Category: बिज़नेस

  • अब गैजेट खरीदना होगा आसान? सरकार के फैसले से मोबाइल से लेकर AC तक हो सकते हैं सस्ते

    अब गैजेट खरीदना होगा आसान? सरकार के फैसले से मोबाइल से लेकर AC तक हो सकते हैं सस्ते

    नई दिल्ली
    बजट 2026 में अनाउंट किए गए Semiconductor Mission 2.0 का असली फायदा यही है कि भारत की टेक्नोलॉजी विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम होगी। इसका सीधा मतलब है कि देश में गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो सकते हैं।

    सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से ये सब होगा सस्ता
    वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026 पेश किया और इसमें स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देते हुए India Semiconductor Mission 2.0 को 40,000 करोड़ रुपये का समर्थन मिला है। इसका सीधा मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स में लगने वाले सेमीकंडक्टर चिप अब भारत में बनाए जाएंगे। सीधा मतलब है कि फोन से लेकर होम अप्लायंसेज तक अगले कुछ साल में सस्ते होने वाले हैं और इनकी कीमतें गिरेंगी। आप नीचे देख सकते हैं कि किन चीजों की कीमत में गिरावट देखने को मिल सकती है।
     
    इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और कारें
    आज की कारों और खासकर EV में दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों चिप्स इस्तेमाल होती हैं। पिछले कुछ सालों में चिप की कमी के कारण गाड़ियां महंगी हुईं और वेटिंग बढ़ी है। देश में ऑटोमोटिव-ग्रेड चिप्स बनने से सप्लाई स्टेबल होगी और लागत घटेगी। लंबे समय में इससे EV की कीमत और मेंटिनेंस कॉस्ट कम हो सकती है।
     
    इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज
    टीवी, फ्रिज, AC, वॉशिंग मशीन, आज हर अप्लायंस 'स्मार्ट' हो चुका है और इन स्मार्ट फीचर्स के लिए माइक्रोचिप्स जरूरी हैं। लोकल सेमीकंडक्टर सप्लाई मिलने पर कंपनियों का खर्च घटेगा, जिसका असर स्मार्ट टीवी, इन्वर्टर AC और एनर्जी-एफिशिएंट अप्लायंसेज की कीमतों पर दिख सकता है।
     
    स्मार्टफोन और टैबलेट
    स्मार्टफोन में प्रोसेसर, कैमरा, नेटवर्क और बैटरी मैनेजमेंट, सब कुछ चिप्स पर निर्भर करता है। अभी ये चिप्स ज्यादातर बाहर से मंगाई जाती हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है। ये चिप्स भारत में बनने लगती हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटेगी। इसका फायदा सबसे पहले बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन में दिख सकता है।

    लैपटॉप, राउटर और स्मार्ट गैजेट्स
    लैपटॉप, Wi-Fi राउटर, स्मार्टवॉच और IoT डिवाइस कई तरह की चिप्स के साथ काम करते हैं। अभी इन्हें इंपोर्ट करना पड़ता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। Semiconductor Mission 2.0 में चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग पर भी जोर है, जिससे इन गैजेट्स की लागत कम हो सकती है। ऐसे में पहले एंट्री-लेवल लैपटॉप और नेटवर्किंग डिवाइसेज को फायदा मिलेगा।

    मेडिकल और हेल्थकेयर डिवाइसेज
    BP मशीन, ECG, ऑक्सीमीटर और कई डायग्नोस्टिक टूल्स भी चिप्स पर चलते हैं। देश में चिप्स बनने से मेडिकल डिवाइस का प्रोडक्शन सस्ता होगा और इलाज से जुड़े टूल्स अफऑर्डेबल बन सकते हैं।

    पावर, सोलर और चार्जिंग सिस्टम
    स्मार्ट मीटर, सोलर इन्वर्टर, EV चार्जर और पावर कंट्रोल सिस्टम में सेमीकंडक्टर बड़ी भूमिका निभाते हैं। Mission 2.0 के साथ पावर-चिप्स को बढ़ावा मिलने से ऊर्जा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत कम हो सकती है, जिसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा।

  • गोल्ड-सिल्वर में हड़कंप: चांदी ₹1 लाख गिरी, सोना 33 हजार रुपये फिसला

    गोल्ड-सिल्वर में हड़कंप: चांदी ₹1 लाख गिरी, सोना 33 हजार रुपये फिसला

     नई दिल्ली

    सोना-चांदी की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट (Gold-Silver Price Crash) देखने को मिली है. एक ही दिन में जहां चांदी का भाव 1 लाख रुपये से ज्यादा टूट गया है, तो वहीं सोना भी एक झटके में 33000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया है. न सिर्फ वायदा कारोबार में, बल्कि घरेलू मार्केट में भी इन कीमती धातुओं के दाम में अचानक तगड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक्सपर्ट पहले से ही ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचे कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट का अनुमान जता रहे थे और हुआ भी कुछ ऐसा है. आइए जानते हैं गोल्ड-सिल्वर प्राइस क्रैश के पीछे के बड़े कारणों के बारे में… 

    देखते ही देखते फूटा चांदी का बुलबुला
    एक्सपर्ट्स के अनुमान सच साबित हुए हैं और आखिर चांदी का बुलबुला फूट गया (Silver Bubble Burst) है. जी हां, सिर्फ एक ही दिन में 1 Kg Silver Price एक लाख रुपये से ज्यादा कम हो गया है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर बीते गुरुवार को तूफानी तेजी के साथ उछाल भरते हुए अपना नया हाई लेवल छूने के बाद अंत में 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई थी, वहीं शुक्रवार को वायदा कारोबार बंद होने पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का रेट क्रैश (Silver Price Crash) हो गया और ये तेजी से गिरते हुए 2,91,922 रुपये पर आ गई. यानी एक झटके में ये 1,07,971 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई. 

    हाई से इतना टूटा चांदी का भाव 
    इससे ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही चांदी की कीमतों ने रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर पार किया था और ये 4,20,048 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल पर पहुंच गई थी. लेकिन झटके में बुलंदियों पर पहुंची चांदी ने अचानक ही निवेशकों को तगड़ा झटका दिया और इस हाई लेवल से 1,28,126 रुपये महज एक दिन में ही सस्ती हो गई. 

    Silver ही नहीं, Gold भी धड़ाम
    न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने का बुलबुला भी फूटा है. 10 Gram 24 Karat Gold Rate में सिर्फ एक कारोबारी दिन में ही 33,113 रुपये की बड़ी गिरावट आई है. सिल्वर प्राइस बुरी तरह फिसलने के साथ-साथ गोल्ड रेट भी क्रैश हो गया. एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव गुरुवार को 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और शुक्रवार को क्लोजिंग तक ये फिसलकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. 

    अगर सोने के हाई लेवल से इसकी कीमत में आई गिरावट पर गौर करें, तो गुरुवार को ही Gold Rate भी चांदी की तरह ताबड़तोड़ तेजी लेकर 1,93,096 रुपये के अपने लाइफ टाइम हाई पर पहुंचे थे और फिर अचानक इसमें ऐसी गिरावट आई कि सोना इस हाई से 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया. 

    अचानक क्यों आई ये बड़ी गिरावट? 
    सोना-चांदी की कीमतों में तेज उछाल के बीच एक्सपर्ट्स पहले सी ही अनुमान जता रहे थे कि ये इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तेजी से फिसल भी सकता है और उनके अनुमान शुक्रवार को सच भी साबित हो गए. अगर इन कीमती धातुओं के भाव में आई गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई वजह नजर आती हैं. 

    Gold-Silver Crash का एक बड़ा कारण मुनाफासूली रही, ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने सोना-चांदी में प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी और बिकवाली के दबाव में झटके में दोनों के दाम बिखर गए. न सिर्फ सोना-चांदी, बल्कि इनके ईटीएफ (Gold-Silver ETF Crash) भी बिखरे हुए नजर आए. इसमें अमेरिकी डॉलर में आई तेजी का भी बड़ा रोल रहा. आमतौर पर जब US  Dollar मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए गोल्ड- सिल्वर खरीदना महंगा पड़ता है और इनकी डिमांड घट जाती है, जिससे कीमतें भी कम होती है.

    डॉलर के साथ ही US Treasury की यील्ड भी बढ़ी है और निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न नजर आने लगा है, जिससे ये बिकवाली देखने को मिली. वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ग्लोबल टेंशन में कमी और US Fed में जेरोम पॉवेल की जगह उनके पसंदीदा व्यक्ति केविन वार्श की एंट्री से जुड़ी खबरों ने भी सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाया है.