Category: बिज़नेस

  • सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 4% बढ़ा, ट्रंप और पॉवेल ने मचाई हलचल

    सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 4% बढ़ा, ट्रंप और पॉवेल ने मचाई हलचल

    मुंबई 

    शेयर बाजार में कमजोरी के साथ 30 अप्रैल को कारोबार की शुरुआत हुई है. सुबह 9:30 बजे पर सेंसेक्स 902.35 अंक गिरकर 76,594 पर ट्रेड करते हुए नजर आया. निफ्टी 277 अंक उछलकर 23,900 पर कारोबार करते हुए दिखा. सभी सेक्टर्स में बिकवाली देखी जा रही है. मेटल, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई है. इस गिरावट के पीछे कई वजह शामिल हैं। 

    सबसे पहली वजह मानी जा रही है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि वह अपनी स्थिति संभाल नहीं पा रहा और बिना परमाणु हथियार वाले समझौते पर फैसला लेने में भी असमंजस में है. सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि ईरान को जल्द समझदारी दिखानी होगी, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं. उनके इस सख्त रुख के बाद ग्लोबल मार्केट में असर दिखा और कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। 

    डोनाल्ड ट्रंप का बयान
    डोनाल्ड ट्रंप का ‘नो मोर मिस्टर नाइस गाय’ बयान सिर्फ एक सामान्य कमेंट नहीं, बल्कि उनकी रणनीति का संकेत माना जा रहा है. इसका मतलब है कि अब वह कूटनीतिक नरमी छोड़कर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में हैं. यूएस और ईरान के बीच बढ़ता टेंशन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने का खतरा, ग्लोबल डर बढ़ा रहा है। 

    डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने US Fed की अपनी आखिरी बैठक में एक बार फिर से अमेरिकी पॉलिसी रेट्स को स्थिर रखने को फैसला किया है. यानी इनमें किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. वेस्ट एशिया संषर्ष और इससे महंगाई के खतरे का हवाला देते हुए फेड ने US Policy Rates Unchanged रखे हैं. इसका असर अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट के रूप में दिखा, तो भारत समेत एशियाई शेयर मार्केट क्रैश हो गए। 

    Sensex-Nifty खुलते ही बिखरे
    ग्लोबल शेयर बाजारों में मचे कोहराम के बीच भारतीय शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के बीच BSE Sensex ने अपने पिछले बंद 77,496 के मुकाबले तेज गिरावट लेकर 77,014 पर ओपन हुआ और फिर ये लगातार फिसलता चला गया. कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा का गोता लगाकर 76,502 के लेवल पर आ गिरा। 

    भारतीय रुपया में गिरावट
    डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर करीब 95.21 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है, जो रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब माना जा रहा है. रुपये में यह गिरावट विदेशी निवेशकों (FII) के लिए चिंता बढ़ाती है, क्योंकि इससे निवेश का रिटर्न कम हो सकता है, और इसी वजह से शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है। 

    यूएस फेड का फैसला
    ग्लोबल संकेत भी फिलहाल नेगेटिव बने हुए हैं. यूएस फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को भले ही स्थिर रखा है, लेकिन बढ़ती महंगाई और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण 2026 में रेट कट की उम्मीदें कम हो गई हैं. वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड खासकर 10 साल की करीब 4.4% पर पहुंचने से अमेरिका में निवेश ज्यादा आकर्षक हो गया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से कैपिटल आउटफ्लो का खतरा बढ़ सकता है। 

    निफ्टी लगातार गिरते हुए करीब 23,900 के स्तर पर पहुंच गया है और बाजार में पैनिक सेलिंग जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. India VIX करीब 4% उछलकर कारोबार कर रहा है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव (वॉलिटिलिटी) बढ़ रहा है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. अब निवेशकों की नजर Q4 नतीजों पर टिकी है, जहां ACC, Adani Ports, Hindustan Unilever और Bajaj Finserv जैसी बड़ी कंपनियां अपने रिजल्ट्स जारी करेंगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय करने में अहम फैक्टर रहेगा। 

  • क्रूड ऑयल 111 डॉलर के पार, पेट्रोल 393 रुपये, दुनिया भर में तेल की कीमतों से हाहाकार

    क्रूड ऑयल 111 डॉलर के पार, पेट्रोल 393 रुपये, दुनिया भर में तेल की कीमतों से हाहाकार

    मुंबई

    यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के फैसले से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 2.8% बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI भी लगभग 100 डॉलर के आसपास है. इसी बीच UAE ने 1 मई से OPEC और OPEC+ छोड़ने का बड़ा फैसला लिया है.इससे पूरी दुनिया के तेल बाजार, कीमतों और सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ सकता है। 

    OPEC और OPEC+ क्या है?
    ओपेक यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) एक ऐसा ग्रुप है जिसमें बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं. इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत जैसे देश शामिल हैं और हाल तक यूएई भी इसका हिस्सा था.इसका मुख्य काम तेल उत्पादन को कंट्रोल करके कीमतों को मैनेज करना है। 

    OPEC कैसे काम करता है? 
    ओपेक तरराष्ट्रीय तेल बाजार  में बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करता है.जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरने लगती हैं, तो ओपेक देश मिलकर तेल की सप्लाई (उत्पादन) में कटौती कर देते हैं, ताकि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से कीमतें फिर से स्थिर हो सकें.इसके विपरीत, जब तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं और दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगता है, तो ओपेक उत्पादन बढ़ाकर बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ा देता है.इससे सदस्य देशों की कमाई  सुरक्षित बनी रहती है और और ग्लोबल मार्केट में कीमतों में  ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता। 

    OPEC क्या है और क्यों इतना ताकतवर है?
    ओपेक+ में ओपेक के साथ कुछ और देश भी जुड़े हैं, जैसे रूस.यह 2016 में तब बना जब तेल की कीमतें गिर गई थीं और ओपेक अकेले बाजार को संभाल नहीं पा रहा था.आज ओपेक+ दुनिया के करीब 40-50% तेल उत्पादन को कंट्रोल करता है। 

    ओपेक+ (OPEC+) की असली ताकत इस बात में छिपी है कि यह संगठन दुनिया के तेल सप्लाई के एक बहुत बड़े हिस्से को कंट्रोल करता है.जब भी ओपेक+ के सदस्य देश कोई फैसला लेते हैं, तो उसका असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखाई देता है और तेल की कीमतें पलक झपकते ही ऊपर-नीचे होने लगती हैं.चूंकि दुनिया की इकोनॉमी तेल पर टिकी है, इसलिए इनके फैसलों का सीधा असर हर देश की महंगाई, ट्रांसपोर्ट की लागत और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.यही वजह है कि ओपेक+ को इतना ताकतवर माना जाता है, क्योंकि यह पूरी दुनिया की जेब और बाजार की दिशा बदल सकती है। 

    यूएई ने ओपेक क्यों छोड़ा? जान लें वजह
    इसके अलावा, यूएई को भविष्य की भी चिंता है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी(Renewable Energy) के बढ़ते चलन के कारण आने वाले समय में तेल की मांग घट सकती है. ऐसे में यूएई की सोच यह है कि आज का तेल भविष्य की तुलना में ज्यादा कीमती हो सकता है, इसलिए वह अभी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहता है. ओपेक की पाबंदियों से बाहर निकलकर वह अपनी इकोनॉमी को और मजबूत करने और भविष्य के जोखिमों से निपटने की तैयारी कर रहा है। 

    घरेलू वायदा बाजार में गिरावट
    जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी दिखी, वहीं घरेलू स्तर पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। क्रूड ऑयल करीब 0.88% यानी 84 रुपये गिरकर 9,401 रुपये पर कारोबार करता दिखा।

     होरमुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण
    Strait of Hormuz को लेकर बनी अनिश्चितता भी कीमतों में तेजी की बड़ी वजह है। यह अहम समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और LNG सप्लाई का लगभग 20% संभालता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर बाजार पर पड़ सकता है।

    भारत पर पड़ सकता है असर
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से उत्पादन को लेकर मतभेद थे.इसके अलावा कोटा सिस्टम से यूएई संतुष्ट नहीं था.वह अपनी मार्केट शेयर बढ़ाना चाहता है। 

    यूएई के बाहर निकलने का असर क्या होगा?
    यूएई के ओपेक से बाहर निकलने का असर काफी गहरा हो सकता है, जिससे सबसे पहले ओपेक की वैश्विक ताकत कमजोर पड़ सकती है.यूएई उन गिने-चुने देशों में शामिल था जिसके पास जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल उत्पादन करने की बड़ी क्षमता थी, और उसके जाने से संगठन का दबदबा कम होना तय है.दूसरा बड़ा असर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के रूप में दिख सकता है. चूंकि अब सप्लाई को एक सुर में कंट्रोल करना मुश्किल होगा, इसलिए बाजार पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वोलाटाइल हो सकता है. अंत में, इससे तेल बाजार पूरी तरह बिखर सकता है. जब हर देश संगठन की एकजुटता के बजाय अपने निजी फायदे और रणनीति के हिसाब से फैसले लेने लगेगा, तो इससे एकजुटता कम होगी और भविष्य में ग्लोबल मार्केट को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। 

    क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें? क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी
    इस समय सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है.ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित है और निर्यात कम हो गया है.इसी वजह से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.अगर हालात सामान्य होते हैं और यूएई ज्यादा उत्पादन शुरू करता है:सप्लाई बढ़ सकती है कीमतें फिर नीचे आ सकती हैं.लेकिन अभी बाजार अनिश्चित है कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। 

    भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा? 
    ग्लोबल ऑयल मार्केट में होने वाली इस हलचल का भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर सीधा और बड़ा असर पड़ता है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर रहता है, बल्कि इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिससे सीधे तौर पर महंगाई में इजाफा होता है और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है। 

    हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना से इनकार किया है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार पश्चिम एशिया के तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर करीब से नजर रख रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है और कीमतें फिलहाल स्थिर बनी रहेंगी। 

  • शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स में 609 अंक की बढ़ोतरी, निफ्टी 24,177 पर क्लोज

    शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स में 609 अंक की बढ़ोतरी, निफ्टी 24,177 पर क्लोज

    मुंबई 

     बुधवार (29 अप्रैल) को शेयर बाजार में दिनभर तेजी का माहौल रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,056 अंक उछला, वहीं निफ्टी 24,329.30 के स्तर पर था। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 609.45 अंक की तेजी के साथ 77,496.36 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 181.95 अंक की बढ़त के साथ 24,177.65 के स्तर पर बंद हुआ।   

    शेयर बाजार में तेजी के कारण….
    कच्चे तेल की कीमत में गिरावट

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी हल्की नरमी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 0.21% की गिरावट के साथ 111 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है, व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलती है और रुपए पर दबाव भी कम होता है। साथ ही ट्रांसपोर्ट, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स की लागत भी घटती है।

    ग्लोबल मार्केट्स का हाल
    एशियाई बाजारों में मजबूती का असर भी भारतीय बाजारों पर देखने को मिला है। हेंग सेंग, कोस्पी, सेट कंपोजिट, शंघाई कंपोजिट और जकार्ता कंपोजिट में बढ़त रही, जबकि निक्केई 225 और ताइवान वेटेड में गिरावट दर्ज हुई। अमेरिकी बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ बंद हुए थे।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया है। विदेशी निवेशकों (FII) ने मंगलवार को 2,103.74 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,712.01 करोड़ रुपए की खरीदारी की, जिससे बाजार में गिरावट सीमित रही।

     

  • सोने और चांदी के भाव में गिरावट, ₹5000 तक गिरी चांदी, 10 ग्राम गोल्ड आज मिल रहा है इतने में

    सोने और चांदी के भाव में गिरावट, ₹5000 तक गिरी चांदी, 10 ग्राम गोल्ड आज मिल रहा है इतने में

    इंदौर 

     शादियों के सीजन में बड़ी खबर सोने-चांदी के भाव को लकर आ रही है। आज सर्राफा बाजारों में सोना-चांदी के रेट में भारी गिरावट है। 28 अप्रैल को 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1629 रुपये सस्ता हो गया है। आज यह 159557 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। चांदी 5381 रुपये सस्ती होकर 238339 रुपये प्रति किलो पर आ गई है।

    22 कैरेट गोल्ड और 18 कैरेट के रेट
    आईबीजेए के मुताबिक आज 10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड के भाव 1492 रुपये सस्ता होकर 136994 रुपये पर आ गया है। इस पर 3 प्रतिशत जीएसटी नहीं लगा है। जीएसटी समेत यह 141103 रुपये का पड़ेगा। 18 कैरेट गोल्ड का रेट भी आज 1222 टूटकर बिना जीएसटी 112168 रुपये हो गया है। जीएसटी के साथ इसका भाव 115533 रुपये हो जाएगा।

    14 और 23 कैरेट गोल्ड के रेट
    सर्राफा बजारों में आज 23 कैरेट गोल्ड की कीमत 1623 रुपये गिरकर 148958 रुपये पर पहुंच गई है। जबकि, 14 कैरेट गोल्ड की कीमत 953 रुपये कम होकर 87491 रुपये प्रति 10 ग्राम है। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 या सवा 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। अभी यह रेट दोपहर सवा 12 बजे वाला है।

    IBJA रेट के मुताबिक अब सोना सर्राफा मार्केट के अपने ऑल टाइम हाई 176121 से 26564 रुपये सस्ता हो गया है। जबकि, चांदी के भाव में ऑल टाइम हाई से 1447594 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। अगर युद्ध के बीच की बात करें तो सोना अबतक 9540 रुपये और चांदी 29561 रुपये गिर चुकी है।

    क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम
    युद्ध के बीच सर्राफा बाजार में सोने-चांदी गिरती की कीमतों के कारणों के बारे में केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया ने बताया कि बाजार नियामकों ने सोने के कारोबार में मार्जिन की दरें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर छोटे निवेशकों पर पड़ा है। ऊंची मार्जिन के चलते सट्टेबाजी करने वालों की संख्या में कमी आई है। कीमतों में अब नरमी है।

    शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर
    जिन निवेशकों को शेयरों में नुकसान उठाना पड़ता है, वे अक्सर अपने दूसरे निवेश को बेचकर पैसा निकालने लगते हैं। सोना-चांदी उनकी पहली पसंद बनता है, क्योंकि यह मुनाफे में होता है। इस बिकवाली के दबाव ने भी सोने और चांदी की कीमतों को नीचे लाने में अहम भूमिका निभाई है। दूसरी ओर अब गोल्ड में इन्वेस्टमेंट की रफ्तार ठंडी पड़ गई है। यही वजह है कि बाजार में अब बड़ी तेजी के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे।

    डॉलर की मजबूती ने डाला दबाव
    अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती ने भी सोने की कीमतों को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घट जाती है।

  • US-ईरान में गतिरोध, शेयर मार्केट भी कन्फ्यूज, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    US-ईरान में गतिरोध, शेयर मार्केट भी कन्फ्यूज, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    मुंबई 

    शेयर मार्केट (Share Market) में मंगलवार को सुस्ती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से लेकर होर्मुज स्ट्रेट खोलने तक पर बात अटकी है और इसे लेकर सेंसेक्स-निफ्टी (Sensex-Nifty) भी कन्फ्यूज नजर आए हैं. विदेशी शेयर बाजारों से मिले निगेटिव सिग्नल ने भी भारतीय स्टॉक मार्केट पर दबाव बढ़ाया है. इन सबके बीच दोनों इंडेक्स कभी रेड, तो कभी ग्रीन जोन में कारोबार करते दिखे। 

    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलने के साथ ही पहले 200 अंक से ज्यादा फिसल गया, फिर अचानक ग्रीन जोन में ट्रेड करता नजर आया. तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 इंडेक्स भी सेंसेक्स की तरह ही ओपनिंग के साथ फिसला और फिर अचानक ग्रीन जोन में आ गया. इस सुस्ती के बीच SBI, IndiGo, Adani Power जैसे शेयर धड़ाम दिखाई दिए। 

    ऐसी रही सेंसेक्स-निफ्टी की ओपनिंग 
    शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत के साथ बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 77,303.63 की तुलना में गिरावट के साथ 77,094 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर अचानक फिसलकर 76,973.54 के लेवल पर आ गया. कुछ देर गिरावट में कारोबार करने के बाद इसने ग्रीन जोन में छलांग लगाई और BSE Sensex 77,335 पर ट्रेड करता दिखा और फिर अगले ही पल टूट भी गया। 

    NSE Nifty की चाल पर नजर डालें, तो ये भी सेंसेक्स की तरह ही बदली-बदली नजर आई. अपने सोमवार के बंद 24,092 की तुलना में ये इंडेक्स फिसलकर 24,049 पर खुला था और फिर मिनटों में ये फिसलकर 23,999 के लेवल पर आ गया. हालांकि, 24 हजार के नीचे फिसलने के बाद अचानक ये मामूली रिकवरी लिए हुए भी दिखाई दिया। 

    गिरावट में कारोबार कर रहे ये शेयर 
    शेयर बाजार में सुस्ती के बीच Eternal, IndiGo, SBI जैसे लार्जकैप स्टॉक गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार कर रहे थे. वहीं मिडकैप में शामिल Phoenix, TIIndia, Laurus Labs और IDFC First Bank जैसे शेयरों में गिरावट देखने को मिली. बीएसई की स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों पर नजर दौड़ाएं, तो KIMS Share, Wockpharma Share, APAR India Share के साथ ही FSL Stock फिसले हुए नजर आए। 

    इन कारणों से बाजार पर दबाव
    शेयर बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों की बात करें, तो अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर सेंसेक्स-निफ्टी पर भी है. दोनों देशों के बीच न तो सीजफायर को लेकर और न ही होर्मुज खोलने को लेकर कोई सहमति बन पा रही है. Hormuz Strait को लेकर ईरान का प्रपोजल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रास नहीं आ रहा है, दूसरी ओर क्रूड की कीमतों में उछाल ने टेंशन बढ़ाने का काम किया है। 

  • India-New Zealand FTA: $20 अरब का निवेश और 100% ड्यूटी फ्री, भारत को मिलेंगे ये खास फायदे

    India-New Zealand FTA: $20 अरब का निवेश और 100% ड्यूटी फ्री, भारत को मिलेंगे ये खास फायदे

     नई दिल्‍ली
    भारतीय मार्केट में लिए आज बहुत ही खास दिन है, क्‍योंकि भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच बड़ी डील साइन होने जा रही है. 27 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में औपचारिक रूप से मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्‍ताक्षर करने जा रहे हैं. यह डील साइन केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में होगी। 

    कुछ महीने पहले ही इस डील को लेकर ऐलान हुआ था और अब इस डील पर हस्‍ताक्षर होने जा रहा है. 16 मार्च 2025 को इस डील को लेकर बातचीत शुरू हुई और 22 दिसंबर 2025 को पूरी हो गई थी और सिर्फ 9 महीने में ही इसे पूरा कर लिया गया। 

    बिजनेस टुडे के अनुसार, इसे भारत के उन सबसे तेज व्यापार समझौतों में से एक बताया जा रहा है, जो बातचीत से हस्ताक्षर तक पहुंचे हैं. औपचारिक रूप से लागू होने से पहले इस समझौते को दोनों देशों में घरेलू अप्रूवल की आवश्यकता होगी, जिसके 2026 के अंत में होने की उम्मीद है। 

    भारत को क्‍या फायदा होगा? 
    वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही भारत के सभी 8,284 वस्‍तुओं के निर्याता को न्‍यूजीलैंड के बाजार में टैक्‍स फ्री एंट्री मिलेगी. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से पहले, न्यूजीलैंड भारतीय वस्तुओं पर औसतन 2.2 प्रतिशत का शुल्क लगाता था, जिसमें कपड़ा, सिरेमिक और ऑटोमोबाइल समेत लगभग 450 उत्पाद कैटेगरी पर 10 प्रतिशत तक का शुल्क लगता था। 

    आगरा को मिलेगा बड़ा लाभ
    इसके अलावा, फाइबर, टेक्‍सटाइल्‍स, हथकरघा और फर्निशिंग चीजों पर भी शून्‍य टैक्‍स लागू होगा. चमड़ा और जूता क्षेत्र में शुल्क 5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है.  वाणिज्य मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आगरा भारत के चमड़े के जूता उत्पादन में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान देता है. अब आगरा का इससे सीधा लाभ मिलेगा. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक यह एक्‍सपोर्ट 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 

    भारत के फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को न्यूजीलैंड में आसानी से पहुंच मिलेगी. वाणिज्य मंत्रालय के फैक्टशीट के अनुसार, न्यूजीलैंड सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका के खाद्य और औषधि प्रशासन, यूरोपीय औषधि एजेंसी और ब्रिटेन की औषधि और स्वास्थ्य उत्पाद नियामक एजेंसी समेत तुलनीय अंतरराष्ट्रीय नियामकों द्वारा जारी गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) और गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (जीसीपी) निरीक्षण रिपोर्टों को स्वीकार करेगी, जिससे दोहराव वाले निरीक्षण समाप्त हो जाएंगे और अनुपालन लागत कम होंगे। 

    किन किन चीजों पर जीरो टैरिफ?
    वाणिज्य मंत्रालय की फैक्टशीट के अनुसार, शून्य शुल्क पहुंच वाले अन्य भारतीय क्षेत्रों में हल्के इंजीनियरिंग सामान, खेल के सामान, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि शामिल हैं, जिनमें फल और सब्जियां, कॉफी, कोको, मसाले और अनाज शामिल हैं। 

    न्‍यूजीलैंड को क्‍या फायदा होगा? 
    बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, न्यूजीलैंड की प्रमुख निर्यात कैटेगरी में ऊन, शराब, लकड़ी, कोयला और ताजे फल, विशेष रूप से एवोकाडो और ब्लूबेरी शामिल हैं, जिन्हें इससे लाभ मिलने की संभावना है. समझौते के तहत सहयोग का दायरा बागवानी, शहद, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन तक विस्तारित है. इसके अलावा, किवी, सेब और शहद पर व्‍यापक पहुंच होगी। 

    तीन साल के लिए हर साल 1,667 वीजा
    न्यूजीलैंड भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा की सुविधा शुरू करेगा, जिसके तहत शुरुआती तीन वर्षों के लिए प्रति वर्ष 1,667 वीजा जारी किए जाएंगे और न्यूजीलैंड में किसी भी समय ऐसे वीजा धारकों की संख्या 5,000 तक सीमित रहेगी। 

    वाणिज्य मंत्रालय और बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के डायरेक्‍ट विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देने की बात कही गई है. निवेश के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, एग्री और टेक्‍नोलॉजी शामिल होने की उम्मीद है. वाणिज्य मंत्रालय के फैक्टशीट के अनुसार, समझौते में वित्तीय सेवाओं, पर्यटन, यात्रा संबंधी सेवाओं, डिजिटल सहयोग और ऑडियो-विजुअल और रचनात्मक उद्योगों समेत लगभग 139 सेवा उप-क्षेत्रों में मोस्ट-फेवर्ड नेशन (MFA) भी रहेगा। 

    गौरतलब है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में लगभग 1.3 अरब डॉलर रहा. समझौते का लक्ष्य इसे लागू होने के पांच वर्षों के भीतर दोगुना करके 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. 15 वर्षों की अवधि में, न्यूजीलैंड द्वारा 20 अरब डॉलर के डायरेक्‍ट विदेशी निवेश (एफडीआई) का उद्देश्य दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में विकास को बढ़ावा देगा। 

  • 1.10 लाख करोड़ में डील, अमेरिका की कंपनी खरीद रही है भारत की फर्म—शेयर की कीमत में आई जबरदस्त उछाल!

    1.10 लाख करोड़ में डील, अमेरिका की कंपनी खरीद रही है भारत की फर्म—शेयर की कीमत में आई जबरदस्त उछाल!

    मुंबई 
    भारत की बड़ी फार्मा कंपनी ने अमेरिका की एक बड़ी कंपनी को खरीदने का ऐलान किया है. यह कंपनी अमेरिका के स्‍टॉक एक्‍सचेंज में लिस्‍ट भी है. इस डील के बाद भारत की कंपनी सन फार्मा की ग्‍लोबल स्‍तर पर पकड़ और भी मजबूत हो जाएगी. इस ऐलान के बाद जैसे ही शेयर बाजार खुला, सन फर्मा के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। 

    सन फार्मा ने जिस अमेरिकी कंपनी को खरीदने का फैसला किया है, उसका नाम ऑर्गेनॉन है. यह कोई छोटी डील नहीं है, बल्कि  11.75 अरब डॉलर या करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की डील है. यह भारतीय फार्मा सेक्‍टर के इतिहा की सबसे बड़ी विदेशी खरीद में से एक मानी जा रही है। 

    सन फार्मा इस कंपनी की 100 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदेगी, जिसके तहत अमेरिकी कंपनी के शेयर होल्‍डर्स को 14 डॉलर प्रति इक्विटी कैश मिलेगा. यह कीमत ऑर्गेनॉन के शुक्रवार के बंद भाव से करीब 24% प्रीमियम पर है. यानी सन फार्मा कंपनी को बाजार भाव से ज्यादा कीमत देकर खरीद कर रही है। 

    शेयर में आई धांसू तेजी
    सन फार्मा के शेयर सोमवार को शानदार तेजी पर कारोबार करते हुए दिखाई दिए. कंपनी के शेयर 4.85% चढ़कर 1,699 रुपये पर पहुंच गए. हालांकि, एक साल, छह महीने और एक महीने के दौरान शेयर ने मामूली निगेटिव रिटर्न दिया है. लेकिन पांच सालों के दौरान इस शेयर में 160 फीसदी की तेजी आई है। 

    क्‍यों खास मानी जा रही ये डील? 
    सन फार्मा की ये डील कई स्‍तरों पर खास मानी जा रही है. अभी तक यह जेनेरिक दवाओं के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस डील के बाद इसे एक नई ताकत मिलेगी. यह कई और स्‍तर पर अपनी पहचान बना सकता है और कारोबार का विस्‍तार कर सकता है. ग्‍लोबल स्‍तर पर भी इसकी पकड़ मजबूत होने वाली है। 

    महिला स्‍वास्‍थ्‍य: ऑर्गेनॉन दुनिया की टॉप 3 महिला स्वास्थ्य कंपनियों में गिनी जाती है. इसका एक बड़ा नेटवर्क अब सनफार्मा को मिलेगा। 

    बायोसिमिलर में एंट्री: सन फार्मा की बायोसिमिलर में मौजूदगी सीमित थी. अब यह डील कंपनी को दुनिया का सातवां सबसे बड़ा बायोसिमिलर प्‍लेयर बन सकता है। 

    ग्लोबल स्केल बढ़ेगा: दोनों कंपनियों की कुल आमदानी 12.4 अरब डॉलर या करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। 

  • मजबूत रिटर्न के बीच कंपनी में बड़े बदलाव, नया CFO नियुक्त

    मजबूत रिटर्न के बीच कंपनी में बड़े बदलाव, नया CFO नियुक्त

    नई दिल्ली

    शेयर बाजार में कई ऐसे स्टॉक हैं जिन्होंने लॉन्ग टर्म में निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। ऐसा ही एक स्टॉक-नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड है। इस स्टॉक की कीमत पांच साल पहले 14 पैसे थी, जो अब 35 रुपये के स्तर पर है। इस पांच साल की अवधि में शेयर ने 24970% से अधिक का रिटर्न दिया है। रकम के हिसाब से इस रिटर्न की बात करें तो अगर किसी निवेशक ने पांच साल पहले एक लाख रुपये निवेश किया था तो अब उसकी रकम लगभग 2.50 करोड़ रुपये हो गई होगी।

    शेयर का परफॉर्मेंस
    नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर की बात करें तो 34.08 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले करीब ढाई पर्सेंट चढ़कर 34.90 रुपये पर पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान शेयर 35.69 रुपये पर पहुंच गया। 17 फरवरी 2026 को शेयर 46 रुपये पर था, जो 52 हफ्ते का हाई भी है। सिंतबर 2025 में शेयर 17 रुपये पर था। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो है। बता दें कि नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने साल 2024 में स्टॉक स्प्लिट और बोनस इश्यू का ऐलान किया था। स्प्लिट के तहत एक शेयर को 10 टुकड़ों में बांटा गया था तो एक शेयर के बदले एक बोनस शेयर मिलेगा।

    शेयरहोल्डिंग पैटर्न
    FY26 की मार्च तिमाही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमोटर की हिस्सेदारी 53.81 प्रतिशत पर स्थिर रही। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs की हिस्सेदारी साल-दर-साल (YoY) 4.25 प्रतिशत से गिरकर 0.18 प्रतिशत रह गई जबकि घरेलू निवशकों यानी DIIs की हिस्सेदारी 0.07 प्रतिशत पर बनी रही। पब्लिक शेयरहोल्डिंग 41.86 प्रतिशत से बढ़कर 45.94 प्रतिशत हो गई, जो कंपनी में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।

    हाल ही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने बोर्ड की बैठक में बड़े बदलाव की घोषणा की। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अनिल कुमार ने व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण अपना इस्तीफा दे दिया है, जो 20 अप्रैल 2026 को कारोबार समाप्त होने के साथ प्रभावी हो गया। उनके स्थान पर बोर्ड ने नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की सिफारिश पर शीतल सोनी को 21 अप्रैल 2026 से कंपनी की नई CFO नियुक्त कर दिया है। यह जानकारी सेबी (LODR) रेगुलेशन 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज को दी गई है।

    कैसे रहे तिमाही नतीजे
    FY26 की दिसंबर तिमाही में परिचालन से राजस्व 1.04 प्रतिशत बढ़कर 290 करोड़ रुपये हो गया और परिचालन मार्जिन आधार पर 11 प्रतिशत पर स्थिर रहा। इसके साथ ही, नेट प्रॉफिट 31 करोड़ रुपये हो गया। EPS (प्रति शेयर आय) में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह 1.06 रुपये हो गया।

  • SBI, कोल इंडिया और ग्रासिम पर भी दांव लगाने की सलाह, बाजार में वोलैटिलिटी का अनुमान

    SBI, कोल इंडिया और ग्रासिम पर भी दांव लगाने की सलाह, बाजार में वोलैटिलिटी का अनुमान

    नई दिल्ली

    सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवर को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी हलचल हो सकती है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। इस माहौल के बीच कुछ शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी। ये शेयर- इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प यानी आईआरएफसी, पॉलीकैब इंडिया, बजाज फाइनेंस, एसबीआई, कोल इंडिया और ग्रासिम हैं।

    एक्सपर्ट ने खरीदने की दी सलाह
    आनंद राठी में टेक्निकल रिसर्च के सीनियर मैनेजर गणेश डोंगरे ने इन तीनों शेयर को सोमवार को खरीदने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प के शेयर को ₹103-106 पर खरीदा जा सकता है। इस शेयर का टारगेट प्राइस ₹111 और स्टॉप लॉस ₹98 रखने की सलाह दी गई है। इसी तरह, पॉलीकैब इंडिया के शेयर को ₹8040-8070 रेंज पर खरीदने की सलाह दी गई है। शेयर के लिए टारगेट प्राइस ₹8300 और स्टॉप लॉस ₹7900 तय किया है। वहीं, बजाज फाइनेंस की बात करें तो ₹921 पर खरीदने और टारगेट प्राइस ₹965 तय किया है। इस शेयर के लिए स्टॉप लॉस ₹900 तय है।

    बाजार पर क्या बोले?
    गणेश डोंगरे ने कहा कि हाल के जियो पॉलिटिक्स के हालात ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आने वाला सप्ताह बहुत अहम होगा, क्योंकि निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत से जुड़ी अपडेट्स पर नजर रखेंगे। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे सोच-समझकर दांव लगाएं, रिस्क मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखें और खबरों से होने वाली उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर पर किसी भी तरह के तनाव या समाधान का बाजार की दिशा पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    Nifty 50 के आउटलुक पर डोंगरे ने कहा कि लगातार तीसरे सप्ताह इस इंडेक्स ने अपनी रिकवरी जारी रखी, जो घरेलू बाजारों में बेहतर होते सेंटिमेंट को दिखाता है। हालांकि, इंडेक्स ने 25,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से अहम स्तर के पास कुछ हिचकिचाहट दिखाई। टेक्नीकल नजरिए से Nifty के लिए तुरंत सपोर्ट 23,500–23,800 की रेंज में है जबकि 24,800–25,000 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस बैंड बना हुआ है। किसी भी करेक्शन के दौर में 23,000–23,500 का जोन एक मजबूत डिमांड एरिया के तौर पर काम करने की उम्मीद है।

    एसबीआई, कोल इंडिया और ग्रासिम
    एक अन्य एक्सपर्ट और चॉइस ब्रोकिंग के कार्यकारी निदेशक सुमीत बगड़िया ने भी तीन शेयरों पर दांव लगाने की सलाह दी है। सुमीत बगड़िया ने SBI, कोल इंडिया और ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदने की सलाह दी। एक्सपर्ट ने SBI के लिए ₹1101 पर खरीदने की सलाह दी है। शेयर के लिए टारगेट ₹1180 और स्टॉप लॉस ₹1048 रखा है। वहीं, कोल इंडिया को ₹456 पर खरीदने की सलाह दी गई है। इस शेयर का टारगेट ₹488 और स्टॉप लॉस ₹440 है। इसके अलावा, ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर को ₹2739 पर खरीदने की सलाह है। शेयर का टारगेट ₹2915 और स्टॉप लॉस ₹2626 तय किया गया है।

  • RBI ने Paytm पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द किया, ग्राहकों के जमा पैसों की स्थिति पर मिलेगा क्या समाधान?

    RBI ने Paytm पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द किया, ग्राहकों के जमा पैसों की स्थिति पर मिलेगा क्या समाधान?

    नई दिल्‍ली
     भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ा ऐक्‍शन लिया है। शुक्रवार को उसने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया। इस कदम से 24 अप्रैल से बैंक के तौर पर उसका कामकाज बंद हो जाएगा। आरबीआई ने अपने आदेश में कहा, 'भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्‍ट, 1949 (BR Act) के सेक्‍शन 22(4) के तहत पेटीएम पेमेंट्स बैंक को जारी किया गया बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह 24 अप्रैल, 2026 को कारोबार बंद होने के समय से प्रभावी होगा।'

    क्‍या है आरबीआई के कदम का मतलब?
    इसका मतलब है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक अब कानून के तहत परिभाषित कोई भी 'बैंकिंग' गतिविधि या उससे जुड़ा कोई अन्य कारोबार तत्काल प्रभाव से नहीं कर सकता है।

    केंद्रीय बैंक ने कहा कि नतीजतन, पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के सेक्‍शन 5(b) में परिभाषित 'बैंकिंग' का कारोबार करने या सेक्‍शन 6 के तहत बताए गए कोई भी अतिरिक्त कारोबार करने से तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है।

    RBI ने आखिर लाइसेंस क्यों रद्द किया?
    24 अप्रैल को जारी अपनी प्रेस रिलीज में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि Paytm Payments Bank Limited (PPBL) का कामकाज जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ चल रहा था। यह फैसला एक दिन में नहीं लिया गया। मार्च 2022 में RBI ने पेटीएम को पहली चेतावनी दी थी और बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था। फिर 2024 की शुरुआत में और सख्ती हुई। न नई जमा, न वॉलेट में पैसे डालो, न कोई बड़ा बैंकिंग काम होगा। 15 मार्च 2024 तक PPBL सिर्फ नाम का बैंक रह गया था। बस पुराना पैसा निकालने की सुविधा बची थी। दो साल तक यह बैंक ऐसे ही रहा। अब RBI ने बाकायदा बंद करने का एलान कर दिया है।

    Paytm वॉलेट का क्या होगा?
    मार्च 2024 से ही Paytm वॉलेट में नए पैसे नहीं डाले जा सकते थे। जो पैसे पहले से थे, वो खर्च हो सकते थे। ज्यादातर लोग पिछले दो सालों में या तो वो पैसे खर्च कर चुके हैं या निकाल चुके हैं। अगर अभी भी आपके वॉलेट में कुछ बचा है तो उसे खर्च कर सकते हैं। बस नया पैसा नहीं डाल सकते। RBI ने यह पूरा खेल धीरे-धीरे समेटा, ताकि किसी को अचानक झटका न लगे।

    क्या पेटीएम का UPI बंद होगा?
    यह सबसे जरूरी बात है। Paytm पर UPI पेमेंट, QR कोड स्कैन, बिल भुगतान सब कुछ पहले की तरह चलता रहेगा। आप पैसों का लेनदेन कर सकते हैं। यूपीआई सिस्टम सीधे बैंकों के नेटवर्क से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। साल 2024 में ही Paytm ने अपनी UPI सेवाएं PPBL से हटाकर दूसरे बैंकों से जोड़ ली थीं। Yes Bank और अन्य पार्टनर बैंकों के जरिए अब यह सेवा चलती है। PPBL से इसका कोई लेना-देना नहीं रहा।

    जिनका पैसा पेटीएम पेमेंट बैंक में है, वे क्या करें?
    आरबीआई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पेटीएम पेमेंट बैंक के पास इतना फंड है कि वह अपने सभी ग्राहकों का पैसा वापस कर सकता है। यानी आपका भी पेसा PPBL के सेविंग अकाउंट में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ग्राहकों को अब अपना पैसा वापस निकाल लेना चाहिए।

    Paytm ने क्या कहा?
    One97 Communications यानी पेटीएम की मूल कंपनी ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि उनका PPBL से अब कोई खास रिश्ता नहीं है। 31 मार्च 2024 तक कंपनी ने PPBL में अपना पूरा निवेश बट्टे खाते में डाल दिया था। UPI, मर्चेंट पेमेंट, QR कोड, Soundbox, Paytm Money ये सब पहले की तरह काम करते रहेंगे।

    RBI ने लाइसेंस क्यों रद्द किया?
        RBI ने अपने आदेश में कहा कि बैंक का कामकाज इस तरह से चलाया जा रहा था जिससे उसके अपने हितों के साथ उसके जमाकर्ताओं के हितों को भी नुकसान पहुंच रहा था।

        इसके कारण BR ऐक्‍ट के सेक्‍शन 22 (3) (b) का पालन नहीं हो रहा था।

        बीआर एक्‍ट के सेक्‍शन 22 (3) (e) के तहत यह पाया गया कि बैंक को कामकाज जारी रखने की अनुमति देने से कोई उपयोगी उद्देश्य या जनहित पूरा नहीं होगा।

        बैंक ने अपने पेमेंट्स बैंक लाइसेंस के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं किया।
        इससे बीआर एक्‍ट के सेक्‍शन 22 (3) (g) का उल्लंघन हुआ।

    यह कदम बैंक पर पहले लगाए गए प्रतिबंधों के बाद उठाया गया है। तब उसे 11 मार्च, 2022 से नए ग्राहक जोड़ने से बंद करने का आदेश दिया गया था। बाद में 31 जनवरी, 2024 और 16 फरवरी, 2024 को आरबीआई ने ग्राहक खातों, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स और वॉलेट में किसी भी नए डिपॉजिट, क्रेडिट या टॉप-अप पर रोक लगा दी थी।