Category: बिज़नेस

  • सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए राहत, MP में आज कीमतों में आई बड़ी गिरावट

    सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए राहत, MP में आज कीमतों में आई बड़ी गिरावट

    इंदौर 

     भारतीय सराफा बाजार से इस अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश में सोने और चांदी की खरीदी पर साल भर के लिए रोक लगाने की अप्रत्याशित अपील के बाद स्थानीय सराफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। पीएम मोदी के इस फैसले ने न केवल आम खरीदार बल्कि बड़े निवेशक और कारोबारियों को भी हैरान-परेशान कर दिया है। सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट की खबर सुनते ही बाजार में खरीदारों की होड़ मच गई है। वहीं इस भारी गिरावट ने हर किसी को चौंका कर रख दिया है।

    चांदी 9.3 फीसदी टूटी, सोना भी औंधे मुंह गिरा
    स्थानीय बाजार से मिले आंकड़ों के मुताबिक बाजार खुलते ही चांदी की कीमत में अब तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी 9.3 फीसदी टूटकर सीधे 2,58,000 रुपए प्रतिकिलोग्राम पर आ गई। शनिवार सुबह जैसे ही सराफा बाजार खुला चांदी बीते दिन शुक्रवार के मुकाबले 2000 रुपए सस्ती बिकी। वहीं दूसरी ओर 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 3 फीसदी तक सस्ता हो गया। इस गिरावट के बाद शुद्ध सोने का भाव 1,54,000 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। अब कारोबारियों का कहना है कि किसी एक ही दिन में इतनी उठापटक से वे हैरान हैं।

    एक्सपर्ट ने बताया क्यों आई भारी गिरावट

    सराफा बाजार में सोना-चांदी के भाव में इतनी गिरावट और बाजार के सेंटीमेंट होने पर मध्यप्रदेश सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी निर्मल वर्मा 'घुघरू' ने इस पर विस्तृत बात की। उन्होंने बताया कि इस गिरावट के पीछे केवल घरेलू घोषणा नहीं, बल्कि वैश्विक कारण भी हैं।

    1- डॉलर और बॉन्ड यील्ड में आई मजबूती
    वे कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही अमेरीकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी निवेशकों का रुझान सोने से हट गया है। वे डॉलर की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।

    2- भारी मुनाफा वसूली
    पिछले कई दिनों से सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर थीं। इस तेजी के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफा काटा है। इससे बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ी और कीमतें धड़ाम से गिरी हैं।

    3- सख्त मौद्रिक नीति भी एक वजह हो सकती है
    घुंघरू बताते हैं कि लगातार महंगाई की चिंताओं ने वैश्विक स्तर पर सख्त मौद्रिक नीति यानी कड़ी ब्याज दरें की उम्मीद बढ़ा दी है। जब भी ब्याज दरें बढ़ने की आशंका होती है, तो कीमती धातुओं पर इसका सीधे तौर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    वैश्विक बाजारों में हाहाकार
    घरेलू या स्थानीय बाजार ही नहीं अब अंतरराष्ट्रीय या वैश्विक बाजार भी बेहाल हो चुके हैं। वैश्विक स्तर पर हाजिर सोना 104 डॉलर की भारी गिरावट के साथ 4,548,46 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी 5.26 डॉलर टूटकर 75.21 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।

    बाजार विश्वलेषकों का कहना है कि दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत डॉलर इंडेक्स ने सराफा बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है। उनका कहना है कि बाजार में स्थिरता आने में थोड़ा समय लग सकता है।

    सोना चांदी के आज के भाव (Gold Silver Price Today)
    24 कैरेट सोना- 16,300 (1 ग्राम)

    22 कैरेट सोना- 14,500 (1 ग्राम)

    18 कैरेट सोना- 11,870 (1 ग्राम)

    चांदी- 2,75,000 रुपए प्रति किलो

    सराफा महासंघ भोपाल के महामंत्री और प्रवक्त नवनीत अग्रवाल कहते हैं। आभूषण खरीदते समय इन भावों में 3 फीसदी GST और लेबर चार्ज भी अतिरिक्त देना होगा। 

  • तेल की कीमतों पर खतरे की घंटी! पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर हो सकती है भारी बढ़ोतरी

    तेल की कीमतों पर खतरे की घंटी! पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर हो सकती है भारी बढ़ोतरी

     नई दिल्‍ली

    शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई, लेकिन ये सिलसिला अब आगे भी जारी रह सकता है. पेट्रोल और डीजल के दाम को लेकर एक्‍सपर्ट्स बड़ी चेतावनी दे दी है. अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहत हैं तो अगले 3 से 4 महीनों में ईंधन की कीमतें बढ़ती रह सकती हैं। 

    यह वॉर्निंग ऐसे समय में आई है, जब वेस्‍ट एशिया में बढ़ते तनाव और ग्‍लोबल तेल आपूर्ति में रुकावट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस 110 डॉलर प्रति बैर के करीब पहुंच गईं। 

    भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 4 साल में पहली बार 15 मई को बढ़ोतरी की गई, क्‍योंकि कच्‍चे तेल की बढ़ती लागत के कारण सरकार तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियों (OMC) पर दबाव बढ़ा जा रहा था. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो हालिया बढ़़ोतरी से तेल और अन्‍य कारोबारी कंपनियों को हो रहे नुकसान की आंशिक तौर से भरपाई हो पाएगी। 

    क्‍यों 3 से 4 महीने तक बढ़ोतरी रह सकती है जारी? 
    मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर गुरमीत सिंह चावला ने इंडिया टुडे डॉट इन को बताया कि ईंधन की कीमतों में संशोधन कुछ हद तक अपेक्षित था क्योंकि तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियां हाई एनर्जी प्राइस को वहन करते हुए अपनी सीमाओं को बढ़ा रही हैं। 

    उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है, ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 90-100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से ऊपर बनी रहती है, तो अगले तीन से चार महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और भी बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। 

    फ्यूल प्राइस में कितनी हो सकती है बढ़ोतरी? 
    चॉइस के ऊर्जा विश्लेषक धवल पोपट ने भी कहा कि मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को केवल आंशिक राहत ही मिलती है. इंडिया टुडे को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीर तक की मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी स्‍वामित्‍व वाली तेल और डीजल कंपनियों पर पड़ रहे मुनाफे के दबाव से कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन मौजूदा घाटे की भरपाई की मात्रा काफी ज्‍यादा बनी हुई है। 

    पोपट के अनुसार, ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर 1 रुपये की बढ़ोतरी से तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों के कुल सालाना EBITDA में लगभग 15,000-16,000 करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है. उन्‍होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि हालिया बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को सालाना करीब 45,000-48,000 करोड़ रुपये की कमाई का लाभ मिल सकता है. हालांकि, पोपट ने चेतावनी दी कि अगर ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो और ज्‍यादा प्राइस बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है। 

    नुकसान की भरपाई के लिए कितने रुपये की बढ़ोतरी संभव 
    उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में, अगर ग्‍लोबल नजरिए में कोई बदलाव नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए कुल मिलाकर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत होगी. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिससे घरेलू ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की गतिविधियों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। 

    तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव 
    पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं ने आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं को तेजी से बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती से तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है, जबतक की रिटेल फ्यूल की कीमतों में और बदलाव नहीं किया जाता है। 

    इकोनॉमिस्‍ट ने भी चेतावनी दी है कि ईंधन की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी धीरे-धीरे महंगाई और घरेलू बजट पर असर डाल सकती है, क्योंकि इससे सभी क्षेत्रों में परिवहन और रसद की लागत बढ़ जाएगी. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में सरकारी हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

  • एक सदी का भरोसा: PM मोदी ने बजाज समूह की 100 साल की यात्रा को बताया प्रेरणादायक

    एक सदी का भरोसा: PM मोदी ने बजाज समूह की 100 साल की यात्रा को बताया प्रेरणादायक

    प्रधानमंत्री ने बजाज समूह की 100 वर्ष की यात्रा को सराहा

    मुंबई
     देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों में शामिल बजाज समूह ने सोमवार को अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूह को बधाई देते हुए राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका की सराहना की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि बजाज समूह ने दशकों से रोजगार सृजन, नवाचार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि समूह की यह 100 वर्षों की यात्रा केवल लंबे समय तक टिके रहने की कहानी नहीं है, बल्कि समय के साथ खुद को ढालने और निरंतर आगे बढ़ने की क्षमता का भी प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि बजाज समूह ने देश की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने समूह के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।

     प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा, ”दशकों से बजाज समूह ने रोजगार पैदा करने, नवाचार को बढ़ावा देने और सामुदायिक विकास का समर्थन करके राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।

    उन्होंने कहा कि 100 साल किसी भी संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा है, जो न केवल लंबी अवधि तक टिके रहने, बल्कि समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता को भी दर्शाती है।

    इस अवसर पर मध्य मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राजनीति और व्यापार जगत की कई हस्तियों ने शिरकत की।

    जमनालाल बजाज ने 1926 में मुंबई में इस समूह की स्थापना की थी और आज इसका बाजार पूंजीकरण 148 अरब डॉलर है और इसमें 1.3 लाख लोग काम करते हैं। संस्थापक जमनालाल बजाज स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रूप से शामिल थे और उन्हें महात्मा गांधी का बेहद करीबी माना जाता था।

    घरेलू विनिर्माण पर जोर देते हुए बजाज ऑटो के चेयरमैन नीरज बजाज ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा हाल ही में शुरू नहीं हुई है, बल्कि जमनालाल जैसे अग्रदूतों के कारण एक सदी पहले ही शुरू हो गई थी।

    दिवंगत राहुल बजाज के पुत्र राजीव बजाज ने कहा, ”हम जो कहते हैं और जो करते हैं, उसमें हमेशा एक समानता होनी चाहिए। शायद इसीलिए बजाज की यात्रा केवल विकास की कहानी नहीं बनी, बल्कि यह विश्वास की कहानी बन गई।”

    इस अवसर पर बजाज परिवार ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उतरने की अपनी योजना भी सार्वजनिक की। इसकी कमान नीरज बजाज के पुत्र नीरव बजाज संभालेंगे, जो व्यवसाय चलाने वाली परिवार की पांचवीं पीढ़ी का हिस्सा हैं।

    बजाज इंटीग्रेटेड हेल्थ सिस्टम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीरव बजाज ने कहा, ”हमारा मानना है कि समाज को लाभ से ही लाभ होना चाहिए, ताकि विकास गरीब से गरीब व्यक्ति तक पहुंचे।”

  • अब CNG चलाना पड़ेगा महंगा: मुंबई में बढ़ी कीमतें, जानिए नया रेट

    अब CNG चलाना पड़ेगा महंगा: मुंबई में बढ़ी कीमतें, जानिए नया रेट

     मुंबई 

    मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। सीएनजी (CNG) के दामों में अचानक बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे रोजाना गैस पर निर्भर लाखों वाहन चालकों की जेब पर असर पड़ना तय है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है। यह नई दरें मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई समेत पूरे एमएमआर क्षेत्र में तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

    महानगर गैस लिमिटेड द्वारा की गई इस बढ़ोतरी के बाद अब मुंबई में सीएनजी का नया रेट 84 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इससे पहले सीएनजी की कीमत 82 रुपये प्रति किलो थी। अचानक हुई इस वृद्धि ने उन हजारों लोगों को झटका दिया है जो पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में सीएनजी को अपना चुके हैं।

    पूरे MMR क्षेत्र में लागू हुई नई दरें
    यह नई कीमतें केवल मुंबई शहर तक ही सीमित नहीं हैं। एमजीएल (MGL) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बढ़े हुए दाम मुंबई के साथ-साथ ठाणे, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर और कल्याण-डोंबिवली समेत पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में प्रभावी होंगे। इसका मतलब है कि पूरे रीजन के लाखों वाहन मालिकों पर इसका सीधा वित्तीय बोझ पड़ेगा।

    कितने लोगों पर असर?
    इस बढ़ोतरी का सीधा असर मुंबई के लाखों यात्रियों पर पड़ेगा. शहर में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी, बसें और निजी वाहन सीएनजी पर चलते हैं. आंकड़ों के मुताबिक मुंबई क्षेत्र में करीब 12 लाख से ज्यादा वाहन सीएनजी का इस्तेमाल करते हैं. इनमें लगभग 4.7 लाख ऑटो रिक्शा, 1.6 लाख टैक्सियां और 5 लाख से ज्यादा निजी कारें शामिल हैं। 

    ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने कहा है कि सीएनजी महंगी होने से उनकी परिचालन लागत बढ़ जाएगी. ऑटो चालकों का कहना है कि अब प्रति किलोमीटर खर्च और बढ़ जाएगा. इसी वजह से किराए में बढ़ोतरी की मांग भी तेज हो गई है. ऑटो यूनियन ने संकेत दिया है कि वे कम से कम 1 रुपये किराया बढ़ाने की मांग करेंगे. वहीं टैक्सी यूनियन 2 रुपये तक किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं। 

    सीएनजी की कीमत बढ़ने का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ सकता है. BEST, NMMT, MSRTC और दूसरी परिवहन सेवाओं की हजारों बसें सीएनजी पर चलती हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में बस संचालन की लागत भी बढ़ सकती है। 

    हालांकि राहत की बात यह है कि पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इससे मुंबई और आसपास के करीब 31 लाख घरों को राहत मिलेगी, जहां खाना बनाने के लिए पाइप गैस का इस्तेमाल होता है। 

    MGL का कहना है कि कीमत बढ़ने के बावजूद सीएनजी अभी भी पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सस्ता विकल्प है. कंपनी के अनुसार मौजूदा दरों पर भी सीएनजी, पेट्रोल की तुलना में करीब 44 फीसदी और डीजल के मुकाबले लगभग 7 फीसदी तक सस्ती पड़ती है। 

    आगे और बढ़ोतरी का खतरा
    तेल उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल कच्चे तेल के संकट के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी जल्द बढ़ सकती हैं. मुंबई में ट्रांसपोर्ट का बड़ा हिस्सा CNG पर निर्भर है. आम आदमी, ऑटो-टैक्सी वाले और बस ऑपरेटर सभी पर इसका सीधा असर पड़ेगा. हालांकि MGL ने आश्वासन दिया है कि CNG अभी भी पर्यावरण के हिसाब से सबसे अच्छा और बजट में सस्ता विकल्प बना रहेगा। 

    ऑटो और टैक्सी का सफर होगा महंगा?
    सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ता है। मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली काली-पीली टैक्सी और ऑटो रिक्शा पूरी तरह से सीएनजी पर आधारित हैं। ऐसे में चालक यूनियनों की ओर से अब किराए में बढ़ोतरी की मांग उठना लाजमी है। अगर आने वाले दिनों में टैक्सी और ऑटो का किराया बढ़ता है, तो इसका सीधा असर मुंबई के आम मुसाफिरों की जेब पर पड़ेगा।

    क्यों बढ़ी कीमतें?
    महानगर गैस लिमिटेड ने इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मुख्य कारण बताया है। हालांकि, उपभोक्ता इस फैसले से नाखुश हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं।

     

  • पाकिस्तान के फैसले से मचा हड़कंप! एयर इंडिया ने हर दिन 100 उड़ानें रोकीं, सामने आई बड़ी वजह

    पाकिस्तान के फैसले से मचा हड़कंप! एयर इंडिया ने हर दिन 100 उड़ानें रोकीं, सामने आई बड़ी वजह

    मुंबई 

    टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों को एक बड़ा झटका दिया है। दुनिया भर में विमान ईंधन (Jet Fuel) की कीमतों में आई भारी तेजी और ईरान में जारी युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट को देखते हुए एयर इंडिया ने जून महीने से अगले तीन महीनों के लिए अपनी कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या कम करने का फैसला किया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    एयर इंडिया ने अपने दिल्ली हब से कई महत्वपूर्ण रूटों पर उड़ानों को पूरी तरह से निलंबित कर दिया है। इसमें शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर और शंघाई जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इसके अलावा, सैन फ्रांसिस्को, पेरिस और टोरंटो जैसी जगहों के लिए उड़ानों की संख्या (Frequency) घटा दी गई है। कुल मिलाकर एयरलाइन ने अपने नेटवर्क से रोजाना लगभग 100 उड़ानों की कटौती की है।

    8 मई 2026 को खत्म हुए हफ्ते में विमान ईंधन की वैश्विक औसत कीमत 162.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो फरवरी के अंत में मात्र 99.40 डॉलर थी। किसी भी एयरलाइन के संचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40% होती है। ऐसे में कीमतों में इतनी भारी बढ़ोतरी ने एयर इंडिया के मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

    एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को बताया कि हवाई क्षेत्र (Airspace) के प्रतिबंधों और महंगे ईंधन ने कई रूटों को 'घाटे का सौदा' बना दिया है। उनके पास पीक ट्रैवल सीजन के दौरान उड़ानों में कटौती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

    एयर इंडिया को अपने प्रतिद्वंद्वी इंडिगो के मुकाबले ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का बंद होना है। इस वजह से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और क्रू का खर्च काफी बढ़ गया है। अब अमेरिका जाने वाली उड़ानों को वियना या स्टॉकहोम में रुकना पड़ता है, जिससे लागत और भी बढ़ जाती है।

    एयर इंडिया पहले ही ₹20,000 करोड़ से अधिक का घाटा झेल रही है। टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस पर लागत कम करने का भारी दबाव है। एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम कई उड़ानों पर अपनी परिचालन लागत (Operating Cost) भी नहीं निकाल पा रहे हैं। पिछले महीने, फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (IndiGo, Air India, SpiceJet) ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार ने टैक्स या ईंधन की कीमतों में राहत नहीं दी, तो सेवाएं निलंबित करना मजबूरी हो जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान युद्ध के कारण उपजे आर्थिक संकट को देखते हुए देश के 140 करोड़ लोगों से ईंधन और यात्रा पर कम खर्च करने की अपील की है। एयर इंडिया का यह कदम उसी गहरे आर्थिक संकट का संकेत है, जहां बढ़ती लागत के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा अब आम आदमी की पहुंच से और दूर हो सकती है।

    दी हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद, भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के विमानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए थे। जहां 24 अप्रैल 2025 से भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद है, वहीं पिछले साल 30 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी विमानों को भारतीय हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। इनमें भारतीय पंजीकृत विमान, भारतीय एयरलाइंस/ऑपरेटरों द्वारा संचालित/स्वामित्व वाले विमान, सैन्य उड़ानें भी शामिल हैं। इनके लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र उपलब्ध नहीं है। नई रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद करने की अवधि को 24 मई 2026 तक बढ़ा दिया है।

  • सरकार के फैसले से बाजार में हलचल, सोना-चांदी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

    सरकार के फैसले से बाजार में हलचल, सोना-चांदी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

    मुंबई 

    केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट टैरिफ को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है. इन कीमती धातुओं पर इंपोर्ट टैरिफ में यह बढ़ोतरी सोने के इंपोर्ट को कम करने और चालू खाता घाटे (CAD) पर लगाम लगाने के उपायों में से एक है. इस कदम से भारतीय मुद्रा को भी सहारा मिलने की संभावना है, जो लगभग हर हफ्ते नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच रही है। 

    इसी के साथ MCX पर चांदी की कीमत 2,95,805 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जबकि सोना 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. यह महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक स्तर पर मिल रहे मजबूत समर्थन को दर्शाता है. चांदी की कीमत 6% के अपर सर्किट पर पहुंच गई है। 

    •     सरकार ने सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से 15% कर दी.
    •     यह कदम चालू खाता घाटा और डॉलर की निकासी रोकने हेतु.
    •     ड्यूटी बढ़ने से चांदी 7.25% बढ़कर 2,99,283 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंची.
    •     भारत का गोल्ड इम्पोर्ट बढ़ा, व्यापार घाटा 333.2 अरब डॉलर पहुंचा.

    आज सोने का लेटेस्ट रेट 

    शहर  24 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम) 22 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम)
    दिल्ली 16,804 14,331
    मुंबई 16,789 15,390
    चेन्नई 15,634 14,331
    कोलकाता  16,789 15,390
    बेंगलुरु 16,789 15,390
    केरल 16,789 15,390
    वडोदरा 16,794 15,395
    अहमदाबाद 16,794 15,395
    पुणे 16,789 15,390

    चांदी की कीमत 
    इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के सरकार के फैसले के बाद आज वायदा (MCX) और रिटेल बाजारों में चांदी की कीमतों में करीब 16675 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है. इम्पोर्ट ड्यूटी का ऐलान होते ही MCX पर चांदी का जुलाई कॉन्ट्रैक्ट 7.25 परसेंट की भारी तेजी के साथ 2,99,283 प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गया. चेन्नई जैसे देश के कई बड़े शहरों में आज चांदी का भाव उछलकर 3,00,100 प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों में भी कीमत 2,90,100 रुपये प्रति किलो पर बनी हुई हैं । 

    भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है. हालांकि, अधिकारियों ने सरकार के इस कदम पर चिंता जताते हुए कहा है कि कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से कीमती धातुओं की स्मगलिंग बढ़ सकती है. अधिकारियों का तर्क है कि साल 2024 के बदा से स्मगलिंग के मामलों में कमी आई थी. गौरतलब है कि भारत सरकार ने साल 2024 के बजट में सोने-चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी में बड़ी कटौती की थी। 

    भारत सरकार ने तब सोने-चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया था. सरकार के इस कदम के बाद सोना-चांदी के आयात में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला था. अब ताजा फैसले के बाद कस्टम ड्यूटी फिर से 2024 के बजट से पहले वाले स्तर पर पहुंच गया है। 

    सरकार ने एकाएक क्यों बढ़ाई इम्पोर्ट ड्यूटी? 

    भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना और चांदी विदेशों से आयात करता है. इसका भुगतान डॉलर में होता है. पश्चिम एशिया में संकट के चलते वैश्चिक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हें, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च हो रहा है. डॉलर की इसी बाहरी निकासी को रोकने के लिए सरकार ने गैर-जरूरी आयातों पर रोक लगाई है.

    कारोबारी साल 2025-26 में भारत का टोटल गोल्ड इम्पोर्ट 24 परसेंट बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर पहुंच गया. इससे देश का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया और चालू खाता घाटा (CAD) भी GDP के 1.3 परसेंट तक पहुंच गया. इस बढ़ते हुए आर्थिक अंतर को पाटने के लिए टैक्स बढ़ाना जरूरी हो गया था. 

  • Google सेवाएं हुई प्रभावित: भारत में सर्च इंजन डाउन, यूजर्स नहीं कर पा रहे सर्च

    Google सेवाएं हुई प्रभावित: भारत में सर्च इंजन डाउन, यूजर्स नहीं कर पा रहे सर्च

    नई दिल्ली
     भारत में आज हजारों यूजर्स के लिए Google डाउन होने की खबर है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस पॉपुलर सर्च इंजन को एक्सेस न कर पाने की शिकायतों की बाढ़ आ गई है। वहीं, आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector पर भी भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 10:23 बजे 3,300 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं हैं।

    Downdetector पर लगभग 57% शिकायतें सर्च में आ रही समस्या से जुड़ी हुई थीं, जबकि 28% यूजर्स ने बताया कि कंटेंट ठीक से लोड नहीं हो रहा था। 11% अन्य यूजर्स ने वेबसाइट में ही दिक्कतें बताईं हैं।

    क्या अभी काम कर रहा है सर्च इंजन?
    वहीं, नेटिजन्स ने Google एक्सेस करने की कोशिश करते वक्त आए एरर मैसेज को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। ऐसा लग रहा है कि रिक्वेस्ट प्रोसेस करते टाइम कोई इंटरनल सर्वर एरर आ गया है। शुरुआती आउटेज के बाद से Downdetector पर दर्ज शिकायतों की संख्या में तेजी से गिरावट भी आई है, जिससे पता चलता है कि सर्च दिग्गज एक बार फिर से अच्छे से वर्क कर रहा है।

    Google आउटेज पर यूजर्स की प्रतिक्रिया
    इसी बीच Google आउटेज पर एक यूजर ने पोस्ट करते हुए लिखा कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मैं यह कह रहा हूं, लेकिन Google.com सच में डाउन हो गया है। मुझे याद नहीं है कि ऐसा आखिरी बार कब हुआ था। ऐसे केस लगातार बढ़ रहे हैं और शायद इसका कारण ‘वाइब कोडिंग’ हो सकता है? साथ ही इस मामले पर एक अन्य यूजर ने लिखा यार, Google का डाउन होना बहुत ही दुर्लभ है। अब तो लग रहा है कि कुछ बड़ा होने हो सकता है।

     

  • 24 घंटे में दूसरी बार टूटा बाजार, सोना चमका… PM मोदी की अपील से बढ़ी हलचल

    24 घंटे में दूसरी बार टूटा बाजार, सोना चमका… PM मोदी की अपील से बढ़ी हलचल

    मुंबई

    शेयर बाजार में मंगलवार को भी तेज गिरावट देखने को मिली है. मार्केट के दोनों इंडेक्स सोमवार को क्रैश होने के बाद सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भी धड़ाम नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर कारोबार करता दिखा, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी 160 अंक से ज्यादा फिसलकर ट्रेड कर रहा था. सबसे ज्यादा गिरावट Infosys, Tech Mahindra, TCS समेत अन्य टेक कंपनियों के शेयरों में देखने को मिली।

    मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल का सीमित इस्तेमाल करने की अपील के बाद लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में डर देखने को मिला. PM Modi ने 24 घंटे में अपनी इस अपील को दोहराया भी।

    बिखरते चले गए सेंसेक्स-निफ्टी
    कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,015 के लेवल से तेज गिरावट लेकर 75,688 के लेवल पर खुला और फिर कुछ ही देर में इसकी गिरावट और तेज होती चली गई. महज 5 मिनट के कारोबार के दौरान ही BSE Sensex 723 अंक से ज्यादा टूटकर 75,291 के लेवल पर लुढ़क गया।

    न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty भी रेड जोन में खुलने के साथ देखते ही देखते बिखर गया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,815 की तुलना में गिरकर 23,722 पर खुला और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए 23,633 तक फिसल गया।

    IT कंपनियों के शेयर क्रैश
    शेयर मार्केट में तेज गिरावट के बीच सबसे ज्यादा नुकसान में आईटी कंपनियां नजर आईं. बीएसई लार्जकैप पर नजर डालें, तो इसमें शामिल TCS Share (3.61%), Infosys Share (3.30%), Tech Mahindra Share (2.80%), HCL Tech Share (2.30%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. इसके अलावा अन्य गिरावट वाले स्टॉक्स पर नजर डालें, तो मिडकैप में शामिल UPL Share (4.10%), Hindustan petroleum Share (3.60%), Coforge Share (3%) गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था।

    इस डर का PM Modi कनेक्शन!
    शेयर बाजार में लगातार बड़ी गिरावट आने के पीछे के कारणों की बात करें, तो सबसे ज्यादा खौफ पीएम मोदी द्वारा रविवार को की गई अपील का माना जा सकता है, जिसमें उन्होंने देश के लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने के लिए कहा था. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट युद्ध और होर्मुज टेंशन का जिक्र करते हुए पेट्रोल-डीजल की सेविंग करने का आग्रह किया था।

    PM Narendra Modi ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि हमारे पड़ोस में जंग चल रही है, जिसका असर पूरी दुनिया समेत भारत पर भी पड़ रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एक साल तक सोना न खरीदें और ईंधन की बचत पर ध्यान दें।

    सिर्फ यही एक कारण नहीं है Stock Market Crash होने का, बल्कि अमेरिका और ईरान में तनातनी के चलते होर्मुज स्ट्रेट पर टेंशन बरकरार है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में दिख रहा है. Brent Crude Oil Price 105 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है और महंगाई के जोखिम ने शेयर बाजार पर दबाव बनाया है।

  • शेयर बाजार में कमजोरी, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट

    शेयर बाजार में कमजोरी, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट

    मुंबई 

    घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 23,900 के नीचे फिसल गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,312.91 अंक गिरकर 76,015.28 पर और निफ्टी 360.30  अंक टूटकर 23,815.85 पर बंद हुआ।

    बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें
    1. कच्चे तेल में तेज उछाल

    अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनने से वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ गया। इसके बाद ब्रेंट क्रूड करीब 4% उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ सकता है।

    2. रुपए पर दबाव
    तेल महंगा होने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI को रुपए को संभालने के लिए बाजार में दखल देना पड़ा।

    3. गोल्ड और एविएशन शेयरों में भारी गिरावट
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने की खरीद और विदेश यात्राएं टालने की अपील की। इसके बाद ज्वैलरी और एविएशन कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। Titan Company, Kalyan Jewellers और InterGlobe Aviation जैसे शेयर दबाव में रहे।

    4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
    विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। बढ़ते तेल दाम, कमजोर रुपया और वैश्विक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

    5. इंडिया VIX में उछाल
    बाजार की घबराहट मापने वाला
    India VIX करीब 12% बढ़कर 18.82 तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता तेजी से बढ़ी है।

  • शेयर बाजार में दहशत, सोना और पेट्रोल-डीजल पर पीएम मोदी का संदेश, खुलते ही बाजार गिरा

    शेयर बाजार में दहशत, सोना और पेट्रोल-डीजल पर पीएम मोदी का संदेश, खुलते ही बाजार गिरा

    मुंबई 
    सोमवार का दिन भार
    तीय शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। बाजार खुलते ही बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस गिरावट ने कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए। बाजार के इस खराब प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं, जिन्होंने मंदी की गाड़ी में फ्यूल भरने का काम किया है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि अब कहानी सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर आए पीएम मोदी के बयान ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया है।

    सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
    कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 1000 पॉइंट यानी 1 पर्सेंट से ज्यादा टूटकर 76,364 के लेवल पर आ गया। वहीं निफ्टी भी 1 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट के साथ 23,896 के निचले स्तर तक पहुंच गया। सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1 पर्सेंट तक की गिरावट देखी गई। इस गिरावट की वजह से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 473.5 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाजार में इस कदर बिकवाली हुई कि छोटे और बड़े हर तरह के निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी
    बाजार के गिरने की पहली बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का विफल होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है, जिससे युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस अनिश्चितता की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है, जिसका सीधा असर देश की इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने भी आग में घी डालने का काम किया है।

    पीएम मोदी की बचत वाली अपील का असर
    बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार ग्लोबल कारणों से ज्यादा असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'किफायत' वाली अपील का पड़ा है। पीएम मोदी ने रविवार को भारतीयों से पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल कम करने और कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, पीएम की इस अपील ने बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है। लोगों से खर्च कम करने की बात कहने का मतलब है कि आने वाले समय में कंपनियों की कमाई और देश की इकोनॉमी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

    इन सेक्टर्स पर पड़ी सबसे ज्यादा मार
    पीएम मोदी की इस अपील का सबसे बुरा असर ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ा है। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, सेनको गोल्ड और पीसी ज्वेलर जैसे शेयरों में भारी गिरावट देखी गई क्योंकि लोगों को डर है कि सोने की डिमांड कम हो जाएगी। इसके अलावा मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिखा। इतना ही नहीं, पीएम द्वारा विदेशी दौरों से बचने की सलाह देने के बाद थॉमस कुक और ईजी ट्रिप प्लानर्स जैसी ट्रेवल कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। बाजार को डर है कि अगर लोग कम खर्च करेंगे, तो कॉर्पोरेट अर्निंग्स यानी कंपनियों के मुनाफे पर इसका सीधा असर होगा।

    निवेशकों को 4 लाख करोड़ का नुकसान
    सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 473.5 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार खुलने के कुछ ही समय में निवेशकों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। अब सवाल है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आ गई? इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इसे देखते हुए पीएम मोदी ने भी गोल्ड और पेट्रोल-डीजल को लेकर लोगों से अपील की है।

    अमेरिका और ईरान के बीच नहीं हो रही सुलह
    दरअसल, निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत से हालात सुधर सकते हैं। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर बातचीत पूरी तरह विफल होती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ और सख्त कदम उठा सकता है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी बड़ा खतरा बना हुआ है।

    पीएम मोदी की अपील
    मिडिल ईस्ट संकट से दुनियाभर में एनर्जी की कीमतें आसमान पर हैं। इससे भारत का आयात घाटा लगातार बढ़ रहा है और रुपया गिर रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल को बचाने की अपील की है। पीएम ने कहा कि हमारे पड़ोस मे जंग जल रही है, जिसका असर पूरी दुनिया समेत भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे एक साल तक सोना न खरीदें और ईंधन की बचत पर ध्यान दें।