Author: NewseDay

  • पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के DA विवाद में नया मोड़, मुख्य सचिव पर अवमानना केस और हाईकोर्ट में माफी की पेशकश चर्चा में

    पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के DA विवाद में नया मोड़, मुख्य सचिव पर अवमानना केस और हाईकोर्ट में माफी की पेशकश चर्चा में

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के बकाये से जुड़े मामले में आज (12 अक्टूबर) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की बेंच ने इस मामले को नियमित अवमानना केस से अपग्रेड कर आपराधिक अपराध की तरह सुनवाई। 

    इस दौरान पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के लिखित माफीनामे पर फैसला हो सकता है। उन्होंने कोर्ट में लिखित रूप से बिना शर्त माफी का प्रस्ताव दिया है। पिछली बेंच ने इस माफीनामे को स्वीकार करने या खारिज करने का फैसला नई बेंच पर छोड़ दिया था।

    आज नई बेंच यह तय करेगी कि मुख्य सचिव की माफी को स्वीकार कर उनके खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को यहीं बंद किया जाए? या कोर्ट को गुमराह करने और गलत तथ्य रखने के लिए उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए?

    9 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव केएपी सिन्हा अदालत में पेश हुए थे। मामले में मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई का मुद्दा भी उठा था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि अदालत की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता।

    वहीं, पंजाब सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा था कि मुख्य सचिव का अदालत को गुमराह करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि अदालत चाहे तो मुख्य सचिव बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं।

    पिछली सुनवाई में क्या-क्या हुआ, 5 पॉइंट में पढ़िए

        सुप्रीम कोर्ट में मामला सूचीबद्ध नहीं हुआ: कर्मचारियों की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय कौशल ने कहा कि DA के बकाये से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन यह मामला अब तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है।

        वकील बोले- सुनवाई में इतनी देरी क्यों हो रही: संजय कौशल ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सरकार ने तुरंत अपील दायर की और उस पर सुनवाई भी तय हो गई। एडवोकेट ने इसे सरकार का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि लाखों कर्मचारियों के बकाये के मामले में इतनी देरी क्यों हो रही है?

        सरकार बोली- पिछली सरकारों का है बकाया: पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारियों का DA बकाया मौजूदा सरकार के समय का नहीं, बल्कि पिछली सरकारों के कार्यकाल से जुड़ा है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि फैसला देने से पहले अदालत पूरे मामले के रिकॉर्ड की जांच कर चुकी है।

        गलत जानकारी देने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी: हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सरकार को अपने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, अपील करने के बाद अदालत को गलत जानकारी देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

        अपील की कमियां अब तक दूर क्यों नहीं हुई?: कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की कमियां अब तक दूर क्यों नहीं की गईं? इसी मामले में अदालत ने आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक अवमानना के मामले की सुनवाई तय रोस्टर के अनुसार संबंधित पीठ ही करेगी।

    मामले में अब तक क्या-क्या हुआ, जानिए

        8 अप्रैल 2026: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर्मचारियों की याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई शुरू हुई, जिसमें पंजाब सरकार द्वारा केंद्रीय पैटर्न पर बढ़े हुए DA को रोकने की नीति को चुनौती दी गई थी।

        3 अगस्त 2026: पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर) ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने सरकार की वित्तीय तंगी की दलीलें खारिज कीं और करीब 8 लाख कर्मचारियों व पेंशनर्स के बकाये को 15 दिनों के भीतर जारी करने का आदेश दिया। इसी दिन कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया कि जब तक बकाया नहीं चुकाया जाता, सरकार अपने प्रचार-प्रसार के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञापन (प्रिंट/सोशल मीडिया) जारी नहीं कर सकती।

        31 अगस्त 2026: हाई कोर्ट की ओर से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए मुख्य सचिव को दी गई अंतिम समयसीमा समाप्त हो गई, लेकिन सरकार भुगतान करने में विफल रही।

        1 सितंबर 2026: पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के इस कड़े आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।

        10 सितंबर 2026: हाई कोर्ट ने अनुपालन न होने पर सरकार से दोबारा जवाब मांगा। राज्य सरकार ने बताया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया जा चुका है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की अपील में मौजूद कमियों को 10 दिन में दूर करने का समय दिया।

        1 अक्टूबर 2026: एडवोकेट जनरल और मुख्य सचिव के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में कमियों को दूर कर अपील को दोबारा फाइल किया गया।
        6 अक्टूबर 2026: हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से स्टेटस रिपोर्ट मंगवाई, जिसमें यह खुलासा हुआ कि पंजाब सरकार की अपील अभी भी कमियों के कारण अटकी हुई है और सूचीबद्ध होने के योग्य नहीं है। कोर्ट ने इसे गलत जानकारी देकर गुमराह करना माना और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को आपराधिक अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी कर 9 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का हुक्म दिया।

        9 अक्टूबर 2026: मुख्य सचिव निजी तौर पर कोर्ट में पेश हुए। उनके वकील ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की। हालांकि, चीफ जस्टिस की बेंच ने राज्य के इस आचरण को बेहद पीड़ादायक बताया और माफी स्वीकार करने से मना करते हुए पूरे मामले को आपराधिक अवमानना से जुड़ी रोस्टर डिवीजन बेंच के पास ट्रांसफर कर दिया।

  • चाणक्य नीति: रिश्तों में जहर घोलती हैं ये 4 गलतियां, समय रहते बदल लें अपनी आदतें

    चाणक्य नीति: रिश्तों में जहर घोलती हैं ये 4 गलतियां, समय रहते बदल लें अपनी आदतें

    रिश्ते सिर्फ प्यार और साथ रहने से मजबूत नहीं बनते, बल्कि उन्हें निभाने के लिए धैर्य, सम्मान और समझदारी भी जरूरी होती है. कई बार इंसान अनजाने में कुछ ऐसी आदतें अपना लेता है, जिनसे धीरे-धीरे करीबी लोगों के साथ रिश्ते कमजोर होने लगते हैं.  शुरुआत में ये बातें छोटी लगती हैं, लेकिन बार-बार दोहराए जाने पर मनमुटाव की वजह बन सकती हैं.

    आचार्य चाणक्य की नीतियों में भी इंसान के व्यवहार, वाणी और संगति को काफी महत्व दिया गया है. इनसे जुड़ी सीख के मुताबिक, गुस्सा, कड़वे शब्द, अहंकार रिश्तों में तनाव बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसी 4 गलतियों के बारे में, जिनसे बचकर रिश्तों में आपसी समझ बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है.

    1. बात-बात पर गुस्सा करना
    गुस्सा इंसान की समझने और सही फैसला लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. जब कोई व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर नाराज होने लगता है, तो किसी के साथ भी बातचीत करना मुश्किल हो जाता है.  सामने वाला अपनी बात कहने से भी कतराने लगता है.

    चाणक्य नीति की सीख के अनुसार, व्यक्ति को अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए.  किसी बात से परेशानी होने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले स्थिति को समझना बेहतर है.  शांत मन से अपनी बात रखने पर विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है.

    2. बातचीत में कड़वे शब्दों का इस्तेमाल करना
    कई बार इंसान गुस्से में ऐसी बातें कह देता है, जो सामने वाले को लंबे समय तक दुख पहुंचाती हैं.  बार-बार ताना मारना, अपमान करना या दूसरों की कमजोरियों का मजाक उड़ाना रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर सकता है.

    वाणी का असर केवल उसी पल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आपसी भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है.  इसलिए असहमति होने पर भी सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए.  अपनी बात स्पष्ट रूप से कहना जरूरी है, लेकिन इसके लिए दूसरे व्यक्ति को नीचा दिखाना सही तरीका नहीं है.

    3. हर बात में अहंकार दिखाना
    किसी भी रिश्ते में अगर एक व्यक्ति हमेशा खुद को सही और दूसरे को गलत मानता है, तो आपसी समझ कमजोर होने लगती है.  अपनी गलती स्वीकार न करना, माफी मांगने से बचना, हर फैसले में अपनी ही बात मनवाने की कोशिश करना रिश्ते में तनाव बढ़ा सकता है.

    चाणक्य नीति से जुड़ी शिक्षाओं में विनम्रता- विवेक को महत्वपूर्ण माना जाता है.  रिश्तों को बेहतर बनाए रखने के लिए यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति का नजरिया अलग हो सकता है.  जरूरत पड़ने पर अपनी गलती मानना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता की निशानी है.

    4. गलत संगति में रहना
    इंसान के आसपास रहने वाले लोगों का उसके विचारों और व्यवहार पर असर पड़ सकता है.  अगर कोई व्यक्ति लगातार ऐसे लोगों के संपर्क में रहता है, जो दूसरों की बुराई करते हैं, झगड़े बढ़ाते हैं या रिश्तों में गलतफहमियां पैदा करते हैं, तो इसका असर उसके अपने संबंधों पर भी पड़ सकता है.

    इसलिए दोस्ती और संगति चुनते समय लोगों के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए.  ऐसे लोगों के साथ समय बिताना बेहतर होता है, जो आपकी बात सुनें, जरूरत पड़ने पर सही सलाह दें , दूसरों के प्रति सम्मान रखना जानते हों.  हालांकि, किसी व्यक्ति के बारे में केवल एक घटना के आधार पर राय बनाने के बजाय उसके व्यवहार को समय के साथ समझना जरूरी है.

    रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए क्या करें?
    रिश्तों में छोटी-मोटी असहमति होना सामान्य है.  जरूरी यह है कि मतभेदों को किस तरह संभाला जाता है.  आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

    धैर्य से सुनें: जवाब देने से पहले सामने वाले की  भावनाओं को समझने की कोशिश करें.

    सम्मान बनाए रखें: बहस के दौरान भी तानों से बचें.
    गलती स्वीकार करें: अपनी गलती समझ आने पर माफी मांगने में संकोच न करें.

    सीमाओं का सम्मान करें: हर व्यक्ति को अपनी पसंद, विचार और निजी समय रखने का अधिकार दें.

    भरोसा बनाए रखें: अपनी बात और व्यवहार में ईमानदारी रखें, ताकि रिश्ते में सुरक्षा के साथ विश्वास बना रहे.

    चाणक्य नीति से क्या मिलती है सीख?
    चाणक्य नीति को परंपरागत रूप से जीवन, व्यवहार, निर्णय और सामाजिक संबंधों से जुड़ी शिक्षाओं के लिए जाना जाता है.  रिश्तों के संदर्भ में इससे मिलने वाली प्रमुख सीख यह है कि व्यक्ति को अपने स्वभाव, बोलने के तरीके और संगति पर ध्यान देना चाहिए.  गुस्से पर नियंत्रण, विनम्रता से बातचीत करने की आदत रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.

    ध्यान रखें कि हर रिश्ते की परिस्थितियां अलग होती हैं.  किसी संबंध में लगातार अपमान, डर या दुर्व्यवहार हो रहा हो, तो केवल समझौता करते रहना जरूरी नहीं है.  ऐसे में अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

  • तांबे की बढ़ती मांग के बीच झारखंड को बड़ी उम्मीद, गिरिडीह और बगोदर में तेज होगी खनिज खोज

    तांबे की बढ़ती मांग के बीच झारखंड को बड़ी उम्मीद, गिरिडीह और बगोदर में तेज होगी खनिज खोज

     रांची
    बीसवीं सदी लौह की थी तो इक्कीसवीं तांबा की। यह क्रिटिकल मिनरल्स की श्रेणी में है। झारखंड के लिए सुखद यह है कि झारखंड के गिरिडीह में डुमरी के बाद बगोदर में भी ताम्र का भंडार मिला है। झारखंड सरकार के भूतत्व सर्वे के प्रारंभिक परिणाम में यह पुष्ट हो चुका है कि बगोदर के अंबाडीह में धरती के नीचे तांबा का भंडार है।

    अब भूतत्व सर्वे कार्य को और व्यापक पैमाने पर किया जाएगा। ब्रिटिश काल में ही यह ज्ञात हो गया था कि गिरिडीह में धरा के नीचे ताम्र है। यह कहां पर कितना है? अब झारखंड सरकार का भूतत्व विभाग इसकी खोज में लगा है। बगोदर में ताम्र की खोज की शुरुआत 2023 में हुई।

    वहां से कुछ पत्थर लिए गए। भूतत्व निदेशालय ने उन पत्थरों को जांच के लिए भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण की कोलकाता प्रयोगशाला में भेजा था। कोलकाता से जांच रिपोर्ट आई कि उन पत्थरों में ताम्र के साथ सीसा और जिंक भी प्रचुर मात्रा में है।

    इस नतीजे से उत्साहित भूतत्व निदेशालय ने पिछले साल से वहां खनिज अन्वेषण के कार्य को तेज किया। आधा किमी क्षेत्र का टोपोग्राफिक सर्वे (स्थलाकृत सर्वेक्षण) किया गया। तीन स्थानों पर 200 मीटर की गहराई तक जमीन की छेदन कार्य कर अयस्क निकाला गया। उसमें भी ताम्र के अलावा और भी खनिज मिले हैं।

    डुमरी के बरगुंडा में मिला बड़ा खजाना
    गिरिडीह में डुमरी के बरगुंडा में तकरीबन एक वर्ग किमी की परिधि में धरा के नीचे ताम्र का विशाल खजाना मिल चुका है। वहां भू सर्वे की विवरणी शासन को दी जा चुकी है। छोटानागपुर के भूतत्व उप निदेशक कुणाल कौशल ने लगातार चार साल तक सर्वेक्षण कार्य किया। अब भूतत्व निदेशक कुमार अमिताभ के पर्यवेक्षण में बगोदर में ताम्र खोज का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
    धरती के नीचे से निकाले गए अयस्क में तांबा की मात्रा का आकलन करते भूतत्व अधिकारी।

    गुलामी काल में मुसाबनी में मिली थी खदान
    झारखंड में अभी पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी प्रखंड में भारत सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान कापर लिमिटेड (एचसीएल) द्वारा ताम्र खनन किया जा रहा है। 1923 में गुलामी काल में ब्रिटिश सरकार ने मुसाबनी में तांबा खोजा था। इसके अलावा अभी मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के खेतरी में ही ताम्र खान है। गिरिडीह में तांबा का विधिवत खनन प्रारंभ हो जाएगा तो बड़ी उपलब्धि होगी।

    महज तीन साल में 75 प्रतिशत हो गया महंगा
    इलेक्ट्रिक वाहन और एआइ डाटा सेंटर के लिए ताम्र की वैश्विक मांग बढ़ी है। टेक इंडस्ट्रीज से जुड़ी आधारभूत संरचना में ताम्र की आवश्यकता सबसे अधिक है। तीन साल में तांबा का मूल्य 75 प्रतिशत बढ़ा है। भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में तांबा की कीमत 14 सौ रुपये किलो के आसपास है।

    गिरिडीह में डुमरी के बरगुंडा में ताम्र की खोज हो चुकी है। बगोदर के अंबाडीह में भी ताम्र के भूतत्व अन्वेषण के परिणाम बेहद सकारात्मक है। भूगर्भ में तांबा मिला है। अब अन्वेषण कार्य और व्यापक किया जाएगा।
        -कुमार अमिताभ, भूतत्व निदेशक, झारखंड

     

  • Apple का दिवाली धमाका! ₹17,900 में लॉन्च हुए रंगोली डिजाइन वाले Special Edition AirPods 5

    Apple का दिवाली धमाका! ₹17,900 में लॉन्च हुए रंगोली डिजाइन वाले Special Edition AirPods 5

    Apple ने भारत में त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए अपने नए AirPods 5 का खास एडिशन पेश किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ईयरबड्स नहीं, बल्कि इनका वायरलेस चार्जिंग केस है. इस पर रंगोली से प्रेरित खास डिजाइन बनाया गया है. कंपनी का यह कदम ऐसे समय आया है, जब दिवाली और दूसरे त्योहारों के लिए लोग नए गैजेट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं.

    Special Edition AirPods 5 की कीमत 17,900 रुपये रखी गई है. यह लिमिटेड नंबर्स में उपलब्ध होंगे और इन्हें Apple के ऑनलाइन स्टोर, Apple Store ऐप और देश के छह ऑफिशियल Apple स्टोर से खरीदा जा सकेगा. कंपनी के मुताबिक, केस पर बना रंगोली डिजाइन त्योहारों के मौके पर भारत की पारंपरिक कला को सम्मान देने का तरीका है.

    AirPods 5 में क्या है खास?
    इस स्पेशल एडिशन में वायरलेस चार्जिंग केस के साथ AirPods 5 के फीचर्स मिलते हैं. इनमें एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन यानी ANC दिया गया है, जो आसपास के शोर को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, इनमें लाइव ट्रांसलेशन फीचर भी है, जिसके जरिए कुछ सपोर्टेड भाषाओं में बातचीत को समझने में मदद मिल सकती है. इन सर्विसेज के इस्तेमाल के लिए संगत Apple डिवाइस और सॉफ्टवेयर की जरूरत हो सकती है.

    Apple के मुताबिक, वायरलेस चार्जिंग केस के साथ ANC चालू रहने पर कुल बैटरी लाइफ 22 घंटे तक हो सकती है. केस को Qi वायरलेस चार्जर और Apple Watch चार्जर से भी चार्ज किया जा सकता है.

    कहां से खरीद पाएंगे ये खास AirPods?
    Special Edition AirPods 5 को ऐपल ऑनलाइन स्टोर, ऐपल स्टोर ऐप और भारत के छह ऐपल स्टोर पर उपलब्ध कराया जा रहा है. इनमें मुंबई के Apple BKC और Apple Borivali, दिल्ली-एनसीआर के ऐपल साकेत और ऐपल नोएडा, बेंगलुरु के ऐपल हेब्बल और पुणे के ऐपल कोरेगांव पार्क स्टोर स्टोर शामिल हैं.

    यह एडिशन सीमित स्टॉक में उपलब्ध होगा. इसलिए खरीदने से पहले Apple की वेबसाइट पर उपलब्धता जांचना बेहतर रहेगा. इसकी कीमत 17,900 रुपये है, जबकि इंस्टेंट कैशबैक और EMI जैसे ऑफर्स भी हैं.

    Apple की फेस्टिव सेल में भी मिलेंगे ऑफर
    AirPods के खास एडिशन के साथ Apple ने भारत में फेस्टिव ऑफर भी शुरू किए हैं. यह अभियान 11 अक्टूबर से 11 नवंबर 2026 तक चलेगा. इस दौरान चुनिंदा iPhone, Mac और iPad मॉडल पर 12 महीने तक नो-कॉस्ट EMI का विकल्प मिल सकता है. पात्र कार्ड से खरीदारी करने पर चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर 15,000 रुपये तक का इंस्टेंट कैशबैक भी दिया जा रहा है.

    Apple Watch, AirPods और कुछ एक्सेसरीज पर छह महीने तक नो-कॉस्ट EMI का विकल्प भी उपलब्ध है. हालांकि, हर प्रोडक्ट पर सभी ऑफर लागू नहीं होंगे.

    iPad पर रंगोली बनाने का भी मौका
    Apple ने त्योहारों के दौरान रंगोली की कला को डिजिटल तरीके से आजमाने के लिए एक खास Today at Apple सेशन भी रखा है. इसमें लोग iPad और Apple Pencil की मदद से अपनी रंगोली डिजाइन कर सकेंगे. यह सेशन 14 अक्टूबर से 9 नवंबर 2026 तक चलेगा. कंपनी के मुताबिक, इसमें रंग, डिजाइन और ट्रेडिशनल पैटर्न के साथ प्रयोग करने का मौका मिलेगा.

  • झेंग क्निवेन का घरेलू कोर्ट पर धमाका, मीरा आंद्रिवा को 7-5, 6-4 से हराकर जीता खिताब

    झेंग क्निवेन का घरेलू कोर्ट पर धमाका, मीरा आंद्रिवा को 7-5, 6-4 से हराकर जीता खिताब

    बीजिंग
     ओलिंपिक चैंपियन चीन की झेंग क्निवेन ने रविवार को फ्रेंच ओपन विजेता मीरा आंद्रिवा को 7-5, 6-4 से हराकर चाइना ओपन टेनिस टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। वह इस टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाली पहली चीनी खिलाड़ी बन गईं। इस जीत के साथ झेंग ने घरेलू सरजमीं पर अपना पहला डब्ल्यूटीए 1000 खिताब जीता।

    वाइल्ड कार्ड से टूर्नामेंट में प्रवेश करने वाली झेंग दाहिने हाथ की कोहनी में चोट के कारण लगभग छह महीने तक कोर्ट से दूर रहने के बाद वापसी कर रही हैं। इस मुकाबले में वह अपने पुराने अंदाज में नजर आईं। उन्होंने दमदार फोरहैंड शाट के दम पर रैलियों में दबदबा बनाया और आंद्रिवा के विरुद्ध कोर्ट के कोणों पर सटीक शाट लगाकर अंक हासिल किए।

    शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे की सर्विस तोड़ी। इसके बाद दुनिया की पांचवें नंबर की खिलाड़ी आंद्रिवा ने मजबूती दिखाते हुए 5-4 की बढ़त बना ली। झेंग की एक क्रास-कोर्ट शाट कोर्ट से बाहर चली गई, जबकि उनका फोरहैंड नेट में उलझ गया। इससे आंद्रिवा को सर्विस तोड़कर निर्णायक बढ़त हासिल करने का मौका मिला।

    हालांकि, झेंग ने तीन ब्रेक पाइंट बचाकर स्कोर 5-5 कर दिया। अगले गेम में आंद्रिवा की गलतियों का फायदा उठाते हुए उन्होंने अपनी तेज बैकहैंड से रूसी खिलाड़ी को चकमा दिया और उनकी सर्विस तोड़कर पहला सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट में भी मुकाबला कड़ा रहा। स्कोर 4-4 होने पर आंद्रिवा ने तीन ब्रेक पाइंट बचाए, लेकिन झेंग ने लगातार दबाव बनाए रखते हुए उनकी सर्विस तोड़ दी। इसके बाद अगले गेम में सटीक ऐस लगाकर उन्होंने मुकाबला अपने नाम कर लिया।

  • बिजली विभाग से निकाले गए आउटसोर्स कर्मियों की होगी वापसी, बेदाग रिकॉर्ड वालों को मिलेगी प्राथमिकता

    बिजली विभाग से निकाले गए आउटसोर्स कर्मियों की होगी वापसी, बेदाग रिकॉर्ड वालों को मिलेगी प्राथमिकता

    लखनऊ
     बिजली विभाग में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मी के लिए रहात भरी खबर है। अब ये कर्मचारी विभाग में 60 साल तक नौकरी कर सकेंगे। इसके लिए उनका फिट रहना अनिवार्य है। फिट रहने पर उन्हें 60 साल तक नौकरी करने का मौका दिया जा सकता है। वहीं, छंटनी में निकाल गए कर्मचारियों की सेवाएं अगर बेदाग रहेंगी तो उन्हें दोबारा नौकरी में लिया जाएगा। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन और संविदा कर्मचारियों के संगठन के बीच हुई बातचीत के आधार पर इसकी सहमति बनी है।

    पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष रणवीर प्रसाद और आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन के बीच कई मसलों पर बातचीत हुई। कई अहम मसलों पर फैसला हुआ। कर्मचारी संगठन ने प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन खत्म करके कॉरपोरेशन के राजस्व लक्ष्यों व व्यवस्था में सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक में फैसला लिया गया है कि अगर आउटसोर्स कर्मचारियों का स्वास्थ्य और शारीरिक फिटनेस बेहतर रही तो वे 60 साल तक सेवाएं दे सकेंगे।

    55 साल की उम्र के बाद देना होगा फिटनेस प्रमाण पत्र
    55 साल की उम्र पूरी करने के बाद उन्हें अपनी फिटनेस के संबंध में संबंधित आउटसोर्स कंपनी को प्रमाणपत्र देना होगा। साथ ही कर्मचारियों को यह घोषित करना होगा कि वे कार्य करने में सक्षम व इच्छुक हैं। एजेंसी द्वारा कॉरपोरेशन को ऐसे कर्मचारियों की जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बाद उन्हें काम पर रखने में प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले पर अमल के लिए कॉरपोरेशन आउटसोर्स एजेंसियों के अनुबंध में जरूरी संशोधन करेगा।

    निकाले गए कर्मचारियों को लिया जाएगा वापस
    पूर्व में हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लिए जाने के मसले पर भी बातचीत हुई है। कॉरपोरेशन ने साफ कर दिया है कि केवल उन्हीं कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का विचार किया जाएगा, जिनके विरुद्ध पहले कर्तव्य पालन में शिथिलता, उपभोक्ताओं से गलत व्यवहार, अनुशासनहीनता, बिजली चोरी में संलिप्तता, धन उगाही, अनुचित आचरण या बिलिंग संबंधी कदाचार की कोई शिकायत नहीं हुई हो। दोबारा काम पर रखने के पहले डिस्कॉम पिछले कार्यकाल के अभिलेखों का सत्यापन करेंगे।

    कॉरपोरेशन के कामों में सहयोग करेगा कर्मचारी संगठन
    वार्ता में कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रबंधन को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन समाप्त करते हुए कॉरपोरेशन के कामों में पूरा सहयोग करेगा। संगठन ने राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने, छह माह में एटीएंडसी हानियों में 10 प्रतिशत की कमी लाने, लाइन लॉस कम करने तथा थ्रू-रेट में वृद्धि के लिए सहयोग देने का भरोसा दिया। कर्मचारी संगठन की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष मो. खालिद, प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र पांडेय, प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय आदि शामिल रहे।

  • बिहार में बदले जाएंगे जर्जर बिजली तार और पोल, 12 हजार करोड़ की योजना से सुधरेगी बिजली सप्लाई

    बिहार में बदले जाएंगे जर्जर बिजली तार और पोल, 12 हजार करोड़ की योजना से सुधरेगी बिजली सप्लाई

     पटना
    बिहार में लोगों को जल्द ही कम वोल्टेज की समस्या से निजात मिल सकता है। राज्य के सभी पुराने जर्जर तार, पोल और बिजली खपत के भार के अनुरूप ट्रांसफार्मर बदले जायेंगे। इससे जर्जर तार के टूटकर गिरने और ट्रांसफार्मर जलने की समस्या कम होगी। साथ ही राज्य के करीब सवा दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के घरों को लो वोल्टेज की समस्या से निजात भी मिलेगी। उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने को लेकर ऊर्जा विभाग ने 12 हजार करोड़ रुपए प्रस्ताव तैयार किया है। इसे जल्द ही स्वीकृति के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा। ऊर्जा विभाग को लगातार जर्जर तार और पोल गिरने के साथ ही ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें मिल रहीं हैं।

    विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने अधिकारियों को इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा था। ऊर्जा विभाग योजना को जमीन पर उतारने के लिए बैंकों से करीब 12 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेगा। पिछले एक दशक (2015-16) में राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी से भी अधिक बढ़ी है। इससे तार और ट्रांसफार्मरों पर लोड और इनके जलने की घटनाएं बढ़ी हैं। इसलिए कम क्षमता वाले तार को उच्च क्षमता वाले तार में बदला जाएगा। ऊर्जा विशेषज्ञ, एस. के. सिंह ने कहा कि अब गांवों में भी घरों में एसी-कूलर हैं। इससे तार और ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ा है। इसलिए जर्जर तार बदलना और उच्च क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाना जरूरी है। पावर सब सटेशन और ग्रिड की संख्या भी बढ़ानी होगी।

    किस पर कितना खर्च
    . पोल औऱ केबल के तार (1.18 लाख किमी) – 8465 करोड़

    . बांस-बल्ला पर तार (33,698 किमी) – 2262 करोड़

    . ट्रांसफार्मर (12 हजार) – 370 करोड़

    इस तरह होगा खर्च
    . उत्तर बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी से 21 जिलों में 6066 करोड़ खर्च

    . दक्षिण बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी से 17 जिलों में 5031 करोड़ खर्च

    क्या होगा फायदा
    . उपभोक्ताओं को निर्बांध बिजली

    . दुर्घटना में कमी आएगी

    . बिजली की बर्बादी रूकेगी

    . ट्रांसफार्म जलने की समस्या कम

  • संजू की एक बड़ी पारी या वैभव का भविष्य? वेस्टइंडीज सीरीज के आखिरी दो मैचों पर टिकी नजरें

    संजू की एक बड़ी पारी या वैभव का भविष्य? वेस्टइंडीज सीरीज के आखिरी दो मैचों पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली
    संजू सैमसन, आखिर कब तक? तीन मैच, दो नाकामियां और एक बड़ी पारी, जिस पर दो-दो जीवनदान का एहसान है. वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा टी20 सीरीज में संजू के बल्ले से 11, 82 और 3 रन निकले हैं. रांची में 82 रन बनाकर उन्होंने जरूर उम्मीद जगाई, लेकिन उस पारी की चमक के पीछे छिपी हकीकत भी देखिए. जब वह 6 रन पर थे, तब उनका कैच छूटा. 42 पर उन्हें दूसरा जीवनदान मिला. यानी संजू की पारी को दो बार विपक्षी टीम ने खुद मौका दिया. सवाल है कि क्या एक बड़ी पारी और दो जीवनदान के सहारे ही भारतीय टीम में उनकी जगह बची रहनी चाहिए?

    सवाल इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि टीम के पास एक ऐसा किशोर बल्लेबाज मौजूद है, जिसने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया का ध्यान खींचा है. नाम है वैभव सूर्यवंशी. लेकिन वैभव को मौका मिले, उससे पहले संजू को लगातार मौके दिए जा रहे हैं. पांच मैचों की सीरीज के तीन मुकाबले बीत चुके हैं. अब सिर्फ दो मैच बाकी हैं. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या टीम मैनेजमेंट अब भी संजू को आजमाता रहेगा या वैभव को मैदान पर उतारने का साहस दिखाएगा?

    एक पारी के दम पर कब तक बचेगी जगह?
    संजू की 82 रनों की पारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लेकिन किसी खिलाड़ी का आकलन सिर्फ उसकी सर्वश्रेष्ठ पारी के आधार पर नहीं होता. टी20 क्रिकेट में असली परीक्षा प्रदर्शन में निरंतरता है. संजू ने पहले मैच में 11 रन बनाए, दूसरे में 82 और तीसरे में सिर्फ 3 रन बनाकर लौट गए. तीन पारियों का यह उतार-चढ़ाव एक बार फिर वही सवाल खड़ा करता है, जो उनके करियर के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है- क्या संजू अपनी प्रतिभा को लगातार प्रदर्शन में बदल सकते हैं?

    रांची में मिली दो जीवनदान की बात इसलिए अहम है, क्योंकि बड़े स्तर पर बल्लेबाज को हर बार ऐसे मौके नहीं मिलते. अगर कैच पकड़ लिए जाते, तो क्या संजू की पारी 82 रनों तक पहुंचती? इसका जवाब कोई निश्चित तौर पर नहीं दे सकता. लेकिन इतना जरूर है कि उनकी पारी को परखते समय इन मौकों का जिक्र जरूरी है. रन बने, यह अच्छी बात है. मगर उन रनों के पीछे मिले अवसरों को भुलाकर सिर्फ स्कोरकार्ड देखकर फैसला करना भी सही नहीं होगा.

    वैभव कब तक देखेंगे ड्रेसिंग रूम से तमाशा?
    दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी हैं, जिनकी प्रतिभा पर दुनिया तालियां बजा चुकी है, लेकिन भारतीय टीम में उन्हें अपनी बारी का इंतजार है. टीम में चुनकर भी मैदान से दूर रखना, किसी युवा खिलाड़ी के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी? वैभव ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से बड़े-बड़े गेंदबाजों के पसीने छुड़ाए हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित करने का मौका उनके हाथ नहीं आया. अगर टीम मैनेजमेंट ने उन्हें चुना है, तो उनकी काबिलियत पर भरोसा भी जताया होगा. फिर उस भरोसे को आजमाने से परहेज क्यों? आखिर वैभव को मौका देने के लिए और कितनी दस्तक का इंतजार है?

    वैभव सूर्यवंशी ने छोटी उम्र में ही अपने बल्ले से बड़े-बड़े गेंदबाजों को चुनौती दी है. उनकी बल्लेबाजी में जो बेखौफ अंदाज दिखता है, उसने उन्हें खास पहचान दिलाई है. बेशक, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव में फर्क है. वैभव को भी टीम इंडिया की जर्सी में उतरकर अपनी काबिलियत साबित करनी होगी. लेकिन सवाल है कि जब उन्हें मैदान पर उतरने का मौका ही नहीं मिलेगा, तो उनकी असली परीक्षा होगी कैसे? प्रतिभा को बेंच पर बैठाकर नहीं, मैदान में उतारकर परखा जाता है. वैभव को मौका दिए बिना उनके बारे में फैसला सुनाना आखिर कितना जायज है?

    अब सीरीज में दो ही मैच बचे हैं. यही वह समय है, जब टीम मैनेजमेंट को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए. अगर वैभव को मौका देना है, तो अभी क्यों नहीं? क्या हर बार संजू की एक बड़ी पारी का इंतजार किया जाएगा? और अगर संजू लगातार रन नहीं बना पा रहे हैं, तो क्या सिर्फ उनकी पुरानी उपलब्धियों के आधार पर उन्हें आगे भी खिलाते रहना उचित है?

    औसत 27 से नीचे, फिर भी सवालों से बाहर क्यों?
    संजू का टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजी औसत 27 से नीचे आ चुका है. यह आंकड़ा अपने आप में किसी खिलाड़ी की पूरी कहानी नहीं बताता, लेकिन जब खराब पारियों और अच्छी पारी के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे, तो सवाल पूछना जरूरी हो जाता है. भारतीय टीम में जगह किसी की स्थायी जागीर नहीं हो सकती. यहां प्रदर्शन, टीम की जरूरत और भविष्य की योजनाओं को बराबर महत्व मिलना चाहिए.

    संजू को बाहर करने की मांग का मतलब यह नहीं कि उनमें प्रतिभा नहीं है. उनकी प्रतिभा पर सवाल नहीं है, सवाल उस प्रतिभा से मिलने वाले नतीजों पर है. आखिर कब तक उम्मीद के आधार पर जगह मिलती रहेगी? कब तक एक बड़ी पारी पिछली नाकामियों पर पर्दा डालती रहेगी? और कब तक किसी दूसरे खिलाड़ी को मौका देने का फैसला टलता रहेगा?

    संजू की जगह या वैभव का भविष्य?
    अब तस्वीर साफ है. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दो मैच बाकी हैं. टीम मैनेजमेंट के सामने विकल्प मौजूद है. वह संजू को एक और मौका देकर उनकी फॉर्म पर भरोसा जता सकता है, या वैभव को उतारकर यह देख सकता है कि युवा बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कर सकता है.

    लेकिन फैसला सिर्फ एक खिलाड़ी को खिलाने या दूसरे को बाहर बैठाने का नहीं है. यह टीम की सोच का सवाल है. क्या भारत भविष्य के लिए नए विकल्प तैयार करना चाहता है, या पुराने विकल्पों को बार-बार आजमाने में ही उलझा रहेगा?

    संजू को अपनी जगह बचाने का पूरा अधिकार है, लेकिन वैभव को मौका पाने का हक भी कम नहीं है. संजू की नाकामी अपने आप वैभव की सफलता की गारंटी नहीं बनती, मगर वैभव को मौका न देना उनकी परीक्षा शुरू होने से पहले ही रोक देना है.

    अब संजू के सामने बल्ले से जवाब देने की चुनौती है और टीम मैनेजमेंट के सामने फैसले की. सीरीज के आखिरी दो मैच बताएंगे कि भारतीय टीम सिर्फ आज का स्कोर देख रही है या कल की टीम भी तैयार कर रही है. वैभव को मौका मिलेगा या नहीं, यह फैसला टीम मैनेजमेंट का है. लेकिन एक सवाल का जवाब उन्हें देना ही होगा- जबकिशोर प्रतिभा दरवाजे पर खड़ी है, तो उसे अंदर आने का मौका आखिर कब मिलेगा?

  • शादी के अगले ही दिन दहेज की मांग से जुड़ा मामला, डिप्टी कलेक्टर पर लगे गंभीर आरोप

    शादी के अगले ही दिन दहेज की मांग से जुड़ा मामला, डिप्टी कलेक्टर पर लगे गंभीर आरोप

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ में डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे पर दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का गंभीर मामला सामने आया है. डिप्टी कलेक्टर और उनके परिजनों के खिलाफ उनकी पत्नी ने प्रताड़ना, मारपीट और करोड़ों रुपये दहेज मांगने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

    शादी के दूसरे दिन से ताने और करोड़ों की मांग
    जानकारी के अनुसार, आरंग के ग्राम भानसोज निवासी पूजा बंजारे का विवाह जुलाई 2024 में धमतरी के जोधापुर वार्ड निवासी मनोज बंजारे के साथ हुआ था. मनोज बंजारे राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. पीड़िता का आरोप है कि विवाह के दौरान उनके परिवार ने घरेलू सामान, सोने की चेन और अन्य उपहार दिए थे. इसके बावजूद शादी के महज दूसरे दिन से ही ससुराल वाले कम दहेज मिलने को लेकर ताने देने लगे.

    मायके की जमीन बेचकर पैसे लाने का दबाव
    पीड़िता का आरोप है कि पति मनोज बंजारे, सास ललिता बंजारे और ससुर कोमल सिंह बंजारे लगातार एक लग्जरी कार और 2 से 3 करोड़ रुपये नकदी की मांग कर रहे थे. शिकायत में इसकी भी उल्लेख है कि 4 जनवरी 2025 को मनोज बंजारे ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि वह अपने मायके की जमीन बेचकर  2-3 करोड़ रुपये लेकर आए. मना करने पर मारपीट की गई.

    काउंसलिंग नाकाम, पुलिस ने दर्ज किया मामला
    पीड़िता का कहना है कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद भी ससुराल वालों का अत्याचार कम नहीं हुआ. बच्चे के जन्म के बाद पति ने उसे मायके में ही छोड़ दिया. 2 सितंबर 2026 को पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने भानसोज स्थित मायके में साथ मारपीट की. मामला महिला थाने पहुंचा, जहां परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराई गई. हालांकि, सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं. आखिरकार पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे और उनके परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है.

  • Indore News: पंच परमेश्वर और ग्रामीण विकास योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप, इंदौर जिले में 45 मामले दर्ज

    Indore News: पंच परमेश्वर और ग्रामीण विकास योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप, इंदौर जिले में 45 मामले दर्ज

     इंदौर
     सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की शिकायतें किस तरह अलग-अलग स्तरों पर सामने आ रही हैं, इसकी तस्वीर दो आंकड़ों से मिलती है। एक ओर 4 सितंबर 2024 से 6 अक्टूबर 2026 के बीच सरकारी योजनाओं से जुड़े 45 प्रकरण दर्ज किए गए। दूसरी ओर लोकायुक्त इंदौर के वर्ष 2026 के आंकड़ों में 44 अपराध पंजीबद्ध होने की जानकारी है।

    लोकायुक्त के मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा रिश्वत लेते पकड़े जाने यानी ट्रैप कार्रवाई का है। दर्ज 44 अपराधों में 40 ट्रैप के, एक पद के दुरुपयोग और तीन आय से अधिक संपत्ति से जुड़े छापों के मामले हैं। एसपी (लोकायुक्त) डा. राजेश सहाय के मुताबिक सरकारी योजनाओं से संबंधित 45 प्रकरणों की सूची में पंच परमेश्वर योजना सबसे ऊपर है। इसके तहत 18 मामले दर्ज हैं।

    प्रधानमंत्री कुटीर निर्माण योजना के पांच और प्रधानमंत्री सीसी रोड निर्माण से जुड़े चार प्रकरण सूची में हैं। मनरेगा की पशुपालन योजना के तीन मामले दर्ज किए गए, जबकि मनरेगा समग्र शिक्षा अभियान के तहत बाउंड्रीवॉल निर्माण और शौचालय रिपेयरिंग से जुड़े मामलों की संख्या क्रमश: एक और दो है।

    प्रधानमंत्री सोलर पैनल सब्सिडी योजना से जुड़े दो प्रकरण भी सूची में शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री सड़क निर्माण, संबल योजना, राज्य मार्ग सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास के तहत सीसी रोड निर्माण, बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं से जुड़े मामले भी दर्ज किए गए हैं। पंच परमेश्वर योजना में 18 प्रकरण होना जांच का अहम बिंदु है।

    लोकायुक्त इंदौर के वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार कुल 44 अपराध पंजीबद्ध किए गए। इनमें 40 ट्रैप प्रकरण हैं। यानी दर्ज मामलों में लगभग 91 प्रतिशत ट्रैप कार्रवाई से संबंधित हैं। एक मामला पद के दुरुपयोग और तीन आय से अधिक संपत्ति के मामलों में छापे से जुड़े हैं।

    ट्रैप मामलों की बड़ी संख्या बताती है कि लोकायुक्त की कार्रवाई में रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले मामलों का हिस्सा प्रमुख है। वहीं, पद के दुरुपयोग और अनुपातहीन संपत्ति से जुड़े मामलों की संख्या कम है। हालांकि, ये आंकड़े केवल दर्ज प्रकरणों का वर्गीकरण बताते हैं, इनसे भ्रष्टाचार के सभी मामलों की वास्तविक संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

    27 मामलों में चालान, छह में सजा
    लोकायुक्त के आंकड़ों में 27 मामलों में चालान पेश किए जाने और छह मामलों में सजा होने की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई की प्रगति का अहम संकेतक है। दोनों सूचियां भ्रष्टाचार के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं। सरकारी योजनाओं के मामलों में सड़क निर्माण, आवास, ग्रामीण विकास और अन्य योजनाओं से जुड़े प्रकरण हैं, जबकि लोकायुक्त के वार्षिक आंकड़ों में ट्रैप कार्रवाई का दबदबा दिखाई देता है।