Author: NewseDay

  • यूपी के राजकीय आईटीआई में एडमिशन का नया अवसर, कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की राह होगी आसान

    यूपी के राजकीय आईटीआई में एडमिशन का नया अवसर, कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की राह होगी आसान

    राजकीय आईटीआई में पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू

    युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही योगी सरकार

    13 से 15 अक्टूबर तक नोडल संस्थानों में जमा होंगे रैंक कार्ड, 16 अक्टूबर तक पूरी होगी चयन प्रक्रिया

    लखनऊ, 
    प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने की दिशा में योगी सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में सत्र 2026-27 के लिए रिक्त सीटों पर प्रवेश का पंचम चरण शुरू कर दिया गया है। चतुर्थ चरण के बाद रिक्त रह गई सीटों के लिए पूर्व पंजीकृत गैर-चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ नवीन ऑनलाइन आवेदकों को भी प्रवेश का अवसर दिया जाएगा।

    व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के विशेष सचिव एवं राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि रिक्त सीटों के सापेक्ष अभ्यर्थियों की शैक्षिक अर्हता के आधार पर तैयार मेरिट सूची संबंधित राजकीय आईटीआई को उपलब्ध करा दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    13 से 15 अक्टूबर तक जमा करना होगा रैंक कार्ड

    प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी एससीवीटी की आधिकारिक वेबसाइट www.scvtup.in पर जाकर ‘पंचम चरण के लिए रैंक’ लिंक पर क्लिक कर अपना रैंक कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए पूर्व पंजीकृत अथवा नवीन आवेदनकर्ता के विकल्प का चयन कर पंजीकरण संख्या एवं जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। रैंक कार्ड प्राप्त करने के बाद उसका प्रिंट निकालकर उस पर हस्ताक्षर करना होगा। हस्ताक्षरित रैंक कार्ड 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 के बीच संबंधित जनपद के किसी भी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में, विशेष रूप से नोडल राजकीय आईटीआई में, अनिवार्य रूप से जमा करना होगा।

    पूर्व पंजीकृत अभ्यर्थियों को मिलेगा प्राथमिक अवसर

    पंचम चरण में सीट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। सबसे पहले चतुर्थ चरण तक पंजीकृत लेकिन चयन से वंचित रहे अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त सीटों पर प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद शेष रिक्त सीटों पर नवीन ऑनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर ट्रेड एवं व्यवसाय का आवंटन किया जाएगा। जनपद स्तर पर गठित चयन समिति द्वारा पूरी प्रक्रिया संपन्न कर 16 अक्टूबर 2026 तक चयनित अभ्यर्थियों की अनुमोदित सूची तैयार की जाएगी। चयन सूची को संबंधित संस्थान के सूचना पट्ट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया की जानकारी समय से मिल सके।

    दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मिलेगा प्रवेश

    संस्थानों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि अभ्यर्थियों को प्रवेश देने से पूर्व उनके मूल अभिलेखों का गहनता से सत्यापन सुनिश्चित करें। शैक्षिक योग्यता, जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ ही पात्र अभ्यर्थियों को उनका उचित अवसर सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    17 अक्टूबर तक पोर्टल पर अपलोड होगा प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों का डाटा

    राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले सभी अभ्यर्थियों का विवरण एससीवीटी पोर्टल पर अपलोड एवं सत्यापित करने की प्रक्रिया भी निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएगी। संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि 17 अक्टूबर 2026 की रात्रि 12 बजे तक सभी प्रवेशित अभ्यर्थियों का डाटा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड एवं सत्यापित कर दिया जाए।

    कौशल से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता
    योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं को ‘कौशल से रोजगार और रोजगार से आत्मनिर्भरता’ की दिशा में आगे बढ़ाना है। राजकीय आईटीआई के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे बदलते रोजगार बाजार में अपनी दक्षता के अनुरूप बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। रिक्त सीटों पर प्रवेश के इस अतिरिक्त चरण से अधिक से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जुड़ने का अवसर मिलेगा और प्रदेश की युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के सरकार के प्रयासों को और गति मिलेगी।

  • इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे विराट कोहली, फिर 2 महीने में ऐसा क्या हुआ कि लिया संन्यास?

    इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे विराट कोहली, फिर 2 महीने में ऐसा क्या हुआ कि लिया संन्यास?

    नई दिल्ली
    टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर विराट कोहली साफ कर चुके हैं कि वह अब टेस्ट क्रिकेट में कभी वापसी नहीं करेंगे। टी20 से वह पहले ही संन्यास ले चुके हैं। सिर्फ वनडे फॉर्मेट खेलने वाले कोहली अगले साल विश्व कप में भारत के लिए आखिरी मैच खेल सकते हैं। विराट अभी भी युवा खिलाड़ियों से ज्यादा फिट हैं। इसके बावजूद उनका टेस्ट क्रिकेट न खेलना भारतीय फैंस को चुभता है। भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान विराट ने अचानक ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। विराट के इस फैसले से सभी को हैरानी हुई थी। अब वसीम जाफर ने इस बारे में खुलकर बात की है और कई खुलासे किए हैं।

    विराट ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। अब वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर खुलासा किया है कि विराट अपने साथ हो रहे बर्ताव से नाराज थे। इसी वजह से विराट और रोहित ने 5 दिन के अंतराल में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।

    लंबा हो सकता था विराट का करियर
    वसीम जाफर ने कहा, 'ऐसा लग रहा था कि विराट अपने साथ हुए बर्ताव से थोड़ा नाराज थे। विराट जैसा खिलाड़ी लोगों को मैदान तक खींच लाता है। उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं। वह निश्चित रूप से और अधिक टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। जब तक हम विराट से खुद नहीं सुनेंगे, तब तक हमें पता नहीं चलेगा। वह इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे।'

    दिल्ली के कोच और अगरकर के बयान एक-दूसरे के उलट
    दिल्ली के कोच सरनदीप सिंह ने विराट के संन्यास लेने पर हैरानी जताई थी। विराट जनवरी 2025 में दिल्ली के लिए रणजी खेल रहे थे, क्योंकि बीसीसीआई ने सभी खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना जरूरी कर दिया था। इसी दौरान कोहली ने दिल्ली के कोच से अपना प्लान शेयर किया था। सरनदीप के अनुसार वह इंग्लैंड दौरे पर खेलना चाहते थे और तीन-चार शतक बनाने के सपने देख रहे थे। कोहली ने सीरीज से पहले दो इंडिया ए मैच खेलने पर भी बात की थी। हालांकि, अगरकर का बयान इससे अलग था। उनका कहना था कि विराट ने अप्रैल की शुरुआत में उनसे संपर्क किया और कहा कि वह संन्यास लेना चाहते हैं। 2 महीने में ऐसा क्या हुआ, जिससे विराट का प्लान बदल गया। यह अभी भी राज है।

  • बिहार की बेटियों ने रचा सफलता का इतिहास, प्रोत्साहन राशि से शिक्षा और सरकारी नौकरी के सपने हुए पूरे

    बिहार की बेटियों ने रचा सफलता का इतिहास, प्रोत्साहन राशि से शिक्षा और सरकारी नौकरी के सपने हुए पूरे

    पटना
     नवरात्र में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के बीच बिहार की बेटियों की सफलता की ये कहानियां भी महिला सशक्तीकरण की तस्वीर पेश करती हैं। किसी बेटी के लिए सरकारी प्रोत्साहन राशि कॉलेज तक पहुंचने का जरिया बनी, तो किसी ने प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल कर सरकारी सेवा में जगह बनाई।

    बिहार सरकार की विभिन्न शैक्षणिक और आर्थिक सहायता योजनाओं का उद्देश्य छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने, अपने सपनों को पूरा करने और आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना है। डिंपी कुमारी और प्रिया आर्या की कहानियां इसी दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

    घर की पहली बेटी बनी कॉलेज स्टूडेंट, सरकारी मदद से आसान हुई राह
    डिंपी कुमारी आज पटना के मगध महिला कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई कर रही हैं। उनके लिए यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।

    परिवार की आर्थिक स्थिति और लड़कियों की उच्च शिक्षा को लेकर बनी पारंपरिक सोच उनके सामने चुनौतियां थीं। वह अपने परिवार की पहली बेटी हैं, जो कॉलेज जाकर पढ़ाई कर रही हैं।

    डिंपी के मुताबिक, 12वीं पास करने के बाद बिहार सरकार की ओर से मिलने वाली 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि ने उनकी आगे की पढ़ाई का रास्ता आसान किया

    इस आर्थिक सहायता से उन्हें कॉलेज में दाखिला लेने और फीस की चिंता कम करने में मदद मिली। उनके लिए यह राशि केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला भी बनी।

    डिंपी बोलीं- दूसरी लड़कियां भी पढ़ें और अपना भविष्य बनाएं
    डिंपी कुमारी कहती हैं कि सरकारी योजनाओं से उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि इस सहायता से उन्हें शिक्षा के लिए पूरी तरह अपने माता-पिता पर निर्भर रहने की चिंता कुछ कम हुई। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और अपने भविष्य को लेकर उम्मीद जगी।

    डिंपी दूसरी छात्राओं को भी पढ़ाई जारी रखने और उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का संदेश देती हैं। उनका मानना है कि शिक्षा बेटियों को आगे बढ़ने और अपनी पहचान बनाने का अवसर देती है।

    वह बिहार सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहती हैं कि लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान देने से उनके जैसे परिवारों की बेटियों को भी कॉलेज तक पहुंचने का मौका मिल रहा है।

    प्रोत्साहन राशि से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में मिली मदद
    डिंपी की कहानी उच्च शिक्षा से जुड़ी है, वहीं प्रिया आर्या की सफलता प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली छात्राओं के लिए प्रेरणा है।

    प्रिया का चयन बीपीएससी में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के पद पर हुआ है। उन्होंने अपनी सफलता के सफर में आर्थिक सहायता के महत्व को रेखांकित किया है।

    प्रिया आर्या के अनुसार, बिहार सरकार से मिली प्रोत्साहन राशि ने मुख्य परीक्षा की तैयारी में उनकी मदद की। उन्होंने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपने विभाग में पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम करेंगी और बिहार के विकास में योगदान देंगी।

    उनकी सफलता बताती है कि सही तैयारी, मेहनत और जरूरी संसाधन मिलने से प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के अवसर मजबूत हो सकते हैं।

    साइकिल से कॉलेज तक, कई योजनाओं से बेटियों को मिल रहा सहारा
    बिहार सरकार छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग स्तरों पर योजनाएं संचालित करती है। इनमें मुख्यमंत्री साइकिल योजना, मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री पोशाक योजना, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना और मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना जैसी पहल शामिल हैं।

    इन योजनाओं का उद्देश्य छात्राओं को स्कूल आने-जाने की सुविधा देने, पढ़ाई से जुड़े खर्च में मदद करने और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने जैसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।

    हालांकि, प्रत्येक योजना की पात्रता, सहायता राशि और आवेदन की शर्तें अलग-अलग होती हैं। छात्राओं को लाभ लेने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

    UPSC-BPSC की तैयारी करने वाली बेटियों को भी आर्थिक मदद
    बिहार सरकार की मुख्यमंत्री सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली पात्र अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।

    इसके तहत निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली अभ्यर्थियों को आगे की तैयारी के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना के तहत यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली पात्र अभ्यर्थियों को एक लाख रुपये और बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली पात्र अभ्यर्थियों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। आवेदन करने से पहले संबंधित भर्ती और योजना के नवीनतम दिशा-निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी है।

    शिक्षा से आत्मनिर्भरता तक, बदल रही हैं बेटियों की राहें
    बिहार में बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति, प्रोत्साहन राशि और प्रतियोगी परीक्षा सहायता जैसी पहल अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी व्यापक होगा, जब पात्र छात्राओं तक समय पर जानकारी पहुंचे और आवेदन की प्रक्रिया उनके लिए सुलभ हो।

    डिंपी कुमारी की कॉलेज तक पहुंचने की कहानी और प्रिया आर्या की सरकारी सेवा में चयन की उपलब्धि अलग-अलग मंजिलों को दिखाती हैं, लेकिन दोनों के केंद्र में शिक्षा और आगे बढ़ने का अवसर है।

    नवरात्र के इस विशेष अवसर पर ये कहानियां संदेश देती हैं कि बेटियों को पढ़ने, तैयारी करने और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर देना परिवार, समाज और राज्य, तीनों के भविष्य को मजबूत कर सकता है।

  • कम पानी और तेज गर्मी में भी उगता है तुम्बा, पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए खुल सकते हैं कमाई के नए रास्ते

    कम पानी और तेज गर्मी में भी उगता है तुम्बा, पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए खुल सकते हैं कमाई के नए रास्ते

    जयपुर
    राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला तुम्बा अब किसानों की अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकता है। कड़वे फल वाली इस जंगली बेल को स्थानीय स्तर पर इंद्रायण भी कहा जाता है। कम पानी, अत्यधिक तापमान और कम उपजाऊ मिट्टी में जीवित रहने की क्षमता के कारण यह शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी फसल बन सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) का इंडियन हार्टिकल्चर के सितंबर-अक्टूबर 2026 के अंक में पब्लिश रिसर्च में तुम्बा की औषधीय उपयोगिता और आर्थिक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।

    शोध के अनुसार, तुम्बा शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक औषधीय पौधा है, जिसका अब तक सीमित उपयोग किया गया है। यह पौधा सूखे और अत्यधिक गर्मी जैसी कठिन परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि कम उपजाऊ मिट्टी में भी जीवित रह सकता है और उग सकता है। इन विशेषताओं के कारण तुम्बा पश्चिमी राजस्थान जैसे रेगिस्तानी इलाकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। शोध में इसके व्यवस्थित उत्पादन की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। उचित तरीके से इसकी खेती को बढ़ावा देने पर शुष्क क्षेत्रों में इसके उपयोग और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    औषधीय गुणों पर वैज्ञानिक रुचि
    शोध के अनुसार तुम्बा में विभिन्न जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इसके अर्क में मधुमेहरोधी, रेचक, सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुणों की संभावनाएं सामने आई हैं। आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी इसका उपयोग होता रहा है। हालांकि, इन गुणों को आधुनिक चिकित्सा में प्रमाणित उपचार मानने से पहले प्रभावशीलता, सुरक्षित मात्रा और दुष्प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। मधुमेह या किसी अन्य बीमारी के इलाज में इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

    किसानों के लिए ऐसे खुलेगा कमाई का रास्ता
    तुम्बा की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने से प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इस वनस्पति का आर्थिक मूल्य बढ़ सकता है। इसके लिए उपयुक्त किस्मों, खेती की तकनीक, उपज, प्रसंस्करण और बाजार की मांग पर काम करना होगा। औषधीय पौधों के उपयोगी घटकों का मूल्यवर्धन होने पर किसानों और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।

  • धान के साथ खेती में बदलाव से फागूराम को फायदा, ग्राफ्टेड बैंगन उगाकर ₹20 हजार ज्यादा कमाए

    धान के साथ खेती में बदलाव से फागूराम को फायदा, ग्राफ्टेड बैंगन उगाकर ₹20 हजार ज्यादा कमाए

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फागूराम ने अपनाई ग्राफ्टेड बैंगन की खेती, मुनाफे में हुई 20 हजार रुपये की बढ़ोतरी

    उद्यानिकी विभाग के सहयोग और आधुनिक कृषि तकनीक से बदली खेती की तस्वीर, 0.400 हेक्टेयर में 120 क्विंटल बैंगन का उत्पादन

    धान से 35 हजार तो ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से कमाए 55 हजार रुपये, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा

    रायपुर,
     खेती में नई तकनीक और फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा उद्यानिकी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित योजनाएं किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही हैं। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम परसाही निवासी कृषक फागूराम पटेल ने भी पारंपरिक धान की खेती के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने में सफलता हासिल की है। उद्यानिकी विभाग के सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन का उत्पादन कर 55 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो धान की खेती से प्राप्त लाभ की तुलना में 20 हजार रुपये अधिक है।

    धान की खेती से आगे बढ़कर अपनाई आधुनिक उद्यानिकी

    फागूराम पटेल पहले मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। खेती से बेहतर आमदनी प्राप्त करने और उपलब्ध भूमि का अधिक लाभकारी उपयोग करने के उद्देश्य से उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों से ग्राफ्टेड बैंगन एवं अन्य सब्जियों की खेती के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के बाद उन्होंने आधुनिक उद्यानिकी तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।

    शासकीय योजना के तहत मिले सहयोग और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें फसल प्रबंधन, उन्नत खेती की पद्धतियों तथा बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिली। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की और बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी अर्जित की।

    ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से बढ़ा उत्पादन और मुनाफा

    फागूराम पटेल बताते हैं कि पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 20 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिसकी बिक्री से 62 हजार रुपये की आय होती थी। इसमें बीज, खाद, श्रमिक एवं अन्य कृषि कार्यों पर लगभग 27 हजार रुपये खर्च होते थे। इस प्रकार धान की खेती से उन्हें लगभग 35 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता था।

    वहीं, ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाने के बाद उन्हें 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 120 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। बैंगन की बिक्री से उन्होंने 1 लाख 20 हजार रुपये की राशि अर्जित की। इस खेती में लगभग 65 हजार रुपये की लागत आई। सभी खर्चों को घटाने के बाद उन्हें 55 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इस प्रकार धान की तुलना में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से उनके मुनाफे में 20 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई।

    तकनीकी मार्गदर्शन और मेहनत से खेती बनी अधिक लाभकारी

    फागूराम पटेल की सफलता में उद्यानिकी विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। विभागीय सहयोग से उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर फसल प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की। इन तकनीकों को अपनाकर वे पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

    ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से मिली सफलता ने फागूराम का आत्मविश्वास बढ़ाया है। उनकी इस पहल से प्रेरित होकर आसपास के अन्य किसान भी धान की पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

    फागूराम पटेल की सफलता की कहानी दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं का लाभ, आधुनिक कृषि तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फसल विविधीकरण के माध्यम से किसान उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकते हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद डिवोशनल फिल्मों की धूम, 2026-27 में रिलीज होंगी रामायण समेत 10 फिल्में

    ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद डिवोशनल फिल्मों की धूम, 2026-27 में रिलीज होंगी रामायण समेत 10 फिल्में

    हनुमान अंश (Hanuman Ansh) की सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री में डिवोशनल फिल्म को लेकर क्रेज बढ़ा दिया है। वहीं दर्शक भी इस तरह की फिल्मों को काफी पसंद कर रहे हैं और इसीलिए 2026 और 2027 में 10 डिवोशनल फिल्मों पर मेकर्स दांव लगाने जा रहे हैं जिन्हें लेकर 'हनुमान अंश' जैसी सफलता की उम्मीद की जा रही है।

    डिवोशनल फिल्मों पर दांव लगा रहे फिल्ममेकर्स
    नीम करोली बाबा के जीवन पर फिल्म के बाद अब आने वाले कुछ महीनों में डिवोशनल व्यक्तित्वों पर फिल्में आ रही हैं जिनमें गोस्वामी तुलसीदास, सांई बाबा, खाटू श्याम शामिल हैं। अपकमिंग डिवोशनल फिल्मों का ये सिलसिला रामायण: पार्ट 1 (Ramayana: Part 1) से शुरू होगा और इसके बाद लगभग 10 फिल्में और रिलीज होंगी।

    2027 में रिलीज होंगी 10 डिवोशनल फिल्में
    रामायण: पार्ट- नवंबर 2026
    वाल्मिकी रामायण- 2026 (संभावित)
    तेरा साईं- फरवरी 2027
    चिंरंजीवी हनुमान: द इटरनल- फरवरी 2027 (संभावित)
    हारे का सहारा बाबा खाटू श्याम हमारा- 2027
    कृष्णावतारम् पार्ट 2- 2027 में संभावित
    महावतार परशुराम- दिसंबर 2027
    राम बोला- 2027 में फ्लोर पर आएगी
    हनुमान अंश 2- अनाउंस नहीं हुई है।
     
    'हनुमान अंश' से 'कृष्णावतरम्' ने किया करोड़ों में कारोबार
    पिछले कुछ सालों में कांतारा, महावतार नरसिम्हा, कृष्णावतारम् जैसी फिल्मों की सफलता ने साबित किया है कि दर्शकों को इस तरह का कंटेंट पसंद है। इन सभी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर अच्छा खासा प्रॉफिट कमाया और अब यही उम्मीद आने वाली डिवोशनल फिल्मों से की जा रही है।

    क्यों सफल हुईं डिवोशनल फिल्में?
    इस सवाल का सीधा जवाब है इस तरह के कंटेंट से दर्शकों का सीधा जुड़ाव। भारत का कल्चर ही इसकी पहचान है और एक बड़ी जनसंख्या भगवान में आस्था रखती है और इसीलिए डिवोशनल व्यक्तित्व से जुड़े इतिहास और कहानी में दर्शकों की खास रुचि है क्योंकि इसे वे अपने आप से जुड़ा हुआ पाते हैं।

    गानों ने भी मचाया धमाल
    डिवोशनल फिल्मों के साथ-साथ लोगों को इनके गाने भी खासे पसंद आए हैं। हनुमान अंश का पार्वती (Parvati) गाना आते ही सोशल मीडिया पर छा गया था वहीं यूट्यूब (YouTube) पर अब तक इसके 120 मिलियन व्यूज हो गए हैं। इसके अलावा कृष्णावतारम् के सभी गाने शानदार थे वहीं 'कांतारा' का कर्मा सॉन्ग अब भी सोशल मीडिया रील्स में ट्रेंडिंग है।

    हनुमान अंश ने दुनियाभर में कमाए 400 करोड़
    सिर्फ 2 करोड़ रुपये बजट में बनी 'हनुमान अंश' ने वर्ड ऑफ माउथ के दम पर तीसरे हफ्ते से कमाई की रफ्तार पकड़ी थी। फिल्म को थिएटर्स में चलते हुए 2 महीने से ज्यादा हो गए हैं और इसने नेट इंडिया कलेक्शन में 300 करोड़ रुपये और ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।

     

  • पंजाब में CM मान के OSD को राहत, राजबीर घुम्मन की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

    पंजाब में CM मान के OSD को राहत, राजबीर घुम्मन की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

    चंडीगढ़.

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। घुम्मन के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामले में एफआइआर दर्ज की थी। इस एफआइआर में घुम्मन समेत छह लोगों को नामजद किया गया था।

    क्या है मामला?
    मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब में कथित भ्रष्टाचार और सरकारी फैसलों को प्रभावित करने से जुड़े इनपुट साझा किए जाने के बाद हुई। ईडी ने अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर और अन्य सरकारी मंजूरियों में कथित लेन-देन से संबंधित जानकारी दी थी। इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पांच अक्टूबर 2026 को सीबीआइ को एफआइआर दर्ज कर जांच करने और दो महीने में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सीबीआइ ने पांच अक्टूबर को एफआइआर दर्ज की। जस्टिस एमएम सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने निर्देश दिया कि मामले में कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। बेंच ने यह भी कहा कि राज्य को जांच में सहयोग करना चाहिए।

    सीबीआई ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) राजबीर सिंह घुमन और पांच अन्य आरोपियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और प्रभाव के गलत इस्तेमाल के मामले में एफआईआर दर्ज की है। मामला सरकारी ट्रांसफर और पोस्टिंग, टेंडर, पॉलिसी से जुड़े फैसलों, लाइसेंसिंग और ज़मीन से जुड़े मामलों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर दी गई रिश्वत से जुड़ा है। सीबीआई ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश पर पांच अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की थी। इसके विरोध में पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

  • बिहार में 27 पुलिस अधिकारियों की नई पोस्टिंग, पटना से बक्सर तक बदली जिम्मेदारियां; जानें किसे कहां मिली तैनाती

    बिहार में 27 पुलिस अधिकारियों की नई पोस्टिंग, पटना से बक्सर तक बदली जिम्मेदारियां; जानें किसे कहां मिली तैनाती

     पटना
     बिहार में पुलिस महकमे के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार के गृह विभाग ने बिहार पुलिस सेवा के 27 अधिकारियों का तबादला किया है। 11 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के तहत अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) और पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस बदलाव में विशेष शाखा, एसटीएफ, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और साइबर क्राइम जैसी अहम इकाइयां शामिल हैं।

    साइबर क्राइम से निपटने के लिए कई जिलों में नई तैनाती
    तबादला सूची में साइबर क्राइम से जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी ध्यान दिया गया है। नवीन कुमार को मधुबनी और मनीष चंद्र चौधरी को मधेपुरा में साइबर क्राइम डीएसपी बनाया गया है।

    दीपक कुमार को मुजफ्फरपुर नगर में साइबर क्राइम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मो. फैसल चांद को सारण में साइबर क्राइम डीएसपी बनाया गया है।

    इन तैनातियों के बाद संबंधित जिलों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों की पुलिसिंग की जिम्मेदारी नए अधिकारियों के पास होगी।

    पटना की विशेष इकाइयों में भी बदले अधिकारी
    राजधानी पटना में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। संजय कुमार झा को अपर पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में पदस्थापित किया गया है।

    अजय कुमार सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक, विशेष कार्य बल (STF), पटना की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, सुरेंद्र कुमार सिंह को मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में तैनात किया गया है।

    छपरा, बक्सर और पटना में भी नई जिम्मेदारियां
    क्षेत्रीय और अनुमंडल स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। रामपुकार सिंह को प्रमोशन के बाद अपर पुलिस अधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-14, पटना में पदस्थापित किया गया है

    भास्कर रंजन को रेल पटना से स्थानांतरित कर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, डुमरांव, बक्सर बनाया गया है। आशीष राज को मसौढ़ी, पटना में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नए पदस्थापन से पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
    गृह विभाग के आदेश के अनुसार, अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्यभार संभालना होगा। जिन अधिकारियों का पदस्थापन अन्यत्र नहीं किया गया है, वे नए पदाधिकारियों को प्रभार सौंपने के बाद अगले आदेश तक पुलिस मुख्यालय, पटना में योगदान देंगे। इस फेरबदल का उद्देश्य विभिन्न पुलिस इकाइयों और जिलों में प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करना है।

    आम लोगों पर क्या होगा असर?
    पुलिस अधिकारियों के तबादले के बाद संबंधित जिलों में कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध और विशेष इकाइयों के कामकाज की जिम्मेदारी नए अधिकारियों के पास होगी।

    हालांकि, इस फेरबदल से आम लोगों की शिकायतों के निपटारे या अपराध नियंत्रण में कितना बदलाव आएगा, यह नई तैनाती के बाद अधिकारियों के कामकाज पर निर्भर करेगा।

     

  • ई-ऑफिस, समय पर उपस्थिति और आई-गाट कोर्स में शानदार काम, मुख्य सचिव ने अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित

    ई-ऑफिस, समय पर उपस्थिति और आई-गाट कोर्स में शानदार काम, मुख्य सचिव ने अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित

    मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस एवं समयबद्ध उपस्थिति, आई-गाट प्रशिक्षण कोर्स में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों को किया सम्मानित

    रायपुर
     मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में अधिकारियों-कर्मचारियों को ई-ऑफिस, समयबद्ध उपस्थिति और आई-गाट में प्रशिक्षण कोर्स में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया। मुख्य सचिव ने सम्मान प्राप्त करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।

               विकासशील ने कहा की मंत्रालय में अधिकारी-कर्मचारी समय पर अपनी उपस्थित दर्ज कर रहे है। मुख्य सचिव ने कहा कि मंत्रालय में 10 बजे से पूर्व आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मुख्य सचिव ने मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को सितम्बर माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। 

                विभागीय श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभागों में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग द्वितीय तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग तृतीय स्थान पर रहा। 

            संयुक्त सचिव श्रेणी में आदिम जाति विकास विभाग के भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम, अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के अनुपम त्रिवेदी द्वितीय तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिदानंद आलोक तृतीय स्थान पर रहे। उप सचिव श्रेणी में चिकित्सा शि़क्षा विभाग की श्रीमती लवीना पाण्डे प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग-1 के किशोर कुमार भूआर्य द्वितीय तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के दूरदेशी राम सोन्टापर तृतीय स्थान पर रहे।

            अवर सचिव श्रेणी में चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूरन लाल साहू प्रथम, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के भूपेन्द्र सिंह राजपूत द्वितीय, गृृह विभाग के सोनचंद साहू तृतीय स्थान पर रहे। अनुभाग अधिकारी श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विरेन्द्र कुमार प्रथम, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की श्रीमती पी.दुर्गा द्वितीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के शिवकुमार गोड़ तृतीय स्थान पर रहे।

              सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की श्रीमती वर्षा रानी अग्रवाल प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग-1 के बेरनाथ कूजूर द्वितीय, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सुप्रिया बागड़े तृतीय स्थान पर रही। वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में सामान्य प्रशासन विभाग-1 के धनेश्वर पटेल प्रथम, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सलीम शैलेन्द्र टोप्पो द्वितीय, चिकित्सा शिक्षा विभाग की श्रीमती ललीता राय तृतीय स्थान पर रही।

             कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सुप्रतिक्षा खलखो प्रथम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अजय राठिया द्वितीय स्थान पर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रभु सिंह राठिया तृतीय स्थान पर रहे।  टेक्निकल सेक्शन में चिकित्सा शिक्षा विभाग के राम नरेश पाल प्रथम स्थान पर, चिकित्सा शिक्षा विभाग के ऋषिकेश मिर्चे द्वितीय स्थान पर तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के सुतृप्ति शर्मा तृतीय स्थान पर रही।

              समयबद्ध कार्यालयीन उपस्थिति के लिए टॉप-10 में जिन अधिकारियों को सम्मानित किया  गया है उनमें सहायक अनुभाग अधिकारी शिवचरण राठौर, भृत्य सेठलाल यादव, सहायक अनुभाग अधिकारी मीरा, सहायक अनुभाग अधिकारी सुगामीनी वर्मा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अवर सचिव भूपेन्द्र सिंह राजपूत, अनुभाग अधिकारी मंजूषा राजपूत, सहायक अनुभाग अधिकारी दीपक श्रीवास, अनुभाग अधिकारी शिवकुमार गोड़, आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव भूपेन्द्र कुमार राजपूत, अनुभाग अधिकारी महेश कुमार तिवारी है।

                आई-गाट कर्मयोगी में प्रशिक्षण प्राप्त करने में उत्कृष्ट कार्य के लिए इस माह वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की प्रथम स्थान पर सुमंजूषा मिश्रा ने 255 कोर्स, द्वितीय स्थान पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विरेन्द्र धु्रव ने 235 कोर्स किए है। इसी तरह से पशुपालन विभाग के संतोष क्षत्रिय तृतीय स्थान पर रहे। इन्होंने आई-गाट 136 प्रशिक्षण कोर्स किए है। ई-ऑफिस में विभिन्न जिलों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कबीरधाम जिला कार्यालय के अधीक्षक राजेन्द्र सिंह धु्रर्वे, दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह, बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा, अपर कलेक्टर सुनिशा नेताम मण्डावी, डिप्टी कलेक्टर रामरतन प्रसाद दुबे को सम्मानित किया।

                 विभागाध्यक्ष कार्यालय में ई-ऑफिस व्यक्तिगत रूप से उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रथम स्थान पर उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त सुरीता यादव, द्वितीय स्थान पर लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के बेनीराम साहू, तृतीय स्थान पर वाणिज्यकर विभाग के तेजराम बढ़ई, चौथे स्थान पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक जॉन तिग्गा, पांचवे स्थान पर नगरीय प्रशासन विभाग की सुसौमित्रा प्रधान को सम्मानित किया गया।

  • छत्तीसगढ़ के बस्तर में बड़ा सड़क हादसा, झीरम घाटी में पिकअप पलटने से मची अफरा-तफरी

    छत्तीसगढ़ के बस्तर में बड़ा सड़क हादसा, झीरम घाटी में पिकअप पलटने से मची अफरा-तफरी

    तोंगपाल/जगदलपुर.

    नेशनल हाइवे 30 पर करीब 9 बजे मजदूरों से भरा एक पिकअप झीरम घाटी रास्ते में बेकाबू हो कर पलट गया. इस हादसे में 1 मजदूर की मौत हो गई और 16 घायल हो गए.

    इस हादसे की जानकारी मिलते ही सीआरपीएफ 227 बटालियन के जवानों ने घायलों को तोंगपाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां घायलों की स्थिति को देखते हुए दो लोगों को डिमरापाल रेफर किया गया, एवं अन्य लोगों का उपचार किया गया, दरभा पुलिस ने मौके पर पहुंच कर दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वाहन को उठाकर, थाना पहुंचाया. पीएचसी तोंगपाल अस्पताल में मृतक के शव को लेकर परिजनों के साथ अग्रिम कार्रवाई की गई.

    जानकारी के मुताबिक घटना में घायल हुए 16 लोग, उड़ीसा क्षेत्र के लेबर कार्य करने वाले बताए गए, सभी लोग ठेकेदार के बुलाने पर कूकानार इलाके में ढलाई करने पिकप पर सवार हो निकले थे. कुछ घायलों ने बताया पिकअप वाहन का चालक वाहन को तेज गति से और लापरवाही पूर्वक चलाने से मोड़ के पास गढ्ढे को बचाने के चलते हादसा हुआ. चालक ने ब्रेक नहीं लगने से हादसा होना बताया. पीएचसी तोंगपाल में पोस्टमार्टम हेतु व्यवस्था न हो पाने के कारण शव दरभा अस्पताल जाने वाहन बुकिंग कर वाना पड़ा. पोस्टमार्टम पश्चात शव को परिजनों को सौंप दिया.