Author: NewseDay

  • दुर्ग में दिव्यांग बच्चों के लिए शिविर, 11 बच्चों को UDID कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में मिली मदद

    दुर्ग में दिव्यांग बच्चों के लिए शिविर, 11 बच्चों को UDID कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में मिली मदद

    दुर्ग.

    स्कूलों में पढ़ाई कर रहे दिव्यांग बच्चों को सुविधा मुहैया कराने समय- समय आंकलन शिविर लगाया जाता है। इसी कड़ी में विकासखण्ड दुर्ग शहर तथा धमधा द्वारा संयुक्त रूप से दिव्यांग बच्चों का आकलन शिविर यूआरसीसी कार्यालय दुर्ग में लगाया गया।

    जिला परियोजना समन्वयक विनोद कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में लगी शिविर में 0 से 18 वर्ष के कुल 104 दिव्यांग बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें से तत्काल 11 बच्चों का यूडीआईडी कार्ड (पहचान पत्र ) बनाने हेतु प्रमाणीकरण किया गया। वैसे दिव्यांगता 40% होने पर ही यूडीआईडी कार्ड बनता है। वहीं दिव्यांगता की श्रेणी में कुल 21 अलग अलग प्रकार की बाधिता को रखा गया है। निःशुल्क जांच के साथ चश्मा तथा आवश्यकतानुसार दवाई प्रदान की गई।

    विकासखंड स्तरीय दिव्यांग आकलन शिविर एपीसी इंद्र कुमार रामटेके एवं यूआरसी नेम सिंह साहू के नेतृत्व में धमधा एवं दुर्ग विकासखंड के दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए लगाई गई। इसमें अस्थि बाधित, श्रवण बाधित, बौद्धिक निशक्तता, अल्प दृष्टि आदि बच्चों का आकलन किया गया। जिला अस्पताल से आए हुए विशेषज्ञ टीम में नाक, कान एवं गला विशेषज्ञ रेणु तिवारी, शिशु रोग विशेषज्ञ मोहित कुमार सोनी, अस्थि रोग विशेषज्ञ अनुरंजन टोप्पो, नेत्र सहायक अधिकारी मोहित राम पटेल तथा एलिमको कृत्रिम अंग निर्माण की टीम ने बच्चों की जांच की।

  • गोरखपुर में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में शिक्षक सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

    गोरखपुर में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में शिक्षक सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

    परिवार और धनकुबेरों तक सिमटी सपा की राजनीति : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    गोरखपुर में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में शिक्षक सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित
     
    राज्यसभा चुनाव में एक प्रत्याशी परिवार से, दूसरा मुंबई का धनाढ्य व्यक्ति, पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी
     
    सपाई गिरगिट की तरह बदलते हैं रंग, सत्ता में वापसी की उम्मीद खत्म इसलिए कर रहे मनमाने वादे : मुख्यमंत्री योगी
     
    शांति और सुरक्षा का सपा का भरोसा मगरमच्छ के नदी पार कराने के वादे जैसा, ये नाव पार नहीं लगाते, डुबाते हैं
     
    रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले अब कालनेमि की तरह जप रहे राम नाम, अयोध्या में फैला रहे दुष्प्रचार
     
    शिक्षकों को पांच लाख की कैशलेस चिकित्सा सुविधा, बिना वेतन कटौती 1.20 करोड़ तक दुर्घटना बीमा कवर
     
    सपा राज में सैफई सिंडिकेट तय करता था नियुक्तियां, भाजपा सरकार ने सभी 75 जिलों के युवाओं को दिया अवसर

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पीडीए पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा की राजनीति में परिवार और धनकुबेरों के अलावा किसी और के लिए जगह नहीं है। राज्यसभा चुनाव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सपा ने एक प्रत्याशी अपने परिवार से और दूसरा मुंबई के धनाढ्य व्यक्ति को बनाया। पीडीए को उन्होंने परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी और भाजपा कार्यकर्ताओं ने पराया धन अपना बताया था। मुख्यमंत्री योगी ने तंज कसा कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले सपाई सत्ता में वापसी की उम्मीद खो चुके हैं, इसलिए अब मनमाने वादे कर रहे हैं।
     
    सोमवार को गोरखपुर में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में आयोजित शिक्षक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षकों की आवाज उठाने के कारण पिछली बार भाजपा ने उनके लिए सीट खाली छोड़ी थी। इस बार माध्यमिक शिक्षक संघ की सहमति से उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। उन्होंने 23 अक्टूबर को मतदान के लिए शिक्षक मतदाताओं को अवकाश देने की बात कही और जनप्रतिनिधियों से प्रत्येक शिक्षक मतदाता तक पहुंचने का आह्वान किया।
     
    सपा का भरोसा मगरमच्छ के वादे जैसा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा का शांति और सुरक्षा का भरोसा देना वैसा ही है, जैसे मगरमच्छ नदी किनारे आकर शिकार छोड़ने और लोगों को नदी पार कराने का वादा करे। ये नाव पार लगाने वाले नहीं, डुबाने वाले लोग हैं। उन्होंने अखिलेश यादव की अयोध्या यात्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले अब कालनेमि की तरह राम नाम जप रहे हैं। राम मंदिर का विरोध करने वाले अयोध्या में दुष्प्रचार कर रहे हैं।
     
    सपा और शिक्षा नदी के दो किनारे
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी और शिक्षा नदी के दो किनारे हैं, जो कभी मिल नहीं सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में नकल और अराजकता को संरक्षण मिला। दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास बुलाकर सम्मानित किया जाता था। शिक्षकों और बेटियों की सुरक्षा संकट में थी। अब किसी शिक्षक को परेशान करने वाले को जेल या जहन्नुम में से एक रास्ता चुनना पड़ेगा।
     
    नई पेंशन योजना लागू की, खाते तक नहीं खोले
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2005 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने नई पेंशन योजना लागू की, लेकिन कर्मचारियों के खाते खोलकर अंशदान जमा नहीं कराया। वर्ष 2018 में कमेटी गठित कराई गई और 2019 की शुरुआत में 10 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराकर 14 लाख कर्मचारियों के खाते खुलवाए गए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और शिक्षकों के हित में बेहतर कदम उठाने से सरकार पीछे नहीं हटेगी।
     
    कैशलेस इलाज और दुर्घटना बीमा का लाभ
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के शिक्षकों और उनके परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी गई है। राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित संस्थानों के साथ रसोइयों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी जोड़ा गया है। बिना वेतन कटौती विभिन्न श्रेणियों में 40 लाख से 1.20 करोड़ रुपये तक दुर्घटना बीमा कवर की व्यवस्था की गई है।
     
    सभी 75 जिलों से शिक्षकों का निष्पक्ष चयन
    मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में आयोगों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा था। नियुक्तियों में रिश्तेदारों को प्राथमिकता और पैसे लेकर चयन किया जाता था। वर्ष 2017 में डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली थे। भाजपा सरकार ने सभी 75 जिलों से निष्पक्ष चयन किया। शिक्षामित्रों का मानदेय तीन हजार से बढ़ाकर 18 हजार और अनुदेशकों का नौ हजार से 17 हजार रुपये किया गया। ऑपरेशन कायाकल्प और प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2300 माध्यमिक विद्यालयों को धनराशि दी गई। स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और डिजिटल लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं।
     
    दंगों से पहचान का संकट, अब विकास से सम्मान
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले दंगों, उपद्रव और अराजकता के कारण उत्तर प्रदेश के लोगों के सामने पहचान का संकट था। निवेश और रोजगार के अवसर भी प्रभावित थे। अब प्रदेश बीमारू नहीं, राजस्व अधिशेष वाला राज्य है। विकास, विरासत, निवेश और रोजगार से उत्तर प्रदेश की नई पहचान बनी है।
     
    गुरु परंपरा को नमन, पूर्व शिक्षक नेताओं को किया याद
    मुख्यमंत्री योगी ने महर्षि वशिष्ठ, संदीपनी और चाणक्य का उदाहरण देकर शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने दिवंगत शिक्षक नेताओं ओम प्रकाश शर्मा, पंचानन राय और डॉ. वाईडी सिंह को श्रद्धांजलि दी। कहा कि ध्रुव त्रिपाठी उनकी परंपरा आगे बढ़ा रहे हैं।
     
    ध्रुव त्रिपाठी बोले- वर्षों पुरानी मांगें पूरी हुईं
    भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की कैशलेस चिकित्सा की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। एक अप्रैल 2005 से पहले विज्ञापित पदों से संबंधित शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ मिला। पदोन्नति जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर पर सुगम हुई है। ग्रेच्युटी सीमा 20 से 25 लाख रुपये हुई। वित्तविहीन शिक्षकों की सेवा नियमावली अंतिम चरण में है।
     
    सूर्य प्रताप शाही बोले- शिक्षा का कायाकल्प हुआ
    कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि ध्रुव त्रिपाठी विधान परिषद में शिक्षकों के कठिन सवाल उठाते हैं। योगी सरकार ने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का कायाकल्प किया है। प्रोजेक्ट अलंकार से भवन, शौचालय और पुस्तकालय की सुविधाएं बढ़ीं। शिक्षकों को बिना आंदोलन सातवां वेतनमान मिला। कैशलेस चिकित्सा सुविधा से शिक्षकों को राहत मिली है।
     
    रवि किशन बोले- सपा का शिक्षा से सरोकार नहीं
    सांसद रवि किशन शुक्ला ने कहा कि ध्रुव त्रिपाठी निस्वार्थ भाव से शिक्षकों की आवाज उठाते हैं। शिक्षक उनके समर्थन में एकजुट हैं। सपा का शिक्षा और ज्ञान से कोई सरोकार नहीं है। पिछली सरकारों में शिक्षण संस्थानों पर कब्जे और अराजकता का माहौल था। आज गोरखपुर में स्वास्थ्य विश्वविद्यालय और सैनिक विद्यालय जैसी सुविधाएं विकसित हुई हैं।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
    सम्मेलन में मंत्री दारा सिंह चौहान, दयाशंकर सिंह, विजय लक्ष्मी गौतम, दानिश आजाद अंसारी, सांसद जगदंबिका पाल, विजय दुबे, भाजपा प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, कामेश्वर सिंह, रमेश सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, अजय शाही, अवधेश सिंह, बृजेश राय, जयनारायण दुबे, शैलेंद्र शुक्ला, संजीव राय और ज्ञानेश कुमार राय समेत शिक्षक व पदाधिकारी मौजूद रहे।

  • कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत, जनता और युवाओं को गुमराह करने के बजाय अपनी विफलताओं पर करे आत्ममंथन-मुख्यमंत्री योगी

    कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत, जनता और युवाओं को गुमराह करने के बजाय अपनी विफलताओं पर करे आत्ममंथन-मुख्यमंत्री योगी

    अराजकता से बाज आए कांग्रेस, वरना जो बचा है वह भी गंवा देगी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के राजनीतिक आचरण पर उठाए सवाल, बोले- देश में अराजकता का पर्याय बन चुकी है सबसे पुरानी पार्टी
     
    अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर रही कांग्रेस
     
    मुख्यमंत्री योगी बोले- 41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा, दूसरे राज्यों में भी जनता का हो चुका मोहभंग
     
    चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम व चुनाव आयोग को दोषी ठहराना कांग्रेस की आदत
     
    कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत, जनता और युवाओं को गुमराह करने के बजाय अपनी विफलताओं पर करे आत्ममंथन
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी।
     
    सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए।
     
    41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा

    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है।
     
    दिल्ली में अराजकता फैलाकर आम लोगों को परेशान कर रही कांग्रेस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है। कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
     
    जीत गए तो पुरुषार्थ, हार गए तो ईवीएम और चुनाव आयोग दोषी

    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है। अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है।
     
    कांग्रेस को बदलना चाहिए अपना नेतृत्व
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है। अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी।
     
    अराजकता जारी रही तो बचा-खुचा भी गंवाना पड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।

  • सितंबर में महंगाई ने बढ़ाई चिंता, अनुमान से ज्यादा 5.54% पर पहुंची खुदरा महंगाई; त्योहारों के बजट पर असर

    सितंबर में महंगाई ने बढ़ाई चिंता, अनुमान से ज्यादा 5.54% पर पहुंची खुदरा महंगाई; त्योहारों के बजट पर असर

     नई दिल्ली

    भारत में फेस्टिव सीजन की शुरुआत से ठीक पहले महंगाई के मोर्चे पर तगड़ा झटका लगा है. सोमवार को देश में खुदरा महंगाई दर के आंकड़े आए, जो टेंशन बढ़ाने वाले हैं. दरअसल, सितंबर महीने में रिटेल महंगाई जोरदार रफ्तार से बढ़ते हुए 5.54% पर पहुंच गई, जबकि इससे पहले अगस्त महीने में ये 4.82% दर्ज की गई थी. यानी महीनेभर में महंगाई 0.72% बढ़ गई है. खासतौर पर खाने-पीने के सामानों के दाम बढ़ने का असर देखने को मिला है, जो महंगाई बढ़ाने में अहम रहे हैं।  

    खाद्य महंगाई तो 8% के करीब
    सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों को देखें, तो सितंबर महीने में भारत में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.54% हो गई, जबकि खाद्य महंगाई दर तेज रफ्तार से बढ़ते हुए 7.74% तक पहुंच गई. महंगाई के ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि खाने-पीने के सामानों की बढ़ती कीमतों ने परिवारों के बजट को बिगाड़ने में अहम रोल निभाया है। 

    खुदरा महंगाई की सालाना दर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित होती है, जबकि खाद्य महंगाई को उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) का उपयोग करके मापा जाता है. दोनों की तुलना सितंबर 2026 की तुलना पिछले वर्ष के इसी महीने से की जाती है।

    ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में क्या हाल? 
    सितंबर महीने में ग्रामीण क्षेत्रों में रिटेल महंगाई 6.08% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88% रही. यानी शहरों की तुलना में ग्रामीण भारत में कीमतों पर दबाव अधिक रहा. बात खाद्य महंगाई की करें, तो ये ग्रामीण क्षेत्रों में 8.06% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में 7.18% दर्ज की गई. इस माह के दौरान अखिल भारतीय खाद्य मुद्रास्फीति दर 7.74% रही। 

    प्याज ने निकाले आंसू, चांदी की चमक तेज
    सितंबर में लिस्टेड वस्तुओं में महंगाई की सबसे ज्यादा मार प्याज पर पड़ी. Onion Price में सालाना आधार पर 108.09% की वृद्धि दर्ज की गई. इससे पहले अगस्त में यह 48.78% थी. इसके अलावा चांदी के आभूषणों (Silver Jewelley) की महंगाई दर 87.80% रही. अदरक के दाम में 62.85% का उछाल, तो वहीं लहसुन की महंगाई दर बीते महीने के 43.60% से बढ़कर 54.62% हो गई. नींबू की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई, इसपर महंगाई दर 36.41% तक पहुंच गई। 

    हालांकि, आलू की कीमतों में साल-दर-साल 11.50% की गिरावट आई, जबकि टमाटर की कीमतों में 8.62% की कमी दर्ज की गई. सितंबर में मोटर कार और जीप, भिंडी और नारियल की कीमतों में भी मुद्रास्फीति नकारात्मक रही. MoSPI ने बताया कि ऑनलाइन बाजारों सहित 1,407 शहरी बाजारों और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 1,465 गांवों से मूल्य आंकड़े इकठ्ठा किए गए. सितंबर माह के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में प्रतिक्रिया दर 100% रही। 

  • बिहार के युवाओं ने दुनिया में बढ़ाया देश का मान, रोबोटिक्स में उत्कृष्टता सम्मान और विमानन क्षेत्र में दिखाई प्रतिभा

    बिहार के युवाओं ने दुनिया में बढ़ाया देश का मान, रोबोटिक्स में उत्कृष्टता सम्मान और विमानन क्षेत्र में दिखाई प्रतिभा

    पटना
     हुनर को सही दिशा और समय मिले, तो बिहार के युवा वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। राजधानी पटना के दो युवाओं आदित्य प्रकाश और आशीष राजवंश ने इसे साबित किया है।

    चीन के शंघाई में आयोजित वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन में आदित्य ने इंसानी इशारों को समझने और रास्ते में आने वाली बाधाओं से बचने वाला रोबोट तैयार कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

    वहीं, आशीष ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस जैसे जिम्मेदारी भरे क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया।

    उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि आज के दौर में डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल और समय प्रबंधन भी सफलता के लिए अहम हैं।
    दो घंटे में चुनौती पूरी करने का दबाव, आदित्य ने रोबोटिक्स में दिखाई प्रतिभा

    पटना के गोला रोड निवासी 22 वर्षीय आदित्य प्रकाश ने वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन की ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोटिक्स श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

    उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें 'मेडलियन फॉर एक्सीलेंस' सम्मान मिला। आदित्य ने ऐसा रोबोट तैयार करने की तकनीक पर काम किया, जो इंसानी इशारों को समझने के साथ अपने रास्ते की बाधाओं को पहचानकर आगे बढ़ सके।

    आदित्य के मुताबिक, रोबोटिक्स में उनकी रुचि बचपन से थी, लेकिन शुरुआत में उन्हें यह नहीं पता था कि इस क्षेत्र में आगे कैसे बढ़ना है।

    ओडिशा के सीवी रमन कॉलेज में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्हें प्रयोगशाला में रोबोटिक्स को करीब से समझने का अवसर मिला। यहीं से उन्होंने अपने शौक को तकनीकी कौशल में बदलने की दिशा में काम शुरू किया।

    कई बार असफल हुए, फिर तकनीक सीखकर खुद को किया बेहतर
    आदित्य ने बताया कि रोबोटिक्स की बारीकियां सीखने में उन्हें लगभग दो साल लगे। उन्होंने बुनियादी स्तर से शुरुआत की और कई बार असफलताओं का सामना किया। हालांकि, हर बार अपनी गलतियों से सीखते हुए उन्होंने तकनीक को बेहतर बनाया और लगातार अभ्यास किया।

    प्रतियोगिता के दौरान समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती थी। प्रतिभागियों को सीमित समय में प्रोजेक्ट को समझना, रणनीति तैयार करना, कोडिंग करना और तय मानकों के अनुसार काम पूरा करना होता था।

    आदित्य ने अपने प्रोजेक्ट में आरएएस-2, ऑटोनॉमस नेविगेशन और ओपनसीवी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तकनीकी ज्ञान के साथ काम करने का अनुशासन और सुरक्षा नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण होता है।

    विमान के रखरखाव में छोटी चूक भी बन सकती है बड़ा जोखिम
    आशीष राजवंश ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, यानी विमान के रखरखाव के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां तकनीकी जानकारी के साथ सावधानी, सटीकता और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। विमान को उड़ान के लिए सुरक्षित घोषित करने से पहले उसके विभिन्न हिस्सों और प्रणालियों की जांच की जाती है।

    आशीष के अनुसार, विमान के रखरखाव से जुड़ी जिम्मेदारी केवल मशीनों की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यात्रियों की सुरक्षा भी जुड़ी होती है।

    इसी कारण उन्होंने इस क्षेत्र को गंभीरता से समझने और इसमें विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रशिक्षण लिया। प्रतियोगिता में उनका अनुभव उन्हें विमानन क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों को समझने का अवसर दे गया।

    छह महीने की ट्रेनिंग के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचे आशीष
    आशीष ने एयरोस्पेस एंड एविएशन सेक्टर स्किल काउंसिल के विशेषज्ञों के निर्देशन में लगभग छह महीने तक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से पहले दिसंबर के अंत में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की थी। इसके बाद फरवरी में 10 दिन, मार्च में 14 दिन और फिर 23 अप्रैल से सितंबर तक लगातार प्रशिक्षण चला।

    आशीष का परिवार पीढ़ियों से मैकेनिकल क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके परदादा, दादा और पिता स्वर्गीय चंदन शर्मा भी इसी क्षेत्र में काम करते रहे।

    मशीनों की कार्यप्रणाली को समझने का अनुभव उनके लिए मददगार रहा, लेकिन विमानन क्षेत्र की तकनीकी बारीकियां उनके लिए नई थीं। ऐसे में उन्हें अपनी तैयारी के दौरान लगातार नई चीजें सीखनी पड़ीं।

    मैन्युअल प्रशिक्षण से वर्चुअल सिस्टम तक का सफर रहा चुनौतीपूर्ण
    आशीष ने प्रतियोगिता की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर उनका प्रशिक्षण मुख्य रूप से मैन्युअल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वर्चुअल सिस्टम पर काम करना पड़ा। इस बदलाव के कारण उन्हें अलग तरह की तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

    निर्धारित समय के भीतर काम पूरा करना भी कठिन रहा। आशीष प्रतियोगिता में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सीख और अनुभव उनके लिए महत्वपूर्ण रहे।

    विमानन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार अभ्यास, तकनीकी प्रशिक्षण और समय के अनुसार काम करने की क्षमता का विशेष महत्व है।

    हुनर के साथ समय प्रबंधन भी सफलता की अहम कुंजी
    आदित्य और आशीष की कहानियां युवाओं को यह संदेश देती हैं कि केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। अपने क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करना, लगातार सीखते रहना और समय का सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है।

    आदित्य ने रोबोटिक्स में अपनी रुचि को अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंचाया, जबकि आशीष ने विमान रखरखाव जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का अनुभव हासिल किया।

    दोनों युवाओं का सफर बताता है कि असफलता भी सीखने का अवसर बन सकती है। जरूरत है सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और अपने हुनर को निखारने के लिए पर्याप्त समय देने की।

  • ‘जीत पर पुरुषार्थ, हार पर ईवीएम दोषी’, योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेतृत्व बदलने की दी नसीहत

    ‘जीत पर पुरुषार्थ, हार पर ईवीएम दोषी’, योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेतृत्व बदलने की दी नसीहत

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी।

    सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया।

    इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए।

    41 वर्ष पहले यूपी की जनता ने कांग्रेस को कर दिया था विदा
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी।

    देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है।

    दिल्ली में अराजकता फैलाकर आम लोगों को परेशान कर रही कांग्रेस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है।

    कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    जीत गए तो पुरुषार्थ, हार गए तो ईवीएम और चुनाव आयोग दोषी
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है।

    अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है।

    कांग्रेस को बदलना चाहिए अपना नेतृत्व
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है।

    अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी।

    अराजकता जारी रही तो बचा-खुचा भी गंवाना पड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।

  • उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार, योगी सरकार महर्षि भृगु की तपोभूमि को दे रही नया स्वरूप

    उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार, योगी सरकार महर्षि भृगु की तपोभूमि को दे रही नया स्वरूप

    योगी सरकार संवार रही महर्षि भृगु की तपोभूमि, धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार

     महर्षि भृगु आश्रम को पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित कर भव्य स्वरूप देने की तैयारी, खर्च होंगे 8.74 करोड़ रुपये 

    आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत को मिल रहा सम्मान, धरातल पर शुरू हुआ पर्यटन विकास कार्य 

    …जहां रची गई भृगु संहिता, अब वहां लिखी जाएगी पर्यटन विकास की नई कहानी

    भृगु आश्रम का विकास पौराणिक विरासत को सम्मान- जयवीर सिंह

    लखनऊ/बलिया
     योगी सरकार ने बलिया जनपद की आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। आस्था के प्रमुख केंद्र महर्षि भृगु आश्रम को अब पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित कर भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इस परियोजना पर 8.74 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मान्यता है कि बलिया स्थित इसी तपोस्थली पर सप्तऋषियों में प्रमुख स्थान रखने वाले महर्षि भृगु ने तपस्या की थी और यहीं भृगु संहिता की रचना की। 

    मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में भृगु आश्रम 
    उल्लेखनीय है कि महर्षि भृगु आश्रम का कायाकल्प मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। मुख्यमंत्री ने बलिया में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर महर्षि भृगु कॉरिडोर विकसित करने की बात कही है। ऐसे में पर्यटन विकास की दिशा में शुरू हुई यह पहल उस संकल्प को धरातल पर उतारने की ओर बढ़ता कदम मानी जा रही है। प्रदेश सरकार की योजना है कि आस्था और अध्यात्म केंद्रों के साथ पौराणिक एवं ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाए। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, अपितु देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी महर्षि भृगु की तपोभूमि और बलिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

    आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का किया जा रहा विकास 
    आश्रम विकास के तहत परिसर को आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक सांस्कृतिक स्वरूप से संवारा जाएगा। यहां भव्य स्वागत द्वार, दो मंजिला मल्टीपर्पज हॉल, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्री शेड, आकर्षक वाल आर्ट और म्यूरल आर्ट, आधुनिक साइनेज तथा महर्षि भृगु की गौरवशाली पौराणिक विरासत को जीवंत करने वाला लाइट एंड साउंड शो विकसित किया जाएगा। पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। आगंतुकों को महर्षि भृगु से जुड़े इतिहास और पौराणिक महत्व से परिचित कराने के लिए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

    गौरवशाली इतिहास वाला बलिया जिला अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा 
    प्राचीन विरासत और गौरवशाली इतिहास वाला बलिया जिला अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बिहार सीमा से सटे इस जनपद का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी खास है। वाराणसी से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित बलिया पर्यटन की दृष्टि से भी खास पहचान रखता है। मान्यता है कि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि ने भी यहां प्रवास किया था। आजादी की लड़ाई में भी बलिया क्रांतिकारियों की धरती के रूप में जाना गया। प्रदेश सरकार के पर्यटन विकास के प्रयासों से जिले की पहचान तेजी से बदल रही है। वर्ष 2025 में 10.31 लाख से अधिक पर्यटकों का पहुंचना इसकी बढ़ती पर्यटन संभावनाओं का प्रमाण है।

    धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा दे रही सरकार
    पर्यटन/संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में हजारों वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे महर्षि भृगु की तपोभूमि को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। महर्षि भृगु आश्रम केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध प्राचीन सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। प्राचीन आश्रम के समग्र पर्यटन विकास की दिशा में धरातल पर कार्य शुरू हो चुका है।'

    महर्षि भृगु की विरासत से जुड़ेंगे आगंतुक- अमृत अभिजात 
    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व के स्थलों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। बलिया स्थित महर्षि भृगु आश्रम का विकास श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनेगा। प्रदेश के 12 पर्यटन सर्किट अंतर्गत स्थलों के साथ महर्षि भृगु आश्रम को विकसित करने से इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को व्यापक पहचान मिलेगी तथा क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • पुर्तगाल के कप्तान रोनाल्डो पर 6 महीने तक के बैन का खतरा, नेशनल टीम छोड़ने के मामले में जांच शुरू

    पुर्तगाल के कप्तान रोनाल्डो पर 6 महीने तक के बैन का खतरा, नेशनल टीम छोड़ने के मामले में जांच शुरू

     नई दिल्ली
     पुर्तगाली फुटबॉल फेडरेशन ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। कप्तान ने UEFA नेशंस लीग के दौरान इंटरनेशनल विंडो के बीच में ही नेशनल कैंप छोड़ दिया था। फेडरेशन ने एक बयान में कहा, "9 अक्टूबर 2026 को नॉन-प्रोफेशनल सेक्शन के फैसले के बाद क्रिस्टियानो रोनाल्डो डॉस सैंटोस एवेइरो के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। यह कार्रवाई 7 अक्टूबर 2026 को हुई घटनाओं के संभावित अनुशासनात्मक नतीजों की जांच के लिए की गई है।"

    बयान में कहा, "कार्रवाई शुरू होने की तारीख तक उन पर लागू ऑटोमैटिक प्रोविजनल सस्पेंशन (अपने-आप लागू होने वाला अस्थायी निलंबन) के अलावा अब उन पर एक नॉन-ऑटोमैटिक प्रोविजनल सस्पेंशन भी लगाया गया है। इस मामले में कार्रवाई की तात्कालिकता को ध्यान में रखा गया है।"

    खबरों के मुताबिक, पांच बार बैलन डी'ओर जीतने वाले खिलाड़ी पुर्तगाल के नेशंस लीग मैचों में वेल्स और नॉर्वे के खिलाफ टीम सिलेक्शन से खुश नहीं थे। हालांकि, रोनाल्डो ने वेल्स के खिलाफ मैच शुरू किया था, लेकिन नॉर्वे के खिलाफ मैच में उन्हें नहीं बुलाया गया। पुर्तगाल ने ये दोनों मैच जोआओ फेलिक्स के गोल की बदौलत जीते।

    नेशनल टीम के कोच जॉर्ज जीसस के साथ अनबन के बाद रोनाल्डो नेशनल कैंप छोड़कर अपने क्लब अल-नसर से जुड़ गए। फेडरेशन ने कहा, "यह मामला 10 अक्टूबर 2026 को FPF की अनुशासनात्मक जांच समिति को सौंपा गया था। जांच पूरी होने तक इस बारे में कोई भी जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक है।"

    पुर्तगाली फुटबॉल फेडरेशन के अनुशासनात्मक नियमों के आर्टिकल 160 के तहत, बिना किसी वाजिब वजह के नेशनल टीम की ड्यूटी छोड़ने पर एक से छह महीने तक का सस्पेंशन हो सकता है। हालांकि, रोनाल्डो के मामले में अभी तक कोई अंतिम सजा घोषित नहीं की गई है। रोनाल्डो के नाम अपने देश के लिए 234 इंटरनेशनल मैचों में 146 गोल करने का रिकॉर्ड दर्ज है।

  • राजस्थान में नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का बाजार चमका, महिलाओं और युवाओं के लिए खुले रोजगार के नए अवसर

    राजस्थान में नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का बाजार चमका, महिलाओं और युवाओं के लिए खुले रोजगार के नए अवसर

    जयपुर
     चेहरे पर क्या लगाया जाए, अब यह सवाल सिर्फ रंगत और चमक तक सीमित नहीं रहा। जयपुर में ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदते समय ग्राहक उनकी सामग्री, प्राकृतिक आधार और त्वचा पर असर को भी तवज्जो देने लगे हैं। नीम, हल्दी, गुलाब, चंदन और एलोवेरा जैसे घटकों वाले उत्पादों की ओर बढ़ते रुझान ने बाजार की पसंद बदल दी है।

    आइएमएआरसी की 2025 रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में हर्बल स्किनकेयर उत्पादों की बिक्री में 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस बढ़ते बाजार का सबसे बड़ा फायदा जयपुर को मिला है। आंकड़ों के अनुसार हर्बल कॉस्मेटिक्स से जुड़े कारोबार में जयपुर में करीब 20 हजार रोजगार सृजित हुए हैं। पूरे राजस्थान के 50 हजार रोजगार में 60 फीसदी महिलाएं और 40 फीसदी पुरुष हैं। खास बात यह है कि 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवा इस कार्यबल का करीब 70 फीसदी हिस्सा है। यानी हर्बल कॉस्मेटिक्स अब सिर्फ सौदर्य उत्पादों का बाजार ही नहीं, बल्कि युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया क्षेत्र भी बन रहा है।

    छोटे उत्पाद निर्माताओं के लिए नया बाजार
    बदलाव सिर्फ खुदरा खरीदारी में नहीं है। सैलूनों में ऑर्गेनिक ट्रीटमेंट्स की मांग भी बढ़ी है। नीम, हल्दी, चंदन और गुलाब आधारित उत्पादों की मांग इस बदलाव का हिस्सा है। ग्राहक अब केवल तत्काल असर वाले उपचार के बजाय त्वचा और बालों की जरूरत के हिसाब से उत्पाद चुनने लगे हैं। इससे सैलून, ब्यूटी प्रोफेशनल्स और छोटे उत्पाद निर्माताओं के लिए भी नया बाजार तैयार हुआ है।

    गुलाबी नगर सबसे आगे
    शहरवार बाजार में भी जयपुर सबसे आगे दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में हर्बल स्किनकेयर उत्पादों की बिक्री में 40 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई, जबकि उदयपुर में 35, जोधपुर में 30, कोटा में 25 और अजमेर में 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई। जयपुर में हल्दी-गुलाब फेस पैक जैसे त्वचा देखभाल उत्पादों की मांग के साथ हर्बल फेसवॉश, क्रीम और अन्य त्वचा उत्पादों का बाजार भी फैल रहा है।

    नेचुरल प्रोडक्ट्स को लेकर जागरूकता बढ़ी
    लोगों में नेचुरल प्रोडक्ट्स को लेकर जागरूकता पहले की तुलना में बढ़ी है। महिलाओं के साथ टीनएजर्स और युवाओं की रुचि भी हर्बल प्रोडक्ट्स में बढ़ रही है। हालांकि, नेचुरल होने का मतलब यह नहीं कि कोई प्रोडक्ट हर स्किन और हेयर टाइप के लिए सही हो। इसलिए जरूरत के अनुसार सही प्रोडक्ट चुनना और इंग्रेडिएंट्स की जानकारी रखना जरूरी है।
    मोनिका गुप्ता, शोध छात्रा हर्बल उत्पाद
    Rajasthan : स्रोत: आईएमएआरसी रिपोर्ट 2025

    पाँच साल के आंकड़े (2019-2024)
    वर्ष – कारोबार – निर्यात – रोजगार – महिला स्टार्ट-अप्स -मांग
    (करोड़)(करोड़) (फीसदी)(फीसदी)
    2020 450 180 25,000 22 25
    2021 550 220 30,000 25 30
    2022 650 260 40,000 30 35
    2023 700 280 45,000 33 38
    2024 800 320 50,000 35 40
    स्रोत: आईएमएआरसी रिपोर्ट 2025

  • हरियाणा में धान खराब होने से नाराज किसान, कृषि मंत्री के सामने उठाई आवाज़

    हरियाणा में धान खराब होने से नाराज किसान, कृषि मंत्री के सामने उठाई आवाज़

    करनाल.

    कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के गाड़ी में बैठते ही किसान नारेबाजी करने लगे। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ता और किसानों के बीच बहस हो गई। करनाल जिले की घरौंडा अनाज मंडी में धान की खरीद और नमी के नाम पर कटौती से नाराज किसानों ने रविवार को कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के सामने विरोध जताया।

    मंत्री के मार्केट कमेटी ऑफिस से गाड़ी में बैठते ही किसानों ने भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए। किसानों का आरोप था कि वे तीन दिन से मंडी में धान बेचने के लिए बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही। नमी के नाम पर प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक काटे जा रहे हैं। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार का बचाव किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    तीन दिन से मंडी में बैठे, फिर भी नहीं बिक रही धान
    किसान गगनदीप, सोनू और अन्य किसानों ने कहा कि वे तीन दिन से धान बेचने के लिए मंडी में इंतजार कर रहे हैं। खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है। यदि धान खरीदी भी जाती है तो नमी का हवाला देकर प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक काट लिए जाते हैं। भाजपा नेता और कार्यकर्ता मंडी में आकर फोटो खिंचवाते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। उनके मुताबिक, मंडी में राइस मिलर्स की संख्या कम है और खरीद एजेंसियां भी धान की ढेरियों तक समय पर नहीं पहुंच रही हैं। किसानों का दावा है कि 17 प्रतिशत नमी होने के बावजूद धान खरीद नहीं की जा रही।

    बारिश से बढ़ी चिंता, कम भाव मिलने का आरोप
    किसानों ने कहा कि पहले ही खरीद में देरी हो रही है और अब बारिश के कारण धान में नमी बढ़ने की आशंका है। इससे फसल बेचने में और परेशानी हो सकती है। करीब 2,000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर धान खरीदी जा रही है और नमी के नाम पर बड़ी कटौती की जा रही है। गगसीना के एक किसान ने भी आरोप लगाया कि उसकी धान 2,200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई, जिससे उसे नुकसान हुआ। किसानों ने कहा कि अधिकारियों और नेताओं को कार्यालयों में बैठकर स्थिति का आकलन करने के बजाय मंडियों में पहुंचकर खरीद व्यवस्था की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।

    नमी के नाम पर कटौती का तय फार्मूला बनाने की मांग
    किसान नेता जगदीप औलख ने कहा कि धान की खरीद में आ रही दिक्कतों और नमी के नाम पर की जा रही कटौती की जानकारी मंत्रियों और अधिकारियों को है। घरौंडा मंडी में राइस मिलर्स की कमी के कारण भी खरीद प्रभावित हो रही है। 20 प्रतिशत तक नमी वाली धान में नियमानुसार कटौती करीब 75 रुपए प्रति क्विंटल बनती है, जबकि आरोप है कि किसानों से 250 से 300 रुपए तक काटे जा रहे हैं। जब नमी निर्धारित सीमा से दो प्रतिशत अधिक हो तो कटौती के लिए स्पष्ट फार्मूला क्यों नहीं बनाया जाता।

    भाजपा कार्यकर्ता बोले- किसानों की धान खरीदी जा रही
    किसानों की नारेबाजी के बीच भाजपा कार्यकर्ता निशांत राणा, पवन ढाकला और संजय खैंची ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों की धान खरीद रही है। यदि कोई कम भाव पर फसल खरीद रहा है तो किसान लिखित शिकायत दें, ताकि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। कार्यकर्ताओं ने किसानों से खरीद प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतें सामने रखने को कहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस होती रही।

    कृषि मंत्री बोले- बारिश और हड़ताल से प्रभावित हुई लिफ्टिंग
    कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कुछ मंडियों में लिफ्टिंग धीमी हुई है। इसके पीछे बारिश और राइस मिलरों की हड़ताल भी वजह है। अधिकारियों से बातचीत कर धान के उठान में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी फसल का पूरा भुगतान मिले और किसी किसान का एक दाना भी खरीद से वंचित न रहे। धान की खरीद के बाद चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को दिया जाता है। ऐसे में खरीद, मिलिंग और उठान की प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था के तहत होती है। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।