Author: NewseDay

  • RPF के 42वें स्थापना दिवस पर दिखा अनुशासन और शौर्य, सेगवे दस्ते की परेड बनी आकर्षण का केंद्र

    RPF के 42वें स्थापना दिवस पर दिखा अनुशासन और शौर्य, सेगवे दस्ते की परेड बनी आकर्षण का केंद्र

    रायपुर.

    रेलवे सुरक्षा बल ने उत्साह और उल्लास के साथ 42वां स्थापना दिवस मनाया. रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा के लिए अधिकारियों और जवानों को 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक, 30 पुलिस पदक और एक जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया गया.

    इस अवसर पर महिला दस्ता, कोरास कमांडो, डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ते ने प्रदर्शन किया. इसके साथ तकनीकी प्रदर्शनी में ड्रोन निगरानी, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और आधुनिक डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की झलक नजर आई. कार्यक्रम में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मिनल चौबे, RPF की महानिदेशक सोनाली मिश्रा, डीजीपी अरुण देव गौतम, रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला के अलावा रेलवे और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.

    कार्यक्रम के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे सुरक्षा बल के स्थापना दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं. रेलवे संपत्ति की रक्षा करें. विश्वास बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारतीय रेल जीवन की अभुक्त शक्ति है. रेलवे को सुरक्षित करने में रेलवे सुरक्षा बल की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है. महिलाओं बच्चों के अत्यंत प्रति निष्ठा से अपने दायित्व का निर्वहन करते रहेंगे. हम इसी सेवा भाव की कर्तव्य मान कर चलेंगे. इसमें आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है. रेलवे का अनुशासन ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को मै नमन करता हूं. पदक विजेताओं को बधाई देता हूं.

    इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में RPF को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा है. यहां बम ब्लास्ट होता था, पटरिया उखाड़ ली जाती थी. ऐसे समय में यहां कार्यक्रम हुआ है. जब यहां से नक्सल समाप्त हो चुका है. आज हमने यहां बल का प्रदर्शन देखा है. जोन और आईटी का उपयोग करके यहां पर यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराने काम कर रहा है. रेल मंत्री ने पूरी फोर्स को पूरा सपोर्ट किया है. हमारे देश में सबसे ज्यादा ट्रैवल करते हैं. महिलाएं लोकल ट्रेन में यात्रा ज्यादा से ज्यादा करें. उसके लिए RPF काम कर रहा है.

    रेलवे महानिदेशक RPF सोनाली मिश्रा ने कहा कि जहां भी हमारी आश्यकता है, वहां विशेष रूप से काम करेंगे. अभी नए अभियान नशे को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने शुरू किया है. टारगेट रखा है, उसमें हम हर प्रकार से सहयोग कर रहे हैं. रेल मंत्री ने मेसेज में बताया है. कमजोर वर्ग, महिलाएं-बच्चे की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. मेरा कैडर एमपी हैं, लेकिन मैने शुरुवात बिलासपुर से की है. आज बहुत खुशी हुई है.

    ट्रेनों में गांजा सप्लाई पर कहा सोनाली मिश्रा ने कहा कि ज्वाइंट ऑपरेशन चल रहा है. हम लोग गारमेंट के सहयोग से काम कर रहे हैं. RPF और GRPF के साथ स्टेट पुलिस भी काम कर रही है. हमारा इसमें अरेस्ट भी बड़ी संख्या में बढ़ा है. हमारा जो टारगेट रखा गया है, उसमें भी हम काम करेंगे. हमने SOP नए बनाए हैं. ट्रैफिकर्स भी अपना मॉडल बदल रहे हैं. आने वाले समय में बेहतर कार्रवाई होगी.

  • डिजिटल क्रॉप सर्वे के बाद डीबीटी से सीधे किसान के खाते में पहुंच रही मुआवजा राशि: सीएम योगी

    डिजिटल क्रॉप सर्वे के बाद डीबीटी से सीधे किसान के खाते में पहुंच रही मुआवजा राशि: सीएम योगी

    सपा सरकार में बिजली नहीं, बिल आता था, अब अन्नदाता किसान का बिल नहीं आता, बिजली आती है: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात प्रभावित 9.18 लाख किसानों के खातों में अंतरित की 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि

    सीएम बोले- किसानों का श्राप ले डूबा सपा को, ये जाति के नाम पर समाज को बांटेंगे, लेकिन जनता का पैसा नहीं बांटेंगे

    15 अक्टूबर से अतिवृष्टि प्रभावित जिलों में धान और मोटे अनाज के क्रय केंद्र खोले जाएंगे: मुख्यमंत्री

    पहले किसान का पैसा बीच में डकार जाते थे सपाई, अब सीधे खाते में पहुंच रही सहायता राशि: सीएम योगी

    पहले दो, चार और 15 रुपये मुआवजा मिलता था, अब सीधे खातों में पहुंच रहे हजारों रुपये: मुख्यमंत्री

    आपदा प्रभावित किसानों को 8 से 10 दिन में राहत, जनहानि पर 24 घंटे में 4 लाख रुपये की सहायता: मुख्यमंत्री

    डिजिटल क्रॉप सर्वे के बाद डीबीटी से सीधे किसान के खाते में पहुंच रही मुआवजा राशि: सीएम योगी

    गोरखपुर, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर में बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि एवं चक्रवात से प्रभावित कृषकों को कृषि निवेश अनुदान राशि के रूप में डीबीटी के माध्यम से 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में प्रदेश में बड़े पैमाने पर फसल को नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर जनहानि और पशुहानि भी हुई है। डबल इंजन की सरकार ने मात्र 8 से 10 दिन के अंदर अपने अन्नदाता किसानों को फसल, मकान और पशुधन की क्षति का मुआवजा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने 2017 के पहले की सपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि तब बिजली नहीं आती थी, लेकिन बिल आता था। अब स्थिति बदल गई है। अब अन्नदाता किसान का बिल नहीं आता, बल्कि बिजली आती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश के 9,18,091 कृषकों के खातों में 493 करोड़ रुपये सीधे भेजे जा रहे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अन्नदाता किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। इस वर्ष केवल बरसात के दौरान ही अब तक प्रदेश के आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग 1,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

    मुख्यमंत्री आवास योजना से तत्काल आवास
    सीएम ने कहा कि अतिवृष्टि, चक्रवात और बाढ़ से जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1.20 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई गई है। यह राशि 493 करोड़ रुपये की फसल क्षति सहायता में शामिल नहीं है, बल्कि अलग से दी जा रही है। जिन लोगों के मकान पूरी तरह बह गए या नष्ट हो गए, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत तत्काल आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए भी नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। पशुहानि के मामलों में भी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। कोई जनहानि होती है तो संबंधित परिवार को 24 घंटे के अंदर चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर सीधे खाते में पहुंचा पैसा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर जिन जनपदों की सर्वे रिपोर्ट सरकार को मिली, वहां किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई गई है। यह राशि सीधे अन्नदाता किसान के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुंच रही है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सहायता राशि में कोई बिचौलिया न हो और पैसा सीधे किसान तक पहुंचे। अगर किसान को 25 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत हुई, तो सीधे उसके खाते में पूरे 25 हजार रुपये ही जाएंगे।

    कभी 100 में से 15 रुपये ही पहुंचते थे जरूरतमंद तक
    सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय राजीव गांधी ने स्वयं कहा था कि सरकार 100 रुपये भेजती है, लेकिन जमीन पर पहुंचते-पहुंचते केवल 15 रुपये बचते हैं। कांग्रेस व सपा के लोग बीच में ही पैसा खा जाते थे। अब प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा दी जाने वाली सहायता सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचती है। बीच में कोई बिचौलिया सेंधमारी नहीं कर सकता। आज 493 करोड़ रुपये अन्नदाता किसानों को मुआवजे के रूप में दिए जा रहे हैं, ताकि उन्हें संकट की घड़ी में राहत मिल सके। सरकार किसानों के साथ हमेशा खड़ी है और हर प्रकार का सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    हुदहुद चक्रवात पर केंद्रीय सहायता के 3200 करोड़ में सिर्फ 800 करोड़ मिले थे किसानों को
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में हुदहुद चक्रवात के दौरान फसल को भारी नुकसान हुआ था। भारत सरकार ने उस समय 3,200 करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन किसानों तक केवल 800 करोड़ रुपये ही पहुंच पाए। शेष राशि किसानों तक नहीं पहुंची। 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने हुदहुद चक्रवात में किसानों को मिली सहायता की स्थिति की जांच कराई तो पता चला कि पूरा पैसा किसानों तक पहुंचा ही नहीं था। इसके बाद अलग से धनराशि की व्यवस्था कर प्रभावित किसानों को सहायता उपलब्ध कराई गई। सपा ने किसानों का पैसा खाया, किसानों का श्राप उसको ले डूबा। विपक्ष समाज को जाति के नाम पर बांटने का प्रयास करता है, लेकिन जनता का पैसा नहीं बांटता।

    बाढ़ से कटान रोकने और सड़कों की मरम्मत के लिए पर्याप्त धन
    सीएम ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जहां बाढ़ के कारण कटान हुई है और जहां अब भी अतिवृष्टि की शिकायतें आ रही हैं, वहां तत्काल राहत और बचाव कार्य किए जाएं। बाढ़ से बचाव के लिए तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि के कारण क्षतिग्रस्त मार्गों और बाधित आवागमन को तत्काल चालू किया जाए। इसके लिए धनराशि जारी की जा चुकी है। आपदा, अतिवृष्टि या चक्रवात के कारण सड़क अथवा अन्य किसी प्रकार की क्षति होने पर धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। सिंचाई विभाग को कटान रोकने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया गया है। पीडब्ल्यूडी, नगर विकास, आवास और विकास प्राधिकरणों को भी क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य मरम्मत के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। जैसे ही मौसम साफ हो, तत्काल काम शुरू कराया जाए और आवागमन में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।

    आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपदा से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग वेदर सिस्टम विकसित करने पर भी काम किया है। पहले आकाशीय बिजली गिरने से बड़ी संख्या में जनहानि होती थी। अब कई जनपदों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए गए हैं, जो संभावित आकाशीय बिजली की जानकारी पहले ही उपलब्ध कराते हैं। एसएमएस और मोबाइल फोन के माध्यम से लोगों को अलर्ट भेजा जाता है। लोगों को खुले आसमान या पेड़ के नीचे नहीं रहने और पक्के भवन में जाने की सलाह दी जाती है। इससे बड़े पैमाने पर जनहानि रोकने में मदद मिली है। इसके साथ ही रेन गेज लगाए जा रहे हैं, ताकि वर्षा की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके और उसके आधार पर तत्काल राहत पहुंचाई जा सके। दुर्भाग्य से कोई किसान, बटाईदार अथवा किसान या बटाईदार के परिवार का सदस्य आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदा की चपेट में आता है, तो मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत संबंधित परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। अधिकारियों को इसे तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    पहले भी 1.29 लाख किसानों को मिली सहायता
    सीएम योगी ने बताया कि वर्तमान सहायता राशि से पहले भी बाढ़, चक्रवात और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए 169 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। 1,29,326 किसानों को फसल क्षति के लिए 78 करोड़ 75 हजार रुपये पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में भी 225 करोड़ 93 लाख रुपये की सहायता पहले वितरित की जा चुकी है। आज कई किसानों को सहायता राशि के डमी चेक प्रदान किए गए हैं, जबकि वास्तविक धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। 2017 से पहले सपा सरकार के समय किसानों को मुआवजा मिलना ही मुश्किल था और यदि मिलता भी था तो दो रुपये, चार रुपये या 15 रुपये जैसी राशि मिलती थी। अब किसानों के हित में काम करने वाली सरकार है, जिसके एजेंडे में अन्नदाता किसान, युवा, महिलाएं और गरीब हैं। संकट की हर घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है।

    86 लाख किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी से शुरू हुई यात्रा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद अन्नदाता किसानों के हित में बड़े फैसले लिए गए। सरकार ने आते ही लघु और सीमांत किसानों की कर्जमाफी के तहत 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया। प्रदेश में 16 लाख निजी ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त की गई है। सरकारी ट्यूबवेल से पहले से ही मुफ्त सिंचाई उपलब्ध थी। इसके अलावा नहरों का जाल बिछाया गया है और प्रदेश में 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। नए ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं और सिंचाई की अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

    15 अक्टूबर से अतिवृष्टि प्रभावित जिलों में धान और मोटे अनाज के क्रय केंद्र
    सीएम ने कहा कि जहां बारिश नहीं हुई है, वहां धान खरीद के क्रय केंद्र शुरू हो रहे हैं। जिन जनपदों में अतिवृष्टि के कारण बड़े पैमाने पर जलभराव हुआ है, वहां 15 अक्टूबर से धान के साथ ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मोटे अनाज के क्रय केंद्र शुरू किए जाएंगे। किसानों को अच्छा दाम दिया जाएगा और मंडी तथा क्रय केंद्रों पर किसान अपनी उपज उपलब्ध करा सकते हैं। सरकार ने खरीद के लिए कोई सीमा तय नहीं की है। किसान जितना धान लेकर आएगा, क्रय केंद्र उसकी खरीद करेंगे। किसानों के लिए कोई टारगेट या रोक-टोक नहीं होगी। जहां अच्छा दाम मिलेगा, किसान वहां अपनी उपज बेच सकता है। यदि कोई नहीं खरीदेगा तो सरकार खरीदेगी और भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के खाते में भेजा जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि अन्नदाता किसान खुशहाल होगा तो देश खुशहाल होगा। अन्नदाता किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा। इसी भावना के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर अन्नदाता किसानों का सम्मान किया है।

    इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, प्रदीप शुक्ला, डॉ विमलेश पासवान, महेंद्र पाल सिंह, श्रवण कुमार निषाद और राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष चारु चौधरी समेत गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। 

    इनसेट-

    मंच पर इन्हें मिला सहायता धनराशि का चेक

    रेशमा देवी – 1,20,000 रुपये
    चंदन कुमार पासवान – 1,20,000 रुपये
    इंद्रावती देवी – 1,20,000 रुपये
    सविता देवी – 1,20,000 रुपये
    छुन्नी देवी – 1,20,000 रुपये
    सीमा देवी – 1,20,000 रुपये
    बिरैची – 25,670 रुपये
    बेचन प्रसाद – 22,951 रुपये
    जोखन – 22,841 रुपये
    संपत – 22,372 रुपये
    परमहंस-— 22,219 रुपये
    चंद्रप्रकाश द्विवेदी – 11,811 रुपये
    धरणीधर – 11,808 रुपये
    गिरजापति त्रिपाठी – 34,000 रुपये
    कमलेश – 26,520 रुपये
    राम दरश – 27,914 रुपये
    जनार्दन प्रसाद – 24,000+ रुपये
    राणा प्रताप सिंह – 22,355 रुपये

  • सपा सरकार में बिजली नहीं आती थी, केवल बिल आता था, अब किसानों को मुफ्त बिजली दे रही योगी सरकार

    सपा सरकार में बिजली नहीं आती थी, केवल बिल आता था, अब किसानों को मुफ्त बिजली दे रही योगी सरकार

    किसानों का पैसा हजम कर गए सपाई, उसी का श्राप ले डूबा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर से 9,18,091 किसानों के खातों में भेजे 493 करोड़ रुपये, आपदा प्रभावितों को सौंपे सहायता राशि के चेक
     
    अतिवृष्टि, बाढ़ और चक्रवात से फसल क्षति पर महज 10 दिन में मुआवजा, इस वर्ष अब तक आपदा प्रभावितों को करीब एक हजार करोड़ की सहायता
     
    जाति के नाम पर समाज को बांटते रहे सपाई, किसानों के खून-पसीने की कमाई पर डालते थे डकैती : मुख्यमंत्री योगी
     
    हुदहुद चक्रवात में केंद्र ने भेजे 3200 करोड़, किसानों को सिर्फ 800 करोड़ बांट सकी थी सपा सरकार
     
    कांग्रेस राज में 100 रुपये में सिर्फ 15 पहुंचते थे, अब बिना बिचौलियों के किसानों को मिल रही पूरी धनराशि
     
    सपा सरकार में बिजली नहीं आती थी, केवल बिल आता था, अब किसानों को मुफ्त बिजली दे रही योगी सरकार
     
    मुख्यमंत्री योगी ने मिशन शक्ति के छठे चरण की जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी, स्कूटी से निकलीं महिला पुलिसकर्मी
     
    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा राहत वितरण को लेकर पिछली सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि किसानों का पैसा हजम करने वाले सपाइयों को उन्हीं का श्राप ले डूबा। वर्ष 2014 में हुदहुद चक्रवात के दौरान केंद्र सरकार ने 3200 करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार किसानों को महज 800 करोड़ रुपये ही बांट सकी। शेष धनराशि किसानों तक नहीं पहुंची। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद इसकी पड़ताल कराई और अलग से धनराशि की व्यवस्था कर किसानों को बकाया मुआवजा दिलाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपाई जाति के नाम पर समाज को बांटते रहे, लेकिन किसानों के खून-पसीने की कमाई पर डकैती डालने से भी नहीं चूके। किसानों का पैसा हजम करने वालों को उन्हीं का श्राप ले डूबा।
     
    सोमवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में मुख्यमंत्री योगी ने बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से प्रभावित प्रदेश के 9,18,091 किसानों के खातों में रिमोट का बटन दबाकर 493 करोड़ रुपये कृषि निवेश अनुदान हस्तांतरित किए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने महज आठ से दस दिन में किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया है। इस वर्ष बरसात के दौरान आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को करीब एक हजार करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
     
    कांग्रेस राज में 100 रुपये चलते थे, किसान तक पहुंचते थे 15
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के शासन में 100 रुपये भेजे जाते थे तो लाभार्थी तक महज 15 रुपये पहुंचते थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इसे स्वीकार किया था। बाकी पैसा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लोग हजम कर जाते थे। अब जिस किसान को 25 हजार रुपये स्वीकृत होते हैं, उसके खाते में पूरे 25 हजार पहुंचते हैं। न कोई बिचौलिया सेंध लगा सकता है और न किसी प्रकार की कटौती होती है।
     
    जनहानि पर 24 घंटे में चार लाख, दुर्घटना पर पांच लाख की सहायता
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आपदा में जनहानि होने पर परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। आकाशीय बिजली समेत दुर्घटना के मामलों में पात्र किसान, बटाईदार और उनके परिवारों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त आवासों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना से 1.20 लाख रुपये अलग से दिए जा रहे हैं। आंशिक मकान क्षति और पशुहानि पर भी सहायता मिलेगी। पूर्व में 1,29,326 किसानों को फसल क्षति के लिए करीब 78 करोड़ रुपये तथा जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में 225.93 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
     
    सड़कों की मरम्मत और कटान रोकने के लिए धन की कमी नहीं
    मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से कटान रोकने के कार्य तत्काल शुरू करें। सिंचाई विभाग को पर्याप्त धनराशि दी गई है। पीडब्ल्यूडी, नगर विकास विभाग और विकास प्राधिकरण मौसम साफ होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत शुरू कराएं। आपदा राहत और आवागमन बहाल करने के लिए जितना धन चाहिए, सरकार उपलब्ध कराएगी। आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम और वर्षा मापने के लिए रेन गेज लगाए गए हैं। नागरिकों को मोबाइल पर मौसम संबंधी अलर्ट भी भेजे जा रहे हैं।
     
    15 अक्टूबर से प्रभावित जिलों में खुलेंगे धान क्रय केंद्र
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिन जिलों में अतिवृष्टि हुई है, वहां 15 अक्टूबर से धान, ज्वार, बाजरा और मक्का के क्रय केंद्र खोले जाएंगे। अन्य जिलों में सोमवार से खरीद शुरू हो रही है। किसानों की उपज खरीदने की कोई सीमा नहीं होगी। भुगतान सीधे खाते में पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि सरकार 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ कर चुकी है। 16 लाख निजी नलकूपों की बिजली निशुल्क की गई है और 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को सौंपे सहायता राशि के चेक
    मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में आपदा प्रभावित लाभार्थियों को सहायता राशि के प्रतीकात्मक चेक सौंपे। इनमें सदर क्षेत्र की रेशमा देवी, चंदन कुमार पासवान, इंद्रावती, सविता देवी, चुन्नी देवी और सीमा देवी, कैंपियरगंज के बहराइची, बेचन प्रसाद, जोकखन, संपत और परमहंस शामिल रहे। इसके अलावा सदर क्षेत्र के चंद्रप्रकाश द्विवेदी और धरणीधर तथा गोला क्षेत्र के गिरजापति त्रिपाठी, कमलेश, रामदरश, जनार्दन प्रसाद और राणा प्रताप सिंह को भी चेक प्रदान किए गए। सहायता राशि डीबीटी से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई।
     
    कृषि मंत्री बोले- किसानों के लिए खोला सरकार ने खजाना
    कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों को प्राथमिकता दी है। अब तक कृषि क्षेत्र में 69,163 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गन्ना मूल्य 280 से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से नौ वर्षों में 6,125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है।
     
    सांसद रवि किशन बोले- संकट में किसानों के साथ सरकार
    सांसद रवि किशन ने कहा कि पिछली सरकारों में किसान कर्ज और आर्थिक संकट से परेशान रहते थे। योगी सरकार ने कर्जमाफी, गन्ना भुगतान और आपदा राहत को प्राथमिकता दी। अब किसानों को सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ता। संकट आने पर सरकार उनके साथ खड़ी रहती है।
     
    मिशन शक्ति की रैली को दिखाई हरी झंडी
     मुख्यमंत्री योगी ने मिशन शक्ति के छठे चरण के अंतर्गत जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्कूटी सवार महिला पुलिसकर्मियों और महिलाओं ने रैली में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद रवि किशन, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

  • ‘राहुल गांधी भारतीय संस्कृति को नहीं समझते’, शिवजी की बारात वाले बयान पर BJP का पलटवार

    ‘राहुल गांधी भारतीय संस्कृति को नहीं समझते’, शिवजी की बारात वाले बयान पर BJP का पलटवार

    भोपाल 
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी 'शिवजी की बारात' वाले बयान पर सियासत गरमा गई है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बयान को लेकर कांग्रेस सांसद पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जो लोग हमेशा भगवान राम का विरोध करते आए हैं, उन्हें भगवान शिव का नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है। 

    शिवराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी का भगवान शिव से कोई लेना-देना नहीं है और वो भारत की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को बिल्कुल नहीं जानते हैं। 

    बीजेपी नेता ने कहा, राम का विरोध करने वाले शिवजी की बारात की बात कर रहे हैं. ये शिव जी की बारात नहीं है. अराजकता फैलाने वाले हुड़दंगियों की जमात है, जो सड़कों पर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है। 

    'चुनाव हारना कांग्रेस की नियति'
    केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि लगातार चुनाव हारना कांग्रेस की नियति बन चुकी है. उन्होंने असम, त्रिपुरा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और हालिया उपचुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ती आई है। 

    शिवराज सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि उसका खुद का 'विचार-शून्य नेतृत्व' है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में आपसी कलह मची है, पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलने पड़ रहे हैं, और कर्नाटक से लेकर तेलंगाना तक नेतृत्व को लेकर घमासान जारी है. जो देश और जनता को नहीं जानता, वो सिर्फ 'नाच न जाने आंगन टेढ़ा' वाली कहावत सच कर रहा है। 

    केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश के अहम राज्यों में कांग्रेस का सफाया बहुत पहले हो चुका है. तमिलनाडु में लगभग 59 सालों, पश्चिम बंगाल में 49 सालों, सिक्किम में 42 सालों, उत्तर प्रदेश में 37 सालों, बिहार में 36 सालों और गुजरात में 31 सालों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। 

    उन्होंने कहा कि आज की स्थिति ये है कि कुछ गिने-चुने राज्यों को छोड़ दें, तो कांग्रेस अन्य जगहों पर सिर्फ एक 'जूनियर पार्टनर' या 'परजीवी पार्टी' बनकर रह गई है, जो कभी DMK, कभी RJD, तो कभी सपा और JMM के सहारे जिंदा है। 

    'संवैधानिक संस्थाओं और सेना पर हमले कर रही है कांग्रेस'
    शिवराज ने आरोप लगाते हुए कहा, 'कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रही है, झूठ बोलकर सड़कों पर अराजकता और दंगे फैला रही है, और पिछले दरवाजे से सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है. जब कोर्ट के फैसले खिलाफ होते हैं, तो कांग्रेस ज्यूडिशियरी पर हमला करती है. जब वो चुनाव हारते हैं, तो वो इलेक्शन कमीशन पर हमला करते हैं, और जब सेना आतंकवादियों से निपटती है, तो वो सिक्योरिटी फोर्स को निशाना बनाते हैं। 

    उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस उन ताकतों से हाथ मिला रही है जो देश को तोड़ना चाहती हैं. वो विदेशी ताकतों के हाथों का खिलौना बन चुकी है, जो जॉर्ज सोरोस जैसे तत्वों और NGO का सहारा लेकर देश में अराजकता फैलाना चाहती है। 

    राहुल गांधी के बयानों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो खुद ये कहते हैं कि वो कोई प्लानिंग नहीं करते और जब मन करे तब निकल पड़ते हैं, उनसे देश क्या उम्मीद कर सकता है. कांग्रेस पार्टी जनता की नजरों और दिलों से पूरी तरह उतर चुकी है। 

    आखिर में शिवराज सिंह कहते हैं, 'जब लाखों झूठे मरे हुए मरे होंगे, तब कहीं श्रीमान राहुल गांधी जी पैदा हुए होंगे।

  • घुनघुट्टा जलाशय से 381 मछुआरों को आजीविका का सहारा, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिल रहा आर्थिक सहयोग

    घुनघुट्टा जलाशय से 381 मछुआरों को आजीविका का सहारा, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिल रहा आर्थिक सहयोग

    डबरी में मछली पालन के साथ सब्जी उत्पादन और सिंचाई से किसानों को दोहरा लाभ, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी बन रहीं आत्मनिर्भर

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में अब खेतों और तालाबों के साथ आजीविका डबरियां, जलाशय और अमृत सरोवर भी किसानों तथा ग्रामीण परिवारों की आर्थिक समृद्धि का माध्यम बन रहे हैं। खेती और पशुपालन के साथ मत्स्य पालन को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय के स्रोत बढ़ा रहे हैं। सरगुजा जिले में शासन की विभिन्न योजनाओं, मत्स्य पालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानीय जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से आजीविका के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। कहीं मछुआरा सहकारी समितियों के सैकड़ों सदस्य सामूहिक मत्स्य पालन से अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं, तो कहीं किसान डबरी में मछली पालन के साथ सब्जी उत्पादन और सिंचाई का लाभ उठा रहे हैं। वहीं स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अमृत सरोवरों में मछली पालन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने और स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मिलने वाली अनुदान सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के अवसर बढ़ रहे हैं। सरगुजा जिले में पारंपरिक जलाशयों से लेकर आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक तक मत्स्य पालन के विविध स्वरूप सामने आ रहे हैं। इन प्रयासों की विशेषता यह है कि ग्रामीण परिवार उपलब्ध भूमि और जल संसाधनों का उपयोग एक से अधिक आजीविका गतिविधियों के लिए कर रहे हैं।

    घुनघुट्टा जलाशय बना 381 मछुआरों की आजीविका का आधार
    सरगुजा जिले का घुनघुट्टा जलाशय सामूहिक मत्स्य पालन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आजीविका उपलब्ध कराने का उदाहरण है। यहां आदिवासी मछुआ सहकारी समिति, कलगसा के 381 सदस्य मत्स्य पालन से जुड़े हुए हैं। समिति को जलाशय 10 वर्ष की अवधि के लिए पट्टे पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे सदस्य संगठित रूप से मत्स्य उत्पादन की गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। जलाशय में मछली पालन से जुड़े कार्य इन परिवारों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बने हुए हैं।

    समिति के अध्यक्ष श्री राम बिलोच राम बताते हैं कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मछली बीज के लिए 7 लाख 62 हजार रुपये की अनुदान सहायता मिलती है। इस सहयोग से जलाशय में मत्स्य उत्पादन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। सहकारी समिति के माध्यम से सामूहिक प्रयासों का लाभ बड़ी संख्या में मछुआरा परिवारों तक पहुंच रहा है। घुनघुट्टा जलाशय का यह उदाहरण दर्शाता है कि उपलब्ध जल संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग और सहकारी व्यवस्था ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करने में सहायक हो सकती है।

    आजीविका डबरियों से मछली पालन और खेती को दोहरा लाभ
    ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित आजीविका डबरियां अब केवल वर्षा जल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम भी बन रही हैं। इन डबरियों में वर्षा जल का संचय कर किसान मछली पालन कर रहे हैं और आवश्यकता के अनुसार पानी का उपयोग सब्जी उत्पादन तथा फसलों की सिंचाई में भी कर रहे हैं। इससे एक ही संसाधन का उपयोग कई आर्थिक गतिविधियों के लिए संभव हो रहा है।

    लखनपुर विकासखंड के किसान श्री शिवबालक ने अपनी आजीविका डबरी में कतला, रोहू, मृगल और ग्रास कार्प प्रजाति की मछलियों का पालन किया। उन्होंने लगभग दो क्विंटल मछली की बिक्री कर 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त की। मछली पालन के साथ वे डबरी में संचित पानी का उपयोग सब्जी उत्पादन के लिए भी करते हैं। इस प्रकार डबरी उनके लिए जल संरक्षण, मत्स्य पालन और खेती को जोड़ने वाला उपयोगी संसाधन बन गई है।

    इसी तरह बतौली विकासखंड के किसान श्री लक्ष्मी प्रसाद ने डबरी में मछली पालन से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने करीब 20 क्विंटल मछली उत्पादन का आकलन किया है। डबरी में उपलब्ध पानी का उपयोग वे साग-सब्जी और गेहूं की सिंचाई के लिए भी कर रहे हैं। मत्स्य पालन से प्राप्त आय और सिंचाई की सुविधा ने उनके कृषि कार्यों को अतिरिक्त सहारा दिया है। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण के लिए विकसित संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर किसानों को अतिरिक्त आर्थिक अवसर मिल सकते हैं।

    पहाड़ी कोरवा परिवार भी अपना रहे मछली पालन, डबरी की मेड़ों पर फलदार पौधों से अतिरिक्त आय की तैयारी
    सरगुजा जिले में आजीविका डबरियों के माध्यम से मत्स्य पालन का विस्तार अन्य ग्रामीण परिवारों तक भी हो रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड की श्रीमती जोशमनि एक्का के परिवार ने 2 लाख 99 हजार रुपये की लागत से निर्मित डबरी में मछली पालन शुरू किया है। वहीं लखनपुर विकासखंड के किसान श्री कनी लाल बड़ा ने अपनी डबरी में 9 किलोग्राम मछली बीज डालकर मत्स्य पालन को सब्जी उत्पादन से जोड़ा है। इन गतिविधियों से परिवारों को खेती के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाएं मिल रही हैं।

     

  • बिहार में विकास परियोजनाओं को रफ्तार, दरभंगा एयरपोर्ट के पास बनेगा लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब

    बिहार में विकास परियोजनाओं को रफ्तार, दरभंगा एयरपोर्ट के पास बनेगा लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब

    पटना
     मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

    दरभंगा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब बनाने के लिए करीब 226 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई है।

    वहीं, पांच साल की रखरखाव अवधि पूरी कर चुकी ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और देखरेख के लिए ग्रामीण सड़क अनुरक्षण एवं प्रबंधन कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया गया। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का भी जिला और क्षेत्रीय स्तर पर विस्तार किया जाएगा।

    दरभंगा में कार्गो हब के लिए बढ़ी राशि
    दरभंगा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब बनाने के लिए 49.9973 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।

    इसके लिए 225 करोड़ 91 लाख 30 हजार 742 रुपये की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। पहले 50.0004 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए 138 करोड़ 73 लाख 77 हजार 534 रुपये मंजूर किए गए थे। जमीन के मुआवजे की गणना बढ़ने के कारण अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है।

    इस परियोजना से मिथिला और उत्तर बिहार के कृषि उत्पादों को हवाई मार्ग से दूसरे राज्यों और बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे किसानों को लाभ मिलने के साथ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।

    पुरानी ग्रामीण सड़कों की होगी मरम्मत
    ग्रामीण कार्य विभाग की सड़कों के रखरखाव के लिए ग्रामीण सड़क अनुरक्षण एवं प्रबंधन कार्यक्रम (आरआरआरएमपी) लागू किया जाएगा।

    इसके तहत उन ग्रामीण सड़कों की नियमित मरम्मत, नवीनीकरण और रखरखाव किया जाएगा, जिनकी पांच साल की अनुरक्षण अवधि पूरी हो चुकी है या भविष्य में पूरी होगी।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण सड़कों को खराब होने से बचाना, उनकी उपयोगिता बनाए रखना और सरकारी राशि का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे गांवों में सड़क संपर्क को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    जिलों तक पहुंचेगा आईटी विभाग
    सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का जिला और क्षेत्रीय स्तर पर विस्तार किया जाएगा। इसके लिए बिहार सूचना प्रौद्योगिकी अवर सेवा नियमावली के तहत व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    प्रमंडल, जिला और प्रखंड स्तर पर तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के साथ सरकारी आईटी परियोजनाओं को लागू करने, उनकी निगरानी और विभागों के बीच समन्वय का काम किया जाएगा।

    इससे सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर तकनीकी समस्याओं का समाधान आसान होगा।

     

  • महाराष्ट्र के अकोला में मां अंबिका का चमत्कारी धाम, बागातली देवी से रिजर्व माता बनने की दिलचस्प कथा

    महाराष्ट्र के अकोला में मां अंबिका का चमत्कारी धाम, बागातली देवी से रिजर्व माता बनने की दिलचस्प कथा

    Sharadiya Navratri : शारदीय नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है. देशभर में देवी मां के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. महाराष्ट्र के अकोला में स्थित अंबिका देवी के प्राचीन मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. सुबह से ही भक्त माता की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं. माता के दर्शन करने के बाद भक्त नारियल, फूल, हल्दी, धूप, दीप और चुनरी अर्पित कर रहे हैं. स्थानीय लोगों के बीच यह मंदिर रिजर्व माता के नाम से भी प्रसिद्ध है. आइए आपको इस मंदिर का इतिहास बताते हैं.

    स्थानीय मान्यता के अनुसार, 300 साल से भी अधिक पुराना यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. मां अंबिका को यहां अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है. कोई उन्हें 'बागातली देवी' कहता है, तो कोई 'रिजर्व माता' के नाम से जानता है. भक्तों का विश्वास है कि मां अपने दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के संकट दूर करती हैं और जीवन के सुख-दुख में अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखती हैं.

    श्रद्धालुओं ने बताया कि इस बार नवरात्र के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है. माता के सुंदर श्रृंगार और दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह से ही पहुंच रहे हैं. मंदिर में पूजा-पाठ और भक्ति का माहौल बना हुआ है.

    मां के दरबार में केवल स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त पहुंच रहे हैं. कुछ श्रद्धालु मुंबई से भी माता के दर्शन करने अकोला आए हैं. भक्तों का कहना है कि मां के चरणों में आकर उन्हें मानसिक शांति मिलती है और वे अपनी परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. श्रद्धालुओं ने माता की कृपा और आशीर्वाद से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए.

    मंदिर के सेवादार अनिल के अनुसार, यह मंदिर अंग्रेजों के शासनकाल से भी पहले का बताया जाता है. मान्यता है कि पहले मंदिर परिसर के आस-पास फूलों की बाग हुआ करता था और उसी क्षेत्र में माता की प्रतिमा स्थापित थी. इसी वजह से माता को 'बागातली देवी' कहा जाने लगा. समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.

    'रिजर्व माता' नाम कैसे पड़े?
    1853 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान इस जगह मंदिर को हटाकर पुलिस स्टेशन बनाने का फैसला किया गया था. उस जगह को रिजर्व करने के लिए वहां ग्रिलिंग भी की गई थी. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद वहां पुलिस स्टेशन नहीं बन पाया. ब्रिटिश सरकार ने कई बार यहां पुलिस स्टेशन बनाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार उनकी कोशिश नाकाम हो जाती. स्थानीय लोग इसे देवी का चमत्कार मानने लगे. कहते हैं कि तभी से इस मंदिर की देवी को रिजर्व माता के नाम से पुकारा जाने लगा. आज भी स्थानीय लोग देवी को इसी नाम से बुलाते हैं.

  • पात्र परिवारों को बेटी के विवाह के लिए सीधे बैंक खाते में मिल रहे 20 हजार रुपये

    पात्र परिवारों को बेटी के विवाह के लिए सीधे बैंक खाते में मिल रहे 20 हजार रुपये

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एक लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए

    210 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 107.092 करोड़ रुपये की सहायता वितरित

    लखनऊ
    आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता के लिए संचालित शादी अनुदान योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एक लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 53 हजार से अधिक पात्र लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। योगी सरकार की इस पहल से जरूरतमंद परिवारों को बेटी के विवाह के दौरान होने वाले खर्च में राहत मिल रही है। सरकार का उद्देश्य पात्र परिवारों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराकर बेटियों के सम्मानजनक विवाह में सहयोग देना है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 1 लाख 5 हजार पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 210 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। अब तक योजना के अंतर्गत 1,09,697 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 53,546 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा चुका है। इन लाभार्थियों को कुल 107.092 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है।

    पात्र परिवारों को 20 हजार रुपये की मदद
    शादी अनुदान योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी के विवाह के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रूपये तक है। विवाह के समय लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। योजना की आवेदन प्रक्रिया में दिव्यांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे योजना का लाभ उन परिवारों तक पहुंचाने पर विशेष जोर है, जिन्हें विवाह के खर्च को पूरा करने में अधिक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    प्रदेश सरकार का लक्ष्य पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध तरीके से सहायता उपलब्ध कराना है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे में शादी अनुदान योजना उनके लिए आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है। सरकार की इस पहल को जरूरतमंद परिवारों के लिए राहतकारी कदम माना जा रहा है, जिससे बेटियों के सम्मानजनक विवाह में सहयोग मिलने के साथ परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम हो रहा है।

    शादी अनुदान योजना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत
    पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक अस्मिता लाल ने बताया कि योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 53,546 पात्र लाभार्थियों को 107.092 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी के विवाह के लिए 20 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 1 लाख 5 हजार लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी परिवारों को विवाह के खर्च में राहत देना और पात्र परिवारों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराना है।

  • लोहिया जी की आत्मा रो रही होगी, राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला

    लोहिया जी की आत्मा रो रही होगी, राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला

    समाजवाद अब परिवारवाद में सिमट कर रह गया, प्रकाश पाल ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना

    चुनाव जीतने की हिम्मत खो चुके लोग 'कॉकरोचों' के सहारे राजनीति कर रहे हैं: प्रकाश पाल

    2024 लोकसभा चुनाव में सपा की सीटें बढ़ीं तब अखिलेश के लिए ईवीएम मुद्दा नहीं था: भाजपा प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी

    सपा सरकार में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर था: भाजपा प्रवक्ता

    लखनऊ
    भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने समाजवादी पार्टी और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य, राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल और पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉक्टर अंकुश त्रिपाठी ने अखिलेश और सपा की नीतियों, इतिहास और बयानों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। अमरपाल मौर्य ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार रही, तब-तब महापुरुषों का अपमान किया गया है।

    अमरपाल मौर्य ने सपा शासन की याद दिलाते हुए कहा कि तत्कालीन ताकतवर मंत्री आजम खान ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को भू-माफिया बताया था, लेकिन अखिलेश यादव ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। अमरपाल ने सवाल उठाया कि अखिलेश किस मुंह से महापुरुषों के सम्मान की बात करते हैं।

    गेस्ट हाउस कांड और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार
    महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मुद्दे पर अमरपाल मौर्य ने कहा कि सपा शासन में उत्तर प्रदेश में दलित समाज की नेता मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड में चीरहरण की कोशिश की गई, जिसे पूरा देश और दुनिया जानती है। उन्होंने कहा कि सपा की नैतिकता तब कहां चली जाती है जब उनके खुद के नेता ऐसे कारनामों में शामिल होते हैं।

    चुनाव आयोग पर सपा का दोहरा मापदंड
    अमरपाल मौर्य ने चुनाव आयोग पर अखिलेश यादव द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि जब सपा चुनाव जीत जाती है, तब उन्हें चुनाव आयोग बिल्कुल सही लगता है, लेकिन जब वे हार जाते हैं तो आयोग पर सवाल खड़ा करने लगते हैं। उन्होंने इसे समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र और दोहरा मापदंड बताया।

    लोहिया जी की आत्मा रो रही होगी: प्रकाश पाल
    भाजपा से राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने सपा के समाजवाद पर तंज कसते हुए कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया जी ने जिस समाजवाद को आगे बढ़ाया था, आज अखिलेश यादव के नेतृत्व में वह केवल एक परिवार तक सिमट कर रह गया है। उन्होंने कहा कि सपा आज समाजवादी नहीं, बल्कि परिवारवादी पार्टी बन चुकी है। स्वर्ग से लोहिया जी की आत्मा यह सब देखकर रो रही होगी।

    सपा और INDI गठबंधन को सच बोलने की चुनौती
    प्रकाश पाल ने अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन के नेताओं को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जो भी आरोप लगाने हैं, वे सच्चे मुद्दों पर आधारित हों। आरोप लगाकर भागना नहीं चाहिए। केवल झूठे बयानों से माहौल खराब करने की राजनीति बंद होनी चाहिए।

    दिल्ली में प्रदर्शन और कॉकरोच नाम पर तंज
    दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों और राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए प्रकाश पाल ने कहा कि जिन लोगों में अब चुनाव लड़कर जीतने की हिम्मत नहीं बची है, वे कॉकरोचों के सहारे राजनीति करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि कॉकरोच की तरह यदि ऐसे लोग खुद उलट जाएं तो सीधे भी नहीं हो पाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं को छुपाने और देश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।

    लोकसभा के चुनाव में ईवीएम कोई मुद्दा नहीं था
    वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूरा इंडी गठबंधन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर भागने की राजनीति करता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा की सीटें बढ़ीं तो अखिलेश यादव के लिए ईवीएम मुद्दा नहीं था और चुनाव आयोग निष्पक्ष एवं पारदर्शी संस्था था। त्रिपाठी ने कहा कि अब 2027 के विधानसभा चुनाव में हार दिखाई देने के कारण अखिलेश यादव पहले से ही बहाने तलाश रहे हैं और इसके लिए चुनाव आयोग को निशाना बना रहे हैं।

    सपा सरकार में महिला अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर था
    डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि उनके मुंह से महिला सम्मान की बात अच्छी नहीं लगती। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा और इनकी सरकार में दुष्कर्म के आरोपी नेता मंत्री पद पर आसीन रहते थे।

    महापुरुषों  से सीख नहीं लेते अखिलेश
    भाजपा प्रवक्ता ने डॉ. राममनोहर लोहिया की जयंती पर अखिलेश यादव के बयानों को लेकर कहा कि विपक्षी नेता महापुरुषों की बातें तो करते हैं, लेकिन उनकी शिक्षाओं से सीख नहीं लेते। उन्होंने कहा कि जनता अखिलेश यादव की कथनी और करनी के अंतर को देख रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी।

  • नाम के अंतर पर FIR के बाद रोकी पेंशन, रिटायर्ड टीचर की याचिका पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

    नाम के अंतर पर FIR के बाद रोकी पेंशन, रिटायर्ड टीचर की याचिका पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

    चंडीगढ़
     सेवानिवृत्त शिक्षक की पेंशन रोके जाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ललित भारद्वाज का कहना है कि सेना में नियमानुसार नाम बदलने के बावजूद बीएड डिग्री में नाम के अंतर को लेकर उनके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई। जांच में डिग्री सही पाई गई और पुलिस ने अदालत में रद्द करने की रिपोर्ट पेश की, फिर भी अप्रैल 2026 में उनकी पेंशन रोक दी गई।

    जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ के समक्ष दायर याचिका में भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में 12 वर्ष से अधिक सेवा की। चिकित्सा आधार पर सेना से छुट्टी मिलने के बाद वह शिक्षा विभाग में शिक्षक नियुक्त हुए। सेना में रहते हुए वर्ष 1991 में उन्होंने नियमानुसार अपना नाम लाला राम से बदलकर ललित भारद्वाज किया था। यह बदलाव सेना के पार्ट-दो आदेश से अधिसूचित हुआ था।

    याचिकाकर्ता का आरोप
    याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने शिक्षा विभाग में 20 वर्ष से अधिक सेवा की और उनका सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा। वह 13 अप्रैल 2022 से पीजीटी अंग्रेजी के पद पर पदोन्नत हुए और 31 दिसंबर 2024 को सेवानिवृत्त हुए। द्वितीय एसीपी लाभ की मांग विभाग ने स्वीकार नहीं की।

    बीएड डिग्री और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में नाम अलग होने के आरोप में 17 जनवरी 2026 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच के दौरान संबंधित विश्वविद्यालय ने डिग्री सही बताई। जांच अधिकारी ने तीन जुलाई 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष रद्द करने की रिपोर्ट पेश की। शिकायतकर्ता ने भी रिपोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताई थी।

    सरकार ने अदालत को क्या बताया?
    सरकार ने अदालत को बताया कि विभाग ने पुलिस रिपोर्ट के विरोध में आपत्ति याचिका दायर की है। शिकायतकर्ता का बयान विभाग की पूर्व अनुमति के बिना दिया गया था और उसे विभाग का आधिकारिक पक्ष नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने दबाव डालकर उससे संतोषजनक रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कराए। मामला अदालत में विचाराधीन है और लोकायुक्त के समक्ष भी शिकायत लंबित है।

    सुनवाई में राज्य सरकार के वकील इस बात का खंडन नहीं कर सके कि 31 दिसंबर 2024 को सेवानिवृत्ति तक याचिकाकर्ता को कोई आरोपपत्र या कारण बताओ नोटिस जारी नहीं हुआ था। हाई कोर्ट ने आगे की दलीलों के लिए मामला 17 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है।