Author: NewseDay

  • आगामी जीबीसी में शामिल होंगे नोएडा अथॉरिटी के ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट

    आगामी जीबीसी में शामिल होंगे नोएडा अथॉरिटी के ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट

    निवेश और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित होगा न्यू नोएडा, औद्योगिक विस्तार को मिलेगी नई रफ्तार

    योगी सरकार के निवेश-अनुकूल माहौल का असर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ेगी गतिविधियां

    मजबूत कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से नोएडा को मिलेगी ग्लोबल इंडस्ट्रियल हब की नई पहचान

    सेमीकंडक्टर, एआई और बैटरी तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर जोर, न्यू नोएडा बनेगा नई औद्योगिक अर्थव्यवस्था का आधार

    नोएडा/लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में नोएडा औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। योगी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का असर अब नोएडा के विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना के रूप में दिखाई दे रहा है। औद्योगिक मांग में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्राधिकरण लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ‘न्यू नोएडा’ विकसित करने की तैयारी कर रहा है।

    नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के अनुसार, इस विस्तार से औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलने के साथ वर्ष 2030 तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5 से 6 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। वहीं, आगामी पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में नोएडा अथॉरिटी के करीब ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इसमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

    औद्योगिक विस्तार को मिलेगी नई दिशा
    प्राधिकरण के सीईओ करुणेश ने बताया कि वर्ष 1976 में दिल्ली के निकट औद्योगिक नगरी के रूप में स्थापित नोएडा आज उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता, बेहतर बुनियादी ढांचे और मजबूत कनेक्टिविटी के कारण यहां विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्यिक गतिविधियों में लगातार निवेश बढ़ा है। मौजूदा शहरी क्षेत्र में भूमि की उपलब्धता सीमित होने के कारण अब ‘न्यू नोएडा’ के विकास की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जल्द ही चरणबद्ध तरीके से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार मौजूदा नोएडा क्षेत्र में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत विकल्पों पर भी काम कर रही है।

    न्यू नोएडा के विकास से औद्योगिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होगी और नए निवेशकों को आधुनिक औद्योगिक आधारभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे विनिर्माण, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को और गति मिलने की उम्मीद है।

    ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट्स धरातल पर
    मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अनुसार, आगामी पांचवें ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में नोएडा से जुड़े करीब ₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतरेंगे। इनमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। योगी सरकार द्वारा लगातार आयोजित किए जा रहे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नोएडा में प्रस्तावित ये परियोजनाएं इसी निवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी।

    तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
    न्यू नोएडा के साथ कनेक्टिविटी को भी विस्तार देने की योजना है। शहर को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा से जोड़ने के लिए तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर पर योजना बनाई जा रही है। इनके जरिए नोएडा को बोड़ाकी के मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब, बॉटनिकल गार्डन और चार मूर्ति के रास्ते गौर सिटी से जोड़ने का प्रस्ताव है। नोएडा पहले से ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित मेट्रो कनेक्टिविटी से आवागमन और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    168 सेक्टरों में फैला मजबूत औद्योगिक आधार
    करीब 20 हजार हेक्टेयर में फैला नोएडा 168 सेक्टरों में विभाजित है और इसका लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र विकसित हो चुका है। पिछले तीन दशकों में यहां करीब 9,500 औद्योगिक, 5,000 वाणिज्यिक और 250 से अधिक संस्थागत आवंटन किए गए हैं। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप पिछले 30-35 वर्षों में 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। अब न्यू नोएडा के विस्तार के साथ रोजगार और निवेश के इस आधार को और व्यापक बनाने की तैयारी है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी निर्यात में बड़ी हिस्सेदारी
    नोएडा का उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में करीब 10 प्रतिशत योगदान है। राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत, जबकि परिधान निर्यात में करीब 80 प्रतिशत बताई जाती है। नोएडा में सैमसंग, डिक्सन, टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और एडोबी जैसी प्रमुख कंपनियों की मौजूदगी ने इसे देश के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों में स्थापित किया है। डेटा सेंटर क्षेत्र में सिफी और अडानीकनेक्स के निवेश से भी नोएडा के तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूती मिली है।

  • LPU हिंसा केस में हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश, पंजाब पुलिस को आरोपियों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा

    LPU हिंसा केस में हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश, पंजाब पुलिस को आरोपियों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हिंसा से जुड़े मामले की जांच को लेकर पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है।

    हाई कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिस सतर्कता और तत्परता से जांच होनी चाहिए थी, अब तक उठाए गए कदम उससे काफी कम हैं। अदालत ने पंजाब पुलिस को मामले के व्यापक प्रभावों को समझते हुए आरोपित को तत्काल गिरफ्तार करने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े खतरों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

    30 करोड़ की संपत्ति नष्ट होने का दावा
    हाई कोर्ट ने कहा कि लगातार दो विश्वविद्यालयों में ऐसी घटना की सूचना प्रसारित की गई, जिसके वास्तविक होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद बड़े स्तर पर अशांति फैली। हिंसा के दौरान पंजाब पुलिस के तीन वाहन जला दिए गए और कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

  • गन्ना रिकवरी से भुगतान तक के विवाद सुलझाएगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

    गन्ना रिकवरी से भुगतान तक के विवाद सुलझाएगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

    गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम: 1 हफ्ते में उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान

    मोदी सरकार की प्राथमिकता में अन्नदाता: गन्ना रिकवरी में हेराफेरी और समस्याओं पर कड़ा रुख, शिवराज सिंह चौहान ने दिए ठोस व्यवस्था के निर्देश

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के सर्वांगीण कल्याण, उनकी उपज के पारदर्शी मूल्यांकन और आय सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील उच्चस्तरीय बैठक की।

    इस बैठक में कर्नाटक सरकार के संबंधित मंत्रीगण तथा केंद्र व राज्य सरकारों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में गन्ना किसानों की जमीनी समस्याओं, शुगर मिलों द्वारा रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन, वेस्टेज, प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार व विस्तार से सार्थक चर्चा हुई।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ किसानों की बात को बेहद गंभीरता और आत्मीयता से सुनते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के लिए किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा के समान है। अन्नदाता का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों द्वारा रखे गए रिकवरी डिफरेंस, वजन में कटौती और मिलों द्वारा वास्तविक रिकवरी छिपाने जैसी विसंगतियों को उन्होंने बेहद संवेदनशील विषय बताया। चौहान ने कहा कि इन विसंगतियों का कोई भी तात्कालिक या आधा-अधूरा समाधान निकालने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के हक पर डाका न डाल सके।

    किसानों को तत्काल और प्रभावी राहत देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रह्लाद जोशी के साथ बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर एक विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों (कर्नाटक व महाराष्ट्र), किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधि, शुगर मिलों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। यह कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी के साइंटिफिक मापदंड, आधुनिक लैब टेस्टिंग व्यवस्था और वजन की शुद्धता से जुड़े हर तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच करेगी और एक निश्चित समय-सीमा में अपनी व्यावहारिक सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इस संबंध में राज्य सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि किसानों की भलाई के लिए और तेजी से कार्यवाही की जा सकें।

    शिवराज सिंह द्वारा प्रह्लाद जोशी के साथ आयोजित इस बैठक में यह भी तय किया गया कि समस्याओं के समाधान को दो चरणों- अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) में विभाजित कर नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। तात्कालिक प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के साथ ही नीतिगत व तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर स्थायी रूप से सुदृढ़ किया जाएगा।

    किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पूरी बैठक में स्वयं उपस्थित रहकर संवाद को निष्कर्ष तक पहुंचाया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बिना किसी भेदभाव के पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सुझावों पर अमल करेगी और मोदी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग, सहायता और ठोस व्यवस्था निरंतर जारी रखेगी।

    केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन के तौर-तरीकों की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार राज्यों और किसानों के समन्वय से हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है।

     

  • छत्तीसगढ़ के गांवों में धर्मांतरण के खिलाफ नाराजगी, पास्टर-पादरियों की एंट्री रोकने के लिए लगाए बोर्ड

    छत्तीसगढ़ के गांवों में धर्मांतरण के खिलाफ नाराजगी, पास्टर-पादरियों की एंट्री रोकने के लिए लगाए बोर्ड

    भानुप्रतापपुर.

    छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण को लेकर विरोध का मामला एक बार फिर सामने आया है। अंतागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कानागांव में ग्रामीणों ने गांव की सीमा पर पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने संबंधी सूचना बोर्ड लगाया है।

    11 अक्टूबर को आयोजित सेक्टर स्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम के बाद यह बोर्ड लगाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे धर्मांतरण के विरोध में हैं। भानुप्रतापपुर के मुंगवाल गांव से शुरू हुआ यह सिलसिला अब अंतागढ़ क्षेत्र तक पहुंच गया है। मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। जानकारी के मुताबिक, 11 अक्टूबर को कानागांव में सेक्टर स्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने गांव की सीमा पर पास्टर-पादरियों के प्रवेश निषेध से जुड़ा बोर्ड लगाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रामीण धर्मांतरण के विरोध में हैं। इसी के चलते गांव के बाहर यह सूचना बोर्ड लगाया गया है।

    मुंगवाल गांव से शुरू हुआ सिलसिला अब अंतागढ़ तक पहुंचा
    कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के मुंगवाल गांव से इस तरह के बोर्ड लगाए जाने का सिलसिला शुरू हुआ था। मुंगवाल में पहली बार ऐसा बोर्ड लगाए जाने के बाद यह मामला चर्चा में आया था। अब अंतागढ़ क्षेत्र के कानागांव में भी इसी तरह का बोर्ड लगाए जाने से यह मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है।

    प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
    कांकेर जिले के कानागांव में पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी बोर्ड लगाए जाने के मामले में फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों के इस कदम के बाद धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अब इस मामले में प्रशासन क्या रुख अपनाता है और आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • कृषि मंत्री ने कहा-योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की

    कृषि मंत्री ने कहा-योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की

    योगी सरकार ने किसानों के लिए मायावती-अखिलेश से तीन गुना ज्यादा बजट जारी किया : कृषि मंत्री

    खुद को धरतीपुत्र और किसानपुत्र कहने वालों ने कुछ नहीं किया, योगी सरकार ने किसानों के लिए खोला खजाना : सूर्य प्रताप शाही 

    कृषि मंत्री ने कहा-योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की

    लखनऊ, 
     बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसल क्षति से प्रभावित प्रदेश के नौ लाख से अधिक किसानों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत राशि सौंपी। गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों के लिए खजाना खोल दिया है। उन्होंने कहा कि खुद को धरतीपुत्र और किसानपुत्र कहने वाली पिछली सरकारों ने किसानों के लिए अपेक्षित काम नहीं किया, जबकि योगी सरकार ने उनके मुकाबले तीन गुना से अधिक राशि खर्च की है।

    शाही ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष मायावती की सरकार ने किसानों पर 10,207 करोड़ रुपए और अखिलेश यादव सरकार ने करीब 12 हजार करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि योगी सरकार अब तक किसानों पर ₹69,163 करोड़ खर्च कर चुकी है।

    कृषि मंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। पिछले वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 752 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के समय आपदा राहत के लिए केंद्र सरकार से मिले 3,200 करोड़ रुपए में से केवल 800 करोड़ रुपए वितरित किए गए थे। योगी सरकार बनने के बाद शेष राशि में से 1,200 करोड़ रुपए सात दिनों के भीतर किसानों के खातों में भेजे गए।

    शाही ने कहा कि गन्ना किसानों के हित में गन्ने का मूल्य बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल किया गया। पिछली सरकार ने पांच वर्षों में करीब ₹62 हजार करोड़ का गन्ना भुगतान किया था, जबकि योगी सरकार ने दस वर्षों में ₹3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 105 चीनी मिलें 15 दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं।

    कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017-18 से अब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को ₹6,125 करोड़ की क्षतिपूर्ति दी गई है। वर्ष 2025-26 में आपदा से प्रभावित 7.31 लाख किसानों को इस योजना के माध्यम से ₹812.76 करोड़ दिए गए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बीमा कराने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष के लगभग 18 लाख से बढ़कर 23 से 24 लाख हो गई है। मुख्यमंत्री ने इनके सर्वे और क्षतिपूर्ति वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। शाही ने कहा कि जालौन में भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब ₹5 करोड़ किसानों को अंतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने किसानों के लिए ऐसे प्रयास किए होते तो उन्हें गरीबी और बदहाली का सामना नहीं करना पड़ता।

  • मुख्यमंत्री की चेतावनी- अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों से कांग्रेस को बचा-खुचा जनसमर्थन भी गंवाना पड़ेगा

    मुख्यमंत्री की चेतावनी- अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों से कांग्रेस को बचा-खुचा जनसमर्थन भी गंवाना पड़ेगा

    देश में अराजकता-अव्यवस्था का पर्याय बनी कांग्रेस: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री ने कहा- यूपी की जनता ने 1985 से कांग्रेस को नकारा, देशभर में जनाधार खो चुकी है कांग्रेस

    हार छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं व न्यायपालिका को भी कठघरे में खड़ा कर रही कांग्रेस: सीएम योगी

    चुनाव जीत जाएं तो पुरुषार्थ, हार जाएं तो ईवीएम दोषी, भारत की जागरूक जनता स्वीकार नहीं करेगी अराजकता: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री की चेतावनी- अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों से कांग्रेस को बचा-खुचा जनसमर्थन भी गंवाना पड़ेगा

    गोरखपुर, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में लगातार देखा जा रहा है कि कांग्रेस व इंडिया गठबंधन न केवल आम जन को परेशान, बल्कि अव्यवस्था व अराजकता पैदा कर देश की संवैधानिक संस्थाओं को भी कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। पहचान का संकट खड़ा करने और भ्रष्ट मंसूबों के कारण कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपनी साख पूरी तरह खो चुके हैं और उनके इस गैर-राजनीतिक व्यवहार को देश की जनता भली-भांति देख रही है।

    चुनाव जीते तो पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम दोषी
    इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत में सीएम योगी ने कहा, आश्चर्य है कि चुनाव जीतने पर इनका पुरुषार्थ और हारने पर ईवीएम और इलेक्शन कमीशन दोषी हो जाता है। न्यायालय अगर मेरिट के आधार पर कोई फैसला देता है, तो माननीय न्यायालय को भी कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास किया जाता है। तमाम प्रकार की धमकियां देने का प्रयास होता है। ऐसे ही तमाम अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना, गाली-गलौच करना और अव्यवस्था फैलाना कांग्रेस की नियति का हिस्सा बन चुका है।

    कांग्रेस के लोग अपने नेतृत्व को बदलें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि जनता उन्हें हर बार क्यों ठुकरा रही है। 1985 के बाद से यूपी में कांग्रेस फिर नहीं आ पाई। यूपी की जनता ने कांग्रेस को 41 वर्ष पहले ही विदा कर दिया था। देश के अन्य राज्यों में भी लोगों का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है और वे इससे मुक्ति पा चुके हैं। कांग्रेस के लोगों को चाहिए कि वे अपने अकर्मण्य, भ्रष्टाचारी और जनता का विश्वास खो चुके नेतृत्व को बदलें। भारत में अराजकता न फैलाने और भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास न करें।

    अराजकता स्वीकार नहीं करेगी जनता
    सीएम योगी ने कहा कि भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से बड़ी जागरूक है। वह इस अराजकता को स्वीकार नहीं करेगी। ऐसा नहीं है कि जनता बहुत दिनों और बहुत देर तक यह सब बर्दाश्त करेगी। अगर कांग्रेस व उनके सहयोगी दलों ने अपने असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कृत्य बंद नहीं किए तो उन्हें बचा-खुचा जनाधार भी गंवाना पड़ेगा।

    युवाओं को गुमराह करने से बाज आए
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस देश में अराजकता फैलाने से बाज आए। जनता-जनार्दन और युवाओं को गुमराह करने से बाज आए। मेरिट के आधार पर और मुद्दों पर चर्चा कर के स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बने। यह देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी होगा।

  • निःशुल्क डायलिसिस से सुकमा जिला अस्पताल बना मरीजों का सहारा

    निःशुल्क डायलिसिस से सुकमा जिला अस्पताल बना मरीजों का सहारा

    सेवा की कहानी

    रायपुर
    कभी दुर्गम क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर के सुकमा जिले में अब स्वास्थ्य सेवाएं दूर-दराज के मरीजों के लिए उम्मीद बन रही हैं। जिला अस्पताल में संचालित निःशुल्क डायलिसिस यूनिट किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को राहत दे रही है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के मरीजों के साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा के मलकानगिरी से आने वाले लोग भी उठा रहे हैं।

    मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सुकमा जिला प्रशासन अस्पताल की व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहा है। कलेक्टर श्री अमित कुमार जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों और चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से डॉक्टरों की नियुक्तियां की गई हैं। इससे अस्पताल में उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिली है।

    दो महीने से मिल रही निःशुल्क सेवा
    ओडिशा के मलकानगिरी निवासी गौतम मजूमदार किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही थी। सुकमा के डायलिसिस सेंटर की जानकारी मिलने पर उन्होंने यहां उपचार शुरू कराया। गौतम बताते हैं, पिछले दो महीनों से सुकमा जिला अस्पताल में मुझे पूरी तरह निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा मिल रही है। यहां अस्पताल का स्टाफ भी आत्मीयता से देखभाल करता है। इस सुविधा से मुझे काफी राहत मिली है। मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभारी हूं।

    मलकानगिरी के ही ध्रुवल राय और दत्ता जैसे मरीजों को भी यहां उपचार का लाभ मिल रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि सीमावर्ती क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं लोगों को उपचार के लिए दूर जाने की मजबूरी से राहत दे सकती हैं। सुकमा जिला अस्पताल में निःशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक राहत के साथ भरोसे का आधार भी बन रही है।

  • झारखंड में सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पर जोर, आईटी पार्क से खुलेंगे नए अवसर

    झारखंड में सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पर जोर, आईटी पार्क से खुलेंगे नए अवसर

     रांची
    राज्य में पहला आईटी पार्क बनाने के लिए सूचना एवं प्रद्योगिकी विभाग (आईटी) की टीम बेंगलुरु के आईटी पार्क का दौरा करेगी और इससे संबंधित रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

    अक्टूबर में ही यह प्रक्रिया पूर्ण की जानी है। बेंगलुरु की तरह ही झारखंड में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विकसित कर वर्ष 2029 तक उसे कार्यशील बनाने के लिए सरकार ने योजना बनाई है।

    बेंगलुरु जाने वाली टीम में विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं। आईटी इको सिस्टम, वहां के निवेश मॉडल के अध्ययन के साथ राज्य सरकार के अधिकारी रांची के आईटी पार्क के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण करने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि से भी मुलाकात करेंगे।

    रांची में विधानसभा के करीब 100 एकड़ भूमि में यह आईटी पार्क स्थापित किया जाना है। अगले दो सालों में इसका पहला चरण प्रारंभ होगा, जिसमें 20 हजार के करीब नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग के लिए राज्य में बड़ी संभावना
    पिछले दिनों गूगल, माइक्रोसाफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ आईटी विभाग के सचिव समेत अन्य अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें झारखंड में सेमिकंडक्टर डिजाइनिंग की संभावना पर चर्चा हुई है।

    पड़ोसी राज्य ओडिशा में एक मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनकर तैयार है और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए कंपनियां काम कर रही हैं।

    झारखंड में रेयर अर्थ मिनरल्स की मौजूदगी का वजह से इसके लिए संसाधन की उपलब्धता है। इसके अलावा न्यूक्लियर एनर्जी के लिए भी कई निवेशकों ने आरंभिक सहमति दी है।

    बेंगलुरु दौरे से लौटने के बाद रांची में देशभर के दूसरे आईटी कंपनियों के प्रतिनिधि का एक सम्मेलन भी आयोजित होगा जो निवेश की संभावना पर चर्चा करेगा।

  • कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य से जुड़े अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण उपलब्धि

    कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य से जुड़े अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण उपलब्धि

    संक्रामक रोगों की पहचान, रोकथाम और वैक्सीन अनुसंधान को मिलेगी गति

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में स्थापित अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई दिशा देने के साथ ही वैज्ञानिक नवाचार और संक्रामक रोगों की रोकथाम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस प्रयोगशाला के माध्यम से संक्रामक रोगजनकों की पहचान, उनके वैज्ञानिक अध्ययन, वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान तथा उन्नत नैदानिक तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का विस्तार राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कृषि एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ में इस प्रकार की उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सुविधा का विशेष महत्व है।

    उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत स्थापित बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला का लोकार्पण विगत 28 सितंबर को किया गया था। मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला के माध्यम से पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों, विशेषकर पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों के अध्ययन एवं निगरानी को नई गति मिलेगी। यह सुविधा गंभीर संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान, रोग प्रकोप से निपटने की तैयारी और उन्नत नैदानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

    उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित वातावरण उपलब्ध होगा, जिससे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन तथा वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे राज्य में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के परस्पर संबंधों पर आधारित 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को मजबूत बनाने में भी यह प्रयोगशाला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में रोगों की निगरानी और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

    श्री साय ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पहले से ही कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मृदा, जल, फसल अवशेषों तथा अन्य नमूनों के परीक्षण एवं अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बीएसएल-3 प्रयोगशाला की स्थापना से विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं को और अधिक मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्रयोगशाला तकनीशियनों एवं संबंधित विशेषज्ञों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर मिलेंगे। इससे राज्य में कुशल वैज्ञानिक मानव संसाधन विकसित करने के साथ ही आधुनिक अनुसंधान तकनीकों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला भविष्य में संक्रामक रोग अनुसंधान, रोग निगरानी, जैव-सुरक्षा, पशु एवं जूनोटिक रोगों के अध्ययन तथा रोग प्रकोप से निपटने की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अधोसंरचना के रूप में विकसित होगी। इससे छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई गति मिलने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता और पहचान को भी मजबूती मिलेगी।

     

  • बरसात में टपकती छत से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से संगीता पहाड़ी कोरवा का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    बरसात में टपकती छत से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से संगीता पहाड़ी कोरवा का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    सेवा संकल्प अभियान-2026

    कभी खपरैल की छत से टपकता था पानी, अब अपने पक्के मकान में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रहा परिवार

    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिली सुरक्षित छत, घर में नल से पानी की सुविधा ने भी आसान बनाया जीवन

    पक्का आशियाना मिलने पर संगीता ने जताई खुशी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति व्यक्त किया आभार

    रायपुर
    कभी आसमान में बादल छाते ही संगीता पहाड़ी कोरवा की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में बारिश का पानी टपकने लगता था। बरसात के दिनों में घर के भीतर पानी आने से परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से संगीता के परिवार को अपना पक्का आशियाना मिल गया है। जिस परिवार के लिए कभी बारिश का मौसम परेशानियों का कारण बन जाता था, वह आज अपने पक्के मकान में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रहा है।

    सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खाला के कोरवा पारा निवासी संगीता पहाड़ी कोरवा की यह कहानी शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों के जीवन में आ रहे बदलाव का उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्की छत उपलब्ध कराई है, बल्कि वर्षों से कच्चे मकान में रहने की परेशानियों से भी राहत दिलाई है।

    बरसात में टपकती थी छत, कच्चे मकान में रहना था मुश्किल
    संगीता बताती हैं कि पहले उनका परिवार खपरैल और कच्ची छत वाले मकान में रहता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और घर के भीतर पानी आने से काफी परेशानी होती थी। बरसात के दौरान परिवार को घर में सुरक्षित रहने और घरेलू सामान को पानी से बचाने की चिंता बनी रहती थी। कच्चे मकान की असुविधाओं के बीच जीवन गुजारना उनकी मजबूरी थी।

    संगीता के मन में भी अपने परिवार के लिए एक पक्का घर होने का सपना था, जहां बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने की परेशानी न हो और परिवार सुरक्षित रह सके।प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिला लाभ उनके इसी सपने को साकार करने का माध्यम बना।

    पीएम जनमन आवास से मिला अपना पक्का घर, वर्षों पुरानी परेशानी हुई दूर
    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत संगीता पहाड़ी कोरवा को पक्के आवास का लाभ मिला। उनके मकान का निर्माण पूरा हो चुका है और अब वे अपने परिवार के साथ उसी घर में निवास कर रही हैं। संगीता बताती हैं कि पहले बारिश होने पर घर में पानी टपकता था, लेकिन अब पक्का मकान बनने से यह परेशानी दूर हो गई है। परिवार को सुरक्षित छत मिलने के साथ रहने की बेहतर सुविधा भी उपलब्ध हुई है।

    उनके पति का नाम शनि लाल है। परिवार में सास-ससुर भी हैं, जो अलग रहते हैं। संगीता अपने परिवार के साथ नवनिर्मित पक्के मकान में रह रही हैं। उनका कहना है कि पक्का आवास मिलने से परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें पहले की तरह कच्ची छत और बारिश के पानी की चिंता नहीं करनी पड़ती।

    पक्के आवास के साथ घर में नल से पानी की सुविधा, दैनिक जीवन हुआ आसान
    संगीता के नवनिर्मित आवास में नल से पानी की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे परिवार को घरेलू कार्यों के लिए पानी की व्यवस्था करने में सहूलियत मिल रही है। संगीता बताती हैं कि पक्का घर बनने के बाद रहने की व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हुई है। घर में पानी की सुविधा उपलब्ध होने से दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी आसान हुआ है। उनके लिए अपना पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार बन गया है।

    “पहले बरसात में पानी टपकता था, अब अपने पक्के घर में कोई परेशानी नहीं होती”
    अपने पक्के आवास में रह रहीं संगीता पहाड़ी कोरवा खुशी व्यक्त करते हुए बताती हैं, “पहले हमारा खपरैल और कच्ची छत वाला घर था। बरसात में पानी टपकता था, जिससे बहुत परेशानी होती थी। अब आवास मिल गया है और घर भी पूरा बन गया है। हम उसी में रहते हैं, अब कोई परेशानी नहीं होती। घर में नल से पानी की सुविधा भी है।” संगीता के शब्दों में पक्का आवास मिलने की खुशी साफ झलकती है। वर्षों तक कच्चे मकान में परेशानियां झेलने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित छत के नीचे रह रहा है।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का लाभ मिलने पर संगीता पहाड़ी कोरवा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। अब वे अपने घर में सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से रह पा रही हैं। संगीता ने आत्मीयता के साथ कहा, “इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विष्णु भइया को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

    पीएम जनमन आवास से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के जीवन में आया बदलाव
    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों के पात्र परिवारों को पक्के आवास की सुविधा उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास प्रदान कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। संगीता पहाड़ी कोरवा की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है। कभी खपरैल की छत से टपकते पानी के बीच जीवन गुजारने वाला उनका परिवार आज अपने पक्के मकान में रह रहा है।पक्के आवास के साथ घर में नल से पानी की सुविधा मिलने से परिवार की दैनिक परेशानियां भी कम हुई हैं।