Author: NewseDay

  • बिहार में बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, दीपावली से पहले सड़क-बिजली बहाल करने के निर्देश

    बिहार में बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, दीपावली से पहले सड़क-बिजली बहाल करने के निर्देश

    पटना
    बिहार के बाढ़ पीड़ित परिवारों को सरकार से सहयता की राशि दी जा रही है। सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 1.60 लाख बाढ़ प्रभावित परिवारों के खाते में 7-7 हजार रुपये अनुग्रह अनुदान के रूप में हस्तांतरित की। कुल 112.14 करोड़ की राशि लोगों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि अब भी कोई प्रभावित परिवार इस राशि से वंचित है तो उनका नाम शीघ्र भेजें। ताकि, उन्हें भी यह राशि उपलब्ध कराई जा सके।

    मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक साथ 1 लाख 60 हजार परिवारों की पीड़ी कम करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा 14 तारीख को किसानों को कृषि इनपुट की राशि जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त आधारभूत सूचनाओं को दीपावली के पहले दुरुस्त करने का निर्देश दिया है ताकि, उन इलाकों में लोगों के जनजीवन को समान्य बनाया जा सके। पिछले दिनों गंगा, गंडक, कोसी, बागमती, बलान नदियों में आई बाढ़ की वजह से करीब 55 लाख की आबादी प्रभावित हुई। भागलपुर में अभी भी बाढ़ के कहर से लोग तबाह हैं। नीचे आती गंगा नदी भीषण कटाव कर रही है। नवगछिया में बड़ी संख्या लोगों के ऊंचे-ऊंचे मकान कटकर गंगा नदी में समा गए।

    इस मौके पर सीएम ने कहा कि लोगों को बाढ़ से काफी परेशानी हुई। प्रभावित जिलों के अधिकारियों ने पूरी क्षमता से राहत पहुंचान का काम किया। सभी जिलाधिकारियों से आग्रह करना है कि एक बार फिर से सर्वे करवा लें ताकि कोई प्रभावित परिवार नहीं बचे। दीपावली से पहले प्रभावित इलाके में सड़क, बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को बहाल करना सुनिश्ति करें ताकि त्योहार में जो लोग बाहर से अपने घर पहुंचें उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि बाढ़ की समस्या का स्थाई समाधान किया जाए। सम्राट चौधरी ने बाढ़ के सामय काफी संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया था और राहत शिविर में जाकर व्यवस्था की समीक्षा की थी।

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए दूसरे फेज में 112.14 करोड़ की राशि ट्रांसफर किया। इससे पहले 15 सितम्बर को 7-7 हजार की सहायता राशि दी गयी थी। उस समय 8 लाख 27 हजार परिवारों को इसका लाभ मिला था। मुख्यमंत्री का कहना है कि कोई भी परिवार छूटना नहीं चाहिए। जिला स्तर पर सर्वे कर पीड़ितों की सूची तैयार की गयी है। सभी बाढ़ पीड़ितों को विभिन्न फेज में राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

  • भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी सरदार सिंह होंगे लीग के एंबेसडर, अरुण साव ने की घोषणा

    भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी सरदार सिंह होंगे लीग के एंबेसडर, अरुण साव ने की घोषणा

    ओलंपियन सुरेंद्र कुमार, प्रदीप मोर, एस.वी. सुनील, ललित कुमार उपाध्याय, शमशेर सिंह और चिंगलेनसाना सिंह करेंगे टीमों की अगुवाई

    रायपुर
    भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सफल फील्ड हॉकी खिलाड़ियों में से एक सरदार सिंह को छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन का लीग एंबेसडर घोषित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित भारत की पहली हॉकी लीग, छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का उद्घाटन सीजन 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक राजधानी रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित होगा। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में आज रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में लीग की छह फ्रेंचाइज़ीस और टीमों का ऐलान किया गया। ड्रा के जरिए फ्रेंचाइजीस को टीमों के आबंटन के साथ ही सभी टीमों की जर्सी भी लॉन्च की गई। टीम ड्रॉ के माध्यम से प्रत्येक फ्रेंचाइज़ी को 22 खिलाड़ियों का दल और एक मुख्य कोच आबंटित किया गया।
     
    उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में कहा, “छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन के लिए सरदार सिंह जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत को लीग एंबेसडर बनाना हमारे युवा खिलाड़ियों को सही संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वह भारत के सबसे प्रतिष्ठित हॉकी खिलाड़ियों में से एक हैं और उनकी विशेषज्ञता से इस लीग को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।”

    श्री साव ने जमीनी स्तर पर छत्तीसगढ़ में हॉकी को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने के लिए लीग और फ्रेंचाइज़ी टीमों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “मैं उन छह टीम मालिकों और प्रायोजकों का हार्दिक स्वागत करता हूं, जिन्होंने हमारे खेल का समर्थन करने और इसमें निवेश करने का निर्णय लिया है। हॉकी को बढ़ावा देने के लिए उनका दृष्टिकोण और दृढ़ संकल्प सराहनीय है। राज्य में हॉकी के पुनरुत्थान की इस महत्वपूर्ण पहल में सरकार के साथ साझेदारी के लिए मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।”

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लीग एंबेसडर सरदार सिंह ने कहा, “एक पूर्व खिलाड़ी और अब हॉकी इंडिया के साथ कोच के रूप में मैंने छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास को करीब से देखा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षा राज्य को एक खेल राज्य के रूप में विकसित करने की है। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की शुरुआत एक ऐसी पहल है, जो दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बनेगी। मुझे विश्वास है कि इससे छत्तीसगढ़ के हॉकी खिलाड़ियों को बहुत लाभ मिलेगा। सीएचएल का लीग एंबेसडर बनना मेरे लिए केवल एक मानद पद नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सितारों के रूप में विकसित करने में योगदान देने का अवसर भी है।”

    सीएचएल में छह फ्रेंचाइज़ी टीमें शामिल हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ियों, ओलंपियनों, स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण देखने को मिलेगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय मंच उपलब्ध कराना और राज्य में घरेलू हॉकी के ढांचे को मजबूत करना है।

    प्रतियोगिता की छह फ्रेंचाइजी टीमों के साथ प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े हैं। चक्रधर चैंपियंस की फ्रेंचाइजी जिंदल स्टील लिमिटेड, न्यायधानी नाइट्स की साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), राजधानी रॉयल्स की बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, मैनपाट टाइगर्स की छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स की सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड और बैलाडीला बुल्स की फ्रेंचाइजी एनएमडीसी लिमिटेड के पास है।

    विजेता को मिलेंगे 11 लाख रुपए, 18 पुरुष मुकाबलों के साथ महिला हॉकी का भी दिखेगा रोमांच

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में छह फ्रेंचाइजी टीमों के कुल 132 खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे। इनमें छत्तीसगढ़ के 108 स्थानीय और 24 अतिथि खिलाड़ी शामिल हैं। प्रत्येक टीम में 22 खिलाड़ी होंगे। इनमें चार अतिथि खिलाड़ी शामिल रहेंगे। हर टीम में एक पूर्व ओलंपियन मार्की खिलाड़ी भी होगा। 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक आयोजित इस लीग में 18 पुरुष हॉकी मुकाबले और एक प्रदर्शनी महिला हॉकी मैच खेला जाएगा। खिलाड़ियों के लिए कुल 21 लाख रुपए की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। विजेता टीम को 11 लाख और उपविजेता को छह लाख रुपए मिलेंगे। दर्शक सभी मुकाबलों का नि:शुल्क आनंद ले सकेंगे। हॉकी के रोमांच के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति और मनोरंजन का भी रंग जमेगा।

    लीग की सबसे बड़ी खासियत प्रत्येक टीम में एक पूर्व ओलंपियन का मार्की खिलाड़ी के रूप में शामिल होना है। इन छह दिग्गज खिलाड़ियों में एस.वी. सुनील, सुरेंद्र कुमार, ललित कुमार उपाध्याय, चिंगलेनसाना सिंह, शमशेर सिंह और प्रदीप मोर के नाम शामिल हैं। इन अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी से स्थानीय खिलाड़ियों को भी मैदान पर उनके साथ खेलने का अवसर मिलेगा।

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए पुरस्कारों की भी आकर्षक व्यवस्था की गई है। कुल 21 लाख रुपए की पुरस्कार राशि में से 17 लाख रुपए विजेता और उपविजेता टीमों के लिए निर्धारित हैं। विजेता टीम को 11 लाख रुपए तथा उपविजेता को छह लाख रुपए दिए जाएंगे। व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए अलग-अलग श्रेणियों में कुल चार लाख रुपए के पुरस्कार रखे गए हैं।

  • दो सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का भूमिपूजन के साथ ही निर्माण कार्य प्रारंभ

    दो सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का भूमिपूजन के साथ ही निर्माण कार्य प्रारंभ

    रायपुर
    उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों को गति देते हुए मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले में कुल 78.51 लाख रुपए की लागत से सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्र की महिलाओं की सहभागिता के साथ भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। भूमिपूजन के साथ ही दोनों निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिए गए। इन निर्माण कार्यों के पूर्ण होने से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा व्यवस्थित नाली निर्माण से जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी। इससे गांवों में सड़क एवं नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और ग्रामीणों को दैनिक आवागमन में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।

           मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के अंतर्गत ग्राम धरमपुरा में मानिकचौरी मेन रोड से धान खरीदी केंद्र एवं गौठान तक 49.74 लाख रुपए की लागत से 0.5 किलोमीटर लंबाई में सीसी सड़क सह नाली का निर्माण किया जाएगा। इस निर्माण कार्य से ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही सड़क के किनारे नाली निर्माण होने से जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ग्राम बिरकोना में 28.77 लाख रुपए की लागत से 0.25 किमी लंबाई में सीसी सड़क सह नाली निर्माण कार्य कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने संबंधित अधिकारी और ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए।

         उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में ग्राम बिरकोना में 1 करोड़ 2 लाख 96 हजार रुपए तथा ग्राम धरमपुरा में  1 करोड़ 24 लाख 7 हजार रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं। इसके साथ ही दोनों गांवों में सैकड़ों प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण भी किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को पक्के मकान की सुविधा मिली है। सरकार का उद्देश्य गांवों में सड़क, नाली, आवास सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर ग्रामीणों के जीवन को और अधिक सुविधाजनक बनाना है।

        उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने कहा कि कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इसके तहत स्कूलों में लगाई गई स्क्रीन के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ करियर काउंसलिंग और कोचिंग की सुविधा भी मिलेगी।विधानसभा क्षेत्र के कुल 85 स्कूलों में से अब तक 50 स्कूलों में स्क्रीन लगाई जा चुकी हैं। शेष 35 स्कूलों में भी स्क्रीन लगाने की योजना है। इसके अलावा क्षेत्र के सभी 8 छात्रावासों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल के तहत देश के प्रमुख ऑनलाइन शिक्षा संस्थानों में शामिल फिजिक्स वाला के माध्यम से विद्यार्थियों को कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए बातचीत की गई है। योजना के अनुसार, विद्यार्थियों को स्कूलों और छात्रावासों में ही स्क्रीन के माध्यम से ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य महंगी कोचिंग और दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करने की मजबूरी को कम करना तथा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना है।

         तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में साहसिक कार्य किया गया है। वे बिरकोना और धरमपुरा जैसे गांवों की जरूरतों को समझते हुए लगातार विकास कार्यों को गति प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों द्वारा भूमिपूजन किया जाना भी सराहनीय है, क्योंकि महिलाओं की भागीदारी के बिना समाज और क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। विकास एक सतत प्रक्रिया है, जो कभी रुकनी नहीं चाहिए। इस दौरान पुर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र साहू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

    भूमिपूजन के साथ ही शुरू हुए निर्माण कार्य
          उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देते हुए इन निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। दोनों कार्यों को भूमिपूजन के साथ ही प्रारंभ कर दिया गया है। इन निर्माण कार्यों से धरमपुरा और बिरकोना के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध होने के साथ ही गांवों में बुनियादी अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।

     

  • बारिश से हरियाणा में गिरा तापमान, जलभराव के चलते किसानों की बढ़ी चिंता

    बारिश से हरियाणा में गिरा तापमान, जलभराव के चलते किसानों की बढ़ी चिंता

    अंबाला.

    हरियाणा के कई जिलों में रविवार रात बारिश हुई। अंबाला, रोहतक और कुरुक्षेत्र समेत कई जिलों में रिमझिम बारिश ने रविवार को मौसम का मिजाज बदल दिया। सुबह साढ़े 11 बजे से दोपहर साढ़े तीन बजे तक जिले में बारिश होती रही।

    अधिकतम तापमान सामान्य से सात डिग्री नीचे 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर ठंडक ऐसी रही कि घरों और कार्यालयों में कई जगह एसी ही नहीं, पंखे भी बंद रहे। दूसरी ओर, शहर और छावनी के कई इलाकों में जलजमाव से लोगों की परेशानी बढ़ी तो खेतों में खड़ी फसल को लेकर किसानों की चिंता भी गहरा गई।

    कई जिलों में बारिश से भीगी फसल: –
    बारिश के कारण सिरसा, डबवाली, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और करनाल समेत कई क्षेत्रों की मंडियों में पानी भर गया. छह जिलों की मंडियों में करीब 6.28 लाख टन धान भीगने की जानकारी सामने आई है. अंबाला की मंडियों में भी पानी भरने से लगभग 4 लाख क्विंटल धान प्रभावित हुआ. फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता और खरीद को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है.

    कैथल और कुरुक्षेत्र में आवक का दबाव:
    प्रदेश के पांच जिलों में ही 14.17 लाख टन से अधिक धान मंडियों में पहुंच चुका है. कुरुक्षेत्र में सर्वाधिक 5.14 लाख टन आवक दर्ज की गई, जिसमें से 3.74 लाख टन की खरीद और 1.73 लाख टन का उठान हुआ. कैथल में 3.54 लाख टन आवक के मुकाबले 2.10 लाख टन की खरीद और 86 हजार टन का उठान हुआ. करनाल में 2.32 लाख टन, अंबाला में 2.31 लाख टन और फतेहाबाद में 86 हजार टन धान पहुंचा है. इन आंकड़ों से मंडियों पर बढ़ते दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है.

  • बिहार में खाद बिक्री के नियम बदले, अनुदानित उर्वरकों के साथ जबरन दूसरी खाद बेचने पर प्रतिबंध

    बिहार में खाद बिक्री के नियम बदले, अनुदानित उर्वरकों के साथ जबरन दूसरी खाद बेचने पर प्रतिबंध

    नवहट्टा (सहरसा)
     कृषि निदेशालय ने अनुदानित उर्वरकों के साथ गैर-अनुदानित उर्वरकों की टैगिंग कर बिक्री करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस फैसले से किसानों को अनावश्यक खाद खरीदने और खेती की लागत बढ़ने से राहत मिलने की उम्मीद है।

    कृषि निदेशक ने इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी को भेजे निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अनुदानित यूरिया, डीएपी और कांप्लेक्स उर्वरकों को आपूर्ति एवं बिक्री के साथ अन्य गैर-अनुदानित उर्वरकों को जोड़कर बेचने की व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी। यह प्रतिबंध अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

    फार्म ए-2 में दर्ज उर्वरकों की बिक्री पर लगा प्रतिबंध
    अनुदानित यूरिया, डीएपी और कॉप्लेक्स उर्वरकों की आपूर्ति करने वाली कंपनियां पहले से मिली अनुमति के तहत इनकी आपूर्ति और बिक्री जारी रख सकेंगी।

    हालांकि, उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र यानी फार्म ए-2 में दर्ज अन्य गैर-अनुदानित उर्वरकों की आपूर्ति और बिक्री पर रोक रहेगी। इससे कंपनियों द्वारा अनुदानित खाद के साथ दूसरे उर्वरक खरीदने के लिए किसानों पर दबाव बनाए जाने की मंशा खत्म होगी।

    जिलास्तर पर होगी निगरानी
    निदेशालय ने जिला कृषि पदाधिकारी को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। अब जिला स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति और बिक्री की निगरानी कृषि विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

  • उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से हुई महत्वपूर्ण पहल

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से हुई महत्वपूर्ण पहल

    प्रदेश के चारो शक्कर कारखानों के 31,022 किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का लाभ

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गन्ना बोनस की गणना का आधार 355 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रूपए प्रति क्विंटल किए जाने से गन्ना किसानों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से लिए गए इस निर्णय से गन्ना किसानों को बढ़ी हुई दर से बोनस का लाभ मिलेगा। इस निर्णय के फलस्वरूप पेराई सत्र 2025-26 में भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, राम्हेपुर, कवर्धा को गन्ना बेचने वाले 14,961 किसानों को लगभग 24.55 करोड़ रुपए की बोनस राशि प्राप्त होगी।

    पेराई सत्र 2025-26 के लिए बोनस गणना में एफआरपी 329.05 रुपए प्रति क्विंटल का आधार लिया गया है। बढ़ी हुई दर के अनुसार 425 रुपए में से एफआरपी घटाने पर किसानों को 95.95 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस मिलेगा। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने में पेराई सत्र 2025-26 के दौरान कुल 25,58,188 क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। इस मात्रा पर 95.95 रुपए प्रति क्विंटल की दर से लगभग 24.55 करोड़ रुपए की बोनस राशि बनेगी, जिसका लाभ कारखाने को गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को मिलेगा।

    नवरात्रि से पहले गन्ना उत्पादकों को प्रदेश सरकार ने दिया तोहफा
     प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों में पेराई सत्र 2025-26 के दौरान कुल 53,25,120 क्विंटल गन्ने की पेराई हुई है। इस आधार पर प्रदेश के कुल 31,022 गन्ना विक्रेता किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रुपए की बोनस राशि प्राप्त होगी। नवरात्रि से पहले राज्य सरकार के इस निर्णय से गन्ना किसानों में हर्ष व्याप्त है। इससे किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा। बढ़ी हुई बोनस राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने, समय पर कृषि कार्य कराने तथा आगामी फसल की बेहतर तैयारी करने में सहायता मिलेगी। इस निर्णय से कबीरधाम जिले के गन्ना किसानों में खुशी का माहौल है। किसानों ने गन्ना बोनस की गणना का आधार बढ़ाने के निर्णय पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया है। बढ़ी हुई बोनस राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने और आगामी फसल की तैयारी में आर्थिक सहायता मिलेगी।

     

  • ​1,064 सोलर ड्यूल पंपों के लक्ष्य में से 849 पंप स्थापित; दूरस्थ पारा-टोलों को ‘झिरिया’ के दूषित जल से मिली मुक्ति

    ​1,064 सोलर ड्यूल पंपों के लक्ष्य में से 849 पंप स्थापित; दूरस्थ पारा-टोलों को ‘झिरिया’ के दूषित जल से मिली मुक्ति

    अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में 'सौर क्रांति': सोलर ड्यूल पंप से 371 गांवों तक पहुँच रहा स्वच्छ पेयजल

    ​जल जीवन मिशन एवं क्रेडा की संयुक्त पहल से नारायणपुर जिले के वनांचल में बदली पेयजल की तस्वीर

    ​1,064 सोलर ड्यूल पंपों के लक्ष्य में से 849 पंप स्थापित; दूरस्थ पारा-टोलों को 'झिरिया' के दूषित जल से मिली मुक्ति

    सौर ऊर्जा आधारित तकनीक से विद्युतविहीन क्षेत्रों में 24/7 सुरक्षित पेयजल की सुनिश्चितता

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    रायपुर,

           छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दुर्गम वनांचल एवं पथरीले अंचलों में, जहाँ कभी एक-एक मटका पानी के लिए ग्रामीणों को मीलों का कठिन सफर तय करना पड़ता था या झिरिया के दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ता था, वहाँ अब सौर ऊर्जा एक वरदान बनकर उभरी है। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के साझा प्रयासों से संचालित सोलर ड्यूल पंप योजना ने अबूझमाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरदराज वाले पारा-टोलों तक स्वच्छ पेयजल की नियमित पहुँच सुनिश्चित करना है, जिससे ग्रामीणों को झिरिया के दूषित जल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।
            ​नारायणपुर जिले की भौगोलिक परिस्थितियाँ, कठिन वनांचल और बिखरी हुई बसाहटें पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा को हर घर तक पहुँचाने में हमेशा से बड़ी चुनौती रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में पीने का साफ पानी सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील विषय है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिले के 371 ग्रामों एवं पारा-टोलों को स्वच्छ पेयजल से जोड़ने के लिए कुल 1,064 सोलर ड्यूल पंप स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। क्रेडा और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के निरंतर प्रयासों से अब तक 849 पंपों की सफल स्थापना पूरी की जा चुकी है, जिससे एक बड़े क्षेत्र में पेयजल संकट दूर हुआ है।
            ​सोलर ड्यूल पंपों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं। बिजली की अनिश्चितता वाले या विद्युतविहीन दूरस्थ क्षेत्रों में भी यह प्रणाली बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करती है। जिले के नेलांगुर, पदमकोट, जाटलूर, उसेबेड़ा, हरबेल, कस्तुरमेंटा-2, धुरबेड़ा और गुमरका जैसे अत्यंत संवेदनशील व दुर्गम गाँवों में इन पंपों के शुरू होने से ग्रामीणों को अपने घर के पास ही शुद्ध पानी मिलने लगा है। इससे पानी जुटाने के लिए दूर जाने की मजबूरी खत्म हुई है, जिससे ग्रामीणों के दैनिक श्रम और समय दोनों की बड़ी बचत हो रही है।
           ​पेयजल की सुलभता का सबसे सुखद और सीधा प्रभाव ग्रामीण महिलाओं और परिवारों की जीवनशैली पर पड़ा है। पहले जहाँ महिलाओं को पानी के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी, वहीं अब वे उस समय का उपयोग अन्य आजीविका गतिविधियों और अपने बच्चों की देखभाल में कर पा रही हैं। इसके साथ ही, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता से दूषित पानी के सेवन से होने वाली जलजनित बीमारियों पर प्रभावी रोक लगी है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। शेष बचे पंपों की स्थापना का कार्य भी तेजी से जारी है। नारायणपुर में सोलर ड्यूल पंपों का यह सफल प्रयोग न केवल दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ में ग्रीन एनर्जी के माध्यम से समावेशी और सतत ग्रामीण विकास की एक नई इबारत भी लिख रहा है।

  • बेटी की उच्च शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए मां ने शुरू की नियमित बचत, सालभर में जमा होंगी 12 हजार रुपये

    बेटी की उच्च शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए मां ने शुरू की नियमित बचत, सालभर में जमा होंगी 12 हजार रुपये

    महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ लेकर अनीता ने पेश की आर्थिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल

    रायपुर
    हर मां की ख्वाहिश होती है कि उसकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे, आत्मनिर्भर बने और अपने सपनों को साकार करे। बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ी रकम से ज्यादा जरूरी है समय रहते बचत की शुरुआत करना। इसी सोच को अपने जीवन में उतार रही हैं सरगुजा जिले की श्रीमती अनीता सिंह। वे महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की पूरी राशि अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर खोले गए सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। इस तरह शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता को उन्होंने बेटी की शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए नियमित बचत का माध्यम बना लिया है।

    अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी अनीता सिंह की यह पहल महिला आर्थिक सशक्तिकरण और बेटियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति जागरूकता का प्रेरक उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि को वे दैनिक खर्चों में उपयोग करने के बजाय बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रख रही हैं। प्रतिमाह एक हजार रुपये की इस बचत से एक वर्ष में 12 हजार रुपये जमा होंगे, जो आने वाले समय में समीक्षा की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

    महतारी वंदन की राशि बनी बेटी के भविष्य की पूंजी
    अनीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खुलवाया है। महतारी वंदन योजना से उनके बैंक खाते में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त होती है। इस पूरी राशि को वे नियमित रूप से बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर देती हैं।

    उनका कहना है कि बेटी की अच्छी शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए अभी से आर्थिक तैयारी करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को बचत में बदलने का निर्णय लिया।

    अनीता का मानना है कि छोटी-छोटी राशि को नियमित रूप से जमा करने से भविष्य में एक अच्छी पूंजी तैयार की जा सकती है। इससे बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा।

    हर महीने एक हजार रुपये की बचत, सालभर में 12 हजार रुपये का संचय
    अनीता सिंह की बचत की यह पहल आर्थिक नियोजन का भी उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक राशि को वे सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं।

    इस तरह नियमित बचत जारी रखने पर एक वर्ष में 12 हजार रुपये की मूल राशि जमा होगी। सुकन्या समृद्धि योजना के प्रावधानों के अनुसार जमा राशि पर निर्धारित ब्याज का लाभ भी मिलता है, जिससे समय के साथ बचत में वृद्धि हो सकती है।

    अनीता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता के कारण उन्हें बेटी के लिए बचत करने में सुविधा हो रही है। इस राशि को वे समीक्षा की आगे की पढ़ाई और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रखना चाहती हैं।

    दो योजनाओं को जोड़कर बेटी की शिक्षा के लिए कर रहीं आर्थिक तैयारी
    अनीता सिंह ने महतारी वंदन योजना और सुकन्या समृद्धि योजना का उपयोग एक-दूसरे के पूरक के रूप में किया है। महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना में वे इस राशि को बेटी के भविष्य के लिए जमा कर रही हैं।

    इस प्रकार एक योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता दूसरी योजना के माध्यम से दीर्घकालिक बचत का आधार बन रही है। अनीता का यह प्रयास दर्शाता है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता का सुनियोजित उपयोग कर परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी की जा सकती है।

    बेटी की अच्छी शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही मां का सपना
    अनीता सिंह चाहती हैं कि उनकी बेटी समीक्षा अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और जीवन में आगे बढ़े। वे अपनी बेटी के भविष्य को लेकर अभी से सजग हैं और नियमित बचत के माध्यम से उसकी शिक्षा के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं।

    उनका कहना है कि बच्चों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए समय रहते बचत करना आवश्यक है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। अनीता के लिए हर महीने जमा किए जाने वाले एक हजार रुपये केवल बचत की राशि नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में किया गया एक प्रयास है।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
    महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ मिलने पर अनीता सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। इस राशि का उपयोग वे अपनी बेटी समीक्षा के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करने के लिए कर रही हैं।

    अनीता ने बताया कि योजना से मिलने वाली सहायता ने उन्हें बेटी के भविष्य के लिए नियमित बचत करने का अवसर दिया है। इससे वे उसकी शिक्षा और आगे की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी कर पा रही हैं।

    छोटी बचत से बड़े सपनों को संबल, अनीता की पहल बनी प्रेरणा
    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत अनीता सिंह की कहानी यह संदेश देती है कि आर्थिक सहायता का सही नियोजन परिवार के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

     

  • राजा वड़िंग का बयान- CJP के समर्थन में सड़क पर उतरे राहुल गांधी के सिपाही

    राजा वड़िंग का बयान- CJP के समर्थन में सड़क पर उतरे राहुल गांधी के सिपाही

    चंडीगढ़.

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया था। हालांकि सीजेपी के लीडरों की गिरफ्तारी के बाद प्रोटेस्ट हो नहीं पाया।

    अब इस प्रोटेस्ट में कांग्रेस ने भी छलांग लगा दी है और पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर ऐलान कर दिया है कि वो चुप रहने वाले नहीं हैं।

    जंतर-मंतर पर पहली बार कब हुआ प्रदर्शन –
    देश की राजधानी दिल्ली के बीचों-बीच स्थित जंतर-मंतर एक ऐसी जगह रही है जो सालों से भारत के लोकतंत्र की आवाज बुलंद करने की जगह रही है। सालों से यह जंतर-मंतर शोषितों की व्यथा का गवाह रहा है और यहीं से कई ऐसे आंदोलन हुए जिसने कई बार सरकारों को झुकाया और सत्ता परिवर्तन हुए। अब एक बार फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों से रोक लगा दी गई है। दरअसल 12 अक्तूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने आदेश जारी करते हुए जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाई कर दिया है। इसका मतलब ये है कि अब यहां कोई धरना-प्रदर्शन आदि नहीं हो सकेगा।

  • योजना की राशि से पौष्टिक भोजन, दवाइयों और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था, स्वस्थ हैं मां और बच्चा

    योजना की राशि से पौष्टिक भोजन, दवाइयों और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था, स्वस्थ हैं मां और बच्चा

    सेवा संकल्प अभियान-2026

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा, दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपये की सहायता का भी प्रावधान

    रायपुर
    मातृत्व का समय हर महिला के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस दौरान मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों और नियमित देखभाल की विशेष जरूरत होती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इन आवश्यकताओं को पूरा करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कृष्णापुर निवासी श्रीमती लीलावती को भी इस योजना से बड़ी राहत मिली है। उन्हें दो किस्तों में कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में किया। लीलावती बताती हैं कि योजना से मिली सहायता के कारण उन्हें मातृत्व के दौरान अपनी और बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सुविधा हुई। वर्तमान में वे और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत लीलावती की यह कहानी दर्शाती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता जरूरतमंद महिलाओं के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री माताओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य, पोषण और शिशु की बेहतर देखभाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    दो किस्तों में मिली 5 हजार रुपये की सहायता, मातृत्व के दौरान मिला सहारा
    लीलावती बताती हैं कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत उन्हें पहली किस्त में 3 हजार रुपये और दूसरी किस्त में 2 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। कुल 5 हजार रुपये की इस राशि से उन्होंने अपने लिए पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था की। मातृत्व के दौरान स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है और ऐसे समय में मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार पर पड़ने वाला खर्च का बोझ भी कुछ कम हो जाता है।

    उन्होंने बताया कि योजना का लाभ मिलने से उन्हें अपनी सेहत के साथ बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल करने में भी मदद मिली। पौष्टिक भोजन और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था करने में सहायता राशि उपयोगी साबित हुई। लीलावती के अनुसार, मातृत्व के समय मिलने वाला यह आर्थिक सहयोग उनके लिए महत्वपूर्ण था। आज वे और उनका बच्चा स्वस्थ हैं, जिससे परिवार में खुशी है।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्रोत्साहन, दूसरी संतान बालिका होने पर भी सहायता का प्रावधान
    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण को बढ़ावा देना है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रथम संतान के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि दो किस्तों में प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त दूसरी संतान बालिका होने पर पात्रता एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार 6 हजार रुपये की सहायता राशि एकमुश्त प्रदान किए जाने का प्रावधान है।

    योजना के माध्यम से महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के बाद स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक सहयोग मिलता है। विशेष रूप से सीमित आय वाले परिवारों में यह सहायता पौष्टिक भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में उपयोगी साबित हो रही है। इससे माताओं को अपने स्वास्थ्य के साथ नवजात शिशु की देखभाल पर भी ध्यान देने में मदद मिलती है।

    योजना से मिली राहत, लीलावती ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ मिलने पर लीलावती ने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि मातृत्व के दौरान प्राप्त 5 हजार रुपये की सहायता राशि से उन्हें पौष्टिक भोजन और दवाइयों सहित अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में सहयोग मिला। इससे वे अपनी और बच्चे की सेहत का बेहतर ध्यान रख सकीं। लीलावती का कहना है कि मातृत्व के समय महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी अनेक जरूरतें होती हैं। ऐसे में योजना से मिलने वाली सहायता राशि काफी उपयोगी होती है। उन्होंने इस आर्थिक सहयोग के लिए शासन के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान में वे और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

    स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु के संकल्प को मिल रहा संबल
    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत ग्राम कृष्णापुर की लीलावती की कहानी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव का उदाहरण है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से प्राप्त 5 हजार रुपये की सहायता राशि ने उन्हें मातृत्व के दौरान पौष्टिक आहार, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में सहयोग दिया। यह आर्थिक सहायता उनके लिए अपनी और बच्चे की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी।

    लीलावती का अनुभव बताता है कि मातृत्व के समय मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने में मदद कर सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को मिल रहा यह सहयोग स्वस्थ मातृत्व, बेहतर शिशु देखभाल और परिवार के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।