Author: NewseDay

  • हरियाणा में गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की फाइल आगे बढ़ी, हाईकोर्ट आदेशों की होगी समीक्षा

    हरियाणा में गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की फाइल आगे बढ़ी, हाईकोर्ट आदेशों की होगी समीक्षा

     चंडीगढ़
    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की मांग पर प्रदेश सरकार के स्तर पर अब प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ 31 अगस्त को हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को आगे परीक्षण के लिए भेज दिया है। इससे लंबे समय से नियमितीकरण की राह देख रहे अतिथि अध्यापकों को उम्मीद बंधी है कि सरकार इस मुद्दे का व्यावहारिक समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने सीएम के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव को गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण से जुड़े मामले को मार्क किया है। इसमें हाई कोर्ट के आदेश और नियमितीकरण की प्रक्रिया से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार करने तथा मुख्यमंत्री को इससे अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित पत्र पर 15 सितंबर की तारीख अंकित है। ऐसे में अब अधिकारियों के स्तर पर मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।

    दरअसल, 31 अगस्त को विधानसभा सत्र के बाद विधानसभा सचिवालय परिसर में मुख्यमंत्री के साथ गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई थी। इसमें शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग का मुद्दा प्रमुखता से रखा था।
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    मुख्यमंत्री ने मामले में अंतिम स्तर की बैठक बुलाकर ठोस समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की ओर से फाइल आगे बढ़ाया जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    गेस्ट टीचर इससे पहले शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और निदेशक के साथ भी अपनी मांग उठा चुके हैं। विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने सरकार के मंत्रियों और विपक्षी विधायकों को भी ज्ञापन सौंपे थे। विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था।

    करीब 20-21 वर्षों की सेवा का हवाला देते हुए गेस्ट टीचर नियमितीकरण को केवल नौकरी का विषय नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के सम्मान और परिवार के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।

    अब मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला अधिकारियों को भेजे जाने के बाद उनकी नजर अगली बैठक और रिपोर्ट पर है। हालांकि, अभी नियमितीकरण का अंतिम निर्णय होना बाकी है, लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से मामले का दोबारा सक्रियता से परीक्षण शुरू होना गेस्ट टीचरों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

     

  • जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात-   धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

    जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात- धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

    जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात-
     
    धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा किसानों को बड़ी राहत देते हुए धमतरी और बालोद जिलों की पांच प्रमुख सिंचाई योजनाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विकास कार्यों के लिए कुल 21 करोड़ 50 लाख 23 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्रीय किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।

    प्रमुख स्वीकृतियाँ 

                धमतरी जिला के राजाडेरा लघु जलाशय जलद्वार के नवीनीकरण एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 1 करोड़ 65 लाख 7 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे लगभग 285 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी प्रकार खट्टी एनीकट (महानदी) महानदी पर निर्मित खट्टी एनीकट के संरक्षण और जलद्वारों के उन्नयन कार्य हेतु 4 करोड़ 89 लाख 30 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे करीब 30 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।

              बालोद जिला (कुल 3 योजनाएं) के जलाशयों में विद्युतीकरण तांदुला, गोंदली और खरखरा जलाशय में विद्युतीकरण व प्रकाश व्यवस्था के कार्यों के लिए 4 करोड़ 95 लाख 99 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 285 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। खरखरा नदी के बांयी तट पर शीतला मंदिर के पास घाट एवं ग्राम मारीदेवरी तटबंध निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 99 लाख 98 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे 183 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र लाभांवित होगा।
             तांदुला परियोजना के अंतर्गत सकरैद वितरक नहर (नाहंदा माईनर, डौकीडीह माईनर, सुखरी माईनर और भदेरा माईनर) के रिमॉडलिंग, लाइनिंग एवं पक्के कार्यों के उन्नयन के लिए 4 करोड़ 99 लाख 89 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे भी 183 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा। इस प्रकार कुल 21.50 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन मजबूत होगा और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

  • विदेश में तीन ऑक्शन के बाद BCCI का फैसला, IPL 2027 मिनी ऑक्शन भारत में होगा

    विदेश में तीन ऑक्शन के बाद BCCI का फैसला, IPL 2027 मिनी ऑक्शन भारत में होगा

    नई दिल्ली
    आईपीएल 2027 से पहले मिनी ऑक्शन का आयोजन होना है। लीग के पिछले तीन ऑक्शन विदेश में हुए थे। आईपीएल 2027 का ऑक्शन भारत में करवाने का फैसला किया गया है। क्रिकबज की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। हर आईपीएल सीजन से पहले खिलाड़ियों की खरीद के लिए बीसीसीआई ऑक्शन का आयोजन करवाती है। बुधवार को गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में यह फैसला लिया गया।

    यूएई और सउदी अरह में हुए ऑक्शन
    आईपीएल 2023 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी कोच्चि में की गई थी। उसके बाद यूएई के दुबई, सउदी अरब के जेद्दा और फिर यूएई के ही अबु धाबी लगातार तीन सीजन की नीलामी हुई। इस बार बीसीसीआई ने आईपीएल ऑक्शन में फिर से भारत में करवाने का फैसला कर लिया है। क्रिकबज को जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया है कि अगले साल होने वाला मेगा ऑक्शन फिर से विदेश में हो सकता है।

    विदेश में ऑक्शन होने पर कई चुनौतियां
    विदेश में होने वाले मिनी-ऑक्शन के लिए अपनी टीमों को विदेश ले जाने में आने वाली लॉजिस्टिकल और ऑपरेशनल चुनौतियों को लेकर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीसीसीआई के सदस्यों ने पिछले साल अबु धाबी में हुए ऑक्शन के दौरान उनकी बातों पर विचार किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए गवर्निंग काउंसिल ने इस साल के ऑक्शन के लिए भारतीय शहर ही चुनने का फैसला किया है।

    वेन्यू पर फैसला जगह की उपलब्धता देखकर
    आईपीएल का ऑक्शन मुख्य रूप से नवंबर या दिसंबर में होता है। उस समय भारत में शादियों का भी सीजन रहता है। इसी वजह से वेन्यू का फैसला फ्रेंचाइजी और उनके डेलिगेशन के लिए रहने की जगह की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। ऑक्शन करवाने के लिए बीसीसीआई को 5 स्टार होटल में 100 से ज्यादा कमरों की जरूरत पड़ती है। इन्हीं सब को देखने के बाद ऑक्शन की तारीख और वेन्यू का फैसला लिया जाएगा।

  • रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    रोपड़ का तीसरा यूनिट बंद, पंजाब में बिजली संकट पर आज शिअद का प्रदर्शन

    पटियाला
     राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत नित नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर बिजली उत्पादन व्यवस्था चरमराती दिख रही है। पटियाला से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली संकट से जूझ रहे पावरकॉम को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार सुबह रोपड़ थर्मल प्लांट का एक और यूनिट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गया।

    इस नए संकट के बाद अब रोपड़ थर्मल प्लांट के कुल चार में से तीन यूनिट पूरी तरह से ठप पड़ चुके हैं। कुल 840 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले इस महत्वपूर्ण प्लांट से इस समय पावरकॉम को महज 120 मेगावाट बिजली ही हासिल हो पा रही है। प्लांट के अधिकांश यूनिट बंद होने से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    बिजली जनरेशन कम होने से कई इलाकों में लोगों को अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बाजारों में सप्लाई लाइन ठीक न होने से रोजाना तारों में स्पार्किंग हो रही है। घंटों तक बिजली बंद रहती है।

    लुधियाना के चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात तारों में भयानक स्पार्किंग हुई और इलाके की लाइट गुल हो गई। सुबह तक इलाके में बिजली गुल रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे बिजली कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर लुधियाना में प्रदर्शन करेगा।

    राहत: प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांट एक्टिव
    दूसरी तरफ, राहत की बात केवल इतनी है कि प्राइवेट सेक्टर के दोनों बड़े थर्मल प्लांट, यानी राजपुरा और तलवंडी साबो, अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी प्लांट के यूनिट बार-बार ठप होने से बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है।

    मांग तोड़ रही रिकॉर्ड
    गौरतलब है कि मौजूदा सीजन में राज्य के भीतर बिजली की मांग 17,300 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य के पावर सेक्टर के इतिहास में अब तक किसी एक दिन की सबसे ज्यादा मांग का नया रिकॉर्ड है।

    इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को अब मुख्य रूप से सेंट्रल सेक्टर से बिजली की भारी खरीद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर जल्द ही रोपड़ प्लांट के खराब यूनिट्स को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ सकता है।

    पंजाब में बिजली की डिमांड-सप्लाई व जनरेशन के बारे में जानिए…

        प्राइवेट प्लांटों में पूरी कैपेसिटी से बन रही बिजली: पंजाब में प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें से 1,980 मेगावाट बिजली का उत्पादन तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के 3 यूनिटों में होता है। प्रत्येक यूनिट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
        1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही
    : तलवंडी साबो में आजकल कुल 1,700 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा हो रही है। वहीं, दूसरा प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा में है, जिसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इसमें आजकल 1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही है।

        तीन में से एक प्लांट की स्थिति चिंताजनक: पंजाब में 3 सरकारी थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,300 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है। इसमें 4 यूनिट हैं। दो यूनिट कल से बंद हैं। जो दो यूनिट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे।

        लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट: रोपड़ में कुल 200 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट हैं। आज चारों यूनिट चल रहे हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है और आज यहां 805 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। गोइंदवाल में तीसरा सरकारी थर्मल प्लांट है, जिसमें 2 यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 520 मेगावाट है। आज एक यूनिट में करीब 430 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

        हाइड्रो प्रोजेक्टों से मदद मिल रही: पंजाब में छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से रात में 830 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और दिन में इसे घटाकर 500 मेगावाट के आसपास रखा जा रहा है। बिजली संकट को कम करने में हाइड्रो प्रोजेक्टों का इस समय अहम योगदान निभा रहा है।

        सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही: पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 450 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट्स से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।

        केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद: पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) केंद्रीय पूल से बिजली ले रहा है।

        महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर: PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट तक बिजली खरीद रहा है। PSPCL को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा।

    बाजार में स्पार्किंग से आग लगने का खतरा हजूरी रोड के दुकानदार मोहित का कहना है कि पूरी मार्केट में तारों का जाल बिछा हुआ है। हल्की सी हवा या बरसात होती है तो स्पार्किंग शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि कई बार अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह पूरी मार्केट कपड़ों की है। इस तरह स्पार्किंग होने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने बताया कि देर रात से सुबह तक बिजली सप्लाई बंद रही। अफसरों को फोन कर रहे हैं, तो वे फोन नहीं उठा रहे।

  • दिल्ली में बदलने लगा मौसम का मिजाज, 18 सितंबर के बाद शुष्क होगा मौसम

    दिल्ली में बदलने लगा मौसम का मिजाज, 18 सितंबर के बाद शुष्क होगा मौसम

    नई दिल्ली
    राजधानी में मॉनसून की विदाई के लिए मौसम की परिस्थितियां अब बदलने लगी हैं। पिछले कुछ दिनों से तापमान बढ़ रहा है, नमी घट रही है और मौसम धीरे-धीरे शुष्क हो रहा है। स्काईमेट के अनुसार, अगले हफ्ते दिल्ली से मॉनसून की वापसी हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 18 सितंबर के बाद बारिश की गतिविधियां काफी कम हो जाएंगी।

    • मंगलवार को उमस की वजह से तेज गर्मी महसूस हुई। दिनभर धूप-छांव का दौर चलता रहा और कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हुई।
    • अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री रहा, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री रहा, यह सामान्य से 2.1 डिग्री अधिक है।
    • रिज में बूंदाबांदी हुई, जबकि गुरुग्राम में 0.5 एमएम बारिश दर्ज की गई। अन्य इलाकों में मौसम शुष्क रहा। नमी का स्तर 61 से 87 प्रतिशत के बीच रहा।

    18 सितंबर के बाद बारिश कम होने की संभावना है
    बुधवार को बादल छाए रहने और कुछ जगहों पर बूंदाबांदी की संभावना है। अधिकतम तापमान 34 और न्यूनतम 24 डिग्री के आसपास रह सकता है। 17 सितंबर को भी हल्की बारिश हो सकती है। 18 सितंबर से मौसम के शुष्क होने की संभावना है। 18 से 21 सितंबर के बीच आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। इस दौरान अधिकतम तापमान 33 से 36 और न्यूनतम 23 से 26 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। बारिश की गतिविधियां कम होने के साथ दिन में गर्मी और उमस फिर बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून की विदाई के साथ दिल्ली में मौसम शुष्क होने लगेगा।

  • UPI Payment पर लगेगा 0.40% MDR चार्ज? जानें 15 अक्टूबर से किसे देना होगा पैसा

    UPI Payment पर लगेगा 0.40% MDR चार्ज? जानें 15 अक्टूबर से किसे देना होगा पैसा

    भारत सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पेमेंट्स् पर चार्ज लागू करने का ऐलान कर दिया है, जो आने वाले 15 अक्टूबर से लागू होगा. UPI का भारत में बड़ा यूजरबेस है. बहुत से लोग मोबाइल में UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनके नाम PhonePe, PayTM, GPay और कई मोबाइल ऐप्स भी UPI की सर्विस देते हैं.

    अब UPI ऐप्स चलाने वाले यूजर्स के बीच में कंफ्यूजन है कि किन-किन UPI मोबाइल ऐप्स पर MDR चार्ज कटेगा?

    सबसे पहले बता देते हैं कि 2,000 रुपये से ऊपर की कीमत के ट्रांजैक्शन पर करने पर 0.40 परसेंट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) देना होगा. सरकार साफ कर चुकी है कि यह चार्ज कस्टमर को नहीं देना होगा बल्कि यह चुनिंदा मर्चेंट पर चार्ज लगेगा.

    चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M)
    सरकार की तरफ से जारी जानकारी में साफ बताया है कि चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M) है. अगर कस्टमर 2 हजार रुपये से ज्यादा की पेमेंट करता है तो उसे कोई चार्ज नहीं देना होगा. यह चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट पर ही लागू होगा.

    MDR कैलकुलेशन कैसे होगा?
    MDR की कैलकुलेशन को लेकर साफ जानकारी दी गई है. सरकार की तरफ से जारी सवालों के जवाब में बताया है कि ₹3,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR लागू होने पर शुल्क ₹12 होगा. यह रकम व्यापारी अपने Acquiring Bank को देगा. वहीं, ₹50,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR के हिसाब से शुल्क ₹200 होगा.

    1 लाख रुपये की शॉपिंग पर 0.4 परसेंट के हिसाब से MDR 400 रुपये बनता है, लेकिन यहां 300 रुपये की सीमा तय की है.

    MDR चार्ज कैलकुलेटर
    व्यापारी को भुगतान की राशि             लागू MDR      व्यापारी द्वारा दिया जाने वाला MDR

    ₹2,000                                                  0%                     ₹0
    ₹3,000                                                  0.40%              ₹12
    ₹50,000                                               0.40%                 ₹200
    ₹ 75,000 रुपये या उससे ज्यादा            फिक्स ₹ 300             ₹ 300

    कस्टमर पर नहीं लगेगा कोई भी चार्ज
    मोबाइल में मौजूद UPI ऐप्स जैसे PhonePe, PayTM, Gpay आदि की मदद से अगर कोई पेमेंट करते हैं, तो कस्टमर के अकाउंट से कोई चार्ज पेमेंट नहीं होगी.  MDR चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट से ली जाएगी. यह रकम मर्चेंट के बैंक अकाउंट से काटी जाएगी.

  • घर में पुराने कपड़ों से पोछा लगाना कितना शुभ? वास्तु के अनुसार जानें सही नियम

    घर में पुराने कपड़ों से पोछा लगाना कितना शुभ? वास्तु के अनुसार जानें सही नियम

    घर की साफ-सफाई न केवल स्वच्छता के लिहाज से जरूरी है, बल्कि इसका सीधा संबंध घर की सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि से भी होता है. वास्तु शास्त्र में पोछा लगाने के तरीकों, समय और इस्तेमाल की जाने वाली चीजों को लेकर कई नियम बताए गए हैं. अक्सर घरों में देखा जाता है कि लोग पुराने, फटे या बेकार हो चुके कपड़ों (जैसे पुरानी टी-शर्ट, बनियान या तौलिया) को पोछा बनाकर फर्श साफ करने लगते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना वास्तु के अनुसार सही है? आइए जानते हैं कि पुराने कपड़ों से पोछा लगाना शुभ माना जाता है या अशुभ.

    पुराने कपड़ों से पोछा लगाना: शुभ या अशुभ?
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, पुराने या फटे-पुराने कपड़ों से घर में पोछा लगाना अत्यंत अशुभ माना जाता है. इसके पीछे कई मुख्य ज्योतिषीय और वास्तु कारण हैं.

    दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा का वास
    पुराने और कटे-फटे कपड़े 'नकारात्मक ऊर्जा' और 'राहु-केतु' के प्रभाव को दर्शाते हैं. जब आप इनसे पूरे घर के फर्श को पोंछते हैं, तो पूरे घर में नकारात्मकता फैलती है, जिससे आर्थिक तंगी (दरिद्रता) आने लगती है.

    मां लक्ष्मी की नाराजगी
    घर की साफ-सफाई में फटे-पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करने से घर का वास्तु दोष बढ़ता है. माना जाता है कि ऐसे घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता और धन की आवक रुक जाती है.

    गृह क्लेश और बीमारियां
    पुराने पहने हुए कपड़ों में व्यक्ति की पुरानी ऊर्जा जुड़ी होती है. जब उन कपड़ों को घिस-घिसकर पोछा बनाया जाता है, तो घर के सदस्यों में मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और बीमारियां बढ़ने की आशंका रहती है.

    विशेषकर फटे अंडरगारमेंट्स या फटे तौलिए
    कई लोग पुराने अंडरगारमेंट्स या तौलिए का इस्तेमाल पोछा लगाने में करते हैं. वास्तु के अनुसार ऐसा करना सबसे बड़ा दोष माना जाता है. इससे घर की तरक्की में रुकावट आती है.

    वास्तु के अनुसार पोछा लगाने के सही नियम
    – हमेशा साफ-सुथरे और इसी काम के लिए बने सूती पोछे (Mop) का ही उपयोग करें.

    – हफ्ते में कम से कम एक या दो बार (विशेषकर गुरुवार को छोड़कर) पोछे के पानी में थोड़ा सा खड़ा सेंधा नमक या समुद्री नमक मिलाएं. नमक घर की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और सकारात्मकता लाता है.

    – सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले पोछा लगाना सबसे उत्तम माना जाता है. सूर्यास्त के बाद कभी भी घर में झाड़ू-पोछा नहीं करना चाहिए, इससे धन हानि होती है.

    – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन पोछा लगाने से ईशान कोण कमजोर होता है और देवगुरु बृहस्पति नाराज होते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा और घर की समृद्धि पर बुरा असर पड़ता है.

  • रांची की 5.13 एकड़ जमीन का म्यूटेशन बरकरार, हाईकोर्ट ने निजी पक्षों को दी छूट

    रांची की 5.13 एकड़ जमीन का म्यूटेशन बरकरार, हाईकोर्ट ने निजी पक्षों को दी छूट

     रांची
     झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने रांची के नामकुम अंचल स्थित 5.13 एकड़ जमीन के म्यूटेशन से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को रद कर दिया।

    खंडपीठ ने रॉबर्ट एंथनी बारला की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए 15 अक्टूबर 2025 के फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें एकल पीठ ने उपायुक्त, भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अंचल अधिकारी के म्यूटेशन के आदेशों को रद कर दिया गया था। खंडपीठ ने निजी प्रतिवादियों को संबंधित जमीन को लेकर लंबित टाइटल सूट में अपना दावा रखने की छूट दी है।

    मामला रांची के मौजा-गुंडू, थाना-हटिया की खाता संख्या 16 की जमीन से संबंधित है। कुल 26.53 एकड़ जमीन वर्ष 1944 में विरोनिका तिर्की ने रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से खरीदी थी। इसमें से 8.80 एकड़ जमीन रोमन कैथोलिक मिशन को दान कर दी गई।

    विरोनिका तिर्की की वर्ष 1983 में मृत्यु के बाद उनके चार पुत्रों ने शेष 17.73 एकड़ जमीन का पारिवारिक बंटवारा कर लिया। इसमें 5.13 एकड़ जमीन जॉन फ्रांसिस कुजूर के हिस्से में आई। जॉन फ्रांसिस कुजूर की मृत्यु के बाद वर्ष 1992 में उक्त जमीन का सक्सेशन म्यूटेशन उनकी पत्नी डॉ. लुईसा बारला कुजूर के नाम हुआ। उनके नाम म्यूटेशन को रद कराने के लिए जान के भाइयों ने जमाबंदी केस दायर किया था, जिसे वर्ष 2007 में खारिज कर दिया गया।

    डॉ. लुईसा बारला कुजूर की मृत्यु के बाद उनके कथित दत्तक पुत्र राबर्ट एंथनी बारला ने जमीन के लिए सक्सेशन म्यूटेशन का आवेदन दिया। नामकुम के अंचल अधिकारी ने 16 जनवरी 2017 को म्यूटेशन उनके नाम कर दिया। इसके खिलाफ अपील और रिवीजन भी खारिज हो गई। निजी प्रतिवादियों की ओर से दायर रिट याचिका पर एकल पीठ ने राजस्व अधिकारियों के तीनों आदेशों को रद कर दिया था।

    अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि एकल पीठ ने इस तथ्य को गलत समझा कि राबर्ट बारला के पक्ष में म्यूटेशन ट्रांसफर के आधार पर किया गया था। जबकि म्यूटेशन आवेदन और संबंधित दस्तावेजों से स्पष्ट था कि आवेदन सक्सेशन म्यूटेशन के लिए किया गया था।

    अदालत ने कहा कि म्यूटेशन केस में 16 जनवरी 2017 के आदेश में जमीन को बेचने और सेल डीड का उल्लेख होना टाइपिंग या अनजाने में हुई त्रुटि प्रतीत होती है। राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट में भी राबर्ट बारला को लुईसा बारला कुजूर का एकमात्र कानूनी उत्तराधिकारी और जमीन पर कब्जे में बताया गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ने म्यूटेशन किया था।

  • शिव पुराण में घोर कलयुग के लक्षण, जानिए कैसा होगा मनुष्य और समाज का भविष्य

    शिव पुराण में घोर कलयुग के लक्षण, जानिए कैसा होगा मनुष्य और समाज का भविष्य

    जैसे जन्म के बाद मृत्यु निश्चित है, वैसे ही युगों का परिवर्तन भी निश्चित माना गया है. हिंदू धर्म ग्रंथों में समय के चक्र को चार युगों में बांटा गया है – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलयुग. वर्तमान समय को कलयुग माना जाता है. हमारे धर्म ग्रंथों में कलयुग की विशेषताओं और उस दौरान होने वाले बदलावों का भी वर्णन मिलता है. तो आइए जानते हैं कि शिव पुराण के अनुसार घोर कलयुग आने पर मनुष्य का जीवन और समाज कैसा होगा.

    कलयुग में पुण्य कर्मों से दूर होंगे लोग
    शिव पुराण में वर्णित कलयुग के लक्षणों के अनुसार, घोर कलयुग आने पर मनुष्य पुण्य कर्मों से दूर होते चले जाएंगे और दुराचार में फंसेंगे. लोग सत्य बोलने से मुंह मोड़ लेंगे और दूसरों की निंदा करने में अधिक रुचि रखेंगे. पराए धन को हड़पने की इच्छा बढ़ेगी और दूसरे की स्त्री के प्रति आसक्ति जैसी बुराइयों का भी वर्णन मिलता है. लोग दूसरे प्राणियों की हिंसा करने से भी नहीं हिचकेंगे. मनुष्य अपने शरीर को ही आत्मा समझने लगेगा. उसमें सद्गुणों का अभाव होगा और उसकी बुद्धि पशुवत होती चली जाएगी. माता-पिता के प्रति भी द्वेष की भावना बढ़ने की बात कही गई है.

    धर्म और ज्ञान का स्वरूप बदल जाएगा
    ग्रंथ में ब्राह्मणों के संदर्भ में भी कलयुग के कुछ लक्षण बताए गए हैं. कहा गया है कि वे लोभ के प्रभाव में आ सकते हैं और वेदों को बेचकर जीविका चलाने जैसी प्रवृत्तियां बढ़ सकती हैं. विद्या का उद्देश्य ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि केवल धन कमाना रह जाएगा.

    लोग अपनी परंपरागत जिम्मेदारियों और कर्मों को छोड़ देंगे. दूसरों को धोखा देने की प्रवृत्ति बढ़ेगी. नियमित धार्मिक कर्मकांड और संध्यावंदन जैसी परंपराओं से दूरी बढ़ने की बात भी कही गई है. ब्रह्मज्ञान के प्रति भी लोगों की रुचि कम होने का वर्णन मिलता है.

    क्षत्रियों में शौर्य की कमी की बात
    कलयुग के वर्णन में क्षत्रिय वर्ग के बारे में भी कहा गया है कि वे धर्म का त्याग करने लगेंगे. उनमें शौर्य और पराक्रम की कमी होगी और वे अनुचित तरीकों से जीवनयापन करने लगेंगे. धर्म और कर्तव्य के स्थान पर गलत कार्यों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति बढ़ने का वर्णन मिलता है.

    व्यापार में छल-कपट बढ़ने की बात
    वैश्य वर्ग के संदर्भ में ग्रंथ में धर्म और संस्कारों से दूर होने की बात कही गई है. धन कमाना ही उनका प्रमुख उद्देश्य बन जाएगा. व्यापार में नाप-तौल की बेईमानी और दूसरे तरीकों से लोगों को ठगने जैसी प्रवृत्तियों का भी वर्णन मिलता है. इसी तरह, शूद्रों के बारे में भी कहा गया है कि वे अपने निर्धारित कर्मों को छोड़कर दूसरे वर्गों के आचार-विचार अपनाने लगेंगे. बाहरी वेशभूषा और दिखावे पर अधिक जोर होगा, जबकि अपने कर्तव्यों से दूरी बढ़ती जाएगी.

    विद्वान होकर भी विवाद में उलझेंगे लोग
    कलयुग के लोगों के स्वभाव को लेकर भी कई बातें कही गई हैं. मनुष्य अपने धर्म और कर्तव्य से दूर हो सकता है और उसके विचार धर्म के विपरीत होने लगेंगे. कुटिलता और दूसरों की निंदा जैसी प्रवृत्तियां बढ़ने की बात कही गई है.

    कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति धनवान होगा तो वह उसका इस्तेमाल गलत कामों में कर सकता है. वहीं, विद्वान व्यक्ति भी ज्ञान का उपयोग सत्य की खोज के बजाय वाद-विवाद में अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए कर सकता है.

    लोग स्वयं को ऊंचा और कुलीन समझकर सामाजिक मर्यादाओं की सीमाएं भी तोड़ेंगे. अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच ऐसे वैवाहिक और सामाजिक संबंधों का वर्णन मिलता है, जिन्हें उस समय की व्यवस्था के विरुद्ध माना गया था.

    कलयुग की स्त्रियों के बारे में क्या कहा गया है?
    शिव पुराण के इस वर्णन में कलयुग की स्त्रियों के संदर्भ में भी कुछ नकारात्मक लक्षण बताए गए हैं. इसमें सदाचार से दूर होने, पति का अपमान करने और सास-ससुर के प्रति द्वेष रखने जैसी प्रवृत्तियों का उल्लेख मिलता है. उनके आचरण, खान-पान और व्यवहार में बदलाव आने की बात कही गई है. पति की सेवा और पारिवारिक जिम्मेदारियों से विमुख होने जैसे लक्षणों का भी वर्णन मिलता है.

    हालांकि, इन वर्णनों को उस समय के धार्मिक-सामाजिक संदर्भ में समझना जरूरी है. इन्हें आज के समाज के हर व्यक्ति या हर महिला पर लागू करना उचित नहीं होगा.

    क्या आज दिखाई दे रहे हैं कलयुग के ये लक्षण?
    शिव पुराण में कलयुग को लेकर बताए गए इन वर्णनों को पढ़ने के बाद कई लोगों को लगता है कि आज के समाज में भी इनमें से कुछ प्रवृत्तियां दिखाई देती हैं. झूठ, लालच, छल, हिंसा, स्वार्थ और रिश्तों में बढ़ती दूरी जैसी समस्याएं आज भी समाज में मौजूद हैं. लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी प्राचीन ग्रंथ में वर्णित भविष्यवाणी और आधुनिक घटनाओं के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता. ये बातें धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों में वर्णित युग-चक्र के संदर्भ में देखी जाती हैं.

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलयुग की अवधि बहुत लंबी मानी गई है. इसलिए वर्तमान समय को कलयुग का शुरुआती चरण माना जाता है और इसके समाप्त होने में अभी बहुत लंबा समय बाकी बताया जाता है.

  • EV से सफर होगा आसान, राजस्थान में 250 चार्जिंग स्टेशन के मेगा प्रोजेक्ट की तै

    EV से सफर होगा आसान, राजस्थान में 250 चार्जिंग स्टेशन के मेगा प्रोजेक्ट की तै

    जयपुर
    राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चलाने वाले चालकों और लंबे सफर पर निकलने वाले यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RRECL) ने राज्य में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस योजना के पहले चरण के तहत राजस्थान के 6 बड़े शहरों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर 250 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, बल्कि चार्जिंग स्टेशन से होने वाली आय को राज्य सरकार के राजस्व मॉडल से जोड़ना भी है।

    निकाय चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने का काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में वाहन चालकों को बैटरी खत्म होने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।

    गौरतलब है कि राजस्थान में तेजी से बढ़ रही इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर, 3-व्हीलर और 4-व्हीलर गाड़ियों की संख्या को देखते हुए चार्जिंग प्वाइंट्स की किल्लत एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। विशेषकर हाईवे पर सफर करते समय चालकों को हमेशा बैटरी डिस्चार्ज होने का डर सताता रहता था। इसे ध्यान में रखते हुए रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन ने निजी एजेंसियों के साथ मिलकर पीपीपी (PPP) मॉडल पर काम करने की रणनीति बनाई है।

    योजना के मुताबिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा रियायती दर पर सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, टेंडर प्रक्रिया में उन निजी कंपनियों या एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो चार्जिंग से होने वाले कुल राजस्व में राज्य सरकार को सबसे ज्यादा हिस्सेदारी की पेशकश करेंगी।

    रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन ने पहले चरण में उन मार्गों और शहरों को प्राथमिकता दी है जहां व्यावसायिक और निजी वाहनों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है।

    जयपुर-आगरा हाईवे: पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण इस रूट पर प्रमुख जगहों पर चार्जिंग प्वाइंट्स बनाए जाएंगे।

    जयपुर-कोटा रूट: हाड़ौती अंचल को राजधानी से जोड़ने वाले इस व्यस्त मार्ग पर ईवी चालकों को हर कुछ किलोमीटर पर चार्जिंग की सुविधा मिलेगी।

    जयपुर-बीकानेर हाईवे: शेखावाटी और पश्चिमी राजस्थान को जोड़ने वाले इस लंबे रूट पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

    जयपुर-अजमेर-सिरोही रूट: धार्मिक पर्यटन और गुजरात सीमा की ओर जाने वाले इस सबसे बड़े हाईवे कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशनों का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा।

    धार्मिक और पर्यटन स्थल: प्रमुख हाईवे के अलावा खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, पुष्कर और नाथद्वारा जैसे भारी फुटफॉल वाले धार्मिक स्थलों पर भी ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

    80 प्रतिशत तक सब्सिडी, सरकार तय करेगी चार्जिंग रेट
    इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राजस्थान सरकार ने इस योजना में भारी सब्सिडी का प्रावधान रखा है।

    भूमि और सब्सिडी मॉडल: चार्जिंग स्टेशन के निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 70 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसमें राज्य सरकार और भूमि उपलब्ध कराने वाले संबंधित विभाग का शेयर शामिल होगा।

    सरकारी नियंत्रण में रहेंगे रेट: निजी कंपनियों को काम मिलने के बावजूद वाहन चालकों से मनमाना पैसा नहीं वसूला जा सकेगा। चार्जिंग की दरें (Rates) पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएंगी और कोई भी कंपनी तय दर से अधिक राशि नहीं वसूल पाएगी।

    सरकारी जमीन का आवंटन: सभी चार्जिंग स्टेशनों के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन और चिह्नीकरण पूरा किया जा चुका है, जिससे काम शुरू करने में देरी न हो।

    2030 तक ईवी बिक्री में 30% हिस्सेदारी का लक्ष्य
    भारत और राजस्थान का ईवी बाजार आने वाले वर्षों में एक बड़ा आर्थिक बदलाव देखने वाला है। राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए लक्ष्यों के अनुरूप राजस्थान भी अपनी ईवी नीतियों को लागू कर रहा है।

    बाजार का तेजी से विस्तार: भारतीय ईवी बाजार जो वर्ष 2025 में लगभग 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर का था, उसके वर्ष 2034 तक बढ़कर 191.04 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

    ईवी बैटरी मार्केट में उछाल: देश में ईवी बैटरी का बाजार वर्ष 2034 तक 15.90 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

    30% बिक्री का नेशनल टारगेट: केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल नए वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

    13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य: देश भर में 2030 तक 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है, जिसमें राजस्थान एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है।

    क्या पड़ेगा सकारात्मक असर?
    राजस्थान में 250 नए चार्जिंग स्टेशन लगने का सबसे बड़ा फायदा राज्य के उन आम नागरिकों को मिलेगा जो महंगे पेट्रोल और डीजल के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का मन बना रहे थे।

    चार्जिंग नेटवर्क की कमी के कारण अब तक लोग हाईवे पर ईवी ले जाने से कतराते थे। लेकिन जयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर और आगरा रूट्स पर फास्ट चार्जिंग प्वाइंट्स उपलब्ध होने से अंतर-शहर यात्रा आसान और सस्ती हो जाएगी। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह कदम राजस्थान में हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत साबित होगा।