Author: NewseDay

  • मेहनत से विकास की नई कहानी लिख रहे श्रमिक, विश्वकर्मा जयंती पर महासम्मेलन

    मेहनत से विकास की नई कहानी लिख रहे श्रमिक, विश्वकर्मा जयंती पर महासम्मेलन

    मेहनत से विकास की नई इबारत लिख रहे श्रमिक, विश्वकर्मा जयंती पर होगा भव्य श्रमिक महासम्मेलन 

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन करेंगे अध्यक्षता

    17 सितंबर को रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में होगा आयोजन

    रायपुर,
    भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर 17 सितंबर को राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रमिकों के सम्मान, उनके योगदान को रेखांकित करने और श्रम शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से आयोजित इस महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी) एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन करेंगे।

    सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा, रायपुर में दोपहर 12 बजे से आयोजित होने वाला यह महासम्मेलन प्रदेश के श्रमवीरों के सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर होगा। निर्माण से लेकर उद्योग, कृषि, सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में अपने परिश्रम से प्रदेश के विकास में योगदान देने वाले श्रमिक इस आयोजन के केंद्र में रहेंगे।

    भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रम, कौशल, निर्माण और सृजन की शक्ति का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजित श्रमिक महासम्मेलन के माध्यम से श्रम के सम्मान और श्रमिकों के महत्व का संदेश प्रदेशभर में पहुंचाया जाएगा। श्रमिकों की मेहनत और कौशल से ही विकास की मजबूत नींव तैयार होती है। छत्तीसगढ़ के विकास में श्रम शक्ति की इसी महत्वपूर्ण भूमिका को यह आयोजन रेखांकित करेगा।

    कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और मंत्री केदार कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इनके साथ मंत्री रामविचार नेताम, दयालदास बघेल, श्याम बिहारी जायसवाल, ओ.पी. चौधरी, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, गजेन्द्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, डॉ. रामप्रताप सिंह, योगेश दत्त मिश्रा और किशोर महानंद सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।

    महासम्मेलन में महापौर श्रीमती मीनल चौबे तथा जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल की भी सहभागिता रहेगी।

    विश्वकर्मा जयंती के इस विशेष अवसर पर आयोजित श्रमिक महासम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के श्रमवीरों के परिश्रम, कौशल और छत्तीसगढ़ के विकास में उनके अमूल्य योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का सार्वजनिक अभिव्यक्तिकरण होगा।

  • यूपी के पीआरडी जवानों को डबल फायदा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा; कैशलेस इलाज को मंजूरी

    यूपी के पीआरडी जवानों को डबल फायदा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा; कैशलेस इलाज को मंजूरी

    पीआरडी जवानों को योगी सरकार का दोहरा तोहफा, ड्यूटी भत्ता बढ़ा और कैशलेस इलाज को मंजूरी

    500 से बढ़कर 600 रुपये हुआ दैनिक ड्यूटी भत्ता, 27,794 स्वयंसेवकों को मिलेगा लाभ

    हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार उठाएगी 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार

    31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों के हित में दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने पीआरडी स्वयंसेवकों का दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने के साथ ही स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना को भी स्वीकृति दी है। दोनों फैसलों से पीआरडी स्वयंसेवकों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मिलेगी।

    हर महीने 3000 रुपये तक बढ़ेगा मानदेय, सरकार पर 101.44 करोड़ का अतिरिक्त भार
    योगी कैबिनेट के फैसले से 30 दिन की ड्यूटी करने वाले पीआरडी स्वयंसेवक के मानदेय में सीधे 3,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि होगी। इससे प्रदेश के 27,794 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि भत्ते में वृद्धि से राज्य सरकार पर प्रतिवर्ष 101.44 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। इसके बाद पीआरडी स्वयंसेवकों पर कुल अनुमानित वार्षिक व्यय 6 अरब 8 करोड़ 68 लाख 86 हजार रुपये हो जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 45 करोड़ रुपये की तत्काल व्यवस्था की गई है।

    31,130 पंजीकृत स्वयंसेवकों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ
    योगी कैबिनेट ने पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। वर्तमान में पंजीकृत 31,130 पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रति स्वयंसेवक 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से योजना पर करीब 9.34 करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष महीनों के लिए अनुपूरक अनुदान से 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    साचीज के जरिए लागू होगी योजना, सेवा अवधि तक मिलेगा स्वास्थ्य कवच
    मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से प्रस्तावित है। योजना का लाभ स्वयंसेवक और उनके आश्रितों को सेवा अवधि के दौरान ही मिलेगा। ऐसे स्वयंसेवक अथवा आश्रित, जो पहले से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान जैसी केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा पोषित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे।

  • यूपी में महिला वोटबैंक अहम, योगी की महिला उद्यमी योजना से आर्थिक स्वावलंबन पर जोर

    यूपी में महिला वोटबैंक अहम, योगी की महिला उद्यमी योजना से आर्थिक स्वावलंबन पर जोर

    लखनऊ 
    उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई हवा बह रही है. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा और निर्णायक मोहरा बनकर उभरी हैं राज्य की महिला वोटर. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना के जरिए सीधे 1 करोड़ महिलाओं को साधने की एक ऐसी रणनीति तैयार की है, जिसने सूबे के चुनावी माहौल में गर्मी बढ़ा दी है. जब सीधे महिलाओं के खाते में ब्याजमुक्त एक लाख रुपए पहुंचेंगे तो बीजेपी को उसी जादू के दोहराने की उम्मीद है, जो पिछले साल बिहार चुनाव में देखा गया। 

    उत्तर प्रदेश में पहले से ही कानून-व्यवस्था, एंटी-रोमियो स्क्वाड और सेफ सिटी प्रोजेक्ट्स की वजह से योगी आदित्यनाथ को महिला वोटरों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है. लेकिन इस बार बात सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है. अब मुकाबला आर्थिक स्वावलंबन और आधी आबादी की जेब को सीधे राहत पहुंचाने का है. इस नए राजनीतिक दांव को उस समय के साथ जोड़कर देखा जा रहा है जब बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के जरिए एक बड़ा कार्ड खेला था. अब सवाल यह है कि क्या बिहार का वही फॉर्मूला यूपी की सरजमीं पर भी कमाल दिखाएगा?

    आधी आबादी को साधने की यह होड़ अचानक तेज नहीं हुई है. विपक्ष की तरफ से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार अपनी पत्नी और सांसद डिंपल यादव को आगे करके महिला वोटरों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में योगी आदित्यनाथ का यह मास्टरस्ट्रोक उनके सबसे मजबूत वोटबैंक की नींव को और ज्यादा पक्का करने की ठोस कोशिश माना जा रहा है. हालांकि, योगी आदित्यनाथ और बीजेपी को महिलाओं का एकतरफ समर्थन हासिल रहा है, जिसकी एक झलक 2022 के यूपी चुनाव नतीजों में देखी गई. जहां बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच पुरुषों के वोट प्रतिशत में तो महज 4 फीसदी का अंतर था, लेकिन महिला वोटरों ने योगी के पक्ष में बंपर मतदान किया. बीजेपी को 48 फीसदी महिला वोट मिले थे, जबकि सपा को महज 32 फीसदी। 

    बिहार का वो सबक, जिसने बदल दी सियासत की दिशा
    यूपी और बिहार की जातिगत पॉलिटिक्स कमोबेश एक जैसी ही है. और पेंचीदा भी. जिसमें गारंटी कम, रिस्क ज्यादा है. जातियों को अपने पक्ष में साधने की हर पार्टी कोशिश करती है. ऐसे में बीजेपी ने कई राज्यों में महिला वोटरों के रूप में एक स्थायी वोटबैंक कायम किया है। 

    बिहार के विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना एक ऐसा पासा साबित हुई थी, जिसने पूरे चुनाव का रुख बदल दिया. चुनाव की आहट के साथ ही राज्य के हर परिवार की एक महिला को सीधे बैंक खाते में आर्थिक मदद और रोजगार शुरू करने का ऑफर दिया गया. इस योजना ने सीधे तौर पर गांव-गांव की महिलाओं को सरकार से जोड़ा और जब नतीजे आए तो यह साफ दिखा कि महिला वोट बैंक किस तरह किसी भी दल की किस्मत पलटने का माद्दा रखता है। 

    बिहार के इस सफल मॉडल ने यह साबित कर दिया कि जब महिलाओं को सीधे आर्थिक रूप से सशक्त किया जाता है, तो वे मतदान केंद्र तक जाकर अपनी पसंद जाहिर करने में जरा भी नहीं हिचकतीं. यही वजह है कि यूपी के चुनावी मौसम से ठीक पहले योगी सरकार ने भी इसी राह पर तेजी से कदम आगे बढ़ाए हैं। 

    यूपी की योजना: 1 करोड़ महिलाओं को 1 लाख रुपए का बड़ा आधार
    योगी सरकार की 'महिला उद्यमी क्रेडिट योजना' का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि इसका असर सीधा और व्यापक हो. योजना के तहत उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी करीब 1 करोड़ महिलाओं को 1 लाख रुपए तक का ब्याजमुक्त क्रेडिट उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी है। 

    इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका आसान और पारदर्शी तरीका है. महिलाओं को बिना किसी ब्याज के तीन किस्तों में पैसे दिए जाएंगे. पहली किस्त 20,000 रुपए की होगी, जिसे दिसंबर से वितरित करने की तैयारी है. इसके बाद समय पर भुगतान करने वाली महिलाओं को 30,000 रुपए और फिर 50,000 रुपए की तीसरी किस्त मिलेगी. यानी कोई कागजी उलझन नहीं, कोई ब्याज का बोझ नहीं और सीधे बैंक खाते में मदद। 

    दोनों योजनाओं में क्या है समानता और क्या है नयापन?
    बिहार की तरह यूपी की योजना का नारा भी वही है- आधी आबादी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना। 

    समानता की बात करें तो दोनों ही योजनाओं में सरकार की मंशा किसी बिचौलिए के बिना सीधे महिलाओं तक पैसा पहुंचाने की है. दोनों जगहों पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का सहारा लिया गया है ताकि एक-एक पाई सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचे. इसके साथ ही दोनों योजनाओं में दिए जाने वाले पैसे को ब्याजमुक्त रखा गया है ताकि महिलाओं पर कर्ज का भारी बोझ न पड़े। 

    हालांकि, यूपी की योजना का दायरा और तरीका थोड़ा अलग है. बिहार जहां एकमुश्त और चरणबद्ध वित्तीय सहायता देने पर केंद्रित था, वहीं यूपी सरकार ने इसे स्वयं सहायता समूहों (SHG) के एक मजबूत नेटवर्क से जोड़ दिया है. यूपी में सरकार का लक्ष्य केवल पैसे बांटना नहीं, बल्कि महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाकर गांव-गांव में छोटे-छोटे कुटीर उद्योग, सिलाई केंद्र, डेयरी उत्पादन और ई-रिक्शा संचालन जैसे कामों से जोड़ना है। 

    कानून-व्यवस्था के भरोसे से आगे आर्थिक आत्मनिर्भरता का सफर
    उत्तर प्रदेश की राजनीति को गहराई से समझने वाले जानते हैं कि 2017 के बाद से योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत राज्य की कानून-व्यवस्था रही है. सड़कों पर सुरक्षा का माहौल, अपराधियों पर कार्रवाई और सेफ सिटी जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच योगी सरकार के प्रति एक गहरा विश्वास पैदा किया। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर मंचों से इस बात को दोहराते रहे हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और उनका स्वावलंबन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी सोच को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था- 

    "अगर प्रदेश की आधी आबादी को घर के भीतर ही सीमित रखा जाएगा, तो राज्य का विकास अधूरा रहेगा. हमारी सरकार महिलाओं की सुरक्षा से लेकर उनके सम्मान और स्वावलंबन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. जब गांव की हमारी बहनें आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो पूरा उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा। 

    यूपी की महिला वोटरों में योगी की ओर से मिला सुरक्षा का भरोसा पहले से मजबूत था, अब उसमें एक लाख रुपए के ब्याजमुक्त क्रेडिट का आर्थिक संबल जोड़कर इस वोटबैंक के इर्द-गिर्द एक अभेद्य किला बनाने की तैयारी है। 

    विपक्ष की चुनौती और डिंपल यादव का फैक्टर
    इस सियासी बिसात पर समाजवादी पार्टी भी शांत नहीं बैठी है. अखिलेश यादव जानते हैं कि अगर 2027 में सत्ता की ओर बढ़ना है तो महिला वोटरों के बीच सेंध लगानी ही होगी. इसके लिए सपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव को महिला संवाद कार्यक्रमों के अग्रिम मोर्चे पर खड़ा कर दिया है। 

    डिंपल यादव लगातार महिलाओं के मुद्दों, महंगाई, रसोई के बजट और महिला सुरक्षा पर योगी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं. वे खुद को गांव-देहात की महिलाओं से जोड़कर सपा के पक्ष में एक सॉफ्ट कॉर्नर बनाने में जुटी हैं. अखिलेश यादव का यह दांव काम न कर जाए, इसी आशंका के काट के रूप में योगी सरकार की यह योजना बेहद अहम मानी जा रही है. सपा के भावुक अपीलों वाले दांव के जवाब में भाजपा का यह कदम सीधे आर्थिक राहत देने वाला एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक हमला है। 

    क्या यूपी में दोहराया जाएगा बिहार का करिश्मा?
    उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति हमेशा से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. लेकिन हाल के वर्षों में 'महिला वोटबैंक' एक ऐसी कैटेगरी बनकर उभरी है जो जाति और मजहब की दीवारों को तोड़कर वोट करती है। 

    दिसंबर से जब 1 करोड़ महिलाओं के खातों में 20,000 रुपए की पहली किस्त पहुंचनी शुरू होगी, तो इसका सीधा असर गांव-गांव के घरों पर पड़ेगा. एक लाख करोड़ रुपये के विशाल दायरे वाली यह योजना यदि धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू हो जाती है, तो यह चुनाव की पूरी पटकथा को बदलने की क्षमता रखती है। 

    योगी आदित्यनाथ ने अपने शासन के मजबूत पहलू यानी कानून-व्यवस्था के साथ जब इस आर्थिक स्वावलंबन को जोड़ा है, तो यह विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. बिहार में जिस तरह महिला वोटरों ने सरकार की वापसी का रास्ता साफ किया था, ठीक उसी तर्ज पर यूपी में भी इस योजना को एक 'गेमचेंजर' माना जा रहा है. 2027 की चुनावी जंग में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष के वादे भारी पड़ते हैं या योगी सरकार का यह एक लाख रुपए का ‘आत्मनिर्भरता मॉडल। 

  • पटना ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा, ब्राउन शुगर में पैरासिटामोल मिलावट की जांच

    पटना ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा, ब्राउन शुगर में पैरासिटामोल मिलावट की जांच

    पटना
    ब्राउन शुगर में पैरासिटामोल मिलाने का शक होने पर पुलिस, औषधि और खाद्य संरक्षा विभाग ने जब्त ड्रग्स की जांच तेज कर दी है। नशे के कारोबार की जांच अब सिर्फ ब्राउन शुगर की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है।

    नशीले पदार्थों में भी मिलावट का खेल शुरू हो गया है। हाल में फुलवारीशरीफ से गिरफ्तार ड्रग पैडलर आकाश कुमार से मिली जानकारी की पड़ताल भोजपुर से फतुहा की एक फूड सप्लीमेंट कंपनी से होते हुए दिनकर गोलंबर स्थित मेडिकल स्टोर तक पहुंची है।

    फूड सप्लीमेंट कंपनी में कोई ऐसा संदिग्ध उपकरण या सामग्री नहीं मिली, जिससे यह साबित हो कि वहां नशीली दवा तैयार की जा रही थी। ऐसे में उसके बनाए छह उत्पादों को जांच के लिए प्रयोगशाल भेजा गया है ताकि यह पता चल सके कि कहीं इसमें ड्रग्स का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है।

    वहीं, औषधि विभाग मेडिकल स्टोर से लेकर दवा कंपनी तक से पड़ताल कर रहा है, किस आधार पर इतनी बड़ी मात्रा में पैरासिटामोल ब्राउन शुगर कारोबारियों को बेची गई।

    ब्राउन शुगर में पैरासिटामोल मिलावट की जांच के लिए पुलिस, औषधि विभाग निरीक्षक सत्यनारायण सरन व इंद्रकांत, खाद्य संरक्षा विभाग अभिहित पदाधिकारी सुदामा चौधरी व डा. सुदिन कुमार सुमन आदि की की टीम बनाई गई है।

    असली खतरा अज्ञात मिश्रण
    हेरोइन में एविल-सेट्रेजिन, बेंजोडायजेपाम, बार्बियूरेट्स जैसे पदार्थ तो सफेद ब्राउन शुगर की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें पैरासिटामोल टैबलेट को पीस कर मिलाने की आशंका है। ब्राउन शुगर या हेरोइन जैसे अवैध ड्रग्स में कौन से पदार्थ कितनी मात्रा में है, इसकी कोई जानकारी नहीं होती।

    यही कारण है इसकी हर खेप का असर व जहरीलापन अलग-अलग होता है। पैरासिटामोल खुद नशीली दवा नहीं है, लेकिन यदि इसे पैडलर मिला रहे हैं तो सिर्फ मात्रा बढ़ती है और नशे कारोबारियों का फायदा बढ़ता है।

    यदि, इसी पैरासिटामोल को ब्राउन शुगर तैयार करने के क्रम में मिलाया जाता है, तो एक अज्ञात रासायनिक मिश्रण बनता है, जिसकी घातकता अभी अज्ञात है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि ब्राउन शुगर मूल तत्व अफीम में यदि ऐसी दवाएं मिलाई जा रही हैं तो मस्तिष्क व सांस की गतिविधि में दबाव बढ़ने से बेहोशी, सांस धीमा होना, ओवरडोज का खतरा, पैरासिटामोल की अत्यधिक मात्रा अलग से लिवर गंभीर नुकसान हो सकता है। कई बार मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी से मौत तक हो सकती है।

    फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट खोलेगी कई राज
    जांच तथ्यों के अनुसार, फूड सप्लीमेंट कंपनी के संचालक ने दिनकर गोलंबर स्थित मेडिकल स्टोर से पैरासिटामोल उपलब्ध कराई थी। औषधि विभाग मेडिकल स्टोर को सील कर खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बिल, स्टाक आदि के आधार पर पूछताछ कर रही है।

    पुलिस देख रही है कि मेडिकल स्टोर से लिया गया पैरासिटामोल नशे के कारोबारियों तक कैसे पहुंचा, इसका इस्तेमाल ब्राउन शुगर में मिलावट के लिए किया या निर्माण के लिए।

    वहीं, फोरेंसिक लैब में जब्त ड्रग में मिले विशिष्ट रासायनिक घटकों की प्रोफाइलिंग से अलग-अलग खेपों या आपराधिक मामलों के बीच संबंध तलाशा जाएगा।

    ब्राउन शुगर में मिलावट के लक्षण
    ब्राउन शुगर-हेरोइन में कैफीन, पैरासिटामोल, बेंजोडायजेपाम, बार्बियूरेट्स जैसी दवाएं मिलाने से सेवन के बाद व्यक्ति में अचानक अत्यधिक सुस्ती, कमजोरी, संतुलन बिगड़ना, अस्पष्ट बोलना व संज्ञानात्मक गड़बड़ी के लक्षण सामने आते हैं।

    इन जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं अब निगाहें

    • फूड सप्लीमेंट कंपनी से लिए गए छह नमूनों में कौन-कौन से रासायनिक घटक मिले, कोई औषधीय पदार्थ मौजूद है या नहीं?
    • पैरासिटामोल की खरीद किस मात्रा में और किसके लिए हुई?
    • मेडिकल स्टोर के बिल और स्टाक रजिस्टर में क्या दर्ज है?
    • कंपनी और मेडिकल स्टोर के बीच दवा के लेन-देन का स्वरूप क्या है?
    • पकड़े गए आरोपितों के बयान की इन दस्तावेजों से पुष्टि होती है या नहीं?
    • ब्राउन शुगर के जब्त नमूने और फूड कंपनी के सैंपल में कोई रासायनिक समानता है या नहीं?

        औषधि विभाग के साथ पुलिस, खाद्य संरक्षा विभाग व आयुष विभाग की संयुक्त टीम इस मामले की जांच कर रही है। ब्राउन शुगर आदि में कौन से पदार्थ मिलाए गए पुलिस फोरेंसिक लैब में इसकी जांच करा रही है। भारी मात्रा में पैरासिटामोल कैसे किसी व्यक्ति को बेची जा रही थी, इस दिशा में औषधि विभाग की टीम जांच कर रही है। मेडिकल स्टोर से सीएंडएफ व कंपनी तक से इस नेटवर्क की जांच की जा रही है। -नित्यानंद किसलय,

    राज्य औषधि नियंत्रक
        ब्राउन शुगर सफेद रंग का होता है, ऐसे में पैरासिटामोल टैबलेट इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए ही मिलाया जाता होगा ताकि उससे अधिक लाभ कमाया जा सके। हेराइन में एविल आदि मिलाते हैं, जिससे घातक लिवर इंजरी की आशंका बढ़ जाती है। -प्रो. हितेष मिश्रा,
    फार्माकोलाजी विभाग, आइजीआइएमएस

        ब्राउन शुगर-हेरोइन जैसे ड्रग्स में एविल, बेंजोडायजापाम, बार्बियूरेट्स व पैरासिटामोल जैसी दवाएं मिलाई जाती हैं। मिलावट के कारण इसकी लत छुड़ाना अपेक्षाकृत शुद्ध ब्राउन शुगर या हेराइन की तुलना में आसान होता है। हालांकि, यदि इस फेर में ओवरडोज होता है तो परिणाम घातक हो सकते हैं। -डॉ. विवेक विशाल, नशा मुक्ति विशेषज्ञ

     

  • वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और सुधार का आखिरी मौका, झारखंड में तारीख 30 सितंबर

    वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और सुधार का आखिरी मौका, झारखंड में तारीख 30 सितंबर

    रांची
    भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावा-आपत्ति चरण की समय सीमा बढ़ाकर अब 30 सितंबर तक कर दी है। अब पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने या प्रारुप मतदाता सूची में अपने नाम आदि में सुधार के लिए इस अवधि तक निर्धारित फार्म भर सकेंगे।

    दावा-आपत्ति चरण की समय सीमा को दूसरी एवं अंतिम बार अवधि विस्तार दिया गया है। राज्य के प्रत्येक पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हो सके, इस उद्देश्य से यह अवधि विस्तार दिया गया है। पहले दावा-आपत्ति चरण की सीमा 15 सितंबर को खत्म हो रही थी।

    राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि जो नागरिक एसआईआर के तहत प्रकाशित प्रारुप मतदाता सूची में अभी तक सम्मिलित नहीं हैं, वे अब 30 सितंबर तक ईसीआइनेट के माध्यम से अथवा अपने संबंधित बीएलओ से संपर्क कर फार्म-6 एवं आवश्यक घोषणा पत्र अवश्य जमा करें।

    उनके अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाताओं की सुविधा को देखते हुए एसआइआर के तहत दावा-आपत्ति की पूर्व निर्धारित अंतिम तिथि चार सितंबर को बढ़ाते हुए 15 सितंबर किया गया था। विभिन्न स्टेकहोल्डर के माध्यम से प्राप्त हो रहे अनुरोध एवं प्राप्त हो रहे फार्म-6, फार्म-7 एवं फार्म–8 की संख्या को देखते हुए दावा आपत्ति की तिथि अंतिम बार बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया गया है।

    इससे उन पात्र भारतीय नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम सम्मिलित कराने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जिनका नाम प्रारुप मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं हो पाया है। इसके साथ-साथ फार्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करा सकते हैं तथा फार्म-8 के माध्यम से अपने संबंधित मतदान केंद्र के लिए नाम स्थानांतरित एवं प्रविष्टियों में सुधार करा सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि ऐसे सभी पात्र भारतीय नागरिक, जो एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरे कर चुके हैं और जिनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं है, वे इस अतिरिक्त अवसर का लाभ उठाते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर फार्म-6 अवश्य भरें।

    क्या है फार्म जमा होने की वर्तमान स्थिति
        फार्म-6 के माध्यम से प्राप्त आवेदन : 4,86,783
        फार्म-6 ए के माध्यम से प्राप्त आवेदन : 87
        फार्म-7 के माध्यम से प्राप्त आवेदन/आपत्तियां : 5,689
        फार्म-8 के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन : 3,11,770

     

  • बिहार में UCC पर आमने-सामने JDU-RJD, जीतन राम मांझी ने समर्थन में रखी बात

    बिहार में UCC पर आमने-सामने JDU-RJD, जीतन राम मांझी ने समर्थन में रखी बात

    पटना
    बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी संग्राम मचा हुआ है। इस बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने यूसीसी पर अपनी बात रखते हुए इसे लागू किए जाने का समर्थन किया है। दरअसल केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कुछ दिनों पहले कहा था कि साल 2029 से पहले भाजपा शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा। अमित शाह के इस ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू विधायक श्याम रजक ने कह दिया था कि बिहार में यूसीसी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, बाद में जदयू नेता विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यूसीसी के प्रावधानों पर विमर्श के बाद पार्टी कोई निर्णय़ लेगी।

    अब केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने UCC को लेकर एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जीतन राम मांझी ने तीन तलाक और धारा 370 पर भी अपना रुख साफ किया है। जीतन राम मांझी ने एक्स पर लिखा, 'बाबा साहेब का संविधान देश के धर्मनिरपेक्षता की नीति पर आधारित है जो हमें समानता का भी अधिकार देता है। UCC के अनुपालन में किसी प्रकार के दांव पेच की बात करना मेरी समझ में गैर संवैधानिक है जिसे मोदी जी के नेतृत्व वाली हमारी सरकार ने काफी सोच समझकर लागू करने का निर्णय लिया है।

    वैसे देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर UCC अनुपालन हेतु हमारी सरकार को निर्देशित किया था जिसे पुरानी सरकारों ने कभी तव्वजो नहीं दिया। पर हम हर संवैधानिक व्यवस्था को लागू करने के पक्षधर हैं चाहें वह ट्रिपल तलाक़ का मामला हो या धारा-370 का। वैसे मैं सरकार के मंत्री होने के नाते एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मोदी जी के नेतृत्व वाली हमारी सरकार ना तो किसी का चेहरा देखकर काम करेगी ना ही किसी ख़ास को खुश करने के लिए।

    “अब तालाब के पानी पर सबों का अधिकार होगा”
    बराबरी का अधिकार मतलब UCC…

    हम हर वह फ़ैसला ले रहें हैं जो राष्ट्रहित में हैं।

    क्योंकि हम रहें या ना रहें ये देश रहना चाहिए।

    धन्यवाद मोदी जी,धन्यवाद अमित शाह जी।

    आप हैं तो देश निश्चित है,देश के अवाम को भरोसा है।'

    तेजस्वी यादव यूसीसी पर क्या बोले
    बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद ) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। मंगलवार को तेजस्वी यादव ने आरोप था लगाया कि बिहार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के सवाल पर स्पष्ट रुख अपनाने से हिचकिचाकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की मौजूदा स्थिति के लिए यादव ने उसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को जिम्मेदार ठहराया था।

    पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से कहा था कि संजय झा ने जदयू को बर्बाद कर दिया है। वह भाजपा की इच्छा के अनुसार पार्टी चला रहे हैं। अब जदयू केवल भाजपा के इशारे पर काम करती है। इस मामले में भी वही हुआ है। तेजस्वी यादव ने दोहराया कि हम इस तरह के कानून के विरोध में रहे हैं और हर स्तर पर इसका विरोध करते रहेंगे।

  • पूर्व अग्निवीरों के लिए नौकरी का बड़ा मौका, यूपी की इन भर्तियों में 20% आरक्षण

    पूर्व अग्निवीरों के लिए नौकरी का बड़ा मौका, यूपी की इन भर्तियों में 20% आरक्षण

    पूर्व अग्निवीरों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, जेल वार्डर-प्रवर्तन सिपाही भर्ती में मिलेगा 20% क्षैतिज आरक्षण

    अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की विशेष छूट से बढ़ेंगे अवसर

    सैन्य प्रशिक्षण व अनुशासन से और ज्यादा मजबूत होगी जेलों की सुरक्षा

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने वाला महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। योगी सरकार ने देशसेवा के बाद लौटने वाले पूर्व अग्निवीरों को प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए जेल वार्डर और परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की विशेष छूट भी मिलेगी। 

    जेल वार्डर और प्रवर्तन सिपाही भर्ती में 20% क्षैतिज आरक्षण

    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग में जेल वार्डर तथा परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू होगा। पूर्व अग्निवीर जिस सामाजिक श्रेणी से संबंधित होंगे, उन्हें उसी श्रेणी में इस आरक्षण का लाभ देकर समायोजित किया जाएगा।

    अधिकतम आयु सीमा में 3 साल की विशेष छूट

    4 वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीरों को भूतपूर्व सैनिकों की तर्ज पर अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट दी जाएगी। आयु की गणना में उनकी 4 वर्ष की सेवा अवधि को घटाने का प्रावधान किया गया है। इससे अधिक संख्या में पूर्व अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

    सैन्य अनुशासन से जेलों की सुरक्षा होगी मजबूत

    प्रदेश की जेलों में सामान्य अपराधियों के साथ गंभीर, कुख्यात और संवेदनशील अपराधियों को भी निरुद्ध किया जाता है। ऐसे में पूर्व अग्निवीरों का सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन, कौशल व सुरक्षा संबंधी अनुभव कारागारों की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में उपयोगी साबित होगा। इससे जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।

  • 18 सितंबर को उदित होंगे बुध, बनेगा भद्र राजयोग; इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    18 सितंबर को उदित होंगे बुध, बनेगा भद्र राजयोग; इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    : वैदिक ज्योतिष में बुद्धि, व्यापार, तर्क, संवाद और अर्थव्यवस्था के कारक ग्रह बुध को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. 18 सितंबर 2026 का दिन खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास रहने वाला है. इस दिन बुध देव अपनी सबसे प्रिय और उच्च राशि कन्या (Virgo) में उदित (Astro Rise) होने जा रहे हैं.

    जब कोई ग्रह उदित होता है, तो उसकी शक्ति और फल देने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है. उच्च राशि में बुध के उदित होने से 'भद्र राजयोग' को पूर्ण बल प्राप्त होगा. बुध का यह महा-उदय कई जातकों के लिए बुद्धि के बल पर सफलता हासिल करने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के नए द्वार खोलेगा. विशेष रूप से 3 ऐसी राशियां हैं, जिनके लिए 18 सितंबर से 'मालामाल' होने के योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं किन खुशकिस्मत राशियों की किस्मत का ताला खुलने वाला है.

    वृषभ राशि (Vrishabha Rashi)
    शुभ स्थिति: आपकी राशि से पांचवें (ज्ञान, बुद्धि, निवेश व अचानक धन-लाभ) भाव में बुध देव उदित होने जा रहे हैं.

    मिलेगा यह फायदा: बुध का उदय आपके लिए आकस्मिक धन-लाभ के रास्ते खोलेगा. यदि आपने पहले कहीं निवेश किया था, तो उससे अब बड़ा रिटर्न मिल सकता है. शेयर बाजार, ट्रेडिंग या लॉटरी से जुड़े काम करने वाले जातकों को उम्मीद से ज्यादा फायदा होगा. विद्यार्थियों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है; प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी सफलता मिल सकती है.

    मिथुन राशि (Mithun Rashi)
    शुभ स्थिति: बुध आपकी राशि के स्वामी होकर आपके चौथे (सुख, संपत्ति व वाहन) भाव में उदित होंगे.

    मिलेगा यह फायदा: आपके लिए प्रॉपर्टी, नया मकान या वाहन खरीदने के मजबूत योग बन रहे हैं. पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई पुराना विवाद चल रहा था, तो फैसला आपके पक्ष में आ सकता है. नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन या सैलरी वृद्धि का शुभ समाचार मिल सकता है. जो लोग मीडिया, मार्केटिंग, आईटी या बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े हैं, वे बड़ा आर्थिक लाभ कमाएंगे.

    कन्या राशि (Kanya Rashi)
    शुभ स्थिति: बुध आपकी ही राशि (प्रथम भाव) के स्वामी हैं और वे आपकी राशि में ही उदित हो रहे हैं.

    मिलेगा यह फायदा: बुध के उदित होते ही आपकी सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता में जबर्दस्त सुधार आएगा. आपके रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. व्यापार से जुड़े लोगों को कोई बड़ी डील हाथ लग सकती है, जिससे भारी मुनाफा होगा. आपके व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ेगा और समाज व कार्यस्थल पर मान-सम्मान में भारी बढ़ोतरी होगी.

    बुध के उदय पर शुभ फल पाने के आसान उपाय
    – बुधवार के दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा (दूब घास) चढ़ाएं और मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं.

    – किसी गरीब या जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र या स्टेशनरी की चीजें दान करें.

    – रोजाना तुलसी की माला से कम से कम 108 बार बुध देव के बीज मंत्र का जाप करें.

    – नियमित रूप से या बुधवार को गाय को हरा चारा या पालक खिलाएं.

  • पंजाब में ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कॉल सेंटर और IPS अधिकारी के ठिकानों पर छापा

    पंजाब में ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कॉल सेंटर और IPS अधिकारी के ठिकानों पर छापा

    चंडीगढ़
     पंजाब के पटियाला और मोहाली जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को छापामारी की। पटियाला के अर्बन एस्टेट फेज 2 में दम वेब सॉल्यूशन नाम के ऑफिस में रेड की। अर्बन एस्टेट फेज 2 में स्को 29 में खुले इस डीएम वेब सॉल्यूशन के अंदर कॉल सेंटर का काम किया जाता था।

    अधिकारियों की टीम में दो गाड़ियों में सवार होकर आई थी और सुबह से टीम ने रेड करने के बाद आने-जाने वालों पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि यह कॉल सेंटर दिन-रात चलता था। मौके पर 15 से 20 अधिकारी मौजूद हैं। वहीं, मोहाली सेक्टर 82 ए के प्लॉट नंबर 2010 ईडी ने छापामारी की है। कथित तौर पर यह रेड आईपीएस अधिकीरी से संबंधित है।

    जानकारी के अनुसार,  ईडी की जांच के दौरान इनपुट मिला था कि तकरीबन ढाई सौ 300 करोड रुपए का ट्रांजेक्शन विदेश में हुआ है। इस बीच जांच के दौरान अधिकारियों को मोहाली का इनपुट मिला।

    मोहाली स्थित ऑफिस की मालकिन के भाई का पटियाला में ऑफिस बना हुआ था। डीएम वेब सॉल्यूशन के नाम से खुले इस ऑफिस के जरिए ट्रांजेक्शन होने की जांच की जा रही है।

    यह ऑफिस पहले फ्लाइंग फेदर के नाम से चल रहा था लेकिन पिछले कुछ महीने से इसका नाम बदल कर डीएम वेब सॉल्यूशन कर दिया गया था। फ्लाइंग फेदर का ऑफिस छोटी बरादरी पटियाला में बना दिया था लेकिन वह भी पिछले कुछ समय से बंद कर दिया गया था।

     

  • UP में जमीन के इस्तेमाल बदलने की प्रक्रिया आसान, कृषि से उद्योग तक शुल्क हुआ कम

    UP में जमीन के इस्तेमाल बदलने की प्रक्रिया आसान, कृषि से उद्योग तक शुल्क हुआ कम

    लखनऊ
     राज्य सरकार ने महायोजना व क्षेत्रीय विकास योजना के तहत आने वाले क्षेत्र की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ ही परिवर्तन शुल्क की दरों में भी तकरीबन 50 प्रतिशत तक की कमी कर दी है।

    अब 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार संबंधित विकास प्राधिकरणों को ही होगा। इससे अधिक क्षेत्रफल के मामलों में ही शासन की अनुमति लेनी होगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली 2014 के तृतीय संशोधन संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई।

    विभागीय विशेष सचिव राजेश कुमार राय ने बताया कि अभी किसी तरह के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार राज्य सरकार को ही है। ईज आफ डूईंग बिजनेस और डी-रेगुलेशन कार्ययोजना के तहत प्रक्रियाओं में सुधार तथा डिजिटलीकरण तथा भूमि संबंधी सेवाओं के लिए आनलाइन प्रणाली को अपनाने पर भारत सरकार का जोर है।

    इसके मद्देनजर दूसरे राज्यों में भू-उपयोग परिवर्तन के संबंध में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद राज्य में भी 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों को देने का निर्णय़ किया गया है। राजस्थान में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू है।

    राय ने बताया कि भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में भी कमी की गई है। अब कृषि भूमि पर उद्योग लगाने के लिए सर्किल रेट का 20 प्रतिशत के बजाय 15 प्रतिशत ही देना होगा। इसी तरह आवासीय के मामले में 50 के बजाय 25, कार्यालय उपयोग के लिए 100 के बजाय 50, वाणिज्यिक उपयोग के लिए सर्किल रेट का 150 प्रतिशत के स्थान पर अब 75 प्रतिशत ही परिवर्तन शुल्क देना होगा।

    मिश्रित उपयोग के मामले में 125 प्रतिशत को घटाकर 65 प्रतिशत शुल्क किया गया है। विदित हो कि उत्तर प्रदेश टाउनशिप नीति-2023 के तहत परियोजना के लिए लाइसेंस हासिल करने वाले विकासकर्ताओं की भूमि तथा मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत जमीन के भू-उपयोग को कृषि से आवासीय में परिवर्तित करने का अधिकार सरकार पहले ही विकास प्राधिकरणों को दे चुकी है।