Author: NewseDay

  • सबालेंका ने कोर्ट पर तोड़ा रैकेट, US Open ने लगाया भारी जुर्माना; रायबाकिना बनीं चैंपियन

    सबालेंका ने कोर्ट पर तोड़ा रैकेट, US Open ने लगाया भारी जुर्माना; रायबाकिना बनीं चैंपियन

     न्यूयॉर्क
    यूएस ओपन के फाइनल में हार के बाद गुस्से में रैकेट तोड़ने वाली आर्यना सबालेंका पर 7500 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। यूएस ओपन की तरफ से लगाए गए जुर्माने की कीमत भारतीय करेंसी में 7,19,530 रुपये है। सबालेंका लगातार तीसरी बार यूएस ओपन के फाइनल में पहुंची थीं। उनके पास जीत की हैट्रिक लगाने का मौका था, लेकिन वह फाइनल में हारकर इस स्वर्णिम मौके स चूक गईं।

    फाइनल मैच में हार के कारण सबालेंका को नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी का ताज भी गंवाना पड़ा। इसके बाद वह बेहद गुस्से में नजर आईं और कोर्ट पर ही पटक-पटक कर अपना रैकेट तोड़ दिया। इस दौरान एक व्यक्ति उनका वीडियो बना रहा था। इस व्यक्ति पर भी सबालेंका भड़क गईं। बाद में उन्होंने बताया कि कोर्ट पर ही गुस्सा निकल जाना उनके लिए अच्छा था। ऐसा नहीं होने पर उनका गुस्सा और खराब हो सकता था।

    रायबाकिना ने पहली बार जीता यूएस ओपन
    कजाकिस्तान की एलेना रायबाकिना ने पहली बार महिला एकल कैटेगरी में यूएस ओपन का खिताब जीता है। इस साल के फाइनल में उन्होंने बेलारूस की एरिना सबालेंका को 2 घंटे 21 मिनट तक चले मुकाबले में 6-4, 5-7, 6-2 से हराया। अपना पहला यूएस ओपन फाइनल खेल रही रायबाकिना ने सबालेंका को ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में भी हराया था। रायबाकिना का यह तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है। उनके पास चार मेजर खिताब में अब सिर्फ फ्रेंच ओपन नहीं है।

    44 मिनट में जीता पहला सेट
    रायबाकिना ने 44 मिनट में पहला सेट 6-4 से जीता। सबालेंका ने जोरदार वापसी की और दूसरा सेट 7-5 से जीता। तीसरे और निर्णायक सेट में सबालेंका ने मैराथन ओपनिंग सर्विस गेम में कई ब्रेक पॉइंट बचाए, लेकिन रायबाकिना ने तुरंत फिर से दबाव बना दिया। रायबाकिना ने दो एस के साथ लव बनाए रखा और आखिरकार 2-1 से ब्रेकथ्रू हासिल किया। एक बार बढ़त मिलने के बाद कजाखिस्तान की खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंतत: 6-2 से निर्णायक सेट अपने नाम किया।

  • 12 साल बाद PF नियमों में बड़ा बदलाव संभव, ₹15,000 की लिमिट बढ़ाकर ₹25,000 करने पर फैसला जल्द

    12 साल बाद PF नियमों में बड़ा बदलाव संभव, ₹15,000 की लिमिट बढ़ाकर ₹25,000 करने पर फैसला जल्द

    नई दिल्ली
     देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर आ रही है. आज केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक होने वाली है, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है. सरकार पीएफ और पेंशन के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। 

    यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है, तो यह करीब 12 साल बाद पीएफ नियमों में होने वाला सबसे बड़ा सुधार होगा. इससे पहले आखिरी बार 1 सितंबर 2014 को इस सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था. इस नए फैसले से देश के संगठित क्षेत्र के करीब 1 करोड़ अतिरिक्त कर्मचारी सीधे तौर पर पीएफ और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। 

    किस पर और कैसे लागू होगा यह नया नियम?
    वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹15,000 तक है, उनके लिए पीएफ खाता खोलना और उसमें योगदान देना अनिवार्य है. नई सीमा लागू होने के बाद, ₹25,000 तक की मासिक आय वाले सभी नए कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन फंड में योगदान करना जरूरी हो जाएगा। 

    हालांकि, ₹25,000 से अधिक बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि उनके लिए इस योजना में शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा. वे अपनी इच्छा के अनुसार ही इसमें योगदान देने का फैसला कर सकते हैं। 

    इन-हैंड सैलरी और कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
    इस फैसले का सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम (In-Hand) सैलरी पर पड़ेगा. जो कर्मचारी ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन ब्रैकेट में आते हैं और अब तक पीएफ का हिस्सा नहीं थे, उनके वेतन से हर महीने पीएफ का 12% हिस्सा कटेगा. इस वजह से हर महीने उनके हाथ में आने वाली नगद सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी, लेकिन दूसरी तरफ उनकी भविष्य की बचत और रिटायरमेंट फंड में तेजी से बढ़ोतरी होगी। 

    वहीं, उद्योगों और कंपनियों को वित्तीय बोझ से बचाने के लिए सरकार ने एक बीच का रास्ता निकाला है. प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को अपना पीएफ योगदान कैलकुलेट करने के लिए पुरानी ₹15,000 की लिमिट का इस्तेमाल जारी रखने की छूट मिल सकती है. इससे कंपनियों पर अचानक कोई बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है। 

  • ओवैसी के बयान पर BJP विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले- ‘मिसाइल चलाकर बता चुके’

    ओवैसी के बयान पर BJP विधायक रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले- ‘मिसाइल चलाकर बता चुके’

    भोपाल
     समान नागरिक संहिता यानी कि UCC के विरोध में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करने भोपाल पहुंचे AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के एक विवादित बयान पर तीखा पलटवार किया। भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में ओवैसी ने शर्मा के बयान का जिक्र करते हुए उन्हें सीधे चुनौती दी। इस दौरान उन्होंने विधायक के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया।

    क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी?
    ओवैसी ने कहा कि उन्होंने रामेश्वर शर्मा का बयान सुना है, जिसमें उन्होंने करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल लॉन्च करने की बात कही थी। ओवैसी ने कहा,

        'रामेश्वर शर्मा, अगर तुम माई के लाल हो तो बताओ, कब मिसाइल लॉन्च करोगे? मैं अकेला काजी कैंप में खड़ा रहूंगा। मैं शहीद होने के लिए तैयार हूं, मरने के लिए तैयार हूं, लेकिन तुम्हारे सामने सिर झुकाने के लिए तैयार नहीं हूं। रामेश्वर शर्मा को काजी कैंप का इतिहास मालूम होना चाहिए। ये काजी कैंप क्या है? सुनो रामेश्वर शर्मा, ये काजी कैंप कौन थे? आजादी के मुजाहिदीन कौन थे?'

    शर्मा को औवैसी ने 'छोटू' कहा
    भाषण के दौरान ओवैसी ने शर्मा के खिलाफ एक बेहद आपत्तिजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान सभा में  मौजूद लोग जमकर तालियां बजाते दिखे। ओवैसी ने अपने भाषण में काजी सैयद आबिद अली, वाजिद अली हुसैनी, खान शाहिद अली खान, फाजिल मोहम्मद खान, अब्दुल खान, शेख हमजा, सादात खान और रिसालदार वाली शाह जैसे नामों का भी जिक्र किया। उन्होंने रामेश्वर शर्मा पर निशाना साधते हुए उन्हें 'छोटू' कहा और बोले कि ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।

    विधायक शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी बैरिस्टर हो तो बदतमीजी की भाषा छोड़ दो। तुम बदतमीजी की भाषा बोलोगे तो मैं पूछता हूं कि औवेसी क्या तुम हिजड़े की संतान हो? हमारे वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की, उसे भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में तुम्हारे अब्बा के घर गिराकर बता दी। जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं।विधायक ने कहा, मिसाइल चलती थी, मिसाइल चलती रहेगी। जहां-जहां आतंकवाद के कैंप रहेंगे, जहां-जहां भारत विरोधी कैंप रहेंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। मैं कल भी अपने बयान पर कायम था, आज भी हूं। ओवैसी, तुम पूरा भाषण सुनो और तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ।

    ‘मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी, आतंकवादी रो रहे थे’
    ओवैसी के इसी बयान पर जवाब देते हुए शर्मा ने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की है, उसे भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल कर अपनी ताकत दिखाई। उन्होंने कहा, “जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं। शर्मा ने आगे कहा कि मिसाइल चलती थी और चलती रहेगी। उनके मुताबिक जहां-जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। उन्होंने कहा कि वह अपने पुराने बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं।  

    ‘पूरा भाषण सुनो, वकील हो तो कोर्ट ले जाओ’
    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी से कहा कि वह उनका पूरा भाषण सुनें। उन्होंने कहा, “तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ। शर्मा ने कहा कि उनके बयान का संदर्भ समझने की जरूरत है और वह अपने बयान पर कायम हैं।

    यूसीसी पर भी ओवैसी को घेरा
    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के यूसीसी विरोध पर भी पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब हर राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है। उन्होंने कहा कि “पांच बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी।  शर्मा ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुसार 2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू हो जाएगा और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होगा और इसे बाबा साहेब आंबेडकर की भावना के अनुरूप लागू किया जाएगा। 

     

    UCC पर कहा-ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी
    यूसीसी पर विधायक शर्मा ने कहा कि हर दल हिंदुओं से वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है? ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी। भारत के गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा है कि 2029 तक 21 प्रांतों में UCC लागू हो जाएगा। मध्य प्रदेश में लागू हो गया है। अब तुम छाती पीटो या इस्लामाबाद से अपने तार जोड़ो, UCC लागू होगा और बाबा साहेब अंबेडकर की भावना के अनुसार ही होगा।

    किस बयान पर हुआ विवाद?
    दरअसल, कुछ दिन पहले जन्माष्ट
    मी के दौरान आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कथित तौर पर कहा था, 'करोंद स्क्वायर से मिसाइल चलाओ तो काजी कैंप पर गिरे।' उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि, बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका इशारा पाकिस्तान के काजी कैंप की ओर था, न कि भोपाल के काजी कैंप की ओर। इसी बयान को लेकर अब ओवैसी ने भोपाल में आयोजित जनसभा के दौरान रामेश्वर शर्मा पर पलटवार किया।

    रामेश्वर शर्मा ने किया ओवैसी पर पलटवार
    रामेश्वर शर्मा ने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत से चलने वाली मिसाइल का डर सिर्फ इस्लामाबाद में ही नहीं, बल्कि ओवैसी जैसे लोगों में भी है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा बयान करोंद से इस्लामाबाद के काजी कैंप पर मिसाइल दागने को लेकर था। शर्मा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस को कैसे पता कि काजी कैंप इस्लामाबाद में है। उन्होंने कहा कि जहां भी आतंकवादियों के कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइलें दागी जाएंगी। साथ ही उन्होंने ओवैसी और राहुल गांधी पर आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। शर्मा ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा 'हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं है, हैदराबाद भारत का हिस्सा है।'

    UCC के मुद्दे पर भी सरकार पर निशाना
    जनसभा से पहले और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के नाम पर अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने UCC के विरोध में आयोजित जनसभा के दौरान इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। 

  • बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    बूचड़खाना बंद होने के बाद 400 मजदूर बाहर आए, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

    पठानकोट 

    पठानकोट के गांव अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बूचड़खाने को पूरी तरह खाली करवाया। 

    निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।

    हिंदू संगठनों, सिख भाईचारे, रामलीला कमेटियों और विभिन्न गांवों के पंच-सरपंचों के विरोध तथा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस व नागरिक प्रशासन हरकत में आया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव शांत है। हालांकि हिंदू संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस बूचड़खाने को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा।

    DC दफ्तर का घेराव और हाईवे जाम से हिला प्रशासन अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में एक बूचड़खाना खोले जाने की खबर से पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके के लोगों में रोष व्याप्त था। स्थानीय निवासियों को अंदेशा था कि इस बूचड़खाने में गौवंश और अन्य पशुओं को काटा जा रहा है। मंगलवार को विभिन्न हिंदू व सिख संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, पूर्व सरपंच और सुजानपुर हलके के सैकड़ों नागरिक डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे।

    आरोप है कि जिला प्रशासन और डीसी ऑफिस द्वारा करीब 2 घंटे तक उन्हें इंतजार करवाया गया और संतोषजनक बातचीत नहीं हुई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आक्रोशित होकर जनसैलाब सड़कों पर उतर आया और नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया।

    अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे संगठन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आए। बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों- औद्योगिक विभाग, बीडीपीओ कार्यालय सुजानपुर और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम पुलिस बल और नाराज संगठनों के साथ अखवाना स्थित बूचड़खाने के अंदर दाखिल हुई।

    हिंदू-सिख संगठनों का कड़ा रुख…

        एडवोकेट भानु प्रताप और रमन ठाकुर: उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सनातन धर्म और हिंदू-सिख भाईचारे की एकजुटता की जीत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते स्थिति को संभाला गया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि आखिर एक विशुद्ध हिंदू बहुल इलाके में बूचड़खाना खोलने की मंजूरी किन अधिकारियों और विभागों ने दी? उन्होंने सरकार से मांग की कि उन दोषी अफसरों की जांच की जाए।

        विशाल चौहान और एडवोकेट अमन ठाकुर (विहिप): उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना यहां नई मशीनरी पहुंचाई जा रही थी, जो बिना प्रशासनिक और राजनीतिक शह के संभव नहीं है। अगर इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

        संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों की चेतावनी: नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यहां से एक भी व्यक्ति अंदर-बाहर होता दिखा या दोबारा काम शुरू करने की कोशिश हुई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने स्थानीय गुर्जर समुदाय से भी अपील की कि वे चंद पैसों के लालच में गौहत्या या बूचड़खाने का समर्थन न करें, ताकि आपसी भाईचारा न बिगड़े।

    विभिन्न संगठनों के लोग रहे शामिल इस विरोध प्रदर्शन और निरीक्षण के दौरान राजपूत सभा से शिवा काटल, आरएसएस से अमित सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ पंजाब के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शिवसेना हिंद पंजाब के महामंत्री बब्बू ठाकुर, विहिप जिला विधि प्रमुख एडवोकेट अमन ठाकुर, गौशाला मामून से राकेश महाजन, पूर्व सरपंच राजिंदर सिंह, पंडित राजिंदर सिंह, स्वामी नित्यानंद, अमन बढ़ोई, साबा तड़वाल सहित बड़ी संख्या में सुजानपुर और पठानकोट के हिंदू-सिख नागरिक मौजूद रहे।

     

        अंदर से निकले 400 मजदूर, बांग्लादेशी भी शामिल: निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया। 

    स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन लगातार यह कह रहा था कि यह यूनिट "नॉट रनिंग" यानी बंद है, तो इतनी भारी तादाद में बाहरी लोग अंदर क्या कर रहे थे?

        18 सितंबर को होना था उद्घाटन: मौके पर मौजूद बूचड़खाने के संचालक कुरैशी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पास स्लाटर हाउस से संबंधित सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद हैं। उसने बताया कि अंदर नई मशीनरी फिट की जा रही है और इसका 18 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन होना तय था।

        अधिकारियों ने मौके पर जड़वाया ताला, दस्तावेज तलब: स्थिति की संवेदनशीलता और बिगड़ते माहौल को देखते हुए मौके पर तैनात एसपीडी विशालजीत सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़, डीएसपी देहाती सुखजिंदर सिंह, थाना प्रभारी शाहपुरकंडी मोहित टाक, थाना प्रभारी सुजानपुर सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ट्रैफिक प्रभारी एएसआई ब्रह्म दत्त ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।

        मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला: डीएसपी राजेश कक्कड़ और डीएसपी सुखजिंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए बूचड़खाने के अंदर मौजूद सभी कर्मचारियों और मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला और स्लाटर हाउस के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला लगवा दिया।

        एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई: पुलिस अधिकारियों ने संचालकों से बूचड़खाने के सभी कागजात व क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जब्त कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई में मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई और ताला लगवाने में सहयोग किया।

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, सुशांत गोल्फ सिटी अब LDA के हवाले; अधूरे काम होंगे पूरे

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, सुशांत गोल्फ सिटी अब LDA के हवाले; अधूरे काम होंगे पूरे

    लखनऊ
    राजधानी की पहली हाईटेक टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी में घर व दुकान खरीदारों को बड़ी राहत देने वाली खबर है। यह अहम परियोजना अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के हाथ होगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एलडीए को हाईटेक टाउनशिप टेकओवर करने पर मुहर लग गई है। इतना ही नहीं सरकार विकास कार्य व देनदारियों के लिए 2912 करोड़ रुपये की धनराशि भी देगी।

    मेसर्स अंसल प्रापर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (अंसल एपीआइ) की अधूरी आवासीय परियोजना को लेकर पिछले डेढ़ साल से उहापोह का माहौल रहा। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले की सुनवाई हुई। अब खरीदारों को राहत देने का रास्ता प्रदेश सरकार ने निकाला है।

    अधूरी परियोजना को पूरा कराने का विस्तृत प्रस्ताव एलडीए ने तैयार किया। उसी प्रस्ताव पर कैबिनेट में मंथन करने के बाद निर्णय लिया गया कि हाईटेक टाउनशिप के तहत अंसल एपीआइ को लाइसेंस दिया गया था, अब स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण टेकओवर करते हुए उसे पूरा कराने का प्रस्ताव एनसीएलटी के समक्ष प्रस्तुत करे।

    यह भी चर्चा हुई कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस परियोजना की अधिकतम देनदारी करीब 2912 करोड़ रुपये है, लेकिन इसकी वास्तविक देयता सीआइआरपी यानि कारपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से ही तय होगी।

    देनदारियों के भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि प्राधिकरण को सीड कैपिटल यानि शुरुआती धन दिया जाएगा। एलडीए के टेकओवर करने से होम बायर्स में विश्वास पैदा होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र व निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार का सृजन तेजी से बढ़ेगा।

    यह होंगे तत्काल लाभ
    इस कदम से 5000 होम बायर्स यानि घर-दुकान खरीदारों की समस्या का समाधान हो सकेगा। साथ ही टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं व उपयोगिताओं का विकास संभव होगा।

    बंधक व ग्राम समाज की भूमि किसी तीसरे पक्ष को देने की जगह अब लखनऊ विकास प्राधिकरण को दी जाएगी, ताकि सरकार के भूमि की रक्षा होगी और भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियां पूरी की जा सकेंगी। परियोजना पूरी होने से शहर का सुनियोजित विकास होगा। अब फिर से परियोजना में विकास कार्य शुरू होंगे।

    यह है मामला
    अंसल एपीआइ ने आइएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज से मार्च 2016 में 50 करोड़ और नवंबर 2016 में 100 करोड़ रुपये ऋण लिया था, खाता एनपीए होने से ब्याज सहित बकाया बकाया 257 करोड़ रुपये पहुंचने पर फाइनेंस कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में याचिका दाखिल की थी।

    एनसीएलटी ने 25 फरवरी 2025 को अंसल ग्रुप को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए आइआरपी (रिसीवर) नवनीत कुमार गुप्ता को नियुक्त किया था। यह आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में होम बायर्स ने चुनौती दी।

    एनसीएलएटी ने होम बायर्स का पक्ष स्वीकार करके एनसीएलटी में एलडीए का पक्ष सुनने का आदेश दिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन, शीर्ष कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश को सही माना। एनसीएलटी में अब 23 सितंबर को सुनवाई होनी है।

  • Second Hand Phone खरीदने से पहले जरूर करें ये स्क्रीन टेस्ट, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

    Second Hand Phone खरीदने से पहले जरूर करें ये स्क्रीन टेस्ट, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

    पिछले कुछ सालों से सेकंड हैंड फोन का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. बहुत सारे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं, जहां आपको पुराने फोन आसानी से मिल जाते हैं. साथ ही ऑफलाइन मार्केट में भी सेकंड हैंड फोन आसानी से मिल जाते हैं. अगर आप भी सेकंड हैंड फोन खरीदने जा रहे हैं, तो खरीदने से पहले आपको फोन की स्क्रीन का टेस्ट जरूर करना चाहिए. इस ट्रिक की मदद से आप आसानी से पता कर सकते हैं कि फोन की स्क्रीन की कंडीशन कैसी है.

    स्मार्टफोन में सबसे ज्यादा जरूरी हिस्सा उसकी डिस्प्ले होती है. इसी की मदद से आप फोन का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सेकंड हैंड फोन खरीदते समय अगर स्क्रीन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आपको खराब फोन मिल सकता है. इसलिए फोन खरीदने से पहले स्क्रीन को अच्छी तरह चेक करना जरूरी है. आइए जानते हैं स्क्रीन टेस्ट करने का आसान तरीका.

    जानिए स्क्रीन टेस्ट करने का आसान तरीका
    सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदते समय आपको सिर्फ फोन की बॉडी चेक नहीं करनी चाहिए. सिर्फ बाहर से फोन देखने पर आपको पता नहीं चल सकता कि फोन के अंदर या स्क्रीन में कोई खराबी है या नहीं.

    इसके लिए आपको फोन की स्क्रीन को भी अच्छी तरह टेस्ट करना चाहिए. स्क्रीन टेस्ट की मदद से आप पता कर सकते हैं कि डिस्प्ले सही तरीके से काम कर रही है या नहीं और स्क्रीन पर कोई निशान या खराब पिक्सेल तो नहीं हैं.

    स्क्रीन बर्न क्या होता है?
    जब आप किसी फोन का बहुत लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी डिस्प्ले के कुछ पिक्सेल खराब होने लगते हैं. इसकी वजह से स्क्रीन पर किसी पुराने आइकन, टेक्स्ट या इमेज का निशान दिखाई देने लगता है. इसे स्क्रीन बर्न कहा जाता है.

    कई बार स्क्रीन बर्न इतना हल्का होता है कि सामान्य इस्तेमाल में आसानी से नजर नहीं आता. इसलिए सेकंड हैंड फोन खरीदते समय इसे अलग से चेक करना जरूरी है.

    ऐसे करें फोन की स्क्रीन टेस्ट
    अगर आप सेकंड हैंड फोन खरीदने जा रहे हैं, तो फोन की बॉडी के साथ स्क्रीन को भी जरूर चेक करें. इसके लिए आप YouTube पर जाकर White Screen या Grey Screen Test का वीडियो चला सकते हैं.

    वीडियो चलाने के बाद फोन की पूरी स्क्रीन एक ही रंग की हो जाएगी. अब स्क्रीन को ध्यान से देखें. अगर कहीं कोई दाग, अलग रंग का हिस्सा या पुराने आइकन का निशान दिखाई दे रहा है, तो फोन की स्क्रीन में दिक्कत हो सकती है.

    इस छोटे से टेस्ट की मदद से आप सेकंड हैंड फोन खरीदने से पहले उसकी स्क्रीन की कंडीशन का बेहतर अंदाजा लगा सकते हैं. इससे आपको खराब डिस्प्ले वाला फोन खरीदने से बचने में मदद मिल सकती है.

  • बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का कहर, 55 हजार हेक्टेयर जमीन प्रभावित; शिवराज करेंगे हवाई सर्वेक्षण

    बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का कहर, 55 हजार हेक्टेयर जमीन प्रभावित; शिवराज करेंगे हवाई सर्वेक्षण

     पटना
     केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर ब‍िहार पहुंचे।

    भोपाल से विशेष विमान से पटना हवाईअड्डा पहुंचने के बाद वे सीएम सम्राट चौधरी के साथ हाजीपुर पुलिस लाइन से सड़क मार्ग से राघोपुर प्रखंड के तेरसिया दियारा पहुंचे।

    यहां एसडीआरएफ के बोट और ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी मौजूद है।

    सारण जिला में दिघवारा और पटना जिला में मनेर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। दोपहर में पटना में बैठक कर आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी लेंगे।

    भागलपुर से पटना लौटने के बाद जाएंगे कोलकाता
    उसके बाद मुंगेर के लिए रवाना हो जाएंगे। वहां से बाढ़ का निरीक्षण करते हुए भागलपुर पहुंचेंगे। भागलपुर राजकीय अतिथिशाला में रात्रि विश्राम करेंगे।

    गुरुवार दोपहर तक पटना लौंटेंगे। और उसी दिन 12:40 बजे इंडिगो की फ्लाइट से कोलकाता के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।

    बहरहाल 15 जिलों (पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल) के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं।

    इनके अंतर्गत लगभग 49.72 लाख लोग और 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ प्रभावित हुई है। राज्य सरकार की ओर से राहत-बचाव का काम चल रहा है। वैसे सरकार बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    नदियों में उतार-चढ़ाव: केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, डुमरिया घाट पर गंडक, बलतारा एवं कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर एवं कहलगांव में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती एवं दरौली में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

    कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर स्थिर रहने या फिर घटने की संभावना है। मुख्य रूप से वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्तर स्थिर तो बाल्मीकिनगर बराज पर गंडक के जलस्तर में गिरावट पाई गई। हालांकि, इंद्रपुरी बराज पर सोन के जलस्तर में वृद्धि भी देखने को मिली है।

    वर्या और पूर्वानुमान : राज्य में सितंबर में अब तक 112.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग छह प्रतिशत अधिक है।

    हालांकि, एक जून से 14 सितंबर तक सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके बावजूद बाढ़ का कारण नेपाल से आने वाली नदियां और बिहार मेंं नदियों में गाद का भर जाना है।

    बिहार मौसम सेवा केंद्र का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर बहुत हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    आपदा प्रबंधन विभाग का दावा
        1089 कम्युनिटी किचन से लगभग 147.73 लाख लोगों को सुबह-शाम का भोजन कराया जा चुका है।
        13 राहत शिविरों में 11,508 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन, चिकित्सा आदि की व्यवस्था है।
        1358 सरकारी नावें चलाई जा रहीं पूरे राज्य में, एसडीआरएफ की 27 व एनडीआरएफ 10 टीमें तैनात हैं।
        4.11 लाख पालीथीन शीट, 78,700 ड्राई राशन पैकेट, 1400 फूड पैकेट का अब तक वितरण हुआ है।
        14,251 क्विंटल पशुचारा का वितरण हो चुका है पशुपालकों के बीच। सूखा व हरा चारा की व्यवस्था है।

    बाढ़ सहायता राश‍ि के पांच पहलू
        बाढ़ से प्रभावित : 15 जिले, 88 प्रखंड, 575 ग्राम पंचायत, 2,642 गांव तथा 21 शहरों के 136 वार्ड। 50 लाख लोग तथा 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित है।
        सभी को सहायता : मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी प्रभावित परिवार राहत से वंचित न रहे। छूटे हुए परिवारों को एक सप्ताह के भीतर सूची में जोड़ने का निर्देश।
        राहत व बचाव : एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 21 टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। स्थिति सामान्य होने तक राहत-बचाव कार्य जारी रहेगा।
        पुनर्निर्माण हो बेहतर :'बिल्ड बैक बेटर दैन बिफोर'' (पहले से बेहतर बनाना) की थीम पर पुनर्निर्माण एवं पुन:-प्राप्ति कार्य किए जाएंगे। सभी पुन:-प्राप्ति कार्य एक माह के भीतर पूरे करने का निर्देश।
        क्षति का आकलन : बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर अधिकारियों को क्षति का समुचित आकलन कर रिपोर्ट तैयार रखने का निर्देश।

     

  • Ramayana के ‘जय जय राम’ में दिखा राम-भरत का भावुक रिश्ता, जानें भरत के त्याग की पूरी कहानी

    Ramayana के ‘जय जय राम’ में दिखा राम-भरत का भावुक रिश्ता, जानें भरत के त्याग की पूरी कहानी

     नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी फिल्म रामायण का पहला गाना 'जय जय राम' हाल ही में रिलीज हुआ है. ए.आर. रहमान के संगीत, डॉ. कुमार विश्वास के बोल और अरिजीत सिंह व श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज से सजा यह गाना दर्शकों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है. इस गाने में श्रीराम (रणबीर कपूर) और माता सीता (साई पल्लवी) के भव्य विवाह, अयोध्या में नगरवासियों द्वारा पुष्प वर्षा से स्वागत और राजा दशरथ (अरुण गोविल) के साथ भावनात्मक दृश्यों को दिखाया गया है. लेकिन इस पूरे गाने का सबसे दिल को छू लेने वाला दृश्य वह है, जहां श्रीराम अपने छोटे भाई भरत से गले मिलते हैं.

    इस गाने के माध्यम से फिल्म मेकर्स ने भरत के किरदार में नजर आने वाले एक्टर आदिनाथ कोठारे की पहली झलक भी दिखाई है. तो आइए जानते हैं कि रामायण में भरत का किरदार कितना महत्वपूर्ण था और आदिनाथ कोठारे पर्दे पर जिसका किरदार निभाएंगे उनका वास्तविक सच क्या है.

    कौन थे भरत?
    रामायण व रामचरितमानस के मुताबिक, भरत केवल श्रीराम के भाई (अनुज) नहीं थे, बल्कि वे निस्वार्थ प्रेम, धर्म और त्याग के सर्वोच्च प्रतीक भी माने जाते हैं. भरत सूर्यवंशी राजा दशरथ और उनकी प्रिय रानी कैकेयी के पुत्र थे. बचपन से ही भरत का अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति स्नेह और आदर रखते थे. भरत का विवाह राजा जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री मांडवी से हुआ था.

    मातृ-मोह पर धर्म की विजय
    रामायण के अनुसार, जब भरत अपने ननिहाल (कैकेय देश) से अयोध्या लौटे और उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी माता कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगकर श्री राम को 14 वर्ष का वनवास पर भेजा है और उनके लिए राजसिंहासन मांगा है, तो वे अत्यंत दुखी और लज्जित हुए. भरत ने बिना किसी झिझक के अपनी माता के इस अनुचित कार्य का विरोध किया. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अयोध्या के सिंहासन पर केवल बड़े भाई श्रीराम का अधिकार है और किसी भी अनैतिक सुख को वे स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने अपनी माता कैकेयी के इस अपराध की कठोर शब्दों में निंदा भी की थी.

    चित्रकूट में राम-भरत मिलाप
    इसके बाद भरत केवल दुखी होकर शांत नहीं बैठे, बल्कि वे पूरी अयोध्या नगरी, माताओं और गुरु वशिष्ठ के साथ श्री राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट के जंगलों की ओर चल पड़े थे. चित्रकूट में जब श्रीराम और भरत का मिलाप हुआ, तो वह प्रसंग इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गई थी. भरत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर अयोध्या वापस लौटने की विनती भी की थी. हालांकि, श्रीराम ने अपने पिता के वचनों का मान रखते हुए अयोध्या लौटने से इनकार कर दिया था.

    जब श्री राम ने लौटने से मना कर दिया था, तो भरत ने श्री राम की 'चरण पादुकाएं' (खड़ाऊ) मांगी थी. उन्होंने संकल्प लिया कि वे कभी भी अयोध्या के राजसिंहासन पर नहीं बैठेंगे. भरत ने श्री राम की पादुकाओं को सिंहासन पर विराजमान किया और स्वयं को केवल उनका 'प्रतिनिधि' (सेवक) मानकर राज्य का संचालन किया था.

    नंदीग्राम में 14 वर्षों का कठिन तपस्वी जीवन
    भरत केवल नाम के त्यागी नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने आचरण से उसे सिद्ध किया था. उन्होंने राजमहल के सारे सुख-वैभव का त्याग कर दिया था. महल के वैभव और सुख-सुविधाओं को छोड़कर, भरत ने अयोध्या के बाहर नंदीग्राम में एक साधारण कुटिया बनाई थी. जहां 14 वर्षों तक उन्होंने भी अपने भाई श्रीराम की तरह सिर पर जटाएं रखीं, वल्कल वस्त्र पहने, कंद-मूल खाया और भूमि पर सोकर एक तपस्वी का जीवन बिताया था. उनका मानना था कि यदि उनके भाई श्रीराम वनों में कष्ट सह रहे हैं, तो वे महल की सुख-सुविधाओं का आनंद लेने के हकदार नहीं हैं.

    आज के समाज के लिए भरत का संदेश
    भरत का चरित्र हमें सिखाता है कि रिश्ते, मूल्य और भ्रातृ-प्रेम किसी भी भौतिक संपत्ति या पद से कहीं ऊपर होते हैं. उन्होंने सिद्ध किया था कि सच्चा अधिकार वही है जो धर्म और न्याय पर आधारित हो, न कि जबरन छीना गया हो.

  • पंचायत चुनाव से पहले साइबर फ्रॉड का खुलासा, AI से तैयार फर्जी पत्र ने मचाया भ्रम

    पंचायत चुनाव से पहले साइबर फ्रॉड का खुलासा, AI से तैयार फर्जी पत्र ने मचाया भ्रम

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर चुनावी माहौल गर्माया हुआ है, लेकिन इस बीच एक गंभीर और सनसनीखेज साइबर जालसाजी का मामला भी सामने आया है। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का एक ऐसा आधिकारिक दिखने वाला पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों की आरक्षण लॉटरी अब 11 और 13 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी। इस वायरल लेटर ने राज्य के लाखों ग्रामीण मतदाताओं, सरपंच पद के दावेदारों और प्रशासनिक हलकों में भारी भ्रम फैला दिया है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (IAS) और पंचायती राज विभाग ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए इस पत्र को पूरी तरह फर्जी और एआई तकनीक से तैयार किया गया साइबर फ्रॉड करार दिया है। विभाग ने साफ किया है कि अभी आरक्षण लॉटरी की कोई भी नई तारीख तय नहीं की गई है और आम जनता को ऐसे किसी भी असत्यापित पत्र पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने की पत्र के 'फ़र्ज़ी' होने की पुष्टि
    जानकारी में सामने आया है कि चुनावी मौसम का फायदा उठाकर किसी असामाजिक तत्व द्वारा एआई टूल्स का गलत इस्तेमाल करके तैयार किए गए इस फर्जी पत्र में बाकायदा शासन सचिव डॉ. जोगा राम के नाम और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया है। पत्र में सरकारी पत्रांक संख्या 24 (30) परावि/विधि/आरक्षण/2026/79 और दिनांक 15/09/2026 अंकित करके इसे सभी जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों को संबोधित दिखाया गया है।

    सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप ग्रुपों, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर जैसे ही यह आदेश वायरल हुआ, ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे स्थानीय नेताओं के बीच होड़ मच गई। लेकिन जब इस पत्राचार की सत्यता की जांच की गई, तो विभाग के रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश जारी होने की बात पूरी तरह नकार दी गई।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, "यह पत्र पूरी तरह फर्जी है। पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी की नई तिथियां अभी निर्धारित नहीं की गई हैं। जल्द ही आधिकारिक बैठक के बाद सही तिथियों का ऐलान किया जाएगा।"

    वायरल फर्जी पत्र : गुमराह करने वाले दावे
    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस फर्जी सरकारी लेटर में हाई कोर्ट के पुराने आदेशों और नगरीय निकाय चुनाव की आचार संहिता का हवाला देकर लोगों को चकमा देने की कोशिश की गई थी:

    11 अक्टूबर का फर्जी दावा: वायरल पत्र में लिखा गया था कि जिला स्तर पर (जिला परिषद सदस्य, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्य) की आरक्षण लॉटरी 11 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी।

    13 अक्टूबर का भ्रामक दावा: उपखंड स्तर पर (सरपंच एवं वार्ड पंच) पदों के लिए आरक्षण लॉटरी 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित करने की बात कही गई थी।

    15 नवंबर की डेडलाइन का हवाला: पत्र में यह भी दर्शाया गया था कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार 15 नवंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के लिए संकल्पबद्ध है।

    विभागीय प्रतिलिपि की नकल: पत्र के नीचे बाकायदा मुख्य सचिव, महाधिवक्ता और जिला परिषद सीईओ को प्रतिलिपि भेजने का नाटक रचा गया था, ताकि कोई भी इसे पहली नजर में फर्जी न समझ सके।

    AI से तैयार हो रहे फर्जी सरकारी दस्तावेज
    राजस्थान में पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके फर्जी सरकारी लेटरहेड, डिजिटल साइन और फर्जी लेटर तैयार करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

    गंभीर कानूनी अपराध: किसी सरकारी विभाग के नाम से फर्जी आदेश बनाना और उस पर आईएएस अधिकारी के हस्ताक्षर स्कैन करके लगाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत गैर-जमानती अपराध है।

    जांच शुरू: राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने वायरल लेटर के ओरिजिनल सोर्स और इसे सबसे पहले शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है।

    सख्त कार्रवाई की चेतावनी: फर्जी पत्र तैयार करने और अफवाह फैलाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कड़ा मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है।

    ग्रामीण दावेदारों में बढ़ा असमंजस
    राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए आरक्षण लॉटरी बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब तक आरक्षण की स्थिति साफ नहीं होती, प्रत्याशी अपनी रणनीति नहीं बना पाते।

    पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक राज्य निर्वाचन आयोग और विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक सोशल मीडिया पर तैर रही किसी भी तारीख पर विश्वास न करें।

    गांव-ढाणी के मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे किसी भी असत्यापित पत्र को आगे व्हाट्सएप ग्रुपों में फॉरवर्ड न करें।

    कब घोषित होंगी पंचायती राज चुनाव की असली तारीखें?
    पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 सितंबर 2026 को आरक्षण लॉटरी निकाली जानी थी, जिसे नगरीय निकाय चुनावों की व्यस्तता के चलते फिलहाल स्थगित करने की तैयारी की जा रही है।

    राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय बैठक के बाद बहुत जल्द आरक्षण लॉटरी की आधिकारिक और नई समय-सारिणी जारी की जाएगी। आयोग का लक्ष्य है कि पारदर्शी तरीके से आरक्षण लॉटरी निकालकर निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराए जाएं।

     

  • ‘रामबोला’ नाम पर छिड़ा विवाद, एक ही दिन दो फिल्मों का ऐलान; जानें किसके नाम है टाइटल

    ‘रामबोला’ नाम पर छिड़ा विवाद, एक ही दिन दो फिल्मों का ऐलान; जानें किसके नाम है टाइटल

     'हनुमान अंश' फिल्म की जादुई सफलता से मेकर्स की खुशी का ठिकाना नहीं है. नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म की सक्सेस को देखते हुए 'हनुमान अंश' के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने गणेष चतुर्थी के शुभ मौके पर अपनी अगली फिल्म का ऐलान किया, जो महाकवि तुलसीदास के जीवन पर आधारित होगी. फिल्म का नाम 'रामबोला' होगा.

    रामबोला पर विवाद क्यों?
    विशाल चतुर्वेदी ने अपनी अपकमिंग फिल्म की घोषणा के साथ ही इसका नाम भी अनाउंस कर दिया. उन्होंने बताया कि उनकी फिल्म का नाम 'रामबोला' होगा. विशाल चतुर्वेदी ने प्रोडक्शन हाउस महावीर जैन के साथ मिलकर रामबोला नाम की फिल्म बनाने का ऐलान करके फैंस को बड़ा तोहफा दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्टर भी शेयर किया.

    लेकिन उसी दिन एक दूसरे डायरेक्टर और डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भी 'रामबोला' नाम से एक और फिल्म का ऐलान कर दिया. अनाउंसमेंट पोस्ट में बताया गया कि 'रामबोला' फिल्म डॉक्टर चंद्रप्रकाश के निर्देशन में बनेगी, जबकि इसे मधु मंटेना और मंदिरा द्विवेदी प्रोड्यूस करेंगी.  

    'रामबोला' नाम से एक साथ एक ही दिन दो फिल्में अनाउंस होने पर फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद खड़ा हो गया. अब सवाल यह उठता है कि आखिर फिल्म का टाइटल किसे मिलेगा?

    किसे मिलेगा टाइटल?
    दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में महावीर जैन से जुड़े एक करीबी सूत्र के हवाले से बताया गया है कि 'रामबोला' टाइल 'हनुमान अंश' बनाने वाले विशाल चतुर्वेदी को ही मिलेगा, क्योंकि यह टाइटल उन्हीं के नाम पर रजिस्टर है. सूत्र ने आगे बताया कि विशाल ने कुछ समय पहले 'रामबोला' फिल्म को लेकर महावीर जैन से मुलाकात की थी. आपसी सहमति से फिल्म बनाने पर बात हुई. फिल्म के राइट्स भी विशाल चतुर्वेदी और महावीर जैन प्रोडक्शन के पास हैं.

    लेकिन कहानी में एक और ट्विस्ट है. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का दावा है कि 'रामबोला' फिल्म के टाइटल के राइट्स उनके पास हैं. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि उन्होंने 'रामबोला' पिल्म को लेकर महावीर जैन से मुलकाता की थी. उन्होंने महावीर जैन को मेल पर वीडियो भी भेजा था.

    हालांकि, टाइटल पर छिड़े विवाद के बीच IMPAA  'इंडियन मोशन पिक्चर आर्टिस्ट एसोसिएशन ने एक नोट जारी कर बताया है कि 'रामबोला' टाइटल विशाल चतुर्वेदी के नाम से रिजस्टर है. 23 जून को विशाल ने एसोसिएशन की मीटिंग में रामबोला टाइटल रजिस्टर करवाया था.