Author: NewseDay

  • एशियन गेम्स में दीपिका-मनीषा का शानदार प्रदर्शन, 11 गोल के साथ चमकीं दीपिका

    एशियन गेम्स में दीपिका-मनीषा का शानदार प्रदर्शन, 11 गोल के साथ चमकीं दीपिका

    हिसार.

    एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारतीय महिला हाकी टीम में हिसार की दीपिका सहरावत ने जहां उज्बेकिस्तान के खिलाफ एक मैच में आठ गोल दागकर अपनी अलग पहचान बनाई, वहीं इंडोनेशिया के खिलाफ लगातार दूसरे मैच में तीन गोल कर हैट्रिक लगाई।

    दीपिका टूर्नामेंट में 11 गोल कर सबसे आगे चल रही है। वहीं दूसरी ओर भारतीय कबड्डी टीम ने सोमवार को अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश को 42-21 से हराकर की। इस मुकाबले में हिसार के गांव भिवानी रोहिल्ला की मनीषा ने लेफ्ट कवर से डिफेंडर की भूमिका निभाई। वहीं हसनगढ़ की निकिता नैन भी भारतीय टीम का हिस्सा हैं।

    दीपिका ने आठ गोल कर तोड़ा अपना ही रिकार्ड 
    भारतीय महिला हाकी टीम ने उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराया था। इस मुकाबले में दीपिका सहरावत ने अकेले आठ गोल दागे। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना ही पिछला रिकार्ड पीछे छोड़ दिया।

  • स्वर्गीय  माहेश्वरी का जीवन राष्ट्रसेवा और निर्भीक पत्रकारिता की प्रेरणा: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल

    स्वर्गीय माहेश्वरी का जीवन राष्ट्रसेवा और निर्भीक पत्रकारिता की प्रेरणा: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने भोपाल में स्वर्गीय  रामगोपाल माहेश्वरी जी के नाम पर मार्ग की नामपट्टिका का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय  माहेश्वरी के राष्ट्र और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि यह सभी के लिए गौरव और आनंद का क्षण है। कुछ व्यक्तित्व केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए होते हैं और उनके विचार एवं आदर्श आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि स्वर्गीय  माहेश्वरी ने स्वतंत्रता से पहले प्रेस की स्थापना की। उस दौर में जब देश स्वतंत्रता आंदोलन के कठिन दौर से गुजर रहा था, उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर निर्भीकता से पत्रकारिता को आगे बढ़ाया। भारत छोड़ो आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनका जीवन राष्ट्रहित, सामाजिक सरोकार और पत्रकारिता के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी है। यह आवश्यक है कि जनहित से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सामने लाएं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सजग एवं निर्भीक भूमिका निभाएं। स्वर्गीय  माहेश्वरी ने अपने कार्यों से पत्रकारिता के इसी दायित्व को मजबूत किया।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मार्ग का नाम स्वर्गीय  माहेश्वरी के नाम पर होना उनके योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस मार्ग से गुजरने वाले लोग उनके नाम और योगदान से परिचित होंगे। जब-जब कोई व्यक्ति इस मार्ग से निकलेगा, स्वर्गीय  माहेश्वरी के आदर्शों और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण का स्मरण होगा।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भारत की संस्कृति में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना निहित है। भारत शांति, मानव कल्याण और विश्व बंधुत्व की भावना के साथ विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में पत्रकारिता सहित समाज के प्रत्येक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और ऐसे महान व्यक्तित्वों का स्मरण हमें राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में नवभारत के एमडी  सुमित माहेश्वरी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधि एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

     

  • मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में महुआ को मिल रहा नया स्वरूप, जशप्योर और जय जंगल के प्रयासों से जनजातीय परिवारों एवं महिला स्वसहायता समूहों के लिए आजीविका की नई संभावनाएं

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में महुआ को मिल रहा नया स्वरूप, जशप्योर और जय जंगल के प्रयासों से जनजातीय परिवारों एवं महिला स्वसहायता समूहों के लिए आजीविका की नई संभावनाएं

    रायपुर

     कभी जंगलों में सहज रूप से मिलने वाली वन उपज और पारंपरिक उपयोग तक सीमित महुआ आज नए रूप, नई पहचान और नई संभावनाओं के साथ बाजार तक पहुंच रहा है। जशपुर में महुआ को केवल वन उपज के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य नवाचार, मूल्य संवर्धन, अनुसंधान और जनजातीय आजीविका के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने महुआ की पहचान को नई ऊंचाई दी है।

    इसी बदलाव की झलक रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देखने को मिली, जहां जशप्योर और जय जंगल के स्टॉल पर जशपुर के महुआ आधारित उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने महुआ से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों को देखा, उनके बारे में जानकारी ली और उनकी गुणवत्ता, स्वाद तथा आधुनिक पैकेजिंग की सराहना की।

    महुआ की बदली तस्वीर, पारंपरिक वन उपज से आधुनिक फूड प्रोडक्ट तक

    महुआ का नाम सुनते ही लंबे समय तक लोगों के मन में इसकी पारंपरिक उपयोगिता की ही तस्वीर उभरती रही। जशपुर में इसी धारणा को बदलते हुए महुआ को आधुनिक खाद्य उत्पादों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। अब महुआ केवल जंगल से संग्रहित होने वाली वन उपज नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने वाला उत्पाद बन रहा है।

    इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के हॉल नंबर-3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, महुआ आधारित कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उत्पादों की विविधता के साथ उनकी आकर्षक पैकेजिंग और आधुनिक प्रस्तुति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि जंगलों से मिलने वाला पारंपरिक महुआ आधुनिक खाद्य बाजार में इतने नए रूपों में भी अपनी जगह बना सकता है।

    कई आगंतुकों ने पहली बार महुआ को इतने विविध खाद्य स्वरूपों में देखा। उत्पादों की प्रस्तुति और स्वाद ने यह संदेश दिया कि यदि स्थानीय संसाधनों को उचित तकनीक, गुणवत्ता और बाजार की समझ के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की पारंपरिक उपज भी व्यापक बाजार तक पहुंच सकती है।

    जशप्योर बना स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन का माध्यम

    जशपुर की पहचान केवल अपने जंगलों और प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों से भी जुड़ी है। इसी स्थानीय ताकत को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में जशप्योर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।

    जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय, महिला समूहों, उत्पादक संस्थाओं और तकनीकी संस्थानों के साझा प्रयासों से महुआ सहित स्थानीय वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर ही अधिक मूल्यवान बनाना और उनसे जुड़े परिवारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर तैयार करना है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय एवं जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ को लेकर हो रहे प्रयास इसी सोच को जमीन पर साकार करते हुए दिखाई देते हैं।

    पेड़ से बाजार तक तैयार हो रही पूरी वैल्यू चेन

    महुआ की कहानी केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का प्रयास है। स्वच्छ और फूड-ग्रेड संग्रहण से लेकर डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण, अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, उत्पाद विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक प्रत्येक चरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से संचालित Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के खाद्य उपयोग, नए उत्पादों, फूड-ग्रेड कलेक्शन, डिहाइड्रेशन और प्रसंस्करण तकनीक सहित विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान एवं प्रयोग किए जा रहे हैं।

    इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य महुआ की गुणवत्ता और बाजार मूल्य बढ़ाने के साथ इससे जुड़े जनजातीय परिवारों और महिला स्वसहायता समूहों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है। जब जंगल में संग्रहित होने वाली उपज को वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर बाजार तक पहुंचाया जाता है, तो उसका लाभ केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े लोगों तक पहुंचने की संभावना बनती है।

    पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही नई पीढ़ी

    इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशप्योर एवं जय जंगल के स्टॉल का प्रतिनिधित्व जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई कर रही थीं। वे आगंतुकों को केवल उत्पादों की जानकारी ही नहीं दे रही थीं, बल्कि यह भी बता रही थीं कि महुआ का संग्रहण किस तरह किया जाता है, उसे फूड-ग्रेड बनाने के लिए किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया है और किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है।

    यह तस्वीर जशपुर में हो रहे बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी है—जहां जंगल से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान अब आधुनिक उत्पाद विकास और बाजार की जरूरतों के साथ जुड़ रहा है।

    अनुसंधान से पोषण की नई संभावनाओं की तलाश

    महुआ के खाद्य उपयोग के विस्तार के साथ इसके पोषण संबंधी पहलुओं पर भी अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जय जंगल के निदेशक समर्थ जैन ने बताया कि ग्राहकों से महुआ के सेवन के बाद आयरन और हीमोग्लोबिन से जुड़े सकारात्मक अनुभवों की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों को वैज्ञानिक रूप से समझना जरूरी है और महुआ में आयरन की मात्रा के साथ शरीर में उसकी उपलब्धता एवं उपयोगिता का व्यवस्थित अध्ययन अगला महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक अध्ययन इन अनुभवों के पीछे ठोस आधार स्थापित करते हैं, तो महुआ पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वन उपज के रूप में नई संभावनाएं प्रस्तुत कर सकता है। उनका प्रयास जशपुर के जंगलों में उपलब्ध इस वन उपज को अनुसंधान, बेहतर प्रसंस्करण और नए उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाना है।

    जशपुर के जंगलों से देश-दुनिया तक पहुंचने की राह

    14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशपुर के महुआ उत्पादों को मिली प्रतिक्रिया केवल किसी एक उत्पाद की लोकप्रियता की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें स्थानीय संसाधन, जनजातीय परंपरा, महिला समूहों की भागीदारी, प्रशासनिक सहयोग, तकनीकी ज्ञान और उद्यमिता एक साथ आकर नई आर्थिक संभावनाओं का निर्माण कर रहे हैं।

    जशपुर का महुआ अब जंगलों में बिखरी वन संपदा भर नहीं है। यह स्थानीय ज्ञान, मेहनत और नवाचार के साथ एक ऐसे उत्पाद के रूप में आगे बढ़ रहा है, जो जनजातीय परिवारों और महिलाओं के लिए आजीविका के अवसरों का माध्यम बन सकता है।

    जशपुर के जंगलों से निकलकर महुआ अब बाजार की नई भाषा बोल रहा है—स्थानीय संसाधन से मूल्य संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान से नवाचार और वन उपज से आजीविका तक। यही बदलाव जशपुर के महुआ को नई पहचान दे रहा है।

  • गुलजार सिंह के बयान पर सियासी घमासान, संजय सिंह ने BJP-अकाली दल को घेरा

    गुलजार सिंह के बयान पर सियासी घमासान, संजय सिंह ने BJP-अकाली दल को घेरा

    चंडीगढ़.

    आम आदमी पार्टी ने पंजाब को बदनाम करने के लिए साजिश रच रही भाजपा, अकाली और कांग्रेस को लेकर बड़ा खुलासा किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि जिस जग्गा सिंह को भाजपा अपना ‘‘भाई’’ बता रही है, वह नशा तस्कर है और उस पर एनडीपीएस समेत 9 केस दर्ज हैं, जबकि मोहन जीत सिंह पर भी 8 केस दर्ज हैं।

    विपक्ष दलों ने गुलजार सिंह पर भी दबाव बनाकर ‘‘आप’’ के खिलाफ बयान दिलवाया। ये लोग पंजाब को बदनाम करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। आज जब भगवंत मान सरकार अभियान चलाकर अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस की सरकारें में लाए गए नशे का खात्मा कर रही है तो इसे रोकने के लिए सभी एकजुट हो गए हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी पंजाब को बदनाम करने की भाजपा, कांग्रेस और अकाली की साजिश को सफल नहीं होने देगी।

  • 26 सितंबर तक बारिश का दौर जारी, जबलपुर समेत 12 जिलों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी

    26 सितंबर तक बारिश का दौर जारी, जबलपुर समेत 12 जिलों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी

    भोपाल।

    मानसून की विदाई से पहले प्रदेश में वर्षा का एक नया दौर आज से शुरू हो सकता है। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के प्रभाव से पूर्वी इलाकों में फिर से झड़ी लग सकती है।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने कटनी, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, डिंडोरी, अनूपपुर, मंडला, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। इससे पहले मंगलवार को सतना में 0.9 मिलीमीटर, मंडला में 10 मिलीमीटर, छतरपुर जिले के खजुराहो में 5 मिलीमीटर और बालाघाट जिले के मलाजखंड में 8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

    26 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज वर्षा के आसार

    मौसम विज्ञानी प्रमेंद्र कुमार ने बताया कि पश्चिम–मध्य बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह सिस्टम अगले 12 घंटों में डीप डिप्रेशन में तब्दील हो सकता है। इसके 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच विशाखापत्तनम और गोपालपुर के तटों को पार करने की संभावना है, जिसका असर मध्य प्रदेश में बुधवार से दिखने लगेगा।

    उत्तर–पश्चिम भारत से लौटने लगा मानसून

    दक्षिण–पश्चिम मानसून की विदाई रेखा फिलहाल राजस्थान, पंजाब और Haryana के हिस्सों से गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और शेष पंजाब–हरियाणा से भी मानसून के पूरी तरह लौटने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन चुकी हैं।

    मध्य प्रदेश में 1 जून से 22 सितंबर तक मानसूनी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से कमजोर रहा है। इस अवधि में पूरे प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 6 प्रतिशत कम पानी बरसा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 2 प्रतिशत कम, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 10 प्रतिशत कम वर्षा रिकार्ड की गई है।

    सबसे कम और सबसे अधिक बारिश वाले जिलों की स्थिति

    सामान्य से सबसे कम वर्षा वाले पांच शहर

    सामान्य से सबसे कम वर्षा वाले पांच शहर

         

    शहर

    सामान्य वर्षा

    वास्तविक वर्षा

    कितनी कम हुई वर्षा

    अलीराजपुर

    837.5

    426.0

    49 प्रतिशत

    धार

    783.8

    489.1

    38 प्रतिशत

    नर्मदापुरम

    1234.6

    817.2

    34 प्रतिशत

    रतलाम

    888.2

    593.5

    33 प्रतिशत

    हरदा

    1055.3

    720.2

    32 प्रतिशत

    (नोट — वर्षा मिलीमीटर में)

    सामान्य से सबसे अधिक वर्षा वाले पांच शहर

    सामान्य से सबसे अधिक वर्षा वाले पांच शहर

         

    शहर

    सामान्य वर्षा

    वास्तविक वर्षा

    कितनी अधिक हुई वर्षा

    निवाड़ी

    768.8

    1183.7

    54 प्रतिशत

    मऊगंज

    948.9

    1422.8

    50 प्रतिशत

    सतना

    922.4

    1319.6

    43 प्रतिशत

    सिंगरौली

    844.5

    1093.0

    29 प्रतिशत

    भिंड

    601.7

    757.2

    26 प्रतिशत

    (नोट — वर्षा मिलीमीटर में)

     

  • गरबा को लेकर बीजेपी विधायक बोले- मुस्लिम भी आएं, अपनी बहनों-बेटियों को साथ लाएं

    गरबा को लेकर बीजेपी विधायक बोले- मुस्लिम भी आएं, अपनी बहनों-बेटियों को साथ लाएं

     भोपाल

    भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि मुस्लिम युवाओं को गरबा कार्यक्रमों में अकेले नहीं आना चाहिए, बल्कि अपनी बहनों और बेटियों को भी साथ लाना चाहिए। भोपाल के हुजूर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक की इस टिप्पणी की विपक्षी कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) ने निंदा की है।

    सोमवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए शर्मा ने कहा था कि अगर मुसलमान नवरात्रि उत्सव के दौरान आयोजित गरबा में भाग लेना चाहते हैं, तो उन्हें 'जय श्री राम' का नारा लगाना होगा और माथे पर 'तिलक' लगाना होगा। उन्होंने कहा, इससे किसी को कोई समस्या नहीं होगी।

     

  • अजय चंद्राकर ने सुप्रिया श्रीनेत-नेहा सिंह पर दायर किया मानहानि का केस

    अजय चंद्राकर ने सुप्रिया श्रीनेत-नेहा सिंह पर दायर किया मानहानि का केस

    धमतरी.

    वायरल वीडियो को लेकर चल रहा सियासी विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। पूर्व मंत्री और कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और लोकगायिका व सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय में याचिका दायर की है।

    मामला स्वतंत्रता दिवस के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से जुड़ा है। चंद्राकर का आरोप है कि भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बनाया गया पुराना वीडियो स्वतंत्रता दिवस का बताकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। उनका कहना है कि इस तरह वीडियो प्रसारित किए जाने से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसी आधार पर उन्होंने दोनों के खिलाफ मानहानि का दावा पेश किया है।

    दो आरोपी भी हो चुके हैं गिरफ्तार
    वायरल वीडियो मामले में धमतरी पुलिस ने अलग कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार कुरूद स्थित भाजपा कार्यालय में 22 मार्च 2026 को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भाजपा का झंडा फहराए जाने का वीडियो बनाया गया था। आरोप है कि बाद में इसी मूल वीडियो को डाउनलोड कर एडिट किया गया और उसे स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। पुलिस ने भुनेश्वर निराला (25) और राकेश निराला (35) को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया। दोनों सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम जिल्दी के रहने वाले हैं। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पूछताछ के बाद दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। पुलिस का दावा है कि वीडियो एडिट करने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं।

    क्या है पूरा विवाद
    स्वतंत्रता दिवस के दौरान सोशल मीडिया पर अजय चंद्राकर का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे भाजपा का झंडा फहराते नजर आ रहे थे। वीडियो को इस दावे के साथ प्रसारित किया गया कि 15 अगस्त को उन्होंने तिरंगे की जगह भाजपा का झंडा फहराया। बाद की पड़ताल में पुलिस के अनुसार यह वीडियो 15 अगस्त 2026 का नहीं, बल्कि पहले के भाजपा प्रशिक्षण कार्यक्रम का था। इसी वीडियो को लेकर रायपुर के सिविल लाइन थाने में सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 336(4), 353(2) और 196 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। अब अजय चंद्राकर की ओर से दायर मानहानि याचिका के बाद विवाद का एक और पहलू अदालत पहुंच गया है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही और दोनों पक्षों की दलीलों पर नजर रहेगी।

  • CCTV में कैद छात्रा से छेड़छाड़ और मारपीट, वीडियो वायरल होने पर आरोपी गिरफ्तार

    CCTV में कैद छात्रा से छेड़छाड़ और मारपीट, वीडियो वायरल होने पर आरोपी गिरफ्तार

     ग्वालियर

     ग्वालियर में 16 वर्षीय छात्रा का रास्ता रोककर बाइक सवार युवक ने दुस्साहसिक हरकत की। उसने सरेराह उसका हाथ पकड़ लिया। विरोध करने पर छात्रा को थप्पड़ मारे। घटनाक्रम पास में लगे सीसीटीवी में रिकार्ड हो गया। वीडियो प्रसारित हुआ तो हरकत में आई पुलिस ने सोमवार को आरोपित युवक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    घटना भितरवार थाना क्षेत्र के बाजना गांव की

    घटना ग्वालियर जिले के भितरवार थाना क्षेत्र के बाजना गांव की है। कक्षा 11 वीं की छात्रा कस्बे में रहकर पढ़ाई कर रही है। पुलिस को छात्रा ने बताया कि करीब 10-15 दिन पहले लोढ़ी निवासी युवराज रावत ने बातचीत करने की बात कही थी, लेकिन उसने इन्कार कर दिया तो वह स्कूल और कोचिंग जाते समय पीछा करने लगा।

    19 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे वह अपनी बुआ की बेटी के साथ कोचिंग से घर लौट रही थी, तभी एसआइटीएम स्कूल के सामने आरोपित युवराज रावत अपने साथी योगेश रावत के साथ बाइक से आया और रास्ता रोक लिया।
    विरोध किया तो थप्पड़ मारा

    युवराज ने छात्रा का हाथ पकड़ लिया। विरोध किया तो थप्पड़ मारा। जान से मारने की धमकी दी। युवक के साथी योगेश ने बीच-बचाव कर मामला रफादफा कराने की कोशिश की। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी में कैद हुई और इंटरनेट मीडिया पर वीडियो प्रसारित हुआ तो पुलिस हरकत में आई। इसके बाद सोमवार को एफआइआर दर्ज कर आरोपित युवराज रावत को गिरफ्तार कर लिया।

    मंगलवार को कोर्ट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने मामले में छेड़छाड़, गलत तरीके से रोकने, गलत तरीके से रोक, महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने, धमकी देने की बीएनएस की धाराओं के अतिरिक्त पाक्सों एक्ट में केस दर्ज किया है।

     

  • रक्षा के क्षेत्र में शिक्षा-प्रशिक्षण और अनुसंधान है राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र

    रक्षा के क्षेत्र में शिक्षा-प्रशिक्षण और अनुसंधान है राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिन-प्रतिदिन के जीवन में जिस गति से डिजिटल प्रणालियों का उपयोग बढ़ रहा है, उसी गति से इस क्षेत्र में चुनौतियां भी बढ़ रही है। डिजिटल और साइबर क्षेत्र की व्यवस्थाओं में समाज हित और जनकल्याण लगातार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सर्तकता आवश्यक है। साइबर और फॉरेंसिक क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों के विस्तार से ही यह संभव है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर और राज्य शासन के बीच हुआ एमओयू तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और राजीव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच हुआ रिलेशनशिप एग्रीमेंट साइबर क्षेत्र में सर्तकता और डिजिटल फोरेंसिक्स में दक्षता का विस्तार करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार आज मंत्रालय में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर और मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय भोपाल के मध्य एमओयू के आदान प्रदान के अवसर पर व्यक्त किया। उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार  इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थे।

    शीघ्र आरंभ होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम

    आज हुआ एमओयू, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर द्वारा प्रदेश के जेल मुख्यालय और पुलिस मुख्यालय के अधिकारी/कर्मचारियों के प्रशिक्षण तथा कौशल विकास के लिये राज्य शासन के साथ किया गया है। अतिशीघ्र ही प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किये जायेगें। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय परिसर, भोपाल के सुचारू संचालन एवं समन्वय के लिए राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गाँधीनगर और राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल के मध्य रिलेशनशिप एग्रीमेंट सम्पादित किया गया। मंत्रालय में हुए एमओयू और रिलेशनशिप एग्रीमेंट कार्यक्रम में आयुक्त तकनीकी शिक्षा  अवधेश शर्मा, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भोपाल के निदेशक  राकेश कुनवर तथा आरजीपीवी के कुलपति  आलोक शर्मा उपस्थित थे। 

    भोपाल परिसर में उपलब्ध है साइबर सिक्योरिटी में बीटेक और डिजिटल फोरेंसिक व साइबर सिक्योरिटी में एमएससी पाठ्यक्रम

    उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर की स्थापना भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 28 सितम्बर, 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य देश में रक्षा के क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, विस्तार एवं सेवाएँ प्रदान करना है। देश के 07 राज्यों में इस विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय परिसर स्थापित किया जा चुके हैं और अब तक लगभग 40 हजार कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। राज्य में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर के परिसर की स्थापना भोपाल में करने के संबंध में मंत्रि-परिषद् की बैठक दिनांक 01.07.2025 में निर्णय लिया गया था। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी), भोपाल परिसर में उपलब्ध भूमि में से 10 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। वर्तमान में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा अस्थायी भवन उपलब्ध कराया गया है। इस अस्थायी परिसर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय दिनांक 22 सितम्बर, 2025 को 01 स्नातक एवं 01 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के साथ प्रारंभ किया गया। वर्तमान में इस परिसर में 84 विद्यार्थी अध्ययनरत् है। यहां साइबर सिक्योरिटी में बीटेक और डिजिटल फोरेंसिक साइबर सिक्योरिटी में एमएससी पाठ्यक्रम उपलब्ध है। 

  • ‘वंदे मातरम्’ न गाने पर कार्रवाई के खिलाफ याचिका, SC ने केंद्र को नोटिस

    ‘वंदे मातरम्’ न गाने पर कार्रवाई के खिलाफ याचिका, SC ने केंद्र को नोटिस

    नई दिल्ली

    राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाता है या फिर सारे आंतरे नहीं गाता है तो उसपर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं सुप्रीम कोर्ट नेइस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब भी मांगा है। गायक टीएम कृष्णा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई की वंदे मातरम् से जुड़े कानून की व्याख्या करते वक्त 1986 के 'बिजो एमैनुअल' के तय सिद्धातों को लागू किया जाएगा।

    आपको बता दें कि जुलाई में संसद के मॉनसून सत्र में एक संशोधन विधेयक लाकर वंदे मातरम को इसके अंतरगत लाया गया था। 29 जुलाई को राज्यसभा में और फिर 30 जुलाई को लेकसभा में विधेयक को पास करके कानून बनाया दिया गया और वंदेमातरम गाना अनिवार्य किया गया था। इसे राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के दायरे में ले आया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय गीत को दो अंतरे तक ही सीमित रखने पर विचार करने से इनकार कर दिया है। हालांकि इस बात पर विचार करने को तैयार है कि इसे ना गाने को दंडनीय अपराध ना बनाया जाए।

    राष्ट्रगान ना गाने पर नहीं हो सकती सजा
    सीजेआई सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बिजो इमैनुएल मामले में सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तय किया गया था कि राष्ट्रगान ना गाने पर किसी को सजा नहीं दी जाएगी और यह अब भी लागू होता है।

    बिजो इमैनुअल केस: 3 छात्रों ने राष्ट्रगान गाने से मना कर दिया

    कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वंदे मातरम से जुड़े कानून की व्याख्या करते समय 1986 के ‘बिजो इमैनुअल’ फैसले में तय सिद्धांतों को लागू किया जाएगा।

    दरअसल, 1986 के बिजो इमैनुअल बनाम केरल सरकार मामले में तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था। हालांकि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते थे।

    सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता।

    ‘नक्सली’ शब्द पर सॉलिसिटर जनरल और मुरलीधर में बहस
    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कृष्णा के वकील सीनियर एडवोकेट डॉ एस मुरलीधर के बीच तीखी बहस भी हुई। संविधान के तहत निर्णय लेने की प्रक्रिया पर मुरलीधर की दलील के जवाब में मेहता ने ‘नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया।

        मुरलीधर: अभी आपने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, उसे वापस लें। यह कार्यवाही लाइव चल रही है। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं।

        मेहता: मैंने कहा कि यही संवैधानिक तरीका है, न कि वह तरीका जो नक्सली चाहता है। और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है।

        मुरलीधर: “किसी बात पर विचार करना नक्सली होना नहीं है।

    इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी होने का आरोप हो, तब भी संविधान के तहत उसके अधिकार बने रहते हैं।

    2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना
    24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' बनाया।

    इस कानून के तहत 'वंदे मातरम' के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।

    इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' के पूरे 6 छंद गाए गए।

    केंद्र से मांगा जवाब
    सुप्रीम कोर्ट ने इस पीआईएल पर सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारियों के संबंध में कानून में दंड के प्रावधानों की समीक्षा होनी चाहिए।

    आपको बता दें कि कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध गायक टी एम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका फाइल की थी और कहा था कि वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि आखिरी के चार अंतरे में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी देवताओं की आर्चना का भाव है और एक धर्मनिरपेक्ष देश में इसे अनिवार्य कर देना संविधान का उल्लंघन है। केंद्र सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कुछ लोग संविधान और कानून के राज में विश्वास नहीं करते और उनकी सोच नक्सलवादी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय गीत की अहम भूमिका थी और इसे भुलाना नहीं चाहिए।

    तुषार मेहता ने क्या दलील दी?
    सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से नोटिस नहीं जारी करने की मांग की. इस पर उन्होंने दलील दी कि यह सनसेशन को बढ़ावा देने वाला होगा. इसके बाद सुनवाई के दौरान ही जस्टिस बागची ने कहा कि  इसमें कोई संदेह नहीं कि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है। 

    याचिकाकर्ता की बात से सहमत दिखा सुप्रीम कोर्ट
    इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि दो पद गाए जाएं या छह पद गाए जाएं… यह सरकार से इतर कौन तय करेगा, कोई और तो नहीं कर सकता. इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने दखल दी. उन्होंने कहा कि लोगों की राय ली जानी चाहिए थी. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह सही बात है। 

    2 सप्ताह में देना है जवाब
    इसके बाद वंदे मातरम के छह पद गाने की अनिवार्यता के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब तलब किया. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दो सप्ताह के अंदर केंद्र को इस मामले में देना होगा जवाब. याचिकाकर्ता के वकील ने एसजी की ओर से दलील में नक्सलाइट शब्द का उपयोग करने पर भी गंभीर आपत्ति जताई।