Author: NewseDay

  • आवासीय योजनाओं के विकास कार्यों के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

    आवासीय योजनाओं के विकास कार्यों के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की 87वीं बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की 87वीं मंडल सम्मिलन बैठक मंडल मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में मंडल अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश में आवासीय एवं व्यावसायिक सुविधाओं के विस्तार, नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने, भवनों की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने, पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने तथा हितग्राहियों को राहत देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

    *ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए चिन्हित भूमि के उपयोग की प्रक्रिया को मंजूरी*

    मंडल अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव ने बताया कि पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में मंडल की चिन्हित एवं स्वामित्व वाली भूमियों पर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए चार्जिंग स्टेशनों के डिजाइन, वित्त पोषण, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, कमीशनिंग, संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था के लिए लाइसेंस फीस मॉडल के तहत एजेंसी को भूमि उपयोग का अधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई है।

    इस निर्णय से मंडल की विभिन्न आवासीय योजनाओं और प्रमुख क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे ईवी उपयोगकर्ताओं को आवश्यक सुविधा उपलब्ध होने के साथ प्रदेश में स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

    *बहुमंजिला भवनों में फायर सेफ्टी ऑडिट होगा, योग्य फर्मों का होगा एम्पेनलमेंट*

    बैठक में मंडल की बहुमंजिला आवासीय एवं व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत भवनों में उपलब्ध अग्नि सुरक्षा उपकरणों, आपातकालीन व्यवस्थाओं और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन की नियमित जांच सुनिश्चित की जाएगी।

    फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड-2016 के भाग-4 तथा छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम, 2018 के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए योग्य फायर सेफ्टी ऑडिटरों एवं फर्मों के एम्पेनलमेंट की प्रक्रिया को भी मंजूरी प्रदान की गई है। इससे भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा और कमियों के समयबद्ध निराकरण की दिशा में व्यवस्था मजबूत होगी।

    *बकाया राशि एकमुश्त जमा करने वाले हितग्राहियों को राहत*

    मंडल अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव ने बताया कि हितग्राहियों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से बकाया राशि एकमुश्त जमा करने वाले हितग्राहियों के लिए विलंबित अवधि के ब्याज तथा वाटर चार्ज के सरचार्ज में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इससे बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान करने वाले हितग्राहियों को आर्थिक राहत मिलेगी और लंबित देयताओं के निराकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।

    *आवासीय योजनाओं के विकास कार्यों के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति*

    बैठक में प्रदेश की विभिन्न आवासीय योजनाओं के अंतर्गत विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इससे विभिन्न क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं के विस्तार के साथ आवश्यक अधोसंरचना एवं निर्माण कार्यों को गति मिलेगी।

    *भूमि आवंटन, क्वींस क्लब और नामांतरण शुल्क से जुड़े भी लिए गए निर्णय*

    बैठक में शैक्षणिक प्रयोजन के लिए आरक्षित भूखंडों के आवंटन संबंधी निर्देश-2026 में विकसित भूमि के प्रीमियम में आंशिक संशोधन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

    इसी प्रकार क्वींस क्लब ऑफ इंडिया, रायपुर के विकास, संचालन एवं रखरखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पीपीपी मोड के तहत एजेंसी नियुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की गई।

    मंडल की आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों के हस्तांतरण से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बिना विक्रय अनुमति के आवासीय भवन/भूखंड अथवा व्यावसायिक भवन/भूखंड का विक्रय किए जाने की स्थिति में हस्तांतरण/नामांतरण शुल्क दोगुना भारित कर हस्तांतरण/नामांतरण किए जाने की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

    बैठक में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष  अनुराग सिंह देव, मंडल आयुक्त  अवनीश कुमार शरण, वित्त संचालक  ऋषभ पाराशर, विशेष सचिव आवास एवं पर्यावरण  देवेन्द्र भारद्वाज, नगर तथा ग्राम निवेश के  संदीप बांगड़े,  जी.आर. रावटे, मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी  हितेश बोराड तथा क्षेत्रीय प्रमुख हुडको सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • युवाओं के समग्र विकास के लिए योजनाओं में समन्वय और विश्वसनीय डाटा जरूरी : सचिव  रघुराज एम आर

    युवाओं के समग्र विकास के लिए योजनाओं में समन्वय और विश्वसनीय डाटा जरूरी : सचिव रघुराज एम आर

    भोपाल 

    युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए विभागीय योजनाओं में बेहतर समन्वय, विश्वसनीय डाटा और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन को युवाओं के समग्र विकास का प्रभावी समन्वित मंच बनाया जाए। यह निर्देश तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के सचिव  रघुराज एम आर ने मंगलवार को मंत्रालय में मिशन की अंतरविभागीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।

    बैठक में भा-वाणी (BhaVANI), युवा संवाद, एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS), एनवाईके (NYK), पर्यावरण संरक्षण, एकलव्य एवं कन्या शिक्षा परिसर, पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और सांदीपनि विद्यालय सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति, लक्ष्यों एवं डाटा की समीक्षा की गई।

    सचिव  रघुराज ने सभी विभागों को योजनाओं की अद्यतन एवं प्रमाणिक प्रगति का डाटा समय पर उपलब्ध कराने तथा ऑनलाइन डाटा को निरंतर अद्यतन रखने के लिए एपीआई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल डाटा के प्रभावी उपयोग से योजनाओं की निगरानी और उनके परिणामों का आकलन अधिक सटीकता से किया जा सकेगा।

     रघुराज ने ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा प्रत्येक वालंटियर को युवाओं से जोड़कर साक्षरता और क्षमता विकास को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। पंचायत, ग्रामीण विकास एवं नगरीय विकास विभाग के सहयोग से ‘युवा संवाद’ और ‘युवा संगम’ जैसी गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने पर भी जोर दिया गया।

    सचिव  रघुराज ने विभागीय आईईसी (IEC) गतिविधियों में समन्वय स्थापित कर योजनाओं और अवसरों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने तथा स्कूल छोड़ चुके (ड्रॉप आउट) बच्चों को पुनः शिक्षा एवं कौशल विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए।

    बैठक में 13 जनवरी 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के अनुपालन प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। लंबित बिंदुओं पर समयबद्ध कार्रवाई तथा मिशन के प्रमुख कार्य-प्रदर्शन संकेतकों (KPI) को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन कर अधिक परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं अवसरों को एकीकृत करते हुए युवा शक्ति मिशन को परिणामोन्मुख और प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

     

  • मंत्री  परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

    मंत्री परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई। बैठक में विद्यार्थियों के हित, शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थान की अधोसंरचना तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, सुरक्षित परिसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के प्रारंभ में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन एवं कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया।

    विद्यार्थियों की सुविधाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता

    बैठक में मंत्री  परमार ने संस्थान में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन उपकरण स्थापित करने का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए।

    विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों को सामान्य बजट भाग-1 में शामिल करते हुए वार्षिक गतिविधियों के लिए 50 हजार रुपए का प्रावधान किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के विशेष अन्य आकस्मिक व्यय में भी 10 लाख रुपए की वृद्धि की गई, जिससे संस्थान की विभिन्न गतिविधियों का सुचारु संचालन किया जा सकेगा।

    विद्यार्थियों के अध्ययन की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय भवन की व्यवस्थाओं में सुधार तथा अध्ययन कक्ष को वातानुकूलित करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में मेजर एवं माइनर विषयों के स्वैप तथा डबल मेजर के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क के प्रस्ताव को भी सामान्य परिषद ने मान्यता प्रदान की। बीबीए एवं एमबीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से नियमानुसार विश्वविद्यालय नामांकन शुल्क लिए जाने को भी स्वीकृति दी गई।

    नवाचार, कौशल और रोजगार के अवसरों पर जोर

    विद्यार्थियों के नवाचार एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर में मानसेवी रूप से सीईओ अथवा मैनेजर नियुक्त करने की अनुमति दी गई। यह अधिकारी इनक्यूबेशन गतिविधियों के साथ प्लेसमेंट संबंधी कार्यों में भी सहयोग करेगा।

    संस्थान में रिमोट पायलट एवं ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भोपाल स्थित आईआईएसईआर तथा चित्रकूट में संचालित इसी प्रकार के केंद्रों का अध्ययन करने और उनके अनुरूप विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को बजट स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश दिए गए।

    संस्थान के कृषि विभाग के लिए पर्याप्त कक्षाओं, सेमिनार हॉल तथा विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकों के लिए आवश्यक स्थान की व्यवस्था हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।

    शैक्षणिक गुणवत्ता और NAAC सुझावों पर निरंतर कार्रवाई

    संस्थान द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा दिए गए सुझावों के अनुरूप निरंतर कार्रवाई की जा रही है। सामान्य परिषद ने इन बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करते हुए संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय

    संस्थान में कार्यरत मानसेवी शिक्षकों की मांगों पर संवेदनापूर्वक विचार करते हुए सामान्य परिषद ने निर्णय लिया कि अब इन्हें ‘अतिथि विद्वान’ के नाम से संबोधित किया जाएगा। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश एवं 3 ऐच्छिक अवकाश दिए जाने के निर्देश भी दिए गए।

    संस्थान में कार्यरत मानसेवी कर्मचारियों के मानदेय में प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत वृद्धि करने तथा यह वृद्धि आगामी तीन वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। कन्या छात्रावास की मैनेजर का मानदेय 22 हजार 374 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार 287 रुपए प्रतिमाह करने की भी स्वीकृति दी गई।

    संस्थान में आमंत्रित विशेषज्ञों को व्याख्यान अथवा बैठक के लिए 1,500 रुपए प्रति व्याख्यान/बैठक तथा कार्यालयीन परामर्श के लिए 700 रुपए प्रति बैठक मानदेय दिए जाने को भी स्वीकृति दी गई।

    आउटसोर्स कर्मचारियों की सामान्य आवश्यकता की पूर्ति सेडमैप के माध्यम से तथा उच्च कुशलता से अधिक योग्यता एवं विशेष दक्षता वाले कर्मचारियों के लिए संस्थान स्तर पर विज्ञापन जारी कर नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए।

    संस्थान की कार्यक्षमता बढ़ाने प्रशासनिक निर्णय

    संस्थान में 15 लाख रुपए तक के बजट एवं खरीदी संबंधी प्रस्तावों पर निर्णय लेने के लिए संचालक को अधिकृत किया गया। इससे संस्थान की आवश्यक गतिविधियों और व्यवस्थाओं से संबंधित निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    बैठक के प्रारंभ में संस्थान द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘एक्सेल एसेंस’ का विमोचन किया गया।

    बैठक में उच्च शिक्षा के अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा, माधव साइंस कॉलेज उज्जैन के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश अग्रवाल सहित सामान्य परिषद के अन्य सदस्य एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

     

  • जबलपुर-भोपाल-इंदौर कॉरिडोर में बनेगी इंडस्ट्रियल टाउनशिप, 2 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

    जबलपुर-भोपाल-इंदौर कॉरिडोर में बनेगी इंडस्ट्रियल टाउनशिप, 2 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

    भोपाल

     जबलपुर से भोपाल और भोपाल से इंदौर कॉरिडोर (एक्सप्रेस-वे) बनाए जा रहे हैं। 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस प्रोजेक्ट को सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के तौर पर तैयार कर रही है। कॉरिडोर पर चार बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इससे आने वाले समय में दो लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे।

    कॉरिडोर पर स्किल सिटी बनाई जाएगी

    इसके साथ इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी बनाई जाएगी। प्रदेश के युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए इस कॉरिडोर पर स्किल सिटी बनाई जाएगी। यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों को दी।

     

  • निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 458 मरीजों को मिला परामर्श, 100 औषधीय पौधों का किया गया रोपण

    निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 458 मरीजों को मिला परामर्श, 100 औषधीय पौधों का किया गया रोपण

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान एवं 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर रायगढ़ जिले के शासकीय आयुर्वेद औषधालय बुनगा द्वारा ‘स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद’ थीम पर विभिन्न जनजागरूकता एवं स्वास्थ्य गतिविधियों का आयोजन किया गया। 

    आयोजन के तहत निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर, काढ़ा वितरण, नशामुक्ति शपथ एवं जागरूकता, स्वच्छता जागरूकता, मितानिन प्रशिक्षण, योग शिविर तथा औषधीय पौधारोपण जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। छिछोर उमरिया, सिहा, ठाकुरपाली, गोतमा एवं स्कूल पारा बुनगा में लगाए गए चिकित्सा शिविरों में कुल 458 मरीजों को आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श प्रदान कर निःशुल्क औषधियों का वितरण किया गया। 

     शिविरों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, वातरोग, ऋतुचर्या एवं योगाभ्यास सहित विभिन्न आयुर्वेदिक विषयों पर आधारित पाम्पलेट वितरित कर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई। साथ ही आयुर्वेद और प्रकृति के समन्वय का संदेश देते हुए 100 औषधीय पौधों का रोपण किया गया तथा उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। गांव के सामुदायिक भवनों एवं चौक-चौराहों पर आयोजित इन गतिविधियों में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में डॉ. जागृति पटेल, फार्मासिस्ट भोज मालाकार, वर्षा ठेठवार, योग प्रशिक्षक दुलामनी रजक, सरपंच एवं मितानिनों का सक्रिय योगदान रहा।

  • जोगी डोंगरी जलाशय में गूंजा स्वच्छता का संकल्प, जल संरक्षण के प्रति किया जागरूक

    जोगी डोंगरी जलाशय में गूंजा स्वच्छता का संकल्प, जल संरक्षण के प्रति किया जागरूक

    रायपुर

     कलेक्टर  विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, स्वच्छता एवं जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज जोगी डोंगरी जलाशय के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान एवं जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं पंचायत विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

    अभियान के दौरान जोगी डोंगरी जलाशय परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसमें जलाशय के आसपास बिखरे कचरे एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों की साफ-सफाई की गई। स्वच्छता अभियान के माध्यम से जल स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने और उनके संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

    कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, जल के अपव्यय को रोकने तथा उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के संबंध में जागरूक किया गया। जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों से अपने गांव के तालाबों, जलाशयों, कुओं एवं अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई और देखरेख में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की गई।

    जल स्रोतों की स्वच्छता सभी की सामूहिक जिम्मेदारी

    कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण केवल विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि वे अपने आसपास के जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के साथ ही जल के संरक्षण और सदुपयोग के लिए निरंतर प्रयास करें।

    ग्रामीणों ने लिया जल संरक्षण का संकल्प

    अभियान में ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, पानी की बर्बादी रोकने तथा जल संरक्षण के लिए अपने स्तर पर निरंतर प्रयास करने का सामूहिक संकल्प लिया। ग्रामीणों की सहभागिता ने जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया।

    कार्यक्रम के माध्यम से “जल है तो कल है” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाते हुए जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप देने का संदेश दिया गया।

  • 52 लाख तक की सब्सिडी का लाभ, फिर भी योजना रही खाली; MP के 8 जिलों में हाईटेक गन्ना हब के आवेदन फिर खुले

    52 लाख तक की सब्सिडी का लाभ, फिर भी योजना रही खाली; MP के 8 जिलों में हाईटेक गन्ना हब के आवेदन फिर खुले

     ग्वालियर

     अंचल में आधुनिक खेती और गन्ने की फसल के यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी योजना को बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय ने ग्वालियर और छिंदवाड़ा, दतिया, धार, बुरहानपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम समेत प्रदेश के आठ जिलों में शुगरकेन हाईटेक हब स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

    इस योजना में 1.70 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत यानि अधिकतम 52 लाख रुपये तक का भारी-भरकम शासकीय अनुदान दिया जा रहा है।

    इसके बावजूद, ग्वालियर और दतिया सहित सभी आठ चिह्नित जिलों से एक भी पात्र हितग्राही या किसान आगे नहीं आया। अब विभाग ने दोबारा से शुगरकेन हाइटेक हब के लिए आवेदन मांगे हैं।

    जून में मांगे थे आवेदन, लेकिन कोई नहीं आया सामने

    कृषि विभाग ने शुगरकेन हाइटेक हब के लिए जून महीने में आवेदन मांगे थे, लेकिन ग्वालियर ही नहीं प्रदेश कि चयनित जिलों में से एक भी हितग्राही ने आवेदन नहीं किया। ऐसे में अब एक बार फिर विभाग ने गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए योजना शुरू की है और आवेदन मांगे हैं। दतिया व ग्वालियर को इस योजना में इसलिए चयनित किया गया है, क्योंकि इन दोनों ही जिलों में गन्ने की खेती होती है।

     

  • सेवा की कहानी: आयुष्मान कार्ड से शिशु खलखो को इलाज के खर्च की चिंता से मिली राहत

    सेवा की कहानी: आयुष्मान कार्ड से शिशु खलखो को इलाज के खर्च की चिंता से मिली राहत

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिकों के जीवन में आ रहे बदलाव की कहानियां सामने आ रही हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत घोघरा निवासी श्रीमती शिशु खलखो के लिए आयुष्मान कार्ड स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक राहत का भी माध्यम बना है। पहले परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने पर उपचार के खर्च की चिंता उनके घरेलू बजट पर असर डालती थी। अब आयुष्मान कार्ड बनने से पात्रता एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

    श्रीमती शिशु खलखो ने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान उनकी समस्या का समाधान हुआ और उनका आयुष्मान कार्ड बनाया गया। कार्ड मिलने के बाद बीमारी की स्थिति में उपचार पर होने वाले बड़े खर्च को लेकर उनकी चिंता पहले की तुलना में कम हुई है। सीमित आय वाले परिवार के लिए स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक खर्च कई बार घरेलू जरूरतों और बजट को प्रभावित करता था, लेकिन आयुष्मान कार्ड ने उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिया है।

    इलाज के खर्च से मिली राहत, परिवार को मिला भरोसा

    शिशु खलखो बताती हैं कि पहले परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर इलाज के लिए बड़ी राशि जुटानी पड़ती थी। इससे घर के दूसरे जरूरी खर्च प्रभावित होते थे और आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब आयुष्मान कार्ड उनके परिवार के लिए उपचार के समय आर्थिक सहारा बन गया है।

    आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजना के प्रावधानों के अनुसार उपचार की सुविधा मिलने से गंभीर बीमारी या आकस्मिक स्वास्थ्य जरूरत के समय परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिलती है। शिशु खलखो के लिए यह कार्ड बीमारी के समय इलाज की सुविधा के साथ आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी लेकर आया है।

    जनकल्याणकारी योजनाओं से मजबूत हो रहा सामाजिक सुरक्षा का आधार

    सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासन की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की कहानियां जन-जन तक पहुंचाई जा रही हैं। शिशु खलखो की कहानी बताती है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंचता है, तो स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकता के समय उन्हें उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा का भी संबल मिलता है।

  • उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश

    उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश

    रायपुर

    सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग गंभीरता से पहल कर रही है। विभाग ने उपचारित जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने नगरीय निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और उनकी जल आवश्यकता के आकलन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा गया है।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के जिन 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन है, वहां के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इन निकायों को एसटीपी के उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा गया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित जल की आवश्यकता होगी, इसका भी आकलन करने को कहा गया है। 

    50 किमी के दायरे में तलाशेंगे उपयोगकर्ता

    उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसके उपयोग के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से की जा सकेगी।

    स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है।

    केंद्र सरकार और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन की पहल

    सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरोदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगाव के निगम आयुक्तों को परिपत्र जारी कर बताया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी एसटीपी के उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए निर्देशित किया है। सूडा ने संबंधित निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता के संबंध में जानकारी 15 दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

  • महाराष्ट्र-कर्नाटक से प्याज की सप्लाई कम, ₹54 किलो पहुंचा भाव; जल्द राहत के आसार

    महाराष्ट्र-कर्नाटक से प्याज की सप्लाई कम, ₹54 किलो पहुंचा भाव; जल्द राहत के आसार

    नई दिल्ली
    देशभर में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। बीते तीन महीनों में प्याज के खुदरा भाव में करीब 82 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून की शुरुआत में जो प्याज करीब ₹30 प्रति किलो बिक रहा था, सितंबर के मध्य तक उसका औसत भाव ₹54 प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून को प्याज का औसत खुदरा मूल्य ₹29.50 प्रति किलो था। वहीं 17 सितंबर तक यह बढ़कर ₹53.78 प्रति किलो हो गया। इस दौरान उपभोक्ताओं को प्याज के लिए काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी।

    थोक बाजार में भी बढ़ी कीमतें
    खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक मंडियों में भी प्याज के दाम तेजी से बढ़े हैं। जून की शुरुआत में थोक बाजार में प्याज का औसत भाव करीब ₹22.60 प्रति किलो था, जो सितंबर में बढ़कर ₹45 प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया। थोक कीमतों में यह बढ़ोतरी बाजार में उपलब्ध स्टॉक और नई फसल की आवक से जुड़ी परिस्थितियों को दर्शाती है। कम सप्लाई के कारण मंडियों में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

    महाराष्ट्र और कर्नाटक से कम हुई आवक
    प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण उत्पादन वाले राज्यों से कम सप्लाई को माना जा रहा है। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज फसल को नुकसान पहुंचने और आवक घटने से बाजार में दबाव बढ़ा। इसके अलावा कर्नाटक से भी प्याज की सप्लाई में कमी आई है। इन दोनों राज्यों से आने वाली खेप में गिरावट का असर देश के कई बाजारों में दिखाई दिया।

    नई फसल में देरी का असर
    बाजार में प्याज की उपलब्धता पर खरीफ फसल की आवक का भी प्रभाव पड़ता है। नई फसल की आवक में देरी होने से पुराने स्टॉक पर निर्भरता बढ़ी, जिससे कीमतों में तेजी बनी रही। व्यापारी और बाजार से जुड़े लोग नई आवक बढ़ने के साथ कीमतों में बदलाव की उम्मीद जता रहे हैं।

    सरकार और बाजार की नजर सप्लाई पर
    प्याज जैसी जरूरी खाद्य वस्तु की कीमतों पर सरकार और बाजार दोनों की नजर रहती है। कीमतों में तेज बदलाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू खर्च पर पड़ता है। आने वाले समय में प्याज की आवक, उत्पादन वाले राज्यों की स्थिति और मंडियों में उपलब्ध स्टॉक कीमतों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।.

    कब तक गिरेंगे प्याज के दाम, क्या कर रही है सरकार    

    प्याज की कीमतों में अभी तेजी जारी है,जिसे कुछ हफ्ते ऐसे हालात बने रह सकते हैं. नई फसल के बाजार में आने के बाद प्याज की कीमत गिर सकती है. प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कांदा एक्सप्रेस चलाने का फैसला किया. बफर स्टॉक से राहत पहुंचाने की कोशिश कर रही है. घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए निर्यात पर रोक-टोक जैसे कदम उठाए हैं. घरेलू खुदरा बाजार में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है. अब उम्मीद है कि नई फसल के आवक के साथ प्याज की कीमत कंट्रोल हो सकेगी।