Author: NewseDay

  • CM यादव ने बताईं TMZ की खूबियां, 500 करोड़ से ज्यादा निवेश पर चर्चा

    CM यादव ने बताईं TMZ की खूबियां, 500 करोड़ से ज्यादा निवेश पर चर्चा

     सीएम डॉ. यादव ने बताईं TMZ की विशेषताएं, कंपनियों ने की 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव पर चर्चा

     मध्यप्रदेश को टेलीकॉम, सेमीकंडक्टर, का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    – मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेंगलुरु में उद्योगपतियों से किया वन-टू-वन संवाद
    – चिप डिजाइन, ड्रोन तकनीक, जीसीसी, डेटा सेंटर पर हुई अहम बातचीत
    – ग्वालियर टेलीकॉम जोन से लेकर मालवा-महाकौशल तक खुलेंगे रोजगार के नए अवसर

    भोपाल/बेंगलुरु
     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन संवाद किया। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद थे। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सूचना प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के एक सशक्त केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-व्यापार के लिए अपार संभावनाएं, मजबूत अधोसंरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और उद्योग-हितैषी नीतियां मौजूद हैं। राज्य सरकार हर निवेशक को सुरक्षित वातावरण, सिंगल विंडो सिस्टम से त्वरित अनुमतियां और नीतिगत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। बेंगलुरु के तकनीकी इको सिस्टम और मध्यप्रदेश के औद्योगिक आधार के समन्वय से प्रदेश में नवाचार और रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि उद्योग की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं हर रोड शो में निवेशकों के साथ संवाद करते हैं और उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी रहते हैं, ताकि निवेश से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं का तत्काल समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पारदर्शी नीतियां लागू हैं और निवेशकों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे का तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद में विशेष रूप से ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की विशेषताओं और संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ-साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की नीतियां भविष्योन्मुखी हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण समूहों के विस्तार के लिए वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों ही तरह के आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।

    थोलोन्स और सीजीआई से संवाद
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद के दौरान आईटी एवं जीसीसी सेक्टर के दिग्गजों ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित करने को लेकर गहरी रुचि दिखाई। थोलोन्स के चेयरमैन और सीईओ अविनाश वशिष्ठ और अंकिता वशिष्ठ ने प्रदेश में 210 करोड़ रुपये के निवेश से जीसीसी यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने पर चर्चा की। सीजीआई के वाइस प्रेसिडेंट अतुल अगाशे ने मध्यप्रदेश में जीसीसी निवेश की संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश में विस्तार की मंशा जताई।

    सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। असेइक मावेन सिलिकॉन के संस्थापक एवं सीईओ शिवकुमार पी.आर. ने प्रदेश में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से 'चिप डिजाइन हाउस' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसके प्रथम चरण में 25 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ पंकज गर्ग ने भी विभिन्न चरणों में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज स्थापित करने पर सहमति जताई।

    डीपटेक फंडिंग, डेटा सेंटर, स्पेसटेक और सस्टेनेबिलिटी में नए निवेश प्रस्ताव
    प्रदेश में स्टार्टअप्स और नई तकनीकों को गति देने के लिए डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड 'सीफंड' के नरेंद्र भंडारी ने मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की। नाइनस्टार्स इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीईओ गोपाल कृष्णन ने मध्यप्रदेश में आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने पर विमर्श किया। स्पेसटेक के क्षेत्र में गैलेक्सी के सह-संस्थापक रक्षित भट्ट और पायल दवे ने अपनी सहभागिता को लेकर संवाद किया। इसके अलावा, मोबिलिटी एवं बाइक शेयरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रैपिडो के सह-संस्थापक पवन गुंटुपल्ली तथा पर्यावरण एवं सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनी डोनाउ कार्बन इंडिया के सीईओ व एमडी वीरेंद्र चौधरी ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की।

    ड्रोन विनिर्माण और रक्षा तकनीक को मिलेगी नई गति
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरबाउंड के संस्थापक नमन पुष्प, आइडियाफोर्ज की हेड ऑफ मार्केटिंग कुथि अरमनमाडा, नॉटिकल विंग्स के हेड ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट रोहन फर्नांडीस, न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज के हेड ऑफ बिजनेस अश्विन शास्त्री और अनमैन्ड सिस्टम्स के संस्थापक एवं सीईओ यशवंत रेड्डी ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने के साथ-साथ निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एयरबाउंड की ओर से प्रतिनिधियों ने ड्रोन भेंट किया।

    प्रमुख टेक एवं कंसल्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने की भेंट
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैठक के दौरान एचपी एंटरप्राइजेज की ओर से जीसीसी क्षेत्र में कार्यरत जयंत और तारा,  जेडस्केलर आईटी कंपनी की ओर से श्रीनिधि तथा क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई क्षेत्र में कार्यरत कंपनी की ओर से अनुराग ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फुजित्सु कंसल्टिंग इंडिया प्रालि की ओर से विशाल अगस्त्या, कंट्री लीडर, इंडिया एवं कंसल्टिंग लीड, ग्लोबल डिलीवरी यूनिट तथा इनफिनिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से नितिन मेहता, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं कंट्री हेड ने भी भेंट की।

    प्रदेश के सभी अंचलों में संतुलित औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का संकल्प
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल के साथ-साथ जबलपुर और ग्वा
    लियर जैसे संभागों में भी औद्योगिक गतिविधियों को समान रूप से संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों में भारी उद्योगों के साथ एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार मिल सके। उपस्थित सभी प्रमुख निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, पारदर्शी कार्य प्रणाली और नेतृत्व की सक्रियता की सराहना की।

  • कृषि विश्वविद्यालय में 3 दिवसीय यूथ कॉन्क्लेव, 28 सितंबर को होगा भव्य शुभारंभ

    कृषि विश्वविद्यालय में 3 दिवसीय यूथ कॉन्क्लेव, 28 सितंबर को होगा भव्य शुभारंभ

    कृषि विश्वविद्यालय में 28 से 30 सितंबर तक “यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव” का आयोजन

    राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री एवं वित्त मंत्री शुभारंभ समारोह में रहेंगे मौजूद

    छत्तीसगढ़ के एक हजार से अधिक युवा कान्क्लेव में शामिल होंगे

    आई.आई.टी, एन.आई.टी, आई.आई.आई.टी., नाबार्ड और सीजी काॅस्ट भी होंगे आयोजन में सहयोगी

    सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण भी होगा

    रायपुर, 
    छत्तीसगढ़ के युवाओं में नवचार, उद्यमिता विकास एवं प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 28 से 30 सितंबर 2026 तक “छत्तीसगढ़ यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव 2026” का आयोजन कृषि मंडपम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में किया जाएगा। राज्य में उद्यमिता एवं स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाले इस यूथ कॉन्क्लेव में प्रदेश भर से लगभग एक हजार से अधिक नवोन्मेषी युवा उद्यमियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस तीन दिवसीय यूथ काॅन्क्लेव 2026 का उद्घाटन 28 सितम्बर को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रामेन डेका करेंगे तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चैधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रथम एवं एकमात्र बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर-केंद्रित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर के नवनिर्मित भवन का शुभारंभ भी किया जाएगा। यूथ काॅन्क्लेव के दौरान युवा नेतृत्व वाले उद्यमों और संस्थागत नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली “नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी” भी आयोजित की जाएगी तथा शीर्ष तीन स्टार्टअप्स को पुरस्कृत किया जाएगा। यूथ काॅन्क्लेव में शामिल होने के इच्छुक युवा छात्र एवं उद्यमी 25 सितम्बर 2026 तक पंजीयन करवा सकते हैं। 
    “यूथ कॉन्क्लेव 2026” में नवाचार अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय पहल है। कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों, इनक्यूबेटर्स, शिक्षाविदों तथा विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इस मंच के माध्यम से नवीन विचारों, अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचारों को व्यावसायिक अवसरों एवं सफल उद्यमों में परिवर्तित करने के साथ-साथ राज्य में एक सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने में सहायता प्राप्त होगी। कार्यक्रम के अंतर्गत 28 सितम्बर को प्रदेश के प्रथम एवं एकमात्र बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर-केंद्रित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। यह केंद्र प्रदेश में बायोटेक्नोलॉजी आधारित अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप विकास एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत आधार के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से शोधार्थियों एवं नवाचारकर्ताओं को प्रोटोटाइप विकास, तकनीकी मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन, मेटरशिप तथा उद्योग एवं निवेशकों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
    छत्तीसगढ़ में लागू नवाचार एवं स्टार्टअप सवर्धन नीति 2025-30 के प्रभावी क्रियान्वयन को गति प्रदान करना इस कॉन्क्लेव का प्रमुख उद्देश्य है। इसके माध्यम से युवाओं में नवाचार एवं उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित करने, स्थानीय आवश्यकताओं एवं समस्याओं के तकनीकी एवं व्यावसायिक समाधान विकसित करने तथा राज्य के स्टार्टअप्स एवं नवाचारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए आवश्यक मंच एवं अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। कॉन्क्लेव में विशेष रूप से कृषि एवं एग्री टेक. खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु स्मार्ट तकनीक, फिनटेक तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। उक्त कार्यक्रम में कुल चार तकनीकी सत्रो का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों का व्याख्यान, स्टार्टअप प्रदर्शनी, स्टार्टअप पिचिंग, निवेशक/स्टार्टअप संवाद, नीति संवाद, मेंटरशिप एवं इनक्यूबेशन सत्र तथा   उत्कृष्ट नवाचारों एवं स्टार्टअप्स को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। तीन शीर्ष युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को क्रमशः एक लाख रूपये, पचहत्तर रूपये तथा पचास हजार रूपये की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। 
    इस कॉन्क्लेव में लगभग 1000 प्रतिभागियों की सहभागिता अपेक्षित है, जिनमें युवा, उच्च शिक्षा के विद्यार्थी, शोधार्थी, स्टार्टअप संस्थापक, नवाचारकर्ता, उद्यमी, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, इनक्यूबेटर, मेंटर, शिक्षाविद् तथा विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी सम्मिलित होंगे। इस आयोजन से प्रदेश के युवाओं को अपने नवीन विचारों एवं तकनीकी समाधानों को विशेषज्ञों, उद्योगों एवं संभावित निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर एवं लाभ प्राप्त होगा। युथ काॅन्क्लेव 2026 में सहभागिता के इच्छुक युवा छात्र https://forms.gle/UL4UoMW8zi9VxyjQ9 तथा युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स https://forms.gle/vH7RYusdHmmFUsxK6 पर 25 सितम्बर 2026 तक पंजीयन कर सकते हैं।

  • हर बच्चे के विकास की निगरानी, पोषण माह में सही सलाह और देखभाल पर जोर

    हर बच्चे के विकास की निगरानी, पोषण माह में सही सलाह और देखभाल पर जोर

    सेवा की कहानी: हर बच्चे के विकास पर नजर, समय पर मिल रही सही सलाह और विशेषज्ञ सेवाएं

    पोषण माह 2026 में बच्चों के विकास की निगरानी और देखभाल पर विशेष जोर

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ में पोषण माह 2026 के तहत बच्चों के समुचित विकास, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत भी बच्चों के विकास की समय पर पहचान, उचित परामर्श और जरूरतमंद बच्चों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने की दिशा में सेवाभाव के साथ प्रयास किए जा रहे हैं।

    अभियान के माध्यम से अभिभावकों को बताया जा रहा है कि वे बच्चे की उम्र के अनुसार उसके सीखने, खेलने, प्रतिक्रिया देने और व्यवहार पर ध्यान दें। विकास में किसी प्रकार की देरी या चिंता दिखाई देने पर इंतजार न करें, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बात करें और स्वास्थ्यकर्मी से आवश्यक सलाह लें। जरूरत पड़ने पर बच्चे को विशेषज्ञ सेवा के लिए रेफर कराया जा सकता है।

    आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के विकास और पोषण की नियमित निगरानी की जा रही है। ‘हर बच्चे के विकास में ध्यान देना जरूरी’ संदेश के साथ परिवारों को यह समझाया जा रहा है कि समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन बच्चों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ पोषण माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और परिवार मिलकर बच्चों के स्वस्थ विकास की दिशा में काम कर रहे हैं। यही निरंतर देखभाल और समय पर सहयोग ‘सेवा की कहानी’ को मजबूत करते हुए बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार कर रहा है।

  • 85 वर्षीय बुजुर्ग मां की गुहार पर कोर्ट का फैसला, पांचों बेटों पर लगा गुजारा भत्ता

    85 वर्षीय बुजुर्ग मां की गुहार पर कोर्ट का फैसला, पांचों बेटों पर लगा गुजारा भत्ता

    हरदा 

    मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक एसडीएम कोर्ट ने पांच बेटों को 85 साल की एक बुजुर्ग मां को भरण-पोषण के तौर पर हर महीने दो-दो हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।मध्य प्रदेश के हरदा जिले की खिरकिया तहसील की एसडीएम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के तहत एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 85 साल की एक बुजुर्ग महिला के 5 बेटों को हर महीने की 10 तारीख तक अपनी मां को दो-दो हजार रुपये यानी कुल 10 हजार रुपये का भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। अदालत ने पैसे नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई और जमीन की आमदनी से सीधे भुगतान की चेतावनी दी है।

    मां के गुजारे के लिए हर महीने रकम देने के आदेश
    प्राप्त जानकारी के अनुसार, 85 साल की बजुर्ग विधवा महिला गीताबाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसडीएम रजनी वर्मा की अदालत ने उनके पांच बेटों को अपनी मां के भरण-पोषण के लिए हर महीने एक तय रकम देने का आदेश दिया।

    बुजुर्ग महिला ने दी थी यह शिकायत
    गीताबाई ने एसडीएम कोर्ट में आवेदन देकर बताया था कि वे वृद्धावस्था के कारण चलने-फिरने, देखने और सुनने में असमर्थ हैं। ग्राम पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 (रकबा 3.861 हेक्टेयर) की संयुक्त जमीन में उनका 1/8 हिस्सा दर्ज है। उनके बेटों की ओर से इस जमीन को लीज पर दिया जाता है। उससे मिली पूरी इनकम का वे खुद ही उपभोग करते हैं।

    बेटे नहीं देते थे मां को पैसे
    बुजुर्ग मां का आरोप था कि जमीन की आमदनी में से बेटे उनको कोई हिस्सा नहीं देते। सभी बेटे उनकी आर्थिक मदद नहीं करते हैं। बेटे उनका कोई ध्यान भी नहीं रखते हैं। इतना ही नहीं जमीन पर बैंक का केसीसी कर्ज बकाया है जिसका भुगतान भी बेटे नहीं कर रहे हैं।

    मां को हर महीने देने होंगे 2-2 हजार रुपये
    मामले की सुनवाई और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद एसडीएम कोर्ट ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत बुजुर्ग महिला के पांचों बेटों राजेन्द्रप्रसाद, गोपालप्रसाद, गोविन्द, नारायण और प्रमोद सोनी को निर्देश दिया कि वे हर महीने की 10 तारीख तक अपनी मां को 2-2 हजार रुपये इस तह कुल 10 हजार रुपये प्रतिमाह नकद भुगतान करें या उनके बैंक खाते में जमा कराएं।

    नहीं किया भुगतान तो ऐक्शन
    अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि बेटे नियमित रूप से यह रकम बुजुर्ग महिला के खाते में पैसे जमा नहीं करते हैं तो पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 की खोट या बटाई से मिली कुल आमदनी में से मां के हिस्से की राशि सीधे उनको प्रदान की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि उसके आदेश की अवहेलना करने पर आरोपी बेटों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी वसूली और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • गणितीय अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से समझाने पर हुई चर्चा

    गणितीय अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से समझाने पर हुई चर्चा

    गणित के डर को आकर्षण में बदलने गतिविधि आधारित शिक्षण पर शिक्षकों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

    छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर में ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' पर प्रशिक्षण हुआ आयोजित

    गणितीय अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से समझाने पर हुई चर्चा

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में  ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' विषय पर विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को गणित शिक्षण की ऐसी नवीन, गतिविधि – आधारित और रचनात्मक विधियों से परिचित कराना रहा, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के लिए गणित को सरल, रोचक और आनंददायक बनाया जा सके।

            प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, अनुभव, गतिविधियों और रचनात्मकता से जोड़कर पढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों में गणित के प्रति रूचि और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकती है।

           कार्यक्रम के विशेषज्ञ इंजीनियर, ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन बेंगलुरु के मैथ्स कोच श्री बी. एन. राव ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधि-आधारित एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गणितीय अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए व्यावहारिक उदाहरणों और विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया तथा बताया कि कक्षा में विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सक्रिय सहभागिता बढ़ाकर गणित को सहज एवं आनंददायक बनाया जा सकता है।

         सेशन के दौरान शिक्षकों ने स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर गणितीय अवधारणाओं को समझा। गतिविधियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। शिक्षकों ने इन तकनीकों को अपने-अपने कक्षा में लागू करने के तरीकों को भी समझा।

         कार्यक्रम में रायपुर के चार विकासखंडों के शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की, जबकि पूरे रायपुर जिले के शिक्षकों के लिए कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रसारण किया गया। इसके माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई गतिविधि-आधारित गणित शिक्षण की विधियों से जुड़े और लाभान्वित हुए।

         इंटरैक्टिव सत्र में गणित शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शिक्षकों के साथ संवाद भी किया गया। छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे प्रभावी शिक्षण उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराना रहा, जिनसे विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को समझकर सीखें, उनका प्रयोग करें तथा उनमें तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित हो।
     
             कार्यक्रम में शिक्षकों की उत्साहपूर्ण एवं सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हुए गणित शिक्षण की नई तकनीकों और दृष्टिकोणों को समझा। शिक्षकों के अनुभव और सुझावों ने कार्यक्रम को अधिक संवादात्मक एवं उपयोगी बनाया। इसी तरह 23 सितंबर को बी.एड. विद्यार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

  • तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स के लिए चयन ट्रायल 23-24 सितंबर को

    तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स के लिए चयन ट्रायल 23-24 सितंबर को

    गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश नवीनीकरण के लिए चयन ट्रायल 23-24 सितम्बर को

    तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए चयन ट्रायल

    आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य

    रायपुर
    राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर जिले में संचालित गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश के नवीनीकरण के लिए 23 सितम्बर और 24 सितम्बर को चयन ट्रायल का आयोजन किया गया है। इसमें भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी 23 सितम्बर को रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक पंजीयन करा सकते हैं। चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गैर-आवासीय बालक-बालिका तीरंदाजी और बालिकाओं के फुटबॉल (बालिका) के लिए चयन ट्रायल 23 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा तथा तीरंदाजी एरिना (बालिका खेल छात्रावास के सामने) में होंगे। वहीं गैर-आवासीय बालक-बालिका हॉकी एवं बालक-बालिका एथलेटिक्स के लिए चयन ट्रायल 24 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं हॉकी स्टेडियम पिच-02 में सुबह 7 बजे से आयोजित किए गए हैं।

    चयन ट्रायल में राज्य के बालक-बालिका खिलाड़ी तथा अन्य राज्यों के 13 से 17 आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। फुटबॉल एवं तीरंदाजी खिलाड़ियों का 23 सितम्बर को पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं तीरंदाजी एरिना रायपुर में किया जाएगा। वहीं 24 सितम्बर को हॉकी एवं एथलेटिक्स खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम पिच-02 में होगा।

    चयन ट्रायल में खिलाड़ियों का चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति द्वारा किया जाएगा। खेल अकादमी संचालन नियम,2014 के तहत अंतिम रूप से चयनित खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, खेल परिधान, प्लेइंग किट, बीमा एवं छात्रवृत्ति आदि सुविधाएं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।

  • 100 महिलाओं की क्षमता वाला राजकीय महिला शरणालय तैयार, बुधवार को CM करेंगे लोकार्पण

    100 महिलाओं की क्षमता वाला राजकीय महिला शरणालय तैयार, बुधवार को CM करेंगे लोकार्पण

    राजकीय महिला शरणालय भवन का बुधवार को लोकार्पण करेंगे मुख्यमंत्री

    8 करोड़ रुपये की लागत से 100 महिलाओं की क्षमता का बना है शरणालय

    निर्माणाधीन राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का निरीक्षण भी करेंगे सीएम योगी

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखपुर में, महिला कल्याण विभाग की तरफ से संचालित होने वाले राजकीय महिला शरणालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर वह निर्माणाधीन राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का भी निरीक्षण करेंगे।

    चरगांवा में कृषि विभाग के बीज गोदाम के समीप 8 करोड़ 5 लाख 42 हजार रुपये की लागत से राजकीय महिला शरणालय के भवन का निर्माण कराया गया है। इस भवन की क्षमता 100 महिलाओं के रहने की है। इसमें आवासीय सुविधा के साथ आवश्यक सहायक सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त 10 डारमेट्री कक्ष, 4 अध्ययन कक्ष, रोगी कक्ष, क्रेच रूम, डाइनिंग हॉल, किचन, स्टोर, शौचालय एवं स्नानघर जैसी आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया गया है। प्रशासनिक एवं संचालन संबंधी कार्यों के लिए वर्कशॉप, वार्डन कक्ष एवं कार्यालय की व्यवस्था की गई है। संवासनियों के अध्ययन एवं ज्ञानवर्धन हेतु पुस्तकालय भी बना है।

    राजकीय महिला शरणालय, महिला कल्याण विभाग के अधीन संचालित एक संरक्षणात्मक एवं आवासीय संस्था है। इन शरणालयों की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य घरेलू हिंसा, जरूरतमंद, संकटपूर्ण परिस्थितियों, भटकाव अथवा अन्य सामाजिक एवं पारिवारिक कठिनाइयों से प्रभावित महिलाओं को सुरक्षित आश्रय, संरक्षण एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करना है। 

    राजकीय महिला शरणालय का लोकार्पण करने से पहले मुख्यमंत्री, किशोरों के लिए निर्माणाधीन संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण करेंगे। चरगांवा में कृषि विभाग के बीज गोदाम के समीप ही राजकीय संप्रेषण गृह (किशोर) का निर्माण 14 करोड़ 87 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। इसकी क्षमता 100 किशोरों के रहने की होगी। इसी परिसर में किशोर न्याय बोर्ड के लिए पृथक ब्लॉक का प्रावधान किया गया है। इसका निर्माण फरवरी 2027 तक पूर्ण होने की उम्मीद है। राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का मुख्य उद्देश्य कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों को सुरक्षित, संरक्षित, बाल-अनुकूल एवं सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध कराते हुए उनकी समुचित देखभाल, संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोसामाजिक सहयोग, कौशल विकास एवं पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इस गृह में ऐसे बालकों को रखा जाता है जिन्हें किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया हो तथा जिनके संबंध में बोर्ड द्वारा विधि के अनुरूप आवश्यक आदेश पारित किए गए हों।  

    गोरखनाथ मंदिर में होने वाले सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री
    बुधवार (23 सितंबर) को गोरखपुर दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर में सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ कार्यक्रम में भी सम्मिलित होंगे। यह कथा ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। प्रख्यात कथावाचक वृंदावन के मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे।

  • 26 सितंबर से ग्वालियर में बड़ा न्यायिक सम्मेलन, 60 से ज्यादा न्यायमूर्ति आएंगे

    26 सितंबर से ग्वालियर में बड़ा न्यायिक सम्मेलन, 60 से ज्यादा न्यायमूर्ति आएंगे

     ग्वालियर
     ग्वालियर में आगा
    मी दिनों में वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस होने जा रही है। न्यायिक शिक्षा के बढ़ते आयाम विषय पर इसका आयोजन 26 से 27 सितंबर तक विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के नवीन परिसर स्थित दंतोपंत्त ठेंगड़ी सभागार में किया जाएगा।

    कांफ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायमूर्तिगण सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश शामिल होंगे। वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश भी इस आयोजन में शामिल हो सकते हैं।

    इसमें सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के 60 से ज्यादा न्यायामूर्तिगण व जिला न्यायालयों के बड़ी संख्या में न्यायाधीश शामिल होंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन के चलते जिला प्रशासन व पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    शहर के प्रमुख होटलों में कमरों का आरक्षण किया जा रहा है। साथ ही एयरपोर्ट से लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी।

    इससे पहले इंदौर में हुआ था सम्मेलन
    बता दें कि, इससे पहले इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की देखरेख में और मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी द्वारा आयोजित किया गया था।

    सीजेआई ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। अब ग्वालियर में रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था व लाइजनिंग को लेकर तैयारियां की जा रहीं हैं, बड़ी संख्या में अधिकारियों की डयूटी इसमें लगाई जा रही है।

    यह है प्रस्तावित शेडयूल…

    26 सितंबर 2026 सत्र एक समय

    दोपहर 12 बजे से एक बजे तक

    विषय: न्यायिक शिक्षा की आवश्यकताएं।

    उभरती पद्धतियां, गुणवत्ता मानक और संस्थागत उत्कृष्टता।

    बदलती कानूनी और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप न्यायिक शिक्षा का विकास।

    क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक शिक्षा मॉडलों का तुलनात्मक विश्लेषण।

    न्यायिक शिक्षा ऑडिट

    संस्थागत शक्तियों, चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करना।

    न्यायिक प्रशिक्षण के लिए मापने योग्य प्रदर्शन संकेतक और गुणवत्ता मानक विकसित करना।

    सत्र दो समय: दोपहर एक बजे से 2:30 बजे तक।

    न्यायिक शिक्षा में नवाचार।

    साझाकरण के माध्यम से सीखना।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा

    व्यस्क शिक्षा के सिद्धांत और योग्यता-आधारित न्यायिक शिक्षा।

    केस स्टडी (मामलों के अध्ययन), न्यायिक अनुकरण (सिमुलेशन) और भूमिका निर्वहन (रोल प्ले) अभ्यासों के माध्यम से व्यावहारिक सीख।

    न्यायिक निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए समस्या-आधारित और परिदृश्य-संचालित शिक्षण।

    संवादात्मक (इंटरैक्टिव) और प्रतिभागी-केंद्रित न्यायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तैयार करना।

    सत्र तीन समय: दोपहर 3:30 बजे से शाम पांच बजे तक।

    विषय: संकाय उत्कृष्टता को सुदृढ़ करना।

    नेतृत्व, पाठ्यक्रम नवाचार और भविष्य के लिए तैयार न्यायिक अकादमियां।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा:

    ट्रेन-द-ट्रेनर (प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण) कार्यक्रमों के माध्यम से अत्यधिक सक्षम न्यायिक संकाय (फैकल्टी) का एक कैडर तैयार करना।

    समकालीन कानूनी विकास और न्यायिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम में नवाचार।

    न्यायिक शिक्षा में अंतःविषय (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण को शामिल करना।

    परिणाम-आधारित मूल्यांकन और निरंतर फीडबैक तंत्र के माध्यम से प्रशिक्षण की प्रभावशीलता की निगरानी करना।

    27 सितंबर 2026 सत्र चार समय: सुबह 10 से 11:30 बजे तक।

    विषय: न्यायिक शिक्षा का डिजिटल परिवर्तन

    अवसर, चुनौतियां और आगे की राह।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साक्षरता और न्यायिक निर्णय लेने पर इसके प्रभाव।

    साइबर कानून, डिजिटल साक्ष्य, डेटा संरक्षण और उभरती प्रौद्योगिकियों में न्यायिक दक्षता।

    प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति और इसके संभावित उपयोग के मामले।

    जेनरेटिव एआई समर्थित शिक्षण उपकरणों के माध्यम से न्यायिक शिक्षा को बदलना।

    भौतिक (फिजिकल), आभासी (वर्चुअल) और स्व-गतिशील (सेल्फ-पेस्ड) शिक्षा को मिलाने वाले ब्लेंडेड लर्निंग माडल।

    सत्र पांच समय: दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक।

    विषय: उत्तरदायी और समावेशी न्याय के लिए न्यायिक दक्षताओं का निर्माण।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा: सामाजिक संदर्भ में न्यायनिर्णयन

    समावेशी और न्यायसंगत न्याय को बढ़ावा देना।

    न्याय करने में निष्पक्षता और तटस्थता।

    नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए न्यायिक क्षमता को बढ़ाना।

    न्यायिक नैतिकता, सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक जिम्मेदारी को मजबूत करना।

    आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग), न्यायिक तर्क और निर्णय लेने के कौशल का विकास करना।

    फीडबैक और ऑडिट: दोपहर 1:30 से 1:40 बजे तक (प्रतिभागियों द्वारा पाठ्यक्रम का फीडबैक और ऑडिट)।

     

  • Basic Salary ₹50 हजार तक है तो PF कितना कटेगा? EPFO नियम और पूरा हिसाब समझें

    Basic Salary ₹50 हजार तक है तो PF कितना कटेगा? EPFO नियम और पूरा हिसाब समझें

     नई दिल्ली

    जब से सरकार ने पीएफ की अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये महीने किया है. तब से इस बात की चर्चा हो रही है कि जिनकी बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये से ज्यादा है, उनके लिए क्या नियम है।  

    सरकार का कहना है कि इससे पहले 2014 में बदलाव हुआ था. अब नए बदलाव से लगभग 51 लाख नए कर्मचारी सीधे तौर पर PF, पेंशन और मुफ्त जीवन बीमा के दायरे में आ गए हैं. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है. हालांकि, पीएफ कटौती बढ़ने के कारण टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी। 

    पहले अगर कोई कर्मचारी 15,000 रुपये महीने से अधिक के बेसिक सैलरी पर पहली बार नौकरी में जुड़ता था, तो उसके लिए अनिवार्य रूप से पीएफ खाता खोलना जरूरी नहीं था। 

    महंगाई और न्यूनतम वेतन में तालमेल 
    दरअसल, साल 2014 से अब तक देश में औसत वेतन और न्यूनतम वेतन में काफी बढ़ोतरी हुई है. कई राज्यों में न्यूनतम वेतन ही 15,000 रुपये के आसपास पहुंच गया है. ऐसे में पुरानी सीमा प्रासंगिक नहीं रह गई थी. अनिवार्य अंशदान की सीमा बढ़ने से कर्मचारियों की मासिक बचत में इजाफा होगा, जिससे लंबी अवधि में उनका रिटायरमेंट फंड काफी बड़ा बनेगा। 

    अनिवार्य न्यूनतम योगदान
    पुरानी सीमा (15,000 रुपये पर कर्मचारी का 12% योगदान)= 1,800 रुपये/माह
    नई सीमा (25,000 रुपये पर कर्मचारी का 12% योगदान) = 3,000 रुपये/माह

    इसमें कंपनी और कर्मचारी दोनों की तरफ से 12-12% का योगदान दिया जाता है. ऐसे में 25,000 रुपये की सीलिंग पर कर्मचारी की सैलरी 1200 रुपये कम मिल सकती है, क्योंकि योगदान राशि 1800 रुपये से बढ़कर 3000 रुपये हो गई। 

    अब तमाम कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर उनकी बेसिक सैलरी 40,000 या 50,000 रुपये है, तो उन पर क्या नियम लागू होगा?

    नियम कहता है कि कंपनी कानूनी तौर पर केवल 25,000 रुपये की सीमा पर ही अपना हिस्सा 3,000 रुपये देने के लिए बाध्य है. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं. राकेश एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और उनकी बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है. राकेश की कंपनी CTC स्ट्रक्चर पर काम करती है, ऐसे में वो अपनी पूरी बेसिक (50,000 रुपये का 12%= 6,000 रुपये) पीएफ में कटवा सकते हैं. कंपनी भी 6000 रुपये ही जमा करेगी. लेकिन वह पैसा राकेश की ही CTC पैकेज से एडजस्ट होगा, जिससे राकेश की Take-Home सैलरी कम हो जाएगी. क्योंकि कंपनी केवल 25,000 रुपये की सीमा तक का ही दायित्व 3000 रुपये उठाएगी। 

    अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 40 हजार रुपये मंथली है, तो क्या विकल्प है? 
    पहला विकल्प: अधिकतर निजी कंपनियां अनिवार्य वैधानिक सीमा पर ही पीएफ काटती हैं. इस हिसाब से कर्मचारी का योगदान 25,000 रुपये का 12%= 3,000 रुपये प्रति माह बनता है.  

    नियोक्ता का योगदान (12%): कुल 3000 रुपये, जो दो हिस्सों में बंटेगा-
    EPS (पेंशन फंड- 8.33%): 25 हजार रुपये का 8.33%= 2,083 रुपये/माह
    EPF (भविष्य निधि- 3.67%): ₹917/माह

    ऐसे में बेसिक 40 हजार रुपये होने के बावजूद कर्मचारी के वेतन से केवल 3,000 प्रति माह कटेंगे. 

    दूसरा विकल्प: पूरी बेसिक सैलरी यानी 40 हजार रुपये पर PF काटना. 
    अगर आपकी कंपनी और आप सहमत हैं, तो आप अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ का योगदान दे सकते हैं. 
    कर्मचारी का योगदान: ₹40,000 का 12% = ₹4,800 प्रति महीने
    नियोक्ता का योगदान: कुल ₹4,800 प्रति माह
    EPS (पेंशन फंड): अधिकतम 25,000 की सीमा पर ही रहेगा, जो कि 2,083 रुपये महीने (अगर उच्च पेंशन का विकल्प नहीं चुना गया है.)
    EPF (भविष्य निधि): बचा हुआ पूरा हिस्सा यानी 2,717 रुपये/माह.

    ऐसे में कर्मचारी के वेतन से 4,800 रुपये प्रति माह कटेंगे और इतना ही योगदान कंपनी की तरफ से कुल पीएफ/पेंशन में जाएगा. लेकिन ऐसी स्थिति में इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी। 

  • कबाड़ बना आकर्षण का केंद्र, सागर में वेस्ट टू वंडर से चौराहों का कायाकल्प

    कबाड़ बना आकर्षण का केंद्र, सागर में वेस्ट टू वंडर से चौराहों का कायाकल्प

    सागर 
     स्वच्छ भारत संकल्प के तहत सागर नगर निगम ने 'वेस्ट टू वंडर' कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत नगर निगम के पास जितना भी कबाड़ आता है, उससे शहर के चौराहों और पार्क में सौंदर्यीकरण किया जाता है. इसके तहत पानी की प्लास्टिक की बोतल से पार्क में प्लास्टिक दानव की प्रतिमा बनाकर प्लास्टिक कचरे के नुकसान बताए गए, तो वहीं चौराहों पर कबाड़ से सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं, जिनमें स्वच्छता के नायक, रेडियो और कई तरह की सुंदर प्रतिमाएं चौराहों की शोभा बढ़ा रही हैं. सागर नगर निगम की इस पहल को केंद्र और राज्य सरकार ने सराहा है। 

    वेस्ट टू वंडर बना बदलाव की मिसाल
    स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्मार्ट सिटी सागर को खूबसूरत बनाने और प्लास्टिक के कचरे के साथ दूसरे कबाड़ का उपयोग कर सुंदर-सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं। 

    सबसे पहले लाखा बंजारा झील किनारे बने विशाल अटल पार्क में प्लास्टिक की बोतल से प्लास्टिक दानव बनाया गया, जो प्लास्टिक से होने वाले नुकसान बताने के साथ ये बताता है कि इसी तरह प्लास्टिक का उपयोग होता रहा, तो ये कचरा दानव बनकर मानव के लिए परेशानी पैदा करेगा। 

    कबाड़ से चौराहों का सौंदर्यीकरण
    इसी कड़ी में नगर निगम द्वारा साफ सफाई में आने वाले कबाड़ से सुंदर-सुंदर कलाकृतियों से चौराहों का सौंदर्यीकरण किया गया है. शहर के वाणिज्यकर चौराहे पर एक विशाल रेडियो की कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है। 

    वहीं, स्वच्छता के नायकों को सम्मान देने के लिए बस स्टेंड़ के नजदीक तीनमढ़िया पर स्वच्छता के नायकों की प्रतिमाएं कबाड़ से बनाई गई है. इसके अलावा संजय ड्राइव पर गदा कलाकृति और चित्रगुप्त चौराहे पर कलम-दवात की कलाकृति कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है. राहतगढ़ ब्रिज के पास तोप और शहीद कालीचरण चौराहे पर ब्रह्मोस मिसाइल की कलाकृति स्थापित की गई है। 

    क्या कहना है नगर निगम का
    नगर निगम की महापौर संगीता सुशील तिवारी कहती हैं, '' स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्लास्टिक और कबाड़ को कम करने, उनके रीसाइकिल करने और फिर से इस्तेमाल के उद्देश्य के साथ शहर में कई तरह के कार्य किए जा रहे हैं. प्लास्टिक के उपयोग को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए अटल पार्क मेंप्लास्टिक का दानव और इसी तरह शहर के अलग-अलग चौराहों पर सुंदर कलाकृतियां कबाड़ से बनाई गई हैं, जो चौराहों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ कबाड़ के रीसाइकिल करने के उद्देश्य को सार्थक कर रही हैं।