Author: NewseDay

  • 2027 की जंग के लिए पंजाब में सियासी हलचल तेज, चारों दलों ने शुरू की तैयारी

    2027 की जंग के लिए पंजाब में सियासी हलचल तेज, चारों दलों ने शुरू की तैयारी

    चंडीगढ़ 

    पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी शुरुआती रणनीति जमीन पर उतार दी है। आम आदमी पार्टी सरकार के करीब साढ़े चार साल के कामकाज और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने में जुटी है। भाजपा केंद्र और अन्य राज्यों में अपनी सरकारों के कामकाज को आधार बनाकर पंजाब में विकल्प पेश कर रही है। 

    शिरोमणि अकाली दल प्रकाश सिंह बादल की विरासत और अपने पारंपरिक पंथक आधार को मजबूत करने की कोशिश में है। कांग्रेस गुटबाजी से ऊपर उठकर एकजुटता का संदेश दे रही है। इस बीच दलों की यात्राओं, रैलियों और घर-घर संपर्क अभियानों का सिलसिला शुरू हो चुका है।

    आप : विकास मॉडल को घर-घर ले जाएगी
    वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार आप ने 2027 की तैयारी में सरकार के करीब साढ़े चार साल के रिपोर्ट कार्ड और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने पर फोकस किया है। पार्टी ने 20 सितंबर से राज्यव्यापी घर-घर संपर्क अभियान शुरू किया है। इसमें 2.68 लाख से अधिक बूथ कमेटी सदस्य हर परिवार तक पहुंचने की योजना के तहत काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धूरी से अभियान की शुरुआत की।

    भाजपा : ट्रैक रिकॉर्ड के सहारे दावेदारी
    भाजपा नेता सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के अनुसार पार्टी केंद्र और अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों के कामकाज को जनता के सामने रख रही है। वह नक्सलवाद में कमी, उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई और आतंकवाद के खिलाफ केंद्र की नीति को भाजपा के ट्रैक रिकॉर्ड के उदाहरण के तौर पर गिनाते हैं। उनका कहना है कि पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद की समस्या का समाधान भी भाजपा की डबल सरकार कर सकती है। भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा सभी 117 सीटों तक पहुंच रही है।

    शिअद : बड़े बादल की विरासत पर भरोसा
    शिरोमणि अकाली दल अपनी पारंपरिक सियासी जमीन मजबूत करने के लिए पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल की विरासत को प्रमुखता से सामने रख रहा है। पार्टी उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और ग्रामीण क्षेत्रों से सीधे जुड़ाव को अपनी पहचान के तौर पर पेश कर रही है। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की रैलियों में अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख लगातार हो रहा है। पार्टी बड़े बादल की राजनीतिक विरासत के सहारे पुराने समर्थक वर्ग को फिर लामबंद करने के साथ अपनी क्षेत्रीय पहचान को भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

    कांग्रेस : एकजुटता के संदेश के साथ मैदान में
    कांग्रेस राहुल गांधी के नाम और एकजुटता के संदेश के सहारे चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी सामूहिक नेतृत्व का संदेश दे रही है। 15 सितंबर के प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुखजिंदर रंधावा का एक मंच पर आना इसी रणनीति का हिस्सा रहा। पायलट ने चन्नी और वड़िंग के हाथ मिलवाकर कार्यकर्ताओं और पंजाबियों को संदेश दिया कि चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व और सामूहिक ताकत के साथ लड़ा जाएगा। 

     

  • ग्वालियर टेलीकॉम जोन से लेकर मालवा-महाकौशल तक औद्योगिक विस्तार, युवाओं के लिए सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर

    ग्वालियर टेलीकॉम जोन से लेकर मालवा-महाकौशल तक औद्योगिक विस्तार, युवाओं के लिए सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश में सूचना प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के एक सशक्त केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-व्यापार के लिए अपार संभावनाएं, मजबूत अधोसंरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और उद्योग-हितैषी नीतियां मौजूद हैं। राज्य सरकार हर निवेशक को सुरक्षित वातावरण, सिंगल विंडो सिस्टम से त्वरित अनुमतियां और नीतिगत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। बेंगलुरु के तकनीकी इको सिस्टम और मध्यप्रदेश के औद्योगिक आधार के समन्वय से प्रदेश में नवाचार और रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि उद्योग की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं हर रोड शो में निवेशकों के साथ संवाद करते हैं और उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी रहते हैं, ताकि निवेश से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं का तत्काल समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पारदर्शी नीतियां लागू हैं और निवेशकों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे का तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद में विशेष रूप से ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की विशेषताओं और संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ-साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की नीतियां भविष्योन्मुखी हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण समूहों के विस्तार के लिए वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों ही तरह के आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।

    ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की स्थापना के लिए थोलोन्स और सीजीआई से संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद के दौरान आईटी एवं जीसीसी सेक्टर के दिग्गजों ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित करने को लेकर गहरी रुचि दिखाई। थोलोन्स के चेयरमैन और सीईओ  अविनाश वशिष्ठ और सु अंकिता वशिष्ठ ने प्रदेश में 210 करोड़ रुपये के निवेश से जीसीसी यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने पर चर्चा की। सीजीआई के वाइस प्रेसिडेंट  अतुल अगाशे ने मध्यप्रदेश में जीसीसी निवेश की संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश में विस्तार की मंशा जताई।

    सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। असेइक मावेन सिलिकॉन के संस्थापक एवं सीईओ  शिवकुमार पी.आर. ने प्रदेश में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से 'चिप डिजाइन हाउस' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसके प्रथम चरण में 25 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ  पंकज गर्ग ने भी विभिन्न चरणों में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज स्थापित करने पर सहमति जताई।

    डीपटेक फंडिंग, डेटा सेंटर, स्पेसटेक और सस्टेनेबिलिटी में नए निवेश प्रस्ताव

    प्रदेश में स्टार्टअप्स और नई तकनीकों को गति देने के लिए डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड 'सीफंड' के  नरेंद्र भंडारी ने मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की। नाइनस्टार्स इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीईओ  गोपाल कृष्णन ने मध्यप्रदेश में आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने पर विमर्श किया। स्पेसटेक के क्षेत्र में गैलेक्सी के सह-संस्थापक  रक्षित भट्ट और सु पायल दवे ने अपनी सहभागिता को लेकर संवाद किया। इसके अलावा, मोबिलिटी एवं बाइक शेयरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रैपिडो के सह-संस्थापक  पवन गुंटुपल्ली तथा पर्यावरण एवं सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनी डोनाउ कार्बन इंडिया के सीईओ व एमडी  वीरेंद्र चौधरी ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की।

    ड्रोन विनिर्माण और रक्षा तकनीक को मिलेगी नई गति

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरबाउंड के संस्थापक  नमन पुष्प, आइडियाफोर्ज की हेड ऑफ मार्केटिंग सु कुथि अरमनमाडा, नॉटिकल विंग्स के हेड ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट  रोहन फर्नांडीस, न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज के हेड ऑफ बिजनेस  अश्विन शास्त्री और अनमैन्ड सिस्टम्स के संस्थापक एवं सीईओ  यशवंत रेड्डी ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने के साथ-साथ निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एयरबाउंड की ओर से प्रतिनिधियों ने ड्रोन भेंट किया।

    प्रमुख टेक एवं कंसल्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने की भेंट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैठक के दौरान एचपी एंटरप्राइजेज की ओर से जीसीसी क्षेत्र में कार्यरत  जयंत और सु तारा,  जेडस्केलर आईटी कंपनी की ओर से  निधि तथा क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई क्षेत्र में कार्यरत कंपनी की ओर से  अनुराग ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फुजित्सु कंसल्टिंग इंडिया प्रा. लि. की ओर से  विशाल अगस्त्या, कंट्री लीडर, इंडिया एवं कंसल्टिंग लीड, ग्लोबल डिलीवरी यूनिट तथा इनफिनिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से  नितिन मेहता, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं कंट्री हेड ने भी भेंट की।

    प्रदेश के सभी अंचलों में संतुलित औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का संकल्प

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल के साथ-साथ जबलपुर और ग्वालियर जैसे संभागों में भी औद्योगिक गतिविधियों को समान रूप से संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों में भारी उद्योगों के साथ एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार मिल सके। उपस्थित सभी प्रमुख निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, पारदर्शी कार्य प्रणाली और नेतृत्व की सक्रियता की सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेलवेंद्रन, प्रबंध संचालक एमपीआईडीसी  चंद्रमौली शुक्ला सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें। 

  • 3 दिवस में सभी अव्यवस्थाएं सुधारने और निर्माण एजेंसी पर अनुबंधानुसार पेनाल्टी लगाने के दिये निर्देश

    3 दिवस में सभी अव्यवस्थाएं सुधारने और निर्माण एजेंसी पर अनुबंधानुसार पेनाल्टी लगाने के दिये निर्देश

    भोपाल 

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने मंगलवार को विधायक  रामेश्वर शर्मा के साथ बैरागढ़ में निर्माणाधीन एलिवेटेड ब्रिज का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने पूरे निर्माणाधीन मार्ग का भ्रमण कर कार्य की भौतिक प्रगति, गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था, सर्विस रोड, तथा नागरिकों के आवागमन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    मंत्री  सिंह ने निर्माण कार्य की धीमी प्रगति और कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान नागरिकों की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना विभाग तथा निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मंत्री  सिंह ने सभी कमियों और अव्यवस्थाओं को 3 दिवस में दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य में बरती गई लापरवाही और विलंब के लिए अनुबंध की शर्तों के अनुसार पेनाल्टी लगाने को कहा। साथ ही बंद अथवा अव्यवस्थित स्ट्रीट लाइटों को चालू करने और निर्माण स्थल पर सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री  सिंह ने सर्विस रोड की खराब स्थिति को देखकर इसे शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्य ब्रिज का निर्माण पूरा होने तक सर्विस रोड ही नागरिकों के आवागमन का प्रमुख माध्यम है, इसलिए इसे सुरक्षित और सुगम बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मंत्री  सिंह ने सिविल अस्पताल के आसपास की अव्यवस्थाओं को तत्काल सुधारने तथा मरीजों, एम्बुलेंस और आम नागरिकों के निर्बाध एवं सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री  सिंह ने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि ब्रिज का संपूर्ण निर्माण कार्य मार्च 2027 तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। समय-सीमा में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्माण कार्य की माइक्रो प्लानिंग करने की भी निर्देश दिए, जिसमें पर्ट चार्ट के आधार पर एक्टिविटी प्लान बनाने और इसके आधार पर साप्ताहिक प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्य अभियंता निर्माण कार्य की प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करेंगे। कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्धता से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन प्रत्येक 15 दिवस में मंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि संत हिरदाराम नगर का यह मुख्य मार्ग अत्यधिक यातायात घनत्व वाला क्षेत्र है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही से गंभीर दुर्घटना की संभावना हो सकती है। उन्होंने निर्माण एजेंसी को सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

    मंत्री  सिंह ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात को निर्बाध बनाए रखने के लिए केवल उसी स्थान पर सेफ्टी बैरियर लगाए जाएं, जहां वास्तविक रूप से निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे स्थानों पर जहाँ निर्माण कार्य नहीं हो रहे है, वहां से अनावश्यक बैरियर तत्काल हटाए जाएं, ताकि यातायात सुचारु रूप से संचालित हो सके। उन्होंने निर्माण स्थल से मलबा एवं अन्य अपशिष्ट निर्माण सामग्री तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि निर्माण कार्य के कारण स्थानीय व्यापारियों एवं रहवासियों को होने वाली समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए तथा उनके आवागमन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो। ठेकेदार को निर्देशित किया गया कि यातायात के अत्यधिक दबाव को देखते हुए निर्बाध आवागमन के लिए अपने स्तर से भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।

    मंत्री  सिंह ने ब्रिज पर वर्षा जल संचयन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बड़ी अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ‘लोक निर्माण से लोक-कल्याण’ के ध्येय के साथ कार्य कर रहा है। विभाग की कार्य पद्धति में बड़ा बदलाव आया है। अब प्रत्येक निर्माण कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता, जवाबदेही और जन-सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि अधोसंरचना निर्माण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो और उसका लाभ नागरिकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक रूप से मिले।

     

  • बिहार में 2.36 करोड़ LPG कनेक्शन, 15% उपभोक्ताओं की e-KYC बाकी; सब्सिडी पर पड़ेगा असर?

    बिहार में 2.36 करोड़ LPG कनेक्शन, 15% उपभोक्ताओं की e-KYC बाकी; सब्सिडी पर पड़ेगा असर?

    पटना
     बिहार में घरेलू एलपीजी के करीब 15 फीसदी उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं करायी है. पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से एक अक्टूबर से बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किए जाने के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले सिलिंडर को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

    राज्य में 2.36 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता
    बिहार के 38 जिलों में तीन प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों के 2.36 करोड़ से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं. इनमें से करीब 55 लाख उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाइसी नहीं करायी है. ऐसे में एक अक्टूबर की समय सीमा नजदीक आने के साथ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

    बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराने पर सब्सिडी को लेकर चिंता
    जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण नहीं कराया है, उन्हें सब्सिडी वाले सिलिंडर की सुविधा मिलने में परेशानी होने की आशंका है. हालांकि, पेट्रोलियम कंपनियों ने ऐसे उपभोक्ताओं के लिए सिलिंडर की कीमत बढ़ाने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है.

    मई से चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
    पेट्रोलियम कंपनियों ने उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण कराने के लिए मई से ही जागरूक करना शुरू कर दिया था. इसके बावजूद लाखों उपभोक्ताओं ने अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं करायी है. कंपनियों की ओर से उपभोक्ताओं को समय रहते ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा कराने के लिए कहा जा रहा है.

    एक अक्टूबर से लागू होगी अनिवार्यता
    घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक अक्टूबर से बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है. ऐसे में जिन उपभोक्ताओं का प्रमाणीकरण अभी बाकी है, उनके लिए प्रक्रिया जल्द पूरी करना जरूरी होगा, ताकि सिलिंडर से जुड़ी सुविधाओं में किसी तरह की परेशानी न हो.

  • कच्चे घर से पक्के आशियाने तक: पीएम जनमन योजना से नंदबाई बैगा के जीवन में आई नई खुशियां

    कच्चे घर से पक्के आशियाने तक: पीएम जनमन योजना से नंदबाई बैगा के जीवन में आई नई खुशियां

    रायपुर

    कभी बारिश की बूंदों के बीच कच्चे घर में रात गुजारने को मजबूर गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत धनौली के खर्रीपारा निवासी मती नंदबाई बैगा के जीवन में अब खुशियों की नई शुरुआत हुई है। पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और मजबूत छत मिली है। वर्षों से कच्चे मकान में रहने के दौरान बारिश, सीलन और पानी टपकने जैसी परेशानियों का सामना करने वाली नंदबाई बैगा अब अपने पक्के घर में परिवार के साथ सुकून और सुरक्षा के साथ जीवन बिता रही हैं।

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विशेष रूप से कमजोर एवं जनजातीय परिवारों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पीएम जनमन योजना इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को आवास सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। नंदबाई बैगा का परिवार इस प्रयास से आए सकारात्मक बदलाव का एक उदाहरण है।

    कच्चे घर में हर मौसम रहती थी चिंता

    नंदबाई बैगा बताती हैं कि पहले उनका घर कच्चा था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और घर में सीलन बनी रहती थी। बरसात के दौरान परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। घर की खराब स्थिति के कारण हर मौसम में परिवार के मन में चिंता बनी रहती थी। सुरक्षित और मजबूत घर का अभाव उनके दैनिक जीवन की परेशानियों को और बढ़ा देता था।

    पक्के आवास से मिली सुरक्षा और सुकून

    पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने के बाद नंदबाई बैगा के परिवार की परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार सुरक्षित और मजबूत घर में रह रहा है। बारिश के दिनों में न तो छत से पानी टपकने की चिंता है और न ही सीलन की परेशानी। पक्का आवास उनके लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन गया है।

    सरकार की योजनाओं से जीवन में आया व्यापक बदलाव

    नंदबाई बैगा को शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन मिलने से खाना पकाने में सुविधा हुई है। इस तरह विभिन्न योजनाओं का लाभ एक साथ मिलने से उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है।

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विजन से जनजातीय परिवारों तक पहुंच रही सुविधाएं

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के जीवन में बुनियादी सुविधाओं और बेहतर अवसरों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पक्का आवास, स्वच्छ ईंधन और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ मिलने से नंदबाई बैगा जैसे परिवारों के जीवन में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके लिए पक्का घर बदलती परिस्थितियों और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद का आधार बना है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

    छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों को आवास, आर्थिक सहायता, रसोई गैस सहित विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। नंदबाई बैगा का परिवार भी इन योजनाओं के समन्वित लाभ से बेहतर और सुरक्षित जीवन की ओर आगे बढ़ रहा है।

  • मंत्री सु भूरिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अधिकारियों को दिए जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

    मंत्री सु भूरिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अधिकारियों को दिए जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल शासकीय सेवाओं के वितरण स्थल के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, पोषण, सीखने, सहभागिता और सम्मान के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेशव्यापी ‘आंगन मिलन सेवा’ अभियान आयोजित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश के सभी 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया ने मंगलवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के अधिकारियों को अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता और व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    हर आंगनवाड़ी बने सेवा, पोषण और सम्मान का केंद्र

    मंत्री सु भूरिया ने कहा कि ‘आंगन मिलन सेवा’ को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे समुदाय और आंगनवाड़ी के बीच मजबूत जुड़ाव का माध्यम बनाया जाए। अभियान का मूल उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, माताओं, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा अन्य हितग्राहियों तक पोषण, स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं की नियमित एवं प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर ऐसा वातावरण निर्मित किया जाए, जिसमें सेवा के साथ सम्मान और जनभागीदारी भी दिखाई दे।

    माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और संवाद पर विशेष फोकस

    अभियान के प्रथम दिवस बाल स्वास्थ्य और आनंदमयी गतिविधियों पर विशेष जोर रहेगा। आंगनवाड़ी केंद्रों पर वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, 3 से 6 वर्ष आयु के बच्चों की गतिविधियां, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के संदेशों का वाचन तथा डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन किया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और आशा कार्यकर्ता का सम्मान भी किया जाएगा। इसके साथ ही 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की माताओं, गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा महिला हितग्राहियों से संवाद होगा। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। गर्भावस्था एवं प्रसवोत्तर देखभाल, संतुलित आहार, एनीमिया, स्तनपान और शिशु देखभाल जैसे विषयों पर पोषण संवाद आयोजित होंगे। बच्चों को फल एवं मिठाई का वितरण भी किया जाएगा।

    ‘मेरी कहानी, मेरी सफलता’ बताएगी योजनाओं के प्रभाव की कहानी

    अभियान के द्वितीय दिवस को ‘मेरी कहानी, मेरी सफलता’ की थीम पर लाभार्थी संवाद आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित महिलाओं और परिवारों के अनुभव सामने लाए जाएंगे। लाभार्थी माताओं को अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को साझा करने का अवसर दिया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, टेक होम राशन, गर्म पका भोजन, पोषण सेवाओं सहित महिला एवं बाल कल्याण की विभिन्न योजनाओं की जानकारी सरल एवं बोलचाल की भाषा में दी जाएगी।

    जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश

    महिला एवं बाल विकास मंत्री सु भूरिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि जनप्रतिनिधिगण कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित गतिविधियों की शोभा बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, विभागीय अमले और समुदाय की सहभागिता से अभियान को व्यापक जन-अभियान का स्वरूप दिया जाए।

    सफलता की कहानियां बनेंगी अभियान की पहचान

    मंत्री सु भूरिया ने अभियान की प्रभावी रिपोर्टिंग और दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर कार्यक्रम के फोटो और वीडियो तैयार करने तथा कम से कम एक सफलता की कहानी पर वीडियो निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सफलता की कहानियों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी एवं लाड़ली बहना योजना, पोषण सेवाओं, कुपोषण से सामान्य श्रेणी में आए बच्चों, पीएम जनमन एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान क्षेत्र के हितग्राहियों, स्पॉन्सरशिप, पीएम केयर्स, मुख्यमंत्री बाल कोविड सेवा योजना तथा सुकन्या समृद्धि योजना से जुड़े अनुभवों को प्रमुखता दी जाएगी।

    ‘आशीर्वाद का दीया’ के बाद अब ‘आंगन मिलन सेवा’ में भी व्यापक जनभागीदारी का आह्वान

    मंत्री सु भूरिया ने कहा कि 17 सितंबर को आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय जनभागीदारी दर्ज की है। उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों से आह्वान किया कि आगामी ‘आंगन मिलन सेवा’ अभियान में भी पूरे मनोयोग और टीम भावना के साथ कार्य करते हुए प्रदेश की जनभागीदारी को नई ऊंचाई दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी अभियान को अपनी जिम्मेदारी मानकर कार्य करे और यह सुनिश्चित करे कि हर आंगनवाड़ी केंद्र पर कार्यक्रम प्रभावी और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित हो।

    9 और 10 अक्टूबर को ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ का विशेष आयोजन

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रदेश में आगे भी जनभागीदारी आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी। 9 एवं 10 अक्टूबर को ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में बड़े मैदानों पर मानव रंगोली का निर्माण किया जाएगा। इसमें व्यापक जनभागीदारी के साथ सेवा, राष्ट्रभाव और विकसित भारत के संकल्प को अभिव्यक्त किया जाएगा।

    प्रतिदिन होगी मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग

    अभियान के दौरान जिलों से प्रगति, प्रमुख उपलब्धियों तथा उच्च गुणवत्ता वाले फोटो एवं वीडियो सहित जानकारी प्रतिदिन शाम 4 बजे तक राज्य स्तर पर भेजी जाएगी। मैदानी अमला आवश्यकता के अनुसार लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तथा शिक्षा विभाग से समन्वय करेगा। कार्यक्रमों की गुणवत्ता, SOP के अनुपालन और दस्तावेजीकरण की जिला स्तर पर निगरानी की जाएगी।

     

  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एवं फेन अभयारण्य के लिए निगरानी समिति गठित

    कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एवं फेन अभयारण्य के लिए निगरानी समिति गठित

    भोपाल 

    भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना अनुसार मण्डला जिले में स्थित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एवं फेन अभयारण्य को पारिस्थितिकी संवेदी जोन के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस क्षेत्र की निगरानी के लिए राज्य शासन द्वारा निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) का गठन किया गया है।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में संभागीय आयुक्त जबलपुर को पदेन-अध्यक्ष बनाया गया है। जिला कलेक्टर मंडला और बालाघाट, उप संचालक कोर और बफर कान्हा टाइगर रिजर्व, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सहायक संचालक मंडला, क्षेत्रीय अधिकारी, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जबलपुर, अधीक्षण अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंडला और बालाघाट, जिला पंचायत मंडला और बालाघाट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जैव विविधता विशेषज्ञ – श्री पी.एस. मसराम भा.व.से. (सेवानिवृत्त) मण्डला, डॉ. अनिरूध्द मजूमदार वैज्ञानिक राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर एवं अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण विभाग सिवनी सदस्य होंगे। क्षेत्र निदेशक कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला को सदस्य- सचिव नामित किया गया है।

    निगरानी समिति के दायित्व भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना 12 मार्च 2021 के अनुसार होंगे।

  • मंत्री  विश्वास सारंग ने वार्ड 36 एवं 37 में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

    मंत्री विश्वास सारंग ने वार्ड 36 एवं 37 में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

    भोपाल 

    सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को नरेला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 36 एवं 37 में करोड़ों रुपये की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का क्रम निरंतर जारी है। मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला की जनता का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इस विश्वास को विकास के माध्यम से निरंतर मजबूत करना हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वार्ड, प्रत्येक कॉलोनी और प्रत्येक परिवार तक विकास की सुविधाएं पहुंचाना हमारी प्रतिबद्धता है। आगे उन्होंने कहा कि सड़क, नाली, अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण कराया जा रहा है, ताकि प्रत्येक वार्ड के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सके। भूमिपूजन के दौरान मंडल अध्यक्ष  नितिन पाठक, पार्षद गीता माली, पार्षद विमलेश ठाकुर, कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

    चांदबड़ में बनेगा सामुदायिक भवन

    मंत्री  सारंग ने वार्ड क्रमांक 37 के चांदबड़ क्षेत्र में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भवन क्षेत्र के नागरिकों के लिए सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों के साथ-साथ विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित होगा। इससे क्षेत्रवासियों को अपने कार्यक्रमों के लिए बेहतर और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

    विभिन्न कॉलोनियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण कार्य

    कार्यक्रम के दौरान मंत्री  सारंग ने वार्ड क्रमांक 36 एवं 37 के सौरभ कॉलोनी, शिव नगर, हिनोतिया, चांदबड़ सहित अन्य क्षेत्रों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इन कार्यों के पूर्ण होने से स्थानीय रहवासियों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ जल निकासी की समस्या के निराकरण में भी सहायता मिलेगी।

    नरेला का हर वार्ड विकास की मुख्यधारा से जुड़े

    मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड में हर सुविधाओं को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है। विकास केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है बल्कि प्रत्येक मोहल्ले की सड़क, नाली, स्वच्छता और नागरिक सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि नरेला का कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता न रहे और प्रत्येक नागरिक को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।

     

  • पटना की ऐतिहासिक जलमीनार फिर होगी गुलजार, 2,500 वर्गफीट में बनेगा कैफेटेरिया

    पटना की ऐतिहासिक जलमीनार फिर होगी गुलजार, 2,500 वर्गफीट में बनेगा कैफेटेरिया

    पटना
     वीरचंद पटेल पथ पर मिलर हाईस्कूल के पास खड़ी ऐतिहासिक जलमीनार पटना की उस दौर की कहानी अपने भीतर समेटे है, जब शहर में पानी पहुंचाने के लिए स्टीम इंजन का सहारा लिया जाता था।

    वर्ष 1915 से 1918 के बीच बनी करीब 130 फीट ऊंची यह जलमीनार अब फिर चर्चा में है। नगर निगम इसे उसके मूल स्वरूप को बचाते हुए जीर्णोद्धार कर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित करने की तैयारी में है।

    108 वर्ष पुरानी इस जलमीनार के जीर्णोद्धार और परिसर के सुंदरीकरण पर 3.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परिसर में करीब 2,500 वर्गफीट क्षेत्र में आधुनिक कैफेटेरिया भी बनाया जाएगा।

    ऐति‍हासिक धरोहर के रूप में होगी विकसित
    इसमें बैठने की जगह, रसोई, काउंटर और अन्य जरूरी सुविधाएं होंगी। इससे विद्यार्थियों, लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। काम पूरा करने के लिए छह महीने की अवधि तय की गई है।

    यह जलमीनार पटना की पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था की गवाह है। वर्ष 1915 से 1918 के बीच बनी इस मीनार में करीब एक लाख गैलन पानी संग्रहित किया जा सकता था

    खास बात यह है कि उस समय पानी को ऊपर चढ़ाने के लिए आधुनिक मोटर नहीं, बल्कि स्टीम इंजन का इस्तेमाल होता था। एएन कालेज के पास स्थित कुएं से स्टीम इंजन के जरिये पानी इस जलमीनार तक पहुंचाया जाता था।

    जैसे ही जलमीनार पूरी भर जाती थी, यहां से लाल सिग्नल दिखाया जाता था। यह संकेत एएन कालेज के पास लगे स्टीम इंजन तक पहुंचता था और इंजन बंद कर दिया जाता था।

    जलमीनार की यह व्यवस्था उस समय की तकनीकी समझ और इंजीनियरिंग का उदाहरण थी। फ्लोटिंग इंडिकेटर तकनीक से पानी का स्तर बढ़ने के साथ इंडिकेटर की स्थिति बदलती थी और जलमीनार के भरने का संकेत मिलता था।

    उस समय इससे जुड़ा जलापूर्ति नेटवर्क 200 से 250 किलोमीटर तक फैला हुआ था। पहले यह व्यवस्था बांकीपुर वाटर सप्लाई हेड वर्क्स के अंतर्गत थी।

    1978 तक इस जलमीनार से होती थी जलापूर्ति
    इसके जरिये वर्तमान के नूतन राजधानी, पाटलिपुत्र और बांकीपुर अंचल के विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाता था। यानी आज जिन इलाकों में शहर का बड़ा हिस्सा बसा हुआ है, वहां दशकों पहले इसी व्यवस्था के जरिये घरों तक पानी पहुंचता था।

    सितंबर 1978 तक इससे जलापूर्ति होती रही। इसके बाद यह ऐतिहासिक ढांचा उपयोग से बाहर हो गया। लाल ईंटों से बनी इस जलमीनार की स्थापत्य शैली भी इसे खास बनाती है।

    गुंबददार संरचना वाली यह इमारत करीब एक सदी से अधिक समय से शहर के बदलते स्वरूप की गवाह रही है। जलमीनार के साथ पूरे परिसर का भी विकास किया जाएगा।

    करीब 14,400 वर्गफीट क्षेत्र में समग्र विकास की योजना है। सजावटी रोशनी से जलमीनार को आकर्षक रूप दिया जाएगा। जलीमनार परिसर में पहले दो जलापूर्ति केंद्र थे।

    एक जलापूर्ति केंद्र समेत करीब 60 प्रतिशत जमीन एमएलसी आवास के लिए चली गई। बचे जलापूर्ति केंद्र की क्षमता 120 अश्वशक्ति है, जो अभी चालू है। वर्तमान में परिसर तक पहुंचने में अवैध पार्किंग बड़ी समस्या है।

    जलमीनार की नींव सुरक्षित, पारंपरिक तकनीक से होगा जीर्णोद्धार
    जलमीनार की स्थिति का आकलन एनआइटी पटना के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जलमीनार में समग्र झुकाव, नींव में दरार या मिट्टी के अलग होने के संकेत नहीं मिले।

    हालांकि, कुछ स्थानों पर नमी, लिंटल में दरार और सीढ़ियों की खराब स्थिति जैसी समस्याएं मिली हैं। इनके सुधार को जीर्णोद्धार योजना में शामिल किया गया है।

    मूल निर्माण सामग्री के अनुकूल चूने आधारित और सांस लेने योग्य पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। अनावश्यक बदलाव से बचते हुए मौजूदा संरचना को सुरक्षित रखने की योजना है।

    प्रस्ताव में जलमीनार की वास्तुकला को उभारने के लिए वार्म एलईडी लाइट लगाने की भी योजना है। इससे रात में भी इसकी पहचान बनी रहेगी।

    हेरिटेज गार्डन के मध्य होगी ऐतिहासिक जलमीनार
    योजना के तहत 10,880 वर्गफीट में हेरिटेज गार्डन विकसित किया जाएगा। इसके मध्य ऐतिहासिक जलमीनार रहेगी। चारों ओर पौधों की क्यारियां और हरियाली विकसित होगी।

    मुख्य प्रवेश द्वार से जलमीनार तक पैदल पथ बनाया जाएगा। दोनों ओर छायादार पेड़ लगाए जाएंगे। चारदीवारी पर प्राकृतिक पत्थर की क्लैडिंग और सजावटी लोहे की रेलिंग होगी।

    प्रवेश द्वार पर कलात्मक लोहे का गेट और खंभों पर सजावटी लाइटें लगाई जाएंगी। परिसर में वर्षा जल संचयन की भी व्यवस्था होगी।

        14,400 वर्गफीट क्षेत्र का होगा विकास
        2,500 वर्गफीट में बनेगा कैफेटेरिया
        4,325 वर्गफीट में परिसर विकसित होगा
        1,963.50 वर्गफीट क्षेत्र में है जलमीनार
        5,600 वर्गफीट में बिछेगा पेवर ब्लाॅक

     

  • विशेष बच्चों के लिए बना भरोसे का केंद्र, 10 साल से निःशुल्क मिल रहा विशेषज्ञ उपचार

    विशेष बच्चों के लिए बना भरोसे का केंद्र, 10 साल से निःशुल्क मिल रहा विशेषज्ञ उपचार

    रायपुर

    ‘जतन केंद्र’ ने बदली 27 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी

    विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और उनके परिवारों के लिए जतन केंद्र उम्मीद और संबल का केंद्र बनकर उभरा है। रायगढ़ जिले में वर्ष 2016 को शुरू हुए इस केंद्र में अब तक 27,088 बच्चों का परीक्षण, मूल्यांकन और उपचार किया जा चुका है। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 तक 5,397 बच्चों को विभिन्न सेवाओं का लाभ मिला है। जतन की खासियत इसका बच्चों के अनुकूल माहौल है। केंद्र को प्ले स्कूल जैसे सहज और खुशनुमा वातावरण में तैयार किया गया है, ताकि बच्चे अस्पताल के डर या तनाव के बिना उपचार करा सकें। यहां आने वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं।

    केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, विशेष शिक्षक, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, नर्स, पैथोलॉजी, समाजसेवक और काउंसलर की सेवाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध हैं। विकासात्मक देरी, देर से बोलने, सीखने में परेशानी और ऑटिज्म जैसे लक्षणों वाले बच्चों का नियमित आकलन और उपचार किया जा रहा है। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में सामने आ रही लर्निंग प्रॉब्लम के मामलों में भी विशेषज्ञ सेवाएं दी जा रही हैं।

    टंग-टाई के 285 बच्चों का निःशुल्क उपचार

    जतन के दंत चिकित्सा विभाग में टंग-टाई यानी जीभ के जुड़ाव की समस्या वाले बच्चों का फ्रेनेक्टमी पद्धति से निशुल्क उपचार किया जा रहा है। अब तक करीब 285 बच्चे इस सुविधा से लाभान्वित हो चुके हैं। इसके साथ ही बच्चों के दांत और मुंह से जुड़ी अन्य बीमारियों का भी इलाज किया जाता है।

    श्रवण जांच से फिजियोथेरेपी तक सुविधा

    श्रवण संबंधी परेशानी वाले बच्चों के लिए केंद्र में बीईआरए और पीटीए टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। ये जांच दिव्यांगता प्रमाण पत्र और कॉक्लियर इंप्लांट की प्रक्रिया में भी उपयोगी होती हैं। वहीं फिजियोथेरेपी विभाग में शारीरिक रूप से बाधित बच्चों के उपचार और पुनर्वास पर काम किया जाता है, ताकि वे दैनिक गतिविधियां अधिक आसानी से कर सकें।

    समय पर उपचार से आसान हो रही बच्चों की राह

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित जतन डीईआईसी में सेवाओं के लगातार सुधार और विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। निःशुल्क विशेषज्ञ उपचार, बच्चों के अनुकूल वातावरण और समय पर हस्तक्षेप ने इस केंद्र को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के परिवारों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है। पिछले 10 वर्षों में हजारों बच्चों तक पहुंची यह सेवा उनकी बेहतर सेहत, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।