Author: NewseDay

  • 0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय

    0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय

    सेवा संकल्प से संवरी उम्मीद

     0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय

    ​रायपुर,

          ​एक किसान के लिए उसकी ज़मीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीदों का आधार होती है। सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम नवरंगपुर निवासी गुलाब पटेल पिता: स्व. श्री प्रेमलाल पटेल ने अपनी इसी ज़मीन में छिपी संभावनाओं को पहचाना और एक ऐसी मिसाल कायम की, जो आज प्रदेश के हज़ारों किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
         ​पारंपरिक खेती से इतर कुछ नया करने की सोच के साथ गुलाब पटेल ने जल संरक्षण और मत्स्य पालन को आजीविका का जरिया बनाने का फैसला किया। उनकी इस सोच को साकार करने में केंद्र व राज्य सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और सेवा संकल्प अभियान संबल बने।

    ​शासकीय योजना से मिली राह और संबल

         गुलाब पटेल के पास 0.40 हेक्टेयर भूमि थी, जिसे उन्होंने तालाब निर्माण के लिए चुना। योजना के तहत उन्हें विभाग से 1.20 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। विभागीय मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता से तालाब का निर्माण पूरा हुआ और इसी के साथ शुरू हुआ मछली पालन का एक नया सफर।

    ​250 क्विंटल उत्पादन और 10 से 15 लाख का शुद्ध लाभ

          तालाब बनने के बाद गुलाब पटेल ने मत्स्य पालन को वैज्ञानिक तकनीक और पूरे समर्पण के साथ अपनाया। नियमित देखरेख, उत्तम आहार और सही प्रबंधन का नतीजा यह रहा कि आज उनके 0.40 हेक्टेयर के जलक्षेत्र से प्रतिवर्ष लगभग 250 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है। तमाम लागत निकालने के बाद उन्हें हर साल 10 से 15 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है।

    ​सेवा संकल्प अभियान: कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरती योजनाएं

           गुलाब पटेल की यह सफलता 'सेवा संकल्प अभियान' की उस मूल भावना को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य शासकीय योजनाओं को केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रखकर आम जन के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना है। शासन के सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और किसान की अनथक मेहनत के इस संगम ने एक छोटे से भू-खंड को आर्थिक आत्मनिर्भरता के मजबूत मॉडल में बदल दिया है।
          ​आज गुलाब पटेल न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर दूसरों के लिए भी एक मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि यदि सही योजना और दृढ़ संकल्प का साथ मिले, तो ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी समृद्धि का द्वार खोल सकता है।

  • सेवा संकल्प अभियान: धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

    सेवा संकल्प अभियान: धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

    सेवा संकल्प अभियान: धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

    नुक्कड़ नाटक से दिया नशामुक्ति का संदेश

    ​रायपुर,
          राज्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत धमतरी स्थित शासकीय श्रवण बाधितार्थ बालिका विद्यालय में समाज कल्याण विभाग द्वारा एक दिवसीय विभागीय प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बालिकाओं को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में नशामुक्त वातावरण का निर्माण करना था।

    ​योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

           शिविर में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विभिन्न हितग्राहीमूलक एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया तथा मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन की मंशा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। बालिकाओं को उपलब्ध अवसरों और अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सही जानकारी ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।

    ​नुक्कड़ नाटक बना आकर्षण का केंद्र

          कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नशामुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपने संवादों और जीवंत अभिनय के माध्यम से नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक तथा सामाजिक दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। नाटक के जरिए संदेश दिया गया कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सामूहिक दायित्व है।
           उपस्थित ​प्रमुख जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने अंत में  लोगों को नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प दिलाया।

  • झारखंड में बंजर भूमि का होगा कायाकल्प, मिलेट्स की खेती और पौधरोपण पर खर्च होंगे ₹20 करोड़

    झारखंड में बंजर भूमि का होगा कायाकल्प, मिलेट्स की खेती और पौधरोपण पर खर्च होंगे ₹20 करोड़

    रांची
     राज्य में बंजर भूमि विकास योजना के तहत झारखंड को इस वर्ष केंद्र से 20 करोड़ रुपये मिलेंगे। हालांकि यह राशि प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को पिछले वर्ष दिए गए 13 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का उपयोगिता प्रमाणपत्र देना होगा। वन एवं पर्यावरण विभाग इसकी तैयारी कर रहा है।

    इस योजना के तहत राज्य के पलामू और संताल परगना प्रमंडलों में औसत से कम हुई वर्षा की वजह से इस राशि से मिलेट्स की खेती के लिए किसानों को सहायता दी जाएगी। राज्य में पानी की कमी वाली भूमि पर मिलेट्स या मोटे अनाज (श्रीअन्न) की खेती की जाती है।

    बंजर भूमि विकास के तहत यहां पौधरोपण और छोटे चेक डैम भी बनाए जाते हैं। बंजर भूमि यानी ऊंची भूमि पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पिछले दो सालों में रिकॉर्ड मिलेट्स का उत्पादन हुआ है। झारखंड में भी इस तरह की भूमि पर प्रयोग को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने योजना बनाई है।

    बिहार में बंजर भूमि विकास के तहत पिछले साल मिली राशि से छोटे-बड़े करीब 750 चेकडैम बनाए गए हैं। इसके अलावा सामाजिक वानिकी के तहत इस राशि से 70 हजार नए पौधे लगाए गए हैं।

    बंजर भूमि पर कृषि कार्य से जुड़े किसान विकास केंद्र के सहायक वैज्ञानिक संजय मिश्रा ने बताया कि चेकडैम की वजह से मिट्टी में नमी बढ़ी है। इससे यहां श्रीअन्न के साथ फलदार पौधे भी लगे हैं, जिनकी वृद्धि अच्छी है।

    राज्य सरकार बंजर भूमि का जिला स्तर पर नया डाटाबेस भी तैयार कर रही है। इसमें उस भूमि का सर्वे भी किया जाएगा, जहां मिट्टी की ऊपर परत उपजाऊ नहीं रह गई है।

  • नोटिस के बाद भी हाई कोर्ट नहीं पहुंचीं पन्ना कलेक्टर, अदालत ने जारी किया गैर-जमानती वारंट

    नोटिस के बाद भी हाई कोर्ट नहीं पहुंचीं पन्ना कलेक्टर, अदालत ने जारी किया गैर-जमानती वारंट

    जबलपुर

    हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश की अवहेलना पर पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने वारंट की तामील की जिम्मेदारी पन्ना पुलिस अधीक्षक को सौंपते हुए कलेक्टर को अगली सुनवाई पर 30 सितंबर को उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं।

    नियमितीकरण को लेकर याचिका दायर की थी

    मामला सेवानिवृत्त कर्मचारी जाविन आरा रिजवी की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता पन्ना कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन आफिसर के पद पर कार्यरत थीं। नियमितीकरण की मांग को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

    आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की

    हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को याचिका का निराकरण करते हुए कलेक्टर को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 90 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई।
    नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुईं कलेक्टर

    एकलपीठ ने पाया कि अवमानना याचिका पर 4 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद कलेक्टर की ओर से न तो अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराई गई और न ही हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश की गई।

    संपर्क अधिकारी भी नियुक्त किया गया था

    आदेश में उल्लेख है कि कलेक्टर ने पांच अक्टूबर, 2025 को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर नोटिस प्राप्त होने की जानकारी दी थी। कलेक्टर कार्यालय की स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी को इस मामले में संपर्क अधिकारी भी नियुक्त किया गया था। इसके बाद भी आदेश के अनुपालन के संबंध में आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।

     

  • किसानों को मिले ₹100 प्रति क्विंटल प्रोत्साहन, पराली जलाने पर रोक का बाजवा ने सुझाया तरीका

    किसानों को मिले ₹100 प्रति क्विंटल प्रोत्साहन, पराली जलाने पर रोक का बाजवा ने सुझाया तरीका

    चंडीगढ़.

    पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पराली जलाने के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार की प्रस्तावित दंडात्मक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए किसानों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन की मांग की है।

    बाजवा ने कहा कि पराली जलाने की समस्या का समाधान किसानों को केवल अपराधी मानकर जुर्माना लगाने से नहीं होगा। इसके लिए किसानों की आर्थिक मजबूरियों को समझते हुए व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराने होंगे।

    बाजवा नहीं करते पराली जलाने का समर्थन
    बाजवा ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ जुर्माने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित व्यवस्था में खेत के आकार आधार पर प्रत्येक घटना के लिए 5,000, 10,000 और 30,000 रुपये तक जुर्माना लगाने की बात कही गई है।

    खेतों को रेड कैटेगरी में डाला जाएगा –
    सरकार ने पराली जलाने की समस्या का समाधान निकाला है। देश की राजधानी दिल्ली से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसान पराली जलाते हैं, जिससे प्रदूषण काफी बढ़ सकता है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए नए नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। नए नियमों के तहत पराली जलाए जाने वाले खेतों को रेड कैटेगरी में डाला जाएगा।

    क्या होंगे पराली जलाने को लेकर नया नियम?
    पर्यावरण मंत्रालय ने पराली जलाने को लेकर ड्राफ्ट नियम बुधवार को जारी किए। ड्राफ्ट नियमों के तहत, जिस खेत में पराली जलाई जाएगी, उसे घटना की तारीख से 15 महीने के लिए 'रेड कैटेगरी' में रखा जाएगा। हालांकि, इस कैटेगरी में डाले जाने के क्या नतीजे होंगे, यह अभी साफ नहीं है। नियमों के तहत, 'अगर उसी जमीन पर बाद में फिर से पराली जलाने की घटना होती है या इन नियमों के तहत लगाया गया पर्यावरण जुर्माना (अगर कोई हो) तय समय में जमा नहीं किया जाता है, तो 'रेड एंट्री' अगले 15 महीनों के लिए भी लागू रहेगी।'

  • भोपाल में 2.5 साल से चल रहा था कच्ची शराब का खेल, ड्रोन ने खोली 12 भट्टियों की पोल

    भोपाल में 2.5 साल से चल रहा था कच्ची शराब का खेल, ड्रोन ने खोली 12 भट्टियों की पोल

     भोपाल

    सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद राजधानी भोपाल में अवैध शराब के ठिकानों पर आबकारी टीम ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। बैरसिया के ग्राम तरावली कलां में लगभग ढाई साल से अवैध रूप से हाथ भट्टियों के माध्यम से कच्ची शराब बनाई जा रही थी।

    सूचना मिलने पर आबकारी और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापामार कार्रवाई की। पहली बार ड्रोन की मदद से शराब के अवैध ठिकानों की तलाशी ली गई, जिसमें 12 भट्टियां बरामद की गईं, लेकिन आरोपित तस्कर मौके से फरार हो गए। इस कार्रवाई में कुल 127 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे।

     

  • जमुई कांड पर सरकार का एक्शन, SIT जांच के बीच BJP बोली- पीड़िता को मिलेगा न्याय

    जमुई कांड पर सरकार का एक्शन, SIT जांच के बीच BJP बोली- पीड़िता को मिलेगा न्याय

    पटना
    जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना को लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है। विपक्ष के सरकार पर हमले के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा है कि बेटियों के सम्मान और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

    उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में सरकार की नीति स्पष्ट है, न ढिलाई होगी और न समझौता। जमुई मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है और तीन आरोपितों की गिरफ्तारी की सूचना सामने आई है।

    ‘अपराधी कोई भी हो, कानून से ऊपर नहीं’
    सरावगी ने कहा कि जमुई की घटना दुखद और पीड़ादायक है। उनके अनुसार, पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की।

    उन्होंने कहा कि बिहार में कानून का राज कायम है और अपराधी कोई भी हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष जांच और कानून के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    पीड़िता को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई की बात
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना और उसके परिवार के साथ खड़ा होना सरकार की प्राथमिकता है।

    उन्होंने घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कानून के तहत कड़ी सजा की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की बात कही। पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी भी गठित की है और अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।

    मंत्री बोले- पुलिस अपना काम कर रही
    बिहार के मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने भी जमुई घटना पर सरकार की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    उनके अनुसार, किन धाराओं में कार्रवाई होगी और किसके खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाया जाएगा, यह पुलिस का काम है और पुलिस अपना काम कर रही है।

    ‘सरकार को जानकारी मिलते ही एक्शन’
    मंत्री ने कहा कि जैसे ही सरकार को घटना की जानकारी मिली, कार्रवाई शुरू कर दी गई और पुलिस ने भी कदम उठाया। उन्होंने पुराने पटना के शिल्पी-गौतम मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन करना पड़ा था, जबकि अब सरकार की ओर से तत्काल कार्रवाई की गई। यह बयान सरकार की ओर से जमुई मामले में त्वरित कार्रवाई को रेखांकित करने के रूप में आया है।

    कांग्रेस के प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक दबाव
    उधर, जमुई मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरने की तैयारी की है। पार्टी ने 22 सितंबर को राज्य के जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा है। कांग्रेस ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़िता को न्याय की मांग उठाई है।

    पुलिस कार्रवाई के साथ बयानबाजी भी तेज
    जमुई मामले में पुलिस कार्रवाई के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा जहां सरकार की त्वरित कार्रवाई और महिला सुरक्षा को लेकर अपना पक्ष रख रही है, वहीं विपक्ष घटना को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।

     

  • महतारी वंदन योजना से 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर माह मिल रहा आर्थिक संबल

    महतारी वंदन योजना से 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर माह मिल रहा आर्थिक संबल

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। पारंपरिक उल्लास और आत्मीय वातावरण में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों से भेंट कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है। माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि तीज का पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना का अवसर है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी माताओं-बहनों और उनके परिवारों के सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों के बीच तीज मिलन का अवसर अत्यंत सुखद और आत्मीय है। मुख्यमंत्री निवास में भी तीज के अवसर पर प्रदेशभर से आई बहनों के साथ पर्व का उल्लास साझा करने का अवसर मिला था। हमारी परंपराओं की यही खूबसूरती है कि वे हमें परिवार और समाज से जोड़ती हैं तथा आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती हैं। 

    सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को मिला है सर्वोच्च सम्मान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। हमारे वेदों, पुराणों और सामाजिक परंपराओं में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा का संदेश निहित है। हमारी संस्कृति कहती है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”, अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां परिवार की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम, त्याग और आशीर्वाद से ही परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार से सशक्त समाज तथा समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर कार्य कर रही है।

    महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

    उन्होंने कहा कि इस योजना से माताओं-बहनों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव उन्हें विशेष संतोष देता है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के साथ बच्चों की पढ़ाई, बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं। कोई बहन सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर बेटी का भविष्य संवार रही है तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर अपने हुनर को आजीविका में बदल रही है। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के लिए अवसर, संसाधन और आवश्यक सहयोग मिले। जब हमारी माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो परिवार मजबूत होगा और पूरे प्रदेश की प्रगति को नई गति मिलेगी।

    13.85 लाख लखपति दीदियां बनीं महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि माताओं-बहनों को स्थायी आजीविका, कौशल और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुखद तस्वीर है।

    उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से मिले आर्थिक संबल और बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी न केवल परिवारों को समृद्ध बना रही है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

    छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को देश-दुनिया में मिलेगी नई पहचान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट लोककला, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यहां की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी ताकत है। इसे सहेजने के साथ नई पीढ़ी और देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 650 करोड़ रुपए की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण और शूटिंग की संभावनाओं का विस्तार होगा। स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार तथा प्रतिभा प्रदर्शन के नए अवसर तैयार होंगे और प्रदेश के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों का अमूल्य योगदान है। हमारे कलाकार अपनी प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सुगंध और यहां की परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहेगी।

    बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर

    मुख्यमंत्री  साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके 15 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण और विकास को मिली नई गति

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ विकसित भारत के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका निभाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है और प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। गांवों तक आवास, पेयजल, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के कठिन समय का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी स्तर पर वैक्सीन विकसित कर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ अनेक देशों की भी सहायता की। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर छत्तीसगढ़वासियों ने अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के प्रति अपना स्नेह और शुभकामनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री ने इसमें उत्साहपूर्वक सहभागी बनने के लिए प्रदेश की माताओं-बहनों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    शांति, विश्वास और विकास के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद के विरुद्ध महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा विकास की राह में बाधा थे, वहां आज शांति और विश्वास के साथ विकास के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रकृति ने छत्तीसगढ़ को वन संपदा, वनोपज, खनिज संसाधनों और उपजाऊ कृषि भूमि से समृद्ध बनाया है। इन संसाधनों का जनहित में बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना सरकार का संकल्प है। विकसित छत्तीसगढ़ की इस यात्रा में माताओं-बहनों की सहभागिता, उनका परिश्रम और आशीर्वाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने लोकगीत से किया माताओं-बहनों का अभिनंदन

    राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि तीज के अवसर पर माताओं-बहनों का अपने निवास पर अभिनंदन करना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया है।

     वर्मा ने अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि जब वे आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब पहली बार उनके गांव में बिजली पहुंची थी और गांव तक सड़क भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश के गांवों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों का तेजी से विस्तार हुआ। आज मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास और खुशहाली की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसान परिवार के बेटे के रूप में प्रदेश सरकार में मंत्री बनकर जनता की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है।

    इस अवसर पर राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत प्रस्तुत कर माताओं-बहनों का अभिनंदन किया। उनकी प्रस्तुति से समारोह में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और तीज पर्व का उल्लास और भी जीवंत हो उठा।

    लोक कला-संस्कृति को समृद्ध करने वाले कलाकारों का सम्मान

    समारोह में छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री  साय ने कलाकारों को सम्मानित करते हुए उनके योगदान की सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने, संवर्धित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारी लोककला, लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि हमारी जड़ों और सामाजिक जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।

    मुख्यमंत्री ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर मांगी प्रदेश की खुशहाली

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा के निवास पर विराजित विघ्नहर्ता भगवान  गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने गणपति बप्पा से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए प्रदेश की निरंतर प्रगति और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ केश शिल्पी विकास बोर्ड के अध्यक्ष  गौरी शंकर वास, चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष  ध्रुव कुमार मिर्धा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, विधायक  रोहित साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, मती वीणा सिंह सहित बड़ी संख्या में माताएं-बहनें, कलाकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • T20I में भारत का बड़ा रिकॉर्ड, 200 जीत पूरी करने वाली पहली टीम बनी; पाकिस्तान-न्यूजीलैंड पीछे

    T20I में भारत का बड़ा रिकॉर्ड, 200 जीत पूरी करने वाली पहली टीम बनी; पाकिस्तान-न्यूजीलैंड पीछे

    नई दिल्ली
    भारत ने जापान के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल मैच को रोमांचक अंदाज में अपने नाम किया। बारिश की वजह से मैच 5-5 ओवर का हुआ। भारत ने सिर्फ 32 रन बनाए। जापान को आखिरी गेंद पर दो रनों से हार झेलनी पड़ी। यह टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भारतीय टीम की 200वीं जीत है।

    भारत- 200 जीत
    भारत टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 200 मैच जीतने वाला पहला देश बना गया है। टीम ने अभी तक 291 मैचों में 194 जीत हासिल की है। वहीं 7 टाई मैचों में 6 जीत मिली है। इस तरह टीम के जीत की संख्या 200 हो गई। अभी तक भारत एक भी टाई मैच नहीं हारा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ बारिश की वजह से एक मैच का सुपर ओवर नहीं हो पाया था और वह टाई ही रह गया।

    पाकिस्तान- 174 जीत
    पाकिस्तान ने 299 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 173 जीत हासिल की है। वहीं टीम को एक जीत सुपर ओवर में मिली है। 4 टाई मैचों में पाकिस्तान तीन में हारा है। पाकिस्तान ने 2009 में टी20 विश्व कप का खिताब भी जीता था।

    न्यूजीलैंड- 137 जीत
    न्यूजीलैंड की टीम के पास एक भी टी20 विश्व कप का खिताब नहीं है। लेकिन सबसे ज्यादा जीत के मामले में टीम तीसरे नंबर पर है। 267 मैचों में उसे 137 जीत मिली है। टाई हुए 10 मैचों में न्यूजीलैंड सिर्फ दो को ही अपने नाम कर पाया है।

    साउथ अफ्रीका- 131 जीत
    2005 में साउथ अफ्रीका ने अपना पहली टी20 मैच खेला था। 235 मैचों में 131 जीत के साथ टीम लिस्ट में चौथे नंबर पर है। उसे 101 मैचों में हार भी झेलनी पड़ी है। पहला टी20 विश्व कप साउथ अफ्रीका की मेजबानी में ही खेला गया था।

    इंग्लैंड- 130 जीत
    दो बार की विश्व चैंपियन इंग्लैंड के 233 मैचों में 130 जीत हैं। टीम को 92 हार झेलनी पड़ी है। उसके 11 मै बेनतीजा रहे। इंग्लैंड का हालिया फॉर्म काफी शानदार रहा है। इस साल 19 मैचों में टीम ने 16 जीत हासिल की है। इस दो में एक हार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत के खिलाफ मिली थी।

  • मोबाइल SIM से जुड़ी इस गलती पर होगी सख्त कार्रवाई, जेल और 50 लाख तक जुर्माना

    मोबाइल SIM से जुड़ी इस गलती पर होगी सख्त कार्रवाई, जेल और 50 लाख तक जुर्माना

    रायपुर.

    अगर अपने पहचान दस्तावेज से सिम लेकर दूसरे व्यक्ति को बेचना या किराये पर दिया है, तो सावधान हो जाएं. दूरसंचार विभाग की ओर से सख्त एडवाइजरी जारी कर मोबाइल यूजर्स को सतर्क किया है. टेलिकॉम पहचान और सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी के गलत इस्तेमाल को गंभीर अपराध बताया है.

    फर्जी आईडी से सिम खरीदने-बेचने या मोबाइल के आईएमईआई (आईएमईआई) नंबर से छेड़छाड़ करने पर 3 साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
    दूरसंचार विभाग के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों के जरिए SIM कार्ड लेना, किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन हासिल करना या अपने नाम पर जारी SIM को धोखाधड़ी के लिए किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराना कानूनी अपराध है. ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. यह सख्त एडवाइजरी छत्तीसगढ़ में सामने आए बड़े साइबर फ्रॉड के बाद जारी किया गया है.

    दरअसल, छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों में 410 से ज्यादा लोगों के दस्तावेज का इस्तेमाल कर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम निकाला जाना सामने आया है. इन सिम का इस्तेमाल बाद में साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा. एमपी के मैहर निवासी रामकृष्ण कुशवाहा को पुलिस ने दबोचा था. वह 4 साल पहले रायपुर आकर गुढ़ियारी में रह रहा था. उसने एक युवती से शादी की और उसके नाम से 3 कंपनियों की सिम बेचने लगे. वह सिम लेने के लिए आने वाले ग्राहकों का बायोमैट्रिक मशीन पर दो बार अंगूठा लगावाकर दो सिम जारी करता था. इसमें से एक ग्राहक और दूसरा अपने पास रखता था. आरोप है कि ऐसे 410 से अधिक सिम को  गोवा में साइबर ठगों को बेच दिया गया.

    एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ 9 सिम
    भारत में आमतौर पर किसी एक व्यक्ति अपने नाम पर सिर्फ 9 मोबाइल कनेक्शन रह सकता है. कुछ राज्यों में नियम अलग हैं, जैसे जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा 6 है. सरकार ने 23 अगस्त से डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म में एक नया फीचर भी जोड़ा है, जिसके जरिए तय सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन वाले मामलों की पहचान के लिए फोटो समेत अन्य विवरणों का मिलान किया जा सकेगा. इस व्यवस्था को लागू करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को अपने सिस्टम को सरकारी प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है.