Author: NewseDay

  • राज्यपाल रमेन डेका का संदेश, डिजिटल प्लेटफॉर्म से छत्तीसगढ़ की लोककला को मिलेगी वैश्विक पहचान

    राज्यपाल रमेन डेका का संदेश, डिजिटल प्लेटफॉर्म से छत्तीसगढ़ की लोककला को मिलेगी वैश्विक पहचान

    डिजिटल माध्यमों से छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को दुनिया तक पहुंचाएं- राज्यपाल रमेन डेका

    खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं जैसे पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश की इस सांस्कृतिक थाती को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया।

             राज्यपाल डेका ने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास व संस्कृति को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कला के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण बहुत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी बल दिया।

            समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद संतोष पांडे ने कहा कि राजपरिवार द्वारा स्थापित इस दूरदर्शी संस्थान ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है।

           कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने दिया। इस गरिमापूर्ण आयोजन में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना, यहां साधारण परिवार का व्यक्ति भी बन सकता है प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति : रामनाथ कोविन्द

    भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना, यहां साधारण परिवार का व्यक्ति भी बन सकता है प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति : रामनाथ कोविन्द

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुशासन से यूपी के विकास को दी नई गति : पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द
     
    लोकभवन में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों का जताया आभार
     
    मोदी-योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्की छत के साथ दी गरिमा, टपकती छत के नीचे बीता था मेरा बचपन : पूर्व राष्ट्रपति

     
    भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना, यहां साधारण परिवार का व्यक्ति भी बन सकता है प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति : रामनाथ कोविन्द
     
    योगी सरकार की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की सराहना, एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो के विस्तार का किया उल्लेख
     
    यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प को सराहा
     
     लखनऊ

     पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों और सुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को नई ऊर्जा दी है। उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयासों को अभूतपूर्व गति मिली है। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से आवागमन सुगम हुआ है। सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से गरीब परिवारों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प की भी प्रशंसा की।
     
    पूर्व राष्ट्रपति बुधवार को लोकभवन सभागार में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक अवसर है। इससे पहले अनेक मंचों से लोगों को संबोधित किया, लेकिन आज चर्चा का विषय उनका अपना जीवन है। इसी प्रदेश में जन्मे, यहीं की मिट्टी में पले-बढ़े और शिक्षा प्राप्त की। उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि भी बना।
     
    भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि, राजनीति का उद्देश्य राष्ट्रसेवा
    पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति के लिए भाजपा को चुनने का प्रमुख कारण पार्टी में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना है। यहां जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद से ऊपर उठकर समावेशी विकास पर बल दिया जाता है। इसी पार्टी में साधारण शिक्षक का पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री, कल्याण सिंह मुख्यमंत्री, गरीब परिवार में जन्मे योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। समाज के कमजोर वर्ग से आने वाला व्यक्ति भी राष्ट्रपति बन सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की सच्ची विजयगाथा है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। उनसे राजनीति को सत्ता प्राप्त करने के बजाय राष्ट्रसेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा मिली।
     
    टपकती छत के नीचे बीता बचपन, आज गरीबों को मिल रहे पक्के घर

    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि कानपुर देहात के छोटे से गांव में उनका साधारण घर था। बरसात में छत टपकती थी। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने पर वे स्मृतियां फिर ताजा हो गई थीं। तब उन्होंने कहा था कि देश के किसी गांव में आज भी कोई छोटा-सा रामनाथ टपकती छत के नीचे खड़ा होकर बेहतर भविष्य के सपने देख रहा होगा। आज मोदी और योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्के मकान के साथ गरिमा और सुरक्षा का एहसास कराया है।
     
    उन्होंने कहा कि उनके पिता शिक्षा को जीवन बदलने का माध्यम मानते थे। जमीन दान करने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव से मिले भाईचारे, संवेदना और बड़ों के सम्मान के संस्कार जीवनभर उनके साथ रहे।
     
    यूपी से राष्ट्रपति बनना करोड़ों लोगों के सपनों का सम्मान
    पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए, लेकिन यहां जन्मे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनने का अवसर पहली बार मिला। इसे वह अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों लोगों के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान मानते हैं। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता की शक्ति दिखाई। उन्होंने बताया कि उनकी आत्मकथा आने वाले दिनों में देश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित की जाएगी।

  • MP में 15 से 17 अक्टूबर तक बारिश की संभावना, कई जिलों में आंधी चलने का अनुमान

    MP में 15 से 17 अक्टूबर तक बारिश की संभावना, कई जिलों में आंधी चलने का अनुमान

    भोपाल
     मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम बदलने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ  और नए चक्रवाती तंत्र के प्रभाव से 15 से 17 अक्टूबर तक प्रदेश के करीब 20 जिलों में आंधी और बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, शुरुआत में ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में मौसम का असर दिखाई दे सकता है। इसके बाद 17 अक्टूबर को रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। हालांकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के लिए इस पूर्वानुमान के तहत कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम से बदलेगा मौसम
    मौसम में बदलाव की मुख्य वजह उत्तरी भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती तंत्र को माना जा रहा है। इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।मानसून की विदाई के बाद अक्टूबर में होने वाली इस बारिश से तापमान और स्थानीय मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम की गतिविधियों का असर अलग-अलग जिलों में अलग समय पर दिखाई देने की संभावना है।

    तीन दिन में इन इलाकों में बदलेगा मौसम
    15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल तथा सागर संभाग के कुछ जिलों में बारिश की संभावना है। 17 अक्टूबर को इसका दायरा बढ़कर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग तक पहुंच सकता है। ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है।

    अक्टूबर में एक साथ दिखेंगे तीन मौसम
    मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का असर देखने को मिला है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने से दिन में धूप और गर्मी बढ़ी, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस होने लगी। अब सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ जिलों में फिर बारिश हो सकती है। प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो गया था। इस बार करीब 100 दिन तक मानसून सक्रिय रहा। विदाई के बाद भी पूर्वी मध्यप्रदेश में पिछले सप्ताह कई जगह आंधी और बारिश का असर देखा गया था। हालांकि, रविवार, सोमवार और मंगलवार को प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश दर्ज नहीं की गई।

    चार महीने में सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी
    इस साल जून से सितंबर तक प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के बीच अंतर भी साफ दिखाई देता है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12 प्रतिशत की कमी रही। पश्चिमी क्षेत्र के कई जिलों में बारिश का घाटा ज्यादा होने से खेती पर असर पड़ने की आशंका है।आंकड़ों के मुताबिक, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश हुई। इन जिलों में कमी नौ से 51 प्रतिशत तक रही। दूसरी ओर, भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडोरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो गया।

    जून की कमी पूरे सीजन पर पड़ी भारी
    मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से आंकड़ों को सहारा मिला, लेकिन पूरे सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा। यही वजह है कि प्रदेश में मानसून की विदाई के समय करीब चार प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई। 

    17 अक्टूबर को 20 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना
    17 अक्टूबर को प्रदेश के कई जिलों में मौसम का असर बढ़ने का अनुमान है। संभावित बारिश और आंधी से प्रभावित होने वाले जिलों की सूची इस प्रकार है

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र: ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी और अशोकनगर।

    सागर क्षेत्र: निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़।

    बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र: पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर और सिंगरौली।

    महाकौशल एवं शहडोल क्षेत्र: शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट।

    इन जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की संभावना है। हालांकि, सभी जिलों में एक जैसी स्थिति रहे, यह जरूरी नहीं है।

    भोपाल, इंदौर और उज्जैन में कैसा रहेगा मौसम?

    मौसम विभाग के बताए गए पूर्वानुमान के अनुसार, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिलहाल इस बारिश को लेकर अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन क्षेत्रों में मौसम में कोई बदलाव नहीं होगा, बल्कि फिलहाल इन संभागों को संभावित बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल नहीं किया गया है।

    किसानों और आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

    आंधी और गरज-चमक की स्थिति में कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहतर रहेगा।

    तेज हवाएं चलने पर पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।

    बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान और जलाशयों के पास खड़े होने से बचें।

    किसान फसलों की कटाई, उपज के भंडारण और खुले में रखे अनाज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करें।

  • अभिजीत दिपके की CJP पर अमेरिकी सिंगर का हमला, एंटी-मोदी प्रदर्शनों और विदेशी फंडिंग को लेकर छिड़ा विवाद

    अभिजीत दिपके की CJP पर अमेरिकी सिंगर का हमला, एंटी-मोदी प्रदर्शनों और विदेशी फंडिंग को लेकर छिड़ा विवाद

    नई दिल्ली
       
    फेमस अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ आवाज उठाई है. उन्होंने देश के युवाओं से अभिजीत दिपके की पार्टी के खिलाफ स्टैंड लेने की गुहार लगाई है. मैरी मिलबेन का आरोप है कि अमेरिका के डोनर भारत में एंटी-मोदी ताकतों को फंडिंग दे रहे हैं। 

    मैरी मिलबेन का CJP को लेकर दावा
    मैरी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने वाले अमेरिकी डोनर अभिजीत दिपके और उनके ग्रुप को फंडिंग कर रहे हैं. उनका दावा है कि वो लोग इंडिया की व्यवस्था को खंडित करना चाहते हैं. भारत के विकास में बाधा डालने के लिए ये सब कोशिशें की जा रही हैं. सिंगर ने यूथ को आगाह करते हुए कहा कि इंडिया में हो रही एंटी मोदी एक्टिविस्ट की फंडिंग उनके देश से हो रही है. मैरी का ये बयान इंडिया में चल रहे प्रोटेस्ट के इरादों पर सवाल उठाता है। 

    कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रही है. उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और SIR में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने की मांग की है. 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP ने प्रोटेस्ट का ऐलान किया था. लेकिन अनुमति न मिलने की वजह से पुलिस कार्रवाई के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया. अभिजीत समेत उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था. पुलिस कार्रवाई के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया। 

    वहीं कुछ महीनों पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने NEET परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ प्रोटेस्ट किया गया था. उनके इस देशव्यापी प्रदर्शन में सेलेब्स भी शामिल हुए थे. प्रकाश राज, शबाना आजमी, स्वरा भास्कर जैसे कई सेलेब्स ने दिपके को सपोर्ट किया था. CJP के हालिया प्रोटेस्ट को भी सेलेब्स का सपोर्ट मिला है. मुंबई में कई सितारों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया था. आमिर खान के भांजे इमरान खान भी पहुंचे थे. पुलिस ने बाकी प्रदर्शनकारियों के साथ इमरान को भी डिटेन किया. इस प्रोटेस्ट के बाद से यूएस की नागरिकता रखने वाले इमरान को देश से बाहर निकालने की मांग उठने लगी है। 

  • मध्यप्रदेश में पुराने शिक्षकों के लिए TET छूट का मामला, हाईकोर्ट के निर्देश पर 60 दिन में फैसला लेगी सरकार

    मध्यप्रदेश में पुराने शिक्षकों के लिए TET छूट का मामला, हाईकोर्ट के निर्देश पर 60 दिन में फैसला लेगी सरकार

    जबलपुर 
     मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साल 2001 से पूर्व नियुक्ति शिक्षा कर्मियों को टीईटी से राहत प्रदान करने के संबंध में सुनवाई की. इस सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बैंच ने सरकार को 60 दिनों की समय सीमा में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक सिंह की एकलपीठ ने पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करने का आदेश जारी करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया. इस फैसले से पुराने सरकारी शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। 

    क्या है पूरा मामला?
    याचिकाकर्ता अनिल कुमार तोमर व अन्य की ओर से सरकारी शिक्षकों के संबंध में ये याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर की गई थी. इस याचिका में कहा गया था कि उनकी नियुक्ति वर्ष 1997 से 1999 के बीच शिक्षाकर्मी वर्ग-दो और तीन के पदों पर हुई थी. सरकार के द्वारा पदोन्नति की प्रक्रिया में टीईटी उत्तीर्ण करने को अनिवार्यता कर दिया गया है. ऐसे में याचिका में सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालयों के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि 3 सितम्बर 2001 से पूर्व नियुक्ति शिक्षा कर्मियों को पदोन्नति प्रक्रिया में टीईटी से छूट प्रदान की गई है. अन्य राज्यों में ऐस फैसला हुआ है, और ऐसी ही छूट मध्य प्रदेश के शिक्षकों को भी मिलनी चाहिए। 

    60 दिन के अंदर मोहन सरकार को लेना होगा फैसला
    याचिका में बताया गया कि देश के अन्य प्रदेशों की तरह मध्य प्रदेश में भी साल 2001 से पूर्व नियुक्ति शिाक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट प्रदान की जाने की मांग करते हुए अभ्यावेदन दिया गया था. सक्षम प्राधिकरण के द्वारा अभ्यावेदन पर कोई निर्णय नहीं लिए जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है. एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन का निराकरण 60 दिनों की अवधि में करने के आदेश जारी किए हैं। 

  • ग्रुप-D कर्मचारियों के कैडर बदलाव की प्रक्रिया शुरू, हरियाणा में आज खुलेगा ऑनलाइन पोर्टल

    ग्रुप-D कर्मचारियों के कैडर बदलाव की प्रक्रिया शुरू, हरियाणा में आज खुलेगा ऑनलाइन पोर्टल

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में विज्ञापन संख्या 4/2018 के अंतर्गत चयनित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को काडर बदलने के लिए सरकार ने एक और मौका दिया है। आज बुधवार से पोर्टल फिर खोल दिया जाएगा, जिस पर पात्र कर्मचारी 30 अक्टूबर तक विकल्प दे सकेंगे। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि जरूरी नहीं कि कामन काडर बदलने से उनकी वरिष्ठता प्रभावित हो।

    मानव संसाधन विभाग ने इससे पहले 17 जुलाई को पोर्टल https://recruitment.groupd.csharyana.gov.in/ शुरू करते हुए कर्मचारियों को विकल्प दिया था कि वे या तो कामन काडर में बने रहें या फिर कामन काडर से बाहर निकलकर संबंधित विभाग के सेवा नियमों के अधीन आ सकते हैं।

    15 अगस्त को बंद कर दिया गया था पोर्टल
    इसके बाद पोर्टल 15 अगस्त को बंद कर दिया गया। इसी दौरान सरकार के संज्ञान में आया कि पोर्टल पर विकल्प मॉड्यूल ने यह संदेश दिया कि कर्मचारी अपनी वरिष्ठता खो देगा, चाहे उसने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा उसे मूल रूप से आवंटित विभाग का विकल्प चुना हो या किसी अन्य विभाग का। इससे कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बन गई और वे सही विकल्प नहीं चुन सके। अब सरकार ने पोर्टल खोलते हुए स्पष्ट किया है कि वे कर्मचारी, जो सामान्य काडर में बने रहने का विकल्प चुनते हैं, उनकी सेवाएं हरियाणा समूह-डी कर्मचारी (भर्ती और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2018-संशोधित रूप में, द्वारा शासित होंगी और उनकी वरिष्ठता एचएसएससी द्वारा तैयार की गई संयुक्त योग्यता सूची के अनुसार निर्धारित की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति एचएसएससी की अनुशंसाओं के अंतर्गत किसी विभाग में हुई थी और जिन्हें 24 जून 2019 के माध्यम से विभाग परिवर्तन का एक बार का अवसर दिया गया था, तो वरिष्ठता निर्धारण के उद्देश्य से उस विभाग को कर्मचारी का प्रारंभिक विभाग माना जाएगा।

    नियमों के अनुसार विनियमित की जाएगी सेवा
    यदि ऐसा कर्मचारी 2024 के सामान्य स्थानांतरण अभियान के दौरान स्थानांतरित हुए बिना उसी विभाग में सेवा जारी रखता है और सामान्य काडर से बाहर रहने का विकल्प चुनता है, तो उसकी वरिष्ठता उस विभाग पर लागू एचएसएससी योग्यता/चयन सूची और संबंधित सेवा नियमों के अनुसार विनियमित की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति प्रारंभ में किसी विभाग में हुई थी और बाद में 2024 के सामान्य तबादला अभियान के दौरान उसका तबादला किसी अन्य विभाग में कर दिया गया, और अब उसने वर्तमान विभाग में ही रहने का विकल्प चुना है, तो ऐसे कर्मचारी को वर्तमान विभाग में वरिष्ठता निर्धारण के उद्देश्य से नव नियुक्त कर्मचारी माना जाएगा। उसे लागू सेवा नियमों के अनुसार उस विभाग की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा। अर्थात् उस विभाग में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि पर उस काडर में कार्यरत सभी कर्मचारियों से नीचे।

  • पंजाब हत्याकांड का मुख्य आरोपी मुंबई से दबोचा गया, पुलिस अब तक 9 आरोपियों को कर चुकी है गिरफ्तार

    पंजाब हत्याकांड का मुख्य आरोपी मुंबई से दबोचा गया, पुलिस अब तक 9 आरोपियों को कर चुकी है गिरफ्तार

    अमृतसर.

    मैड संधू हत्याकांड की जांच में पंजाब पुलिस को एक और अहम सफलता मिली है। जालंधर काउंटर इंटेलिजेंस ने मुंबई एटीएस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए मामले से जुड़े मुख्य आरोपी जोबनप्रीत को मुंबई से गिरफ्तार किया है।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से तीन पिस्तौल, पांच मैगजीन और 11 कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर हथियारों की सप्लाई और वारदात में शामिल अन्य लोगों के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

    विदेश में बैठे हैंडलरों के संपर्क में था आरोपी
    पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, जोबनप्रीत की भूमिका शूटरों तक हथियार पहुंचाने, उन्हें आर्थिक मदद देने और वारदात को अंजाम देने के लिए जरूरी लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने में सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी  विदेश में बैठे हैंडलरों के निर्देश पर काम कर रहा था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हथियार कहां से लाए गए और उन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

    तरनतारन में तीन फायरिंग की घटनाओं में भी भूमिका
    प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपी ने तरनतारन जिले में रंगदारी से जुड़े तीन फायरिंग मामलों में अपनी संलिप्तता कबूल की है। पुलिस इन घटनाओं के संबंध में भी उससे पूछताछ कर रही है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन वारदातों के पीछे कौन लोग थे और क्या इनका संबंध किसी संगठित आपराधिक गिरोह से है। पुलिस अब आरोपी के संपर्कों, हथियारों की सप्लाई करने वालों और विदेश में बैठे हैंडलरों के साथ उसके संबंधों की जांच कर रही है।

  • बस्तर में किसानों का विरोध, मुआवजे के सर्वे से असंतुष्ट किसानों ने टीम को लौटाया

    बस्तर में किसानों का विरोध, मुआवजे के सर्वे से असंतुष्ट किसानों ने टीम को लौटाया

    बकावंड.

    बस्तर जिले के बकावंड जनपद के धोबीगुड़ा गांव में बाढ़ प्रभावित किसानों का गुस्सा अब राहत राशि के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है. सरकार की ओर से घोषित 8 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए किसानों ने राजस्व सर्वे टीम को बिना मुआयना किए वापस लौटा दिया.

    किसानों का कहना है कि हालिया बाढ़ में धान सहित दूसरी फसलें बर्बाद हो गई हैं और अब अगली खेती तथा परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा है. इंद्रावती नदी के आसपास के धोबीगुड़ा, मालगांव, गुमडेल, कोरपाल, कानापाल, उलनार, कारितगांव और बजावंड जैसे गांवों में फसल नुकसान की शिकायतें सामने आई हैं. प्रभावित किसानों के मुताबिक, एक एकड़ में करीब 21 क्विंटल धान की उपज होती है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 हजार रुपये बैठती है. उनका कहना है कि बीज, खाद, दवा, जुताई और मजदूरी सहित खेती की लागत ही करीब 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है. ऐसे में पूरी फसल नष्ट होने के बाद घोषित सहायता राशि को किसान अपनी वास्तविक क्षति की तुलना में बेहद कम मान रहे हैं.

    किसानों की मांग है कि खेतों में हुए नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए और उसी के अनुरूप मुआवजा तय किया जाए. ग्राम पंचायत धोबीगुड़ा के सरपंच संतोष कश्यप ने किसानों को समझाइश देते हुए उनकी मांग जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने की पहल की है. उन्होंने प्रभावित किसानों से सांसद महेश कश्यप से मिलकर सामूहिक रूप से अपनी बात रखने की अपील की है. अब प्रशासन के सामने किसानों की आपत्तियों का समाधान करने, नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने और राहत को लेकर भरोसा बहाल करने की चुनौती है.

  • मिलेट फसलों की खरीद से लेकर उपयोग तक पर मंथन, मुख्य सचिव ने की अहम बैठक की अध्यक्षता

    मिलेट फसलों की खरीद से लेकर उपयोग तक पर मंथन, मुख्य सचिव ने की अहम बैठक की अध्यक्षता

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मिलेट फसलों के उपार्जन, उत्पादन एवं उपयोग के संबंध में बैठक सम्पन्न

    रायपुर
     मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में कोदो, कुटकी, रागी तथा मक्का के उपार्जन एवं फसल विविधीकरण, किसानों को प्रोत्साहित करने सहित अन्य आवश्यक विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में इन कृषि उत्पादों की आवश्यकता, उपार्जन तथा मिलेटस के उपयोग के संबंध में चर्चा हुई। इसके तहत स्कूलों में मध्यांह भोजन और महिला एवं बाल विकास के पोषक आहार कार्यक्रमों में आंगनबाड़ियों के माध्यम में वितरित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई। 

              बैठक में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित अन्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

  • ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद, सिंधिया परिवार के महासमझौते पर आज अदालत में सुनवाई

    ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद, सिंधिया परिवार के महासमझौते पर आज अदालत में सुनवाई

    ग्वालियर

    सिंधिया राज परिवार की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है।अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में बुधवार (14 अक्टूबर 2026) को अंतरिम आवेदन व आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। सात दिन पहले भी आवेदनों पर बहस हुई थी।

    बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट तय करेगी कि आगे की सुनवाई की दिशा क्या रहेगी। मतलब आज साफ हो जाएगा कि अंतरिम आवेदनों पर आगे की सुनवाई की जाएगी या फिर प्रतिमा देवी की आपत्ति को स्वीकार कर साक्ष्य पर यह सुनवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। बुधवार शाम तक सिंधिया राजघराने की पूरे देश में फैली संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है।

    एक दूसरे पर लगा चुके हैं धोखाधड़ी का आरोप

    इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद के समझौते पर सात दिन पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना के समझौता आपत्ति आवेदन पर बहस हुई थी। प्रतिमा देवी की ओर से कहा गया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। मतलब साफ तौर पर प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, वंसुधरा राजे, यशोधरा राजे व ऊषा राजे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था।

    प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राजे की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि स​हमति से हस्ताक्षर हुए हैं।

    हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।साथ ही इस धोखाधड़ी के आरोप पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से पक्ष आया था कि हस्ताक्षर सहमति से ही हुए हैं। इसमें कोई भी गड़बड़ी नहीं की गई है।

    पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरा समझौता इन पर ही टिका
    वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था।

    लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।

    पर अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। साथ ही वर्तमान समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।

    पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

    सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद

    ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट में चल रही कानूनी जंग अब बेहद दिलचस्प और उलझते मोड़ पर पहुंच गई है।

    इस ऐतिहासिक केस के पटाक्षेप के लिए 78 साल पुराना विलय पत्र यानी ‘द कोवेनेंट’ सबसे अहम दस्तावेज बनकर सामने आया है।

    दिल्ली के नोटरी द्वारा सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित यह दस्तावेज कोर्ट के सामने आ चुका है, जिसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और राजाओं को मिलने वाले टैक्स फ्री ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है।