Author: NewseDay

  • HPSC को हाईकोर्ट से राहत, हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी

    HPSC को हाईकोर्ट से राहत, हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी

    चंडीगढ़.

    हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) भर्ती प्रक्रिया को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की स्क्रीनिंग परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी में बदलाव और कुछ प्रश्नों को हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली 16 याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में विषय विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ठोस गलती साबित हुए बिना न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने कहा कि उत्तर कुंजी की शैक्षणिक शुद्धता का आकलन करना विशेषज्ञों का काम है। जब तक उत्तर कुंजी में स्पष्ट और निर्विवाद त्रुटि साबित न हो, तब तक अदालत को विशेषज्ञों की राय में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने HPSC की ओर से 27 जून 2025 को जारी अंतिम उत्तर कुंजी, 3 जुलाई 2025 की घोषणा और 11 जुलाई 2025 को घोषित स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी थी। अभ्यर्थियों का आरोप था कि आयोग ने अंतिम उत्तर कुंजी में छह प्रश्नों के उत्तर बदल दिए और 10 प्रश्नों को हटा दिया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन बदलावों से परीक्षा की निष्पक्षता और परिणाम की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। उन्होंने संशोधित उत्तर कुंजी जारी करने, सभी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराने और नई मेरिट सूची तैयार करने की मांग की थी।

    बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा से प्रश्न दोहराने का भी उठाया मुद्दा
    याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी दलील दी कि बिहार लोक सेवा आयोग की 29 अप्रैल 2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) परीक्षा के 30 प्रश्न हरियाणा की परीक्षा में दोहराए गए थे। उनका कहना था कि उत्तर कुंजी में बदलाव और प्रश्न हटाए जाने से योग्य अभ्यर्थियों के चयन की संभावनाएं प्रभावित हुईं। इसी आधार पर उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की मांग की। हालांकि, अदालत ने कहा कि किसी दूसरी परीक्षा के प्रश्न दोहराए जाने मात्र से परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह नहीं किया जा सकता।

    HPSC ने अदालत में क्या दलील दी?
    हरियाणा लोक सेवा आयोग ने अदालत को बताया कि परीक्षा की प्रारंभिक उत्तर कुंजी जारी करने के बाद अभ्यर्थियों से आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया और उनकी सिफारिशों के आधार पर अंतिम उत्तर कुंजी तैयार की गई। आयोग के अनुसार, अभ्यर्थियों की शिकायतों की दोबारा समीक्षा भी विशेषज्ञों से कराई गई थी। इस समीक्षा के बाद उत्तर कुंजी में किसी और बदलाव की आवश्यकता नहीं पाई गई।

    विशेषज्ञों की राय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती अदालत
    हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रश्नों की शैक्षणिक शुद्धता और उत्तर कुंजी की वैधता का तकनीकी मूल्यांकन विशेषज्ञों के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ता विशेषज्ञों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उनके फैसले में दुर्भावना साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अलग-अलग पाठ्यपुस्तकों में दिए गए उत्तरों की तुलना के आधार पर विशेषज्ञों की राय को खारिज नहीं किया जा सकता। उत्तर कुंजी में स्पष्ट त्रुटि का प्रमाण न होने के कारण न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।

    असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया के लिए क्या मायने?
    हाई कोर्ट द्वारा सभी 16 याचिकाएं खारिज किए जाने से HPSC की अंतिम उत्तर कुंजी और स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली इन याचिकाओं पर कानूनी विवाद समाप्त हो गया है। हालांकि, भर्ती के अगले चरण, नियुक्तियों की समयसीमा और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर आयोग की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों पर नजर रखनी होगी। इस फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले मामलों के लिए यह संदेश भी मिलता है कि केवल असहमति पर्याप्त नहीं है; न्यायिक हस्तक्षेप के लिए स्पष्ट त्रुटि या ठोस आधार प्रस्तुत करना जरूरी है।

  • परविंदर झोटा हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई तेज, अमृतपाल की पार्टी के कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

    परविंदर झोटा हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई तेज, अमृतपाल की पार्टी के कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

    मानसा.

    पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के बाद सूबे में हड़कंप मच गया है। बुधवार को गुस्साए लोगों ने आरोपी की दुकान में आग लगा दी। वहीं, आरोपी केमिस्ट के घर पर बुलडोजर से कार्रवाई की गई है।

    उधर, खडूर साहिब सीट से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस मामले में मानसा जाने की योजना बना रहे कई लोगों को पुलिस हिरासत में ले रही है। तरसेम सिंह ने परमिंदर सिंह झोटा की हत्या पर दुख जताया और पंजाब सरकार पर नशीली दवाओं की तस्करी रोकने में नाकाम रहने और नशीली दवाओं के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने का आरोप लगाया।

    आरोपी की दुकान में लगाई आग, मकान पर चला बुलडोजर
    मानसा। पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या के बाद तनाव की स्थिति बन गई है। हत्या के आरोपी अश्विनी की दुकान में भीड़ ने आग लगा दी। वहीं, आरोपी के मकान को भी गिराया जा रहा है। पुलिस मौके पर मौजूद है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। आरोपी को मंगलवार को राजस्थान के चूरू से गिरफ्तार किया गया था।

    आरोपी की दुकान में आग, मकान पर कार्रवाई
    परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा में लोगों का गुस्सा सामने आया। हत्या के आरोपी अश्विनी की दुकान को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। इसके बाद आरोपी के मकान को गिराने की कार्रवाई भी शुरू हुई। मौके पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने कहा कि पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर मौजूद है। प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सूचना मिलने के बाद पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसएसपी के अनुसार, अवैध निर्माण से जुड़ी जानकारी मिली थी और उसी संबंध में कार्रवाई की जा रही है।

    मनजीत कौर ने पुलिस पर लगाए आरोप
    इस बीच, 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह के सहयोगी सरदार गुरप्रीत सिंह की मददगार मनजीत कौर ने पुलिस पर उन्हें जबरन घर में रोके रखने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में मानसा जाने वाली थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां जाने से रोक दिया। मनजीत कौर ने बताया कि सुबह करीब 5.30 बजे पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और दरवाजा जोर-जोर से खटखटाने लगे। वहां करीब 15-16 पुलिसकर्मी और एक महिला पुलिसकर्मी मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और बताया कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले हैं तथा उन्हें थाने चलना होगा। मनजीत कौर ने बताया कि उन्होंने पुलिस से कार्रवाई का कारण पूछा, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने मोबाइल से घटनाक्रम रिकॉर्ड करने की कोशिश की तो पुलिसकर्मियों ने उनका फोन छीन लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी लगातार उन्हें एक सूची में नाम होने की बात कह रहे थे और धमकी भरे लहजे में बात कर रहे थे।

  • सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें युवा: मुख्यमंत्री

    सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें युवा: मुख्यमंत्री

    अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का मार्ग बनाया, रामनाथ कोविन्द की जीवन यात्रा हर भारतीय के लिए प्रेरणा: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री ने लोकभवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का किया विमोचन

    गांव के स्कूल से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे रामनाथ कोविन्द का जीवन संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ की मिसाल

    मुख्यमंत्री ने कहा- कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे, विपरीत परिस्थितियों में कभी संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए

    हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय विकसित कर रही सरकार, 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय के लिए अलग कक्ष: सीएम

    सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें युवा: मुख्यमंत्री

    लखनऊ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन सभागार में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की गरिमामयी उपस्थिति में उनकी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को अभावों से संघर्ष करते हुए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरणादायी यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने अभावों को ढाल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और संघर्ष करने का मार्ग बनाया। उन्होंने परिश्रम, पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प के बल पर अपने जीवन की दिशा तय की। उनका जीवन देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का आगमन हमेशा प्रदेशवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश उनकी जन्मभूमि भी है और उनकी कर्मसाधना की भूमि भी। यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिस आत्मकथा का पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा विमोचन किया गया था, उसका हिंदी रूपांतरण अब उनकी पावन जन्मभूमि वाले प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विमोचित हुआ है। 

    अभावों में जन्म, संघर्ष से संवैधानिक शिखर तक का सफर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा एक ऐसे भारतीय की कहानी है, जिसने जीवन की कठिनाइयों को प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया। परौंख गांव के एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्म लेने वाले रामनाथ कोविन्द के सिर से बचपन में ही मां का साया उठ गया था। इसके बावजूद उन्होंने अभावों को कभी पलायन का कारण नहीं बनने दिया और न ही अपनी परिस्थितियों को किसी से कुछ मांगने का आधार बनाया। उन्होंने गांव के विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की, फिर उच्च शिक्षा अर्जित की और अधिवक्ता के रूप में वंचितों-गरीबों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा और सार्वजनिक जीवन को अपने संघर्ष का हिस्सा बनाया। भारतीय जनता पार्टी के सदस्य एवं पदाधिकारी के रूप में राजनीतिक यात्रा शुरू करने के बाद वह राज्यसभा के सदस्य बने, बिहार के राज्यपाल पद पर पहुंचे और अंततः भारत के राष्ट्रपति के रूप में सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की यात्रा हमें बताती है कि महानता केवल अनुकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने से नहीं आती, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने के साहस से प्राप्त होती है। घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे। यही दृढ़ संकल्प उनकी यात्रा की शुरुआत बना। जब परिस्थितियां अनुकूल हों तो लोककल्याण और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करने का जज्बा होना चाहिए। यही विशेषता रामनाथ कोविन्द को उस मुकाम तक लेकर गई, जहां उन्होंने पांच वर्ष तक 145 करोड़ भारतवासियों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में देश का नेतृत्व किया। उन्हें जो भी दायित्व मिला, उसका निर्वहन उन्होंने सहजता, सरलता और भारतीय जनभावनाओं के अनुरूप किया।

    जन्मभूमि के प्रति अनुराग जीवन के संस्कारों का परिचायक
    मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की विशेषता केवल सर्वोच्च
    संवैधानिक पद तक पहुंचना नहीं है, बल्कि अपनी जन्मभूमि, गांव और पुराने संबंधों के प्रति उनका अनुराग भी है। उन्हें परौंख गांव जाने का कई बार अवसर मिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी उनके गांव पहुंच चुके हैं। जन्मभूमि के प्रति अनुराग रखना प्रत्येक भारतीय के जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार होना चाहिए। राष्ट्रपति पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद भी रामनाथ कोविन्द जब अवसर मिलता है, पुराने साथियों से मिलने पहुंचते हैं। कानपुर आने पर वह अपने गांव की ओर रुख करते हैं और लखनऊ आने पर पुराने परिचितों से मिलना नहीं भूलते। चाट वाले, चाय वाले, कपड़े वाले और दूसरे पुराने परिचितों के साथ उनके संबंध आज भी बने हुए हैं। उनका जीवन हमें अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का संदेश देता है। व्यक्ति जीवन में कितनी भी ऊंचाई प्राप्त कर ले, उसे अपने मूल, अपने गांव, अपने समाज और उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने उसकी जीवन यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    भगवान राम का उदाहरण देकर समझाया जन्मभूमि का महत्व
    मुख्यमंत्री ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंका विजय के बाद जब लक्ष्मण सोने की लंका देखकर वहां कुछ समय रुकने की बात करते हैं, तब भगवान श्रीराम उन्हें अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि का महत्व समझाते हैं। भगवान श्रीराम कहते हैं- ‘अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।’ अर्थात सोने की लंका भी उन्हें आकर्षित नहीं करती, क्योंकि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। 

    राष्ट्रपति के रूप में दुनिया में प्रभावी ढंग से रखा भारत का पक्ष
    मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति के रूप में देश के विभिन्न राज्यों और दुनिया के अनेक देशों की यात्राएं कीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने प्रभावी ढंग से भारत का पक्ष रखा और दूसरे देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया। उनका सार्वजनिक जीवन संवैधानिक मर्यादा, सहज व्यवहार और देश के प्रति समर्पण का उदाहरण है। गांव से लेकर राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम के बल पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।

    युवाओं को महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथा पढ़ने की सलाह
    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे आगे बढ़ने के लिए महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़ें। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन संघर्ष का अध्ययन हमें यह समझने का अवसर देता है कि कठिन परिस्थितियों को कैसे अपनी शक्ति में बदला जा सकता है। रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अभावों से निकलकर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की यात्रा को सामने रखती है। यह आत्मावलोकन करने की आवश्यकता है कि हमारे विद्यालय, महाविद्यालय और पंचायतें किस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। विद्यार्थियों को ऐसी पुस्तकों तक पहुंच उपलब्ध कराना आवश्यक है, जो उनके जीवन को दिशा दे सकें। अच्छी पुस्तकें सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होती हैं। वे सोचने-समझने की क्षमता विकसित करती हैं, अनुभवों से सीखने का अवसर देती हैं और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती हैं।

    सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय पुस्तकें पढ़ें युवा
    मुख्यमंत्री ने आधुनिक जीवन में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज व्यक्ति पांच से सात घंटे केवल स्मार्टफोन व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खर्च कर रहा है। यदि इस समय में एक-दो घंटे बचाकर पुस्तकों के अध्ययन और चिंतन में लगाए जाएं तो इससे व्यक्ति को कहीं अधिक लाभ हो सकता है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स प्राप्त करने के बजाय युवाओं को अपनी वास्तविक जिंदगी जीने पर ध्यान देना चाहिए। सोशल मीडिया की आभासी लोकप्रियता की तुलना में वास्तविक जीवन के अनुभव, ज्ञान, अध्ययन और व्यक्तित्व विकास अधिक उपयोगी हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से समय का सदुपयोग करने और अच्छी पुस्तकों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

    ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय, 57,600 ग्राम सचिवालयों में अलग कक्ष
    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश में प्रत्येक ग्राम पंचायत में पुस्तकालय विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं और इनमें एक कक्ष केवल पुस्तकालय के लिए निर्धारित किया गया है। गांव के बच्चे इन पुस्तकालयों में जाकर पढ़ सकें, इसके लिए व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। डिजिटल पुस्तकालयों के निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। पुस्तकालय ज्ञान, विचार और व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी अच्छी पुस्तकों और अध्ययन सामग्री तक पहुंच मिलनी चाहिए। इससे उन्हें अपनी प्रतिभा विकसित करने और भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में भी पुस्तकालयों के विकास का काम व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।

    लखनऊ और गोरखपुर के पुस्तक मेलों का किया उल्लेख
    मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के सहयोग से उत्तर प्रदेश में आयोजित किए जा रहे पुस्तक मेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में पुस्तकों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम ने बताया कि जब पहली बार लखनऊ में पुस्तक मेला आयोजित करने की बात हुई, तब आशंका व्यक्त की गई कि आज के समय में लोग पुस्तकें खरीदेंगे या नहीं। तब मैंने एनबीटी से एक बार पुस्तक मेला आयोजित करके देखने का आग्रह किया। लखनऊ में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और अच्छी संख्या में पुस्तकें खरीदी गईं। इसके बाद मैंने गोरखपुर में भी पुस्तक मेला लगाने का सुझाव दिया। गोरखपुर में तो पुस्तकों की बिक्री और लोगों की भागीदारी और अधिक रही। इससे पता चलता है कि जहां अपेक्षा कम होती है, वहां भी पुस्तकों के प्रति अच्छी रुचि देखने को मिल सकती है, बशर्ते लोगों को उचित मंच और अवसर उपलब्ध कराया जाए। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में भी युवा, विद्यार्थी और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग पहुंचे और अच्छी पुस्तकें खरीदीं।
     
    इस अवसर पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उनकी पत्नी सविता कोविंद, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं बृजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा समेत कई गण्यमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

  • UP Politics: विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल, सपा छोड़ बीजेपी में गए तीन बड़े नेता

    UP Politics: विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल, सपा छोड़ बीजेपी में गए तीन बड़े नेता

     लखनऊ

    अमेठी में अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. तीनों ने स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. मंच से बोलते हुए अभय सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ीने की वजह भी बताई। 

    उन्होंने सपा पर सनातन विरोधी आचरण, भर्तियों में भेदभाव और चापलूसी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए. साथ ही दिल्ली के आंदोलन, नौकरी घोटालों और 2024 के अयोध्या चुनाव पर भी बात रखी। 

    अमेठी में हुए इस कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं के सामने तीनों नेताओं ने पार्टी का दामन थामा. तीनों नेताओं ने एक साथ पार्टी की सदस्यता ली. इस मौके पर स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे. अभय सिंह ने अपना संबोधन भारत माता की जय के नारे के साथ शुरू किया. इसके बाद उन्होंने सपा छोड़ने की वजह बताई। 

    अमेठी में हुआ ज्वॉइनिंग का कार्यक्रम
    बीजेपी ने इस बड़े ज्वॉइनिंग कार्यक्रम के लिए अमेठी को चुना है। इस कार्यक्रम में स्मृति ईरानी और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहीं। इस कार्यक्रम के जरिए बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है। 
    1. राकेश प्रताप सिंह
    (गौरीगंज सीट, अमेठी)
    2.अभय सिंह
    (गोसाईंगंज सीट, अयोध्या)
    3. विनोद चतुर्वेदी 
    (कल्पी सीट, जालौन)

    जानिए राकेश प्रताप सिंह के बारे में
    राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक हैं। 2012 से समाजवादी पार्टी के साथ थे। 2017, 2022 में सपा के टिकट पर विधायक बने। लगातार तीसरी बार 2022 में विधायक बने। फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत की थी। राज्यसभा चुनाव में BJP कैंडिडेट को वोट किया था। जून 2025 में सपा ने निष्कासित कर दिया था। सपा पर तुष्टिकरण और सनातन के अपमान का आरोप लगाते रहे हैं।

    जानिए अभय सिंह के बारे में
    अयोध्या जिले की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह भी समाजवादी पार्टी के चर्चित नेताओं में शामिल रहें। उनका नाम पहले भी पार्टी नेतृत्व से मतभेदों और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहा है। उनके पाला बदलने की स्थिति में अयोध्या क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है। अब अभय सिंह ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है।

    जानिए विनोद चतुर्वेदी के बारे में
    जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी इस चर्चा में शामिल हैं। उनके बीजेपी में जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें पहले से ही लगाई जा रही थी। आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, स्मृति ईरानी के सामने भाजपा में शामिल हो गए हैं।

    सपा पर लगाए गंभीर आरोप
    अभय सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी का आचरण सनातन विरोधी रहा है. उनका आरोप है कि पार्टी में रामचरितमानस को फाड़ने जैसा काम किया गया. उन्होंने दावा किया कि सपा में जब भी किसी भर्ती की बात आई, जानबूझकर एक तरफ के लोगों को ही लिया गया। 

    अभय सिंह के मुताबिक पहले नौकरी उसी को मिलती थी जो चापलूसी करता था. उन्होंने दावा किया कि आज किसी के लिए कोई भेदभाव नहीं है. उन्होंने सपा के दौर और आज के हालात की तुलना करते हुए अपनी बात रखी। 

    राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सपा ने किन लोगों को आगे रखा, इसके मुकाबले भाजपा ने सभी दलों को आगे रखा. दिल्ली में चल रहे आंदोलन को लेकर अभय सिंह ने कहा कि यह आंदोलन विदेशी फंडिंग के लिए चलाया जा रहा है. नौकरी घोटालों पर उन्होंने कहा कि जो घोटाले हुए, उनमें सभी की गिरफ्तारी हो रही है। 

    अभय सिंह ने आरोप लगाया कि 2024 में अयोध्या की भोली भाली जनता को बरगला कर सांसद बनाया गया. उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में अयोध्या की जनता इसका जवाब लाखों वोट से देगी. अभय सिंह ने जय श्री राम के नारे के साथ अपनी बात पूरी की. यह सारी बातें उन्होंने भाजपा में शामिल होने के बाद मंच से कही। 

    तीन बार सपा के टिकट पर विधायक चुने गए राकेश प्रताप सिंह की पार्टी से दूरियां पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ती गईं। स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से रामचरितमानस और अन्य धार्मिक विषयों को लेकर की गई टिप्पणियों के विरोध में राकेश प्रताप सिंह ने एक कथा मंच से अपनी बात रखी थी। इसके बाद सपा नेतृत्व के साथ उनकी तल्खियां बढ़ती गईं।

    वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी गठबंधन की राजनीतिक दिशा से अलग हटकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी के पक्ष में प्रचार किया था। चुनाव से पहले ही उनके परिवार के अन्य सदस्य भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके अलावा राकेश प्रताप सिंह ने गौरीगंज से अयोध्या स्थित राम मंदिर तक पदयात्रा भी निकाली थी। इन घटनाक्रमों के बीच पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था।

    राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे: राकेश सिंह

    राकेश प्रताप सिंह ने कहा है कि वह राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। उनके साथ अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के भी भाजपा में शामिल होने की तैयारी है। इसके अलावा अमेठी जिले के सैकड़ों ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, पूर्व ग्राम प्रधानों और सपा से जुड़े लोगों के भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने का दावा किया जा रहा है। कार्यक्रम में जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिभा शुक्ला, मंत्री दारा सिंह चौहान और भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भोला सिंह समेत कई मंत्री व विधायक मौजूद रहेंगे।

     

  • मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से जिले में आवासीय सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से जिले में आवासीय सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में आवासीय विकास को नई गति, कुनकुरी और जशपुर में बनेंगी दो आधुनिक आवासीय कॉलोनियां

    अटल विहार योजना के तहत 51.48 करोड़ रुपये की लागत से 225 आवासों का होगा निर्माण, आम नागरिकों को मिलेगा किफायती और सुविधायुक्त आशियाना

    मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से जिले में आवासीय सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    कुनकुरी के गिनाबहार में 97 और जशपुर के बालाछापर में 128 आवासों का निर्माण, आधुनिक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगी कॉलोनियां

    अटल विहार योजना अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को मिलेगी विशेष राहत, ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों को 80 हजार और एलआईजी हितग्राहियों को 40 हजार रुपये का अनुदान

    जशपुर के महुआटोली, कडोरा और पत्थलगांव क्षेत्र में भी आवासीय योजनाओं के विस्तार की तैयारी

    रायपुर
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित, सुविधायुक्त और किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री साय के गृह जिले जशपुर को आवासीय विकास के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा अटल विहार योजना के अंतर्गत कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गिनाबहार और जशपुर नगर के ग्राम बालाछापर में लगभग 51 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से दो आधुनिक आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएंगी। इन दोनों परियोजनाओं के माध्यम से कुल 225 आवासों का निर्माण प्रस्तावित है। इन योजनाओं से जिले में सुनियोजित आवासीय विकास को गति मिलने के साथ ही विभिन्न आय वर्गों के परिवारों को अपना घर प्राप्त करने के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष निर्देशों के अनुरूप इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि आवासीय विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि जिला मुख्यालयों, छोटे नगरों और विकासखंड स्तर तक भी आधुनिक एवं व्यवस्थित आवासीय सुविधाओं का विस्तार हो। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं के विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है।

    मुख्यमंत्री साय की पहल से छोटे शहरों तक पहुंच रही आधुनिक आवासीय सुविधाएं

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार को महत्वपूर्ण प्राथमिकता देते हुए सभी 33 जिलों में नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप आवासीय योजनाएं विकसित करने पर जोर दिया है। इसी सोच के अनुरूप जशपुर जिले में अटल विहार योजना के तहत नई आवासीय परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल मकानों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसे सुव्यवस्थित आवासीय परिसर विकसित करना है, जहां नागरिकों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर सड़कें, स्वच्छता, हरियाली और दैनिक जीवन की आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

    जशपुर जिले में इन योजनाओं के क्रियान्वयन से विशेष रूप से मध्यम आय वर्ग, निम्न आय वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लाभ मिलेगा। साथ ही जिले में आवासीय अधोसंरचना के विस्तार से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों, निर्माण क्षेत्र और रोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है।

    आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से आवासीय परियोजनाओं को मिली गति

    आवास एवं पर्यावरण मंत्री तथा जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष निर्देशों पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जिले में आवासीय परियोजनाओं के विस्तार और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चौधरी ने आवासीय योजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता, समयबद्ध निर्माण तथा नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।

    मंत्री चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा ऐसी आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो आम नागरिकों की आर्थिक क्षमता के अनुरूप होने के साथ-साथ आधुनिक शहरी नियोजन और बेहतर जीवन स्तर की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकें। जशपुर और कुनकुरी की प्रस्तावित कॉलोनियां इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन योजनाओं से जिले में व्यवस्थित आवासीय विकास के साथ ही नागरिकों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    कुनकुरी के गिनाबहार में 17.15 करोड़ रुपये से बनेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी

    अटल विहार योजना के अंतर्गत कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गिनाबहार में लगभग 7 एकड़ भूमि पर क्षेत्र की पहली आधुनिक एवं सुव्यवस्थित आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी। इस परियोजना के लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत कुल 97 आवासों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें से 91 आवास आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के परिवारों के लिए निर्धारित हैं।

    इस परियोजना की विशेषता यह है कि राज्य शासन द्वारा आवासीय योजना के लिए मंडल को मात्र एक रुपये प्रति वर्गफुट की दर से भूमि उपलब्ध कराई गई है। इससे किफायती आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। योजना के अंतर्गत पात्र ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों को 80 हजार रुपये तथा एलआईजी हितग्राहियों को 40 हजार रुपये का अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। इससे सीमित आय वाले परिवारों पर आवास प्राप्त करने का आर्थिक बोझ कम होगा।

    कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस परियोजना में सुव्यवस्थित आंतरिक सड़कें, सुरक्षा व्यवस्था, हरित वातावरण, जल निकासी और अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह कॉलोनी कुनकुरी क्षेत्र में सुनियोजित आवासीय विकास का नया केंद्र बन सकेगी।

    जशपुर के बालाछापर में 34.32 करोड़ रुपये से बनेंगे 128 आवास, आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा परिसर

    जशपुर नगर के ग्राम बालाछापर में अटल विहार योजना के अंतर्गत लगभग 7 एकड़ भूमि पर दूसरी बड़ी आवासीय परियोजना विकसित की जाएगी। इसके लिए 34 करोड़ 32 लाख 25 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 128 आवासों के साथ व्यावसायिक दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित है।

    योजना में उच्च आय वर्ग (एचआईजी) के 11, मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के 20, जूनियर एमआईजी के 4, निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के 55 तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के 38 आवास शामिल हैं। इस प्रकार परियोजना में समाज के विभिन्न आर्थिक वर्गों की आवासीय आवश्यकताओं का ध्यान रखा गया है।

    बालाछापर की यह आवासीय कॉलोनी रायगढ़ रोड स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 से मात्र 200 मीटर की दूरी पर विकसित की जाएगी। इसे आधुनिक कवर्ड कैंपस के रूप में तैयार किया जाएगा, जहां बस स्टॉप, सामुदायिक भवन, बॉक्स क्रिकेट, आकर्षक गार्डन, बच्चों के लिए किड्स प्ले एरिया तथा व्यावसायिक दुकानों जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन सुविधाओं से रहवासियों को आवास के साथ ही मनोरंजन, सामाजिक गतिविधियों और दैनिक आवश्यकताओं के लिए बेहतर वातावरण प्राप्त होगा।

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के निर्देशों के अनुरूप मंडल द्वारा प्रदेश में किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवासीय योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंडल का उद्देश्य केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को ऐसा सुव्यवस्थित और सुरक्षित आवासीय वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हों। जशपुर और कुनकुरी में विकसित की जा रही कॉलोनियों में आधुनिक अधोसंरचना, चौड़ी एवं व्यवस्थित सड़कें, स्वच्छ वातावरण, हरित क्षेत्र और आवश्यक नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    सिंह देव ने बताया कि इन परियोजनाओं में विभिन्न आय वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवासों की योजना तैयार की गई है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराना मंडल की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।

    महुआटोली, कडोरा और पत्थलगांव में भी आवासीय योजनाओं के विस्तार की तैयारी

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जशपुर जिले में आवासीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में आगे भी नई परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी है। इसके अंतर्गत जशपुर के महुआटोली, कडोरा तथा पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम मदनपुर में भी आवासीय योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन योजनाओं से जिले के अन्य क्षेत्रों में भी नागरिकों को व्यवस्थित एवं किफायती आवास प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के जशपुर स्थित कार्यपालन अभियंता प्रफुल्ल चौरे ने बताया कि ग्राम मदनपुर, पत्थलगांव की आवासीय योजना में भी बुकिंग जारी है। संबंधित आवासीय योजनाओं के लिए बुकिंग प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हो चुकी है तथा प्रथम चक्र की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

    जशपुर के आवासीय विकास में जुड़ रहा नया अध्याय

     जशपुर जिले में आवासीय विकास को नई दिशा मिल रही है। कुनकुरी और जशपुर में लगभग 14 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाली इन दोनों परियोजनाओं से 225 परिवारों को आधुनिक आवासीय सुविधाओं से युक्त घर प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

    अटल विहार योजना के अंतर्गत इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन जिले में सुव्यवस्थित नगरीय विकास, बेहतर नागरिक सुविधाओं और किफायती आवास की उपलब्धता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे जशपुर जिले में आवासीय अधोसंरचना मजबूत होने के साथ ही आम नागरिकों के अपने घर के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी।

  • OpenAI ऑफिस में जासूसी का चौंकाने वाला मामला, AI की मदद से पकड़ा गया आरोपी; FBI जांच में जुटी

    OpenAI ऑफिस में जासूसी का चौंकाने वाला मामला, AI की मदद से पकड़ा गया आरोपी; FBI जांच में जुटी

    सैन फ्रांसिस्को
    चोरी छिपे रिकॉर्डिंग और जासूसी करने का एक मामला सामने आया है, जहां अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित OpenAI ऑफिस में सऊदी के एक इंजीनियर ने चोरी छिपे रिकॉर्डिंग करने के लिए टॉयलेट पेपर में लपेटकर एक डिवाइस को लगाया. आरोप में एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया है, जो सऊदी का मूल निवासी है। 

    अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस विभाग (DOJ) के मुताबिक, OpenAI में बतौर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले सऊदी मूल निवासी को गिरफ्तार किया है. उनपर आरोप है कि एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूप में चोरी छिपे ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लगा रहे थे। 

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब सेंसटिव AI रिसर्च सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. कंपनियों और सरकारों के बीच टेक्नोलॉजी और एक्सपर्ट को अपनी तरफ खींचने की होड़ मची है. एडवांस्ड AI की मदद से आर्थिक और रणनीतिक तौर पर भी बढ़त हासिल की जा सकती है। 

    30 सितंबर को लगा मिला डिवाइस 
    DOJ के मुताबिक, 30 सितंबर को OpenAI को सैन फ्रांसिस्को बेस्ड इमारत के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूप में टीवी के पीछे USB पोर्ट में लगा हुआ एक डिवाइस मिला था। 

    अंगूठे के आकार का डिवाइस किया था इंस्टॉल 
    FBI को दी गई शिकायत के आधार पर अंगूठे के आ
    कार का यह डिवाइस टॉयलेट पेपर में छिपाया गया था. इसमें एक माइक्रोफोन भी लगा था और कैमरे से कनेक्ट था. रिपोर्ट के मुताबिक, इसको करीब 28 सितंबर को लगाया था। 

    आरोपी के बैग में इस तरह का डिवाइस मिला 
    जांच के दौरान अलफोजान के निजी बैग में इसी तरह का एक कस्टमाइज डिवाइस भी मिला. OpenAI ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया है कि कि डिवाइस को लगाने वाले शख्स की पहचान कर ली गई है. वह सितंबर 2020 से अमेरिका में कानूनी रूप से स्थायी निवासी है। 

    अलफोजान को अगर इस मामले का दोषी पाया जाता है तो उनको 5 साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर (करीब 2.2 करोड़ रुपये) का जुर्माना और 3 साल तक की सजा हो सकती है। 

  • MP News: अब पूरी होगी खजुराहो की प्राचीन विष्णु प्रतिमा, 11वीं सदी की मूर्ति का सिर मिलने से जगी उम्मीद

    MP News: अब पूरी होगी खजुराहो की प्राचीन विष्णु प्रतिमा, 11वीं सदी की मूर्ति का सिर मिलने से जगी उम्मीद

    खजुराहो
    मध्य प्रदेश
    के खजुराहों स्थित जवारी मंदिर में स्थापित 11वीं सदी की भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का गायब सिर ASI को मिल गया है। इस मूर्ति की मरम्मत को लेकर मामला हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। अब ASI एक्सपर्ट्स से जांच करवाने के बाद इसे वापस मूर्ति पर लगाने की योजना बना रहा है।

    काम पूरा करने के लिए तीन साल की डेडलाइन
    ASI के डायरेक्टर जनरल यदुबीर सिंह रावत ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि रिसर्च में देरी रोकने के लिए आर्कियोलॉजिकल खुदाई के काम को तीन साल में पूरा करने की डेडलाइन तय की गई है।

    साथ ही ज्यादातर संरक्षण प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी मिलने का समय घटाकर 15-20 दिन कर दिया गया है। उन्होंने उज्जैन के वैश्य टेकरी में शुरुआती खुदाई की योजना के बारे में भी बताया, जहां एक बौद्ध स्तूप हो सकता है जो सांची के स्तूप से भी बड़ा हो सकता है। हालांकि इसके असली आकार और महत्व का अभी पता लगाया जाना बाकी है।

    सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था मामला
    खजुराहो के जवारी मंदिर में सिर कटी विष्णु की मूर्ति को लेकर विवाद पिछले साल सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जब वकील राकेश दलाल ने सात फीट ऊंची मूर्ति की मरम्मत, उसे बदलने या फिर से बनाने की मांग की थी।

    याचिका खारिज करते हुए तत्कालीन CJI बी.आर.गवई ने कहा था, 'जाओ और देवता से ही कुछ करने को कहो।' हालांकि बाद में गवई ने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया था, लेकिन एक वकील ने कोर्टरूम के अंदर उन पर जूता फेंकने की कोशिश की थी।

    ASI के स्टोर में मिला गायब सिर
    रावत ने बताया कि मूर्ति का गायब सिर ASI के स्टोर में मिला है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स समिट के लिए भोपाल दौरे के दौरान मुझे पता चला कि मूर्ति का सिर मिल गया है उसे हमारे स्टोर में रखा गया था।'

    उन्होंने आगे कहा,'इंचार्ज ने मुझे बताया कि शायद किसी ने इसे चुराने के लिए सिर तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया। हम एक्सपर्ट्स से इसकी जांच करवा रहे हैं और जल्द ही इसे वापस मूर्ति पर लगा देंगे।'

  • छत्तीसगढ़: विजय शर्मा ने मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दरबार में टेका माथा, जनकल्याण की मांगी कामना

    छत्तीसगढ़: विजय शर्मा ने मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दरबार में टेका माथा, जनकल्याण की मांगी कामना

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का किया निरीक्षण, निर्माण कार्यों की ली जानकारी

    रायपुर
    उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने आज नवरात्रि के अवसर पर कबीरधाम जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। उन्होंने कवर्धा स्थित प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर और मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचकर माता रानी का आशीर्वाद लिया। 

         उप मुख्यमंत्री शर्मा ने सर्वप्रथम मां महामाया मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं कबीरधाम जिले की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

    मां विंध्यवासिनी मंदिर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का किया निरीक्षण

         उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। ज्योति कलश भवन के निर्माण से मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिलेगी।

    छिरपानी कॉलोनी के मां दुर्गा पंडाल में किए दर्शन

         उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कवर्धा के छिरपानी कॉलोनी स्थित मां दुर्गा पंडाल पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात भी की।

  • दोस्त की मौत के बाद युवाओं के बीच लोकप्रिय हुआ परविंदर सिंह झोटा, पंजाब में बढ़ी चर्चा

    दोस्त की मौत के बाद युवाओं के बीच लोकप्रिय हुआ परविंदर सिंह झोटा, पंजाब में बढ़ी चर्चा

    मानसा.

    नशे के खिलाफ आवाज उठाने पर जान गंवाने वाले परविंदर सिंह झोटा के जीवन में भी एक ऐसा दौर भी आया था, जब वह खुद नशे की गिरफ्त में फंस गया था, लेकिन एक दोस्त की नशे के कारण हुई मौत ने उसे भीतर तक झकझोर दिया। इस घटना के बाद उसने न सिर्फ नशा छोड़ने का फैसला किया बल्कि नशे के खिलाफ जंग भी छेड़ दी।

    नशे के खिलाफ अभियान के दौरान वह इंटरनेट मीडिया के जरिए अपनी बात रखता था और नशे से जुड़े मामलों को सामने लाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन भी करता था।

    बॉक्सिंग में रहा नेशनल खिलाड़ी
    नशे के कारोबार में शामिल होने का संदेह होने पर लोगों से सीधे सवाल करना और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना उसकी गतिविधियों का हिस्सा बन गया। यही नहीं विभिन्न विवादों और कानूनी मामलों के कारण भी वह चर्चा में रहा। झोटा कभी बॉक्सिंग का नेशनल खिलाड़ी रहा था। उसकी शारीरिक ताकत के कारण लोग उसे "झोटा" कहने लगे और फिर यही नाम उसकी पहचान बन गया। परविंदर सिंह झोटा के खिलाफ नौ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इनमें कुछ मामले विचाराधीन थे, जबकि कुछ में उसे राहत मिली थी। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार,झोटा को गोली मारने वाले केमिस्ट अश्विनी कुमार के खिलाफ अलग-अलग वर्षों में चार एफआइआर दर्ज हुई थीं।

    मां से कहा था रोटी बनाकर रखना, आकर खाऊंगा
    झोटा की मां अमरजीत कौर की आंखों के सामने बार-बार बेटे के घर से निकलते समय कहे गए शब्द घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह कहता था कि कुछ लोग उसे मार देंगे, लेकिन फिर उसने नशे के खिलाफ अपनी आवाज बंद नहीं की। मां ने कहा कि घर से निकलते समय उसने पैर छुए और कहा कि रोटी बनाकर रखना, लौटकर खाना खाएगा।

  • दुर्ग विश्वविद्यालय में आधुनिक शिक्षा पर जोर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा अध्ययन के लिए बनेंगे नए केंद्र

    दुर्ग विश्वविद्यालय में आधुनिक शिक्षा पर जोर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा अध्ययन के लिए बनेंगे नए केंद्र

    दुर्ग.

    हेमचंद यादव विश्वविद्यालय (पूर्व में दुर्ग विश्वविद्यालय) की कार्यपरिषद की 42वीं बैठक कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय ग्रंथालय में हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार से जुड़े कई बड़े निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा अध्ययन, कृषि विज्ञान तथा भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के नए केंद्रों की स्थापना प्रमुख है।

    सत्र 2027-28 से भारतीय एवं विदेशी भाषा केंद्र की स्थापना को मंजूरी मिली। पहले चरण में फ्रेंच, जर्मन, जापानी, छत्तीसगढ़ी, ओड़िया एवं मराठी भाषाएं पढ़ाई जाएगी। आगे रूसी, स्पेनिश, कोरियाई, चीनी, अरबी, तमिल एवं उर्दू जैसी भाषाएँ चरणबद्ध रूप से जोड़ी जाएगी। कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी। पाँच वर्ष की इस परियोजना पर लगभग 35.48 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इसमें से 18.46 करोड़ का अनुदान छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन से मांगा जाएगा। केंद्र में चार प्रयोगशालाएं, जीपीयू कंप्यूट क्लस्टर वाला डेटा सेंटर, स्मार्ट कक्ष और इनक्यूबेशन स्थल बनेंगे। पांच वर्षों में 30,000 विद्यार्थियों और 3,000 शासकीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने तथा 20 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है।

    प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जाएगा। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा एवं सामरिक अध्ययन संस्थान की स्थापना को भी स्वीकृति मिली। इसके लिए 16 नए पदों (7 शैक्षणिक एवं 9 तकनीकी / अशैक्षणिक) के सृजन का प्रस्ताव पारित हुआ। इन पदों पर लगभग 1.91 करोड़ का वार्षिक व्यय आएगा। प्रस्ताव उच्च शिक्षा संचालनालय के माध्यम राज्य शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। बैठक में डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. राजलक्ष्मी सेलेट, डॉ. हंसा शुक्ला, विवेक मिश्रा एवं डॉ. शालिनी गुप्ता सदस्य के रूप में उपस्थित रहे। कुलसचिव डॉ. अनिल पांडे ने आभार व्यक्त किया। अब विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाएगी कृषि सत्र 2027-28 में 40 सीट उपलब्ध इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सहयोग से कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र शुरू करने को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। सत्र 2027-28 से 40 सीटों वाला चार वर्षीय स्नातक (कृषि विज्ञान) कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव है। मधुमक्खी पालन और बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी इसमें शामिल हैं। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच पाँच वर्षीय एमओयू किया जाएगा। विशेष शिक्षा पाठ्यक्रम एवं अन्य निर्णय भारतीय पुनर्वास परिषद को सत्र 2027-28 के लिए दो पाठ्यक्रमों के प्रस्ताव भेजे गए थे, जिनका कार्योत्तर अनुमोदन किया गया। ये पाठ्यक्रम श्रवण बाधिता और बौद्धिक अक्षमता से संबंधित है जिनमें 30-30 सीटें होंगी। पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग
    भारत सरकार की योजना के तहत डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यहां पात्र अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं पीएम केयर्स योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों को यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग एवं पीएसयू परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। एमएससी प्रयोगशालाओं के लिए चार करोड़ रुपए का प्रस्ताव बजट में मंजूर गणित, भौतिकी, रसायन, प्राणी शास्त्र एवं वनस्पति शास्त्र के एमएससी पाठ्यक्रमों के लिए प्रयोगशाला उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके लिए बजट में रखी गई 400 लाख की राशि के प्राक्कलन को मंजूरी दी गई। उपकरणों की खरीदी जेम पोर्टल/ई-प्रोक्योरमेंट से पारदर्शी तरीके से होगी।