Author: NewseDay

  • परविंदर सिंह झोटा की हत्या के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, फरीदकोट में BJP प्रधान को हिरासत में लिया गया

    परविंदर सिंह झोटा की हत्या के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, फरीदकोट में BJP प्रधान को हिरासत में लिया गया

    फरीदकोट/जालंधर.

    मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में बुधवार को भाजपा के आहवान पर राज्य के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किया जा रहा है। जालंधर में जहां एक तरफ पुतला फूंका गया, वहीं फरीदकोट में प्रदर्शन कर रहे जिला प्रधान संदीप सिंह सन्नी बराड़ को हिरासत में लिया गया है।

    गौरतलब है कि कल की घटना के बाद भाजपा ने पूरे राज्य में प्रदर्शन करने का एलान किया था। फरीदकोट में घंटा घर चौक पर भाजपा नेताओं की तरफ से रोष प्रदर्शन किया। इसके बाद जब प्रदर्शनकारी एसएसपी कार्यालय के बाहर धरना देने पहुंचे तो पुलिस ने जिला प्रधान सन्नी बराड़ सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इससे पहले भाजपा जिला अध्यक्ष सन्नी बराड़ के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने फरीदकोट के घंटाघर चौक से मिनी सचिवालय तक रोष मार्च निकाला और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

    प्रदर्शन के उपरांत भाजपा नेताओं ने डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा और एसएसपी गुरबंस सिंह बैंस को ज्ञापन सौंपकर पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति और नशे के कारोबार पर चिंता जताई। भाजपा जिला अध्यक्ष सन्नी बराड़ ने कहा कि मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में गैंगस्टरों और नशा तस्करों के हौसले बुलंद हैं तथा पुलिस प्रशासन इन पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।

    सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी
    भाजपा नेता सन्नी बराड़ ने आरोप लगाया कि मानसा में एक केमिस्ट खुलेआम नशा बेच रहा था। जब परमिंदर सिंह झोटा जैसे नौजवानों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो उनकी गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है।
    डीसी व एसएसपी को ज्ञापन देते भाजपा नेता।

    जिले में भी नशे की समस्या पर ठोस कदम उठाने की जरूरत: बराड़
    उन्होंने दावा किया कि फरीदकोट जिले में भी नशे की समस्या पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सन्नी बराड़ ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब को रंगला पंजाब बनाने का वादा करके सत्ता में आई सरकार के कार्यकाल में राज्य के हालात बिगड़ गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने नशा तस्करों और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

  • स्मार्ट पंजीयन कार्यालय बना दिव्यांग सुमन अग्रवाल के लिए सुविधा का केंद्र, रजिस्ट्री में भी बचाए 25 हजार रुपये

    स्मार्ट पंजीयन कार्यालय बना दिव्यांग सुमन अग्रवाल के लिए सुविधा का केंद्र, रजिस्ट्री में भी बचाए 25 हजार रुपये

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    स्मार्ट पंजीयन कार्यालय बना दिव्यांग सुमन अग्रवाल के लिए सुविधा का केंद्र, रजिस्ट्री में भी बचाए 25 हजार रुपये

    व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा से आसान हुई पंजीयन प्रक्रिया, महिला क्रेता को पंजीयन शुल्क में मिली 50 प्रतिशत की छूट

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पंजीयन सेवाओं का कायाकल्प, वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में नागरिक सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    रायपुर, 
     छत्तीसगढ़ में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और संवेदनशील बनाने की दिशा में किए जा रहे सुधारों से आम नागरिकों को आर्थिक राहत के साथ बेहतर सुविधाएं भी मिल रही हैं। रायगढ़ जिले के सुभाष चौक निवासी दिव्यांग श्रीमती सुमन अग्रवाल का अनुभव इसकी एक मिसाल है। जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं श्रीमती अग्रवाल को स्मार्ट पंजीयन कार्यालय में व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा मिलने से आवागमन में आसानी हुई। वहीं महिला क्रेता के रूप में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें 25 हजार रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत भी हुई। इस तरह शासन की पहल ने उनके लिए संपत्ति का पंजीयन न केवल किफायती बनाया, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक भी बना दिया।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पंजीयन सेवाओं को नागरिक केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पंजीयन प्रक्रिया के सरलीकरण, शुल्क में रियायत और स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों के माध्यम से नागरिकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए पंजीयन विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित किए जा रहे हैं।

    रजिस्ट्री में 25 हजार रुपये की बचत, घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मिलेगी मदद

    सेवा संकल्प अभियान के तहत अपना अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सुमन अग्रवाल ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिला क्रेता के लिए निर्धारित पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का लाभ मिला। इससे उनके 25 हजार रुपये बच गए। उन्होंने बताया कि यह राशि उनके परिवार की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित होगी। संपत्ति के पंजीयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में मिली इस आर्थिक राहत से उन्हें काफी खुशी हुई।

    व्हीलचेयर और रैंप ने आसान बनाया कार्यालय में आवागमन

    श्रीमती सुमन अग्रवाल के लिए आर्थिक राहत के साथ स्मार्ट पंजीयन कार्यालय में उपलब्ध सुविधाएं भी विशेष रूप से मददगार साबित हुईं। दिव्यांग होने के कारण उन्हें कार्यालय में आवागमन के दौरान सहारे की आवश्यकता थी। जिला पंजीयक कार्यालय, रायगढ़ में उपलब्ध व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा से उन्हें बिना अनावश्यक परेशानी के पंजीयन संबंधी प्रक्रिया पूरी करने में सहायता मिली। इन व्यवस्थाओं ने उन्हें सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया और पंजीयन कार्य सुगमता से संपन्न हुआ।

    श्रीमती अग्रवाल का अनुभव दर्शाता है कि शासकीय सेवाओं में संवेदनशीलता और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और विशेष आवश्यकता वाले हितग्राहियों के लिए ऐसी सुविधाएं सरकारी कार्यालयों तक पहुंच को अधिक सहज बनाती हैं।

    स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों से बदल रहा नागरिक सेवाओं का अनुभव

    राज्य सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों में नागरिकों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है। इनमें वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल टोकन प्रणाली, हेल्प डेस्क, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, निःशुल्क वाई-फाई और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही दिव्यांगजनों के लिए रैंप और व्हीलचेयर जैसी व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि सभी नागरिक सम्मानजनक और सुविधाजनक वातावरण में अपनी संपत्ति का पंजीयन करा सकें।

    वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य नागरिकों के समय और धन की बचत के साथ शासकीय सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और सुविधाजनक बनाना है।

    श्रीमती सुमन अग्रवाल की कहानी इस बदलाव का उदाहरण है, जहां एक ओर पंजीयन शुल्क में छूट से 25 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली, वहीं दूसरी ओर व्हीलचेयर और रैंप जैसी सुविधाओं ने उन्हें सहजता से रजिस्ट्री कराने में मदद की। उन्होंने इन जनहितैषी व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • गिरदावरी को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव के आसार, पटवारियों के बाद कृषि कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

    गिरदावरी को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव के आसार, पटवारियों के बाद कृषि कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

    बलौदा बाजार.

    छत्तीसगढ़ में फसल गिरदावरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पटवारी संघ के पीवी एप (फसल भौतिक सत्यापन) के जरिए गिरदावरी का काम करने से इनकार करने और हड़ताल पर जाने के बाद अब कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों ने भी इस काम का विरोध शुरू कर दिया है।

    शासन ने कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को फील्ड में जाकर पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी करने की जिम्मेदारी दी है। इसके विरोध में बलौदाबाजार में कृषि विभाग के कर्मचारियों ने कलेक्टर और उप संचालक कृषि को ज्ञापन सौंपकर उन्हें इस काम से मुक्त रखने की मांग की है। कृषि विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि गिरदावरी राजस्व विभाग से जुड़ा काम है और उन्हें इसका पर्याप्त अनुभव नहीं है। ऐसे में फसल सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड में गलतियां होने की आशंका है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है और उन्हें धान बेचने के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कर्मचारियों ने मांग की है कि गिरदावरी का काम उन लोगों से कराया जाए, जिन्हें राजस्व संबंधी कार्यों का अनुभव है।

    मांग नहीं मानी तो हड़ताल पर जाने की चेतावनी
    छत्तीसगढ़ कृषि अधिकारी शासकीय संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र टंडन ने कहा कि राजस्व पटवारी संघ पीवी एप से गिरदावरी कराने का विरोध कर रहा है और उसके हड़ताल पर जाने के बाद शासन ने यह जिम्मेदारी कृषि विभाग को सौंपने का फैसला लिया है। कृषि विभाग के कर्मचारियों को खेती-किसानी से जुड़े काम का अनुभव है, लेकिन राजस्व संबंधी रिकॉर्ड और गिरदावरी की प्रक्रिया का पर्याप्त अनुभव नहीं है। टंडन के मुताबिक, कर्मचारियों से यह काम कराने पर गलतियां होने की आशंका है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ सकता है और धान खरीदी के दौरान उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि गिरदावरी का काम ऐसे सर्वेयर से कराया जाना चाहिए, जिन्हें इस प्रक्रिया का अनुभव हो। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर कलेक्टर और उप संचालक कृषि को ज्ञापन सौंपा है। यदि शासन की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो कृषि विभाग के कर्मचारी भी हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं।

    एक दिन का अवकाश लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे कर्मचारी
    अपनी मांगों के समर्थन में जिलेभर से कृषि विभाग के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी एक दिन का अवकाश लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने ज्ञापन सौंपकर पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी का काम कराने के फैसले पर विरोध जताया।

    नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की उम्मीद
    गिरदावरी का काम धान खरीदी से जुड़ा होने के कारण इस विवाद का असर किसानों पर पड़ने की आशंका है। नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में पटवारी संघ के विरोध के बाद कृषि विभाग के कर्मचारियों की आपत्ति ने शासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि शासन कृषि कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और गिरदावरी का काम समय पर पूरा कराने के लिए क्या व्यवस्था करता है। किसानों के लिए यह प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी है, ताकि धान बेचने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    धान उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में है छत्तीसगढ़
    छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक और उपार्जन करने वाले राज्यों में शामिल है। खरीफ सीजन के लिए प्रदेश में 27 लाख से अधिक किसान सरकारी पोर्टलों पर पंजीकृत हैं। पिछले खरीफ विपणन सत्र में राज्य सरकार ने 14 नवंबर से धान खरीदी शुरू की थी। इस दौरान प्रदेश के उपार्जन केंद्रों में 25 लाख से अधिक किसानों से समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड 145 लाख टन से ज्यादा धान खरीदा गया था। इस बार भी बड़ी संख्या में पंजीकृत किसानों और धान के रकबे को देखते हुए खरीदी की तैयारी समय पर पूरी करना और उपार्जन केंद्रों को निर्धारित समय पर शुरू करना जरूरी है।

  • UP Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया में तेजी की उम्मीद

    UP Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया में तेजी की उम्मीद

    प्रयागराज
    उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के पद पर बनाए रखने का निर्देश दिया है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के शासनादेश में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके तहत निवर्तमान प्रधान प्रशासक के पद पर बने रहेंगे।

    जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही थी. याचिकाओं में योगी सरकार के 25 मई के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था. इन मामलों में यूपी सरकार, निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है। 

    ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर भी असंतोष
    हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से जुड़ी सभी याचिकाओं को संबद्ध कर दिया था और सभी पर एक साथ सुनवाई हुई. याची दशरथ यादव समेत अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, अनिल कुमार, अकबर अंसारी और हेमचंद्र की ओर से दाखिल याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी। 

    इससे पहले शुक्रवार को हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर असंतोष जताया था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्ट फील्ड में जाकर तैयार नहीं की गई, बल्कि दफ्तर में बैठकर तैयार की गई है। 

    दरअसल, ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने का मामला कोर्ट पहुंचा था। इस मामले में याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है।

  • झोटा हत्याकांड पर CM मान का सख्त रुख, बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे; BJP ने मांगा इस्तीफा

    झोटा हत्याकांड पर CM मान का सख्त रुख, बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे; BJP ने मांगा इस्तीफा

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के मानसा जिले में एक सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा है कि उन्होंने पंजाब पुलिस को इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

    सीएम मान ने आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस घटना के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और अगर इसमें किसी भी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि पंजाब पुलिस इस मामले की तह तक जाएगी और साजिश के पीछे जो भी व्यक्ति होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। 

    इस दौरान उन्होंने दोहराया कि पंजाब में नशा बेचने वालों के लिए 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और सरकार किसी को संरक्षण नहीं देती। 

    बीजेपी की मांग- मामले की सीबीआई जांच हो
    दूसरी तरफ, चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि परमविंदर झोटा के पिता ने जो बयान दिया है, वो बेहद चौंकाने वाला है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि ये सब स्थानीय विधायक की मिलीभगत से हो रहा है। 

    ढिल्लों ने कहा, 'मैंने तुरंत गवर्नर को लिखा. हमने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी जाए। 

    ढिल्लों ने आरोप लगाया कि आज सुबह ही एक पंजाब पुलिसकर्मी को BSF कर्मियों ने 15 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा है, जो एक वीआईपी काफिले में ड्यूटी पर था. उन्होंने कहा कि खुद पंजाब पुलिस के कर्मी ही ड्रग्स के कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं।  

    बीजेपी ने मान से की इस्तीफे की मांग
    कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, लगातार हो रही हत्याओं, गैंगस्टरवाद और ड्रग्स से हो रही मौतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, इसलिए उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने अमृतसर में यस बैंक के मैनेजर की हत्या और मोहाली में मुठभेड़ के दौरान घर के अंदर फायरिंग जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया। 

    इस मामले पर कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा, 'मानसा परविंदर झोटा के पिता की अपील से सहमत होते हुए, मैं सभी पंजाबियों से अपील करता हूं: अगर हम पंजाब के युवाओं और अपने भविष्य को बचाना चाहते हैं, तो हमें जागना होगा और इस सोई हुई सरकार को दरवाजा दिखाना होगा। 

  • युवा कार्टूनिस्ट अपनी रचनात्मकता को दें नई उड़ान, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करें छत्तीसगढ़ का नाम : मुख्यमंत्री

    युवा कार्टूनिस्ट अपनी रचनात्मकता को दें नई उड़ान, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करें छत्तीसगढ़ का नाम : मुख्यमंत्री

    कार्टून समाज को जागरूक करने के साथ सोचने और आत्ममंथन के लिए करता है प्रेरित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    गंभीर विषयों को सहजता से जनमानस तक पहुंचाने की कार्टून में है अद्भुत क्षमता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    युवा कार्टूनिस्ट अपनी रचनात्मकता को दें नई उड़ान, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करें छत्तीसगढ़ का नाम : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री साय कार्टून फेस्टिवल-2026 में हुए शामिल, कार्टून वॉच पत्रिका के 30 वर्ष पूर्ण होने पर दी बधाई

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व एवं सेवा यात्रा पर आधारित कॉफी टेबल बुक का हुआ विमोचन

    प्रख्यात कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से किया गया सम्मानित

    रायपुर
    कार्टून केवल हास्य और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और समाज का सशक्त दर्पण है। यह गंभीर विषयों, सामाजिक परिस्थितियों और विसंगतियों को हास्य एवं व्यंग्य के माध्यम से सहजता से जनमानस तक पहुंचाने वाली प्रभावशाली रचनात्मक विधा है। कई बार जो बात हजारों शब्दों में कहना कठिन होता है, उसे एक प्रभावशाली कार्टून बड़ी सरलता और गहराई के साथ अभिव्यक्त कर देता है। कार्टून समाज को हंसाने के साथ सोचने, समझने और आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में कार्टून वॉच पत्रिका द्वारा आयोजित कार्टून फेस्टिवल-2026 को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कला और साहित्य किसी भी समाज की चेतना के वाहक होते हैं। कार्टून इस दृष्टि से विशिष्ट कला है, जिसमें चित्र, विचार, हास्य और व्यंग्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। एक कार्टूनिस्ट अपने सूक्ष्म अवलोकन और रचनात्मक दृष्टि से सामाजिक घटनाओं को ऐसा स्वरूप देता है, जो लंबे समय तक लोगों की स्मृति में बना रहता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्टून जनभावनाओं, जनअपेक्षाओं और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति देने का भी सशक्त माध्यम है।

    मुख्यमंत्री ने भारतीय कार्टून कला की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए महान कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि आर.के. लक्ष्मण का प्रसिद्ध ‘कॉमन मैन’ केवल एक कार्टून चरित्र नहीं, बल्कि देश के सामान्य नागरिक की आशाओं, अपेक्षाओं, जिज्ञासाओं और चिंताओं की पहचान बन गया। स्वतंत्रता के बाद बदलते भारत और उसकी सामाजिक परिस्थितियों को उन्होंने जिस प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया, वह भारतीय पत्रकारिता और कार्टून कला की अमूल्य विरासत है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्टून कला को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाओं को भी अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने और इस विधा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कार्टून फेस्टिवल-2026 में जयपुर के प्रख्यात कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी कलाकार की दीर्घकालीन साधना और रचनात्मक योगदान का सम्मान पूरी कला विधा का सम्मान है और इससे नई पीढ़ी को उत्कृष्टता की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

    मुख्यमंत्री साय ने युवा कार्टूनिस्टों का आह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी में प्रतिभा, कल्पनाशीलता और तकनीक की अपार संभावनाएं हैं। डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए मंच उपलब्ध कराए हैं। युवा कलाकार अपनी मौलिकता और रचनात्मक दृष्टि को बनाए रखते हुए इन अवसरों का उपयोग करें और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अपनी समृद्ध कला, संस्कृति, साहित्य और रचनात्मक परंपराओं से है। राज्य सरकार इनके संरक्षण एवं संवर्धन के साथ कलाकारों और रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्टून फेस्टिवल जैसे आयोजन स्थापित कलाकारों के अनुभव और युवा प्रतिभाओं की ऊर्जा को एक मंच पर लाकर कला एवं समाज के बीच रचनात्मक संवाद को मजबूत करते हैं।

    कार्यक्रम के दौरान सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व और सेवा यात्रा पर आधारित कार्टून कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कार्टून के माध्यम से किसी व्यक्तित्व और उसकी यात्रा को प्रस्तुत करना अभिव्यक्ति का विशिष्ट और रोचक माध्यम है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्टून वॉच पत्रिका के प्रकाशन के 30 वर्ष पूर्ण होने और 31वें वर्ष में प्रवेश करने पर पत्रिका के संपादक त्र्यंबक शर्मा सहित पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि तीन दशकों तक कार्टून जैसी विशिष्ट रचनात्मक विधा को समर्पित पत्रिका का निरंतर प्रकाशन उल्लेखनीय उपलब्धि है। कार्टून वॉच ने इस कला के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ देशभर के स्थापित और नवोदित कार्टूनिस्टों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराया है।

    लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कार्टून के माध्यम से समाज के गंभीर और संवेदनशील विषयों को व्यंग्य के जरिए सहज एवं सरल रूप में रेखांकित किया जा सकता है। उन्होंने कार्टून कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए त्र्यंबक शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए कार्टून वॉच पत्रिका के 30 वर्ष पूर्ण होने पर पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री साय ने कार्टून फेस्टिवल-2026 के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, सहयोगियों, कार्टूनिस्टों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ समाज में सकारात्मक और विचारशील संवाद को और समृद्ध करेंगे।

    कार्यक्रम में कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा, हिमांशु द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ पत्रकार, देश के विभिन्न हिस्सों से आए कार्टूनिस्ट, कलाकार तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • महंगाई ने बढ़ाई चिंता! सितंबर में WPI Inflation में भारी उछाल, जानें आम आदमी और बाजार पर क्या होगा असर

    महंगाई ने बढ़ाई चिंता! सितंबर में WPI Inflation में भारी उछाल, जानें आम आदमी और बाजार पर क्या होगा असर

    नई दिल्ली

    त्योहारों और कारोबारी गतिविधियों के बीच आम जनता और उद्योग जगत के लिए एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर उछलकर दोहरे अंक में 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अगस्त 2026 में यह दर 9.92 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सभी वस्तुओं के लिए ऑल इंडिया होलसेल प्राइस इंडेक्स अगस्त के 110.8 से बढ़कर सितंबर में 112.5 हो गया है। थोक कीमतों में आई यह अचानक तेजी मुख्य रूप से खनिज तेल, खाद्य वस्तुओं, कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस, कोयले, बुनियादी धातुओं और रसायनों के महंगे होने की वजह से देखी गई है।देश में थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI पर आधारित महंगाई दर सितंबर महीने में बढ़कर 11.39% पर पहुंच गई है, जो कि इससे पिछले महीने यानी अगस्त में 9.92% थी. थोक महंगाई में हुई इस तेज बढ़ोतरी से साफ है कि आने वाले दिनों में उत्पादन और विनिर्माण लागत बढ़ने का असर आम जनजीवन और खुदरा बाजारों पर भी पड़ सकता है। 

    महंगाई में इस बढ़ोतरी के पीछे खाद्य पदार्थों, ईंधन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी वस्तुओं की बढ़ती कीमतें प्रमुख वजह रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सितंबर में किन चीजों की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई और इसके पीछे क्या वजहें हैं। 

    सितंबर में कितनी बढ़ी थोक महंगाई?

        सितंबर में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39% पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.92% थी.
        खाद्य पदार्थों की महंगाई दर अगस्त के 7.05% से बढ़कर सितंबर में 8.66% हो गई.
        मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी वस्तुओं की महंगाई दर 8.37% से बढ़कर 9.76% पर पहुंच गई.
        ईंधन और बिजली की महंगाई दर में भी काफी तेजी आई है. अगस्त में यह 22.93% थी, जो सितंबर में बढ़कर 25.85% हो गई.

    किन चीजों की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई?
    थोक महंगाई में तेजी के पीछे कई तरह की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें जिम्मेदार हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, सितंबर में महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में कुछ खास चीजें शामिल रहींहैं। 

        मिनरल ऑयल और पेट्रोलियम उत्पाद
        खाद्य पदार्थ
        कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
        कोयला और लिग्नाइट
        बुनियादी धातुएं और उनसे बनने वाले उत्पाद
        रसायन और रासायनिक उत्पाद
        कपड़ा, रबर और प्लास्टिक उत्पाद
        बिजली के उपकरण

    पश्चिम एशिया में युद्ध का महंगाई पर क्या असर पड़ा?
    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी महंगाई पर देखने को मिल रहा है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई रुकावटों से इनकी आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ा है. भारत कच्चे तेल के आयात के लिए इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में जब कच्चे तेल और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं, तो परिवहन, उत्पादन और खेती की लागत पर भी असर पड़ता है। 

    थोक महंगाई में उछाल की सबसे बड़ी वजह क्या है?

    सितंबर महीने में थोक महंगाई को बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान ईंधन और बिजली श्रेणी का रहा है।

        ईंधन एवं बिजली क्षेत्र: इस सेगमेंट में सालाना महंगाई दर अगस्त के 22.93 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 25.85 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इसका इंडेक्स भी 108.3 से चढ़कर 110.5 हो गया।
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        निर्मित उत्पाद: मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई और यह अगस्त के 8.37 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 9.76 प्रतिशत हो गई, जबकि इसका सूचकांक 108.8 से बढ़कर 110.2 पर दर्ज किया गया।
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        प्राथमिक वस्तुएं: प्राइमरी आर्टिकल्स श्रेणी में महंगाई दर 7.76 प्रतिशत से बढ़कर 8.67 प्रतिशत हो गई और इंडेक्स 118.1 से बढ़कर 120.3 हो गया।

    थाली का बजट क्यों बिगड़ रहा है और फूड इंडेक्स का क्या हाल है?

    आम उपभोक्ताओं के रसोई बजट से जुड़ा डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स, जिसकी कुल सूचकांक में 24.99 प्रतिशत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, सितंबर में बढ़कर 8.66 प्रतिशत हो गया। अगस्त 2026 में यह 7.05 प्रतिशत पर था। मंत्रालय के अनुसार, इस फूड इंडेक्स में प्राइमरी आर्टिकल्स ग्रुप के तहत आने वाले 'फूड आर्टिकल्स' और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स के तहत आने वाले 'फूड प्रोडक्ट्स का निर्माण' दोनों शामिल हैं।
    विभिन्न क्षेत्रों और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) पर क्या प्रभाव पड़ा है?

    थोक कीमतों के साथ-साथ ऑल इंडिया आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) भी अगस्त के 110.8 से बढ़कर सितंबर में 112.5 पर पहुंच गया है। अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति इस प्रकार है:

        खनन एवं उत्खनन: माइनिंग का आउटपुट पीपीआई सितंबर में उछलकर 129.2 हो गया, जो अगस्त में 122.0 था।

        कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन: इसका इंडेक्स 116.5 से बढ़कर 118.7 पर आ गया।

        बिजली क्षेत्र: बिजली का सूचकांक अगस्त के 90.9 से बढ़कर सितंबर में 92.0 दर्ज किया गया।

        निर्मित उत्पाद: मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का पीपीआई भी 109.7 से बढ़कर 111.0 हो गया।

    आंकड़ों का संशोधन और जुलाई महीने की क्या स्थिति रही?

    वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले महीनों के आंकड़ों की स्थिति भी साफ की है। जुलाई 2026 का अंतिम डब्ल्यूपीआई इंडेक्स 110.0 पर अपरिवर्तित रहा, जिसके चलते जुलाई की अंतिम थोक महंगाई दर 9.78 प्रतिशत तय हुई। जुलाई का अंतिम इंडेक्स 2022-23 बेस ईयर के आधार पर 98.97 प्रतिशत की वेटेड रिस्पॉन्स रेट के साथ तैयार किया गया था। वहीं, सितंबर 2026 का प्रोविजनल इंडेक्स 83.4 प्रतिशत की वेटेड रिस्पॉन्स रेट पर आधारित है।

    डब्ल्यूपीआई के आंकड़े क्या संकेत दे रहे?

    ईंधन और बुनियादी कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योगों की विनिर्माण लागत बढ़ी है। थोक स्तर पर कीमतों में यह दोहरे अंक की वृद्धि (11.39%) यह दर्शाती है कि आने वाले समय में खुदरा बाजारों पर भी इसका दबाव देखने को मिल सकता है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

    खुदरा महंगाई में भी दर्ज हुई बढ़ोतरी
    थोक महंगाई के साथ खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई, जो पिछले 23 महीनों का उच्चतम स्तर है. हालांकि, अगस्त में यह दर 4.83% तक दर्ज की गई थी. इसकी खास वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बताया जा रहा है. ऐसे में थोक महंगाई और खुदरा महंगाई में एक साथ बढ़ोतरी से आम लोगों की घरेलू बजट बिगाड़ सकती है।  

  • दुर्घटना के बाद राहत कार्य में देरी पर एनएचएआई ने एजेंसी पर लगाई 10 लाख की पेनाल्टी

    दुर्घटना के बाद राहत कार्य में देरी पर एनएचएआई ने एजेंसी पर लगाई 10 लाख की पेनाल्टी

    दुर्घटना के बाद राहत कार्य में देरी पर एनएचएआई ने एजेंसी पर लगाई 10 लाख की पेनाल्टी

    रायपुर
     राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के कटघोरा-अंबिकापुर खंड में दुर्घटना प्रबंधन में लापरवाही पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएच एआई) ने संबंधित एजेंसी मेसर्स रविंद्र सिंह पर 10 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। विगत 12 अक्टूबर को सुबह करीब 3 बजे चोटिया टोल प्लाजा के पास दो ट्रक-ट्रेलरों की भिड़ंत हुई थी। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने में देरी के कारण मार्ग बाधित रहा।

    जांच में सामने आया कि घटना के दौरान एजेंसी का परियोजना प्रबंधक मौके पर मौजूद नहीं था। क्रेन ऑपरेटर की अनुपलब्धता और रिकवरी उपकरणों के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं होने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। 1033 हेल्पलाइन पर बार-बार सूचना देने के बावजूद समय पर आवश्यक सहायता नहीं मिल सकी।
    एनएचएआई ने इसे घटना प्रबंधन और हाईवे पेट्रोलिंग के निर्धारित मानकों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित एजेंसी पर 10 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है।

  • छत्तीसगढ़ में आपदा पीड़ितों को आर्थिक संबल, साय सरकार जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा रही सहायता

    छत्तीसगढ़ में आपदा पीड़ितों को आर्थिक संबल, साय सरकार जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा रही सहायता

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संवेदनशील राहत व्यवस्था, दुर्घटना प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल

    जशपुर जिले में 16 मृतकों के निकटतम वारिसों के लिए 64 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत

    प्रत्येक प्रभावित परिवार को मिलेगी 4 लाख रुपये की सहायता, कठिन समय में परिजनों को राहत देने की पहल

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने और उन्हें आर्थिक संबल देने की इसी पहल के तहत जशपुर जिले में विभिन्न दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 16 व्यक्तियों के निकटतम वारिसों के लिए कुल 64 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। प्रत्येक प्रकरण में मृतक के निकटतम वारिस को 4 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि दुर्घटनाओं एवं आपदाओं के कारण अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों को शासन के प्रावधानों के अनुरूप समय पर सहायता मिल सके। किसी परिवार के सदस्य की असामयिक मृत्यु से उत्पन्न दुख और क्षति की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता प्रभावित परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने और जीवन को पुनः व्यवस्थित करने में सहायक होती है।

    कलेक्टर कार्यालय जशपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के अंतर्गत 16 प्रकरणों में सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इन प्रकरणों में कुएं, तालाब, नदी, बांध एवं अन्य जलस्रोतों में डूबने से हुई मृत्यु के मामले शामिल हैं। शासन के निर्धारित प्रावधानों के तहत पात्र निकटतम वारिसों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    जिले के विभिन्न विकासखंडों के 16 प्रभावित परिवारों को मिलेगी सहायता

    जारी आदेश के अनुसार कुनकुरी तहसील के ग्राम बेमताटोली में मनीषा बाई की कुएं में गिरकर डूबने से मृत्यु के प्रकरण में ललकू राम के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार जशपुर तहसील के ग्राम बाहमनपुर में बीकांत तिर्की की तालाब में डूबने से मृत्यु के मामले में बरनाबास तिर्की के आवेदन पर 4 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। फरसाबहार तहसील के ग्राम सिंगिबहार में सरस्वती बाई की तालाब में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में अनूप राम के आवेदन पर भी 4 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।

    मनोरा तहसील के ग्राम पटिया (अंगराकटोना) में लच्छू राम की बांध के पानी में डूबने से मृत्यु के मामले में मधुरा राम के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा ग्राम रेमने में बलदेव राम की ईब नदी में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती जगमाईत बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार तपकरा तहसील के ग्राम साजबहार (कंडरापानी) में शबनम तिग्गा की तालाब में डूबने से मृत्यु के मामले में संतोष तिग्गा के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा मनोरा तहसील के ग्राम लिटिम में मोनिका एक्का की कुएं में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में ओंकार एक्का के आवेदन पर 4 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है।

    फरसाबहार तहसील के ग्राम कोनपारा में नरेन्द्र डनसेना की डेम के पानी में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में राम प्रसाद डनसेना के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पत्थलगांव तहसील के ग्राम गोडीकला में विनोद महंत की कुएं में डूबने से मृत्यु के मामले में श्रीमती देवकुंवर के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा फरसाबहार तहसील के ग्राम गारीघाट (किनकेला टोला) में सागरमती बाई की कुएं में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में जयपाल साय के आवेदन पर 4 लाख रुपये की सहायता मंजूर की गई है।

    इसी प्रकार मनोरा तहसील के ग्राम डड़गांव में सफदर अंसारी की लावा नदी में डूबने से मृत्यु के मामले में श्रीमती चमन खातून के आवेदन पर 4 लाख रुपये, ग्राम गुल्लू में मनोज खलखो की नदी में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती अनिता खलखो के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा फरसाबहार तहसील के ग्राम भालूमुंडा में शिवानी शाह की नदी में डूबने से मृत्यु के मामले में शीतल शाह के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

    मनोरा तहसील के ग्राम गेधा में पटला राम की तालाब में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती बिहनी बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये, फरसाबहार तहसील के ग्राम कुंहारबहार में अमीन राम की कुएं में डूबने से मृत्यु के मामले में श्रीमती फूलमेत बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा ग्राम माटीपहाड़छर्री में संकुंद्रो साय की कुएं में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती पदना बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

    प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना शासन की प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आपदा एवं दुर्घटना प्रभावित परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप राहत प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से पात्र प्रकरणों में आर्थिक सहायता स्वीकृत कर प्रभावित परिवारों को संबल प्रदान किया जा रहा है।

    जशपुर जिले में 16 प्रकरणों में 64 लाख रुपये की सहायता राशि की स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहायता से दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों से उबरने में मदद मिलेगी।

  • बिलासपुर में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर कार्रवाई, विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद CGRERA ने लिया बड़ा फैसला

    बिलासपुर में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर कार्रवाई, विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद CGRERA ने लिया बड़ा फैसला

    विकास अनुज्ञा निरस्त होने पर CGRERA की बड़ी कार्रवाई, बिलासपुर की 'सौराष्ट्र' रियल एस्टेट परियोजना का रेरा पंजीयन निरस्त

    स्वीकृत विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद प्राधिकरण ने स्वतः संज्ञान लेकर की कार्रवाई

    रेरा ने आम नागरिकों और निवेशकों से की अपील, संपत्ति खरीदने से पहले परियोजना के पंजीयन और विकास अनुमति की स्थिति अवश्य जांचें

    रायपुर, 
    छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, नियमों का पालन और घर एवं भूखंड खरीदारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने बिलासपुर जिले में स्थित रियल एस्टेट परियोजना 'सौराष्ट्र' की स्वीकृत विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद परियोजना का रेरा पंजीयन भी निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई प्राधिकरण द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर की गई है।

    प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रमोटर श्री नमन गोयल द्वारा विकसित की जा रही 'सौराष्ट्र' परियोजना बिलासपुर जिले के अग्रय नगर, वार्ड क्रमांक 12, खसरा नंबर 1551 में स्थित है। यह परियोजना CGRERA में पंजीयन क्रमांक PCGRERA161025001981 के अंतर्गत पंजीकृत थी।

    परियोजना को संचालनालय, नगर तथा ग्राम निवेश, छत्तीसगढ़ द्वारा छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के अंतर्गत विकास अनुज्ञा प्रदान की गई थी। संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा परियोजना की स्वीकृत विकास अनुमति निरस्त किए जाने के बाद CGRERA ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की।

    प्रकरण की समीक्षा के उपरांत प्राधिकरण ने 05 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा विकास अनुज्ञा निरस्त किए जाने के कारण परियोजना का रेरा पंजीयन जारी रखना उचित नहीं है। इसी आधार पर प्राधिकरण ने 'सौराष्ट्र' परियोजना का पंजीयन निरस्त करने का निर्णय लिया।

    CGRERA की यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के संचालन में वैधानिक अनुमतियों और निर्धारित नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। परियोजनाओं के पंजीयन के साथ-साथ उनकी विकास अनुमतियों की वैधता भी महत्वपूर्ण है। प्राधिकरण द्वारा इस प्रकार के मामलों में कार्रवाई से रियल एस्टेट क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयासों को मजबूती मिल रही है।

    भूखंड या मकान खरीदने से पहले रेरा पंजीयन और विकास अनुमति की जांच जरूरी

    छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने आम नागरिकों, भूखंड खरीदारों एवं संभावित निवेशकों से अपील की है कि किसी भी रियल एस्टेट परियोजना में निवेश करने अथवा भूखंड, मकान या फ्लैट खरीदने से पहले संबंधित परियोजना के रेरा पंजीयन की वर्तमान स्थिति, स्वीकृत विकास अनुमति तथा अन्य आवश्यक अनुमतियों की जांच अवश्य करें।

    प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व में पंजीकृत परियोजनाओं के संबंध में भी उनकी वर्तमान पंजीयन स्थिति का सत्यापन करना आवश्यक है, ताकि नागरिक किसी प्रकार की अनियमितता या संभावित आर्थिक जोखिम से बच सकें।

    नागरिक रेरा पंजीकृत परियोजनाओं की जानकारी एवं पंजीयन की वर्तमान स्थिति का सत्यापन CGRERA की आधिकारिक वेबसाइट https://rera.cgstate.gov.in/ के माध्यम से कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए प्राधिकरण के दूरभाष क्रमांक 0771-4918927 पर भी संपर्क किया जा सकता है।