Author: NewseDay

  • योगी सरकार बाढ़ प्रभावितों को राहत पहुंचाने और जनजीवन सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयासरत

    योगी सरकार बाढ़ प्रभावितों को राहत पहुंचाने और जनजीवन सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयासरत

    बाढ़ प्रभावित गांवों में नगर विकास मंत्री ने किया निरीक्षण, संवाद कर सुनी समस्याएं, राहत सामग्री वितरित की

    लखनऊ
    योगी सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य बनाने और लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने लखनऊ के मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सैंथा और आसपास के गांवों के बाढ़ प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों, साफ-सफाई और प्रभावित नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    बाढ़ के बाद बीमारियों की रोकथाम पर योगी सरकार का जोर
    मंत्री एके शर्मा ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद मक्खी-मच्छरों के प्रकोप और प्रदूषित जल एवं वायु से आमजन तथा पशुओं में बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, दवा छिड़काव और जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ड्रोन तकनीक से किए जा रहे दवा छिड़काव का निरीक्षण किया और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी जरूरत के अनुसार इस तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।

    राहत शिविरों और स्वास्थ्य सुविधाओं का लिया जायजा
    नगर विकास मंत्री ने बाढ़ राहत शिविर और राहत चिकित्सा शिविर का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने पानी उतर चुके क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था का जायजा लेते हुए सफाईकर्मियों का उत्साहवर्धन किया। साथ ही नगर निगम के अधिकारियों, सफाईकर्मियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों को आपसी समन्वय से स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित इलाकों में संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।

    प्रभावित परिवारों से संवाद, राहत सामग्री वितरित
    निरीक्षण के दौरान नगर विकास मंत्री ने बाढ़ प्रभावित नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रभावित परिवार तक राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाएं पहुंचाई जाएं। प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार और प्रशासन जनता के साथ खड़े हैं। बाढ़ प्रभावितों को राहत पहुंचाना और जनजीवन सामान्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है। राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त गौरव कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

  • विष्णु के सुशासन में अवैध खनिज परिवहन पर सख्ती, रेत से भरे 6 ट्रैक्टर जब्त

    विष्णु के सुशासन में अवैध खनिज परिवहन पर सख्ती, रेत से भरे 6 ट्रैक्टर जब्त

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में खनिज संपदा के संरक्षण, अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण तथा शासकीय राजस्व की सुरक्षा के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है। सुशासन की इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए गए 6 ट्रैक्टरों को जब्त किया है।

    खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र में चीचगोहना पुल के नीचे अवैध रूप से रेत परिवहन करते 2 ट्रैक्टर तथा मरिहीघाट क्षेत्र से रेत से भरे 3 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं। जब्त पांचों ट्रैक्टरों को सुरक्षार्थ मरवाही थाने में रखा गया है। इसी प्रकार गौरेला क्षेत्र के पिपरिया में अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए गए एक ट्रैक्टर को जब्त कर गौरेला थाने में सुरक्षित रखा गया है।

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के सुशासन में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खनिज संपदा के नियमानुसार उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी के तहत जिला प्रशासन एवं खनिज विभाग द्वारा खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए निगरानी एवं जांच की कार्रवाई की जा रही है। खनिजों के अवैध कारोबार से होने वाली राजस्व हानि को रोकने के साथ ही पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब्त किए गए सभी वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान और खनिज अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। संबंधित प्रकरणों में निर्धारित अर्थदंड अथवा समझौता राशि खनिज मद में जमा कराए जाने के उपरांत ही नियमानुसार वाहनों को मुक्त किया जाएगा।

    राज्य शासन की मंशा के अनुरूप खनिज संपदा के अवैध दोहन पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी रखी जा रही है। खनिज विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण में संलिप्त पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खनिज राजस्व की सुरक्षा तथा खनन गतिविधियों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जांच एवं प्रवर्तन की कार्रवाई निरंतर की जाएगी।

  • 25 जनवरी से शुरू होगी जनगणना, 10 जनवरी से ऑनलाइन सेल्फ-एंट्री का मिलेगा मौका

    25 जनवरी से शुरू होगी जनगणना, 10 जनवरी से ऑनलाइन सेल्फ-एंट्री का मिलेगा मौका

    इंदौर

    आगामी वर्ष होने वाली जनगणना के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। संभावित कार्यक्रम के अनुसार 25 जनवरी से 28 फरवरी तक 35 दिन में आबादी की गणना की जाएगी। इससे पहले 10 से 24 जनवरी तक आमजन को आनलाइन स्वयं गणना की सुविधा मिलेगी। हालांकि जनगणना की तारीखों को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी होना बाकी है, लेकिन विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। गणना पूरी होने के बाद एक से पांच मार्च तक सुधार अभियान चलाया जाएगा।

    जनगणना में स्वयं गणना की सुविधा आमजन के लिए उपलब्ध होगी। जनगणना के पहले 15 दिनों में लोग मोबाइल के माध्यम से आनलाइन अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। आनलाइन प्रक्रिया पूरी होने पर एक नंबर जनरेट होगा। बाद में जब प्रगणक घर पहुंचेंगे, तो परिवार को यह नंबर बताना होगा। प्रगणक जानकारी का सत्यापन कर गणना की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इससे परिवारों की जानकारी दर्ज करने और सत्यापन का काम व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

  • Toyota Glanza Facelift: नई डिजाइन और शानदार फीचर्स के साथ आई ग्लांजा, खरीदने से पहले जानें क्या है खास

    Toyota Glanza Facelift: नई डिजाइन और शानदार फीचर्स के साथ आई ग्लांजा, खरीदने से पहले जानें क्या है खास

    मुंबई 
    Toyota Glanza Facelift Launch: नवरात्रि के साथ ही देश में फेस्टीव सीजन की शुरुआत हो चुकी है. इस दौरान कार कंपनियां भी लगातार नए मॉडलों को बाजार में उतारने में व्यस्त हैं. इस बीच जापानी कार निर्माता टोयोटा ने आज भारतीय बाजार में अपनी सबसे सस्ती कार टोयोटा ग्लांजा के नए फेसलिफ्ट मॉडल को लॉन्च किया है. आकर्षक लुक और दमदार इंजन से लैस इस हैचबैक की शुरुआती कीमत 6.99 लाख रुपये तय की गई है जो टॉप मॉडल के लिए 10.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है। 

    नई टोयोटा ग्लांजा अब कुल 5 वेरिएंट में आएगी. इसमें ई, एस, जी, वी और वी (ऑप्शनल) शामिल हैं. ख़ास बात ये है कि, कंपनी ने पहली बार टोयोटा ग्लांजा में एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) को शामिल किया है. जो कि केवल हायर V (O) ग्रेड में मिलेगा. इस कार को कुल 7 कलर ऑप्शन में पेश किया गया है, जिसमें बिल्कुल नए ब्लूइश ब्लैक और डिजिटल टील कलर शामिल है। 

    कैसा है डिजाइन 

    Toyota Glanza के लुक और डिजाइन में भी कंपनी ने बदलाव किया है. इस कार को बिल्कुल नया फ्रंट फेस, नया ग्रिल और नए डिजाइन के अलॉय व्हील दिए गए हैं. कार में रडार मॉड्यूल भी दिया गया है, जो ADAS यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम से जुड़े फीचर्स को सपोर्ट करता है. हालांकि, कंपनी ने हेडलाइट्स के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन LED फॉग लैंप्स को नया डिजाइन दिया गया है।  

    कार के फ्रंट में मिलने वाले टोयोटा लोगो की जगह भी बदली गई है. अब इसे बोनट के नीचे मौजूद प्लास्टिक ट्रिम पर लगाया गया है. इसके अलावा, नई Glanza में शार्क-फिन एंटीना दिया गया है. Glanza के साइड प्रोफाइल में पहले जैसा ही डिजाइन देखने को मिलता है. इसमें 16-इंच के अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। 

    क्रोम डोर हैंडल और खिड़कियों के चारों ओर मिलने वाली क्रोम लाइन को भी बरकरार रखा गया है. यानी कार के साइड लुक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. पीछे की तरफ भी डिजाइन पहले जैसा ही है. इसमें रैपअराउंड LED टेललाइट्स, छत पर लगा स्पॉइलर और रियर वाइपर के साथ वॉशर मिलता है। 

    इंजन और परफॉर्मेंस
    Toyota Glanza का सबसे बड़ा
    बदलाव इसका नया Z12E 1.2-लीटर, 3-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन है. यह इंजन पेट्रोल और CNG, दोनों फ्यूल ऑप्शन पर चलता है. पेट्रोल मोड में यह इंजन 83hp की पावर और 112Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इसके साथ 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) के विकल्प मिलते हैं। 

    पुराने मॉडल में 4-सिलेंडर इंजन दिया जाता था. इसकी तुलना में नए इंजन का पावर आउटपुट 7hp कम है, जबकि टॉर्क में 1Nm की कमी आई है. इसके बावजूद नए मॉडल में माइलेज को थोड़ा बेहतर बनाया गया है. पेट्रोल इंजन के साथ आइडल स्टार्ट-स्टॉप फीचर भी दिया गया है, जो गाड़ी के कुछ समय तक खड़े रहने पर इंजन को बंद करके फ्यूल की खपत कम करने में मदद करता है। 

    इसके अलाव कंपनी ने ऑटोमेटिक वेरिएंट के लिए इंटेलिजेंट गियर शिफ्ट (IGS) सिस्टम को शामिल किया है, जो ऑटोमेटिक वेरिएंट की ड्राइविंग को स्मूथ बनाने में मदद करता है. नया इंजन CNG मोड में 70hp की पावर और 102Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इस विकल्प में भी 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड AMT ट्रांसमिशन दिए गए हैं. पुराने इंजन के मुकाबले CNG मोड में पावर 7hp कम हो गई है, लेकिन टॉर्क 4.5Nm बढ़ा है। 

    कैसा है कार का केबिन
    केबिन फीचर्स की बात करें तो इसमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट, टोयोटा आई कनेक्ट, हेड-अप-डिस्प्ले (HUD) और 360 डिग्री कैमरा भी दिया गया है. कंपनी ने इसमें नई लेदरेट सीट अपहोल्स्ट्री दी है, जिससे कार का इंटीरियर पहले से ज्यादा प्रीमियम महसूस हो सकता है. इसके अलावा, अब फ्रंट सीट वेंटिलेशन का फीचर भी दिया गया है, जो गर्म मौसम में सफर को ज्यादा आरामदायक बनाने में मदद करेगा। 

    नई Glanza में वायरलेस फोन चार्जर भी दिया गया है. खास बात यह है कि इसके नीचे कूलिंग वेंट मिलता है, जो चार्जिंग के दौरान फोन को ठंडा रखने में मदद कर सकता है. म्यूजिक के शौकीनों के लिए कार में Clarion का 4-स्पीकर और 2-ट्वीटर वाला साउंड सिस्टम दिया गया है. इसके अलावा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) और लेवल-2 ADAS फीचर्स भी शामिल किए गए हैं। 

    पिछले मॉडल की तरह 9-इंच टचस्क्रीन और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल दिया जा रहा है. इसके अलावा ड्राइवर के लिए मोनोक्रोम हेड-अप डिस्प्ले दिया गया है, जबकि इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में एनालॉग डायल्स के साथ कलर मल्टी-इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले (MID) मिलता है. कार में ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और पीछे बैठने वाले पैसेंजर्स के लिए AC वेंट्स भी दिए गए हैं। 

    मिलते हैं ये धांसू सेफ्टी फीचर्स
    सेफ्टी की बात करें तो कंपनी ने इसमें 6 एयरबैग को बतौर स्टैंडर्ड दिया है. जो कार के सभी वेरिएंट में उपलब्ध होगा. इसके अलावा टॉप वेरिएंट में एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), टेक बॉडी स्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकफोर्स डिस्ट्रीब्यूशन (EBD) के साथ एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल (VSC), थ्री-प्वाइंटेड ELR सीट बेल्ट और इमरजेंसी स्टॉप सिग्नल्स जैसे फीचर्स दिए गए हैं। 

    लेवल-2 एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) पैकेज में कंपनी ने एडॉप्टिव क्रूज कंट्रोल, ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट और हाई-बीम असिस्ट जैसे फीचर्स को शामिल किया है. जो कि इस कार की ड्राइविंग को सेफ बनाने में मदद करते हैं। 

  • तानों को ताकत बनाकर अपने मुकाम पर पहुंचीं आशा राजबाला

    तानों को ताकत बनाकर अपने मुकाम पर पहुंचीं आशा राजबाला

    नवरात्रि विशेष-5: स्वास्थ्य की शक्ति

    मुझसे मिलिए, मैं हूं आपके स्वास्थ्य की पहरेदार

    26 जनवरी 2025 को दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान

    बढ़े मानदेय और प्रोत्साहन राशि से मिली आर्थिक मजबूती

    अलीगढ़
    नवरात्र में जब पूरा देश शक्ति स्वरूपा देवी के नौ रूपों की आराधना करता है, तब समाज में ऐसी कई ‘जीवित शक्तियां’ भी हैं जो बिना किसी शोर-शराबे के लोगों का जीवन संवार रही हैं। अलीगढ़ की आशा कार्यकर्ता राजबाला देवी ऐसी ही एक शक्ति हैं। कभी घर-घर जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करने पर ताने सुनने वालीं राजबाला आज हजारों महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी बन चुकी हैं। राजबाला ने मुश्किल परिस्थितियों और लोगों की बातों को पीछे छोड़कर अपने काम से ऐसी पहचान बनाई कि आज वही लोग उन्हें सम्मान की नजर से देखते हैं, जो कभी उनके काम पर सवाल उठाते थे।

    राजबाला बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2006 में आशा कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया था। उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका और स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर जागरूकता कम थी। ऐसे में घर-घर जाकर महिलाओं को योजनाओं की जानकारी देने पर कई बार ताने सुनने पड़ते थे। परिवार का सहयोग भी कम था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। नवरात्र के नौ दिनों की तरह उनकी साधना भी निरंतर चलती रही। लगातार मेहनत और समर्पण से उन्होंने धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीता।

    3,000 से अधिक महिलाओं को दिलाया योजनाओं का लाभ
    राजबाला देवी अब तक 3,000 से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिला चुकी हैं। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने गांव की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने के फायदे समझाए। उनका प्रयास रहा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। मातृत्व और शिशु की रक्षा के उनके इस संकल्प में मां के रक्षक स्वरूप की झलक मिलती है।

    टीकाकरण से आयुष्मान कार्ड तक, घर-घर पहुंचाईं योजनाएं
    आशा कार्यकर्ता के रूप में राजबाला देवी ने मिशन टीकाकरण, परिवार कल्याण, आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड से जुड़ी गतिविधियों में भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों का टीकाकरण कराया और परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाई। गरीब परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनवाकर उन्हें पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा से जोड़ने में भी मदद की।

    जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक मिला सम्मान
    राजबाला देवी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक सम्मानित किया जा चुका है। जिले में उन्हें 'अलीगढ़ रत्न' सम्मान मिला, जबकि प्रदेश स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सम्मानित किया गया। उनके कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। 26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि राजबाला देवी के साथ-साथ पूरे जिले के लिए भी गर्व का विषय है।

    बढ़े मानदेय और प्रोत्साहन राशि से मिली आर्थिक मजबूती
    राजबाला देवी के मुताबिक, शुरुआती दौर में आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाला मानदेय काफी कम था। योगी सरकार की ओर से मानदेय और प्रोत्साहन राशि बढ़ाए जाने से आशा कार्यकर्ताओं को आर्थिक मजबूती मिली है। इससे परिवार का खर्च चलाने में भी पहले की तुलना में सहूलियत हुई है। नवरात्र का संदेश है कि नारी शक्ति का सम्मान ही समाज की सच्ची आराधना है। राजबाला देवी जैसी आशा कार्यकर्ता इसी शक्ति का प्रतीक हैं, जो हर दिन गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य की रक्षा का दायित्व निभा रही हैं।

    आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख जिम्मेदारियां
    – मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं में सहयोग
    – टीकाकरण और पोषण के प्रति जागरूकता
    – परिवार नियोजन की जानकारी देना
    – बीमारियों और महामारी की रोकथाम में सहयोग
    – संचारी रोग नियंत्रण अभियान में भागीदारी
    – स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना

  • किसानों को मंडियों तक उपज पहुंचाने में होगी सुविधा, ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन होगा सुगम

    किसानों को मंडियों तक उपज पहुंचाने में होगी सुविधा, ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन होगा सुगम

    लखनऊ
    योगी सरकार में संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण एवं गड्ढा मुक्त कार्यों को गति प्रदान करने के लिए राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने लगभग 477 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इस धनराशि से प्रदेश के 18 मंडलों में 1,111 संपर्क मार्गों की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य कराया जाएगा। इन मार्गों की कुल लंबाई लगभग 1,714 किलोमीटर है। इससे किसानों को अपनी उपज कृषि मंडियों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा।
       संपर्क मार्गों की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण से कृषि उपज से लदे वाहनों की आवाजाही बेहतर होगी। खराब सड़कों के कारण परिवहन में होने वाली कठिनाइयां कम होंगी और किसानों को उपज की ढुलाई में राहत मिलेगी।
       मंडलवार विवरण के अनुसार कानपुर मंडल में सर्वाधिक 158 संपर्क मार्गों की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण के लिए 50.66 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। इन मार्गों की कुल लंबाई 235.39 किलोमीटर है। वहीं बरेली मंडल में 156 मार्गों के लिए सर्वाधिक 74.86 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यहां 225.15 किलोमीटर लंबाई के संपर्क मार्गों पर कार्य कराया जाएगा। लखनऊ मंडल में 129 मार्गों के लिए 72.60 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई 215.40 किलोमीटर है।
       इसी प्रकार झांसी मंडल में 77 मार्गों के लिए 44.11 करोड़ रुपये, आगरा में 100 मार्गों के लिए 35.89 करोड़ रुपये तथा प्रयागराज में 83 मार्गों के लिए 34.73 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। अयोध्या, अलीगढ़, मिर्जापुर सहित अन्य मंडलों में भी स्वीकृत संपर्क मार्गों की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कराया जाएगा।
       सड़क मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों में तेजी लाने के लिए मंडी परिषद ने संबंधित जिलाधिकारियों से अपने स्तर पर नियमित समीक्षा की अपेक्षा की है। मंडी परिषद के उपनिदेशक (निर्माण), उपनिदेशक (प्रशासन) एवं मंडी सचिव जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर उनके निर्देशन में कार्यों की प्रगति सुनिश्चित करेंगे। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की निगरानी उपनिदेशक (निर्माण) करेंगे। जिलाधिकारी द्वारा गठित जनपद स्तरीय समितियां भी इसमें सहयोग करेंगी। साथ ही संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा समय-समय पर कार्यों की जांच कराई जाएगी।
       मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त रखने और उनके सुदृढ़ीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में मंडी परिषद द्वारा संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण एवं गड्ढा मुक्ति के कार्यों को गति प्रदान की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप और समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराए जाएंगे। इससे किसानों और ग्रामीण आबादी को बेहतर सड़क सुविधाओं का दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

  • मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना से किसानों को लाभ

    मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना से किसानों को लाभ

    मंडी परिषद की प्रस्तावित व्यवस्था में 43 इंच टीवी की जगह मिलेगी चारा काटने की मशीन, अन्य उपहारों में भी किया गया बदलाव

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में किसानों को कृषि कार्यों में सहूलियत देने और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के तहत दिए जाने वाले उपहारों में बदलाव किया गया है। इसी के तहत लकी ड्रॉ के माध्यम से किसानों को दिए जाने वाले उपहारों की सूची में संशोधन का किया गया है। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसे उपकरण उपलब्ध कराना है, जिनका इस्तेमाल वे खेती-पशुपालन से जुड़े कार्यों में कर सकें।
      निदेशक, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के अंतर्गत वर्तमान में दिए जा रहे कुछ उपहारों के स्थान पर कृषि उपयोगी मशीनें और उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए गठित समिति की बैठक में उपहारों की उपयोगिता और वितरण व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया गया। नवीनतम बदलाव के अनुसार 43 इंच के एलईडी टीवी के स्थान पर तीन हॉर्स पावर की चारा काटने वाली मशीन दी जाएगी। इससे किसानों को पशुपालन संबंधी कार्यों में भी मदद मिलेगी।

    टीवी की जगह मिलेगी चारा काटने की मशीन
     इस योजना के तहत वर्तमान में द्वितीय उपहार के रूप में 43 इंच का टीवी दिया जाता है। इसके स्थान पर तीन हॉर्स पावर की चारा काटने की मशीन दी जाएगी। इसकी अनुमानित कीमत 30 हजार रुपये प्रति उपहार है। प्रत्येक संभाग में ऐसे तीन उपहार दिए जाने की व्यवस्था होगी। इससे किसानों को पशुओं के लिए चारा तैयार करने में सुविधा मिलेगी और श्रम की बचत भी होगी।

    पंपिंग सेट और पावर स्प्रेयर भी सूची में
    प्रथम उपहार के रूप में आठ हॉर्स पावर का पंपिंग सेट पहले की तरह ही दिया जाएगा। इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये प्रति उपहार है और प्रत्येक संभाग में दो उपहार दिए जाने का प्रावधान है। वहीं, पावर स्प्रेयर को भी उपहारों की सूची में शामिल रखा गया है। इसके लिए प्रति उपहार अनुमानित कीमत पांच हजार रुपये है।

     उपहारों की श्रेणियों में भी किया गया बदलाव
    योजना के अंतर्गत उपहारों की विभिन्न श्रेणियों के लिए निम्नलिखित व्यवस्था की गई है—

    प्रथम उपहार: 35 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर
    द्वितीय उपहार: वर्तमान में 900 लीटर क्षमता वाले पावर टिलर (11 किलोवाट) तथा 13.7 एचपी क्षमता के उपकरणों के स्थान पर छोटे ट्रैक्टर (20 हॉर्स पावर से कम) को शामिल किया गया है।
    तृतीय उपहार: पावर टिलर/रीपर जैसे उपकरणों के स्थान पर 100 सीसी क्षमता वाली मोटरसाइकिल को शामिल किया गया है।
    चतुर्थ उपहार: सोलर पावर पैक संयंत्र को उपहार के रूप में शामिल किया गया है।

    समिति की संस्तुति के आधार पर लिया गया निर्णय
     गठित समिति ने उपहार वितरण के दौरान आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर विचार किया है। समिति की संस्तुति के आधार पर प्रथम उपहार के रूप में ट्रैक्टर को यथावत रखते हुए अन्य उपहारों की खरीद एवं वितरण की व्यवस्था में बदलाव करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के छमाही ड्रॉ और बंपर ड्रॉ के अंतर्गत वितरित किए जा रहे उपहारों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए संशोधित व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
      किसानों और कृषि उपज के व्यापारियों को राहत देने के लिए राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की विभिन्न योजनाओं में कृषि उपयोगी संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। परिषद के दस्तावेज में किसानों को निःशुल्क प्लास्टिक कैरेट और व्यापारियों को प्लास्टिक शीट वितरित करने की योजना है। इसके साथ ही कृषि शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और मंडी परिसर में दुर्घटना या अग्निकांड की स्थिति में आर्थिक सहायता देने की भी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान तथा कृषि महाविद्यालय से स्नातक करने वाले छात्रों की छात्रवृत्ति रुपए 3000 से बढ़ाकर रूपये 5000 की गयी है।

    किसानों को मिलेंगे निःशुल्क प्लास्टिक कैरेट
    मंडी परिषद की योजना के तहत किसानों को कृषि उपज की तोड़ाई और परिवहन के दौरान उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक कैरेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सब्जियों और फलों की तोड़ाई के समय से ही कैरेट का इस्तेमाल करने वाले किसानों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था है। मंडी समितिवार किसानों की संख्या के आधार पर कैरेट वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 'क' श्रेणी की मंडियों में 500 किसानों को चार-चार कैरेट देने का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 2,000 कैरेट वितरित किए जाने हैं। 'ख' श्रेणी की मंडियों में 250 किसानों को चार-चार कैरेट यानी कुल 1,000, 'ग' श्रेणी की मंडियों में 200 किसानों को कुल 800 और 'घ' श्रेणी की मंडियों में 150 किसानों को कुल 600 कैरेट देने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह इन चार श्रेणियों के लिए कुल 4,400 प्लास्टिक कैरेट का वितरण प्रस्तावित है।

     परिषद की इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों, व्यापारियों और कृषि शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को अलग-अलग स्तर पर सहयोग देना है। प्लास्टिक कैरेट और शीट वितरण से जहां कृषि उपज के रखरखाव में सहूलियत मिल सकती है, वहीं छात्रवृत्ति और दुर्घटना सहायता जैसी योजनाएं लाभार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर सकती हैं। योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित मंडी समिति से पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

  • झांसी से मैहर तक पैदल पहुंचा परिवार, तीन साल के बेटे के साथ 150 किमी चलने की बताई वजह

    झांसी से मैहर तक पैदल पहुंचा परिवार, तीन साल के बेटे के साथ 150 किमी चलने की बताई वजह

    मैहर

     मां शारदा के प्रति आस्था और नवरात्र में नौ दिनों तक व्रत रखने का संकल्प लेकर झांसी का एक परिवार अपने तीन साल के बेटे के साथ करीब 150 किलोमीटर पैदल चलकर मैहर पहुंचा।

    फल और खाद्य सामग्री देकर मदद की

    बागेश्वर धाम से शुरू हुई इस यात्रा को पूरा करने में परिवार को छह दिन लगे। मंगलवार को मैहर के आल्हा तालाब पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने परिवार की परेशानी जानकर फल और खाद्य सामग्री देकर मदद की।

    संकल्प को पूरा करने के लिए वे पैदल निकले

    झांसी के बड़ा बाजार निवासी पवन कुशवाहा (26), उनकी पत्नी कामिनी कुशवाहा और तीन साल के बेटे अंश ने मां शारदा के दर्शन के लिए यह यात्रा शुरू की थी। पवन के मुताबिक, पति-पत्नी ने नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत रखने और मां शारदा के दर्शन करने का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वे पैदल निकले।

    रास्ते में बैग से चोरी हो गए रुपये

    पवन ने बताया कि यात्रा के लिए वह घर से करीब 1500 रुपये लेकर निकले थे। रास्ते में थकान होने पर परिवार सड़क किनारे आराम करने के लिए रुका। इसी दौरान रात में किसी ने उनके बैग से रुपये निकाल लिए। नकदी चोरी होने के बाद खाने-पीने की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया, लेकिन परिवार ने यात्रा जारी रखी।

     

  • गन्ने का मूल्य 425 रुपये प्रति क्विंटल होने पर किसानों में उत्साह एवं खुशी, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा को शक्कर की बोरियों से तौलकर जताया आभार

    गन्ने का मूल्य 425 रुपये प्रति क्विंटल होने पर किसानों में उत्साह एवं खुशी, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को शक्कर की बोरियों से तौलकर जताया आभार

    रायपुर

    सरकार द्वारा गन्ने का मूल्य 425 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने पर कबीरधाम जिले के गन्ना उत्पादक किसानों में उत्साह एवं खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के किसान हितैषी निर्णय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आज कवर्धा में किसान संघों के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में किसानों ने उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। किसानों ने उन्हें गन्ना भेंटकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। इस दौरान किसानों ने उप मुख्यमंत्री  शर्मा को शक्कर की बोरियों से तौलकर उनका विशेष अभिनंदन किया।

    कवर्धा में जिला पंचायत कार्यालय और विधायक कार्यालय के पास किसान संघो के पदाधिकारियों एवं किसानों ने उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा का गन्ने का मूल्य 425 रुपये प्रति क्विंटल होने पर खुशी जताते हुए  आभार व्यक्त किया। किसानों ने कहा कि गन्ने का मूल्य बढ़ने से जिले के हजारों गन्ना उत्पादक परिवारों को लाभ मिलेगा। इससे खेती की बढ़ती लागत की भरपाई करने में सहायता मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि कबीरधाम जिला गन्ना उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में गन्ने का बेहतर मूल्य मिलने से किसानों को अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल प्राप्त होगा तथा गन्ने की खेती को और प्रोत्साहन मिलेगा।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने किसानों के स्नेह और आत्मीय अभिनंदन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और खुशहाली राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं और उनकी मेहनत से ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले और खेती-किसानी से जुड़े परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बनें, इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाते रहेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान किसानों और किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने उप मुख्यमंत्री  शर्मा का अभिनंदन करते हुए कहा कि गन्ने का मूल्य 425 रुपये प्रति क्विंटल होना गन्ना उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। किसानों ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और सरकार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

  • भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की दीर्घकालिक कार्ययोजना : मुख्यमंत्री

    भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की दीर्घकालिक कार्ययोजना : मुख्यमंत्री

    रायपुर 

    स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हों, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर समान रूप से ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस दौरान संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन, संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अंतर्गत संचालित योजनाओं, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार हुआ है। अनेक अच्छे अस्पताल और चिकित्सा संस्थान विकसित हुए हैं। अब जहां चिकित्सकों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा उपकरणों अथवा जांच सुविधाओं की कमी है, उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकता के साथ दूर किया जाए। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो और उनका अधिकतम लाभ मरीजों तक पहुंचे।

    भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बने स्वास्थ्य अधोसंरचना की दीर्घकालिक कार्ययोजना

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाए। इसी आधार पर स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार और आवश्यक सुविधाओं के विकास की स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुरूप बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को प्राथमिकता से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास में केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों, उपकरणों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता को भी समग्र रूप से सुनिश्चित किया जाए।

    जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों को मिलें आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं

    मुख्यमंत्री  साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी या भटकाव का सामना न करना पड़े।

    उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध कोई भी महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण रखरखाव अथवा मरम्मत के अभाव में लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए। इसके लिए प्रभावी निगरानी और समयबद्ध मरम्मत व्यवस्था विकसित की जाए।

    बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वित्तीय प्रगति, मानव संसाधन की उपलब्धता तथा रिक्त पदों पर भर्ती की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं और सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी प्रचलन में है। मुख्यमंत्री ने भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं को गति देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता सेवाओं की गुणवत्ता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के साथ स्वास्थ्य संस्थानों के गुणवत्ता मानकों, ई-हॉस्पिटल तथा आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की और तकनीक का उपयोग मरीजों की सुविधा तथा सेवाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए करने के निर्देश दिए।

    हर प्रसव सुरक्षित हो, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री  साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि गर्भवती माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक पोषण एवं चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें और प्रसूता महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा तथा सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

    उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन इस दिशा में और बेहतर परिणाम हासिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।

    बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) में टीकाकरण की स्थिति, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए, जिससे बीमारियों की समय पर पहचान हो और मरीजों को प्रारंभिक स्तर पर ही उपचार मिल सके।

    दुर्गम अंचलों के लिए विकसित हो वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

    मुख्यमंत्री  साय ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस की सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीज तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को केवल भौगोलिक कठिनाइयों के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़क अथवा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस का पहुंचना संभव नहीं है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीज को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस तथा 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    दुख की घड़ी में शव वाहन के लिए परेशान न हों परिजन

    मुख्यमंत्री  साय ने शव वाहन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए जीवन के सबसे कठिन और पीड़ादायक क्षणों में से एक होता है। ऐसे समय में परिवार को शव वाहन जैसी बुनियादी व्यवस्था के लिए परेशान होना उचित नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में शव वाहन की सुविधा परिजनों को सहजता और समय पर उपलब्ध हो। स्वास्थ्य विभाग ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करे, जिनमें मरीज और उसके परिवार की गरिमा तथा संवेदनाओं का पूरा सम्मान हो।

    सिकल सेल उन्मूलन के लिए जांच, परामर्श और जनजागरूकता का हो विस्तार

    मुख्यमंत्री  साय ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है और इसके प्रति व्यापक जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाओं का विस्तार करने के साथ विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच एवं आनुवंशिक परामर्श के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। विशेषकर प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करने पर उन्होंने जोर दिया।

    मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा

    मुख्यमंत्री  साय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, परामर्श सेवाओं और उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे जरूरतमंद व्यक्ति समय रहते सहायता प्राप्त कर सके।

    बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का पूरा लाभ मिले। विशेष रूप से दूरस्थ अंचलों में योजनाओं की जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और सुदृढ़ किया जाए।

    चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ गुणवत्ता पर भी समान जोर

    मुख्यमंत्री  साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन शासकीय मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए कॉलेजों की स्थापना तथा संचालित मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों तथा अन्य व्यवस्थाओं में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी हैं। इसलिए वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर उपचार सुविधाएं विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी, आईपीडी और विभिन्न जांच सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की।

    नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और एलाइड हेल्थ एजुकेशन का भी विस्तार

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 तथा फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 7 हो गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी प्रारंभ की गई हैं।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रदेश में प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट तथा अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।

    दवाइयों की उपलब्धता और उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही नहीं

    मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दवाइयों की आपूर्ति ऐसी हो कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी न हो।

    उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित संस्थाओं, मानव संसाधन, उपचार सुविधाओं और योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।

    त्योहारी सीजन में मिलावट के विरुद्ध चलाएं सघन जांच अभियान

    मुख्यमंत्री  साय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में मिठाई, दुग्ध उत्पाद एवं अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और विक्रय स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक अथवा मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी से कार्य करें।

    अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचना ही योजनाओं की वास्तविक सफलता

    मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और सेवाओं की वास्तविक सफलता का पैमाना यह है कि जरूरत के समय उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता और समयबद्धता से पहुंचता है। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा हो और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कमियों की पहचान कर उनका त्वरित निराकरण किया जाए।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह बड़े शहर में रहता हो या सुदूर वनांचल में, आवश्यकता पड़ने पर उसे समय पर बेहतर उपचार मिले। चिकित्सा सुविधा के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसी लक्ष्य के साथ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है।

    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, संचालक स्वास्थ्य  संजीव कुमार झा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा  रितेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव  प्रभात मलिक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।