Author: NewseDay

  • प्रधानमंत्री मोदी के संवेदनशील एवं जनहितैषी निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार

    प्रधानमंत्री मोदी के संवेदनशील एवं जनहितैषी निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार

    भोपाल
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम' को वित्त वर्ष 2030-31 तक निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया है। कुल 53 हज़ार 428 करोड़ रूपए की इस योजना से देशभर के 3 करोड़ 20 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी निर्णयों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता का दायरा बढ़ाने और सहायता राशि में वृद्धि का निर्णय भी लिया गया है। अब 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी लाभ मिल सकेगा। पेंशन के लिए न्यूनतम आयु सीमा भी समाप्त कर दी गई है। यह दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा का सम्बल देने तथा उनके जीवन को और अधिक सम्मानपूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

     

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित पीपीपीएसी की बैठक संपन्न

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित पीपीपीएसी की बैठक संपन्न

    रायपु

    मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मूल्यांकन समिति की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा बिलासपुर के कोनी स्थित सिम्स मेडिकल कैंपस में निर्मित 240 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बिस्तरों वाले स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत संचालित और रखरखाव करने के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। 

    बैठक में पीपीपी मॉडल अस्पताल को 10 वर्षों के लिए बिलासपुर के कोनी में कुल 340 बिस्तरों वाले इन दोनों अस्पतालों को एक ही 10-वर्षीय लाइसेंस समझौते के तहत निजी डेवलपर, ऑपरेटर को संचालन और रखरखाव के लिए सौंपने के प्रस्ताव पर विचार किया गया।   

    अस्पताल में सरकारी योजनाओं (आयुष्मान भारत आदि) के लाभार्थियों और पूरी तरह निःशुल्क मरीजों के लिए आरक्षित रहेंगे। केवल 20 प्रतिशत बिस्तरों का उपयोग पेड मरीजों के इलाज के लिए किया जा सकेगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी जैसी प्रमुख चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। 

    बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव  अमित कटारिया, वित्त एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं संबंधित ऑपरेटर संस्था केपीएमजी के प्रतिनिधि शामिल हुए।

     

  • बंद विद्यालयों में फिर शुरू हुई पढ़ाई, निःशुल्क कोचिंग से इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचे विद्यार्थी

    बंद विद्यालयों में फिर शुरू हुई पढ़ाई, निःशुल्क कोचिंग से इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचे विद्यार्थी

    रायपुर

    नारायणपुर जिले के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित अंचलों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों से बच्चों के लिए पढ़ाई के नए अवसर खुल रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में नए विद्यालयों के संचालन, बंद शालाओं को पुनः प्रारंभ करने और वैकल्पिक शालाओं की स्थापना के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में अनेक पहल की गई हैं। जिले में 24 वैकल्पिक शालाओं के माध्यम से लगभग 800 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई है। वहीं, निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, डिजिटल शिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा से विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।

    नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत शिक्षा सत्र 2024-25 में ईरक्कभट्टी, जड्डा, ताडोबेडा एवं तोयामेटा (एनमेटा) में चार नवीन प्राथमिक विद्यालय प्रारंभ किए गए। इसके साथ ही लंबे समय से बंद नौ प्राथमिक शालाओं में दोबारा पढ़ाई शुरू कराई गई। इन प्रयासों से 207 विद्यार्थियों को लाभ मिला। शिक्षा सत्र 2025-26 एवं 2026-27 में 24 वैकल्पिक शालाओं का संचालन शुरू किया गया, जिससे ऐसे गांवों के बच्चों तक भी शिक्षा पहुंची, जिन्हें पहले विद्यालय जाने का अवसर नहीं मिला था। सत्र 2026-27 में चार प्राथमिक शालाओं का शुभारंभ भी किया गया है।

    ‘स्कूल केईंता’ अभियान से शिक्षा से वंचित बच्चों की पहचान

     शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने के लिए जिले में विशेष ‘स्कूल केईंता’ अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत 24,701 परिवारों का सर्वेक्षण कर 1,047 शाला त्यागी और 1,295 अप्रवेशी बच्चों की पहचान की गई। इन बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई है। जिले में वर्तमान में 538 विद्यालय संचालित हैं। आवासीय शिक्षा के लिए दो कस्तूरबा गांधी विद्यालय, दो पोर्टा केबिन विद्यालय और एक डॉरमेट्री की सुविधा उपलब्ध है। केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय भी विद्यार्थियों को शैक्षणिक अवसर प्रदान कर रहे हैं। शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 187 शासकीय शालाओं में 273 अतिथि शिक्षकों की स्वीकृति दी गई है। जरूरत वाले गांवों में शिक्षा दूतों के माध्यम से भी बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है।

    निःशुल्क कोचिंग से उच्च शिक्षा की राह हुई आसान

    जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिले में पिछले दो वर्षों से निःशुल्क कोचिंग संचालित की जा रही है। शिक्षा सत्र 2025-26 में गणित संकाय के 29 विद्यार्थियों में से 16 का चयन विभिन्न प्रतिष्ठित शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में हुआ। जीवविज्ञान संकाय के सात विद्यार्थियों ने नीट के माध्यम से काउंसलिंग प्रक्रिया में सफलता प्राप्त की। इनमें एक विद्यार्थी का चयन शासकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए हुआ है।

    डिजिटल शिक्षा और नवाचार से बढ़ रहे सीखने के अवसर

     जिले में 10 आईसीटी लैब और 32 स्मार्ट क्लास संचालित हैं। डिजिटल शिक्षण सामग्री से विद्यार्थियों को विषयों को सरल और रुचिकर तरीके से समझने में मदद मिल रही है। आठ विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से बच्चों को वैज्ञानिक प्रयोग और मॉडल निर्माण के अवसर दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही 12 हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगारोन्मुखी कौशल से परिचित कराया जा रहा है। दोनों विकासखंडों में एक-एक पीएम  विद्यालय तथा जिले में कुल सात स्वामी आत्मानंद विद्यालय संचालित हैं। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विद्यार्थियों के लिए पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 100-100 सीटों वाले बालक एवं बालिका छात्रावासों के संचालन की दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया है। नारायणपुर जिले के बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी जिले की स्थिति बेहतर हुई है।

  • सुरक्षित मातृत्व सेवाओं से मातृ मृत्यु दर शून्य करने पर हुआ मंथन

    सुरक्षित मातृत्व सेवाओं से मातृ मृत्यु दर शून्य करने पर हुआ मंथन

    सुमन रोडमैप-2030 पर हुई कार्यशाला

    भोपाल
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा यूएनएफपीए मध्यप्रदेश के सहयोग से सुमन रोडमैप 2030 – देखभाल की निरंतरता में तेजी विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान एवं प्रबंधन, प्रसव कक्षों में गुणवत्ता सुधार, प्रसूति संबंधी जटिलताओं के प्रभावी प्रबंधन तथा मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। कार्यशाला का उद्देश्य सुमन के तहत निर्धारित लक्ष्यों को जिला स्तर पर प्रभावी कार्ययोजनाओं में परिवर्तित कर प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना तथा रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को शून्य करना है। एनएचएम मध्यप्रदेश एवं यूएनएफपीए ने इस दिशा में जिलों को तकनीकी एवं कार्यक्रम संबंधी सहयोग प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    कार्यशाला को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अपर आयुक्त डॉ. पवन कुमार ने वर्चुअल संबोधित किया। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री धनराजू एस, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना एवं मातृ स्वास्थ्य की वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अर्चना मिश्रा ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की रणनीति पर विचार साझा किए। कार्यशाला में प्रदेश के सभी 52 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी तथा कार्यक्रम प्रबंधक शामिल हुए।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव उमरिया जिले के ग्राम गुरुवाही में लाड़ली बहना सम्मेलन में हुए शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव उमरिया जिले के ग्राम गुरुवाही में लाड़ली बहना सम्मेलन में हुए शामिल

    लाड़ली बहना योजना की 41वीं किश्त 1 करोड़ 25 लाख बहनों के खातों में 1834 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित
    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और लाड़ली बहनों को गैस सिलेंडर रीफिल के लिए 115 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 144 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और भूमि-पूजन

     

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नवरात्रि के पावन पर्व पर बुधवार को प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख लाड़ली बहनों को लाड़ली बहना योजना की 41वीं किश्त की सौगात मिली है। राज्य सरकार बहनों के बैंक खातों में हर माह 1500 रुपए की राशि ट्रांसफर कर रही है। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 65 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। हमारी सरकार सच्चा वादा-पक्का काम के भाव से प्रदेश की जनता से किए गए जनकल्याण के सभी वादे पूरा करते हुए आगे बढ़ रही है। प्रदेश की आधी आबादी के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के एक चौथाई जिलों में हमारी बहनें कलेक्टर की जिम्मेदारी निभा रही हैं। उमरिया जिले के बांधवगढ़ को प्रभु श्रीराम, माता सीता और भगवान श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद मिला है। उमरिया में विरासनी देवी का आशीर्वाद मिला है। उमरिया में विरासनी देवी का आशीर्वाद लेना सौभाग्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उमरिया जिले के मानपुर जनपद पंचायत अंतर्गत गुरुवाही ग्राम में आयोजित लाड़ली बहना योजना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 41वीं किश्त की राशि बहनों के बैंक खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को 1834 करोड़ रुपये से अधिक राशि अंतरित की। उन्होंने इसके साथ प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना और लाड़ली बहनों को गैस सिलेंडर रीफिल के लिए 115 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाड़ली बहना सम्मेलन में 144 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया।

    महिला कल्याण के लिए राज्य सरकार ने किया 47 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रावधान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्य दलों की सरकारों के दौर में प्रदेश के महिला बाल विकास विभाग का बजट केवल 350 करोड़ रुपए हुआ करता था, लेकिन अब राज्य सरकार ने 47 हजार करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान महिला कल्याण के लिए किया है। आज बहनों को लाड़ली बहना योजना के 1500 रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना के एलपीजी उपभोक्ताओं को गैस रिफिलिंग अनुदान राशि दी गई है। इसके लिए प्रदेश की 23 लाख से अधिक बहनों को 115 करोड़ रुपए से अधिक राशि अंतरित की गई है। राज्य सरकार गैस रिफिल अनुदान के 3 साल में 1600 करोड़ की सहायता बहनों को दे चुकी है।

    सरकार गरीबों के जीवन में खुशियां लाने के लिए कर रही है काम
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी ने माताओं-बहनों की सुविधा के लिए पक्के मकान और शौचालय बनवाएं। राज्य सरकार ने स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 50 लाख से अधिक संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का संकल्प लिया है। पटवारियों को जो भ्रांतियां थी, वह दूर कर दी गई हैं। राज्य सरकार गरीबों के जीवन में खुशियां लाने के लिए काम कर रही है। प्रदेश में 21 वर्ष बाद फिर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बस चलने लगी हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए सांदीपनि विद्यालय की सौगात मिल रही है, जहां उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है। मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए बस सुविधा, साइकिलें और नि:शुल्क किताबें व गणवेश दी जा रही है।

    किसानों की आय में वृद्धि के लिए गौपालन को किया जा रहा है प्रोत्साहित
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष अंतर्गत किसानों को अनेक सौगातें दी जा रही हैं किसानों की आय में वृद्धि के लिए गौपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को भी राज्य सरकार प्रोत्साहित कर रही है। "जियो और जीने दो'' के सिद्धांत के अनुरूप प्रदेश के वनांचल में वन्यजीवों की विविधता को प्रोत्साहित करते हुए उनकी संख्या में वृद्धि की जा रही है। वन्यजीवों से होने वाली दुर्घटना पर मुआवजा राशि में भी वृद्धि की गई है। प्रदेश में हवाई सेवाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

    65 लाख बहनें जुड़ी हैं स्व-सहायता समूहों से
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार बहन-बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित है। प्रदेश में 65 लाख बहनें स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं और आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ रोजगार पा रही हैं। इनमें से 25 प्रतिशत लखपति दीदियाँ शामिल हैं। राज्य सरकार रोजगार आधारित उद्योगों में काम करने पर बहनों को अलग से पाँच हजार रुपए की सहायता वेतन के रूप में दे रही है।

    136 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उमरिया जिले के समग्र विकास के लिए कुल 144 करोड़ रुपये की लागत के 136 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन हुए हैं। इनमें 87 करोड़ रुपये की लागत के 68 कार्यों का लोकार्पण और 57 करोड़ रुपये की लागत के 68 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। इन विकास कार्यों में बांधवगढ़ और मानपुर विधानसभा क्षेत्रों के कार्य भी शामिल हैं। राज्य सरकार लगातार विकास के लिए प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रही है। उमरिया सहित आसपास के जिलों को स्लीमनाबाद टनल का भी लाभ मिलेगा, इससे सिंचाई के पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।

     

  • राज्यपाल पटेल ने प्रो. बेदिया को कुलगुरू नियुक्त किया

    राज्यपाल पटेल ने प्रो. बेदिया को कुलगुरू नियुक्त किया

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के होंगे कुलगुरू

    भोपाल
    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल का नया कुलगुरू, प्रोफेसर, व्यवसाय प्रबंध, पं. जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के प्रोफेसर दीन दयाल बेदिया को नियुक्त किया है।

    राज्यपाल श्री पटेल ने प्रो. दीन दयाल बेदिया को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 4 वर्ष की कालावधि अथवा 70 वर्ष की आयु जो भी पूर्वत्तर हो के लिए कुलगुरू नियुक्त किया है।

  • लखनऊ विश्वविद्यालय ने रचा इतिहास, क्यूआर कोड आईडी डिजिलॉकर पर

    लखनऊ विश्वविद्यालय ने रचा इतिहास, क्यूआर कोड आईडी डिजिलॉकर पर

     

    डिजीलॉकर पर सीधे डिजिटल पहचान पत्र (vCard) उपलब्ध कराने वाला देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बना एलयू

    योगी सरकार उच्च शिक्षा को डिजिटल व पेपरलेस व्यवस्था से कर रही सशक्त, लखनऊ विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण कदम

    लखनऊ
    उच्च शिक्षण संस्थानों में 'डिजिलॉकर' के अधिकतम व प्रभावी उपयोग की योगी सरकार की परिकल्पना को साकार करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय ने छात्र-सुविधाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रवेश लेने वाले कुल 21,268 छात्र-छात्राओं के आधिकारिक पहचान पत्र भारत सरकार के डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक अपलोड कर दिए हैं। इस स्तर पर व्यापक डिजिटल पहचान पत्र व्यवस्था लागू करने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है।

    प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ विश्वविद्यालय की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों को आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और छात्र-केंद्रित डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। योगी सरकार की मंशा है कि विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेपरलेस बनाया जाए, जिससे विद्यार्थियों का कीमती समय बचे और उन्हें पारदर्शी सेवाएं मिलें। लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा देश में सबसे पहले अपने 21 हजार से अधिक नए विद्यार्थियों के पहचान पत्र डिजिलॉकर पर क्यूआर कोड के साथ उपलब्ध कराना डिजिटल उत्तर प्रदेश की दिशा में एक युगांतकारी पहल है। यह व्यवस्था न केवल छात्रों को दफ्तरों के चक्कर और कागजी झंझटों से मुक्ति दिलाएगी, बल्कि फर्जीवाड़े पर भी पूरी तरह अंकुश लगाएगी। राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों को भी इस मॉडल का अनुसरण करना चाहिए।

    लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी के नेतृत्व में लखनऊ विश्वविद्यालय ने छात्र-हितैषी और पेपरलेस गवर्नेंस की दिशा में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस डिजिटल पहल के अंतर्गत सत्र 2026-27 में स्नातक, परास्नातक, पीएचडी शोधार्थियों के साथ-साथ डिप्लोमा एवं शास्त्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया है। यह पहचान पत्र पूरी तरह 'क्यूआर कोड आधारित' है। पंजीकृत विद्यार्थी अब डिजिलॉकर में लॉग-इन कर अपनी प्रोफाइल फोटो के ठीक नीचे दिए गए 'Generate vCard' विकल्प पर क्लिक कर अपना डिजिटल पहचान पत्र आसानी से देख और डाउनलोड कर सकते हैं।

    डिजिलॉकर पहचान पत्र (वीकार्ड) की प्रमुख विशेषताएं व लाभ इस प्रकार हैं। यह 24×7 स्मार्टफोन में उपलब्ध रहता है, जिससे विद्यार्थियों को भौतिक प्लास्टिक कार्ड साथ रखने की बाध्यता नहीं होगी और कार्ड के खोने, फटने या चोरी होने का जोखिम समाप्त हो जाएगा। यह कतारों व जटिल प्रक्रियाओं से मुक्ति दिलाता है, क्योंकि नए सत्र में कार्ड छपाई व वितरण में लगने वाले हफ्तों के समय की बचत हुई है और कार्ड खोने पर डुप्लीकेट कार्ड बनवाने की लंबी प्रक्रिया से भी छात्रों को राहत मिली है। डिजिलॉकर में उपलब्ध यह डिजिटल पहचान पत्र सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भौतिक कार्ड के समान 100 प्रतिशत कानूनी रूप से वैध है, जिससे त्वरित सत्यापन व कानूनी मान्यता मिलती है। क्यूआर कोड स्कैन कर प्रतियोगी परीक्षाओं, बस/ट्रेन/मेट्रो रियायत, बैंक व अन्य संस्थानों में त्वरित सत्यापन संभव होगा। यह फर्जीवाड़े पर रोक लगाता है और स्वतः निष्क्रिय हो जाता है, क्योंकि यह प्रणाली सीधे विश्वविद्यालय के डेटाबेस और छात्र की एपीएएआर आईडी से जुड़ी है, जिससे जाली आईडी कार्ड बनने की संभावना शून्य हो गई है और पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर यह कार्ड स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा। इसके माध्यम से कैंपस सुविधाओं का सुगम उपयोग किया जा सकता है, जैसे केंद्रीय टैगोर लाइब्रेरी, रीडिंग हॉल, कंप्यूटर लैब, छात्रावासों व खेल परिसरों में छात्र मोबाइल से ही क्यूआर कोड स्कैन कराकर त्वरित प्रवेश ले सकेंगे। यह पर्यावरण संरक्षण (हरित परिसर) में भी सहायक है, क्योंकि 21 हजार से अधिक प्लास्टिक (पीवीसी) कार्ड और लेमिनेशन शीट का उपयोग न होने से प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी, जो विश्वविद्यालय की ग्रीन कैंपस नीति के अनुकूल है।

    डिजिटल आईडी कार्ड (vCard) प्राप्त करने की सरल प्रक्रिया यह है कि छात्र अपने स्मार्टफोन में डिजिलॉकर ऐप या पोर्टल पर पंजीकृत विवरण से लॉग-इन करें, प्रोफाइल फोटो के ठीक नीचे दिए गए विकल्प 'Generate vCard' पर क्लिक करें, और क्लिक करते ही क्यूआर कोड आधारित आधिकारिक डिजिटल आईडी कार्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा, जिसे कभी भी डाउनलोड किया जा सकता है।

  • राज्यपाल पटेल से विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की सौजन्य भेंट

    राज्यपाल पटेल से विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की सौजन्य भेंट

    लोकभवन पहुँचकर की चर्चा

    भोपाल
    राज्यपाल मंगुभाई पटेल से विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सौजन्य भेंट की। विधानसभा अध्यक्ष तोमर बुधवार को लोकभवन पहुँचे थे। राज्यपाल श्री पटेल का विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने अभिवादन कर पुष्प-गुच्छ भेंट किया। उन्होंने राज्यपाल से विभिन्न विषयों पर चर्चा भी की।

  • उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    ’रायपुर

    उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने आज नवरात्रि के अवसर पर कबीरधाम जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। उन्होंने कवर्धा स्थित प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर और मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचकर माता रानी का आशीर्वाद लिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने सर्वप्रथम मां महामाया मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं कबीरधाम जिले की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

    ’मां विंध्यवासिनी मंदिर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का किया निरीक्षण’

    उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। ज्योति कलश भवन के निर्माण से मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिलेगी।

    ’छिरपानी कॉलोनी के मां दुर्गा पंडाल में किए दर्शन’

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कवर्धा के छिरपानी कॉलोनी स्थित मां दुर्गा पंडाल पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात भी की।

  • गोरक्षपीठ से जुड़ी स्वामी प्रणवानंद की साधना का सुनाया प्रसंग, आध्यात्मिक साधना को बनाया राष्ट्र जागरण का माध्यम

    गोरक्षपीठ से जुड़ी स्वामी प्रणवानंद की साधना का सुनाया प्रसंग, आध्यात्मिक साधना को बनाया राष्ट्र जागरण का माध्यम

    वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित, संन्यासियों के त्याग और राष्ट्रसेवा को सराहा

    काशी विश्वनाथ मंदिर, राम जन्मभूमि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का किया उल्लेख, कहा- आपसी बंटवारे से विदेशी आक्रांताओं को मिला अवसर
     
    100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, मुख्यमंत्री योगी ने अपने हाथों से पांच परिवारों को प्रदान कीं सिलाई मशीनें
     

    वाराणसी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'याद रखना, एक संन्यासी के जीवन का ध्येय ही होना चाहिए कि धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा। धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा और छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा।' उन्होंने कहा कि देश और धर्म के लिए किया गया हर त्याग महान है। शांति के समय धर्म का स्वरूप संयम, सौहार्द और लोककल्याण है, लेकिन राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष के लिए भी तैयार रहना चाहिए। भारत सेवाश्रम संघ ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। राष्ट्रोन्नति को आत्मोन्नति का माध्यम बनाकर संस्था ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्र जागरण और लोककल्याण से जोड़ा है।
     
    मुख्यमंत्री योगी बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी प्रणवानंद महाराज के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर आरती की। मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना भी की। संघ के प्रधान सचिव स्वामी विश्वात्मानंद ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1926 में स्थापित काशी शाखा ने सेवा और राष्ट्र जागरण की अपनी परंपरा के सौ वर्ष पूरे किए हैं। यह संस्था भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक देशों में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा को आगे बढ़ा रही है।
     
    आपसी बंटवारे से विदेशी आक्रांताओं को मिला अवसर
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब राष्ट्र संकट में होता है तो उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी संकट में पड़ जाती है। उन्होंने सवाल किया कि विदेशी आक्रांता सफल नहीं होते तो क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को अपवित्र और क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस होता। क्या राम जन्मभूमि पर पांच सौ वर्षों तक गुलामी का कलंक रहता या श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ऐसा संकट खड़ा होता। उन्होंने कहा कि आपसी बंटवारे का दुष्परिणाम देश को भुगतना पड़ा। इसी पाप के परिमार्जन के लिए संतों ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण का माध्यम बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसी राष्ट्रीय चेतना और संकल्प का परिणाम है।
     
    गोरक्षपीठ में स्वामी प्रणवानंद को मिली थी दीक्षा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद महाराज का गोरक्षपीठ से गहरा संबंध रहा है। वर्ष 1912-13 में वह गोरखपुर पहुंचे और सिद्ध योगी बाबा गंभीरनाथ के सानिध्य में साधना की। उन्होंने स्वामी प्रणवानंद के बचपन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि लगभग 12-13 वर्ष की आयु में वह अपने शिक्षक के साथ गुरु की खोज में गोरखपुर पहुंचे थे। बाबा गंभीरनाथ ने उन्हें देखकर जन्म से सिद्ध योगी बताया था। साधना के दौरान वह तीन घंटे तक अखंड समाधि में रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर से प्राप्त आध्यात्मिक प्रेरणा को स्वामी प्रणवानंद ने पूरे देश में राष्ट्र जागरण का माध्यम बनाया। इसी ऐतिहासिक संबंध के कारण भारत सेवाश्रम संघ से उनका विशेष लगाव है।
     
    स्वाधीनता और हिंदू जागरण में संघ का योगदान
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 1926 में स्वामी प्रणवानंद ने काशी शाखा की स्थापना की थी। देश की पराधीनता के समय वह स्वाधीनता और हिंदू जागरण की अलख जगाते रहे। आज भारत सेवाश्रम संघ देश के साथ दुनिया के अनेक देशों में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि संघ ने राष्ट्रवाद को जीवन का ध्येय बनाया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति के विरुद्ध नए राजनीतिक संगठन के निर्माण की प्रेरणा भी स्वामी प्रणवानंद से मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संघ के संन्यासियों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। यही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।
     
    100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
    शताब्दी समारोह में भारत सेवाश्रम संघ की ओर से 100 परिवारों को सिलाई मशीनें प्रदान की गईं। मुख्यमंत्री योगी ने स्वयं पांच परिवारों को सिलाई मशीनें सौंपीं। उन्होंने कहा कि संघ का यह प्रयास सौ परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना है। उन्होंने प्रयागराज कुंभ में संघ की अन्नक्षेत्र सेवा और देशभर में संचालित लोककल्याणकारी गतिविधियों की भी सराहना की। कहा कि शांति के समय सेवा और लोककल्याण के माध्यम से समाज को समर्थ बनाना ही आध्यात्मिक साधना की सार्थकता है।
     
    धर्म को मानवता और अध्यात्म को सेवा से जोड़ा : स्वामी विश्वात्मानंद
    भारत सेवाश्रम संघ के प्रधान सचिव स्वामी विश्वात्मानंद ने कहा कि काशी शाखा की स्थापना धर्म को मानवता, अध्यात्म को सेवा और तीर्थ को राष्ट्रीय जागरण से जोड़ने के संकल्प के साथ हुई थी। संघ पीड़ितों की सहायता, तीर्थयात्रियों की सेवा, चिकित्सा, शिक्षा, जनजाति कल्याण और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है।