Author: NewseDay

  • पेड़ के सेबों से सीखते हैं जोड़-घटा, शब्द हटाते ही दिखता है विलोम; शिक्षक

    पेड़ के सेबों से सीखते हैं जोड़-घटा, शब्द हटाते ही दिखता है विलोम; शिक्षक

    यमुनानगर
     यहां घंटी बजते ही किताबें जरूर खुलती हैं, लेकिन पढ़ाई किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहती। थर्माकोल का पेड़ बच्चों को जोड़-घटा सिखाता है। उसकी हरी पत्तियां और लाल सेब गणित के सवाल बन जाते हैं।

    कागज पर लिखा शब्द हटाते ही उसका विपरीतार्थक सामने आ जाता है। यानी यहां चीजें बोलती हैं और बच्चे उन्हें देखकर, छूकर और करके सीखते हैं। राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिल्क खास के जेबीटी पवन कुमार ने इसी अनोखी शिक्षण शैली को अपनी पहचान बनाया है।

    बेकार वस्तुओं से बनाते हैं शिक्षण सामग्री
    करीब 26 साल की सेवा में इसी प्रयास और विद्यार्थियों की उपलब्धियों के लिए उन्हें इस साल राज्य शिक्षक पुरस्कार भी मिला है। पवन कुमार थर्माकोल, कागज और घरों में बेकार पड़ी वस्तुओं से कम लागत वाली शिक्षण सामग्री तैयार करते हैं। थर्माकोल के पेड़ पर कागज की पत्तियां और फल लगाकर बच्चों से उनकी संख्या गिनवाते हैं।

    फिर इन्हीं के जरिए जोड़-घटा के सवाल करवाते हैं। विपरीतार्थक शब्दों के लिए भी ऐसी सामग्री बनाई है, जिसमें एक शब्द हटाते ही दूसरा शब्द सामने दिखाई देता है। यही सामग्री अभिभावकों को भी दी जा रही है, ताकि बच्चे अभ्यास कर सकें।

    विद्यालय में हैं 61 बच्चे
    विद्यालय में 61 बच्चे हैं। विद्यार्थी स्कूल, खंड और जिला स्तर पर सांस्कृतिक, खो-खो, प्रश्नोत्तरी और चित्र देखकर विवरण लिखने जैसी प्रतियोगिताओं में अव्वल रह चुके हैं।

    शिक्षक के संग समाजसेवक भी हैं पवन
    पढ़ाई संग समाजसेवा का पाठ व्यासपुर में जन्मे पवन कुमार करीब दस वर्षों से मिल्क खास में कार्यरत हैं। वर्ष 2015 में फेरूवाला स्कूल से रक्तदान शिविर की शुरुआत की। अब तक 16 शिविरों में योगदान दे चुके हैं और स्वयं 15 बार रक्तदान कर चुके हैं।

    स्काउट एवं गाइड गतिविधियों के जरिए बच्चों में सेवा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित कर रहे हैं। पवन कुमार की शिक्षण शैली और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें इस वर्ष राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    उनकी कक्षा में गणित मात्र सवाल नहीं, पेड़ पर लगे सेबों में दिखाई देता है और भाषा केवल किताब में नहीं, कागज के प्रयोग से समझ आती है।

  • स्वामी आत्मानंद स्कूल सेलूद में बनेगा साइकिल स्टैंड, बाउंड्रीवाल और वॉलीबॉल ग्राउंड

    स्वामी आत्मानंद स्कूल सेलूद में बनेगा साइकिल स्टैंड, बाउंड्रीवाल और वॉलीबॉल ग्राउंड

    रायपुर

    स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहे विद्यार्थियों के लिए सोमवार का दिन उस समय खास बन गया, जब स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव अचानक उनके बीच पहुंचे और सहजता से बातचीत करने लगे। दुर्ग जिले में सेवा सेतु शिविर में शामिल होने ग्राम फेकारी पहुंचे मंत्री  यादव कार्यक्रम से लौटते समय सेलूद चौक स्थित हाईस्कूल के विद्यार्थियों से मिले। शिक्षा मंत्री को अपने बीच पाकर बच्चों में उत्साह दिखाई दिया और उन्होंने खुलकर अपनी पढ़ाई, स्कूल की गतिविधियों और आवश्यकताओं के बारे में चर्चा की। स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय, सेलूद की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्री  यादव ने स्कूल परिसर में साइकिल स्टैंड, बाउंड्रीवाल एवं वॉलीबॉल ग्राउंड के निर्माण की घोषणा की। 

     शिक्षा मंत्री  यादव ने विद्यार्थियों से पढ़ाई, तिमाही परीक्षा की तैयारी, स्कूल की गतिविधियों और खेल-कूद के बारे में जानकारी ली। आत्मीय संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर में प्रार्थना शेड एवं मंच निर्माण की आवश्यकता बताई। बच्चों की मांग पर मंत्री  यादव ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करते हुए प्रार्थना शेड एवं मंच निर्माण के निर्देश दिए।

     शिक्षा मंत्री  यादव ने विद्यार्थियों से चर्चा करते हुए कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीक का है। विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के साथ तकनीकी ज्ञान में भी दक्ष होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में गूगल, एक्सेल सहित विभिन्न संस्थाओं एवं कंपनियों के सहयोग से बच्चों को एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। विद्यार्थियों के लिए इंग्लिश लर्निंग कोर्स शुरू करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

    इसके बाद शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय, सेलूद पहुंचे और विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने प्राचार्य एवं शिक्षकों से शैक्षणिक व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। प्राचार्य ने बताया कि विद्यालय में शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण, खेल सुविधाएं और आवश्यक आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

  • कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन को बताया आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम

    कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन को बताया आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम

    भोपाल

    किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव का जिला स्तरीय कार्यक्रम सोमवार को कृषि उपज मंडी, चंगेरा, नीमच में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खंडवा जिले से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए नीमच के किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने किसानों से कृषि गतिविधियों, शासन की किसान हितैषी योजनाओं से मिल रहे लाभ, कृषि क्षेत्र में नवाचार तथा किसानों की आवश्यकताओं के संबंध में बात की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीमच जिला उन्नत कृषि, आधुनिक खेती एवं कृषि व्यापार के क्षेत्र में प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। जिले में अश्वगंधा, इसबगोल, तुलसी, सतावरी, चिरायता, आंवला, बहेरा और नीम सहित विभिन्न औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। चिया सीड, लहसुन, मेथी एवं धनिया सहित अनेक कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं व्यापार में भी नीमच की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ एवं आधारशिला बताया।

    नीमच मंडी की बढ़ती आवक और आय का किया उल्लेख

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीमच कृषि उपज मंडी की कृषि व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि नीमच मंडी ए-ग्रेड मंडी है और औषधीय फसलों के व्यापार के लिए एशिया के प्रमुख केंद्रों में अपनी पहचान रखती है। वर्ष 2023-24 में मंडी में 53.46 लाख क्विंटल कृषि उपज की आवक हुई थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 72 लाख क्विंटल हो गई। इसी अवधि में मंडी की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 34.5 करोड़ रुपये हो गई।

    प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले में 10 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण तथा कृषि के साथ अन्य आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

    सिंचाई परियोजनाओं से बढ़ेगा कृषि क्षेत्र का दायरा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए संचालित परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुरा-मनासा सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना से 212 गांवों की 67 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित हो सकेगी। इसी प्रकार जावद-नीमच एवं खुमान सिंह शिवाजी सिंचाई योजनाओं के पूर्ण होने से एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जिले में कृषि का रकबा बढ़ेगा तथा बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलेगा।

    चीता परियोजना से पर्यटन और रोजगार की नई संभावनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधीसागर अभयारण्य में चीता परियोजना के आने से नीमच जिले में पर्यटन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा नीमच को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।

    कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्यपालन पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन एवं मत्स्यपालन को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने तथा गांधीसागर जलाशय सहित जिले में मत्स्य उत्पादन से जुड़े परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

    मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, जावद विधायक  ओमप्रकाश सकलेचा, नीमच विधायक  दिलीप सिंह परिहार, मनासा विधायक  अनिरुद्ध माधव मारू ने संबोधित किया।

    प्रगतिशील किसानों एवं मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

    कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील किसानों  श्याम कारपेंटर,  हरीश पाटीदार,  किशोर कुमार पाटीदार एवं  अनिल धाकड़ को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं 11 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। महोत्सव में कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, आधुनिक कृषि पद्धतियों, फसल उत्पादन, पशुपालन तथा किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी गई। आयोजन स्थल पर कृषि एवं विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं और कृषि तकनीकों से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई।

    कार्यक्रम में कलेक्टर  हिमांशु चंद्रा, अपर कलेक्टर  बी.एस. कलेश,  जयपाल सिंह चावड़ा, कप्तान सिंह,  कपिल यार्डे,  वंदना खंडेलवाल, नगर पालिका अध्यक्ष  स्वाति चोपड़ा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, हितग्राही एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

     

  • गांवों के ऐसे नाम नहीं सुने होंगे! यूपी में ‘कोरोना’ से ‘पनौती’ तक अजब नामों

    गांवों के ऐसे नाम नहीं सुने होंगे! यूपी में ‘कोरोना’ से ‘पनौती’ तक अजब नामों

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जिनके नाम इतने अटपटे हैं कि लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते। इन गांवों में रहने वाले लोग अपने गांव के नामों को लेकर इतने परेशान हैं कि नाम बदलने के लिए कई प्रयास कर चुके हैं। आज हम आपको इन्हीं अजब-गजब गांवों के बारे में बताने वाले हैं, जिनके नाम सुनकर आप भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।

    कोरोना
    सीतापुर जिले की मिश्रित तहसील में स्थित इस गांव का नाम महामारी कोरोना से काफी पहले से रखा गया है। लेकिन ये गांव कोरोना संक्रमण के दौरान ही चर्चा में आया था। इस नाम की वजह से ग्रामीणों को कई बार अजीब स्थिति का सामना करना पड़ता है।

    पनौती
    पनौती का अर्थ अक्सर हम बूरी किस्मत वाले को कहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा भी एक गांव है जिसका नाम ही पनौती है। चित्रकूट जिले में स्थित इस गांव के लोग अपने गांव के नाम से ही परेशान हैं। यहां के ग्रामीण अपने गांव का नाम बदलने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं।

    रण्डौली
    उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिला की जयसिंहपुर तहसील के अंतर्गत आने वाला रण्डौली गांव अपने नाम बदलने की वजह से काफी चर्चा में रहा है। इस गांव का नाम अजीब होने के कारण यहां के निवासियों को दूसरों को अपने गांव का नाम बताने में शर्मिंदगी महसूस होती थी। हालांकि लंबे प्रयास के बाद इस गांव का नाम वर्ष 2017 में बदलकर अन्नपूर्णा नगर कर दिया गया है।

    मुंहकुचवां
    यूपी के मीरजापुर जिले में मुहकुचवां गांव का नाम अजीबोगरीब है। जब भी लोग इस गांव के नाम को सुनते हैं तो अपनी हंसी नहीं रोक पाते। मुहकुचवां गांव की कुल आबादी करीब दो हजार है। ये गांव मीरजापुर शहर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है।

    लोलपुर
    उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की तरबगंज तहसील में स्थित लोलपुर गांव का नाम Lol (लाफ ऑफ लाउड) से मिलता-जुलता है, जो सुनने में काफी अनोखा लगता है। अपने इस अनोखे नाम की वजह से ये गांव भी काफी चर्चा में रहा है।

    गंज्हेड़ी
    सुल्तानपुर जिले में स्थित इस गांव का नाम भी काफी अजीब और हास्यास्पद माना जाता है। यहां के लोग अपने गांव के नाम को लेकर काफी परेशान हैं। बाहरी लोग अक्सर इस गांव के नाम का मजाक बनाते हैं।

    भैंसा
    मथुरा जिले में 'भैंसा' नाम का गांव है। जानवर से जुड़े नाम वाले इस गांव के बारे में पहली बार सुनने वाले लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं।

    बालमपुर
    सुल्तानपुर जिले के भदैयां ब्लॉक में स्थित बालामपुर गांव अपने नाम को लेकर काफी प्रसिद्ध है। यहां कि महिलाएं अपने गांव का नाम बताने में अक्सर शर्मा जाती हैं।

  • आईटीआई प्रवेश के पांचवें चरण की प्रक्रिया शुरू, 11 अक्टूबर तक होंगे ऑनलाइन आवेदन

    आईटीआई प्रवेश के पांचवें चरण की प्रक्रिया शुरू, 11 अक्टूबर तक होंगे ऑनलाइन आवेदन

    लखनऊ

    योगी सरकार की युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की नीति के तहत प्रदेश के राजकीय एवं निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रशिक्षण सत्र 2026-27 के पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चतुर्थ चरण की प्रवेश प्रक्रिया 3 अक्टूबर को पूरी होने के बाद रिक्त रह गई सीटों के सापेक्ष यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 6 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि तक ऑनलाइन आवेदन और विकल्प भर सकेंगे।

    राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी), उत्तर प्रदेश के अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि पंचम चरण में राजकीय आईटीआई के पूर्व पंजीकृत लेकिन प्रवेश से वंचित अभ्यर्थियों को नए विकल्प भरने का अवसर दिया गया है। वहीं राजकीय एवं निजी आईटीआई में प्रवेश के लिए नए अभ्यर्थी भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

    पूर्व पंजीकृत अभ्यर्थी बदल सकेंगे विकल्प

    राजकीय आईटीआई की प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय चरण में अचयनित अथवा चयनित होने के बावजूद प्रवेश न ले पाने वाले अभ्यर्थी परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपनी पंजीकरण संख्या और जन्मतिथि दर्ज कर रिक्त व्यवसायों एवं इच्छित संस्थानों के लिए पुनरीक्षित विकल्प भर सकेंगे। अभ्यर्थियों को लिंग, उपवर्ग एवं शैक्षिक अर्हता संबंधी विवरण भी पुनः पंजीकृत करने का अवसर मिलेगा। यदि कोई अभ्यर्थी नए विकल्प दर्ज नहीं करता है तो उसे मूल आवेदन में दिए गए विकल्पों के आधार पर ही पंचम चरण की सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा राजकीय संस्थानों में पहले प्रवेश लेने के बाद किसी कारणवश नाम कटवा चुके अभ्यर्थी भी इस चरण में आवेदन कर सकेंगे।

    नए अभ्यर्थियों को भी मिलेगा मौका

    राजकीय एवं निजी आईटीआई में नए सिरे से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को परिषद की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। आवेदन के बाद डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग अथवा यूपीआई के माध्यम से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पेमेंट गेटवे से शुल्क जमा किया जा सकेगा। शुल्क भुगतान के बाद अभ्यर्थी आवेदन पत्र का प्रिंट आउट प्राप्त कर सकेंगे।

    श्रेणीवार निर्धारित है आवेदन शुल्क

    सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण शुल्क 300 रुपये, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 250 रुपये तथा सभी महिला अभ्यर्थियों के लिए 100 रुपये निर्धारित किया गया है। ऑनलाइन आवेदन एवं विकल्प भरने की प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2026 से 11 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

    रिक्त सीटों की जानकारी वेबसाइट पर होगी उपलब्ध

    अधिशासी निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि चतुर्थ चरण के बाद बची रिक्त सीटों का जनपदवार, संस्थानवार और व्यवसायवार विवरण परिषद की अधिकृत वेबसाइट पर देखा जा सकता है। अभ्यर्थी संबंधित आईटीआई के कार्यालय से भी रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी आईटीआई के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने संस्थानों में रिक्त सीटों की व्यवसायवार अद्यतन स्थिति अनिवार्य रूप से सूचना पट पर प्रदर्शित करें, ताकि अभ्यर्थियों को विकल्प चयन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की राह आसान करने पर जोर

    योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। आईटीआई जैसे संस्थानों में तकनीकी प्रशिक्षण युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पंचम चरण की प्रवेश प्रक्रिया के जरिए रिक्त सीटों को भरने से अधिक से अधिक युवाओं को स्किल डेवलपमेंट और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

  • चन्नी को कांग्रेस हाईकमान की बड़ी जिम्मेदारी, तीसरी बार सौंपी कृषि समिति की कमान

    चन्नी को कांग्रेस हाईकमान की बड़ी जिम्मेदारी, तीसरी बार सौंपी कृषि समिति की कमान

    चंडीगढ़.

    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी पर पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर भरोसा जताया है। संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन के बाद चन्नी को लगातार तीसरी बार कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मत्स्य पालन संबंधी स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

    जताया पार्टी प्रमुखों का आभार
    चन्नी ने इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का आभार जताया है। चन्नी ने कहा कि वह किसानों की सेवा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी ईमानदारी, लगन और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे। चन्नी सितंबर 2024 से इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े मंत्रालयों की नीतियों, योजनाओं, बजट और कामकाज की समीक्षा करती है।

    दो साल में दो संसद रत्न सम्मान
    चन्नी के संसदीय प्रदर्शन को हाल के वर्षों में लगातार पहचान मिली है। वर्ष 2025 में उन्हें व्यक्तिगत संसदीय प्रदर्शन के लिए संसद रत्न सम्मान मिला था। वहीं 2026 में उनके नेतृत्व वाली कृषि संबंधी स्थायी समिति को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संसद रत्न सम्मान दिया गया।

  • निवेश के नक्शे पर MP की बड़ी छलांग, SING फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ की FDI प्रतिबद्धताएं

    निवेश के नक्शे पर MP की बड़ी छलांग, SING फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ की FDI प्रतिबद्धताएं

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ ने आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धताएं प्राप्त कीं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस के लिए ₹41,750 करोड़ की एक बड़ी निवेश प्रतिबद्धता शामिल है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने फोरम में राज्य के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जहां छत्तीसगढ़ भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सहभागिता कर रहा था।

    यह महत्वपूर्ण निवेश प्रतिबद्धता सिंगापुर मुख्यालय वाली एनर्जी कैपिटल ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आई है, जो छत्तीसगढ़ में 100 मेगावाट क्षमता का एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करेगी। एनर्जी कैपिटल ग्लोबल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऑन-साइट स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर्स का विकास और वित्तपोषण करती है तथा इसकी उपस्थिति सिंगापुर, भारत, मलेशिया, कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में है। मुख्यमंत्री ने फोरम में कंपनी को ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ सौंपा।

    यह निवेश प्रतिबद्धता छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को और गति देती है। राज्य में पहले से ही भारत का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित है। ये परियोजनाएं मिलकर छत्तीसगढ़ को भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।

    एनर्जी कैपिटल ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  स्टानिस्लाव बोरिसोव ने कहा, “एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जिस ऊर्जा, भूमि और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है, वह आज छत्तीसगढ़ में उपलब्ध है। यह एमओयू एक दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत है। हम मध्य भारत में सबसे बड़ा एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस विकसित करने, राज्य में अंतरराष्ट्रीय पूंजी और विशेषज्ञता लाने तथा इसके संचालन के लिए छत्तीसगढ़ के इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साहित हैं।”

    राज्य को सनस्ट्रीम ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से सोलर क्षेत्र के साथ-साथ संबंधित बैटरी स्टोरेज और कंपोनेंट्स के लिए ₹1,500 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्ताव भी प्राप्त हुआ। 

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ये निवेश प्रतिबद्धताएं छत्तीसगढ़ की नीतियों, संभावनाओं और लोगों के प्रति विश्वास का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य के और करीब ले जाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी के साथ एक फायरसाइड चैट में भी हिस्सा लिया, जिसका संचालन सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा किया गया। छत्तीसगढ़ का पक्ष प्रभावी ढंग से रखते हुए उन्होंने कहा, “हम बंद कमरों में चर्चा करके सुधार नहीं लाते। हम सीधे उद्योग जगत से उनकी कठिनाइयों के बारे में पूछते हैं और उसके अनुरूप अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करते हैं। 450 से अधिक सुधार किए जा चुके हैं और यह ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ तब तक नहीं रुकेगी, जब तक लोग स्वयं यह न कहें कि अब और सुधार की आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने कहा कि सुधारों, प्रगतिशील औद्योगिक नीति और सक्रिय सरकार के इस संयोजन के कारण छत्तीसगढ़ को केवल 18 महीनों में ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

    सिंगापुर सरकार के विदेश मंत्रालय तथा व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की राज्य मंत्री सु गैन सियो ह्वांग फोरम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनकी उपस्थिति ने भारतीय राज्यों के साथ आर्थिक संबंधों को और गहरा करने को सिंगापुर द्वारा दिए जा रहे महत्व को रेखांकित किया। मास्टरकार्ड, आईएचसीएल (ताज होटल्स) और नेस्ले सहित वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

    फोरम के इतर मुख्यमंत्री ने एक्वाटेक और एड्रॉइट ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन चर्चाओं में उद्योगों के लिए अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से संबंधित अधोसंरचना और छत्तीसगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण के व्यापक अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

    मुख्यमंत्री 6 अक्टूबर 2026 को CEO राउंडटेबल में सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और फोरम से बनी निवेश की गति को आगे बढ़ाएंगे।

  • छत्तीसगढ़ में नर्सिंग स्टाफ का बड़ा आंदोलन, ग्रेड-पे बढ़ाने की मांग पर 7 अक्टूबर से प्रदर्शन

    छत्तीसगढ़ में नर्सिंग स्टाफ का बड़ा आंदोलन, ग्रेड-पे बढ़ाने की मांग पर 7 अक्टूबर से प्रदर्शन

    रायपुर.

    प्रदेशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ ने ग्रेड पे बढ़ाए जाने की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। एसोसिएशन के मुताबिक 7 अक्टूबर 2026 से चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

    पहले चरण में 7 अक्टूबर को भोजन अवकाश के दौरान प्रदेश के ब्लॉक और जिला स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों के बाहर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव के नाम का ज्ञापन अपने संस्था प्रमुख तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
    आंदोलन के अगले चरण में 30 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर में प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन और महारैली प्रस्तावित है। एसोसिएशन ने बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ के इस प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही है। वहीं, मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 18 नवंबर 2026 से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है।

    संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ का ग्रेड पे बढ़ाए जाने की मांग को लेकर 2018 में आंदोलन किया गया था। आंदोलन के दौरान नर्सेस को जेल में ठूंस दिया गया था। कठोर यातनाएं दी गईं थी, जिसके पश्चात नर्सेस की लंबित मांगों के निराकरण के लिए शासन द्वारा कमेटी गठन कर ग्रेड पे बढ़ाने संबंधी अनुशंसाएं की गई थी, लेकिन वह अनुशंसा आज 8 साल बीत जाने के बावजूद लागू नहीं की गई। उन्होंने कहा, नर्सों ने विगत कई वर्षों से लिखित, मौखिक अनेक निवेदन और पत्राचार मंत्रियों अधिकारियों से किया है, लेकिन एक भी मांग आज तक पूरी नहीं हुई। मांगों के निराकरण न होने की दशा में 2023 में भी नर्सेस द्वारा छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन के बैनर तले आंदोलन किया गया। फिर भी कोई निराकरण नहीं हुआ। बदले में 2500 से भी अधिक कर्मचारियों को निलंबन और बर्खास्तगी की सजा भुगतनी पड़ी थी। ऐसे में अब प्रदेशभर के स्टाफ नर्स और नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारी निराश और आक्रोशित होकर आंदोलन का रुख करने को विवश हो रहे हैं।

    नर्सों ने इस बार स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर इस बार ग्रेड पे में वृद्धि नहीं की गई तो 30 अक्टूबर को प्रदेशभर की नर्सेस राजधानी में विशाल महारैली का आयोजन करेंगे। दिवाली तक उनकी मांगें नहीं मानी गई तो उसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन का आगाज होगा। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। इसकी सूचना सरकार को दे दी गई है।

  • स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    स्वच्छ और हरित स्कूलों की दिशा में यूपी ने रचा नया रिकॉर्ड, SHVR में 1.62 लाख विद्यालयों की भागीदारी

    योगी सरकार में स्वच्छ-हरित विद्यालयों का बढ़ा कारवां, एसएचवीआर में 1.62 लाख स्कूलों ने दर्ज कराई भागीदारी

    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग में प्रदेश के 2.66 लाख स्कूलों में 1.86 लाख में शुरू हुई प्रक्रिया, 1.79 लाख का पंजीकरण

    1,62,054 विद्यालयों ने दर्ज कराई सहभागिता, प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत

     कानपुर देहात 83.17% के साथ प्रदेश में शीर्ष पर, मुजफ्फरनगर 82.24% और भदोही 77.62% के साथ टॉप-3 में

    कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ टॉप-5 में शामिल 

    – स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को विद्यालयी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में व्यापक सहभागिता सामने आई है। ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ यानी एसएचवीआर (SHVR—स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग) 2026-27 में 5 अक्टूबर तक प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 में प्रक्रिया शुरू, 1,79,793 विद्यालयों का पंजीकरण और 1,62,054 विद्यालयों द्वारा सहभागिता पूर्ण की गई है। प्रदेश का अंतिम पूर्णता प्रतिशत 60.83 प्रतिशत दर्ज हुआ है।

    एसएचवीआर 2026-27 की यह स्थिति उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना के प्रति व्यापक सहभागिता को रेखांकित करती है। प्रदेश के अनेक जनपदों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है।

    स्वच्छता से हरित चेतना तक विद्यालयों की भागीदारी
    एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छ एवं हरित वातावरण को प्रोत्साहित करने के लिए निर्धारित गतिविधियों और मानकों में विद्यालयों की सहभागिता को दर्ज किया जाता है। जनपदवार रिपोर्ट प्रदेश के सभी 75 जनपदों के विद्यालयों की स्थिति को दर्शाती है।

    कानपुर देहात प्रदेश में शीर्ष पर
    जनपदवार आंकड़ों में कानपुर देहात 83.17% अंतिम पूर्णता प्रतिशत के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जनपद के कुल 2,876 विद्यालयों में से 2,392 विद्यालयों ने पूर्णता दर्ज की है। मुजफ्फरनगर 82.24% के साथ दूसरे और भदोही 77.62% के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद कौशांबी 75.22% और ललितपुर 73.78% के साथ शीर्ष पांच में शामिल हैं।

    टॉप-10 में शामिल जनपद
    अंतिम पूर्णता प्रतिशत के आधार पर टॉप-10 में कानपुर देहात (83.17%), मुजफ्फरनगर (82.24%), भदोही (77.62%), कौशांबी (75.22%), ललितपुर (73.78%), बाराबंकी (73.52%), रामपुर (71.90%), मऊ (71.50%), बुलंदशहर (70.25%) और सहारनपुर (68.90%) शामिल हैं।

    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सहभागिता
    पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विद्यालयों की व्यापक सहभागिता दर्ज हुई है। वाराणसी में 67.58%, मिर्जापुर में 68.29%, सोनभद्र में 68.51%, गोरखपुर में 60.83%, बुलंदशहर में 70.25% और सहारनपुर में 68.90% अंतिम पूर्णता प्रतिशत दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सामने आती है।

    1.86 लाख विद्यालयों में शुरू हुई भागीदारी
    प्रदेश के कुल 2,66,408 विद्यालयों में 1,86,196 विद्यालयों में एसएचवीआर की प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि 1,79,793 विद्यालयों ने पंजीकरण कराया और 1,62,054 विद्यालयों ने इसे पूर्ण किया। यह आंकड़ा प्रदेशभर में एसएचवीआर 2026-27 के प्रति विद्यालयों की व्यापक और सक्रिय सहभागिता को रेखांकित करता है।

    कोट:
    स्वच्छ एवं हरित विद्यालय स्वस्थ और जागरूक पीढ़ी की आधारशिला हैं। एसएचवीआर के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छता, हरित परिवेश और पर्यावरणीय चेतना को और मजबूत किया जा रहा है।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    कोट:
    एसएचवीआर विद्यालयों को स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों के प्रति सक्रिय बनाने का प्रभावी माध्यम है। व्यापक सहभागिता से स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों की दिशा में सकारात्मक बदलाव को गति मिलेगी।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • चीतों के लिए बड़ी खुशखबरी! कूनो में जन्मे 5 नन्हे शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    चीतों के लिए बड़ी खुशखबरी! कूनो में जन्मे 5 नन्हे शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    कूनो में गूंजी चीतों की नई पीढ़ी की किलकारी

    भारतीय धरा पर जन्मे शावकों की पीढ़ी ले रही अंगड़ाईयां
    मादा चीता केजेपी-21 ने 5 स्वस्थ शावकों को दिया जन्म
    चीतों की संख्या अब बढ़कर हुई 60
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट चीते से जुड़ी टीम को दी बधाई

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उ़़द्यान में चीता प्रोजेक्ट अंतर्गत 5 अक्टूबर सोमवार को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई। भारतीय धरती पर जन्मी 32 माह की मादा चीता केजेपी-21 ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या बढ़कर अब 60 हो गई है, इसमें से 41 भारतीय धरती पर जन्में चीते शामिल है। भारत में जन्मी मादा चीता केजेपी-12 और मुखी के बाद केजेपी-21 तीसरी मादा चीता है, जिसने भारतीय धरती पर शावकों को जन्म दिया। यह उपलब्धि देश में चीता संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के प्रयासों की सफलता और चीतों की नई पीढ़ी की विस्तार की दिशा में मील का पत्थर है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रोजेक्ट चीता से जुड़े वन्य अधिकारियों, पशु चिकित्सकों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम तथा सभी सहयोगियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासों से भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। नन्हें मेहमानों के आगमन से कूनो की धरती पर एक बार फिर वन्य जीव संरक्षण की नई उम्मीद ने जन्म लिया है।

    बोत्सवाना की नई जेनेटिक लाइन की शुरुआत
    इन पांच शावकों के जन्म की एक और खासियत है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। ऐसे में इन शावकों के साथ भारत में बोत्सवाना की जेनेटिक लाइन की भी शुरुआत हुई है। इससे देश में विकसित हो रहे चीता कुनबे में नई आनुवंशिक विविधता जुड़ने की उम्मीद है।

    भारत में जन्मे चीतों का आंकड़ा 40 के पार
    पांच नए शावकों के जन्म के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या अब 60 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में लगातार हो रहे प्रजनन को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधन टीम और अन्य कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर जन्मी चीतों की यह नई पीढ़ी देश में चीता पुनर्स्थापना की कहानी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रही है।

     

    भारत में बोत्सवाना वंशावली की हुई शुरूआत

    केजेपी-21 के पाँच शावकों का जन्म एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी लेकर आया है। इनके पिता बोत्स्वाना के लाया गया नर चीता है। इन शावकों के जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना वंशावली की शुरूआत हुई है। इससे देश में बढ़ती चीता आबादी में एक नई अनुवांशिक वंशावली का समावेश हुआ है।

    चीता पुनर्स्थापना अभियान में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ा

    भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की उल्लेखनीय यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यह उपलब्धि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिये निरंतर किये जा रहे वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को भी रेखांकित करती है।