Author: NewseDay

  • चीतों के लिए बड़ी खुशखबरी! कूनो में जन्मे 5 नन्हे शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    चीतों के लिए बड़ी खुशखबरी! कूनो में जन्मे 5 नन्हे शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    कूनो में गूंजी चीतों की नई पीढ़ी की किलकारी

    भारतीय धरा पर जन्मे शावकों की पीढ़ी ले रही अंगड़ाईयां
    मादा चीता केजेपी-21 ने 5 स्वस्थ शावकों को दिया जन्म
    चीतों की संख्या अब बढ़कर हुई 60
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट चीते से जुड़ी टीम को दी बधाई

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उ़़द्यान में चीता प्रोजेक्ट अंतर्गत 5 अक्टूबर सोमवार को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई। भारतीय धरती पर जन्मी 32 माह की मादा चीता केजेपी-21 ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या बढ़कर अब 60 हो गई है, इसमें से 41 भारतीय धरती पर जन्में चीते शामिल है। भारत में जन्मी मादा चीता केजेपी-12 और मुखी के बाद केजेपी-21 तीसरी मादा चीता है, जिसने भारतीय धरती पर शावकों को जन्म दिया। यह उपलब्धि देश में चीता संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के प्रयासों की सफलता और चीतों की नई पीढ़ी की विस्तार की दिशा में मील का पत्थर है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रोजेक्ट चीता से जुड़े वन्य अधिकारियों, पशु चिकित्सकों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम तथा सभी सहयोगियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासों से भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। नन्हें मेहमानों के आगमन से कूनो की धरती पर एक बार फिर वन्य जीव संरक्षण की नई उम्मीद ने जन्म लिया है।

    बोत्सवाना की नई जेनेटिक लाइन की शुरुआत
    इन पांच शावकों के जन्म की एक और खासियत है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। ऐसे में इन शावकों के साथ भारत में बोत्सवाना की जेनेटिक लाइन की भी शुरुआत हुई है। इससे देश में विकसित हो रहे चीता कुनबे में नई आनुवंशिक विविधता जुड़ने की उम्मीद है।

    भारत में जन्मे चीतों का आंकड़ा 40 के पार
    पांच नए शावकों के जन्म के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या अब 60 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में लगातार हो रहे प्रजनन को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधन टीम और अन्य कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर जन्मी चीतों की यह नई पीढ़ी देश में चीता पुनर्स्थापना की कहानी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रही है।

     

    भारत में बोत्सवाना वंशावली की हुई शुरूआत

    केजेपी-21 के पाँच शावकों का जन्म एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी लेकर आया है। इनके पिता बोत्स्वाना के लाया गया नर चीता है। इन शावकों के जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना वंशावली की शुरूआत हुई है। इससे देश में बढ़ती चीता आबादी में एक नई अनुवांशिक वंशावली का समावेश हुआ है।

    चीता पुनर्स्थापना अभियान में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ा

    भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की उल्लेखनीय यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यह उपलब्धि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिये निरंतर किये जा रहे वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को भी रेखांकित करती है।

     

  • एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों का जलवा, निर्मला भूरिया बोलीं- दुनिया ने देखा नारी शक्ति का दम

    एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों का जलवा, निर्मला भूरिया बोलीं- दुनिया ने देखा नारी शक्ति का दम

    एशियन गेम्स में दुनिया ने देखा भारत की नारी शक्ति का दम

     निर्मला भूरिया

    भोपाल

    एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को 85 पदक दिलाए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के खाते में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक आए। इस उपलब्धि की सबसे गौरवपूर्ण तस्वीर यह है कि महिला खिलाड़ियों ने 38 पदक अपने नाम किए, जो पुरुष खिलाड़ियों के बराबर हैं। इनमें 11 स्वर्ण पदक महिला खिलाड़ियों और महिला टीमों ने जीते।

    भारत की बेटियों का यह प्रदर्शन केवल खेल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत और सशक्त होती नारी शक्ति की तस्वीर है। क्रिकेट में भारतीय महिला टीम ने स्वर्ण जीतकर देश का गौरव बढ़ाया, वहीं महिला कबड्डी और महिला हॉकी टीम ने भी स्वर्णिम सफलता हासिल की। महिला हॉकी टीम की स्वर्णिम वापसी विशेष रूप से ऐतिहासिक रही, जिसने 44 वर्ष बाद एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों की सफलता महिला सशक्तिकरण की सबसे प्रभावशाली तस्वीर है। आज हमारी बेटियां केवल खेल के मैदान में पदक नहीं जीत रहीं, बल्कि वे देश की करोड़ों बेटियों के सपनों को भी नई दिशा दे रही हैं। उनकी सफलता यह विश्वास मजबूत करती है कि बेटी को अवसर, प्रोत्साहन और विश्वास दिया जाए तो वह किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकती है।

    व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी भारतीय बेटियों ने नए इतिहास रचे। कुमकुम मोहोड ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में भारत के लिए पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीता। महिला रिकर्व टीम ने भी स्वर्ण अपने नाम किया। निशानेबाजी में नीरू धांडा ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन और परवीन हुड्डा ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि गोल्फ में प्रणवी उर्स ने भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया। मीराबाई चानू ने भारोत्तोलन में रजत पदक जीतकर भारत के लिए इस खेल में लंबे अंतराल के बाद पदक दिलाया।

    इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में मध्यप्रदेश की बेटियों ने भी अपनी प्रतिभा और मेहनत का परचम लहराया। प्रदेश की क्रिकेटर क्रांति गौड़ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा बनीं। छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचकर स्वर्ण पदक जीतना उनकी मेहनत और संघर्ष की प्रेरक कहानी है। निशानेबाजी में मध्यप्रदेश की नीरू ढांडा ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने ट्रैप मिक्स्ड टीम में भी स्वर्ण और महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। इस तरह नीरू ने एशियन गेम्स में तीन पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया। निशानेबाजी में ही मध्यप्रदेश की आशी चौकसे ने महिला 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि मनीषा कीर ने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया। इसी तरह मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय सेलर हर्षिता तोमर ने 49er FX महिला स्किफ ईवेंट में कांस्य पदक हासिल किया है।

    भारतीय महिला हॉकी टीम की स्वर्णिम सफलता में भी मध्यप्रदेश की बेटियों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। ईशिका चौधरी, बिच्छू देवी और सुशीला चानू भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं, जिसने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। एक बेटी की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार, समाज और देश की सोच को बदलने की ताकत रखती है। एशियन गेम्स में बेटियों की सफलता उन सभी परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी बेटियों को खेल, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए वातावरण तैयार हुआ है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से लेकर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने तक की सोच अब जमीन पर दिखाई दे रही है। मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बेटियों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

    एशियन गेम्स की बेटियों की सफलता हमें यह संदेश देती है कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं और नारों तक सीमित नहीं है। सच्चा सशक्तिकरण तब है, जब बेटी अपने सपनों का रास्ता स्वयं चुन सके, अपनी प्रतिभा को पहचान सके और अपनी मेहनत के बल पर दुनिया के सामने अपनी पहचान बना सके। आज कुमकुम मोहोड, नीरू धांडा, लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा, प्रणवी उर्स, मीराबाई चानू और भारतीय महिला टीमों की उपलब्धियां देश की हर बेटी को यह संदेश दे रही हैं—आसमान कोई सीमा नहीं है।

    एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों ने पदक जीतकर सिर्फ तिरंगा नहीं ऊंचा किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण की नई इबारत भी लिखी है। यह उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा बनेंगी और उन्हें यह विश्वास देंगी कि उनके सपनों को पूरा करने के लिए देश उनके साथ खड़ा है।

     

  • करीब 161 करोड़ की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास भी बनाये जायेंगे, आश्रम स्कूलों को दिए जाएंगे 143 करोड़ रुपए

    करीब 161 करोड़ की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास भी बनाये जायेंगे, आश्रम स्कूलों को दिए जाएंगे 143 करोड़ रुपए

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती ने प्रजा के सुख को ही अपना धर्म माना था। उनका शासनकाल कृषि, जल प्रबंधन और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। यह रानी दुर्गावती की प्रशासनिक दक्षता का ही कमाल था कि गोंड साम्राज्य के हजारों गांव समृद्धि का केंद्र बन गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती अदम्य साहस, अटल स्वाभिमान और शक्ति की प्रतीक थीं। उन्होंने जीवनकाल में 52 युद्ध लड़े और 51 में विजय प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती के दिखाए मार्ग पर चलकर हमारी सरकार प्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के कल्याण और विकास का एक नया अध्याय लिख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को खंडवा जिले के हरसूद के ग्राम छनेरा में हुए वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती उत्सव एवं तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण तथा पंच कलश के जरिये गोगोपूजन एवं बड़ादेव का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार गोंडवाना साम्राज्य के तत्कालीन 52 गढ़ों के राजशासकों के वर्तमान वंशजों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन राजवंशजों को साफा पहनाकर तथा खड्ग एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां खंडवा जिले के साथ बुरहानपुर, बड़वानी, खरगौन, देवास और हरदा के 3 लाख 54 हजार से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को 21 करोड़ 34 लाख रुपए से अधिक की बोनस राशि का वितरण किया। इसमें खंडवा के 32 हजार 846 तेंदूपत्ता संग्राहक भी शामिल हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने खंडवा वन मंडल क्षेत्र की 56 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के 26 हजार 400 से अधिक हितग्राहियों को 4 करोड़ 58 लाख रुपए के काष्ठ लाभांश की राशि भी वितरित की। मुख्यमंत्री ने खंडवा जिले में लगभग 143 करोड़ रुपए की लागत से 18 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसमे लगभग 48 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न हाई स्कूल भवनों और छात्रावासों के साथ लगभग 20 करोड़ रूपए की लागत से खालवा में खेल परिसर का भूमिपूजन के साथ ही 68 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत से 3 सामुदायिक एवं सांस्कृतिक भवनों की सौगात भी शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर क्षेत्रीय विकास एवं सुविधा उन्नयन से जुड़ी विभिन्न घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 5 साल में सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। इसी उद्देश्य से हरसूद विधानसभा क्षेत्र में करवानी उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां के जनजातीय क्षेत्रों में 25 करोड़ की लागत से बिजली आपूर्ति से जुड़े सभी विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि खालवा तहसील क्षेत्र में 6 सांदीपनि विद्यालय बनाए जायेंगे। हरसूद में 490 सीटर नया कन्या छात्रावास बनेगा। इस क्षेत्र के सभी छात्रावासों में 34 करोड़ की लागत से रोटी मेकर मशीनें लगाई जायेंगी। छात्रावासों में वॉटर कूलर लगाए जाएंगे। यहां के छात्रावासों में ई-लाइब्रेरी बनाई जायेगी। करीब 161 करोड़ की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास बनाये जायेंगे। यहां के आश्रम स्कूलों को विकास कार्यों के लिए 143 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। खंडवा में 10 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से एक हाइटेक नर्सरी बनाई जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हरसूद सहित खंडवा जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनाये जायेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार विरासत से विकास के संकल्प से साथ गरीब से गरीब के जीवन में रोशनी लाने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए पंख लगाने का काम किया है। वीरांगना रानी दुर्गावती के जन्मोत्सव में आज 52 गढ़ों के राजवंशजों का सम्मान कर जीवन धन्य हो गया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती के जीवन से हमें राष्ट्र प्रथम, स्वाभिमान, विषम परिस्थितियों में नेतृत्व कौशल, नारी शक्ति का सम्मान, जल संचय, जंगल और प्रकृति के संरक्षण की सीख मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत को सम्मान देते हुए सरकार ने प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक 750 रुपये से बढ़ाकर 4 हजार रुपये किया है तथा शुद्ध लाभ का 75 प्रतिशत बोनस के रूप में दिया जा रहा है। आज खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, देवास और हरदा सहित कुल 6 जिलों के 3 लाख 54 हजार 126 तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस राशि दी गई है। उन्होंने कहा कि 32 लघुवनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर वनवासियों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मेडिकल की पढ़ाई के लिए गरीब बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी और लैपटॉप बांटे गए हैं। शासकीय स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क किताबें और साइकिलें दी गई हैं। प्रदेश के 85 हजार युवाओं को शासकीय पदों पर नौकरी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी साल राज्य में 1 लाख करोड़ रूपए की लागत से जनकल्याण और विकास के काम कराए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश के गांव-गांव तक मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों को भी सुगम परिवहन की बसों का लाभ मिलेगा। प्रदेश में कानून का राज है। राज्य सरकार ने बालाघाट और मंडला जिले से नक्सलवाद की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों में ग्रामीण आबादी को नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ दिया जा रहा है। किसानों की समृद्धि के लिए दिन में भी 10 घंटे बिजली देने की शुरुआत की जा रही है। कृषक कल्याण वर्ष में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित कर अन्नदाताओं को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर धाम को पीएम हेली सेवा से जोड़ा गया है। प्रदेश में गरीब जरूरतमंदों को एयर एम्बुलेंस की सुविधा मिल रही है। राहवीर योजना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

    केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास ऊइके ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर अग्रसर है। आज वीरांगना रानी दुर्गावती जन्मोत्सव में 52 गढ़ों के राजवंशजों का सम्मान किया गया है। पहली बार हमें इतिहास का सिंहावलोकन करने का अवसर मिला है। देश में 2014 के बाद बड़ा बदलाव आया है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देशवासियों ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना देखा है। मध्यप्रदेश में 2003 से पहले और उसके बाद विकास स्पष्ट रूप से नजर आता है। केंद्रीय मंत्री  ऊइके ने रानी दुर्गावती के जीवन पर केंद्रित एक स्वलिखित गीत भी प्रस्तुत किया।

    जनजातीय कार्य, लोक सम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय राजवंशों के 52 गढ़ केवल मध्यप्रदेश और देश के दूसरे राज्यों में भी थे। आजादी के बाद उन्होंने देश की एकता के लिए अपना राज्य समर्पित कर दिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जनजातीय युवाओं के कल्याण के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपए की राशि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में दी जा रही है। जनजातीय युवाओं को डॉक्टर बनाने के लिए राज्य सरकार हर साल 90 लाख रुपए फीस भर रही है। प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी और लैपटॉप बांटे गए हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के मंच पर रानी दुर्गावती, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, क्रांतिसूर्य टंट्या मामा, संत सिंगाजी महाराज महापुरुषों के जीवन पर आधारित आकर्षक नृत्य नाटकों का मंचन किया गया।

    वीरांगना रानी दुर्गावती के बारे में

    रानी दुर्गावती का जन्म अब से 502 साल पहले 5 अक्टूबर 1524 को वर्तमान उत्तरप्रदेश के महोबा में हुआ था। वे गढ़ मंडला राज्य की शासक महारानी थीं तथा साहस, शौर्य, पराक्रम और स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने गोंडवाना साम्राज्य और राष्ट्र के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए मुगलों से वीरतापूर्वक संघर्ष किया। प्राणांत तक मातृभूमि की अस्मिता की रक्षा करते हुए 24 जून 1564 को वर्तमान मध्यप्रदेश के जबलपुर में वीरगति प्राप्त की।

    52 गढ़ों के इन राजवंशजों का किया सम्मान

    कार्यक्रम में  महेंद्र प्रताप सिंह जूदेव (नर्मदापुरम),  महेंद्र शाह (बरहेटा नरसिंहपुर), डॉ. हेमराज सिंह (जागीरदेवरी रायसेन),  अमरजीत सिंह (उदयपुरा रायसेन),रंजना सिंह (मदनपुर नरसिंहपुर),दमयंती सिंह (दियागढ़ जबलपुर),  यशवंत सिंह जूदेव (बिलोनिया नरसिंहपुर),  विमलेश ठाकुर (दमोह),  राजा वीरेंद्र शाह (देवगढ़ छिंदवाड़ा), डॉ. योगेश्वर सिंह (सिहोरा बघेलगढ़),गरिमा सिंह (मदनपुर),अर्चना सिंह कसदे (उमरिया),  अभिजीत शाह (हरदा),  ठाकुर (गोटेगांव नरसिंहपुर) तथा अन्य गढ़ों से आए राजवंशजों का भी सम्मान हुआ।

    कार्यक्रम में विधायक  नारायण पटेल, सु कंचन तनवे, सु छाया मौरे, जिला पंचायत अध्यक्षपिंकी सुदेश वानखेड़े, महापौर सु अमृत अमर यादव, पूर्व महापौरभावना शाह, कुंवर दिव्यादित्य शाह एवं  अंबाराम कराड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक उपस्थित थे।

     

  • अमरावत खुर्द स्कूल में विद्यार्थियों को मिले स्कूली बैग, राज्यमंत्री गौर ने शिक्षा के महत्व पर दिया जोर

    अमरावत खुर्द स्कूल में विद्यार्थियों को मिले स्कूली बैग, राज्यमंत्री गौर ने शिक्षा के महत्व पर दिया जोर

    शिक्षा से होगी तरक्की की राह प्रशस्त, बच्चों को नियमित रूप से भेजें स्कूल: राज्यमंत्री  गौर

    शासकीय माध्यमिक शाला अमरावत खुर्द में कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों को वितरित किए स्कूली बैग

    भोपाल

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने सोमवार को शासकीय माध्यमिक एकीकृत शाला, अमरावत खुर्द में आयोजित कार्यक्रम में कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों को स्कूली बैग वितरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही जीवन में सर्वांगीण विकास और प्रगति का मूल आधार है। जो विद्यार्थी निष्ठा एवं लगन से विद्या अध्ययन करता है, वह तरक्की और सफलता के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें नियमित रूप से विद्यालय अवश्य भेजें, शिक्षित एवं गुणी बाल-पीढ़ी ही अपने परिवार के जीवन स्तर को उन्नत बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण में महती भूमिका निभाती है।

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उपस्थित विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद स्थापित कर उन्हें लगनपूर्वक अध्ययन करने तथा जीवन में उच्च लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गुरुजनों का सम्मान करने वाले तथा अनुशासित रहकर शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को जीवन में सफलता प्राप्त करने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने विद्यालय परिसर में मध्याह्न भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया तथा विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर विद्यालय के संचालन की समयबद्धता, पठन-पाठन का स्तर और भोजन की गुणवत्ता एवं पर्याप्तता के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

    कार्यक्रम में राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने शिक्षक वर्ग से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षकों का पावन कर्तव्य विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण कर उनके जीवन को सही दिशा प्रदान करना है। यदि शिक्षक अपने शिष्यों को सुसंस्कृत और योग्य नागरिक बनाने में सफल होते हैं, तभी उनकी शिक्षण साधना वास्तविक अर्थों में सार्थक सिद्ध होती है। उन्होंने बल देकर कहा कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षित, संस्कारवान और उत्तरदायी नागरिक बनाने के लिए परिवार, शिक्षक और समाज को समन्वित प्रयास करने होंगे, जिससे सशक्त समाज और विकसित भारत की सुदृढ़ नींव बाल-मन में रोपे गए एवं सुसंस्कारों पर ही आधारित है।

     

  • युवा मतदाताओं से CM यादव की अपील, लोकतंत्र मजबूत करने के लिए वोटर लिस्ट में नाम जरूर जुड़वाएं

    युवा मतदाताओं से CM यादव की अपील, लोकतंत्र मजबूत करने के लिए वोटर लिस्ट में नाम जरूर जुड़वाएं

    लोकतंत्र की मजबूती में हर जागरूक मतदाता की भागीदारी बेहद जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    18 वर्ष पूरा कर चुके युवा साथी मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य कराएं दर्ज

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह बेहद जरूरी है कि मतदाता सूची भी अद्यतन, पारदर्शी और विश्वसनीय हो। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन सहित पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित है। सही जानकारी के लिए सिर्फ निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया पर ही विश्वास करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के युवाओं से अपील की है कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवा अपना नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज कराएं और प्रत्येक नागरिक अपने नाम की भी पुष्टि करे। उन्होंने कहा कि "आईए, हम अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें।"

     

  • यूपी में 2100 से अधिक कैंटीन बनीं आत्मनिर्भरता की ‘प्रेरणा’, दस हजार परिवारों का बनीं सहारा

    यूपी में 2100 से अधिक कैंटीन बनीं आत्मनिर्भरता की ‘प्रेरणा’, दस हजार परिवारों का बनीं सहारा

    लखनऊ

    सरकारी दफ्तरों में आने-जाने वाले लोगों की रोजाना की आवाजाही अब ग्रामीण महिलाओं की कमाई का जरिया बन रही है। उत्तर प्रदेश में 2100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए रोजगार और कारोबार का नया मंच बन चुकी हैं। इसके साथ ही आज ये दस हजार परिवारों का सहारा बन गई हैं। 

    विकास भवन, कलेक्ट्रेट और ब्लॉक कार्यालयों जैसे सरकारी परिसरों में संचालित इन कैंटीनों ने समूहों के लिए स्थानीय स्तर पर स्थायी बाजार तैयार किया है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के सहयोग से संचालित इस पहल के जरिये महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में कारोबार का अवसर मिल रहा है।

    रोज की फुटफॉल बन रही कमाई का आधार

    प्रेरणा कैंटीनों के लिए सरकारी कार्यालयों की रोजाना की फुटफॉल कारोबार का आधार बन रही है। कर्मचारियों और आगंतुकों की आवाजाही से कैंटीनों को स्थानीय ग्राहक मिल रहे हैं। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार के साथ कारोबार चलाने का अनुभव भी मिल रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए समूहों को दूर बाजार तलाशने के बजाय सरकारी परिसरों में ही कारोबार का मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

    गांव के समूहों के लिए खुला नया बाजार

    प्रेरणा कैंटीनों का विस्तार विकासखंड स्तर तक होने से गांव के स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर कारोबार का अवसर मिल रहा है। सरकारी परिसरों को ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए यहां समूहों के उत्पादों और सेवाओं के लिए नया बाजार तैयार हुआ है। इस पहल से महिलाओं को केवल कैंटीन संचालन तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    कलेक्ट्रेट से स्वास्थ्य केंद्रों तक नेटवर्क

    प्रेरणा कैंटीनों का नेटवर्क सरकारी कार्यालयों के साथ स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच चुका है। विकास भवन, कलेक्ट्रेट और ब्लॉक कार्यालयों के अलावा पीएचसी और सीएचसी परिसरों में भी कैंटीन संचालित की जा रही हैं। इससे सरकारी कार्यालयों में आने वाले कर्मचारियों और आगंतुकों के साथ स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले लोगों को भी भोजन और नाश्ते की सुविधा मिल रही है। इस विस्तार ने स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के दायरे को और बढ़ाया है। कैंटीनों को व्यवस्थित रूप देने और महिलाओं को बेहतर सुविधाओं के साथ कारोबार संचालित करने का अवसर देने पर जोर है। मॉडल कैंटीन के माध्यम से रोजगार को आगे कारोबार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    किफायती भोजन के साथ सेवा भी : अरुण कुमार

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रेरणा कैंटीनों के माध्यम से कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छ, पौष्टिक और घर जैसा किफायती भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। इस तरह कैंटीनें एक ओर सरकारी परिसरों की जरूरत पूरी कर रही हैं तो दूसरी ओर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन रही हैं।

    रोजगार, सेवा और बाजार तीनों को एक मंच

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण के विजन के अनुरूप प्रेरणा कैंटीनों का यह विस्तार ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकारी परिसरों की नियमित जरूरत और ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को जोड़कर तैयार हुआ यह मॉडल रोजगार, सेवा और बाजार तीनों को एक साथ मंच दे रहा है।

  • शिक्षा से होगी तरक्की की राह प्रशस्त, बच्चों को नियमित रूप से भेजें स्कूल: राज्यमंत्री गौर

    शिक्षा से होगी तरक्की की राह प्रशस्त, बच्चों को नियमित रूप से भेजें स्कूल: राज्यमंत्री गौर

    भोपाल

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने सोमवार को शासकीय माध्यमिक एकीकृत शाला, अमरावत खुर्द में आयोजित कार्यक्रम में कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों को स्कूली बैग वितरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही जीवन में सर्वांगीण विकास और प्रगति का मूल आधार है। जो विद्यार्थी निष्ठा एवं लगन से विद्या अध्ययन करता है, वह तरक्की और सफलता के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें नियमित रूप से विद्यालय अवश्य भेजें, शिक्षित एवं गुणी बाल-पीढ़ी ही अपने परिवार के जीवन स्तर को उन्नत बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण में महती भूमिका निभाती है।

    राज्यमंत्री  गौर ने उपस्थित विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद स्थापित कर उन्हें लगनपूर्वक अध्ययन करने तथा जीवन में उच्च लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गुरुजनों का सम्मान करने वाले तथा अनुशासित रहकर शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को जीवन में सफलता प्राप्त करने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती। राज्यमंत्री  गौर ने विद्यालय परिसर में मध्याह्न भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया तथा विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर विद्यालय के संचालन की समयबद्धता, पठन-पाठन का स्तर और भोजन की गुणवत्ता एवं पर्याप्तता के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

    कार्यक्रम में राज्यमंत्री  गौर ने शिक्षक वर्ग से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षकों का पावन कर्तव्य विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण कर उनके जीवन को सही दिशा प्रदान करना है। यदि शिक्षक अपने शिष्यों को सुसंस्कृत और योग्य नागरिक बनाने में सफल होते हैं, तभी उनकी शिक्षण साधना वास्तविक अर्थों में सार्थक सिद्ध होती है। उन्होंने बल देकर कहा कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षित, संस्कारवान और उत्तरदायी नागरिक बनाने के लिए परिवार, शिक्षक और समाज को समन्वित प्रयास करने होंगे, जिससे सशक्त समाज और विकसित भारत की सुदृढ़ नींव बाल-मन में रोपे गए एवं सुसंस्कारों पर ही आधारित है।

     

  • केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा गुजरात के नर्मदा में दो दिवसीय आयोजन

    केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा गुजरात के नर्मदा में दो दिवसीय आयोजन

    रायपुर

    उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव गुजरात के नर्मदा में आज से शुरू हुए सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में शामिल हुए। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा “गतिशक्ति से प्रगति” थीम पर इसका आयोजन किया गया है। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने चिंतन शिविर का शुभारंभ किया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री  हर्ष मल्होत्रा भी इस दौरान मौजूद थे।

    देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के मंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ एवं नीति निर्माता इस राष्ट्रीय चिंतन शिविर में भागीदारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री  साव के साथ लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, अपर सचिव  एस.एन. वास्तव और राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  ज्ञानेश्वर कश्यप भी चिंतन शिविर में हिस्सा ले रहे हैं।

    चिंतन शिविर में भाग ले रहे विभिन्न राज्यों के मंत्रियों, अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं नीति निर्माताओं ने आज तीन सत्रों में भविष्य में बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की डिजाइन, गुणवत्ता, रोड सेफ्टी और परियोजना प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में रायपुर से जगदलपुर, बिलासपुर से रायगढ़, कटघोरा से अंबिकापुर और रायपुर से सारंगढ़ तक फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्गों की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।  चिंतन शिविर में निर्धारित किए जाने वाले फ्रेमवर्क्स से इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

    राष्ट्रीय चिंतन शिविर के पहले दिन आज विभिन्न सत्रों में “पीएम गतिशक्ति—समन्वित और प्रभावी परियोजना क्रियान्वयन के लिए एकीकृत अधोसंरचना नियोजन”, “भूमि अधिग्रहण में तेजी और भूमि राशि का प्रभावी उपयोग” तथा “सुदृढ़ परियोजना क्रियान्वयन और रेटिंग के लिए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट फ्रेमवर्क” पर गहन विचार-विमर्श किया गया। चिंतन शिविर के दूसरे दिन 6 अक्टूबर को “सुरक्षित राजमार्गों का डिजाइन—मानकों से क्रियान्वयन तक” और “गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना मॉनिटरिंग” पर मंथन किया जाएगा।

  • तटबंध टूटने पर सरकार सख्त, 7 इंजीनियरों पर गिरी कार्रवाई की गाज; जानें पूरा मामला

    तटबंध टूटने पर सरकार सख्त, 7 इंजीनियरों पर गिरी कार्रवाई की गाज; जानें पूरा मामला

    पटना
    गंडक नदी में रिकॉर्ड पानी आने से तटबंध टूटने की घटनाओं और इस मामले में अभियंताओं की लापरवाही पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। जल संसाधन विभाग ने सारण और गोपालगंज मे तैनात सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता पर अनुशासनिक कार्रवाई चलाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्तर पर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा बैठक के बाद अभियंताओं पर सरकार ने कार्रवाई की है।

    जिन सात अभियंताओं को निलंबित किया गया है, उनमें दो कार्यपालक अभियंता, तीन सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंता हैं। इन पर गंडक नदी में आई बाढ़ के दौरान आकस्मिक कार्य योजना को धरातल पर लागू करने में शिथिलता तथा मैटेरियल एवं संसाधनों के प्रबंधन में लापरवाही का आरोप है। इस साल 28 सितंबर से एक अक्तूबर के बीच 13 जगहों पर गंडक का तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे बड़े इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया।

    जल संसाधन विभाग के अनुसार, ⁠नेपाल और उत्तरप्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव हुआ। नेपाल के देवघाट में गंडक नदी का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को पार करते हुए नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

    गंडक नदी का जलस्तर बिहार के चार स्थलों- बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में अपने पुराने उच्चतम जलस्तर को पार करते हुए नया रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इससे गंडक का तटबंध कई स्थलों पर क्षतिग्रस्त हो गया। ⁠क्षतिग्रस्त तटबंधों का विभाग के वरीय पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञ टीम के द्वारा स्थल निरीक्षण कर उससे निपटने के लिए आकस्मिक कार्य योजना पर कार्य करने हेतु निदेशित किया गया। परंतु कुछ स्थानीय अभियंताओं द्वारा इसके क्रियान्वयन में शिथिलता एवं लापरवाही बरती गयी। यही नहीं, तटबंध क्षतिग्रस्त होने की आकस्मिक परिस्थिति के अनुरूप तात्कालिक प्रतिक्रिया में विलंब किया गया तथा ब्रीच स्थल पर उपस्थित रह कर मटेरियल और मैनपावर के साथ कट-एंड को प्रोटेक्ट करने का प्रयास करने के बजाय स्थल से हट जाया गया।

    आकस्मिक कार्य योजना लागू करने में शिथिलता
    विभाग का कहना है कि आकस्मिक कार्य योजना को धरातल पर लागू करने में शिथिलता पायी गई तथा मैटेरियल एवं संसाधनों के प्रबंधन में भी लापरवाही बरती गई। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय का अभाव पाया गया। कुछ अभियंताओं की कार्यशैली के विरुद्ध भारी जनाक्रोश देखने को मिला। स्थल निरीक्षण एवं प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जल संसाधन विभाग के आठ अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया।

    शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी : विभाग
    विभाग ने साफ कहा है कि आपदाजन्य आकस्मिक परिस्थिति में कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही अक्षम्य है और इसके विरुद्ध सख़्त कार्यवाई होगी। विभाग के अनुसार फिलहाल गंडक के तटबंधों पर अब दबाव नहीं है तथा सीपेज/पाइपिंग की समस्या भी अब नहीं है। तटबंध के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त मटेरियल स्टॉक कर कट-एंड को प्रोटेक्ट करने तथा टैगिंग का काम जारी है।

    ये निलंबित किये गये
    संतोष कुमार प्रभाकर, कार्यपालक अभियंता, छपरा

    मो. साजिद इकबाल, कार्यपालक अभियंता, गोपालगंज

    सुनील कुमार, सहायक अभियंता, छपरा

    विनोद कुमार, सहायक अभियंता, छपरा

    मो. जावेद अंसारी, सहायक अभियंता, गोपालगंज

    चंद्रशेखर कुमार, कनीय अभियंता, छपरा

    विकास कुमार, कनीय अभियंता, गोपालगंज

    इन पर विभागीय कार्यवाही
    कुमार मनोज गुप्ता, मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर

    (आरोप : चंपारण तटबंध के क्षतिग्रस्त होने एवं तदोपरांत की जाने वाली आकस्मिक प्रतिक्रिया में शिथिलता और लापरवाही)

  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश बना देश में नंबर-1

    पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश बना देश में नंबर-1

    लखनऊ

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर संचयी इंस्टॉलेशन के मामले में गुजरात को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही योजना के तहत संचयी रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे निरंतर एवं समन्वित प्रयासों का परिणाम है। 

    उत्तर प्रदेश में पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति लगातार तेज रही है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, डिस्कॉम स्तर पर निरीक्षण एवं मीटरिंग की निगरानी, बैंकिंग फॉलोअप, वेंडर समन्वय तथा लंबित प्रकरणों के समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। योजना मे यूपीनेडा द्वारा 8000 से अधिक वेंडर्स को इमपैनल्ड कर एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार भी दिया गया जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव जनपदों की राष्ट्रीय रैंकिंग मे देखा जा रहा है। प्रदेश के कुल 15 जनपद देश के टॉप 100 मे शामिल है जिसमे उल्लेखनीय रूप से जनपद लखनऊ देश मे प्रथम स्थान एवं जनपद वाराणसी देश मे दसवे स्थान पर है।

    प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली

    प्रदेश में स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 2,942 मेगा वॉट से अधिक हो चुकी है। 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के मानक के आधार पर यह क्षमता प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा करने की क्षमता रखती है। ₹6.50 प्रति यूनिट के समतुल्य मूल्य पर यह बिजली ₹8.5 करोड़ से अधिक प्रतिदिन तथा ₹3,100 करोड़ से अधिक वार्षिक बिजली के बराबर है। इससे लाखों परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत

    रूफटॉप सोलर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि बिजली उत्पादन के लिए अलग से बड़े भू-भाग की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह घरों की छत पर लगाया जाता है। 4 एकड़ प्रति मेगा वॉट के मानक के आधार पर प्रदेश में स्थापित वर्तमान रूफटॉप सोलर क्षमता से 11,700 एकड़ से अधिक भूमि की बचत होती है। इस प्रकार घरों की छतों और उपलब्ध भवन संरचनाओं पर सौर संयंत्र लगाकर बड़े भू भाग के उपयोग की आवश्यकता कम की जा रही है, जिनका उपयोग अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।

    34 लाख टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी

    रूफटॉप सोलर से उत्पादित स्वच्छ बिजली के आधार पर प्रदेश में 34 लाख टन से अधिक वार्षिक CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। इस पर्यावरणीय लाभ को वृक्ष-समतुल्यता के रूप में देखें तो यह 15 करोड़ से अधिक पेड़ों द्वारा एक वर्ष में अवशोषित कार्बन के बराबर बैठता है। यह वृक्ष-समतुल्यता एक अनुमानात्मक पर्यावरणीय तुलना है।

     8,000 से अधिक वेंडर्स, 1 लाख से अधिक को प्रत्यक्ष रोजगार

    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर ग्रीन जॉब इकोसिस्टम तैयार किया है। 8,000 से अधिक यूपीनेडा वेंडर्स के माध्यम से सोलर सिस्टम की बिक्री, डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल कार्य, कमीशनिंग और आफ्टर-सेल्स सर्विस से जुड़े क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। वहीं योजना का रोजगार प्रभाव केवल वेंडर्स और इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं है। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, लोडिंग-अनलोडिंग, सामग्री आपूर्ति, स्ट्रक्चर फैब्रिकेशन, सर्वेक्षण, साइट असेसमेंट, ग्राहक सेवा, मरम्मत एवं रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इस प्रकार योजना ने प्रदेश में युवाओं के लिए ग्रीन स्किल और ग्रीन जॉब्स का एक नया बाजार तैयार किया है।

    केंद्र और राज्य की सब्सिडी से सीधे लाभार्थियों को लाभ

    इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में केन्द्रीय सब्सिडी ₹5,722 करोड़ से अधिक तथा राज्य सब्सिडी ₹2,000 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता का प्रभाव सामने आया है। केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय सहायता का प्रत्यक्ष लाभ लाभार्थियों तक पहुंचने से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर अपनाना अधिक सुलभ हुआ है। रूफटॉप सोलर अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार के बिजली खर्च में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और घरेलू आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी साधन बन रहा है।

    सूर्य घर से बदल रही है उत्तर प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था

    8,76,500 से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट, 2,942 मेगा वॉट से अधिक स्थापित क्षमता, प्रतिदिन 1.32 करोड़ से अधिक यूनिट स्वच्छ बिजली, 11,700 एकड़ से अधिक भूमि-संरक्षण का प्रभाव, 34 लाख टन से अधिक संभावित वार्षिक कार्बन बचत, 8,000 से अधिक वेंडर्स और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना उत्तर प्रदेश में अब एक व्यापक ग्रीन इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन का आधार बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने रूफटॉप सोलर को जनभागीदारी, रोजगार, उद्योग, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए देश के सामने एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है।