Author: NewseDay

  • इंदौर में वोटर लिस्ट सुधार की कवायद तेज, 4.47 लाख हटे नामों की होगी फिर जांच; घर-घर पहुंचेंगे BLO

    इंदौर में वोटर लिस्ट सुधार की कवायद तेज, 4.47 लाख हटे नामों की होगी फिर जांच; घर-घर पहुंचेंगे BLO

     इंदौर

     मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर घर-घर दस्तक शुरू हो चुकी है। करीब सात माह पहले जिस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान बीएलओ ने दो बार मतदाताओं से संपर्क किया था, फॉर्म भरवाए थे और दस्तावेजों की जांच की थी, वहीं काम अब फिर से किया जाएगा। एसआइआर के बाद हटे मतदाताओं की जानकारी लेने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) फिर से उनके पते पर दस्तक देंगे। यदि वह पते पर मिलते हैं और पात्र पाए जाते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा।
    SIR के दौरान घटे मतदाता, अब नाम जुड़वाने का मिला फिर मौका

    एसआइआर से पहले जिले में 28 लाख 67 हजार 294 मतदाता थे। एसआइआर के बाद 23 दिसंबर 2025 की प्रारंभिक सूची में संख्या घटकर 24 लाख 20 हजार 171 रह गई। यानी एक ही प्रक्रिया में 4.47 लाख नाम बाहर हो गए थे। एसआईआर के दौरान ही 66,825 नाम जोड़े गए।

    वहीं 21 फरवरी 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित हुई, जिसमें 24 लाख 86 हजार 996 मतदाता थे। अब सात माह बाद फिर से बीएलओं विलोपित मतदाताओं की जांच कर नाम जोड़ने का कार्य करेंगे।

    सोमवार को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा ने इस अभियान की समीक्षा की। उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पवार ने सभी ईआरओ को पात्र मतदाताओं को चिन्हित कर उनके नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि 18-19 वर्ष के मतदाताओं के नाम भी इस दौरान प्राथमिकता से नाम सूची में शामिल किए जाएं। एक माह तक यह अभियान चलेगा।
    10 माह में 5वीं बार दस्तक: 2003 की जानकारी देने का बंधन खत्म

    बीते वर्ष अक्टूबर से अब तक मतदाताओं से बीएलओ द्वारा चार बार संपर्क किया जा चुका है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच एसआइआर प्रक्रिया के दौरान दो बार बीएलओ मतदाता के घर पहुंचे थे। वहीं फार्म प्राप्त नहीं होने पर जनवरी में एक बार फिर से छूटे मतदाताओं की जांच की गई थी। इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत की मतदाता सूची तैयार करने के लिए भी घर-घर संपर्क किया गया। अब फिर पांचवी बार बीएलओं अपने बूथ में विलोपित मतदाता की जांच करेंगे।

    एसआइआर के दौरान 2003 की सूची में नाम या परिवार के किसी सदस्य का नाम मांगा गया था, लेकिन अब इसकी बाध्यता नहीं है। फार्म-6 के साथ भरा जाने वाला डिकलेरेशन फार्म हटा दिया गया है। एसआइआर के दौरान पुरानी सूची से अपना संबंध साबित नहीं कर पाने वाले मतदाताओं के लिए अब पात्रता के आधार पर नाम जुड़वाने का रास्ता खुला है।

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    नाम जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेज

    मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या संशोधन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे…

    •     जन्म तारीख का प्रमाण: जन्म प्रमाण पत्र, तारीख लिखी मार्कशीट, पासपोर्ट और पैन कार्ड।
    •     पते का प्रमाण: पहचान पत्र, बिजली बिल, बैंक पासबुक, सरकारी कर्मचारी होने पर कार्ड, जमीन के दस्तावेज।
    •     किरायेदार के लिए: जन्म प्रमाण पत्र के साथ, पते के प्रमाण में किरायानामा दस्तावेज और मकान मालिक का बिजली बिल।
    •     पता बदलने पर: मतदाता को वर्तमान ईपीक नंबर के साथ फार्म-8 भरना होगा और नए पते का प्रमाण देना होगा।
    •     युवा मतदाता: फार्म-6 भरना होगा, जिसमें माता-पिता के नाम के साथ जन्म और पते का प्रमाण देना होगा।

     

  • राष्ट्रीय पटल पर चमका वारासिवनी, नगरीय निकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला पुरस्कार

    राष्ट्रीय पटल पर चमका वारासिवनी, नगरीय निकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला पुरस्कार

    भोपाल 

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 'सभी के लिए आवास' के संकल्प को मध्यप्रदेश की धरा पर साकार करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी नेतृत्व के फलस्वरूप मध्यप्रदेश को 'प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पुरस्कार-2026' से पुरस्कृत किया गया है। विश्व आवास दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू ने यह प्रतिष्ठित पुरूस्कार प्रदान किया। राज्य शासन की ओर से नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त  संकेत भोंडवे तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के राज्य मिशन संचालक  शिशिर गेमावत ने पुरूस्कार प्राप्त किया।

    प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के बी.एल.सी. (लाभार्थी आधारित निर्माण) घटक के सर्वोत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित क्रियान्वयन तथा स्वीकृत आवासों की तुलना में सर्वाधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कराने में मध्यप्रदेश संपूर्ण देश में अग्रणी रहा है। एक लाख से कम आबादी वाले नगरीय निकायों की श्रेणी में उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित करते हुए नगर पालिका परिषद वारासिवनी को भी बी.एल.सी. घटक के अंतर्गत सर्वाधिक आवास पूर्ण करने पर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से अलंकृत किया गया।

    आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास  भोंडवे ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी से प्रदेश के लाखों वंचित एवं जरूरतमंद शहरी परिवारों के अपने पक्के घर का स्वप्न साकार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में योजना का पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। मिशन संचालक  गेमावत ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में योजना के विभिन्न घटकों के अंतर्गत अब तक 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 9 लाख से अधिक निर्मित आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं।

    प्रदेश में योजना के बहुआयामी एवं सुगम क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक अभिनव प्रयोग तथा नीतिगत सुधार किए गए हैं। समाज के अंतिम छोर पर खड़े भूमिहीन पात्र परिवारों को आवासीय भूमि के पट्टे वितरित किए गए, जिससे वे बी.एल.सी. घटक के अंतर्गत मिलने वाले लाभों से वंचित न रहें। इस ऐतिहासिक सफलता में राज्य स्तरीय मिशन टीम, जिला प्रशासन, नगरीय निकायों, संबद्ध विभागों, समर्पित हितग्राहियों एवं समस्त हितधारकों का सहयोगात्मक योगदान व कर्मठता प्रशंसनीय रही है।

     

  • विश्व जूडो चैंपियनशिप में इशरूप पर नजरें, अजरबैजान में दांव-पेच से दिखाएंगी दम

    विश्व जूडो चैंपियनशिप में इशरूप पर नजरें, अजरबैजान में दांव-पेच से दिखाएंगी दम

    चंडीगढ़.

    चंडीगढ़ की युवा जूडो खिलाड़ी इशरूप नारंग सीनियर विश्व जूडो चैंपियनशिप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अजरबैजान के बाकू में 7 और 8 अक्टूबर को होने वाली इस प्रतियोगिता में 20 वर्षीय इशरूप दुनिया की शीर्ष जूडो खिलाड़ियों के बीच अपना दमखम दिखाएंगी।

    इशरूप ने सीनियर विश्व रैंकिंग में टॉप-100 में जगह बनाकर अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ (आईजेएफ) की विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी के लिए निर्धारित योग्यता हासिल की है। वह एमसीएम डीएवी कॉलेज की छात्रा हैं और अमेच्योर जूडो एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ (एजेएसी) का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    अहमद युसिफोव के खिलाफ हर्ष सिंह का शानदार सफर समाप्त हुआ
    भारत के हर्ष सिंह ने अजरबैजान के बाकू में आयोजित जूडो विश्व चैंपियनशिप में अपने अभियान के सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक दिया, जहां उन्होंने दो उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों को हराकर पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान पर काबिज हर्ष ने अपने अभियान की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के 40वें रैंक वाले पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को पहले ही दौर में हराकर की। इसके बाद उन्होंने बहरीन के 20वें रैंक वाले रुस्लान पोल्टोरात्स्की पर एक और शानदार जीत हासिल कर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। आखिरकार उनका सफर अजरबैजान के घरेलू खिलाड़ी और विश्व नंबर 5 अहमद युसिफोव के खिलाफ समाप्त हो गया। फिर भी, यह परिणाम भारतीय जूडोका के लिए एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन साबित हुआ, जो रैंकिंग में शीर्ष समूह से काफी बाहर रहते हुए विश्व चैंपियनशिप में शामिल हुए थे, लेकिन उन्होंने बार-बार अपने से काफी ऊपर स्थान पर मौजूद प्रतिद्वंद्वियों को परास्त किया।

    पहले दौर के मुकाबले में हर्ष को अपने से कहीं अधिक उच्च रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ बढ़त हासिल करने का मौका मिला। विश्व रैंकिंग में 40वें स्थान पर काबिज एंटुन नेटो का सामना करते हुए, भारतीय खिलाड़ी ने वाजा-अरी से जीत हासिल कर 32वें दौर में प्रवेश किया। रैंकिंग में 43 स्थानों का अंतर इस परिणाम को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। हर्ष बाकू में 83वीं रैंकिंग के साथ पहुंचे थे, जबकि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में 40वें स्थान के जूडोका के रूप में प्रवेश किया था। पहले दौर में सिर्फ टिके रहने के बजाय, हर्ष ने स्कोरिंग एक्शन के जरिए जीत हासिल की, जिससे उन्हें अगले दौर में पहुंचने के लिए जरूरी बढ़त मिल गई। इसने -60 किलोग्राम वर्ग के मुश्किल दौर की नींव भी रख दी।

    दूसरे उलटफेर ने हर्ष को प्री-क्वार्टरफाइनल में पहुँचा दिया
    अगली चुनौती कागज़ पर और भी कठिन लग रही थी। हर्ष का सामना बहरीन के रुस्लान पोल्टोरात्स्की से था, जो विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर थे। दोनों जूडो खिलाड़ियों के बीच 63 स्थानों का अंतर रैंकिंग में एक और बड़ा उलटफेर था। एक बार फिर, हर्ष ने वज़ा-अरी से जीत हासिल की। ​​इस जीत ने उन्हें प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुँचा दिया और इसका मतलब यह था कि भारतीय खिलाड़ी ने लगातार दो राउंड में अपने से काफी ऊँची रैंकिंग वाले दो प्रतिद्वंद्वियों को हराया था। हर्ष के लिए, विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान से राउंड ऑफ़ 16 तक पहुँचना विश्व चैंपियनशिप के मंच पर एक बड़ी उपलब्धि थी। इसने भारत को जूडो की सबसे प्रतिस्पर्धी भार श्रेणियों में से एक में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने का अवसर भी दिया। हर्ष की दो जीत का इनाम उन्हें अज़रबैजान के अहमद युसिफोव के साथ राउंड ऑफ़ 16 में मुकाबले के रूप में मिला। युसिफोव एक बिल्कुल अलग स्तर की चुनौती पेश कर रहे थे। उपलब्ध परिणामों में अज़रबैजानी खिलाड़ी को विश्व का नंबर 5 जूडोका बताया गया था और वे घरेलू मैदान के प्रबल दावेदार के रूप में उतरे थे। विश्व के 40वें और 20वें नंबर के खिलाड़ियों को हराने के बाद भी हर्ष लगातार तीसरी बार उलटफेर करने में नाकाम रहे। युसिफोव ने राउंड ऑफ़ 16 में हर्ष को हराकर विश्व चैंपियनशिप में उनके शानदार सफर का अंत कर दिया। इस जीत के साथ हर्ष पुरुषों के -60 किलोग्राम वर्ग में शीर्ष 16 जूडो खिलाड़ियों में शामिल हो गए, जबकि टूर्नामेंट की शुरुआत में उनकी रैंकिंग 83वीं थी।

    एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद एक महत्वपूर्ण अवसर
    हर्ष का प्रदर्शन इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें भारत की एशियाई खेलों की टीम में नहीं चुना गया था। इस चूक का मतलब था कि विश्व चैंपियनशिप ने भारतीय खिलाड़ी को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। उन्होंने दो उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों को हराकर और ड्रॉ में काफी आगे बढ़कर इसका जवाब दिया। एंटुन नेटो और पोल्टोरात्स्की पर उनकी जीत विशेष रूप से उल्लेखनीय थी क्योंकि दोनों जीतें उनसे काफी उच्च रैंक वाले जूडो खिलाड़ियों के खिलाफ थीं। विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान से शुरुआत करते हुए, हर्ष ने पहले 40वें स्थान पर रहे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को हराया और फिर 20वें स्थान पर रहे बहरीनी खिलाड़ी को मात दी। उनकी इस प्रगति ने रैंकिंग के अंतर को एक संभावित नुकसान से बदलकर उनके अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कहानियों में से एक बना दिया। युसिफोव के खिलाफ उनकी अंतिम हार भी उनके सामने आए सबसे उच्च रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ हुई। हर्ष कॉमनवेल्थ स्तर पर एक स्थापित रिकॉर्ड के साथ बाकू पहुंचे थे, उन्हें उपलब्ध सामग्री में कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन के रूप में वर्णित किया गया था। हालांकि, विश्व चैंपियनशिप एक बिल्कुल अलग चुनौती थी, जिसमें दुनिया के शीर्ष जूडो खिलाड़ी शामिल थे। हर्ष ने जोरदार जवाब दिया।

    उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ दो वाजा-अरी जीत ने उन्हें पहले दौर से ही अंतिम 16 में पहुंचा दिया। हालांकि वे युसिफोव के खिलाफ अपनी जीत का सिलसिला जारी नहीं रख सके, लेकिन इस अभियान ने रैंकिंग में अपने से कहीं ऊपर के जूडो खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया। सबसे महत्वपूर्ण बात उनके प्रदर्शन में निरंतरता है। पहले उलटफेर को एक अलग घटना मानकर नजरअंदाज किया जा सकता था, लेकिन पोल्टोरात्स्की पर जीत ने इस बात की पुष्टि कर दी कि हर्ष कहीं अधिक उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ भी जीत हासिल करने में सक्षम हैं। विश्व के नंबर 5 खिलाड़ी से हार के साथ उनका अभियान समाप्त हो गया, लेकिन इससे पहले हर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते हुए भारतीय जूडो खिलाड़ियों में अपनी पहचान बना ली थी। प्रतियोगिता में प्रवेश करते समय 83वीं रैंकिंग वाले खिलाड़ी के लिए, दो बड़े उलटफेरों के बाद विश्व चैंपियनशिप के राउंड ऑफ़ 16 तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हर्ष के लिए अगली चुनौती इस सफलता को विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ निरंतरता में तब्दील करना होगा। बाकू में साबित कर दिया कि उनके नाम के आगे की रैंकिंग यह निर्धारित नहीं करती कि वे किस स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। 

  • बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की विभीषिका देखी, फिर बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर उनका दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री का वितरण किया। सीएम यहां स्वास्थ्य शिविर में भी पहुंचे और डॉक्टरों से दवाओं/ व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री कुर्सियों पर बैठे बाढ़ पीड़ित के पास पहुंचे और शासन से मिली राहत सामग्री, अन्न, चिकित्सा आदि सुविधाओं की हकीकत जानी। उन्होंने बच्चों को पास बुलाकर चॉकलेट भी दी। 

    मुख्यमंत्री ने अक्टूबर में आई इस बाढ़ विभीषिका पर चिंता जताई। कहा कि गोमती नदी पर तटबंध बनने से काफी हद तक बाढ़ की विभीषिका को रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक नदी के तट का सर्वे कराते हुए तटबंध बनवाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो गांव तटबंध के बाहर रहे, वहां बरसात का पानी निकालने की उचित व्यवस्था हो। तटबंध बनने के बाद नदी का जलस्तर बढ़े तो अंदर का पानी जमा होकर बीमारी न पैदा करे, बल्कि पंपिंग सेट लगाकर बाहर निकाला जाए। सिंचाई विभाग इन कार्यों का प्रस्ताव बनाकर शीर्घ कार्य प्रारंभ कराए, जिससे आने वाले समय में इस त्रासदी को रोक सकें और बाढ़ की विभीषिका पर अंकुश लगाया जा सके। 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन कर जताई चिंता 

    सीएम ने आज सुबह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के फोन आने के बारे में बाढ़ पीड़ितों को अवगत कराया। बाढ़ को लेकर रक्षा मंत्री की चिंता के विषय में भी जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनने से बाढ़ बचाव में मदद कराने के बारे में भी विमर्श किया। इस पर सीएम ने उन्हें बताया कि सरकार ने इसे स्वीकृत कर दिया है, धनराशि अवमुक्त करते हुए यह कार्य जल्द आगे बढ़ाएंगे। ऐसी पुख्ता व्यवस्था करेंगे तो हर सीजन में तटबंध उपयोगी होगा। बरसात में नदी का पानी उधर नहीं आएगा और इधऱ का पानी पंपिंग सेट के जरिए नदी की तरफ डाल दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि एलडीए ने ग्रीन कॉरिडोर बनवाया है, यह सड़क और सुरक्षा दोनों का काम कर रहा है। इसी तरह तटबंध पर चलने की भी व्यवस्था कराएंगे।

    स्कूल, मैरिज हॉल आदि में रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था करे प्रशासन

    सीएम ने बाढ़ पीड़ितों से अपील की कि संकट की इस घड़ी में हम सभी मिलकर आपदा का सामना करें। गांव से बाहर आए लोगों के लिए खुले में सोने की बजाय स्कूल, मैरिज हॉल में व्यवस्था करें। वहां गर्म भोजन, बच्चों को दूध, गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार, पशुओं के चारे, भूसा-चोकर की व्यवस्था हो। पशुओं की सुरक्षा व संरक्षण पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि पानी के कारण पशुओं को होने वाली बीमारी से भी बचाव की व्यवस्था की जाए।

    नदियों के जलस्तर में हुई काफी वृद्धि
    मुख्यमंत्री ने अकड़रिया कला गांव में बाढ़ पीड़ितों से संवाद करते हुए कहाकि 10 दिन में 50 से अधिक जनपदों में भारी बारिश हुई है, जिससे तमाम नदियों के जलस्तर में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि में लखनऊ भी था, लेकिन उस दौरान गोमती नदी का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था, लेकिन पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व नेपाल में हुई बारिश के कारण पांच-छह दिन बाद पानी नीचे आने से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इस कारण बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर, फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक यह क्षेत्र जल पलावन और बाढ़ से जूझ रहा है। 

    बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है डबल इंजन सरकार 

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि डबल इंजन सरकार आपके साथ खड़ी है। मैं लगातार यहां की स्थिति का आकलन करते हुए इस पर नजर रखा हूं। आज पीड़ित क्षेत्रों में पहुंचकर राहत कार्यों को भी देखा है। हमारे जनप्रतिनिधि निरंतर राहत-बचाव कार्यों में जुटे हैं और प्रशासन के साथ पीड़ितों की हरसंभव मदद कर रहे हैं।  

    हर पीड़ित परिवार के लिए की गई राशन की व्यवस्था 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत-बचाव कार्य के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ से डूबे गांव- मोहल्लों में हर परिवार के लिए सूखा राशन (10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल, एक लीटर रिफाइंड/ सरसों का तेल, नमक, मिर्च, मसाला, बरसाती, बाल्टी, लाई-भूजा, मोमबत्ती, माचिस) आदि उपलब्ध कराया गया है। 
    गाय, बकरी, भैंस, बकरी, घोड़ा आदि पालतू पशुओं के चारे, छोटे बच्चों के दूध, स्वास्थ्य/ पशु चिकित्सालय शिविर के लिए भी प्रशासन को निर्देशित किया गया है। 

    हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध 

    सीएम ने कहा कि हर व्यक्ति की जान बचाना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। बरसात में पानी भरने पर सांप-बिच्छू आदि के काटने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की गई है। एंटी रैबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध है। डूबने-आकाशीय बिजली से जनहानि पर परिवार को चार लाख की सहायता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि घर क्षतिग्रस्त होने पर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास, जनहानि, पशुहानि और किसानों की फसल के नुकसान पर सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा तत्काल दिलाया जाए, जिससे किसान के साथ सरकार का संबल दिखे। 

    गांवों की सुरक्षा के लिए पुलिस की पेट्रोलिंग, चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान तैनात हों 

    मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि ग्रामीणों के बाहर आने पर रात में गांवों की सुरक्षा के लिए चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी, पुलिस की पेट्रोलिंग हो और वहां पेट्रोमैक्स जलाए जाएं। कैंप में पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था कराई जाए, जिससे लोगों को सुविधा मिल सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि आपदा पीड़ित चिंतित न हों, सरकार निरंतर राहत सामग्री कराएगी। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि आपदा की घड़ी में सरकार हरसंभव मदद करेगी। सीएम ने सभी के सुखी-स्वस्थ होने की कामना की। 

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विधायक योगेश शुक्ल, डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, इटौंजा के नगर पंचायत अध्यक्ष अखिलेश अवस्थी आदि मौजूद रहे।

  • जगदलपुर में सेवा संकल्प का जनसेवा से जुड़ाव, शिविर में हितग्राहियों को मिले योजनाओं के लाभ

    जगदलपुर में सेवा संकल्प का जनसेवा से जुड़ाव, शिविर में हितग्राहियों को मिले योजनाओं के लाभ

    रायपुर

     उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर अंचल नक्सलवाद के लंबे और काले दौर से निकलकर अब शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। कभी हिंसा और भय से प्रभावित रहे क्षेत्रों में आज शासन की योजनाएं और सेवाएं पहुंच रही हैं। विकास के साथ लोगों के जीवन में सुरक्षा और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है।

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा आज जगदलपुर के पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार टाउन हॉल में आयोजित जिला स्तरीय सेवा संकल्प शिविर में शामिल हुए। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा एक ही स्थान पर नागरिकों की समस्याओं का निराकरण करने के साथ पात्र हितग्राहियों को वित्तीय सहायता, अधिकार अभिलेख, प्रमाण पत्र और विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

    हिंसा के जख्मों पर सेवा और संवेदना का मरहम       

    शिविर को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मां दंतेश्वरी की कृपा और शासन-प्रशासन के साझा प्रयासों से बस्तर में माओवादी हिंसा समाप्ति की ओर है। क्षेत्र में अब भय के स्थान पर विश्वास और हिंसा के स्थान पर विकास एवं सेवा का नया सवेरा दिखाई दे रहा है। उन्होंने नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित आम नागरिकों एवं सुरक्षा जवानों के पुनर्वास का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन दिवसीय विशेष शिविर के माध्यम से पीड़ितों और दिव्यांगजनों को उच्च गुणवत्ता वाले कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण शत-प्रतिशत निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने इस पहल से जुड़े एक भावुक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि कृत्रिम हाथ लगने के बाद एक हितग्राही ने उसी हाथ से पानी की बोतल उठाकर पानी पिया। वर्षों बाद अपने हाथ से सामान्य काम कर पाने की यह खुशी बताती है कि ऐसी पहल किसी व्यक्ति के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।

    एक ही छत के नीचे मिला योजनाओं का लाभ

     जिला स्तरीय सेवा संकल्प शिविर में विभिन्न विभागों ने मौके पर ही पात्र हितग्राहियों को योजनाओं और सेवाओं का लाभ प्रदान किया। राजस्व विभाग द्वारा आपदा प्रबंधन के अंतर्गत पांच बाढ़ प्रभावितों को कुल 6 लाख 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही 35 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए गए। श्रम विभाग द्वारा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत एक हितग्राही को 20 हजार रुपए तथा मुख्यमंत्री मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत एक पात्र हितग्राही को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।

    कृषि विभाग ने पांच किसानों को फसल बीमा प्रमाण पत्र और मत्स्य पालन विभाग ने तीन मत्स्य पालकों को जाल वितरित किए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के वय वंदन कार्ड और पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। शिविर में 12 नागरिकों के आधार विवरण का अद्यतन करने के साथ जन्म एवं मृत्यु पंजीयन से संबंधित आवेदन भी लिए गए।

    बस्तर में विकास की नई तस्वीर – सांसद  महेश कश्यप   

     बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों तथा आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक प्रभाव बस्तर में दिखाई दे रहा है। दशकों तक उग्रवाद के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था, निःशुल्क राशन, पक्के आवास, शौचालय सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। सेवा संकल्प शिविर के माध्यम से एक ही परिसर में विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने से नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय मौके पर ही समस्याओं के समाधान और योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

    इस अवसर पर नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा, नगर निगम आयुक्त  प्रवीण वर्मा, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं नागरिक उपस्थित थे।

  • SIR पर कांग्रेस के रुख को लेकर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा का तंज, दिल्ली बैठक पर उठाए सवाल

    SIR पर कांग्रेस के रुख को लेकर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा का तंज, दिल्ली बैठक पर उठाए सवाल

    रायपुर.

    दिल्ली में आज कांग्रेस की होने वाली बैठक पर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का चरित्र काफी सालों से वैसा ही है. ये समय-समय पर अपना रंग गिरगिट की तरह बदलते रहते हैं. जब SIR होना था, तब विरोध हुआ.

    जब विरोध हो चुका है तो फिर क्यों विरोध? हकीकत यह है कि भारत 1947 में आजाद हो चुका है, लेकिन इनके ऊपर से गुलामी का साया अभी तक नहीं हटा है. भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में युवा कांग्रेस चुनाव में आपसी खींचतान को लेकर कहा कि तत्कालीन सरकार में शराब घोटाले का पैसा बराबर नहीं बंटा था, उसी का परिणाम है कि आपसी खींचतान जारी है. वहीं कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत के छत्तीसगढ़ दौरा पर कहा कि एक बार आए थे, मैं उनका स्वागत कर चुका हूं. बार-बार छत्तीसगढ़ आयें. इससे हमारी रणनीति मजबूत होगी.

    वहीं, कोल लेवी मामले में पेशी को लेकर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, भ्रष्टाचार के मामले में जिन लोगों के खिलाफ प्रकरण है, उनके खिलाफ चालान पेश किया जा रहा है. अब जांच और कार्रवाई के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. जब चालान पेश होगा, तब पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी.

  • रूस-यूक्रेन जंग में भारत का मास्टरप्लान! काला सागर से अनाज-ऊर्जा तक, ऐसे तैयार होगा सीजफायर का रास्ता

    रूस-यूक्रेन जंग में भारत का मास्टरप्लान! काला सागर से अनाज-ऊर्जा तक, ऐसे तैयार होगा सीजफायर का रास्ता

    नई दिल्ली

     रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के खत्म होने के आसार बन रहे हैं. ऐसा भारत की पहल पर हो रहा है. दरअसल, भारत ने रूस और यूक्रेन को ऐसा ऑफर दिया है जिस पर दोनों देशों ने करीब-करीब सहमति जताई है. यूक्रेन ने कहा है कि युद्ध खत्म कराने के लिए अब तक मिले तमाम प्रस्तावों में यह सबसे बेहतर ऑफर हैं. वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत का ऑफर बहुत अच्छा है. पीएम मोदी लंबे समय से इस जंग को खत्म कराने की बात कह रहे हैं. इस बीच रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए हाल के महीनों में कीव और मॉस्को दोनों के साथ वार्ता करके अपने प्रयास तेज किए हैं. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा था कि कीव को संभावित युद्ध विराम के लिए भारत और तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले, लेकिन भारत का प्रस्ताव सबसे बेहतर है। 

    भारत ने अपने प्रस्ताव में काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की बात कही है. इस पर करीब-करीब सहमति बनती दिख रही है. ऐसे में भारत के इस पहल को उसके शांति के प्रति समर्पण की अवधारणा से जोड़ा जा रहा है. बतौर एक शांतिदूत भारत की तारीफ हो रही है. भारत की इस पहल में एक और रोचक तथ्य है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करीब दो साल से इस जंग को खत्म कराने की बात कर रहे हैं. लेकिन, जंग खत्म होने की बजाय बीते कुछ महीनों से और भयानक रूप ले चुकी है. अमेरिका इस जंग को खत्म कराने में बुरी तरह विफल होता दिख रहा है। 

    क्या है भारत का प्रस्ताव
    भारत ने अभी तक अपने प्रस्ताव की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं. लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ किया है कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है. भारत की बातचीत सिर्फ युद्ध रोकने की अपील तक सीमित नहीं है. नई दिल्ली काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज के निर्यात, ऊर्जा आपूर्ति और एक-दूसरे पर हमले रोकने जैसी व्यवस्थाओं पर दोनों पक्षों से बात कर रहा है. यही भारत के प्रस्ताव की खासियत है. यह सीधे यह तय करने की कोशिश नहीं करता कि रूस को क्या मिलेगा और यूक्रेन को क्या छोड़ना होगा. इसके बजाय उन मुद्दों से शुरुआत की जा रही है जिन पर दोनों देशों के लिए तत्काल राहत जरूरी है। 

    काला सागर इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है. युद्ध के दौरान यहां जहाजों और बंदरगाहों पर हमलों ने व्यापार और अनाज की आपूर्ति को प्रभावित किया है. अगर काला सागर में सुरक्षित नेविगेशन और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था बनती है तो इसका असर सिर्फ रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा. वैश्विक खाद्य और ऊर्जा बाजार को भी इससे राहत मिल सकती है। 

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के मुताबिक कीव को भारत, अमेरिका, तुर्की और मिस्र से युद्धविराम को लेकर प्रस्ताव मिले हैं. उन्होंने भारत के प्रस्ताव को व्यापक बताया है. यूक्रेन ने ऊर्जा और काला सागर में युद्धविराम पर विचार करने की बात भी कही है. हालांकि कीव चाहता है कि किसी भी युद्धविराम में ऊर्जा और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था भी शामिल हो. यानी अभी इसे रूस और यूक्रेन के बीच अंतिम शांति समझौता कहना जल्दबाजी होगी. फिलहाल भारत ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है जो दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ा सके और बड़े युद्धविराम की जमीन तैयार कर सके। 

    भारत की पहल में अमेरिका से क्या अलग है?
    अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में शामिल रहा है. ट्रंप प्रशासन ने भी रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं. सितंबर में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच बातचीत में भी युद्ध खत्म करने और ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग जैसे मुद्दे सामने आए थे. लेकिन अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती है. वह खुद पश्चिमी गठबंधन का प्रमुख हिस्सा है और यूक्रेन को सैन्य तथा राजनीतिक समर्थन देता रहा है. ऐसे में मॉस्को के साथ बातचीत करते समय उसकी भूमिका को रूस अलग नजरिए से देखता है. भारत की स्थिति अलग है. नई दिल्ली के रूस के साथ पुराने और गहरे संबंध हैं, वहीं यूक्रेन के साथ भी भारत के राजनयिक संबंध कायम हैं. भारत ने युद्ध के दौरान रूस से बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया और साथ ही यूक्रेन के साथ भी संपर्क बनाए रखा. यही वजह है कि भारत दोनों पक्षों के बीच ऐसी बातचीत की जगह बना सकता है जिसमें किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय तत्काल मानवीय और आर्थिक मुद्दों से शुरुआत हो। 

    पुतिन ने मोदी के बारे में क्या कहा?
    भारत की पहल को उस समय और महत्व मिला जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति पहल की सार्वजनिक रूप से सराहना की. पुतिन ने कहा कि मोदी लगातार संघर्ष खत्म करने का सवाल उठाते रहे हैं और उनके पास इस समस्या के संभावित समाधान को लेकर अच्छे विचार हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत पहली बार युद्ध खत्म कराने की दिशा में अपने प्रयासों को केवल अपील से आगे ले जाने की बात कर रहा है. जयशंकर ने भी साफ कहा है कि भारत अब केवल शांति की वकालत नहीं कर रहा, बल्कि दोनों पक्षों से बातचीत करके कुछ व्यावहारिक मुद्दों पर मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। 

    प्रस्ताव पर सहमति बनी तो भारत के लिए कितनी बड़ी राहत
    अगर भारत की पहल से रूस और यूक्रेन के बीच सीमित युद्धविराम की व्यवस्था बनती है और आगे व्यापक बातचीत का रास्ता खुलता है तो यह भारत की विदेश नीति के लिए बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा. सबसे पहला फायदा यह होगा कि भारत की वह नीति मजबूत होगी जिसमें वह युद्ध के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बताता रहा है. प्रधानमंत्री मोदी रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं से लगातार संपर्क में रहे हैं और भारत ने शुरू से कहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है। 

    दूसरा फायदा भारत के आर्थिक हितों से जुड़ा है. रूस भारत के लिए ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार है. दूसरी तरफ यूरोप और पश्चिमी देशों के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने से भारत को इन दोनों रिश्तों के बीच संतुलन साधना पड़ता है। 

    तीसरा और शायद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत की कूटनीतिक भूमिका सिर्फ संतुलन साधने वाले देश की नहीं रहेगी. अगर दोनों पक्ष किसी भारतीय पहल को बातचीत की शुरुआत के लिए स्वीकार करते हैं तो नई दिल्ली को संकट समाधान में एक सक्रिय मध्यस्थ भूमिका निभाने का अनुभव मिलेगा। 

  • रूस की एंटी-प्लेग लैब में हादसा, कर्मचारी की मौत से हड़कंप; ‘वुहान जैसे हालात’ की चर्चा

    रूस की एंटी-प्लेग लैब में हादसा, कर्मचारी की मौत से हड़कंप; ‘वुहान जैसे हालात’ की चर्चा

    मॉस्को 

    रूस के साइबेरिया क्षेत्र में रहस्यमय इंफेक्शन ने हड़कंप मचा दिया है. यहां की प्रयोगशाला में एक महिला कर्मचारी की संदिग्ध खतरनाक संक्रमण को लेकर अधिकारियों में न सिर्फ चिंता बढ़ गई है बल्कि स्थिति पैनिक हो रही है.  घटना इरकुत्स्क के पास स्थित शेलेखोव के एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई बताई जा रही है, ऐसे में प्लेग के निमोनिक वेरियंट के फैलने की आशंका जताई जा रही है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक प्रयोगशाला में काम करने वाले एक कर्मचारी की मौत हो गई, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया है। 

    बताया जा रहा है कि मृतक को ऐसे निमोनिया का पता चला था, जिसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. हालांकि घटना के दौरान वास्तव में कौन-सा संक्रमण या पदार्थ बाहर निकला, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. रूस की संक्रमण नियंत्रण एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर (Rospotrebnadzor) मामले की जांच और स्थिति पर निगरानी रख रही है, लेकिन ज्यादा जानकारी अब भी सामने नहीं आई है. घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। 

    रहस्यमय बीमारी को लेकर मचा हड़कंप 
    सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इरकुत्स्क क्षेत्र, इरकुत्स्क शहर और शेलेखोव की सैनिटरी तथा महामारी संबंधी स्थिति सामान्य और स्थिर है. अभी यह साफ नहीं है कि प्रयोगशाला में हुई दुर्घटना का संक्रमण फैलने से कोई सीधा संबंध है या नहीं. अधिकारी घटना की वजह और रिस्क की जांच कर रहे हैं. इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट से जुड़े इस मामले में मृतक 28 वर्षीय महिला कर्मचारी बताई जा रही है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक उसे ऐसे निमोनिया की शिकायत थी, जिसके संक्रमण की वजह नहीं पता चल सकी है. वहीं  आशंका जताई जा रही थी कि महिला की मौत प्लेग से हो सकती है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुर्यातिया में फिलहाल प्लेग का कोई प्रकोप नहीं है। 

    200 लोग मेडिकल निगरानी में 
    संक्रमण की आशंका के चलते शेलेखोव में उस अस्पताल की निगरानी बढ़ाए जाने की खबर है, जहां कर्मचारी को भर्ती कराया गया था. स्थानीय मीडिया के मुताबिक करीब 200 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया, जबकि शहर के एक डिलीवरी हॉस्पिटल में भी एहतियाती क्वारंटीन लागू किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट ने कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर मास्क पहनने की सलाह दी है. कंपनी ने कहा कि जिन लोगों का मरीज से करीबी संपर्क था, उनकी निगरानी की जा रही है और अब तक उनमें बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं। 

    क्या हो सकती है ये बीमारी?
    आशंका है कि ये बीमारी निमोनिक प्लेग हो सकती है, तो फेफड़ों को प्रभावित करने वाला गंभीर संक्रमण है और सांस से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए फैल सकता है. हालांकि विशेषज्ञों ने कहा है कि फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि मामला प्लेग का ही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्लेग गंभीर बीमारी हो सकती है, लेकिन समय पर पहचान और उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है। 

  • यमन में 106 हवाई हमलों से मचा हड़कंप, सऊदी अरब ने हूतियों पर कसा शिकंजा; बाब अल-मंदेब पर बढ़ा दबाव

    यमन में 106 हवाई हमलों से मचा हड़कंप, सऊदी अरब ने हूतियों पर कसा शिकंजा; बाब अल-मंदेब पर बढ़ा दबाव

    बेरूत
     यमन के उत्तरी हिस्से पर शासन करने वाले 'अंसार अल्लाह' आंदोलन ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया है कि उसने पिछले 24 घंटों में उनके इलाके में 106 हवाई हमले किए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा, "पिछले 24 घंटों में, सऊदी लड़ाकू विमानों ने राजधानी सना और अल-जौफ़, ताइज़, अमरान, हज्जा और सादा प्रांतों में आम नागरिकों के ठिकानों पर 106 हवाई और मिसाइल हमले किए हैं।"

    सरी ने आगे कहा कि एफ -15 और टाइफून लड़ाकू विमानों ने यमन के उन इलाकों पर हमले किए जो हूतियों के नियंत्रण में हैं। इससे पहले रविवार को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेनाओं ने उन इलाकों को वापस पाने के लिए एक सैन्य अभियान की घोषणा की जो अभी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं।

    यमनी सेना ने इस अभियान को ‘डॉन ऑफ यमन’ नाम दिया है और उसका सबसे बड़ा लक्ष्य रणनीतिक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है. सेना के मुताबिक इसके लिए जमीन और हवा, दोनों तरफ से कार्रवाई तेज की गई है. सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमनी सेना को जमीन पर एयर कवर दे रहा है और बाब अल-मंदेब के लिए हवाई सुरक्षा भी उपलब्ध करा रहा है। 

    ताइज को घेरने की तैयारी, तुर्बाह पर कब्जा
    तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा रविवार को हुआ। इसके कुछ ही समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा कर दी। तुर्बाह एक अहम सड़क पर स्थित है, जो प्रांतीय राजधानी ताइज को बंदरगाह शहर अदन से जोड़ती है। अदन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का अंतरिम केंद्र है।

    ताजा हिंसा में भी हजारों लोग प्रभावित
    संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, हालिया हिंसा में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 3,600 से अधिक लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के अनुसार, इस नए संघर्ष के कारण यमन के भीतर 1.45 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। संघर्ष के चलते 3,000 से ज्यादा लोग समुद्र पार कर जिबूती भी पहुंच चुके हैं। ऐसे में ताइज़ की ओर हूतियों की नई बढ़त और सऊदी समर्थित सरकार के जवाबी सैन्य अभियान ने यमन में लंबे समय से चले आ रहे संकट को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है।

    सरकारी सेना के लिए तुर्बाह क्यों है अहम?
    पिछले कई वर्षों से तुर्बाह में सरकारी सैनिकों की अहम तैनाती रही है। यहां से वे हूतियों के खिलाफ ताइज की रक्षा करते रहे हैं। ऐसे में शहर का हाथ से निकलना सरकारी बलों के लिए रणनीतिक और सैन्य, दोनों लिहाज से बड़ा नुकसान है। इससे पहले हूतियों ने ताइज के बाहरी इलाकों में कई गांवों और क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। इन लगातार बढ़तों ने विद्रोहियों के लिए ताइज को चारों तरफ से घेरने का रास्ता खोल दिया है। ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और देश में इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा है।

    लाल सागर के तट पर भी हूतियों की बड़ी बढ़त
    सितंबर की शुरुआत में ईरान समर्थित हूतियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया था। इस अभियान के दौरान उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों पर नियंत्रण मिलने के बाद हूतियों का यमन की तरफ से बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हो गया है।

    बाब अल-मंदब पर कब्जा क्यों है इतना अहम?
    बाब अल-मंदब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है। इस संकरे जलमार्ग से दुनिया के करीब 12 फीसदी वैश्विक व्यापार का आवागमन होता है। इसलिए इस इलाके पर किसी भी सशस्त्र समूह का नियंत्रण क्षेत्रीय संघर्ष के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

    यमन सरकार ने शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान
    रविवार को जारी बयान में सऊदी समर्थित यमन सरकार ने कहा कि वह सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों में सैनिकों की तैनाती और लामबंदी कर रही है। सत्तारूढ़ प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि सैन्य अभियान का लक्ष्य हूतियों के कब्जे में बचे इलाकों को वापस लेना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी सरकार को समर्थन देने की अपील भी की।

    सऊदी अरब ने दिया हूतियों को सीधा संदेश
    अल-अलीमी के एलान के कुछ ही घंटे बाद सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने यमन सरकार की सेनाओं को पूरा सैन्य सहयोग देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि हूतियों के खत्म होने तक सऊदी अरब यमन सरकार की सेनाओं को 'पूरी ऑपरेशनल मदद' देता रहेगा।

    मिसाइल और ड्रोन हमलों से भी बढ़ा तनाव
    अल-मलिकी ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को हूतियों को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार है। हूती पिछले करीब तीन महीने से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। इन हमलों ने दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

    जुलाई में कैसे फिर भड़की लड़ाई?
    ताजा तनाव की शुरुआत जुलाई के मध्य में हुई। उस समय हूतियों ने सऊदी अरब पर यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी करने का आरोप लगाया था। हूतियों का दावा था कि सऊदी अरब ने एक अनधिकृत ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए एयरपोर्ट को निशाना बनाया।

    जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब को बनाया निशाना
    इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब और यमन में सरकारी बलों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। उन्होंने लाल सागर में सऊदी शिपिंग की नाकेबंदी का भी ऐलान किया और सऊदी अरब से जुड़े कई जहाजों को निशाना बनाया। इसके बाद सितंबर में हूतियों ने अपने अभियान को और तेज कर दिया। उन्होंने लाल सागर के तट से तेजी से आगे बढ़ते हुए कई इलाकों पर कब्जा किया। इसे पिछले कई वर्षों में हूतियों की सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त में से एक माना जा रहा है।

    तुर्बाह के हाथ से निकलने का ताइज पर असर
    वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के मुताबिक, तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा ताइज प्रांत और ताइज शहर में मोर्चे पर तैनात यमन सरकार समर्थक बलों के लिए सैनिकों और हथियारों समेत जरूरी सामान पहुंचाना बेहद मुश्किल कर सकता है। थिंक टैंक ने रविवार को जारी अपने विश्लेषण में कहा कि सप्लाई रोकना सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका असर इससे भी बड़ा है। तुर्बाह के उत्तर में आने-जाने वाली सभी सड़कों पर नियंत्रण होने का मतलब है कि सरकारी बलों के लिए शहर से पीछे हटने का रास्ता भी बंद हो सकता है।

    2014 से चल रही है यमन की जंग
    यमन का गृहयुद्ध 2014 में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोही अपने उत्तरी गढ़ से आगे बढ़ते हुए राजधानी सना में दाखिल हो गए थे। उन्होंने शहर पर कब्जा कर लिया और यमन की सरकार को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। वर्षों से जारी इस युद्ध ने यमन को दुनिया की सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में से एक के केंद्र में ला दिया है। संघर्ष में अब तक 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 

     

  • ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा तटबंध: मुख्यमंत्री योगी

    ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर फैजुल्लागंज से नैमिष तक बनेगा तटबंध: मुख्यमंत्री योगी

    लखनऊ 

    गोमती की बाढ़ से फैजुल्लागंज से नैमिष तक के इलाके को बचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर तटबंध बनाया जाएगा। तटबंध पर रास्ता भी बनेगा, जिससे यह बाढ़ से बचाव के साथ आवागमन के काम आएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बख्शी का तालाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि तटबंध को स्वीकृति दे दी गई है। धनराशि जारी कर मानसून समाप्त होने के बाद काम आगे बढ़ाया जाएगा।
     
    मुख्यमंत्री बख्शी का तालाब तहसील क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट एवं राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री बांटी और उनकी समस्याएं सुनीं। राहत एवं बचाव कार्यों में लगी टीमों से बात कर स्थिति जानी और स्वास्थ्य विभाग के शिविर का जायजा लिया। इससे पहले उन्होंने फैजुल्लागंज से नैमिष तक प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे भी किया।
     
    तटबंध के साथ जल निकासी का भी इंतजाम

    मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती किनारे सर्वे कर तटबंध का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। कहा कि तटबंध के बाहर बारिश का पानी जमा न हो, इसका भी इंतजाम किया जाए। इसके लिए पंपिंग सेट लगाए जाएंगे, ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने पर आबादी की ओर जमा पानी को नदी में निकाला जा सके। तटबंध को हर मौसम में उपयोगी बनाने के साथ उस पर आवागमन की व्यवस्था भी की जाएगी।
     
    पांच-छह दिन बाद पहुंचा बारिश का पानी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 दिनों में प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में भारी बारिश हुई है। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और नेपाल में हुई बारिश का पानी पांच-छह दिन बाद नीचे पहुंचने से गोमती का जलस्तर बढ़ा। इससे बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर और फैजुल्लागंज से नैमिष तक के इलाके में बाढ़ जैसे हालात बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लगातार स्थिति और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे और जमीनी स्थिति देखने पहुंचे हैं।
     
    प्रभावित परिवारों को 26 जरूरी वस्तुएं
    बाढ़ प्रभावित परिवारों को चावल, दाल, आटा, च
    ना और तिरपाल समेत 26 जरूरी वस्तुओं की राहत सामग्री दी जा रही है। इसमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल और एक लीटर सरसों या रिफाइंड तेल के साथ नमक, मिर्च-मसाला, बाल्टी, लाई-भुजा, मोमबत्ती, माचिस और बरसाती समेत अन्य सामान शामिल है।
     
    मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों को खुले में रहने के बजाय स्कूलों और मैरिज हॉल में बनाए गए राहत शिविरों में ठहराने के निर्देश दिए। शिविरों में दोनों समय गर्म भोजन की व्यवस्था होगी। छोटे बच्चों को दूध और गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार दिया जाएगा। पशुओं के लिए सूखे भूसे के साथ चोकर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
     
    जनहानि पर तत्काल ₹4 लाख

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ में डूबने या आकाशीय बिजली से जनहानि होने पर परिवार को तत्काल ₹4 लाख की सहायता दी जाएगी। बारिश से मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर पात्र परिवार को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना से घर मिलेगा। पशुहानि की भी भरपाई होगी। राहत एवं बचाव कार्यों के बाद फसलों का समय से सर्वे कर किसानों को नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा।
     
    स्वास्थ्य केंद्रों पर रहेगा एंटी स्नेक वेनम

    बाढ़ के दौरान सांप-बिच्छू और अन्य जीवों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। कुत्ते या अन्य जानवर के काटने पर एंटी रेबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध रहेगा। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल और पशु चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे।
     
    राहत शिविरों में बिजली न होने पर पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था होगी। घर छोड़कर शिविरों में आने वाले परिवारों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए गांव के चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी और पुलिस के जवान रात में पेट्रोलिंग करेंगे।
     
    राजनाथ ने फोन कर ली बाढ़ की जानकारी

    मुख्यमंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सुबह फोन कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने भी फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनने से बाढ़ की समस्या से राहत मिलने की बात कही। मुख्यमंत्री ने बताया कि तटबंध को स्वीकृति दे दी गई है और इसके लिए तत्काल धनराशि जारी कर काम आगे बढ़ाया जाएगा।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि आपदा की इस घड़ी में डबल इंजन सरकार उनके साथ खड़ी है। राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं और प्रशासन को इसके लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, विधायक योगेश शुक्ला व डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य और नगर पंचायत इटौंजा अध्यक्ष अखिलेश कुमार अवस्थी समेत प्रशासन, पुलिस और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।