Author: NewseDay

  • पीएम आवास योजना-शहरी में यूपी का देशभर में परचम, दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित

    पीएम आवास योजना-शहरी में यूपी का देशभर में परचम, दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित

    लखनऊ

    विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी में देशभर में अपनी उपलब्धियों का परचम लहराया। 5 अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रदेश को दो प्रतिष्ठित श्रेणियों में पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि प्रदेश में जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आवास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और लाभार्थी केंद्रित व्यवस्था को मिली यह राष्ट्रीय मान्यता उत्तर प्रदेश की शहरी विकास यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    पीएम आवास योजना-शहरी में यूपी को दो राष्ट्रीय पुरस्कार

    प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के लाभार्थी आधारित आवास निर्माण (बीएलसी) घटक में उत्तर प्रदेश ने देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। स्वीकृत आवासों के सापेक्ष सर्वाधिक आवास पूर्ण करने पर प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान मिला है। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत स्वीकृत आवासों की कुल संख्या के सापेक्ष सर्वाधिक प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग यानी धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कराने के मामले में उत्तर प्रदेश को तृतीय स्थान से सम्मानित किया गया है।

    राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में यूपी का प्रतिनिधित्व

    दोनों प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा प्रदान किए गए। इस अवसर पर केंद्र सरकार के शहरी विकास विभाग के सचिव सत्येंद्र सिंह, डी. तारा और संयुक्त सचिव कुमार रविकांत सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश की ओर से राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के निदेशक महेंद्र बहादुर सिंह ने पुरस्कार ग्रहण किए।

    पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे निदेशक सूडा के साथ वित्त नियंत्रक रजनीकांत वर्मा और कार्यक्रम अधिकारी अतुल सिंह चौहान भी उपस्थित रहे। प्रदेश की इस उपलब्धि पर निदेशक सूडा ने विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं।

  • ‘अपराधियों के मन में डर पैदा करना होगा’, दिल्ली-NCR में रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

    ‘अपराधियों के मन में डर पैदा करना होगा’, दिल्ली-NCR में रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

    नई दिल्ली

    दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों में हुई रेप की वारदातों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि अपराधियों के मन में डर पैदा करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक पुलिस अपराधियों के मन में यह डर पैदा नहीं करती कि रेप किया तो मारे जाएंगे, तब तक स्थिति नहीं बदलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, हम भारत जैसे देश में हैं। सिर्फ कागज पर बातें लिखना काफी नहीं है। आपको असल में कदम उठाने होंगे।

    कोर्ट ने पुलिस को बिना हिचके सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा, अगर आपको थोड़ा और सख्त या कठोर होना पड़े, तो हिचकिचाएं नहीं। कुछ लोग आर्टिकल 21 (जीवन का अधिकार) को लेकर हंगामा करेंगे, लेकिन आपको अपना फर्ज निभाना होगा। हाल ही के दिनों में दिल्ली एनसीआर में रेप की कई वारदाते सामने आई थीं। इसमें स्लीपर बस में नाबालिग से गैंगरेप की वारदात भी शामिल थी जिसने निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी थी। इसके अलावा कालकाजी इलाके में आस्था कुंज पार्क में लड़की के साथ गैंगरेप हुआ था। वारदात को अंजाम देने वाले फर्जी पुलिस बनकर आए थे। इन घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए।

    क्या वॉर रूम बनाने का कोई प्रावधान है?
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि अपराध रोखने के लिए आप क्या कर रहे हैं। साथ ही पूछा कि क्या दिल्ली में अपराधों की निगरानी के लिए वॉर रूम बनाने का कोई प्रावधान है? कोर्ट ने बताया कि अलग-अलग हाई कोर्ट में ऐसे वॉर रूम बनाए गए हैं। कोर्ट ने National Database on Sexual Offenders के जरिए संदिग्ध और यौन अपराधों में शामिल लोगों की निगरानी पर भी ध्यान देने को कहा। 

    सभी एजेंसियां मिलकर इस मुद्दे पर काम करें- सुप्रीम कोर्ट
    कोर्ट ने कहा कि अगर सभी एजेंसियां मिलकर इस मुद्दे पर काम करें और खास तौर पर ध्यान दें, तो स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वह इस मामले के हर पहलू पर गंभीरता से ध्यान दे। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि अगले चार हफ्तों में फिर इस तरह की घटनाएं सामने आएं। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों के आसपास की स्थिति पर भी ध्यान देने को कहा। सुनवाई के दौरान कहा गया कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो छात्राओं को परेशान करते हैं और उन्हें लगातार तंग करते हैं।

    जज ने 2012 के निर्भया कांड का किा जिक्र
    कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में हजारों बिना अनुमति वाले खाने-पीने के ठिकाने हैं, जहां असामाजिक तत्व जमा होते हैं। इनमें कुछ जगहों पर शराब भी उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई। इस पर जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने 2012 के निर्भया कांड का जिक्र करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी कहीं खाना खाने गए थे और वहां शराब भी पी थी, जिसके बाद अपराध किया गया। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि इन सभी पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    अपराध रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम होगा
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि अपराध रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा। केवल कागजों पर योजना बनाने से काम नहीं चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर अपराध रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है तो पीछे नहीं हटना चाहिए। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि लोग आर्टिकल 21 का हवाला देकर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन पुलिस की जो जिम्मेदारी है, उसे हर हाल में निभाना होगा। कोर्ट ने कहा कि हमारा मकसद यह होना चाहिए कि रेप और ऐसे दूसरे अपराध पूरी तरह खत्म हों।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस के पास पर्याप्त बल नहीं है तो नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाए। पुलिसकर्मियों को उचित ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि इन कदमों को पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा, लेकिन तब तक किसी घटना को रोकने के लिए भी जरूरी कदम उठाने होंगे।

    दिल्ली पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की हिदायत
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। पुलिस को ऐसे समय में खास तौर पर सतर्क रहना होगा। कोर्ट ने कहा कि अपराध होने के बाद आरोपी को पकड़ना और गिरफ्तार करना ही काफी नहीं है। पुलिस का असली काम अपराध को होने से रोकना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस को ऐसा माहौल बनाना होगा कि अपराध करने वाले के मन में डर पैदा हो। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई अपराध करता है तो उसे पकड़ लिया जाएगा, गिरफ्तार कर लिया जाएगा—लेकिन यह समस्या का पूरा समाधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि दिल्ली पुलिस को अपराध होने से पहले उसे रोकने पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

    दिन-रात दिल्ली में कड़ी निगरानी
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में दिन और रात दोनों समय कड़ी निगरानी रखने को कहा। कोर्ट ने साफ कहा कि जवाबदेही सबसे अहम है और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी।

    2012 निर्भया केस का भी जिक्र
    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया केस का भी जिक्र किया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि उन जगहों पर भी ध्यान दिया जाए जहां बिना अनुमति चल रहे खाने-पीने के ठिकानों पर शराब भी परोसी जाती है। कोर्ट ने कहा कि 2012 की घटना के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपियों ने कहीं खाना और शराब ली थी और उसके बाद अपराध किया था। 

    पार्क और सार्वजनिक जगहों पर रोशनी
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में सभी सार्वजनिक जगहों और पार्कों में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह SG तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे कि सार्वजनिक जगहों और पार्कों में उचित लाइटिंग की व्यवस्था हो। मालूम हो कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हाल ही रेप के कई मामले सामने आए हैं। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।

    अपराधियों के मन में पैदा कीजिए डर- सुप्रीम कोर्ट
    कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि आप सख्ती कीजिए। अपराधियों के मन में डर पैदा कीजिए। मानवाधिकार कार्यकर्ता आप पर आर्टिकल 21 के हनन के आरोप लगाएंगे, लेकिन आपको सख्त होना होगा। कोर्ट ने कहा कि समाज की हर महिला हमारी माता है, बहन है। हमें उन्हें सुरक्षित महसूस करवाना होगा। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से घर पर महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं, वैसा ही समाज में भी करना होगा। बस में एक महिला अकेले सफर कर रही है तो उसकी जानकारी आपको होनी चाहिए। आपको उसकी सुरक्षा के लिए सक्रिय होना होगा। 16 नवंबर को अगली सुनवाई।

    हर जगह निगरानी बढ़ाने के आदेश
    कोर्ट ने पुलिस को स्कूल- कॉलेजों से लेकर बस स्टॉप तक, हर जगह निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस से यह भी कहा कि वे पूरे शहर में निगरानी बढ़ाएं और बस स्टॉप, मेट्रो, रेलवे स्टेशन, स्कूल, कॉलेज जैसी जगहों पर ज्यादा ध्यान दें, जहां महिलाओं के साथ अपराधों का खतरा ज्यादा होता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि ये दिल्ली पुलिस के लिए बहुत बड़ा काम है और बहुत बड़ी चुनौती होने वाली है लेकिन इसी में पुलिस की सबसे बड़ी जीत है। कोर्ट ने कहा, यह आप सबके सामने एक बहुत बड़ा काम है। यह एक चुनौती है और जिस दिन आप इस चुनौती से पार पा लेंगे, वह डिपार्टमेंट के लिए एक बड़ी जीत होगी।

    'लोग आपसे डरे नहीं'
    सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को नसीहत दी है कि उनका रवैया ऐसा होना चाहिए कि जनता उनसे बात करने में डरे नहीं। वह खुद आगे आकर आपसे मिलें और बात करें। कोर्ट ने कहा, आपका रवैया ऐसा होना चाहिए जिससे आम आदमी को आपसे बात करने का भरोसा मिले।

  • 45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    सहरसा
     पिछड़े कोसी क्षेत्र में आने वाले दिनों में डेयरी से संबंधित कारोबार तेजी से बढ़ेगा। सरकार ने सात निश्चय -3 के तहत एक अरब 26 करोड़ सात लाख की लागत से कोसी दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड के अंतर्गत दही प्लांट, प्रीमियम आईस्क्रीम प्लांट, टोटल मिक्स्ड राशन प्लांट, इंस्टैंट मिल्क चिलिंग प्लांट खोलने की योजना है।

    इससे कोसी क्षेत्र में डेयरी व दुग्ध व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के पशुपालक व दुग्ध कारोबारी काफी लाभांवित होंगे, जो पिछड़े कोसी क्षेत्र के विकास का बढ़ा कारण बनेगा।

    नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का भी होगा गठन
    श्वेत क्रांति-2 पहल के तहत डेयरी किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने के लिए नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर बल दिया जाएगा।

    इस समिति के गठन होने से सहकारी डेयरी के माध्यम से उपभोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले समितियों का अधिकांश हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचेगा।

    सात निश्चय- 3 से प्राप्त राशि से कोसी प्रमंडल के तीनों जिले में मिल्क चिलिंग प्लांट एवं इंस्टैंट मिल्क चिलिंग सिस्टम की स्थापना होगी। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी और इसे खराब होने से बचाया जा सकेगा।

    दुग्ध उत्पादन बढ़ने से सशक्त होगी ग्रामीण महिलाएं

    कोसी प्रमंडल में दुग्ध उत्पादन में जीविका के माध्यम से महिलाएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। कौशिकी जीविका महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी महिलाओं द्वारा संचालित है और सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में अपनी सेवाएं दे रही है।

    वर्तमान में कंपनी से 45,000 दुग्ध उत्पादक जीविका दीदी जुड़ी हुई हैं। यह महिलाएं न केवल दुग्ध उत्पादन करती हैं, बल्कि इसके संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

    यह कंपनी चालू वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन औसतन 76,171 लीटर दूध की खरीद कर रही है महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग कर आधुनिक तकनीकों के साथ अपने व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं।

    सात निश्चय से विभिन्न तरह के प्लांट की स्थापना से इस कंपनी का भी कारोबार तेजी से फल-फूल सकेगा। ऐसी संभावना है।

        कोसी क्षेत्र के विकास में डेयरी व्यवसाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण प्लांट की स्थापना से व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के लोग काफी लाभांवित होंगे। – डॉ. अभिनीत झा, जिला पशुपालन पदाधिकारी, सहरसा

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वन विकास निगम की ओर से सौंपा गया 16 करोड़ 74 लाख 2 हजार रुपए के लाभांश का चेक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वन विकास निगम की ओर से सौंपा गया 16 करोड़ 74 लाख 2 हजार रुपए के लाभांश का चेक

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की ओर से 16 करोड़ 74 लाख 2 हजार रुपए के लाभांश का चेक सौंपा गया। यह निगम द्वारा अब तक दिया गया सर्वाधिक लाभांश है। राज्य सरकार के अंशदान पर 44.13 रुपए प्रति शेयर की दर से यह लाभांश प्रदान किया गया है।

    निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लाभांश का चेक सौंपा। इस अवसर पर निगम के उपाध्यक्ष  राम मोहन सिंह बघेल और प्रमुख सचिव वन  राघवेंद्र सिंह उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के अध्यक्ष  रावत, उपाध्यक्ष  बघेल, प्रमुख सचिव वन  सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन तथा मध्यप्रदेश वन विकास निगम के प्रबंध संचालक को निगम की विकासोन्मुखी गतिविधियों के लिए बधाई दी।

    मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की ओर से भारत सरकार को उसके अंशदान पर 44.13 रुपए प्रति शेयर की दर से 61 लाख 17 हजार रुपए का लाभांश भुगतान किया जाएगा।

     

  • उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    प्रयागराज
    प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख रुपये का इनामी आरोपी अरमान अब प्रयागराज पुलिस की कस्टडी में है. करीब साढ़े तीन साल तक गया की जेल में बंद रहने के बाद उसे प्रयागराज लाया गया है. अरमान की अहमियत सिर्फ इस वजह से नहीं है कि उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है, बल्कि पुलिस के मुताबिक वारदात वाले दिन वही बाइक चला रहा था जिस पर बमबाज गुड्डू मुस्लिम बैठा था. इसके अलावा अरमान को अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन का बेहद करीबी बताया जाता रहा है. ऐसे में पुलिस की पूछताछ का फोकस सिर्फ उमेश पाल हत्याकांड तक सीमित रहने के बजाय गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता के लंबे समय से फरार रहने की कड़ी तक पहुंच सकता है। 

    43 महीने बाद खुला एक ऐसा दरवाजा, जिसके पीछे छिपे हैं कई सवाल
    24 फरवरी 2023… प्रयागराज की सड़क पर उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की हत्या हुई. कैमरों में कैद हुई तस्वीरों ने पूरे हत्याकांड को समझने की एक अहम कड़ी पुलिस को दी. बम बरसा रहा था गुड्डू मुस्लिम और बाइक चला रहा था अरमान. वारदात के बाद दोनों उसी बाइक से फरार हुए थे. अरमान अतीक अहमद के नेटवर्क से जुड़ा बताया गया और बाद में उसकी तलाश में पांच लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ.  लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट इसके बाद आया. जिस अरमान को यूपी पुलिस तीन साल से तलाश रही थी, वह यूपी से बाहर किसी नए नाम या पहचान के साथ नहीं, बल्कि बिहार की गया जेल में बंद था. अब उसे पुलिस प्रयागराज लेकर आ रही है। 

    सबसे बड़ा सवाल, गुड्डू मुस्लिम कहां गया
    उमेश पाल हत्याकांड के बाद कई आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आए, कुछ मुठभेड़ में मारे गए और कुछ के खिलाफ अदालत में कार्रवाई आगे बढ़ी. लेकिन गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. गुड्डू मुस्लिम पर पांच लाख रुपये का इनाम है, जबकि शाइस्ता परवीन पर भी इनामी राशि घोषित की गई थी. पुलिस ने दोनों की तलाश में कई राज्यों में दबिश दी, लेकिन उनका पता नहीं चल सका. अब पुलिस के हाथ ऐसा व्यक्ति लगा है जो गुड्डू मुस्लिम के बेहद करीब रहा था. अरमान ने गुड्डू को अपनी बाइक पर बैठाकर उमेश पाल के घर तक पहुंचा था. यानी पुलिस के सामने अब एक ऐसा आरोपी है जो वारदात से ठीक पहले गुड्डू के साथ था और वारदात के बाद उसके साथ ही वहां से निकला था. यही वजह है कि अरमान की पूछताछ इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। 

    क्या अरमान बता सकता है गुड्डू मुस्लिम का आखिरी ठिकाना 
    पुलिस के लिए पहला बड़ा सवाल यही हो सकता है कि 24 फरवरी 2023 की वारदात के बाद गुड्डू मुस्लिम कहां गया? दोनों साथ भागे थे. ऐसे में पुलिस यह जानना चाहेगी कि वारदात के बाद दोनों के रास्ते कब और कहां अलग हुए. क्या गुड्डू पहले से तय किसी ठिकाने पर पहुंचा था? किसने उसे वहां पहुंचाने में मदद की? क्या उसके पास पहले से सुरक्षित ठिकानों की पूरी सूची थी? क्या फरारी के दौरान उसे किसी ने आर्थिक या लॉजिस्टिक मदद पहुंचाई?

    इन सवालों के जवाब अगर अरमान की पूछताछ में मिलते हैं तो जांच की दिशा एक बार फिर बदल सकती है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अरमान के पास वर्तमान में गुड्डू मुस्लिम के बारे में कोई ऐसी जानकारी है या नहीं. यह पुलिस की पूछताछ के बाद ही सामने आएगा. दूसरा बड़ा सवाल हो सकता है कि शाइस्ता की फरारी का नेटवर्क कौन चला रहा था ? अरमान को लेकर एक और बात उसे इस केस में महत्वपूर्ण बनाती है. पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि अरमान शाइस्ता परवीन के बेहद करीब रहता था और उसके मूवमेंट तथा सुरक्षा व्यवस्था में साथ रहता था। 

    गया का ही रहने वाला है अरमान 
    उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी शूटर अरमान बिहार के गया जिला के कठोत्तर तालाब का रहने वाला है. और उमेश पाल के हत्या के बाद अरमान उत्तर प्रदेश से गया आ गया. गया शहर के कटारी तालाब के पास एक अंडा व्यवसाय पर गोली चलाने के पुराने मामले में गया कोर्ट में 27 फरवरी 2023 को आत्मसमर्पण कर दिया. जहां से उसको गया के सेंट्रल जेल में 27 फरवरी 2023 को भेज दिया गया था और अभी तक अरमान गया के सेंट्रल जेल में बंद है. प्रयागराज के धूमनगंज थाना की पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि उमेश पाल का हत्याकांड में शामिल आरोपी बिहार के गया जिला के सेंट्रल जेल में बंद है तो उत्तर प्रदेश की पुलिस गया के सेंट्रल जेल पहुंची और गया के सेंट्रल जेल में बंद अरमान से पूछताछ कर उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल आरोपी अरमान की पहचान की. यूपी पुलिस ने पांच लाख के इनामी हत्याकांड के आरोपी अरमान को अपने साथ उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए अर्जी भी दी. अब पुलिस उसे लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हो चुकी है। 

    परिवार वालों को एनकाउंटर का डर 
    वही उमेश पाल के हत्या के आरोपी अरमान के पिता समीम मलिक ने बताया की मेरा बेटा अरमान उत्तर प्रदेश के उमेश पाल हत्या में शामिल था और वहां से भाग कर वह गया आया . गया में एक पुराने मामले भोलू अंडा वाला के केश में गया कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. मगर तीन -चार साल के बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए आई थी. अब हम लोगों को डर लग रहा है की उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को ले जाते समय एनकाउंटर न कर दे क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस आरोपी के हाथ में बंदूक देकर एनकाउंटर कर देती है. उन्होंने कहा कि उमेश पाल के हत्या के चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है और यह पांचवां आरोपी है तो हमें लग रहा है की इसका भी एनकाउंटर न कर दें. उन्होंने कहा कि अरमान उत्तर प्रदेश में एक बर्फ फैक्ट्री में काम करता था मगर वहां से कुछ लोगों ने उसको अतीक अहमद के साथ जुड़ा दिया था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के साथ नहीं रहता था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के बीवी शाहिस्ता और मली भाई के साथ रहता था। 

  • संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ यूपी राइज का हुआ आयोजन

    संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ यूपी राइज का हुआ आयोजन

    झांसी

     संवाद, संकल्प और सफलता के मूलमंत्र के साथ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में सोमवार को यूपी राइज कार्यक्रम का आयोजन हुआ। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आयोजन में नवाचारी युवाओं ने अपने स्टार्टअप आइडियाज को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के साथ ही आसपास के कई जिलों से आए विद्यार्थियों एवं नवाचारियों ने हिस्सा लिया। 

    इस मौके पर युवाओं और नवाचारियों को योगी सरकार की उन योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से वे अपने स्टार्टअप के लिए आर्थिक मदद या व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त कर सकते है। कार्यक्रम स्थल पर इन योजनाओं में पंजीकरण कराने के लिए संबंधित विभागों की ओर से काउंटर लगाए गए।

    इस आयोजन में 12 स्टार्टअप्स की टीम ने अपने आइडियाज प्रस्तुत किए। इनमें से अभिषेक और निशांत के स्टार्टअप ऑन मिंट को विनर घोषित किया गया जबकि जबकि जुनैद रिजवान और सागर के स्टार्टअप इक्षू को रनर अवार्ड दिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में स्टार्टअप फाउंडर, स्टूडेंट, विश्वविद्यालय के शिक्षक, स्टार्टअप मेंटोर, एक्सपर्ट उपस्थित रहे। नवाचारी युवाओं ने अपने आइडिया प्रस्तुत किए जिसे लेकर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए और योगी सरकार की योजनाओं के माध्यम से आर्थिक मदद प्राप्त करने के तरीके बताए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कवि मुकुल शर्मा ने युवाओं को अपनी रचनाएं सुनाकर युवाओं का मनोरंजन किया।

    मेंटोर एवं निर्णायक मंडल के तौर पर कनेक्स्ट मारकॉम के डायरेक्टर अलाय रिजवी, स्टूफिट के सीईओ डॉ सैयद शुजात हैदर जाफरी, इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल के प्रेसिडेंट डॉ नूर आलम खान उपस्थित रहे। इसके अलावा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एम एम सिंह, डॉ संदीप एवं अन्य उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने कहा कि विकसित भारत 2047 की संकल्पना को पूरा करने में यूपी राइज जैसे आयोजन मददगार सिद्ध होंगे। युवाओं को अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहना होगा। यह आयोजन अवसर, नवाचार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देने का काम करेगा।

  • पटना में अब तेजी से होंगे विकास कार्य, बारिश थमते ही BUDCO

    पटना में अब तेजी से होंगे विकास कार्य, बारिश थमते ही BUDCO

    पटना
    मानसून के कारण थमे विकास कार्य अब रफ्तार पकड़ेंगे। वर्षा खत्म होते ही सड़कों, नालों, पार्कों और घाटों से जुड़ी अधूरी योजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है।

    बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) की ओर से सैदपुर, राजीव नगर और आनंदपुरी नाला समेत कई बड़ी योजनाओं पर इसी माह के अंतिम सप्ताह से काम शुरू कराया जाएगा।

    त्योहारों को देखते हुए बुडको ने काम शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृत 300 से अधिक ऐसी योजनाएं हैं, जिनका काम वर्षा के कारण रोक दिया गया था।

    इनमें सड़क निर्माण, पुरानी सड़कों की मरम्मत, पार्क व घाटों का विकास और नालों के पक्कीकरण का काम शामिल है।

    आठ डिविजन में बांटकर विकास कार्य करा रहा बुडको
    बुडको पटना को आठ डिविजन में बांटकर विकास कार्य करा रहा है। इनमें अजीमाबाद, बांकीपुर, कंकड़बाग, नूतन राजधानी, पटना पश्चिम, पाटलिपुत्र, पटना पूर्वी और पटना सिटी डिविजन शामिल हैं।

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 500 योजनाओं में से 177 योजनाओं का काम वर्षा के दौरान रोक दिया गया था। इसी तरह 2024-25 में स्वीकृत 393 योजनाओं में से 127 रुकी योजनाओं पर भी दोबारा काम शुरू होगा।

    दो तरफ से बनेगा सैदपुर नाला
    सैदपुर नाले का निर्माण तेजी से पूरा करने के लिए गायघाट और रामपुर, दोनों ओर से एक साथ काम शुरू कराया जाएगा। निर्माण में बाधा बन रहे बिजली के खंभों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है।

    नाले के पानी का बहाव भी अस्थायी रूप से डायवर्ट किया गया है, ताकि निर्माण के दौरान जलजमाव की समस्या न हो।

    राजीव नगर में हटे खंभे, अब ढलाई
    राजीव नगर बड़े नाले का काम भी इसी माह के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा। मानसून शुरू होने पर जुलाई में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं हो, इसलिए काम रोक दिया गया था।

    अब राजापुर पुल की ओर से निर्माण शुरू कराया जाएगा। रविवार को नाले के किनारे लगे सभी बिजली के खंभे हटा दिए गए। नाले में जमा गाद की सफाई भी तेजी से कराई जा रही है। आनंदपुरी नाले का काम भी दोबारा शुरू किया जाएगा।

    कहीं नाला बना, सड़क का इंतजार
    अधूरे विकास कार्यों के कारण कई इलाकों के लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। वार्ड सात के इंद्रपुरी रोड नंबर-10 में बाक्स नाला बन चुका है, लेकिन खोदी गई सड़क की मरम्मत नहीं हुई है।

    लोगों को नाले के ऊपर से पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। वहीं, वार्ड 45 के गीता प्रसाद रोड में 1.57 करोड़ रुपये की लागत से योगीपुर चौक से गांधी नगर तक नाला और सड़क बननी है।

    नाले का काम लगभग पूरा है, लेकिन सड़क नहीं बनने से राहगीरों को परेशानी हो रही है। अब इन अधूरे कामों को भी पूरा कराया जाएगा।

  • UP Old Age Pension: 60 साल की उम्र पर मिलेगा ₹1,500, जानें आय और दस्तावेज की शर्तें

    UP Old Age Pension: 60 साल की उम्र पर मिलेगा ₹1,500, जानें आय और दस्तावेज की शर्तें

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा और उनके सम्मान को ध्यान में रखते हुए वृद्धावस्था पेंशन योजना में एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर 1500 प्रतिमाह कर दी है।

    प्रदेश सरकार ने न केवल वृद्धजनों की मासिक पेंशन राशि में शानदार इजाफा किया है, बल्कि इस योजना को बिना किसी रुकावट के लगातार चलाने के लिए अनुपूरक बजट में 1500 करोड़ रुपये के बड़े फंड की मंजूरी भी दे दी है।

    सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों वरिष्ठ नागरिकों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    अब उत्तर प्रदेश के पात्र बुजुर्गों (Old Age Scheme) को हर महीने मिलने वाली 1000 रुपये की पेंशन को बढ़ाकर सीधे 1500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यानी अब हमारे बुजुर्गों को सालाना पूरे 18,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

    पेंशन भेजने का तरीका भी हुआ आसान
    इसके साथ ही, पेंशन बांटने के तरीके को भी पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और आसान बना दिया गया है। पहले जहां तीन महीने में एक साथ 3000 रुपये दिए जाते थे, वहीं अब बढ़े हुए पैसों को 1500-1500 रुपये की दो किस्तों में जारी किया जाएगा।

    सबसे अच्छी बात यह है कि पेंशन का सारा पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, ताकि बिना किसी बिचौलिए या झंझट के बुजुर्गों को उनका हक सीधे उनके हाथ में मिल सके।
    किसे मिलेगा पेंशन का लाभ, पात्रता और शर्तें

    पेंशन का नियमित लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूरा होना अनिवार्य है। जैसे कि लाभार्थी का बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है।

    डीबीटी (DBT) से भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक खाते का NPCI पोर्टल पर मैप होना जरूरी है।

    इसके अलावा सबसे जरूरी बात कि e-KYC सत्यापन। यदि किसी वृद्धजन की पेंशन रुकती है, तो उन्हें तुरंत अपना e-KYC अपडेट कराना होगा।

    यदि पेंशन खाते में न आए तो क्या करें?
    अगर किसी पात्र बुजुर्ग के खाते में बढ़ी हुई पेंशन की किस्त नहीं पहुंची है, तो सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार:

        सबसे पहले अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या बैंक शाखा में जाकर e-KYC और NPCI मैपिंग का स्टेटस चेक कराएं।
        अपने संबंधित जनपद के समाज कल्याण विभाग के कार्यालय से संपर्क कर आवेदन विवरण और आधार विवरण का मिलान कराएं।
        योजना के आधिकारिक यूपी सामाजिक पेंशन पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन स्टेटस ट्रैकिंग करें।

     

  • 6911 पेड़ों की कटाई पर NGT सख्त, भोपाल नगर निगम को एक माह में पौधे लगाने और रिपोर्ट देने के निर्देश

    6911 पेड़ों की कटाई पर NGT सख्त, भोपाल नगर निगम को एक माह में पौधे लगाने और रिपोर्ट देने के निर्देश

    भोपाल 

     पेड़ काटने की अनुमति देने के बाद पर्यावरण की भरपाई के लिए जमा करोड़ों रुपये भी नगर निगम ठीक से खर्च नहीं कर पाया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सही तरीके से नहीं हुआ और रकम पौधारोपण के बजाय दूसरे कामों में खर्च की गई।

    इतना ही नहीं, 2021 से राशि का हिस्सा पड़ा हुआ है, जबकि पेड़ काटे जाने के बाद तय मानकों के मुताबिक पौधारोपण तक पूरा नहीं किया गया। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली स्थिति माना है। साथ ही भोपाल में हरियाली घटने के आंकड़ों पर भी एनजीटी ने चिंता जताई है।

    एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच के आदेश के अनुसार, 2021-22 से 2025-26 के बीच नगर निगम द्वारा 6911 पेड़ काटने की अनुमति दी गई, इनके बदले 24,706 पौधे लगाए जाने थे, लेकिन अब तक 19,152 ही लगाए गए।
    पूरी राशि का उपयोग नहीं

    वहीं, पेड़ कटाई के एवज में 3.52 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि एक जनवरी 2026 तक सिर्फ 95.85 लाख रुपये ही पौधारोपण और संबंधित कार्यों पर खर्च किए गए। यानी करीब 2.56-2.57 करोड़ रुपये का उपयोग ही नहीं किया गया।

    एनजीटी ने माना कि राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और पौधारोपण भी तय मानकों के मुताबिक नहीं किया गया। एनजीटी ने साफ कहा कि पेड़ काटने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पौधारोपण उसी वित्तीय वर्ष या अगले मानसून में किया जाना चाहिए था, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण ऐसा नहीं हुआ।
    समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा निगम

    एनजीटी ने नगर निगम के रिकार्ड की जांच के बाद कहा कि जमा राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और रकम का कुछ हिस्सा दूसरे कामों में खर्च किया गया।

    नगर निगम की सुस्ती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिस पौधारोपण का काम मानसून में पूरा होना चाहिए था, उसके लिए निगम बाद में समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा। एनजीटी ने इस स्थिति को ‘आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला’ बताया।

    आदेश में पिछले एक दशक में शहर में चार से पांच लाख परिपक्व पेड़ काटे जाने के अनुमान और आइआइएससी के आकलन का उल्लेख है, जिसके अनुसार व्यापक भोपाल शहरी क्षेत्र में ट्री कैनोपी में 44 प्रतिशत कमी आई है।
    निगम को एक महीने में पूरा करना होगा पौधारोपण

    एनजीटी ने नगर निगम को एक महीने में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार क्षतिपूर्ति पौधारोपण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। पौधारोपण अतिरिक्त और निर्धारित खुले क्षेत्र में किया जाएगा, ताकि हरित क्षेत्र का वास्तविक नुकसान पूरा हो सके। इसके लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी करनी होगी।

    पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सिर्फ पौधारोपण, रखरखाव और पौधों के सर्वाइवल के लिए किया जाए। पुराने पौधारोपण के बीच खाली जगह भरने को क्षतिपूर्ति पौधारोपण नहीं माना जाएगा। निगम को लगाए गए पौधों के सर्वाइवल की जांच कर फोटो सहित रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।

     

  • शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित "सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026" में प्रदेश के युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवाओं को नई दिशा, प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराना है। कॉन्क्लेव में प्रदेश से 20 हजार से अधिक युवा सहभागिता करेंगे।

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े अवसरों की जानकारी एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं से संवाद कर उनकी आकांक्षाओं, विचारों और अपेक्षाओं को जानेंगे तथा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विकास पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार भी उपस्थित रहेंगे।

    जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल तथा कबीर कैफे द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेंगी।

    विशेषज्ञ देंगे मानसिक स्वास्थ्य और कॅरियर संबंधी मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में आईआईटी मुंबई और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ युवाओं को शिक्षा, तकनीकी विकास, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। एम्स के मनोचिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे।

    17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता

    कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विभाग युवाओं को अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं, अवसरों और गतिविधियों से परिचित कराएंगे।

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर एवं सेडमैप द्वारा स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से संबंधित गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।

     80 से अधिक प्रदर्शनी कक्षों में दिखेगी अवसरों और संभावनाओं की तस्वीर

    कॉन्क्लेव में विभागों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और नवोदित उद्यमों के 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। इनमें रोजगार, प्रशिक्षण, कॅरियर, उद्यमिता, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और शासकीय योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं गतिविधियां प्रदर्शित की जाएंगी।

    विश्वविद्यालयों द्वारा शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, कॅरियर मार्गदर्शन और ड्रोन प्रौद्योगिकी सहित भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

    विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता तक

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से विभिन्न नवोदित उद्यम अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। युवा इन नवाचारों के माध्यम से विचार को उत्पाद और उत्पाद को उद्यम में बदलने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित करने तथा नए विचारों पर कार्य करने के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा।

    उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, अर्धचालक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहन (EV) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां कॉन्क्लेव के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगी। इन क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा।

    कॅरियर से साइबर सुरक्षा तक विविध विषयों पर मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन, कौशल विकास, मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों द्वारा जानकारी दी जाएगी। पुलिस विभाग द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग, जन-सुरक्षा और युवा संवाद से जुड़े विषयों पर जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

    सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 युवाओं को शिक्षा से कौशल, कौशल से रोजगार, विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा।