Author: NewseDay

  • शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित "सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026" में प्रदेश के युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवाओं को नई दिशा, प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराना है। कॉन्क्लेव में प्रदेश से 20 हजार से अधिक युवा सहभागिता करेंगे।

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े अवसरों की जानकारी एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं से संवाद कर उनकी आकांक्षाओं, विचारों और अपेक्षाओं को जानेंगे तथा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विकास पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार भी उपस्थित रहेंगे।

    जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल तथा कबीर कैफे द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेंगी।

    विशेषज्ञ देंगे मानसिक स्वास्थ्य और कॅरियर संबंधी मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में आईआईटी मुंबई और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ युवाओं को शिक्षा, तकनीकी विकास, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। एम्स के मनोचिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे।

    17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता

    कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विभाग युवाओं को अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं, अवसरों और गतिविधियों से परिचित कराएंगे।

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर एवं सेडमैप द्वारा स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से संबंधित गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।

     80 से अधिक प्रदर्शनी कक्षों में दिखेगी अवसरों और संभावनाओं की तस्वीर

    कॉन्क्लेव में विभागों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और नवोदित उद्यमों के 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। इनमें रोजगार, प्रशिक्षण, कॅरियर, उद्यमिता, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और शासकीय योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं गतिविधियां प्रदर्शित की जाएंगी।

    विश्वविद्यालयों द्वारा शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, कॅरियर मार्गदर्शन और ड्रोन प्रौद्योगिकी सहित भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

    विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता तक

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से विभिन्न नवोदित उद्यम अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। युवा इन नवाचारों के माध्यम से विचार को उत्पाद और उत्पाद को उद्यम में बदलने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित करने तथा नए विचारों पर कार्य करने के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा।

    उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, अर्धचालक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहन (EV) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां कॉन्क्लेव के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगी। इन क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा।

    कॅरियर से साइबर सुरक्षा तक विविध विषयों पर मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन, कौशल विकास, मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों द्वारा जानकारी दी जाएगी। पुलिस विभाग द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग, जन-सुरक्षा और युवा संवाद से जुड़े विषयों पर जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

    सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 युवाओं को शिक्षा से कौशल, कौशल से रोजगार, विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा।

     

  • बलौदाबाजार में सर्वसुविधायुक्त नवीन जिला परिवहन कार्यालय का लोकार्पण

    बलौदाबाजार में सर्वसुविधायुक्त नवीन जिला परिवहन कार्यालय का लोकार्पण

    ​रायपुर

     छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने सोमवार को बलौदाबाजार के ग्राम पंचायत परसाभदेर में नवनिर्मित जिला परिवहन कार्यालय भवन का विधिवत लोकार्पण किया। राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को नया आयाम देने के उद्देश्य से सोनबरसा जंगल सफारी के लिए 4 नई जिप्सियों और परिसर के सौंदर्यीकरण तथा अधोसंरचना विकास कार्यों के लिए 1.5 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

    लोकार्पण के पश्चात मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सर्वसुविधायुक्त नवनिर्मित जिला परिवहन कार्यालय भवन  के विभिन्न कक्षों का अवलोकन किया। मंत्रीद्वय ने भवन की उच्च गुणवत्तापूर्ण निर्माण शैली की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए अधिकारियों को आम जनता की सहूलियत और नागरिक केंद्रित सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया।

    समारोह को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार जन-आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए परिवहन सेवाओं का तेजी से आधुनिकीकरण कर रही है। आने वाले समय में परिवहन विभाग से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह डिजिटल प्रणाली पर आधारित होंगे, जिससे नागरिकों को अपने आवश्यक कार्य घर बैठे ही पूर्ण करने की अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी। जिले में पंजीकृत 2 लाख 14 हजार से अधिक वाहनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यातायात नियमों के पालन पर विशेष बल दिया। विशेषकर स्कूली बच्चों द्वारा वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को यातायात सुरक्षा के प्रति जागरूक करें ताकि संभावित दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए संचालित 'राहवीर योजना' का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत पीड़ितों को डेढ़ लाख रुपये तक के मुफ्त एवं कैशलेस इलाज की व्यवस्था दी जा रही है। उन्होंने जिले के 5 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) में परिवहन सुविधा केंद्रों के सफल संचालन और 572 लर्निंग लाइसेंस जारी होने पर खुशी जाहिर की।

    राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने जिलेवासियों को बधाई देते हुए बताया कि महज पौने दो वर्षों के रिकॉर्ड समय में इस सर्वसुविधायुक्त आधुनिक कार्यालय भवन का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। उन्होंने घोषणा की कि शीघ्र ही जिले में अत्याधुनिक वाहन टेस्टिंग की सुविधा भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय निवासियों को जांच के लिए अन्य शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आज गांव से लेकर शहर तक समाज के हर वर्ग को मिल रहा है।

    ​समारोह के दौरान सामाजिक सरोकारों और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 80 वर्ष से अधिक आयु के 10 वरिष्ठ बुजुर्गों को निःशुल्क बस पास प्रदान किए गए, जबकि 5 वाहन स्वामियों को लाइसेंस और 5 चालकों को सुरक्षा हेतु हेलमेट का वितरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत 'एक पेड़ माँ के नाम' मुहिम के तहत मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कार्यालय परिसर में पौधरोपण कर हरित पर्यावरण का संदेश दिया।

    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा व प्रमोद शर्मा, भारत स्काउट गाइड के राज्य उपाध्यक्ष, अपर आयुक्त परिवहन, मुख्य वन संरक्षक (रायपुर वृत्त) मणीवासन, कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक और डीएफ सहित अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • दिल्ली की महिलाओं के हाथ में ₹2,500 कैश! लक्ष्मी योजना से बदल सकती है जिंदगी

    दिल्ली की महिलाओं के हाथ में ₹2,500 कैश! लक्ष्मी योजना से बदल सकती है जिंदगी

     नई दिल्ली
    लोधी रोड पर कैंप में रहने वाली 52 साल की उमा खुश हैं कि ' दिल्ली लक्ष्मी योजना' की वजह से उनकी बचत में हर महीने कुछ पैसे जुड़ेंगे। उनकी बेटी ने अभी कॉलेज जाना शुरू किया है, और उमा को उसकी शादी के लिए पैसे जुटाने की चिंता थी। 29 साल की प्रीति के लिए, हर महीने मिलने वाले 2,500 रुपये का मतलब सिर्फ एक है- अपनी 10 साल की बेटी की पढ़ाई में रुचि को बढ़ावा देना। उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी के नाथूपुरा में रहने वाली प्रीति के परिवार के भविष्य का सपना उनकी बेटी की पढ़ाई पर टिका है। उन्होंने गर्व से TOI को बताया कि वह टीचर बनना चाहती हैं। और प्रीति क्या चाहती हैं? अपने तीन साल के शरारती बेटे को संभालते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के बाद, मेरी अपनी इच्छाएं खत्म हो गईं।

    क्या कह रहीं दिल्ली की महिलाएं?
    कोटला मुबारकपुर के पास रहने वाली सुमित्रा (35) के मन में भी लंबे समय से यही बात थी। उनकी जिंदगी अपने 15 और 13 साल के बेटों की परवरिश और पति की मदद करने के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन मिलने वाले स्टाइपेंड (भत्ते) की उम्मीद ने जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी एक पुरानी इच्छा को फिर से उनके दिल में जगा दिया। सुमित्रा सिलाई सीखना चाहती थीं। लेकिन छह महीने के कोर्स की फीस 4,000-5,000 रुपये है। पति की 20,000 रुपये महीने की सैलरी में सुमित्रा का घर बहुत सीमित बजट में चलता है। 5,000 रुपये किराए में, लगभग 10,000 रुपये खाने-पीने और राशन में, और बाकी पैसे बेटों की पढ़ाई और घर के दूसरे खर्चों में चले जाते हैं।
    2500 रुपये की मदद से कितना असर
    हालांकि, अब, सुमित्रा घर तक सीमित भूमिकाओं से आगे की सोच रही हैं। वह सिलाई सीखना चाहती हैं, अपना कुछ शुरू करना चाहती हैं और घर में ज्यादा योगदान देना चाहती हैं। उनके पति, जो चपरासी का काम करते हैं, ने कहा कि अगर वह अपने पैसे खुद कमाएंगी तो मुझे बहुत खुशी होगी। 2025 के विधानसभा चुनावों के दौरान, बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता देगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि इस कदम का मकसद ऐसी महिलाओं को ज्यादा आर्थिक सुरक्षा देना और उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करना है।

    कुछ राहत, लेकिन आय की शर्तें

    'पहले इंडिया फाउंडेशन' के चेयरमैन और नीति आयोग के पूर्व वाइस-चेयरमैन, अर्थशास्त्री राजीव कुमार के अनुसार, हालांकि यह योजना महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बचत का अवसर देती है, लेकिन आय की पात्रता की शर्त कई लोगों को इससे बाहर कर सकती है। राजीव कुमार ने कहा कि कोई भी अतिरिक्त आय कुछ राहत तो देती ही है। लेकिन सालाना 2.5 लाख रुपये से कम पारिवारिक आय का मानदंड थोड़ा कड़ा है। इसका मतलब है कि प्रति परिवार मासिक आय 21,000 रुपये से कम या प्रतिदिन 700 रुपये से कम होनी चाहिए।

    क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट
    उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब चार लोगों के परिवार के लिए प्रति व्यक्ति आय प्रतिदिन 200 रुपये से कम है। राजीव कुमार ने बताया कि मार्च में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के लिए दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय 5.3 लाख रुपये रहने का अनुमान था। हम इससे ज्यादा आय सीमा (कट-ऑफ) चुन सकते थे।
    अंजली ने बताया कैसे चलता है घर खर्च
    करोल बाग के शिदीपुरा की रहने वाली अंजली (38) अपने घर के पास एक गोदाम में पेन और अन्य सामान पैक करके महीने के 7,000 रुपये कमाती हैं। उनके पति की न तो कोई पक्की नौकरी है और न ही कोई निश्चित वेतन। हालांकि, आय के अनिश्चित स्रोतों के बावजूद, वह घर संभालने में माहिर हैं और यह जोड़ा मिलकर अगले महीने की योजना बनाता है। उन्होंने कहा कि बहुत सारी परेशानियां हैं, लेकिन हम उनका सामना करते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं।

    'लक्ष्मी योजना जरूर मिलेगी कुछ राहत'
    अंजली ने कहा कि उनके घर में एक ऐसा खर्च है जिसमें कोई कटौती नहीं की जा सकती, और वह है उनके 15 साल के बेटे की स्कूल और ट्यूशन फीस- जो महीने में 2,000 से 3,000 रुपये है। उनके 70 से ज्यादा उम्र के सास-ससुर, जिनके घर में पूरा परिवार रहता है, उनका साथ देते हैं और उन्हें राहत भी मिलती है।
    महंगाई का असर
    इस इनकम ग्रुप वाले परिवारों के लिए, जिन्हें जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने की उम्मीद नहीं होती, 'लक्ष्मी योजना' जैसी वेलफेयर स्कीम कितनी मददगार होती है? डीयू के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में इकोनॉमिक्स की एसोसिएट प्रोफेसर शिरीन अख्तर ने कहा कि दिल्ली में औसत प्रति व्यक्ति आय इतनी ज्यादा है, फिर भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है। यह भारी असमानता को दिखाता है। यह बंटवारे से जुड़ा मुद्दा है।

    2500 रुपये का ट्रांसफर बेहद अहम
    शिरीन अख्तर ने आगे कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर गौर करें। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे भारत में चीनी की औसत खुदरा कीमत जुलाई में लगभग 48 रुपये प्रति किलो थी, जो 26 अगस्त तक 65 रुपये से ज्यादा हो गई। जो परिवार बमुश्किल अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, उनके लिए कीमतों में ऐसी बढ़ोतरी का मतलब है कि उन्हें अपनी खपत में असल बदलाव करने पड़ सकते हैं। ऐसे में, 2,500 रुपये का ट्रांसफर अहम हो जाता है। हालांकि, अख्तर ने कहा कि सबसे गरीब परिवारों के मामले में, 'खर्च का एक बहुत बड़ा हिस्सा जरूरी चीजों पर ही होता है।'

    महिलाओं की जिंदगी बदलेगी ये योजना!
    शिरीन अख्तर ने कहा कि यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि परिवार क्या खरीदना बंद कर देता है? यदि यह फल, दूध, दालें हैं, तो आज की मुद्रास्फीति कल की पोषण संबंधी कमी बन जाती है। यदि यह दवाएं हैं, तो यह स्वास्थ्य की कमी बन जाती है। यदि यह ट्यूशन, किताबें या स्कूली शिक्षा है, तो यह मानव-पूंजी की कमी बन जाती है। यदि परिवार केवल आवश्यक उपभोग को बनाए रखने के लिए उधार लेता है, तो आज की मुद्रास्फीति कल का कर्ज का बोझ बन जाती है। और अगर महिलाएं अवैतनिक घरेलू और देखभाल की जिम्मेदारियों को जारी रखते हुए भुगतान किए गए काम को बढ़ाकर क्षतिपूर्ति करती हैं, तो मुद्रास्फीति महिलाओं की गरीबी को भी बढ़ाती है।

    दिल्ली लक्ष्मी योजना की शर्तें क्या हैं?
        दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत 21 से 60 वर्ष आयु की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सरकार की ओर से 2500 रुपये की राशि जमा की जाएगी।
        लाभार्थी को दिल्ली में न्यूनतम 10 वर्षों तक रहने वाले परिवार की सबसे बड़ी पात्र महिला होनी चाहिए और उसके पास वैध मतदाता पहचान पत्र होना चाहिए।
        अयोग्य ठहराने के मानदंडों में वे महिलाएं शामिल हैं जो आयकर का भुगतान करती हैं, सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी हैं। किसी भी पेंशन की प्राप्तकर्ता हैं।
        अगर फोर व्हीलर चार पहिया वाहन की मालिक हैं, तीन से अधिक बच्चे हैं, सालाना 2,400 यूनिट से अधिक बिजली का उपभोग करती हैं।
        या फिर किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि के अलावा परिवार में एक सरकारी कर्मचारी हैं तो उन महिलाओं को लक्ष्मी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

    महिलाओं के लिए 2500 रुपये पर्याप्त हैं?
    बड़ा सवाल- क्या महिलाओं की एजेंसी बदलने के लिए 2,500 रुपये पर्याप्त हैं? नीति आयोग के पूर्व वाइस-चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक बार जब वे आवश्यक कौशल हासिल कर लें, तो नियमित, उचित भुगतान वाला रोजगार ही महिलाओं की एजेंसी को बदलने का एकमात्र तरीका है। शिरीन अख्तर ने कहा कि कैश ट्रांसफर केवल एक सहारा है; वे सुरक्षित नौकरियां पैदा करने या अच्छी सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने का विकल्प नहीं हैं। किफायती भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के साथ इनकम सपोर्ट सबसे अच्छा काम करता है।

     

  • इंदौर में वोटर लिस्ट सुधार की कवायद तेज, 4.47 लाख हटे नामों की होगी फिर जांच; घर-घर पहुंचेंगे BLO

    इंदौर में वोटर लिस्ट सुधार की कवायद तेज, 4.47 लाख हटे नामों की होगी फिर जांच; घर-घर पहुंचेंगे BLO

     इंदौर

     मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर घर-घर दस्तक शुरू हो चुकी है। करीब सात माह पहले जिस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान बीएलओ ने दो बार मतदाताओं से संपर्क किया था, फॉर्म भरवाए थे और दस्तावेजों की जांच की थी, वहीं काम अब फिर से किया जाएगा। एसआइआर के बाद हटे मतदाताओं की जानकारी लेने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) फिर से उनके पते पर दस्तक देंगे। यदि वह पते पर मिलते हैं और पात्र पाए जाते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा।
    SIR के दौरान घटे मतदाता, अब नाम जुड़वाने का मिला फिर मौका

    एसआइआर से पहले जिले में 28 लाख 67 हजार 294 मतदाता थे। एसआइआर के बाद 23 दिसंबर 2025 की प्रारंभिक सूची में संख्या घटकर 24 लाख 20 हजार 171 रह गई। यानी एक ही प्रक्रिया में 4.47 लाख नाम बाहर हो गए थे। एसआईआर के दौरान ही 66,825 नाम जोड़े गए।

    वहीं 21 फरवरी 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित हुई, जिसमें 24 लाख 86 हजार 996 मतदाता थे। अब सात माह बाद फिर से बीएलओं विलोपित मतदाताओं की जांच कर नाम जोड़ने का कार्य करेंगे।

    सोमवार को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा ने इस अभियान की समीक्षा की। उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पवार ने सभी ईआरओ को पात्र मतदाताओं को चिन्हित कर उनके नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि 18-19 वर्ष के मतदाताओं के नाम भी इस दौरान प्राथमिकता से नाम सूची में शामिल किए जाएं। एक माह तक यह अभियान चलेगा।
    10 माह में 5वीं बार दस्तक: 2003 की जानकारी देने का बंधन खत्म

    बीते वर्ष अक्टूबर से अब तक मतदाताओं से बीएलओ द्वारा चार बार संपर्क किया जा चुका है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच एसआइआर प्रक्रिया के दौरान दो बार बीएलओ मतदाता के घर पहुंचे थे। वहीं फार्म प्राप्त नहीं होने पर जनवरी में एक बार फिर से छूटे मतदाताओं की जांच की गई थी। इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत की मतदाता सूची तैयार करने के लिए भी घर-घर संपर्क किया गया। अब फिर पांचवी बार बीएलओं अपने बूथ में विलोपित मतदाता की जांच करेंगे।

    एसआइआर के दौरान 2003 की सूची में नाम या परिवार के किसी सदस्य का नाम मांगा गया था, लेकिन अब इसकी बाध्यता नहीं है। फार्म-6 के साथ भरा जाने वाला डिकलेरेशन फार्म हटा दिया गया है। एसआइआर के दौरान पुरानी सूची से अपना संबंध साबित नहीं कर पाने वाले मतदाताओं के लिए अब पात्रता के आधार पर नाम जुड़वाने का रास्ता खुला है।

    यह भी पढ़ें- खाद की ई-टोकन प्रणाली बनी मुसीबत… 10 मिनट में खत्म हो रहे टोकन, डीएपी-यूरिया के लिए तरस रहे किसान
    नाम जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेज

    मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या संशोधन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे…

    •     जन्म तारीख का प्रमाण: जन्म प्रमाण पत्र, तारीख लिखी मार्कशीट, पासपोर्ट और पैन कार्ड।
    •     पते का प्रमाण: पहचान पत्र, बिजली बिल, बैंक पासबुक, सरकारी कर्मचारी होने पर कार्ड, जमीन के दस्तावेज।
    •     किरायेदार के लिए: जन्म प्रमाण पत्र के साथ, पते के प्रमाण में किरायानामा दस्तावेज और मकान मालिक का बिजली बिल।
    •     पता बदलने पर: मतदाता को वर्तमान ईपीक नंबर के साथ फार्म-8 भरना होगा और नए पते का प्रमाण देना होगा।
    •     युवा मतदाता: फार्म-6 भरना होगा, जिसमें माता-पिता के नाम के साथ जन्म और पते का प्रमाण देना होगा।

     

  • राष्ट्रीय पटल पर चमका वारासिवनी, नगरीय निकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला पुरस्कार

    राष्ट्रीय पटल पर चमका वारासिवनी, नगरीय निकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला पुरस्कार

    भोपाल 

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 'सभी के लिए आवास' के संकल्प को मध्यप्रदेश की धरा पर साकार करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी नेतृत्व के फलस्वरूप मध्यप्रदेश को 'प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पुरस्कार-2026' से पुरस्कृत किया गया है। विश्व आवास दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू ने यह प्रतिष्ठित पुरूस्कार प्रदान किया। राज्य शासन की ओर से नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त  संकेत भोंडवे तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के राज्य मिशन संचालक  शिशिर गेमावत ने पुरूस्कार प्राप्त किया।

    प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के बी.एल.सी. (लाभार्थी आधारित निर्माण) घटक के सर्वोत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित क्रियान्वयन तथा स्वीकृत आवासों की तुलना में सर्वाधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कराने में मध्यप्रदेश संपूर्ण देश में अग्रणी रहा है। एक लाख से कम आबादी वाले नगरीय निकायों की श्रेणी में उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित करते हुए नगर पालिका परिषद वारासिवनी को भी बी.एल.सी. घटक के अंतर्गत सर्वाधिक आवास पूर्ण करने पर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से अलंकृत किया गया।

    आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास  भोंडवे ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी से प्रदेश के लाखों वंचित एवं जरूरतमंद शहरी परिवारों के अपने पक्के घर का स्वप्न साकार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में योजना का पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। मिशन संचालक  गेमावत ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में योजना के विभिन्न घटकों के अंतर्गत अब तक 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 9 लाख से अधिक निर्मित आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं।

    प्रदेश में योजना के बहुआयामी एवं सुगम क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक अभिनव प्रयोग तथा नीतिगत सुधार किए गए हैं। समाज के अंतिम छोर पर खड़े भूमिहीन पात्र परिवारों को आवासीय भूमि के पट्टे वितरित किए गए, जिससे वे बी.एल.सी. घटक के अंतर्गत मिलने वाले लाभों से वंचित न रहें। इस ऐतिहासिक सफलता में राज्य स्तरीय मिशन टीम, जिला प्रशासन, नगरीय निकायों, संबद्ध विभागों, समर्पित हितग्राहियों एवं समस्त हितधारकों का सहयोगात्मक योगदान व कर्मठता प्रशंसनीय रही है।

     

  • विश्व जूडो चैंपियनशिप में इशरूप पर नजरें, अजरबैजान में दांव-पेच से दिखाएंगी दम

    विश्व जूडो चैंपियनशिप में इशरूप पर नजरें, अजरबैजान में दांव-पेच से दिखाएंगी दम

    चंडीगढ़.

    चंडीगढ़ की युवा जूडो खिलाड़ी इशरूप नारंग सीनियर विश्व जूडो चैंपियनशिप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अजरबैजान के बाकू में 7 और 8 अक्टूबर को होने वाली इस प्रतियोगिता में 20 वर्षीय इशरूप दुनिया की शीर्ष जूडो खिलाड़ियों के बीच अपना दमखम दिखाएंगी।

    इशरूप ने सीनियर विश्व रैंकिंग में टॉप-100 में जगह बनाकर अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ (आईजेएफ) की विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी के लिए निर्धारित योग्यता हासिल की है। वह एमसीएम डीएवी कॉलेज की छात्रा हैं और अमेच्योर जूडो एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ (एजेएसी) का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    अहमद युसिफोव के खिलाफ हर्ष सिंह का शानदार सफर समाप्त हुआ
    भारत के हर्ष सिंह ने अजरबैजान के बाकू में आयोजित जूडो विश्व चैंपियनशिप में अपने अभियान के सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक दिया, जहां उन्होंने दो उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों को हराकर पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान पर काबिज हर्ष ने अपने अभियान की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के 40वें रैंक वाले पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को पहले ही दौर में हराकर की। इसके बाद उन्होंने बहरीन के 20वें रैंक वाले रुस्लान पोल्टोरात्स्की पर एक और शानदार जीत हासिल कर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। आखिरकार उनका सफर अजरबैजान के घरेलू खिलाड़ी और विश्व नंबर 5 अहमद युसिफोव के खिलाफ समाप्त हो गया। फिर भी, यह परिणाम भारतीय जूडोका के लिए एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन साबित हुआ, जो रैंकिंग में शीर्ष समूह से काफी बाहर रहते हुए विश्व चैंपियनशिप में शामिल हुए थे, लेकिन उन्होंने बार-बार अपने से काफी ऊपर स्थान पर मौजूद प्रतिद्वंद्वियों को परास्त किया।

    पहले दौर के मुकाबले में हर्ष को अपने से कहीं अधिक उच्च रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ बढ़त हासिल करने का मौका मिला। विश्व रैंकिंग में 40वें स्थान पर काबिज एंटुन नेटो का सामना करते हुए, भारतीय खिलाड़ी ने वाजा-अरी से जीत हासिल कर 32वें दौर में प्रवेश किया। रैंकिंग में 43 स्थानों का अंतर इस परिणाम को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। हर्ष बाकू में 83वीं रैंकिंग के साथ पहुंचे थे, जबकि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में 40वें स्थान के जूडोका के रूप में प्रवेश किया था। पहले दौर में सिर्फ टिके रहने के बजाय, हर्ष ने स्कोरिंग एक्शन के जरिए जीत हासिल की, जिससे उन्हें अगले दौर में पहुंचने के लिए जरूरी बढ़त मिल गई। इसने -60 किलोग्राम वर्ग के मुश्किल दौर की नींव भी रख दी।

    दूसरे उलटफेर ने हर्ष को प्री-क्वार्टरफाइनल में पहुँचा दिया
    अगली चुनौती कागज़ पर और भी कठिन लग रही थी। हर्ष का सामना बहरीन के रुस्लान पोल्टोरात्स्की से था, जो विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर थे। दोनों जूडो खिलाड़ियों के बीच 63 स्थानों का अंतर रैंकिंग में एक और बड़ा उलटफेर था। एक बार फिर, हर्ष ने वज़ा-अरी से जीत हासिल की। ​​इस जीत ने उन्हें प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुँचा दिया और इसका मतलब यह था कि भारतीय खिलाड़ी ने लगातार दो राउंड में अपने से काफी ऊँची रैंकिंग वाले दो प्रतिद्वंद्वियों को हराया था। हर्ष के लिए, विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान से राउंड ऑफ़ 16 तक पहुँचना विश्व चैंपियनशिप के मंच पर एक बड़ी उपलब्धि थी। इसने भारत को जूडो की सबसे प्रतिस्पर्धी भार श्रेणियों में से एक में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने का अवसर भी दिया। हर्ष की दो जीत का इनाम उन्हें अज़रबैजान के अहमद युसिफोव के साथ राउंड ऑफ़ 16 में मुकाबले के रूप में मिला। युसिफोव एक बिल्कुल अलग स्तर की चुनौती पेश कर रहे थे। उपलब्ध परिणामों में अज़रबैजानी खिलाड़ी को विश्व का नंबर 5 जूडोका बताया गया था और वे घरेलू मैदान के प्रबल दावेदार के रूप में उतरे थे। विश्व के 40वें और 20वें नंबर के खिलाड़ियों को हराने के बाद भी हर्ष लगातार तीसरी बार उलटफेर करने में नाकाम रहे। युसिफोव ने राउंड ऑफ़ 16 में हर्ष को हराकर विश्व चैंपियनशिप में उनके शानदार सफर का अंत कर दिया। इस जीत के साथ हर्ष पुरुषों के -60 किलोग्राम वर्ग में शीर्ष 16 जूडो खिलाड़ियों में शामिल हो गए, जबकि टूर्नामेंट की शुरुआत में उनकी रैंकिंग 83वीं थी।

    एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद एक महत्वपूर्ण अवसर
    हर्ष का प्रदर्शन इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें भारत की एशियाई खेलों की टीम में नहीं चुना गया था। इस चूक का मतलब था कि विश्व चैंपियनशिप ने भारतीय खिलाड़ी को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। उन्होंने दो उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों को हराकर और ड्रॉ में काफी आगे बढ़कर इसका जवाब दिया। एंटुन नेटो और पोल्टोरात्स्की पर उनकी जीत विशेष रूप से उल्लेखनीय थी क्योंकि दोनों जीतें उनसे काफी उच्च रैंक वाले जूडो खिलाड़ियों के खिलाफ थीं। विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान से शुरुआत करते हुए, हर्ष ने पहले 40वें स्थान पर रहे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को हराया और फिर 20वें स्थान पर रहे बहरीनी खिलाड़ी को मात दी। उनकी इस प्रगति ने रैंकिंग के अंतर को एक संभावित नुकसान से बदलकर उनके अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कहानियों में से एक बना दिया। युसिफोव के खिलाफ उनकी अंतिम हार भी उनके सामने आए सबसे उच्च रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ हुई। हर्ष कॉमनवेल्थ स्तर पर एक स्थापित रिकॉर्ड के साथ बाकू पहुंचे थे, उन्हें उपलब्ध सामग्री में कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन के रूप में वर्णित किया गया था। हालांकि, विश्व चैंपियनशिप एक बिल्कुल अलग चुनौती थी, जिसमें दुनिया के शीर्ष जूडो खिलाड़ी शामिल थे। हर्ष ने जोरदार जवाब दिया।

    उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ दो वाजा-अरी जीत ने उन्हें पहले दौर से ही अंतिम 16 में पहुंचा दिया। हालांकि वे युसिफोव के खिलाफ अपनी जीत का सिलसिला जारी नहीं रख सके, लेकिन इस अभियान ने रैंकिंग में अपने से कहीं ऊपर के जूडो खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया। सबसे महत्वपूर्ण बात उनके प्रदर्शन में निरंतरता है। पहले उलटफेर को एक अलग घटना मानकर नजरअंदाज किया जा सकता था, लेकिन पोल्टोरात्स्की पर जीत ने इस बात की पुष्टि कर दी कि हर्ष कहीं अधिक उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ भी जीत हासिल करने में सक्षम हैं। विश्व के नंबर 5 खिलाड़ी से हार के साथ उनका अभियान समाप्त हो गया, लेकिन इससे पहले हर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते हुए भारतीय जूडो खिलाड़ियों में अपनी पहचान बना ली थी। प्रतियोगिता में प्रवेश करते समय 83वीं रैंकिंग वाले खिलाड़ी के लिए, दो बड़े उलटफेरों के बाद विश्व चैंपियनशिप के राउंड ऑफ़ 16 तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हर्ष के लिए अगली चुनौती इस सफलता को विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ निरंतरता में तब्दील करना होगा। बाकू में साबित कर दिया कि उनके नाम के आगे की रैंकिंग यह निर्धारित नहीं करती कि वे किस स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। 

  • बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की विभीषिका देखी, फिर बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर उनका दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री का वितरण किया। सीएम यहां स्वास्थ्य शिविर में भी पहुंचे और डॉक्टरों से दवाओं/ व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री कुर्सियों पर बैठे बाढ़ पीड़ित के पास पहुंचे और शासन से मिली राहत सामग्री, अन्न, चिकित्सा आदि सुविधाओं की हकीकत जानी। उन्होंने बच्चों को पास बुलाकर चॉकलेट भी दी। 

    मुख्यमंत्री ने अक्टूबर में आई इस बाढ़ विभीषिका पर चिंता जताई। कहा कि गोमती नदी पर तटबंध बनने से काफी हद तक बाढ़ की विभीषिका को रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक नदी के तट का सर्वे कराते हुए तटबंध बनवाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो गांव तटबंध के बाहर रहे, वहां बरसात का पानी निकालने की उचित व्यवस्था हो। तटबंध बनने के बाद नदी का जलस्तर बढ़े तो अंदर का पानी जमा होकर बीमारी न पैदा करे, बल्कि पंपिंग सेट लगाकर बाहर निकाला जाए। सिंचाई विभाग इन कार्यों का प्रस्ताव बनाकर शीर्घ कार्य प्रारंभ कराए, जिससे आने वाले समय में इस त्रासदी को रोक सकें और बाढ़ की विभीषिका पर अंकुश लगाया जा सके। 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन कर जताई चिंता 

    सीएम ने आज सुबह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के फोन आने के बारे में बाढ़ पीड़ितों को अवगत कराया। बाढ़ को लेकर रक्षा मंत्री की चिंता के विषय में भी जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनने से बाढ़ बचाव में मदद कराने के बारे में भी विमर्श किया। इस पर सीएम ने उन्हें बताया कि सरकार ने इसे स्वीकृत कर दिया है, धनराशि अवमुक्त करते हुए यह कार्य जल्द आगे बढ़ाएंगे। ऐसी पुख्ता व्यवस्था करेंगे तो हर सीजन में तटबंध उपयोगी होगा। बरसात में नदी का पानी उधर नहीं आएगा और इधऱ का पानी पंपिंग सेट के जरिए नदी की तरफ डाल दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि एलडीए ने ग्रीन कॉरिडोर बनवाया है, यह सड़क और सुरक्षा दोनों का काम कर रहा है। इसी तरह तटबंध पर चलने की भी व्यवस्था कराएंगे।

    स्कूल, मैरिज हॉल आदि में रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था करे प्रशासन

    सीएम ने बाढ़ पीड़ितों से अपील की कि संकट की इस घड़ी में हम सभी मिलकर आपदा का सामना करें। गांव से बाहर आए लोगों के लिए खुले में सोने की बजाय स्कूल, मैरिज हॉल में व्यवस्था करें। वहां गर्म भोजन, बच्चों को दूध, गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार, पशुओं के चारे, भूसा-चोकर की व्यवस्था हो। पशुओं की सुरक्षा व संरक्षण पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि पानी के कारण पशुओं को होने वाली बीमारी से भी बचाव की व्यवस्था की जाए।

    नदियों के जलस्तर में हुई काफी वृद्धि
    मुख्यमंत्री ने अकड़रिया कला गांव में बाढ़ पीड़ितों से संवाद करते हुए कहाकि 10 दिन में 50 से अधिक जनपदों में भारी बारिश हुई है, जिससे तमाम नदियों के जलस्तर में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि में लखनऊ भी था, लेकिन उस दौरान गोमती नदी का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था, लेकिन पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व नेपाल में हुई बारिश के कारण पांच-छह दिन बाद पानी नीचे आने से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इस कारण बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर, फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक यह क्षेत्र जल पलावन और बाढ़ से जूझ रहा है। 

    बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है डबल इंजन सरकार 

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि डबल इंजन सरकार आपके साथ खड़ी है। मैं लगातार यहां की स्थिति का आकलन करते हुए इस पर नजर रखा हूं। आज पीड़ित क्षेत्रों में पहुंचकर राहत कार्यों को भी देखा है। हमारे जनप्रतिनिधि निरंतर राहत-बचाव कार्यों में जुटे हैं और प्रशासन के साथ पीड़ितों की हरसंभव मदद कर रहे हैं।  

    हर पीड़ित परिवार के लिए की गई राशन की व्यवस्था 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत-बचाव कार्य के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ से डूबे गांव- मोहल्लों में हर परिवार के लिए सूखा राशन (10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल, एक लीटर रिफाइंड/ सरसों का तेल, नमक, मिर्च, मसाला, बरसाती, बाल्टी, लाई-भूजा, मोमबत्ती, माचिस) आदि उपलब्ध कराया गया है। 
    गाय, बकरी, भैंस, बकरी, घोड़ा आदि पालतू पशुओं के चारे, छोटे बच्चों के दूध, स्वास्थ्य/ पशु चिकित्सालय शिविर के लिए भी प्रशासन को निर्देशित किया गया है। 

    हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध 

    सीएम ने कहा कि हर व्यक्ति की जान बचाना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। बरसात में पानी भरने पर सांप-बिच्छू आदि के काटने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की गई है। एंटी रैबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध है। डूबने-आकाशीय बिजली से जनहानि पर परिवार को चार लाख की सहायता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि घर क्षतिग्रस्त होने पर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास, जनहानि, पशुहानि और किसानों की फसल के नुकसान पर सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा तत्काल दिलाया जाए, जिससे किसान के साथ सरकार का संबल दिखे। 

    गांवों की सुरक्षा के लिए पुलिस की पेट्रोलिंग, चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान तैनात हों 

    मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि ग्रामीणों के बाहर आने पर रात में गांवों की सुरक्षा के लिए चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी, पुलिस की पेट्रोलिंग हो और वहां पेट्रोमैक्स जलाए जाएं। कैंप में पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था कराई जाए, जिससे लोगों को सुविधा मिल सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि आपदा पीड़ित चिंतित न हों, सरकार निरंतर राहत सामग्री कराएगी। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि आपदा की घड़ी में सरकार हरसंभव मदद करेगी। सीएम ने सभी के सुखी-स्वस्थ होने की कामना की। 

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विधायक योगेश शुक्ल, डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, इटौंजा के नगर पंचायत अध्यक्ष अखिलेश अवस्थी आदि मौजूद रहे।

  • जगदलपुर में सेवा संकल्प का जनसेवा से जुड़ाव, शिविर में हितग्राहियों को मिले योजनाओं के लाभ

    जगदलपुर में सेवा संकल्प का जनसेवा से जुड़ाव, शिविर में हितग्राहियों को मिले योजनाओं के लाभ

    रायपुर

     उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर अंचल नक्सलवाद के लंबे और काले दौर से निकलकर अब शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। कभी हिंसा और भय से प्रभावित रहे क्षेत्रों में आज शासन की योजनाएं और सेवाएं पहुंच रही हैं। विकास के साथ लोगों के जीवन में सुरक्षा और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है।

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा आज जगदलपुर के पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार टाउन हॉल में आयोजित जिला स्तरीय सेवा संकल्प शिविर में शामिल हुए। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा एक ही स्थान पर नागरिकों की समस्याओं का निराकरण करने के साथ पात्र हितग्राहियों को वित्तीय सहायता, अधिकार अभिलेख, प्रमाण पत्र और विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

    हिंसा के जख्मों पर सेवा और संवेदना का मरहम       

    शिविर को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मां दंतेश्वरी की कृपा और शासन-प्रशासन के साझा प्रयासों से बस्तर में माओवादी हिंसा समाप्ति की ओर है। क्षेत्र में अब भय के स्थान पर विश्वास और हिंसा के स्थान पर विकास एवं सेवा का नया सवेरा दिखाई दे रहा है। उन्होंने नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित आम नागरिकों एवं सुरक्षा जवानों के पुनर्वास का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन दिवसीय विशेष शिविर के माध्यम से पीड़ितों और दिव्यांगजनों को उच्च गुणवत्ता वाले कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण शत-प्रतिशत निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने इस पहल से जुड़े एक भावुक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि कृत्रिम हाथ लगने के बाद एक हितग्राही ने उसी हाथ से पानी की बोतल उठाकर पानी पिया। वर्षों बाद अपने हाथ से सामान्य काम कर पाने की यह खुशी बताती है कि ऐसी पहल किसी व्यक्ति के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।

    एक ही छत के नीचे मिला योजनाओं का लाभ

     जिला स्तरीय सेवा संकल्प शिविर में विभिन्न विभागों ने मौके पर ही पात्र हितग्राहियों को योजनाओं और सेवाओं का लाभ प्रदान किया। राजस्व विभाग द्वारा आपदा प्रबंधन के अंतर्गत पांच बाढ़ प्रभावितों को कुल 6 लाख 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही 35 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए गए। श्रम विभाग द्वारा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत एक हितग्राही को 20 हजार रुपए तथा मुख्यमंत्री मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत एक पात्र हितग्राही को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।

    कृषि विभाग ने पांच किसानों को फसल बीमा प्रमाण पत्र और मत्स्य पालन विभाग ने तीन मत्स्य पालकों को जाल वितरित किए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के वय वंदन कार्ड और पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। शिविर में 12 नागरिकों के आधार विवरण का अद्यतन करने के साथ जन्म एवं मृत्यु पंजीयन से संबंधित आवेदन भी लिए गए।

    बस्तर में विकास की नई तस्वीर – सांसद  महेश कश्यप   

     बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों तथा आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक प्रभाव बस्तर में दिखाई दे रहा है। दशकों तक उग्रवाद के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था, निःशुल्क राशन, पक्के आवास, शौचालय सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। सेवा संकल्प शिविर के माध्यम से एक ही परिसर में विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने से नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय मौके पर ही समस्याओं के समाधान और योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

    इस अवसर पर नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा, नगर निगम आयुक्त  प्रवीण वर्मा, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं नागरिक उपस्थित थे।

  • SIR पर कांग्रेस के रुख को लेकर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा का तंज, दिल्ली बैठक पर उठाए सवाल

    SIR पर कांग्रेस के रुख को लेकर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा का तंज, दिल्ली बैठक पर उठाए सवाल

    रायपुर.

    दिल्ली में आज कांग्रेस की होने वाली बैठक पर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का चरित्र काफी सालों से वैसा ही है. ये समय-समय पर अपना रंग गिरगिट की तरह बदलते रहते हैं. जब SIR होना था, तब विरोध हुआ.

    जब विरोध हो चुका है तो फिर क्यों विरोध? हकीकत यह है कि भारत 1947 में आजाद हो चुका है, लेकिन इनके ऊपर से गुलामी का साया अभी तक नहीं हटा है. भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में युवा कांग्रेस चुनाव में आपसी खींचतान को लेकर कहा कि तत्कालीन सरकार में शराब घोटाले का पैसा बराबर नहीं बंटा था, उसी का परिणाम है कि आपसी खींचतान जारी है. वहीं कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत के छत्तीसगढ़ दौरा पर कहा कि एक बार आए थे, मैं उनका स्वागत कर चुका हूं. बार-बार छत्तीसगढ़ आयें. इससे हमारी रणनीति मजबूत होगी.

    वहीं, कोल लेवी मामले में पेशी को लेकर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, भ्रष्टाचार के मामले में जिन लोगों के खिलाफ प्रकरण है, उनके खिलाफ चालान पेश किया जा रहा है. अब जांच और कार्रवाई के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. जब चालान पेश होगा, तब पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी.

  • रूस-यूक्रेन जंग में भारत का मास्टरप्लान! काला सागर से अनाज-ऊर्जा तक, ऐसे तैयार होगा सीजफायर का रास्ता

    रूस-यूक्रेन जंग में भारत का मास्टरप्लान! काला सागर से अनाज-ऊर्जा तक, ऐसे तैयार होगा सीजफायर का रास्ता

    नई दिल्ली

     रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के खत्म होने के आसार बन रहे हैं. ऐसा भारत की पहल पर हो रहा है. दरअसल, भारत ने रूस और यूक्रेन को ऐसा ऑफर दिया है जिस पर दोनों देशों ने करीब-करीब सहमति जताई है. यूक्रेन ने कहा है कि युद्ध खत्म कराने के लिए अब तक मिले तमाम प्रस्तावों में यह सबसे बेहतर ऑफर हैं. वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत का ऑफर बहुत अच्छा है. पीएम मोदी लंबे समय से इस जंग को खत्म कराने की बात कह रहे हैं. इस बीच रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए हाल के महीनों में कीव और मॉस्को दोनों के साथ वार्ता करके अपने प्रयास तेज किए हैं. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा था कि कीव को संभावित युद्ध विराम के लिए भारत और तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले, लेकिन भारत का प्रस्ताव सबसे बेहतर है। 

    भारत ने अपने प्रस्ताव में काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की बात कही है. इस पर करीब-करीब सहमति बनती दिख रही है. ऐसे में भारत के इस पहल को उसके शांति के प्रति समर्पण की अवधारणा से जोड़ा जा रहा है. बतौर एक शांतिदूत भारत की तारीफ हो रही है. भारत की इस पहल में एक और रोचक तथ्य है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करीब दो साल से इस जंग को खत्म कराने की बात कर रहे हैं. लेकिन, जंग खत्म होने की बजाय बीते कुछ महीनों से और भयानक रूप ले चुकी है. अमेरिका इस जंग को खत्म कराने में बुरी तरह विफल होता दिख रहा है। 

    क्या है भारत का प्रस्ताव
    भारत ने अभी तक अपने प्रस्ताव की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं. लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ किया है कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है. भारत की बातचीत सिर्फ युद्ध रोकने की अपील तक सीमित नहीं है. नई दिल्ली काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज के निर्यात, ऊर्जा आपूर्ति और एक-दूसरे पर हमले रोकने जैसी व्यवस्थाओं पर दोनों पक्षों से बात कर रहा है. यही भारत के प्रस्ताव की खासियत है. यह सीधे यह तय करने की कोशिश नहीं करता कि रूस को क्या मिलेगा और यूक्रेन को क्या छोड़ना होगा. इसके बजाय उन मुद्दों से शुरुआत की जा रही है जिन पर दोनों देशों के लिए तत्काल राहत जरूरी है। 

    काला सागर इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है. युद्ध के दौरान यहां जहाजों और बंदरगाहों पर हमलों ने व्यापार और अनाज की आपूर्ति को प्रभावित किया है. अगर काला सागर में सुरक्षित नेविगेशन और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था बनती है तो इसका असर सिर्फ रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा. वैश्विक खाद्य और ऊर्जा बाजार को भी इससे राहत मिल सकती है। 

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के मुताबिक कीव को भारत, अमेरिका, तुर्की और मिस्र से युद्धविराम को लेकर प्रस्ताव मिले हैं. उन्होंने भारत के प्रस्ताव को व्यापक बताया है. यूक्रेन ने ऊर्जा और काला सागर में युद्धविराम पर विचार करने की बात भी कही है. हालांकि कीव चाहता है कि किसी भी युद्धविराम में ऊर्जा और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था भी शामिल हो. यानी अभी इसे रूस और यूक्रेन के बीच अंतिम शांति समझौता कहना जल्दबाजी होगी. फिलहाल भारत ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है जो दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ा सके और बड़े युद्धविराम की जमीन तैयार कर सके। 

    भारत की पहल में अमेरिका से क्या अलग है?
    अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में शामिल रहा है. ट्रंप प्रशासन ने भी रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं. सितंबर में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच बातचीत में भी युद्ध खत्म करने और ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग जैसे मुद्दे सामने आए थे. लेकिन अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती है. वह खुद पश्चिमी गठबंधन का प्रमुख हिस्सा है और यूक्रेन को सैन्य तथा राजनीतिक समर्थन देता रहा है. ऐसे में मॉस्को के साथ बातचीत करते समय उसकी भूमिका को रूस अलग नजरिए से देखता है. भारत की स्थिति अलग है. नई दिल्ली के रूस के साथ पुराने और गहरे संबंध हैं, वहीं यूक्रेन के साथ भी भारत के राजनयिक संबंध कायम हैं. भारत ने युद्ध के दौरान रूस से बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया और साथ ही यूक्रेन के साथ भी संपर्क बनाए रखा. यही वजह है कि भारत दोनों पक्षों के बीच ऐसी बातचीत की जगह बना सकता है जिसमें किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय तत्काल मानवीय और आर्थिक मुद्दों से शुरुआत हो। 

    पुतिन ने मोदी के बारे में क्या कहा?
    भारत की पहल को उस समय और महत्व मिला जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति पहल की सार्वजनिक रूप से सराहना की. पुतिन ने कहा कि मोदी लगातार संघर्ष खत्म करने का सवाल उठाते रहे हैं और उनके पास इस समस्या के संभावित समाधान को लेकर अच्छे विचार हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत पहली बार युद्ध खत्म कराने की दिशा में अपने प्रयासों को केवल अपील से आगे ले जाने की बात कर रहा है. जयशंकर ने भी साफ कहा है कि भारत अब केवल शांति की वकालत नहीं कर रहा, बल्कि दोनों पक्षों से बातचीत करके कुछ व्यावहारिक मुद्दों पर मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। 

    प्रस्ताव पर सहमति बनी तो भारत के लिए कितनी बड़ी राहत
    अगर भारत की पहल से रूस और यूक्रेन के बीच सीमित युद्धविराम की व्यवस्था बनती है और आगे व्यापक बातचीत का रास्ता खुलता है तो यह भारत की विदेश नीति के लिए बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा. सबसे पहला फायदा यह होगा कि भारत की वह नीति मजबूत होगी जिसमें वह युद्ध के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बताता रहा है. प्रधानमंत्री मोदी रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं से लगातार संपर्क में रहे हैं और भारत ने शुरू से कहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है। 

    दूसरा फायदा भारत के आर्थिक हितों से जुड़ा है. रूस भारत के लिए ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार है. दूसरी तरफ यूरोप और पश्चिमी देशों के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने से भारत को इन दोनों रिश्तों के बीच संतुलन साधना पड़ता है। 

    तीसरा और शायद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत की कूटनीतिक भूमिका सिर्फ संतुलन साधने वाले देश की नहीं रहेगी. अगर दोनों पक्ष किसी भारतीय पहल को बातचीत की शुरुआत के लिए स्वीकार करते हैं तो नई दिल्ली को संकट समाधान में एक सक्रिय मध्यस्थ भूमिका निभाने का अनुभव मिलेगा।