Author: NewseDay

  • कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गाडरवारा और नरसिंहपुर ही नहीं प्रदेश के अनेक कस्बों और नगरों से सड़क मार्ग द्वारा राजधानी तक पहुंचना सुगम हो गया है। सड़कों के शानदार नेटवर्क से यह संभव हुआ है। फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों ने नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाया है। इसके साथ ही सिंचाई, कृषि, शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। विकास की यह यात्रा तेज गति के साथ जारी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के लिए आए गाडरवारा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वृहद आकार की गजमाला और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुविधायुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय का नामकरण सांदीपनि महर्षि के नाम से किया गया है जिससे महर्षि के शिष्यों भगवान कृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव का महत्व विद्यार्थी समझ सकें। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में विकास की गति को बढ़ाने का कार्य किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

    स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गत ढाई वर्ष में क्षेत्र को अनेक सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जो स्वीकृतियां प्रदान की हैं, उनमें 20 किलोमीटर लंबाई की नगर चीचली- सालीचौका रोड शामिल है जिसकी लागत 60 करोड़ होगी। वर्तमान सिंगल रोड के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी। इस निर्माण कार्य के अंतर्गत दूधी नदी पर पुल भी बनाया जाएगा। इसके अलावा अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग का निर्माण भी 27 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह 17.50 किलोमीटर लंबाई का मार्ग होगा। इससे मारेगांव, बसुरिया, अमाड़ा, पचामा और घुटंगा ग्रामों के निवासी भी लाभान्वित होंगे। साईं खेड़ा में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण होने से भविष्य में विद्युत प्रदाय अधिक सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गाडवारा नगर में 5 करोड़ रुपए लागत से गौशाला के निर्माण और 35 सामुदायिक भवनों की स्वीकृति दी गई है। यही नहीं इंडोर स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी भी प्रदान की गई है।

    अच्छी सड़कों ने बचाया समय, ईंधन और ऊर्जा

    कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बताया कि गाडरवारा क्षेत्र विकास के ऐसे आयाम प्राप्त कर रहा है जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। गाडरवारा से भोपाल आने में कभी 6 से 8 घंटे का समय लगता था। अब सड़क मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे में यह दूरी तय करना संभव हो गया है। अच्छी सड़कों से समय, ईंधन और ऊर्जा की बचत हो रही है। नगर चीचली- सालीचौका, अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग की स्वीकृति के साथ ही 13 अन्य मार्गों के निर्माण की पहल भी हुई है, जो क्षेत्र के नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

     

  • बस्तर में उम्मीदों की नई उड़ान, दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदाय हेतु वृहद शिविर का आयोजन

    बस्तर में उम्मीदों की नई उड़ान, दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदाय हेतु वृहद शिविर का आयोजन

    रायपुर

    लंबे समय तक नक्सल हिंसा और बारूदी सुरंगों की विभीषिका झेलने वाला बस्तर अब अंधकार से निकलकर शांति, विश्वास और विकास के नए रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय विशाल निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर ने पीड़ितों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक जारी ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस शिविर में संभाग के बस्तर, कोण्डागांव, नारायणपुर एवं कांकेर जिले से 3,800 से अधिक जरूरतमंदों का पंजीयन हुआ है, जिसके माध्यम से नक्सल विस्फोटों, सड़क दुर्घटनाओं व अन्य कारणों से अपने अंग गंवा चुके नागरिकों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

     शिविर को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सली हिंसा के दंश से जूझा है, लेकिन अब यह अंचल उस दौर से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल उपकरणों के वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। उन्होंने हिंसा में अपने अंग गंवा चुके पीड़ितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे खुद को कभी भी अकेला न समझें, पूरी सरकार और समाज पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार का लक्ष्य केवल बस्तर को हिंसा से मुक्त कराना नहीं, बल्कि एक शांत, सशक्त और 'विकसित बस्तर' का निर्माण करना है।

     कार्यक्रम में उपस्थित उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद का खात्मा केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बारूदी सुरंगों और आईईडी विस्फोटों का शिकार होकर अपने अंग गंवाने वाले हर नागरिक को पुनः संबल देकर अपने पैरों पर खड़ा करना ही नक्सलवाद की अंतिम निशानी को मिटाना है। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि नक्सलियों ने भले ही धमाकों से लोगों के पैर छीने हों, लेकिन बस्तर की जनता के आत्मबल और मां दंतेश्वरी की कृपा से आज वही लोग कृत्रिम अंगों के सहारे स्वाभिमान से आगे बढ़ रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ने आईईडी ब्लास्ट के शिकार ग्रामीण संतोष पोयाम सहित कर्तव्य के दौरान घायल हुए पुलिस जवान राकेश कुमार यादव और घासीराम मांझी की जीवटता का विशेष उल्लेख किया, जो अब कृत्रिम अंगों की मदद से बिना किसी सहारे के चलने के लिए तैयार हैं।

     यह पुनीत अभियान जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से 'जयपुर फुट' के लिए विख्यात भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर एनएसई फाउंडेशन और भारतीय जैन संघटना के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है। शिविर की खासियत यह है कि यहां ऑन-साइट आधुनिक कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा दिव्यांगजनों का व्यक्तिगत नाप लेकर मौके पर ही आधुनिक कृत्रिम हाथ, पैर, कैलिपर्स तैयार कर लगाए जा रहे हैं, जबकि पहले ही दिन 70 से अधिक हितग्राहियों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही जरूरतमंदों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स, बैसाखी और श्रवण यंत्र पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम शिविर स्थल पर ही परीक्षण कर दिव्यांगजनों को मेडिकल सर्टिफिकेट सौंप रही है और हितग्राहियों को मौके पर ही शत-प्रतिशत दिव्यांग पेंशन व अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें भविष्य में दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

      इस महाशिविर के व्यापक विस्तार की जानकारी देते हुए भारतीय जैन संघटना के डॉ. अतुल जैन ने बताया कि पूर्व में यह शिविर कवर्धा के लिए प्रस्तावित था, किंतु उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा के संवेदनशील सुझाव पर बस्तर के पीड़ितों को प्राथमिकता देते हुए इसे यहां आयोजित किया गया। शिविर की रूपरेखा दो चरणों में तय की गई है, जिसके प्रथम चरण में 5 से 7 अक्टूबर तक बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों के हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है, जिसमें अकेले बस्तर जिले के 1,570 हितग्राही शामिल हैं। इसके पश्चात संभाग के शेष जिलों—दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के लिए 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा में दूसरे चरण का शिविर आयोजित होगा।

    उद्घाटन अवसर पर बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की सेवा ही सबसे बड़ी ईश्वर आराधना है। वहीं चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने के संकल्प के साथ पीड़ितों के संपूर्ण पुनर्वास को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। इस अवसर पर रायपुर से वर्चुअल जुड़े जगदलपुर विधायक  किरण सिंह देव, जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, कमिश्नर  डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक  बीएन मीणा, कलेक्टर  आकाश छिकारा, जिला पंचायत सीईओ  तन्मय खन्ना सहित जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • इलाज के खर्च की चिंता हुई कम, आयुष्मान कार्ड से विजय पंडो के परिवार को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल

    इलाज के खर्च की चिंता हुई कम, आयुष्मान कार्ड से विजय पंडो के परिवार को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल

    रायपुर

     बीमारी के समय इलाज का खर्च आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी चिंता बन जाता है। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत लोसंगी के पंडरीपानी निवासी  विजय कुमार पंडो का परिवार भी पहले इसी परेशानी से जूझता था। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने पर उपचार का खर्च जुटाना मुश्किल होता था। अब विजय कुमार पंडो के साथ उनकी बेटियों भारती पंडो और आरती पंडो का भी आयुष्मान कार्ड बन जाने से परिवार को जरूरत के समय उपचार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल मिला है।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई विजय पंडो के परिवार की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि आयुष्मान कार्ड जरूरतमंद परिवारों के लिए बीमारी के समय इलाज के खर्च की चिंता को कम करने में सहायक बन रहा है। पात्रता अनुसार पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा मिलने से परिवार को भरोसा है कि आर्थिक तंगी अब बेहतर उपचार की राह में पहले जैसी बाधा नहीं बनेगी।

    पैसों की कमी से इलाज कराने में होती थी परेशानी

    विजय कुमार पंडो बताते हैं कि पहले परिवार के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने पर अस्पताल में इलाज का खर्च स्वयं उठाना पड़ता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अचानक आने वाला चिकित्सा खर्च परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन जाता था।

    कई बार पैसों की कमी के कारण बेहतर उपचार कराने में भी कठिनाई होती थी। अब आयुष्मान कार्ड बनने से परिवार को जरूरत के समय निःशुल्क उपचार की सुविधा का भरोसा मिला है।

    बेटियों भारती और आरती को भी मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ

    विजय के लिए यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके साथ उनकी दोनों बेटियों भारती और आरती का भी आयुष्मान कार्ड बन गया है। परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ने के बाद बीमारी अथवा उपचार की आवश्यकता होने पर इलाज के खर्च को लेकर उनकी चिंता कम हुई है।

    विजय बताते हैं कि आर्थिक कमी के कारण पहले अस्पताल में ठीक ढंग से इलाज कराने में दिक्कत होती थी। अब कार्ड बनने से जरूरत के समय उपचार कराने में परिवार को बड़ी सहायता मिलेगी।

    आयुष्मान कार्ड ने दिया जरूरत के समय इलाज का भरोसा

    विजय पंडो के परिवार के लिए आयुष्मान कार्ड केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बीमारी की स्थिति में उपचार और आर्थिक सुरक्षा का भरोसा बन गया है। पात्रता अनुसार पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा परिवार को स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक खर्च से राहत देने में मददगार होगी।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विजय पंडो के परिवार की यह कहानी बताती है कि स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं की पहुंच जरूरतमंद परिवारों तक होने से इलाज की राह में आने वाली आर्थिक कठिनाइयों को कम करने में मदद मिल रही है।

    आयुष्मान कार्ड मिलने पर  विजय कुमार पंडो ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा से उनके परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल मिला है और जरूरत के समय इलाज कराने में बड़ी मदद मिलेगी।

  • महात्मा गांधी सान्दीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों ने किया संसद भवन का भ्रमण

    महात्मा गांधी सान्दीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों ने किया संसद भवन का भ्रमण

    भोपाल 

    महात्मा गांधी सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा भोपाल के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन का भ्रमण किया। विद्यालय को लगातार तीसरी बार युवा संसद प्रतियोगिता में विजेता बनने से विद्यार्थियों को यह सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।

    पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ, भोपाल द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष 'युवा संसद' प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, इसमें विद्यार्थियों के दल द्वारा संसद की कार्यवाही से संबंधित लगभग एक घंटे की प्रस्तुति दी जाती है। इस प्रतियोगिता में विजेता रहने वाले विद्यालय के विद्यार्थियों को संसद भवन भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाता है। युवा संसद प्रतियोगिता में लगातार तीसरे वर्ष विजेता बनने पर महात्मा गांधी सांदीपनी विद्यालय के 2 होनहार छात्रों संस्कार साहू एवं लखन धानक को संसदीय विद्यापीठ की ओर से दिल्ली भेजा गया।

    विद्यार्थियों ने देखी लोकसभा की कार्यवाही

    विद्यार्थियों ने लोकसभा की कार्यवाही को नजदीक से देखा तथा संसद परिसर में स्थित संग्रहालय एवं प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विद्यार्थियों को दिल्ली के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर करने का भी अवसर मिला, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ। भ्रमण के दौरान युवा संसद प्रभारी शिक्षिका  रेखा पाटीदार भी छात्रों के साथ उपस्थित रहीं और उन्होंने पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्राचार्य  सुधाकर पाराशर, उप प्राचार्य  पी. विजय कुमार, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यालय परिवार ने विजेता छात्रों एवं प्रभारी शिक्षकों  रेखा पाटीदार,  पूनम वास्तव, डॉ दीप्ति सोलंकी एवं  रक्षा गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ सफलता की कामना की है।

     

     

    भोपाल 

    महात्मा गांधी सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा भोपाल के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन का भ्रमण किया। विद्यालय को लगातार तीसरी बार युवा संसद प्रतियोगिता में विजेता बनने से विद्यार्थियों को यह सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।

    पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ, भोपाल द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष 'युवा संसद' प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, इसमें विद्यार्थियों के दल द्वारा संसद की कार्यवाही से संबंधित लगभग एक घंटे की प्रस्तुति दी जाती है। इस प्रतियोगिता में विजेता रहने वाले विद्यालय के विद्यार्थियों को संसद भवन भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाता है। युवा संसद प्रतियोगिता में लगातार तीसरे वर्ष विजेता बनने पर महात्मा गांधी सांदीपनी विद्यालय के 2 होनहार छात्रों संस्कार साहू एवं लखन धानक को संसदीय विद्यापीठ की ओर से दिल्ली भेजा गया।

    विद्यार्थियों ने देखी लोकसभा की कार्यवाही

    विद्यार्थियों ने लोकसभा की कार्यवाही को नजदीक से देखा तथा संसद परिसर में स्थित संग्रहालय एवं प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विद्यार्थियों को दिल्ली के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर करने का भी अवसर मिला, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ। भ्रमण के दौरान युवा संसद प्रभारी शिक्षिका  रेखा पाटीदार भी छात्रों के साथ उपस्थित रहीं और उन्होंने पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्राचार्य  सुधाकर पाराशर, उप प्राचार्य  पी. विजय कुमार, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यालय परिवार ने विजेता छात्रों एवं प्रभारी शिक्षकों  रेखा पाटीदार,  पूनम वास्तव, डॉ दीप्ति सोलंकी एवं  रक्षा गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ सफलता की कामना की है।

     

  • संकट की घड़ी में बाढ़ प्रभावितों के साथ मजबूती से खड़ी छत्तीसगढ़ सरकार

    संकट की घड़ी में बाढ़ प्रभावितों के साथ मजबूती से खड़ी छत्तीसगढ़ सरकार

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें त्वरित राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया गया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं। प्रदेशभर में जलभराव और बाढ़ में फंसे 49 हजार 793 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। प्रभावित परिवारों के लिए 152 राहत शिविर स्थापित कर 11 हजार 945 से अधिक लोगों के रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है।

    राज्य में 1 जून से 30 सितम्बर 2026 की अवधि के दौरान, विशेषकर 23 से 29 सितम्बर के बीच हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ से प्रदेश के 33 में से 22 से अधिक जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ। नदियों और नालों में जलस्तर बढ़ने से 1,083 गांवों के 74 हजार 130 से अधिक नागरिक प्रभावित हुए।

    बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुकमा और बस्तर जिलों में देखा गया। सुकमा जिले के 25 गांवों के 40 हजार 714 तथा बस्तर जिले के 145 गांवों के 20 हजार 212 लोग प्रभावित हुए। इसके अतिरिक्त रायपुर, धमतरी, बालोद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, कोरबा, बेमेतरा, कबीरधाम, दुर्ग, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा सहित अन्य जिलों के अनेक गांव भी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हुए।

    49 हजार से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू

    आपदा की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किए। आपदा प्रबंधन की टीमों ने दिन-रात अभियान चलाते हुए जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रदेशभर में अब तक 49 हजार 793 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें अकेले सुकमा जिले में 40 हजार से अधिक तथा रायपुर जिले में 5,600 से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।

    प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में 152 राहत शिविर स्थापित किए गए। इन शिविरों में 11 हजार 945 से अधिक प्रभावित लोगों के रहने और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

    प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने पर जोर

    बारिश और बाढ़ से हुई जनहानि, पशुहानि, मकानों तथा फसलों की क्षति के मामलों में राज्य सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई तेजी से की जा रही है।

    बारिश और बाढ़ से संबंधित हादसों में प्रदेशभर में अब तक 15 लोगों की दुखद मृत्यु हुई है। इसके साथ ही 1,220 से अधिक पशुधन की हानि हुई है। प्राकृतिक आपदा से 2,103 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 7,947 मकानों को आंशिक क्षति पहुंची है। किसानों की 6,154 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लगी फसलें भी प्रभावित हुई हैं।

    राज्य सरकार ने क्षति के आकलन के साथ ही पात्र प्रभावित परिवारों तक सहायता राशि पहुंचाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है।

    जनहानि से लेकर मकान और फसल क्षति तक सहायता का त्वरित वितरण

    जनहानि के प्रकरणों में अब तक ₹16 लाख की राहत राशि प्रदान की जा चुकी है, जबकि ₹24 लाख से अधिक का भुगतान प्रक्रियाधीन है।

    पशुहानि के मामलों में प्रभावित पशुपालकों को ₹26.17 लाख से अधिक की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है तथा ₹2.18 लाख की राशि का भुगतान शेष है।

    पूर्ण एवं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए ₹1.61 करोड़ से अधिक की सहायता राशि स्वीकृत कर वितरित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त ₹20.26 लाख की सहायता राशि शीघ्र ही संबंधित हितग्राहियों के खातों में भेजी जाएगी।

    इसी प्रकार फसल क्षति के लिए ₹12.82 लाख की क्षतिपूर्ति राशि जारी की जा चुकी है, जबकि ₹4.96 लाख से अधिक की राशि का वितरण शेष है।

    इस प्रकार जनहानि, पशुहानि, मकान एवं फसल क्षति से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा सहायता और क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है।

    शेष नुकसान का शीघ्र आकलन कर राहत राशि देने के निर्देश

    राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रभावित नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराने में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो। रायगढ़, जांजगीर-चांपा, कोरबा, दुर्ग और गरियाबंद सहित प्रभावित जिलों में राजस्व एवं पटवारी टीमों को शेष नुकसान का अंतिम आकलन जल्द से जल्द पूरा करने और पात्र हितग्राहियों को राहत राशि का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों के साथ नुकसान के आकलन और आर्थिक सहायता वितरण की कार्रवाई समानांतर रूप से की जा रही है। राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक प्रभावित नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने, जरूरतमंद परिवारों को तत्काल राहत देने और नुकसान से प्रभावित लोगों तक नियमानुसार आर्थिक सहायता शीघ्र पहुंचाने की है।

  • अधोसंरचना विकास की पूरी कार्य प्रणाली का डिजिटल आधार बने पीएम गति शक्ति : मंत्री  सिंह

    अधोसंरचना विकास की पूरी कार्य प्रणाली का डिजिटल आधार बने पीएम गति शक्ति : मंत्री सिंह

    भोपाल

    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में देशभर के अच्छे प्रयोगों और नवाचारों को साझा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘बैंक ऑफ आइडियाज, इनोवेशन एंड रिसर्च’ जैसी वेबसाइट बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी राज्य या विभाग में सफल हुए प्रयोगों को दूसरे राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए, जिससे उनके अनुभवों का व्यापक लाभ मिल सके।

    केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने भूमि अधिग्रहण को सड़क परियोजनाओं की प्रमुख चुनौती बताते हुए कहा कि लगभग 1.60 लाख भूमि अधिग्रहण प्रकरण लंबित हैं। उन्होंने टेंडर जारी करने से पहले भूमि अधिग्रहण संबंधी कार्रवाई पूरी करने का सुझाव दिया, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।

    सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि दुर्घटनाओं में 18 से 36 वर्ष के युवाओं की बड़ी संख्या में मृत्यु देश के लिए गंभीर क्षति है। उन्होंने बताया कि लगभग 40 प्रतिशत दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों और 60 प्रतिशत राज्य सरकारों की सड़कों पर होती हैं। केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने व्हाइट टॉपिंग तथा अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी विचार करने का सुझाव दिया। केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने केवड़िया (गुजरात)। अधोसंरचना विकास में पीएम गति शक्ति के व्यापक और व्यावहारिक उपयोग की मध्यप्रदेश की पहल को राष्ट्रीय मंच पर सराहना मिली है।

    गुजरात के केवड़िया में आयोजित चिंतन शिविर में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने पीएम गति शक्ति पर केंद्रित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने सर्वेक्षण, सड़क नेटवर्क की योजना, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, बजट और निर्माण कार्यों की समय-सीमा निर्धारित करने में इस प्लेटफॉर्म के उपयोग के मध्यप्रदेश के अनुभव साझा किए। सत्र में बताया गया कि प्रदेश के कुछ नवाचारों को राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी अपनाया जा रहा है।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि पीएम गति शक्ति को अधोसंरचना विकास के लिए एक व्यापक डिजिटल आधार के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए इसे विभागों की नियमित कार्यप्रणाली से जोड़ना होगा। मध्यप्रदेश ने प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न मॉड्यूल विकसित कर इस दिशा में व्यावहारिक पहल की है।

    केंद्रीय मंत्री  गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित चिंतन शिविर में लगभग 18 राज्यों के लोक निर्माण मंत्रियों ने सहभागिता की। लगभग सभी राज्यों के लोक निर्माण विभागों और सड़क निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिविर में अधोसंरचना विकास, तकनीक, नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और परियोजनाओं की निगरानी पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। चिंतन शिविर में भाग लेने आए लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने सोमवार सुबह पहले लौह पुरुष भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' के दर्शन किए एवं सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

    74,370 किलोमीटर सड़कें, 2,601 सरकारी भवन और 3,654 पुल जियो-टैग

    लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने बताया कि गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर मध्यप्रदेश के लिए लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप विकसित किया गया है। इसके माध्यम से प्रदेश की 74,370 किलोमीटर सड़कों, 2,601 सरकारी भवनों और 3,654 पुलों को जियो-टैग किया जा चुका है। इससे अधोसंरचना संबंधी जानकारी को सटीक भौगोलिक पहचान के साथ उपलब्ध कराने में मदद मिली है।

    प्रदेश ने रोड नेटवर्क मास्टर प्लान मॉड्यूल भी विकसित किया है। पीएम गति शक्ति के भू-स्थानिक डेटा का उपयोग कर तैयार रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से मौजूदा सड़क नेटवर्क, क्षेत्रीय आवश्यकताओं और भविष्य की प्राथमिकताओं का बेहतर विश्लेषण संभव हुआ है।

    डीपीआर, बजट और समय-सीमा निर्धारण से जुड़ा पीएम गति शक्ति

    मंत्री  सिंह ने बताया कि प्रस्तावित सड़कों के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया को भू-स्थानिक डेटा से जोड़ने के लिए डीपीआर मॉड्यूल विकसित किया गया है। इसी प्रकार बजट मॉड्यूल के माध्यम से वार्षिक बजट तैयार करने की प्रक्रिया को पीएम गति शक्ति से जोड़ा गया है। विभिन्न प्रस्तावों और योजनाओं को एक साथ देखने से संभावित दोहराव की पहचान करने और उसे दूर करने में मदद मिल रही है। इससे उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग का आधार तैयार हुआ है।

    निर्माण कार्यों के लिए विकसित टाइमलाइन मॉड्यूल से परियोजनाओं की वास्तविक समय-सीमा निर्धारित करने और तय समय-सीमा के अनुरूप प्रगति की समीक्षा करने की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार सर्वेक्षण और डेटा संग्रह से लेकर योजना, डीपीआर, बजट तथा निर्माण की समय-सीमा तक पीएम गति शक्ति को विभागीय कार्य प्रणाली से जोड़ा जा रहा है।

    क्रियान्वयन, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंध प्रबंधन तक बढ़े उपयोग

    लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने कहा कि पीएम गति शक्ति की क्षमताओं का उपयोग परियोजना क्रियान्वयन, प्रगति की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंध प्रबंधन तक बढ़ाया जाना चाहिए। विभागों की व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुसार नए मॉड्यूल, इंटरफेस और सुविधाएं विकसित करने के लिए बायसेग-एन के साथ और अधिक समन्वय किया जा सकता है।

    मंत्री  सिंह ने राज्यों से अपनी तकनीकी चुनौतियों, आवश्यकताओं और संभावनाओं पर खुले मन से चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीएम गति शक्ति पर डेटा अपलोड करने के साथ उसका नियमित निर्णयों और कार्यों में उपयोग आवश्यक है। सत्र से नए विचार, व्यावहारिक सुझाव और सार्थक समाधान सामने आना ही चिंतन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

    मध्यप्रदेश की पहल को बायसेग-एन ने सराहा, अन्य राज्यों में भी अपनाए जा रहे नवाचार

    बायसेग-एन के निदेशक  विनय ठाकुर ने पीएम गति शक्ति की विभिन्न सुविधाओं और निर्माण कार्यों में इसके उपयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण मंत्री  सिंह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है।  सिंह स्वयं तीन-चार बार BISAG-N, गांधीनगर पहुंचकर कार्यों की समीक्षा और मार्गदर्शन कर चुके हैं।

    निदेशक  ठाकुर ने बताया कि राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मध्यप्रदेश के कुछ नवाचारों को लागू किया गया है। उन्होंने इसे राज्यों के बीच सफल प्रयोगों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

    ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से परियोजनाओं की निगरानी पर चर्चा

    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के चेयरमैन  संतोष यादव ने ड्रोन तकनीक से सड़क परियोजनाओं की निगरानी और विश्लेषण की जानकारी दी। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से निर्माण कार्यों में संभावित देरी और लागत वृद्धि का पूर्व आकलन करने तथा एनएचएआई के डेटा लेक सिस्टम के उपयोग के बारे में बताया।

    शिविर में अमरावती शहर के निर्माण और विकास पर भी प्रेजेंटेशन हुआ। इसमें आधुनिक तकनीक, भू-स्थानिक डेटा और एकीकृत अधोसंरचना योजना के माध्यम से बड़े एवं जटिल विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की संभावनाएं प्रस्तुत की गईं।

     

  • पंखों को मिली रफ्तार: सरस्वती साइकिल योजना से बेटियों की शिक्षा की राह हुई आसान

    पंखों को मिली रफ्तार: सरस्वती साइकिल योजना से बेटियों की शिक्षा की राह हुई आसान

    रायपुर

    गांव की पगडंडियों और लंबी सड़कों से होकर स्कूल पहुंचने वाली बेटियों के लिए एक साइकिल केवल दो पहियों का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा तक पहुंचने की राह आसान करने वाली साथी बन सकती है। घर से विद्यालय की दूरी, आने-जाने में लगने वाला समय, बदलता मौसम और परिवहन साधनों की कमी जैसी चुनौतियों के बीच सरस्वती साइकिल योजना दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में मदद कर रही है।

    सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित शासकीय हाई स्कूल सेदम की छात्राएं रजनी एक्का, गायत्री यादव, सोनिया, रजनी साहू और नीतू यादव भी इस बदलाव को अपने जीवन में महसूस कर रही हैं। कभी स्कूल पहुंचने के लिए पैदल लंबी दूरी तय करने वाली इन छात्राओं के लिए साइकिल मिलने के बाद आवागमन आसान हुआ है। समय की बचत हो रही है और किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भरता भी कम हुई है।

    साइकिल नहीं, शिक्षा तक पहुंच आसान करने का माध्यम

    छत्तीसगढ़ शासन की सरस्वती साइकिल योजना के माध्यम से कक्षा 9वीं में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को निःशुल्क साइकिल प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा देने के साथ बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।

    योजना का महत्व विशेष रूप से उन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में अधिक दिखाई देता है, जहां घर और विद्यालय के बीच दूरी अधिक है तथा सार्वजनिक परिवहन के साधन सीमित हैं। ऐसी परिस्थितियों में प्रतिदिन पैदल स्कूल आना-जाना छात्राओं के लिए समय और श्रम दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। साइकिल मिलने से यही दूरी कम समय में तय की जा सकती है।

    पहले पैदल पहुंचती थीं स्कूल, अब बच रहा समय

    शासकीय हाई स्कूल सेदम की छात्राएं बताती हैं कि साइकिल मिलने से पहले उन्हें स्कूल आने-जाने के लिए पैदल चलना पड़ता था। इससे काफी समय लगता था और थकान भी होती थी। गर्मी, बारिश और ठंड के दिनों में यह परेशानी और बढ़ जाती थी।

    अब साइकिल से वे कम समय में विद्यालय पहुंच रही हैं। समय पर स्कूल पहुंचने के साथ घर लौटने में भी कम समय लग रहा है। छात्राओं का कहना है कि आने-जाने में बचने वाला समय अब पढ़ाई और घर के अन्य जरूरी कार्यों में उपयोग हो रहा है।

    रजनी एक्का, गायत्री यादव, सोनिया, रजनी साहू और नीतू यादव का अनुभव बताता है कि आवागमन की एक सुविधा छात्राओं की रोजमर्रा की पढ़ाई को कितना आसान बना सकती है। अब उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए किसी पर निर्भर रहने की जरूरत भी कम हुई है।

    “अब समय पर स्कूल पहुंचते हैं, पढ़ाई के लिए भी मिलता है ज्यादा समय”

    छात्राओं ने बताया कि साइकिल मिलने के बाद विद्यालय तक आने-जाने में काफी सुविधा हुई है। पहले पैदल चलने में अधिक समय और श्रम लगता था। अब कम समय में स्कूल पहुंचने से नियमित पढ़ाई में मदद मिल रही है।

    उनका कहना है कि साइकिल से आने-जाने में समय की बचत होने के कारण पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिलता है। घर के जरूरी काम और पढ़ाई के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी आसानी हुई है। इस सुविधा से विद्यालय जाने का उत्साह भी बढ़ा है और वे आगे मन लगाकर पढ़ाई करते हुए उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं।

    बेटियों के आत्मविश्वास को भी मिली नई ताकत

    सरस्वती साइकिल योजना का प्रभाव केवल स्कूल तक की दूरी कम करने तक सीमित नहीं है। स्वयं साइकिल चलाकर विद्यालय जाना छात्राओं को अपने दैनिक आवागमन में अधिक आत्मनिर्भर भी बना रहा है। पहले जहां कई छात्राओं को पैदल चलना पड़ता था या किसी परिजन पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वे स्वयं स्कूल पहुंच रही हैं।

    छात्राओं के लिए यह अनुभव आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी है। अपनी राह स्वयं तय कर स्कूल तक पहुंचना उन्हें आगे बढ़ने और अपने शैक्षणिक लक्ष्यों के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।

    बालिका शिक्षा को मिल रहा मजबूत आधार

    किसी भी समाज की प्रगति में बालिका शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालय तक पहुंच जितनी आसान होगी, छात्राओं के लिए नियमित रूप से शिक्षा से जुड़े रहना उतना ही सुविधाजनक होगा। दूरस्थ क्षेत्रों में साइकिल जैसी व्यक्तिगत आवागमन सुविधा इसी आवश्यकता को पूरा करने में मदद करती है।

    स्कूल की दूरी और परिवहन की परेशानी कम होने से छात्राओं को अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलता है। माध्यमिक शिक्षा से लगातार जुड़ी रहने वाली छात्राएं आगे उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों की ओर कदम बढ़ा सकती हैं।

    एक शिक्षित बेटी, परिवार और समाज की ताकत

    एक बेटी की शिक्षा का प्रभाव केवल उसके व्यक्तिगत भविष्य तक सीमित नहीं रहता। शिक्षित बालिका आगे चलकर परिवार में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और आर्थिक निर्णयों के प्रति अधिक जागरूक भूमिका निभा सकती है। इस तरह बेटियों की शिक्षा में किया गया सहयोग आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की नींव भी तैयार करता है।

    शिक्षा बालिकाओं को अपने अधिकारों और अवसरों के प्रति जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पढ़ाई से लगातार जुड़ाव उन्हें अपने भविष्य के लक्ष्य निर्धारित करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है।

    शिक्षा से मजबूत होती है बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता

    बालिकाओं का लगातार विद्यालय और शिक्षा से जुड़े रहना उनके सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा उन्हें अपने अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और जीवन में उपलब्ध अवसरों की जानकारी देती है। इससे कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

    जब बेटियां अपनी पढ़ाई जारी रखती हैं और उच्च शिक्षा तथा भविष्य के लक्ष्य तय करती हैं, तब शिक्षा उनके जीवन में प्राथमिकता के रूप में मजबूत होती है। इसलिए विद्यालय तक उनकी सुगम पहुंच केवल आवागमन का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भर भविष्य से भी जुड़ी है।

    साइकिल के पहियों पर आगे बढ़ रहे बेटियों के सपने

    शासकीय हाई स्कूल सेदम की छात्राओं के लिए सरस्वती साइकिल योजना से मिली साइकिल स्कूल आने-जाने का साधन होने के साथ समय की बचत, आत्मविश्वास और आगे पढ़ने की आकांक्षा से भी जुड़ गई है। छात्राओं का कहना है कि स्कूल तक पहुंच आसान होने से पढ़ाई जारी रखने का उत्साह बढ़ा है और वे उच्च शिक्षा हासिल कर अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं।

    सेवा संकल्प अभियान के बीच इन छात्राओं का अनुभव बताता है कि शिक्षा की राह में आने वाली छोटी-छोटी व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने वाली पहल किस तरह बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर दे सकती है। आज साइकिल के पैडल के साथ स्कूल की ओर बढ़ते उनके कदम शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर भी बढ़ रहे हैं।

  • सोनबरसा जंगल सफारी के लिए चार नई जिप्सी और डेढ़ करोड़ रुपए के विकास कार्यों की स्वीकृति

    सोनबरसा जंगल सफारी के लिए चार नई जिप्सी और डेढ़ करोड़ रुपए के विकास कार्यों की स्वीकृति

    रायपुर

     परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि जन आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए परिवहन कार्यालयों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। परिवहन सेवाओं को डिजिटल बनाने से लोगों को घर बैठे काम कराने की सुविधा मिलेगी।  कश्यप आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की ग्राम पंचायत परसाभदेर में 1 करोड़ 74 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित जिला परिवहन कार्यालय भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंत्री  कश्यप ने सोनबरसा जंगल सफारी के लिए चार नई जिप्सी तथा सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की।

    मंत्री  कश्यप ने कहा कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में पांच पैक्स में परिवहन सुविधा केंद्रों के संचालन हो रहा है और इनके माध्यम से 572 लर्निंग लाइसेंस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पैक्स अब धान खरीदी के साथ अन्य सेवाएं भी उपलब्ध कराएंगे।  कश्यप ने सड़क सुरक्षा पर जोर देते हुए अभिभावकों से बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों द्वारा दोपहिया वाहन चलाने के प्रति अभिभावकों को सजग रहना चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके। 

    राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि जिले में परिवहन सुविधाओं को विस्तार देते हुए सर्वसुविधायुक्त कार्यालय भवन का निर्माण पूरा हुआ है। परिवहन सेवाओं के आधुनिकीकरण और डिजिटल सुविधाओं से वाहन स्वामियों को राहत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहरों से गांवों तक विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। कार्यक्रम में वाहन चालकों को लाइसेंस, सुरक्षित यातायात के लिए हेलमेट तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के दस बुजुर्गों को निःशुल्क बस पास वितरित किए गए।

     कार्यक्रम के दौरान सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत परिवहन मंत्री  कश्यप व राजस्व मंत्री  वर्मा द्वारा कार्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती आकांक्षा जायसवाल, पूर्व विधायक  शिवरतन शर्मा और  प्रमोद कुमार शर्मा सहित जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • युवाओं को उभरती तकनीकों और रोजगार-उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने की पहल

    युवाओं को उभरती तकनीकों और रोजगार-उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने की पहल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री युवा सम्मेलन 6 अक्टूबर को लाल परेड ग्राउंड, भोपाल में आयोजित होगा। सम्मेलन में प्रदेश के युवाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवाचार, आधुनिक तकनीकों, कौशल विकास, इंटर्नशिप और उद्यमिता के अवसरों से परिचित कराया जाएगा। मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमपीएसईडीसी) द्वारा सम्मेलन में छह स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स और प्रौद्योगिकी उद्यमिता सहित विभिन्न उभरते तकनीकी क्षेत्रों में प्रदेश में हो रहे कार्यों तथा उपलब्ध अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सहभागिता में एक स्टॉल एमपीएसईडीसी का होगा, जबकि पांच स्टॉल अकादमिक संस्थानों, उद्योग एवं डेवलपर समुदाय से जुड़ी संस्थाओं द्वारा लगाए जाएंगे। स्टॉल्स पर तकनीकी गतिविधियों के लाइव प्रदर्शन के साथ युवाओं के लिए उपलब्ध इंटर्नशिप, कौशल विकास और स्टार्टअप सहायता से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी।

    एमपीएसईडीसी के स्टॉल पर आईटी, आईटीईएस एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में राज्य के निवेश प्रोत्साहन ढांचे तथा विद्यार्थियों और स्नातकों के लिए संचालित इंटर्नशिप कार्यक्रम की जानकारी दी जाएगी। आईआईटी इंदौर दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन द्वारा अनुसंधान को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं उद्यमिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा।

    इज़ी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के स्टॉल पर ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से शासन, कृषि और उद्योग के क्षेत्र में मानव रहित हवाई प्रणालियों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। द ओरिजिन गिल्ड द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मध्यभारत में विकसित हो रहे समुदाय आधारित नेटवर्क और एआई विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

    गूगल डेवलपर ग्रुप (जीडीजी), भोपाल द्वारा डेवलपर्स के कौशल उन्नयन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उपकरणों की जानकारी दी जाएगी। वहीं यंगोवेटर के स्टॉल पर रोबोटिक्स, ऑटोमेटेड गाइडेड व्हीकल्स (एजीवी), ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स और ऑटोमेशन समाधानों का प्रदर्शन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री युवा सम्मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की यह सहभागिता प्रदेश के युवाओं को तकनीकी क्षेत्र की संस्थाओं, उद्योगों और नवाचार से जुड़े समुदायों से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगी। इससे युवा अपने तकनीकी कौशल को रोजगार, करियर और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ सकेंगे। प्रदेश की प्रौद्योगिकी अर्थव्यवस्था में युवाओं को प्रमुख सहभागी बनाने की दिशा में यह सहभागिता महत्वपूर्ण होगी।

     

  • सीएम हेल्पलाइन 1076 से हो रहा समस्याओं का प्रभावी और समयबद्ध समाधान

    सीएम हेल्पलाइन 1076 से हो रहा समस्याओं का प्रभावी और समयबद्ध समाधान

    रायपुर

    नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण और समाधान के प्रति उनकी संतुष्टि सुशासन की महत्वपूर्ण कसौटी है। इसी दिशा में सीएम हेल्पलाइन 1076 नागरिकों की समस्याओं को सीधे शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और उनके त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था के रूप में कार्य कर रही है। शिकायत दर्ज होने से लेकर संबंधित विभाग द्वारा कार्रवाई तथा निराकरण के बाद नागरिक से प्राप्त फीडबैक तक पूरी प्रक्रिया की सतत निगरानी की जा रही है।

    इसी कड़ी में कोरबा जिले के वार्ड क्रमांक 12, नई बस्ती, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट की शिकायत का भी समाधान किया गया। शिकायतकर्ता  मोहम्मद रियाज ने 10 सितम्बर 2026 को सीएम हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण क्षेत्र में रात के समय अंधेरा रहता है, जिससे स्थानीय नागरिकों को आवागमन में परेशानी हो रही है।

    शिकायत प्राप्त होते ही इसे संबंधित निगम प्रशासन तक पहुंचाया गया। निगम की टीम ने स्थल का निरीक्षण कर खराब स्ट्रीट लाइट की मरम्मत की और उसे पुनः चालू कराया। समस्या का समाधान होने के बाद शिकायतकर्ता  रियाज से फीडबैक लिया गया। उनके द्वारा निराकरण पर संतुष्टि व्यक्त किए जाने के बाद ही शिकायत को बंद किया गया।

    नागरिक की संतुष्टि के बाद ही शिकायत होती है बंद

    सीएम हेल्पलाइन 1076 में नागरिकों की शिकायतों को केवल दर्ज करने तक सीमित नहीं रखा गया है। शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने, आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने और निराकरण के बाद शिकायतकर्ता की संतुष्टि की पुष्टि करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे समस्याओं के समाधान के साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी मजबूत हो रही है।

    शिकायत से समाधान और समाधान से संतुष्टि तक सीएम हेल्पलाइन 1076 नागरिकों और शासन-प्रशासन के बीच संवाद, विश्वास और जवाबदेही की प्रभावी कड़ी के रूप में कार्य कर रही है।