Author: NewseDay

  • फैंस का इंतजार खत्म! विराट कोहली और रोहित शर्मा अगले महीने करेंगे वापसी, 5 वनडे खेलने का मौका

    फैंस का इंतजार खत्म! विराट कोहली और रोहित शर्मा अगले महीने करेंगे वापसी, 5 वनडे खेलने का मौका

    मुंबई 

    शुभमन गिल की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम की। भारत ने तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी में आयोजित वनडे में 8-8 विकेट से जीत दर्ज की जबकि न्यू चंडीगढ़ में आखिरी मैच में पांच विकेट से हार का सामना किया। दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा ने घर पर फैंस का काफी मनोरंजन किया। दोनों करियर के आखिरी पड़ाव पर हैं लेकिन फैंस का जोश बरकरार है। 37 वर्षीय विराट और 39 वर्षीय रोहित टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं और भारत के लिए सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलेते हैं। ऐसे में फैंस दोनों को मैदान पर देखने कोई मौका नहीं गंवाया चाहते। चलिए, आपको बताते हैं कि विराट और रोहित कब अगली बार भारतीय जर्सी में वनडे मैच खेलते हुए नजर आएंगे।

    अब 3 नहीं बल्कि 5 वनडे में मैदान पर उतरेंगे
    भारत को अगली वनडे सीरीज न्यूजीलैंड दौरे पर खेलनी है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीनों फॉर्मेट की सीरीज आयोजित होगी। दोनों टीमें 22 अक्टूबर 2026 से पांच मैचों की टी20 सीरीज में भिड़ेंगी। उसके बाद पांच मैचों की वनडे सीरीज होगी। विराट और रोहित 1 नवंबर से भारतीय जर्सी में एक्शन में होंगे क्योंकि उसी दिन से वनडे सीरीज शुरू होगी। विराट ने पिछली बार न्यूजीलैंड की धरती पर वनडे सीरीज फरवरी 2020 में खेली थी। तब उनके बल्ले से 51, 15 और 9 के स्कोर निकले थे। वहीं, 'हिटमैन' के नाम से मशहूर रोहित ने न्यूजीलैंड में पिछली वनडे सीरीज जनवरी 2019 में खेली। रोहित ने पांच मैचों की सीरीज में 11, 87, 62, 7 और 2 के स्कोर बनाए थे।

    वनडे सीरीज के मैच कब-कहां खेले जाएंगे?
    भारत को न्यूजीलैंड दौरे पर वनडे सीरीज का पहला मैच एक नवंबर को ऑकलैंड के मैदान पर खेलना है। दोनों टीमें दूसरा वनडे में वेलिंग्टन के मैदान पर भिड़ेंगी, जो 7 नवंबर को आयोजित होगा। तीसरा मुकाबला हैमिल्टन में 10 नवंबर को खेला जाएगा। सीरीज के आखिरी दोनों वनडे माउंट माउंगानुई के मैदान पर होंगे। चौथे वनडे का 13 नवंबर और पांचवें मैच का 15 नवंबर को आयोजन होगा। वनडे सीरीज समाप्त होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ 19 नवंबर से दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है।

    विराट-रोहित ने WI सीरीज में कितने रन बनाए?
    विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में तीन मैचों में 168 रन जुटाए। उन्होंने पहले वनडे में नाबाद 139 रन बनाए, दूसरे में 29 रन की पारी खेली और तीसरे में गोल्डन डक का शिकार हुए। वह सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में छठे पायदान पर है। रोहित शर्मा ने 225 रन बटोरे। उन्होंने पहले मैच में 32, दूसरे में 101 और तीसरे वनडे में 92 रनों की पारी खेली। वह लिस्ट में चौथे नंबर पर हे। कप्तान शुभमन गिल ने सीरीज में सर्वाधिक 334 रन जोड़े। उन्होंने एक दोहरा शतक लगाया और एक सेंचुरी जमाई। वह आखिरी मुकाबले में एक रन ही बना सके। गिल को प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड मिला।

  • 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया हुई तेज, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी-भत्तों से जुड़ी सुविधाओं का जुटाया जा रहा डेटा

    8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया हुई तेज, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी-भत्तों से जुड़ी सुविधाओं का जुटाया जा रहा डेटा

    नई दिल्ली

    8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले अलग-अलग बेनिफिट्स एंड फैसिलिटीज की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग अब इन बेनिफिट्स से रिलेटेड जानकारी का स्टडी करेगा, ताकि कर्मचारियों के सैलरी, अलाउंसेस और अन्य सर्विस बेनिफिट्स की रिव्यू की जा सके।

    फाइनेंसियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉयी ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (CGEGIS) से जुड़ी जानकारी मांगी है। सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) ने 1 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया है। इसमें मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स (MoHUA) के तहत आने वाले डिपार्टमेंट्स एंड ऑफिसेज से सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉईज ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम यानी CGEGIS से जुड़ा डेटा मांगा गया है। बता दें कि यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम है, जिसमें इंश्योरेंस कवर के साथ सेविंग्स का प्रोविजन भी होता है।

    दिए गए हैं निर्देश
    CPWD ने रिलेटेड ऑफिसेज से कहा है कि वे तय फॉर्मेट यानी एनेक्सचर-एम (Annexure-M) में यह जानकारी उपलब्ध कराएं। इसके लिए संबंधित SDG और ADG को निर्देश दिए गए हैं और जानकारी 9 अक्टूबर तक CPWD को भेजनी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि CGEGIS के तहत मिलने वाले लाभ में कोई बदलाव या बढ़ोतरी कर दी गई है। फिलहाल यह सिर्फ जानकारी जुटाने की प्रक्रिया है।

    नवंबर 2025 में बना था 8वां वेतन आयोग
    बता दें कि 8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में बनाया था। इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में प्रो. पुलक घोष पार्ट-टाइम मेंबर और पंकज जैन मेंबर-सेक्रेटरी हैं। आयोग को केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, अलाउंसेस, रिटायरमेंट बेनिफिट्स और दूसरी सर्विस कंडीशंस की रिव्यू कर सरकार को अपनी सिफारिशें देनी हैं।

    सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 15 जून थी
    वेतन आयोग पहले ही कर्मचारियों, पेंशनरों, कर्मचारी संगठनों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से सुझाव ले चुका है। सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 15 जून 2026 तक बढ़ाई गई थी। अब आयोग अलग-अलग विभागों से जरूरी आंकड़े जुटाने के साथ जमीनी स्तर पर भी बातचीत कर रहा है। आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, अक्टूबर में बेंगलुरु और मुंबई में भी बैठकें प्रस्तावित हैं।

    ऐसे में CGEGIS से जुड़ी जानकारी मांगा जाना कर्मचारियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह सरकारी सेवा से जुड़े लाभों में शामिल है और अब इसकी जानकारी भी 8वें वेतन आयोग के स्टडी का हिस्सा बन रही है। हालांकि, अभी इससे CGEGIS में किसी बदलाव, ज्यादा इंश्योरेंस कवर या एडिशनल बेनिफिट्स की घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल इसे 8वें वेतन आयोग की चल रही डेटा जुटाने और रिव्यू प्रोसेस के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

  • बाढ़ से निपटने और सिंचाई सुधार की दिशा में बड़ा कदम, यूपी में जर्जर जल संरचनाओं का हुआ कायाकल्प

    बाढ़ से निपटने और सिंचाई सुधार की दिशा में बड़ा कदम, यूपी में जर्जर जल संरचनाओं का हुआ कायाकल्प

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में सिंचाई तंत्र को अभेद्य बनाने और बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था को आधुनिक दिशा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जल ही जीवन है' और 'बूंद-बूंद का बेहतर उपयोग' के संकल्प को साकार करते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जर्जर और दशकों पुरानी जल संरचनाओं का कायाकल्प कर दिया है। प्रदेश के प्रमुख बैराजों, बांधों, हेड रेगुलेटरों और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के जर्जर गेटों को न केवल बदला गया है, बल्कि 60 से 70 फीट गहरे पानी के भीतर गेट बदलकर राज्य ने एक अभूतपूर्व तकनीकी कीर्तिमान भी स्थापित किया है।

    ओखला, गोमती और नरौरा बैराज का हुआ आधुनिकीकरण
    सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के अनुसार, लंबे समय से देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुके गेटों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है। 

    गोमती और हिंडन बैराज: लखनऊ स्थित गोमती बैराज के सभी 10 गेट और गाजियाबाद स्थित हिंडन बैराज के सभी 8 गेट सफलतापूर्वक बदले जा चुके हैं।

    ओखला व नरौरा बैराज: दिल्ली स्थित ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले गए हैं, जबकि बुलंदशहर के नरौरा बैराज के 61 में से 13 गेट बदले जा चुके हैं और 48 पर काम जारी है।

    अन्य प्रमुख संरचनाएं: पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के सभी 4 गेट, एटा के तातारपुर कनेक्टिंग व हेड रेगुलेटर के 20 गेट, और हरिद्वार के भीमगौड़ा बैराज के 8 खराब गेटों को विभाग की बीआईएस/आईएसओ प्रमाणित बरेली व झांसी कार्यशालाओं में निर्मित नए गेटों से बदला गया है।

    70 फीट गहरे पानी के भीतर बदली गई तकनीक, दूर हुई रिसाव की समस्या
    प्रदेश में पहली बार बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पानी के भीतर स्थित गेटों को बदलने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद ली गई।

    गहरे पानी में ऑपरेशन: ललितपुर के माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में लगभग 60 से 70 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों को पानी के भीतर ही सफलतापूर्वक बदला गया।

    चंद्रप्रभा बांध में रिसाव बंद: चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में 80 फीट गहराई पर स्थित गेटों से हो रहे रिसाव को गोताखोरों की मदद से स्थायी रूप से रोककर खरीफ और आगामी फसलों के लिए पानी सुरक्षित किया गया। 

    संभावित आपदाओं के लिए तैयार रखे गए 'स्पेयर गेट'
    मुख्य अभियंता (यांत्रिक) उपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार केवल वर्तमान संरचनाओं को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की संभावित आपदाओं और आकस्मिक खराबी से निपटने के लिए एडवांस तैयारी कर रही है।
     
    ओखला बैराज, मौदहा (हमीरपुर), लहचूरा (महोबा), खो बैराज (बिजनौर), घाघरा बैराज (बहराइच) और शारदा बैराज (लखीमपुर खीरी) जैसी अति-संवेदनशील जल संरचनाओं के लिए विशेष स्पेयर गेट तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए गेट बदला जा सकेगा और जन-धन की संभावित क्षति को रोकते हुए किसानों को निर्बाध सिंचाई का पानी मिलता रहेगा।  

  • 5.99 लाख रुपये से शुरू, 24kmpl+ माइलेज; नई Maruti Baleno बनी ग्राहकों की पहली पसंद, बिक्री 25 हजार पार

    5.99 लाख रुपये से शुरू, 24kmpl+ माइलेज; नई Maruti Baleno बनी ग्राहकों की पहली पसंद, बिक्री 25 हजार पार

    मुंबई 

    मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने पिछले महीने अपनी प्रीमियम हैचबैक – Baleno का फेसलिफ्ट लॉन्च किया था। यह फेसलिफ्ट कई शानदार अपग्रेड्स से लैस है। इसके फ्रंट लुक को भी कंपनी ने पहले से ज्यादा बोल्ड और अग्रेसिव बना दिया है। यही कारण है कि सेल के मामले में 2026 बलेनो ने कमाल कर दिया है। कारवाले की रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने इसकी सेल 25 हजार यूनिट से ज्यादा रही है। पहले महीने हुई शानदार सेल का यह माइलस्टोन बता रहा है कि नई बलेनो अपने सेगमेंट पर राज करने के मूड से आई है। आइए जानते हैं नई बलेनो में क्या कुछ है खास।

    5.99 लाख रुपये शुरुआती कीमत
    नेक्सा की वेबसाइट पर नई बलेनो 5.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ लिस्ट है। इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 9.99 लाख रुपये तक जाती है। दोनों कीमतें एक्स-शोरूम हैं। फीचर्स की बात करें, तो बलेनो फेसलिफ्ट में आपको 1.2 लीटर का थ्री-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलेगा। यह नया इंजन 82bhp की पावर और 114Nm का टॉर्क ऑफर करता है। कंपनी नई बलेनो (AMT) का माइलेज 24.77 kmpl तक का क्लेम करती है। बलेनो मैन्युअल और AMT गियरबॉक्स ऑप्शन के साथ आती है। खास बात है कि बलेनो में आपको सीएनजी के साथ एएमटी का भी ऑप्शन मिलेगा।

    नई बलेनो में हुए ये बदलाव
    बलेनो के एक्सटीरियर में हुए बदलावों की बात करें, तो अब इसमें ब्लैक हॉरिजॉन्टल स्लैट्स वाली बड़ी फ्रंट ग्रिल ऑफर की जा रही। वहीं, हेडलैंप और टेल लैंप पहले जैसे ही हैं। नए फॉग लैंप हाउसिंग के साथ बंपर में थोड़ा बदलाव किया गया है। हैचबैक के 16-इंच के अलॉय व्हील्स और शार्क फिन एंटीना को भी डिजाइन दिया गया है। गाड़ी के डाइमेंशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बलेनो की लंबाई अभी भी 3,990mm है और इसका व्हीलबेस 2,520mm है।

    इंटीरियर की जहां तक बात है, तो केबिन का लेआउट पहले जैसा ही है। इसमें नौ-इंच का टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम और सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है। इस बार इसमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, टायर प्रेशर मॉनिटर और लेवल 2 ADAS-बेस्ड सेफ्टी फीचर्स भी दिए गए हैं। पुराने मॉडल से लिए गए फीचर्स में हाइट-एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, वायरलेस चार्जर, हेड-अप डिस्प्ले, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और 360-डिग्री कैमरा शामिल हैं।

    आने वाला है फ्रॉन्क्स का फेसलिफ्ट
    कंपनी बलेनो के बाद अपनी कई और कारों को अपडेट देने वाली है। फ्रॉन्क्स इन्हीं में से एक है। मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स का फेसलिफ्ट इसी साल नवंबर में मार्केट में एंट्री कर सकता है। इसमें कंपनी नया फ्रंट ग्रिल, अपडेटेड बंपर और नई एलईडी लाइट्स के साथ डिजाइन में छोटे-मोटे बदलाव कर सकती है। इंटीरयर में आपको बड़ा टचस्क्रीन, अपडेटेड डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, सनरूफ और वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स जैसे फीचर देखने को मिल सकते हैं। इसमें लेवल-2 ADAS भी दिया जा सकता है।

  • कृषि में AI-रोबोटिक्स की एंट्री, जम्मू-कश्मीर में बदलेगी खेती की तस्वीर; LG मनोज सिन्हा ने बताया विजन

    कृषि में AI-रोबोटिक्स की एंट्री, जम्मू-कश्मीर में बदलेगी खेती की तस्वीर; LG मनोज सिन्हा ने बताया विजन

    जम्मू
     जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में उभरती आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और स्मार्ट फार्मिंग जैसी भविष्योन्मुखी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने का जोरदार आह्वान किया है।

    SKUAST-कश्मीर में AI और रोबोटिक्स पर आयोजित एक आंतरिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र अब केवल पारंपरिक खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, तकनीक और आधुनिक इंजीनियरिंग हस्तक्षेपों के माध्यम से भविष्य का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मानव बुद्धिमत्ता और एआई का होगा तालमेल
    सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर इन मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए उपयुक्त मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का कृषि परिदृश्य ऐतिहासिक रूप से किसानों को कठिन परिस्थितियों से निपटने और सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित करता रहा है।

    1960 के दशक में भारत के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय देश खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था और आयात पर काफी हद तक निर्भर था।

    कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने मशीनीकरण सहित विभिन्न उपायों के जरिए कृषि क्षेत्र को बदलने और हरित क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    उन्होंने कहा कि अब कृषि इंजीनियरिंग को उत्पादन बढ़ाने, कम संसाधनों में अधिक उपज हासिल करने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि और बागवानी को सुरक्षित रखने जैसी व्यावहारिक और तात्कालिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

    सिन्हा ने कहा, “इन चुनौतियों का समाधान अतीत के औजारों से नहीं किया जा सकता। हमें नए औजारों की जरूरत है।” उन्होंने आधुनिक तकनीकों और नए दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

    खेती में महिलाओं की भूमिका को तकनीक से मिले मजबूती
    उपराज्यपाल ने कहा कि हाल के महीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से हुए बदलावों ने दुनियाभर में इसके प्रति रुचि और चिंताएं दोनों बढ़ाई हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI और मानव बुद्धिमत्ता एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करें, न कि उन्हें अलग-अलग देखा जाए।

    उन्होंने समाज के व्यापक वर्ग को लाभ पहुंचाने वाले नवाचारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने कहा कि महिला नेतृत्व वाली इंजीनियरिंग और तकनीकी पहल केवल चर्चा का विषय न रहें, बल्कि उनके ठोस और व्यावहारिक परिणाम सामने आने चाहिए।

    कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रम बल से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि गतिविधियों से जुड़ी हैं, जबकि इस क्षेत्र में काम करने वाले कई श्रमिकों को नियमित मजदूरी भी नहीं मिलती।

    उपराज्यपाल ने कृषि इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और संस्थानों से ऐसी तकनीक एवं समाधान विकसित करने का आह्वान किया जो समावेशी और संसाधन-कुशल हों तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों में खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करें।

  • काशी विश्वनाथ मंदिर का रास्ता होगा सुगम, दालमंडी में 60 फीट चौड़ी सड़क का काम तेज; 172 से ज्यादा भवन हटे

    काशी विश्वनाथ मंदिर का रास्ता होगा सुगम, दालमंडी में 60 फीट चौड़ी सड़क का काम तेज; 172 से ज्यादा भवन हटे

     वाराणसी

    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए दालमंडी से होकर बनाए जा रहे सुगम मार्ग के चौड़ीकरण का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. करीब एक साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में ध्वस्तीकरण का काम लगभग पूरा हो गया है. सोमवार को पांच और भवनों पर बुलडोजर चलाया गया. इसके साथ ही चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम पूरा होने की बात पीडब्ल्यूडी ने कही है। 

    दालमंडी में चल रहा यह प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को पहले के मुकाबले काफी चौड़ा करने के लिए शुरू किया गया था. पीडब्ल्यूडी की ओर से करीब सवा 200 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में कुल 187 भवन चौड़ीकरण की जद में आए थे. इन भवनों में छह मस्जिदें भी शामिल थीं। 

    अब तक 170 से ज्यादा भवनों को जमींदोज किया जा चुका है. पीडब्ल्यूडी के मुताबिक करीब 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पूरा हो गया था. सोमवार को अंतिम चरण में पांच भवनों को गिराया गया. इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत भवनों को हटाने का काम पूरा हो गया. दालमंडी का इलाका लंबे समय से संकरी गलियों और घनी आबादी के लिए जाना जाता है. इसी इलाके से होकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है. प्रोजेक्ट के तहत करीब 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क तैयार की जानी है। 

    गलियों के जाल से निकलेगा 60 फीट चौड़ा रास्ता
    इस चौड़ी सड़क के तैयार होने के बाद मंदिर तक पहुंचने का रास्ता मौजूदा संकरी गलियों के मुकाबले काफी सुगम हो जाएगा. फिलहाल इस पूरे इलाके में चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम लगभग पूरा किया जा चुका है. अब आगे का काम सड़क और उससे जुड़ी सुविधाओं को तैयार करने पर केंद्रित होगा। 

    दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत कुल 187 भवनों की पहचान की गई थी. इनमें छह मस्जिदें भी शामिल थीं. प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के सहयोग से इन मस्जिदों को भी चौड़ीकरण की जरूरत के अनुसार आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया है. भवनों को हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया गया. अब अंतिम चरण में पांच भवनों को भी डिस्मेंटल कर दिया गया. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक इसके साथ ही डिमोलिशन का अंतिम चरण पूरा हो गया है। 

    पीडब्ल्यूडी के वाराणसी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि दालमंडी में डिस्मेंटलिंग का फाइनल चरण सोमवार को था. इस चरण में करीब पांच भवनों को डिस्मेंटल किया गया. उन्होंने बताया कि अब तक 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पहले ही हो चुका था. केके सिंह के मुताबिक चौड़ीकरण की जद में आए भवनों के लिए अब तक 132 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है. भवनों को हटाने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद ली गई। 

    भवनों को हटाने के बाद अब प्रोजेक्ट के अगले महत्वपूर्ण हिस्से पर काम चल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक इलाके में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम अभी जारी है. यह काम नवंबर महीने में पूरा होने की उम्मीद है. पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होने के बाद करीब एक से डेढ़ महीने में प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा. इस हिसाब से दिसंबर के अंत तक काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए तैयार किया जा रहा सुगम मार्ग पूरा होने की उम्मीद है। 

    अब वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम
    दालमंडी चौड़ीकरण का यह प्रोजेक्ट करीब एक साल त
    क चलने वाला था. अधिकारियों के मुताबिक इसे दिसंबर में पूरा करना बड़ी उपलब्धि होगी. इसके लिए भवनों के ध्वस्तीकरण के साथ-साथ सड़क से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है. केके सिंह ने बताया कि इस काम में प्रशासन का पूरा सहयोग मिला है. इसी सहयोग के चलते ध्वस्तीकरण के काम को अंतिम चरण तक पहुंचाया जा सका है. अब दालमंडी में भवनों को हटाने का काम खत्म हो चुका है और सड़क निर्माण से जुड़े बाकी काम को पूरा करने पर जोर है। 

    करीब एक साल पहले शुरू हुआ यह काम अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां दालमंडी में चौड़ीकरण की सबसे बड़ी बाधा यानी भवनों को हटाने का काम पूरा हो चुका है. 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क के तैयार होने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले रास्ते को नया स्वरूप मिलेगा. अधिकारियों की योजना के मुताबिक नवंबर में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होगा और इसके बाद करीब एक से डेढ़ महीने में पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। 

  • गुना में बाल विवाह पर बड़ा खुलासा, हर चौथी लड़की की शादी 18 साल से पहले; आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

    गुना में बाल विवाह पर बड़ा खुलासा, हर चौथी लड़की की शादी 18 साल से पहले; आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

     गुना 

    गुना में कम उम्र में शादी की परंपरा कानून और जागरूकता के बावजूद खत्म नहीं हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 के आंकड़े बताते हैं कि 20 से 24 वर्ष की उम्र की हर चार में करीब एक युवती का विवाह 18 साल की कानूनी उम्र से पहले हो चुका था। जिले में इसका अनुपात 25.9% है। पांच साल पहले हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 में यह 28.1% था, यानी कमी तो आई, लेकिन राज्य के 20% औसत से गुना अभी भी काफी ऊपर है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली तस्वीर पुरुषों के आंकड़े में सामने आई है।

    25 से 29 वर्ष की उम्र के 39% पुरुषों की शादी 21 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले हुई। इसके पहले के सर्वे में यह अनुपात 21.8% था। यानी पांच साल में कम उम्र में शादी करने वाले पुरुषों का अनुपात 17.2% अंक बढ़ गया। राज्य का औसत 25% है।

    पुरुषों का आंकड़ा सबसे बड़ा अलार्म; 5 साल में 21.8% से 39% : बाल विवाह की चर्चा में आमतौर पर लड़कियों के आंकड़ों पर फोकस रहता है, लेकिन गुना में पुरुषों का आंकड़ा ज्यादा बड़ा सवाल खड़ा करता है। 25-29 वर्ष के 39% पुरुषों की शादी 21 साल से पहले हुई।

    पांच साल पहले यह अनुपात 21.8% था। यानी इसमें करीब 80% की सापेक्ष बढ़ोतरी हुई है। राज्य में 21 साल से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का औसत 25% है। गुना का आंकड़ा इससे 14 प्रतिशत अंक अधिक है।

    शादी जल्दी तो मातृत्व भी जल्दी, किशोरियों में आंकड़ा 8.5%
    कम उम्र में विवाह का एक और संकेत किशोरियों के मातृत्व के आंकड़े में दिखता है। जिले में 15-19 वर्ष की 8.5% किशोरियां सर्वे के समय या तो मां बन चुकी थीं या गर्भवती थीं। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 5.5% था। यानी पांच साल में इसमें 3% अंक की बढ़ोतरी हुई। मप्र का औसत 5.6% है, जबकि गुना इससे भी ऊपर है।

    इसके पीछे कारण शिक्षा भी है। जिले में 15-49 वर्ष की केवल 18.9% महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा पूरी की है। जबकि प्रदेश में इसका औसत 33.7% है। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्रदेश के मुकाबले बालिका शिक्षा में गुना की स्थिति बेहद खराब है। यही स्थिति लड़कों की शिक्षा में भी है।

     

  • किसानों के लिए जरूरी खबर! समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार-बाजरा उपार्जन का पंजीयन जारी, अब तक 3 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

    किसानों के लिए जरूरी खबर! समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार-बाजरा उपार्जन का पंजीयन जारी, अब तक 3 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

    समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत

    10 अक्टूबर तक होगा पंजीयन

    भोपाल

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 3 लाख 5 हजार 82 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं।

    जबलपुर संभाग में 1 लाख 47 हजार 824, नर्मदापुरम में 16 हजार 398, भोपाल में 8 हजार 599, रीवा में 94 हजार 384, शहडोल में 21 हजार 456 और सागर संभाग में 16 हजार 155 किसानों ने पंजीयन कराया है।

    पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा।

    सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

    सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा।

    आधार नंबर का वेरिफिकेशन

    पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।

     

  • भोपाल में जुटेंगे 20 हजार युवा, CM मोहन यादव बताएंगे रोजगार से AI-रोबोटिक्स तक भविष्य का रोडमैप

    भोपाल में जुटेंगे 20 हजार युवा, CM मोहन यादव बताएंगे रोजगार से AI-रोबोटिक्स तक भविष्य का रोडमैप

    भोपाल 

    भोपाल में 6 अक्टूबर को सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 आयोजित होगा, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओंमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार युवाओं से सीधा संवाद करेंगे।AI, रोबोटिक्स, ड्रोन जैसी भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान।मध्य प्रदेश की युवा शक्ति को रोजगार, कौशल, स्टार्टअप और नई तकनीकों से जोड़ने के लिए सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ.

    मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधे संवाद करेंगे। कॉन्क्लेव में युवाओं को कॅरियर और रोजगार के नए विकल्पों के साथ ही नवाचार और उभरती तकनीकों की संभावनाओं से भी रूबरू कराया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रविवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सभी तैयारियां तय समय-सीमा में पूरी करने और युवाओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।कॉन्क्लेव में रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और नई तकनीकों पर विशेष सत्र और गतिविधियां होंगी।

     विशेषज्ञों के साथ शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और स्टार्टअप भी इसमें शामिल होंगे। युवाओं को बदलते जॉब मार्केट, नए कौशल की जरूरत, स्वरोजगार की संभावनाओं और अपने आइडिया को बिजनेस में बदलने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों और विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी रहेगी। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उद्योग, एमएसएमई, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष, पुलिस और साइबर सुरक्षा समेत कई विभाग युवाओं के लिए संचालित योजनाओं और अवसरों की जानकारी देंगे। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर और सेडमैप की ओर से भी स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। 

    इनमें विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, संस्थाओं और स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार, कॅरियर, प्रशिक्षण, अनुसंधान, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। विश्वविद्यालयों की ओर से ड्रोन तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और कॅरियर से जुड़े प्रोजेक्ट और प्रस्तुतियां भी होंगी।

    युवा कॉन्क्लेव में भविष्य की तकनीकों को खास जगह दी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और रिसर्च की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा। इसका मकसद युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई तकनीकों और इनोवेशन के क्षेत्र में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करना है।मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से नवोदित उद्यम अपने उत्पाद और नए प्रयोग प्रदर्शित करेंगे। युवा इन स्टार्टअप के जरिए यह समझ सकेंगे कि किसी विचार को उत्पाद, सेवा और सफल उद्यम में कैसे बदला जा सकता है।

     कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन और कौशल विकास के साथ मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग, रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञ जानकारी देंगे। पुलिस विभाग की ओर से महिला सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग और जन-सुरक्षा से जुड़े विषयों पर युवाओं के साथ संवाद किया जाएगा।CM मोहन यादव ने मंडला को दिया 460 करोड़ का तोहफा, टाइगर सफारी-जू से पान की खेती तक कई बड़े ऐलानयुवा कॉन्क्लेव में ज्ञान और मार्गदर्शन के साथ मनोरंजन का भी इंतजाम रहेगा। 

    कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां युवाओं का उत्साह बढ़ाएंगी।सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को संवाद, कौशल, कॅरियर, रोजगार और नवाचार के अवसरों से जोड़ना है। मुख्यमंत्री डॉ.

    मोहन यादव के साथ 20 हजार से अधिक युवाओं का संवाद और 80 से ज्यादा प्रदर्शनी कक्ष इस आयोजन को प्रदेश के युवा केंद्रित बड़े आयोजनों में शामिल करेगा। सरकार का जोर युवा प्रतिभा और ऊर्जा को सही अवसर देकर विकसित मध्य प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ाने पर है।

  • नर्मदा उद्गम की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, अमरकंटक में 11,657 हेक्टेयर में नया शहर; 4 गांवों में खुलेंगे होटल-रिसॉर्ट

    नर्मदा उद्गम की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, अमरकंटक में 11,657 हेक्टेयर में नया शहर; 4 गांवों में खुलेंगे होटल-रिसॉर्ट

    अमरकंटक 
    मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा उद्गम स्थल को प्रदूषण से बचाने के लिए अमरकंटक सैटेलाइट सिटी बसाएगी। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने निवेश क्षेत्र का दायरा सात हजार से बढ़ाकर 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा कर दिया है। चार गांवों की जमीन पर होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं बनेंगी। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा।मध्य प्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए सरकार यहां एक सुनियोजित नया शहरी क्षेत्र विकसित करेगी। इसके लिए अमरकंटक के निवेश क्षेत्र का दायरा 7 हजार से बढ़ाकर 11,657 हेक्टेयर से अधिक कर दिया गया है।

    नर्मदा उद्गम स्थल की सुरक्षा
    इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर हुई थी। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है। मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh government) ने इसके लिए निवेश क्षेत्र का दायरा बढ़ाया है।

    योजना के तहत पर्यटकों के ठहरने की जगह नर्मदा के उद्गम स्थल से दूर बनाई जाएगी। दुकानें और दूसरी कारोबारी गतिविधियां भी वहां से हटाई जाएंगी। इसका मकसद गंदे पानी को नर्मदा नदी में जाने से रोकना है।

    नर्मदा को प्रदूषण से बचाना मकसद
    इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद हुई। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है।

    इसके लिए पर्यटकों की नई बसाहट और व्यावसायिक गतिविधियों को उद्गम स्थल से दूर ले जाने की योजना है, ताकि सीवेज नर्मदा में न पहुंचे। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा। इसमें होटल, सड़क और आवासीय क्षेत्रों की जगह तय की जाएगी।

    इन 4 गांवों में बनेगी सैटेलाइट सिटी
    सैटेलाइट सिटी के लिए चुने गए चार गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को अपेक्षाकृत कम बाधाओं के साथ सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी।

    नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है।
    नर्मदा उद्गम (Narmada river origin) का इलाका धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम है। इसी वजह से सरकार वहां सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करना चाहती है। क्या इससे उद्गम पर दबाव घटेगा? योजना का मकसद पर्यटन का बोझ उद्गम से दूर रखना है।

    अमरकंटक सैटेलाइट सिटी कहां बनेगी?
    निवेश क्षेत्र (वह इलाका जिसमें विकास की योजना बनती है) का दायरा बढ़ा है। पहले यह करीब सात हजार हेक्टेयर था। अब यह 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है।

    नई सैटेलाइट सिटी चार गांवों की दो हजार 134.14 हेक्टेयर जमीन पर बसेगी। यह इलाका अमरकंटक के मुख्य संवेदनशील क्षेत्र से दूर है। यहां होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी।

    इन 4 गांवों में बनेगा नया शहर
    अमरकंटक सैटेलाइट सिटी (Amarkantak satellite city) के लिए पोंडी, लालपुर, बरसोत और सेंदुखार गांव चुने गए हैं। इन चारों गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को कम बाधाओं में सुनियोजित शहरी क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी।

    ये आंकड़े 2011 की जनगणना के हैं। पोंडी सबसे बड़ा हिस्सा है। यहां 999.21 हेक्टेयर जमीन है और आबादी 1,554 है। लालपुर में 447.97 हेक्टेयर जमीन और 810 लोग हैं। बरसोत में 417.14 हेक्टेयर जमीन और 521 लोग हैं। सेंदुखार में 269.80 हेक्टेयर जमीन और सिर्फ 69 लोग हैं। चारों गांवों की कुल आबादी करीब तीन हजार है।

    15 गांव/क्षेत्रीय इकाइयों का मास्टर प्लान
    अमरकंटक के मुख्य क्षेत्र और नई सैटेलाइट सिटी समेत कुल 15 क्षेत्रीय इकाइयों को नए निवेश क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है।

    कृषि भूमि पर कॉटेज और स्विमिंग पूल
    अमरकंटक के विकास के लिए 2020 में मास्टर प्लान में बदलाव कर कृषि भूमि पर ‘कृषि पर्यटन’ को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया था।

    मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत कृषि भूमि पर कॉटेज, कैंपिंग साइट, रेस्टोरेंट, योग-नेचुरोपैथी केंद्र, वेलनेस/आध्यात्मिक केंद्र और स्विमिंग पूल की अनुमति दी गई।

    इसके अलावा गैर-प्रदूषणकारी उद्योग, मधुमक्खी पालन, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।