Author: NewseDay

  • बच्चों की सेहत को लेकर छत्तीसगढ़ बाल आयोग सख्त, स्कूलों में शुगर जागरूकता पर जोर

    बच्चों की सेहत को लेकर छत्तीसगढ़ बाल आयोग सख्त, स्कूलों में शुगर जागरूकता पर जोर

    छत्तीसगढ़ में स्कूलों में अब दिखेगा कोल्ड ड्रिंक में कितना शक्कर, बाल आयोग की अनुशंसा

    पालकों एवं बच्चों के व्यवहार परिवर्तन की सकारात्मक कार्यवाही किये जाने हेतु अनुशंसा – डाॅ. वर्णिका शर्मा 

    रायपुर,

     छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों में बढ़ते मोटापा एवं मधुमेह के खतरे को देखते हुए राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों तथा आवासीय संस्थाओं में शुगर एवं कैलोरी बोर्ड स्थापित करने की अनुशंसा की है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ एवं पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता है। प्रस्तावित बोर्ड में विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक एवं कैलोरी की मात्रा को सरल एवं दृश्य माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही लाल, पीला एवं हरा ट्रैफिक लाइट सिस्टम के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ एवं अस्वस्थ खाद्य पदार्थों की जानकारी दी जाएगी।

    राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों एवं आवासीय आश्रम शालाओं/छात्रावासों में बच्चों को कुपोषण, बाल-मोटापे एवं मधुमेह से बचाने हेतु शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड स्थापित करते हुए जंक फूड की बिक्री पर नियंत्रण, पौष्टिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने, ईट राइट क्लब एवं छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर बनाने तथा प्रार्थना सभा में पोषण संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अनुशंसा की गई है। आश्रम शालाओं, पोटा केबिन, प्रयास एवं एकलव्य विद्यालयों में भी भोजन सारणी के साथ शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाने तथा स्थानीय पौष्टिक आहार को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है।

    इसके अलावा पालकों तथा शिक्षकों की बैठक में पोषण एवं संतुलित आहार पर चर्चा कर पालकों को बच्चों के स्वस्थ खान-पान के लिए प्रेरित करने तथा उत्कृष्ट प्रयास करने वाले पालकों को “च्ंतमदजे व िजीम डवदजी” जैसी प्रोत्साहन व्यवस्था प्रदान करने की अनुशंसा की गई है। आयोग द्वारा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्यवाही करते हुए आयोग को अवगत कराने का लेख किया गया है ।

  • IND vs WI: इकाना की पिच पर किसका चलेगा जोर? 89 रन वाला इतिहास या 200+ का रोमांच

    IND vs WI: इकाना की पिच पर किसका चलेगा जोर? 89 रन वाला इतिहास या 200+ का रोमांच

    लखनऊ
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5 टी20 मैच की सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में खेला जाना है। दोनों टीमें यह मैच जीतकर विजयी आगाज करने की कोशिश करेंगी। भारतीय टीम हाल ही में एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीतकर लौटी है और आत्मविश्वास से भरी हुई है। वहीं, वेस्टइंडीज ने वनडे में 350 रन से ज्यादा का लक्ष्य हासिल कर रिकॉर्ड बनाया और कैरिबियाई खिलाड़ी ही पूरे जोश में होंगे। ऐसे में इस मैच में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

    लखनऊ में भारत का आखिरी टी20 मैच काफी चर्चा में रहा था। इकाना स्टेडियम में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड की टीम 99 रन पर ऑल आउट हो गई थी। हालांकि, 100 रन के लक्ष्य का पीछा करने में भारत को 119 गेंदें लग गई थीं। अंत में टीम इंडिया ने यह मुकाबला 6 विकेट से जीता था। हालांकि, इस बार लखनऊ में हाई स्कोरिंग मैच देखने को मिल सकता है।

    स्टेडियम के बाहर भरा पानी
    मैच से कुछ दिन पहले लखनऊ और उत्तर भारत में काफी बारिश हुई थी। इससे गोमती नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। स्टेडियम के आसपास कुछ जगहों पर पानी भरा हुआ है, लेकिन मैदान में पानी निकलने की अच्छी व्यवस्था है। इससे मैदान पूरी तरह सूखा हुआ है। मैच के दौरान भी इस वजह से कोई परेशानी नहीं होगी।

    कैसा रहेगा मौसम?
    लखनऊ में मंगलवार को दिन में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन शाम में मौसम पूरी तरह से साफ रहेगा। बारिश की संभावना न के बराबर है। हालांकि, यहां उमस बहुत ज्यादा है। ऐसे में रात के समय ओस गिर सकती है। ओस गिरने पर गेंदबाजों और फील्डर को परेशानी होती है। इस वजह से टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करने का फैसला कर सकती है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज में भी तीनों मुकाबले लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम ने ही जीते हैं।

    कैसी है पिच?
    लखनऊ की पिच से शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिल सकती है। मैच से पहले हल्की बारिश की भी संभावना है। अगर बारिश होती है तो नई गेंद से तेज गेंदबाजों को मूवमेंट मिल सकता है। हालांकि, गेंद पुरान होने पर बड़े शॉट खेलना आसान होगा और इस मुकाबले में भी 200 रन के आसपास स्कोर बन सकता है।

     

  • रेलवे का बड़ा अपडेट: शताब्दी एक्सप्रेस का बदला रूट, ललितपुर तक ही चलेगी ट्रेन; कई गाड़ियां लेट

    रेलवे का बड़ा अपडेट: शताब्दी एक्सप्रेस का बदला रूट, ललितपुर तक ही चलेगी ट्रेन; कई गाड़ियां लेट

    ग्वालियर
     अगासोद यार्ड रीमॉडलिंग के चलते रेलवे ने कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है। इसके तहत नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस को 15 अक्टूबर को ललितपुर से ही वापस लौटाया जाएगा।

    वहीं, रानी कमलापति-नई दिल्ली शताब्दी भी इसी दिन रानी कमलापति के बजाय ललितपुर से रवाना होगी। इसके अलावा कई ट्रेनों को दो से पांच घंटे तक पुनर्निर्धारित समय पर चलाया जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनों को रास्ते में रोककर नियंत्रित किया जाएगा।

    बता दें कि, अगासोद यार्ड रीमॉडलिंग का असर 12002 नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस पर पड़ेगा। 15 अक्टूबर को यह ट्रेन ललितपुर में ही यात्रा समाप्त करेगी। इसी तरह 12001 रानी कमलापति-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस भी 15 अक्टूबर को रानी कमलापति के बजाय ललितपुर से ही रवाना होगी।

    ये ट्रेनें दो से पांच घंटे की देरी से चलेंगी
    रेलवे ने आठ ट्रेनों को पुनर्निर्धारित समय पर चलाने का निर्णय लिया है। 16031 चेन्नई-श्री माता वैष्णो देवी कटरा 14 अक्टूबर को चार घंटे, 12652 हजरत निजामुद्दीन-मदुरै 15 अक्टूबर को पांच घंटे, 19484 सहरसा-अहमदाबाद 14 अक्टूबर को दो घंटे और 11077 पुणे-जम्मू तवी 14 अक्टूबर को पांच घंटे देरी से चलेगी।

    12650 हजरत निजामुद्दीन-यशवंतपुर 15 अक्टूबर को चार घंटे, 12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम तीन घंटे, 18238 अमृतसर-बिलासपुर तीन घंटे और 12138 फिरोजपुर कैंट-मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस चार घंटे पुनर्निर्धारित समय पर चलेगी।

    कुछ ट्रेनों को मार्ग में नियंत्रित कर चलाने का निर्णय लिया गया है। 12138 फिरोजपुर कैंट-मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को 10 से 14 अक्टूबर तक 90 मिनट, 12648 हजरत निजामुद्दीन-कोयंबटूर को 14 अक्टूबर को 90 मिनट और 12650 हजरत निजामुद्दीन-यशवंतपुर को 10 से 13 अक्टूबर तक 90 मिनट नियंत्रित किया जाएगा।

    इसके अलावा 12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम को 10, 12 और 13 अक्टूबर को 60 मिनट, 18238 अमृतसर-बिलासपुर को 10 से 14 अक्टूबर तक 60 मिनट, 12630 हजरत निजामुद्दीन-यशवंतपुर को 14 अक्टूबर को 30 मिनट और 22686 को 10 व 13 अक्टूबर को 30 मिनट नियंत्रित किया जाएगा।

    साहिबाबाद यार्ड में निर्माण कार्य से बदलेगा
    बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस का मार्ग दिल्ली रेल मंडल के साहिबाबाद यार्ड में निर्माण कार्य के चलते आठ अक्टूबर को बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस बदले मार्ग से संचालित होगी।

    रेलवे के अनुसार साहिबाबाद यार्ड में समपार संख्या चार के स्थान पर सीमित ऊंचाई वाले भूमिगत मार्ग के निर्माण के लिए आरसीसी गर्डर लगाने और सुरक्षा प्लेटें स्थापित करने का काम किया जा रहा है।

    इसके लिए पावर और यातायात ब्लॉक लिया गया है। गाड़ी संख्या 22200 बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस साहिबाबाद से आनंद विहार टर्मिनल, तिलक ब्रिज और हजरत निजामुद्दीन के बजाय साहिबाबाद-दिल्ली जंक्शन-नई दिल्ली-हजरत निजामुद्दीन होकर चलेगी।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गाडरवारा के नागरिकों ने किया अभिनंदन, बोले- राजधानी तक पहुंचना हुआ सुगम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गाडरवारा के नागरिकों ने किया अभिनंदन, बोले- राजधानी तक पहुंचना हुआ सुगम

    कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गाडरवारा क्षेत्र के नागरिकों ने किया मुख्यमंत्री निवास में अभिनन्दन

    गाडरवारा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गाडरवारा और नरसिंहपुर ही नहीं प्रदेश के अनेक कस्बों और नगरों से सड़क मार्ग द्वारा राजधानी तक पहुंचना सुगम हो गया है। सड़कों के शानदार नेटवर्क से यह संभव हुआ है। फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों ने नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाया है। इसके साथ ही सिंचाई, कृषि, शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। विकास की यह यात्रा तेज गति के साथ जारी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के लिए आए गाडरवारा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वृहद आकार की गजमाला और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुविधायुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय का नामकरण सांदीपनि महर्षि के नाम से किया गया है जिससे महर्षि के शिष्यों भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव का महत्व विद्यार्थी समझ सकें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में विकास की गति को बढ़ाने का कार्य किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

    स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गत ढाई वर्ष में क्षेत्र को अनेक सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जो स्वीकृतियां प्रदान की हैं, उनमें 20 किलोमीटर लंबाई की नगर चीचली- सालीचौका रोड शामिल है जिसकी लागत 60 करोड़ होगी। वर्तमान सिंगल रोड के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी। इस निर्माण कार्य के अंतर्गत दूधी नदी पर पुल भी बनाया जाएगा। इसके अलावा अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग का निर्माण भी 27 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह 17.50 किलोमीटर लंबाई का मार्ग होगा। इससे मारेगांव, बसुरिया, अमाड़ा, पचामा और घुटंगा ग्रामों के निवासी भी लाभान्वित होंगे। साईं खेड़ा में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण होने से भविष्य में विद्युत प्रदाय अधिक सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गाडवारा नगर में 5 करोड़ रुपए लागत से गौशाला के निर्माण और 35 सामुदायिक भवनों की स्वीकृति दी गई है। यही नहीं इंडोर स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी भी प्रदान की गई है।

    अच्छी सड़कों ने बचाया समय, ईंधन और ऊर्जा

    कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बताया कि गाडरवारा क्षेत्र विकास के ऐसे आयाम प्राप्त कर रहा है जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। गाडरवारा से भोपाल आने में कभी 6 से 8 घंटे का समय लगता था। अब सड़क मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे में यह दूरी तय करना संभव हो गया है। अच्छी सड़कों से समय, ईंधन और ऊर्जा की बचत हो रही है। नगर चीचली- सालीचौका, अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग की स्वीकृति के साथ ही 13 अन्य मार्गों के निर्माण की पहल भी हुई है, जो क्षेत्र के नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

     

  • 791 किमी सड़कों के लिए कटेंगे 2.89 लाख पेड़? भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

    791 किमी सड़कों के लिए कटेंगे 2.89 लाख पेड़? भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

     भोपाल
    भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।

    सड़क का नेटवर्क, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
     भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।में भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क को लेकर पर्यावरणविदों और शहर के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। योजना के तहत 18 से 75 मीटर तक चौड़ी सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण से 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडराने लगा है। हाल ही में एनएचएआइ की 16.44 किमी लंबी सड़क के लिए लगभग 6,000 पेड़ काटे गए थे। इस आधार पर देखें तो पूरे 791.42 किमी नेटवर्क के निर्माण से सांकेतिक रूप से करीब 2.89 लाख पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल सकती है। 1,450 रुपए प्रति पेड़ की मुआवजा दर के अनुसार इसका सांकेतिक मूल्य लगभग 42 करोड़ रुपए बनता है। इससे पहले भी बायपास और विभिन्न सड़क परियोजनाओं के नाम पर राजधानी में हजारों पेड़ों की बलि दी जा चुकी है।

    डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। इस प्रकार की ओवरलैपिंग से व्यावसायिक गतिविधियों को वैधता मिल सकती है। 

    गौरव वैद्य के अनुसार वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव सड़कों का अंतिम रेखांकन, संबंधित मार्गों पर मौजूद वर्तमान वनस्पति की स्थिति, भू-अधिग्रहण की वास्तविक आवश्यकताएं और सड़कों के वास्तविक चौड़ीकरण का विस्तार जैसी बातों पर निर्भर करेगा।30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा।

    धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़भोपाल में काटे जाएंगे 2.89 लाख पेड़। 

    ओवरलैपिंग मार्किंग पर उठे सवाल
    मैनिट भोपाल के डिपार्टमेंट ऑफ आकिटेक्चर एंड प्लानिंग के एचओडी प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। 

    प्रस्तावित सड़क नेटवर्क का ढांचा
    18 मीटर चौड़ी सड़कें- 111
    24 मीटर चौड़ी सड़कें- 103
    30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48
    45 मीटर चौड़ी सड़कें- 17
    60 मीटर चौड़ी सड़कें- 15
    ये नई सड़कें देंगी नया आकार

    09 मीटर- 2 सड़कें
    12 मीटर- 4 सड़कें
    15 मीटर- 2 सड़कें
    70 मीटर- 4 सड़कें
    75 मीटर-6 सडकें

    प्रोजेक्ट भोपाल की हरियाली के लिए खतरा
    पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। वहीं मैनिट के प्रो. डॉ. धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।

    वित्तीय एवं पर्यावरणीय मानक
    एनएचएआइ संदर्भ दरः 365 पेड़ प्रति किलोमीटर
    संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़
    निर्धारित मुआवजा दरः 1,450 रुपए प्रति पेड़
    अनुमानित कुल मुआवजा राशिः लगभग 42 करोड़ रुपए

     

  • अफगानिस्तान का बड़ा रणनीतिक कदम, वाखान कॉरिडोर से चीन तक सड़क संपर्क; बिना विदेशी मदद बनी 121 किमी सड़क

    अफगानिस्तान का बड़ा रणनीतिक कदम, वाखान कॉरिडोर से चीन तक सड़क संपर्क; बिना विदेशी मदद बनी 121 किमी सड़क

    काबुल
     अफगानिस्तान ने चीन से सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. देश ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में वाखान कॉरिडोर के जरिए 121 किलोमीटर लंबी सड़क का आधिकारिक उद्घाटन किया है. यह सड़क चीन के शिनजियांग क्षेत्र की ओर सीधा रास्ता उपलब्ध कराती है. हालांकि, फिलहाल यह सड़क बिना पक्की सतह वाली है। 

    इस सड़क का निर्माण करीब दो साल पहले शुरू हुआ था और इसे बनाने में करीब 365 मिलियन अफगानी यानी लगभग 55 लाख डॉलर की लागत आई है. अफगानिस्तान के ग्रामीण पुनर्वास और विकास मंत्री अब्दुल लतीफ मंसूर ने इसके उद्घाटन के दौरान कहा कि इस सड़क का देश के लिए रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक महत्व है। 

    चीन तक पहुंच बनाने में अहम होगा वाखान
    वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में मौजूद एक संकरी पट्टी है. यह इलाका ताजिकिस्तान और पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के बीच स्थित है. लंबे समय से इसकी भौगोलिक स्थिति को अफगानिस्तान और चीन के बीच संपर्क के लिहाज से अहम माना जाता रहा है। 

    नई सड़क के शुरू होने से इस दूरदराज इलाके में आवाजाही आसान होने की उम्मीद है. अफगान सरकार का कहना है कि उसने खास तौर पर कम विकसित प्रांतों में बुनियादी ढांचे से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी है। 

    विदेशी इंजीनियरों के बिना तैयार हुई सड़क
    अब्दुल लतीफ मंसूर ने कहा कि इस परियोजना पर अफगान इंजीनियरों ने ही काम किया और निर्माण के लिए किसी विदेशी इंजीनियर या सलाहकार की मदद नहीं ली गई. सरकार ने इसे स्थानीय तकनीकी क्षमता और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में अहम उपलब्धि बताया। 

    अफगानिस्तान के लिए वाखान कॉरिडोर सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है. सरकार इसे चीन की ओर व्यापार और संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों से जोड़कर देख रही है. वहीं पाकिस्तान भी चीन के साथ मिलकर उसके CPEC प्रोजेक्ट के तहत कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रहा है, लेकिन प्रोजेक्ट के 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है. ऐसे में अफगानिस्तान ने कमोबेश तीन साल में ही सड़क बनाकर पूरी कर ली है। 

  • 3 बार RAS पास कर रचा इतिहास! किसान की बेटी प्रियंका सिहाग बनीं SDM, 40वीं रैंक हासिल की

    3 बार RAS पास कर रचा इतिहास! किसान की बेटी प्रियंका सिहाग बनीं SDM, 40वीं रैंक हासिल की

    हनुमानगढ़ 
    सफलता किसी की मोहताज नहीं होती, और जब इरादे मजबूत हों तो गांव-देहात से निकलकर भी देश-प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षाओं को फतह किया जा सकता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की रावतसर तहसील के बरमसर गांव की रहने वाली प्रियंका सिहाग ने इस बात को साबित कर दिखाया है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाली प्रियंका ने लगातार तीन बार राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा पास की और अब अपने तीसरे प्रयास में प्रदेशभर में 40वीं रैंक हासिल कर एसडीएम (SDM) बनने का सपना पूरा किया।

    21 वर्ष की उम्र में शुरुआत और लगातार 3 बार सफलता
    प्रियंका सिहाग की यह यात्रा महज एक बार में मिली सफलता नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतरता और कड़ी मेहनत की मिसाल है।

    पहला प्रयास (RAS-2021): महज 21 वर्ष की उम्र में प्रियंका ने पहली बार परीक्षा दी और पूरे राजस्थान में 599वीं रैंक हासिल की। हालांकि, केवल 1 अंक से सेवा आवंटन रुक जाने के कारण उन्हें पद नहीं मिल सका, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

    दूसरा प्रयास (RAS-2023): प्रियंका ने अपनी गलतियों से सीख लेते हुए दूसरे प्रयास में 265वीं रैंक प्राप्त की और उनका चयन असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (ACTO – GST) के पद पर हुआ।

    तीसरा प्रयास (RAS-2024): शादी के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल राजस्थान 40वीं रैंक हासिल की। इसके बाद सितंबर 2026 में हुए सेवा आवंटन में उन्हें SDM का पद मिला।

    प्रियंका की शादी बीकानेर जिले के खाजूवाला निवासी दिलीप कुमार भांभू से हुई है, जो राजस्थान तहसील सेवा (2018 बैच) के अधिकारी हैं और वर्तमान में तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं। उनके ससुर आसाराम भांभू भी एक सरकारी शिक्षक हैं। प्रियंका ने बताया कि शादी के बाद RAS-2024 परीक्षा की तैयारी करने और अपना लक्ष्य हासिल करने में उन्हें अपने पति और ससुर का पूरा प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिला।

    पारिवारिक संघर्ष और प्रेरणा की कहानी
    प्रियंका के पिता पुरुषोत्तम सिहाग एक साधारण किसान हैं जो गांव में ही खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि मां उर्मिला देवी गृहिणी हैं। कॉलेज के दूसरे वर्ष के दौरान प्रियंका ने मोबाइल पर प्रशासनिक अधिकारियों के प्रेरणादायक वीडियो देखे थे, जिसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया।

    युवाओं के लिए प्रेरणादायक सीख
    प्रियंका सिहाग का संदेश बिल्कुल साफ है कि यदि पहली बार में मनचाही सफलता या रैंक न मिले, तो निराश होने की बजाय अपनी कमियों को सुधारना चाहिए। सही रणनीति, परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर जीवन में किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। सही दिशा में किया गया प्रयास हमेशा रंग लाता है।

  • चालू है न्यायधानी में अवैध रेत खनन का कारोबार! नदी में दिनदहाड़े चल रहे ट्रैक्टर, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

    चालू है न्यायधानी में अवैध रेत खनन का कारोबार! नदी में दिनदहाड़े चल रहे ट्रैक्टर, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

    चालू है न्यायधानी में अवैध रेत खनन का कारोबार! नदी में दिनदहाड़े चल रहे ट्रैक्टर, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

     बिलासपुर
     न्यायधानी बिलासपुर में रेत खनन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोनी क्षेत्र में नदी के किनारे बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन और परिवहन किए जाने का दृश्य सामने आया है। मौके की तस्वीर में नदी के बीच रेत के बड़े-बड़े हिस्से दिखाई दे रहे हैं और ट्रैक्टर भी रेत वाले क्षेत्र में मौजूद नजर आ रहे हैं।

     यह पूरा मामला कोनी, बिलासपुर क्षेत्र का बताया गया है। सुबह करीब 6:53 बजे की तस्वीर में नदी क्षेत्र में मशीनरी और ट्रैक्टर की मौजूदगी दिखाई दे रही है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यहां रेत का उत्खनन और परिवहन अधिकृत अनुमति के तहत हो रहा है या नियमों को दरकिनार कर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं?

     नदी का सीना खोदकर निकाली जा रही रेत? 

    मौके के दृश्य में नदी के बड़े हिस्से में रेत का फैलाव और पानी की संकरी धार दिखाई दे रही है। आसपास कई स्थानों पर खुदाई जैसे निशान भी नजर आ रहे हैं। यदि यहां बिना वैध अनुमति या निर्धारित खनन सीमा के बाहर रेत निकाली जा रही है, तो यह जांच का विषय है।

     प्रशासन की निगरानी पर सवाल
    रेत खनन को लेकर शासन द्वारा नियम और अनुमति व्यवस्था निर्धारित की गई है। इसके बावजूद यदि नदी क्षेत्र में सुबह-सुबह ट्रैक्टरों की आवाजाही और रेत उठाने का काम चल रहा है, तो संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    अब देखना होगा कि खनिज विभाग, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में मौके का निरीक्षण कर खनन की अनुमति, रॉयल्टी, खनन क्षेत्र और परिवहन दस्तावेजों की जांच करते हैं या नहीं।

     सबसे बड़ा सवाल यही है— यदि खनन वैध है तो मौके पर इसकी अनुमति और रॉयल्टी संबंधी दस्तावेज क्या हैं, और यदि अनुमति नहीं है तो नदी क्षेत्र में यह गतिविधि किसकी निगरानी में चल रही है?

  • ATF की बढ़ती कीमतों का असर, IndiGo ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज; इंटरनेशनल टिकट पर ₹10 हजार तक बढ़ेगा खर्च

    ATF की बढ़ती कीमतों का असर, IndiGo ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज; इंटरनेशनल टिकट पर ₹10 हजार तक बढ़ेगा खर्च

    मुंबई 

    हवाई सफर करने वालों के लिए टिकट महंगा हो सकता है. देश की बड़ी एयरलाइन IndiGo ने घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए फ्यूल चार्ज बढ़ाने का फैसला किया है. नए चार्ज 6 अक्टूबर 2026 की रात 12:01 बजे के बाद की जाने वाली नई बुकिंग पर लागू होंगे. यानी इस समय के बाद टिकट बुक करने वाले यात्रियों को पहले के मुकाबले ज्यादा फ्यूल चार्ज देना होगा. घरेलू उड़ानों में चार्ज यात्रा की दूरी के हिसाब से तय होगा. इसमें 100 रुपये से लेकर 350 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। 

    सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की घरेलू उड़ानों पर हुई है. वहीं, 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ान पर यात्रियों को 300 रुपये ज्यादा देने होंगे. अगर एक परिवार में चार लोग सफर कर रहे हैं, तो दूरी के हिसाब से उन्हें एक तरफ की यात्रा पर अधिकतम 1,200 रुपये तक अतिरिक्त फ्यूल चार्ज देना पड़ सकता है. हालांकि, यह बढ़ोतरी टिकट के बेस किराए से अलग होगी। 

    दूरी के हिसाब से लगेगा नया फ्यूल चार्ज
    IndiGo ने घरेलू उड़ानों को अलग-अलग दूरी की कैटेगरी में बांटा है. जितनी लंबी उड़ान होगी, फ्यूल चार्ज उतना ही ज्यादा होगा. 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ान पर अब ₹900 फ्यूल चार्ज लगेगा. वहीं, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करने वाले यात्रियों से ₹1,300 लिया जाएगा। 

    उड़ान की दूरी नया फ्यूल चार्ज
    0–500 किमी ₹375
    501–1,000 किमी ₹600
    1,001–1,500 किमी ₹900
    1,501–2,000 किमी ₹1,150
    2,000 किमी से ज्यादा ₹1,300

    100 से 350 रुपये तक बढ़ा चार्ज 

    नई दरों के मुताबिक घरेलू उड़ानों पर फ्यूल चार्ज में ₹100 से ₹350 तक की बढ़ोतरी हुई है. 1,001-1,500 किलोमीटर की उड़ान के लिए चार्ज ₹300 बढ़ा है. वहीं, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ान पर ₹350 की बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर परिवार के बजट पर पड़ सकता है. उदाहरण के लिए, अगर चार लोग ऐसी उड़ान लेते हैं जिसमें प्रति यात्री ₹350 की बढ़ोतरी हुई है, तो एक तरफ की यात्रा में परिवार को ₹1,400 ज्यादा देने होंगे. आने-जाने की यात्रा में यह अतिरिक्त खर्च ₹2,800 तक हो सकता है.

    इंटरनेशनल फ्लाइट पर भी बढ़ा फ्यूल चार्ज

    IndiGo ने इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए भी फ्यूल चार्ज में बदलाव किया है. अलग-अलग क्षेत्रों के लिए चार्ज अलग रखा गया है. SAARC  सेक्टर की उड़ानों पर चार्ज ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 किया गया है. यूरोप जाने वाली उड़ानों के लिए फ्यूल चार्ज ₹10,000 रखा गया है.

    क्षेत्र फ्यूल चार्ज
    SAARC ₹3,000
    दक्षिण-पूर्व एशिया ₹5,500
    GCC और मिडिल ईस्ट ₹5,500
    उत्तर और पूर्वी एशिया ₹5,500
    अफ्रीका ₹6,000
    यूरोप ₹10,000

    ATF महंगा होने से बढ़ा खर्च 

    IndiGo के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है. एयरलाइन के लिए ईंधन एक बड़ा खर्च होता है. जब ATF महंगा होता है, तो उड़ानों के संचालन की लागत भी बढ़ जाती है. एयरलाइन का कहना है कि बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई करने के लिए फ्यूल चार्ज में इससे ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ सकती थी. लेकिन यात्रियों पर बोझ कम रखने के लिए चार्ज में सीमित बढ़ोतरी की गई है.

  • OpenAI में बढ़ी चिंता! डेविड रॉबिन्सन का इस्तीफा, बोले- AI हो रहा पावरफुल लेकिन सेफ्टी सिस्टम पीछे

    OpenAI में बढ़ी चिंता! डेविड रॉबिन्सन का इस्तीफा, बोले- AI हो रहा पावरफुल लेकिन सेफ्टी सिस्टम पीछे

    न्यूयॉर्क

    OpenAI में एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. कंपनी के लंबे समय तक काम करने वाले सेफ्टी  लीडर डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा दे दिया है. कंपनी छोड़ने के बाद रॉबिन्सन ने OpenAI की काम करने की कल्चर और एआई को आगे बढ़ाने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 

    उन्होंने कहा कि AI इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है. रॉबिन्सन के मुताबिक, मौजूदा तरीके से एआई को डेवलप करना अब सही नहीं है। 

    OpenAI की ट्रायल एंड एरर अप्रोच पर उठे बड़े सवाल
    डेविड रॉबिन्सन ने अपने एक लेख में बताया कि एआई कंपनियां अक्सर पहले सिस्टम को डेवलप और डिप्लॉय करती हैं और जब कोई दिक्कत सामने आती है, तब सेफ्टी सिस्टम को बेहतर किया जाता है। 

    ओपनएआई इस तरीके को इटरेटिव डिप्लॉयमेंट कहता है. रॉबिन्सन का कहना है कि यह तरीका AI के लिए काफी बड़ा रिस्क बन सकता है. जैसे-जैसे एआई मॉडल ज्यादा पावरफुल होते जाएंगे, वैसे-वैसे किसी गलती का असर भी बड़ा हो सकता है। 

    उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ी गलती हो गई तो हर बार उसे बाद में ठीक करने का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए एआई कंपनियों को पहले से ज्यादा मजबूत सेफ्टी सिस्टम बनाने होंगे। 

    AI Agents की घटनाओं का भी किया जिक्र
    रॉबिन्सन ने अपने लेख में एआई एजेंट से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि एक घटना में ओपनएआई से गलती से AI Agents का एक स्वॉर्म रिलीज हो गया था। 

    उन्होंने एक और मामले का जिक्र किया, जिसमें ट्रेनिंग के दौरान एक एआई मॉडल ने इंटरनेट एक्सेस से जुड़ी पाबंदियों को पार कर लिया. सिस्टम ने इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे अपने आप बंद नहीं किया जा सका, जबकि ऐसा होना चाहिए था. रॉबिन्सन के मुताबिक, इस तरह की गलतियां सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं. AI इंडस्ट्री में तेजी से काम करने की वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। 

    अब Trial and Error का समय खत्म
    रॉबिन्सन ने कहा कि AI की बढ़ती कैपिसिटी को देखते हुए अब 'Trial and Error' के भरोसे आगे बढ़ना ठीक नहीं है. उनका मानना है कि भविष्य में एआई सिस्टम इंसानों से भी ज्यादा सक्षम हो सकते हैं. ऐसे में किसी बड़ी गलती को बाद में ठीक करना मुश्किल हो सकता है। 

    उन्होंने AI कंपनियों को एविएशन और नुक्लेअर पावर  जैसे हाई-रिस्क सेक्टर से सेफ्टी के तरीके सीखने की सलाह दी है. उनके मुताबिक, एआई सिस्टम में भी कई लेयर की सेफ्टी और बैकअप सिस्टम होने चाहिए, ताकि एक छोटी गलती बड़ी समस्या में न बदल जाए। 

    AI से नहीं, उसके गलत इस्तेमाल से चिंता
    रॉबिन्सन ने यह भी साफ किया कि वह एआई को पूरी तरह खराब नहीं मानते. उनके मुताबिक, AI लोगों के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद हो सकता है. लेकिन इसकी कैपिसिटी बढ़ने के साथ सेफ्टी भी उसी हिसाब से मजबूत होनी चाहिए।

    OpenAI से इस्तीफा देने के बाद अब रॉबिन्सन बाहर से AI सेफ्टी को लेकर काम करना चाहते हैं. उनका कहना है कि कंपनियों पर बाहर से भी दबाव होना जरूरी है, ताकि एआई को ज्यादा सुरक्षित तरीके से डेवलप किया जा सके। 

    यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब AI सेफ्टी को लेकर पूरी इंडस्ट्री में बहस तेज हो रही है. रॉबिन्सन का कहना है कि एआई को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।