Author: NewseDay

  • कैसा होगा कलयुग का अंत? धर्मग्रंथों में बताए गए हैं ये संकेत और भविष्यवाणियां

    कैसा होगा कलयुग का अंत? धर्मग्रंथों में बताए गए हैं ये संकेत और भविष्यवाणियां

     कल्पना कीजिए उस समय की, जब दुनिया में धर्म का नाम लेने वाला कोई नहीं होगा. जब इंसानों की उम्र लगातार घटती जाएगी और आखिर में मनुष्य की औसत आयु महज 20 साल रह जाएगी. जब छोटी उम्र में ही बाल सफेद होने लगेंगे और इंसान का जीवन पाप, लालच और अधर्म से घिर जाएगा.

    धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में कलयुग के अंतिम चरण को लेकर कई तरह के वर्णन मिलते हैं. इन वर्णनों के अनुसार, जैसे-जैसे कलयुग अपने चरम पर पहुंचेगा, वैसे-वैसे धर्म, सत्य, दया, पवित्रता, क्षमा और मनुष्य की आयु में कमी आती जाएगी.

    लेकिन सवाल है कि आखिर कलयुग का अंत कैसा होगा? क्या समुद्र और नदियां सूख जाएंगी? और सबसे बड़ा सवाल, इस घोर अधर्म के बीच भगवान विष्णु का कल्कि अवतार कैसे होगा? आइए जानते हैं पुराणों में बताए गए कलयुग के अंतिम समय की उस कथा के बारे में.

    जब 20 साल की उम्र ही बन जाएगी बुढ़ापे की निशानी
    धार्मिक ग्रंथों में कलयुग के अंतिम चरण को बेहद भयावह बताया गया है. मान्यता है कि इस दौर में मनुष्य की आयु लगातार कम होती जाएगी. आज जहां 20 साल की उम्र को युवावस्था की शुरुआत माना जाता है, वहीं कलयुग के अंतिम चरण में यही उम्र जीवन के अंतिम पड़ाव के करीब मानी जाएगी.

    कहा गया है कि इंसानों के शरीर में भी समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगेंगे. कम उम्र में ही बाल सफेद होने लगेंगे और शारीरिक शक्ति तेजी से घटने लगेगी. यानी जिस उम्र में आज के युवा अपना करियर और भविष्य बनाने के बारे में सोचते हैं, उस समय इंसान अपने जीवन के अंत के करीब पहुंच चुका होगा.

    रिश्ते और परिवार भी कमजोर पड़ जाएंगे
    कलयुग के अंतिम समय को लेकर शास्त्रों में सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के पतन का भी वर्णन मिलता है. धर्म, सत्य, पवित्रता, दया, क्षमा और संयम जैसी चीजें धीरे-धीरे समाप्त होती जाएंगी. पति-पत्नी के रिश्तों में भी विश्वास और सम्मान कम होता जाएगा.

    लोग स्वार्थ और अपनी इच्छाओं को रिश्तों से ऊपर रखने लगेंगे. परिवार की जगह धन और व्यक्तिगत लाभ को ज्यादा महत्व दिया जाएगा. धार्मिक वर्णनों में तो यहां तक कहा गया है कि उस समय अच्छे चरित्र की पहचान भी व्यक्ति के आचरण से नहीं, बल्कि उसके पास मौजूद धन से की जाएगी.

    जिसके पास धन होगा, वही सम्मानित माना जाएगा
    कलयुग के अंतिम चरण में धन ही प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा आधार बन जाएगा. जिस व्यक्ति के पास जितना ज्यादा धन होगा, समाज उसे उतना ही प्रभावशाली और गुणवान समझेगा. उसके परिवार और कुल की प्रतिष्ठा भी धन के आधार पर तय की जाएगी.  वहीं गरीब व्यक्ति को अपमानित और अयोग्य समझा जाएगा.

    धन के लिए लोग अपने ही रिश्तेदारों और मित्रों के खिलाफ खड़े हो जाएंगे. लालच इतना बढ़ जाएगा कि इंसान अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेगा.

    धर्म की जगह अधर्म का बोलबाला होगा
    कलयुग के अंतिम समय में धर्म का पालन करने वाले लोगों की संख्या बेहद कम रह जाने की बात कही गई है. लोग धार्मिक ग्रंथों और वेदों की बातें तो करेंगे, लेकिन उनके जीवन में उनका पालन दिखाई नहीं देगा.

    कुछ धार्मिक गुरु भी अपने स्वार्थ के लिए लोगों का इस्तेमाल करेंगे. वे ज्ञान की बातें करेंगे, लेकिन उनके आचरण में धर्म और सदाचार की कमी होगी. वहीं चालाक, लोभी और स्वार्थी व्यक्ति को ही बुद्धिमान और सफल माना जाएगा. धरती पर अन्न उगना भी मुश्किल हो जाएगा.

    पुराणों में कलयुग के अंतिम चरण में प्राकृतिक असंतुलन का भी वर्णन मिलता है. मान्यता है कि धरती की उर्वरता कम होती जाएगी और अन्न का उत्पादन प्रभावित होगा. बारिश अनियमित हो जाएगी और मौसम का संतुलन बिगड़ जाएगा. कहीं भयंकर गर्मी होगी तो कहीं कड़ाके की ठंड. आंधी, बाढ़ और दूसरे प्राकृतिक संकट बढ़ सकते हैं. कुछ धार्मिक वर्णनों में तो यह भी कहा गया है कि सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि नदियां और समुद्र तक सूखने लगेंगे.

    जब तीर्थों की जगह छोटे तालाबों को महत्व मिलेगा
    कलयुग के अंत से जुड़े धार्मिक वर्णनों में यह भी कहा गया है कि लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं में इतना बदलाव आ जाएगा कि पवित्र तीर्थों के महत्व को भी लोग भूलने लगेंगे. लोग दूर स्थित पवित्र नदियों और तीर्थस्थलों की जगह अपने आसपास मौजूद छोटे जलस्रोतों को ही तीर्थ मानने लगेंगे.

    यह वर्णन सिर्फ भौगोलिक बदलाव की बात नहीं करता, बल्कि उस समय मनुष्य की सोच और धार्मिक मूल्यों में आने वाले बदलाव की ओर भी संकेत करता है.

    कलयुग का सबसे बड़ा प्रतीक होगा कली पुरुष
    धार्मिक मान्यताओं में कली पुरुष को कलयुग के अधर्म और बुराइयों का प्रतीक माना गया है. जैसे-जैसे अधर्म बढ़ेगा, कली की शक्ति भी बढ़ती जाएगी. उसका प्रभाव मनुष्यों की सोच और व्यवहार पर पड़ने लगेगा. लोग धीरे-धीरे लोभ, क्रोध, हिंसा, छल और स्वार्थ के रास्ते पर जाने लगेंगे.

    कहा जाता है कि कली पुरुष को सबसे ज्यादा शक्ति अधर्म से ही मिलेगी. जितना अधर्म बढ़ेगा, उतना ही उसका प्रभाव भी बढ़ता जाएगा.

    फिर होगा भगवान कल्कि का अवतार
    लेकिन सनातन परंपरा में एक बात हमेशा कही गई है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए ईश्वर अवतार लेते हैं. कलयुग के अंत में भगवान विष्णु के दसवें अवतार भगवान कल्कि के अवतार की मान्यता है.

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा और धर्म लगभग समाप्त हो जाएगा, तब भगवान कल्कि अवतार लेकर अधर्म का नाश करेंगे और धर्म की दोबारा स्थापना करेंगे.

    मान्यता है कि भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर प्रकट होंगे. उनके घोड़े का नाम देवदत्त बताया जाता है. वे हाथ में तलवार धारण करके अधर्म और अत्याचार का अंत करेंगे.

    भगवान कल्कि के गुरु होंगे परशुराम
    भगवान कल्कि से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भगवान परशुराम का भी विशेष स्थान बताया गया है. परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है और वे चिरंजीवी माने गए हैं. मान्यता है कि भगवान परशुराम ही भगवान कल्कि को युद्ध और धर्म का ज्ञान देंगे. धार्मिक प

    रंपराओं में यह भी कहा जाता है कि परशुराम आज भी महेंद्र पर्वत पर तपस्या कर रहे हैं और कल्कि अवतार की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

    कल्कि अवतार का साथ देंगे चिरंजीवी
    कल्कि अवतार से जुड़ी कथाओं में कई चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है.
    इनमें भगवान परशुराम, महर्षि वेदव्यास और अश्वत्थामा जैसे नाम शामिल हैं. हनुमान जी को भी चिरंजीवी माना गया है और धार्मिक मान्यता है कि वे कलयुग के अंत तक पृथ्वी पर मौजूद रहेंगे. मान्यता है कि भगवान कल्कि के अवतार के समय ये दिव्य शक्तियां धर्म की स्थापना में उनका साथ देंगी.

    कलयुग के अंत में क्या होगा?
    कलयुग के अंत को लेकर धार्मिक ग्रंथों में महाप्रलय जैसे विनाशकारी घटनाक्रम का वर्णन मिलता है. एक मान्यता के अनुसार, धरती पर लंबे समय तक मूसलाधार बारिश होगी और पूरा संसार जलमग्न हो जाएगा.

    इसके बाद सूर्य का प्रचंड रूप दिखाई देगा. कुछ धार्मिक वर्णनों में एक साथ कई सूर्यों के प्रकट होने की कल्पना की गई है, जिनकी तीव्र गर्मी से पृथ्वी का जल सूख जाएगा. यह वर्णन धार्मिक और प्रतीकात्मक परंपराओं का हिस्सा है, जिसे आधुनिक विज्ञान के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. इसके बाद अधर्म का अंत होगा और एक नए युग यानी सतयुग की शुरुआत मानी जाती है.

    क्या कलयुग सबसे बुरा युग है?
    कलयुग को भले ही अधर्म और पतन का युग कहा गया हो, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में इसकी एक खास विशेषता भी बताई गई है. मान्यता है कि कलयुग में ईश्वर की भक्ति और नाम-स्मरण से आध्यात्मिक फल प्राप्त करना दूसरे युगों की तुलना में आसान है. यानी सतयुग में जिस पुण्य के लिए लंबे समय तक तपस्या करनी पड़ती थी, त्रेता और द्वापर में भी जिसके लिए लंबे समय तक साधना करनी पड़ती थी, वहीं कलयुग में सच्ची श्रद्धा और भक्ति से कम समय में ही आध्यात्मिक फल की प्राप्ति हो सकती है.

    इसी वजह से कलयुग को सिर्फ पाप और अधर्म का युग ही नहीं, बल्कि भक्ति के लिए विशेष अवसर वाला युग भी माना गया है.

    कलयुग में गणेश जी का भी होगा अवतार?
    कलयुग के अंत से जुड़ी कुछ धार्मिक कथाओं में भगवान गणेश के एक विशेष रूप का भी वर्णन मिलता है. गणेश पुराण की कथाओं में भगवान गणेश के धूम्रवर्ण स्वरूप का उल्लेख किया जाता है. कुछ परंपराओं के अनुसार, कलयुग के अंत में वे अधर्म और असुर शक्तियों का विनाश करने के लिए विशेष रूप धारण करेंगे.

    इस रूप को धूम्रवर्ण या धूम्रकेतु नाम से जोड़ा जाता है. कथाओं में अभिमानासुर जैसे असुर का भी उल्लेख मिलता है, जिसका अंत भगवान गणेश करेंगे. हालांकि यहां भी अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में कथा और विवरण अलग-अलग मिलते हैं.

    अंत में होगी धर्म की पुनर्स्थापना
    कलयुग की यह पूरी कथा एक बात पर आकर खत्म होती है – जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंचता है, तब धर्म की पुनर्स्थापना होती है. भगवान कल्कि के अवतार की मान्यता इसी विचार से जुड़ी है.

    कहा जाता है कि भगवान कल्कि कली के प्रभाव और अधर्म का अंत करेंगे. पापियों का विनाश होगा, धर्म की दोबारा स्थापना होगी और इसके बाद एक नए युग यानी सतयुग का आरंभ होगा. हालांकि पुराणों में कलयुग के अंत और कल्कि अवतार को लेकर अलग-अलग ग्रंथों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं. इसलिए इन कथाओं को धार्मिक मान्यताओं और पुराणिक वर्णनों के रूप में समझना चाहिए.

    फिलहाल मान्यता यही है कि कलयुग का अभी लंबा समय बाकी है. इसलिए भगवान कल्कि के अवतार को निकट भविष्य की घटना नहीं माना जाता है.लेकिन इस पूरी कथा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि मनुष्य को अपने जीवन में धर्म, सत्य, दया, संयम और सदाचार को बनाए रखना चाहिए. क्योंकि चाहे युग कोई भी हो, अंत में विजय हमेशा धर्म की ही होती है.

  • हरियाणा में ‘समृद्धि’ योजना शुरू, इमरजेंसी में गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट अस्पताल में भी मिलेगा इलाज

    हरियाणा में ‘समृद्धि’ योजना शुरू, इमरजेंसी में गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट अस्पताल में भी मिलेगा इलाज

    चंडीगढ़.

    प्रदेश में अब गर्भवती महिलाएं आपात स्थिति में निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराई जा सकेंगी। गंभीर परिस्थितियों में समय बचाने प्रत्येक महिला को उसकी जोखिम श्रेणी के अनुसार उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधा केंद्र से टैग किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी के अनुरोध पर निजी स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हो सकते हैं।

    इससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से होने वाले अनावश्यक बहुस्तरीय रेफरल रुकेंगे और आपात स्थिति में सही स्तर की देखभाल तुरंत मिल सकेगी। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने मातृ मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर कम करने के लिए सोमवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा प्रस्तावित "समृद्धि" (सुरक्षित मातृत्व और बाल स्वास्थ्य पहल) योजना का शुभारंभ करते यह जानकारी साझा की।

  • सेवा संकल्प अभियान के तहत रायपुर में रोजगार मेला, 7-8 अक्टूबर को जुटेंगी रोजगार की संभावनाएं

    सेवा संकल्प अभियान के तहत रायपुर में रोजगार मेला, 7-8 अक्टूबर को जुटेंगी रोजगार की संभावनाएं

    • युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने रायपुर में होगा दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन
    • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे अध्यक्षता
    • सेवा संकल्प अभियान के तहत राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7-8 अक्टूबर को रायपुर में

    रायपुर
    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रोजगार विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को रायपुर में राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में आयोजित इस दो दिवसीय रोजगार मेले के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे।

             राज्य स्तरीय रोजगार मेले का मुख्य कार्यक्रम 8 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे प्रारम्भ होगा। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप, गुरु खुशवंत साहेब, राम विचार नेताम, दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, श्याम बिहारी जायसवाल, ओ.पी. चौधरी, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, राजेश अग्रवाल एवं गजेन्द्र यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

             कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, राजेश मूणत, अनुज शर्मा, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू एवं इंद्र कुमार साहू तथा नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे और जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

               राज्य स्तरीय रोजगार मेले के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। रोजगार मेले में युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों एवं प्रतिष्ठानों में उपलब्ध रोजगार अवसरों की जानकारी मिलने के साथ ही उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप नियोजन का अवसर प्राप्त होगा। रोजगार विभाग द्वारा युवाओं से राज्य स्तरीय रोजगार मेले में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की गई है।

  • किसानों के प्रदर्शन से बठिंडा-मानसा में कामकाज प्रभावित, जिला प्रबंधकीय परिसरों के गेट किए बंद

    किसानों के प्रदर्शन से बठिंडा-मानसा में कामकाज प्रभावित, जिला प्रबंधकीय परिसरों के गेट किए बंद

     बठिंडा
     पंजाब के विभिन्न जिलों में मांगों को लेकर किसानों की ओर से जिला प्रबंधकीय परिसर के सभी गेटों का बंद कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।किसान सोमवार से यहां धरना-प्रदर्शन करने में जुटे हैं। इस दौरान किसी भी कर्मचारी को अंदर जाने नहीं दिया गया। इस कारण जिला प्रबंधकिय परिसर में बने सभी सरकारी दफ्तरों में काम बंद पड़ा है।

    मानसा में भी दिखा असर
    वहीं, मानसा में भी किसान जिला प्रबंधकीय परिसर के गेट पर लगा रहे हैं। इस बीच किसान संगठन उगराहा की ओर से मंगलवार सुबह प्रबंधन के परिसर को जाने वाले दोनों गेट को बंद करते धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रशासन की ओर से किसानों के प्रदर्शन को देखते धरना स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

    इस दौरान किसी भी अधिकारी और कर्मचारियों को प्रबंधन के परिसर के अंदर और बाहर जाने की अनुमति नहीं है। नतीजन डीसी, एसएसपी समेत अन्य विभागों के अधिकारी अपने दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं।

    बेशक सोमवार को जिले में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी को लेकर पूरा प्रशासन गांव फत्ता मालोका में व्यस्त होने के कारण बड़े अधिकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन किसानों ने मंगलवार सुबह ही प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स के बाहरी गेट से आगे बढ़ते परिसर के अंदर जाने वाले दोनों दरवाजों को बंद करते सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई।

    किसान नेता राम सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री गांव की चौपाल में लोगों की समस्या हल करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन किसानी मांगों को लेकर पिछले महीने डीसी दफ्तरों के आगे दिन रात का धरना देने के बाद भी सरकार उनकी मांगे मानने को मंजूर नहीं है। किसान नेता ने कहा कि संगठन की प्रदेश कमेटी नेताओं कि फैसले अनुसार प्रबंधकीय कांप्लेक्स का। घेराव जारी रहेगा।

    प्रदर्शन में ही लंगर का प्रबंध
    प्रबंधकीय कांप्लेक्स में धरने पर बैठे किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसान लंगर खाने के लिए इधर-उधर में जा सके।

     

  • छत्तीसगढ़ में BJP का सहयोग केंद्र फिर सक्रिय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज सुनेंगे शिकायतें

    छत्तीसगढ़ में BJP का सहयोग केंद्र फिर सक्रिय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज सुनेंगे शिकायतें

    रायपुर.

    भारतीय जनता पार्टी का सहयोग केंद्र आज सोमवार से एक बार फिर सक्रिय हो रहा है। राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मंत्री पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब आज सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, 8 अक्टूबर को पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा 9 अक्टूबर को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व अगस्त माह में भाजपा के सहयोग केंद्र का संचालन नौ दिनों तक किया गया था। अब इसे पुनः शुरू किया जा रहा है, ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब आज सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान वे भाजपा कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे और उनकी ओर से सामने रखी जाने वाली समस्याओं, मांगों एवं सुझावों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहयोग केंद्र में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। 8 अक्टूबर को पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा 9 अक्टूबर को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने के लिए सहयोग केंद्र में मौजूद रहेंगे। अलग-अलग विभागों से संबंधित मामलों को संबंधित मंत्रियों के समक्ष रखने की व्यवस्था से कार्यकर्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी माध्यम उपलब्ध होगा।

    भाजपा के सहयोग केंद्र की यह पहल पार्टी संगठन और सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक मामलों और विभागीय कार्यों से संबंधित विषयों को मंत्रियों के समक्ष रख सकेंगे। इसके बाद आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों के अधिकारियों से समन्वय कर मामलों के निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अगस्त माह में भाजपा के सहयोग केंद्र का संचालन लगातार नौ दिनों तक किया गया था।

    उस दौरान भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी समस्याएं और मांगें मंत्रियों के सामने रखी थीं। अब एक बार फिर सहयोग केंद्र को शुरू किया जा रहा है। पार्टी का प्रयास है कि कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुना जाए और संबंधित विभागों के सहयोग से उनके निराकरण की प्रक्रिया को तेज किया जाए। सहयोग केंद्र के दोबारा सक्रिय होने से कार्यकर्ताओं को सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक सीधा और व्यवस्थित मंच मिलेगा।

  • CM मान ने बंदी सिंहों की रिहाई का दिया भरोसा, बोले- ‘हर हाल में मिलेगा न्याय’, कानून का रास्ता अपनाएंगे

    CM मान ने बंदी सिंहों की रिहाई का दिया भरोसा, बोले- ‘हर हाल में मिलेगा न्याय’, कानून का रास्ता अपनाएंगे

     चंडीगढ़
     बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को लेकर गठित चार सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की। कमेटी में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल हैं। मुलाकात के दौरान कमेटी के सदस्यों ने बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपने विचार और मांगें रखीं।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने कमेटी के सदस्यों की बात और उनकी अपील को गंभीरता से सुना है। उन्होंने कमेटी को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार बंदी सिखों की रिहाई के मामले का जल्द से जल्द उचित और कानूनी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

    'जो काम पिछली सरकारों ने नहीं किया, हम करेंगे' बंदी सिंहों की रिहाई पर CM भगवंत मान ने दिलाया न्याय का भरोसा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर गठित चार सदस्यीय कमेटी से मुलाकात की। उन्होंने कमेटीपंजाब सरकार कानूनी समाधान हेतु प्रतिबद्ध, जल्द कार्रवाई का भरोसादी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को लेकर गठित चार सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की। कमेटी में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल हैं। मुलाकात के दौरान कमेटी के सदस्यों ने बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपने विचार और मांगें रखीं। 

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने कमेटी के सदस्यों की बात और उनकी अपील को गंभीरता से सुना है। उन्होंने कमेटी को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार बंदी सिखों की रिहाई के मामले का जल्द से जल्द उचित और कानूनी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जायज और कानूनी कदमों को पिछली सरकारों की ओर से कई वर्षों से नहीं उठाया गया, उन्हें उनकी सरकार प्राथमिकता के आधार पर उठाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि इस मामले को आगे बढ़ाकर जल्द समाधान तक पहुंचाया जा सके।मान ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ खड़ी रही है और बंदी सिखों के मामले में भी सरकार कानून के दायरे में रहते हुए जरूरी कदम उठाएगी।

     उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और कमेटी के साथ हुई बातचीत को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कमेटी की ओर से बंदी सिखों की रिहाई के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक को इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    जो पुरानी सरकार ने नहीं किया वो हम करेंगे
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जायज और कानूनी कदमों को पिछली सरकारों की ओर से कई वर्षों से नहीं उठाया गया, उन्हें उनकी सरकार प्राथमिकता के आधार पर उठाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि इस मामले को आगे बढ़ाकर जल्द समाधान तक पहुंचाया जा सके।

    दिलाया न्याय का भरोसा
    मान ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ खड़ी रही है और बंदी सिखों के मामले में भी सरकार कानून के दायरे में रहते हुए जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

    इस बैठक को माना जा रहा अहम
    मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और कमेटी के साथ हुई बातचीत को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कमेटी की ओर से बंदी सिखों की रिहाई के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक को इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • Aadhaar Name Update: नाम में बदलाव के लिए जरूरी होंगे ये डॉक्यूमेंट, जानें नया नियम

    Aadhaar Name Update: नाम में बदलाव के लिए जरूरी होंगे ये डॉक्यूमेंट, जानें नया नियम

    आधार कार्ड के नए नियमों ने पुराने नियमों की जगह ले ली है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड पर नाम बदलवाने, अपडेट कराने के नियमों में बदलाव कर दिया है.

    18 सितंबर 2026 को जारी किए नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) ने पुराने नियमों की जगह ले ली है. नए नियमों के तहत नाम में किए जाने वाले बदलावों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है.

    इंडियाटुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मामूली सुधार, डेटा एंट्री ऑपरेटर की गलती, शादी या तलाक के बाद सरनेम में बदलाव और पुराना नाम बदलाने के लिए अलग-अलग दस्तावेजों की जरूरत होगी.

    UIDAI की तरफ से क्लियर किया जा चुका है कि नाम अपडेट कराने के लिए दिए जाने वाले डॉक्यूमेंट, एफिडेविट और गजट नोटिफिकेशन्स की जांच के बाद ही आवेदन पर आगे काम किया जाएगा.

    आधार कार्ड होल्डर्स को नए नियमों की 5 अहम बातों को जानना जरूरी है. आइए इसके बारे में एक-एक करके जानते हैं.

    मामूली सुधार
    शख्स की पहचान में अगर कोई बदलाव नहीं हो रहा है और केवल नाम में छोटा सुधार करना है. ऐसे में इसको Minor Name Change माना गया है, जिसके तहत इन कामों को रखा गया है.

        नाम के शुरुआती अक्षरों को पूरा करना
        मिडिल नेम या सरनेम जोड़ना या हटाना
        नाम के क्रम में बदलाव करना
        स्पेलिंग सुधार, जिसमें उच्चारण लगभग समान है

    इस तरह के मामलों में आधार कार्ड होल्डर्स को प्रूफ ऑफ आइडेंटी (PoI) जमा करना जरूरी होगा. साथ ही 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Head of Family (HoF) बेस्ड नाम अपडेट के मामलों में Proof of Relationship (PoR) का भी इस्तेमाल किया जाएगा.

    UIDAI ने इस स्थिति को साफ करते हुए बताया है कि Ram को Rama, Somya को Saumya करने या फिर मिडिल नाम को शामिल करने जैसे कामों को मामूली सुधार में शामिल किया गया है.

    डेटा एंट्री की एक गलती के लिए लगेगा एफिडेविट
    अगर आधार कार्ड बनवाते समय डेटा एंट्री ऑपरेटर की गलती के कारण नाम गलत एंटर हो चुका है तो उसका प्रोसेस थोड़ा सा अलग है. 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों को Annexure B एफिडेविट के साथ साथ PoI या फिर PoR सब्मिट करना होगा. वहीं अगर आवेदक नाबालिक है तो माता-पिता या अभिभावक को Annexure C एफिडेविट के साथ PoI या PoR को सब्मिट करना होगा.

    शादी और तलाक के बाद सरनेम बदलने के नियम
    शादी या तलाक के बाद अगर सरनेम बदलने वाली महिलाओं को Annexure D एफिडेविट और प्रूफ ऑफ आइडेंटी (POI) जमा करना होगा. एफिडेविट में यह कंफर्म किया जाएगा कि सरनेम में बदलाव शादी या तलाब के कारण किया जा रहा है. इससे शख्स की पहचान में कोई बदलाव नहीं हो रहा है.

    वहीं, जेंडर में बदलाव के बाद नाम अपडेट करने के लिए SOP में अलग प्रावधान किए हैं. इसके लिए संबंधित PoI देना होगा.

    नाम में इन सुधारों के लिए नहीं लगेगा कोई डॉक्यूमेंट
    प्राधिकरण ने कुछ ऐसे मामलों की भी जानकार दी है, जहां पर नाम सुधार या अपडेट करने के लिए किसी डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं है. इसमें नाम में गलत तरीके से लगाए गए कैपिटल लेटर्स को ठीक करन शामिल है. जैसे RaMesh को Ramesh करना.

    नाम बदलने के लिए Gazette नोटिफिकेशन जरूर
    प्राधिकरण ने बताया है कि अगर कोई शख्स अपना पूरा नाम बदलना चाहता है, जिससे उसकी पहचान बदल सकती है. इसको मेजर नाम चेंज की कैटेगरी में रखा गया है.

    नाम में बदलाव करने के लिए Gazette नोटिफिकेशन्स जरूरी है. साथ ही संबंधित Proof of Indentity भी जमा करना होगा.

  • लौदाबाजार में मंत्री टंक राम वर्मा ने उठाई झाड़ू, बोले- ‘स्वच्छता आदत है, जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी’

    लौदाबाजार में मंत्री टंक राम वर्मा ने उठाई झाड़ू, बोले- ‘स्वच्छता आदत है, जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी’

    सेवा संकल्प अभियान

    स्वच्छता एक आदत है जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी – मंत्री टंक राम वर्मा

     बलौदाबाजार में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने हाथों में उठाई झाड़ू

    षष्ठी मंदिर परिसर में चला विशेष स्वच्छता अभियान

    ​रायपुर

           प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के ऐतिहासिक 25 वर्ष पूर्ण होने के सुअवसर पर जारी 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत जिले भर में विविध जनसेवा कार्यक्रमों की धूम है। इसी कड़ी में 'सेवा मेरा योगदान' कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की अगुवाई में बलौदाबाजार स्थित ऐतिहासिक षष्ठी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।
         ​अभियान के दौरान राजस्व मंत्री वर्मा, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों ने स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर सड़कों पर बिखरे कचरे को साफ किया और उसे डस्टबिन में एकत्रित किया।     
           मंत्री वर्मा के इस प्रतीकात्मक पहल ने आमजनों को स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने का एक सशक्त संदेश दिया।
    ​स्वच्छता एक आदत है जो धीरे-धीरे संस्कार बनती है।   
     
          राजस्व मंत्री वर्मा ने ​उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 सफल वर्षों के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 'सेवा संकल्प अभियान' चलाया जा रहा है। स्वच्छता केवल एक दिवस का कार्य नहीं, बल्कि एक आदत है जो धीरे-धीरे हमारे व्यवहार का हिस्सा बनती है। हर्ष का विषय है कि आज इस अभियान के माध्यम से जन-जन में स्वच्छता के प्रति अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिल रही है।
            ​स्वच्छता के इस महाअभियान में कलेक्टर , भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य उपाध्यक्ष, नगर पालिका उपाध्यक्ष सहित विभिन्न वार्डों के पार्षदगण एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होकर अपना श्रमदान दिया।

  • मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका, 10 अप्रैल तक करें आवेदन; SIR पर CM मोहन यादव ने किया अलर्ट

    मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका, 10 अप्रैल तक करें आवेदन; SIR पर CM मोहन यादव ने किया अलर्ट

     भोपाल 
    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। फार्म छह, घोषणा सहित पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित है। सही जानकारी के लिए केवल निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया पर ही विश्वास करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मतदाता सूची को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम की स्थिति को लेकर एक्स पर पोस्ट कर यह बात कही। साथ ही 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवाओं से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की अपील की।

    निर्धारित प्रक्रिया पर विश्वास करें
    सीएम   मोहन यादव ने कहा कि एसआईआर को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। फॉर्म 6 और डिक्लेयेरशन सहित पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित है। सही जानकारी के लिए सिर्फ निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया पर ही विश्वास करें। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेरा आग्रह है कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवा अपना नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज कराएं और प्रत्येक नागरिक अपने नाम की भी पुष्टि करे। आइए, अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें।

    विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगा रहे आरोप 
    बता दें मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विपक्षी पार्टियां विरोध कर रहा हैं। इसको लेकर सीजेपी और कांग्रेस पार्टी के नेताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के सदस्यों वाली एक संवैधानिक संस्था को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कानून के तहत जरूरी सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा हैं। इनके द्वारा एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देकर आरोप लगाया जा रहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 माह के करीब 14 बार मतदात सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई, जिस पर कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा हैं।  

    लोकतंत्र की मजबूती के लिए अद्यतन सूची जरूरी
    उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह बेहद जरूरी है कि मतदाता सूची भी अद्यतन, पारदर्शी और विश्वसनीय हो। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है। प्रत्येक नागरिक मतदाता सूची में अपने नाम की पुष्टि करें। आइए, हम अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें।

    10 अप्रैल तक चलाया जा रहा है विशेष अभियान
    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 10 अप्रैल तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। एक अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वालों के साथ जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गए, उनके नाम जोड़ने के लिए आवेदन लिए जाएंगे।

     

  • 1.53 लाख करोड़ की फल-सब्जियों की बर्बादी पर लगेगी लगाम, भारत-ब्रिटेन का बड़ा प्लान

    1.53 लाख करोड़ की फल-सब्जियों की बर्बादी पर लगेगी लगाम, भारत-ब्रिटेन का बड़ा प्लान

    करनाल
    भारत में हर साल मेहनत से उगाई गई करोड़ों टन फल और सब्जियां बाजार तक पहुंचने से पहले ही सड़ जाती हैं। इस राष्ट्रीय नुकसान से निपटने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल और ब्रिटेन के ब्रुनेल विश्वविद्यालय लंदन ने हाथ मिलाया है।

    दोनों वैश्विक संस्थानों ने मिलकर सोल टेक नाम से एक महत्वाकांक्षी अनुसंधान परियोजना पर काम शुरू किया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित कोल्ड स्टोरेज और एक मजबूत हार्टिकल्चर कोल्ड चेन नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में भी बिना ग्रिड बिजली या महंगे डीजल के फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

    क्यों पड़ी इस प्रोजेक्ट की जरूरत?
    भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और नाबार्ड की रिपोर्ट बताती है कि भारत में उचित कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे की भारी कमी
    है।

    सालाना 4 से 5 करोड़ टन फल-सब्जियों की बर्बादी
    देश में हर साल कुल उत्पादन का लगभग 6 से 15 प्रतिशत यानि करीब 40 से 50 मिलियन मीट्रिक टन फल और सब्जियां खेत से बाजार तक पहुंचने के दौरान ही खराब हो जाती हैं। टमाटर और हरी सब्जियों जैसी जल्द खराब होने वाली फसलों में यह नुकसान 20 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

    इस बर्बादी के कारण देश को सालाना करीब 1.53 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कोल्ड स्टोरेज न होने के कारण किसानों को अपनी फसल तुरंत औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है या फिर सड़ाकर फेंकनी पड़ती है।

    कैसे काम करेगा सोल टेक मडल जानिये?
    एमएचयू और ब्रुनेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मिलकर दो प्रमुख मोर्चों पर काम कर रहे हैं।

    सौर संचालित डिसेंट्रलाइज्ड कोल्ड स्टोरेज
    परंपरागत कोल्ड स्टोरेज बिजली या डीजल जनरेटर पर चलते हैं, जिनकी संचालन लागत बहुत अधिक होती है। सोल टेक के तहत ऐसे सोलर-पावर्ड छोटे और मध्यम स्टोरेज बनाए जा रहे हैं जो गांवों और मंडियों के पास आसानी से स्थापित किए जा सकेंगे।

    वैज्ञानिक प्रोटोकाल का विकास
    हर फल और सब्जी की प्रकृति अलग होती है। किस फसल को किस तापमान और आर्द्रता पर कितने दिनों तक रखा जा सकता है, इसके लिए दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक सटीक वैज्ञानिक गाइडलाइंस और डेटाबेस तैयार कर रहे हैं।

    उच्चस्तरीय बैठकों में तय हुई रणनीति
    परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए एमएचयू, करनाल और ब्रुनेल यूनिवर्सिटी के शीर्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के बीच रणनीतिक बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में देश के मैदानी इलाकों की जलवायु परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी डिजाइन और डेटा ट्रांसफर पर विस्तृत सहमति बनी है। दोनों संस्थान अब इसके प्रयोगात्मक माडल स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    किसान फसल को औने-पौने दाम पर बेचने के बजाय सौर कोल्ड स्टोरेज में रखकर बाजार में बेहतर भाव मिलने का इंतजार कर सकेंगे। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली बिल और डीजल का खर्च खत्म हो जाएगा। डीजल का उपयोग न होने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और हरित कृषि को बढ़ावा मिलेगा। यह अंतरराष्ट्रीय साझेदारी न केवल हरियाणा के बागवानी किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, बल्कि देश में कृषि संकट के समाधान के लिए एक वैश्विक नजीर भी पेश करेगी। -डॉ. एसके मल्हौत्रा, कुलपति महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल।