Author: NewseDay

  • सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को, जानें श्राद्ध-तर्पण का सही समय और किन पितरों के लिए करें पूजा

    सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को, जानें श्राद्ध-तर्पण का सही समय और किन पितरों के लिए करें पूजा

    : पितृ पक्ष में आने वाली सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है. यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया. 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी.

    सर्वपितृ अमावस्या तिथि (Sarva Pitru Amavasya 2026 Tithi)
    अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात करीब 9 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी. इसलिए श्राद्ध कर्म के लिए 10 अक्टूबर की तिथि महत्वपूर्ण रहेगी.

    सर्वपितृ अमावस्या क्यों मानी जाती है खास?
    सर्वपितृ अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहा जाता है. यह पितृ पक्ष के समापन का दिन है. धार्मिक परंपरा में इसे उन पितरों के लिए विशेष माना गया है, जिनकी श्राद्ध तिथि याद नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से छूट गया हो.

    धार्मिक पंचांग परंपरा के अनुसार, अगर किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या उस तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका, तो सर्वपितृ अमावस्या पर उनका श्राद्ध किया जा सकता है. इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का स्मरण करके श्रद्धा से तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है. इसलिए अगर किसी कारण से पितृ पक्ष में किसी पूर्वज का श्राद्ध छूट गया हो, तो सर्वपितृ अमावस्या को उनके निमित्त श्राद्ध करने की परंपरा है.

    सर्वपितृ अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
    इस दिन अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया जा सकता है. पितरों का स्मरण करते हुए जल, तिल आदि से तर्पण करने की परंपरा है.

    इसके अलावा कई परिवारों में श्राद्ध के अवसर पर गाय, कौवे और कुत्ते को भोजन कराने तथा जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान करने की परंपरा भी है. कुछ क्षेत्रों में इसे पंचबली की परंपरा से जोड़ा जाता है.

    अगर सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा हो तो ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा भी कराई जा सकती है. घर पर व्यवस्था संभव न हो तो मंदिर या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और अन्न का दान करना भी श्रद्धा से किया जा सकता है.

    क्या श्राद्ध से पहले खाना नहीं खाना चाहिए?
    यह नियम सभी परिवारों के लिए एक जैसा नहीं है. कई पारंपरिक विधियों में श्राद्धकर्ता के लिए संयम और सात्विक आहार का पालन बताया जाता है और कुछ परंपराओं में श्राद्ध कर्म पूरा होने तक भोजन न करने की व्यवस्था भी होती है.

    लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए एक अनिवार्य नियम की तरह नहीं बताया जाना चाहिए. व्रत, स्वास्थ्य, उम्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए अगर आप विधिवत श्राद्ध कर रहे हैं तो अपने पुरोहित से पहले ही पूछ लें कि उस विधि में भोजन कब करना है.

    श्राद्धकर्ता कौन बन सकता है?
    श्राद्धकर्ता को लेकर अलग-अलग धर्मशास्त्रीय परंपराओं में अलग व्यवस्थाएं मिलती हैं. सामान्य रूप से पुत्र द्वारा श्राद्ध करने की परंपरा प्रमुख रही है, लेकिन पुत्र न होने की स्थिति में अन्य निकट संबंधियों द्वारा श्राद्ध किए जाने के उल्लेख भी मिलते हैं. कुछ परंपराओं में पत्नी, पुत्री या अन्य परिजन भी विशेष परिस्थितियों में श्राद्ध कर सकते हैं.

    इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर परिस्थिति में केवल बड़ा पुत्र ही श्राद्ध कर सकता है. परिवार की परंपरा और संबंधित संस्कार-विधि के अनुसार श्राद्धकर्ता का निर्धारण किया जा सकता है.

    अगर परिवार में एक से अधिक पुत्र हैं, तो अलग-अलग रहने वाले पुत्रों को लेकर भी अलग परंपराएं मिलती हैं. ऐसी स्थिति में स्थानीय पुरोहित से विधि पूछना सबसे उचित रहेगा.

    पितृ पक्ष में कैसा भोजन करना चाहिए?
    पितृ पक्ष के दौरान सात्विक और संयमित भोजन करने की परंपरा कई परिवारों में है. खासकर जिस दिन श्राद्ध किया जाता है, उस दिन श्राद्ध के भोजन की शुद्धता और विधि का विशेष ध्यान रखा जाता है.

    मांसाहार और मदिरा से परहेज करने की परंपरा व्यापक रूप से देखी जाती है. हालांकि प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चना या कुछ दूसरी चीजों को लेकर नियम क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए इन्हें हर परिवार के लिए एक जैसा शास्त्रीय निषेध बताना उचित नहीं है.

    सर्वपितृ अमावस्या पर जरूर करें ये काम
    पितृ पक्ष में धार्मिक ग्रंथों का पाठ और भगवान का स्मरण कई परिवारों की परंपरा का हिस्सा है. श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ भी श्रद्धा से किया जा सकता है. लेकिन यह कहना कि सर्वपितृ अमावस्या पर गीता के पूरे 18 अध्याय या विशेष रूप से केवल सातवें अध्याय का पाठ करना ही शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है, उचित नहीं होगा. यह अधिक सही है कि व्यक्ति अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार गीता पाठ, मंत्र-जप या भगवान का स्मरण करें

  • Punjab Flood: डी-सिल्टिंग के पक्ष में पंजाब सरकार, NGT में कहा- नदियों की क्षमता बहाल करना जरूरी

    Punjab Flood: डी-सिल्टिंग के पक्ष में पंजाब सरकार, NGT में कहा- नदियों की क्षमता बहाल करना जरूरी

    चंडीगढ़
    पंजाब सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में कहा है कि बाढ़ प्रबंधन, नदियों और ड्रेनों की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने तथा भविष्य की आपदाओं से बचाव के लिए की जाने वाली वास्तविक डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) और ड्रेजिंग को केवल इसलिए व्यावसायिक खनन नहीं माना जा सकता। दरअसल निकाली गई सामग्री का आर्थिक मूल्य हो सकता है। राज्य सरकार ने यह पक्ष पंजाब में डी सिल्टिंग पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग से संबंधित आवेदन की सुनवाई के दौरान रखा।

    सरकार ने कहा कि डी-सिल्टिंग पर ब्लैंकेट रोक लगाने से उसके कई जरूरी वैधानिक कार्य प्रभावित होंगे। इनमें बाढ़ प्रबंधन, नदियों और ड्रेनों की क्षमता बहाल करना, तटबंधों की सुरक्षा तथा भविष्य में बाढ़ से होने वाली आपदाओं की रोकथाम शामिल है।

    पंजाब ने एनजीटी के समक्ष स्पष्ट किया कि रखरखाव, पुनर्बहाली और आपदा प्रबंधन के लिए की जाने वाली डी-सिल्टिंग और ड्रेजिंग को खनिजों के व्यावसायिक दोहन और बिक्री के लिए किए जाने वाले खनन से अलग रखा जाना चाहिए।

    हालांकि, राज्य सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के परिशिष्ट-IX के आइटम-7 में मुख्य प्रबंधन के लिए ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग को दी गई छूट का इस्तेमाल व्यावसायिक खनन को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता।

    सरकार ने कहा कि उसका इरादा ऐसी किसी गतिविधि को अनुमति देने का नहीं है, जो वास्तविकता और प्रभाव में व्यावसायिक खनन हो, लेकिन उसे डी-सिल्टिंग के नाम पर कराया जाए।

    2025 की बाढ़ का दिया उदाहरण
    पंजाब सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 2025 में आई अभूतपूर्व बाढ़ का हवाला दिया। सरकार के अनुसार, 2025 के मानसून में पंजाब में 622.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक थी। इस दौरान सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर नदी तंत्र में भी असाधारण रूप से अधिक पानी आया। बाढ़ के कारण नदी चैनलों, ड्रेनों, तटबंधों और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचा।

    राज्य ने यह भी बताया कि 16 सितंबर 2025 के केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र में केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम द्वारा स्थिति का आकलन किए जाने का उल्लेख था। टीम ने व्यावहारिक तौर पर स्थिति को 'गंभीर प्रकृति की आपदा' माना था।

    इसके बाद जल संसाधन विभाग ने नदियों, ड्रेनों और अन्य जलमार्गों की जलप्रवाह क्षमता को बहाल करने और बनाए रखने के लिए निवारक तथा सुधारात्मक कार्य शुरू किए। साथ ही बाढ़ प्रबंधन से जुड़े ढांचों को मजबूत करने के काम भी किए गए। रा

    ज्य ने कहा कि ये कार्य उसकी वैधानिक जिम्मेदारियों का हिस्सा हैं और पंजाब कैनाल एंड ड्रेनेज एक्ट, 2023 की धारा 38 के तहत भी ऐसे कार्य किए जाते हैं।

    एनजीटी के अंतरिम निर्देश के बाद एसओपी
    पंजाब ने एनजीटी के अंतरिम निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें सरकारी एजेंसियों या अन्य माध्यमों से मेंटेनेंस, अपकीप और डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए डी-सिल्टिंग की अनुमति दी गई है।

    इसकी शर्त यह है कि इसका इस्तेमाल व्यावसायिक रेत खनन के लिए नहीं होना चाहिए। इसी निर्देश के बाद जल संसाधन विभाग ने 15 जून 2026 को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत महत्वपूर्ण स्थानों पर नदी की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की।

    इसमें महत्वपूर्ण स्थलों की पहचान, काम शुरू करने से पहले तकनीकी आकलन और राज्य तकनीकी मूल्यांकन समिति से स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर काम कराने का प्रावधान किया गया।

    डी-सिल्टिंग की आड़ में नहीं होने देंगे अवैध खनन
    विभाग के मुख्य अभियंता/ड्रेनेज-कम-माइनिंग ने 99 डी-सिल्टिंग साइटों की पहचान कर उनकी जिला स्तर की सूची 16 जून को उपायुक्तों को भेजी। इन स्थानों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जमीन मालिकों या एसओपी के अनुसार काम कराने की व्यवस्था की गई।

    इसके बाद 16 जुलाई को विभाग ने 37 और साइटों की सूची भेजी। इसमें वॉल्यूम-शेयर और प्राइस-बिड टेंडर मॉडल वाले स्थान शामिल थे। साथ ही उन साइटों को भी सूची में रखा गया, जिन्हें पहले जमीन मालिकों को आवंटित किया गया था, लेकिन विरोध या अन्य कारणों से वहां काम रुक गया था।

    उपायुक्तों को महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर जरूरत का आकलन करने और जमीन मालिकों अथवा एसओपी के तहत डी-सिल्टिंग का काम कराने के निर्देश दिए गए।

    राज्य सरकार ने एनजीटी को स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रबंधन और आपदा से बचाव के लिए ऐसे कार्यों को व्यावसायिक खनन के बराबर नहीं रखा जा सकता, लेकिन डी-सिल्टिंग की आड़ में होने वाले वास्तविक व्यावसायिक खनन की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।

     

  • IIIT रायपुर में Agentic AI रोडशो का आयोजन, नई तकनीक के अवसरों और उपयोग पर हुई चर्चा

    IIIT रायपुर में Agentic AI रोडशो का आयोजन, नई तकनीक के अवसरों और उपयोग पर हुई चर्चा

    रायपुर. ट्रिपल आईटी नया रायपुर में आयोजित IEEE एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोडश का आज 6 अक्टूबर को अंतिम दिन है. तीन दिवसीय आयोजन में विशेषज्ञ, शोधकर्ता, शिक्षाविद और विद्यार्थी एजेंटिक AI की संभावनाओं, अनुप्रयोगों और चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं.

    अंतिम दिन एआई सिस्टम, एथिकल और जिम्मेदार AI, मानव-एआई सहयोग और व्यावहारिक उपयोग पर विशेष फोकस रहेगा. कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी चर्चा और प्रदर्शन के साथ आइडियाथॉन भी आयोजित किया जा रहा है. आयोजन IEEE कंप्यूटर सोसाइटी स्पेशल प्रोजेक्ट, ट्रिपल आईटी और AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहयोग से हो रहा है.

    विकसित होगा एआई इकोसिस्टम
    रायगढ़ के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की आधुनिक तकनीक से जोड़ने, इसके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देने और नवाचार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिले में एआई एक्सीलेंस सेंटर विकसित किया जाएगा। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने आज संत पूज्य  प्रियदर्शी राम जी ऑडिटोरियम, पंजरी प्लांट में आयोजित एक दिवसीय एआई कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर यह घोषणा की। ‘रायगढ़ की एआई उड़ान-जागरूकता से नवाचार तक’ थीम पर आयोजित कार्यशाला में 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि आईआईआईटी नया रायपुर के सहयोग से रायगढ़ में एआई से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित एआई एक्सीलेंस सेंटर में एआई से संबंधित गतिविधियों का चरणबद्ध विस्तार किया जाएगा। जिले के चयनित प्रतिभाशाली युवाओं को आईआईआईटी नया रायपुर के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

  • माइसरखाना के निष्कासन के बाद बठिंडा की सियासत गरम, AAP के 7 दावेदार टिकट के लिए मैदान में

    माइसरखाना के निष्कासन के बाद बठिंडा की सियासत गरम, AAP के 7 दावेदार टिकट के लिए मैदान में

    बठिंडा
    बठिंडा में आम आदमी पार्टी के मौड़ हलके में विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना के पार्टी से निष्कासन के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गई है। MLA की जगह संगठन में खाली हुई राजनीतिक स्पेस को भरने के लिए पार्टी के भीतर कई चेहरे सक्रिय हो गए हैं। 

    इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव की टिकट के लिए भी अभी से जमीन तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। मौड़ में फिलहाल करीब सात नेताओं के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं।

    खास बात यह है कि इन नेताओं ने केवल पार्टी संगठन तक अपनी गतिविधियां सीमित नहीं रखी हैं, बल्कि वर्करों से व्यक्तिगत संपर्क, गांवों में बैठकें और डोर-टू-डोर संपर्क भी बढ़ा दिया है। यानी मुकाबला सिर्फ हलका इंचार्ज बनने का नहीं, बल्कि 2027 में पार्टी का चेहरा बनने की तैयारी का भी दिखाई दे रहा है।

    मौड़ में AAP की कमान पाने की दौड़…

        किसी की नजर दिल्ली पर, कोई मान से करीबियां बढ़ा रहा: मौड़ में दावेदारों के बीच असली मुकाबला स्थानीय संगठन के साथ-साथ ऊपर तक पहुंच बनाने का भी है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेता दिल्ली में बैठे पार्टी नेताओं से संपर्क साध रहे हैं, जबकि कुछ की कोशिश मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ अपने राजनीतिक संबंध मजबूत करने की है। ऐसे में आने वाले दिनों में हलका इंचार्ज की नियुक्ति पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन का संकेत भी दे सकती है।

        राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू: मौड़ में अभी तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन सात चेहरों की बढ़ती सक्रियता ने साफ कर दिया है कि माइसरखाना के बाद खाली हुई राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू हो चुका है। हलका इंचार्ज का फैसला पार्टी के लिए महज संगठनात्मक नियुक्ति नहीं होगा।

        टिकट की दौड़ के समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित: इससे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मौड़ में पार्टी के संभावित चेहरे और टिकट की दौड़ के समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित हो सकते हैं। अब नजर पार्टी हाईकमान के फैसले पर है कि वह पुराने संगठनात्मक चेहरे पर भरोसा जताता है, सरकार के करीब माने जाने वाले चेहरे को आगे करता है या स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता को जिम्मेदारी सौंपता है।

        जीदा के पास संगठन और सरकार दोनों का अनुभव: दावेदारों में एडवोकेट नवदीप सिंह जीदा का नाम सबसे प्रमुखता से चर्चा में है। वह बठिंडा लोकसभा हलके के इंचार्ज हैं और पंजाब शुगरफेड के चेयरमैन भी हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता होने के कारण संगठन में उनकी पहचान नई नहीं है। संगठनात्मक जिम्मेदारी और सरकार से जुड़े पद पर रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का मजबूत पक्ष माना जा रहा है।

        डॉ. राजू ढड्डे: शुरुआत से AAP के साथ: डॉ. राजू ढड्डे भी मौड़ की राजनीति में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वह आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनके करीबी संबंधों की भी पार्टी हलके में चर्चा रहती है। ऐसे में उनकी दावेदारी का आधार पुराना संगठनात्मक जुड़ाव और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच दोनों को माना जा रहा है।

        महिला विंग की नेता ने भी बढ़ाई सक्रियता: महिला विंग की पंजाब वाइस प्रधान रूपिंदर कौर गिल भी इस दौड़ में सक्रिय हैं। लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़ी होने के कारण संगठन में उनका अपना आधार है। महिला कार्यकर्ताओं और महिला वोटरों के बीच सक्रियता को देखते हुए वह भी हलका इंचार्ज की दौड़ में महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभर रही हैं।

        सिपी भाकर ने बदली राजनीतिक पारी: सिपी भाकर की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है। वह पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। AAP में आने के बाद अब उन्होंने मौड़ में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। वर्करों से संपर्क और क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाकर वह भी अपनी जगह बनाने में जुटे हैं।

        बूटा सिंह संदोहा के पास ग्रामीण संगठन का आधार: बूटा सिंह संदोहा लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। वह जिला परिषद के सदस्य हैं और नशे के खिलाफ काम करने वाली टीम से भी जुड़े रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में उनकी सक्रियता और लंबे समय से पार्टी संगठन में रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का आधार है।

        हिम्मत सिंह के साथ परिवार की भी राजनीतिक मौजूदगी: मौड़ हलके के कोऑर्डिनेटर हिम्मत सिंह कुत्तीवाल भी मैदान में हैं। उनकी पत्नी रानी कौर जिला परिषद सदस्य हैं। यानी हलके में राजनीतिक सक्रियता के साथ परिवार की भी स्थानीय स्तर पर मौजूदगी है। यही वजह है कि उनका नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है।

        माइसरखाना से रंजीत सिंह मठाड़ू की दावेदारी: रंजीत सिंह मठाड़ू गांव माइसरखाना के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी मौजूदा सरपंच हैं। माइसरखाना क्षेत्र से स्थानीय पकड़ और पंचायत स्तर पर राजनीतिक संपर्कों के चलते उन्होंने भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है।

  • ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे और लोक संस्कृति को बढ़ावा देगा ‘चेन्दरू’ पुरस्कार, राज्योत्सव में होगा सम्मान

    ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे और लोक संस्कृति को बढ़ावा देगा ‘चेन्दरू’ पुरस्कार, राज्योत्सव में होगा सम्मान

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान देगा ‘चेन्दरू’ पुरस्कार, उत्कृष्ट योगदान पर मिलेगा एक लाख रुपये का सम्मान

    गांवों की संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार और समृद्धि के नए द्वार-पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल

    सतत ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे, स्थानीय संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को मिलेगा प्रोत्साहन

    राज्योत्सव में होगा विजेता का सम्मान, उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी होगी जारी

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ के
    गांवों की समृद्ध संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रभावी कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए गए हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होंगे।

    इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास का प्रभावी माध्यम बनाना भी है।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव हमारी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति की जीवंत विरासत हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचे। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आजीविका तथा स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ग्रामीण पर्यटन में यह क्षमता है कि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा, खान-पान और जीवनशैली को करीब से अनुभव करें। इससे पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंच सकती है।

    ‘चेन्दरू’ नाम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय मंच

    पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ छत्तीसगढ़ की उस विशिष्ट पहचान को सामने लाता है, जिसने कभी बस्तर और यहां के सहज प्राकृतिक जीवन को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अब इसी नाम से स्थापित राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार छत्तीसगढ़ के गांवों में पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जमीनी नायकों और संस्थाओं को सम्मान और पहचान प्रदान करेगा।

    एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र से होगा सम्मान

    पुरस्कार के अंतर्गत चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को यह सम्मान जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नवाचारी और प्रभावशाली प्रयासों को सामने लाकर राज्य में ग्रामीण पर्यटन की नई प्रेरक कहानियां तैयार करना है।

    छह सदस्यीय जूरी करेगी उत्कृष्ट कार्यों का मूल्यांकन

    पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों के मूल्यांकन हेतु छह सदस्यीय निर्णायक मंडल का प्रावधान किया गया है। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक करेंगे। इसमें पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्य, उसके प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा।

    समाचार पत्रों के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी प्रविष्टियां

    ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटोग्राफ, छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उपलब्धियों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

    राज्योत्सव में मिलेगा सम्मान, देश के सामने आएंगी सफलता की कहानियां

    चयनित विजेता अथवा संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर विजेता के कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों को रेखांकित करती सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को व्यापक पहचान मिलेगी और अन्य गांवों तथा समुदायों को भी पर्यटन आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

    होमस्टे और सामुदायिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं राज्य की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ी हुई हैं। बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर ग्रामीण अंचलों के पारंपरिक व्यंजन, लोककला, हस्तशिल्प, मेले, पर्व, प्राकृतिक स्थल और स्थानीय जीवनशैली पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करते हैं। ऐसे में होमस्टे और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

     ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से पर्यटन गतिविधियों का विकेंद्रीकरण होगा और इसका आर्थिक लाभ गांवों तक पहुंचेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही पारंपरिक कला, शिल्प, खान-पान, लोकसंस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

    ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार का प्रयास ग्रामीण पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक-सामाजिक सशक्तता, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करना है।

  • Nigeria Plane Crash: आसमान में संपर्क टूटा, फिर आग के गोले में बदला विमान; 32 की मौत

    Nigeria Plane Crash: आसमान में संपर्क टूटा, फिर आग के गोले में बदला विमान; 32 की मौत

    अबुजा

    नाइजीरिया में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है. यहां नाइजीरियाई वायुसेना का एक विमान देश के दक्षिण-पश्चिमी ओंडो राज्य में धड़धड़ाता हुआ क्रैश हो गया. हादसे में विमान में सवार सभी 32 लोगों की मौत तय मानी जा रही है. इनमें 25 यात्री और 7 क्रू सदस्य शामिल थे और इनमें से किसी के भी जिंदा बचने की उम्मीद नहीं है. नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबू ने हादसे की पुष्टि करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। 

    जानकारी के मुताबिक नाइजीरियाई वायुसेना का ATR-42 विमान बेनिन सिटी से लागोस के लिए नियमित मिशन पर उड़ान भर रहा था, जब ये हादसा हुआ. उड़ान के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल का विमान से संपर्क टूट गया. इसके कुछ ही समय बाद विमान ओंडो राज्य के इग्बोकोडा इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे के बाद विमान का मलबा एक कोस्टल एरिया के पास मिला. इसके बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और रेस्क्यू मिशन चलाया गया. बचावकर्मियों ने नावों की मदद से आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। 

    कैसे क्रैश हुआ मिलिट्री एयरक्राफ्ट?
    नाइजीरिया के विमानन मंत्री फेस्टस कीयामो ने बताया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सोमवार सुबह करीब 8:13 GMT पर विमान से संपर्क खो दिया था. बाद में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी सामने आई. अधिकारियों के मुताबिक विमान एक नियमित उड़ान पर था और इसे किसी विशेष आपात स्थिति के लिए नहीं भेजा गया था. सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में भी नदी के किनारे लोगों की भीड़ और बचावकर्मियों को तलाशी करते देखा गया. स्थानीय लोगों ने भी हादसे के बारे में जानकारी दी. दुर्घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर रहने वाली 39 वर्षीय दायो अकिन्टे ने बताया कि उन्होंने तेज आवाज सुनी थी. उन्हें शुरुआत में लगा कि यह बादलों की गरज जैसी आवाज है. बाद में उन्हें विमान दुर्घटना की जानकारी मिली। 

    राष्ट्रपति टिनबू ने जताया दुख
    राष्ट्रपति टिनुबू ने इस घटना को देश और सशस्त्र बलों के लिए बेहद दुखद बताया. उन्होंने नाइजीरियाई वायुसेना को हादसे की पूरी जांच तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है, ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय किए जा सकें. यह नाइजीरिया में हाल के वर्षों के सबसे गंभीर विमान हादसों में से एक है. इससे पहले मई 2021 में सेना के शीर्ष अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल इब्राहिम अत्ताहिरू समेत 11 लोगों की विमान दुर्घटना में मौत हुई थी. अगस्त 2015 में भी एक सैन्य विमान हादसे में सात लोगों की जान गई थी। 

  • रोहित-कोहली-गिल के रन काफी नहीं, 2027 विश्व कप के लिए गेंदबाजी बनेगी टीम इंडिया की असली ताकत

    रोहित-कोहली-गिल के रन काफी नहीं, 2027 विश्व कप के लिए गेंदबाजी बनेगी टीम इंडिया की असली ताकत

    नई दिल्ली
    1983 और 2011… भारतीय क्रिकेट के ये दो साल सिर्फ विश्व कप जीतने की तारीखें नहीं हैं, बल्कि उस क्रिकेट की पहचान हैं, जिसमें भारत ने दुनिया को बताया था कि बड़े टूर्नामेंट कैसे जीते जाते हैं. 2027 में फिर वही गौरव हासिल करना है तो सिर्फ बल्लेबाजी के दम पर सपना देखना खतरनाक होगा. टीम इंडिया के पास बल्लेबाजी में रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल, शुभमन गिल और संजू सैमसन जैसे विकल्प हैं. रन बनाने की ताकत की कमी नहीं है. सवाल यह है कि रन बचाने और विकेट निकालने की ताकत कितनी है?

    क्रिकेट अब सिर्फ 350 रन बनाने का खेल नहीं रह गया है. बड़े टूर्नामेंट में असली परीक्षा तब होती है जब सामने वाली टीम भी 300-350 के पार जाने की स्थिति में हो. ऐसे में आपकी गेंदबाजी कितनी जल्दी मैच का रुख बदल सकती है, यही खिताब और सिर्फ अच्छे प्रदर्शन के बीच का फर्क बनती है.

    भारत अगर बल्लेबाजी की दादागीरी के भरोसे हर मुकाबला जीतने की सोचता रहेगा तो यह रणनीति लंबे टूर्नामेंट में जोखिम भरी होगी. एक खराब दिन बल्लेबाजों का आया और स्कोर 250-270 के आसपास अटक गया तो मैच बचाने के लिए गेंदबाजों के पास क्या हथियार होंगे?

    यहीं जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. बुमराह 100 फीसदी फिट हों और हार्दिक अपनी पूरी गेंदबाजी क्षमता के साथ उपलब्ध हों तो टीम का संतुलन ही बदल जाता है. लेकिन सवाल सिर्फ दो खिलाड़ियों का नहीं है. 2027 विश्व कप के लिए भारत को ऐसी गेंदबाजी यूनिट चाहिए जो परिस्थितियों की मोहताज न हो और बड़े मुकाबलों में खुद मैच छीन सके.

    और इसके लिए सबसे जरूरी है- अब प्रयोगों की दुकान बंद कर विश्व कप के लिए चुनी जाने वाली टीम को साथ खेलने का पर्याप्त समय देना होगा.

    विश्व कप से छह महीने पहले टीम बनाने की कोशिश करने की बजाय कम से कम छह महीने पहले एक पक्का टीम संयोजन तैयार होना चाहिए. कौन नई गेंद संभालेगा, डेथ ओवर में कौन आएगा, बीच के ओवरों में विकेट कौन निकालेगा, बुमराह के साथ दूसरा और तीसरा तेज गेंदबाज कौन होगा, हार्दिक की मौजूदगी में टीम का संतुलन कैसा होगा- इन सवालों के जवाब टूर्नामेंट शुरू होने से काफी पहले मिलने चाहिए.

    बल्लेबाजी में पांच बड़े नाम होने से टीम कागज पर मजबूत दिख सकती है, लेकिन विश्व कप कागज पर नहीं जीते जाते. वहां एक विकेट मैच बदलता है, एक स्पेल कहानी बदलता है और एक दबाव भरा ओवर पूरा अभियान बदल सकता है.

    1983 की टीम के पास कपिल देव थे, 2011 की टीम के पास जहीर खान… दोनों टीमों में बल्लेबाजी सितारों से भरी थी, लेकिन खिताब तक पहुंचने के लिए गेंदबाजी ने भी अपनी भूमिका निभाई.

    इसलिए 2027 का सवाल यह नहीं होना चाहिए कि भारत के पास कितने बड़े बल्लेबाज हैं. सवाल यह होना चाहिए कि क्या भारत के पास इतने धारदार गेंदबाज हैं जो बड़े मैच में सामने वाली टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ सकें?

    अगर जवाब अभी पूरी तरह साफ नहीं है तो वक्त अभी भी है. लेकिन वक्त को प्रयोगों में गंवाने की बजाय योजना में लगाना होगा. 2027 में 1983 और 2011 का गौरव दोहराना है तो बैटिंग की दादागीरी के साथ गेंदबाजी में भी बारूद चाहिए. वरना 350 रन भी कभी-कभी कम पड़ सकते हैं

     

  • पितृ पक्ष में चीटियों को आटा-चीनी खिलाने से क्या होता है? जानें धार्मिक मान्यताओं से जुड़े रहस्य

    पितृ पक्ष में चीटियों को आटा-चीनी खिलाने से क्या होता है? जानें धार्मिक मान्यताओं से जुड़े रहस्य

    हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए बेहद समर्पित माना जाता है. इस दौरान लोग पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य के जरिए अपने पितरों को याद करते हैं. पितृ पक्ष में दान और जीवों की सेवा का विशेष महत्व बताया गया है, जिनमें से चीटियों को आटा या चीनी डालना एक बेहद महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है. क्या आपने कभी सोचा है कि विशेष रूप से इन दिनों में चीटियों को भोजन कराना क्यों जरूरी माना गया है? गरुड़ पुराण और धार्मिक मान्यताओं में इससे जुड़े कई गहरे रहस्य और कारण बताए गए हैं. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान चीटियों की सेवा करने से पितृ क्यों प्रसन्न होते हैं.

    गरुड़ पुराण में जीव सेवा का महत्व
    हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मनुष्य के द्वारा किए गए कर्मों का प्रभाव केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं पर भी पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि मृत्यु के बाद आत्माएं विभिन्न योनियों में भटकती हैं. चीटियां और अन्य सूक्ष्म जीव भी सृष्टि का एक अहम हिस्सा हैं. पितृ पक्ष में चीटियों को आटा डालने से चींटी जैसे छोटे जीवों की भूख शांत होती है, जिससे उनका आशीर्वाद अदृश्य रूप से हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है.

    – चीटियों को खिलाने से दूर होते हैं दोष
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चीटियों का संबंध राहु-केतु और शनि जैसे ग्रहों से भी जोड़ा जाता है. जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से या विशेषकर पितृ पक्ष में चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालता है, तो उसके कई प्रकार के ग्रह दोष और बाधाएं शांत होने लगती हैं. इससे जीवन में आ रही अड़चनें दूर होती हैं.

    – ऋणों और पापों से मुक्ति का मार्ग
    धर्मग्रंथों में कहा गया है कि अनजाने में हमसे कई छोटे-छोटे जीव-हत्या के पाप हो जाते हैं, जिन्हें 'पंच महायज्ञ' या जीव सेवा के माध्यम से संतुलित किया जाता है. चीटियों को भोजन कराने से चींटी ऋण और अन्य सूक्ष्म जीवों के प्रति कर्ज से मुक्ति मिलती है. इसे चींटी सेवा या 'कीड़ी नगर' डालना भी कहा जाता है, जो पुण्य का बड़ा काम माना गया है.

    – पितरों की तृप्ति और उनका आशीर्वाद
    ऐसी धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में हमारे आसपास या जीवों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं. जब हम चीटियों या अन्य बेजुबान जानवरों को अन्न दान करते हैं, तो उससे मिलने वाला पुण्य सीधा हमारे पितरों तक पहुंचता है. इससे पितृ तृप्त होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

    चीटियों को आटा डालते समय किन बातों का रखें ध्यान?
    साफ-सुथरी जगह चुनें: चीटियों को हमेशा खुले में, पेड़ के नीचे या उनके बिल के पास साफ स्थान पर ही आटा डालना चाहिए.

    शक्कर या बूरा मिलाएं: सादे आटे की जगह उसमें थोड़ा सा चीनी या बूरा मिलाकर डालने से चीटियां आसानी से उसे ग्रहण कर पाती हैं.

    नियमितता का रखें ख्याल: यदि आप पितृ पक्ष के दौरान यह नियम अपनाते हैं, तो इसे श्रद्धा और निरंतरता के साथ करें, जिससे आपको इसका पूर्ण आध्यात्मिक लाभ मिल सके.

  • 45 हजार गांवों के लिए बदलेगा टैक्स नियम, पंचायतों की बढ़ेगी कमाई लेकिन घर-मालिकों पर नहीं पड़ेगा

    45 हजार गांवों के लिए बदलेगा टैक्स नियम, पंचायतों की बढ़ेगी कमाई लेकिन घर-मालिकों पर नहीं पड़ेगा

    पटना
    सरकार गांव वालों को बड़ी राहत देने जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में घर अथवा व्यावसायिक संपत्ति पर लगने वाले कर को लेकर पंचायती राज विभाग ने नियमावली में सुधार की औपचारिकता पूर्ण कर ली है।

    नई नियमावली में ऐसी कर व्यवस्था तैयार की गई जिससे ग्रामीणों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और पंचायतों की स्थानीय आय के स्रोत भी स्पष्ट हो सकें। इसके लिए विधान मंडल से पारित कानून एवं नियमावली संशोधन किया गया है।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर गत दिनों पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस पर सहमति बनी। प्रस्तावित सुधार के तहत गांवों में सामान्य आवासीय मकान या निजी व्यावसायिक संपत्ति पर सीधे संपत्ति कर लगाने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

    विभाग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां शहरी क्षेत्रों से अलग हैं, इसलिए नगर निकायों की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति आधारित कर व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा।

    पंचायती राज विभाग पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए कर एवं शुल्क से जुड़े दूसरे विकल्पों पर काम पूरा कर लिया है। नियमावली में यह स्पष्ट किया जाएगा कि पंचायतें किन सेवाओं अथवा स्थानीय सुविधाओं के एवज में शुल्क ले सकती हैं। इससे पंचायतों को आय का स्रोत मिलेगा और ग्रामीणों पर सीधे संपत्ति कर का भार भी नहीं पड़ेगा।

    विभाग स्तर पर पूर्व नियमावली को शिथिल कर नए प्रविधानों की समीक्षा के उपरांत संशोधन का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसमें कर निर्धारण, वसूली और पंचायतों की आय से जुड़े प्रविधानों को सरल और स्पष्ट करने पर बल रहेगा।

    नई व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रामीणों के हितों का संरक्षण करना है। नियमावली में संशोधन के बाद पंचायतों को स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने के लिए अधिक स्पष्ट अधिकार मिल सकेंगे।

    निजी स्कूल, मोबाइल टावर, रेस्टोरेंट पर टैक्स
    नए प्रविधान के तहत ईंट भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर, रेस्टोरेंट, चावल मिल, निजी अस्पताल आदि को कर के दायरे में लाने की तैयारी है। इसी तरह बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान से कर वसूली की तैयारी है। होर्डिंग, बैनर आदि व्यावसायिक गतिविधियों पर कर देना होगा।

    मकान मालिक को व्यावसायिक संपत्ति पर कर नहीं देना होगा। पंचायती राज विभाग कैबिनेट से शीघ्र प्रस्ताव स्वीकृत कराएगा।

    गांवों का नेटवर्क
        गांवों की संख्या: 45,103
        पंचायतों की संख्या: 8041

     

  • UP के जंगलों में दिखेगा वन्यजीवन का अनोखा संसार, ‘मछली’ फेम नल्ला

    UP के जंगलों में दिखेगा वन्यजीवन का अनोखा संसार, ‘मछली’ फेम नल्ला

    लखनऊ
     रणथंभौर की बाघिन ‘मछली’ की जिंदगी को नौ साल कैमरे में कैद कर दुनिया को उसकी कहानी दिखाने वाले मशहूर वन्यजीव फिल्मकार सुब्बैया नल्ला मुथु अब प्रदेश के जंगलों की अनकही कहानियां दुनिया तक पहुंचाएंगे।

    बाघों की जिंदगी और जंगल की धड़कन को कैमरे के जरिये कहानी में बदलने वाले नल्ला के अनुभव का लाभ अब प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में लिया जाएगा। इसके लिए आठ अक्टूबर को वन विभाग उनके साथ एमओयू करेगा।

    एमओयू के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत, रानीपुर व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व आदि में डाक्यूमेंट्री और अन्य फिल्मांकन की दिशा में काम होगा। मुथु को तराई के जंगलों में शूटिंग के लिए तीन वर्ष का समय मिलेगा। बाघों के साथ ही यहां की जैव विविधता, प्राकृतिक आवास, वन्यजीवों के व्यवहार और संरक्षण की चुनौतियों को कहानी का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद
    यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि तराई के जंगलों में बाघों के साथ हाथी, गैंडा, बारहसिंघा समेत कई दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। गौरतलब है कि मुथु के लिए वन्यजीव फिल्मांकन महज कैमरे से वीडियो बनाना नहीं, बल्कि जंगल में लंबे समय तक रहकर उसके किरदारों को समझना रहा है।

    रणथंभौर की ‘मछली’ पर बनाई गई उनकी फिल्म ‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण फिल्म का पुरस्कार मिला। उन्होंने करीब नौ वर्ष तक मछली और उसके वंश की कहानी को कैमरे में दर्ज किया था। वर्ष 2024 में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उन्हें वी. शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला था।

    पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुके नल्ला के चर्चित काम में ‘टाइगर डायनेस्टी’, ‘टाइगर क्वीन’ और ‘लाइफ फोर्स’ जैसी वन्यजीव फिल्में शामिल हैं। 1987 से फिल्म निर्माण से जुड़े नल्ला ने 11 सीरीज और 55 डाक्यूमेंट्री बनाने के साथ भारतीय वन्यजीवों पर व्यापक काम किया है। इससे पहले वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हाई-स्पीड कैमरा विशेषज्ञ के रूप में भी काम कर चुके हैं।