Author: NewseDay

  • सरकारी स्कूलों में तकनीक से बदलेगी शिक्षा की तस्वीर, झारखंड में शुरू होगी एडटेक पहल

    सरकारी स्कूलों में तकनीक से बदलेगी शिक्षा की तस्वीर, झारखंड में शुरू होगी एडटेक पहल

    मेदिनीनगर (पलामू)
    सरकारी स्कूलों की पारंपरिक पढ़ाई अब धीरे-धीरे तकनीक आधारित शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ेगी। झारखंड के सरकारी विद्यालयों में एडटेक (एजुकेशन टेक्नोलॉजी) आधारित शिक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए राज्य स्तर पर रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

    इसका उद्देश्य कक्षाओं में डिजिटल संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल बढ़ाने के साथ शिक्षकों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना और विद्यार्थियों की सीखने की जरूरत के अनुसार शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

    यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से कर रहा काम
    योजना का असर पलामू समेत राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों पर पड़ने की संभावना है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) इस पहल पर यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से काम कर रहा है।

    एडटेक आधारित शिक्षा व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने के लिए बेंगलुरु की संस्था आईटी फॉर चेंज के विशेषज्ञ कंसल्टेंसी सेवाएं दे रहे हैं। संस्था के प्रतिनिधि राज्य में शिक्षण व्यवस्था की मौजूदा स्थिति और तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं।

    शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों से लिया जा रहा फीडबैक
    रोडमैप तैयार करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में शिक्षकों, झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डाइट) के शिक्षा विशेषज्ञों के साथ फीडबैक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें स्कूलों में तकनीक के मौजूदा इस्तेमाल, कक्षाओं की जमीनी चुनौतियों और शिक्षकों के अनुभवों पर चर्चा की जा रही है।

    फीडबैक के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि तकनीक आधारित शिक्षा लागू करने में स्कूलों के सामने किस तरह की व्यावहारिक दिक्कतें हैं। साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों तक डिजिटल संसाधनों की समान पहुंच सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

    डिजिटल शिक्षा व्यवस्था होगी अधिक जवाबदेह
    विशेषज्ञों के अनुसार, एडटेक आधारित व्यवस्था लागू होने से सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और साक्ष्य आधारित बनाने में मदद मिल सकती है। डिजिटल संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार शिक्षण पद्धति में बदलाव की संभावनाएं बढ़ेंगी।

    रोडमैप लागू होने के बाद शिक्षकों के तकनीकी कौशल को मजबूत करने के साथ कक्षाओं में डिजिटल संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल का रास्ता तैयार होगा। इससे सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

    जानें क्या है ‘एडटेक’
    ‘एडटेक’ यानी शिक्षा प्रौद्योगिकी ऐसी व्यवस्था है, जिसमें पारंपरिक शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, वीडियो, इंटरैक्टिव कंटेंट और ऑनलाइन संसाधनों के जरिए कठिन विषयों को भी विद्यार्थियों के लिए आसान और रुचिकर बनाने का प्रयास किया जाता है।

    एडटेक में इंटरैक्टिव व्हाइटबोर्ड, डिजिटल कंटेंट और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित टूल्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों की सीखने की गति और जरूरत के अनुसार शिक्षण को अधिक व्यक्तिगत बनाने की संभावना बढ़ती है। वहीं, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से शिक्षकों को विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति पर अधिक ध्यान देने में मदद मिल सकती है।

  • वारिस पंजाब दे को खतरा बताने पर अकाली दल का पलटवार, अयाली-खालसा ने उठाए सवाल

    वारिस पंजाब दे को खतरा बताने पर अकाली दल का पलटवार, अयाली-खालसा ने उठाए सवाल

    चंडीगढ़.

    अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सरदार मनप्रीत सिंह अयाली और सांसद भाई सरबजीत सिंह खालसा ने कड़ा एतराज जताया है।

    पार्टी की मान्यता और चुनाव संबंधी विवाद को लेकर हाई कोर्ट में चल रही कार्रवाई के दौरान पार्टी को सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर नेताओं ने इसे सिख कौम और उसकी राजनीतिक आवाज को लेकर गंभीर टिप्पणी करार दिया।

    सिख कौम ने देश की आजादी के लिए दी है कुर्बानियां
    दोनों नेताओं ने मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर पार्टी के खिलाफ की जा रही कार्रवाई रोकने की मांग की। नेताओं ने कहा कि सिख कौम ने देश की आजादी से लेकर उसकी सुरक्षा तक में बड़ी कुर्बानियां दी हैं।

  • टाटीबंध-बिरगांव में जल्द खुलेंगे रजिस्ट्री दफ्तर, जमीन की रजिस्ट्री के लिए कलेक्ट्रेट जाने से मिलेगी मुक्ति

    टाटीबंध-बिरगांव में जल्द खुलेंगे रजिस्ट्री दफ्तर, जमीन की रजिस्ट्री के लिए कलेक्ट्रेट जाने से मिलेगी मुक्ति

    रायपुर.

    राजधानी रायपुर में जमीन और प्रॉपर्टी की बढ़ती खरीदी-बिक्री को देखते हुए पंजीयन विभाग उपपंजीयक कार्यालयों का विस्तार करने जा रहा है. इसी कड़ी में टाटीबंध और बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में जल्द ही नए उपपंजीयक दफ्तर शुरू किए जाएंगे. इसके लिए विभाग तैयारी में जुटा हुआ है.

    संभावना है कि आगामी दो महीने के भीतर दोनों क्षेत्रों में उपपंजीयक कार्यालय शुरू हो जाएंगे. इसके बाद टाटीबंध, बिरगांव और आसपास के गांवों के लोगों को रजिस्ट्री के लिए कलेक्टोरेट स्थित मुख्य पंजीयन कार्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, मास्टर प्लान-2031 के तहत राजधानी रायपुर के निवेश क्षेत्र का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है. पहले निवेश क्षेत्र में 41 गांव शामिल थे, लेकिन नए मास्टर प्लान में 65 नए गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है. इस तरह निवेश क्षेत्र में शामिल गांवों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है. निवेश क्षेत्र का विस्तार होने के साथ इन गांवों में विकास गतिविधियां और जमीन की खरीदी-बिक्री भी बढ़ रही है.

    प्रॉपर्टी की बढ़ती रजिस्ट्री को देखते हुए पंजीयन विभाग ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक उपपंजीयक कार्यालयों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसका उद्देश्य लोगों को उनके क्षेत्र के नजदीक रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध कराना और मुख्य कार्यालयों में होने वाली भीड़ को कम करना है. रायपुर कलेक्टोरेट परिसर स्थित मुख्य पंजीयन कार्यालय में त्योहारों और वित्तीय वर्ष के अंत में मार्च क्लोजिंग के दौरान रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है. ऐसे समय में ऑनलाइन आवेदन और अपॉइंटमेंट लेने से लेकर रजिस्ट्री कराने तक लोगों को भीड़ और लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को देखते हुए पंजीयन विभाग ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में उपपंजीयक कार्यालय शुरू किए हैं.

    सड्डू-मोवा तरफ विधानसभा रोड स्थित बेबीलॉन टॉवर और श्रीराम बिजनेस पार्क में उपपंजीयक दफ्तर पहले ही शुरू हो चुके हैं. इन कार्यालयों में रजिस्ट्री की सुविधा मिलने से आसपास के क्षेत्र के लोगों को कलेक्टोरेट तक लंबा सफर तय नहीं करना पड़ रहा है. इससे लोगों के समय और श्रम के साथ आने-जाने में होने वाले खर्च की भी बचत हो रही है. अब टाटीबंध और बिरगांव में नए उपपंजीयक कार्यालय शुरू होने से इन क्षेत्रों के साथ आसपास के निवेश ग्रामों में रहने वाले लोगों को भी रजिस्ट्री के लिए बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

  • UPI पेमेंट पर चार्ज का असर! 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका, बड़े ट्रांजैक्शन पर भी पड़ेगा असर

    UPI पेमेंट पर चार्ज का असर! 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका, बड़े ट्रांजैक्शन पर भी पड़ेगा असर

    नई दिल्ली

    UPI से 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की तैयारी है। यह नियम 15 अक्टूबर से लागू हो सकता है। इसमें UPI P2P यानी ग्राहक से व्यापारी वाले भुगतान शामिल होंगे। यह चार्ज व्यापारी को देना है। लेकिन, सवाल यह है कि अगर व्यापारी या दुकानदार यह खर्च ग्राहकों पर डाल देते हैं, तो क्या होगा? लोकल सर्कल्स के नए सर्वे में इसका बड़ा असर दिख रहा है। सर्वे में 291 जिलों के 67,000 से ज्यादा UPI यूजर्स ने जवाब दिए।

    ग्राहक क्या करेंगे अगर UPI पर फीस लगे?
    सर्वे के मुताबिक, अगर व्यापारी UPI पेमेंट पर अलग से फीस जोड़ते हैं, तो…

        14 प्रतिशत लोग कहते हैं वे UPI से ही पेमेंट करेंगे और फीस भी देंगे।
        27 प्रतिशत लोग कैश से पेमेंट करेंगे।
        26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड पर शिफ्ट हो जाएंगे।
        14 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड इस्तेमाल करेंगे।
        4 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।
        नौ प्रतिशत लोग व्यापारी से कोई और ऐसा पेमेंट ऑप्शन मांगेंगे जिस पर अलग चार्ज न हो।
        2 प्रतिशत लोग खरीदारी टाल देंगे या करेंगे ही नहीं।
        4 प्रतिशत लोग तय नहीं कर पाए कि वे क्या करेंगे।

    ₹2,000 से ऊपर की खरीद में कौन से पेमेंट मोड का करेंगे इस्तेमाल ?
    जब लोगों से पूछा गया कि अगर UPI पर अलग चार्ज लगे तो ₹2,000 से ऊपर की खरीद में वे सबसे ज्यादा कौन सा तरीका इस्तेमाल करेंगे तो उनका जवाब कुछ ऐसा रहा..

        26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड चुनेंगे।
        26 प्रतिशत लोग कैश चुनेंगे।
        13 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड चुनेंगे।
        11 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।
        सिर्फ 20 प्रतिशत लोग UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।
        4 प्रतिशत लोग अनिश्चित हैं।

    यानी LocalCircles का मानना है कि 76 प्रतिशत UPI यूजर्स बड़े पेमेंट के लिए UPI छोड़ सकते हैं, अगर उस पर अतिरिक्त शुल्क लगता है।

    क्या व्यापारी भी MDR नहीं देना चाहते?
    सर्वे में व्यापारियों की राय भी सामने आई है। 242 जिलों के 32,000 से ज्यादा व्यापारियों ने ये जवाब दिए…

        सिर्फ 17 प्रतिशत व्यापारी ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR देने को तैयार हैं।

        41 प्रतिशत व्यापारी कोई भी MDR देने को तैयार नहीं हैं।

        9 प्रतिशत व्यापारी UPI ही नहीं लेते।

        15 प्रतिशत व्यापारियों ने 0.04 प्रतिशत को अधिकतम सीमा बताया।

    UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत क्यों गिर सकती है?
    लोकल सर्कल्स का अनुमान है कि 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने के बाद पहले पूरे महीने में UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत तक घट सकती है। दरअसल, ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट संख्या में बहुत कम हैं। मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 5 प्रतिशत से भी कम, लेकिन वैल्यू के हिसाब से ये करीब 67 प्रतिशत हैं, यानी लगभग ₹6 लाख करोड़ महीना। यह कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब एक-पांचवां हिस्सा है।

    अनुमान है कि UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 4 प्रतिशत गिर सकती है। इसमें 1 पर्सेंटेज पॉइंट सीधा नुकसान MSME व्यापारियों पर होगा और 3 पर्सेंटेज पॉइंट नेटवर्क इफेक्ट से, क्योंकि लोग उन व्यापारियों के साथ कुल UPI इस्तेमाल भी कम कर सकते हैं।

    चूंकि 83 प्रतिशत व्यापारी 0.4 प्रतिशत MDR खुद नहीं झेलना चाहते, इसलिए हो सकता है कि वे यह खर्च सरचार्ज, प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाकर, या ग्राहकों को दूसरे पेमेंट मोड की तरफ मोड़कर वसूल करें। अगर ऐसा हुआ, तो 76 प्रतिशत ग्राहक ₹2,000 से ऊपर की खरीद में दूसरा पेमेंट मोड चुन सकते हैं।

  • ‘असेंबली से AI तक’ नए यूपी की उड़ान, CM योगी ने प्रदेशवासियों को दिखाई प्रगति की तस्वीर

    ‘असेंबली से AI तक’ नए यूपी की उड़ान, CM योगी ने प्रदेशवासियों को दिखाई प्रगति की तस्वीर

    असेंबली से एआई तक: नए उत्तर प्रदेश की नई उड़ान…

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को 'उप्र की प्रगति' से कराया साक्षात्कार

    सीएम योगी ने 'एक्स' पर किया पोस्ट- जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप व 8 यूनिकॉर्न हैं

    पीएम मोदी के विजन को डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा: मुख्यमंत्री

    पूर्ववर्ती सरकार को कटघरे में खड़ा कर सीएम ने लिखा- जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा

    तकनीक का निर्माता बन रहा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री 

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रदेशवासियों को उप्र की प्रगति से  साक्षात्कार कराया। उन्होंने 2017 के बाद प्रदेश की उड़ान को अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया। वहीं पूर्ववर्ती सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा?

    पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का नहीं किया उपयोग
    मुख्यमंत्री ने लिखा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का उपयोग नहीं किया, बल्कि इसे 'बीमारू' ही बनाए रखा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का जो विजन दिया, डबल इंजन सरकार ने उसे उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा है।

    मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही विकास यात्रा
    मुख्यमंत्री ने बताया कि आज साढ़े 9 वर्ष के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी है। जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही है, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप व8 यूनिकॉर्न हैं। यानी यात्रा मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही है।

    2017 से पहले सैफई महोत्सव ही था सांस्कृतिक उत्थान
    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की तस्वीर भी दिखाई। कहाकि आज के परिदृश्य से अलग पहले सिर्फ घोषणाएं होती थीं, पर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए संघर्ष करती थीं। क्योंकि तब परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था।

    भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा उप्र
    मुख्यमंत्री ने बताया कि हमने प्राथमिकता बदली। परिवार के विकास की जगह प्रदेश का विकास, माफिया के संरक्षण की जगह निवेशक का संरक्षण और तुष्टीकरण की जगह टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स बढ़ा तो डेटा सेंटर की आवश्यकता बढ़ी और डेटा बढ़ा तो आज उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर से एआई सिटी तक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा है।

    तकनीक का निर्माता बन रहा उत्तर प्रदेश
    मुख्यमंत्री ने बताया कि एआई-प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम भी युवाओं को नौकरी खोजने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार देने वाला बना रहा है। कभी उत्तर प्रदेश तकनीक का बाजार था, आज उसका निर्माता बन रहा है। असेंबली  से एआई तक यह यात्रा केवल तकनीक की नहीं, हमारे युवाओं के रोजगार, उद्यम और समृद्धि की यात्रा है।

    'नए उत्तर प्रदेश' की दिख रही नई उड़ान 
    सीएम ने बताया कि इसी कड़ी में आज (मंगलवार)  लखनऊ में एचसीएल टेक की स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता करूंगा। इस अवसर पर HCL GUVI Emerging Tech Skilling Centre का शुभारंभ भी होगा। 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प के साथ यही 'नए उत्तर प्रदेश' की नई उड़ान है।

  • UP Shikshamitra: 1.28 लाख शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय का लाभ, सितंबर-अक्टूबर के लिए ₹460.23 करोड़ जारी

    UP Shikshamitra: 1.28 लाख शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय का लाभ, सितंबर-अक्टूबर के लिए ₹460.23 करोड़ जारी

    योगी सरकार में 1.28 लाख शिक्षामित्रों को बढ़े मानदेय का लाभ, सितंबर-अक्टूबर के लिए ₹460.23 करोड़ जारी

    – ₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार प्रतिमाह हुआ मानदेय, बढ़ी दर पर सितंबर-अक्टूबर के लिए धनराशि जारी

    – शैक्षिक सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ

    – प्रत्येक माह ₹230.11 करोड़, दो माह के लिए कुल ₹460.23 करोड़ का प्रावधान

    – जनपदवार आवंटित धनराशि के अनुसार मानदेय भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत शिक्षामित्रों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया है। ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹18 हजार प्रतिमाह किए गए मानदेय की बढ़ी दर पर शैक्षिक सत्र 2026-27 में कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों के सितंबर और अक्टूबर माह के मानदेय के लिए ₹460.23 करोड़ की धनराशि जारी की गई है। दोनों माह के मानदेय भुगतान के लिए जनपदवार धनराशि निर्धारित की गई है।

    सितंबर के मानदेय के लिए ₹230.11 करोड़ तथा अक्टूबर के लिए भी ₹230.11 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई है। इस प्रकार दोनों माह के लिए कुल ₹460.23 करोड़ का प्रावधान किया गया है। संबंधित जनपदों को निर्धारित आवंटन के अनुसार भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

    प्रदेश के लगभग 1.28 लाख शिक्षामित्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। शैक्षिक सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों के लिए सितंबर और अक्टूबर के मानदेय का जनपदवार आवंटन किया गया है। इसके माध्यम से बढ़ी हुई दर पर मानदेय भुगतान की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।

    मानदेय में 80 प्रतिशत की वृद्धि
    योगी सरकार द्वारा समग्र शिक्षा के अंतर्गत शिक्षामित्रों के मानदेय में ₹8 हजार प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। इससे मानदेय ₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार प्रतिमाह हो गया है, यानी इसमें 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़ी दर से मानदेय मिलने से शिक्षामित्रों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा।

    “योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि कर उनके आर्थिक हितों को मजबूती दी है। बढ़े मानदेय के साथ सितंबर और अक्टूबर के लिए ₹460.23 करोड़ की धनराशि जारी होना शिक्षामित्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।”
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    “मानदेय में वृद्धि से शिक्षामित्रों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा। इससे वे और अधिक उत्साह एवं प्रतिबद्धता के साथ विद्यालयों में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को सशक्त बनाने में योगदान दे सकेंगे।”
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • हर बात सबको बताना पड़ सकता है नुकसानदेह, चाणक्य ने ईमानदारी को लेकर दी थी ये खास सलाह

    हर बात सबको बताना पड़ सकता है नुकसानदेह, चाणक्य ने ईमानदारी को लेकर दी थी ये खास सलाह

     प्राचीन भारत के महान दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राज सलाहकार चाणक्य को जीवन, शासन और व्यवहार पर उनकी तीखी टिप्पणी करने के लिए आज भी याद किया जाता है

    चाणक्य नीति में कहा गया है कि, 'किसी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते हैं और ईमानदार लोगों को सबसे पहले धोखा दिया जाता है।'

    ईमानदारी पर चाणक्य के कथन
    अपने भी यह कथन कई बार सुना होगा। हो सकता है कि सुनकर नजरअंदाज भी कर दिया हो, लेकिन इस कथन के माध्यम से चाणक्य जीवन का सबसे की सबसे जरूरी चीज समझाने की कोशिश करते हैं।

    सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाने का अर्थ है कि वे इस्तेमाल करने लायक होते हैं, ठीक उसी तरह ईमानदार लोग शोषण का आसानी से शिकार बन सकते हैं। हालांकि इस कथन के जरिए चाणक्य ईमानदारी के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसी दुनिया में अज्ञानता या लापरवाही के खिलाफ है, जहां हर कोई निष्पक्ष, स्वार्थी और लोभी है।

    चाणक्य नीति में चाणक्य कहते हैं कि, व्यक्ति को ईमानदारी और बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए। सच बोलना जरूरी है, लेकिन नुकसान से बचने के लिए परिस्थितियों और लोगों को भी समझना उतना ही जरूरी है।

    जरूरत से ज्यादा ईमानदार क्यों हैं खतरनाक?
    चाणक्य कहते हैं कि, जो व्यक्ति अपने सभी विचार, भावनाएं और योजनाएं जाहिर कर देता है, वह अनजाने में ही दूसरों को ऐसी जानकारी दे सकता है, जिसका इस्तेमाल आगे चलकर उसी के खिलाफ किया जा सकता है। ऐसा इंसान आसानी से छल-कपट का शिकार हो सकता है।चाणक्य के ऐसा कहने के पीछे ईमानदारी को गलत ठहराना नहीं है, बल्कि पूरी तरह से बेपरवाह होने से बचने के लिए है।

    चाणक्य कहते हैं कि, ईमानदार होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सबको सब कुछ बता दिया जाए। एक बुद्धिमान व्यक्ति सच बोलते हुए भी यह समझ सकता है कि कब बोलना है, क्या जाहिर करना है और किस पर भरोसा करना है।

    क्या चाणक्य झूठ बोलने की प्रेरणा देता हैं?
    ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। चाणक्य कहते हैं कि आप अपने हर निजी विचार बताए बिना भी सोच कह सकते हैं। आप हर किसी पर फौरन भरोसा किए बिना भी ईमानदार हो सकते हैं। आप अपनी कुछ योजनाओं और निजी मामलों को अपने तक सीमित रखते हुए भी सच्चे बने रह सकते हैं।

    छल और विवेक में भी अंतर होता है। छल में जानबूझकर किसी को गलत ज्ञान या मार्गदर्शन प्रदान करना शामिल है। जबकि विवेक का सीधा मतलब है हर बात को कहना जरूरी नहीं है। इसलिए चाणक्य की चेतावनी को बेईमानी के बजाय विचारशील ईमानदारी के रूप में लेना चाहिए।

  • शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में रायपुर संभाग का दबदबा, ओवरऑल चैंपियन का खिताब जीता

    शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में रायपुर संभाग का दबदबा, ओवरऑल चैंपियन का खिताब जीता

    26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का रंगारंग समापन

    रायपुर संभाग बना ओवरऑल चौम्पियन, बलौदाबाजार में खुलेगा डाइट

    रायपुर, 
     छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार -भाटापारा जिले केे पंडित चक्रपाणी शुक्ल हाई स्कूल मैदान में 3 से 6 अक्टूबर तक आयोजित चार दिवसीय 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का मंगलवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ। शैक्षणिक पांचों संभाग के खिलाड़ियों ने बैंड की धुन पर आकर्षक मार्च पास्ट किया। समारोह के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने ध्वज अवरोहण कर प्रतियोगिता के समापन की विधिवत घोषणा की और विभिन्न विधाओं के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया। शानदार प्रदर्शन के दम पर रायपुर संभाग ने ओवरऑल चौम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया। इस दौरान मंत्री श्री यादव ने बलौदाबाजार में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) खोलने की बड़ी घोषणा की।

    खेलों से बढ़ती है सांस्कृतिक समझ- शिक्षा मंत्री

           खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि खेल से शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ विभिन्न संस्कृतियों, खान-पान और रहन-सहन को भी सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई से 31 अक्टूबर तक चलने वाली इस स्पर्धा का उद्देश्य बच्चों को अलग-अलग जिलों की संस्कृति से रूबरू कराना है। हार-जीत पर सीख देते हुए उन्होंने कहा कि हार से निराश होने के बजाय कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय खेल में शामिल कराए गए श्कुराशश् खेल का आयोजन भी इसी स्पर्धा के तहत बलौदाबाजार में हुआ है।

    विभिन्न खेल स्पर्धाओं के प्रमुख परिणाम

           रग्बी (14 वर्ष) बालक और बालिका दोनों वर्गों में रायपुर संभाग प्रथम, बस्तर द्वितीय तथा दुर्ग संभाग तृतीय स्थान पर रहा। नेटबॉल (19 वर्ष) बालक और बालिका दोनों वर्गों में रायपुर संभाग ने प्रथम, बिलासपुर ने द्वितीय और दुर्ग संभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

    कुराश प्रतियोगिता

          14 वर्ष बालक दुर्ग प्रथम, सरगुजा द्वितीय, रायपुर तृतीय। बालिका वर्ग में रायपुर प्रथम, बिलासपुर द्वितीय, दुर्ग संभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार 17 वर्ष बालक रायपुर प्रथम, सरगुजा द्वितीय, दुर्ग तृतीय। बालिका वर्ग में दुर्ग प्रथम, बिलासपुर द्वितीय, रायपुर तृतीय। 19 वर्ष बालक रायपुर प्रथम, सरगुजा द्वितीय, दुर्ग तृतीय। बालिका वर्ग में बिलासपुर प्रथम, दुर्ग द्वितीय, रायपुर तृतीय स्थान पर रहे।

         इस गरिमामयी अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल,  पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े, भारत स्काउट गाइड के राज्य उपाध्यक्ष विजय केशरवानी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पवन साहु, कलेक्टर बलौदाबाजार -भाटापारा, एसपी, आनंद यादव, राकेश ध्रुव सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे।

  • पुलिस को देखते ही पुनपुन नदी में कूदे लोग, 60 में से दो की डूबने से मौत

    पुलिस को देखते ही पुनपुन नदी में कूदे लोग, 60 में से दो की डूबने से मौत

     फुलवारी शरीफ
    पिपरा थाना क्षेत्र के बेहरावां गांव में पुलिस की छापेमारी सोमवार को उस समय खौफनाक मंजर में बदल गई, जब भारी संख्या में पहुंचे पुलिसकर्मियों की कार्रवाई से बचने के लिए करीब 50-60 लोगों ने जान बचाने के लिए पुनपुन नदी में छलांग लगा दी।

    ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पुलिस ने इस तरह धावा बोला, मानो कोई बड़ी नक्सली या आतंकवादी वारदात हो गई हो। अचानक चारों तरफ पुलिस बल देखकर लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही भगदड़ मच गई और लोग नदी की ओर भागने लगे।

    नदी में ईंट-पत्थर फेंके जाने का आरोप
    ग्रामीणों के अनुसार, भागने के दौरान पुलिस पर ईंट-पत्थर भी चलाए गए। इसके बाद पुलिस की ओर से भी नदी में ईंट-पत्थर फेंके जाने का आरोप है। नदी में कूदे लोग तैरकर दूसरे किनारे निकलने का प्रयास कर रहे थे।

    इसी दौरान लगातार ईंट-पत्थर गिरने से उन्हें नदी से बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया। हालांकि जो लोग तैरने में सक्षम थे, वे किसी तरह दूसरे किनारे पहुंचकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

    दो लोगों की डूबने से मौत
    इस अफरातफरी में फुलवारी शरीफ के ढिबरा निवासी आकाश मांझी और करीब 60 वर्षीय राम मांझी नदी से बाहर नहीं निकल सके। दोनों की डूबने से मौत हो गई। आकाश अपनी नानी के घर बेहरावां आया हुआ था। दोनों ने बचाने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन उन्हें बाहर नहीं निकाला सका। क्योंकि पुलिस गांव नदी के मुहाने पर खड़ा होकर नदी में ईंट पत्थर चला रही थी।

    घटना के बाद बेहरावां गांव में मातम और दहशत का माहौल है। दो मौतों ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की भारी मौजूदगी और कार्रवाई के बाद कई लोग घर छोड़कर चले गए हैं। वहीं, बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी की भी बात सामने आ रही है। गांव में पुलिस बल की मौजूदगी बनी हुई है।

  • बिजली के तार छूते ही धधक उठा ट्रक, देखते ही देखते 4 बसें बनीं आग का शिकार; जोधपुर में मचा हड़कंप

    बिजली के तार छूते ही धधक उठा ट्रक, देखते ही देखते 4 बसें बनीं आग का शिकार; जोधपुर में मचा हड़कंप

     जोधपुर
    खेजड़ली से गुड़ा विश्नोइयां की तरफ जा रहे चारे से भरे ट्रक के बिजली के तारों की चपेट में आने से सोमवार रात आग लग गई। ट्रक में चारा भरा होने के कारण आग तेजी से फैलने लगी और देखते ही देखते लपटें उठने लगीं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    चारे से भरा था ट्रक
    जानकारी के अनुसार सोमवार रात करीब साढ़े बजे चारे से भरा ट्रक गुजर रहा था। इसी दौरान ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार ट्रक के संपर्क में आ गए। शॉर्ट सर्किट के बाद चारे में आग लग गई। आग की लपटें उठती देख आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पानी के टैंकरों की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया

    काफी मशक्कत के बाद बुझी आग
    हादसे की सूचना मिलते ही विवेक विहार थाना पुलिस और चेतक भी मौके पर पहुंच गए। आग की स्थिति को देखते हुए बासनी से दो दमकलें भी बुलाई गईं। दमकलकर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद आग बुझा ली गई।

    ग्रामीणों की सजगता और समय पर पहुंची पुलिस व दमकल टीम की तत्परता से आग को ज्यादा फैलने से रोक लिया गया। इससे ट्रक में भरा काफी चारा भी बचा लिया गया। हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस ने घटनाक्रम की जानकारी जुटाई और बिजली के तारों के संपर्क में आने से आग लगने की प्रारंभिक बात सामने आई है।

    पाल रोड पर खड़ी बसों में भीषण आग, चार बसें जलकर खाक
    जोधपुर में पाल रोड स्थित गांगाणा में एक कारखाने में खड़ी बसों में सोमवार देर रात भीषण आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। आग की चपेट में आने से कारखाने में खड़ी चार बसें जल गईं। आग लगने की सूचना मिलते ही अफरा-तफरी मच गई।

    कारखाना कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए कुछ बसों को समय रहते बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। सूचना पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए। आग लगने से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हड़कंप मच गया।