Author: NewseDay

  • अधोसंरचना विकास को रफ्तार देने की तैयारी, एक लाख करोड़ से अधिक खर्च का लक्ष्य

    अधोसंरचना विकास को रफ्तार देने की तैयारी, एक लाख करोड़ से अधिक खर्च का लक्ष्य

    भोपाल 

    इस वित्तीय वर्ष 2026-2027 में मध्यप्रदेश सरकार ने बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर सड़क, बांध, बिजली, नहर निर्माण सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक व्यय का लक्ष्य रखा है। इस राशि में राज्य की अपनी आय, विभिन्न निगमों के संसाधन और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से जुटाए जाने वाले ऋण सहित अन्य वित्तीय स्रोत शामिल हैं। वास्तविक उपलब्धता और व्यय बजट दस्तावेजों तथा वर्ष के दौरान जारी आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों से स्पष्ट होंगे।

    विकास परियोजनाओं के लिए इतनी बड़ी राशि का प्रावधान इसीलिए संभव हो सका है, क्योंकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में हर वर्ष निरंतर वृद्धि हो रही है। जीएसडीपी में बढ़ोतरी होने से राज्य सरकारों की ऋण लेने की क्षमता भी बढ़ जाती है, हालांकि ऋण की वास्तविक सीमा केंद्र सरकार के नियमों, राजकोषीय उत्तरदायित्व प्रावधानों और अन्य वित्तीय मानकों पर निर्भर करती है। मध्यप्रदेश सरकार इस बढ़ी हुई वित्तीय क्षमता का उपयोग उपरोक्त विकास परियोजनाओं के लिए कर रही है।

    इस लक्ष्य का उद्देश्य प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना और उनके क्रियान्वयन में तेजी लाना है। मध्यप्रदेश में सड़क क्षेत्र की कई परियोजनाओं के साथ केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से संबंधित कार्य भी विभिन्न चरणों में संचालित हैं। इन परियोजनाओं की लागत, वित्तपोषण व्यवस्था और प्रगति का आकलन संबंधित विभागों तथा केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
    इन परियोजनाओं के अंतर्गत बांध, नहर और अन्य जल-संरचनाओं के निर्माण से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अलावा बिजली, सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कार्यों पर होने वाला व्यय परियोजना-विशिष्ट स्वीकृतियों, चरणबद्ध बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर निर्भर करेगा।

    इतने बड़े निवेश कार्यक्रम की सफलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह होगा कि बजट में किए गए प्रावधान वास्तविक परिसंपत्तियों में कितनी तेजी और दक्षता से परिवर्तित होते हैं। परियोजनाओं में समय और लागत की वृद्धि को नियंत्रित करना, भुगतान व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखना तथा प्रत्येक परियोजना के परिणामों की नियमित निगरानी करना वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना धन की व्यवस्था करना।
    इस लिहाज से सरकार के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाना और दूसरी ओर राजकोषीय स्थिरता बनाए रखना। 

    यदि राजस्व संसाधनों में वृद्धि, ऋण प्रबंधन, व्यय की प्राथमिकता और परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के बीच संतुलन कायम रहता है, तो एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तावित निवेश प्रदेश की दीर्घकालीन अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सरकार के निर्धारित निवेश लक्ष्य का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करना और प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराना है। हालांकि, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि लक्ष्य या बजट अनुमान को दर्शाती है; इसे वास्तविक व्यय नहीं माना जा सकता। निर्धारित प्रावधान, ऋण से प्राप्त राशि और परियोजनावार वास्तविक खर्च का अंतिम आकलन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद उपलब्ध आधिकारिक लेखा और वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर किया जाना अधिक उपयुक्त होगा।

    "हर जगह, हरसंभव—प्रदेश विकास में सहभागिता” की भावना के साथ अधोसंरचना निर्माण, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इन प्रयासों से विकास की गति तेज होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
    एक लाख करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर व्यय से एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

  • बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने मिलकर करें प्रभावी प्रयास : मंत्री  निर्मला भूरिया

    बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने मिलकर करें प्रभावी प्रयास : मंत्री निर्मला भूरिया

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम को प्रभावी बनाने के लिए 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) का व्यापक मैदानी तंत्र तैयार किया गया है। अब बाल विवाह के हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लक्षित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अकादमी में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में बाल विवाह रोकथाम की रणनीति, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के समन्वय पर मंथन हुआ।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने कहा है कि बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए शासन, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रभावी एवं समन्वित प्रयास करने होंगे। बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए तैनात बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (CMPO) केवल कानून के क्रियान्वयनकर्ता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत हैं।

    मंत्री  भूरिया मंगलवार को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ही बाल विवाह के मामलों में समयबद्ध हस्तक्षेप, समन्वय और संवेदनशील कार्रवाई के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल का वास्तविक प्रभाव मैदानी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।

    मंत्री  भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश ने बाल विवाह रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के अनुसार 20-24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह का अनुपात NFHS-5 के 23.1 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ से बाल विवाह उन्मूलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता मिली है। मध्यप्रदेश में भी बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रभावी, समन्वित और सतत प्रयासों को मजबूत किया जा रहा है।

    35 हजार से अधिक अधिकारियों को का दायित्व

     भूरिया ने बताया कि प्रदेश में 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) को विभिन्न विभागों से नामित किया गया है। यह व्यवस्था ग्राम स्तर तक निगरानी और बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने के लिए है । जिला स्तर से लेकर अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और नगरीय क्षेत्रों तक अधिकारियों की मौजूदगी का उद्देश्य यही है कि बाल विवाह की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई प्रशासन के किसी दूरस्थ स्तर तक पहुंचने का इंतजार न करे, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही त्वरित हस्तक्षेप संभव हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना में 18 वर्ष से पहले विवाह होने पर लाभ नहीं मिलने का प्रावधान बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने और परिवारों को बाल विवाह से दूर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल को गति देने पर जोर

     भूरिया ने कहा कि विभाग द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल शुरू की गई है। इसके तहत ऐसे ग्रामों को मान्यता दी जा रही है, जहां पिछले एक वर्ष में कोई बाल विवाह नहीं हुआ है। यह पहल केवल बाल विवाह रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समुदाय को बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करने का माध्यम है।उन्होंने कहा कि किशोरियों के लिए जीवन कौशल शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व विकास जैसे कार्यक्रम उन्हें अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में सक्षम बना रहे हैं।

    मंत्री  भूरिया ने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों से कहा कि देवउठनी ग्यारस जैसे संवेदनशील अवसरों को देखते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए अभी से तैयारियां तेज करना जरूरी है।उन्होंने कहा कि बाल विवाह के जोखिम वाले परिवारों तक केवल कानूनी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ पहुंचना होगा। गरीबी, सामाजिक दबाव, असुरक्षा और अवसरों की कमी कई बार बाल विवाह के पीछे कारण बनते हैं। ऐसे में कानून के साथ परामर्श, शिक्षा, सामाजिक सहयोग और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

    बाल विवाह रोकथाम के लिए हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लक्षित कार्रवाई जरूरी : आयुक्त संदीप जी.आर.

    आयुक्त महिला बाल विकास  संदीप जी.आर. ने कहा है कि मध्यप्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए अब सामान्य प्रयासों से आगे बढ़कर बाल विवाह प्रभावित क्षेत्रों में हॉटस्पॉट आधारित और लक्षित कार्रवाई पर विशेष ध्यान देना होगा। जिन ग्राम पंचायतों, विकासखंडों और जिलों में बाल विवाह की घटनाएं अधिक हैं, वहां उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर योजनाबद्ध एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के प्रयासों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए जिला, अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और शहरी निकाय स्तर तक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि बाल विवाह की पहचान, रोकथाम और आवश्यक कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी तंत्र विकसित हो सके।  संदीप ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग के बिना बाल विवाह की रोकथाम के प्रयास पूर्ण नहीं हो सकते। इसी व्यापक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP) योजना की जिला कार्ययोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (PCMA) के सुदृढ़ प्रवर्तन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

    संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास  छोटे सिंह ने कहा कि पंचायतों की भूमिका केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकार भी उनकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पंचायत विकास योजनाओं और ग्राम सभाओं में बाल विवाह रोकथाम को प्रमुखता से शामिल किया जाए तथा ग्राम सभा में चर्चा हो कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के लिए सही है या गलत। विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार ने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक ब्लॉक और क्षेत्र में बाल विवाह पूरी तरह रोका जाए। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के कार्यों की नियमित समीक्षा के साथ उनकी जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए।

    यूनिसेफ ने किशोर सशक्तिकरण को बताया स्थायी बदलाव की कुंजी

    यूनिसेफ के राज्य प्रमुख  विलियम हेनलोन जूनियर ने कहा कि किशोरावस्था भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। बाल विवाह रोकने के लिए जरूरी है कि किशोर-किशोरियां शिक्षा से जुड़े रहें, सुरक्षित रहें, जीवन कौशल सीखें और अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में उनकी भागीदारी हो। इससे बाल विवाह की रोकथाम के साथ समाज के विकास को भी गति मिलेगी।

    इस अवसर पर मंत्री  भूरिया ने यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित बाल विवाह के प्रभावी रोकथाम पर आधारित मार्गदर्शिका तथा प्रशिक्षण मोड्यूल का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने परिसर में लगे प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर यंग चैम्पियंस  हुमा ख़ान और आशु सुंदरी ने अपने अनुभव साझा किये।

     

  • गर्मी से मिलेगी राहत या फिर बढ़ेगी उमस? 11 अक्टूबर को राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में बारिश की संभावना

    गर्मी से मिलेगी राहत या फिर बढ़ेगी उमस? 11 अक्टूबर को राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में बारिश की संभावना

    जयपुर
    राजस्थान में मानसून की विदाई के बाद अक्टूबर में गर्मी बढ़ गई है। गर्मी के दौर के बीच मौसम विभाग ने फिर बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार 11 अक्टूबर को प्रदेश के बीकानेर और जोधपुर संभाग में हल्की बरसात की संभावना है। इससे पहले राजस्थान में पारे में वृद्धि देखी जा रही है।

    सोमवार 5 अक्टूबर को भी प्रदेश में ज्यादातर स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किए गए। अभी अधिकतम तापमान आगामी दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस और बढ़ने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। हालांकि कुछ स्थानों पर रात का यानि न्यूनतम तापमान सामान्य या उसके आस-पास रहने से रात के समय हल्की ठंडक का अहसास हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहेगा। बात करें अधिकतम तापमान की तो राजस्थान में 5 अक्टूबर को 8 स्थानों का अधिकतम तापमान 38 डिग्री से भी ऊपर दर्ज किया गया है। प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान श्रीगंगानगर का 39.7 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से भी 3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। वहीं चूरू का अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि सामान्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। बीकानेर 38.8, वनस्थली 38.6, जैसलमेर 38.5, फलोदी 38.4, बाड़मेर 38.1 और कोटा का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं फतेहपुर का 37.7, लूणकरनसर और अलवर का 37.6, जोधपुर शहर का 37.5, चित्तौड़गढ़ और संगरिया का 37.4, जयपुर और झुंझुनूं का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। राजस्थान के हिल स्टेशन माउंटआबू का भी अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

    माउंट आबू का रहा सबसे कम न्यूनतम तापमान
    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अधिकतम ही नहीं न्यूनतम तापमान में भी वृद्धि देखी जा रही है। 5 अक्टूबर को प्रदेश में सबसे अधिक न्यूनतम तापमान फलोदी का 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है। श्रीगंगानगर का 25.8, जोधपुर शहर और जालौर का 25.2, जयपुर का 25.1 और बीकानेर का 25 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 14.5 डिग्री सेल्सियस माउंटआबू का और इसके बाद 17.6 डिग्री सेल्सियस डबोक का रहा

    मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर का अपडेट
    मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार आज से राज्य में मौसम ड्राई रहेगा और धूप रहेगी। हालांकि तापमान में कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिलेगा। दिन में अधिकांश शहरों का तापमान 30 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हो सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 18 से 25 डिग्री के बीच दर्ज होने की संभावना है।

  • एचसीएल टेक लखनऊ के 10वें स्थापना दिवस में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी, आईटी सिटी फेज-2 की रखी आधारशिला

    एचसीएल टेक लखनऊ के 10वें स्थापना दिवस में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी, आईटी सिटी फेज-2 की रखी आधारशिला

     लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ को एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटिंग और डीप टेक टेक्नोलॉजी का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। मंगलवार को एचसीएल टेक लखनऊ के 10वें स्थापना दिवस पर उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में लखनऊ को भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटी के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए कम से कम 50 विश्वस्तरीय एआई स्टार्टअप स्थापित कर उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाने वाला इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने एचसीएल को भी इस अभियान में साथ आने का प्रस्ताव दिया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने एचसीएल आईटी सिटी लखनऊ के फेज-2 की आधारशिला रखी और परियोजना मॉडल का उद्घाटन किया। करीब 500 करोड़ रुपये के निवेश वाले दूसरे चरण में लगभग छह हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उन्होंने इमर्जिंग टेक स्किलिंग सेंटर का भी शुभारंभ किया। इसके जरिए छात्रों, शिक्षकों, वर्किंग प्रोफेशनल्स और सरकारी अधिकारियों को उभरती तकनीक में प्रशिक्षित किया जाएगा।
     
    100 एकड़ के एचसीएल टेक लखनऊ परिसर में 12,520 से अधिक टेक कर्मचारी कार्यरत हैं और छह हजार से अधिक फ्रेशर्स को नौकरी का अवसर मिला है। टेकबी कार्यक्रम से 2,200 से अधिक युवाओं को इंडस्ट्री रेडी स्किल और टेक्नोलॉजी करियर से जोड़ा गया है।
     
    आईटी-आईटीईएस निर्यात एक लाख करोड़ के पार

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक दशक पहले आईटी और आईटीईएस के माध्यम से 12 से 15 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता था, जो अब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। अगले चार वर्ष में इसे 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 3,800 करोड़ से बढ़कर 45 हजार करोड़ रुपये हो गया है और 2030 तक इसे दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
     
    उन्होंने कहा कि भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट में प्रदेश का योगदान 60 प्रतिशत है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा में आईटी पार्क चल रहे हैं। सात सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क कार्यरत हैं, जबकि वाराणसी, बरेली, कानपुर और गोरखपुर में नए आईटी पार्क बन रहे हैं। नोएडा और लखनऊ को यू-हब यानी डीप टेक हब के रूप में विकसित करने का भी निर्णय लिया गया है।
     
    यूपी का युवा अब यहीं बना रहा दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दस वर्ष पहले अच्छी डिग्री लेने वाले यूपी के युवाओं को करियर के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जाना पड़ता था। अब प्रदेश का युवा लखनऊ में रहकर दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी बना रहा है और दुनिया के युवा भी यूपी आ रहे हैं। उन्होंने एचसीएल कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर बताया।
     
    उन्होंने कहा कि शिव नादर ने एचसीएल की पांच दशक की यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू की थी, जो आज वैश्विक बन चुकी है। दस वर्ष पहले एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में एचसीएल ने अपने कार्यक्रम तीन हजार से अधिक गांवों और 50 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचाए हैं।
     
    पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया था : मुख्यमंत्री योगी

    पूर्ववर्ती सरकारों पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक दशक पहले यूपी में काम करना चुनौतीपूर्ण था। प्रदेश की छवि खराब थी, असुरक्षा का माहौल था, इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था और आईटी सेक्टर की बुनियादी जरूरत बिजली भी गायब थी। उन…

  • शुभमन-शेफाली समेत 4 भारतीयों पर ICC की नजर, सितंबर के प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड के लिए नामांकन

    शुभमन-शेफाली समेत 4 भारतीयों पर ICC की नजर, सितंबर के प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड के लिए नामांकन

    नई दिल्ली
    एशियन गेम्स 2026 में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले खिलाड़ी आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड जीतने के प्रबल दावेदार बने हैं। भारत की महिला और पुरुष दोनों टीमों ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। इस दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंच अवॉर्ड की रेस में हैं। भारत के शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा, श्री चरणी और शेफाली वर्मा इस अवॉर्ड को जीतने की रेस में शामिल हैं। जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा और श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू भी इस अवॉर्ड को जीत सकती हैं।

    महिलाओं की शॉर्टलिस्ट में एशिया कप और एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन को शामिल किया गया है। अटापट्टू ने बल्ले और गेंद दोनों से असर डाला, जबकि शेफाली ने टॉप ऑर्डर में शानदार प्रदर्शन किया और विमेंस एशिया कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं। इस बीच, चरणी आईसीसी विमेंस टी20 बॉलिंग रैंकिंग में अब तक के सबसे ज्यादा रेटिंग पॉइंट्स तक पहुंचीं। पुरुषों में अभिषेक शर्मा ने चार टी20 में 229 रन बनाए, जिसमें अफगानिस्तान के खिलाफ रिकॉर्ड 30 गेंदों में सेंचुरी शामिल है, जबकि गिल ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ दो वनडे में 333 रन बनाए, जिसमें उनकी दूसरी डबल सेंचुरी भी शामिल है। रजा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जिम्बाब्वे की घरेलू वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे।

    अभिषेक शर्मा
    अभिषेक ने पिछले साल सितंबर में यह अवॉर्ड जीता था। उन्होंने भारत के किसी भी बैटर की तरफ से सबसे तेज टी20 सेंचुरी लगाई, जिससे उन्होंने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ रोहित शर्मा के 35 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड को बेहतर किया। फिरोजशाह कोटला में अफगानिस्तान के खिलाफ शर्मा की पारी आईसीसी के किसी भी फुल-मेंबर देश के किसी भी बैटर की सबसे तेज सेंचुरी भी थी। बाएं हाथ के इस ओपनर ने सीरीज के तीसरे मैच में 34 गेंदों में 108 रन बनाए।

    श्री चरणी
    चरणी को जून में भी इस अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और सितंबर महीने में सात टी20 मैचों में 3.30 के शानदार इकॉनमी रेट के साथ 18 विकेट लिए। एशियन गेम्स के फाइनल में 13 रन देकर दो विकेट लेने के बाद, उन्होंने आईसीसी विमेंस टी20 बॉलिंग रैंकिंग में अब तक के सबसे ज्यादा रेटिंग पॉइंट्स हासिल किए, जो 817 पॉइंट्स तक पहुंचे।

    शुभमन गिल
    इंडिया के कप्तान अपने पांचवें आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड के लिए लाइन में हैं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में वेस्ट इंडीज के खिलाफ पहले वनडे में 110 रन बनाए और फिर वनडे में अब तक का सबसे तेज दोहरा शतक लगाया। उनकी तूफानी 223 रन की पारी सिर्फ 133 गेंदों पर आई और उनकी टीम ने 8 विकेट बाकी रहते और 39 गेंदें बाकी रहते 406 रन का बड़ा टारगेट हासिल किया।

    शेफाली वर्मा
    इस ओपनर ने 184.61 के स्ट्राइक-रेट से कुल 360 रन बनाए और विमेंस एशिया कप में भारत के सफल कैंपेन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी थीं। इस दौरान उन्होंने 6 विकेट भी लिए, जिससे भारत ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीता, जहां उन्होंने सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ नाबाद 100 और श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 48 रन बनाए।

  • दशहरा पर अन्नदाता किसानों को मिलेगा योगी सरकार का उपहार

    दशहरा पर अन्नदाता किसानों को मिलेगा योगी सरकार का उपहार

    लखनऊ

    योगी सरकार अन्नदाता किसानों को दशहरा पर उपहार देगी। उपहार स्वरूप प्रदेश के किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र प्राप्त होगा। इसके लिए अन्नदाता किसानों को 7 से 20 अक्टूबर तक www.agriculture.up.gov.in पर आवेदन करना होगा। 

    संयुक्त कृषि निदेशक (अभियंत्रण) बलराम वर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से संचालित नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजनांतर्गत सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना में 2166 कृषि यंत्र तथा प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फ़ॉर इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिडयू अंतर्गत 1755 कृषि यंत्र तथा अन्य योजनाओं के कृषि यंत्र/ कृषि रक्षा उपकरण के लिए अनुदान दिया जाएगा। 

    कस्टम हायरिंग सेंटर व फार्म मशीनरी बैंक (10-10 लाख), किसान ड्रोन व अन्य एकल कृषि यंत्र पर अनुदान दिया जाएगा। वहीं फसल अवशेष प्रबंधन के तहत एकल कृषि यंत्र व कस्टम हायरिंग सेंटर (30 लाख), त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत मेज सेलर, मिलेट पर्लर, कीट रोग नियंत्रण योजना के तहत कृषि रक्षा यंत्र, सीडीपी योजना के तहत कृषि यंत्र के लिए किसान आवेदन कर सकेंगे। 

    उन्होंने बताया कि www.agriculture.up.gov.in पर यंत्रों की बुकिंग/जनपदवार आवेदन किया जाएगा। इस लिंक पर किसान कार्नर के अंतर्गत यंत्र बुकिंग प्रारंभ पर क्लिक कर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। यहां पूर्ण विवरण, यंत्र बुकिंग, अनुदान प्रक्रिया आदि की भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

  • बक्सर में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा महंगा, रफ्तार पकड़ते ही सिस्टम भेजेगा

    बक्सर में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा महंगा, रफ्तार पकड़ते ही सिस्टम भेजेगा

    बक्सर
     जिले की सड़कों पर वाहन चलाने वाले लोगों के लिए यातायात नियमों की अनदेखी अब आसान नहीं होगी। खासकर खाली दिखने वाली सड़क पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों पर अब पुलिस की सीधी नजर रहेगी।

    जिले में पहली बार नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाले प्रमुख मार्गों पर स्पीड गन से लैस तीन हाइवे पेट्रोलिंग वाहन तैनात किए गए हैं।

    इनकी मदद से वाहन को रोके बिना ही उसकी गति और अन्य यातायात नियमों की निगरानी की जा सकेगी और उल्लंघन मिलने पर चालान सीधे मोबाइल पर भेजा जा सकेगा।

    जिले के लोगों के लिए यह नया अनुभव होगा। एक स्पीड गन जिले में पहले से भी है, लेकिन उसका इस्तेमाल जिले की बाहरी सीमा से गुजरने वाले आरा-मोहनिया हाइवे पर होता है। अब जिले से गुजरने वाले सभी चार नेशनल हाइवे पर स्पीड गन की निगरानी होगी।

    इन वाहनों को डुमरांव-मलियाबाग पथ, बक्सर-आरा एनएच-922 और चौसा-मोहनिया उच्च पथ पर तैनात किया गया है। इससे इन मार्गों से रोजाना आवागमन करने वाले जिले के आम वाहन चालकों को अब गति सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा।

    अभी तक जिले में एक स्पीड गन उपलब्ध थी, लेकिन उसकी तैनाती आरा-मोहनिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिले की बाहरी सीमा के सीमित हिस्से में होती थी।

    नए वाहनों की तैनाती से पहली बार जिले के प्रमुख और नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाले मार्गों पर स्पीड निगरानी का दायरा बढ़ेगा।

    खाली सड़क देखकर बढ़ाई रफ्तार, तो मोबाइल पर आएगा चालान
    हाइवे पर अधिकतम अनुमत गति कई हिस्सों में 80 या 100 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है, लेकिन बस्तियों, विद्यालयों, बाजारों और आरओबी के आसपास निर्धारित गति इससे काफी कम रहती है।

    ऐसे स्थानों पर 30, 40, 50 या 60 किमी प्रति घंटा की सीमा का पालन करना होता है। अक्सर सड़क खाली देखकर चालक इन संवेदनशील स्थानों पर भी रफ्तार बढ़ा देते हैं। अब स्पीड गन ऐसे वाहनों को चिह्नित कर सकेगी।

    यातायात डीएसपी संतोष कुमार के अनुसार, तीनों वाहनों में स्पीड गन के साथ जीपीएस और अन्य उपकरण लगे हैं। इनकी निगरानी जिला मुख्यालय के साथ यातायात मुख्यालय पटना से भी की जाएगी।

    कैमरे की जद में आने वाले वाहन की निगरानी के बाद नियम उल्लंघन पर चालान किया जा सकेगा। वाहन चालकों को चाहिए कि सड़क पर चलते समय गति सीमा वाले बोर्ड पर लगातार ध्यान रखें।

    हेलमेट-सीट बेल्ट और कागजात की भी होगी निगरानी
    नए वाहनों की निगरानी सिर्फ ओवरस्पीड तक सीमित नहीं रहेगी। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और सही कागजात के वाहन चलाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। यानी सड़क पर पुलिसकर्मी को देखकर ही हेलमेट या सीट बेल्ट लगाने की आदत अब काम नहीं आएगी।

    एनएच-922 पर तैनात वाहन बक्सर गोलंबर से आरा सीमा तक निगरानी करेगा। वाहनों में दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए स्ट्रेचर और आपात उपकरण भी उपलब्ध हैं।

    यातायात पुलिस को उम्मीद है कि नियमों के पालन से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और हेलमेट-सीट बेल्ट के इस्तेमाल से हादसों में जान जाने का जोखिम भी कम होगा।

  • ‘द बैटमैन पार्ट II’ की शूटिंग रुकी, निर्देशक मैट रीव्स ने लिया ब्रेक

    ‘द बैटमैन पार्ट II’ की शूटिंग रुकी, निर्देशक मैट रीव्स ने लिया ब्रेक

    फिल्म 'द बैटमैन पार्ट II'  के लिए दर्शकों को और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। क्योंकि फिल्म के निर्देशक मैट रीव्स व्यक्तिगत कारणो के चलते फिल्म से खुद को अलग कर चुके हैं।

    अस्थायी रूप से रुका प्रोडक्शन
    फिल्म 'द बैटमैन पार्ट II' की शूटिंग कुछ दिनों से लंदन में चल रही थी। मगर अब इसे रोक दिया गया है। फिल्म के निर्माता वार्नर ब्रदर्स और डीसी स्टूडियोज ने सोमवार को इसकी पुष्टि की जिससे इस सीक्वल को लेकर एक और नया मोड़ आ गया है, जिसकी रिलीज डेट पहले ही कई बार आगे बढ़ाई जा चुकी है। हालांकि अब तक फिल्म की रिलीज डेट 18 फरवरी 2028 ही बताई जा रही है।

    स्टूडियो ने दिया बयान
    हॉलीवुड रिपोर्टर के अनुसार स्टूडियो ने एक बयान में कहा, ‘मैट रीव्स के पारिवारिक मामलों पर ध्यान देने के कारण 'द बैटमैन पार्ट II' का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है। मैट को डीसी स्टूडियोज का पूरा समर्थन प्राप्त है और हम जल्द ही इस सफर को फिर से शुरू करने की उम्मीद करते हैं।’

     फिल्म ‘बैटमैन’ के बारे में

    • फिल्म 'द बैटमैन पार्ट II' में रॉबर्ट पैटिनसन बैटमैन के रूप में वापसी करेंगे।
    • फिल्म में एंडी सर्किस और कॉलिन फैरेल क्रमशः अल्फ्रेड और पेंगुइन की भूमिकाएं निभाएंगे।
    • वहीं फिल्म में स्कारलेट जोहानसन, सेबेस्टियन स्टेन, ब्रायन टायरी हेनरी, जेमी लॉसन, चार्ल्स डांस, गिल पेरेज-अब्राहम और सेबेस्टियन कोच नए चेहरों के रूप में फिल्म में एंट्री लेंगे।
    • फिल्म 18 फरवरी 2028 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
  • चंडीगढ़ में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ निकाला रोष मार्च

    चंडीगढ़ में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ निकाला रोष मार्च

    चंडीगढ़.

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चंडीगढ़ कांग्रेस ने मंगलवार को इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ रोष मार्च निकाला।

    हाथों में तिरंगा लेकर प्रदर्शनकारी डीसी कार्यालय की ओर बढ़े। कार्यालय से कुछ दूरी पहले चंडीगढ़ पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने वहीं प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग तथा केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की ने कहा कि कहा कि कांग्रेस इस अभियान को चंडीगढ़ तक सीमित नहीं रखेगी। आने वाले दिनों में शहर के प्रत्येक वार्ड, गांव और सेक्टर तक अभियान पहुंचाया जाएगा। मार्च में कांग्रेस के पार्षदों, जिला व ब्लॉक पदाधिकारियों, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल तथा समाजवादी पार्टी सहित इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए।

  • ब्रॉडकास्टर्स ने दिखाई बेरुखी, पाकिस्तान क्रिकेट के राइट्स खरीदने वाला सिर्फ एक बोलीदाता

    ब्रॉडकास्टर्स ने दिखाई बेरुखी, पाकिस्तान क्रिकेट के राइट्स खरीदने वाला सिर्फ एक बोलीदाता

    नई दिल्ली
    पाकिस्तान क्रिकेट के लिए मैदान के बाहर से भी बुरी खबर आई है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को अपने घरेलू इंटरनेशनल मैचों के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स रिजर्व प्राइस से करीब आधी कीमत में बेचने पड़े हैं. 60 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के रिजर्व प्राइस के मुकाबले सिर्फ 35 करोड़ रुपये की बोली आई और राज्य प्रसारक पाकिस्तान टेलीविजन कॉरपोरेशन (PTV) अकेला बोलीदाता रहा.

    PCB ने हाल ही में 25 घरेलू इंटरनेशनल मैचों के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स के लिए टेंडर जारी किया था. बोर्ड ने इन राइट्स के लिए 600 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का रिजर्व प्राइस तय किया था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में किसी कंसोर्टियम को बोली लगाने की इजाजत नहीं दी गई. नतीजा यह रहा कि बाजार में मौजूद संभावित खरीदारों की संख्या बेहद सीमित रह गई.

    60 करोड़ की उम्मीद, 35 करोड़ में सौदा
    एक विश्वसनीय सूत्र के मुताबिक PTV ने 350 मिलियन पाकिस्तानी रुपये की बोली लगाई, जो PCB के तय रिजर्व प्राइस से काफी कम थी. इसके बावजूद PTV अकेला बोलीदाता होने के कारण राइट्स हासिल करने में सफल रहा.

    इस समझौते में पाकिस्तान के 25 घरेलू इंटरनेशनल मैच शामिल हैं. इनमें पांच टेस्ट, 14 वनडे और छह टी20 इंटरनेशनल मुकाबले हैं.

    पाकिस्तान को इस महीने श्रीलंका के खिलाफ तीन टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने हैं. इसके बाद इंग्लैंड के साथ सात मैचों की त्रिकोणीय वनडे सीरीज प्रस्तावित है. अगले महीने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच भी खेले जाने हैं.

    ब्रॉडकास्टर्स क्यों हुए दूर?
    PCB के सामने सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ कम बोली नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के हालिया प्रदर्शन ने भी ब्रॉडकास्टिंग बाजार को प्रभावित किया है. सूत्र का कहना है कि टीम के प्रदर्शन के उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने से स्पॉन्सर्स और विज्ञापनदाता फिलहाल पाकिस्तान क्रिकेट से दूरी बनाए हुए हैं.

    यानी मैदान पर खराब प्रदर्शन का असर अब सीधे क्रिकेट की कमाई पर दिखाई देने लगा है.

    इसके अलावा पुराने ब्रॉडकास्टिंग सौदों का बकाया भी PCB के लिए बड़ी समस्या बन गया है.कम से कम तीन ब्रॉडकास्टर्स पर पिछले समझौतों का पैसा अभी बाकी बताया जा रहा है.ये कंपनियां पहले कंसोर्टियम के जरिए पाकिस्तान क्रिकेट के राइट्स हासिल करती रही हैं.

    दिलचस्प बात यह है कि इन कंपनियों को इस बार बोली प्रक्रिया से बाहर नहीं किया गया था.उन्होंने खुद ही टेंडर में हिस्सा नहीं लिया.पाकिस्तान क्रिकेट के राइट्स खरीदने वाली एक प्रमुख कंपनी ने भी इस बार कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

    PSL में भी नहीं मिला था मनमाफिक रिस्पॉन्स
    PCB के लिए परेशानी सिर्फ इंटरनेशनल क्रिकेट तक सीमित नहीं है.इस साल पाकिस्तान सुपर लीग के 11वें सीजन के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को लेकर भी बोर्ड को उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी.

    PSL में दो नई टीमों के जुड़ने के बावजूद ब्रॉडकास्टिंग राइट्स के लिए बाजार में वैसा उत्साह नहीं दिखा, जिसकी PCB को उम्मीद थी.पिछले साल के PSL राइट्स खरीदने वाला एक ब्रॉडकास्टर अब भी बोर्ड का अरबों पाकिस्तानी रुपये बकाया है.

    अगले राइट्स पर भी सवाल
    मौजूदा समझौते में जनवरी 2027 में आयरलैंड के खिलाफ तीन टी20 इंटरनेशनल और उसके बाद आयरलैंड तथा जिम्बाब्वे के साथ सात मैचों की त्रिकोणीय सीरीज भी शामिल है. हालांकि जिम्बाब्वे ने अपने क्रिकेट बोर्ड से जुड़े अंदरूनी मसलों के कारण पाकिस्तान दौरे पर जाने में असमर्थता जताई है.

    ऐसे में PCB के सामने चुनौती सिर्फ राइट्स बेचने की नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट के लिए ब्रॉडकास्टर्स, स्पॉन्सर्स और विज्ञापनदाताओं का भरोसा दोबारा हासिल करने की भी है.

    60 करोड़ का रिजर्व प्राइस और सिर्फ 35 करोड़ की बोली का यह अंतर पाकिस्तान क्रिकेट के मौजूदा कमर्शियल हालात की तस्वीर जरूर दिखाता है.