Author: NewseDay

  • मंगलवार और गुरुवार को अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए मिलेगी सीधी रेल सुविधा

    मंगलवार और गुरुवार को अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए मिलेगी सीधी रेल सुविधा

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के रेल यात्रियों को बड़ी सुविधा मिली है। अम्बिकापुर से हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित एक्सप्रेस ट्रेन की सेवा अब सप्ताह में एक दिन के स्थान पर दो दिन उपलब्ध होगी। मंगलवार को अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से द्विसाप्ताहिक ट्रेन को सांसद  चिंतामणि महाराज ने हरी झंडी दिखाकर निर्धारित सुबह 7.30 पर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों से मुलाकात कर उन्हें पुष्प भेंट किए और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

    दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल द्वारा गाड़ी संख्या 22407 अम्बिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस का संचालन अब प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को किया जाएगा। ट्रेन अम्बिकापुर से प्रातः 7.30 बजे रवाना होगी। वहीं गाड़ी संख्या 22408 हजरत निजामुद्दीन-अम्बिकापुर एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार एवं मंगलवार को रात्रि 11 बजे हजरत निजामुद्दीन से रवाना होगी। सेवा आवृत्ति बढ़ाए जाने से सरगुजा संभाग के यात्रियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सप्ताह में एक अतिरिक्त सीधी रेल सेवा उपलब्ध हो गई है।

    सरगुजा संभाग के यात्रियों की लंबे समय से थी मांगकृसांसद  चिंतामणि महाराज

     सांसद  चिंतामणि महाराज ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन ट्रेन संचालन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि रेल सेवा की आवृत्ति बढ़ने से पूरे सरगुजा संभाग के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहले सप्ताह में एक दिन ट्रेन चलने के कारण सभी यात्रियों को यात्रा का अवसर नहीं मिल पाता था। अब अतिरिक्त फेरा शुरू होने से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रथम दिन भी यात्रियों में नई सेवा को लेकर उत्साह दिखाई दिया।  

     रायगढ़, जशपुर क्षेत्र सहित अन्य स्थानों से भी यात्री इस ट्रेन से यात्रा करने पहुंचे। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति सरगुजा संभाग की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।

    यात्रियों की मांग पर बढ़ाई गई ट्रेन की आवृत्तिकृडीआरएम  राकेश रंजन

    डीआरएम  राकेश रंजन ने बताया कि क्षेत्र के लोगों द्वारा लंबे समय से दिल्ली के लिए संचालित रेल सेवा को सप्ताह में एक दिन से बढ़ाकर दो दिन करने की मांग की जा रही थी। जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर रेल मंत्रालय द्वारा ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाकर सप्ताह में दो दिन की गई है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल अम्बिकापुर बल्कि ट्रेन के मार्ग में आने वाले विभिन्न स्टेशनों के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के लोग इस अतिरिक्त रेल सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करेंगे।

    अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में बढ़ेंगी सुविधाएं

    डीआरएम  रंजन ने अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेशन में नया प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। रेलवे लाइनों का विस्तार करने के साथ ही बड़े फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का निर्माण भी कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कोचिंग सुविधाओं में सुधार का कार्य किया जा रहा है। भविष्य में अम्बिकापुर से और ट्रेनों के संचालन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जरूरी अधोसंरचना और सुविधाओं के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए आवागमन होगा आसान- महापौर

    नगर निगम महापौर अंबिकापुर के मती मंजूषा भगत ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन सीधी ट्रेन की सुविधा मिलना नगरवासियों और पूरे क्षेत्र के यात्रियों के लिए उपयोगी है। इससे दिल्ली आने-जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों सहित अन्य यात्रियों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने इस रेल सुविधा के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति नगरवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

    इस अवसर पर डीसीएम  एस. भारतीयन, एसआर डीआरएम  अहूजा, पार्षद  आलोक दुबे, पार्षद  रविकांत उरांव,  भारत सिंह सिसोदिया, मती अरुणा सिंह,  विनोद हर्ष सहित जनप्रतिनिधि, रेलवे के अधिकारी और वरिष्ठ नागरिक गण उपस्थित रहे।

     

  • सितंबर में आबकारी राजस्व ने लगाई ऐतिहासिक छलांग: करीब 800 करोड़ रुपए की अधिक कमाई

    सितंबर में आबकारी राजस्व ने लगाई ऐतिहासिक छलांग: करीब 800 करोड़ रुपए की अधिक कमाई

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अवैध शराब के कारोबार और माफिया तंत्र के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति का सीधा और बड़ा असर उत्तर प्रदेश के आबकारी राजस्व पर दिख रहा है। आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के सितंबर महीने में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए गत वर्ष के मुकाबले राजस्व संग्रह में लगभग 21% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में कुल 4,611.29 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि (3,811.70 करोड़) से 799.59 करोड़ रुपए अधिक है। इसके साथ ही विभाग ने इस माह 120.98% की उपलब्धि हासिल की है।

    माफिया तंत्र पर नकेल और ताबड़तोड़ कार्रवाई बनी राजस्व में उछाल की वजह

    आबकारी विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए गए सघन प्रवर्तन अभियान, अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी, अवैध भट्ठियों के ध्वस्तीकरण और माफियाओं की धरपकड़ का नतीजा रहा कि समानांतर अवैध व्यापार पूरी तरह ध्वस्त हो गया। हाईवे, ढाबों और अंतर्राज्यीय सीमाओं पर लगातार चेकिंग और क्यूआर कोड आधारित ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ तकनीक की वजह से कर चोरी पर पूरी तरह लगाम कसी गई है, जिससे वैध बिक्री में तेजी आई और सीधा लाभ सरकारी खजाने को मिला।

    6 माह में 29,406 करोड़ रुपए का संग्रह

    चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर 2026) के दौरान भी विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विभाग की कुल क्रमिक प्राप्ति 29,406.50 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में यह आंकड़ा 26,149.32 करोड़ रुपए था। इस प्रकार गत वर्ष के मुकाबले विभाग ने 3,257.18 करोड़ रुपए (112.46%) का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है।

    डिस्टिलरी से लेकर फुटकर दुकानों तक कड़ा पहरा

    आबकारी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा विभाग की टीम ने पूरे प्रदेश में तकनीक-सक्षम निगरानी और सघन प्रवर्तन अभियान चलाकर लीकेज को पूरी तरह रोका है। डिस्टिलरी से लेकर फुटकर दुकानों तक कड़ा पहरा है। निरंतर छापेमारी, जब्ती और गिरफ्तारियों के चलते अवैध नेटवर्क को तोड़ा गया है, जिसका सीधा परिणाम इस रिकॉर्ड राजस्व संग्रह के रूप में सामने आया है। चालू वित्तीय वर्ष के आगामी महीनों में भी यह कड़ाई जारी रहेगी।

    सितंबर में करीब 800 करोड़ रुपए अधिक राजस्व

    आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश से माफिया राज और अवैध धंधे पूरी तरह समाप्त हो रहे हैं। सितंबर माह में लगभग 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व यह साबित करता है कि जनता का विश्वास पारदर्शी व्यवस्था में है। यह अतिरिक्त राजस्व प्रदेश के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं को और गति देगा। अवैध शराब का कारोबार करने वालों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। सितंबर 2026 में चलाए गए विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत विभाग ने 89 हजार से अधिक स्थानों पर छापेमारी कर 2.33 लाख लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की और 251 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

  • आयुष्मान कार्ड बनवाने की प्रक्रिया हुई आसान, बिहार के राशन कार्डधारक ऐसे उठाएं 5 लाख तक इलाज का लाभ

    आयुष्मान कार्ड बनवाने की प्रक्रिया हुई आसान, बिहार के राशन कार्डधारक ऐसे उठाएं 5 लाख तक इलाज का लाभ

    पटना
     बिहार सरकार (Bihar Government) ने स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाते हुए राज्य के करोड़ों राशन कार्ड धारकों को बड़ी राहत दी है।

    सरकार की बीते दिनों की गई घोषणा के अनुसार, अब राज्य के सभी राशन कार्ड धारकों को 'मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना' और 'आयुष्मान भारत योजना' के तहत प्रति परिवार हर साल 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।

    अगर आपके पास भी राशन कार्ड है और आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आयुष्मान कार्ड (गोल्डन कार्ड) बनवाना अनिवार्य है। आइए जानते हैं कि आप घर बैठे या अपने नजदीकी सेंटर्स के माध्यम से यह कार्ड कैसे बनवा सकते हैं।

    सबसे पहला काम: लिस्ट में अपना नाम कैसे चेक करें?
    कार्ड बनवाने से पहले आपको यह चेक करना होगा कि आपका नाम लाभार्थी सूची में है या नहीं। इसके लिए आप मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    •     PMJAY के आधिकारिक पोर्टल beneficiary.nha.gov.in पर जाएं या मोबाइल में 'Ayushman App' डाउनलोड करें।
    •     होमपेज पर 'Beneficiary' (लाभार्थी) ऑप्शन चुनें और अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP से लॉग-इन करें।
    •     इसके बाद अपना राज्य (Bihar), स्कीम (PMJAY/MMJAY), जिला और सर्च का तरीका चुनें।
    •     आप 'Family ID' का विकल्प चुनकर अपना राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर दर्ज कर सकते हैं।
    •     सर्च करते ही आपके परिवार के सभी सदस्यों के नाम स्क्रीन पर आ जाएंगे।

    घर बैठे ऑनलाइन तरीका:
    लिस्ट में नाम दिखने पर उसके आगे 'Action' या 'e-KYC' का ऑप्शन मिलेगा। इस पर क्लिक करें और आधार OTP, फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए अपनी पहचान वेरिफिकेशन करें।

    e-KYC प्रक्रिया पूरी होने के कुछ ही समय बाद आपका आयुष्मान कार्ड जनरेट हो जाएगा, जिसे आप वहीं से डाउनलोड कर सकते हैं।

    ऑफलाइन तरीका:
    अगर आप ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, तो आप CSC या PDS डीलर के पास जाकर मुफ्त में कार्ड बनवा सकते हैं।

    नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर): अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाएं।

    PDS डीलर (राशन की दुकान): जहां से आप राशन लेते हैं, वे जन वितरण प्रणाली (PDS) डीलर भी ई-केवाईसी कर कार्ड बना रहे हैं।

    सरकारी अस्पताल: आप अपने स्थानीय सिविल सर्जन कार्यालय या किसी भी सरकारी अस्पताल के आयुष्मान मित्र से संपर्क कर सकते हैं। ऑफलाइन केंद्र पर जाते समय अपना आधार कार्ड और राशन कार्ड साथ जरूर ले जाएं।

    योजना से जुड़े प्राइवेट अस्पताल कैसे खोजें?

    • आयुष्मान कार्ड का लाभ केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि कई बड़े प्राइवेट अस्पतालों में भी मिलता है। आपके आसपास कौन से अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं, यह जानने के लिए सबसे पहले बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति की वेबसाइट shs.bihar.gov.in या PMJAY पोर्टल पर जाएं।
    • यहां 'Find Empanelled Hospitals' (अस्पताल खोजें) सेक्शन पर क्लिक करें।
    • अपना राज्य, जिला, अस्पताल का प्रकार (Public/Private) और बीमारी का विभाग (Specialty) चुनें।
    • सर्च करते ही योजना से जुड़े सभी अस्पतालों की लिस्ट आपके सामने आ जाएगी।
  • राज्यपाल रमेन डेका से महाराजा कमल चंद्र भंज देव ने की भेंट

    राज्यपाल रमेन डेका से महाराजा कमल चंद्र भंज देव ने की भेंट

    रायपुर

     राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में बस्तर राज परिवार के माटी पुजारी एवं रथपति महाराजा कमल चंद्र भंज देव ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने राज्यपाल को बस्तर के प्रसिद्ध ऐतिहासिक  दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

    राज्यपाल को भंज देव ने  दशहरा उत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाले महाराजा नवाखाई एवं महाराजा बाहर रहनी कार्यक्रमों में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं तथा उत्सव के विभिन्न आयोजनों की जानकारी भी राज्यपाल को दी।

    राज्यपाल डेका ने आमंत्रण के लिए  आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और लोक आस्था का  प्रतीक है। इसकी अनूठी परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

  • कच्ची झोपड़ी से पक्के घर तक, पीएम जनमन आवास ने बदली रोन्हू के परिवार की जिंदगी

    कच्ची झोपड़ी से पक्के घर तक, पीएम जनमन आवास ने बदली रोन्हू के परिवार की जिंदगी

    रायपुर,

    बारिश शुरू होते ही घास-फूस की छत से टपकता पानी, तेज आंधी में झोपड़ी के क्षतिग्रस्त होने का डर और ठंड के दिनों में परिवार की सुरक्षा की चिंता—सरगुजा जिले के रोन्हू के लिए कभी यही जीवन की हकीकत थी। अब कच्ची झोपड़ी की जगह पक्के घर ने ले ली है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (ग्रामीण) से मिले पक्के आवास ने उनके परिवार को मौसम की मुश्किलों से राहत देने के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार दिया है।

    लुण्ड्रा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत ससौली निवासी विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के सदस्य रोन्हू, पिता सोनसाय को वर्ष 2023-24 में योजना के तहत आवास निर्माण के लिए 2 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। पक्का घर बनने के बाद अब उनका परिवार हर मौसम में अधिक सुरक्षित और निश्चिंत होकर जीवन गुजार रहा है।

    बारिश में टपकती थी छत, आंधी में सताता था घर टूटने का डर

    पक्का मकान बनने से पहले रोन्हू का परिवार कच्ची दीवारों और घास-फूस की छत वाली झोपड़ी में रहता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने लगता था। तेज हवा और आंधी आने पर घर के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहती थी, वहीं ठंड के मौसम में भी परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ता था।

    कच्चे मकान में कीड़े-मकौड़ों सहित अन्य जोखिमों का डर भी बना रहता था। परिवार को समय-समय पर झोपड़ी की मरम्मत और घास-फूस बदलने में मेहनत और पैसा खर्च करना पड़ता था। पक्का घर बनने के बाद इन परेशानियों से काफी हद तक राहत मिली है।

    पक्की छत के साथ मिली बुनियादी सुविधाएं

    नए आवास ने रोन्हू के परिवार को केवल मजबूत छत ही नहीं दी, बल्कि रहन-सहन को भी अधिक सुविधाजनक बनाया है। आवास के साथ बिजली, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से परिवार को बेहतर वातावरण मिला है।

    अब बारिश, तेज हवा या ठंड के मौसम में घर की सुरक्षा को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती। बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी अधिक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हुआ है।

    सुरक्षित घर से बढ़ा सम्मान और भविष्य का भरोसा

    रोन्हू के लिए पक्का घर केवल ईंट और दीवारों से बना मकान नहीं, बल्कि वर्षों की असुरक्षा और परेशानी से मिली राहत है। कच्ची झोपड़ी से पक्के आवास तक का यह सफर उनके परिवार के लिए जीवन में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के रोन्हू के परिवार तक पहुंची आवास सुविधा ने उन्हें सुरक्षित छत, बुनियादी सुविधाओं और बेहतर जीवन का आधार दिया है। आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ रहते हुए रोन्हू भविष्य को लेकर अधिक निश्चिंत हैं। एक पक्की छत ने उनके जीवन में सुरक्षा के साथ सम्मान, सुकून और नई उम्मीद भी जोड़ी है।

  • मध्यप्रदेश पुलिस के डीएसपी श्री विवेक सागर प्रसाद भी स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम के सदस्य

    मध्यप्रदेश पुलिस के डीएसपी श्री विवेक सागर प्रसाद भी स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम के सदस्य

    भोपाल 

    20वें एशियाई खेल आइची-नागोया, जापान में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। 3 अक्टूबर को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने मलेशिया को 5-1 से पराजित कर एशियाई खेलों में लगातार दूसरी बार हॉकी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस स्वर्णिम सफलता के साथ भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए भी सीधे क्वालीफाई किया।

    भारतीय टीम की इस शानदार उपलब्धि पर मध्यप्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने पूरी भारतीय पुरुष हॉकी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने टीम के सदस्य एवं मध्यप्रदेश पुलिस में पुलिस उप अधीक्षक  विवेक सागर प्रसाद को भी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि का हिस्सा बनने पर बधाई दी।

    स्वर्णिम सफलता का हिस्सा रहे डीएसपी विवेक सागर प्रसाद

    भारतीय पुरुष हॉकी टीम की इस ऐतिहासिक जीत में मध्यप्रदेश पुलिस के उप पुलिस अधीक्षक  विवेक सागर प्रसाद भी टीम के सदस्य के रूप में शामिल रहे। टीम के मिडफील्डर  विवेक सागर प्रसाद ने पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम के साथ अपने खेल कौशल और योगदान से देश की स्वर्णिम सफलता में सहभागिता की।

    भारतीय पुरुष हॉकी टीम की इस उपलब्धि से मध्यप्रदेश पुलिस भी गौरवान्वित है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हॉकी को गौरवान्वित करने वाली टीम का हिस्सा बनकर  विवेक सागर प्रसाद ने मध्यप्रदेश पुलिस का नाम भी खेल जगत में रोशन किया है।

    इटारसी क्षेत्र के चांदौन निवासी  विवेक सागर प्रसाद वर्ष 2021 में मध्यप्रदेश पुलिस में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त हुए। इससे पूर्व वे टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम, 19वें एशियन गेम्स 2023 में स्वर्ण पदक, पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक तथा कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में रजत पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम के भी सदस्य रहे हैं। इस प्रकार विभिन्न प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय हॉकी टीम के साथ उनकी निरंतर सहभागिता देश के लिए गौरव का विषय है।

    भारतीय पुरुष हॉकी टीम की एशियाई खेलों में यह स्वर्णिम उपलब्धि देश के खेल इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय है। टीम के सदस्य के रूप में  विवेक सागर प्रसाद की सफलता मध्यप्रदेश पुलिस के लिए भी गौरव का विषय है।

     

     

  • 30 सितंबर तक 41.16% बजट खर्च, मुख्य सचिव ने लंबित योजनाओं और केंद्रीय फंड पर तेज कार्रवाई के दिए निर्देश

    30 सितंबर तक 41.16% बजट खर्च, मुख्य सचिव ने लंबित योजनाओं और केंद्रीय फंड पर तेज कार्रवाई के दिए निर्देश

    जयपुर
     मुख्य सचिव  वी. निवास ने सरकारी व्यय की गुणवत्ता सुधारने और बजट राशि के बेहतर उपयोग से प्रदेश के विकास को गति देने पर जोर दिया। मंगलवार को शासन सचिवालय में वित्त व्यय विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने नीति आयोग की राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक संबंधी रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यय को तर्कसंगत बनाने के प्रयास और मजबूत किए जाएं। उपलब्ध संसाधनों का उपयोग प्राथमिकता वाले कार्यों में किया जाए, ताकि योजनाओं का बेहतर लाभ आमजन तक पहुंचे।

    मुख्य सचिव ने बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं के प्रस्ताव वित्त विभाग को प्राप्त नहीं हुए हैं, उनकी संबंधित विभागों के शासन सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। प्रस्ताव शीघ्र भिजवाए जाएं और प्रगति से अवगत कराया जाए।

    उन्होंने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की लंबित केंद्रीय सहायता और आगामी किस्तों की स्वीकृति के लिए संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिवों एवं प्रमुख शासन सचिवों को केंद्रीय मंत्रालयों से प्रभावी समन्वय करने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन, विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए धनराशि प्राप्त करने के प्रयास तेज करने को कहा। इन योजनाओं से संबंधित राज्य स्तरीय समितियों की बैठकें भी समय पर आयोजित करने के निर्देश दिए।

     निवास ने आर्थिक विकास को गति देने वाली प्रमुख परियोजनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने जल संसाधन, सार्वजनिक निर्माण और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की प्रमुख परियोजनाओं को चिह्नित कर राज उन्नति पर सूचीबद्ध करने तथा उनकी नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा कर परियोजनाओं को निर्धारित अवधि में पूरा किया जाए।

    बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, विद्युत अनुदान और कर्मचारी हितलाभों से संबंधित प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान मुख्य सचिव ने पेंशन भुगतान से जुड़ी समस्याओं और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के लंबित भुगतान के मामलों के समाधान पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित विभागों को वित्त विभाग के साथ समन्वय और स्पष्ट संवाद रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    प्रमुख शासन सचिव, वित्त  वैभव गालरिया ने बताया कि योजनाओं के बजट के उपयोग में पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। 30 सितंबर, 2026 तक राज्य निधि और केंद्रीय सहायता सहित योजनाओं के कुल बजट का 41.16 प्रतिशत उपयोग किया गया है। शासन सचिव, वित्त (व्यय) डॉ. टीना सोनी एवं विशिष्ट शासन सचिव, वित्त (बजट) मती शिवांगी स्वर्णकार ने बजट घोषणाओं पर विभागों द्वारा की गई कार्रवाई और वित्तीय स्वीकृतियों की स्थिति प्रस्तुत की। बैठक में केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में केंद्रीय सहायता की स्वीकृति तथा आगामी किस्तें प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जानकारी भी दी गयी। प्रस्तुतीकरण में राज्य की आय, योजनाओं एवं सेवाओं पर व्यय, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजीगत व्यय और वेतन-पेंशन सहित प्रमुख व्यय मदों का विवरण रखा गया। बैठक में संयुक्त शासन सचिव, वित्त (व्यय-1) डॉ. भारती दीक्षित सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • बिहार को मिलेगा सबसे बड़ा पुल! गंडक नदी पर 2000 करोड़ की परियोजना को जल्द मिल सकती है मंजूरी

    बिहार को मिलेगा सबसे बड़ा पुल! गंडक नदी पर 2000 करोड़ की परियोजना को जल्द मिल सकती है मंजूरी

    पटना
    बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर 2000 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा पुल बनाने का रास्ता जल्द ही साफ होने वाला है। गंडक नदी पर बनने वाले इस पुल की लागत लगभग 2000 करोड़ रुपये होगी। यह ब्रिज दोनों राज्यों को आपस में जोड़ेगा। इससे बिहार के बेतिया से यूपी के गोरखपुर एवं कुशीनगर की दूरी भी घट जाएगी। यह पुल नेशनल हाईवे (NH) 727 एए पर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की वित्तीय स्वीकृति पिछले साल ही हे दी गई थी। अब केंद्रीय कैबिनेट से जल्द इसके निर्माण कार्य की मंजूरी मिलने की संभावना है।

    कैबिनेट मंजूरी का बीते एक साल से इंतजार किया जा रहा है। इस लंबित परियोजना को जल्द मंजूरी देने को लेकर बिहार के पथ निर्माण विभाग और केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय बीच बातचीत हुई है। इसकी वित्तीय स्वीकृति अक्टूबर 2025 में मिली थी। केंद्रीय कैबिनेट की मुहर लगने के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

    बिहार का सबसे लंबा पुल होगा
    बेतिया में गंडक नदी पर बनने वाला यह पुल बिहार का सबसे लंबा ब्रिज होगा। इस पुल की लंबआई 12 किलोमीटर होगी। वहीं, अप्रोज रोड को जोड़कर इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 29.5 किलोमीटर होगी। सड़क सह पुल के निर्माण कार्य पर लगभग दो हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

    हैम मोड में होगा निर्माण
    इस पुल का निर्माण हैम मोड मॉडल (हाईब्रिड एन्युइटी मोड) में होना है। इसके तहत चयनित एजेंसी कुल लागत का 60 फीसदी खर्च खुद वहन करेगी, जबकि 40 प्रतिशत फंड केंद्र सरकार देगी। निर्माण एजेंसी को 15 सालों तक इस पुल और सड़क का रखरखाव भी करना होगा। निर्माण एजेंसी टोल टैक्स के जरिए अपनी लागत वसूलेगी।

    यूपी-बिहार के बीच आवागमन सुगम होगा
    इस पुल के बन जाने से उत्तर बिहार और यूपी के पूर्वांचल के बीच आवागमन सुगम हो जाएगा। बेतिया से गोरखपुर और कुशीनगर की दूरी भी घट जाएगी। पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण जिले के लोग यूपी तक आसानी से आवागमन कर सकेंगे। गोरखपुर, कुशीनगर, तमकुही राज और सेवराही जैसे इलाकों में आना-जाना आसान होगा। यह पुल बेतिया के मनुआपुल और कुशीनगर के तिवारीपट्टी सेवराही के बीच बनाया जाएगा।

  • उद्योगों की जरूरत के मुताबिक युवाओं को तैयार करने ITE Education Services के साथ समझौता

    उद्योगों की जरूरत के मुताबिक युवाओं को तैयार करने ITE Education Services के साथ समझौता

    रायपुर 

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सिंगापुर यात्रा के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास और निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण देने के लिए सिंगापुर की ITE Education Services के साथ एमओयू किया गया। वहीं एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में ₹350 करोड़ का नया निवेश प्रस्ताव भी मिला। इसके साथ ही सिंगापुर यात्रा में छत्तीसगढ़ को मिले एफडीआई निवेश प्रस्तावों की राशि बढ़कर ₹43,600 करोड़ हो गई है।

    मुख्यमंत्री  साय ने सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालाकृष्णन से भी मुलाकात की। इसके अलावा दुनिया की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    छत्तीसगढ़ ने विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर पहले Singapore-India Network for Growth (SING) Forum 2026 में भाग लिया है।

    युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली स्किलिंग पर जोर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ सरकार और ITE Education Services, Singapore के बीच तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री और प्रतिनिधिमंडल ने ITE कॉलेज का भ्रमण कर वहां के उद्योग आधारित प्रशिक्षण मॉडल को भी समझा।

    सिंगापुर में Cisco, BYD और Singapore Airlines जैसी बड़ी कंपनियां ITE कॉलेजों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षण देने और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने में सहयोग करती हैं। इसी अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ में भी लिया जाएगा। इससे उद्योगों की जरूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि “निवेश से उद्योग आते हैं और कुशल युवा उन उद्योगों की ताकत बनते हैं। सिंगापुर ने कौशल विकास का एक सफल मॉडल तैयार किया है। हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को भी उद्योगों की जरूरत के मुताबिक आधुनिक प्रशिक्षण मिले और वे अपने प्रदेश में ही बेहतर करियर बना सकें। प्रदेश में आने वाले उद्योगों को उनकी जरूरत के अनुसार कुशल युवा यहीं मिलें।”

    किसानों की उपज को मिलेगा बड़ा बाजार

    मुख्यमंत्री  साय ने सिंगापुर की Valency International Pte Ltd को छत्तीसगढ़ में ₹350 करोड़ के निवेश का आमंत्रण दिया। 22 देशों में कारोबार करने वाली यह कंपनी प्रदेश में इंटीग्रेटेड एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट हब स्थापित करेगी।

    इस हब में काजू, तिल, दलहन और मूंगफली की प्रोसेसिंग की जाएगी। इससे किसानों की उपज का प्रदेश में ही मूल्य संवर्धन होगा, उन्हें नए बाजार मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    सिंगापुर के विदेश मंत्री से हुई मुलाकात

    मुख्यमंत्री  साय ने सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालाकृष्णन से मुलाकात की। दोनों के बीच छत्तीसगढ़ और सिंगापुर के बीच निवेश, कौशल विकास, शहरी नियोजन और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। सिंगापुर के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के विकास में किस तरह लिया जा सकता है, इस पर भी विचार-विमर्श हुआ।

    15 से अधिक वैश्विक कंपनियों के साथ निवेश पर चर्चा

    सीईओ राउंडटेबल में मुख्यमंत्री  साय ने 15 से अधिक वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से संवाद किया। इनमें TCS, SMBC, Tolaram Group, Agrocorp, Indian Ocean Group और Blue Aqua शामिल थे।

    मुख्यमंत्री ने उन्हें छत्तीसगढ़ की निवेश-अनुकूल नीतियों, सुधारों और बेहतर कारोबारी वातावरण की जानकारी दी। बैठक में टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, एग्रीबिजनेस, एक्वाकल्चर और फूड सेक्टर में निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    AI और डिजिटल फाइनेंस में युवाओं को प्रशिक्षण देने पर चर्चा

    मुख्यमंत्री  साय ने Global Finance & Technology Network (GFTN) के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की। बैठक में GFTN के ग्रुप सीईओ  Sopnendu Mohanty, इंडिया, एशिया, जापान एवं ASEAN के सीईओ  James Boey और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर  Anthony Thomas सहित उनकी टीम शामिल हुई।

    बैठक में छत्तीसगढ़ के युवाओं को AI और डिजिटल फाइनेंस में प्रशिक्षण देने, प्रदेश के स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने और नई तकनीकों के लिए टेक लैब स्थापित करने में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    इन महत्वपूर्ण समझौतों और बैठकों के साथ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सिंगापुर यात्रा संपन्न हुई। इस यात्रा ने निवेश के साथ-साथ कौशल, तकनीक और वैश्विक साझेदारी के नए अवसर छत्तीसगढ़ के लिए खोले हैं। प्रतिनिधिमंडल 7 अक्टूबर को रायपुर लौटेगा।

  • डीएनए-ड्रोन लैब में प्रशिक्षु अफसरों ने समझी जांच की ताकत

    डीएनए-ड्रोन लैब में प्रशिक्षु अफसरों ने समझी जांच की ताकत

    लखनऊ

     योगी सरकार की तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था को वैज्ञानिक साक्ष्यों का संबल मिल रहा है। इसी कड़ी में प्रान्तीय सिविल सेवा (PCS) 2025 बैच के 38 प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ का भ्रमण कर आधुनिक फॉरेंसिक जांच की बारीकियां समझीं। अधिकारियों ने संस्थान में स्थापित डीएनए लैब और ड्रोन लैब का अवलोकन किया तथा अपराध की वैज्ञानिक जांच में इनके उपयोग और महत्व की जानकारी प्राप्त की।

    इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ जी.के. गोस्वामी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से सच्चाई को वैज्ञानिक रूप से कानून के समक्ष ला कर न्याय दिलाने में सहयोग करना ही हमारा मूल कार्य है। फील्ड में सिविल सेवा का काम बेहद कठिन काम है जो त्याग और समर्पण मांगता है, आपको मानसिक रूप से हर पल अपने को विषम परिस्थितियों से जूझने के लिए तैयार रखना होगा।
     
    उन्होंने कहा कि कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक विज्ञान है। यह एक विजन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश भर के अफसरों को फॉरेंसिक की बारीकियां से अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने नए कानून के सदर्भ में तीन विषयों न्याय, सत्य एवं साक्ष्य पर भी प्रकाश डालते हुए इसका महत्व बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में फॉरेंसिक विज्ञान अति महत्वपूर्ण है साइबर और फॉरेंसिक हमारे जीवन में साया की तरह है क्योंकि हमारा जीवन आधुनिक तकनीक पर ज्यादा निर्भर है।

    डॉ गोस्वामी ने कहा कि मृत्यु कालिक बयान के विषय पर प्रशिक्षु अधिकारियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि मृत्युकालिक बयान की आवश्यकता तब पड़ती है जब ऐसा प्रतीत हो कि यदि पीड़ित के बयान तत्काल अंकित नहीं किए गये तो उसकी मृत्यु हो सकती है और बाद में अपराध को कानूनी रूप से सुझाने का महत्वपूर्ण साक्ष्य का लोप हो सकता है। ऐसी दशा में पुलिस अथवा चिकित्सक की सूचना पर किसी भी मजिस्ट्रेट को पीड़ित की भाषा में ही उसके बयान अंकित करने चाहिए जो क़ानूनी रूप से ग्राह्य है। उन्होंने कहा कि संभव हो तो बयान के समय डिजिटल रिकार्डिग भी करा लें। यदि पीड़ित व्यक्ति बात करने में सक्षम न हो परन्तु लिखित देने में सक्षम हो तो एसा बयान भी मृत्युकालिक बयान माना जायेगा।

    संस्थान के अपर निदेशक संजीव सुमन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संस्थान के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, पलक अनेजा, सेंथिल शिव सुब्रमण्यम, जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी, आरआई शैलेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे।