Author: NewseDay

  • कहानी और कला से बच्चों में विकसित होगी पर्यावरणीय संवेदनशीलता और रचनात्मक सोच

    कहानी और कला से बच्चों में विकसित होगी पर्यावरणीय संवेदनशीलता और रचनात्मक सोच

    रायपुर

    बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में विद्यालयीन शिक्षकों के लिए दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। 6 एवं 7 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में कला, कहानी और स्थानीय अनुभवों को शिक्षण से जोड़कर बच्चों को प्रकृति एवं पर्यावरण को समझने के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    आईआईएसईआर पुणे के केयर प्रोजेक्ट, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के संयुक्त सहयोग से आयोजित कार्यशाला की थीम ‘आर्ट ऐस स्टोरी, स्टोरी ऐस नॉलेज, नॉलेज ऐस एक्शन’ रखी गई है। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों के शासकीय विद्यालयों के शिक्षक भाग ले रहे हैं।

          कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर छत्तीसगढ़ साइंस सेंटर के महानिदेशक  पी. कवीश्वर ने कहा कि कहानी बच्चों को केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि उन्हें अपने आसपास की दुनिया को देखने, समझने और उस पर स्वतंत्र रूप से विचार करने के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम है। बच्चों को अपने आसपास की प्रकृति का स्वयं अवलोकन करने, प्रश्न पूछने और अपने अनुभवों को कहानी के रूप में अभिव्यक्त करने के अवसर मिलने चाहिए। इससे सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और अर्थपूर्ण होती है तथा उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

    भारत के पहले द्विभाषी क्लाइमेट टैब्लॉइड ‘जुगनू’ का विमोचन

    कार्यशाला के दौरान बच्चों के लिए तैयार भारत के पहले द्विभाषी हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट टैब्लॉइड ‘जुगनू’ का भी विमोचन किया गया। ‘जुगनू’ को आईआईएसईआर पुणे के केयर प्रोजेक्ट के एक्शन रिसर्च के माध्यम से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण जैसे विषयों को सहज एवं रचनात्मक तरीके से समझने और अपनी बात अभिव्यक्त करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।

    केयर प्रोजेक्ट की प्रोजेक्ट लीड एवं ‘जुगनू’ की पब्लिशर डॉ. शालिनी शर्मा ने बताया कि इसके माध्यम से देशभर के विद्यालयीन शिक्षकों और बच्चों की कहानियों एवं रचनात्मक सामग्री को मंच प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। इसमें स्थानीय परिवेश, प्रकृति, पर्यावरण और जलवायु से जुड़े बच्चों एवं शिक्षकों के अनुभवों और विचारों को स्थान मिलेगा।

    उन्होंने बताया कि ‘जुगनू’ का उद्देश्य बच्चों में जलवायु परिवर्तन को लेकर केवल चिंता या भय पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें अपने आसपास के पर्यावरण को देखने-समझने, प्रश्न पूछने, अपनी आवाज अभिव्यक्त करने और सकारात्मक बदलाव के लिए पहल करने हेतु प्रेरित करना है। ‘लेट अस टर्न इको-एंग्जायटी इन टू इको-एजेंसी’ की भावना के साथ यह पहल बच्चों को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील और समाधान की दिशा में सक्रिय बनने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

    पर्यावरणीय संवेदनशीलता को बचपन से संस्कार का हिस्सा बनाना जरूरी
           छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर की सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर मती प्रज्ञा कदम ने कहा कि कहानी बच्चों के विचारों, संवेदनाओं और दृष्टिकोण को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। बचपन से ही बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण को देखने, समझने और उससे जुड़ने के अवसर दिए जाएं तो उनमें पर्यावरण संरक्षण की भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।

     उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संवेदनशीलता को केवल पाठ्यक्रम का विषय न रखकर बच्चों के दैनिक जीवन और संस्कार का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। कहानी, कला और स्थानीय अनुभवों के माध्यम से बच्चों को प्रकृति से जोड़ने से उनमें जिज्ञासा, अवलोकन क्षमता, स्वतंत्र विचार और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है।

    अनुभवात्मक और रचनात्मक शिक्षण के तरीके सीख रहे शिक्षक

    दो दिवसीय कार्यशाला में कला, कहानी और स्थानीय जलवायु अनुभवों पर आधारित विभिन्न गतिविधिपरक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें शिक्षक अपने स्थानीय परिवेश, प्रकृति, समुदाय और पर्यावरण से जुड़े अनुभवों को कहानी एवं कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं।

    कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को ऐसे रचनात्मक शिक्षण उपकरणों से परिचित कराया जा रहा है, जिनका उपयोग कर वे विद्यार्थियों को केवल जानकारी देने के बजाय स्वयं अवलोकन करने, प्रश्न पूछने, विचार करने, अनुभव साझा करने और समाधान तलाशने के लिए प्रेरित कर सकें।

    कार्यशाला में विकसित कहानियों और गतिविधियों का आगे कक्षा-कक्ष में शिक्षण-अधिगम के प्रभावी संसाधन के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए शासकीय विद्यालयों के शिक्षक इसमें उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

  • पैरोल पर जेल से बाहर आएगा आसाराम, राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को दिए सख्त निर्देश

    पैरोल पर जेल से बाहर आएगा आसाराम, राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को दिए सख्त निर्देश

    जोधपुर
     नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से पैरोल के मामले में बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूर्व में जारी आदेश की पालना करते हुए आसाराम को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से इस आदेश की अनुपालना रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

    मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष हुई। आसाराम की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि कोर्ट ने अगस्त में 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने उन्हें रिहा नहीं किया।

    3 अगस्त के आदेश की पालना के निर्देश
    सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी, आदेश के बावजूद पैरोल लागू नहीं की गई। इस पर खंडपीठ ने राज्य सरकार को पूर्व में जारी आदेश की पालना करने के निर्देश दिए।

    गुजरात कोर्ट का दिया गया हवाला
    राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीएल भाटी ने दलील दी कि आसाराम को गुजरात के गांधीनगर की अदालत भी एक अन्य मामले में दोषी ठहरा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात हाईकोर्ट ने उस मामले में आसाराम की पैरोल याचिका खारिज कर दी थी।

    हालांकि, राजस्थान हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं बता सकी, जिससे 3 अगस्त 2026 के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त या निलंबित माना जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गुजरात हाईकोर्ट द्वारा आपातकालीन पैरोल खारिज किए जाने के आदेश का राजस्थान हाईकोर्ट के पहले के आदेश पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

    सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नहीं दी चुनौती
    सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार के अधिवक्ता से यह भी पूछा कि क्या 3 अगस्त के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि सरकार की ओर से ऐसा कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर नहीं किया गया है। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में 3 अगस्त को जारी आदेश की पालना की जानी चाहिए।2018 में सुनाई गई थी उम्रकैद
    आसाराम को वर्ष 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जेल में सजा काट रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें समय-समय पर अस्पताल जाने की अनुमति भी मिलती रही है।

    गांधीनगर का अलग मामला
    इसके अलावा सूरत की दो बहनों से जुड़े यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में गांधीनगर की अदालत ने जनवरी 2023 में आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी मामले का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में पैरोल को लेकर अपनी दलील रखी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

     

  • अरपा नदी के प्रदूषण पर हाईकोर्ट नाराज, पूछा- 4 STP से 70 नालों का पानी कैसे होगा साफ?

    अरपा नदी के प्रदूषण पर हाईकोर्ट नाराज, पूछा- 4 STP से 70 नालों का पानी कैसे होगा साफ?

    बिलासपुर.

    बिलासपुर में सीवरेज प्रबंधन और अरपा नदी में हो रहे प्रदूषण को रोकने हाईकोर्ट ने नगर निगम से विस्तृत कार्ययोजना मांगी है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र, जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शासन को नया एफिडेविट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या सिर्फ 4 एसटीपी से 70 नालों का पानी साफ हो जाएगा?

    चीफ सेक्रेटरी विकासशील ने इस बारे में हाईकोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत कर कहा कि फिलहाल सभी एसटीपी पूरे होने वाले हैं। इसके बाद कितना गंदा पानी इनसे साफ होगा, इसकी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही बताया जा सकता है कि और एसटीपी की जरूरत है या नहीं। हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की है। अरपा नदी के संरक्षण और संवर्धन मामले में डिवीजन बेंच के समक्ष शासन की ओर से प्रस्तुत एफिडेविट के अनुसार, बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 6 लाख 68 हजार 540 है और प्रतिदिन लगभग 72.20 एमएलडी सीवरेज उत्पन्न होता है। इसे सीवरेज नेटवर्क और करीब 70 नालों के माध्यम से चैनलाइज किया जाता है।

    कोर्ट ने मांगी ये जानकारी
    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी जानकारी मांगी कि अतिरिक्त एसटीपी जरूरी हैं तो शासन को उनकी क्षमता, स्थान, निर्माण की समय-सीमा और अरपा नदी में पानी छोड़े जाने से पहले पूर्ण ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने के उपायों की जानकारी भी देनी होगी। शासन के अनुसार, वर्तमान में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 78 एमएलडी है, जबकि इनका वास्तविक उपयोग करीब 43.90 एमएलडी हो रहा है। एफिडेविट में बताया गया कि 16 एमएलडी क्षमता के दो और एसटीपी निर्माणाधीन हैं। इनमें से एक ट्रायल रन के चरण में है, जबकि दूसरे के 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है। दोनों के चालू होने के बाद शहर की कुल सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता 94 एमएलडी हो जाएगी, जो वर्तमान अनुमानित सीवरेज उत्पादन 72.20 एमएलडी से अधिक है।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि शहर के सभी नालों का सीवरेज का पानी वास्तव में एसटीपी तक पहुंच रहा है या नहीं। डिवीजन बेंच ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को नया एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। एफिडेविट में विशेष रूप से बताना होगा कि नगर निगम क्षेत्र के सभी 70 नाले, निर्माणाधीन दो एसटीपी समेत उपलब्ध छह एसटीपी से कवर और कनेक्टेड हैं या नहीं तथा प्रत्येक नाले से निकलने वाले सीवरेज को प्रभावी ढंग से इंटरसेप्ट, डायवर्ट और ट्रीट किया जा रहा है या नहीं।

  • भारत मंडपम में दिखेगा यूपी का स्वाद और हुनर, IITF 2026 में पहली बार ODOP की दस्तक

    भारत मंडपम में दिखेगा यूपी का स्वाद और हुनर, IITF 2026 में पहली बार ODOP की दस्तक

    इंटरनेशनल ट्रेड शो के बाद एक जनपद एक व्यंजन की राष्ट्रीय मंच पर दस्तक

    आईआईटीएफ 2026 में पहली बार लगेगा ओडीओसी का स्टॉल, भारत मंडपम में यूपी के स्थानीय व्यंजन और उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

    14 से 27 नवंबर तक नई दिल्ली में होगा 45वां इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, ओडीओपी के साथ ओडीओसी के जरिए योगी सरकार की ‘लोकल से ग्लोबल’ पहल को मिलेगी नई पहचान

    प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और समृद्ध पाक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा

    प्रदेश की स्थानीय पाक परंपराओं को व्यापार, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने का अवसर उपलब्ध करा रही योगी सरकार

    लखनऊ,
    ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में आकर्षण का केंद्र बनने के बाद योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल ‘एक जनपद एक व्यंजन' (ओडीओसी) अब राष्ट्रीय मंच पर दस्तक देने जा रही है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 45वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (आईआईटीएफ) 2026 में पहली बार ओडीओसी का स्टॉल लगाया जाएगा। यहां ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के साथ ओडीओसी के जरिए उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और समृद्ध पाक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो में ओडीओसी को मिले मंच के बाद आईआईटीएफ जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व्यापार मेले में इसकी पहली प्रस्तुति इस पहल के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे उत्तर प्रदेश की स्थानीय पाक परंपराओं को व्यापार, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

    उत्पाद के बाद अब स्थानीय स्वाद की ब्रांडिंग

    उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की अपनी अपनी विशिष्ट पहचान और पारंपरिक व्यंजन हैं। ओडीओसी की अवधारणा इन्हीं स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक  पहचान, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने की सोच पर आधारित है। अब तक जहां ओडीओपी के माध्यम से जिलों के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है, वहीं ओडीओसी स्थानीय स्वाद और पाक परंपराओं को भी इसी व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से जोड़ रहा है। आईआईटीएफ में ओडीओसी के स्टॉल के जरिए प्रदेश की इस पाक विविधता को एक व्यवस्थित मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले आगंतुकों, व्यापारियों, निवेशकों और संभावित खरीदारों को उत्तर प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों और उनसे जुड़े उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

    ओडीओपी के साथ ओडीओसी, ‘लोकल से ग्लोबल’ का अगला कदम

    प्रधानमंत्री मोदी के विजन ‘लोकल से ग्लोबल’ को योगी सरकार साकार करते हुए स्थानीय उत्पादों को बाजार, ब्रांड और व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। ओडीओपी इस दिशा में प्रदेश की प्रमुख पहलों में शामिल है। अब ओडीओसी के माध्यम से इसी सोच को प्रदेश की पाक विरासत तक विस्तार दिया जा रहा है। आईआईटीएफ में ओडीओपी और ओडीओसी की संयुक्त मौजूदगी से उत्तर प्रदेश के उत्पाद और स्वाद, दोनों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। इससे स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों, खाद्य कारोबारियों और संबंधित क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए नए बाजार और व्यापारिक संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है।

    ग्रेटर नोएडा के बाद दिल्ली में बढ़ेगा ओडीओसी का दायरा

    ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों को बड़े व्यापारिक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर दिया। अब उसी क्रम में ओडीओसी को नई दिल्ली के भारत मंडपम तक ले जाया जा रहा है। यह बदलाव इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि ओडीओसी अब केवल प्रदेश की स्थानीय पहल के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के व्यंजनों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने वाले ब्रांडिंग मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है।

    देश-विदेश के खरीदारों तक पहुंचेगी यूपी की पाक पहचान

    इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर देश के प्रमुख व्यापारिक आयोजनों में शामिल है। ऐसे मंच पर ओडीओसी की पहली भागीदारी उत्तर प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों और उनसे जुड़े उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करेगी। इसके जरिए प्रदेश की पारंपरिक पाक विरासत को केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित रखने के बजाय उसे ब्रांड, बाजार और आर्थिक अवसर से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। स्थानीय स्वाद के साथ जुड़े छोटे उद्यमियों और कारोबारियों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।

  • Maharashtra Bike Taxi: अब सिर्फ इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी चलेगी, एग्रीगेटर्स को 6 महीने में बदलनी होगी फ्लीट

    Maharashtra Bike Taxi: अब सिर्फ इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी चलेगी, एग्रीगेटर्स को 6 महीने में बदलनी होगी फ्लीट

     मुंबई

    महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी चलाने वालों के लिए आने वाले कुछ महीने काफी अहम होने वाले हैं. अगर आप ओला, उबर, रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म के साथ पेट्रोल बाइक टैक्सी चला रहे हैं, तो अब ज्यादा समय नहीं बचा है. राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को अपनी फ्लीट पेट्रोल से इलेक्ट्रिक करने के लिए समयसीमा तय कर दी है. पेट्रोल से इलेक्ट्रिक पर जाने के लिए ज्यादातर ऑपरेटरों को 6 महीने का समय दिया गया है, जबकि कुछ लाइसेंस होल्डर्स को 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी। 

    महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने अक्टूबर में बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर्स और रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) को इस संबंध में पत्र भेजा है. यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद उठाया गया. सरकार के फैसले के मुताबिक, महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी सेवाओं को तय समयसीमा के भीतर 100% इलेक्ट्रिक फ्लीट की ओर जाना होगा. यानी पेट्रोल बाइक से चल रही सेवाओं को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना होगा। 

    पेट्रोल बाइक वालों को कितने महीने मिलेंगे?

    अभी पेट्रोल बाइक टैक्सी चला रहे ऑपरेटरों के लिए पहला चरण 6 महीने का है. इसी अवधि में उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन की अनिवार्यता पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. हालांकि, महाराष्ट्र बाइक टैक्सी रूल्स, 2025 के तहत प्रोविजनल या टेंपररी लाइसेंस वाले ऑपरेटरों को 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत दी गई है. यानी इन ऑपरेटरों के लिए कुल समय 9 महीने तक हो सकता है। 

    एग्रीगेटर्स ने मांगी थी 2030 तक की मोहलत
    ओला, उबर, रैपिडो जैसे बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स ने इस बदलाव के लिए ज्यादा समय चाहती थीं. एग्रीगेटर्स ने सरकार से 2030 तक की मोहलत देने की मांग की थी. उनका कहना था कि पूरी फ्लीट को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने में समय लगेगा. कंपनियों ने अपनी मांग के पीछे महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी और बड़े स्तर पर वाहनों को बदलने में आने वाली चुनौतियों का हवाला दिया था. लेकिन सकार ने 203र0 तक की मोहलत देने के बजाय मौजूदा समयसीमा तय की है। 

    बाइक टैक्सी राइडर्स के सामने चुनौती
    सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बाइक टैक्सी चलाने वाले राइडर भी इस बदलाव को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं. सितंबर में महाराष्ट्र बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दूसरे अधिकारियों को पत्र लिखकर बदलाव के लिए 1.5 साल का समय मांगा था. एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित गावडे के मुताबिक, ज्यादातर बाइक टैक्सी राइडर मिडिल या लोअर-मिडिल क्लास परिवारों से आते हैं. ऐसे में अचानक इलेक्ट्रिक बाइक खरीदने के लिए बड़ा निवेश करना उनके लिए आसान नहीं है. राइडरों ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी लाइफ को लेकर भी चिंता जताई थी. यानी उनके लिए मामला सिर्फ बाइक बदलने का नहीं, बल्कि उसे चलाने की लागत और चार्जिंग की सुविधा से भी जुड़ा है। 

    पहले 50:50 मॉडल पर हुई थी चर्चा
    महाराष्ट्र सरकार ने शुरुआत में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक बाइक को साथ चलाने वाले 50:50 मॉडल पर भी विचार किया था. इसमें कंपनियों को अपने बेड़े में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह की मोटरसाइकिल रखने की अनुमति देने की बात थी. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, कैबिनेट ने इस मॉडल को मंजूरी नहीं दी. सरकार को आशंका थी कि ज्यादा लागत के कारण कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को टाल सकती हैं। 

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राज्य स्तरीय चित्रकला एवं भाषण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राज्य स्तरीय चित्रकला एवं भाषण

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस सेवा के संकल्प को साकार करते हुए मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने विकास को विरासत से जोड़कर आगे बढ़ाया है। कई सालों तक ब्रिटिश काल में बने भवन में हमारी संसद चलती रही। लेकिन अब हमारी संसद का नया भवन ऐसा बना है, जिसमें भारतीयता के दर्शन होते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने लोकतंत्र को गौरवान्वित करते हुए सार्वजनिक जीवन जिया है। यह गर्व का विषय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति भी हमारी चुनाव प्रक्रिया की तारीफ करते हुए उसे अपनाने की मंशा जताते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी की छवि वैश्विक नेताओं के बीच विशिष्ट दिखती है। प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस उपलब्धि पर सेवा संकल्प अभियान-2026 में पूरा देश एक साथ खड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राज्य स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टी.टी. नगर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभकिया। कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ।

    55 जिलों से चयनित उत्कृष्ट चित्रकला कृतियों का हुआ प्रदर्शन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर प्रदेश के 55 जिलों से चयनित उत्कृष्ट चित्रकला कृतियों का अवलोकन किया। कार्यक्रम में राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिता के प्रथम तीन विजेताओं ने भाषण भी प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटे-बेटियों की चित्रकला प्रतिभा और भाषण की दक्षता की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारे विद्यार्थियों ने अपने मन के भाव को भाषण और चित्रों के माध्यम से बहुत प्रभावी तरीके से अंकित और अभिव्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेरे सपनों का भारत-राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के अंतर्गत भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त अशोक नगर की सु जी मिश्रा का वक्तव्य सुना। द्वितीय स्थान पर रहीं जिला धार की सु छवि मंगरोलिया और तृतीय पर रहीं गुना जिले की सु रानी रजक के विचार भी सुने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त नरसिंहपुर जिले की आयुष अहिरवार, द्वितीय स्थान पर रहीं बालाघाट की सु डीनू बोपचे और तृतीय स्थान पर रहीं टीकमगढ़ की सु आयुषी सिद्धी नामदेव को पुरस्कार प्रदान किए।

    पांच जिला शिक्षा अधिकारियों को मिला सम्मान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारियों को भी सम्मानित किया। इसके अंतर्गत जिला शिक्षा अधिकारियों में सतना की  सलोनी शर्मा, नरसिंहपुर के  अनिल कुशवाहा, बालाघाट की सु धन जैन, अनूपपुर के  तुलाराम आरमो, उज्जैन के  महेंद्र खत्री तथा लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के संयुक्त संचालक  एच.एन. नेमा को उनके सराहनीय योगदान और निष्ठापूर्ण सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कार्यक्रम में शासकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोरसा जिला मुरैना की कक्षा 10वीं छात्रा कुमारी इकरा ने सम्पर्क कर उनसे कठिन परिस्थितियों में आगे पढ़ाई संबंधी अपनी समस्या साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिटिया इकरा को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

    देश के साथ मध्यप्रदेश भी तेजी से बदल रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने और अब तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में उन्होंने राज्य की अनेक चुनौतियों को समाप्त करते हुए गुजरात को एक सशक्त और समृद्ध प्रदेश बनाया। उनके कार्यकाल में पेट्रोकेमिकल की रिफाइनरी गुजरात में स्थापित हुईं, जिससे आज भारत ईंधन के मामले में आत्मनिर्भर बन पाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने मेरा भारत और विकसित भारत की संकल्पना के भाव से बड़े से बड़े फैसले लिए और उन्हें सरलता से लागू भी किया। आज हम डिजिटल भुगतान के माध्यम से दुनिया में सबसे अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन करने वाले देश हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने डीबीटी की शुरुआत की, इससे जरूरतमंदों को उनके हक की रकम सीधे बैंक खाते में पहुंचती है। देश के साथ मध्यप्रदेश भी तेजी से बदल रहा है।

    स्कूल शिक्षा की बेहतरी केलिए हरसंभव प्रयास जारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों के लाखों विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस के सेवा संकल्प अभियान में सहभागिता की है। विद्यार्थियों के लिए स्वच्छता, पौध-रोपण, प्रकृति संरक्षण, जल संरक्षण, गरीबों की मदद करना तथा माता-पिता की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विद्यार्थियों ने सुशासन पर विश्वास रखते हुए देश के लिए प्रतिबद्धता से सभी कामों को ईमानदारी से करने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा की बेहतरी केलिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी सरकार ने आगामी 2 वर्ष में स्कूलों के सभी जर्जर भवनों के स्थान पर नए भवन तैयार करने का संकल्प लिया है। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी, लैपटॉप और किताब, ड्रेस भी नि:शुल्क दी जा रही हैं। हमारी सरकार ने वर्षों से लंबित शिक्षकों के प्रमोशन कर उन्हें भी नई सौगात दी है। स्कूलों के लिए शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।

    अमृतकाल की युवा पीढ़ी विकसित भारत को आकार देगी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 21 वर्ष बाद दोबारा सार्वजनिक बस सेवा की शुरुआत की गई है। ये बसें प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में भी नागरिकों को सुगम परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराएंगी। स्कूलों में विद्यार्थियों के आवागमन के लिए भी बसें संचालित की जा रही हैं। हमारी सरकार राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य बना है। प्रदेश सरकार वर्ष 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने जा रही है। हमारे अमृतकाल की युवा पीढ़ी वर्ष 2047 तक विकसित भारत को आकार देगी।

    भविष्य का भारत बेहतर होगा

    स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिता में स्कूली बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदेश के 41 हजार से अधिक विद्यालयों में जिला स्तर, ब्लॉक स्तर और राज्य स्तर पर 'मेरे सपनों का भारत' विषय पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें कक्षा 6 से 12वीं तक के 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों के विचार और संस्कार सामने आए, जिन्हें सुनकर और देखकर यह विश्वास मजबूत होता है कि भविष्य का भारत बेहतर होगा। इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य कुमार काश्यप, भोपाल महापौर  मालती राय, विधायक  भगवानदास सबनानी, स्कूल शिक्षा सचिव  संजय गोयल सहित स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

     

  • अपने घर का सपना हुआ साकार, रागिनी के परिवार को मिला खुशियों का आशियाना

    अपने घर का सपना हुआ साकार, रागिनी के परिवार को मिला खुशियों का आशियाना

    रायपुर

    अपना घर केवल चार दीवारों का निर्माण नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए सुरक्षा, स्थायित्व और बेहतर भविष्य का आधार होता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और आम परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आवासीय परियोजनाओं को बेहतर कनेक्टिविटी और आवश्यक सुविधाओं के साथ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    राज्य सरकार और मंडल की इन्हीं कोशिशों से रायपुर के समीप नरदहा में हितग्राही रागिनी का अपने घर का सपना साकार हुआ है। वर्षों से अपने परिवार के लिए एक स्थायी आशियाने की चाह रखने वाली रागिनी के लिए नया घर केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार के सुरक्षित और बेहतर भविष्य की नई शुरुआत है।

    “अपना घर होना मेरा सपना था, हाउसिंग बोर्ड की पहल ने इसे पूरा किया”

    अपने अनुभव साझा करते हुए रागिनी कहती हैं, “अपना घर होना मेरा सपना था, जिसे छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की इस पहल ने पूरा किया है। आज अपना घर होने की खुशी और संतुष्टि को शब्दों में बताना मुश्किल है।”

    उन्होंने बताया कि नरदहा स्थित परियोजना की लोकेशन उनके परिवार के लिए काफी सुविधाजनक है। रायपुर से बेहतर कनेक्टिविटी के साथ आसपास एजुकेशन हब, स्कूल और कॉलेज की उपलब्धता बच्चों की पढ़ाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अच्छा सामाजिक वातावरण और आवश्यक सुख-सुविधाएं यहां रहने के अनुभव को और बेहतर बनाती हैं।

    घर के साथ मिला सुरक्षित भविष्य का भरोसा

    रागिनी के लिए अपना आशियाना मिलने की खुशी इसलिए भी खास है, क्योंकि अब परिवार के पास भविष्य के लिए अपना एक स्थायी ठिकाना है। बच्चों की शिक्षा के लिए अनुकूल वातावरण, रायपुर तक सुगम पहुंच और आसपास उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं ने उनके नए घर की खुशी को और बढ़ा दिया है।

    श्रीमती रागिनी कहती हैं, “वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार और हाउसिंग बोर्ड की यह पहल हम जैसे हितग्राहियों के घर के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अपना आशियाना पाने का अवसर देने के लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार और हाउसिंग बोर्ड का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।”

    आम परिवारों तक बेहतर आवास पहुंचाने की दिशा में पहल

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में आवासीय योजनाओं के माध्यम से नागरिकों को सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त रहवास उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रयास है कि आवासीय परियोजनाएं केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें कनेक्टिविटी, शिक्षा और रोजमर्रा की आवश्यक सुविधाओं तक सहज पहुंच जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखा जाए।

    नरदहा की रागिनी की कहानी इसी प्रयास का मानवीय पक्ष सामने लाती है। अपना घर मिलने से उनके परिवार को एक छत के साथ सुरक्षा और स्थायित्व मिला है तथा बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर नई उम्मीद भी जगी है। अपने आशियाने की चाबी के साथ रागिनी के परिवार के जीवन में खुशियों का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।

     

  • 12 अक्टूबर तक पूरा होगा फसल क्षति का डिजिटल सर्वे, प्रभावित किसानों को मिलेगी नियमानुसार सहायता

    12 अक्टूबर तक पूरा होगा फसल क्षति का डिजिटल सर्वे, प्रभावित किसानों को मिलेगी नियमानुसार सहायता

    लखनऊ

    योगी सरकार ने हाल में चक्रवात, अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए फसल क्षति का तेजी से और पारदर्शी आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा करते हुए 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति की फीडिंग पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

    राहत आयुक्त ने कहा कि किसान हित सर्वोपरि है और किसी भी प्रभावित किसान का अहित नहीं होना चाहिए। फसल क्षति का आकलन केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगा। जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं क्षेत्र में जाकर सर्वे की स्थिति देखेंगे और इसकी गुणवत्ता व पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।

    डिजिटल सर्वे से होगा फसल नुकसान का सटीक आकलन

    बाढ़ के पानी में डूबी फसलों का डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया जाएगा। इससे खेतों में हुई वास्तविक क्षति का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा। डिजिटल सर्वे से मिली जानकारी के आधार पर पात्र किसानों को उनकी फसल के नुकसान के अनुसार नियमानुसार सहायता राशि दी जाएगी। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन भी करेंगे।

    आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी के आंकड़ों से तय होगी वास्तविक वर्षा

    फसल क्षति का आकलन अधिक वैज्ञानिक और तथ्यपरक बनाने के लिए आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी की रिपोर्ट व आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संबंधित क्षेत्रों में वास्तव में कितनी बारिश हुई, इसका सही आकलन किया जा सकेगा। वर्षा के वास्तविक आंकड़ों और डिजिटल सर्वे को आधार बनाकर फसल नुकसान का निर्धारण किया जाएगा।

    12 अक्टूबर तक पूरा करना होगा डिजिटल क्रॉप सर्वे

    राहत आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर स्थिति में 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति की फीडिंग पूरी कर ली जाए। जिलों में सर्वे की प्रगति प्रतिदिन गूगल शीट और पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही की जाएगी।
    फसल सर्वे से पहले संबंधित खसरा और अन्य राजस्व अभिलेखों की जांच की जाएगी। इससे पिछले वर्ष बोई गई फसल की जानकारी मिल सकेगी और वर्तमान फसल तथा उसे हुई क्षति का सही आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे पात्र किसानों तक राहत पहुंचाने में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    बाढ़ के साथ बारिश और चक्रवात से हुए नुकसान की भी होगी गणना

    सरकार ने केवल बाढ़ से हुई फसल क्षति ही नहीं, बल्कि भारी बारिश और चक्रवात के प्रभाव से हुए नुकसान को भी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित जिलों को निर्धारित गूगल शीट पर इन सभी आंकड़ों को अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। आंकड़ों में किसी तरह की भिन्नता मिलने पर संबंधित अधिकारी को उसका स्पष्ट कारण बताना होगा।

    किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता
    योगी सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राहत और सहायता वितरण की पूरी प्रक्रिया में तेजी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरती जाए। प्रभावित किसानों को समय पर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। राहत आयुक्त ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि आमजन के जीवन की आधारशिला हैं। इसलिए सभी अधिकारी किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करें।

  • रेलवे स्टेशन तक पहुंच होगी आसान, रायगढ़वासियों को मिलेगी नई सड़क की सौगात

    रेलवे स्टेशन तक पहुंच होगी आसान, रायगढ़वासियों को मिलेगी नई सड़क की सौगात

    रायगढ़

    रायगढ़ शहर में रेलवे स्टेशन तक आवागमन को आसान बनाने और प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने की दिशा में नई सड़क की सौगात मिलने जा रही है। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी की पहल से अग्रसेन चौक से आरपीएफ पोस्ट होते हुए सीधे रेलवे स्टेशन तक नया सड़क मार्ग विकसित किया जा रहा है। इस वैकल्पिक मार्ग के तैयार होने से रेलवे स्टेशन की दूरी करीब 500 मीटर कम होने के साथ व्यस्त समय में यात्रियों के लगभग 10 मिनट तक बचने की उम्मीद है।

    कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने आज प्रस्तावित सड़क निर्माण स्थल का निरीक्षण कर कार्य की प्रगति एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप गुणवत्ता के साथ तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

    रेलवे स्टेशन के लिए मिलेगा सीधा और सुविधाजनक वैकल्पिक मार्ग

    प्रस्तावित सड़क अग्रसेन चौक से आरपीएफ पोस्ट होते हुए सीधे रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगी। वर्तमान में चक्रधर नगर चौक सहित शहर के विभिन्न हिस्सों से रेलवे स्टेशन जाने वाला यातायात अग्रसेन चौक के बाद रामनिवास टॉकीज, सुभाष चौक और स्टेशन चौक की ओर जाता है। व्यस्त समय में इस मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।

    नई सड़क बनने के बाद रेलवे स्टेशन जाने वाले यातायात के बड़े हिस्से को वैकल्पिक मार्ग पर डायवर्ट किया जा सकेगा। इससे सुभाष चौक, रामनिवास टॉकीज और गांधी पुतला क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होने के साथ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को भी राहत मिलेगी।

    करीब 500 मीटर कम होगी दूरी, यात्रियों का बचेगा समय

    नगर निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय ने बताया कि नए मार्ग से रेलवे स्टेशन पहुंचने की दूरी वर्तमान मार्ग की तुलना में करीब 500 मीटर कम हो जाएगी। व्यस्त समय में लगभग 10 मिनट तक समय की बचत होने की उम्मीद है। इससे विशेष रूप से ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

    कलेक्टर चतुर्वेदी ने कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए वैकल्पिक मार्गों का विकास जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को सड़क निर्माण से जुड़े कार्य प्राथमिकता से पूरा करने और निर्माण के दौरान नागरिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

  • उत्तर प्रदेश में जापानी कंपनियों को बुलाने की तैयारी, निवेश प्रस्तावों पर चर्चा के लिए जापान जाएगा दल

    उत्तर प्रदेश में जापानी कंपनियों को बुलाने की तैयारी, निवेश प्रस्तावों पर चर्चा के लिए जापान जाएगा दल

     लखनऊ
    राज्य में विदेशी निवेश को आमंत्रित करने के लिए राज्य सरकार का प्रतिनिधिमंडल 19 अक्टूबर को जापान जाएगा। चार दिवसीय दौरे में ग्रीनहाईड्रोजन, इलेक्ट्रानिक्स और वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) के क्षेत्र में निवेश को लेकर विभिन्न जापानी कंपनियों के साथ करार किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 से 26 फरवरी तक सिंगापुर व जापान की यात्रा की थी। इस यात्रा में जापान के यामानाशी प्रांत के 200 निवेशकों को उन्होंने राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री की इस यात्रा से पहले जनवरी में जापानी निवेशकों का दल उत्तर प्रदेश के दौरे पर आया था।

    इसके बाद से जापानी निवेशकों के दो दौरे उत्तर प्रदेश में हो चुके हैं। औद्योगिक विकास विभाग ने जापानी निवेशकों को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सेक्टर पांच-ए में स्थापित की जा रही जापानी सिटी का भी दौरा कराया था। साथ ही लखनऊ और अन्य जिलों में उपलब्ध भूमि, सड़क, हवाई व रेल की कनेक्टिविटी की जानकारी दी थी। जापान की कनाडेविया कंपनी के प्रतिनिधियों ने ग्रीन हाईड्रोजन के क्षेत्र में निवेश में रुचि दिखाई है।

    इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी होंगे शामिल
    इसी सिलसिले में राज्य सरकार का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी के नेतृत्व में जापान के यामानाशी प्रांत के दौरे पर जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा), आइटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग और इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी शामिल होंगे।

    जापानी कंपनी कनाडेविया के साथ आइआइटी कानपुर व बीएचयू में स्थापित हो रहे ग्रीन हाईड्रोजन के एक्सीलेंस सेंटरों की स्थापना में तकनीकी सहयोग प्रदान करने को लेकर पहले ही एमओयू हो चुका है।