ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर आगामी 13 अक्टूबर तक फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर, स्वचलित हाई ग्राउंड क्लियरेंस स्प्रेयर बूम टाईप, रीपर स्वचलित, रीपर ट्रेक्टर चलित, शुगरकेन रेटून मैनेजर, रिजर एवं ब्रॉड बेड फरो प्लांटर कृषि यंत्रों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इसकी लॉटरी प्रक्रिया 14 अक्टूबर को संपादित की जाएगी। इच्छुक किसानों को आवेदन के साथ स्वयं के बैंक खाते से संबंधित जिले के सहायक कृषि यंत्री पन्ना के नाम से निर्धारित राशि का डीडी जमा करना अनिवार्य है। धरोहर राशि के बिना आवेदन मान्य नहीं होगा। फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर के लिए 5500, स्वचलित हाई ग्राउंड क्लियरेंस स्प्रेयर बूम टाईप के लिए 15,000, रीपर स्वचलित के लिए 2300, रीपर ट्रेक्टर चलित के लिए 2300, शुगरकेन रेटून मैनेजर के लिए 5000, रिजर के लिए 2500 एवं ब्रॉड बेड फरो प्लांटर के लिए 3000 रूपए की राशि निर्धारित है।
Author: NewseDay
-

टाउन हॉल पन्ना में जिला स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प एवं युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से संचालित अभियान अंतर्गत युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार की स्वायत्त इकाई मेरा युवा भारत द्वारा नशा मुक्त युवा एवं विकसित भारत थीम पर जिला स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन टाउन हॉल, पन्ना में किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 300 विद्यार्थियों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं ने नशे के दुष्प्रभावों और नशामुक्ति का संदेश प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों व टीम को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सहभागिता का अवसर मिलेगा। इस अवसर पर जिला खेल अधिकारी सुमित तोमर भी उपस्थित रहे। जिला युवा अधिकारी अपूर्व तिवारी ने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की अपील की। साथ ही कार्यक्रम में सहभागिता के लिए सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार भी व्यक्त किया।
-

कलेक्टर की जनसुनवाई में आए 51 आवेदन
जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर ऊषा परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई जनसुनवाई में 51 आवेदन आए। इस मौके पर आम लोगों की समस्याओं को सुनकर निराकरण किया गया। जनसुनवाई में उपस्थित विभागीय अधिकारियों द्वारा भी आवेदकों की समस्याएं सुनी गईं। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को आवेदकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए निर्देशित किया।
-

किराए के दो कमरों से सुविधायुक्त भवन तक, भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र को मिला अपना घर
रायपुर
कभी किराए के मकान के महज दो छोटे कमरों में संचालित होने वाला सरगुजा जिले का भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र आज अपने नए और सुविधायुक्त भवन में बच्चों की किलकारियों से गुलजार है। जहां पहले सीमित जगह के कारण बच्चों को बैठने, सीखने और खेल-कूद की गतिविधियों में परेशानी होती थी, वहीं अब रंग-बिरंगे शैक्षणिक चित्रों से सजे भवन में नौनिहाल खेल-खेल में सीख रहे हैं। पर्याप्त जगह मिलने से पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और अन्य गतिविधियों का संचालन भी अधिक व्यवस्थित ढंग से हो रहा है।
विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चठिरमा के बढ़निझरिया ग्राम में 11.69 लाख रुपये की लागत से नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया गया है। नया भवन बच्चों के साथ गर्भवती और शिशुवती माताओं के लिए भी बेहतर सुविधाओं का केंद्र बना है। भवन निर्माण ने स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार किए और कार्य के दौरान कुल 439 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ।
सेवा संकल्प अभियान के बीच भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र में आया यह बदलाव बताता है कि गांव में तैयार होने वाली एक अधोसंरचना किस तरह बच्चों की शिक्षा और पोषण, माताओं की देखभाल तथा स्थानीय ग्रामीणों के रोजगार जैसी कई जरूरतों को एक साथ मजबूती दे सकती है।
दो छोटे कमरों की परेशानी से मिली मुक्ति
पहले भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन के केवल दो छोटे कमरों में संचालित होता था। सीमित जगह में बच्चों के बैठने से लेकर प्रारंभिक शिक्षा और खेल-कूद की गतिविधियां संचालित करने तक कई व्यावहारिक कठिनाइयां आती थीं।
नए भवन ने इन परिस्थितियों को बदल दिया है। बच्चों को अब गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान मिल रहा है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी पोषण, प्रारंभिक शिक्षा एवं अन्य गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित कर पा रही हैं। अपना भवन मिलने से केंद्र की सेवाओं के लिए स्थायी और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध हुआ है।
60 बच्चों के साथ गर्भवती और शिशुवती माताओं को मिल रहीं सेवाएं
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुमित्रा व्यापारी बताती हैं कि वर्तमान में केंद्र से कुल 60 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 22 बच्चे तथा 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 38 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 8 शिशुवती और 9 गर्भवती माताएं भी केंद्र की सेवाओं से जुड़ी हुई हैं।
बच्चों को नियमित रूप से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं गर्भवती और शिशुवती माताओं को पूरक पोषण आहार के साथ पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है। इस तरह नया भवन बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के साथ मातृ-शिशु देखभाल से जुड़ी सेवाओं के संचालन का भी बेहतर माध्यम बना है।
रंग-बिरंगी दीवारें बनीं बच्चों की पहली पाठशाला
नए आंगनबाड़ी भवन की दीवारों पर बने अक्षर, शिक्षाप्रद चित्र और आकर्षक कार्टून बच्चों को सहज रूप से अपनी ओर आकर्षित करते हैं। रंगों और चित्रों से सजा वातावरण नौनिहालों के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक बना रहा है।
अब बच्चे पर्याप्त जगह में बैठकर सीख सकते हैं, खेल सकते हैं और सामूहिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। आंगनबाड़ी का यह नया स्वरूप बच्चों के लिए केवल पोषण प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि खेल, सीख और आनंद से जुड़ी उनकी पहली पाठशाला के रूप में विकसित हो रहा है।
भवन बना तो गांव में रोजगार भी आया
नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण ने बच्चों और माताओं के लिए बेहतर सुविधा तैयार करने के साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार भी उपलब्ध कराया। निर्माण कार्य के दौरान कुल 439 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ।
इस तरह गांव में एक स्थायी परिसंपत्ति के निर्माण के साथ स्थानीय परिवारों को गांव में ही काम मिला। अधोसंरचना निर्माण और ग्रामीण रोजगार का यह जुड़ाव विकास के दोहरे लाभ को सामने लाता है।
एक भवन से बदली बच्चों और माताओं की सुविधा की तस्वीर
भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र में आया बदलाव केवल पुराने किराए के कमरों से नए भवन तक पहुंचने की कहानी नहीं है। यह बच्चों को बेहतर वातावरण, माताओं को जरूरी सेवाएं और ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की संयुक्त तस्वीर है।
कभी दो छोटे कमरों में सीमित आंगनबाड़ी गतिविधियां आज सुविधायुक्त भवन में विस्तार पा रही हैं। बच्चों के लिए खेलने और सीखने की जगह है, माताओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन है और गांव के लिए एक स्थायी सार्वजनिक परिसंपत्ति तैयार हुई है।
सेवा संकल्प अभियान के बीच भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र की यह कहानी बताती है कि जब विकास की सुविधा गांव तक पहुंचती है, तो उसका प्रभाव केवल एक भवन तक सीमित नहीं रहता—उसमें बच्चों के बेहतर बचपन, माताओं की बेहतर देखभाल और ग्रामीण परिवारों की आजीविका की उम्मीद भी जुड़ जाती है।
-

छठ से पहले दिल्ली-पटना रूट पर स्पेशल ट्रेन का प्लान, 994 किमी सफर 13 घंटे में; जानें किराया और ठहराव
पटना
दीपावली और छठ महापर्व के दौरान दिल्ली से बिहार आने वाले यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेन चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली-पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है।करीब 994 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह ट्रेन लगभग 13 घंटे में सफर पूरा करेगी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो त्योहार के दौरान दिल्ली से बिहार आने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
सोशल मीडिया की स्लीपर ट्रेन से अलग है यह प्रस्ताव
नई दिल्ली-पटना वंदे भारत स्लीपर को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में रेलवे की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।फिलहाल उत्तर रेलवे की ओर से भेजा गया प्रस्ताव वंदे भारत स्पेशल ट्रेन का है, जिसमें एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की व्यवस्था होगी। इसलिए स्लीपर वंदे भारत की चर्चा को इस प्रस्तावित ट्रेन से अलग समझना जरूरी है।
कहां-कहां रुकेगी ट्रेन? छह स्टेशनों पर ठहराव का प्रस्ताव
प्रस्तावित वंदे भारत स्पेशल नई दिल्ली से पटना के बीच चलेगी। रास्ते में अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा स्टेशनों पर इसका ठहराव प्रस्तावित है। करीब 994 किलोमीटर के इस सफर में यात्रियों को तेज और अपेक्षाकृत सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा।21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक पहली जोड़ी चलाने की तैयारी
पहली जोड़ी 02252/02251 को नई दिल्ली से 21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक सोमवार, बुधवार और शनिवार को चलाने का प्रस्ताव है।वापसी में पटना से 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को ट्रेन चलाने की योजना है। इस दौरान कुल 16 फेरे लगाए जाने का प्रस्ताव है।
दूसरी जोड़ी भी चलेगी, जानें किस दिन मिलेगी ट्रेन
दूसरी जोड़ी 02253/02254 पटना से 24 अक्टूबर से 28 नवंबर तक शनिवार, सोमवार और बुधवार को चलाने का प्रस्ताव है। वहीं नई दिल्ली से यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक रविवार, मंगलवार और गुरुवार को संचालित की जाएगी। यानी त्योहारों के दौरान दिल्ली-पटना रूट पर अतिरिक्त फेरे उपलब्ध कराने की तैयारी है।सुबह दिल्ली से रवाना, रात में पहुंचेगी पटना
प्रस्ताव के मुताबिक नई दिल्ली से ट्रेन सुबह 8:35 बजे रवाना होगी और दोपहर पौने तीन बजे प्रयागराज पहुंचेगी। इसके बाद रात करीब 9:30 बजे पटना पहुंचने का समय प्रस्तावित है।वापसी में पटना से ट्रेन सुबह 10 बजे चलकर दोपहर 3:35 बजे प्रयागराज और रात 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंच सकती है।
कितना होगा किराया? चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास का प्रस्ताव
नई दिल्ली से पटना के बीच एसी चेयर कार का किराया भोजन समेत करीब 2,575 से 2,600 रुपये और एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया करीब 4,650 से 4,680 रुपये रहने का प्रस्ताव है। हालांकि अंतिम किराया रेलवे बोर्ड की मंजूरी और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद शुरू होगी टिकट बुकिंग
सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय के अनुसार रेलवे बोर्ड की हरी झंडी मिलने के बाद आइआरसीटीसी पर आरक्षण शुरू किया जाएगा। ऐसे में यात्रियों को फिलहाल आधिकारिक घोषणा और बुकिंग खुलने का इंतजार करना होगा।दिवाली और छठ के दौरान बिहार आने वाले यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त ट्रेन अहम विकल्प बन सकती है।
क्या दिल्ली-पटना के बीच स्लीपर वंदे भारत भी आएगी?
नई दिल्ली-पटना के बीच वंदे भारत स्लीपर चलाने की योजना को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन अभी इसका समय और शेड्यूल आधिकारिक रूप से तय नहीं है।सोशल मीडिया पर 2 अक्टूबर से ट्रेन चलने और ट्रायल जैसी चर्चाएं सामने आई हैं, लेकिन रेलवे की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल त्योहारों के लिए सामने आया ठोस प्रस्ताव वंदे भारत स्पेशल ट्रेन का ही है।
-

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के पहले दिन 1.12 करोड़ बच्चों एवं किशोरियों को दी गई कृमिनाशन खुराक
भोपाल
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (National Deworming Day) के अंतर्गत 06 अक्टूबर 2026 को प्रदेशभर में कृमिनाशन गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रथम दिवस की अब तक प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टिंग के अनुसार, प्रदेश में 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1.12 करोड़ बच्चों एवं किशोरों तथा प्रजनन आयु वर्ग (WRA) की लगभग 1 लाख महिलाओं को कृमिनाशन हेतु एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक दी गई।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान का उद्देश्य बच्चों, किशोरों एवं लक्षित प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं में आंतों के कृमि संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण करना है। कृमि संक्रमण के कारण होने वाली पोषण संबंधी समस्याओं एवं एनीमिया के जोखिम को कम करने तथा बच्चों एवं किशोरों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहयोग के लिए नियमित कृमिनाशन महत्वपूर्ण है। अभियान के अंतर्गत विद्यालयों, आंगनवाड़ी केन्द्रों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं सहित विभिन्न सेवा प्रदायगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को कृमिनाशन सेवाएं प्रदान की गईं।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर दवा सेवन से वंचित रहे पात्र हितग्राहियों के लिए 09 अक्टूबर 2026 मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा। मॉप-अप राउंड के दौरान प्रथम दिवस पर अनुपस्थित अथवा किसी अन्य कारण से एल्बेंडाजोल की खुराक नहीं ले सके पात्र बच्चों, किशोरों एवं लक्षित प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं को कृमिनाशक दवा दी जाएगी, ताकि अभियान के अंतर्गत अधिकतम पात्र हितग्राहियों का कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।
-

अपराध स्थल से न्यायालय तक—वैज्ञानिक साक्ष्य, पुलिस जांच और अभियोजन की पूरी प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन
भोपाल
नवीन न्याय संहिताओं के प्रावधानों और अपराध की सूचना से लेकर न्यायालय के अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को आमजन के लिए सरल, रोचक और व्यावहारिक रूप में समझाने के उद्देश्य से बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं फॉरेंसिक जांच के महत्वपूर्ण पहलुओं का सजीव नाट्य मंचन किया गया। प्रदर्शनी में यह दिखाया गया कि किसी अपराध के बाद पुलिस द्वारा घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने से लेकर फॉरेंसिक प्रयोगशाला में परीक्षण, रिपोर्ट तैयार करने और आगे की कानूनी कार्रवाई तक विभिन्न विशेषज्ञ एवं इकाइयां किस प्रकार समन्वय के साथ कार्य करती हैं।
प्रदर्शनी में फॉरेंसिक जांच की पूरी प्रक्रिया को अपराध स्थल से प्रयोगशाला तक चरणबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया। मध्यप्रदेश में विकसित फॉरेंसिक जांच व्यवस्था के अंतर्गत सभी जिलों में उपलब्ध Mobile Forensic Units की भूमिका को भी प्रदर्शित किया गया। प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्यों का collection, documentation, photography एवं videography किस प्रकार करते हैं, इसे सजीव प्रस्तुति के माध्यम से समझाया गया।
प्रदर्शनी में यह भी बताया गया कि BNS की धारा 176(3) के प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित गंभीर अपराधों में crime scene examination तथा photography/videography का विशेष महत्व है। अपराध स्थल पर उपलब्ध साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित करना और उनका दस्तावेजीकरण आगे की जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत आधार प्रदान करता है।
सजीव मंचन में फॉरेंसिक जांच के विभिन्न चरणों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि आमजन आसानी से समझ सकें कि—
· Crime Scene पर Mobile Forensic Unit/Forensic Expert वैज्ञानिक साक्ष्यों का documentation और collection करता है।
· Hospital में Post-Mortem Forensic Medicine Expert द्वारा किया जाता है, जिसमें मृत्यु के कारण, प्रकृति तथा अन्य medico-legal aspects का परीक्षण किया जाता है।
· FSL Laboratory में Scientific Officer/Forensic Scientist द्वारा जब्त exhibits का वैज्ञानिक परीक्षण कर examination report तैयार की जाती है।
DNA से Voice Analysis तक—प्रयोगशाला में वैज्ञानिक परीक्षणों का प्रदर्शन
प्रदर्शनी में फॉरेंसिक विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में होने वाली वैज्ञानिक परीक्षण प्रक्रियाओं को भी व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया गया। इसमें DNA, Biology, Chemistry, Toxicology, Ballistics, Physics तथा Voice Analysis से संबंधित परीक्षणों को सरल एवं समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत किया गया।
आगंतुकों को यह दिखाया गया कि अपराध स्थल से प्राप्त साक्ष्य किस प्रकार प्रयोगशाला तक पहुंचते हैं, विभिन्न शाखाओं के विशेषज्ञ उनका वैज्ञानिक विश्लेषण किस प्रकार करते हैं और परीक्षण के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने के बाद रिपोर्ट किस प्रकार तैयार की जाती है।
प्रदर्शनी में e-Forensic 2.0 प्रणाली के माध्यम से फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने, उसके डिजिटल संधारण तथा पुलिस एवं माननीय न्यायालय को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी सजीव नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से समझाया गया।
इस प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आधुनिक पुलिसिंग में वैज्ञानिक साक्ष्य केवल जांच को दिशा देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘मुस्कान अभियान’ और महिला सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्रदर्शनी में प्रदर्शित
प्रदर्शनी में ‘मुस्कान अभियान’ के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रति मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील एवं समन्वित कार्यप्रणाली की जानकारी प्रदर्शित की गई है। इसमें बालक-बालिकाओं के गुम होने की सूचना मिलने पर थाना पुलिस, जिला पुलिस, साइबर सेल, जीआरपी तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़ी इकाइयों द्वारा किए जाने वाले समन्वित प्रयासों को दर्शाया गया है। तकनीकी विश्लेषण, CCTV फुटेज, अंतर्राज्यीय समन्वय तथा अन्य माध्यमों से गुमशुदा बच्चों की तलाश और उन्हें सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जा रही है।
प्रदर्शनी में बाल सुरक्षा से जुड़े गुड टच-बैड टच, POCSO Act, साइबर सुरक्षा, बाल अधिकार, बाल विवाह, लैंगिक समानता एवं सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार जैसे विषयों पर पुलिस द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर किए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जा रही है।
महिला हेल्प डेस्क की भूमिका और थानों में महिलाओं को उपलब्ध कराए जाने वाले सहज एवं संवेदनशील प्रथम संपर्क बिंदु की जानकारी भी दी जा रही है। महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से महिलाओं को पुलिस प्रक्रिया, उनके विधिक अधिकारों तथा आवश्यक सहायता के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
विद्यार्थियों और युवा आगंतुकों में भी दिखा उत्साह, पुलिस प्रदर्शनी बनी सीखने का अनुभव
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों एवं युवा आगंतुकों की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिल रही है। एक्सीलेंस कॉलेज, भोपाल के फोरेंसिक विषय के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा FSL अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड़ द्वारा उन्हें फोरेंसिक विज्ञान एवं अपराध अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया गया। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी के क्विज जोन में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और डायल-112 की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया।
कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल के विद्यार्थियों ने पुलिस बैंड दल की आकर्षक एवं मनमोहक संगीतमयी प्रस्तुति का आनंद लिया। वहीं विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी में प्रस्तुत अभियोजन एवं न्यायालय से जुड़ी गतिविधियों का अवलोकन कर न्यायिक प्रक्रिया को नजदीक से समझने का अनुभव प्राप्त किया।
प्रदर्शनी के अवलोकन के बाद युवा विद्यार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किए और पुलिस की कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक, फोरेंसिक अनुसंधान तथा नागरिक सुरक्षा से जुड़ी प्रस्तुतियों को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।
-

राजस्थान पुलिस ने बदला बीट सिस्टम, तकनीक के जरिए मजबूत होगी 9 जिलों की पुलिसिंग
जयपुर
राजस्थान में बीट पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह, जनोन्मुखी एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से राजस्थान पुलिस और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D), गृह मंत्रालय, भारत सरकार के मध्य सोमवार को पुलिस मुख्यालय, जयपुर में महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू डीजीपी/आईजीपी कॉन्फ्रेंस 2025 की सिफारिशों के अनुरूप बीट स्तर की पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए तैयार एक वर्षीय एक्शन प्लान के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।पुलिस मुख्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल की मौजूदगी में राजस्थान पुलिस की ओर से उप महानिरीक्षक (अपराध) दीपक भार्गव और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की ओर से उप महानिरीक्षक, नेशनल पुलिस मिशन, BPR&D, डॉ. किरण कंग सिद्धू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
पुलिसिंग में बीट ही बेसिक है : आलोक मित्तल
एमओयू पर हस्ताक्षर के पश्चात BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिसिंग में बीट ही बेसिक है। बीट पुलिसिंग की महत्ता को महसूस करते हुए डीजीपी/आईजीपी कॉन्फ्रेंस 2025 की सिफारिशों में एक वर्षीय एक्शन प्लान तैयार करने के माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों की अनुपालना में गोवा के बाद राजस्थान पुलिस का यह दूसरा एमओयू है। उन्होंने कहा कि एमओयू के तहत BPR&D द्वारा राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर बीट पुलिसिंग को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जाएंगे। इस प्रकार के एमओयू से एक-दूसरे के राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज से सीखने को मिलेगा। उन्होंने राजस्थान पुलिस के बीट क्लस्टर कॉन्सेप्ट की भी सराहना की।धरातल पर दिखेगा बदलाव : राजीव कुमार शर्मा
इससे पहले महानिदेशक पुलिस, राजस्थान राजीव कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में बीट पुलिसिंग को पुलिस एवं आमजन के बीच सबसे महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु बताते हुए इसे और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बीट पुलिसिंग के परंपरागत कार्यों से हटकर अब तकनीक के सहयोग से धरातल पर बेहतर परिणाम दिखाई देंगे। उन्होंने चंडीगढ़ की बीट बुक प्रैक्टिस की सराहना की और इसे अपनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि यह एमओयू बीट पुलिसिंग को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह, जनसहभागी, सूचना आधारित एवं तकनीक-सक्षम बनाने के साथ-साथ अपराध की रोकथाम, पुलिस-जन संवाद और स्थानीय स्तर पर पुलिस की प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस दौरान उन्होंने नवीन विधिक संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन में राजस्थान के प्रयासों के बारे में बताया और इसी प्रकार की उपलब्धियों के लिए टीम राजस्थान पुलिस को तैयार रहने की बात कही।राजस्थान की बीट पुलिसिंग पर हुआ प्रस्तुतीकरण
कार्यक्रम की शुरुआत में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने डीजी BPR&D आलोक मित्तल तथा डीआईजी डॉ. किरण कंग सिद्धू का डीआईजी राशि डोगरा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद महानिदेशक पुलिस, कानून एवं व्यवस्था, संजय अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए राजस्थान पुलिस की बेस्ट प्रैक्टिसेज के बारे में जानकारी दी। उप महानिरीक्षक पुलिस, क्राइम ब्रांच, दीपक भार्गव ने राजस्थान में वर्तमान बीट पुलिसिंग व्यवस्था एवं इसकी कार्यप्रणाली पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसके पश्चात उप महानिरीक्षक, नेशनल पुलिस मिशन, BPR&D की डॉ. किरण कंग सिद्धू ने बीट पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए BPR&D की ओर से तैयार कार्ययोजना एवं सहयोग के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया।नौ जिलों का प्रथम चरण में चयन
एमओयू के तहत कार्ययोजना के प्रथम चरण में प्रत्येक रेंज से एक-एक, कुल नौ जिलों का चयन करते हुए नवीन बीट प्रणाली को लागू किया गया है। इसमें सीकर, जयपुर उत्तर, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, कोटा शहर, डूंगरपुर, चूरू, जैसलमेर एवं जोधपुर पश्चिम को शामिल किया गया है। प्रथम चरण के अनुभवों, उपलब्धियों एवं अच्छे नवाचारों के आधार पर इसके बाद प्रदेशभर के शेष जिलों में नवीन बीट प्रणाली लागू की जाएगी।इस पहल के तहत बीट संरचना को जनसंख्या, अपराध की स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियों तथा शहरी-ग्रामीण स्वरूप के आधार पर युक्तिसंगत बनाया जाएगा। बीट स्तर पर हॉटस्पॉट, संवेदनशील स्थानों, महत्वपूर्ण संस्थानों एवं अन्य स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान करते हुए जियो-मैप्ड बीट प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।
सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय सूचना तंत्र होगा मजबूत
बीट पुलिसिंग को जनसहभागिता से जोड़ते हुए कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (CLG), पुलिस मित्र एवं अन्य सामुदायिक माध्यमों को मजबूत किया जाएगा। 'नो योर बीट ऑफिसर' जैसी पहल के माध्यम से पुलिस एवं आमजन के बीच नियमित संवाद को संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा। विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों के साथ लक्षित संवाद पर भी विशेष जोर रहेगा। बीट बुक, विलेज क्राइम नोट बुक, डिजिटल बीट प्रोफाइल एवं अपराध/हॉटस्पॉट मैपिंग के माध्यम से स्थानीय सूचनाओं के कानूनसम्मत संग्रह, सत्यापन एवं उपयोग की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।राजकॉप ई-बीट बुक को किया जाएगा और सशक्त
बीट पुलिसिंग में तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए राजकॉप ई-बीट बुक की क्षमताओं को और विकसित किया जाएगा। जीपीएस, जियो-टैगिंग, क्यूआर आधारित सुविधाएं, डिजिटल दस्तावेजीकरण एवं डैशबोर्ड जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं का आवश्यकता के अनुरूप उपयोग किया जाएगा। इससे बीट स्तर की गतिविधियों की निगरानी, सूचना का अद्यतन एवं पर्यवेक्षण अधिक प्रभावी हो सकेगा।केपीआई आधारित होगी बीट पुलिसिंग की समीक्षा
कार्ययोजना के तहत की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) के आधार पर बीट पुलिसिंग की प्रभावशीलता की समीक्षा की जाएगी। बीट, पुलिस थाना, जिला/कमिश्नरेट एवं राज्य स्तर पर संरचित रिपोर्टिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी तथा अच्छे कार्यों एवं नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर विशेष जोर
बीट अधिकारियों एवं पर्यवेक्षण अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रारंभिक एवं रिफ्रेशर प्रशिक्षण, ट्रेनर्स की ट्रेनिंग तथा कैस्केड ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर को नोडल प्रशिक्षण संस्थान के रूप में नामित किया गया है। अकादमी द्वारा सॉफ्ट स्किल्स एवं ट्रेनर्स की ट्रेनिंग से संबंधित प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी।BPR&D देगा विशेषज्ञ मार्गदर्शन, राजस्थान पुलिस करेगी परिचालन क्रियान्वयन
एमओयू के तहत BPR&D द्वारा सामान्य क्रियान्वयन ढांचा, प्रशिक्षण सामग्री, मॉडल प्रारूप, समीक्षा उपकरण एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं बीट पुलिसिंग की मैदानी एवं परिचालन व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर आवश्यक आदेश, मानव संसाधन, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण व्यवस्था, तकनीक एवं अन्य परियोजना संबंधी आवश्यकताओं की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस की रहेगी।इस मौके पर महानिदेशक पुलिस, कानून एवं व्यवस्था, संजय अग्रवाल, महानिदेशक पुलिस, यातायात, मालिनी अग्रवाल सहित पुलिस मुख्यालय के समस्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में महानिरीक्षक पुलिस (क्राइम) शरत कविराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद BPR&D के अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।
-

कार्यों की प्रगति और निर्माण की गुणवत्ता का लिया जायजा
रायपुर
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज बिलासपुर के सकरी में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत निर्मित आवासों और कोनी में पीएम ई-बस सेवा के लिए निर्माणाधीन टर्मिनल एवं चार्जिंग स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने दोनों परियोजनाओं की प्रगति एवं निर्माण की गुणवत्ता का जायजा लिया और अधिकारियों को कमियां दूर कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। सूडा के सीईओ सुमित अग्रवाल और बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे सहित निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।
प्रमुख सचिव बोरा ने सकरी में प्रधानमंत्री आवास योजना के एएचपी घटक के तहत बनाए गए आवासों के निरीक्षण के दौरान फ्लोर पर टाइल्स नहीं लगे होने और फिनिशिंग कार्य अधूरा मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने नगर निगम के इंजीनियरों तथा निर्माण एजेंसीज को कमियों में तत्काल सुधार करते हुए फिनिशिंग कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने किचन और प्लेटफॉर्म के आकार को लेकर भी अधिकारियों से सवाल-जवाब किए तथा निर्माण में उपयोग की गई सामग्री एवं अब तक हुए कार्यों की जानकारी ली।
श्री बोरा ने आवासीय परिसर में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने परिसर में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था करने, लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाने और बच्चों के लिए खेल क्षेत्र विकसित करने को कहा। प्रमुख सचिव ने शेष कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए 15 दिनों बाद प्रगति की पुनः समीक्षा करने की बात कही। सकरी में करीब 11 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से 261 आवास तैयार किए गए हैं, जिनमें अंतिम चरण के फिनिशिंग कार्य शेष हैं।
प्रमुख सचिव बोरा ने कोनी स्थित सिटी बस डिपो पहुंचकर पीएम ई-बस सेवा के तहत निर्माणाधीन टर्मिनल कॉम्प्लेक्स, सब-स्टेशन एवं चार्जिंग स्टेशन का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने बसों के लिए बनाए गए स्टॉप को व्यवस्थित करने और वहां डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश दिए, ताकि यात्रियों को बसों के समय एवं आवागमन की जानकारी आसानी से मिल सके।
पीएम ई-बस सेवा के तहत बिलासपुर में 50 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। इनमें 9 मीटर की 35 और 7 मीटर की 15 बसें शामिल हैं। इन बसों का संचालन शहर के 12 मार्गों पर किया जाएगा। मार्ग निर्धारण में स्कूल, कॉलेज, औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र, पर्यटन स्थल तथा उच्च न्यायालय तक आवागमन की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
ई-बसों के संचालन के लिए कोनी स्थित सिटी बस डिपो में टर्मिनल कॉम्प्लेक्स, सब-स्टेशन एवं चार्जिंग स्टेशन के निर्माण के लिए 11 करोड़ 45 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसमें सिविल अधोसंरचना निर्माण के लिए 8 करोड़ 37 लाख रुपए, सब-स्टेशन के लिए 1 करोड़ 59 लाख रुपए तथा उच्च दाब विद्युत कनेक्शन के लिए 1 करोड़ 49 लाख रुपए का प्रावधान है। वर्तमान में सिविल अधोसंरचना निर्माण का लगभग 70 प्रतिशत और सब-स्टेशन निर्माण का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उच्च दाब विद्युत कनेक्शन के लिए आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण सीएसपीडीसीएल द्वारा किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए टर्मिनल कॉम्प्लेक्स में कैफेटेरिया एवं रैनबसेरा विकसित करने की भी योजना है।
-

PhD स्कॉलर की करंट से मौत मामले में सख्ती, PU के SDO समेत 3 पर कार्रवाई की तैयारी
चंडीगढ़.
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में करंट से पीएचडी स्काॅलर ज्योति की मौत केस की मजिस्ट्रियल इंक्वायरी पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट डीसी निशांत कुमार यादव को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में हादसे के लिए कई स्तरों पर लापरवाही का उल्लेख किया है।
पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के एसडीओ, एक जूनियर इंजीनियर और संबंधित इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथाॅरिटी (सीईए) की वर्ष 2013 की गाइडलाइंस के उल्लंघन को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी खुले तारों और विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच करने की थी, वे अपनी ड्यूटी अपेक्षित तरीके से नहीं निभा पाए। नियमित निरीक्षण में खामियों को समय रहते दूर किया जाता तो हादसे को टाला जा सकता था।
