Author: NewseDay

  • जगदलपुर में पहली बार होगा राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, देशभर के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे शिरकत

    जगदलपुर में पहली बार होगा राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, देशभर के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे शिरकत

    बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में जुटेंगे देशभर के वरिष्ठ अधिकारी

    एम-पैक्स समितियों के गठन, डिजिटल सेवाओं, भंडारण और सहकारी बैंकिंग पर होगा मंथन

    उर्वरक वितरण और बहुराज्यीय सहकारिता पर भी चर्चा, छत्तीसगढ़ साझा करेगा अपनी उपलब्धियां

    रायपुर,
    बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी ‘सहकार से समृद्धि’ की कार्ययोजना पर मंथन करेंगे। सम्मेलन भारत सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी की अध्यक्षता में होगा। इसमें अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज बंसल तथा भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन भी शामिल होंगे।

    सम्मेलन में मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (एम-पैक्स) और दुग्ध समितियों के गठन, एम-पैक्स कंप्यूटरीकरण, सहकारिता में डिजिटल तकनीक के उपयोग, भंडारण क्षमता के विस्तार और सहकारी बैंकिंग के सशक्तिकरण पर विशेष चर्चा होगी। एम-पैक्स से उर्वरक वितरण और बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से समन्वय पर भी विचार कर अगले तीन महीनों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

    छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बताया कि सम्मेलन में 15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक भाग लेंगे। सम्मेलन में सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और स्थानीय रोजगार को मजबूती देने पर जोर रहेगा।

    पहले दिन सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा की जाएगी। विभिन्न राज्य एम-पैक्स व दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता विस्तार, डिजिटल सेवाओं और ऋण उपलब्धता के अनुभव साझा करेंगे। विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, कारोबार के विविधीकरण तथा प्राथमिक समितियों को राष्ट्रीय निर्यात, जैविक और बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।
    दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आगामी पांच वर्षों के वित्तीय सहयोग तथा राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। एम-पैक्स से उर्वरक व अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता और जिला स्तर के सफल सहकारी मॉडल साझा किए जाएंगे। अधिकारी बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का भ्रमण भी करेंगे।

    नई समितियों और डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पहुंच
    सचिव डॉ. प्रसन्ना ने बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां गठित की गई हैं। ‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए कृषकों के खाते खोले गए हैं। एम-पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में परिवर्तित किया गया है। राज्य के 2,058 एम-पैक्स में उपलब्ध माइक्रो एटीएम से अब तक 324 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन हुए हैं।

    गोदाम निर्माण से बढ़ रही भंडारण क्षमता
    राज्य में एम-पैक्स के लिए 200 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाए जा रहे हैं। आरआईडीएफ योजना 2022 के तहत 725 एम-पैक्स में गोदामों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2025 में जर्जर गोदाम वाले अथवा गोदाम विहीन 100 एम-पैक्स में गोदाम निर्माण की योजना स्वीकृत कर निर्माण एजेंसियां चयनित की गई हैं। नवगठित 515 एम-पैक्स में भी गोदाम निर्माण प्रस्तावित है।
    विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत राज्य के 46 एम-पैक्स चयनित हैं। इनमें 20 के लिए ऋण स्वीकृत हो चुका है, नौ को एएमआई सब्सिडी मिली है और छह में निर्माण शुरू हो गया है।

    राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ाव
    राज्य शासन ने उपार्जन के लिए एनसीसीएफ को 14 और नाफेड को 15 जिलों में एजेंसी नियुक्त किया है। एनसीसीएफ में राज्य के 2,058 और नाफेड में 412 एम-पैक्स का पंजीयन हुआ है। वहीं, 1,681 एम-पैक्स को राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, 1,633 को राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और 1,746 को भारतीय बीज सहकारी समिति की सदस्यता मिली है।

    एथेनॉल संयंत्रों से मूल्य संवर्धन और रोजगार को बढ़ावा
    कोंडागांव में 80 केएलपीडी क्षमता के एथेनॉल संयंत्र से स्थानीय मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन और रोजगार सृजन हो रहा है। भोरमदेव में पीपीपी मॉडल पर संचालित 80 केएलपीडी संयंत्र सहकारी शक्कर कारखाने को नियमित और बढ़ती आय प्रदान कर रहा है। पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। इनसे कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

    सम्मेलन में इन अनुभवों के आधार पर सहकारी समितियों की पहुंच, सेवाओं और कारोबार के विस्तार की आगामी दिशा पर विचार किया जाएगा।

  • प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली मरवाही के भर्रीडांड़ निवासी मंगसा दास की जिंदगी, वर्षों की परेशानी के बाद मिला अपना पक्का आशियाना

    प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली मरवाही के भर्रीडांड़ निवासी मंगसा दास की जिंदगी, वर्षों की परेशानी के बाद मिला अपना पक्का आशियाना

    प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली मरवाही के भर्रीडांड़ निवासी मंगसा दास की जिंदगी, वर्षों की परेशानी के बाद मिला अपना पक्का आशियाना

    खपरैल की टपकती छत और मिट्टी की उखड़ती दीवारों से मिली मुक्ति, बेटे-बहू के साथ पक्के घर में सुकून से गुजर रही जिंदगी

    रायपुर
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के संकल्प ने गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के एक बुजुर्ग की जिंदगी में खुशियों की नई रोशनी बिखेरी है। मरवाही विकासखंड के ग्राम भर्रीडांड़ निवासी 80 वर्षीय मंगसा दास ने जीवन का लंबा समय मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाले कच्चे मकान में गुजारा। उम्र के इस पड़ाव पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद अब वे अपने बेटे-बहू के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन बिता रहे हैं।

    अपने नए घर की बात करते हुए मंगसा दास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई देती है। वे बताते हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। सामान्य दिनों में तो किसी तरह गुजारा हो जाता था, लेकिन बारिश का मौसम आते ही मुश्किलें बढ़ जाती थीं। तेज बारिश में खपरैल की छत से पानी टपकता था। कई बार मिट्टी की दीवार का हिस्सा उखड़ जाता था और घर में रखा जरूरी सामान भी पानी से भीग जाता था।

    बारिश की आहट के साथ बढ़ जाती थी चिंता

    मंगसा दास ने कई बार अपने कच्चे मकान की मरम्मत भी कराई, लेकिन परेशानी का स्थायी समाधान नहीं हो सका। हर साल बारिश से पहले घर को ठीक करने की चिंता रहती थी। तेज बरसात में छत से टपकते पानी और कमजोर होती मिट्टी की दीवारों के बीच परिवार को सामान सुरक्षित रखने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती थी। बढ़ती उम्र के साथ मकान की बार-बार मरम्मत कराना उनके लिए और कठिन होता चला गया।

    प्रधानमंत्री आवास योजना बनी नई उम्मीद

    मंगसा दास को जब प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। योजना की सूची में नाम आने के बाद उनके वर्षों पुराने पक्के घर के सपने को पूरा करने का रास्ता खुल गया। उन्होंने पुराने कच्चे मकान को हटवाकर पक्के आवास का निर्माण कराया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना आज मंगसा दास जैसे ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुरक्षा और सम्मान का आधार बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भी पात्र परिवारों तक आवास योजना का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    अब बारिश आती है तो डर नहीं लगता

    पक्का घर बन जाने के बाद मंगसा दास के जीवन की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक दूर हो गई है। अब बारिश होने पर न खपरैल से पानी टपकने का डर है, न मिट्टी की दीवार खराब होने की चिंता। घर का सामान सुरक्षित रहता है और परिवार को मौसम की मार से बचाने के लिए मजबूत छत मिल गई है। मंगसा दास के लिए यह पक्का आवास केवल ईंट, सीमेंट और छत से बना मकान नहीं है। यह उम्र के अंतिम पड़ाव में सुरक्षा, सम्मान और सुकून से जीवन जीने का भरोसा है।

    मंगसा दास पक्का आवास मिलने से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उनके बुढ़ापे का सहारा बने हैं। पक्का मकान मिलने से उनकी वर्षों पुरानी परेशानी समाप्त हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजना से उन्हें जीवन के इस पड़ाव पर सुरक्षित घर मिला है।

    पक्का घर बना सम्मान और सुरक्षित भविष्य का आधार

    प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को केवल छत उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार देना भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में योजना का लाभ ग्रामीण अंचलों के जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रहा है।

    80 वर्षीय मंगसा दास की कहानी इसी बदलाव की एक भावनात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है। कभी बारिश की बूंदें उनके लिए चिंता का संदेश लेकर आती थीं। खपरैल से टपकते पानी के बीच घर का सामान बचाना और मिट्टी की दीवारों को संभालना उनकी मजबूरी थी। आज वही बुजुर्ग अपने बेटे-बहू के साथ मजबूत छत के नीचे सुकून से जीवन बिता रहे हैं।

    मंगसा दास के चेहरे की मुस्कान इस बदलाव को बयां करती है। पक्का घर केवल चार दीवारें और एक छत नहीं, बल्कि बुढ़ापे में सुरक्षा, सम्मान और निश्चिंत जीवन का भरोसा है। अब बारिश की बूंदें उनके लिए परेशानी नहीं, बल्कि अपने पक्के आशियाने में बैठकर सुकून से देखने वाला मौसम बन गई है।

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ किया- पंचायत कर्मचारी पेंशन के हकदार नहीं

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ किया- पंचायत कर्मचारी पेंशन के हकदार नहीं

    बिलासपुर.

    हाईकोर्ट ने पंचायत कर्मचारियों की पेंशन संबंधी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता पेंशन पाने का कोई वैधानिक अधिकार स्थापित नहीं कर सके.

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत कर्मचारी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और उनके सेवा संबंधी मामले अलग नियमों से संचालित होते हैं. दरअसल, मामला प्रदेश के अलग-अलग जनपद पंचायतों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़ा था. याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक सेवा करने और कुछ अन्य जनपद पंचायतों में कर्मचारियों को पेंशन मिलने का हवाला देते हुए पेंशन देने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि कुछ जनपद पंचायतों द्वारा अपने स्तर पर पेंशन दिए जाने से सभी पंचायत कर्मचारियों को वैधानिक रूप से पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता.

    कोर्ट ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 केवल पहले से मौजूद वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभों को संरक्षण देती है, इससे नई पेंशन का अधिकार पैदा नहीं होता. याचिका कर्ताओं की सेवा शर्तों में सेवानिवृत्ति लाभ प्रोविडेंट फंड योजना के तहत थे, और वे कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड का लाभ ले रहे थे. ऐसे में पेंशन देने का कोई आधार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि दूसरे किसी प्राधिकरण द्वारा दिए गए लाभ के आधार पर वैधानिक अधिकार की मांग नहीं की जा सकती. सभी याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं पाए जाने पर हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया और लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया.

  • आयुर्वेद को नई पहचान देने पर जोर, राज्यपाल पटेल ने ‘नाड़ी विश्लेषण-2026’ का किया उद्घाटन

    आयुर्वेद को नई पहचान देने पर जोर, राज्यपाल पटेल ने ‘नाड़ी विश्लेषण-2026’ का किया उद्घाटन

    नाड़ी विश्लेषण, आयुर्वेद का विज्ञान और भारत का गौरव : राज्यपाल पटेल

    राज्यपाल ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी नाड़ी विश्लेषण- 2026 का शुभारंभ

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि नाड़ी विश्लेषण विज्ञान, भारत की समृद्ध चिकित्सकीय ज्ञान परंपरा है। यह विज्ञान के साथ भारतीय ज्ञान की गौरवशाली विरासत भी है। आधुनिक तकनीक और आयुष विज्ञान के साथ नाड़ी विश्लेषण को जोड़ना और विस्तारित करना स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत बनाने का मार्ग है। उन्होंने संगोष्ठी के आयोजन की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि “सबके लिए स्वास्थ्य” के लक्ष्य की पूर्ति में आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यह स्वस्थ जीवनशैली और स्व-देखभाल को बढ़ावा देता है। नाड़ी विश्लेषण, कम खर्चीली, बिना किसी शारीरिक नुकसान की जाँच विधि है, जिसमें जटिल उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए नाड़ी विश्लेषण ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सस्ती, सुलभ और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के द्वारा जन स्वास्थ्य को नया आयाम दे सकती है।

    राज्यपाल पटेल मंगलवार को नाड़ी विश्लेषण – 2026 पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन, राष्ट्रीय आयुष मिशन और पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ''नाड़ी परीक्षा की व्यवहारिक तकनीकों की खोज एवं निदान में नाड़ी का नैदानिकी महत्व'' विषय पर किया गया था।

    स्वस्थ जीवन और वेलनेस को बढ़ाता है आयुर्वेद

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आज दुनिया आयुर्वेद केहॉलिस्टिक विजन और जीवन दर्शन की ओर लौट रही है। आयुर्वेद आरोग्य का ऐसा विज्ञान है, जो रोग के उपचार से आगे बढ़कर स्वस्थ जीवन और वेलनेस को बढ़ावा देता है। इसके बहुउद्देश्यीय महत्व के कारण आयुर्वेद का भविष्य स्वर्णिम है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, हमें अनुशासन सिखाता है। मौसम के अनुसार खान-पान और जीवन शैली में परिवर्तन का मार्गदर्शन देता है। आयुष की अलग-अलग विधाएं भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। योग, हौम्योपैथी और नैचुरोपैथी हर घर-हर व्यक्ति तक पहुँच गई है। परिणामस्वरूप आज विश्वभर में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवनशैली और संयमित खान-पान की उपयोगिता बताई। सभी को नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, भरपूर नींद और पर्याप्त पानी को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी।

    एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने पर हो चिंतन

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने आयुर्वेद को नई पहचान दिलाई है। समय की मांग है कि नाड़ी विश्लेषण के पारंपरिक ज्ञान से जुड़े दावों का आधुनिक वैज्ञानिक मानकों और शोध पद्धतियों के आधार पर विश्लेषण तथा सत्यापन किया जाए। नाड़ी विश्लेषण की व्यक्तिपरकता और विशिष्ट आकलन के अंतरों को कम करने पर चर्चा की जाए। आधुनिक वैज्ञानिक मापदण्डों के आधार पर प्रमाणित विश्लेषण द्वारा इसे एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने पर भी चिंतन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन क्षेत्रों में जहाँ आधुनिक जाँच सुविधाएँ सीमित हैं, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में नाड़ी विश्लेषण विधि के द्वारा बड़ी संख्या में लोगों तक स्वास्थ्य परामर्श तथा प्रारंभिक स्वास्थ्य आकलन में आयुर्वेद चिकित्सक और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संभावनाओं को भी खोजा जाना चाहिए।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ भगवान धन्वतरी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उनका आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने ''आयु वर्धनम् – सिकल सेल'' लघु पुस्तिका का लोकार्पण किया। भारत के प्रतिष्ठित नाड़ी विशेषज्ञों का सम्मान किया। महाविद्यालय परिसर में औषधीय पौधे का रोपण किया।

    कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी ने आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में महाविद्यालय की सतत और सक्रिय भूमिका की सराहना की। स्वागत उद्बोधन में आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने नाड़ी विश्लेषण विज्ञान के प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के उद्देश्य, महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। आभार आयुष विभाग की आयुक्त सुउमा माहेश्वरी ने व्यक्त किया। संगोष्ठी का प्रारंभ और समापन राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय गान से हुआ। कार्यक्रम में पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य उमेश शुक्ला, नाड़ी विशेषज्ञ, महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय प्रमुख, आचार्यगण और विद्यार्थी उपस्थित थे।

     

  • शुभारंभ अवसर पर राज्य में ₹1,100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को

    शुभारंभ अवसर पर राज्य में ₹1,100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक स्थापत्य, जैव-विविधता और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 'मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट' (MPTM 2026) के सातवें संस्करण का आयोजन 07 से 10 अक्टूबर 2026 तक भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित आयोजन राज्य के पर्यटन परिदृश्य का अब तक का सबसे विशाल और रणनीतिक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) नेटवर्किंग मंच सिद्ध होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर, बुधवार को मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी करेंगे।

    राज्य मंत्री  लोधी ने बताया कि मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट केवल एक व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के सर्वांगीण आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार सृजन और वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक प्रभावी माध्यम है। राज्य सरकार वर्ष 2030 तक मध्यप्रदेश को देश का शीर्ष साहसिक पर्यटन स्थल बनाने की सुविचारित कार्ययोजना पर अग्रसर है। इसके साथ ही, प्रदेश को "भारत की वन्यजीव राजधानी" (Wildlife Capital of India) के रूप में ब्रांडिंग करते हुए संरक्षण-आधारित और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को प्राथमिकता दी जा रही है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के माध्यम से विश्वस्तरीय सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण होमस्टे के जरिए स्थानीय समुदायों का सशक्तीकरण तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) व बहुभाषी डिजिटल तकनीकों के जरिए पर्यटकों के अनुभव को आधुनिक बनाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    सचिव पर्यटन और प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी. ने मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट की रूपरेखा, तैयारियों और रणनीतिक लक्ष्यों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य शासन की सुदृढ़ और प्रगतिशील पर्यटन नीतियों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पर्यटन ने अप्रत्याशित वृद्धि हासिल की है। वर्ष 2025 में पर्यटकों के आवागमन में 57 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे प्रदेश में पर्यटकों का कुल आंकड़ा 21.05 करोड़ तक पहुंच गया है। MPTM 2026 का मूल उद्देश्य इसी तीव्र संवृद्धि को वैश्विक निवेश, आधुनिक अधोसंरचना और सतत आजीविका के अवसरों में रूपांतरित करना है। 

    MPTM 2026 के इस संस्करण में विश्व के 34 से अधिक प्रमुख देशों के 100 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि और पर्यटन स्टेकहोल्डर इस मार्ट में प्रत्यक्ष सहभागिता कर रहे हैं। इनमें यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली, ग्रीस, नीदरलैंड्स, पोलैंड, फिनलैंड, बुल्गारिया, बेलारूस, अल्बानिया, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे प्रमुख यूरोपीय राष्ट्र शामिल हैं। अमेरिकी महाद्वीप से संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको; एशिया-प्रशांत क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस और लंका; तथा पश्चिम एशिया व अफ्रीका से संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल, मॉरीशस, केन्या और रूस के प्रमुख टूर ऑपरेटर्स व ट्रैवल लेखक भोपाल पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी देश के 15 से अधिक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, हरियाणा, ओडिशा तथा जम्मू और कश्मीर के 180 से अधिक प्रमुख घरेलू टूर ऑपरेटर्स भाग ले रहे हैं।

    इस चार दिवसीय आयोजन की सबसे बड़ी व्यापारिक विशेषता 10 हजार से अधिक पूर्व-निर्धारित B2B बैठकें होंगी। इन व्यापारिक बैठकों के सुचारु संचालन के लिए एक अत्याधुनिक ऑनलाइन शेड्यूलिंग प्रणाली विकसित की गई है। इसके माध्यम से देश-विदेश के प्रतिष्ठित खरीदारों (Buyers), राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों, होटल समूहों, एयरलाइंस और ट्रैवल एजेंसियों का राज्य के 355 स्थानीय हितधारकों (होटलियर्स, रिसॉर्ट संचालकों, हेरिटेज प्रॉपर्टीज, होमस्टे स्वामियों और एडवेंचर स्पोर्ट्स संचालकों) से सीधा संवाद स्थापित होगा। प्रत्यक्ष और वर्चुअल दोनों माध्यमों से होने वाली ये बैठकें राज्य के स्थानीय पर्यटन उत्पादों, लोक-संस्कृति, हस्तशिल्प और अद्वितीय यात्रा पैकेजों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीधे स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।

    मध्यप्रदेश में निजी पूंजी निवेश और विश्वस्तरीय अधोसंरचना को गति देने की दृष्टि से MPTM 2026 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगा। आयोजन के दौरान लगभग ₹1,100 करोड़ से अधिक के संयुक्त निवेश प्रस्तावों और अनुबंधों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होटल, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी टेंटेड कैंपिंग और इको-टूरिज्म इकाइयों की स्थापना के लिए 14 प्रमुख परियोजनाओं हेतु निजी निवेशकों को ₹252 करोड़ के 'लेटर ऑफ अवार्ड' (LOA) औपचारिक रूप से सौंपे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पर्यटकों की सड़क यात्रा को सुगम, सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए राज्य के 3 प्रमुख पर्यटन राजमार्गों पर अत्याधुनिक 'मार्ग सुविधा केंद्रों' (Way-side Amenities) के विकास हेतु भी LOA प्रदान किए जा रहे हैं।

    इस निवेश अभियान का सबसे बड़ा आकर्षण सीहोर जिले के रामगढ़ में होने वाला ₹848.40 करोड़ का मेगा पर्यटन निवेश समझौता है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड एवं मेसर्स ए.आर.एम. फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मध्य संपन्न होने वाले इस ऐतिहासिक अनुबंध के अंतर्गत रामगढ़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स, गोल्फ विला, वेलनेस रिसॉर्ट, लक्जरी होटल और उच्चस्तरीय आतिथ्य अधोसंरचना का निर्माण किया जाएगा। यह विशाल परियोजना न केवल विंध्य और मालवा क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र को वैश्विक पहचान देगी, बल्कि इससे क्षेत्र में लगभग 920 प्रत्यक्ष और सैकड़ों अप्रत्यक्ष स्थानीय रोजगारों का सृजन होगा।

    प्रदेश के पर्यटन तंत्र को भविष्योन्मुखी बनाने के उद्देश्य से MPTM 2026 में 12 विशिष्ट रणनीतिक एमओयू, एमओए और समझौतों पर विधिवत हस्ताक्षर किए जाएंगे। इन समझौतों में कौशल विकास के तहत भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM), ग्वालियर के साथ साझेदारी शामिल है, जिसके प्रथम चरण में भोपाल के 100 पर्यटक वाहन चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग, शिष्टाचार और ग्राहक सेवा का RPL प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया जाएगा। ग्रामीण पर्यटन के डिजिटलीकरण के लिए 'ग्राम स्टे' के साथ समझौता किया जा रहा है, जिससे सुदूर ग्रामीण होमस्टे को वैश्विक बुकिंग प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जा सके। साहसिक और जल पर्यटन के विस्तार हेतु 'रॉयल एनफील्ड' के साथ नए बाइक राइडिंग रूट्स के चिन्हांकन, 'एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (ATOAI) के साथ सुरक्षा मानकों के निर्धारण तथा पीथमपुर स्थित एशिया के सबसे बड़े ऑटोमोटिव टेस्टिंग ट्रैक 'नैट्रैक्स' (NATRAX) के साथ मोटरस्पोर्ट्स पर्यटन के विकास हेतु एमओयू किए जा रहे हैं।

    फिल्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। आर्टमिसिया कॉलेज ऑफ आर्ट एंड डिजाइन (ACAD), इंदौर के साथ विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण व डिजिटल एसेट लाइब्रेरी निर्माण का गैर-वित्तीय समझौता हो रहा है, जबकि प्रसिद्ध डिजिटल मीडिया समूह 'द वायरल फीवर' (TVF) एवं क्रार्क फैमिली ऑफिस के सहयोग से फिल्म पर्यटन, AVGC क्षेत्र में कौशल विकास और 'म्यूजियम ऑफ स्टोरीटेलिंग' की स्थापना की जाएगी। स्मार्ट टूरिज्म के तहत 'एक्सप्लर्जर' (Explurger) के सहयोग से राज्य के 100 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 1,000 एआई-सक्षम क्यूआर कोड बोर्ड्स लगाए जाएंगे। धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA), नई दिल्ली तथा 'द्रोणाह' (DRONAH) के साथ ओरछा के ऐतिहासिक समूह (Historic Ensemble of Orchha) के यूनेस्को नामांकन हेतु एकीकृत प्रबंधन व लैंडस्केप संरक्षण योजना तैयार की जाएगी। साथ ही, टेकनपुर (ग्वालियर) स्थित बीएसएफ अकादमी में पर्यटन अधोसंरचना व बीएसएफ म्यूजियम के आधुनिकीकरण हेतु त्रिपक्षीय अनुबंध संपन्न होगा।

    एमपी ट्रैवल मार्ट के पहले दिन 07 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आमंत्रित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योगपतियों, निवेशकों व कॉरपोरेट प्रतिनिधियों के साथ विशेष 'वन-ऑन-वन' बैठकें की जाएंगी, जिसमें प्रदेश में भावी निवेश की रूपरेखा पर विमर्श होगा। 08 अक्टूबर को मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल और भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव  भुवनेश कुमार द्वारा बी2बी मार्ट और प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। इसी दिन 'भारत की वन्यजीव राजधानी के रूप में मध्यप्रदेश' विषय पर एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा होगी, जिसमें देश के जाने-माने पर्यावरणविद, वन अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ भाग लेंगे। साथ ही, साहसिक पर्यटन और MICE (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेस एंड एग्जिबिशन) उद्योग पर रणनीतिक राउंडटेबल कार्यशालाएं आयोजित होंगी। 09 अक्टूबर को सतत व्यापारिक बैठकों के साथ-साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्टॉल्स और नवाचारों के लिए पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा। 10 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक प्रदर्शनी को स्कूल, कॉलेज, पर्यटन अध्ययन संस्थानों के विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए निःशुल्क खोला जाएगा, जिससे जनसामान्य में पर्यटन के प्रति चेतना और गौरव का भाव जागृत हो सके।

    वैश्विक पर्यटकों की सुविधा के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (www.mptourism.com) का बहुभाषी संस्करण भी लॉन्च किया जा रहा है। अब हिंदी और अंग्रेजी के अलावा जर्मन, स्पैनिश, फ्रेंच और जापानी भाषाओं में भी संपूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी। इसके साथ ही, 'टेलमी डिजीइन्फोटेक' के सहयोग से विकसित अत्याधुनिक 'एमपी ट्रैवल हैंडबुक' (डायनेमिक डिजिटल कॉफी टेबल बुक) का लोकार्पण किया जा रहा है, जिसमें 360-डिग्री विहंगम दृश्य, इंटरैक्टिव मैप्स, एआई-आधारित स्टोरीटेलिंग, वर्चुअल रियलिटी लिंक्स और द्विभाषी ऑडियो नरेशन की सुविधा उपलब्ध है। प्रदर्शनी परिसर में आगंतुकों के लिए वीआर तकनीक के माध्यम से प्रदेश के ज्योतिर्लिंगों के लाइव वर्चुअल दर्शन और वन्यजीव सफारी का जीवंत अनुभव कराने वाले विशेष केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।

    अतिथियों को मध्यप्रदेश के अनूठे खान-पान और संयुक्त राष्ट्र के मिलेट प्रोत्साहन मिशन से जोड़ने के लिए 'माँ की रसोई' का विशेष लाइव काउंटर स्थापित किया गया है। इसमें कोदो-मेथी भात, ज्वार-बाजरे की रोटियां, मट्ठे के आलू, चक्की का साग, निघौना, मालवा-निमाड़ का प्रसिद्ध दाल-बाफला, भुने भाटे का भर्ता और सिलबट्टे की ताजी चटनियों जैसे विशुद्ध पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं।

    विदेशी और राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को प्रदेश की जमीनी पर्यटन संपदा का साक्षात्कार कराने के लिए आयोजन के उपरांत 16 विशेष फैमिलियराइजेशन टूर्स (FAM Trips) आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें 200 से अधिक विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये दल हेरिटेज सर्किट (खजुराहो, ओरछा, मांडू, महेश्वर, ग्वालियर, सांची, भीमबेटका), वाइल्डलाइफ सर्किट (कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और कूनो चीता अभयारण्य), आध्यात्मिक सर्किट (उज्जैन महाकाल महालोक, ओंकारेश्वर एकात्म धाम, चित्रकूट, अमरकंटक) तथा साहसिक जल पर्यटन सर्किट (पचमढ़ी, चंदेरी, तवा, गांधी सागर) का सघन दौरा करेंगे। साथ ही, भोपाल में प्रवास के दौरान प्रतिनिधियों को हेरिटेज वॉक, वन विहार बर्ड वॉक, बड़े तालाब पर शिकारा राइड तथा स्वास्थ्य-वर्धक योग सत्रों का विशेष अनुभव कराया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 केवल एक व्यापारिक समागम नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक उत्थान, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और स्थानीय समुदायों की समृद्धि का एक समन्वित महाअभियान है, जो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को वैश्विक पर्यटन के शीर्ष केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

     

  • मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने CM यादव की बड़ी पहल, मुंबई में उद्योग जगत से करेंगे सीधा संवाद

    मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने CM यादव की बड़ी पहल, मुंबई में उद्योग जगत से करेंगे सीधा संवाद

    मुंबई में उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें

    मुंबई में होगा उच्चस्तरीय निवेश संवाद
    जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले उद्योग समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और औद्योगिक संभावनाओं को देश के प्रमुख उद्योग समूहों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। द सेंट रेजिस, लोअर परेल में आयोजित होने वाले मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें करेंगे और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा भी करेंगे।

    मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक, वित्तीय और कारोबारी समूहों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत के साथ सीधा संवाद मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर चल रहे संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण चरण होगा। संवाद के दौरान प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक आधार से उद्योग समूहों को अवगत कराया जाएगा।

    निवेशकों से सीधे संवाद पर होगा फोकस

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे । इसके बाद मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर केंद्रित प्रस्तुतिकरण और विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य संबोधन भी निवेशकों के साथ संवाद का प्रमुख केंद्र रहेगा।

    मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, निवेश अनुकूल नीतिगत वातावरण और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक अवसरों को विस्तार से सामने रखा जाएगा। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण देंगे। संवाद में विशेष रूप से यह रेखांकित किया जाएगा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण बड़े बाजारों से जुड़ाव, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अधोसंरचना और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के माध्यम से निवेशकों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जनवरी 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले बढ़ाया जा रहा सीधा संपर्क

    मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधे संपर्क की प्रक्रिया तेज की है। इसी क्रम में मुंबई का यह संवाद महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि समिट से पहले विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों के साथ उनकी आवश्यकताओं, निवेश योजनाओं और प्रदेश में उपलब्ध अवसरों पर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हो।

    मुंबई संवाद में प्रमुख उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे प्रदेश में निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अवसरों और औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ संभावित निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं कि इनमें निवेशकों के प्रस्तावों और उनकी व्यावसायिक आवश्यकताओं को सीधे समझने का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियों और सुविधाओं को सुगम बनाने तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

    मुंबई में होने वाला यह निवेश संवाद मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने और देश के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ प्रदेश के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उद्योगों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर विशेष रूप से केंद्रित रहेगा।

     

  • MP में चीता संरक्षण को बड़ी उड़ान, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते होंगे विमुक्त; 7 अक्टूबर को कार्यक्रम

    MP में चीता संरक्षण को बड़ी उड़ान, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते होंगे विमुक्त; 7 अक्टूबर को कार्यक्रम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 7 अक्टूबर को 2 चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करेंगे विमुक्त

    मध्यप्रदेश में कूनो और गांधीसागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का तीसरा आवास

    वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन पर सागर और बुंदेलखंड के लिए ऐतिहासिक अवसर

    सागर

    वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा।

    चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के यहां पहुंचेंगे, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

    439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं

    कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है।

    प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व

    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है तथा संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

    चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब यह अभियान मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है।

    देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60

    5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं।

    7 अक्टूबर को कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीतें रहेंगे। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं।

    वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा।

  • छोटे कारोबारियों को बड़ी सौगात! ₹10,000 करोड़ का Growth Fund, लॉजिस्टिक्स सिस्टम होगा मजबूत

    छोटे कारोबारियों को बड़ी सौगात! ₹10,000 करोड़ का Growth Fund, लॉजिस्टिक्स सिस्टम होगा मजबूत

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और छोटे कारोबार को लेकर दो बड़े फैसले किए हैं. केंद्रीय कैबिनेट ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी यानी ITLA बनाने को मंजूरी दी है. साथ ही स्‍मॉल एंड मीड‍ियम एंटरप्राइजेज ग्रोथ फंड (SGF) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी गई है. सरकार एक तरफ देश में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आपस में जोड़कर काम कराने की तैयारी कर रही है. दूसरी तरफ छोटे और मझोले कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड बनाया जा रहा है. इससे आम आदमी, किसान, छोटे दुकानदार और छोटे कारोबारी को सीधा फायदा होगा। 

    आपके भी मन में सवाल होगा क‍ि आख‍िर इस तरह की अथॉर‍िटी की जरूरत क्‍यों पड़ी. मान लीजिए किसी किसान ने अपने खेत में गेहूं पैदा किया. गेहूं गांव से मंडी जाएगा, वहां से किसी दूसरे शहर में जाएगा और फिर किसी फैक्ट्री या गोदाम तक पहुंचेगा. इस पूरे सफर में सड़क, ट्रक, रेलवे, गोदाम और कई बार बंदरगाह तक की जरूरत पड़ सकती है. अगर सड़क अच्छी है लेकिन रेलवे कनेक्शन नहीं है, रेलवे है लेकिन माल उतारने-चढ़ाने की व्यवस्था कमजोर है या बंदरगाह तक पहुंचने में बहुत समय लग रहा है तो पूरे सिस्टम का खर्च बढ़ जाता है. यही खर्च आखिरकार सामान की कीमत में भी जुड़ता है. मोदी सरकार की नई ITLA का मकसद इसी पूरी कड़ी को एक साथ देखकर योजना बनाना है। 

    अभी कैसे होता है?
    अभी सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा, जलमार्ग और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़े काम अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के जरिए होते हैं. ITLA इन सबके बीच बेहतर तालमेल बनाने वाली संस्था के तौर पर काम करेगी. ITLA को आप सरकार का ऐसा सिस्टम समझ सकते हैं, जो यह देखने की कोशिश करेगा कि देश में माल और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए कौन सा रास्ता सबसे बेहतर है. इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग, हवाई सेवा, जलमार्ग, कोस्टल शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स सभी को एक साथ देखा जाएगा। 

    यानी सरकार सिर्फ यह नहीं देखेगी कि सड़क कहां बनानी है. यह भी देखा जाएगा कि उस सड़क का रेलवे, बंदरगाह या दूसरे परिवहन साधनों से कनेक्शन कैसा है. इससे एक ही काम के लिए अलग-अलग विभागों में योजना बनाने की बजाय एक साझा प्लान के हिसाब से काम करने की कोशिश होगी। 

    10 साल या उससे ज्यादा का ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान बनेगा
    ITLA की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करना होगी. यह छोटी अवधि की योजना नहीं होगी. सरकार ने इसे 10 साल या उससे ज्यादा की अवधि को ध्यान में रखकर बनाने की बात कही है. इसका मतलब यह है कि सरकार आने वाले वर्षों में देश में ट्रांसपोर्ट की जरूरत कहां बढ़ेगी, किस इलाके में सड़क चाहिए, कहां रेलवे कनेक्शन चाहिए, किस बंदरगाह की क्षमता बढ़ानी है और माल की आवाजाही किस तरह आसान बनाई जा सकती है] इन सबको पहले से प्लान करने की कोशिश करेगी. अगर किसी इलाके में अगले 10-15 साल में उद्योग, खेती या कारोबार बढ़ने वाला है तो वहां की सड़क और माल ढुलाई की जरूरत का अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है। 

    500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट की भी होगी जांच
    ITLA की भूमिका सिर्फ प्लान बनाने तक सीमित नहीं होगी. 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा लागत वाली केंद्र सरकार की ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तकनीकी जांच भी ITLA करेगी. इन परियोजनाओं की निगरानी और उनके असर का आकलन भी किया जाएगा. यानी किसी बड़े सड़क, रेलवे या दूसरे ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं तो यह देखने की व्यवस्था होगी कि परियोजना तकनीकी रूप से सही है या नहीं और इससे अपेक्षित फायदा मिल रहा है या नहीं. यानी बड़ा प्रोजेक्ट सिर्फ बनाना ही मकसद नहीं होगा, उससे कितना फायदा हुआ, यह भी देखा जाएगा। 

    FASTag से GSTN तक का डेटा एक जगह आएगा
    ITLA का एक और महत्वपूर्ण काम नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी बनाना होगा. इसमें FASTag, Vahan, GSTN e-way bill, GPS और ट्रैफिक सिस्टम जैसे अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा को एक साथ लाने की योजना है। 

    इसका फायदा क्या होगा?
    मान लीजिए किसी हाईवे पर हर दिन हजारों ट्रक गुजर रहे हैं. FASTag से टोल और वाहनों की आवाजाही का डेटा मिलता है. GSTN e-way bill से यह पता लगाया जा सकता है कि सामान की आवाजाही किस तरह हो रही है. GPS और ट्रैफिक सिस्टम से यह समझने में मदद मिल सकती है कि ट्रैफिक कहां और कितना है. अगर यह जानकारी एक साथ मिलेगी तो सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि कहां सड़क पर दबाव बढ़ रहा है, माल किस रूट से ज्यादा जा रहा है और कहां नई सुविधा की जरूरत है. यानी भविष्य में ट्रांसपोर्ट से जुड़े फैसले ज्यादा डेटा के आधार पर लेने की कोशिश होगी। 

    इसका फायदा आम आदमी को क्‍या फायदा
    अगर माल एक शहर से दूसरे शहर तक जल्दी और कम खर्च में पहुंचता है तो कारोबारी की लागत घट सकती है. अगर किसान की फसल मंडी तक जल्दी पहुंचती है तो नुकसान कम हो सकता है. अगर फैक्ट्री तक कच्चा माल समय पर पहुंचता है तो उत्पादन बेहतर हो सकता है. और अगर पूरे सिस्टम की लागत कम होती है तो लंबे समय में इसका फायदा कारोबार, किसान और उपभोक्ता, तीनों को मिल सकता है। 

    10 हजार करोड़ का SGF फंड है क्‍या?
    SGF के लिए 10,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं. यह फैसला छोटे और मझोले कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है. देश में बहुत से कारोबार ऐसे हैं जो छोटी या मध्यम इकाई से शुरू होते हैं. इनमें मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, सप्लायर, सर्विस कारोबार और दूसरी कारोबारी इकाइयां शामिल हैं. इन कारोबारों को आगे बढ़ने के लिए नई मशीन खरीदने, उत्पादन बढ़ाने, कारोबार का विस्तार करने या नई क्षमता तैयार करने के लिए पूंजी की जरूरत पड़ती है. SGF का उद्देश्य ऐसे छोटे और मझोले उद्यमों की ग्रोथ को सहारा देना है. हालांकि 10 हजार करोड़ रुपये का मतलब यह नहीं है कि हर छोटे दुकानदार या कारोबारी को सीधे उसके खाते में पैसा मिलेगा. यह एक ग्रोथ फंड है. इससे किस तरह के उद्यमों को और किन नियमों के तहत मदद मिलेगी। 

     

  • 12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक कोर्स के लिए 12 नए विश्वविद्यालय होंगे आरंभ

    12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक कोर्स के लिए 12 नए विश्वविद्यालय होंगे आरंभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2027 प्रदेश में युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा और एक वर्ष में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की एक नहीं, दो परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही प्रदेश में 12 नए मेडिकल कॉलेज और रोजगारपरक कोर्स के लिए 12 नए विश्वविद्यालय आरंभ किए जाएंगे, जो कौशल उन्नयन पर केन्द्रित होंगे। प्रदेश के एक लाख युवाओं को कौशल उन्नयन योजना से जोड़ा जाएगा। युवा वर्ष 2027 के लिए एक पोर्टल की भी शुरूआत की जाएगी, जिसमें युवा अपने विचार और सुझाव दे सकेंगे। राज्य सरकार उपयुक्त सुझावों को लागू करने की दिशा में कार्य करेगी। प्रदेश के सभी जिलों के शासकीय महाविद्यालयों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। कॉलेजों में विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट के लिए विशेष एजेंसी निर्धारित की जाएगी, जो युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए काम करेगी। स्नातकोत्तर की छात्राओं को गांव की बेटी और प्रतिभा किरण योजना में शामिल किया जाएगा। सभी शासकीय महाविद्यालयों में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और एडवांस कम्प्युटिंग लैब की स्थापना की जाएगी। उच्च शिक्षा में शोध को प्रोत्साहन देने के लिए शोधार्थियों को मिलने वाली राशि को 16 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रूपए प्रतिमाह किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह घोषणाएं आज सीएम यूथ कॉन्क्लेव -2026 को संबोधित करते हुए कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड ग्राउंड पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    युवाओं के लिये लगाए गए अनेक स्टॉल्स

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में सीएम यूथ कॉन्क्लेव में यूथ आइकॉनिक सिंगर  जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे द्वारा मंत्रमुग्ध करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गयी। 'मेरी चौखट पर चलकर आज प्रभु राम आएं हैं', 'शंकर संकट हरना', 'कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' जैसे भजनों पर युवा झूम उठे। लाल परेड मैदान युवाओं के उत्साह, उमंग और ऊर्जा से सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर नेशनल एआई लिटरेसी मिशन के कौशल रथ द्वारा संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने युवाओं द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक भी देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य, योग, कॅरियर गाइडेंस, भारतीय ज्ञान परम्परा, कौशल उन्नयन, आयुष और नवाचार से उद्यमिता तक की थीम पर लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन भी‍किया। विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा भी अपने स्टॉल लगाए गए थे।

    'मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संग-बदलाव के रंग' की रॉक प्रस्तुति ने युवाओं को किया आकर्षित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  जुबिन नौटियाल के साथ छात्रों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिवादन किया। रोबोट संग सीएम की कदमताल के अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रोबोट 'बडी' से हाथ मिलाया और उसके साथ वॉक भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के पंजीकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेश के उद्योगों और विकसित भारत @2047 पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, साथ ही 'डॉ. मोहन यादव के संग-बदलाव के रंग' की रॉक शैली में वीडियो प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, विधायक  भगवानदास सबनानी, विधायक  रामेश्वर शर्मा तथा अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण उपस्थित थे।

    राज्य स्तर पर 5 करोड़ रूपए का आइडिया फंड बनाया जाएगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं स्टार्टअप आइडिया को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तर पर 5 करोड़ रूपए का आइडिया फंड बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर भी शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रदेश में 500 नई इकाईयां बनाई जाएंगी। प्रत्येक संभाग में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2027 में पुन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होगा, जिससे सम्पूर्ण प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एशियन गेम्स-2026 में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 5 स्वर्ण पदक जीते हैं। बदलते दौर में भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। युवा शक्ति के बल पर भारत आगे बढ़ेगा और इसी के साथ मध्यप्रदेश भी आगे बढ़ेगा। मध्यप्रदेश सबसे युवा प्रदेश है। यहां बेरोजगारी दर देश में सबसे कम है। हम प्रदेश की समृद्धि और युवाओं के कल्याण के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

    राज्य सरकार तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार कदम उठा रही है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष 7 अक्टूबर को पूर्ण हो रहे हैं। सेवा और देश की प्रगति को समर्पित प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश में कई असंभव कार्य पूर्ण हुए हैं। मध्यप्रदेश को पहले केवल कृषि आधारित प्रदेश माना जाता था, लेकिन पिछले ढाई साल में हमारा प्रदेश उद्योग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, मेडिकल एजुकेशन और आईटी सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ा है। प्रदेश सरकार ने सभी शासकीय विभागों में 85 हजार युवाओं को नौकरी दी। उन्होंने युवा साथियों में जोश भरते हुए कहा कि यही समय है – सही समय है। राज्य सरकार युवाओं के लिए तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार कई नए कदम उठा रही है। राज्य में नॉलेज सिटी और साइंस सिटी आकार ले रही हैं। हमारा प्रयास है‍कि राज्य के युवा नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बने, इसीलिए आईटी पार्क इंदौर, रीवा, उज्जैन सहित हम देश का सबसे बड़ा टेली कम्यूनिकेशन केन्द्र ग्वालियर में बनाने जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं से बड़े भाई के रूप में बातचीत की। वे रैम्प पर चलते हुए छात्रों के बीच पहुंचे, छात्रों से हाथ मिलाया और उनसे अनौपचारिक लहजे में संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को मंच पर बुलाकर उनसे, उनके सपनों, आकांक्षाओं और राज्य सरकार से अपेक्षाओं पर चर्चा की।

    भोपाल के ओरिएंटल कॉलेज की छात्रा सु आयशा खान ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पूछा कि – राज्य सरकार युवाओं को कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए क्या कर रही है ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि – कृषि क्षेत्र में समृद्धि के लिए सरकार ने पूरा वर्ष 2026 कृषक कल्याण को समर्पित किया है। हमारी सरकार फूड प्रोसेसिंग को लेकर वैल्यू चेन तैयार करने के लिए कार्य कर रही है। युवा साथी जैविक खेती के साथ नई फसलों की खेती भी कर रहे हैं। इसी वर्ष सरकार ने पौने 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा। यह देश में सबसे अधिक है। अब किसानों को दिन में भी 10 घंटे बिजली मिलेगी। सरकार कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग और दूध उत्पादन को भी प्रोत्साहन दे रही है।

    एलएनसीटी कॉलेज की छात्रा सु नीशा वारस्कर ने पूछा कि मध्यप्रदेश सरकार एआई और स्टार्टअप फील्ड में क्या बदलाव ला रही है ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि- राज्य सरकार लगातार इनोवेशन के बल पर युवाओं को आगे बढ़ा रही है। भोपाल में एआई और नॉलेज सिटी बन रही है। उज्जैन में साइंस सिटी पर काम चल रहा है। अब सेमीकंडक्टर और नवाचारों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। युवाओं को स्टार्टअप के लिए 5 लाख रुपए तक अनुदान की व्यवस्था है। हमारे युवा रोजगार देने वाले बनें इस दिशा में प्रदेश सरकार काम कर रही है।

    स्कोप ग्लोबल यूनिवर्सिटी के छात्र  लक्ष्य वास्तव ने पूछा कि प्रदेश के युवाओं का रुझान तेजी से खेलों की ओर बढ़ा है। प्रदेश को स्पोर्ट्स हब बनाने के लिए क्या कार्य हो रहे हैं ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि- भोपाल में वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार हो चुका है। जहां प्रशिक्षण ले रहे मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में 11 पदक जीते, जिसमें 5 स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। उच्च शिक्षा में स्पोर्ट्स को एक कोर्स के रूप में शामिल किया गया है। सभी कॉलेजों में स्पोर्ट्स कोच की नियुक्ति की है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभाओं में युवाओं के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। हमारे खिलाड़ी कुश्ती, कबड्डी, हॉकी, क्रिकेट के साथ अब हमारे खिलाड़ी आर्चरी और शूटिंग में भी गोल्ड मेडल जीत रहे हैं। युवा वर्ष में स्पोर्ट्स सेक्टर को हम सबसे अधिक प्राथमिकता देंगे।

    सरोजनी नायडू महाविद्यालय की छात्रा सु अपर्णा ने सवाल किया कि सोशल मीडिया के दौर में हम भारतीय और सनातन संस्कृति से कैसे जुड़े रहें और इस दिशा में सरकार क्या प्रयास करेगी ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि- हम नदी, प्रकृति और पहाड़ सभी से प्रेम करते हैं। हम जियो और जीने दो की संस्कृति के आधार पर चलते हैं। भारतीय मूल के युवा पायलट कैप्टन स्मित ने इसी का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने फ्लाइट में 200 यात्रियों की जान बचाई। सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालु देश-दुनिया से उज्जैन आएंगे। इसमें भीड़ प्रबंधन के लिए एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। महाकाल के लड्डू अब कार्ड के जरिए मिल रहे हैं। बाबा महाकाल के दर्शन ही नहीं, तीर्थाटन से रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। अगले वर्ष 12 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान है।

    उत्कृष्ट महाविद्यालय भोपाल के छात्र  अनिकेत तिवारी का प्रश्न था कि प्रधानमंत्री  मोदी ने विकसित भारत के लिए खेल, रोड, रेल के विकास की बात कही है। राज्य सरकार इसमें कैसे योगदान देगी ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी पूरे देश को परिवार मानते हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रदेश हर क्षेत्र में विकास कर आगे बढ़ रहा है। हमारी सरकार हवाई सुविधाएं बढ़ाने के लिए काम कर रही है। पिछले ढाई साल में सतना, रीवा और दतिया में नए एयरपोर्ट शुरू हुए हैं। राज्य सरकार प्रत्येक 150 किलोमीटर पर एक एयरपोर्ट बनाएगी। आगामी वर्षों में कुल 15 एयरपोर्ट बनाए जाएंगे, जिसमें से 10 इसी वर्ष तैयार करने का प्रयास रहेगा। हेली सर्विस और नई टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहन के साथ अब हाइड्रोजन ट्रेन भी संचालित हो रही है। हम राज्य को नई तकनीक के बल पर आगे बढ़ाएंगे।

    चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल की छात्रा सु नीरा चटर्जी का सवाल था कि – युवाओं को नशे की बुराई से कैसे बचाएंगे ?

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार वर्ष 2029 तक प्रदेश को नशे से मुक्त कराएंगे। पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने राज्य सरकार के साथ अभियान को लेकर समीक्षा बैठक की है। नशे से समाज और परिवार बर्बाद हो जाता है। ड्रग्स के नशे के रोग से युवा पीढ़ी को बचाने के लिए राज्य सरकार कठोर कार्रवाई करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का सफल क्रियान्वयन हुआ

    उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों से मध्यप्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को क्रियान्वित करने में सफल हो पाई है। सीएम यूथ कॉन्क्लेव में शैक्षणिक संस्थान, व्यापारी, उद्योगपति, छात्र, शिक्षाविद् सहित समाज के सभी वर्गों के लोग मिलकर देश के भावी निर्माण के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने राष्ट्र के पुनर्निमाण के लिए विकसित भारत@2047 का सपना देखा है। विश्व में देश को सबसे शक्तिशाली बनाने में युवा शक्ति का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग  प्रबल सिपाहा ने आभार व्यक्त किया।

     

  • हर घर मिले स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा, PM सूर्यघर योजना को प्रभावी बनाने पर जोर

    हर घर मिले स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा, PM सूर्यघर योजना को प्रभावी बनाने पर जोर

    लोगों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का करें प्रभावी क्रियान्वयन : नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला

    भोपाल में सेवा सेतु अभियान अन्तर्गत आयोजित शिविर का किया शुभारंभ

    भोपाल 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुसार लोगों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाये। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने यह बात मंगलवार को सेवा सेतु अभियान अन्तर्गत रवीन्द्र भवन भोपाल में आयोजित शिविर में कही।

    मंत्री शुक्ला ने कहा कि रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के लिए क्षेत्रवार लक्ष्य निर्धारित कर उसकी शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाये। इस कार्य की सतत मानीटरिंग होना चाहिए। योजना के क्रियान्वयन में आ रही कमियों को भी दूर करें। उन्होंने कहा कि आगे आने वाली पीढ़ी को हरा भरा और सोलर बिजली से युक्त मध्यप्रदेश सौंपना हम सबकी जिम्मेदारी है।

    अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने कहा कि सोलर संयत्र से मिलने वाली बिजली 2 रूपये प्रति यूनिट है, जबकि कोयला बनने वाली बिजली 6 रूपये प्रति यूनिट है। साथ ही सोलर एनर्जी पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। अत: इस अभियान में सभी लोग सक्रिय सहभागिता करें।

    एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ऋषि गर्ग ने बताया कि प्रदेश में एक लाख 88 हजार रूफटॉप सोलर पैनल लग चुके हैं। प्रदेश में 750 मेगावॉट की सेालर एनर्जी की क्षमता विकसित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि शिविरों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

    आर.ई.सी. के पदाधिकारी विजय कुलकर्णी ने बताया कि देश में एक करोड़ घरों में रूफटाप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। अभी तक 51 लाख लगाये गये हैं। वीडियो के माध्यम से सोलर पैनल के उपयोग की जानकारी दी गयी।

    मंत्री शुक्ला ने सोलर पैनल से संबंधित लगे स्टॉल का भी अवलोकन किया। आभार प्रदर्शन एम.डी. ऊर्जा विकास निगम अमित तोमर ने किया।