Author: NewseDay

  • सेलूद कन्या विद्यालय में प्रार्थना शेड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत

    सेलूद कन्या विद्यालय में प्रार्थना शेड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत

    सेलूद कन्या विद्यालय में प्रार्थना शेड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत 

    शिक्षा मंत्री की घोषणा पर त्वरित अमल

    रायपुर,
     दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेलूद की छात्राओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। स्कूल में प्रार्थना शेड के निर्माण हेतु लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा 10 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

    शिक्षा मंत्री की घोषणा पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई

           उल्लेखनीय है कि शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव द्वारा 05 अक्टूबर 2026 को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेलूद में प्रार्थना शेड के निर्माण की घोषणा की गई थी। इस घोषणा पर त्वरित और संवेदनशील पहल करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने मात्र अगले ही दिन यानी 06 अक्टूबर को निर्माण कार्य के लिए राशि स्वीकृत करने का आदेश जारी कर दिया।

    छात्राओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएँ

          इस प्रार्थना शेड का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के माध्यम से कराया जाएगा। दैनिक व सांस्कृतिक गतिविधियाँ, शेड बनने से विद्यालय में प्रतिदिन आयोजित होने वाली प्रार्थना सभा के साथ-साथ शैक्षणिक, सांस्कृतिक और अन्य सामूहिक गतिविधियों के संचालन में सुगमता होगी। विशेष रूप से चिलचिलाती धूप और बारिश के मौसम के दौरान छात्राओं को एक सुरक्षित, छायादार और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध हो सकेगा।

  • CM साय के नेतृत्व में ‘हर घर जल’ का सपना साकार, डांडजमड़ी के हर घर पहुंचा साफ पानी

    CM साय के नेतृत्व में ‘हर घर जल’ का सपना साकार, डांडजमड़ी के हर घर पहुंचा साफ पानी

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ संकल्प से बदली डांडजमड़ी की तस्वीर, सभी 90 घरों तक पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल जीवन मिशन से सुदूर गांवों में आ रहा बदलाव

    रायपुर,  
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर घर तक सुरक्षित और शुद्ध पेयजल पहुंचाने के संकल्प ने छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों में लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव लाना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के आकांक्षी विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत डांडजमड़ी के सभी 90 घरों में अब नल से शुद्ध पेयजल पहुंचने लगा है। कभी पानी के लिए दूर स्थित कुएं तक जाना यहां के ग्रामीणों की दिनचर्या का हिस्सा था, लेकिन अब घर के आंगन में नल से पानी मिलने की सुविधा ने विशेषकर महिलाओं और परिवारों के जीवन को अधिक सहज बनाया है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण भारत के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाते हुए दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। डांडजमड़ी की उपलब्धि इसी अभियान के जमीनी असर की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

    घर में नल आया तो दूर हुई वर्षों की परेशानी

    डांडजमड़ी की ग्रामवासी श्रीमती ललिता वाकरे के लिए घर में नल से पानी आना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की एक बड़ी परेशानी से मुक्ति है। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि पहले पानी लेने के लिए उन्हें घर से दूर स्थित कुएं तक जाना पड़ता था। इसमें समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब घर में ही नल से शुद्ध पेयजल मिलने लगा है। इससे परिवार की दिनचर्या आसान हुई है और पानी की चिंता भी कम हुई है।

    ललिता वाकरे का अनुभव उस बदलाव की कहानी है, जो जल जीवन मिशन देश के गांवों में ला रहा है। ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम से राहत मिलने के साथ ही स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक बन रही है।

    सभी 90 परिवारों के घर तक पहुंचा नल से जल

    जल जीवन मिशन के तहत डांडजमड़ी पंचायत के सभी 90 घरों तक नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है। इस व्यवस्था को स्थायी और स्थानीय सहभागिता पर आधारित बनाने के उद्देश्य से योजना के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी गई है। इस पहल के माध्यम से गांव को केवल पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि ग्रामीण समुदाय को जल स्रोतों के संरक्षण और उपलब्ध पानी के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।

    पानी मिला है तो उसे बचाने की जिम्मेदारी भी हमारी

    ग्राम पंचायत के सरपंच इंजोर सिंह धुर्वे, पंचायत सचिव रतन सिंह, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों तथा ग्रामवासियों को जल की उपयोगिता, जल प्रबंधन, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई है। ग्रामीणों को यह समझाया गया है कि हर घर तक नल से पानी पहुंचने के साथ जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना भी सामुदायिक जिम्मेदारी है।

    जल जीवन मिशन की अवधारणा में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। स्थानीय स्तर पर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था से ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित होने के साथ पेयजल व्यवस्था को दीर्घकाल तक सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

    विकसित भारत की बुनियाद मजबूत कर रहा ‘हर घर जल’

    केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन केवल पाइपलाइन बिछाने या घरों में नल लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण परिवर्तन है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता गांवों में बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में आधारभूत भूमिका निभाती है। इसके साथ ही पानी जुटाने में लगने वाले समय की बचत ग्रामीण महिलाओं और परिवारों के दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाती है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में मिशन के क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच मजबूत हो रही है। आकांक्षी विकासखंड गौरेला का डांडजमड़ी गांव इसका उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां सभी 90 परिवार अब अपने घर में नल से शुद्ध पेयजल प्राप्त कर रहे हैं।

    डांडजमड़ी में नल से बहती पानी की हर धार केवल एक सरकारी योजना की उपलब्धि नहीं है। यह उस ग्रामीण परिवार के लिए राहत है, जिसे अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता; उस महिला के लिए समय की बचत है, जिसकी दिनचर्या कभी पानी जुटाने से शुरू होती थी; और उस गांव के लिए बदलाव का प्रतीक है, जो अब जल संरक्षण की जिम्मेदारी के साथ अपने भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा नया प्रोत्साहन, ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ में ₹1 लाख की इनामी राशि

    ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा नया प्रोत्साहन, ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ में ₹1 लाख की इनामी राशि

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ के गांवों की समृद्ध संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है।

    पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रभावी कार्य करने वाले व्यक्तियों के साथ संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए गए हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होंगे।

    नकद राशि और प्रशस्ति पत्र से किया जाएगा सम्मानित
    इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास का प्रभावी माध्यम बनाना भी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव हमारी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति की जीवंत विरासत हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचे। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आजीविका तथा स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ग्रामीण पर्यटन में यह क्षमता है कि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा, खान-पान और जीवनशैली को करीब से अनुभव करें। इससे पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंच सकती है।

    ‘चेन्दरू’ नाम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय मंच
    पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ छत्तीसगढ़ की उस विशिष्ट पहचान को सामने लाता है, जिसने कभी बस्तर और यहां के सहज प्राकृतिक जीवन को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अब इसी नाम से स्थापित राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार छत्तीसगढ़ के गांवों में पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जमीनी नायकों और संस्थाओं को सम्मान और पहचान प्रदान करेगा।

    एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र से होगा सम्मान
    पुरस्कार के अंतर्गत चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को यह सम्मान जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नवाचारी और प्रभावशाली प्रयासों को सामने लाकर राज्य में ग्रामीण पर्यटन की नई प्रेरक कहानियां तैयार करना है।

    छह सदस्यीय जूरी करेगी उत्कृष्ट कार्यों का मूल्यांकन
    पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों के मूल्यांकन हेतु छह सदस्यीय निर्णायक मंडल का प्रावधान किया गया है। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक करेंगे। इसमें पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्य, उसके प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा।

    समाचार पत्रों के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी प्रविष्टियां
    ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटोग्राफ, छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उपलब्धियों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

    राज्योत्सव में मिलेगा सम्मान, देश के सामने आएंगी सफलता की कहानियां
    चयनित विजेता अथवा संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर विजेता के कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों को रेखांकित करती सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को व्यापक पहचान मिलेगी और अन्य गांवों तथा समुदायों को भी पर्यटन आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

    होमस्टे और सामुदायिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार
    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं राज्य की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ी हुई हैं। बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर ग्रामीण अंचलों के पारंपरिक व्यंजन, लोककला, हस्तशिल्प, मेले, पर्व, प्राकृतिक स्थल और स्थानीय जीवनशैली पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करते हैं। ऐसे में होमस्टे और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से पर्यटन गतिविधियों का विकेंद्रीकरण होगा और इसका आर्थिक लाभ गांवों तक पहुंचेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ पारंपरिक कला, शिल्प, खान-पान, लोकसंस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार का प्रयास ग्रामीण पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक-सामाजिक सशक्तता, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करना है।

  • जेवर एयरपोर्ट पहुंचे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन, योगी सरकार की ग्लोबल कनेक्टिविटी को मिली मजबूती

    जेवर एयरपोर्ट पहुंचे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन, योगी सरकार की ग्लोबल कनेक्टिविटी को मिली मजबूती

    योगी सरकार की ग्लोबल कनेक्टिविटी और निवेश नीति को मिला नया आयाम, जेवर पहुंचे स्विस राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति, मंत्री सुनील शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने किया स्वागत

    एविएशन के साथ आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर जोर

    स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी द्वारा विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का किया निरीक्षण, करीब 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद

    नोएडा/लखनऊ
     उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और आधुनिक औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की योगी सरकार की नीति को आज उस समय एक और अंतरराष्ट्रीय आयाम मिला, जब स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति महामहिम गाय बर्नार्ड पारमेलिन अपने करीब 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर पहुंचे। यह दौरा उत्तर प्रदेश और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और एविएशन क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, नागरिक उड्डयन विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं आईआईडीसी दीपक कुमार तथा इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन और उनके प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया।

    योगी सरकार की निवेश नीति से वैश्विक साझेदारी को मिल रहा विस्तार

    योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचे और निवेश के अनुकूल वातावरण को अपनी विकास नीति का प्रमुख आधार बनाया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसी व्यापक विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जेवर में विकसित हो रहा यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक हवाई संपर्क से जोड़ने के साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक, कारोबारी और निवेश गतिविधियों को नई गति देने की क्षमता रखता है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का जेवर एयरपोर्ट दौरा इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि एयरपोर्ट का विकास स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी द्वारा किया गया है। इससे उत्तर प्रदेश में स्विस तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश के साथ बने इस महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहयोग का नया अवसर सामने आया है।

    आधुनिक सुविधाओं का लिया जायजा

    दौरे की शुरुआत एनआईए ऑफिस में हुई, जहां अवनी बोर्ड रूम में एयरपोर्ट से संबंधित प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन ने भी प्रतिनिधिमंडल को संबोधित किया। इसके बाद एयरपोर्ट परिसर के आंगन में भारतीय संगीत की धुनों के बीच लंच का आयोजन किया गया और ग्रुप फोटो भी हुआ। इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल दो हिस्सों में विभाजित हुआ। राष्ट्रपति गाय बर्नार्ड पारमेलिन, उनकी पत्नी और चयनित अधिकारी एयरसाइड तथा एटीसी टॉवर के विशेष निरीक्षण के लिए गए। वहीं प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने टर्मिनल, सुरक्षा क्षेत्र, बोर्डिंग गेट्स, एप्रन और बैगेज रिक्लेम सहित एयरपोर्ट की विभिन्न सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल दोपहर करीब दो बजे एयरपोर्ट से रवाना हुआ।

    एविएशन के साथ आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स में सहयोग की उम्मीद

    करीब 65 सदस्यीय स्विस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति की पत्नी, स्विस राजदूत, राष्ट्रीय परिषद के सदस्य, राज्य सचिव और लगभग 40 उद्योगपति शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने इस दौरे को केवल एयरपोर्ट निरीक्षण तक सीमित न रखते हुए संभावित आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीतियों और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर प्रयासों से राज्य में वैश्विक कंपनियों के लिए निवेश का अनुकूल माहौल तैयार हुआ है। ऐसे में स्विस राष्ट्रपति का जेवर दौरा एविएशन के अलावा आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीक और इससे जुड़े क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग और निवेश की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है।

  • तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर पीछे हटे अखिलेश तो राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं

    तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर पीछे हटे अखिलेश तो राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं

    राज्यसभा का तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी सपा, राजभर ने अखिलेश पर कसा तंज; बोले- बस हो गया टांय-टांय फिस्स

    '403 सीट पर है निगाहें', अखिलेश की पोस्ट पर राजभर का तंज, बोले- सपने देखना बुरी बात नहीं

    तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर पीछे हटे अखिलेश तो राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं

    राज्यसभा चुनाव से पहले अखिलेश पर राजभर का वार, बोले- 'कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं'

    अखिलेश के राज्यसभा दांव पर राजभर ने कसा तंज, बोले- कभी-कभी समझदारी का काम भी कर लेते हैं

    अखिलेश यादव पर ओपी राजभर ने साधा निशाना, बोले- बस हो गया टांय-टांय फिस्स

    लखनऊ,
    समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी की तरफ से तीन की जगह दो ही उम्मीदवारों को उतारने का ऐलान किया है। सपा सुप्रीमो के इस फैसले पर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि अखिलेश कभी-कभी समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं।

    'बस हो गया टांय-टांय फिस्स'
    ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, "मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स!"। उन्होंने अखिलेश यादव के दो उम्मीदवार उतारने के फैसले पर कटाक्ष करते हुए लिखा, "वैसे कभी-कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया।"

    '403 के सपने देखना बुरी बात नहीं'
    राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव के 403 विधानसभा सीटों से जुड़े राजनीतिक दावे पर भी तंज कसा। उन्होंने लिखा, "रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।" इसके जरिए राजभर ने राज्यसभा चुनाव से आगे विधानसभा चुनाव की सियासत को भी निशाने पर लिया। 

    बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए सपा की तरफ से पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया जा चुका है। लेकिन अखिलेश यादव लगातार दावा कर रहे थे कि वो तीसरे उम्मीदवार के जरिए बीजेपी को सरप्राइज देंगे। लेकिन अब अखिलेश अपनी ही बात से पीछे हट गए हैं। अब इसी को लेकर ओपी राजभर ने अखिलेश पर तंज कसा है।

  • 60 साल पुरानी नहर प्रणाली को मिलेगी नई जिंदगी, राजस्थान के किसानों के लिए 790 करोड़ की योजना

    60 साल पुरानी नहर प्रणाली को मिलेगी नई जिंदगी, राजस्थान के किसानों के लिए 790 करोड़ की योजना

    बीकानेर
     इंदिरा गांधी नहर परियोजना (इंगानप) के प्रथम चरण के किसानों के लिए सरकार ने बड़ी सौगात दी है। बीकानेर, श्रीगंगानगर सहित हनुमानगढ़ जिले में करीब 60 साल पहले बने खाले अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे टेल-एंड के किसानों को सिंचाई पानी नहीं मिल पा रहा था। अब इन खालों का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है।

    राजस्थान सरकार ने इसके लिए 790 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। जल संसाधन विभाग उत्तर हनुमानगढ़ मुख्य अभियन्ता अरुण कुमार सिडाना ने इस कार्य के लिए 7 पैकेज बनाए हैं और 7 कार्यों को स्वीकृति दी गई है। हनुमानगढ़ जल संसाधन उत्तर मुख्य अभियन्ता सिडाना का दावा है कि काम पूरा होने के बाद 1 लाख
    51 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

    इंदिरा गांधी नहर परियोजना में खालों का निर्माण आज से लगभग छह दशक पहले हुआ था। लगातार उपयोग और रखरखाव के अभाव में खाले डैमेज हो गए हैं। कई जगह फील्ड लाइनें टूट गई हैं, कई जगह खालों में गहरे गड्ढे पड़ गए हैं। इससे पानी खेत तक पहुंचने से पहले ही रिस जाता है, वाटर लॉसेस बढ़ गया है। किसान पिछले कई सालों से इसकी शिकायत कर रहे थे।जल संसाधन उत्तर हनुमानगढ़ की ओर से इस समस्या को लेकर राज्य सरकार को अवगत करवाया गया था। किसानों की पीड़ा और बढ़ते वाटर लॉसेस को देखते हुए सरकार ने यह बजट जारी किया है। फील्ड लाइनिंग की बदौलत अब पानी की बर्बादी रुकेगी और अंतिम छोर के किसान को भी उसके शेयर का पूरा पानी मिलेगा।

    एनडीबी प्रोजेक्ट से पहले ही मिली थी राहत
    इससे पहले न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की सहायता से राजस्थान जल क्षेत्र पुन: संरचना परियोजना के तहत बड़ी राहत मिली थी। 3291.63 करोड़ की इस परियोजना के तहत हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर व बीकानेर जिलों में इंदिरा गांधी फीडर व मुख्य नहर की 179.53 किमी और वितरण तंत्र (छोटी नहरों) की 2498.69 किमी लंबाई में रिलाइनिंग का काम जुलाई 2026 में पूरा हो चुका है। इससे पानी की बचत हुई है और शेयर के अनुसार पानी मिलने लगा है।

    13 जिलों की जीवनरेखा है आईजीपीएन
    जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम व द्वितीय चरण में कुल 16.17 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। यह नहर सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के 13 जिलों – हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी, चूरू, जोधपुर, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा व बाड़मेर में लगभग 2 करोड़ आबादी के लिए पेयजल की जीवनरेखा है।साथ ही सूरतगढ़, रामगढ़, गिरल, गुढ़ा, बरसिंगसर तथा राजवेस्ट की थर्मल और गैस आधारित ऊर्जा परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन के लिए भी इसी नहर से जल उपलब्ध होता है। नए खाले बनने से इस सिस्टम को मजबूती मिलेगी और किसानों की दशकों पुरानी समस्या खत्म होगी

  • SIR अभियान में नए वोटरों की तलाश तेज, BLO को मिला घर-घर सत्यापन और नाम जोड़ने का टारगेट

    SIR अभियान में नए वोटरों की तलाश तेज, BLO को मिला घर-घर सत्यापन और नाम जोड़ने का टारगेट

    लखनऊ
    एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलेगा। छूटे हुए मतदाताओं, महिलाओं और पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के नाम सूची में जोड़े जाएंगे। बीएलओ घर-घर जाकर लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का काम करेंगे। यही नहीं बूथ पर भी मतदाताओं को फॉर्म-6 उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से सभी जिलों की निगरानी होगी। बीएलओ के लिए टारगेट भी तय किया गया है।

    एक महीने तक विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। यूपी में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से पूर्व की और उसके बाद जारी मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम का मिलान भी किया जाएगा। बीएलओ को एक सप्ताह में कम से कम 25 लोगों से संपर्क कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है।

    बूथ पर भी लगेंगे विशेष शिविर
    घर-घर संपर्क के दौरान छूटे हुए मतदाताओं व पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं के भी फॉर्म-6 भरवाए जाएंगे। ऐसी महिलाएं जिनकी शादी के बाद ससुराल वाले क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ा है, उनका नाम भी जुड़वाया जाएगा। नए भरवाए जा रहे फॉर्मों को राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों से साझा किया जाएगा। वहीं बूथ पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। आश्रय स्थलों, श्रमिक कालोनियों में रहने वाले, बेघर व वंचित वर्ग के पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने को विशेष कैंप लगाए जाएंगे। एक महीने में सभी बीएलओ अपने-अपने क्षेत्र में यह कार्य पूरा करेंगे।

    डिजिटल ऐप से होगी रियल टाइम ट्रैकिंग
    अभियान को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने तकनीक का सहारा भी लेने का फैसला किया है। बीएलओ अपने मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर सत्यापन के दौरान भरे गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की ऑनलाइन एंट्री करेंगे। इसकी सीधे राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग होती रहेगी। इसके साथ ही जो नागरिक बीएलओ के पहुंचने से पहले ही आवेदन करना चाहते हैं, वे वोटर सर्विस पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप से भी डिजिटल फॉर्म जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन भी बीएलओ द्वारा घर जाकर ही किया जाएगा।

    लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पुनरीक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी क्षेत्र में पात्र मतदाताओं या नवविवाहिताओं के नाम बड़े पैमाने पर छूटने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित बीएलओ और सुपरवाइजर के खिलाफ जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों से पहले प्रदेश का कोई भी नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।

  • 9 एमबीबीएस, 2 बीडीएस और एनआईटी रायपुर में 2 बीटेक दाखिले; पहली पीढ़ी के डॉक्टर और इंजीनियर बनने की ओर बढ़े छात्र

    9 एमबीबीएस, 2 बीडीएस और एनआईटी रायपुर में 2 बीटेक दाखिले; पहली पीढ़ी के डॉक्टर और इंजीनियर बनने की ओर बढ़े छात्र

    दंतेवाड़ा/बस्तर
     एनएमडीसी-समर्थित छू लो आसमान : दंतेवाड़ा के वंचित परिवारों के छात्रों ने 9 एमबीबीएस, 2 बीडीएस सीटें हासिल कीं, पहली पीढ़ी के डॉक्टर और इंजीनियर के तौर पर प्रोफेशनल कॉलेजों में दाखिला लिया

    दंतेवाड़ा के छात्रों की एनईईटी (NEET) में सफलता के बाद हुई काउंसलिंग के पहले दौर ने एनएमडीसी के सहयोग से चल रही ‘छू लो आसमान’ पहल को नई पहचान दिलाई है, जिसमें अब तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करने वाले 22 छात्रों में से 11 छात्रों ने एमबीबीएस में नौ और बीडीएस में दो सीटें हासिल की हैं ।

    सफल छात्रों ने दंतेवाड़ा में आवासीय कोचिंग कार्यक्रम में शुरू हुई यात्रा में अगला कदम रखते हुए मेडिकल कॉलेजों में अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है । शेष छात्रों के लिए काउंसलिंग अभी भी जारी है ।

    इस पहल से जुड़े दो अन्य छात्र, जिन्होंने जेईई (JEE) परीक्षा उत्तीर्ण की है, उन्होंने एनआईटी रायपुर में जैव प्रौद्योगिकी और खनन में बी.टेक कार्यक्रमों में दाखिला लिया है ।

    वंचित परिवारों के छात्रों के लिए प्रोफेशनल शिक्षा की नई राह
    छात्रों और उनके परिवारों के लिए, दाखिला का अर्थ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता से कहीं अधिक है । एक सामान्य श्रेणी के छात्र को छोड़कर, सभी सफल उम्मीदवार अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से हैं । अधिकांश आर्थिक रूप से वंचित परिवारों से आते हैं, जिनके माता-पिता खेती या कृषि मजदूरी का कार्य करते हैं । कई लोगों के लिए, व्यावसायिक शिक्षा में प्रवेश पाना उनके परिवार में इस तरह की पहली उपलब्धि है ।

    प्रवेश पाने वालों में 21 वर्षीय दीपा मरकाम भी शामिल हैं, जिन्होंने एनईईटी में 412 अंक प्राप्त करने के बाद छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सीआईएमएस), बिलासपुर में एमबीबीएस कार्यक्रम में प्रवेश लिया है । दंतेवाड़ा के पोटाली की निवासी दीपा एक दूर-दराज के इलाके से आती हैं, जहां स्वास्थ्य-सेवा तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है ।

    “हिंसा से बुरी तरह प्रभावित एक गाँव में पले-बढ़े होने के कारण, जहां लोगों को डॉक्टर तक पहुंचने के लिए घंटों यात्रा करनी पड़ती है, मैं जानती हूँ कि हमारे क्षेत्र को स्वास्थ्य-सेवा की कितनी सख्त जरूरत है । अब जब मैंने अपनी मेडिकल सीट हासिल कर ली है, तो मेरा मिशन अपने गृह-नगर लौटना है और अपने लोगों के लिए एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण करना है, जिन्होंने बहुत लंबे समय तक कष्ट सहा है,” मरकाम ने कहा ।

    2011 से जारी है ‘छू लो आसमान’ की शैक्षणिक यात्रा
    ‘छू लो आसमान’ के तहत नवीनतम दाखिले प्रोफेशनल शिक्षा परिणामों के लंबे रिकॉर्ड में वृद्धि करते हैं । 2011 में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और एनएमडीसी की एक संयुक्त पहल के रूप में शुरू किया गया यह कार्यक्रम राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करता है ।

    दंतेवाड़ा जिले के कक्षा 8 उत्तीर्ण छात्रों के लिए एक प्रतियोगी प्रवेश-परीक्षा के माध्यम से छात्रों का चयन किया जाता है । चयनित लोगों को कक्षा 9 से कक्षा 12 तक रहने की सुविधा, यूनिफॉर्म, अध्ययन-सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता के साथ-साथ निरंतर कोचिंग भी दी जाती है ।

    इस कार्यक्रम के तहत कक्षा 9 से कक्षा 12 वीं तक प्रत्येक कक्षा में 80 बालक और 80 बालिकाओं को वार्षिक प्रवेश दिया जाता है । ‘छू लो आसमान’ के तहत अब तक 7,140 छात्र पढ़ाई समाप्त कर चुके हैं, जिसमें लगभग ₹3.7 करोड़ रुपये का वार्षिक परिचालन व्यय और अब तक ₹19.63 करोड़ रुपये का कुल व्यय हुआ है ।

    इस पहल के माध्यम से सहायता प्राप्त छात्र बी.टेक/बी.ई., बी.फार्मा, बी.एससी.-नर्सिंग, पॉलीटेक्निक, कृषिविज्ञान, एमबीबीएस और पशु-चिकित्सा विज्ञान सहित प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई कर रहे हैं और साथ ही एनआईटी (NIT) और आईआईटी (IIT) जैसे प्रमुख संस्थानों में भी दाखिला ले रहे हैं ।

    मेडिकल और इंजीनियरिंग दाखिलों से उपलब्धियों के रिकॉर्ड में जुड़ा नया अध्याय
    नवीनतम काउंसलिंग परिणामों ने अब उस रिकॉर्ड में नौ एमबीबीएस और दो बीडीएस दाखिला जोड़े हैं, जबकि जेईई में चयनित दो छात्रों ने एनआईटी रायपुर में दाखिला लिया है ।

    “एक सामान्य श्रेणी के छात्र को छोड़कर, हमारे सभी सफल उम्मीदवार एसटी समुदाय से हैं और पहली पीढ़ी के प्रोफेशनल के रूप में इतिहास रच रहे हैं । एनईईटी पास करने वाले 22 छात्रों में से 13 के लिए काउंसलिंग के नतीजे प्राप्त हुए हैं, जिनमें से नौ ने एमबीबीएस और दो ने बीडीएस सीटें हासिल की हैं । इसके साथ ही, दो छात्रों ने जेईई के माध्यम से एनआईटी रायपुर में प्रवेश प्राप्त किया है । शेष छात्रों के लिए काउंसलिंग अभी भी जारी है और हम आने वाले दिनों में और अधिक सकारात्मक परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं ।” ‘छू  लो आसमान’ के प्रिंसिपल शैनी रवींद्र ने कहा ।

    एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि ये उपलब्धियां वंचित समुदायों के छात्रों के लिए सतत शैक्षणिक अवसर पैदा करने के महत्व को दर्शाती हैं ।

    उन्होंने कहा, “इन होनहार युवा प्रतिभाओं को गंभीर सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को पार कर वास्तव में प्रतिष्ठित मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश करते देखना हमारे लिए गर्व का क्षण है । वे केवल प्रोफेशनल डिग्री हासिल नहीं कर रहे हैं; वे परिवर्तन के शक्तिशाली उत्प्रेरक बन रहे हैं, जो अपने परिवारों का उत्थान कर सकते हैं और अपने गृह-नगर के सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य परिदृश्य में योगदान कर सकते हैं ।”

    नवीनतम काउंसलिंग परिणामों के साथ, दंतेवाड़ा के छात्र अब सीआईएमएस बिलासपुर, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज रायपुर और एनआईटी रायपुर जैसी संस्थानों में मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । शेष एनईईटी-उत्तीर्ण छात्रों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है, जिसमें आगे चलकर और भी दाखिला मिलने की उम्मीद है ।

  • JPSC में कथित गड़बड़ी की जांच तेज, TDPL की परीक्षाओं से नियुक्त 462 अफसर जांच के घेरे में

    JPSC में कथित गड़बड़ी की जांच तेज, TDPL की परीक्षाओं से नियुक्त 462 अफसर जांच के घेरे में

     रांची
     झारखंड में JPSC की परीक्षाओं में कथित मेधा घोटाले की जांच का दायरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है, जिससे राज्य की भर्तियों पर सवाल खड़े हो गए हैं. अब तक तीन परीक्षाओं में शामिल सफल अभ्यर्थियों की जांच और गिरफ्तारी हो रही थी, लेकिन अब CID 18 और परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए समन भेजने की तैयारी में है.

    अब तक JPSC 14वीं, FRO और ACF परीक्षा की जांच जारी थी. अब फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO और सिविल सेवा परीक्षा 2023 की परीक्षा की भी जांच शुरू हो रही है. इन तीन परीक्षाओं के माध्यम से 462 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं. CID नियुक्त हो चुके अधिकारियों को समन भेजने की तैयारी कर रहा है.

    पेपर लीक से OMR में हेराफेरी तक, कई आरोपों की जांच
    मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के माध्यम से आयोजित JPSC की सभी 21 परीक्षाएं अब जांच के दायरे में हैं. CID ने इन परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. CID पेपर लीक, OMR शीट में हेराफेरी और कथित सेटिंग के जरिये अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों की जांच कर रही है.

    18 और परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी
    अब जांच के अगले चरण में झारखंड सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा 2023, सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025 के सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी है. विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति, सहायक निदेशक, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर और ड्रग इंस्पेक्टर नियुक्ति से जुड़ी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में हैं. इसके अलावा इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ी 2025 और 2026 की परीक्षाओं की भी जांच होगी. सिविल जज जूनियर डिविजन नियुक्ति परीक्षा 2023 तथा ACF-FRO नियुक्ति परीक्षा 2024 की फाइलें भी खंगाली जा रही हैं.

    सहायक लोक अभियोजक, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO), झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2024 और छठी सीमित उपसमाहर्ता परीक्षा 2018 के सफल अभ्यर्थी भी CID की जांच के दायरे में हैं.

    अब तक 27 आरोपित जेल भेजे गये
    मामले में CID अब तक 27 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. इनमें JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत अन्य शामिल हैं. अब तक की कार्रवाई मुख्य रूप से तीन परीक्षाओं पर केंद्रित थी. 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित सेटिंग के जरिए सफल होने के आरोप में सुमन सौरभ, दीपक राणा, ओमप्रकाश राणा, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह को गिरफ्तार किया गया है.

    वहीं, सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा के
    सफल अभ्यर्थी ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न भी जेल भेजे जा चुके हैं.

    छात्र आंदोलन की क्राउड फंडिंग की शिकायत भी CID तक पहुंची
    JPSC-JSSC नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही CID को छात्र आंदोलन की फंडिंग से जुड़ी शिकायत भी मिली है. शिकायत में आंदोलन के लिए करोड़ों रुपये जुटाये जाने और उनके स्रोत व खर्च की जांच की मांग की गयी है. हालांकि, CID ने इस शिकायत की पुष्टि नहीं की है और न ही इस संबंध में जांच शुरू होने की जानकारी दी है.

  • ₹1.53 लाख करोड़ की फल-सब्जियों को मिलेगा सुरक्षा कवच, भारत-ब्रिटेन मिलकर बनाएंगे ग्रीन कोल्ड चेन नेटवर्क

    ₹1.53 लाख करोड़ की फल-सब्जियों को मिलेगा सुरक्षा कवच, भारत-ब्रिटेन मिलकर बनाएंगे ग्रीन कोल्ड चेन नेटवर्क

    करनाल.

    भारत में हर साल मेहनत से उगाई गई करोड़ों टन फल और सब्जियां बाजार तक पहुंचने से पहले ही सड़ जाती हैं। इस राष्ट्रीय नुकसान से निपटने और किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल और ब्रिटेन के ब्रुनेल विश्वविद्यालय लंदन ने हाथ मिलाया है।

    दोनों वैश्विक संस्थानों ने मिलकर सोल टेक नाम से एक महत्वाकांक्षी अनुसंधान परियोजना पर काम शुरू किया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित कोल्ड स्टोरेज और एक मजबूत हार्टिकल्चर कोल्ड चेन नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में भी बिना ग्रिड बिजली या महंगे डीजल के फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

    व्यापार से परे पूंजी का संचालन
    सरकार का इरादा हालिया व्यापार समझौतों को वस्तुओं और सेवाओं के बुनियादी आदान-प्रदान से आगे बढ़ाने का है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी इन द्विपक्षीय समझौतों का उपयोग भारत में पूंजी प्रवाह को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के लिए करना चाहते हैं। ब्रिटेन भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशकर्ता बना हुआ है। ब्रिटिश कंपनियों ने सितंबर 2024 तक कुल मिलाकर 35 अरब डॉलर का इक्विटी निवेश किया। ब्रिटेन से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (इक्विटी) का प्रवाह 2025-26 वित्तीय वर्ष में 1 अरब डॉलर रहा। वर्तमान में भारत में लगभग 667 ब्रिटिश कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें 5 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। पूंजी प्रवाह द्विपक्षीय होता है। मार्च 2024 तक ब्रिटेन में भारत का बाहरी निवेश 19 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जुलाई 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि ब्रिटेन में 971 भारतीय कंपनियां कार्यरत हैं, जो 100,000 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं।

    नए व्यापार समझौतों को उत्प्रेरित करना
    भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के लागू होने के बाद एक समर्पित निवेश डेस्क की स्थापना की मांग उठाई गई है। यह द्विपक्षीय समझौता औपचारिक रूप से 15 जुलाई, 2026 को लागू हुआ। इसी बीच, प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। इसे अक्सर "सभी समझौतों की जननी" कहा जाता है। इस समझौते की कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उम्मीद है कि 2026 के अंत तक इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।

    ग्रीन चैनल घरेलू वित्तीय क्षेत्र में हाल ही में हुए संरचनात्मक परिवर्तनों के अनुरूप है। भारत ने हाल ही में बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने के लिए अपने नियमों को उदार बनाया है और बैंकिंग में निवेश सीमा को बढ़ाकर 74% कर दिया है। उदारीकृत लाइसेंसिंग ढांचे के तहत, पात्र विदेशी बैंक चार साल की अवधि में अधिकतम 15 शाखाएं स्थापित कर सकते हैं।