Author: NewseDay

  • आज का राशिफल 8 अक्टूबर 2026: इन राशियों पर बरसेगी किस्मत, धन-करियर में मिलेगा फायदा

    आज का राशिफल 8 अक्टूबर 2026: इन राशियों पर बरसेगी किस्मत, धन-करियर में मिलेगा फायदा

    मेष
    आज आपको पैसे कमाने के अन्य स्रोतों के बारे में भी सोचना चाहिए। आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा। आज का दिन आपके जीवन में खुशियां लेकर आने वाला है। कुछ कामों में आप आसानी से सफल हो जाएंगे।

    वृषभ
    आज आप बहुत ज्यादा पैसे नहीं बचा पाएंगे। नियमित रूप से बॉस के साथ हल्की-फुल्की बातचीत करना जरूरी है। आज आपको मानसिक शांति पाने पाने में मदद मिलेगी।

    मिथुन
    आज आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। गोल्स के बारे में सोचना आपके लिए फायदेमंद होगा। आप जो कुछ भी चाहते हैं उसे प्राप्त करना हमेशा संभव है, याद रखें। खर्च कम रखें। धन का आगमन होगा।

    कर्क
    आपका परिवार आज आपको सपोर्ट करेगा। आज टीम वर्क पर फोकस करें। कुछ बड़ा हासिल करने के लिए आपको अपने पर्सनल समय का त्याग करना होगा। इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास अपना समय नहीं होगा।

    सिंह
    आपके लिए आज अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाने का अच्छा समय है। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें ताकि आप एक साथ गहरा कनेक्शन स्थापित कर सकें। आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

    कन्या
    आज के दिन खुद पर ध्यान दें। बचत करने की कोशिश करें क्योंकि यह आपके वर्तमान कमाई के स्तर को बनाए रखने में मदद करेगा। लाइफ में बैलेंस बनाकर रखना जरूरी है।

    तुला
    आज आपको आर्थिक और भावनात्मक तौर पर सोच-विचार करने की जरूरत है। आगे की एक नई यात्रा के लिए तैयार हो जाइए। अपने करियर और निजी जीवन को एक साथ संतुलित करने का प्रयास करें।

    वृश्चिक
    आज अपने पार्टनर के साथ उन मुद्दों पर बात करें, जो आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा कर रहे हैं। आप किसी ऐसे रिस्क की ओर बढ़ सकते हैं, जो आपकी वित्तीय स्थिति को नुकसान दे सकता है।

    धनु
    आज आपके सभी काम पूरे होंगे। आपका निजी और व्यावसायिक जीवन संतुलित रहेगा और आपको कुछ नया करने का मौका भी मिलेगा। दूसरी ओर, आपको अपने रिश्ते में रोमांस बनाए रखने की जरूरत है।

    मकर
    अगर आप अपने रिश्ते को लेकर बहुत गंभीर हैं तो नेक्स्ट लेवल प्लान करने का यह समय शुभ है। आज छोटी बचत से शुरुआत करें और पता करें कि क्या आप अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति को मैनेज करने में सक्षम हैं?

    कुंभ
    अपने पार्टनर को बेहतर तरीके से जानने के लिए साथ में कुछ अच्छा समय बिताना बेहतर होगा। आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी लेकिन सेविंग्स जरूर करें। आप जीवन में खुश और संतुष्ट रहें।

    मीन
    आज के दिन आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी रहेगी। निवेश के अवसरों के लिए यह अच्छा है। स्टॉक एक्स्पर्ट्स के साथ बात-चीत करते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है। सेहत पर ध्यान दें।

  • चेन्दरू’ राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार के लिए बढ़ाई गई आवेदन करने की अंतिम तिथि

    चेन्दरू’ राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार के लिए बढ़ाई गई आवेदन करने की अंतिम तिथि

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने और सतत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार-2026’ के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

    राज्य में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं समर्पित योगदान को पहचान और सम्मान देने के उद्देश्य से यह पुरस्कार प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार एवं आजीविका से जोड़ने के साथ होमस्टे, स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और समुदाय आधारित पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    राज्योत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस अलंकरण समारोह में मिलेगा सम्मान

    ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ प्रतिवर्ष राज्योत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस अलंकरण समारोह में प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में दीर्घकालीन एवं समर्पित योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से दिया जाएगा। यह सम्मान किसी व्यक्ति अथवा संस्था को जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जाएगा।

    छह प्रमुख थीम में किया जाएगा कार्यों का मूल्यांकन

    पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों में ग्रामीण पर्यटन से जुड़े कार्यों का मूल्यांकन छह प्रमुख थीम के अंतर्गत किया जाएगा। इनमें एथनिक टूरिज्म, ईको टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन, हेरिटेज टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म तथा मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म शामिल हैं।

    मूल्यांकन के दौरान ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों के विकास, होमस्टे को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने, पर्यटकों को उपलब्ध कराए जा रहे विशिष्ट अनुभवों, पर्यटन स्थलों एवं धरोहरों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी जैसे पहलुओं को विशेष महत्व दिया जाएगा। संबंधित क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में आए बदलाव के साथ आवेदक द्वारा अतीत और वर्तमान में किए गए कार्यों एवं उनके प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।

    व्यक्ति और संस्था दोनों कर सकते हैं आवेदन

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में कार्यरत पात्र व्यक्ति अथवा संस्था पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवा, उल्लेखनीय उपलब्धियों और समर्पित प्रयासों को महत्व दिया जाएगा।

    आवेदन के साथ देना होगा कार्यों और उपलब्धियों का विवरण

    आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में पूर्ण परिचय, पता एवं फोटोग्राफ के साथ छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवास का प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड की सत्यापित छायाप्रति प्रस्तुत करनी होगी। इसके साथ ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण, प्राप्त अन्य सम्मानों की जानकारी तथा उपलब्ध होने पर प्रकाशित सामग्री और समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित समाचारों की सत्यापित प्रतियां भी संलग्न की जा सकती हैं। आवेदक को पुरस्कार स्वीकार करने की लिखित सहमति भी देनी होगी।

    छह सदस्यीय जूरी करेगी प्रविष्टियों का परीक्षण

    पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण निर्धारित जूरी द्वारा किया जाएगा। जूरी की कार्यवाही गोपनीय रहेगी और चयन के संबंध में अपील मान्य नहीं होगी। शासकीय सेवकों के आवेदन के मामले में सामान्य प्रशासन विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

    15 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेजना होगा आवेदन

    पुरस्कार के लिए निर्धारित प्रारूप में पूर्ण आवेदन पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, द्वितीय तल, उद्योग भवन, रिंग रोड नंबर-1, रायपुर (छत्तीसगढ़)-492001 के पते पर भेजना होगा। आवेदन 15 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित पते पर पहुंचना अनिवार्य है। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त प्रविष्टियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।

    पुरस्कार एवं आवेदन प्रक्रिया के संबंध में अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 73545-80006 अथवा ई-मेल scmpctb@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे व्यक्तियों एवं संस्थाओं से निर्धारित समय-सीमा में अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत करने का आह्वान किया है। ‘चेन्दरू’ पुरस्कार के माध्यम से ऐसे प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान मिलेगी, जो गांवों की संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं को सहेजते हुए पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका और सतत विकास से जोड़ रहे हैं।

  • नोनी सशक्तिकरण योजना ने अंकिता के सपनों को दिए पंख, शिक्षा के लिए मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

    नोनी सशक्तिकरण योजना ने अंकिता के सपनों को दिए पंख, शिक्षा के लिए मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

    रायपुर

    आर्थिक परिस्थितियां कमजोर हों, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला और शासन की योजनाओं का सहारा मिले तो शिक्षा के सपनों को नई उड़ान मिल सकती है। गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिले के नगर पालिका परिषद गौरेला के वार्ड क्रमांक 15 की निवासी कुमारी अंकिता रोहणी की कहानी भी इसी संकल्प और उम्मीद को बयां करती है। निर्माण श्रमिक परिवार की बेटी अंकिता अपनी पढ़ाई पूरी कर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। उनके इस सपने को मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना से मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता ने मजबूती दी है।

    अंकिता के पिता  रवि रोहणी निर्माण श्रमिक हैं और श्रम विभाग में पंजीकृत हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच परिवार के लिए घर की जरूरतों के साथ बेटी की शिक्षा का खर्च उठाना आसान नहीं था। इसके बावजूद परिवार ने अंकिता की पढ़ाई में आर्थिक परिस्थितियों को बाधा नहीं बनने दिया और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी शिक्षा जारी रखा।

    इसी बीच श्रमिक परिवारों की बेटियों के सशक्तिकरण के लिए संचालित नोनी सशक्तिकरण योजना की जानकारी मिलने पर अंकिता को योजना से जोड़ा गया। पात्रता और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें योजना के तहत 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। यह राशि अंकिता और उनके परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आई।

    शिक्षा की जरूरतों पर खर्च कर रही हैं सहायता राशि

    अंकिता इस सहायता राशि का उपयोग अपनी शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं। पढ़ाई से संबंधित खर्चों के लिए आर्थिक सहयोग मिलने से परिवार पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम हुआ है। वहीं अंकिता भी अब अधिक आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा रही हैं।

    अंकिता बताती हैं कि शासन से मिली सहायता उनके लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं है, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी है। उनका सपना शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनकर परिवार तथा समाज का नाम रोशन करने का है।

    श्रमिक परिवारों की बेटियों को मिल रहा आर्थिक संबल

    नोनी सशक्तिकरण योजना श्रमिक परिवारों की बेटियों को आर्थिक संबल प्रदान कर उनके बेहतर भविष्य की राह आसान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सहायता मिलने से उनकी शिक्षा सहित भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में परिवारों को सहयोग मिल रहा है। योजना के माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी सार्थक प्रयास हो रहे हैं।

    अंकिता की कहानी बताती है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर जरूरतमंद परिवार तक पहुंचने से न केवल आर्थिक कठिनाइयां कम होती हैं, बल्कि युवाओं के सपनों और आत्मविश्वास को भी नई मजबूती मिलती है।

    योजना के तहत मिली सहायता से उत्साहित अंकिता ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस मदद से उनकी शिक्षा के सपने को मजबूती मिली है। अब वह मन लगाकर पढ़ाई करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती हैं और भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहारा बनना चाहती है।

  • आधुनिक पुलिसिंग, फॉरेंसिक तकनीक और न्याय प्रक्रिया के सजीव प्रदर्शन की सराहना

    आधुनिक पुलिसिंग, फॉरेंसिक तकनीक और न्याय प्रक्रिया के सजीव प्रदर्शन की सराहना

    भोपाल 

    नवीन न्याय संहिताओं को आमजन के लिए सरल, सहज एवं व्यावहारिक रूप में समझाने के उद्देश्य से भेल दशहरा मैदान, गोविन्दपुरा में आयोजित पांच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी का आज  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा की उपस्थिति में समापन हुआ। इस अवसर पर डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री जी के 3 अक्टूबर के दौरे की सूचना के बाद  प्रदर्शनी के आयोजन के लिए मात्र छह दिन का समय मिला था। सीआईडी टीम ने लगातार अवकाश के दिनों में कार्य करते हुए रूपरेखा तैयार की और इवेंट एजेंसी ने केवल दो दिनों में प्रदर्शनी का सेटअप तैयार किया। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में इतने बड़े स्तर का आयोजन टीमवर्क और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    डीजीपी  मकवाणा ने विशेष रूप से आरक्षकों कीसराहना करते हुए कहा कि अंतिम समय में ब्रीफिंग मिलने के बावजूद उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ आगंतुकों को नवीन कानूनों एवं आधुनिक पुलिसिंग की जानकारी दी। उन्होंने स्वयं भी परिवार के साथ सामान्य नागरिक के रूप में प्रदर्शनी का अवलोकन कर पूरी प्रक्रिया को समझा। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने प्रदर्शनी में अपराध की सूचना से लेकर पुलिस कार्रवाई, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी व्यवस्था को एक ही मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किए जाने की सराहना की। समापन अवसर पर प्रदर्शनी को सफल बनाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सीआईडी, फिंगरप्रिंट टीम, डॉग स्क्वाड, पुलिस स्टेशन टीम सहित विभिन्न अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रदर्शनी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रावधानों को केवल पुस्तकीय जानकारी तक सीमित न रखते हुए पुलिस, फॉरेंसिक, चिकित्सा, अभियोजन, न्यायपालिका एवं जेल प्रशासन की समन्वित कार्यप्रणाली के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। 14 विशेष जोन में मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो, लाइव डेमो और सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से नागरिकों को आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली की पूरी कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला।

    अंतिम दिन अभियोजन एवं न्यायालय चरण का सजीव मंचन

    प्रदर्शनी के अंतिम दिन तृतीय चरण—अभियोजन तथा न्यायालय चरण को विशेष रूप से सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें विवेचना के बाद प्रकरण के अभियोजन तक पहुंचने, अभियोजन की भूमिका, न्यायालयीन कार्यवाही तथा अंतिम न्याय तक पहुंचने की प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया गया। इस सजीव प्रस्तुति में CCTNS एवं ICJS सहित आधुनिक डिजिटल प्रणालियों की भूमिका को भी प्रदर्शित किया गया। प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न चरणों के बीच डिजिटल सूचना एवं कार्यप्रणाली का समन्वय प्रकरण के त्वरितएवं व्यवस्थित निराकरण में सहायक बनता है।

    ICJS के पांच प्रमुख स्तंभों के माध्यम से ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल न्याय प्रक्रिया का प्रदर्शन

    प्रदर्शनी में ICJS (Inter-Operable Criminal Justice System) एवं CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रक्रिया को शुरुआत से अंत तक डिजिटल रूप में प्रस्तुत किया गया। ‘वन डेटा, वन एंट्री’ के सिद्धांत पर आधारित इस व्यवस्था में पुलिस से लेकर अभियोजन, स्वास्थ्य एवं फॉरेंसिक, जेल तथा न्यायालय तक विभिन्न चरणों में तकनीक के उपयोग और आपसी समन्वय को प्रदर्शित किया गया। पुलिस स्तर पर CCTNS एवं e-साक्ष्य के माध्यम से FIR दर्ज करने, डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने, e-Zero FIR तथा जांच प्रबंधन की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। तलाशी, जब्ती एवं अपराध स्थल से संबंधित प्रक्रियाओं की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग तथा e-Summon जैसी डिजिटल सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।

    अभियोजन स्तर पर e-Prosecution पोर्टल के माध्यम से आरोप-पत्र के त्वरित मूल्यांकन, केस फाइलों की डिजिटल जांच तथा पुलिस डेटाबेस से प्रकरण संबंधी जानकारी के डिजिटल समन्वय की प्रक्रिया को समझाया गया। स्वास्थ्य एवं फॉरेंसिक स्तर पर MedLEaPR (Medico-Legal Examination and Postmortem Reporting) के माध्यम से मेडिको-लीगल जांच एवं पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड के मानकीकृत निर्माण तथा इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण की प्रक्रिया और e-Forensics के माध्यम से वैज्ञानिक केस ट्रैकिंग एवं साक्ष्य सत्यापन की व्यवस्था को प्रदर्शित किया गया।

    जेल प्रशासन के स्तर पर e-Prisons प्रणाली के माध्यम से डिजिटल जेल प्रबंधन, बंदियों की जानकारी एवं ट्रैकिंग, रिमांड निगरानी, e-Parole तथा पुनर्वास प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। न्यायालयीन स्तर पर e-Courts, न्याय श्रुति एवं e-Summon के माध्यम से डिजिटल न्यायालयीन प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक सुनवाई, समन की डिजिटल तामीली तथा गवाहों की वर्चुअल गवाही एवं दूरस्थ सुनवाई की व्यवस्था को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार प्रदर्शनी में पुलिस से लेकर न्यायालय तक आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रत्येक चरण में डिजिटल तकनीक के उपयोग और आपसी समन्वय को एकीकृत रूप में समझाया गया।

    रंगमंचीय प्रस्तुति से समझाई ‘घटना से न्याय तक’ की पूरी प्रक्रिया

    प्रदर्शनी के लिए अपराध अनुसंधान विभाग के तत्वावधान में तैयार की गई रंगमंचीय प्रस्तुति में घटना घटित होने से लेकर पुलिस सहायता, पुलिस थाने की कार्यप्रणाली, अपराध की खोजबीन एवं विश्लेषण, चिकित्सकीय सहायता, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक परीक्षण, अभियोजन तथा न्यायालयीन कार्यवाही तक की पूरी प्रक्रिया को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में नवीन न्याय संहिताओं एवं आधुनिक न्याय प्रणाली के व्यावहारिक उपयोग को भी दर्शाया गया। रंगमंचीय प्रस्तुति का निर्देशन  आनंद यादव द्वारा किया गया। सीमित समय में प्रस्तुति को तैयार कर आमजन के लिए प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत करने में उनके परिश्रम, लगन एवं रचनात्मक योगदान की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सराहना की गई।

    NAFIS और MCU से अपराध अनुसंधान में आधुनिक तकनीक की झलक

    प्रदर्शनी में अपराध अनुसंधान में आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक के उपयोग को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) के माध्यम से घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट एवं पामप्रिंट जैसे चांस प्रिंट्स के आधार पर पहचान की प्रक्रिया को समझाया गया। घटनास्थल से प्राप्त ऐसे निशानों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित कर राष्ट्रीय स्तर के फिंगरप्रिंट डेटाबेस में मिलान की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

    इसी प्रकार MCU (Measurement Collection Unit) के माध्यम से अपराधियों से संबंधित बायोमेट्रिक एवं पहचान संबंधी विवरण के संकलन की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। इसमें आइरिस स्कैन, मानकीकृत डिजिटल फोटोग्राफी तथा अन्य पहचान संबंधी मापदंडों के उपयोग की जानकारी दी गई। इन तकनीकों के माध्यम से अपराध अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को आमजन के सामने रखा गया।

    वैज्ञानिक साक्ष्य से मजबूत होती आधुनिक विवेचना

    प्रदर्शनी में 3D क्राइम सीन मॉडल के माध्यम से घटनास्थल को सुरक्षित करने, साक्ष्यों का वैज्ञानिक संकलन, फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी तथा फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका को सजीव रूप में समझाया गया। Mobile Forensic Units, FSL तथा DNA, Biology, Chemistry, Toxicology, Ballistics, Physics और Voice Analysis जैसी विभिन्न वैज्ञानिक जांच विधियों की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही e-Forensic 2.0 के माध्यम से फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने, उसके डिजिटल संधारण तथा पुलिस एवं न्यायालय को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी सजीव प्रस्तुति के माध्यम से समझाया गया।

    डायल-112 से लेकर साइबर सुरक्षा तक तकनीक आधारित पुलिस सेवाएं

    प्रदर्शनी में डायल-112 के माध्यम से आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर सूचना संकलन, डिस्पैच, पुलिस रिस्पॉन्स एवं वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग तक की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया गया। साइबर सुरक्षा जोन में ऑनलाइन ठगी से बचाव, 1930 पर तत्काल सूचना, साइबर फ्रॉड के ‘गोल्डन ऑवर’, E-Zero FIR तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार से संबंधित जानकारी दी गई। नागरिकों को साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने और समय पर शिकायत करने के लिए जागरूक किया गया।

    ‘ऑपरेशन मुस्कान’ और महिला हेल्प डेस्क की जानकारी भी दी गई

    प्रदर्शनी में ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के माध्यम से गुम हुए बालक-बालिकाओं की तलाश, तकनीकी विश्लेषण, CCTV, अंतरराज्यीय समन्वय एवं उन्हें सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की पुलिस कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध पुलिस सहायता, विधिक अधिकारों एवं संवेदनशील प्रथम संपर्क व्यवस्था को भी प्रदर्शित किया गया।

     विद्यार्थियों और युवाओं ने प्रदर्शनी को बताया उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक

    पांच दिनों के दौरान नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं की प्रदर्शनी में उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक विज्ञान, डायल-112, पुलिसिंग, अभियोजन एवं न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़े प्रदर्शन देखे तथा लाइव क्विज में भी सहभागिता की। युवा आगंतुकों ने आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक अनुसंधान, नागरिक सुरक्षा एवं न्याय प्रक्रिया से जुड़ी प्रस्तुतियों को उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं सीखने का बेहतर अनुभव बताया।

    आमजन को कानून और न्याय व्यवस्था से जोड़ने की अभिनव पहल

    नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित यह प्रदर्शनी केवल कानूनों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि आमजन को यह समझने का अवसर दिया कि किसी घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस किस प्रकार कार्रवाई करती है, वैज्ञानिक साक्ष्य किस प्रकार जुटाए एवं परखे जाते हैं, अभियोजन की भूमिका क्या होती है और न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से प्रकरण अंतिम न्याय तक किस प्रकार पहुंचता है।

    प्रदर्शनी के माध्यम से तकनीक-सक्षम, वैज्ञानिक, समन्वित एवं नागरिक-केंद्रित आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली को सरल भाषा, डिजिटल तकनीक और सजीव नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया गया। पांच दिवसीय आयोजन की यही विशेषता रही कि कानून को पढ़ने के साथ-साथ उसे देखने, समझने और अनुभव करने का अवसर नागरिकों, विद्यार्थियों एवं युवाओं को मिला।

    इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव, उप पुलिस महानिरीक्षक  साकेत प्रकाश पाण्डेय,  प्रशांत खरे, एस ओ टू डीजीपी  मलय जैन, सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री,  संतोष भदौरिया उपस्थित रहे। 

  • गोमती के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में योगी सरकार का राहत अभियान तेज

    गोमती के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में योगी सरकार का राहत अभियान तेज

    लखनऊ

    गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित क्षेत्रों में योगी सरकार के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्य लगातार तेज किए जा रहे हैं। बुधवार को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने पूरे दिन जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में रहकर राहत व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने जोन-6 के सैठा तथा जोन-3 के लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर समेत विभिन्न इलाकों का निरीक्षण कर अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

    12 अस्थायी रैन बसेरों में प्रभावित परिवारों को आश्रय

    नगर आयुक्त ने जलभराव की स्थिति के साथ नावों के संचालन, पेयजल, स्वच्छता, फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और राहत सुविधाओं की समीक्षा की। प्रभावित इलाकों में करीब 20 पानी के टैंकर भेजे गए हैं। साथ ही 10 हजार लीटर पैकेज्ड पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है। जलभराव प्रभावित परिवारों के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार किए गए हैं, इनमें दाउद नगर में 10 तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में एक-एक अस्थायी रैन बसेरा शामिल है। जबकि जोन-6 में करीब 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 26 लोग रैन बसेरे में रह रहे हैं।

    इसके अतिरिक्त पल्टन छावनी, उमराव हाता और इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे 100-100 बेड क्षमता वाले स्थायी रैन बसेरे भी उपलब्ध हैं। रैन बसेरों में बेड, फोल्डिंग, पंखे, कूलर, प्रकाश व्यवस्था और मोबाइल के लिए 12 चार्जिंग पॉइंट की सुविधा दी गई है।

    प्रभावित इलाकों में 90 नावों से रेस्क्यू अभियान

    राहत कार्यों के तहत जिला प्रशासन की 90 नावें प्रभावित क्षेत्रों में संचालित हैं। नगर निगम की टीमें राहत सामग्री की लोडिंग, अनलोडिंग और वितरण में प्रशासन का सहयोग कर रही हैं। दाउद नगर में दो शिफ्टों में 25-25 कर्मचारियों तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में 25-25 कर्मचारियों को लगाया गया है। जोन-6 के सैठा, दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, टांड खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज सहित विभिन्न क्षेत्रों में नावों एवं स्टीमर से लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य जारी है। लक्ष्मी हॉस्पिटल के पीछे एक नाव विशेष रूप से राहत सामग्री वितरण के लिए लगाई गई है।

    250 सफाईकर्मियों के साथ फॉगिंग अभियान तेज

    स्वच्छता और बीमारी से बचाव के लिए यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक करीब 250 सफाईकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। करीब 150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एमएलओ और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा चुका है। इसमें जोन-3 और जोन-6 के क्षेत्र शामिल हैं। जलभराव वाले ऐसे स्थानों, जहां सामान्य मशीनों से पहुंचना कठिन है, वहां ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव किया जा रहा है। छह मैनुअल और छह बड़ी फॉगिंग मशीनों के अलावा एलएसए की दो बड़ी मशीनों से भी दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।

    अस्थायी भंडार केंद्र का भी किया निरीक्षण

    निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती युनिवर्सिटी में बनाए गए अस्थायी भंडार केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था देखी तथा सामग्री के व्यवस्थित रख-रखाव और आवश्यकता के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों तक समय से पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।

    पानी उतरते ही शुरू होगा विशेष सफाई अभियान

    नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान राहत कार्यों के साथ ही जलस्तर कम होने के बाद की स्थिति से निपटने की तैयारी भी पूरी रखी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र के लिए अलग-अलग टीमें निर्धारित की जा रही हैं। पानी उतरते ही इन टीमों द्वारा सड़कों और बस्तियों में जमा कीचड़, कचरे एवं गंदगी की सफाई के साथ ब्लीचिंग पाउडर, एंटी लार्वा और आवश्यक दवाओं का छिड़काव तथा फॉगिंग कराया जाएगा। इसका उद्देश्य जलभराव के बाद संक्रामक एवं मच्छरजनित बीमारियों के संभावित प्रसार को नियंत्रित करना है।

  • ’गांव में ही मिली मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना की जानकारी, आवेदन की प्रक्रिया हुई आसान’

    ’गांव में ही मिली मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना की जानकारी, आवेदन की प्रक्रिया हुई आसान’

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गांव-गांव में आयोजित किए जा रहे सेवा सेतु शिविर आम नागरिकों तक शासकीय योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत कटरा में आयोजित सेवा सेतु शिविर ग्राम पंचायत उषाढ़ निवासी विरेन्द्र सिंह के लिए भी मददगार साबित हुआ। शिविर में उन्हें श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत पात्रता के अनुसार बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी ने उनके परिवार में नई उम्मीद जगाई।

    विरेन्द्र सिंह शिविर में अपनी समस्याओं और शासकीय योजनाओं की जानकारी लेने पहुंचे थे। इसी दौरान श्रम विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने उन्हें पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग के लिए संचालित मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के बारे में बताया। योजना की पात्रता, मिलने वाली सहायता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी मिलने पर उन्होंने अपने बच्चों के लिए योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया और आवश्यक प्रक्रिया के तहत आवेदन किया।

    एक ही स्थान पर मिली जानकारी और आवेदन की सुविधा

    सेवा सेतु शिविर की खासियत यह रही कि विरेन्द्र सिंह को योजना की जानकारी प्राप्त करने और आवेदन की प्रक्रिया समझने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। शिविर में संबंधित विभाग की मौजूदगी से उन्हें एक ही स्थान पर योजना से जुड़ी आवश्यक जानकारी और आवेदन संबंधी मार्गदर्शन मिला। इससे शासन की योजना तक उनकी पहुंच आसान हुई।

    विरेन्द्र सिंह ने बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के बीच बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना परिवार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना से मिलने वाली सहायता बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को निरंतर जारी रखने में महत्वपूर्ण सहारा बनेगी। उन्होंने कहा कि गांव के नजदीक शिविर आयोजित होने से उन्हें ऐसी योजना के बारे में जानकारी मिली, जिसका लाभ उनके बच्चों की शिक्षा में उपयोगी साबित हो सकता है।

    श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को मिल रहा प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य श्रमिक परिवारों पर बच्चों की पढ़ाई के आर्थिक भार को कम करने के साथ उन्हें शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। ऐसी योजनाएं सीमित आय वाले श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान कर रही हैं।

    सेवा सेतु से योजनाओं तक आसान हो रही ग्रामीणों की पहुंच

    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सेवा सेतु शिविरों के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं और सेवाओं को ग्रामीणों के नजदीक उपलब्ध कराया जा रहा है। इन शिविरों में नागरिकों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ पात्र हितग्राहियों को आवेदन एवं आवश्यक प्रक्रियाओं के संबंध में मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। इससे जानकारी के अभाव में योजनाओं से वंचित रहने वाले पात्र लोगों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

    विरेन्द्र सिंह के लिए कटरा का सेवा सेतु शिविर इसी उद्देश्य को साकार करने वाला साबित हुआ। योजना की जानकारी मिलने और आवेदन की राह आसान होने से अब उन्हें उम्मीद है कि छात्रवृत्ति की सहायता उनके बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित होगी।

  • लिव-इन के पंजीयन, पैतृक संपत्ति में बराबरी और भरण-पोषण पर एक समान कानून की मांग

    लिव-इन के पंजीयन, पैतृक संपत्ति में बराबरी और भरण-पोषण पर एक समान कानून की मांग

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ महिला मंच और महाराष्ट्र मंडल महिला समिति की पदाधिकारियों व सदस्यों ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील व व्यावहारिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी  एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता  मोहन पवार ने महिलाओं द्वारा दिए गए सभी व्यावहारिक और कानूनी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें उन पर विचार करने का पूर्ण आश्वासन दिया।   

    लैंगिक समानता और संपत्ति अधिकार

    शताब्दी पाण्डेय ने धर्म आधारित कानूनों में बदलाव की वकालत करते हुए पैतृक व व्यक्तिगत संपत्ति में महिला और पुरुष को समान अधिकार देने, भरण-पोषण के नियम एक समान बनाने और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की। छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल प्रदेश होने के कारण संबंधित समुदायों की परंपराओं, नीतियों, रीति-रिवाजों और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए व्यापक विचार-विमर्श पर सहमति बनी। साथ ही, पंचायतों में कानूनी सलाह के लिए विशेष डेस्क बनाने की मांग रखी । श्वेता पड्डा ने महिलाओं के शोषण पर प्रभावी रोकथाम के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन को अनिवार्य बनाने की मांग की। साथ ही, लिव-इन से जन्मे बच्चों को पालन-पोषण और उत्तराधिकार का पूरा अधिकार मिलने तथा जैविक पहचान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

    अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने स्पष्ट किया कि केवल आपसी सहमति (एग्रीमेंट) के आधार पर महिला-पुरुष का साथ रहना भारतीय कानून में मान्य नहीं है, इसलिए इस पर स्पष्टता जरूरी है। अधिवक्ता मती हेमलता सिंह ने यूसीसी का मुख्य उद्देश्य कानूनी भेदभाव को समाप्त कर व्यवस्था को सरल बनाना बताया। गीता श्याम दलाल ने एक राष्ट्र, एक कानून का समर्थन करते हुए कहा कि अपराधी को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, जबकि सभी को अपनी परंपराओं को मानने की स्वतंत्रता हो। मती आस्था अभय काले ने कहा कि यह व्यवस्था समाज के अंतिम छोर पर खड़ी कमजोर महिलाओं तक पहुँचनी चाहिए, जिसके लिए महिलाओं का जागरूक होना सबसे पहले आवश्यक है। बैठक में आकांक्षा तिवारी, डॉ. (मती) भारती यादव, डॉ. (मती) रत्ना पाण्डेय, मती पुरोहित और प्रसन्ना राजेश अवस्थी, मती अर्चना वोरा, मती शेफाली पुरोहित, मती शीला शर्मा, मती नमिता शेष, मती मालती मिश्रा ने बच्चों के हितों की रक्षा से जुड़े सुझाव दिए, आदिवासी समाज की सहभागिता व विवाह परंपराओं पर अपने विचार समिति  के समक्ष रखे। समिति ने महिलाओं की इस संवादात्मक पहल की सराहना करते हुए सभी व्यावहारिक सुझावों को आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखने का भरोसा दिलाया।

  • ट्रैफिक प्रॉब्लम से बचा सकती है क्वांटम तकनीक, यूपीएसआईएफएस में छात्रों ने प्रस्तुत किए प्रेजेंटेशन

    ट्रैफिक प्रॉब्लम से बचा सकती है क्वांटम तकनीक, यूपीएसआईएफएस में छात्रों ने प्रस्तुत किए प्रेजेंटेशन

    लखनऊ

    प्रदेश की तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को योगी सरकार लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) लखनऊ में बुधवार को क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। इसमें संस्थान के लॉ, बीटेक और एमटेक के छात्र-छात्राओं ने भविष्य की योजनाओं को लेकर अपनी बात रखी और विशेषज्ञों से नई तकनीक की बारीकियां सीखीं। छात्र-छात्राओं के समूहों ने ‘डिस्कवरी एवं क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से यातायात समस्या का समाधान’ विषय पर विषय विशेषज्ञ डॉ. पवन शर्मा और हेराल्ड डी कोस्टा के समक्ष प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया।

    इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण के दृष्टिगत वाहनों का आइडल टाइम कम करके सीओटू (CO2) उत्सर्जन और ईंधन की खपत घटाने तथा ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के विषय पर भी प्रकाश डाला। सुरक्षा और रियल-टाइम स्पीड के लिए TLS 1.3 एन्क्रिप्शन और GDPR नियमों के साथ डेटा सुरक्षित रखते हुए सेकंडों में सटीक रूट तय करने की प्रक्रिया भी प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही फॉरेंसिक व इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स के तहत भविष्य में एंबुलेंस, पुलिस और फॉरेंसिक सेवाओं के लिए प्राथमिकता वाले ट्रैफिक रूट तैयार करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। 

    विषय विशेषज्ञ और आईटी एक्सपर्ट (यूएसए) डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि संस्थान की ओर से छात्र-छात्राओं को जो तकनीकी माहौल दिया जा रहा है, वह काबिले तारीफ है। छात्र-छात्राओं ने टेक्नोलॉजी विषय पर अपनी अद्भुत पकड़ बनाई है और आज के प्रेजेंटेशन में उनकी दक्षता प्रदर्शित हो रही है।  

    संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तरह के कार्यक्रम से युवा पीढ़ी का ज्ञानवर्धन होता है तथा बच्चे दुनिया में होने वाले तकनीकी प्रयोगों (क्वांटम टेक्नोलॉजी लॉ विथ लैब) से रूबरू होते हैं। उन्होंने विषय विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुतियों के लिए टीमों की सराहना की। 
    डॉ. गोस्वामी ने कहा कि इन प्रयोगों के माध्यम से क्वांटम चिप्स बनेंगी, जो फॉरेंसिक साइंस एंड एप्लीकेशन (क्वांटम क्रिप्टोग्राफी) में प्रभावशाली होंगी। उन्होंने तकनीक के लाभ और भविष्य के लक्ष्य तथा ‘ट्रैफिक कंजेशन’ जैसी गंभीर समस्या के समाधान के विषय पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्थान क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा में अग्रणी होकर कार्य कर रहा है।

    कार्यक्रम में अपर निदेशक संजीव सुमन, उप निदेशक चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. निमिशा, डॉ. सेंथिल शिवासुब्रमण्यम सहित जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी आदि उपस्थित रहे।

  • बस्तर बाढ़ आपदा में पीड़ितों को 9.39 करोड़ रुपए से अधिक की राहत राशि का त्वरित भुगतान, पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी

    बस्तर बाढ़ आपदा में पीड़ितों को 9.39 करोड़ रुपए से अधिक की राहत राशि का त्वरित भुगतान, पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी

    रायपुर

    बस्तर अंचल में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई मूसलाधार बारिश और ओडिशा के खातीगुड़ा व मुरान बांधों से छोड़े गए पानी के चलते उत्पन्न भीषण बाढ़ की स्थिति के बीच जिला प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है। आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से अब तक कुल 9 करोड़ 39 लाख 29 हजार 898 रुपए की राहत राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।  

    जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वित्तीय सहायता में सबसे बड़ा हिस्सा मकानों की क्षतिपूर्ति के रूप में दिया गया है, जिसके तहत कुल 8 करोड़ 78 लाख 15 हजार 398 रुपए वितरित किए गए हैं। इसमें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 8 करोड़ 2 लाख 23 हजार 391 रुपए तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 75 लाख 92 हजार 7 रुपए की सहायता शामिल है। इसके अतिरिक्त घरों में रखे बर्तन व अन्य घरेलू सामग्रियों के नुकसान के एवज में प्रभावितों को 52 लाख 45 हजार रुपये, जनहानि के मामलों में आश्रितों को 8 लाख रुपये का मुआवजा और पशुहानि के मामलों में 69 हजार 500 रुपये की राहत राशि का त्वरित भुगतान किया गया है।  

     राज्य शासन के संवेदनशील निर्देशों के तहत राजस्व अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों ने दिन-रात सक्रिय होकर प्रकरणों का तेजी से निराकरण सुनिश्चित किया, जिससे इतनी बड़ी धनराशि का त्वरित वितरण संभव हो सका। कलेक्टर  आकाश छिकारा ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए हैं कि पूर्ण एवं आंशिक मकान क्षति के जितने भी शेष मामले लंबित हैं, उन्हें भी बिना किसी विलंब के प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि कोई भी प्रभावित परिवार शासन की मदद से वंचित न रहे।

    वित्तीय सहायता के साथ-साथ जमीनी स्तर पर पुनर्वास और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रयास भी तेज गति से संचालित किए जा रहे हैं। जिन परिवारों के आशियाने पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, उनके तात्कालिक आश्रय हेतु प्रशासन द्वारा बांस, बल्ली और तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्रियां त्वरित रूप से पहुंचाई जा रही हैं। वहीं जलभराव के बाद संक्रामक और जलजनित बीमारियों के खतरे को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मिलकर सभी पेयजल स्रोतों का अनिवार्य क्लोरीनेशन कर रहे हैं और गांवों में लगातार ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव किया जा रहा है। बस्तर संभाग के कमिश्नर  डोमन सिंह और कलेक्टर  आकाश छिकारा स्वयं लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों व राहत शिविरों का निरीक्षण कर पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, और प्रशासन का संकल्प है कि अंतिम पीड़ित व्यक्ति तक सहायता पहुंचने तक यह राहत अभियान निरंतर जारी रहेगा।

     

  • एमपीआईडीसी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस : 2026 में प्रदर्शित किया ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन

    एमपीआईडीसी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस : 2026 में प्रदर्शित किया ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन

    भोपाल

    नई दिल्ली में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 में स्टेट पार्टनर के रूप में सहभागिता की और मध्यप्रदेश को टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के उभरते डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम के की-नोट सत्र में एमपीआईडीसी की कार्यपालक निदेशक मती अनीशा वास्तव ने प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्वालियर में प्रस्तावित समर्पित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन की जानकारी दी। इसका उद्देश्य टेलीकॉम उपकरण निर्माताओं, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को आकर्षित करना है।

    इंडियन मोबाइल कांग्रेस के दौरान मती वास्तव ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। उन्होंने निवेश अवसरों, उद्योगों की आवश्यकताओं तथा मध्यप्रदेश में विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की।

    आईएमसी : 2026 में एमपीआईडीसी की सहभागिता से टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम के साथ प्रदेश का जुड़ाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है। साथ ही मध्यप्रदेश में नए निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को भी बल मिला है।