Author: NewseDay

  • सिंहस्थ 2028 से पहले सड़क चौड़ीकरण पर हाईकोर्ट का दखल, सरकार को नोटिस जारी

    सिंहस्थ 2028 से पहले सड़क चौड़ीकरण पर हाईकोर्ट का दखल, सरकार को नोटिस जारी

     उज्जैन

    उज्जैन शहर में होने वाले सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण में जाने वाली जमीन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। इसमें नगर निगम के सड़क चौड़ीकरण के लिए निर्माण हटाने व जमीन निगम की घोषित करने को चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी कर उज्जैन नगर निगम व सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में निगम कार्रवाई पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन अंतरिम व्यवस्था दी कि जो भी कार्रवाई होगी, वो कोर्ट आदेश के अधीन रहेगी। चौबीस खंभा मार्ग उज्जैन निवासी छात्र सोमिल कराड़े ने निगम द्वारा सड़क चौड़ीकरण को लेकर जारी आदेश को चुनौती दी है।

    दायर की थी याचिका
    उनका कहना है कि केंद्र सरकार 13 साल पहले पारित भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद राज्य सरकार के मप्र म्यूनिसिपल एक्ट की धारा-305 का औचित्य नहीं रह जाता। इसके तहत निगम को सड़क बनाने में बाधक निर्माण हटाने के साथ ही उस जमीन का आधिपत्य मिल जाता है। भूमि अधिग्रहण कानून में इसके लिए दावे आपत्ति बुलाकर मुआवजा तय करने की प्रक्रिया है, जबकि निगम एक्ट में केवल नोटिस के जरिए ही प्रक्रिया पूरी हो जाती ऐसे में दो नियम एक दूसरे के विपरीत होने के चलते उन्होंने याचिका दायर की है। है। कोर्ट ने चार सप्ताह बाद मामले पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया है। जानकारी के लिए बता दें कि अगला उज्जैन सिंहस्थ (कुंभ मेला) 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा।

    वाघमारे केस का हवाला

    सुनवाई के दौरान जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने सवाल उठाए कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुभदा वाघमारे केस में इस विषय को तय कर चुकी है तो फिर कोर्ट इस पर कैसे सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सुभदावाघमारे द्वारा जब कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, उस समय केंद्र सरकार का कानून लागू नहीं हुआ था। इस पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही चार सप्ताह का निर्णय लिया है। बाद इस पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है।

  • महाअष्टमी या महानवमी, किस दिन होगी पूजा? 2026 नवरात्र की तिथियों का पूरा कंफ्यूजन दूर

    महाअष्टमी या महानवमी, किस दिन होगी पूजा? 2026 नवरात्र की तिथियों का पूरा कंफ्यूजन दूर

    शारदीय नवरात्र में इस बार महाष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन है. खासकर उन लोगों के बीच जो अष्टमी का व्रत रखते हैं या फिर नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करते हैं। 

    कई परिवारों में अष्टमी की पूजा की परंपरा है, तो कई घरों में नवमी की पूजा प्रमुख रूप से की जाती है. ऐसे में सवाल है कि इस बार अष्टमी का व्रत और पूजन किस दिन करना चाहिए? महानवमी की पूजा कब होगी? कन्या पूजन किस दिन करना शुभ रहेगा? और संधि पूजा का मुहूर्त क्या है? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी. आइए पंडित प्रवीण मिश्र जी से जानते हैं कि महा अष्टमी और महा नवमी की तिथि के बारे में। 

    19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा

    इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी. इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं। 
    अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें। 

    कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं. कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए। 

    रात में अष्टमी पूजा की परंपरा है तो क्या करें?
    कुछ परिवारों में महाष्टमी की पूजा रात्रि में करने की परंपरा होती है. खासकर कुछ परिवारों में कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है. ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं। 

    महानवमी की पूजा कब होगी?
    19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है। 

    अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं। 

    यानी 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है। 

    20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन
    कुछ लोग उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं. ऐसे लोग 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं. हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी. इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए. इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं। 

    महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें?
    जिन लोगों के यहां महानवमी का व्रत रखने की परंपरा है, वे नवमी के दिन यानी 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं. नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें. व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है। 

    संधि पूजा का शुभ मुहूर्त
    इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा. यह कुल 48 मिनट का समय होगा. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है. इसी दौरान संधि पूजा की जाती है। 

    शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था. इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को कमल पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। 

  • लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, इस दिन मिल सकते हैं महिलाओं को ₹1500

    लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, इस दिन मिल सकते हैं महिलाओं को ₹1500

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चल रही लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि इस बार योजना की 41वीं किस्त जारी होनी है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है।

    इस बार लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का इंतजार है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इस बार महिलाओं के बैंक खाते में 1500 रुपये की अगली राशि आखिर कब तक आएगी? तो चलिए बिना देर किए इस बारे में जानने की कोशिश करते हैं। 

    कब आएगी लाडली बहना योजना की 41 किस्त?
    अगर आप भी लाडली बहना योजना की 41वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, तो अभी सरकार की तरफ से इसकी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि माना जा रहा है कि लाडली बहनों को उनकी अगली किस्त के 1500 रुपये 10 से 15 अक्टूबर के बीच मिल जाएंगे। हालांकि किस्त के जारी होने से पहले लाभार्थी बहनों को कुछ चीजें चेक कर लेनी चाहिए। सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है। इसके अलावा ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए, वरना पैसे बैंक में नहीं आएंगे।

    1500 रुपये पाने के लिए कौन से 3 काम करवाना जरूरी है?

    पहला काम

        लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली किस्त के 1500 रुपये सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजे जाते हैं
        इसलिए बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही होना जरूरी है
        अगर बैंक खाते की जानकारी गलती है, तो आपकी किस्त अटक सकती है

    दूसरा काम

        लाभार्थी यह जरूर चेक कर लें कि उनका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक है या नहीं
        साथ ही बैंक खाते में डीबीटी सुविधा भी एक्टिव होनी चाहिए
        अगर ऐसा है, तो बेहतर है वरना किस्त प्राप्त करने में आपको दिक्कत हो सकती है

    तीसरा काम

        लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली किस्त का लाभ लेने के लिए आपको ई-केवाईसी भी करवानी होती है
        अगर आप ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं तो आपकी किस्त अटक सकती है
        इसलिए ये जरूर चेक करें कि आपकी केवाईसी हो रखी है या नहीं

    लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आ सकती है?

        लाड़ली बहना योजना के तहत सरकार सामान्य तौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी कर देती है
        इसी आधार पर 41वीं किस्त के भी इसी समय के बीच आने की उम्मीद है यानी 10 से 15 तारीख के बीच
        हालांकि, अभी सरकार की तरफ से तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है

    बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत?

    अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं। 

     

     

     

  • लांजी के जंगल में दिखने लगे हाथी-बाघ, नवेगांव-नगझीरा और कान्हा को जोड़ रहा वन्यजीव कॉरिडोर

    लांजी के जंगल में दिखने लगे हाथी-बाघ, नवेगांव-नगझीरा और कान्हा को जोड़ रहा वन्यजीव कॉरिडोर

    बालाघाट
     मध्य प्रदेश का लांजी क्षेत्र अब महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आने वाले वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक रास्ता बनता जा रहा है। पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र के जंगलों से होकर वन्यजीव नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य और कान्हा टाइगर रिजर्व के बीच आवाजाही कर रहे हैं। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे कट्टीपार के जंगल इस प्राकृतिक वन्यजीव गलियारे की अहम कड़ी बनकर उभरे हैं।

    लांजी से पश्चिम दिशा में नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य करीब 80 किलोमीटर और पूर्व में कान्हा टाइगर रिजर्व करीब 100 किलोमीटर दूर है। दोनों बड़े वन क्षेत्रों के बीच मौजूद लगातार फैला जंगल वन्यजीवों को सुरक्षित आवाजाही का प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराता है।

    हाथी ने 15 दिन तक किया विचरण
    अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ की ओर से आया एक हाथी कट्टीपार के रास्ते बालाघाट पहुंचा था। हाथी ने किरनापुर और हट्टा क्षेत्र के जंगलों में करीब 15 दिन तक विचरण किया। इसके बाद वह उकवा के जंगलों से होते हुए कान्हा की दिशा में चला गया।यह इस गलियारे से हाथियों की आवाजाही का पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 में भी इसी रास्ते से तीन हाथियों के गुजरने की जानकारी सामने आई थी।

    नवेगांव-नगझीरा की बाघिन भी पहुंची थी लांजी
    वन्यजीवों की आवाजाही का एक और उदाहरण वर्ष 2025 में सामने आया, जब नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य की एक बाघिन लांजी-किरनापुर क्षेत्र में पहुंची। बाघिन करीब एक महीने तक इस इलाके के जंगलों में विचरण करती रही और इसके बाद वापस लौट गई।इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र अलग-अलग वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
    23 बीटों में बाघ से लेकर बायसन तक मौजूद

    दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट के पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र का विस्तार करीब 23 हजार हेक्टेयर में है। यहां 23 बीट हैं, जिनमें बाघ, तेंदुआ, बायसन और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की जाती है।

    लांजी और महाराष्ट्र की सीमा के बीच से बाघ नदी बहती हुई किरनापुर क्षेत्र की ओर आती है। नदी के दोनों तरफ जंगल होने के कारण गर्मी के मौसम में जब पानी के स्रोत सीमित होते हैं, तब नवेगांव-नगझीरा क्षेत्र के वन्यजीव नदी पार कर इस ओर आ जाते हैं।

    कुछ यहीं बना लेते हैं ठिकाना
    वन विभाग के अनुसार, दूसरे वन क्षेत्रों से आने वाले वन्यजीव इस इलाके में कई दिनों तक विचरण करते हैं। इनमें से कुछ वापस अपने पुराने क्षेत्र में लौट जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक इसी क्षेत्र में बने रहते हैं।

    पश्चिम लांजी सामान्य के वन परिक्षेत्र अधिकारी सपन ताम्रकार के मुताबिक, कान्हा और नवेगांव-नगझीरा के बीच पश्चिम लांजी सामान्य का जंगल प्राकृतिक गलियारे की तरह काम कर रहा है। दोनों वन क्षेत्रों से वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

    बालाघाट बना बाघों का नया ठिकाना, बढ़ती संख्या से वन विभाग अलर्ट, 200 से ज्यादा टाइगर

    मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है. देश भर में साल 2014 से 2022 के बीच 65 प्रतिशत आबादी बढ़ी है. इसमें सिर्फ एमपी में 155 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. ऐसे में एमपी टाइगर की संख्या एक हजार से ज्यादा हो गई है. इसमें अकेले में बालाघाट में अकेले 200 से ज्यादा बाघ होने की संभावना है. इसी बीच बालाघाट में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। 

    दरअसल, बालाघाट के कान्हा पेंच कॉरिडोर यानी दक्षिण सामान्य वन मंडल में 18 बाघ और 27 तेंदुए दर्ज हुए है. ऐसे में एमपी को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है. लेकिन जितनी तेजी से बाघों की संख्या बढ़ रही है उतनी ही तेजी से बाघों और मानव के बीच संघर्ष भी बढ़ रहा है। 

    दक्षिण बालाघाट बना बाघों का आशियाना
    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नई रिपोर्ट में एक जानकारी सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर और दक्षिण बालाघाट के वन मंडलों में बड़े मांसाहारी वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है. ऐसे में जिस इलाके को कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क के बीच बाघों के गूजरने का गलियारा नहीं माना जाता है. वह अब सिर्फ एक रास्ता नहीं बल्कि बाघ, तेंदुआ और दूसरे वन्य प्राणियों का अहम इलाका भी बन गया  है.  दूसरी तरफ बाघों की बढ़ती आबादी और सिकुड़ता जंगल कई चिंताएं पैदा कर रहा है. इसमें सड़क निर्माण, माइनिंग, मानव-वन्य संघर्ष और बाघों की टेरिटोरियल फाइट भी शामिल है। 

    जानिए कितने बाघ और कितने तेंदुआ
    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नवंबर 2021 में दक्षिण बालाघाट के लालबर्रा और कटंगी वन क्षेत्रों में 71 कैमरा ट्रैप लगाए गए. इसमें कैमरों की मदद से 215 वर्ग किलोमीटर इलाके में 25 दिनों तक निगरानी रखी गई. इस दौरान बाघों के 262 और 154 फोटो मिले. इसी के आधार पर 18 अलग-अलग बाघ और 27 तेंदुए की पहचान हुई. इसके अलावा कैमरे ने 24 स्तनधारी प्रजातियों को भी कैद किया. इसमें भेड़िया, सियार, रीछ या स्लॉथ बेयर, गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, बार्किंग डियर और साही जैसी कई प्रजातियां शामिल है। 

    क्यों भा रहा बाघों को यह ठिकाना 
    बालाघाट को दो नेशनल पार्कों (कान्हा और पेंच) का कॉरिडोर कहा जाता है. दरअसल, जब बाघों की आबादी कम हुआ करती थी तब यहीं से बाघ गुजरते थे. बालाघाट सीसीएफ गौरव चौधरी ने बताया कि यह इलाका बाघों  के प्रजनन के लिए अनुकूल वातारण मिलता गया. ऐसे में यहाँ पर आबादी भी बढ़ती गई. दूसरी तरफ यह पर बाघों के लिए शिकार और आराम की भी पर्याप्त व्यवस्था है. इसके अलावा जंगल और गांव पास-पास ही है. ऐसे में बाघों को आसान शिकार मिलते हैं. ऐसे में कॉरिडोर ही अब बाघों का ठिकाना बनता गया। 

  • MP में निवेश बढ़ाने CM यादव की पहल तेज, मुंबई में होगा उच्चस्तरीय निवेश संवाद

    MP में निवेश बढ़ाने CM यादव की पहल तेज, मुंबई में होगा उच्चस्तरीय निवेश संवाद

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और औद्योगिक संभावनाओं को देश के प्रमुख उद्योग समूहों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज  8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। द सेंट रेजिस, लोअर परेल में आयोजित होने वाले मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें करेंगे और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा भी करेंगे।

    मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक, वित्तीय और कारोबारी समूहों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत के साथ सीधा संवाद मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर चल रहे संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण चरण होगा। संवाद के दौरान प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक आधार से उद्योग समूहों को अवगत कराया जाएगा।

    निवेशकों से सीधे संवाद पर होगा फोकस

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे । इसके बाद मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर केंद्रित प्रस्तुतिकरण और विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य संबोधन भी निवेशकों के साथ संवाद का प्रमुख केंद्र रहेगा।

    मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, निवेश अनुकूल नीतिगत वातावरण और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक अवसरों को विस्तार से सामने रखा जाएगा। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण देंगे। संवाद में विशेष रूप से यह रेखांकित किया जाएगा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण बड़े बाजारों से जुड़ाव, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अधोसंरचना और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के माध्यम से निवेशकों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जनवरी 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले बढ़ाया जा रहा सीधा संपर्क

    मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधे संपर्क की प्रक्रिया तेज की है। इसी क्रम में मुंबई का यह संवाद महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि समिट से पहले विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों के साथ उनकी आवश्यकताओं, निवेश योजनाओं और प्रदेश में उपलब्ध अवसरों पर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हो।

    मुंबई संवाद में प्रमुख उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे प्रदेश में निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अवसरों और औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ संभावित निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं कि इनमें निवेशकों के प्रस्तावों और उनकी व्यावसायिक आवश्यकताओं को सीधे समझने का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियों और सुविधाओं को सुगम बनाने तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

    मुंबई में होने वाला यह निवेश संवाद मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने और देश के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ प्रदेश के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उद्योगों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर विशेष रूप से केंद्रित रहेगा।

     

  • Vande Bharat vs Amrit Bharat: स्पीड, कोच, दरवाजे और किराये में कितना अंतर? जानें पूरी डिटेल

    Vande Bharat vs Amrit Bharat: स्पीड, कोच, दरवाजे और किराये में कितना अंतर? जानें पूरी डिटेल

    नई दिल्ली
    अमृत भारत एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस दोनों ही भारतीय रेलवे की नई पीढ़ी की ट्रेनें हैं, जिन्हें यात्रा के समय को कम करने और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए डिजाइन किया गया है। 

    दरअसल, पटरियों पर 'वंदे भारत एक्सप्रेस' की सफलता के बाद अब 'अमृत भारत एक्सप्रेस' भी देश के प्रमुख रेल मार्गों पर रफ्तार भर रही है. हालांकि ये दोनों ही ट्रेनें भारतीय रेल के आधुनिक दौर की मिसाल हैं, लेकिन अपनी तकनीक, किराये और सुविधाओं के मामले में एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं. आइए दोनों ट्रेनों के बीच 5 बड़े अंतर जानते हैं. दोनों ट्रेनों की टेक्नोलॉजी, क्लास और लक्षित यात्रियों में बड़ा अंतर है। 

    1. एसी बनाम नॉन-एसी
    वंदे भारत एक्सप्रेस: यह पूरी तरह से एक एयर-कंडीशनर (AC) ट्रेन है. इसमें यात्रियों के लिए केवल 'एसी चेयर कार', 'एक्सीक्यूटिव क्लास' और नए वेरिएंट्स में 'एसी स्लीपर' की सुविधा दी गई है। 

    अमृत भारत एक्सप्रेस: यह एक पूरी तरह से नॉन-एसी ट्रेन है. इसे विशेष रूप से मध्यम वर्ग और आम यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें केवल 'स्लीपर क्लास' और 'अनारक्षित जनरल डिब्बे' शामिल हैं। 

    2. दोनों के इंजन में भी अंतर 
    वंदे भारत: यह भारत की पहली बिना इंजन वाली (Self-Propelled) ट्रेनसेट है. मेट्रो की तर्ज पर इसके डिब्बों के नीचे ही मोटर लगे होते हैं, जिससे यह सेकंडों में बेहद तेज रफ्तार पकड़ लेती है। 

    अमृत भारत: इस ट्रेन में आगे और पीछे दो शक्तिशाली लोकोमोटिव 'WAP-5' इंजन लगाए गए हैं, जो 'पुश-पुल तकनीक' पर काम करते हैं. आगे वाला इंजन ट्रेन को खींचता है और पीछे वाला धक्का देता है, इस तकनीक से ट्रेन बिना झटके के तेजी से स्पीड पकड़ती है और समय की बचत करती है। 

    3. रफ्तार और किराया
    वंदे भारत: 160 से 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम यह ट्रेन प्रीमियम श्रेणी में आती है. इसका किराया राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस के समकक्ष या उससे थोड़ा अधिक है. वंदे भारत मुख्य रूप से इंटरसिटी (200 से 600 किमी) और लंबी दूरी के रूटों को कवर करती है। 

    अमृत भारत: 130 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चलने वाली यह ट्रेन किफायती सफर का बेहतरीन विकल्प है. इसका किराया सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों जितना ही रखा गया है, ताकि आम आदमी भी कम खर्च में आरामदायक लंबी दूरी तय कर सकें. अमृत भारत मुख्य रूप से 800 से 1500+ किमी की लंबी दूरी वाले राज्यों/शहरों को जोड़ती है। 

    4. यात्री सेगमेंट अलग-अलग
    जहां वंदे भारत का मुख्य ध्यान बिजनेस ट्रैवलर्स, कॉर्पोरेट पेशेवरों और कम समय में सफर पूरा करने वाले यात्रियों पर है, वहीं अमृत भारत एक्सप्रेस को मुख्य रूप से देश के प्रवासियों, मजदूरों और आम बजट यात्रियों की लंबी दूरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

    5. खान-पान और बाकी सुविधाएं
    वंदे भारत में ट्रेन खान-पान के लिए ऑन-बोर्ड कैटरिंग/पेंट्री कार सुविधा उपलब्ध है. जबकि अमृत भारत में कैटरिंग शामिल नहीं है, हालांकि बोतल होल्डर, चार्जिंग पॉइंट और पैक्ड स्नैक टेबल उपलब्ध है. वंदे भारत में ऑटोमैटिक दरवाजे हैं, वहीं अमृत भारत में मैन्युअल दरवाजे हैं। 

    भारतीय रेलवे की मानें तो 'वंदे भारत' जहां देश में हाई-स्पीड प्रीमियम सफर का चेहरा है, वहीं 'अमृत भारत एक्सप्रेस' आम नागरिक के लिए बजट-फ्रेंडली, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं का नया पर्याय बनकर उभरी है। 

  • शारदीय नवरात्रि से पहले कर लें घर की सफाई, किचन से मंदिर तक इन चीजों को हटाना न भूलें

    शारदीय नवरात्रि से पहले कर लें घर की सफाई, किचन से मंदिर तक इन चीजों को हटाना न भूलें

    शारदीय नवरात्रि:
    शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। पूरे 9 दिन चलने वाले इस त्योहार में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। वैसे नवरात्रि की तैयारियां कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती हैं। खासकर घर की साफ-सफाई का काम तो जल्दी से जल्दी शुरू हो जाता है। इस दौरान सिर्फ धूल-मिट्टी साफ करना ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसी चीजों को भी हटाना भी जरूरी है जिनका इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं हुआ है। कई बार हम पुरानी और बेकार चीजों को ये सोचकर संभालकर रखते जाते हैं कि ये बाद में काम आएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता और घर में बेकार की चीजें बढ़ती जाती हैं। ऐसे में नवरात्रि के लिए आप भी घर की सफाई करने वाले हैं तो ये चीजें हटाना ना भूलें।

    रसोई से निकालें टूटे हुए बर्तन और सामान
    रसोई में रखे टूटे-फूटे बर्तन, चटके हुए कप-प्लेट, खराब डिब्बे और लंबे समय तक इस्तेमाल ना हुए सामान को अलग कर दें। इनकी वजह से रसोई साफ करने के बाद भी भरी-भरी और अव्यवस्थित नजर आती है। हो सके तो त्योहरों से पहले पुराने डिब्बे बदलकर नए और मजबूत डिब्बों से रिप्लेस कर दें।

    खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान
    पुराने और बेकार चार्जर, खराब इयरफोन, केबल और काम ना करने वाले इलेक्ट्रिक गैजेट्स या दूसरे सामान को यूं ही घर में इक्कठा करने से कोई फायदा नहीं है। ये दोबारा काम भी नहीं आते हैं और फालतू की जगह घेरकर रखते हैं। इसलिए सफाई के दौरान इन्हें भी घर से निकालने का इंतजाम करें।

    पुराने कपड़े और जूते-चप्पल
    अलमारी में कई ऐसे कपड़ों का ढेर लगा हुआ रहता है, जिन्हें कोई पहनता भी नहीं है और वो दोबारा इस्तेमाल भी नहीं होते। ऐसे ही जूते-चप्पल के ढेर भी रखे रहते हैं। सफाई के दौरान इन्हें भी निकालकर अलग करें। इसमें से ठीक सामान को किसी जरूरतमंद को डोनेट किया जा सकता है।

    मंदिर से हटाएं टूटी हुई मूर्तियां
    घर के मंदिर में रखी हुई खंडित मूर्तियों और तस्वीरों को भी अलग कर दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी मूर्तियों को घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। इन्हें किसी मंदिर, धार्मिक स्थान या उचित व्यवस्था के अनुसार विसर्जित कर दें।

    बंद घड़ी और टूटा हुआ सामान
    घर में बंद और टूटी हुई घड़ी रखना अशुभ माना जाता है। साथ ही ये फालतू की जगह भी घेरकर रखती है। इसके अलावा टूटे हुए शोपीस, चटका हुआ शीशा और खराब सामान को भी अलग निकालकर रख दें। इससे घर की सफाई के साथ-साथ अनावश्यक सामान भी कम होगा।

    सूखे हुए खराब पौधे
    अगर आपके घर में पूरी तरह सूख चुके या खराब हो चुके पौधे रखे हैं तो उन्हें भी नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से अलग कर दें। इसके अलावा सूखे हुए फूल या फूलों की माला को उचित व्यवस्था के साथ घर से हटा दें।

    नवरात्रि से पहले हटाएं तामसिक चीजें
    नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से तामसिक चीजें भी हटा देनी चाहिए। अगर आपके घर पुरानी शराब की बोतल इक्कठा हैं, तो उन्हें कबाड़ में दे दें। इसके अलावा रसोई और फ्रिज से मांस, अंडे और प्याज-लहसुन भी निकाल दें।

  • आज का राशिफल 8 अक्टूबर 2026: इन राशियों पर बरसेगी किस्मत, धन-करियर में मिलेगा फायदा

    आज का राशिफल 8 अक्टूबर 2026: इन राशियों पर बरसेगी किस्मत, धन-करियर में मिलेगा फायदा

    मेष
    आज आपको पैसे कमाने के अन्य स्रोतों के बारे में भी सोचना चाहिए। आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा। आज का दिन आपके जीवन में खुशियां लेकर आने वाला है। कुछ कामों में आप आसानी से सफल हो जाएंगे।

    वृषभ
    आज आप बहुत ज्यादा पैसे नहीं बचा पाएंगे। नियमित रूप से बॉस के साथ हल्की-फुल्की बातचीत करना जरूरी है। आज आपको मानसिक शांति पाने पाने में मदद मिलेगी।

    मिथुन
    आज आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। गोल्स के बारे में सोचना आपके लिए फायदेमंद होगा। आप जो कुछ भी चाहते हैं उसे प्राप्त करना हमेशा संभव है, याद रखें। खर्च कम रखें। धन का आगमन होगा।

    कर्क
    आपका परिवार आज आपको सपोर्ट करेगा। आज टीम वर्क पर फोकस करें। कुछ बड़ा हासिल करने के लिए आपको अपने पर्सनल समय का त्याग करना होगा। इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास अपना समय नहीं होगा।

    सिंह
    आपके लिए आज अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाने का अच्छा समय है। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें ताकि आप एक साथ गहरा कनेक्शन स्थापित कर सकें। आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

    कन्या
    आज के दिन खुद पर ध्यान दें। बचत करने की कोशिश करें क्योंकि यह आपके वर्तमान कमाई के स्तर को बनाए रखने में मदद करेगा। लाइफ में बैलेंस बनाकर रखना जरूरी है।

    तुला
    आज आपको आर्थिक और भावनात्मक तौर पर सोच-विचार करने की जरूरत है। आगे की एक नई यात्रा के लिए तैयार हो जाइए। अपने करियर और निजी जीवन को एक साथ संतुलित करने का प्रयास करें।

    वृश्चिक
    आज अपने पार्टनर के साथ उन मुद्दों पर बात करें, जो आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा कर रहे हैं। आप किसी ऐसे रिस्क की ओर बढ़ सकते हैं, जो आपकी वित्तीय स्थिति को नुकसान दे सकता है।

    धनु
    आज आपके सभी काम पूरे होंगे। आपका निजी और व्यावसायिक जीवन संतुलित रहेगा और आपको कुछ नया करने का मौका भी मिलेगा। दूसरी ओर, आपको अपने रिश्ते में रोमांस बनाए रखने की जरूरत है।

    मकर
    अगर आप अपने रिश्ते को लेकर बहुत गंभीर हैं तो नेक्स्ट लेवल प्लान करने का यह समय शुभ है। आज छोटी बचत से शुरुआत करें और पता करें कि क्या आप अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति को मैनेज करने में सक्षम हैं?

    कुंभ
    अपने पार्टनर को बेहतर तरीके से जानने के लिए साथ में कुछ अच्छा समय बिताना बेहतर होगा। आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी लेकिन सेविंग्स जरूर करें। आप जीवन में खुश और संतुष्ट रहें।

    मीन
    आज के दिन आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी रहेगी। निवेश के अवसरों के लिए यह अच्छा है। स्टॉक एक्स्पर्ट्स के साथ बात-चीत करते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है। सेहत पर ध्यान दें।

  • चेन्दरू’ राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार के लिए बढ़ाई गई आवेदन करने की अंतिम तिथि

    चेन्दरू’ राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार के लिए बढ़ाई गई आवेदन करने की अंतिम तिथि

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने और सतत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार-2026’ के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

    राज्य में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं समर्पित योगदान को पहचान और सम्मान देने के उद्देश्य से यह पुरस्कार प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार एवं आजीविका से जोड़ने के साथ होमस्टे, स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और समुदाय आधारित पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    राज्योत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस अलंकरण समारोह में मिलेगा सम्मान

    ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ प्रतिवर्ष राज्योत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस अलंकरण समारोह में प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में दीर्घकालीन एवं समर्पित योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से दिया जाएगा। यह सम्मान किसी व्यक्ति अथवा संस्था को जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जाएगा।

    छह प्रमुख थीम में किया जाएगा कार्यों का मूल्यांकन

    पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों में ग्रामीण पर्यटन से जुड़े कार्यों का मूल्यांकन छह प्रमुख थीम के अंतर्गत किया जाएगा। इनमें एथनिक टूरिज्म, ईको टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन, हेरिटेज टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म तथा मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म शामिल हैं।

    मूल्यांकन के दौरान ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों के विकास, होमस्टे को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने, पर्यटकों को उपलब्ध कराए जा रहे विशिष्ट अनुभवों, पर्यटन स्थलों एवं धरोहरों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी जैसे पहलुओं को विशेष महत्व दिया जाएगा। संबंधित क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में आए बदलाव के साथ आवेदक द्वारा अतीत और वर्तमान में किए गए कार्यों एवं उनके प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।

    व्यक्ति और संस्था दोनों कर सकते हैं आवेदन

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में कार्यरत पात्र व्यक्ति अथवा संस्था पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवा, उल्लेखनीय उपलब्धियों और समर्पित प्रयासों को महत्व दिया जाएगा।

    आवेदन के साथ देना होगा कार्यों और उपलब्धियों का विवरण

    आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में पूर्ण परिचय, पता एवं फोटोग्राफ के साथ छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवास का प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड की सत्यापित छायाप्रति प्रस्तुत करनी होगी। इसके साथ ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण, प्राप्त अन्य सम्मानों की जानकारी तथा उपलब्ध होने पर प्रकाशित सामग्री और समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित समाचारों की सत्यापित प्रतियां भी संलग्न की जा सकती हैं। आवेदक को पुरस्कार स्वीकार करने की लिखित सहमति भी देनी होगी।

    छह सदस्यीय जूरी करेगी प्रविष्टियों का परीक्षण

    पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण निर्धारित जूरी द्वारा किया जाएगा। जूरी की कार्यवाही गोपनीय रहेगी और चयन के संबंध में अपील मान्य नहीं होगी। शासकीय सेवकों के आवेदन के मामले में सामान्य प्रशासन विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

    15 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेजना होगा आवेदन

    पुरस्कार के लिए निर्धारित प्रारूप में पूर्ण आवेदन पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, द्वितीय तल, उद्योग भवन, रिंग रोड नंबर-1, रायपुर (छत्तीसगढ़)-492001 के पते पर भेजना होगा। आवेदन 15 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित पते पर पहुंचना अनिवार्य है। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त प्रविष्टियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।

    पुरस्कार एवं आवेदन प्रक्रिया के संबंध में अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 73545-80006 अथवा ई-मेल scmpctb@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे व्यक्तियों एवं संस्थाओं से निर्धारित समय-सीमा में अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत करने का आह्वान किया है। ‘चेन्दरू’ पुरस्कार के माध्यम से ऐसे प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान मिलेगी, जो गांवों की संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं को सहेजते हुए पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका और सतत विकास से जोड़ रहे हैं।

  • नोनी सशक्तिकरण योजना ने अंकिता के सपनों को दिए पंख, शिक्षा के लिए मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

    नोनी सशक्तिकरण योजना ने अंकिता के सपनों को दिए पंख, शिक्षा के लिए मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

    रायपुर

    आर्थिक परिस्थितियां कमजोर हों, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला और शासन की योजनाओं का सहारा मिले तो शिक्षा के सपनों को नई उड़ान मिल सकती है। गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिले के नगर पालिका परिषद गौरेला के वार्ड क्रमांक 15 की निवासी कुमारी अंकिता रोहणी की कहानी भी इसी संकल्प और उम्मीद को बयां करती है। निर्माण श्रमिक परिवार की बेटी अंकिता अपनी पढ़ाई पूरी कर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। उनके इस सपने को मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना से मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता ने मजबूती दी है।

    अंकिता के पिता  रवि रोहणी निर्माण श्रमिक हैं और श्रम विभाग में पंजीकृत हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच परिवार के लिए घर की जरूरतों के साथ बेटी की शिक्षा का खर्च उठाना आसान नहीं था। इसके बावजूद परिवार ने अंकिता की पढ़ाई में आर्थिक परिस्थितियों को बाधा नहीं बनने दिया और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी शिक्षा जारी रखा।

    इसी बीच श्रमिक परिवारों की बेटियों के सशक्तिकरण के लिए संचालित नोनी सशक्तिकरण योजना की जानकारी मिलने पर अंकिता को योजना से जोड़ा गया। पात्रता और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें योजना के तहत 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। यह राशि अंकिता और उनके परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आई।

    शिक्षा की जरूरतों पर खर्च कर रही हैं सहायता राशि

    अंकिता इस सहायता राशि का उपयोग अपनी शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं। पढ़ाई से संबंधित खर्चों के लिए आर्थिक सहयोग मिलने से परिवार पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम हुआ है। वहीं अंकिता भी अब अधिक आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा रही हैं।

    अंकिता बताती हैं कि शासन से मिली सहायता उनके लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं है, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी है। उनका सपना शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनकर परिवार तथा समाज का नाम रोशन करने का है।

    श्रमिक परिवारों की बेटियों को मिल रहा आर्थिक संबल

    नोनी सशक्तिकरण योजना श्रमिक परिवारों की बेटियों को आर्थिक संबल प्रदान कर उनके बेहतर भविष्य की राह आसान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सहायता मिलने से उनकी शिक्षा सहित भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में परिवारों को सहयोग मिल रहा है। योजना के माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी सार्थक प्रयास हो रहे हैं।

    अंकिता की कहानी बताती है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर जरूरतमंद परिवार तक पहुंचने से न केवल आर्थिक कठिनाइयां कम होती हैं, बल्कि युवाओं के सपनों और आत्मविश्वास को भी नई मजबूती मिलती है।

    योजना के तहत मिली सहायता से उत्साहित अंकिता ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस मदद से उनकी शिक्षा के सपने को मजबूती मिली है। अब वह मन लगाकर पढ़ाई करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती हैं और भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहारा बनना चाहती है।