Author: NewseDay

  • Jaguar की नई इलेक्ट्रिक कार Type-01 लॉन्च, 720KM रेंज के साथ मिलेगी अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग

    Jaguar की नई इलेक्ट्रिक कार Type-01 लॉन्च, 720KM रेंज के साथ मिलेगी अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग

     नई दिल्ली
    जगुअर ने अपनी इलेक्ट्रिक कार टाइप-01 (Jaguar Type 01) से पर्दा उठा दिया है. ये ब्रिटिश ब्रांड की नई शुरुआत है. 2024 में कंपनी ने जगुअर टाइप-00 को पेश किया था और टाइप-01 उससे काफी ज्यादा इंस्पायर्ड है. इस कार को कंपनी ने जगुआर इलेक्ट्रिक आर्किटेक्चर पर तैयार किया है। 

    टाइप-01 कंपनी की दूसरी कारों से काफी अलग डिजाइन के साथ आती है. ये लग्जरी मार्केट को टार्गेट करता है. इस कार में 1000 बीएचपी से ज्यादा पावर और 720 किलोमीटर तक की क्लेम्ड रेंज मिलेगी. इसमें 4 लोगों के लिए स्पेस दिया गया है. आइए जानते हैं इस कार की खास बातें। 

    बैटरी और रेंज 
    टाइप-01 में दमदार परफॉर्मेंस वाले हार्डवेयर के साथ आती है. इसमें तीन मोटर का सेटअप दिया गया है, जिसमें दो रियर साइड में और एक फ्रंट में दिया गया है. ये सेटअप 1030 एचपी की पावर और 1365 एनएम तक का टॉर्क ऑफर करता है. इस कार का वजन लगभग 2.7 टन है। 

    ये कार 3.2 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. कार में 120kWh की बैटरी मिलती है, जिसकी डब्लूएलटीपी क्लेम्ड रेंज 720 किलोमीटर है. जगुआर टाइप-01 को सिर्फ 13 मिनट चार्ज करके 321 किलोमीटर का सफर तय किया जा सकता है. 10 से 80 परसेंट तक चार्ज को चार्ज होने में सिर्फ 22 मिनट का वक्त लगता है। 

    ये कार चार अलग-अलग जोन में बटी हुई है. डैशबोर्ड पर कार के बोनट वाला ही पैटर्न देखने को मिलेगा. कार में फिजिकल बटन्स नहीं दी गई हैं. सेंटर टचस्क्रीन से ही क्लाइमेट कंट्रोल और दूसरे फीचर्स का एक्सेस मिलेगा. इस स्क्रीन को ऐसे प्लेस किया गया है कि ड्राइवर को इसे इस्तेमाल करने में दिक्कत नहीं हो। 

    कार में 24 इंच का ओएलईडी डिस्प्ले दिया गया है. जगुआर की सेल्स में तेजी से गिरावट आई है और इसे रोकने के लिए कंपनी को नए कंज्यूमर्स को जोड़ना होगा. यही वजह है कि कंपनी नए डिजाइन के साथ एंट्री कर रही है. कार की कीमतों को लेकर कंपनी ने कोई ऐलान नहीं किया है। 

    जगुआर टाइप-01 की कीमत रोल्स रॉयस जितनी तो नहीं होगी, लेकिन ब्रांड की पुरानी फ्लैगशिप कार से ज्यादा होगी. इसकी डिलीवरी मिड 2027 में शुरू हो सकती है. ये कार भारत में भी लॉन्च होगी. जहां इसकी कीमत 2 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है। 

  • पटना में प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर बड़ा फैसला, टैक्स के दायरे से बाहर संपत्तियों पर दोगुना जुर्माना

    पटना में प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर बड़ा फैसला, टैक्स के दायरे से बाहर संपत्तियों पर दोगुना जुर्माना

    पटना
    संपत्ति कर के दायरे से बाहर रहकर अब तक कर नहीं देने वाले संपत्ति मालिकों पर पटना नगर निगम जनवरी 2027 से शिकंजा कसने जा रहा है।निगम के डोर-टू-डोर सर्वेक्षण में चिह्नित ऐसी संपत्तियों का 31 दिसंबर 2026 तक कर निर्धारण नहीं कराने पर जनवरी से 100 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही बकाया संपत्ति कर पर अक्टूबर 2026 से 1.5 प्रतिशत मासिक पेनाल्टी भी लागू कर दी गई है।

    नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सभी अंचलों को 31 दिसंबर तक वार्डवार विशेष कर निर्धारण शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है।

    इन शिविरों में नागरिक संपत्ति कर का नया निर्धारण कराने के साथ कर पुनर्निर्धारण, कर में संशोधन और बकाया कर का भुगतान करा सकेंगे। खास बात यह है कि नागरिक अपने नजदीकी किसी भी शिविर में पहुंचकर इन सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    दो दिन में 60 से अधिक संपत्तियों का नया निर्धारण
    पहले चरण में पाटलिपुत्र और नूतन राजधानी अंचल में वार्डवार विशेष शिविर शुरू किए गए हैं। शुरुआती दो दिनों में दोनों अंचलों के शिविरों में 60 से अधिक संपत्तियों का नया कर निर्धारण किया गया।

    16 संपत्तियों में कर संशोधन और छह संपत्तियों का पुनर्निर्धारण भी हुआ। शिविरों के माध्यम से 211 संपत्तियों से करीब 14 लाख रुपये संपत्ति कर की वसूली की गई।
    सर्वे में सामने आईं कर से बाहर संपत्तियां

    नगर निगम के डोर-टू-डोर सर्वेक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जो अभी तक संपत्ति कर के दायरे में नहीं थीं। निगम अब इन संपत्तियों के मालिकों को शिविरों के माध्यम से कर निर्धारण कराने का अवसर दे रहा है।

    31 दिसंबर तक कर निर्धारण कराने पर संपत्ति मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कर जमा करने का मौका मिलेगा। इसके बाद निगम स्तर से कार्रवाई और जुर्माने का प्रविधान लागू होगा।

    इन जगहों पर लगेंगे शिविर
    सात अक्टूबर को नूतन राजधानी अंचल में सब्जपुरा के वार्ड-3 स्थित वार्ड पार्षद कार्यालय और पाटलिपुत्र अंचल में अशोक राजपथ स्थित गेट संख्या-93, वार्ड-22ए में शिविर लगेगा।

    आठ से 10 अक्टूबर तक नूतन राजधानी अंचल में हरनीचक के वार्ड-11 स्थित वार्ड पार्षद कार्यालय तथा पाटलिपुत्र अंचल में कुर्जी में बैंक आफ बड़ौदा के पास वार्ड-22बी स्थित वार्ड पार्षद कार्यालय में शिविर आयोजित होगा।

    नहीं कराया निर्धारण तो हो सकती है कुर्की-जब्ती
    नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में कर निर्धारण नहीं कराने वाले संपत्ति मालिकों पर बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

    इसमें नियमानुसार कुर्की-जब्ती, बैंक खाते को फ्रीज करने, संपत्ति की बिक्री और गिरफ्तारी वारंट समेत अन्य कार्रवाई का प्रविधान है।

    निगम ने संपत्ति मालिकों से अंतिम समय का इंतजार नहीं करने और 31 दिसंबर से पहले विशेष शिविर में कर निर्धारण कराने की अपील की है।

     

     

  • विदेश में फिर नीलाम होगा चंडीगढ़ का विरासत फर्नीचर, 10 अक्टूबर को दो कुर्सियों पर लगेगी बोली

    विदेश में फिर नीलाम होगा चंडीगढ़ का विरासत फर्नीचर, 10 अक्टूबर को दो कुर्सियों पर लगेगी बोली

     चंडीगढ़
     चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर की विदेशों में नीलामी का मामला फिर गरमा गया है। शहर की प्रशासनिक इमारतों में इस्तेमाल किए गए और प्रसिद्ध वास्तुकार पियरे जेनरे द्वारा डिजाइन किए गए फर्नीचर की विदेशों में नीलामी को लेकर एडवोकेट अजय जग्गा ने यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेरिस में प्रस्तावित नीलामी में संबंधित फर्नीचर बिक नहीं पाया, लेकिन अब 10 अक्टूबर को नीदरलैंड में पियरे जेनरे की डिजाइन की दो कुर्सियों की नीलामी प्रस्तावित है।

    जग्गा ने सात अक्टूबर को प्रशासक को भेजे पत्र में मांग की है कि यदि अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है तो तत्काल दर्ज की जाए, ताकि विदेश मंत्रालय के माध्यम से संबंधित देश के अधिकारियों और नीलामी घर को नीलामी रोकने के लिए कहा जा सके। उनका तर्क है कि बिना एफआईआर के राजनयिक स्तर पर कार्रवाई करने में दिक्कत आती है।

    नीलामी कैटलॉग में चंडीगढ़ का स्पष्ट उल्लेख नीदरलैंड के हेसिन्क फाइन आर्ट ऑक्शनरिस की नीलामी में लॉट नंबर 28 में पियरे जेनरे की दो एक्स-लेग आर्मचेयर शामिल हैं। इनकी अनुमानित कीमत 5,000 से 7,000 यूरो और शुरुआती बोली 3,000 यूरो बताई गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैटलॉग में इनकी प्रोवेनेंस स्पष्ट रूप से फ्रॉम द एडमिनिस्ट्रैटिव बिल्डिंग्स, चंडीगढ़, इंडिया लिखी गई है।

    इसी तरह पेरिस के Artcurial की नीलामी में लॉट नंबर 73 में पियरे जेनरे की ‘चेयर वी टाइप केन सीट, केन बैक’ शामिल थी। इसकी अनुमानित कीमत 4,000 से 6,000 यूरो थी और कैटलॉग में प्रोवेनेंस एडमिनिस्ट्रैटिव बिल्डिंग्स, चंडीगढ़ दर्ज था। जग्गा के अनुसार पेरिस की नीलामी में यह वस्तु न तो बिकी और न ही नीलाम हो पाई।

    जांच हो कि फर्नीचर चंडीगढ़ से विदेश कैसे पहुंचा
    जग्गा ने प्रशासन से मांग की है कि नीलामी घरों से इन वस्तुओं की पूरी प्रोवेनेंस हिस्ट्री, खरीद-बिक्री के दस्तावेज, निर्यात-आयात और कस्टम दस्तावेज तथा स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड मांगे जाएं। साथ ही यह भी जांच हो कि ये वस्तुएं चंडीगढ़ की प्रशासनिक इमारतों से कब, किसकी अनुमति से और किस माध्यम से बाहर गईं।

    उन्होंने कहा कि मामला केवल फर्नीचर की खरीद-बिक्री का नहीं है। पियरे जेनरे का फर्नीचर चंडीगढ़ के निर्माण और इसकी आधुनिक वास्तुकला की विरासत से सीधे जुड़ा है। ऐसे में प्रशासनिक भवन में इस्तेमाल हुआ कोई फर्नीचर सामान्य व्यावसायिक वस्तु नहीं माना जा सकता।

    विरासत फर्नीचर का डेटाबेस बनाने की मांग
    जग्गा ने चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर के संरक्षण के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की भी मांग की है। इसमें प्रशासनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध फर्नीचर की सूची तैयार करने, विदेशों में पहुंच चुके या गायब विरासत सामान का केंद्रीय डेटाबेस बनाने तथा जरूरत पड़ने पर इंटरपोल, कस्टम विभाग, संग्रहालयों और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ समन्वय करने का सुझाव दिया है।

    उन्होंने प्रशासक से मांग की है कि हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल (HIPC) को प्रभावी रूप से सक्रिय किया जाए और जिन वस्तुओं पर चंडीगढ़ का वैध स्वामित्व साबित हो, उनकी वापसी और पुनर्स्थापना (रिपैट्रिएशन) के लिए कानूनी और राजनयिक कार्रवाई की जाए।

    जग्गा ने संविधान के अनुच्छेद 49 का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय महत्व की कला और ऐतिहासिक वस्तुओं की सुरक्षा राज्य का दायित्व है। इसलिए नीदरलैंड की नीलामी से पहले कार्रवाई करना जरूरी है।

     

  • $1.05 ट्रिलियन की संपत्ति के साथ मस्क बने कई देशों से अमीर, सिर्फ 20 देशों की GDP उनसे आगे

    $1.05 ट्रिलियन की संपत्ति के साथ मस्क बने कई देशों से अमीर, सिर्फ 20 देशों की GDP उनसे आगे

    वाशिंगटन 

    एलन मस्क का नेटवर्थ अब 1.05 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। दुनिया के सबसे बड़े रईस मस्क अब ताइवान, बेल्जियम, स्वीडन, इजरायल, अर्जेंटीना, सिंगापुर, आस्ट्रिया, यूएई जैसे सैकड़ों देशों से भी अमीर हो गए हैं। ये वो देश हैं, जिनकी जीडीपी IMP के मुताबिक 1 ट्रिलियन डॉलर से कम है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक इनकी दौलत में एक साल में 125 पर्सेंट यानी 583 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है।

    मस्क की संपत्ति एक ही साल में थाइलैंड की जीडीपी 580 अरब डॉलर से अधिक बढ़ गई। यही नहीं पिछले एक साल में मस्क ने जितना कमाया है, उतने में कोलंबिया (जीडीपी 539.53 अरब डॉलर), वियतनाम (जीडीपी 527.27 अरब डॉलर), मलेशिया (जीडीपी 516.43 अरब डॉलर), फिलीपींस (जीडीपी 512.22 अरब डॉलर), बांग्लादेश ( जीडीपी 510.71 अरब डॉलर ) और डेनमार्क ( जीडीपी 503.77 अरब डॉलर) में से किसी एक देश का सालभर का खर्च उठा सकते हैं। इसके बावजूद उनके पास कई अरब डॉलर शॉपिंग के लिए बच भी जाएंगे।

    एलन मस्क की कमाई का राज
    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, सोमवार को मस्क का नेटवर्थ करीब 62.6 अरब डॉलर बढ़कर 977 बिलियन डॉलर हो गया था। मंगलवार को इनकी दौलत 5.36 अरब डॉलर बढ़ गई। यानी दो दिन में मस्क ने करीब 68 अरब डॉलर पीट दिए। इसकी उछाल की वजह उनकी दोनों कंपनियों टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरों में तेजी है। अक्टूबर की शुरुआत से अब तक स्पेसएक्स के शेयर करीब 13 प्रतिशत से अधिक और टेस्ला के शेयर करीब 7 प्रतिशत चढ़ चुके हैं।

    एलन मस्क से अमीर केवल 20 देश
    मस्क से अमीर केवल अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, भारत, फ्रांस, इटली, रूस, ब्राजील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको, स्पेन, कोरिया, तुर्किए, इंडोनिया, सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड, और पोलैंड है। आईएमएफ के अनुसार अमेरिका की जीडीपी अभी 32.38 ट्रिलियन डॉलर है तो पोलैंड की 1.13 ट्रिलियलन डॉलर।

    एलन मस्क किन देशों से अमीर
    एलन मस्क अभी उन सभी देशों से अमीर हैं, जिनकी जीडीपी इनके नेटवर्थ से कम है। कुछ प्रमुख देशों की बात करें तेा IMF के मुताबिक ताइवान की जीडीपी अभी 976.72 अरब डॉलर है। जबकि, आयरलैंड की जीडीपी 779.38 अरब डॉलर। बेल्जियम की जीडीपी भी एलन मस्क के नेटवर्थ से अभी कम है। इसकी जीडीपी 776.73 अरब डॉलर है।

    स्वीडन की जीडीपी 760.48 अरब डॉलर है। इजरायल की जीडीपी 719.85 अरब डॉलर, अर्जेंटीना की 688.38 अरब डॉलर, सिंगापुर की 659.57 अरब डॉलर, ऑस्ट्रिया की 623.72 अरब डॉलर, यूएई की 621.55 अरब डॉलर, नॉर्वे की 599.41 अरब डॉलर है।

     

  • नाना पाटेकर ने दुनिया को कहा अलविदा, गोवा में हुआ निधन; PM मोदी ने जताया शोक

    नाना पाटेकर ने दुनिया को कहा अलविदा, गोवा में हुआ निधन; PM मोदी ने जताया शोक

    मुंबई 
    8 अक्टूबर 2026 को हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोवा स्थित उनके घर पर सुबह उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया. अस्पताल में करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की. नाना पाटेकर ने पर्दे पर जितनी दमदार पहचान बनाई, निजी जिंदगी में वह उतने ही सादे नजर आते थे। 

    नाना पाटेकर का निधन, ऐसा था उनका सादा लाइफस्टाइल
    महंगे ब्रांड और दिखावे के बजाय खेती, गांव, घर का खाना और साधारण कपड़े उनकी पसंद का हिस्सा रहे. यही वजह है कि उनके निधन के बाद उनकी इस जमीन से जुड़ी जिंदगी को भी याद किया जा रहा है।

    पीएम मोदी ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि बहुत कम कलाकारों में नाना पाटेकर जैसी गहराई, अपनी अलग पहचान और खास मौजूदगी थी. उन्होंने हर किरदार में शानदार विविधता और रचनात्मकता दिखाई और ऐसे किरदार दिए, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। 
    पीएम मोदी ने कहा कि नाना पाटेकर अपने बेबाक और साफ विचारों के लिए भी जाने जाते थे और जो सही मानते थे, उसे कहने से कभी नहीं हिचकते थे. हिंदी और मराठी सिनेमा में उनका योगदान बहुत बड़ा था. उनके निधन से एक गहरी कमी पैदा हो गई है. पीएम मोदी ने उनके परिवार, दोस्तों और उनके अनगिनत प्रशंसकों के प्रति संवेदना जताई और उनकी आत्मा की शांति की कामना की.

    अमित शाह ने नाना पाटेकर के निधन पर जताया दुख
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता नाना पाटेकर के निधन को कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया. उन्होंने कहा कि पांच दशकों तक नाना पाटेकर ने अपने सहज अभिनय और दमदार संवाद अदायगी से दर्शकों के दिल पर अमिट छाप छोड़ी. गंभीर सामाजिक विषय हों या हास्य-व्यंग्य, उन्होंने जिस किरदार को निभाया, उसे जीवंत बना दिया। 

    अमित शाह ने कहा कि ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए सूखे से जूझ रहे किसान परिवारों की सेवा करना हो या सीमा पर जाकर जवानों का हौसला बढ़ाना, नाना पाटेकर ख्याति के शिखर पर पहुंचने के बाद भी अपनी मिट्टी से जुड़े रहे। 

    अमित शाह ने कहा कि जब भी नाना से मिलने का मौका मिला, उनकी सरलता और साफगोई ने हमेशा प्रभावित किया. अमित शाह ने शोकाकुल परिवार और प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति देने और दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। 

     

     

    खेती और गांव से था खास लगाव
    नाना पाटेकर का खेती से जुड़ाव काफी पुराना था. एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने पुणे के पास अपनी जमीन पर खेती करने की बात बताई थी. वहां चावल, मूंगफली, लहसुन और प्याज जैसी फसलें उगाई जाती थीं. उन्होंने खेती को अपने पसंदीदा कामों में शामिल बताया था. फार्महाउस पर उनका जुड़ाव केवल फसलों तक सीमित नहीं था. पुरानी रिपोर्टों और उनके इंटरव्यू में गाय-बैल समेत पशुओं की देखभाल का भी जिक्र मिलता है. कोविड के दौर में भी उन्होंने फार्महाउस पर रहने और वहां के जीवन का अनुभव शेयर किया था। 

    योगी आदित्यनाथ का ट्वीट
    यूपी के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा, 'मशहूर अभिनेता, सशक्त थिएटर कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी पद्म श्री नाना पाटेकर जी का निधन कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अपनी बेहतरीन अदाकारी से उन्होंने भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की। भगवान श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।'

     

    खुद खाना बनाना पसंद करते थे
    नाना पाटेकर की सादगी उनके खान-पान में भी नजर आती थी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें खाना बनाना पसंद है. उन्होंने यह तक कहा था कि अगर वह अभिनेता नहीं बनते तो शायद एक छोटा होटल खोलते. बाद के वर्षों में गांव में रहते हुए भी वह खुद खाना बनाने और अपने रोजमर्रा के काम करने की बात करते रहे. यानी उनका फार्महाउस उनके लिए केवल आराम करने की जगह नहीं था, बल्कि एक ऐसी जगह थी जहां वह सामान्य जीवन जीना पसंद करते थे। 

    कपड़ों में भी दिखती थी सादगी
    नाना पाटेकर के पहनावे की बात करें तो उनका अंदाज बॉलीवुड के सामान्य ग्लैमर से काफी अलग रहा. वह अक्सर साधारण कुर्ता-पायजामा या खादी जैसे आरामदायक पारंपरिक कपड़ों में नजर आते थे. गोवा में 4 अक्टूबर 2026 को उनकी आखिरी सार्वजनिक मौजूदगी की तस्वीरों और वीडियो में भी वह सफेद कुर्ते और सफेद गमछे में दिखाई दिए थे. उनके लिए कपड़े किसी स्टेटस सिंबल से ज्यादा आराम और जरूरत की चीज रहे. यही सादगी उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व की पहचान बन गई थी। 

    लग्जरी से ज्यादा सीमित जरूरतों पर भरोसा
    नाना पाटेकर ने पुराने इंटरव्यू में अपनी जिंदगी को लेकर कहा था कि वह लग्जरी लाइफ नहीं जीते और उनकी जरूरतें सीमित हैं. वह महंगी चीजों पर खर्च करने के बजाय जरूरतमंदों की मदद को अधिक महत्व देने की बात भी करते रहे. किसान परिवारों की मदद और सामाजिक कामों से उनका जुड़ाव भी सार्वजनिक रूप से सामने आता रहा है. नाम फाउंडेशन के जरिए उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों से जुड़े राहत कार्यों में भी योगदान दिया था। 

    नाना पाटेकर की सादगी क्यों याद रहेगी?
    नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी फिल्मों और दमदार संवादों की चर्चा स्वाभाविक है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी का यह पहलू भी कम दिलचस्प नहीं है. एक ऐसे दौर में जब सेलिब्रिटी लाइफस्टाइल अक्सर महंगी कारों, डिजाइनर कपड़ों और लग्जरी छुट्टियों से जोड़ा जाता है, नाना का खेत, पशु, घर का खाना और साधारण पहनावा उनकी अलग पसंद को दिखाता है। 

  • MP में मतदाता सूची सुधार का बड़ा अभियान, 31 लाख हटे नामों की होगी जांच; मजदूरों-बेघरों के लिए विशेष कैंप

    MP में मतदाता सूची सुधार का बड़ा अभियान, 31 लाख हटे नामों की होगी जांच; मजदूरों-बेघरों के लिए विशेष कैंप

    भोपाल
     चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को सही और अपडेट करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत राज्य भर में 74,000 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) 31 अक्टूबर तक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट से बाहर हुए पात्र नागरिकों के नाम दोबारा जोड़ना और हटाई गई प्रविष्टियों का सत्यापन करना है।

    31.11 लाख कटे नामों का दोबारा होगा सत्यापन
    प्रशासन द्वारा पहले मतदाता सूची से हटाए गए 31 लाख 11 हजार नामों का पुनः सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जा रहा है। इनमें लगभग 14 लाख ऐसे नाम हैं जो या तो दो जगह दर्ज थे या फिर संबंधित व्यक्तियों का निधन हो चुका है। वहीं लगभग 17,11,302 ऐसे मतदाता हैं जो स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं या पते पर नहीं मिले थे। यदि वे वास्तव में स्थानीय निवासी हैं और मतदान करते हैं, तो उनके नाम सूची में फिर से जोड़े जाएंगे।

    युवाओं और वंचित वर्गों के लिए दी गई छूट
    1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नवयुवक अब बिना किसी डिक्लेरेशन के एडवांस में फॉर्म-6 भर सकते हैं। मजदूर बस्तियों, रैन बसेरों (नाइट शेल्टर) और बेघर नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज करने के लिए अलग से विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

    राजनीतिक दलों के साथ साझा होंगी लिस्ट
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद ज़मीनी स्तर पर काम में तेज़ी ला दी गई है। बीएलओ को हर सप्ताह 20 से 25 घरों तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तैयार अंतिम सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए (Booth Level Agents) के साथ साझा किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

  • MP में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने वाली तीसरी लाइन अटकी, जबलपुर-इटारसी प्रोजेक्ट से मिलेगा बड़ा फायदा

    MP में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने वाली तीसरी लाइन अटकी, जबलपुर-इटारसी प्रोजेक्ट से मिलेगा बड़ा फायदा

    जबलपुर
    एक ओर जबलपुर मंडल से जुड़ने वाले रेलखंडों पर मल्टीट्रैकिंग की रफ्तार बढ़ रही है, वहीं मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी के महत्वपूर्ण रेलमार्ग की तीसरी लाइन की योजना अभी अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रही है। इस दोहरी लाइन वाले करीब 519 किमी लंबे रेलखंड पर प्रतिदिन औसतन दो से ज्यादा यात्री और मालगाड़ियों का संचालन होता है।

    ट्रेनों की बढ़ती संख्या के मुकाबले ट्रैक क्षमता कम होने से कई बार यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों की समयबद्धता पर पड़ रहा है। ट्रेनों की धीमी चाल और विलंब के कारण यात्रियों को समस्या से जूझना पड़ रहा है।

    रेल बोर्ड भेजा गया डीपीआर
    पश्चिम मध्य रेल की ओर से मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी रेलखंड की तीसरी लाइन के लिए सर्वे कर डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा चुकी है। डीपीआर परीक्षण के लिए रेल बोर्ड भेजी गई है, लेकिन अंतिम स्वीकृति अभी बाकी है।

    इसके चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। यह रेलमार्ग कोलकाता-मुंबई के पुराने और महत्वपूर्ण रेल रूट का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश और बिहार को महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत से जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। जबलपुर मंडल के इस हिस्से पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी लगातार दबाव रहता है।

    अतिरिक्त ट्रैक नहीं होने के कारण एक ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी ट्रेन को रोकने की स्थिति कई जगह बनती है।

    कनेक्टिंग रूट पर मल्टीट्रैकिंग तेज
    मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी से जुड़े रेलखंडों पर मल्टीट्रैकिंग का काम आगे बढ़ चुका है। मानिकपुर-प्रयागराज के बीच उत्तर मध्य रेलवे ने तीसरी लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण पूरा कर निर्माण शुरू कर दिया है। कटनी-बीना रेलखंड पर तीसरी लाइन तैयार हो चुकी है।

    चौथी लाइन को मिली स्वीकृति
    कटनी-शहडोल-अनूपपुर रेलखंड पर चौथी लाइन को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं इटारसी-भोपाल और इटारसी-नागपुर रेलखंड पर भी चौथी लाइन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में बीच के मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी हिस्से की तीसरी लाइन अभी स्वीकृति के इंतजार में है।

     

  • ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी, MP स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर्स को दिए खास निर्देश

    ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी, MP स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर्स को दिए खास निर्देश

    भोपाल

    मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पाटने के लिए एक अहम और सख्त कदम उठाया है। इस साल राज्यभर के जिला और ब्लॉक-स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर 3,118 बॉन्डेड डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई है। विभाग का मुख्य संदेश बिल्कुल साफ है- 'डॉक्टरों को नौकरी छोड़ने नहीं देना है।' इसके लिए प्रशासन ने सभी जिला कलेक्टरों को मैदान में उतरकर इन युवा डॉक्टरों की शुरुआती समस्याओं को समझने और उन्हें पूरी सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

    बॉन्ड नियमों के पालन में आया रिकॉर्ड उछाल
    पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले इस बार अनिवार्य बॉन्ड प्रणाली का अनुपालन काफी बेहतर रहा है:

        इस साल कुल 3,118 डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई।

        इनमें से 2,601 डॉक्टर (यानि 83% से अधिक) पिछले हफ्ते तक अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर चुके हैं।

        तुलनात्मक रूप से देखें तो साल 2025 में यह आंकड़ा मात्र 39.5% और 2024 में 42% था।

        इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों के जुड़ने से राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी का आंकड़ा जो पहले करीब 5,000 था, अब घटकर लगभग 2,000 के आसपास रह जाने की उम्मीद है।

    नई चुनौतियों से पार पाना बड़ी प्राथमिकता
    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस समय सबसे बड़ी चिंता इन डॉक्टरों के रिटेंशन (नौकरी में टिके रहना) को लेकर है। इनमें से अधिकांश युवा डॉक्टर पहली बार बड़े शहरों से बाहर दूरदराज और आदिवासी जिलों में काम करने पहुंचे हैं। वहां उन्हें आवास, भोजन, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर कई तरह की शुरुआती परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग का मानना है कि यदि शुरुआती महीनों में इन्हें एक सकारात्मक और अनुकूल माहौल मिल जाए, तो उनके नौकरी छोड़ने के मामलों में भारी कमी आएगी।

    जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील
    इस दिशा में कलेक्टर्स को विशेष रूप से ब्रीफ किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में डॉक्टरों के रहने और काम करने की स्थितियों की समीक्षा के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करें। इसके अलावा, विभाग ने स्थानीय विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क साधा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके समर्थक या स्थानीय लोग डॉक्टरों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं, बल्कि एक सकारात्मक और सहयोगी रुख अपनाएं।

    क्या हैं मेडिकल बॉन्ड के कड़े नियम?

        मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नियम स्पष्ट हैं:
        सामान्य वर्ग के एमबीबीएस स्नातक: ग्रामीण क्षेत्रों में 1 साल की अनिवार्य सेवा, ऐसा न करने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना।

        एससी/एसटी वर्ग: नियम के तहत एक साल की सेवा और जुर्माना राशि 5 लाख रुपये।
        मेरिटोरियस/सीएम वेलफेयर योजना: सरकारी कॉलेजों से पढ़ने वाले इन छात्रों को 2 साल की सेवा देनी होगी और 10 लाख रुपये का बॉन्ड पेनल्टी है।

        निजी कॉलेज के छात्र (सरकारी फीस पर): जिन छात्रों की फीस सरकार ने उठाई है, उन्हें 5 साल की सेवा देनी होगी और 25 लाख रुपये का जुर्माना प्रावधान है।

        नॉन-सर्विस पीजी छात्र (MD/MS): 1 वर्ष की सेवा और 10 लाख रुपये जुर्माना।

        इन-सर्विस उम्मीदवार, डिमॉन्स्ट्रेटर और मेडिकल ऑफिसर: इनके लिए 5 साल की अनिवार्य सेवा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है।

  • रिश्वत मांगने वाले पटवारी पर शिकंजा, जावर के धर्मेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी

    रिश्वत मांगने वाले पटवारी पर शिकंजा, जावर के धर्मेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी

    भूमि नामांतरण के एवज में रिश्वत मांगने वाले जावर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति

    8 हजार रुपये रिश्वत मांगने के प्रकरण में कलेक्टर सीहोर  बालागुरु के. ने जारी किया आदेश

    भोपाल

    राजस्व प्रशासन में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में जिला स्तर पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्रवाई लोकायुक्त में दर्ज शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। जारी आदेश के अनुसार, पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि पटवारी द्वारा भूमि नामांतरण के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है।

    शिकायत के सत्यापन में 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि

    जारी आदेश के अनुसार शिकायत के सत्यापन के लिए निरीक्षक श्री मुकेश तिवारी द्वारा शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया गया।रिकॉर्डिंग के दौरान पटवारी द्वारा 8 हजार रुपये रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके बाद स्वतंत्र पंच साक्षियों की उपस्थिति में रिकॉर्डेड वार्तालाप का अवलोकन कर प्रारंभिक पंचनामा तैयार किया गया और जावर जाकर ट्रेप की कार्रवाई की गई। रिकॉर्ड की गई बातचीत में रिश्वत की मांग स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई।

    एफएसएल जांच में पटवारी की आवाज प्रमाणित

    सीहोर जिले के तहसील कार्यालय जावर में पंचों की उपस्थिति में वॉयस रिकॉर्डर और मेमोरी कार्ड का जप्ती पंचनामा तैयार कर उन्हें सीलबंद किया गया। आरोपी पटवारी की आवाज का नमूना (वॉइस सैंपल) लेकर एफएसएल भोपाल भेजा गया। एफएसएल रिपोर्ट में रिकॉर्ड की गई आवाज को पटवारी श्री राठौर की आवाज होना प्रमाणित किया गया।

    भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पंजीबद्ध हुआ प्रकरण

    धर्मेन्द्र सिंह राठौर, पटवारी हल्का नंबर 24, तहसील जावर, जिला सीहोर के विरुद्ध लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए भूमि नामांतरण के लिए 8 हजार रुपये रिश्वत की मांग करने का आरोप है। प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था।

    उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने माना कि आरोपी के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19(1)(बी) एवं (सी) के प्रावधानों के तहत सक्षम प्राधिकारी की अभियोजन स्वीकृति आवश्यक होने से कलेक्टर सीहोर द्वारा पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

  • MP में रेयर अर्थ मिनरल्स पर बड़ा फैसला, निजी कंपनियां करेंगी उत्खनन; सरकार ने बनाई नई नीति

    MP में रेयर अर्थ मिनरल्स पर बड़ा फैसला, निजी कंपनियां करेंगी उत्खनन; सरकार ने बनाई नई नीति

    भोपाल 

    प्रदेश की धरती में छिपे खनिज संसाधनों की तलाश अब राज्य सरकार निजी कंपनियों के माध्यम से कराएगी। इसके लिए खनिज विभाग ने मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी तैयार की है। इसमें कंपनियों को खनिजों की खोज के बदले उत्खनन में हिस्सेदारी देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे सरकार को खनिजों की खोज पर सीधे राशि खर्च नहीं करनी पड़ेगी और पर कार खनिज धडार मिलने पर राजस्व अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पॉलिसी पर आगे काम बढ़ाने का अनुमोदन कर दिया है।

    पॉलिसी में खासतौर पर क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज (Critical Rare Earth Minerals Mining) पर जोर दिया गया है। इन खनिजों की पहचान के लिए अत्याधुनिक तकनीक और महंगी मशीनों की जरूरत होती है। मप्र खनिज निगम के माध्यम से कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित कर उन्हें अलग अलग क्षेत्रों में खोजबीन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कंपनियां अपने संसाधनों से सर्वे और खोज करेंगी। इसके बदले उन्हें उत्खनन व उद्योग में भागीदारी भी मिलेगी।

    सैटेलाइट से निगरानी, अवैध खनन पर पेनाल्टी
    दूसरी ओर, खनिज विभाग ने गौण खनिजों के खनन को नियंत्रित करने के लिए नए माइनर मिनरल रूल्स का ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद इन्हें लागू किया जाएगा। नए नियमों में पर्यावरण संरक्षण के साथ खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसके तहत सैटेलाइट से खदानों की निगरानी, ऑनलाइन चालान और ई-चेकगेट के माध्यम से परिवहन संबंधी प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जाएगा। निर्धारित क्षेत्र और गहराई से अधिक खनन करने या बिना अनुमति खनन करने पर पेनाल्टी बढ़ाने का प्रस्ताव है।

    पांच साल में राजस्व दोगुने करने का लक्ष्य
    सीएम डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किया जाए। निवेश के साथ प्रदेश में रोजगार के अवसर भी सृजित हों। खनिज से होने वाली आय का अधिकतम हिस्सा जनहित पर खर्च करें। खनिज विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल के अनुसार, 2026-27 में खनिज राजस्व 13,720 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वहीं, 2030-31 तक इसे बढ़ाकर 30 हजार करोड़ करने की योजना है। नई एक्सप्लोरेशन पॉलिसी और खनन नियमों में बदलाव को इस लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    पॉलिसी से ये फायदा?
    सरकार पर खर्च का बोझ कमः
    निजी कंपनियां अपने संसाधनों से खनिजों की खोज करेंगी। सरकार को सीधे निवेश नहीं करना पड़ेगा।

    दुर्लभ खनिजों की तलाश में तेजीः क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज के लिए आधुनिक तकनीक व मशीनों का उपयोग बढ़ेगा।

    निवेश को प्रोत्साहनः खनिजों की खोज और उत्खनन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। खनिज आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    राजस्व में वृद्धिः नए खनिज भंडार मिलने व व्यावसायिक उत्खनन से सरकार की आय बढ़ सकती है।

    रोजगार के नए अवसरः खनन, खनिज प्रसंस्करण और उनसे जुड़े उद्योगों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढेगा।

    अवैध खनन पर अंकुशः सैटेलाइट निगरानी, ई-चेकगेट व ऑनलाइन चालान से अवैध खनन पर निगरानी मजबूत होगी।

    पर्यावरण संरक्षणः खदानों के आसपास पर्यावरण सुधार को अनिवार्य बनाने और उल्लंघन पर पेनाल्टी से पर्यावरणीय नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।