Author: NewseDay

  • लिव-इन के पंजीयन, पैतृक संपत्ति में बराबरी और भरण-पोषण पर एक समान कानून की मांग

    लिव-इन के पंजीयन, पैतृक संपत्ति में बराबरी और भरण-पोषण पर एक समान कानून की मांग

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ महिला मंच और महाराष्ट्र मंडल महिला समिति की पदाधिकारियों व सदस्यों ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील व व्यावहारिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी  एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता  मोहन पवार ने महिलाओं द्वारा दिए गए सभी व्यावहारिक और कानूनी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें उन पर विचार करने का पूर्ण आश्वासन दिया।   

    लैंगिक समानता और संपत्ति अधिकार

    शताब्दी पाण्डेय ने धर्म आधारित कानूनों में बदलाव की वकालत करते हुए पैतृक व व्यक्तिगत संपत्ति में महिला और पुरुष को समान अधिकार देने, भरण-पोषण के नियम एक समान बनाने और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की। छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल प्रदेश होने के कारण संबंधित समुदायों की परंपराओं, नीतियों, रीति-रिवाजों और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए व्यापक विचार-विमर्श पर सहमति बनी। साथ ही, पंचायतों में कानूनी सलाह के लिए विशेष डेस्क बनाने की मांग रखी । श्वेता पड्डा ने महिलाओं के शोषण पर प्रभावी रोकथाम के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन को अनिवार्य बनाने की मांग की। साथ ही, लिव-इन से जन्मे बच्चों को पालन-पोषण और उत्तराधिकार का पूरा अधिकार मिलने तथा जैविक पहचान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

    अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने स्पष्ट किया कि केवल आपसी सहमति (एग्रीमेंट) के आधार पर महिला-पुरुष का साथ रहना भारतीय कानून में मान्य नहीं है, इसलिए इस पर स्पष्टता जरूरी है। अधिवक्ता मती हेमलता सिंह ने यूसीसी का मुख्य उद्देश्य कानूनी भेदभाव को समाप्त कर व्यवस्था को सरल बनाना बताया। गीता श्याम दलाल ने एक राष्ट्र, एक कानून का समर्थन करते हुए कहा कि अपराधी को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, जबकि सभी को अपनी परंपराओं को मानने की स्वतंत्रता हो। मती आस्था अभय काले ने कहा कि यह व्यवस्था समाज के अंतिम छोर पर खड़ी कमजोर महिलाओं तक पहुँचनी चाहिए, जिसके लिए महिलाओं का जागरूक होना सबसे पहले आवश्यक है। बैठक में आकांक्षा तिवारी, डॉ. (मती) भारती यादव, डॉ. (मती) रत्ना पाण्डेय, मती पुरोहित और प्रसन्ना राजेश अवस्थी, मती अर्चना वोरा, मती शेफाली पुरोहित, मती शीला शर्मा, मती नमिता शेष, मती मालती मिश्रा ने बच्चों के हितों की रक्षा से जुड़े सुझाव दिए, आदिवासी समाज की सहभागिता व विवाह परंपराओं पर अपने विचार समिति  के समक्ष रखे। समिति ने महिलाओं की इस संवादात्मक पहल की सराहना करते हुए सभी व्यावहारिक सुझावों को आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखने का भरोसा दिलाया।

  • ट्रैफिक प्रॉब्लम से बचा सकती है क्वांटम तकनीक, यूपीएसआईएफएस में छात्रों ने प्रस्तुत किए प्रेजेंटेशन

    ट्रैफिक प्रॉब्लम से बचा सकती है क्वांटम तकनीक, यूपीएसआईएफएस में छात्रों ने प्रस्तुत किए प्रेजेंटेशन

    लखनऊ

    प्रदेश की तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को योगी सरकार लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) लखनऊ में बुधवार को क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। इसमें संस्थान के लॉ, बीटेक और एमटेक के छात्र-छात्राओं ने भविष्य की योजनाओं को लेकर अपनी बात रखी और विशेषज्ञों से नई तकनीक की बारीकियां सीखीं। छात्र-छात्राओं के समूहों ने ‘डिस्कवरी एवं क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से यातायात समस्या का समाधान’ विषय पर विषय विशेषज्ञ डॉ. पवन शर्मा और हेराल्ड डी कोस्टा के समक्ष प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया।

    इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण के दृष्टिगत वाहनों का आइडल टाइम कम करके सीओटू (CO2) उत्सर्जन और ईंधन की खपत घटाने तथा ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के विषय पर भी प्रकाश डाला। सुरक्षा और रियल-टाइम स्पीड के लिए TLS 1.3 एन्क्रिप्शन और GDPR नियमों के साथ डेटा सुरक्षित रखते हुए सेकंडों में सटीक रूट तय करने की प्रक्रिया भी प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही फॉरेंसिक व इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स के तहत भविष्य में एंबुलेंस, पुलिस और फॉरेंसिक सेवाओं के लिए प्राथमिकता वाले ट्रैफिक रूट तैयार करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। 

    विषय विशेषज्ञ और आईटी एक्सपर्ट (यूएसए) डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि संस्थान की ओर से छात्र-छात्राओं को जो तकनीकी माहौल दिया जा रहा है, वह काबिले तारीफ है। छात्र-छात्राओं ने टेक्नोलॉजी विषय पर अपनी अद्भुत पकड़ बनाई है और आज के प्रेजेंटेशन में उनकी दक्षता प्रदर्शित हो रही है।  

    संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तरह के कार्यक्रम से युवा पीढ़ी का ज्ञानवर्धन होता है तथा बच्चे दुनिया में होने वाले तकनीकी प्रयोगों (क्वांटम टेक्नोलॉजी लॉ विथ लैब) से रूबरू होते हैं। उन्होंने विषय विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुतियों के लिए टीमों की सराहना की। 
    डॉ. गोस्वामी ने कहा कि इन प्रयोगों के माध्यम से क्वांटम चिप्स बनेंगी, जो फॉरेंसिक साइंस एंड एप्लीकेशन (क्वांटम क्रिप्टोग्राफी) में प्रभावशाली होंगी। उन्होंने तकनीक के लाभ और भविष्य के लक्ष्य तथा ‘ट्रैफिक कंजेशन’ जैसी गंभीर समस्या के समाधान के विषय पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्थान क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा में अग्रणी होकर कार्य कर रहा है।

    कार्यक्रम में अपर निदेशक संजीव सुमन, उप निदेशक चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. निमिशा, डॉ. सेंथिल शिवासुब्रमण्यम सहित जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी आदि उपस्थित रहे।

  • बस्तर बाढ़ आपदा में पीड़ितों को 9.39 करोड़ रुपए से अधिक की राहत राशि का त्वरित भुगतान, पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी

    बस्तर बाढ़ आपदा में पीड़ितों को 9.39 करोड़ रुपए से अधिक की राहत राशि का त्वरित भुगतान, पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी

    रायपुर

    बस्तर अंचल में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई मूसलाधार बारिश और ओडिशा के खातीगुड़ा व मुरान बांधों से छोड़े गए पानी के चलते उत्पन्न भीषण बाढ़ की स्थिति के बीच जिला प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है। आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से अब तक कुल 9 करोड़ 39 लाख 29 हजार 898 रुपए की राहत राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।  

    जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वित्तीय सहायता में सबसे बड़ा हिस्सा मकानों की क्षतिपूर्ति के रूप में दिया गया है, जिसके तहत कुल 8 करोड़ 78 लाख 15 हजार 398 रुपए वितरित किए गए हैं। इसमें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 8 करोड़ 2 लाख 23 हजार 391 रुपए तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 75 लाख 92 हजार 7 रुपए की सहायता शामिल है। इसके अतिरिक्त घरों में रखे बर्तन व अन्य घरेलू सामग्रियों के नुकसान के एवज में प्रभावितों को 52 लाख 45 हजार रुपये, जनहानि के मामलों में आश्रितों को 8 लाख रुपये का मुआवजा और पशुहानि के मामलों में 69 हजार 500 रुपये की राहत राशि का त्वरित भुगतान किया गया है।  

     राज्य शासन के संवेदनशील निर्देशों के तहत राजस्व अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों ने दिन-रात सक्रिय होकर प्रकरणों का तेजी से निराकरण सुनिश्चित किया, जिससे इतनी बड़ी धनराशि का त्वरित वितरण संभव हो सका। कलेक्टर  आकाश छिकारा ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए हैं कि पूर्ण एवं आंशिक मकान क्षति के जितने भी शेष मामले लंबित हैं, उन्हें भी बिना किसी विलंब के प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि कोई भी प्रभावित परिवार शासन की मदद से वंचित न रहे।

    वित्तीय सहायता के साथ-साथ जमीनी स्तर पर पुनर्वास और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रयास भी तेज गति से संचालित किए जा रहे हैं। जिन परिवारों के आशियाने पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, उनके तात्कालिक आश्रय हेतु प्रशासन द्वारा बांस, बल्ली और तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्रियां त्वरित रूप से पहुंचाई जा रही हैं। वहीं जलभराव के बाद संक्रामक और जलजनित बीमारियों के खतरे को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मिलकर सभी पेयजल स्रोतों का अनिवार्य क्लोरीनेशन कर रहे हैं और गांवों में लगातार ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव किया जा रहा है। बस्तर संभाग के कमिश्नर  डोमन सिंह और कलेक्टर  आकाश छिकारा स्वयं लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों व राहत शिविरों का निरीक्षण कर पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, और प्रशासन का संकल्प है कि अंतिम पीड़ित व्यक्ति तक सहायता पहुंचने तक यह राहत अभियान निरंतर जारी रहेगा।

     

  • एमपीआईडीसी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस : 2026 में प्रदर्शित किया ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन

    एमपीआईडीसी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस : 2026 में प्रदर्शित किया ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन

    भोपाल

    नई दिल्ली में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 में स्टेट पार्टनर के रूप में सहभागिता की और मध्यप्रदेश को टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के उभरते डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम के की-नोट सत्र में एमपीआईडीसी की कार्यपालक निदेशक मती अनीशा वास्तव ने प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्वालियर में प्रस्तावित समर्पित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन की जानकारी दी। इसका उद्देश्य टेलीकॉम उपकरण निर्माताओं, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को आकर्षित करना है।

    इंडियन मोबाइल कांग्रेस के दौरान मती वास्तव ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। उन्होंने निवेश अवसरों, उद्योगों की आवश्यकताओं तथा मध्यप्रदेश में विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की।

    आईएमसी : 2026 में एमपीआईडीसी की सहभागिता से टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम के साथ प्रदेश का जुड़ाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है। साथ ही मध्यप्रदेश में नए निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को भी बल मिला है।

  • विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

    विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

    भोपाल

    भारत के सार्वजनिक जीवन में कुछ यात्राएँ केवल राजनीतिक यात्रा नहीं होतीं, वे राष्ट्र-निर्माण की यात्रा बन जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष ऐसी ही एक प्रेरणादायी यात्रा का प्रतीक हैं।

    7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी ने जिस जिम्मेदारी को स्वीकार किया था, वह आज 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की एक ऐतिहासिक यात्रा बन चुकी है। गुजरात से शुरू हुई यह यात्रा आज भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने के संकल्प तक पहुँच चुकी है।

    इन 25 वर्षों को केवल सत्ता में निरंतरता के रूप में देखना इस यात्रा को सीमित कर देना होगा। वास्तव में यह नीति से नीयत, नीयत से परिणाम और परिणाम से जनविश्वास तक की यात्रा है।

    गरीब के सम्मान से राष्ट्र के उत्थान तक

    प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही है कि विकास को उन्होंने केवल बड़े शहरों और बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रखा। गरीब, किसान, महिला, युवा, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजातीय समाज और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना उनकी नीतियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

    जनधन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन, उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओ के जीवन में सुविधा, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता को जन आंदोलन बनाना, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को पक्का घर, आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा और पीएम-किसान के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष सहायता—इन पहलों ने शासन और सामान्य नागरिक के बीच संबंध को नए रूप में स्थापित किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओ की सूची नहीं है। यह उस सोच का परिणाम है जिसमें सरकार का अर्थ केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन है।

    महिला शक्ति को नेतृत्व की शक्ति बनाना

    प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने नारी शक्ति को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों, उज्ज्वला, मुद्रा, जनधन और अन्य योजनाओ तक महिलाओ को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने का प्रयास हुआ है। आज देश की महिलाएँ राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, सेना, खेल, उद्यमिता और शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में भी एक नई दिशा का संकेत देते हैं।

    एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में मैं मानती हूँ कि जब देश की आधी आबादी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है, तब पूरा देश आगे बढ़ता है।

    पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में

    मेरे लिए प्रधानमंत्री मोदी जी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक न्याय और अवसरों के विस्तार सेभी जुड़ा है। पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना के वल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है; यह शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, कौशल, वित्तीय अवसर और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने वंचित वर्गों के लिए योजनाओ की पहुँच बढ़ाने, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को मजबूत करने और अवसरों को अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया है। यही सोच ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के भाव को मजबूत करती है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण के दायित्व से जुड़े होने के कारण मैं विशेष रूप से महसूस करती हूँ कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओ का लाभ पहुँचाना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

    डिजिटल भारत और बदलता हुआ शासन

    पिछले 25 वर्षों की एक बड़ी उपलब्धि भारत के शासन तंत्र में तकनीक का व्यापक समावेश भी है। आज डिजिटल भुगतान, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और ऑनलाइन सेवाओ ने नागरिक और सरकार के बीच की दूरी को कम किया है। भारत ने यह दिखाया है कि तकनीक के वल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि पारदर्शिता, गति और समावेशन का माध्यम भी बन सकती है। भारत की डिजिटल क्षमता ने विश्व के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है और अनेक क्षेत्रों में भारत आज समाधान देनेवालेदेशों मेंशामिल हो रहा है।

    आत्मनिर्भर भारत सेविकसित भारत तक

    प्रधानमंत्री मोदी जी की सोच में भारत के वल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता वाला राष्ट्र है।

    ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक क्षमता को नई गति देने का प्रयास किया है।

    आज भारत की आकांक्षा के वल वर्तमान को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की है। यह लक्ष्य के वल सरकार का लक्ष्य नहीं हो सकता; यह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भागीदारी सेही पूरा होगा।

    विश्व पटल पर नए आत्मविश्वास का भारत

    प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में भी आत्मविश्वास और सक्रियता दिखाई देती है। भारत ने वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से रखने का प्रयास किया है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण की चिंताओ को सामने रखना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, आपदा के समय सहायता और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका इस परिवर्तन को दर्शाती है। भारत आज विश्व व्यवस्था में केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्णऔर प्रभावशाली भागीदार के रूप मेंअपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है।

    25 वर्ष हमें क्या सिखाते हैं?

    श्री नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की यात्रा हमें यह सिखाती है कि नेतृत्व केवल पद प्राप्त करने का नाम नहीं है। नेतृत्व का वास्तविक अर्थ है—दृष्टि रखना, कठिन निर्णय लेने का साहस रखना और उन निर्णयों को परिणाम में बदलने के लिए निरंतर परिश्रम करना। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक की यह यात्रा निरंतर जनसेवा की यात्रा रही है। आज जब हम इन 25 वर्षों को देखते हैं, तो यह केवल अतीत का मूल्यांकन करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाले भारत की दिशा तय करने का अवसर भी है।

    विकसित भारत के संकल्प के साथ

    आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं प्रधानमंत्री मोदी जी को 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देती हूँ। एक जनप्रतिनिधि और मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में मेरा विश्वास है कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि नए भारत की कार्य संस्कृति है।

    हमारा संकल्प है कि समाज के प्रत्येक वर्ग—विशेषकर गरीब, पिछड़े, वंचित, महिलाएँ, युवा और अल्पसंख्यक को विकास की मुख्य धारा से जोड़ते हुए एक ऐसा भारत बनाया जाए जहाँ अवसर सबके लिए हों और सम्मान प्रत्येक नागरिक का अधिकार हो। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पिछले 25 वर्षों ने भारत को नई आकांक्षा, नया आत्मविश्वास और नई दिशा दी है। अब अगला लक्ष्य और भी बड़ा है—

    2047 का विकसित भारत।

    आइए, इस अमृत संकल्प की यात्रा में हम सभी अपनी भूमिका निभाएँ और एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें जो समृद्ध भी हो, सशक्त भी हो, आत्म निर्भर भी हो और अपनी महान सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने वाला विश्वगुरु भारत भी हो।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जनसेवा के 25 गौरवपूर्ण वर्षों की हार्दिक बधाई।

     

     

  • नवा रायपुर में भारत-ज़िम्बाब्वे महिला टी-20 सीरीज़ की तैयारियां पूरी

    नवा रायपुर में भारत-ज़िम्बाब्वे महिला टी-20 सीरीज़ की तैयारियां पूरी

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम (परसदा) में आयोजित होने वाली भारत महिला बनाम ज़िम्बाब्वे महिला टी-20 क्रिकेट सीरीज की प्रशासनिक स्तर पर की जा रही तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। तीन अंतर्राष्ट्रीय महिला टी-20 मुकाबले 16, 18 और 20 अक्टूबर 2026 को खेले जाएंगे।  मुख्य सचिव ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों को व्यवस्थाओं के संबंध में अन्य विभागों से आवश्यक समन्वय करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैच के सुचारू संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए पुलिस विभाग एवं आयोजक संस्थाओं को समय पर जरूरी कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा है। 

       मैच के सफल संचालन और अंतर-विभागीय समन्वय के लिए रायपुर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक लोकल सपोर्ट कमेटी गठित की गई है। इस समिति में रायपुर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, खेल एवं युवा कल्याण संचालक, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता, एनआरडीए के प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि शामिल हैं। ई-टिकट को आसानी से स्कैन कर स्टेडियम में प्रवेश दिलाने के लिए दर्शकों हेतु परिसर में ओपन वाई-फाई की व्यवस्था की जाएगी।

    स्टेडियम के भीतर खाद्य सामग्री, पेयजल आपूर्ति इत्यादि व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए है। टिकटों पर स्टेडियम का नाम शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, नवा रायपुर अटल नगर स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगा। टिकटों का वितरण ऑनलाइन किया जाएगा। स्टेडियम परिसर और सभी पार्किंग क्षेत्रों में सीसीटीव्ही कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे। टिकट धारकों को निश्चित अनुपात में पार्किंग पास उपलब्ध कराए जाएंगे। सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था सीसीटीव्ही कैमरे एवं सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था पुलिस, एनआरडीए, सीएससीएस और बीसीसीआई द्वारा की जाएगी। आवश्यक विद्युत व्यवस्था, सीएसपीडीसीएल और ऊर्जा विभाग द्वारा की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग नजदीकी अस्पतालों की मैपिंग करेगा और स्थल पर एम्बुलेंस तैनात रहेगी। आपातकालीन इलाज एवं वीवीआईपी आवागमन हेतु ग्रीन कॉरिडोर का मार्ग निर्धारित किया गया है।  स्टेडियम परिसर एवं निगम के निकटतम क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध रहे इसकी सुनिश्चितता बीएसएनएल द्वारा की जाएगी। फायर ब्रिगेड और पर्याप्त जल की उपलब्धता और आपातकालीन स्थिति के लिए रूट का चिन्हांकन गृह एवं अग्निशमन विभाग द्वारा किया जाएगा।

     वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इस बैठक में परिवहन विभाग के सचिव  एस. प्रकाश, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के यशवंत कुमार, पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, संचालक जनसम्पर्क  आशीष टिकरिया, एमडी टूरिज्म  सौमिल रंजन चौबे सहित कलेक्टर रायपुर, पुलिस अधीक्षक रायपुर, एनआरडीए, खेल एवं युवा कल्याण, फायर एवं सेफटी, एयरपोर्ट आथरटी, सीएसपीडीसीएल, पीडब्लूडी, छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने भाग लिया।

    छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम (परसदा) में आयोजित होने वाली भारत महिला बनाम ज़िम्बाब्वे महिला टी-20 क्रिकेट सीरीज की प्रशासनिक स्तर पर की जा रही तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। तीन अंतर्राष्ट्रीय महिला टी-20 मुकाबले 16, 18 और 20 अक्टूबर 2026 को खेले जाएंगे।  मुख्य सचिव ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों को व्यवस्थाओं के संबंध में अन्य विभागों से आवश्यक समन्वय करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैच के सुचारू संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए पुलिस विभाग एवं आयोजक संस्थाओं को समय पर जरूरी कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा है। 

       मैच के सफल संचालन और अंतर-विभागीय समन्वय के लिए रायपुर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक लोकल सपोर्ट कमेटी गठित की गई है। इस समिति में रायपुर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, खेल एवं युवा कल्याण संचालक, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता, एनआरडीए के प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि शामिल हैं। ई-टिकट को आसानी से स्कैन कर स्टेडियम में प्रवेश दिलाने के लिए दर्शकों हेतु परिसर में ओपन वाई-फाई की व्यवस्था की जाएगी।

    स्टेडियम के भीतर खाद्य सामग्री, पेयजल आपूर्ति इत्यादि व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए है। टिकटों पर स्टेडियम का नाम शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, नवा रायपुर अटल नगर स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगा। टिकटों का वितरण ऑनलाइन किया जाएगा। स्टेडियम परिसर और सभी पार्किंग क्षेत्रों में सीसीटीव्ही कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे। टिकट धारकों को निश्चित अनुपात में पार्किंग पास उपलब्ध कराए जाएंगे। सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था सीसीटीव्ही कैमरे एवं सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था पुलिस, एनआरडीए, सीएससीएस और बीसीसीआई द्वारा की जाएगी। आवश्यक विद्युत व्यवस्था, सीएसपीडीसीएल और ऊर्जा विभाग द्वारा की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग नजदीकी अस्पतालों की मैपिंग करेगा और स्थल पर एम्बुलेंस तैनात रहेगी। आपातकालीन इलाज एवं वीवीआईपी आवागमन हेतु ग्रीन कॉरिडोर का मार्ग निर्धारित किया गया है।  स्टेडियम परिसर एवं निगम के निकटतम क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध रहे इसकी सुनिश्चितता बीएसएनएल द्वारा की जाएगी। फायर ब्रिगेड और पर्याप्त जल की उपलब्धता और आपातकालीन स्थिति के लिए रूट का चिन्हांकन गृह एवं अग्निशमन विभाग द्वारा किया जाएगा।

     वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इस बैठक में परिवहन विभाग के सचिव  एस. प्रकाश, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के यशवंत कुमार, पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, संचालक जनसम्पर्क  आशीष टिकरिया, एमडी टूरिज्म  सौमिल रंजन चौबे सहित कलेक्टर रायपुर, पुलिस अधीक्षक रायपुर, एनआरडीए, खेल एवं युवा कल्याण, फायर एवं सेफटी, एयरपोर्ट आथरटी, सीएसपीडीसीएल, पीडब्लूडी, छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने भाग लिया।

  • विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

    विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

    भोपाल 

    भारत के सार्वजनिक जीवन में कुछ यात्राएँ केवल राजनीतिक यात्रा नहीं होतीं, वे राष्ट्र-निर्माण की यात्रा बन जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष ऐसी ही एक प्रेरणादायी यात्रा का प्रतीक हैं।

    7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में श्री मोदी जी ने जिस जिम्मेदारी को स्वीकार किया था, वह आज 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की एक ऐतिहासिक यात्रा बन चुकी है। गुजरात से शुरू हुई यह यात्रा आज भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने के संकल्प तक पहुँच चुकी है।

    इन 25 वर्षों को केवल सत्ता में निरंतरता के रूप में देखना इस यात्रा को सीमित कर देना होगा। वास्तव में यह नीति से नीयत, नीयत से परिणाम और परिणाम से जनविश्वास तक की यात्रा है।

    गरीब के सम्मान से राष्ट्र के उत्थान तक

    प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही है कि विकास को उन्होंने केवल बड़े शहरों और बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रखा। गरीब, किसान, महिला, युवा, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजातीय समाज और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना उनकी नीतियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

    जनधन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन, उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओ के जीवन में सुविधा, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता को जन आंदोलन बनाना, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को पक्का घर, आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा और पीएम-किसान के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष सहायता—इन पहलों ने शासन और सामान्य नागरिक के बीच संबंध को नए रूप में स्थापित किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओ की सूची नहीं है। यह उस सोच का परिणाम है जिसमें सरकार का अर्थ केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन है।

    महिला शक्ति को नेतृत्व की शक्ति बनाना

    प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने नारी शक्ति को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों, उज्ज्वला, मुद्रा, जनधन और अन्य योजनाओ तक महिलाओ को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने का प्रयास हुआ है। आज देश की महिलाएँ राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, सेना, खेल, उद्यमिता और शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में भी एक नई दिशा का संकेत देते हैं।

    एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में मैं मानती हूँ कि जब देश की आधी आबादी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है, तब पूरा देश आगे बढ़ता है।

    पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में

    मेरे लिए प्रधानमंत्री मोदी जी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक न्याय और अवसरों के विस्तार सेभी जुड़ा है। पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना के वल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है; यह शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, कौशल, वित्तीय अवसर और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने वंचित वर्गों के लिए योजनाओ की पहुँच बढ़ाने, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को मजबूत करने और अवसरों को अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया है। यही सोच ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के भाव को मजबूत करती है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण के दायित्व से जुड़े होने के कारण मैं विशेष रूप से महसूस करती हूँ कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओ का लाभ पहुँचाना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

    डिजिटल भारत और बदलता हुआ शासन

    पिछले 25 वर्षों की एक बड़ी उपलब्धि भारत के शासन तंत्र में तकनीक का व्यापक समावेश भी है। आज डिजिटल भुगतान, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और ऑनलाइन सेवाओ ने नागरिक और सरकार के बीच की दूरी को कम किया है। भारत ने यह दिखाया है कि तकनीक के वल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि पारदर्शिता, गति और समावेशन का माध्यम भी बन सकती है। भारत की डिजिटल क्षमता ने विश्व के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है और अनेक क्षेत्रों में भारत आज समाधान देनेवालेदेशों मेंशामिल हो रहा है।

    आत्मनिर्भर भारत सेविकसित भारत तक

    प्रधानमंत्री मोदी जी की सोच में भारत के वल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता वाला राष्ट्र है।

    ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक क्षमता को नई गति देने का प्रयास किया है।

    आज भारत की आकांक्षा के वल वर्तमान को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की है। यह लक्ष्य के वल सरकार का लक्ष्य नहीं हो सकता; यह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भागीदारी सेही पूरा होगा।

    विश्व पटल पर नए आत्मविश्वास का भारत

    प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में भी आत्मविश्वास और सक्रियता दिखाई देती है। भारत ने वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से रखने का प्रयास किया है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण की चिंताओ को सामने रखना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, आपदा के समय सहायता और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका इस परिवर्तन को दर्शाती है। भारत आज विश्व व्यवस्था में केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्णऔर प्रभावशाली भागीदार के रूप मेंअपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है।

    25 वर्ष हमें क्या सिखाते हैं?

    श्री नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की यात्रा हमें यह सिखाती है कि नेतृत्व केवल पद प्राप्त करने का नाम नहीं है। नेतृत्व का वास्तविक अर्थ है—दृष्टि रखना, कठिन निर्णय लेने का साहस रखना और उन निर्णयों को परिणाम में बदलने के लिए निरंतर परिश्रम करना। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक की यह यात्रा निरंतर जनसेवा की यात्रा रही है। आज जब हम इन 25 वर्षों को देखते हैं, तो यह केवल अतीत का मूल्यांकन करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाले भारत की दिशा तय करने का अवसर भी है।

    विकसित भारत के संकल्प के साथ

    आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं प्रधानमंत्री श्री मोदी जी को 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देती हूँ। एक जनप्रतिनिधि और मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में मेरा विश्वास है कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि नए भारत की कार्य संस्कृति है।

    हमारा संकल्प है कि समाज के प्रत्येक वर्ग—विशेषकर गरीब, पिछड़े, वंचित, महिलाएँ, युवा और अल्पसंख्यक को विकास की मुख्य धारा से जोड़ते हुए एक ऐसा भारत बनाया जाए जहाँ अवसर सबके लिए हों और सम्मान प्रत्येक नागरिक का अधिकार हो। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पिछले 25 वर्षों ने भारत को नई आकांक्षा, नया आत्मविश्वास और नई दिशा दी है। अब अगला लक्ष्य और भी बड़ा है—

    2047 का विकसित भारत।

    आइए, इस अमृत संकल्प की यात्रा में हम सभी अपनी भूमिका निभाएँ और एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें जो समृद्ध भी हो, सशक्त भी हो, आत्म निर्भर भी हो और अपनी महान सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने वाला विश्वगुरु भारत भी हो।

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जनसेवा के 25 गौरवपूर्ण वर्षों की हार्दिक बधाई।

     

  • विकसित भारत 2047 के लिए छत्तीसगढ़ की प्राथमिकताओं पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित

    विकसित भारत 2047 के लिए छत्तीसगढ़ की प्राथमिकताओं पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित

    रायपुर

    ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में छत्तीसगढ़ की भूमिका और राज्य की प्राथमिकताओं को तय करने के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में छठवें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन के लिए विभिन्न विभागों की प्रस्तुतियों और प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    कार्यशाला के दौरान आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए  निवेश, रोजगार, नागरिक सेवाओं का विस्तार और शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाना है। ग्रामीण संपर्क (रूरल कनेक्टिविटी), जल प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्र को सुदृढ़ करना। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं के लक्ष्य अधिक ठोस, स्पष्ट और समयबद्ध माइलस्टोन (समय-सीमा) के साथ होने ताकि नागरिकों के जीवन पर इनके सकारात्मक प्रभावों का सटीक आकलन किया जा सके।

    विशेषज्ञों के प्रमुख सुझाव 

    खनिज सचिव  पी. दयानंद ने महत्वपूर्ण खनिजों के विकास और उनसे जुड़ी संभावनाओं पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। ऊर्जा सचिव  सारांश मित्तर ने अनुपयोगी भूमि (वेस्टलैंड) पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास की व्यापक रणनीति साझा करते हुए ऊर्जा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय, किफायती और सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में नगरीय प्रशासन, स्कूल शिक्षा, कृषि, सामान्य प्रशासन, आवास एवं पर्यावरण, आदिम जाति विकास, पर्यटन, राजस्व, कौशल विकास, स्वास्थ्य, श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिवों व सचिवों ने अपने-अपके विभागों की कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं।

    बैठक में नगरीय प्रशासन विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चंपावत, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, कौशल विकास विभाग के सचिव  बसवराजु एस., स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता,  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव एवं आयुक्त जनसंपर्क  रजत बंसल, उद्योग विभाग के संचालक  प्रभात मलिक, नीति आयोग के सदस्य  आशीष भट्ट सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहें।

  • उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति और सरल, सुगम विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराएं : ऊर्जा मंत्री  तोमर

    उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति और सरल, सुगम विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराएं : ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल

    विद्युत वितरण प्रणाली को निर्बाध बनाने तथा विद्युत समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर की अध्यक्षता में बुधवार को रोशनी घर स्थित विधुत विभाग के कार्यालय ग्वालियर में समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य अभियंता  विनोद कटारे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

    ऊर्जा मंत्री  तोमर ने निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु तत्परता के साथ पहल करने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रत्येक उपभोक्ता को सरल, सुगम एवं बेहतर विद्युत सेवाएं उपलब्ध हों। नवरात्रि तथा दीपावली पर्व पर उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराना हमारा दायित्व है। हम यह सुनिश्चित करें कि ट्रिपिंग की स्थिति निर्मित न हो, इसके लिए मुख्य रूप से ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट और अर्थ लीकेज जैसी समस्याओं को रोकना जरूरी है।

     

  • कहानी और स्थानीय अनुभवों के जरिए बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर

    कहानी और स्थानीय अनुभवों के जरिए बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर

    रायपुर

     बच्चों को अपने आसपास के पर्यावरण को देखने, समझने, सवाल पूछने और अपने अनुभवों को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला का मंगलवार को समापन हुआ। कार्यशाला के दूसरे दिन शिक्षकों ने कहानी लेखन, रचनात्मक गतिविधियों और संवादात्मक सत्रों में सक्रिय भागीदारी करते हुए पहले दिन की सीख को आगे बढ़ाया।

       आईआईएसईआर पुणे के केयर प्रोजेक्ट, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, यूनिसेफ तथा छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त सहयोग से 6 एवं 7 अक्टूबर को जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एक्शन (एक्सआईएसए), विधानसभा रोड, रायपुर में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से शासकीय विद्यालयों के शिक्षक शामिल हुए।

    शिक्षकों ने तैयार की कहानियां, साझा किए अनुभव

    कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागी शिक्षकों ने अपनी कहानियों को विकसित किया और उन्हें एक-दूसरे के साथ साझा किया। स्टोरीटेलिंग गतिविधियों और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से बच्चों के स्थानीय परिवेश, दैनिक अनुभवों और प्रकृति को कहानी से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई।

       इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कहानी केवल जानकारी देने का माध्यम न होकर बच्चों में अवलोकन, जिज्ञासा, स्वतंत्र सोच, कल्पनाशीलता और अपनी बात अभिव्यक्त करने की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

    ‘कहानीकार पुस्तक मेला’ बना विशेष आकर्षण

     दूसरे दिन आयोजित ‘कहानीकार पुस्तक मेला’ कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण रहा। पुस्तक मेले में शिक्षकों को विभिन्न पुस्तकों, कहानियों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से परिचित होने का अवसर मिला। पुस्तकों को कल्पना, ज्ञान, संवाद और सीखने के प्रभावी माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया।

     शिक्षकों को बताया गया कि किताबों और कहानियों को कक्षा की गतिविधियों से जोड़कर बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।

    कहानी और कला से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनेंगे बच्चे

    कार्यशाला में कहानी, कला और स्थानीय अनुभवों के माध्यम से बच्चों को प्रकृति एवं पर्यावरण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। बच्चों को अपने आसपास की प्रकृति का स्वयं अवलोकन करने, प्रश्न पूछने और अपने अनुभवों को कहानी के रूप में व्यक्त करने के अवसर देकर सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और अर्थपूर्ण बनाया जा सकता है।

       साथ ही पर्यावरणीय संवेदनशीलता को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर बच्चों के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई गई।

    ‘जुगनू’ देगा बच्चों और शिक्षकों की रचनात्मकता को मंच

       कार्यशाला के दौरान बच्चों के लिए भारत के पहले द्विभाषी हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट टैब्लॉइड ‘जुगनू’ को भी प्रस्तुत किया गया। आईआईएसईआर पुणे के केयर प्रोजेक्ट की एक्शन रिसर्च से विकसित ‘जुगनू’ के माध्यम से देशभर के बच्चों और शिक्षकों की कहानियों, स्थानीय अनुभवों तथा प्रकृति, पर्यावरण एवं जलवायु से जुड़ी रचनात्मक सामग्री को मंच प्रदान किया जाएगा।

       केयर प्रोजेक्ट की प्रोजेक्ट लीड एवं ‘जुगनू’ की पब्लिशर डॉ. शालिनी शर्मा ने बताया कि इसका उद्देश्य बच्चों में पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर केवल चिंता पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें अपने आसपास के परिवेश को समझने, सवाल पूछने, अपनी आवाज अभिव्यक्त करने और सकारात्मक बदलाव के लिए पहल करने को प्रेरित करना है।

    अनुभव साझा करने और प्रमाण-पत्र वितरण के साथ समापन

       समापन सत्र में प्रतिभागी शिक्षकों ने दो दिनों की अपनी सीख और अनुभव साझा किए। इसके बाद छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. शिरीष कुमार सिंह तथा एनआईटी रायपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राज कुमार साहू की उपस्थिति में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

       दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला ने शिक्षकों को ऐसे रचनात्मक और अनुभवात्मक तरीकों से परिचित कराया, जिनका उपयोग वे कक्षाओं में बच्चों को देखने, सोचने, सवाल करने, अपनी बात कहने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करने में कर सकेंगे। ‘आर्ट ऐस स्टोरी, स्टोरी ऐस नॉलेज, नॉलेज ऐस एक्शन’ की अवधारणा पर आधारित यह पहल शिक्षा को स्थानीय परिवेश, प्रकृति और बच्चों के अनुभवों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रही।