Author: NewseDay

  • त्रिवर्षीय आबकारी नीति से निर्यात उछला तो यूपी में किसानों और उद्योगों के लिए बढ़े अवसर

    त्रिवर्षीय आबकारी नीति से निर्यात उछला तो यूपी में किसानों और उद्योगों के लिए बढ़े अवसर

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) का असर विदेशी बाजारों से आगे किसानों और उद्योगों तक दिखाई देने लगा है। निर्यात बढ़ने के साथ कच्चे माल की मांग में भी तेजी आई है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जबकि ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में वृद्धि हुई है। इससे कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।

    नई इकाइयों से औद्योगिक गतिविधियों को बल

    प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के बीच नई इकाइयों की स्थापना का सिलसिला भी आगे बढ़ रहा है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। इससे संबंधित क्षेत्रों में उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की दिशा में कदम बढ़े हैं।

    चीनी मिलों के शीरे की बढ़ी मांग

    आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक पहुंच रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में भी वृद्धि हुई है। इससे किसानों के उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों का संबंध मजबूत हुआ है।

    बंद इकाई फिर हुई सक्रिय

    मुरादाबाद में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने बंद इकाई को फिर सक्रिय किया है। वहीं गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात के विस्तार के साथ प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। नई इकाइयों की स्थापना और बंद इकाइयों के पुनर्जीवन से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ संबंधित क्षेत्रों में कारोबारी अवसर भी पैदा हो रहे हैं। नीति में किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की छूट नहीं दी जाएगी। इसके जरिए नीति के लाभ को निर्धारित नियामकीय शर्तों से जोड़ा गया है।

    4 माह में 183 लाख डॉलर का निर्यात, 66 लाख डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा

    अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार माह में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। प्रदेश ने इस अवधि में 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात लाइनें 29 से बढ़कर 39 तथा संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई।

  • बिहार के इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक कॉलेजों की बदली तस्वीर, प्लेसमेंट 12 गुना बढ़ा; नामांकन 98% तक

    बिहार के इंजीनियरिंग-पॉलिटेक्निक कॉलेजों की बदली तस्वीर, प्लेसमेंट 12 गुना बढ़ा; नामांकन 98% तक

     पटना
     बिहार के सरकारी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पिछले पांच वर्षों में प्लेसमेंट और नामांकन दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

    विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 से 2025-26 के बीच प्लेसमेंट पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या 1700 से बढ़कर 20477 हो गई।

    पांच साल में प्लेसमेंट ने लगाई बड़ी छलांग
    2020-21 में पालिटेक्निक के 1002 और इंजीनियरिंग के 698 विद्यार्थियों समेत कुल 1700 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ था। 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 4681 और 2022-23 में 4944 पहुंच गई। इसके बाद 2023-24 में 8197 और 2024-25 में 11178 विद्यार्थियों को रोजगार मिला।

    2025-26 में 20 हजार से ज्यादा को रोजगार
    प्लेसमेंट के आंकड़ों में सबसे बड़ी छलांग 2025-26 में देखने को मिली। इस वर्ष कुल 20477 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ।

    यानी पांच वर्षों में रोजगार पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 12 गुना बढ़ गई। विभाग इसे तकनीकी शिक्षा में रोजगारपरक बदलाव का अहम संकेत मान रहा है।

    इंजीनियरिंग में 94% से ज्यादा नामांकन
    प्लेसमेंट के साथ तकनीकी संस्थानों में विद्यार्थियों का रुझान भी बढ़ा है। इंजीनियरिंग में नामांकन दर 2022-23 में 65.86 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में 72.71, 2024-25 में 81.33 और 2025-26 में 81.52 प्रतिशत हुई। 2026-27 में यह बढ़कर 94.39 प्रतिशत पहुंच गई।

    पॉलिटेक्निक में भी रिकॉर्ड नामांकन
    पॉलिटेक्निक संस्थानों में नामांकन दर 2022-23 में 84.37 प्रतिशत थी। 2023-24 में यह 84.20 और 2024-25 में 82.40 प्रतिशत रही। इसके बाद 2025-26 में नामांकन 93.60 प्रतिशत और 2026-27 में 98.08 प्रतिशत तक पहुंच गया।

    38 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 14331 दाखिले
    वर्तमान सत्र में 38 इंजीनियरिंग महाविद्यालयों की कुल 15183 बीटेक सीटों में से 14331 सीटों पर नामांकन हुआ है। वहीं 46 पालिटेक्निक संस्थानों की 17227 सीटों में से 16897 सीटों पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिला हुआ है।

    सिर्फ 10 रुपये सालाना फीस में इंजीनियरिंग
    विभाग के अनुसार सरकारी संस्थानों में बेहद कम शुल्क भी विद्यार्थियों के बढ़ते भरोसे की एक वजह है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई का वार्षिक शुल्क महज 10 रुपये और पालिटेक्निक का शुल्क पांच रुपये है। आधुनिक पाठ्यक्रम, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सेंटर आफ एक्सीलेंस से रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

    आधुनिक पढ़ाई से बढ़े रोजगार के मौके
    विभाग रोजगारपरक आधुनिक पाठ्यक्रमों को तेजी से लागू कर रहा है। शैक्षणिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण में सुधार, आधुनिक प्रयोगशालाओं और सेंटर आफ एक्सीलेंस की सुविधा से विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। बीटेक में छात्राओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण भी है।

        मंत्री बोलीं- शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ना लक्ष्य
        सरकार का उद्देश्य सिर्फ विद्यार्थियों को तकनीकी संस्थानों में प्रवेश दिलाना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी शिक्षा देना है, जो ज्ञान, कौशल, रोजगार और नवाचार से जुड़ी हो। लगभग 98 प्रतिशत नामांकन, बढ़ते प्लेसमेंट, एनबीए मान्यता, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उभरते पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां इस दिशा में हो रहे बदलाव को दर्शाती हैं
        शीला कुमारी, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी मंत्री

    वर्षवार प्लेसमेंट के आंकड़े
    2020-21     1700
    2021-22     4681
    2022-23     4,944
    2023-24     8197
    2024-25     11178
    2025-26     20477

  • राजस्थान में बारिश के बाद शुरू होगी सर्दी, 10-12 अक्टूबर को इन इलाकों में बदलेगा मौसम का मिजाज

    राजस्थान में बारिश के बाद शुरू होगी सर्दी, 10-12 अक्टूबर को इन इलाकों में बदलेगा मौसम का मिजाज

    जयपुर
     राजस्थान में अक्टूबर की गर्मी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। दिन में जहां कई शहरों में तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, वहीं रात के तापमान में गिरावट शुरू हो गई है। मौसम केन्द्र जयपुर के अनुसार प्रदेश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसके असर से 10 से 12 अक्टूबर के बीच बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ जिलों में बादल छाने और मेघगर्जन के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद तापमान में गिरावट से मौसम में सर्दी का असर बढ़ना शुरू हो सकता है।

    मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्टूबर के बाद प्रदेश के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। ऐसे में दिन की गर्मी से कुछ राहत मिलने के साथ रातें भी ठंडी होने लगेंगी। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव प्रदेश के सभी हिस्सों में नहीं रहेगा। अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है।

    11 अक्टूबर को बीकानेर संभाग में बारिश की संभावना है, जबकि 12 अक्टूबर को जयपुर सहित बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। 8 से 13 अक्टूबर तक प्रदेश के अधिकांश अन्य हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है।

    11 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश के आसार
    मौसम विभाग के अनुसार 11 अक्टूबर को बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, डीडवाना-कुचामन, सीकर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, अलवर और डीग में कुछ-कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बादल छाने और मेघगर्जन की स्थिति भी बन सकती है।

    पिलानी सबसे गर्म, माउंट आबू सबसे ठंडा
    बुधवार को राजस्थान में दिन का तापमान कई शहरों में 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। पिलानी में अधिकतम तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक रहा। वहीं फलोदी में न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 5.2 डिग्री अधिक था।

    दूसरी ओर माउंट आबू में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री रहा, जो सामान्य से 2.6 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 2.4 डिग्री कम है। इस तरह जयपुर में दिन और रात के तापमान में करीब 14 डिग्री का अंतर रहा।

    10 अक्टूबर से बढ़ेगा सर्दी का असर
    राजस्थान में दिन के समय गर्मी बनी हुई है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के असर के बाद तापमान में गिरावट से मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। 10 अक्टूबर के बाद गर्मी से राहत और सर्दी की शुरुआत के संकेत मिलने लगेंगे।

  • राजनांदगांव के 65 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं को ₹19.46 करोड़ की राहत, बिजली बिल समाधान योजना की अवधि बढ़ी

    राजनांदगांव के 65 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं को ₹19.46 करोड़ की राहत, बिजली बिल समाधान योजना की अवधि बढ़ी

    31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि

    राजनांदगांव क्षेत्र में 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को 19.46 करोड़ की राहत 

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड के राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत चार जिलों में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत पुराने बिजली बिलों के बकाये से जूझ रहे 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को लाभ मिला है। योजना के अंतर्गत अब तक मूल बकाया राशि एवं अधिभार (सरचार्ज) में कुल 19 करोड़ 46 लाख रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब इस योजना की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है।

    चार जिलों में व्यापक क्रियान्वयन

          राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में इस योजना का बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके माध्यम से बीपीएल, घरेलू एवं कृषि श्रेणी के पात्र उपभोक्ताओं को पुराने बकाये के निपटारे पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार छूट दी जा रही है। अब तक योजना के तहत 65,062 उपभोक्ता लाभान्वित हो चुके हैं।

    लाभान्वित उपभोक्ताओं की कुल संख्या 

         उपभोक्ता अपने नजदीकी वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में पहुंचकर बकाया राशि का निपटारा कर सकते हैं। बकाया बिजली बिलों का निपटारा कर उपभोक्ता न केवल स्वयं को आर्थिक बोझ से मुक्त कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली सेवा भी सुनिश्चित कर सकते हैं। समय पर बिल का भुगतान और बकाया का निपटारा कर उपभोक्ता बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान कर एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अन्नदाताओं को संबल प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी पुराने बोझ के बिजली सेवाओं का लाभ उठा सकें।  प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से 31,392 निष्क्रिय उपभोक्ता तथा 33,669 पात्र सक्रिय उपभोक्ता शामिल हैं। लाभान्वित उपभोक्ताओं द्वारा अब तक लगभग 5 करोड़ 89 लाख रुपये की बकाया राशि बिजली कंपनी में जमा कराई जा चुकी है, जिससे कंपनी के राजस्व संग्रहण को भी गति मिली है।

    विभिन्न संभागों में सक्रिय भागीदारी

          राजनांदगांव क्षेत्र के सात विद्युत संभागों में उपभोक्ताओं ने इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। कवर्धा संभाग के 24,415 उपभोक्ता, पंडरिया संभाग के 21,234 उपभोक्ता, राजनांदगांव संभाग के 6,023 उपभोक्ता, डोंगरगढ़ संभाग के 5,351 उपभोक्ता, खैरागढ़ संभाग के 3,670 उपभोक्ता, मोहला संभाग के  3,076 उपभोक्ता और डोंगरगांव संभाग के 1,293 उपभोक्ताआंे को लाभान्वित किया गया है।

    66 वितरण केंद्रों और 3 जोनों में विशेष अभियान

          राजनांदगांव क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री हर्ष कुमार मेश्राम ने बताया कि योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए क्षेत्र के 66 वितरण केंद्रों और 03 जोनों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जाकर उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट और बकाया निपटारे की प्रक्रिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

    31 दिसंबर 2026 तक उठाएं लाभ

         मुख्य अभियंता श्री मेश्राम ने 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया बिजली बिल वाले पात्र बीपीएल, घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे विलंब न करें। उपभोक्ता 31 दिसंबर 2026 तक अपने निकटतम विद्युत वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। पुराने बकाये का यह समाधान न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक बोझ से मुक्त करता है, बल्कि उनकी विद्युत सेवाओं को भी सुचारू रखता है।

  • निजी बिल्डरों की परियोजनाओं को टक्कर देता हाउसिंग बोर्ड का आवास, हिमालयन हाइट्स में पूरा हुआ घर का सपना

    निजी बिल्डरों की परियोजनाओं को टक्कर देता हाउसिंग बोर्ड का आवास, हिमालयन हाइट्स में पूरा हुआ घर का सपना

    सेवा संकल्प अभियान

    सेवा की कहानी: हिमालयन हाइट्स में साकार हुआ अपने घर का सपना, जितेंद्र मेहता को मिला सुविधाओं से भरपूर आशियाना

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आम परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में पहल

    वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण और सुविधायुक्त आवास उपलब्ध कराने पर जोर

    प्रीमियम लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी और किफायती दरों से हितग्राही संतुष्ट, निजी बिल्डरों की परियोजनाओं के समकक्ष बताया हाउसिंग बोर्ड का आवास

    रायपुर, 
     हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर और सुविधायुक्त घर हो, जहां वे अपने परिवार के साथ सुकून भरा जीवन बिता सकें। यदि यह घर शहर की अच्छी लोकेशन पर, आवश्यक सुविधाओं के करीब और किफायती दरों पर उपलब्ध हो जाए, तो यह खुशी दुगुनी हो जाती है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आवासीय परियोजनाएं ऐसे ही परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का माध्यम बन रही हैं। राजधानी रायपुर के डूमरतराई स्थित हिमालयन हाइट्स आवासीय परियोजना के निवासी जितेंद्र मेहता की कहानी भी इसी संतुष्टि और भरोसे को सामने लाती है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आवासीय परियोजनाओं में गुणवत्ता, बेहतर लोकेशन, आधुनिक सुविधाओं और नागरिकों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है।

    दो साल पहले लिया फैसला, आज घर में रहकर पूरी तरह संतुष्ट

    हिमालयन हाइट्स के निवासी जितेंद्र मेहता बताते हैं कि उन्होंने लगभग दो वर्ष पहले इस परियोजना में अपना घर बुक कराया था। उस समय उनका सपना था कि परिवार के लिए एक ऐसा घर मिले, जहां बेहतर वातावरण के साथ शहर की सभी जरूरी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हों। आज अपने घर में रहकर वे अपने निर्णय से बेहद खुश और संतुष्ट हैं।

    मेहता कहते हैं, “मैंने करीब दो साल पहले डूमरतराई स्थित हिमालयन हाइट्स में अपना घर बुक कराया था और आज यहां रहकर अपने फैसले से बहुत संतुष्ट हूं। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रीमियम लोकेशन है।”

    रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और मॉल तक आसान पहुंच बनी बड़ी सुविधा

    मेहता के अनुसार हिमालयन हाइट्स की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लोकेशन और बेहतर कनेक्टिविटी है। यहां से रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मुख्य सड़क और शॉपिंग मॉल तक पहुंच आसान है। इससे रोजमर्रा के कामकाज, आवागमन और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी सुविधा मिलती है।

    उनका कहना है कि आवास खरीदते समय केवल मकान की कीमत ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि आसपास उपलब्ध सुविधाएं और शहर से उसकी कनेक्टिविटी भी मायने रखती है। हिमालयन हाइट्स इन अपेक्षाओं पर खरा उतरता है।

    “निजी बिल्डरों की परियोजनाओं से किसी भी तरह कम नहीं है हिमालयन हाइट्स”

    छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की आवासीय परियोजना के प्रति अपना भरोसा व्यक्त करते हुए मेहता कहते हैं, “मेरे अनुभव में यह परियोजना निजी बिल्डरों की परियोजनाओं से किसी भी तरह कम नहीं है। अच्छी लोकेशन पर किफायती दर में अपना घर मिलना हमारे लिए बहुत खुशी की बात है।”

    उनका यह अनुभव दर्शाता है कि शासकीय आवासीय परियोजनाएं भी बेहतर लोकेशन, सुविधाओं और किफायती दरों के कारण नागरिकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती हैं।

    अपने घर का सपना पूरा होने पर जताया सरकार और हाउसिंग बोर्ड का आभार

    जितेंद्र मेहता ने अपने घर का सपना साकार होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने हमारे अपने घर के सपने को साकार किया है। इसके लिए मैं हाउसिंग बोर्ड और छत्तीसगढ़ सरकार का हृदय से धन्यवाद करता हूं।”

    गुणवत्तापूर्ण आवास के साथ बेहतर जीवन की दिशा में प्रयास

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा नागरिकों को बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आवासीय परियोजनाओं में गुणवत्ता, किफायती दरों और सुविधाजनक लोकेशन को महत्व देकर अधिक से अधिक परिवारों के अपने घर के सपने को पूरा करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    डूमरतराई के हिमालयन हाइट्स में रहने वाले जितेंद्र मेहता की संतुष्टि इस बात का उदाहरण है कि अच्छी लोकेशन पर सुविधायुक्त आवास मिलने से परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। उनके लिए हिमालयन हाइट्स केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि वर्षों से संजोए अपने घर के सपने की सुखद परिणति है।

  • रावण के पुतले बनाकर मिसाल पेश कर रहा मुस्लिम परिवार, हरियाणा में 5 पीढ़ियों से निभा रहा परंपरा

    रावण के पुतले बनाकर मिसाल पेश कर रहा मुस्लिम परिवार, हरियाणा में 5 पीढ़ियों से निभा रहा परंपरा

     पानीपत
     पानीपत में मुस्लिम परिवार दशकों से रामलीला के पुतले बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहा है। यमुनानगर में रावलपिंडी से चली कारीगरी चार दशक बाद भी जारी है।

    कुरुक्षेत्र में कैथल से शुरू हुआ हुनर पांचवीं पीढ़ी के हाथों तक पहुंच गया है, जबकि भिवानी में वर्ष 1902 से चली आ रही परंपरा आज भी 100 फीट के रावण का चेहरा गढ़ रही है।

    इन परिवारों के लिए पुतले बनाना केवल रोजगार नहीं। यह उनके बुजुर्गों से मिला हुनर, परिवार की पहचान और उस सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प है, जिसमें दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ समाज को जोड़ने का संदेश भी देता है।

    बदलते समय में पुतलों के आकार और डिजाइन बदले, सामग्री महंगी हुई, काम का तरीका बदला, लेकिन बांस मोड़ने, कागज साधने और रावण के चेहरे में भाव भरने की कला पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रही।

    मुस्लिम परिवार की गंगा-जमीनी तहजीब
    पानीपत में दशहरा सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी तस्वीर पेश करता है, जिसमें मुस्लिम परिवार के हाथों से रामलीला के रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण आकार लेते हैं। असगर अली का परिवार दशकों से इस काम में जुटा है। उनके पिता हाजी अशरफ अली ने पानीपत में पुतले बनाने का काम शुरू किया था।

    अब असगर अली के साथ उनके बेटे भी इस विरासत को आगे बढ़ा है। खास बात यह है कि एमसीए पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर इमरान और बीटेक सिविल इंजीनियर सोहेल भी नौकरी -पेशा दुनिया के विकल्पों के बावजूद पिता के साथ पुतले बनाने में हाथ बंटा रहा है

    50 कारीगरों की टीम रामलीला मैदानों के लिए पुतले कर रही तैयार
    हर वर्ष दशहरे से करीब डेढ़-दो माह पूर्व परिवार पानीपत पहुंचता है। इस बार करीब 50 कारीगरों की टीम अलग-अलग रामलीला मैदानों के लिए पुतले तैयार कर रही है। सेक्टर-25 के लिए 100 फीट, सेक्टर-13-17 के लिए 90 फीट तथा श्री देवी मंदिर और माडल टाउन के लिए 70-70 फीट ऊंचे रावण के पुतले बनाए जा रहे हैं।

    पुतलों का ढांचा बांस की खपच्चियों से तैयार होता है। खुले मैदान में धूप, बारिश और तेज हवा के बीच कारीगर दिन-रात जुटे रहते हैं। असगर परिवार के लिए यह काम केवल कमाई नहीं, बल्कि पानीपत की रामलीला परंपरा और सामाजिक भाईचारे का हिस्सा है।

    यमुनानगर: रावलपिंडी से चली कारीगरी, चार दशक से जारी
    श्री सनातन धर्म मंदिर में इन दिनों रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले आकार ले रहे हैं। इन्हें तैयार कर रहा है महेंद्र मनचंदा का परिवार, जिसके बुजुर्गों ने पाकिस्तान के रावलपिंडी में इस कला की हैं।

    अब उनके बेटे पंकज भी साथ हैं। इस बार रावण 70 फीट, कुंभकर्ण 60 फीट और मेघनाद 50 फीट का होगा। महंगाई ने इस बार पुतलों की लागत बढ़ा दी है। पिछले वर्ष 160 से 170 रुपये किलो मिलने वाली सुतली 300 रुपये किलो हो गई है। करीब 500 रुपये में मिलने वाली कौड़ी 1000 रुपये से अधिक की है, जबकि कपड़े की कीमत भी लगभग दोगुनी हो चुकी है।

    दशहरा ग्राउंड की 70 साल पुरानी परंपरा
    यमुनानगर के दशहरा ग्राउंड में रावण दहन की परंपरा 1950 के दशक से जुड़ी है। पुराने रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1952 में यहां दशहरा दहन हुआ था। इसके बाद यह स्थान दशहरा ग्राउंड के नाम से पहचाना जाने लगा।

    कुरुक्षेत्र में रावण के पुतले बनाने वाले परिवार की कहानी कैथल से शुरू हुई और अब पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच गई है। परिवार की चौथी पीढ़ी से जुड़े शमां खान बताते हैं कि उनके दादा छज्जु राम ने 1962-63 में कैथल में पुतले बनाने शुरू किए थे। इसके बाद उनके पिता मोहम्मद इस्लाम खान ने करीब 1985 में कुरुक्षेत्र में इस काम को आगे बढ़ाया। अब शमां खान और उनके बड़े भाई हाजी इसरार इस कारीगरी में जुटे हैं।

    चौथी पीढ़ी के शाहरुख और सादिक खान भी काम सीख रहे हैं, जबकि पांचवीं पीढ़ी के अजमत और अब्बूजर खान भी इस हुनर से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

    इस बार कुरुक्षेत्र में 101 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है। परिवार कुरुक्षेत्र के साथ कैथल, चीका, पाथड़ा, पिहोवा और खनौरी के लिए भी पुतले तैयार कर रहा है।

    भिवानी: 1920 में दादा ने पुतला बनाना शुरू किया
    भिवानी में रावण के पुतले बनाने की कहानी एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। महेंद्रगढ़ के बास मोहल्ला निवासी 76 वर्षीय मोहनलाल बताते हैं कि उनके दादा शिवदास ने वर्ष 1902 में पुतले बनाने शुरू किए थे।

    फिर उनके पिता मंगलसेन और उसके बाद उन्होंने इस हुनर को आगे बढ़ाया। अब उनके बेटे श्यामलाल, मनीष और हरीश भी इसी काम में जुटे हैं।

    पांचवीं पीढ़ी का कपिल भी बांस पकड़ना सीख रहा है। इस बार भिवानी में 100 फीट का रावण तथा 80-80 फीट के मेघनाद व कुंभकर्ण तैयार किए जा रहे हैं। परिवार हरियाणा के अलावा हिमाचल, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में पुतले बनाता है।

    एक बड़े सेट को तैयार करने में चार लाख रुपये से अधिक खर्च आता है। इस परिवार की कारीगरी को 100 से अधिक मेडल मिल चुके हैं।

  • चेन्नई एयर शो से सबक, काशी में हाईटेक सुरक्षा प्लान तैयार; 170 इमरजेंसी बेड और 97 एंबुलेंस रहेंगी तैनात

    चेन्नई एयर शो से सबक, काशी में हाईटेक सुरक्षा प्लान तैयार; 170 इमरजेंसी बेड और 97 एंबुलेंस रहेंगी तैनात

    लखनऊ
    चेन्नई एयर शो में अक्टूबर 2024 में सामने आई स्थिति से सबक लेते हुए काशी में एयरफोर्स डे एरियल डिस्प्ले की तैयारी की जा रही है। यहां किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए हवा, गंगा और जमीन, तीनों स्तर पर अलग रिस्पॉन्स प्लान रहेगा।

    एनडीआरएफ की विशेषज्ञता भी ली जाएगी। तैयारियों का पूरा खाका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा गया है। प्रजेंटेशन देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए स्टेट इवेंट है। उत्तर प्रदेश डिफेंस एक्सपो और महाकुंभ में अपनी शक्ति और तैयारी दिखा चुका है। उन्होंने उसी स्तर पर एयर शो की तैयारी करने के निर्देश दिए।

    वाराणसी में 22, 24 और 25 अक्टूबर को एयरफोर्स डे एरियल डिस्प्ले प्रस्तावित है। तैयारियों के प्रजेंटेशन में चेन्नई एयर शो के दौरान भीड़ की स्थिति को अलग से रखा गया। इसके बाद काशी के लिए तैयार क्राउड मैनेजमेंट प्लान बताया गया है। इससे साफ है कि चेन्नई में सामने आई स्थिति को ध्यान में रखकर यहां आपात इंतजाम किए जा रहे हैं।

    हवा में हादसा हो या गंगा में, पहले से तय रहेगा रिस्पॉन्स
    एयर शो के दौरान किसी आपात स्थिति में अलग-अलग विभागों को मौके पर व्यवस्था तय करने का इंतजार नहीं करना होगा। कार्ययोजना में हवा, पानी और जमीन पर होने वाली संभावित घटनाओं के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट और कंटिंजेंसी प्लान बनाने की बात है। इसके लिए एनडीआरएफ की विशेषज्ञता ली जाएगी। यानी हवा में कोई आपात स्थिति बने, गंगा में घटना हो या जमीन पर अचानक हालात बिगड़ें, तीनों के लिए पहले से रिस्पॉन्स तय रहेगा।

    इसके लिए एयरफोर्स, रेलवे, रोडवेज, जलमार्ग, जिला प्रशासन और पुलिस को आपस में जोड़ा जाएगा। कार्ययोजना में इन एजेंसियों के बीच समन्वय को प्रमुख जरूरत के रूप में रखा गया है। जरूरत पर दूसरे जिलों से मजिस्ट्रेट बुलाने और अतिरिक्त संसाधन जुटाने का भी प्रस्ताव है।

    तीन कंट्रोल रूम, अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर
    इमरजेंसी में सूचना मिलने से मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए इंटीग्रेटेड, सीएमओ और इमरजेंसी लाइन के तीन कंट्रोल रूम होंगे। अस्पताल तक एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की योजना है। सरकारी और निजी अस्पतालों में 170 इमरजेंसी और 44 आईसीयू बेड चिह्नित किए गए हैं

    मेडिकल बैकअप में आयोजन स्थल से 20 किमी के दायरे के सात सरकारी अस्पताल और 15 किमी के दायरे के सात निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं। 23 ब्लड बैंक भी चिह्नित हैं। वाराणसी में 58 एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा दूसरे जिलों से 39 एंबुलेंस मंगाई जाएंगी। इस तरह जरूरत पड़ने पर 97 एंबुलेंस उपलब्ध होंगी।

    21 समितियों को अलग-अलग जिम्मा
    एयर शो की तैयारियों के लिए 21 समितियां बनाई गई हैं। किसी समिति को घाट संभालने हैं तो किसी को कंट्रोल रूम और मेडिकल कवर।

    आयोजन स्थल, पीए सिस्टम, आमंत्रण और पास, स्वागत और आवास, परिवहन, वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी और मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी भी अलग-अलग बांटी गई है। नमो घाट से अस्सी और रविदास घाट तक के लिए एक घाट प्रबंधन समिति और रामनगर-डोमरी क्षेत्र के लिए दूसरी समिति बनाई गई है।

    पक्षियों पर नजर रखने के लिए भी अलग कमेटी
    तैयारी में एक अलग ‘बर्ड कंट्रोल कमेटी’ भी बनाई गई है। एयर शो के दौरान पक्षियों से जुड़ी चुनौती पर यह समिति काम करेगी। सड़क और गंगा के रास्ते आवाजाही के लिए अलग ‘ट्रांसपोर्ट कमेटी (लैंड एंड रिवर)’ बनाई गई है। कंट्रोल रूम के संचालन और मेडिकल कवर की जिम्मेदारी भी अलग-अलग समितियों को दी गई है।

     

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 470 खिलाड़ियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, अब पुलिस की वर्दी में निभाएंगे नई जिम्मेदारी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 470 खिलाड़ियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, अब पुलिस की वर्दी में निभाएंगे नई जिम्मेदारी

     लखनऊ
    कभी बॉक्सिंग रिंग में प्रतिद्वंद्वी को मात दी तो कभी निशानेबाजी में अचूक निशाना लगाकर पदक जीते। किसी ने हॉकी के मैदान पर पहचान बनाई तो किसी ने तीरंदाजी और एथलेटिक्स में प्रतिभा का लोहा मनवाया। खेल के मैदान में मेहनत से मुकाम हासिल करने वाले ऐसे 470 खिलाड़ी अब उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी में कानून-व्यवस्था संभालने में योगदान देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोक भवन सभागार में आयोजित समारोह में इन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें 43 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस, 295 आरक्षी नागरिक पुलिस और 132 आरक्षी पीएसी शामिल हैं।
     
    पदक जीतने वाले खिलाड़ी अब संभालेंगे नई जिम्मेदारी
    नियुक्ति पाने वालों में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता शामिल हैं। कुशीनगर की बॉक्सर आइस प्रजापति ने नेशनल गेम्स 2024 में स्वर्ण पदक जीता था। मेरठ के निशानेबाज शार्दुल विहान एशियन गेम्स 2018 के रजत पदक विजेता हैं। लखनऊ के हॉकी खिलाड़ी आमिर अली एशियन चैंपियनशिप 2024 और मुरादाबाद के निशानेबाज मोहित पाल नेशनल चैंपियनशिप 2025 के स्वर्ण पदक विजेता हैं। चारों को उपनिरीक्षक बनाया गया है।
     
    बॉक्सिंग से तीरंदाजी तक, प्रतिभाओं को मिला अवसर
    बैडमिंटन खिलाड़ी हिमांशी तिवारी, कराटे खिलाड़ी प्रणय शर्मा और बॉक्सर अभिषेक यादव को भी उपनिरीक्षक नियुक्त किया गया है। तीरंदाज रागिनी मार्को, एथलीट तान्या चौधरी और वॉलीबॉल खिलाड़ी अनन्या राय को नियुक्ति पत्र मिले हैं। बरेली की भारोत्तोलक सुहानी राजपूत और लखनऊ की साइक्लिस्ट तनु भारती को आरक्षी बनाया गया है। कबड्डी खिलाड़ी अमरेश, हॉकी खिलाड़ी प्रतिमा सरोज और बॉक्सर अभय सिंह राठौर भी नियुक्ति पाने वालों में शामिल हैं।
     
    950 खिलाड़ियों को मिल चुकी नौकरी
    योगी सरकार की कुशल खिलाड़ी योजना के तहत वर्ष 2022 से अब तक 950 खिलाड़ियों को पुलिस विभाग में नौकरी मिल चुकी है। उत्तर प्रदेश पुलिस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड इन खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि नौकरी के साथ खेलों में उनका प्रदर्शन जारी रहे।
     
    एक लाख सरकारी नौकरियों के महाअभियान में 7,142 को नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक लाख सरकारी नौकरियां देने के महाअभियान के तहत सितंबर से नियुक्ति पत्र वितरण का सिलसिला जारी है। 19 सितंबर को विभिन्न विभागों के 818 चयनित अभ्यर्थियों, 20 सितंबर को 912 पुलिसकर्मियों, 22 सितंबर को 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों तथा 28 सितंबर को 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इन चार कार्यक्रमों में 6,672 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले। आठ अक्टूबर को 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद इन पांच कार्यक्रमों में नियुक्ति पाने वालों की कुल संख्या 7,142 हो गई है।

  • नगर पालिका एव त्रिस्तरीय पंचायत के आगामी  आम/उप निर्वाचन माह दिसम्बर 2026 की तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयुक्त ने संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक ली

    नगर पालिका एव त्रिस्तरीय पंचायत के आगामी आम/उप निर्वाचन माह दिसम्बर 2026 की तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयुक्त ने संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक ली

    नगर पालिका एव त्रिस्तरीय पंचायत के आगामी  आम/उप निर्वाचन माह दिसम्बर 2026 की तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयुक्त ने संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक ली

    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तैयारी की समीक्षा

    रायपुर 
    आयोग द्वारा स्थानीय निकायो के निर्वाचन के संबंध में निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी किया गया है, निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 30 नवम्बर 2026 को किया जायेगा। आगामी आम एवं उप निर्वाचन की तैयारियों के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग में राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से रिक्त पदों, आरक्षण, परिसीमन की अद्यतन जानकारी ली, साथ ही निर्वाचन हेतु आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सोनमणि बोरा, सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भीम सिंह, सचिव नगरीय प्रशासन अविनाश चंपावत, संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती प्रियंका महोबिया उपस्थित रहे।

        पंचायत निर्वाचन – सारंगढ़-बिलाईगढ़, कोरिया एवं कोंडागांव जिलों की 09 ग्राम पंचायतों में सरपंच तथा 126 पंच पदों का आम निर्वाचन प्रस्तावित हैं तथा जनपद पंचायत सदस्य का 01 रिक्त पद, सरपंच के 92 रिक्त पदों, पंच के 721 पदों के लिए उपनिर्वाचन कराया जाना है। 

        नगरीय निकाय निर्वाचन – नवगठित 02 नगर पंचायत तमनार, जिला रायगढ़ व नगर पंचायत बड़ी करेली, जिला धमतरी के साथ साथ नगरपालिक निगम भिलाई-चरौदा, रिसाली, जामुल एवं बिरगांव सहित ऐसे 15 नगरीय निकाय जिसमें आम निर्वाचन सम्पन्न कराया जाना है। इसके साथ ही एक अध्यक्ष पद (नगर पंचायत, बिलाईगढ़) एवं अलग-अलग निकायों के 06 वार्ड पार्षद का उप निर्वाचन भी कराया जाना है।

        राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सभी संबंधित विभागों एवं जिला प्रशासन को निर्वाचन से संबंधित समस्त तैयारियों को समन्वित रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि आयोग का उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सुचारू निर्वाचन सुनिश्चित करना है इसलिए निर्वाचन संबधी समस्त अपेक्षित कार्यवाही समय सीमा में पूर्ण कर ली जाए।

  • सरकारी स्कूल की प्रधानपाठिका पर बच्चों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    सरकारी स्कूल की प्रधानपाठिका पर बच्चों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    बालोद.

    छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सरकारी स्कूल की प्रधानपाठिका को अपने ही बेटे और बेटी की शिकायत के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बच्चों ने अपनी मां पर शारीरिक प्रताड़ना, मारपीट और गंदी गालियां देने का आरोप लगाया था।

    मामले की जांच बाल कल्याण समिति द्वारा किए जाने के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक, शबाना बानो, ग्राम परसदा स्थित शासकीय स्कूल में प्रधानपाठिका के पद पर पदस्थ हैं। उनके बेटा और बेटी ने अपनी मां के खिलाफ शिकायत करते हुए लंबे समय से प्रताड़ित किए जाने की बात कही थी। बच्चों ने शिकायत में शारीरिक प्रताड़ना के साथ मारपीट और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे।

    शिकायत मिलने के बाद मामले को बाल कल्याण समिति के समक्ष रखा गया। समिति की जांच के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। जांच और शिकायत के आधार पर बालोद कोतवाली पुलिस ने प्रधानपाठिका शबाना बानो को गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।