Author: NewseDay

  • ESIC बीमित कामगारों के लिए बड़ी पहल, झारखंड के CHC-PHC में मिलेगा इलाज; हर साल ₹1,000 की मदद

    ESIC बीमित कामगारों के लिए बड़ी पहल, झारखंड के CHC-PHC में मिलेगा इलाज; हर साल ₹1,000 की मदद

    रांची
    राज्य सरकार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में भी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईएस) से बीमित कामगाराें का इलाज होगा। वहीं, ईएसआईएस के अस्पतालों में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना तथा अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत इलाज हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसे लेकर पहल की है।

    कैबिनेट की स्वीकृति के बाद यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इस पहल को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बुधवार को श्रम विभाग एवं कर्मचारी राज्य बीमा निगम के पदाधिकारियों के साथ बैठक की।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि ईएसआइसी की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अधिक से अधिक बीमित कामगारों एवं उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।

    बैठक में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रांची एवं जमशेदपुर स्थित ईएसआइसी केंद्रों में अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना एवं आयुष्मान भारत के लाभुकों के इलाज की संभावना पर भी चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इन योजनाओं के लाभुकों के इलाज के लिए दावा की राशि झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।

    बताते चलें कि वर्तमान में झारखंड में ईएसआइसी की 21 डिस्पेंसरी संचालित हैं, जहां बीमित व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब राज्य सरकार के सीएचसी एवं पीएचसी के नेटवर्क को ईएसआइसी चिकित्सा सेवाओं से जोड़कर इसकी पहुंच राज्य के अधिकाधिक क्षेत्रों तक विस्तार किया जाएगा।

    बैठक में श्रम सचिव जितेंद्र कुमार सिंह, अपर सचिव संदीप कुमार दोराईबुरू, संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद तथा ईएसआइसी, झारखंड के क्षेत्रीय निदेशक शिवेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

    प्रति बीमित व्यक्ति एक हजार रुपये प्रतिवर्ष की मिलेगी वित्तीय सहायता
    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईएसआईसी द्वारा संबद्ध प्रति बीमित व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रतिवर्ष की दर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लगभग 1.50 लाख बीमित व्यक्तियों तथा उनके परिवारों सहित करीब छह लाख लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलने की संभावना है।

    ईएसआईसी के अंतर्गत पात्र बीमित व्यक्तियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को नियमानुसार चिकित्सा लाभ, बीमारी हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, दिव्यांगता हितलाभ, आश्रित हितलाभ सहित अन्य वैधानिक सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त होते हैं।

  • 5 नवंबर तक राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश, जिलावार प्रत्येक प्रकरण की हुई समीक्षा

    5 नवंबर तक राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश, जिलावार प्रत्येक प्रकरण की हुई समीक्षा

    रायपुर

    उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने आज महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में नक्सल प्रकरणों की वापसी, आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित जवानों एवं नागरिकों के परिवारों को दी जा रही सहायता की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नक्सल प्रकरणों में निरुद्ध एवं न्यायालयों में प्रक्रियाधीन लोगों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाए। गंभीर अपराध, जनहानि तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) से संबंधित मामलों को छोड़कर अन्य पात्र प्रकरणों की वापसी के लिए निर्धारित प्रक्रिया को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रकरणों की वापसी की कार्रवाई नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाए।

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बैठक में सभी जिलों से प्राप्त प्रकरण वापसी संबंधी आवेदनों की जिलावार एवं प्रकरणवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक प्रकरण की वर्तमान स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने प्रकरण वापसी के लिए प्रस्तावित संपूर्ण प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसे जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित जिलों में जिला स्तरीय प्रकरण वापसी समितियों की बैठक अगले 15 दिनों के भीतर आयोजित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही राज्य स्तरीय समिति की बैठक 5 नवंबर तक संपन्न कराने के निर्देश दिए।

    अन्य राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के निवासियों की वापसी और पुनर्वास पर विशेष जोर

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अन्य राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के निवासियों को वापस राज्य में लाने की प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे व्यक्तियों की वापसी के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया जाए। राज्य लौटने वाले आत्मसमर्पित व्यक्तियों को पुनर्वास केंद्रों में रखकर उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप आजीविकापरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर सकें।

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अब तक लगभग 900 पुनर्वासितों के राज्य वापस लौटने पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने सभी पुनर्वासितों को मोबाइल फोन और प्रशिक्षण किट उपलब्ध कराने के साथ उनके आवश्यक पहचान पत्र एवं राशन कार्ड बनवाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुनर्वास से संबंधित व्यवस्थाओं के साथ हथियारों की मैपिंग के संबंध में भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    पुनर्वासितों को भूमि आवंटन, रोजगार, आवास और आर्थिक सहायता का पूरा लाभ मिले

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने शासन की पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली सहायता एवं सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण पर अलग-अलग चर्चा करते हुए भूमि आवंटन, रोजगार उपलब्ध कराने, आवास वितरण और अन्य पुनर्वास सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को मिलने वाले सभी लाभ समय पर उपलब्ध कराए जाएं और कोई भी पात्र पुनर्वासित सहायता से वंचित न रहे। उन्होंने पुनर्वासितों को मिलने वाली इनाम राशि के लंबित भुगतान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रत्येक लंबित प्रकरण की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले महीने आयोजित होने वाली समीक्षा बैठक से पहले पुनर्विचार से संबंधित सभी मामलों पर चर्चा कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने सभी पात्र पुनर्वासितों को प्रोत्साहन राशि वितरित किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों की सराहना की। साथ ही सभी पुनर्वासितों के आयुष्मान कार्ड एवं राशन कार्ड अनिवार्य रूप से बनवाने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा से संबंधित योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने पुनर्वास से संबंधित जानकारियों को सार्वजनिक करने के निर्देश भी दिए, जिससे आमजन को शासन द्वारा किए जा रहे पुनर्वास प्रयासों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त हो सके।

    इलवद पंचायत के लंबित विकास कार्यों की समीक्षा, ग्रामीणों की मांग के अनुरूप हों कार्य स्वीकृत

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने इलवद पंचायत के अंतर्गत लंबित विकास कार्यों की जिलावार समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक प्रस्तावित एवं लंबित कार्य की स्वीकृति की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की स्वीकृति के समय यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्य स्थानीय ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं और उनकी मांग के अनुरूप हों। उन्होंने ग्रामीणों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

    नक्सल हिंसा में शहीद जवानों के परिजनों और प्रभावित नागरिकों को मिले सभी निर्धारित लाभ

     उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने वर्ष 2001 से अब तक नक्सल घटनाओं में शहीद हुए जवानों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति एवं अन्य निर्धारित लाभ प्रदान किए जाने की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अब तक की कार्रवाई पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए लंबित प्रकरणों पर अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र परीक्षण कर नियमानुसार निराकरण किया जाए, ताकि पात्र परिजनों को निर्धारित सहायता एवं सुविधाएं प्राप्त हो सकें।

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने नक्सल घटनाओं में जान गंवाने वाले आम नागरिकों की जानकारी भी ली। उन्होंने मृत नागरिकों के आश्रित परिवारों को दी जा रही आर्थिक सहायता एवं अन्य लाभों की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी पात्र परिवारों को अनिवार्य रूप से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने नक्सल घटनाओं में घायल जवानों एवं घायल नागरिकों को प्रदान की जा रही सहायता, उपचार और अन्य सुविधाओं की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए।

    शहीदों की स्मृति में बनेंगे जनोपयोगी स्मारक, बड़े घटनास्थलों पर दर्ज होगी वीर सपूतों की गाथा

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने नक्सल घटनाओं में शहीद जवानों एवं जान गंवाने वाले आम नागरिकों की स्मृति में स्मारक निर्माण की योजना की समीक्षा की। उन्होंने स्मारकों के लिए तैयार किए गए मानक डिजाइन पर चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि इन स्मारकों को केवल स्मृति स्थल तक सीमित न रखकर जनोपयोगी स्वरूप भी दिया जाए। उन्होंने स्मारकों को यात्री प्रतीक्षालय एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के केंद्रों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को भी इनका लाभ मिल सके।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर नक्सल घटनाओं में बड़ी संख्या में जवान या आम नागरिकों की मृत्यु हुई है, वहां बड़े स्मारक बनाए जाएं। ऐसे स्मारक स्थलों पर लोगों के रुकने और ठहरने की समुचित व्यवस्था भी की जाए। इसके साथ ही संबंधित नक्सल घटना, शहीद जवानों और मृत नागरिकों के संबंध में संपूर्ण जानकारी स्मारक स्थल पर प्रदर्शित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां बस्तर के वीर सपूतों के बलिदान और इतिहास से परिचित हो सकें।

    शहीदों के नाम पर होंगे पंचायत भवन, स्कूल मैदान, मार्ग और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने नक्सल घटनाओं में शहीद हुए जवानों की स्मृति को स्थायी सम्मान देने के लिए सार्वजनिक स्थलों के नामकरण संबंधी कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी भवन, मार्ग, चौक-चौराहों, बाजार और स्कूल मैदान सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थलों का नामकरण शहीदों के नाम पर करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई अगले महीने तक पूर्ण की जाए। उन्होंने गांवों में शहीद स्मारकों के निर्माण की प्रगति की जानकारी लेते हुए निर्धारित मानक प्रारूप के अनुरूप इनका निर्माण जल्द से जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

    बस्तर के रासायनिक उर्वरक मुक्त गांवों की होगी पहचान, किसानों को मिलेगा उत्पादों का उचित मूल्य

     उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बस्तर के ऐसे गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां अब तक खेती में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं हुआ है। उन्होंने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर धान उपार्जन प्रारंभ होने से पहले आवश्यक व्यवस्थाओं से जोड़ा जाए, ताकि वहां उत्पादित कृषि उपज का किसानों को उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने इस पहल में संबंधित गांवों की महिला स्वसहायता समूहों को भी जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय कृषि उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाकर उनके लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित किए जाएं।

    मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के निर्देश

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने नवरात्रि के अवसर पर मां दंतेश्वरी की आराधना एवं दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं तथा उनकी सुरक्षा के लिए समुचित इंतजाम किए जाएं।

    बैठक में प्रमुख सचिव सु निहारिका बारीक, गृह सचिव सु नेहा चंपावत, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  एस.आर.पी. कल्लूरी एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  विवेकानंद सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बस्तर, कोण्डागांव, कबीरधाम, राजनांदगांव, महासमुंद, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, दुर्ग एवं बलरामपुर जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए

  • 1.10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित भवन में होगा प्रारंभिक संचालन, चराईडांड में 13.93 करोड़ रुपये से बनेगा स्थायी हाईटेक कैंपस

    1.10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित भवन में होगा प्रारंभिक संचालन, चराईडांड में 13.93 करोड़ रुपये से बनेगा स्थायी हाईटेक कैंपस

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियों की ओर अग्रसर है। जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम कंडोरा में फिजियोथेरेपी कॉलेज शुरू करने की तैयारी की जा रही है। करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से निर्मित हाईस्कूल भवन में प्रारंभिक रूप से कॉलेज का संचालन किया जाएगा। कॉलेज में 50 सीटों पर इसी शैक्षणिक सत्र से प्रवेश प्रारंभ करने की तैयारी है। इस पहल से जिले के विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा।

    कंडोरा में निर्मित हाईस्कूल भवन में हाईस्कूल संचालन की अनुमति नहीं मिलने के बाद शासन द्वारा उपलब्ध अधोसंरचना का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए यहां फिजियोथेरेपी कॉलेज संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इससे एक ओर पहले से निर्मित भवन का उपयोग सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर जिले में स्वास्थ्य शिक्षा के नए अवसर विकसित होंगे। मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में यह पहल जशपुर को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    50 सीटों पर प्रवेश की तैयारी, विद्यार्थियों को जिले में ही मिलेगा उच्च शिक्षा का अवसर

    फिजियोथेरेपी कॉलेज की शुरुआत से जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने के नए अवसर मिलेंगे। प्रारंभिक रूप से 50 सीटों के साथ कॉलेज संचालन की तैयारी की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी की व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए अन्य शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

    कॉलेज के संचालन से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवश्यक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी सहायता मिलेगी। विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    फिजियोथेरेपी उपचार सुविधाओं के विस्तार से मरीजों को भी मिलेगा लाभ

    जिले में फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त होगा। वर्तमान में जिले के अनेक मरीजों को फिजियोथेरेपी उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर फिजियोथेरेपी शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार होने से ऐसे मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

    कॉलेज के माध्यम से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने के साथ फिजियोथेरेपी सेवाओं के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

    चराईडांड में 13.93 करोड़ रुपये से बनेगा स्थायी हाईटेक कैंपस

    फिजियोथेरेपी कॉलेज के लिए चराईडांड के पास करीब 13 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत से स्थायी हाईटेक कैंपस विकसित करने की योजना है। स्थायी परिसर के निर्माण तक कंडोरा में पहले से तैयार भवन का उपयोग कॉलेज संचालन के लिए किया जाएगा।

    स्थायी कैंपस विकसित होने से भविष्य में विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक अधोसंरचना और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में जिले की क्षमता का विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कंडोरा में फिजियोथेरेपी कॉलेज की प्रस्तावित शुरुआत इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे जिले के युवाओं को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के नए अवसर मिलने के साथ भविष्य में स्थानीय स्तर पर फिजियोथेरेपी उपचार सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी।

  • देश के प्रमुख निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश, नए निवेश और औद्योगिक विस्तार में मिलेगा पूरा सहयोग

    देश के प्रमुख निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश, नए निवेश और औद्योगिक विस्तार में मिलेगा पूरा सहयोग

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई गति देने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के शीर्ष नेतत्व के साथ वन-टू-वन बैठकें की। फार्मा, टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर, औद्योगिक गैस, ट्रांसमिशन, टायर, आईटी और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर हुई इन बैठकों में उद्योग समूहों ने मध्यप्रदेश में नई इकाईयाँ स्थापित करने और मौजूदा निवेश के विस्तार में रूचि दिखाई।

    कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक समूहों द्वारा नवकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, केमिकल तथा अन्य क्षेत्रों में लगभग 90 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तावों से प्रदेश में 14,375 रोजगार सृजित होने की संभावना है।

    निवेश प्रस्तावों में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 71 हजार 289 करोड़, टेक्सटाइल्स में 5 हजार करोड़, फार्मास्यूटिकल्स में 2 हजार 280 करोड़, रियल एस्टेट एक हजार करोड़, सूचना प्रौद्योगिकी में 200 करोड़, केमिकल उद्योग के क्षेत्र में 400 करोड़ का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, विकसित हो रही अधोसंरचना और कुशल कार्यबल उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को भूमि, बिजली, पानी, सड़क, ऊर्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुगमता से उपलब्ध हों। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने उद्योग जगत को मध्यप्रदेश में नए निवेश और विस्तार के लिए आमंत्रित करते हुए आश्वस्त किया कि उन्हें इकाइयाँ लगाने में पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में आयोजित ‘मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद’ कार्यक्रम अंतर्गत आरपीजी, वेलस्पन, आईनॉक्स, भिलोसा, इप्का और सन फार्मा के प्रमुखों से वन-टू-वन चर्चा की। बैठकों में विभिन्न क्षेत्रों की निवेश योजनाओं, संभावित स्थलों, परियोजनाओं के क्रियान्वयन, औद्योगिक सुविधाओं और आवश्यक प्रोत्साहनों पर विचार-विमर्श हुआ।

    आरपीजी समूह ने ट्रांसमिशन, टायर और आईटी क्षेत्र में दर्शाई रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका की मुलाकात में विद्युत पारेषण, टायर निर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। गोयनका ने जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश करने की इच्छा व्यक्त की। प्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति और निवेश-अनुकूल नीतियों के आधार पर नई इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम, सागर और जबलपुर संभावित स्थलों के रूप में चर्चा में आए। समूह ने इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और आवश्यकताओं का आंकलन करने में रुचि दिखाई। उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क की प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के उपयोग तथा संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर व्यावसायिक संभावनाओं का आंकलन करने पर भी संवाद हुआ।

    समूह की प्रमुख कंपनियों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। आरपीजी समूह का मध्यप्रदेश से पुराना जुड़ाव है और केईसी इंटरनेशनल ने प्रदेश की विद्युत पारेषण अधोसंरचना के विकास में योगदान दिया है।

    वेलस्पन समूह टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क में निवेश की संभावनाएं तलाशेगा

    वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से चर्चा में पाइप निर्माण, टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचनात्मक क्षेत्र की निवेश योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। समूह ने मिल की भूमि पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में निवेश तथा प्रस्तावित पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। स्थल का निरीक्षण करने के लिए समूह अपनी टीम भेजेगा।

    बैठक में वेलस्पन कॉर्प के एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में 150 करोड़ रूपये के निवेश और सिंटेक्स के 700 करोड़ रूपये के प्रगतिरत निवेश पर भी चर्चा हुई। समूह की रायसेन और देवास में उपस्थिति तथा पाइप निर्माण एवं टेक्सटाइल गतिविधियों पर संवाद हुआ। वेलस्पन समूह प्रदेश में सड़क एवं राजमार्ग निर्माण सहित अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं से भी जुड़ेगा। जल और अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजनाओं में समूह की सहभागिता की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    अति उच्च शुद्धता वाला सेमीकंडक्टर – ग्रेड सिलेन गैस संयंत्र करेगा स्थापित

    आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ जैन से औद्योगिक गैस एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश पर चर्चा हुई। कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार मध्यप्रदेश में 1,260 करोड़ रूपये के निवेश से देश का पहला अति-उच्च शुद्धता वाला सेमीकंडक्टर-ग्रेड सिलेन गैस संयंत्र स्थापित करने की योजना है। अप्रैल 2029 से उत्पादन प्रारंभ करना प्रस्तावित है। परियोजना से लगभग 350 करोड़ रूपये के आयात प्रतिस्थापन और 320 से अधिक स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

    संवाद में नवीनतम तकनीक से सेमीकंडक्टर उद्योग में उपयोग होने वाली विशेष गैसों के उत्पादन के लिए लगभग 1,200 करोड़ रूपये के संभावित निवेश पर भी चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 40 एकड़ भूमि की आवश्यकता जताई गई। प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और गेल के आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से गैस की आपूर्ति से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    निवेश प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता, ब्याज अनुदान, प्रति यूनिट 2 रूपये की बिजली सब्सिडी, विद्युत शुल्क में छूट, अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज और समयबद्ध स्वीकृतियों जैसे विषय चर्चा में रहे। कंपनी वर्ष 2000 से इंदौर और भोपाल में कार्यरत है। जून 2023 में प्रदेश में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने के साथ कंपनी नई ऑन-साइट गैस उत्पादन इकाइयों और नर्मदापुरम में सौर ऊर्जा से जुड़ी नाइट्रोजन पाइपलाइन की दिशा में भी कार्य कर रही है।

    भिलोसा ने 7,500 करोड़ रूपये के चरणबद्ध निवेश की प्रस्तुत की योजना

    प्रबंध निदेशक भिलोसा इंडस्ट्रीज संदीप जैन ने पीएम मित्र पार्क, धार को केंद्र में रखते हुए मध्यप्रदेश में चरणबद्ध रूप से कुल 7,500 करोड़ रूपये के निवेश और करीब 3,750 रोजगार के अवसरों की योजना प्रस्तुत की। कंपनी ने प्रारंभिक रूप से लगभग 2,500 करोड़ रूपये के पूंजीगत निवेश से कार्य शुरू करने तथा समग्र निवेश को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने की जानकारी दी।

    पीएम मित्र पार्क में टेक्सटाइल निर्माण के लिए 200 एकड़ और सहायक इकाइयों के लिए अतिरिक्त 100 एकड़ भूमि के संबंध में चर्चा हुई। भूमि के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई गई। कंपनी ने वर्ष 2028 से उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा है।

    धार–इंदौर क्षेत्र में पॉलिस्टर यार्न, फायबर, निटेड फैब्रिक और मैन-मेड फायबर आधारित नॉन-गारमेंट फैब्रिक के एकीकृत विनिर्माण तथा सूक्ष्म एवं लघु सहायक इकाइयों के विकास की संभावनाओं पर भी संवाद हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समूह को अनुकूल नीतियों, पारदर्शी प्रक्रियाओं और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

    इप्का के देवास और उज्जैन में 1,080 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव

    इप्का लैबोरेटरीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी अजीत कुमार जैन से देवास और विक्रम उद्योगपुरी, उज्जैन में प्रस्तावित परियोजनाओं पर चर्चा हुई। कंपनी का देवास में लगभग 1,000 करोड़ रूपये और विक्रम उद्योगपुरी में लगभग 80 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव है। दोनों परियोजनाओं से लगभग 1,500 रोजगार सृजन की संभावना है, जिनमें देवास से लगभग 1,000 और विक्रम उद्योगपुरी से लगभग 500 रोजगार शामिल हैं।

    बैठक में रतलाम में विकसित हो रहे बायोटेक पार्क से कंपनी के जुड़ने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। क्षेत्र में बड़ा भूमि बैंक उपलब्ध है और पास से ही 8 लेन एक्सप्रेस-वे गुजरता है। प्रस्तावित परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सहयोग पर भी संवाद हुआ। इप्का की मध्यप्रदेश में रतलाम, पीथमपुर, इंदौर, भोपाल और देवास में 7 विनिर्माण सुविधाएं हैं, जिनसे लगभग 7,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़े हैं।

    सन फार्मा की पीथमपुर परियोजना और सौर ऊर्जा प्रकल्प पर हुई विस्तृत चर्चा

    सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप सांघवी से पीथमपुर में लगभग 3,000 करोड़ रूपये की ग्रीनफील्ड परियोजना के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। परियोजना के अंतर्गत भारत, अमेरिका, यूरोप और अन्य बाजारों के लिए औषधि फॉर्मूलेशन की विनिर्माण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे 1,750 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जिनमें लगभग 1,250 प्रत्यक्ष और 500 अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।

    पीथमपुर के सेक्टर-7 में भूमि संबंधी विषयों, स्थानीय बाधाओं के निराकरण, आवश्यक अनुमतियों और अधोसंरचना पर विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित प्रक्रियाओं को सुगम बनाने तथा दिसंबर 2026 तक जल, बिजली और सड़क जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। प्लॉट हस्तांतरण एवं पुनःपंजीकरण शुल्क में छूट तथा प्रोत्साहन संबंधी आदेश में आवश्यक संशोधन पर भी चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंपनी के बड़े सौर ऊर्जा प्रकल्प के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान और आवंटन में सहयोग का आश्वासन दिया। सौर ऊर्जा परियोजना के प्रोत्साहनों, अधोसंरचना और अनुमतियों पर भी संवाद हुआ। कार्यकारी अध्यक्ष सांघवी ने रतलाम में प्रस्तावित फार्मा पार्क में रुचि जताते हुए पार्क की स्थापना होने पर निवेश की संभावनाओं पर विचार करने की इच्छा व्यक्त की। सन फार्मा देवास में वर्ष 1984 से कार्य कर रही है और मध्यप्रदेश के फॉर्मूलेशन एवं एपीआई संयंत्रों में लगभग 3,958 कर्मचारी कार्यरत हैं।

     

  • चित्रकूट में बनेगा बचपन डे केयर सेंटर, योगी सरकार ने जारी की 3 करोड़ रुपये की पहली किश्त

    चित्रकूट में बनेगा बचपन डे केयर सेंटर, योगी सरकार ने जारी की 3 करोड़ रुपये की पहली किश्त

    लखनऊ

    दिव्यांगजनों के कल्याण, विकास और सुगम पुनर्वास की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने चित्रकूट जनपद में बचपन डे केयर सेंटर के भवन निर्माण के लिए प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस परियोजना की कुल लागत
    5 करोड़ 62 लाख 82 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसके सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 3 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त अवमुक्त कर दी गई है। 

    दिव्यांग बच्चों के विकास और पुनर्वास को मिलेगी बेहतर आधारभूत सुविधा

    योगी सरकार लगातार दिव्यांगजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योजनाओं को धरातल पर उतार रही है। चित्रकूट में बचपन डे केयर सेंटर की स्थापना इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे दिव्यांग बच्चों के कल्याण, विकास, देखभाल और सुगम पुनर्वास के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं विकसित होने की उम्मीद है।

    5.62 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा बचपन डे केयर सेंटर

    मूल्यांकन समिति की संस्तुति के आधार पर सेंटर के भवन निर्माण की कुल परियोजना लागत 562.82 लाख रुपये (5.62 करोड़ रुपये से अधिक) निर्धारित की गई है। शासन की ओर से जारी स्वीकृति के अनुसार निर्माण कार्य सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही प्रारंभ किया जाएगा। निर्माण के दौरान निर्धारित गुणवत्ता, मानकों और विशिष्टियों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और कार्यदायी संस्था की होगी।

    सभी जरूरी अनापत्तियों के बाद ही शुरू होगा सेंटर का निर्माण

    सरकार ने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक वैधानिक अनापत्तियां और पर्यावरणीय क्लियरेंस प्राप्त करना भी अनिवार्य किया है। इससे परियोजना को निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप पूरा करने में मदद मिलेगी।
    इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव राकेश कुमार यादव ने निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश को आधिकारिक स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्वीकृत धनराशि का आहरण और व्यय आवश्यकता के अनुसार किश्तों में तथा निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुरूप किया जाएगा।

  • करनाल में निरंकारी समागम को लेकर रेलवे का फैसला, 34 ट्रेनें यहां रुकेंगी

    करनाल में निरंकारी समागम को लेकर रेलवे का फैसला, 34 ट्रेनें यहां रुकेंगी

    करनाल.

    संत निरंकारी मंडल के 79वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय संत समागम को लेकर रेलवे ने बड़ी तैयारी की है। समागम 23 से 27 अक्टूबर तक पानीपत के समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर होगा।

    यह स्थल दिल्ली-अंबाला रेलखंड पर भोडवाल माजरी स्टेशन से सटा हुआ है। इसी कारण रेलवे ने समागम अवधि के दौरान 35 अप और 35 डाउन ट्रेनों का यहां पर दो मिनट का अस्थायी ठहराव देने का प्रस्ताव भेजा था। उत्तर रेलवे ने 20 सितंबर से 31 अक्टूबर तक 34 ट्रेनों के ठहराव को मंजूरी दे दी है।

    34 ट्रेनों को मिला दो मिनट का अस्थायी ठहराव
    समागम को देखते हुए रेलवे के सामने 35 अप और 35 डाउन ट्रेनों को भोडवाल माजरी स्टेशन पर दो मिनट रोकने का प्रस्ताव भेजा गया था। उत्तर रेलवे ने फिलहाल 34 ट्रेनों के ठहराव को मंजूरी दी है।

    करनाल के यात्रियों को भी मिलेगा सीधा फायदा
    प्रस्तावित ट्रेनों में शामिल अधिकांश गाड़ियां करनाल रेलवे स्टेशन पर पहले से रुकती हैं। इससे करनाल और आसपास के श्रद्धालु इन ट्रेनों से यात्रा कर भोडवाल माजरी उतर सकेंगे और वहां से समागम स्थल तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

    कई प्रमुख ट्रेनें सूची में शामिल
    भोडवाल माजरी में अस्थायी ठहराव मिलने वाली ट्रेनों में कई महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। इनमें 15707 कटिहार-अमृतसर, 12471 स्वराज, 12473 सर्वोदय, 12217 संपर्क क्रांति, 12497 शान-ए-पंजाब, 12925 पश्चिम, 14507 दिल्ली-फाजिल्का, 12715 सचखंड और 12057 जनशताब्दी प्रमुख हैं। इसके अलावा 20433 जम्मू मेल, 18101 टाटा-जम्मू, 12413 गालताधाम पूजा, 12445 उत्तर संपर्क क्रांति, 12449 गोवा संपर्क क्रांति, 11057 मुंबई-अमृतसर, 12919 मालवा, 11077 झेलम, 12311 नेताजी और 22455 कालका एक्सप्रेस भी सूची में शामिल हैं।

    करनाल स्टेशन पर पहले से रुकती हैं ज्यादातर ट्रेनें
    इनमें से अधिकांश ट्रेनों का करनाल रेलवे स्टेशन पर पहले से ठहराव है। ऐसे में करनाल के यात्री इन ट्रेनों में टिकट लेकर भोडवाल माजरी उतर सकते हैं और वहां से समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल तक पहुंच सकते हैं।

    हिमाचल एक्सप्रेस के ठहराव की मांग अभी बाकी
    रेलवे के फैसले के बाद भी संत निरंकारी मंडल की एक अहम मांग पूरी होना बाकी है। मंडल ने हिमाचल एक्सप्रेस को भी भोडवाल माजरी स्टेशन पर अस्थायी ठहराव देने की मांग की है।

    रात के समय यात्रियों को हो सकती है परेशानी
    संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंद्र सुखीजा के अनुसार इस संबंध में उत्तर रेलवे के चीफ पैसेंजर ट्रैफिक मैनेजर को पत्र भेजा गया है। मंडल का कहना है कि हिमाचल क्षेत्र से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह ट्रेन बेहद महत्वपूर्ण है। 14054 डाउन हिमाचल एक्सप्रेस दिल्ली से आते हुए रात करीब 2 बजे करनाल पहुंचती है, जबकि 14053 अप हिमाचल एक्सप्रेस दिल्ली की ओर जाते समय करीब 1:30 बजे करनाल में रुकती है। यदि भोडवाल माजरी पर इसका ठहराव नहीं मिलता है तो हिमाचल और करनाल के हजारों श्रद्धालुओं को रात के समय करनाल या पानीपत उतरकर सड़क मार्ग से समालखा जाना पड़ सकता है।

    श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर रेलवे पर नजर
    79वें अंतरराष्ट्रीय संत समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। रेलवे द्वारा भोडवाल माजरी पर अतिरिक्त ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि मंडल की मांग के बाद हिमाचल एक्सप्रेस को भी अस्थायी ठहराव की मंजूरी मिलती है या नहीं।

  • बिहार जाने वाली फ्लाइट्स के किराए ने छुआ आसमान, दीपावली-छठ में दिल्ली-मुंबई से दरभंगा टिकट ₹30 हजार पार

    बिहार जाने वाली फ्लाइट्स के किराए ने छुआ आसमान, दीपावली-छठ में दिल्ली-मुंबई से दरभंगा टिकट ₹30 हजार पार

    दरभंगा
     दीपावली और छठ में अभी करीब एक माह का वक्त है। लेकिन दरभंगा एयरपोर्ट से हवाई टिकटों का दाम आसमान छू रहा है। यह हाल दरभंगा से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जाने वाली सभी उड़ानों में है। अन्य दिनों में दरभंगा एयरपोर्ट से विभिन्न हवाई मार्ग पर टिकटों का दाम सामान्य रहता है। लेकिन जैसे ही दीपावली और छठ का नजदीक पहुंचने लगता है।

    एयरलाइंस कंपनियां टिकटों के दाम में तीन से चार गुणा वृद्धि कर देती है। इससे त्योहार पर घर लौटने की चाह रखने वाले यात्रियों की खुशियों पर पानी फिरने लगता है। कई यात्री तो टिकटों की कीमत सुनकर भौचक रह जाते हैं। ऐसे में हवाई सफर की योजना त्याग ट्रेन या अन्य साधन से घर लौटने की जुगत में हैं।

    हवाई मार्ग पर टिकटों की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल
    दीपावली आठ नवंबर और छठ महापर्व 14 व 15 नवंबर को है। पांच से 13 नवंबर के बीच दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु हवाई मार्ग पर टिकटों की कीमत अप्रत्याशित उछाल है।

    खासतौर पर मुंबई से दरभंगा आनेवाले यात्रियों की जेब को ज्यादा चपत लग रही है। दीपावली और छठ के दौरान मुंबई से दरभंगा के लिए स्पाइसजेट में 30,196 रुपये, अकासा में 27,600 रुपये और इंडिगो में 24,871 से लेकर 25,801 रुपये में एक टिकट उपलब्ध हो रहा है। इस अवधि में दरभंगा से लौटने पर स्पाइसजेट, इंडिगो और अकासा के विमान में सात से लेकर नौ हजार रुपये में टिकट है।

    हैदराबाद से दरभंगा के लिए इंडिगो में 22,894 रुपये
    दिल्ली से दरभंगा के लिए स्पाइसजेट में 16,593 से लेकर 21,430 रुपये, इंडिगो में 17,557 से लेकर 19,498 रुपये और अकासा में 18,542 से लेकर 20,042 रुपये प्रति टिकट लिए जा रहे हैं। वापसी में स्पाइसजेट, इंडिगो और अकासा में पांच से आठ हजार रुपये लग रहा है। बेंगलुरु से दरभंगा आने पर अकासा में 23,527 रुपये लग रहा है। जबकि बेंगलुरु वापसी में 7,374 रुपये खर्च हो रहा है।

    हैदराबाद से दरभंगा के लिए इंडिगो में 22,894 रुपये लिए जा रहे हैं। दरभंगा से हैदराबाद जाने पर इंडिगो में 7,872 रुपये में टिकट उपलब्ध है। जबकि दरभंगा और कोलकाता के बीच कोई सीधी फ्लाइट उपलब्ध नहीं है। यात्रियों से कनेक्टिंग फ्लाइट के लिए 26,601 रुपये की वसूली की जा रही है।

    छह नवंबर से शुरू मुंबई की उड़ान में सीटें फुल
    छह नवंबर से दरभंगा से मुंबई के लिए अकासा क्यूपी 2011 की उड़ान की शुरुआत होगी, लेकिन अभी से ही मुंबई से उड़ान भरकर दरभंगा पहुंचने वाली अकासा की फ्लाइट में सीटें फुल होने लगी हैं। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, छह से 10 नवंबर तक मुंबई दरभंगा हवाई मार्ग पर अकासा के विमान फुल चल रहे हैं।

    हाल के दिनों में दरभंगा मुंबई हवाई मार्ग पर अकासा की उड़ान में विस्तार की घोषणा के साथ ही एक टिकट की बुकिंग 14 हजार में हो रही थी। लेकिन अब अकासा के विमान में छह नवंबर से एक टिकट की खरीदारी करने पर 27,600 रुपये चुकाना पड़ रहा है। जबकि दरभंगा और मुंबई के बीच अकासा के उड़ान की विस्तार की घोषणा से यात्रियों में पर्व त्योहार के मौके पर टिकट दाम में राहत की उम्मीद जगी थी। लेकिन उनकी उम्मीदों पर तुषारापात हो सकता है।

  • एनएमडीसी में सतर्कता मामलों पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम

    एनएमडीसी में सतर्कता मामलों पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम

    हैदराबाद

    एनएमडीसी लिमिटेड के सतर्कता विभाग ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह (VAW) 2026 के तहत केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा पहचाने गए प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 7 और 8 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में पब्लिक प्रोक्‍यूरमेंट में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं, जीईएम – नई विशेषताएं और कार्यक्षमताओं, प्रभावी खरीद के लिए अनुबंध डिजाइन, और साइबर सुरक्षा और साइबर स्वच्छता पर चार विषयगत सत्र शामिल थे, जिसका मुख्‍य उद्देश्य था – व्‍यावसायिक क्षमता को मजबूत करना, नैतिक निर्णय लेने को बढ़ावा देना और संगठनात्मक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाना ।

    उद्घाटन सत्र  कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), एनएमडीसी और  सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ), एनएमडीसी की गरिमामयी उपस्थित में संपन्‍न हुआ । कार्यक्रम के समापन समारोह में  विवेक निशांत नाथ,निदेशक (वाणिज्‍य), एनएमडीसी और  सी नीलकंठ रेड्डी, सीवीओ की भव्‍य उपस्थित थी, जिन्होंने निरंतर क्षमता निर्माण, नैतिक आचरण, पारदर्शी प्रणालियों और निवारक सतर्कता उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के महत्व को रेखांकित किया।

    पहले दिन  संजय अग्रवाल, आईआरएसएस, पीसीएमएम, आरसीएफ-कपूरथला द्वारा "सार्वजनिक खरीद में लोकाचार" पर सत्र में व्‍याख्‍यान व प्रस्‍तुतीकरण दिए गएं, जिनमें सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, नैतिक निर्णय लेने और स्थापित खरीद सिद्धांतों के अनुपालन पर जोर दिया गया। इसके अलावा,  अनुज कुमार, निदेशक (जीईएम) ने "जीईएम – नए विशेषताएं और कार्यविधियां" पर एक सत्र का संचालन किया, जिसमें हाल के घटनाक्रमों, डिजिटल खरीद तंत्र और सरकारी ई-मार्केटप्लेस के प्रभावी उपयोग के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रकाश डाला गया।

    दूसरे दिन,  अंकुर वास्तव, कंट्रोलर, एनआरएससी ने प्रभावी खरीद अनुबंध विकसित करने पर व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और प्रासंगिक केस स्टडी साझा करते हुए "प्रभावी खरीद के लिए अनुबंध डिजाइन" पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया । मती के.इन्‍द्रावेणी, वैज्ञानिक-एफ, और एसोसिएट डायरेक्टर, सी-डेक ने साइबर खतरों, जिम्मेदार डिजिटल प्रथाओं और कार्यस्थल में सुरक्षा-सचेत व्यवहार बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए "साइबर सुरक्षा और साइबर स्वच्छता" के संबंध में प्रतिभागियों को विस्‍तार से अवगत कराया ।

    इन सत्रों में एथिकल प्रोक्‍यूरमेंट, अनुबंध प्रबंधन, डिजिटल खरीद प्लेटफॉर्म और साइबर सुरक्षा के संबंध में  प्रतिभागियों की समझ को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ दृष्टिकोणों को व्यावहारिक अंतर्दृष्टि के साथ जोड़ा गया। संवादात्मक चर्चाओं के माध्‍यम से व्यावसायिक अनुभवों के आदान-प्रदान को सुगम बनाया और इस संबंध में अपने प्रतिभागियों को कार्यालय के कामकाज में आनेवाली कठिनाइयों को कम करने और अनियमितताओं को रोकने में मजबूत प्रणालियों, ठोस निर्णय लेने और प्रक्रियात्मक अनुपालन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया ।  

    एनएमडीसी के मुख्‍यालय और विभिन्न परियोजनाओं से नामित अधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम ज्ञान साझाकरण, व्यावसायिक विकास और निवारक सतर्कता के माध्यम से संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एनएमडीसी के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

    इस महत्‍वपूर्ण दो दिवसीय कार्यक्रम ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 और सुशासन के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एनएमडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

  • साफ-सफाई की व्यवस्था और एसएलआरएम सेंटर का लिया जायजा

    साफ-सफाई की व्यवस्था और एसएलआरएम सेंटर का लिया जायजा

    रायपुर

    उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज खुद स्कूटी चलाकर अम्बिकापुर शहर का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था और डीसी रोड स्थित एसएलआरएम सेंटर का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बने आवासों के हितग्राहियों से बातचीत की और अधिकारियों को नागरिक सुविधाएं बेहतर बनाने तथा सड़क निर्माण एवं मरम्मत के काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।

    केरसु तालाब में सफाई व्यवस्था तत्काल सुधारने के निर्देश

    शहर भ्रमण के दौरान उप मुख्यमंत्री  साव ने विभिन्न क्षेत्रों में साफ-सफाई एवं नागरिक सुविधाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। केरसु तालाब में सफाई की आवश्यकता पाए जाने पर उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने सार्वजनिक स्थलों एवं आवासीय क्षेत्रों में नियमित सफाई के साथ स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर करने एवं नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।

    प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों से मिले

    उप मुख्यमंत्री  साव ने सुभाष नगर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के एएचपी घटक के तहत बने 493 आवासीय इकाईयों का निरीक्षण किया। उन्होंने हितग्राहियों से मुलाकात कर वहां में मिल रही सुविधाओं और उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। साथ ही पक्का मकान मिलने के बाद उनके जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। हितग्राहियों ने आवास मिलने पर खुशी जताई और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
     साव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन हितग्राहियों को आवास आबंटित किए गए हैं, उनका वहां निवास सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने आवासीय परिसर में साफ-सफाई, जरूरी सुविधाओं और शेष निर्माण कार्यों जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    स्वच्छता दीदियों के काम की सराहना की

    उप मुख्यमंत्री ने डीसी रोड स्थित एसएलआरएम सेंटर पहुंचकर कचरा संग्रहण, पृथक्करण और प्रसंस्करण की व्यवस्था देखी। उन्होंने अम्बिकापुर के कचरा प्रबंधन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि शहर में लगभग 480 स्वच्छता दीदियां घर-घर से कचरा एकत्र करने और उसके प्रबंधन का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं। उनके प्रयासों से शहर में स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था बनी है।

    उप मुख्यमंत्री  साव द्वारा स्कूटी से अंबिकापुर शहर के भ्रमण के दौरान महापौर मती मंजूषा भगत, नगर निगम के सभापति  हरमिंदर सिंह टिन्नी, कलेक्टर  अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत की सीईओ सु रोमा वास्तव और नगर निगम के आयुक्त  विनय कुमार अग्रवाल सहित पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा अभियंतागण भी उनके साथ थे।

  • गोविंदपुरा क्षेत्र के वार्ड-60 में 42 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों का हुआ भूमि-पूजन

    गोविंदपुरा क्षेत्र के वार्ड-60 में 42 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों का हुआ भूमि-पूजन

    भोपाल 

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा कि “क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी, जनता की निष्काम सेवा के माध्यम से मिले दायित्व का ऋण उतारना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।” राज्यमंत्री  गौर गुरुवार को गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड क्रमांक-60 में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने लगभग 42 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत विभिन्न विकास कार्यों का वैदिक रीति-रिवाज से भूमि-पूजन किया।

    राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि प्रदेश सरकार जन-आकांक्षाओं के अनुरूप विकास को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि प्रत्येक स्वीकृत योजना धरातल पर प्रत्यक्ष रूप से आकार लेती हुई दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों को सुगम, सुरक्षित एवं आधुनिक मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सड़क, पार्क सौंदर्यकरण तथा अन्य जन-सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को उच्च मानक गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के लिये सतत मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

    वल्लभ नगर से सौम्या विहार मार्ग एवं दीपनगर पार्क में निर्माण कार्यों की सौगात

    आयोजित भूमि-पूजन कार्यक्रम में वार्ड-60 स्थित वल्लभ नगर से सौम्या विहार तक 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली कांक्रीट (सीसी) सड़क का विधिवत शिलान्यास किया गया, जिससे क्षेत्रीय निवासियों को आवागमन में सुगमता प्राप्त होगी। इसके साथ ही नागरिकों की सुविधा एवं पार्क के सौंदर्यीकरण के लिए दीपनगर पार्क परिसर में 5 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले शेड निर्माण कार्य का भी भूमि-पूजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय जन-प्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।