Author: NewseDay

  • ई-वे बिल जांच में सख्ती से नियंत्रण, बिना ठोस सूचना और वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति के नहीं रोके जा सकेंगे मालवाहक वाहन

    ई-वे बिल जांच में सख्ती से नियंत्रण, बिना ठोस सूचना और वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति के नहीं रोके जा सकेंगे मालवाहक वाहन

    रायपुर

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत को बड़ी राहत देने वाले अनेक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई है। बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने इन निर्णयों को व्यापार सुगमता, कर प्रशासन में पारदर्शिता और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की दिशा में युगांतकारी सुधार बताया है।

    वित्त मंत्री  चौधरी ने बैठक के उपरांत कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्ष जीएसटी 2.0 के माध्यम से कर की दरों में व्यापक सुधार कर देश की जनता और व्यापार जगत को बड़ी राहत दी गई थी। अब 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में प्रक्रियागत सुधारों (Procedural Reforms) और प्रक्रियाओं के सरलीकरण (Procedural Simplification) पर विशेष जोर दिया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य व्यापारियों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करना, कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।

    जीएसटी कानून से गिरफ्तारी की शक्ति हटाने की सिफारिश, छोटे मामलों में मिलेगी राहत

    वित्त मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी परिषद ने कर कानून से गिरफ्तारी की शक्ति से संबंधित धारा 69 को हटाने की महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए कर राशि की सीमा वर्तमान एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सामान्य जुर्माने की राशि भी 25 हजार रुपये से घटाकर अधिकतम 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है।

    उन्होंने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य सामान्य प्रक्रियागत त्रुटियों और छोटे मामलों में व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत देना है। हालांकि जानबूझकर कर चोरी और धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। इससे ईमानदारी से व्यापार करने वाले करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा और कर प्रशासन अधिक संतुलित एवं व्यावहारिक बनेगा।

    ई-वे बिल जांच में बड़े बदलाव, मालवाहक वाहनों की आवाजाही होगी सुगम

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि ई-वे बिल की जांच से संबंधित प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार किसी मालवाहक वाहन को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस सूचना होना आवश्यक होगा। इसके लिए संयुक्त आयुक्त अथवा उससे उच्च स्तर के अधिकारी की अनुमति भी अनिवार्य होगी।

    उन्होंने बताया कि ई-वे बिल की जांच संबंधित राज्य में ही की जा सकेगी, जहां माल भेजने वाला अथवा प्राप्त करने वाला स्थित हो। केवल रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में मालवाहक वाहनों को जांच के नाम पर नहीं रोका जाएगा।

     चौधरी ने कहा कि इन सुधारों से परिवहन के दौरान होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी। माल की आवाजाही तेज होने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत घटाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देशभर के व्यापारियों, परिवहन व्यवसायियों और औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा।

    रिफंड प्रक्रिया होगी स्वचालित, व्यापारियों की फंसी पूंजी जल्द होगी उपलब्ध

    वित्त मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी रिफंड प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की गई है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का पूरा रिफंड सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकृत किया जा सकेगा। इसके लिए किसी अधिकारी की अलग से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    उन्होंने बताया कि निर्यात और उलटे शुल्क ढांचे (Inverted Duty Structure) से संबंधित मामलों में रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि तत्काल मंजूर करने का प्रावधान प्रस्तावित है। साथ ही रिफंड आवेदन की जांच की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है।

     चौधरी ने कहा कि रिफंड प्रक्रिया में तेजी आने से व्यापारियों और उद्यमियों की कार्यशील पूंजी लंबे समय तक अटकी नहीं रहेगी। समय पर राशि उपलब्ध होने से व्यवसाय संचालन, उत्पादन और नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से निर्यातकों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।

    जीएसटी पंजीयन होगा आसान, छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को बड़ी सुविधा

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि जीएसटी पंजीयन और उसमें संशोधन की प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत मुख्य व्यवसाय स्थल को छोड़कर पंजीयन संबंधी अन्य जानकारियों में संशोधन पोर्टल के माध्यम से स्वतः किया जा सकेगा। इसी प्रकार पंजीयन निरस्त कराने की प्रक्रिया भी अधिक सरल और स्वचालित होगी।

    उन्होंने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से वस्तुओं की बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत देने की सिफारिश की गई है। ऐसे विक्रेताओं को प्रत्येक राज्य में अलग कार्यालय स्थापित करने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी।

     चौधरी ने कहा कि डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स के तेजी से बढ़ते अवसरों को देखते हुए यह सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और नए उद्यमियों को कम लागत में अपने उत्पादों को देशभर के बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

    इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा बढ़ेगा, उद्योगों की लागत कम करने में मिलेगी मदद

    वित्त मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा का दायरा बढ़ाने संबंधी महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की हैं। प्रस्तावित प्रावधानों के अंतर्गत आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर तथा फैक्ट्री परिसर के बाहर स्थापित पाइपलाइन पर भी पात्रता के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

    उन्होंने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार होने से कर पर कर लगने की समस्या कम होगी तथा उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत घटाने में सहायता मिलेगी। इससे औद्योगिक निवेश, उत्पादन क्षमता और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।

    छोटे करदाताओं को नोटिस और जुर्माने में राहत, लेट फीस में भी मिलेगी छूट

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिशों में छोटे व्यापारियों और सामान्य करदाताओं को अनावश्यक कानूनी एवं आर्थिक बोझ से राहत देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार 10 हजार रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार धोखाधड़ी से संबंधित नहीं होने वाले मामलों में निर्धारित समय के भीतर कर और ब्याज जमा करने पर केवल पांच प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

    उन्होंने बताया कि पांच करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने में देरी होने पर भी राहत मिलेगी। यदि ऐसे व्यापारी संबंधित महीने के अंत तक अपना रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो उन्हें विलंब शुल्क से छूट देने की सिफारिश की गई है।

     चौधरी ने कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए ये सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इससे सामान्य प्रक्रियागत चूक के कारण होने वाली परेशानियां कम होंगी और व्यापारियों को अपने कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

    1 अप्रैल 2027 से सुधारों को लागू करने का लक्ष्य

    वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जीएसटी परिषद द्वारा प्रस्तावित इन प्रक्रियागत सुधारों को आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

    उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 के माध्यम से कर दरों में राहत देने के बाद अब कर अनुपालन, पंजीयन, रिफंड, ई-वे बिल जांच और दंडात्मक प्रावधानों में व्यापक सरलीकरण की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इससे व्यापार जगत में विश्वास बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

    छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत को भी मिलेगा लाभ

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। राज्य में व्यापार, उद्योग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सरल जीएसटी प्रक्रियाओं का लाभ मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी निवेश, उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार के कर सुधारों और राज्य सरकार के व्यापार सुगमता संबंधी प्रयासों से प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को प्रोत्साहन मिलेगा।

    विकसित भारत 2047 की दिशा में ऐतिहासिक सुधार : वित्त मंत्री  चौधरी

    वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक सुधारों के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल कर संग्रहण बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद कर प्रणाली विकसित करना है, जो व्यापारियों को सुविधा दे, उद्यमिता को प्रोत्साहित करे और देश की आर्थिक प्रगति को गति प्रदान करे।

    उन्होंने कहा कि 57वीं जीएसटी परिषद की सिफारिशें इसी व्यापक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती हैं। गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों में बदलाव, ई-वे बिल जांच में सुधार, स्वचालित रिफंड, सरल पंजीयन, इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार और छोटे व्यापारियों को दंडात्मक प्रावधानों में राहत जैसे कदम व्यापार सुगमता की दिशा में दूरगामी साबित होंगे।

     चौधरी ने कहा कि इन सुधारों से देश में निवेश और उद्यमिता को नई ऊर्जा मिलेगी तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।

    वित्त मंत्री  चौधरी ने इन महत्वपूर्ण सुधारों के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • शांति, सुरक्षा, विश्वास और विकास ने बस्तर में खोलीं नई संभावनाएं, कहा-आने वाले समय में बनेगा देश का अग्रणी संभाग

    शांति, सुरक्षा, विश्वास और विकास ने बस्तर में खोलीं नई संभावनाएं, कहा-आने वाले समय में बनेगा देश का अग्रणी संभाग

    रायपुर

    अविभाजित मध्यप्रदेश के समय प्रशासनिक सेवाओं में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके 11 सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने बस्तर के बदलते स्वरूप को करीब से देखा। बस्तर प्रवास के दौरान शांति, सुरक्षा, विश्वास और विकास की दिशा में हो रहे बदलावों से रूबरू होकर उन्होंने कहा कि बस्तर अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। यहां विकास की असीम संभावनाएं मौजूद हैं और आने वाले समय में बस्तर देश के अग्रणी संभागों में अपनी पहचान स्थापित करेगा। इन सेवानिवृत्त अधिकारियों में  बीएल कुरिल, मति रेणु तिवारी,  मनोहर दुबे,  सुरेन्द्र उपाध्याय,  एसएन रूपला,  भरत अग्रवाल,  टीसी महावर,  डीडी सिंह, मति जय कियावत, मति सुनीता त्रिपाठी,  उल्हास तेलंग शामिल रहे।

    सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और यहां के जनजीवन को करीब से जाना-समझा। उन्होंने चित्रकोट जलप्रपात और तीरथगढ़ जलप्रपात सहित बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। प्रकृति की अनुपम छटा से अभिभूत अधिकारियों ने कहा कि बस्तर प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ सांस्कृतिक और मानवीय विविधताओं से भी समृद्ध क्षेत्र है। यहां की लोक परंपराएं, कला-संस्कृति और विरासत इसकी विशिष्ट पहचान हैं।यह सब बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करेगा।

    सरल-सहज और मेहनतकश हैं बस्तर के लोग

    बस्तर के ग्रामीण अंचलों और लोगों के जीवन को करीब से देखने के बाद सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने कहा कि यहां के लोग बेहद सीधे-सरल, सहज और मेहनती हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखा है। अधिकारियों ने कहा कि बस्तर की सबसे बड़ी ताकत यहां के लोग हैं, जिनकी मेहनत, सहजता और अपनी संस्कृति के प्रति गहरा जुड़ाव क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मां दंतेश्वरी के दर्शन कर मांगा बस्तर की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

    बस्तर प्रवास के दौरान सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन किए। उन्होंने मां दंतेश्वरी से बस्तर वासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान पूरे देश में विशिष्ट है, जिसे संरक्षित रखते हुए विकास की नई संभावनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

    अमर वाटिका में शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि

     इन सेवानिवृत्त अधिकारियों ने जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर कर्तव्यपथ पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद जवानों को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और सुरक्षा स्थापित करने में सुरक्षा बलों के जवानों का त्याग और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके बलिदान के कारण आज बस्तर विकास और विश्वास के नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

    पुनर्वासित युवाओं का बढ़ाया हौसला

     जगदलपुर स्थित पण्डुम कैफे में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने पुनर्वासित युवाओं से भी मुलाकात की। उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए उनके अनुभव जाने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर विकास की राह पर आगे बढ़ने के उनके संकल्प की सराहना की। अधिकारियों ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि नई शुरुआत के साथ अपने परिवार और समाज के विकास में योगदान देना ही भविष्य को बेहतर बनाने का सबसे मजबूत रास्ता है। इस दौरान कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह ने इन सेवानिवृत्त अधिकारियों से भेंटकर बस्तर में आकर यहां के लोगों का हौसला-अफजाई करने आभार जताया।

    माओवाद का खात्मा बस्तर के भविष्य के लिए बड़ी उपलब्धि

    उक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर में माओवाद के खात्मे को क्षेत्र के भविष्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा के वातावरण में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं खुली हैं। बस्तर में विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है और इसका सकारात्मक प्रभाव आमजन के जीवन में दिखाई दे रहा है।

    उन्होंने बस्तर वासियों को इस बदलाव के लिए बधाई देते हुए कहा कि शांति और विकास की यह यात्रा बस्तर को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। प्राकृतिक संपदा, समृद्ध संस्कृति, मेहनतकश जनसमुदाय और तेजी से मजबूत हो रही अधोसंरचना के साथ बस्तर आने वाले समय में विकास का अग्रणी केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

  • एप के जरिए ऑनलाइन कनेक्ट होगी हर महिला, क्यूआर स्कैन करते ही कर सकेंगी शिकायत

    एप के जरिए ऑनलाइन कनेक्ट होगी हर महिला, क्यूआर स्कैन करते ही कर सकेंगी शिकायत

    लखनऊ

    प्रदेश की महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था तैयार कर रही है। इसके तहत महिला सुरक्षा के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल तैयार किया जा रहा है, जिसमें एप के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं के लिए शिकायत दर्ज कराने और उस पर एक्शन लेने की प्रक्रिया को और सुगम बनाने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था में क्यूआर कोड स्कैन करते ही महिला अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगी। वहीं एप के माध्यम से महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षा तंत्र से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाएगी।

    इस पहल की खास बात यह होगी कि महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों और उनसे संबंधित कार्रवाई की निगरानी के लिए व्यवस्था को प्रदेश स्तर पर जोड़ा जाएगा। लखनऊ स्थित कमांड सेंटर से सभी 75 जिलों पर नजर रखने की योजना है। कमांड सेंटर में तैनात विशेष सेल महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग के साथ ही जरूरत के अनुसार विभिन्न विभागों और संबंधित तंत्र के बीच समन्वय की भूमिका निभाएगा। इससे शिकायतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने और उनके निस्तारण की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास होगा।

    क्यूआर स्कैन करते ही मिलेगी सुविधा

    प्रस्तावित व्यवस्था में महिलाओं को शिकायत के लिए अलग-अलग माध्यमों की तलाश करने की जरूरत कम होगी। क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद महिला शिकायत दर्ज कर सकेगी। इसके साथ ही एप के जरिए ऑनलाइन कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की तैयारी है। यानी तकनीक को महिला सुरक्षा के तंत्र से सीधे जोड़कर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने पर जोर है। महिला सुरक्षा से जुड़ी किसी समस्या की जानकारी मिलने पर संबंधित तंत्र तक उसकी पहुंच आसान हो, यही इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए लखनऊ में स्थापित किए जाने वाले कमांड सेंटर से जिलों की मॉनिटरिंग की जाएगी। यहां बनने वाला स्पेशल सेल जरूरत के अनुसार विभिन्न विभागों के साथ समन्वय करेगा।

    लखनऊ से सभी 75 जिलों पर नजर

    प्रदेश में महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी को एकीकृत स्वरूप देने की तैयारी है। लखनऊ स्थित कमांड सेंटर को इसका प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा, जहां से प्रदेश के सभी 75 जिलों की मॉनिटरिंग की जाएगी। विशेष सेल के माध्यम से विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी और शिकायतों के निस्तारण को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    इस व्यवस्था में तकनीक आधारित शिकायत तंत्र और प्रदेश स्तर की निगरानी को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इससे एक ओर महिला के लिए शिकायत दर्ज कराने का रास्ता आसान होगा तो दूसरी ओर प्रदेश स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी रहेगी। इसे देश में पहली बार शुरू की जा रही ऐसी पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है।

    आयोग की भूमिका को भी मिलेगा और प्रभावी स्वरूप

    महिला सुरक्षा के इस व्यापक प्रयास के बीच उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की भूमिका को भी और प्रभावी बनाने पर जोर है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल के विस्तार के उपरांत गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से महिला आयोग के आगामी कार्यों, दायित्वों और प्राथमिकताओं के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस दौरान प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। डॉ. बबिता सिंह चौहान ने आयोग द्वारा महिलाओं के हित में किए जा रहे कार्यों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी।

  • दवा निर्माण से अनुसंधान तक संपूर्ण मूल्य शृंखला विकसित करने पर जोर

    दवा निर्माण से अनुसंधान तक संपूर्ण मूल्य शृंखला विकसित करने पर जोर

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में निवेश के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में दवा निर्माण, सक्रिय औषधीय घटक (एपीआई), अनुसंधान, परीक्षण और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, विकसित औद्योगिक क्लस्टर, कुशल मानव संसाधन और निवेश प्रोत्साहन इस दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में फार्मा सेक्टर की राउंड टेबल चर्चा में प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद किया। चर्चा में प्रदेश में फार्मा विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, निर्यात और नई तकनीक पर आधारित निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

    भारत की फार्मा विकास यात्रा में मध्यप्रदेश की मजबूत भागीदारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत आज “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में पहचाना जाता है। भारतीय दवाएं 200 से अधिक वैश्विक बाजारों तक पहुंच रही हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का फार्मा निर्यात 30.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में मध्यप्रदेश एक मजबूत, भरोसेमंद और तेजी से उभरता हुआ भागीदार है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में निर्मित फार्मा उत्पाद 160 से अधिक देशों तक पहुंचते हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 11,889 करोड़ रुपए के फार्मा उत्पादों का निर्यात दर्ज किया गया। प्रदेश का मौजूदा विनिर्माण आधार और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ाव नई निवेश परियोजनाओं के लिए अवसर उपलब्ध कराता है।

    प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां, विकसित क्लस्टर और कुशल मानव संसाधन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां और 30 से अधिक एपीआई एवं बल्क ड्रग विनिर्माता हैं। इंदौर, पीथमपुर-धार, भोपाल-रायसेन, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, देवास, भिंड और मुरैना में फार्मा उद्योग का आधार विकसित हुआ है। इंदौर क्लस्टर में 96 से अधिक, पीथमपुर-धार में 57 से अधिक और भोपाल-रायसेन में 36 से अधिक फार्मा इकाइयां दर्ज हैं।

    प्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज, 200 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 140 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश निवेशकों को भूमि के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन, परिवहन संपर्क और बाजार तक पहुंच की सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है। यह औद्योगिक परिवेश विनिर्माण के साथ अनुसंधान और तकनीक आधारित गतिविधियों के विस्तार में सहायक है।

    निवेश प्रस्तावों से उत्पादन तक आगे बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र के 54 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 19,477 करोड़ रुपए का प्रस्तावित निवेश और लगभग 18,646 रोजगार सृजन के अवसरों की संभावना है। इनमें से 34 इकाइयों के लगभग 12,306 करोड़  रुपए के निवेश प्रस्तावों के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। इन परियोजनाओं से लगभग 10,298 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसी अवधि में 14 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ किया है। इंदौर , देवास, उज्जैन, भोपाल, धार, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर और भिंड जैसे जिलों में नई फार्मा एवं लाइफ साइंस इकाइयों की गतिविधियों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति मिल रही है।

    निवेश, अनुसंधान और गुणवत्ता के लिए नीतिगत प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग संवर्धन नीति-2025 में फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस को फोकस सेक्टर बनाया गया है। पात्र स्थायी पूंजी निवेश पर 40 प्रतिशत तक मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता (बीआईपीए) का प्रावधान है। एपीआई, बल्क ड्रग और मेडिकल डिवाइस के लिए 1.3 गुना गुणक का प्रावधान भी किया गया है।

    कंपनी के अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों के व्यय पर 50 प्रतिशत सहायता तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए अलग-अलग 1 करोड़ रुपए तक सहायता उपलब्ध है। स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के लिए स्थायी पूंजी निवेश की 25 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 25 करोड़  रुपए तक देने का प्रावधान है।

    निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए माल परिवहन लागत की 50 प्रतिशत सहायता 5 वर्षों तक, अधिकतम 2 करोड़ रुपए की सीमा तक उपलब्ध है। इन प्रावधानों से फार्मा उद्योग में निवेश, अनुसंधान, गुणवत्ता और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।

    पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण और आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन पर 5 करोड़ रुपए तक और शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन व्यवस्था पर 10 करोड़ रुपए तक सहायता का प्रावधान है। निजी भूमि पर अधोसंरचना विकास के लिए 5 करोड़ रुपए तक तथा तकनीक हस्तांतरण के लिए एक करोड़ रूपये तक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फार्मा उद्योग के विस्तार के साथ अनुसंधान, गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इन सुविधाओं से उद्योगों को आधुनिक उत्पादन प्रक्रियाएं अपनाने और अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

    विक्रम उद्योगपुरी का मेडिकल डिवाइस पार्क में बढ़ रहे निवेश के अवसर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क में 57 इकाइयों को आवंटन दिया गया है और 17 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। इस क्षेत्र में लगभग 2,374.86 करोड़ रुपए के निवेश और लगभग 9,625 रोजगार अवसरों की संभावना है। मेडिकल डिवाइस पार्क प्रदेश में चिकित्सा उपकरण विनिर्माण के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। फार्मा और चिकित्सा उपकरण उद्योग का विकास उत्पादन, तकनीकी सेवाओं और स्थानीय रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा।

    रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क, नई पीढ़ी के फार्मा निवेश पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रतलाम में 1,666.3 हेक्टेयर क्षेत्र में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां फार्मा, बायोटेक और केमिकल क्षेत्र के निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एपीआई और तैयार दवाओं के साथ टीके, इंजेक्टेबल दवाएं, जैव प्रौद्योगिकी, कोशिका एवं जीन आधारित उपचार, चिकित्सा उपकरण, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण की संपूर्ण मूल्य शृंखला मध्यप्रदेश में विकसित करना चाहती है। इससे प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार और वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन की संभावनाओं का विस्तार होगा।

    प्रमुख फार्मा निवेशकों की भागीदारी, दवा निर्माण और अनुसंधान में व्यापक विशेषज्ञता

    राउंड टेबल मीटिंग में फार्मा उद्योग प्रतिनिधियों में दवा निर्माण, एपीआई, ब्रांडेड एवं जेनेरिक दवाओं, विशेष औषधियों और अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। उपस्थित फार्मा सेक्टर के निवेशकों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कहा कि हम में से कई लोग और हमारे समुदाय के लोग एमपी में इस सेक्टर में निवेश करने के इच्छुक हैं और प्रदेश की नीतियों संसाधनों और अन्य सुविधाओं के कारण मध्यप्रदेश में निवेश के लिए जल्द से जल्द आयेंगे। इस अवसर पर उपस्थित डॉ. टोनी परमार फार्मा एसोसिएशन सेक्रेटरी जनरल ने कहा कि यहां उपस्थित लोगों में कई सीनियर प्रतिनिधि उपस्थित हैं। बहुत सारे लोग मध्यप्रदेश में निवेश करना चाहते हैं, हम बहुत जल्द ही मध्यप्रदेश आएंगे और इस सेक्टर में एमपी के साथ  देश के संकल्प को पूरा करने में सहयोगी बनेंगे।

    एनक्यूब एथिकल्स के प्रबंध निदेशक  मेहुल शाह की कंपनी क्रीम, ऑइंटमेंट, जेल और लोशन जैसी त्वचा पर उपयोग की जाने वाली औषधियों के विकास एवं विनिर्माण में विशेषज्ञता रखती है। कंपनी अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए उत्पाद विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण करती है। आईपीसीए के प्रबंध निदेशक  अजीत कुमार जैन की कंपनी एपीआई और तैयार दवाओं के निर्माण में सक्रिय है। इसका उत्पाद पोर्टफोलियो दर्द प्रबंधन, हृदय रोग, मलेरिया और संक्रमणरोधी उपचार सहित अनेक चिकित्सीय क्षेत्रों में विस्तृत है।

    अजंता फार्मा के अध्यक्ष  सतीश अग्रवाल की कंपनी ब्रांडेड जेनेरिक और जेनेरिक दवाओं का विकास, विनिर्माण एवं विपणन करती है। नेत्र रोग, त्वचा रोग, हृदय रोग और दर्द प्रबंधन इसके प्रमुख क्षेत्र हैं। ल्यूपिन के निदेशक  के. आर. गुप्ता की कंपनी की विशेषज्ञता जेनेरिक एवं ब्रांडेड दवाओं के साथ जटिल जेनेरिक उत्पादों, बायोसिमिलर और एपीआई तक फैली है। दोनों कंपनियां भारतीय बाजार के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी सक्रिय हैं।

    मैक्लियोड्स फार्मास्युटिकल्स संक्रमणरोधी दवाओं, टीबी, एचआईवी, हृदय रोग और मधुमेह सहित विभिन्न उपचार क्षेत्रों में कार्य करती है। अमोली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  रूपेश कामदार की कंपनी एपीआई और दवा निर्माण में उपयोग होने वाले मध्यवर्ती रसायनों के उत्पादन से जुड़ी है। गुफिक बायोसाइंसेज की विशेषज्ञता इंजेक्टेबल और विशेष प्रक्रिया से सुखाकर तैयार की जाने वाली लाइयोफिलाइज्ड दवाओं सहित विशेष औषधीय उत्पादों में है।

    एस. कांत हेल्थकेयर स्वास्थ्य उत्पादों और फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन के विनिर्माण एवं विपणन से जुड़ा समूह है। ब्लू क्रॉस लेबोरेटरीज विभिन्न चिकित्सीय क्षेत्रों में ब्रांडेड दवाओं के विकास, निर्माण और विपणन में कार्य करती है। डाइमैक इंडस्ट्रीज़ और एमिल फार्मा के प्रतिनिधियों को भी इस संवाद के लिए आमंत्रित किया गया।

    सिप्ला, ग्लेनमार्क और एल्केम के वरिष्ठ प्रबंधन का प्रतिनिधित्व भी प्रस्तावित है। सिप्ला श्वसन रोग, दीर्घकालिक उपचार और संक्रमणरोधी दवाओं के व्यापक पोर्टफोलियो के लिए जानी जाती है। ग्लेनमार्क अनुसंधान आधारित कंपनी है, जिसके प्रमुख क्षेत्र श्वसन रोग, त्वचा रोग और कैंसर उपचार हैं। एल्केम संक्रमणरोधी दवाओं, पाचन तंत्र संबंधी उपचार, दर्द प्रबंधन, विटामिन और दीर्घकालिक उपचार क्षेत्रों में सक्रिय है।

    इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडीएमए) के महासचिव  टोनी परमार को भी राउंड टेबल के लिए आमंत्रित किया गया। आईडीएमए भारतीय दवा निर्माताओं का उद्योग संघ है, जो नीति, गुणवत्ता, विनिर्माण, मूल्य निर्धारण और उद्योग विकास से जुड़े विषयों पर सरकार एवं नियामक संस्थाओं के साथ संवाद करता है। 

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आदिम जाति विकास संबंधी राज्य स्तरीय कार्य समिति की बैठक सम्पन्न

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आदिम जाति विकास संबंधी राज्य स्तरीय कार्य समिति की बैठक सम्पन्न

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत गठित राज्य स्तरीय कार्यसमिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों का सूक्ष्म परीक्षण कर उन्हें अनुमोदित किया गया।

    प्राथमिकता वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप देते हुए, राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति के अनुमोदन हेतु परीक्षण पश्चात कुल 3,189 प्राथमिक कार्यों के लिए 246 करोड़ 54 लाख रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

    बैठक की मुख्य विशेषताएँ और प्रमुख निर्णय

    बैठक में जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (च्टज्ळ) वाले कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में 185 कम्युनिटी-मैनेज्ड क्रेच (पालना-घर) की स्थापना और संचालन को हरी झंडी दी गई।

    सांस्कृतिक धरोहर व शिक्षा

     जनजातीय क्षेत्रों के पवित्र सामाजिक-सांस्कृतिक स्थलों के जीर्णाेद्धार एवं संरक्षण के पायलट प्रोजेक्ट के साथ-साथ प्राथमिक शालाओं (कक्षा 1 से 5) में 2 वर्षों के लिए बहुभाषी शिक्षण-अधिगम सामग्री के विकास हेतु भी मंजूरी प्रदान की गई। अन्य विकास कार्य बुनियादी ढांचा, शिक्षा, संस्कृति एवं धरोहर, नवीकरणीय ऊर्जा, पेयजल, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, ग्राम व समुदाय विकास सहायता, खेलकूद, पशुपालन, अनुसूचित क्षेत्रों के लोगों के लिए आय सृजन की योजनाएं, तथा सुदृढ़ीकरण एवं प्रशासनिक व्यय से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के उपरांत उन्हें अनुमोदित किया गया।

    मुख्य सचिव ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि अनुमोदित प्रस्तावों का क्रियान्वयन पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम छोर तक बसे जनजातीय अंचलों तक पहुंच सके।

    इस उच्च स्तरीय बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव  सारांश मित्तर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद अब्दुल कैसर हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह सहित कृषि, वन, महिला एवं बाल विकास और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जीएमसी एवं हमीदिया चिकित्सालय परिसर में निर्माणाधीन कार्यों का किया निरीक्षण

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जीएमसी एवं हमीदिया चिकित्सालय परिसर में निर्माणाधीन कार्यों का किया निरीक्षण

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं हमीदिया चिकित्सालय परिसर में विभिन्न निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने पुराने ओपीडी भवन के ध्वस्तीकरण का कार्य शीघ्र पूरा करने और नवीन ओपीडी भवन का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कमला नेहरू चिकित्सालय में स्थापित किए जा रहे पेट-सीटी स्कैन के स्थल का निरीक्षण कर कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने रेडियोथेरेपी विभाग में निर्माणाधीन लीनियर एक्सीलरेटर बंकर का भी निरीक्षण किया तथा मशीन के क्रय एवं स्थापना संबंधी आवश्यक निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ईदगाह हिल्स में निर्माणाधीन पीजी हॉस्टल के संबंध में अधिकारियों से चर्चा कर बाउंड्री वॉल, पानी एवं विद्युत कनेक्शन का कार्य दो माह में पूर्ण कर हॉस्टल प्रारंभ करने के निर्देश दिए। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के नवीन यूजी हॉस्टल का कार्य भी दो माह में पूर्ण करने तथा मॉर्चुरी का निर्माण एक माह में प्रारंभ करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं अध्यक्ष, कार्यकारिणी समिति, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय स्वशासी समिति, भोपाल डॉ. सलोनी सिडाना, अधिष्ठाता गांधी चिकित्सा महाविद्यालय डॉ कविता सिंह, संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक हमीदिया चिकित्सालय डॉ. सुनीत टंडन सहित पीआईयू के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • ‘अयोध्या गए थे तो रामलला के दर्शन कर लेते’, अखिलेश यादव पर मंत्री गिरीश यादव का तंज

    ‘अयोध्या गए थे तो रामलला के दर्शन कर लेते’, अखिलेश यादव पर मंत्री गिरीश यादव का तंज

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चन्द्र यादव, भाजपा के राज्यसभा सांसद बृजलाल और बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के अयोध्या पहुंचकर भी रामलला के दर्शन नहीं करने पर सवाल उठाए। 

    ‘अयोध्या गए थे तो रामलला के दर्शन कर लेते’

    राज्य मंत्री गिरीश चन्द्र यादव ने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या गए थे तो उन्हें प्रभु श्रीराम के दर्शन भी करने चाहिए थे। गिरीश यादव ने कहा कि यदि अखिलेश यादव को भगवान राम से प्रेम है तो उन्हें राम मंदिर जाकर दर्शन करना चाहिए था। साथ ही, यह कहने का साहस भी दिखाना चाहिए था कि उन्हें राम मंदिर बनने से खुशी हुई है।

    ‘धार्मिक मंच से भी राजनीतिक पाठ’

    भाजपा सांसद और पूर्व DGP बृजलाल ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व सपा विधायक पवन पांडेय द्वारा आयोजित भागवत कथा के धार्मिक मंच से भी अखिलेश यादव ने राजनीतिक संदेश दिया। ये कथा का अपमान है। 

    बृजलाल ने अयोध्या की 1990 की घटनाओं और मथुरा के जवाहरबाग कांड का उल्लेख करते हुए सपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद अखिलेश यादव के परिवार से हैं और उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान बड़ी संख्या में लाल बत्तियां उनके परिवार के आसपास थीं।

    उन्होंने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह वास्तव में समानता की बात करते हैं तो घोषणा करें कि सत्ता में आने पर अपने परिवार के अलावा किसी अन्य यादव, मुस्लिम या दलित को मुख्यमंत्री बनाएंगे।

    ‘रामलला का मंदिर आस्था का केंद्र’

    भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि अयोध्या सप्तपुरियों में से एक है, लेकिन अखिलेश यादव ने सत्ता में रहते हुए इसे भुला दिया था। राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के यदुवंशी होने के दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं तो उन्हें मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि के लिए भी प्रयास करना चाहिए।

    त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि वोट बैंक की नाराजगी के डर से अखिलेश यादव न रामलला के दर्शन कर रहे हैं और न ही कृष्ण जन्मभूमि पर अपना रुख स्पष्ट कर रहे हैं।

  • रबी सीजन से पहले बिजली सप्लाई को लेकर बड़ी तैयारी, MP Transco ने बढ़ाई कंपनसेशन क्षमता

    रबी सीजन से पहले बिजली सप्लाई को लेकर बड़ी तैयारी, MP Transco ने बढ़ाई कंपनसेशन क्षमता

    रबी सीजन के पहले एमपी ट्रांसको ने बढ़ाई रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता : ऊर्जा मंत्री तोमर

    ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंको की संख्या पहुंची 750: वोल्टेज प्रोफाइल में हुआ उल्लेखनीय सुधार

    भोपाल

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने रबी सीजन के ठीक पहले अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क की रिएक्टिव पावर कंपन सेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचवी) सबस्टेशनों मे 750 कैपेसिटर बैंको के संचालन से वोल्टेज प्रोफाइल बेहतर हुआ है तथा कृषि उपभोक्ताओं सहित सभी उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर, गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति मिल रही है।

    मंत्री तोमर ने बताया कि एमपी ट्रांसको द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 और  वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अभी तक 29 नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना कर उन्हें सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया  है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 9383.5 एमवीएआर हो गई है। यह क्षमता प्रदेश की अब तक की अधिकतम रिएक्टिव पावर मांग 6776 एमवीएआर से लगभग 38 प्रतिशत अधिक है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।

    विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में सुधार

    ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि राज्य शासन की मंशानुरूप उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एमपी ट्रांसको  जरुरत के हिसाब से अपने  ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंक स्थापित कर चुकी है। कंपनी के 418 सबस्टेशनों में से अधिकांश में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पुराने सबस्टेशनों में भी आवश्यकता के अनुसार नए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए जा रहे हैं तथा मौजूदा क्षमता में वृद्धि की जा रही है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे पूरे प्रदेश में विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता

    वर्तमान में एमपी ट्रांसको के 220 केवी सबस्टेशनों पर 132  केवी सिस्टम के लिए 33 कैपेसिटर बैंक तथा 132 केवी सबस्टेशनों पर 33 केवी  सिस्टम पर    717 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। कुल मिलाकर 750 कैपेसिटर बैंकों के माध्यम से 9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता उपलब्ध है, जिसमें 132 केवी की 1073 एम वी ए आर तथा 33 केवी की 8310.5 एमवीएआर शामिल है,जो प्रदेश की विद्युत प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान कर रही है।

    52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की क्षमता बढ़ाई गई

    एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता टेस्टिंग एम वाय मंसूरी ने  जानकारी दी कि कंपनी ने ऐसे 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की पहचान की थी, जिनकी उपयोगी आयु पूर्ण हो चुकी थी और जो अपेक्षित कैपेसिटिव सपोर्ट प्रदान नहीं कर पा रहे थे। इन स्थानों पर अधिक क्षमता वाले नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना एवं पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन का अभियान चलाया गया इससे सबस्टेशनों की रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में अभी तक 309 एमवीएआर की बढोत्तरी हुई और उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति की जा रही है।

    कैपेसिटर बैंक से होता है यह लाभ

    मंसूरी ने जानकारी दी कि ट्रांसमिशन प्रणाली में सिंचाई पंप, औद्योगिक मोटरें तथा अन्य विद्युत उपकरण प्रायः इंडक्टिव लोड उत्पन्न करते हैं, जिससे वोल्टेज में गिरावट और पावर फैक्टर में कमी आती है। कैपेसिटर बैंक इस इंडक्टिव प्रभाव की भरपाई कर रिएक्टिव पावर उपलब्ध कराते हैं। इससे एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशन में वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार होता है, पावर फैक्टर बेहतर होता है, ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता बढ़ती है तथा उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती है।

     

  • भोपाल पुलिस का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव और दशहरे के चलते 15 दिन तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

    भोपाल पुलिस का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव और दशहरे के चलते 15 दिन तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

    भोपाल 

    दुर्गा उत्सव और दशहरे के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के सामान्य अवकाश पर रोक लगा दी है। डीजीपी के निर्देश पर विशेष शाखा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

    आदेश के मुताबिक 11 से 25 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का सामान्य अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। यह आदेश सभी स्पेशल डीजी, एडीजी, जोनल आईजी, भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नर, जिला पुलिस अधीक्षकों, सेनानियों और रेल पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है।

    आपात स्थिति में सीमित अवधि की छुट्टी
    पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार किसी आपात स्थिति में संबंधित एसपी या आईजी सीमित अवधि के लिए अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अवकाश के लिए डीजीपी की अनुमति अनिवार्य होगी।

    नवरात्र से दशहरे तक बढ़ेगी सुरक्षा
    नवरात्र के दौरान प्रदेशभर में बड़ी संख्या में देवी पंडाल, गरबा और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। इनमें देर रात तक बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है। इसके अलावा दशहरे पर रावण दहन, चल समारोह और प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ बढ़ने से कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए पुलिस थानों में पर्याप्त बल उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च, पैदल गश्त और लगातार निगरानी बढ़ाई जाएगी। 

    सोशल मीडिया और साइबर गतिविधियों पर भी नजर
    त्योहारों के दौरान अफवाह, भड़काऊ सामग्री और असामाजिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल, साइबर विंग और स्थानीय खुफिया इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। किसी भी आपत्तिजनक या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    ड्यूटी के बाद मिलेगा क्षतिपूर्ति अवकाश
    त्योहारों के दौरान लगातार ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों
    को बाद में रोटेशन के आधार पर क्षतिपूर्ति अवकाश दिया जाएगा। ड्यूटी पॉइंट पर जवानों के लिए भोजन, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार  त्योहारों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

  • आकाश अंबानी का बड़ा ऐलान, Jio बना रहा स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक; 6G के लिए तैयारी शुरू

    आकाश अंबानी का बड़ा ऐलान, Jio बना रहा स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक; 6G के लिए तैयारी शुरू

    मुंबई 

    रिलायंस जियो अब सिर्फ 5G नेटवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहता. कंपनी अगली पीढ़ी की टेलीकॉम टेक्नोलॉजी यानी 6G की तैयारी में अभी से जुट गई है. रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने गुरुवार को कहा कि कंपनी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक विकसित करने पर काम कर रही है और प्री-6G टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पेटेंट भी फाइल कर चुकी है। 

    आकाश अंबानी ने 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दौरान एएनआई से बातचीत में जियो की भविष्य की टेक्नोलॉजी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित वॉयस और डेटा सर्विस, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और 6G जैसी नई तकनीकों पर है। 

    भारत की अपनी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी तैयार कर रहा Jio
    आकाश अंबानी ने कहा कि जियो सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी ऐसी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी विकसित करने पर काम कर रही है, जिसे भारत से बाहर भी इस्तेमाल किया जा सके। 

    इसका मतलब साफ है कि जियो आने वाले समय में सिर्फ मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस तक अपनी तकनीक को सीमित नहीं रखना चाहता. कंपनी सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र में भी अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने की तैयारी कर रही है। 

    6G में भारत को आगे ले जाने की तैयारी
    आकाश अंबानी ने कहा कि भारत ने 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य रखा है और जियो इस दिशा में रिसर्च, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास के जरिए योगदान देगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 6G के मामले में भारत को दुनिया का नेतृत्व करने की बात कही है और भारत से आने वाले 6G पेटेंट में 10 फीसदी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया है. अंबानी के मुताबिक, जियो इस लक्ष्य में बड़ा योगदान देने की तैयारी कर रहा है। 

    6G लॉन्च होने से पहले ही पेटेंट पर काम
    जियो ने 6G के व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल में आने से पहले ही इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर दिया है. आकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी ने प्री-6G के दौर में ही पेटेंट के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है. यानी जियो का फोकस सिर्फ मौजूदा नेटवर्क को बेहतर बनाने पर नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए जरूरी तकनीक और बौद्धिक संपदा तैयार करने पर भी है। 

    AI से बदल सकती है मोबाइल की वॉयस और डेटा सर्विस
    आकाश अंबानी ने कहा कि जियो पारंपरिक टेलीकॉम सेवाओं को एआई की मदद से और बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है. कंपनी वॉयस और डेटा सेवाओं में एआई के इस्तेमाल पर काम कर रही है। 

    उनके मुताबिक, एआई की मदद से वॉयस और डेटा सर्विस में नए तरह के इनोवेशन किए जा सकते हैं, जिसका फायदा भारत के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को मिल सकता है। 

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखा Jio का अगला विजन
    7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली में चल रहे 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस में जियो अपनी डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े विजन को प्रदर्शित कर रहा है. इस आयोजन में 5G, 6G, एआई आधारित नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है। 

    आकाश अंबानी के मुताबिक, जियो यहां अपने पूरे डिजिटल सोसाइटी विजन को सामने रखने की कोशिश कर रहा है. कंपनी का जोर आने वाले वर्षों में कनेक्टिविटी, एआई और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को जोड़कर नई डिजिटल सेवाएं तैयार करने पर है.