Author: NewseDay

  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में छत्तीसगढ़ का बड़ा सुधार, भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव

    ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में छत्तीसगढ़ का बड़ा सुधार, भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव

    रायपुर

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और शहरी विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किया है। भारत सरकार द्वारा डीरिगुलेशन (Deregulation) और अनुपालन बोझ कम करने (Compliance Burden Reduction) के लिए सुझाए गए सुधारों के अनुरूप राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस बदलाव से भूमि उपयोग संबंधी प्रावधान अधिक सरल, स्पष्ट और लचीले होंगे तथा आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे।

    वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए इन सुधारों का उद्देश्य शहरी नियोजन व्यवस्था को बदलती आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाना है। नई व्यवस्था में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट (Negative List) आधारित मॉडल अपनाया गया है। इससे भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनावश्यक जटिलताएं कम होंगी और नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों को अधिक सुविधा मिलेगी।

    शहरी नियोजन सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ को मिली 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता

    भारत सरकार की विशेष सहायता योजना (Special Assistance to States for Capital Investment-SASCI) के अंतर्गत शहरी नियोजन सुधारों को अपनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय पहल की है। इन सुधारों के लिए राज्य को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है। इस प्रकार दो वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली है।

    इसी सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने अब भूमि उपयोग नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यह पहल केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत राज्यों में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करने और निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    नेगेटिव लिस्ट मॉडल से भूमि उपयोग में आएगा अधिक लचीलापन

    संशोधित भूमि विकास नियमों में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इस मॉडल के अंतर्गत प्रत्येक भूमि उपयोग श्रेणी में उन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है, जो संबंधित क्षेत्र के लिए अनुपयुक्त हैं। वहीं, अन्य अनुमत्य गतिविधियों के संचालन के लिए अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

    इस व्यवस्था का प्रमुख लाभ यह होगा कि भूमि उपयोग से संबंधित नियम अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनेंगे। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, नई व्यावसायिक गतिविधियों और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।

    भारत सरकार द्वारा सुझाए गए सुधारों के अनुरूप त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों ने भी अपने विकास नियंत्रण विनियमों (Development Control Regulations-DCR) में नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाया है। छत्तीसगढ़ ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए भूमि उपयोग नियमन को अधिक आधुनिक, लचीला और विकासोन्मुख बनाया है।

    आवासीय क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और कार्यालयों को मिलेगी अनुमति

    संशोधित नियमों की एक महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के बीच अनुमत्य गतिविधियों का विस्तार है। आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Use) को प्रोत्साहित किया गया है।

    नई व्यवस्था के अंतर्गत अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमत्य किया गया है। इसी प्रकार कार्यालयों को भी आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमति दी गई है।

    इस बदलाव से नागरिकों को अपने निवास स्थान के आसपास ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, आवासीय और कार्यस्थलों के बीच की दूरी कम होने से आवागमन में लगने वाले समय और यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकेगी।

    औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास की सुविधा

    राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की आवश्यकताओं को भी भूमि उपयोग सुधारों में विशेष महत्व दिया है। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी तथा संबंधित श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाओं को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है।

    इससे औद्योगिक इकाइयों के आसपास कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। श्रमिकों को कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा उपलब्ध होने से उनके दैनिक आवागमन में आसानी होगी और औद्योगिक क्षेत्रों में आवश्यक सामाजिक अधोसंरचना के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

    इसके अतिरिक्त मनोरंजन भूमि उपयोग श्रेणी में श्मशान एवं कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है। इस प्रकार संशोधित व्यवस्था में नागरिक सुविधाओं, सामाजिक आवश्यकताओं और आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

    निवेश, रोजगार और शहरी विकास को मिलेगी नई गति

    तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ भूमि उपयोग की आवश्यकताएं भी लगातार बदल रही हैं। आवासीय क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता, व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुविधाओं का विकास आधुनिक शहरी नियोजन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

    राज्य सरकार द्वारा किए गए इन सुधारों से भूमि उपयोग संबंधी नियम अधिक व्यावहारिक होंगे और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा मिलेगी। नियमों में स्पष्टता और अनुपालन संबंधी बोझ कम होने से उद्यमियों तथा निवेशकों को भी लाभ मिलने की अपेक्षा है।

    छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य में निवेश के नए अवसर विकसित करने, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और नागरिकों के लिए बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मिलेगी मजबूती

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और निवेश अनुकूल वातावरण के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। भूमि उपयोग नियमों में किया गया यह संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    भारत सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने संबंधी सुधारों के अनुरूप लागू की गई नई व्यवस्था से छत्तीसगढ़ में शहरी नियोजन को अधिक आधुनिक और विकासोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • सरगुजा की जीवनदायिनी श्याम घुनघुट्टा परियोजना बनी अन्नदाताओं का सहारा, 63 गांवों के खेतों तक पहुंच रहा सिंचाई का पानी

    सरगुजा की जीवनदायिनी श्याम घुनघुट्टा परियोजना बनी अन्नदाताओं का सहारा, 63 गांवों के खेतों तक पहुंच रहा सिंचाई का पानी

    रायपुर

    खेतों में लहलहाती फसलों के लिए पानी सबसे बड़ी जरूरत है। जब बारिश कम होती है और खेतों में नमी घटने लगती है, तब सिंचाई के भरोसेमंद साधन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होते। सरगुजा जिले की श्याम घुनघुट्टा परियोजना वर्षों से किसानों की इसी जरूरत को पूरा कर रही है। जिले की जीवनदायिनी कही जाने वाली इस परियोजना की 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से 63 गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच रहा है। लगभग 35 वर्ष पुरानी नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य से जल वितरण व्यवस्था को मजबूती मिली है। विशेष रूप से अल्प वर्षा के दौरान परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हुई है।

    श्याम घुनघुट्टा परियोजना की उपयोगिता केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं है। यह अम्बिकापुर शहर की पेयजल आपूर्ति का भी प्रमुख आधार है। एक ओर परियोजना की नहरें ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी को सहारा दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर इससे नगर निगम अम्बिकापुर को अमृत योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध कराया जा रहा है।

    35 वर्ष पुरानी नहरों को मिला नया जीवन, 23.81 करोड़ रुपये से हुआ जीर्णोद्धार

    जल संसाधन संभाग क्रमांक-01, अम्बिकापुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्याम घुनघुट्टा परियोजना लगभग 35 वर्ष पुरानी है। लंबे समय से संचालित इस परियोजना की नहरों में समय के साथ कई स्थानों पर दरारें पड़ गई थीं। इसके अलावा जलीय जीव-जंतुओं द्वारा बिल बनाए जाने से भी नहरों के क्षतिग्रस्त होने की समस्या सामने आती थी।

    नहरों के क्षतिग्रस्त होने से जल प्रवाह प्रभावित होता था। कई स्थानों पर पानी के रिसाव और नहरों की खराब स्थिति के कारण सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने में कठिनाइयां होती थीं। इससे किसानों को आवश्यकतानुसार सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रभावित होती थी।

    इन समस्याओं के समाधान के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा नहरों के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य की योजना तैयार की गई। इसके अंतर्गत 08 मार्च 2019 को 2381.84 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।

    स्वीकृत राशि से नहरों का जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य पूर्ण कराया गया है। इससे पुरानी नहरों की स्थिति में सुधार हुआ है और सिंचाई के लिए जल प्रवाह एवं वितरण व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

    जब बारिश ने छोड़ा साथ, तब नहरों के पानी ने किसानों को दी राहत

    सरगुजा जिले में वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 के दौरान अल्प वर्षा की स्थिति बनी थी। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने फसलों की सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई थी। खेतों में पानी की कमी से कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी।

    ऐसे समय में श्याम घुनघुट्टा परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी। परियोजना की नहर प्रणाली के माध्यम से जिले के 63 गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया। इससे किसानों को वर्षा की कमी के बावजूद कृषि कार्य जारी रखने में सहायता मिली।

    जिन किसानों की खेती वर्षा पर निर्भर रहती है, उनके लिए जरूरत के समय सिंचाई का पानी उपलब्ध होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्याम घुनघुट्टा परियोजना ने अल्प वर्षा की स्थिति में भी खेतों तक पानी पहुंचाकर कृषि गतिविधियों को सहारा देने में अपनी उपयोगिता साबित की है।

    236 किलोमीटर की नहर प्रणाली, 63 गांवों की खेती को मिल रहा संबल

    श्याम घुनघुट्टा परियोजना के अंतर्गत लगभग 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली विकसित है। इस विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से जिले के 63 गांवों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा रहा है।

    नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य से जल प्रवाह की व्यवस्था में सुधार हुआ है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत होने से पानी के वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिली है।

    परियोजना से उपलब्ध सिंचाई सुविधा किसानों को कृषि कार्यों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान कर रही है। विशेष रूप से वर्षा की अनिश्चितता के बीच नहरों से पानी मिलने से खेती के लिए अतिरिक्त सहारा उपलब्ध होता है।

    खेतों को पानी देने के साथ अम्बिकापुर शहर की भी बुझा रही प्यास

    श्याम घुनघुट्टा परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों की सिंचाई व्यवस्था के साथ अम्बिकापुर शहर की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    परियोजना से नगर निगम अम्बिकापुर को अमृत योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस जल का उपयोग शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाता है।

    इस प्रकार एक ही जल परियोजना ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा कर रही है। गांवों में किसानों को खेती के लिए पानी मिल रहा है, वहीं शहर में नागरिकों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए भी जल उपलब्ध कराया जा रहा है।

    जल संरक्षण और बेहतर प्रबंधन से मजबूत हुई सिंचाई व्यवस्था

    जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कृषि विकास और नागरिक सुविधाओं के लिए आवश्यक है। पुरानी नहरों की मरम्मत और लाइनिंग कार्य से उपलब्ध जल के अधिक व्यवस्थित उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

    श्याम घुनघुट्टा परियोजना के अंतर्गत किए गए जीर्णोद्धार कार्यों से नहरों की संरचनात्मक स्थिति बेहतर हुई है। इससे जल प्रवाह और वितरण में आने वाली बाधाओं को कम करने में सहायता मिली है।

    परियोजना का अनुभव यह भी दर्शाता है कि पहले से उपलब्ध जल संसाधन संरचनाओं का संरक्षण और समय पर रखरखाव ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

    सरगुजा के किसानों और शहरवासियों के लिए जीवनदायिनी बनी परियोजना

    श्याम घुनघुट्टा परियोजना आज सरगुजा जिले की कृषि और पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है। लगभग 35 वर्ष पुरानी इस परियोजना ने समय के साथ किसानों और नागरिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    23.81 करोड़ रुपये की लागत से नहरों के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य पूर्ण होने से सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिली है। 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से 63 गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है, जबकि अम्बिकापुर शहर को भी पेयजल आपूर्ति के लिए जल प्राप्त हो रहा है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत श्याम घुनघुट्टा परियोजना की यह उपलब्धि जल संसाधनों के संरक्षण, बेहतर प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण उदाहरण है। बारिश की कमी के समय खेतों तक पहुंचने वाला पानी किसानों की मेहनत को सहारा देता है, वहीं शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में भी परियोजना की अहम भूमिका है।

    सरगुजा की यह जीवनदायिनी परियोजना खेतों की सिंचाई और नागरिकों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करते हुए ग्रामीण एवं शहरी जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत बनी हुई है।

  • तीन साल में यूपीसीडा औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्री पंजीकरण दोगुने से अधिक, 50,000 से ज्यादा रोजगार सृजित

    तीन साल में यूपीसीडा औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्री पंजीकरण दोगुने से अधिक, 50,000 से ज्यादा रोजगार सृजित

    लखनऊ

    योगी सरकार उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में तैयार औद्योगिक भूमि, बेहतर कनेक्टिविटी, प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं और क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक पार्कों के विस्तार से निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से तैयार हो रहे हैं। इसी का परिणाम है कि यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्री पंजीकरण पिछले तीन वर्षों में दोगुने से अधिक हो गए हैं।

    वर्ष 2022-23 में करीब 1,400 फैक्ट्री पंजीकरण की तुलना में वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3,300 हो गई। इन औद्योगिक गतिविधियों से अब तक 50,000 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। यूपीसीडा की एसीईओ दीक्षा जैन ने बताया कि यह वृद्धि प्रदेश में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार और निवेशकों के बीच उत्तर प्रदेश की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।

    एनसीआर से बुंदेलखंड और पूर्वी यूपी तक औद्योगिक विस्तार

    योगी सरकार की संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास की नीति के अनुरूप यूपीसीडा अब एनसीआर से आगे बढ़कर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में भी औद्योगिक आधार मजबूत कर रहा है। गोरखपुर, संत कबीर नगर और ललितपुर में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। ललितपुर में समर्पित फार्मास्युटिकल पार्क विकसित किया जा रहा है। वहीं, एक्सप्रेसवे और प्रमुख राजमार्गों के आसपास करीब पांच नए औद्योगिक क्षेत्रों को भी मंजूरी दी गई है।

    इस विस्तार को 55,000 एकड़ से अधिक के औद्योगिक लैंड बैंक का आधार मिल रहा है। करीब 2,000 एकड़ विकसित भूमि वर्तमान में औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध है। नए औद्योगिक क्षेत्रों के साथ पुराने औद्योगिक एस्टेट में भी सड़क, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। यूपीसीडा की एसीईओ दीक्षा जैन के अनुसार, उद्योगों के लिए केवल भूमि पर्याप्त नहीं है। भरोसेमंद बुनियादी ढांचा, बेहतर कनेक्टिविटी और अनुकूल औद्योगिक इकोसिस्टम जरूरी है। इसी दिशा में प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के साथ भूमि आवंटन और स्वीकृति प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया जा रहा है।

    फार्मा, ऑटो, फूड प्रोसेसिंग और बायोप्लास्टिक पर फोकस

    योगी सरकार की सेक्टर-विशिष्ट औद्योगिक विकास नीति को आगे बढ़ाते हुए यूपीसीडा विभिन्न क्षेत्रों के लिए समर्पित औद्योगिक पार्क विकसित कर रहा है। ललितपुर फार्मा पार्क में विशेषीकृत बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे बड़ी फार्मा कंपनियों के साथ संबंधित विनिर्माण इकाइयों को आकर्षित किया जा सके। पीलीभीत के भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में ऑटो और ऑटो-कंपोनेंट उद्योग की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पंतनगर के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र से इसकी भौगोलिक निकटता को देखते हुए यहां ऑटो-कंपोनेंट और विनिर्माण निवेश आकर्षित करने की रणनीति तैयार की जा रही है।

    इसी तरह बहेड़ी में फूड प्रोसेसिंग पार्क और लखीमपुर खीरी के कुंभी में बायोप्लास्टिक पार्क विकसित किया जा रहा है। इन क्षेत्र-विशिष्ट पार्कों से स्थानीय संसाधनों, कौशल और बाजार की संभावनाओं को उद्योगों से जोड़ते हुए रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    टेक्नोलॉजी से पारदर्शी और आसान हो रही निवेश प्रक्रिया

    निवेशकों को तेजी से भूमि उपलब्ध कराने और औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन को सुगम बनाने के लिए यूपीसीडा तकनीक का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है। ईआरपी सिस्टम, एआई आधारित एनालिटिक्स, ड्रोन मॉनिटरिंग, ऑनलाइन नीलामी और ‘वन मैप’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से भूमि प्रबंधन और निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाई जा रही है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प के अनुरूप यूपीसीडा का यह विस्तार प्रदेश को मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक औद्योगिक बुनियादी ढांचे, क्षेत्र-विशिष्ट पार्कों और निवेशक-अनुकूल व्यवस्था के जरिए प्रदेश में नए निवेश, रोजगार और उत्पादन को गति देने के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक संतुलित औद्योगिक विकास को मजबूती मिल रही है।

  • माननीय राष्ट्रपति महोदय के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

    माननीय राष्ट्रपति महोदय के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

    रायपुर 

    मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत के माननीय राष्ट्रपति महोदया मती द्रौपदी मुर्मू के आगामी दिनों में प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। माननीय राष्ट्रपति महोदया का 22 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक रायपुर एवं जगदलपुर (बस्तर) का प्रवास प्रस्तावित है।   

    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल, आवास, स्वास्थ्य सुविधा और परिवहन के सभी इंतजाम निर्धारित मापदंडों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राष्ट्रपति के संपूर्ण प्रवास कार्यक्रमों के लिए संस्कृति विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।   

    प्रवास के दौरान राष्ट्रपति महोदय के आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रम में लोकभवन, रायपुर एवं बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा (रायपुर) में कार्यक्रमों के आयोजन में शामिल होना प्रस्तावित है। इसी तरह से लाल बाग ग्राउंड, जगदलपुर (बस्तर) में मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा के पावन अवसर पर विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन में शामिल होना प्रस्तावित है। 

    मुख्य सचिव ने रायपुर एवं बस्तर संभाग के कलेक्टरों का राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सभी जरूरी व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट (रायपुर) तथा माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट (जगदलपुर) से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक सुरक्षा, कारकेड और सड़क मार्ग से यात्रा की सुगम व्यवस्था का दायित्व संबंधित जिला कलेक्टरों, पुलिस आयुक्त तथा पुलिस अधीक्षकों को सौंपा गया है।  राष्ट्रपति महोदय एवं उनके साथ आने वाले अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्था के संबंध में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित गाइडलाइन्स के अनुसार सर्व सुविधायुक्त चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।  बैठक में कार्यक्रम स्थलों पर मानक अनुसार डायस (मंच), बैकड्रॉप, निर्बाध विद्युत आपूर्ति (वैकल्पिक व्यवस्था सहित), साउंड-लाइट सिस्टम तथा ग्रीन रूम में कंप्यूटर, प्रिंटर व इंटरनेट की जरूरी तैयारियों के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए। 

    वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चम्पावत, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, गृह एवं श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता, संचालक जनसम्पर्क  आशीष टिकरिया सहित लोकभवन के वरिष्ठ अधिकारी, कलेक्टर रायपुर एवं बस्तर, पुलिस मुख्यालय के अधिकारी, पुलिस अधीक्षक रायपुर एवं बस्तर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण विभाग, एयरफोर्स, बीएसएनएल, एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारी शामिल हुए।

  • डेयरी व्यवसाय से संध्या बनीं आत्मनिर्भर, दूध की बिक्री से हर महीने हो रही 15 हजार रुपये की बचत

    डेयरी व्यवसाय से संध्या बनीं आत्मनिर्भर, दूध की बिक्री से हर महीने हो रही 15 हजार रुपये की बचत

    रायपुर

     ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और नियमित आमदनी का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव निवासी श्रीमती संध्या ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से मिले सहयोग को अपनी मेहनत से सफल स्वरोजगार में बदल दिया है। वर्ष 2024 में योजना के तहत मिले अनुदान से उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। आज उन्हें प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी होती है, जिसमें चारा-पानी एवं अन्य खर्च निकालने के बाद करीब 15 हजार रुपये की बचत हो रही है।

    संध्या की यह सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाला सहयोग और पशुपालन के प्रति लगन ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय का मजबूत आधार बन सकती है। डेयरी व्यवसाय से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और भविष्य में व्यवसाय को और विस्तार देने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

    वर्ष 2024 में मिला अनुदान, डेयरी व्यवसाय को मिली नई दिशा

    संध्या बताती हैं कि वर्ष 2024 में उन्हें छत्तीसगढ़ शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत अनुदान प्राप्त हुआ। इस सहायता से गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

    उन्होंने पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया। नियमित मेहनत और बेहतर प्रबंधन से डेयरी व्यवसाय उनके परिवार के लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

    प्रतिदिन 30 लीटर दूध उत्पादन, हर महीने हो रही अच्छी आमदनी

    संध्या के डेयरी व्यवसाय से वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें रोजाना करीब 1,200 रुपये की आय होती है। उनके अनुसार, महीने में लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

    पशुओं के चारे, पानी और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की बचत होती है। इस तरह डेयरी व्यवसाय से उनकी सालाना बचत करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रही है।

    नियमित रूप से होने वाली इस आमदनी ने संध्या को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। पशुपालन अब उनके लिए केवल घरेलू गतिविधि नहीं, बल्कि आय अर्जित करने का महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया है।

    तीन बछियां बनीं भविष्य की नई उम्मीद

    संध्या ने वर्तमान डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ भविष्य की भी तैयारी शुरू कर दी है। उनकी गायों से तीन बछियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें वे आगे प्रजनन के लिए तैयार कर रही हैं।

    इन बछियों के बड़े होने से आने वाले समय में उनके पशुधन में वृद्धि होने की संभावना है। इससे दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने के नए अवसर भी तैयार होंगे।

    संध्या का प्रयास बताता है कि पशुपालन से होने वाली वर्तमान आय के साथ पशुधन का विकास भी भविष्य की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।

    शासकीय सहयोग से आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान

    राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के माध्यम से मिले अनुदान ने संध्या को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उन्होंने इस अवसर का उपयोग करते हुए पशुपालन को नियमित आय के साधन के रूप में विकसित किया।

    संध्या ने योजना के तहत मिले सहयोग के लिए पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि विभागीय सहायता से डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

    लमगांव की संध्या की कहानी ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों के लिए प्रेरक उदाहरण है। शासकीय योजना से मिले सहयोग, पशुओं की बेहतर देखभाल और निरंतर मेहनत के माध्यम से उन्होंने डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। आज दूध की बिक्री से होने वाली नियमित आमदनी उनके वर्तमान को आर्थिक संबल दे रही है, वहीं बढ़ता पशुधन भविष्य में और आगे बढ़ने की उम्मीद जगा रहा है।

  • पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने की विभागीय योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा, अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश

    पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने की विभागीय योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा, अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश

    रायपुर

    पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व एवं पुरातत्व विभाग की योजनाओं और विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास से जुड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।

    चित्रकोट को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी तेज

    मंत्री  अग्रवाल ने बस्तर के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं दो सप्ताह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में डीपीआर एवं प्रेजेंटेशन तैयार कर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने को कहा। साथ ही सिरपुर पर्यटन विकास की तैयार डीपीआर का प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए।

    144 पर्यटन स्थलों का सर्वेक्षण पूरा, 20 स्थलों पर प्राथमिकता से विकसित होंगी सुविधाएं

    छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के 144 पर्यटन स्थलों का गैप फिलिंग असेसमेंट पूरा कर लिया गया है। मंत्री  अग्रवाल ने सर्वेक्षण के आधार पर प्राथमिकता वाले 20 पर्यटन स्थलों में सार्वजनिक शौचालय, स्वच्छ पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं फास्ट ट्रैक आधार पर विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन सुविधाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए स्थानीय समितियों को जिम्मेदारी देने अथवा सुलभ इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं का सहयोग लेने को कहा।

    राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 31 नए स्थलों पर दो माह में शुरू होंगे कार्य

    मंत्री  अग्रवाल ने राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत पूर्व में विकसित स्थलों के अधूरे कार्य शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्मित पर्यटन इकाइयों, सार्वजनिक शौचालयों और कैफेटेरिया का संचालन स्थानीय समितियों को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन चिह्नित 31 स्थलों पर विकास कार्यों के लिए डीपीआर, निविदा और एजेंसी चयन सहित सभी प्रक्रियाएं दो माह के भीतर पूरी कर कार्यादेश जारी करने तथा निर्माण कार्य प्रारंभ कराने को कहा। प्रथम चरण में चयनित 10 स्थलों के अतिरिक्त बस्तर के एक-दो महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल करने तथा आवश्यक बजट प्रस्ताव प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने माता कौशल्या धाम चंदखुरी में प्रभु राम की नवीन प्रतिमा को स्थानांतरित कर मंदिर समिति से चर्चा कर जल्द से जल्द मूर्ति स्थापना के निर्देश दिए।

    रामलला दर्शन योजना के लिए वैकल्पिक ट्रेन संचालन की व्यवस्था

     रामलला दर्शन योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। आईआरसीटीसी द्वारा पेंट्री बोगी में तकनीकी समस्या के कारण ट्रेन उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में उन्होंने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) के माध्यम से पृथक एजेंसी चयनित कर वैकल्पिक ट्रेन संचालन की आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    भोरमदेव कॉरिडोर की ऑनलाइन निगरानी, होमस्टे हितग्राहियों को शीघ्र मिलेगी सब्सिडी

    मंत्री  अग्रवाल ने भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा और तकनीकी निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने तथा संबंधित एजेंसियों को नियमानुसार समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने होमस्टे नीति के अंतर्गत चयनित हितग्राहियों को कैपिटल सब्सिडी शीघ्र उपलब्ध कराने तथा तीन चरणों में सहायता राशि वितरण की आवश्यक तैयारी करने को कहा।

    पर्यटन मंडल की जिन इकाइयों को तकनीकी कारणों से निजी संस्थाओं को लीज पर देना संभव नहीं है, उनका संचालन स्थानीय समितियों के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक पर्यटन इकाई में आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनकी दूरी दर्शाने वाले बड़े सूचना बोर्ड लगाने को कहा गया।

    पर्यटन मार्गों पर विकसित होंगे सुविधा केंद्र, परियोजनाओं की निगरानी के लिए इंजीनियरों की सेवाएं

    मंत्री  अग्रवाल ने पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रमुख पर्यटन मार्गों पर वेसाइड एमेनिटीज विकसित करने हेतु सभी जिला कलेक्टरों से समन्वय कर भूमि चिह्नित करने और पर्यटन मंडल का लैंड बैंक तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र एवं राज्य शासन की निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं की तकनीकी मॉनिटरिंग के लिए सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी के माध्यम से इंजीनियरों की सेवाएं लेने पर सहमति प्रदान की।

    बैठक में मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन की तैयारियों, कुदरगढ़ रोप-वे निर्माण, मंदिर परिसरों के तालाबों एवं झीलों के जीर्णाेद्धार, मुख्यमंत्री की घोषणाओं से संबंधित लंबित कार्यों तथा स्वीकृत बजट के समयबद्ध उपयोग की भी समीक्षा की गई। मंत्री  अग्रवाल ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों को जोड़कर मिनी सर्किट विकसित करने, स्थानीय टूर ऑपरेटरों एवं ट्रैवल एजेंटों के साथ कार्यशाला आयोजित करने तथा केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए।

    कलाकारों के लिए डिजिटल पोर्टल होंगे सुदृढ़, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण पर विशेष जोर

    संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कलाकारों के पंजीयन हेतु संचालित चिन्हारी पोर्टल को अपडेट करने, कलाकार दलों के श्रेणी उन्नयन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पारदर्शी आवंटन के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक पीठों के संबंधित विभागों को हस्तांतरण और पुनः संचालन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा।

    पुरातत्व विभाग की समीक्षा में सिरपुर के सुरंग टीला और नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो का नियमित संचालन सुनिश्चित करने, अंबिकापुर जिला पुरातत्व संग्रहालय के उन्नयन तथा रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में ऐतिहासिक रियासतों से जुड़ी सामग्री के व्यवस्थित प्रदर्शन के निर्देश दिए गए। बैठक में युवा दर्शन योजना में खिलाड़ियों को शामिल करने तथा फिल्म सिटी एवं ट्राइबल कन्वेंशन सेंटर के कार्यों में तेजी लाने पर भी चर्चा हुई।

    मंत्री  अग्रवाल ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने तथा अगली समीक्षा बैठक में प्रत्येक निर्देश पर की गई कार्रवाई का अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना भी आवश्यक है।

    बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के उपसचिव  अभिषेक गुप्ता, पर्यटन मंडल की उपमहाप्रबंधक मती पूनम शर्मा, राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • *विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा हमारी जनजातीय संस्कृति, आस्था और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*

    *विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा हमारी जनजातीय संस्कृति, आस्था और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*

    रायपुर 

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व 2026 में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया। इस अवसर पर बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा के अनुरूप प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक पागा पहनाकर उनका सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री साय ने आत्मीय आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी आस्था, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत है। इस पर्व में बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक समरसता की सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई देती है। हमारी सरकार बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

    प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों, परंपराओं तथा इस वर्ष के आयोजन की तैयारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

    *75 दिनों तक चलती है आस्था और परंपरा की अनूठी यात्रा*

    प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाला विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। हरेली अमावस्या से इसकी पारंपरिक शुरुआत होती है और विभिन्न पूजा-विधानों एवं अनुष्ठानों के साथ यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तक चलता है।

    इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा तथा 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। बस्तर दशहरा के विभिन्न अनुष्ठानों में अंचल के अलग-अलग समुदायों की परंपरागत और महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है।

    *मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा है बस्तर दशहरा*

    बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बस्तर में दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था और आराधना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है।

    बस्तर दशहरा की परंपरा को ऐतिहासिक मान्यताओं में चालुक्य नरेश पुरुषोत्तम देव से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम देव ने पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की यात्रा की थी, जहां उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि प्राप्त हुई। इसी ऐतिहासिक परंपरा के साथ बस्तर दशहरा में रथ का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है।

    बस्तर दशहरा में मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों और समाज के अलग-अलग वर्गों की जिम्मेदारियां परंपरागत रूप से निर्धारित हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर रथ निर्माण और आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं तक स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इसकी विशेषता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही सामूहिक सहभागिता की यह परंपरा बस्तर दशहरा को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का अनूठा उदाहरण बनाती है।

    *देश-दुनिया को आकर्षित करती है बस्तर की जीवंत संस्कृति*

    विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-अनुष्ठानों, जनजातीय परंपराओं और लोक संस्कृति के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक आयोजन और बस्तर की जीवंत संस्कृति को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं।

    बस्तर दशहरा जहां सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है, वहीं यह बस्तर की लोक कला, परंपराओं और पर्यटन को भी व्यापक पहचान देता है। विभिन्न समुदायों की सामूहिक भागीदारी और मां दंतेश्वरी के प्रति अगाध आस्था इस पर्व को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर की संस्कृति छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। बस्तर दशहरा जैसी परंपराएं हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। इन परंपराओं का संरक्षण और उन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

    मुख्यमंत्री को आमंत्रण देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में बस्तर सांसद महेश कश्यप, परगनाकरेकोट के  मंगलु मांझी,  बलराम मांझी, श्री पदम् चालकी, समारू चालकी, डमरू चालकी, लक्ष्मण मांझी सहित अनेक मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन एवं बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • युवाओं से कहा – बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और मेहनत से उन्हें साकार करें

    युवाओं से कहा – बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और मेहनत से उन्हें साकार करें

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री  साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री  साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए।

    प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री  साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।  प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया।

    अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया – कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य

    युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।

    “कभी नहीं सोचा था सरपंच भी बनूंगा, ईश्वर ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया”

    बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कैसे मिली। सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री  साय ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जशपुर के बगिया जैसे छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण छोटी उम्र में ही छोटे भाइयों, मां और दादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती-बाड़ी संभाली और छोटे भाइयों को सक्षम बनाने का प्रयास किया। उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि गांव का सरपंच बनूंगा। सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए सरपंच से विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री और आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला।

    मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं से कहा कि उन्होंने हमेशा ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को जीवन में अपनाया। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छे उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ काम करते हैं तो ईश्वर भी हमारा साथ देता है। शायद ईश्वर को मेरे हाथों से लोगों की सेवा करानी थी, इसलिए एक छोटे से गांव के सरपंच को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर मिला।

    समय की कीमत समझें, अपनी रुचि को बनाएं लक्ष्य

    छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय की कीमत समझनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी उनका समय अध्ययन और अपने भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का है। इस समय का जितना अधिक सदुपयोग करेंगे, भविष्य उतना ही बेहतर होगा। सपने हमें मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। हर युवा को अपनी रुचि पहचाननी चाहिए, उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से प्रयास करना चाहिए।

    “जल है तो कल है”—जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान

    कक्षा नवमीं के छात्र आदित्य राज तिवारी ने मुख्यमंत्री  साय से पूछा कि स्कूली विद्यार्थी जल संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है।” जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और यह आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ‘जल संचय-जनभागीदारी’ अभियान चलाया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री  साय ने कोरिया जिले में लागू 5 प्रतिशत मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में अच्छे परिणाम सामने आए हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका उल्लेख किया है। राजनांदगांव में सोक पिट निर्माण की दिशा में अच्छा काम हो रहा है।उन्होंने युवाओं से वर्षा जल संचयन को अपने घर, स्कूल और समाज में प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

    वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

    छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल के कक्षा ग्यारहवीं के छात्र मितांश सिंह ने प्रदेश के आर्थिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य है और इन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर प्रदेश की आय बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

    शिक्षा को संस्कार और रोजगार से जोड़ रही नई शिक्षा नीति

    छात्रा सानिया परवीन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में सवाल किया। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित हैं। इन संस्थानों में प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और अधोसंरचना को भी लगातार बेहतर किया जा रहा है। केंद्र सरकार की पीएम योजना में छत्तीसगढ़ के 341 स्कूल शामिल हैं। योजना के तहत इन विद्यालयों में अधोसंरचना, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं सहित आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखते हुए उसे संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ना है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के बच्चों और युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करे।

    युवाओं के साथ सुने भक्ति गीत, प्रतिभाओं का किया सम्मान

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने युवाओं के साथ ‘भजन क्लबिंग’ के अंतर्गत आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत भक्ति गीतों का आनंद लिया। मुख्यमंत्री ने खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

    इस अवसर पर गणमान्य नागरिक, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

  • रायपुर की फुटबॉल अकादमी से टीम इंडिया तक किरण की उड़ान, रूस के खिलाफ दिखाएंगी दम

    रायपुर की फुटबॉल अकादमी से टीम इंडिया तक किरण की उड़ान, रूस के खिलाफ दिखाएंगी दम

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ की बेटी किरण पिस्दा अब भारतीय महिला फुटबॉल टीम की जर्सी में अंतरराष्ट्रीय मैदान पर अपना दमखम दिखाएंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी की इस प्रतिभावान खिलाड़ी का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। किरण की इस कामयाबी ने एक बार फिर साबित किया है कि राज्य सरकार का प्रोत्साहन, बेहतर खेल सुविधाएं और व्यवस्थित प्रशिक्षण मिलने पर प्रदेश की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकती हैं। किरण की उपलब्धि से उत्साहित उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि किरण ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने किरण पिस्दा को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय महिला फुटबॉल टीम में उनका चयन पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उनकी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने किरण के माता-पिता, प्रशिक्षकों और रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी को भी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।  साव ने विश्वास जताया कि किरण भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की प्रतिभाशाली बेटियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    किरण की इस सफलता में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बालिका फुटबॉल अकादमी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अकादमी में मिले नियमित प्रशिक्षण, अनुशासित वातावरण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों ने किरण की प्रतिभा को निखारने में अहम योगदान दिया है। राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और प्रोत्साहन का ही परिणाम है कि अकादमी की खिलाड़ी अब भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम तक पहुंच रही हैं। विभाग का उद्देश्य प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार करना है। किरण की सफलता इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    भारतीय सीनियर महिला टीम में किरण पिस्दा की यह शानदार वापसी भी है। इससे पहले वे वर्ष 2022 में नेपाल में आयोजित एसएएफएफ वीमेन्स चैंपियनशिप (SAFF Women's Championship) में भारतीय सीनियर महिला टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अब इस महीने होने वाले फीफा (FIFA) इंटरनेशनल मैच विंडो में उन्हें रूस के खिलाफ दो अंतरराष्ट्रीय मैत्री मुकाबलों के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। पहला मुकाबला 8 अक्टूबर को शाम छह बजे कोलकाता के किशोर भारती क्रीड़ांगन में निर्धारित है। दूसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को इसी मैदान पर खेला जाएगा। इन मुकाबलों में किरण को एक बार फिर सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

    किरण को राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाने में रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी की कोच सरिता कुजूर के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की भी अहम भूमिका है। सरिता कुजूर खिलाड़ियों के तकनीकी कौशल के साथ उनकी मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और मैच के दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर विशेष ध्यान देती हैं। खिलाड़ियों के खेल का नियमित आकलन कर उनकी तकनीकी एवं मानसिक कमियों को दूर करना उनकी प्रशिक्षण पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किरण की सफलता में इस निरंतर प्रशिक्षण और व्यक्तिगत मार्गदर्शन का बड़ा योगदान रहा है।

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक मती आकांक्षा शिक्षा खलखो ने भी किरण पिस्दा के भारतीय महिला फुटबॉल टीम में चयन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि किरण की उपलब्धि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के लिए गौरव का विषय है। यह उनकी कड़ी मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि किरण की सफलता छत्तीसगढ़ की अन्य बालिका खिलाड़ियों को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।

    रायपुर की आवासीय फुटबॉल अकादमी से भारतीय सीनियर टीम तक किरण पिस्दा का सफर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की अहम सफलता है। राज्य सरकार के प्रोत्साहन और अकादमी में मिले तकनीकी एवं मानसिक प्रशिक्षण ने उनकी प्रतिभा को नई ऊंचाई दी है। अब छत्तीसगढ़ के खेलप्रेमियों की निगाहें रूस के खिलाफ होने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर हैं, जहां प्रदेश की यह बेटी भारतीय टीम की ओर से अपने खेल के प्रदर्शन के लिए तैयार है।

  • फार्मा, टेक्सटाइल, सीमेंट, दूरसंचार, डेटा सेंटर और हरित अधोसंरचना क्षेत्र की परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    फार्मा, टेक्सटाइल, सीमेंट, दूरसंचार, डेटा सेंटर और हरित अधोसंरचना क्षेत्र की परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रक्रियाएं और औद्योगिक सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन बनाती हैं। राज्य सरकार नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए आवश्यक सहयोग एवं अनुमतियां समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक भूमि, अधोसंरचनात्मक और कुशल कार्यबल निवेशकों को महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में आयोजित ‘मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद’ कार्यक्रम में विभिन्न सेक्टर्स के निवेशकों से भी मुलाकात की। उन्होंने निवेश योजनाओं और औद्योगिक विस्तार पर चर्चा करते हुए प्रतिनिधियों को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : 2027 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मुम्बई रोड शो में विभिन्न उद्योग समूहों और निवेशकों के साथ दिनभर हुई बैठकों में मध्यप्रदेश को लगभग 90 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।

    जेएसडब्ल्यू समूह ने सीमेंट, पेंट और अन्य व्यवसायों के विस्तार में दिखाई रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से जेएसडब्ल्यू समूह के श्री पार्थ जिंदल ने प्रदेश में समूह की मौजूदा औद्योगिक उपस्थिति और विस्तार योजनाओं पर चर्चा की। समूह की गतिविधियों में ग्वालियर में पेंट, धार में इस्पात, पन्ना में चूना पत्थर खनन तथा दमोह के गैसाबाद और हटा में सीमेंट से जुड़े कार्य शामिल हैं।

    बैठक में सीमेंट, पेंट और अन्य व्यवसायों के विस्तार, प्रगतिरत परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन तथा भविष्य के रणनीतिक निवेश अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। समूह ने परियोजनाओं को गति देने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।

    अक्षय ऊर्जा और भंडारण में अवादा का 22,156 करोड़ रूपये का निवेश प्रस्ताव

    अध्यक्ष अवादा समूह श्री प्रशांत चौबे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सौर, पवन, नियमित उपलब्धता वाली नवकरणीय ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर चर्चा की। समूह वर्ष 2013-14 से मध्यप्रदेश में कार्यरत है। नीमच में 151 मेगावाट और आगर सोलर पार्क में 280 मेगावाट की सौर परियोजनाएं इसकी मौजूदा उपस्थिति का हिस्सा हैं।

    समूह ने कुल 2,362 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाओं के लिए 22,156 करोड़ रूपयेका प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसमें पचोरा में 6,616 करोड़ रूपये, ईशानगर में 3,250 करोड़ रूपये और नीमच में 12,290 करोड़ रूपये का निवेश शामिल है।

    बैठक में परियोजनाओं के शीघ्र पंजीकरण, समूह की कंपनियों एवं विशेष प्रयोजन संस्थाओं द्वारा पंजीकरण के उपयोग, शासकीय भूमि आवंटन और भूमि अधिकारों के पट्टे अथवा हस्तांतरण की अनुमति पर चर्चा हुई। आगर मालवा में पवन ऊर्जा पंजीकरण को 201.3 मेगावाट से बढ़ाकर 264 मेगावॉट करने तथा समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एकल-खिड़की सहयोग की अपेक्षा की गई।

    पीथमपुर में एनक्यूब एथिकल्स का 1,200 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एनक्यूब एथिकल्स प्रायवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री मेहुल मधुसूदन शाह ने फार्मास्यूटिकल विनिर्माण के विस्तार पर चर्चा की। कंपनी की मध्यप्रदेश में स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क, पीथमपुर में इकाई है।

    कंपनी ने 2 फार्मा परियोजनाओं के लिए 1,200 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव दिया, जिनसे 800 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इनमें मौजूदा पीथमपुर इकाई का द्वितीय चरण का विस्तार और समीपवर्ती 20 एकड़ से अधिक भूमि पर स्टेराइल ऑफ्थैल्मिक अर्थात आंखों की दवाओं की नई विनिर्माण सुविधा शामिल है। नई इकाई के लिए भूमि आवंटित है। परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में राज्य सरकार के सहयोग और मध्यप्रदेश को कंपनी के विनिर्माण एवं निर्यात आधार के रूप में विस्तार देने पर विचार-विमर्श हुआ।

    छिंदवाड़ा में हिंदुस्तान यूनिलीवर का 800 रूपये से 1,000 करोड़ रूपये का विस्तार प्रस्ताव

    हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक, सप्लाई चेन, दक्षिण एशिया, श्री योगेश मिश्रा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से छिंदवाड़ा की लहगडुआ स्थित इकाई के विस्तार पर चर्चा की। दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र की कंपनी की यह इकाई देश में उसके बड़े विनिर्माण संयंत्रों में शामिल है।

    कंपनी ने सर्फ एक्सेल और व्हील के लिए नई स्प्रे-ड्राइड डिटर्जेंट विनिर्माण सुविधा में भूमि की लागत को छोड़कर 800 से 1,000 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव दिया। वर्ष 2027 से 2030 के बीच चरणबद्ध विकास और 5 से 8 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता प्रस्तावित है। इससे लगभग 700 प्रत्यक्ष और 1,500 अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों के सृजित होने की संभावना है।

    परियोजना के लिए 35 से 40 एकड़ भूमि, प्रतिदिन 1,000 किलोलीटर पानी और 5,000 केवीए विद्युत क्षमता की आवश्यकता बताई गई। शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन पद्धति अपनाने तथा मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना : 2025 के अंतर्गत अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज और विस्तार में सहयोग पर भी चर्चा हुई।

    ग्वालियर में 200 करोड़ रूपये की दूरसंचार उपकरण इकाई का प्रस्ताव, महिला रोजगार पर विशेष जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंद्रा शेखर ने दूरसंचार उपकरण एवं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी ने ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में 200 करोड़ रूपये की एआई-संचालित, निर्यातोन्मुख दूरसंचार उपकरण विनिर्माण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

    प्रस्तावित इकाई का 75 प्रतिशत से अधिक उत्पादन निर्यात के लिए निर्धारित करने की योजना है। लगभग 1,000 रोजगार अवसरों के साथ कार्यबल में 70 प्रतिशत महिलाओं और 10 प्रतिशत दिव्यांगजन की भागीदारी रखी गई है। बैठक में इकाई की स्थापना के लिए भूमि आवंटन पर विचार-विमर्श हुआ।

    ब्लैक स्टोन और वनराज रियल्टी ने लॉजिस्टिक्स एवं रियल एस्टेट में तलाशीं निवेश की संभावनाएं

    ब्लैक स्टोन के प्रबंध निदेशक श्री आलोक जैन और वनराज रियल्टी एलएलपी के श्री राजीव अजमेरा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। ब्लैक स्टोन की प्रदेश में अभी उपस्थिति नहीं है।

    लगभग 500 से 1,000 करोड़ रूपये के संभावित निवेश के संदर्भ में प्रमुख स्थानों पर उपयुक्त राजस्व भूमि उपलब्ध कराने, प्रोत्साहन प्रक्रिया की स्पष्टता तथा आवश्यक अनुमतियों और स्वीकृतियों के शीघ्र निराकरण पर विचार-विमर्श हुआ।

    सिफी ने मध्यप्रदेश में हाइपरस्केल और एआई-रेडी डेटा सेंटर में दिखाई रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सिफी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के डेटा सेंटर व्यवसाय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शरद अग्रवाल ने प्रदेश में डेटा सेंटर अवसंरचना विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    कंपनी ने हाइपर स्केल, एआई-रेडी और एज डेटा सेंटर स्थापित करने में रुचि दिखाई। इसके लिए विश्वसनीय बिजली, नवकरणीय ऊर्जा, फाइबर कनेक्टिविटी और भविष्य में विस्तार की सुविधा वाली भूमि की आवश्यकता जताई गई। भूमि, पात्र प्रोत्साहनों और समयबद्ध प्रस्ताव के लिए एकल-खिड़की सहयोग पर भी संवाद हुआ।

    इन्फ्रा मार्केट का निर्माण सामग्री क्षेत्र में 200 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से हेला इन्फ्रा मार्केट लिमिटेड के सह-संस्थापक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं निदेशक श्री सौविक सेनगुप्ता ने निर्माण सामग्री क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी वर्ष 2016 से मध्यप्रदेश में कार्यरत है।

    कंपनी ने 200 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिससे लगभग 250 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। विनिर्माण विस्तार, स्थानीय आपूर्ति शृंखला और उपयुक्त औद्योगिक स्थानों की पहचान पर विचार-विमर्श हुआ। भूमि, अधोसंरचनात्मक विकास, अनुमतियों और पात्र प्रोत्साहनों के संबंध में राज्य सरकार के सहयोग की अपेक्षा की।

    डी एंड एच इंडिया का इंदौर के निकट 300 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से डी एंड एच इंडिया लिमिटेड के निदेशक श्री सौरभ वोरा ने वेल्डिंग सामग्री और सहायक विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार पर चर्चा की। कंपनी वर्ष 1974 से मध्यप्रदेश में कार्यरत है और इसके कार्यालय मुंबई तथा इंदौर में हैं। कंपनी ने इंदौर के निकट लगभग 25 एकड़ भूमि पर 300 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इससे करीब 500 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन, भूमि, अधोसंरचना, आवश्यक स्वीकृतियों और पात्र प्रोत्साहनों पर विचार-विमर्श हुआ।

    ई-बस, बायोगैस और स्मार्ट मीटर परियोजनाओं में एवरसोर्स का 3,500 करोड़ रूपये का निवेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एवरसोर्स कैपिटल की कार्यकारी निदेशक सुश्री खुशबू शाहानी ने हरित अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश और नई संभावनाओं पर चर्चा की। समूह की परियोजनाएं इलेक्ट्रिक बसों, संपीड़ित बायोगैस और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

    प्रदेश में समूह का लगभग 3,500 करोड़ रूपये का प्रतिबद्ध निवेश प्रगतिरत है, जिससे करीब 6,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों की संभावना है। ग्रीनसेल के माध्यम से पीएम ई-बस सेवा के अंतर्गत 682 इलेक्ट्रिक बसों में लगभग 2,000 करोड़ रूपये का निवेश शामिल है। एवरएनवायरो के इंदौर और प्रस्तावित भोपाल बायोगैस संयंत्रों से लगभग 350 करोड़ रूपये का निवेश जुड़ा है। एनर्जी मार्क और अल्फानार के माध्यम से भोपाल एवं जबलपुर की बिजली वितरण कंपनियों के लिए 23 लाख स्मार्ट मीटर परियोजनाओं में करीब 1,200 करोड़ रूपये का निवेश है।

    बैठक में प्रगतिरत परियोजनाओं की क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों के समाधान, निवेश विस्तार और नए अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।

    मीरा कॉटन का 2,000 करोड़ रूपये का टेक्सटाइल निवेश प्रस्ताव, 4 हजार रोजगार की संभावना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मीरा कॉटन एंड सिंथेटिक मिल्स प्रायवेट लिमिटेड के निदेशक श्री जय जयेश शाह ने अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री जयेश शाह के साथ टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी पॉलिस्टर टेक्सचर्ड यार्न, निटेड फैब्रिक और गारमेंट का एकीकृत विनिर्माण करती है। इसके संयंत्र भिवंडी और सिलवासा में हैं।

    कंपनी ने मध्यप्रदेश में 2,000 करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव रखा, जिससे लगभग 4,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। नई इकाई की स्थापना और संचालन को सुगम बनाने के लिए अधोसंरचना तथा पात्र प्रोत्साहनों से संबंधित सहयोग पर चर्चा हुई।

    सनटेक रियल्टी ने जीसीसी, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स में दिखाई निवेश की रुचि

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सनटेक रियल्टी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री कमल खेतान ने रियल एस्टेट और शहरी अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर चर्चा की।

    कंपनी ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र तथा लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग में रुचि व्यक्त की। बैठक में उपयुक्त राजस्व भूमि उपलब्ध कराने, पात्र प्रोत्साहनों की प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियों एवं स्वीकृतियों के शीघ्र निराकरण पर विचार-विमर्श हुआ।

    इंडियन डायमंड सीमेंट का 3,000 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से इंडियन डायमंड सीमेंट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक श्री रुद्र प्रताप त्रिपाठी ने सीमेंट एवं अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। कंपनी की मध्यप्रदेश के सतना में फैक्ट्री है।

    कंपनी ने 3,000 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत रखा, जिससे 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। पन्ना जिले की गुनौर तहसील में लगभग 1,000 एकड़ भूमि के स्वामित्व से जुड़े विषयों और खनिज ब्लॉक पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की गई। भूमि एवं पानी की उपलब्धता, परियोजना शीघ्र प्रारंभ करने के लिए एकल-खिड़की स्वीकृतियों तथा बिक्री कर एवं अन्य प्रोत्साहनों पर भी चर्चा हुई।