Author: NewseDay

  • CNG कारों की बढ़ती डिमांड के बीच Mahindra की नई SUV की एंट्री, 15 अक्टूबर को होगा बड़ा लॉन्च

    CNG कारों की बढ़ती डिमांड के बीच Mahindra की नई SUV की एंट्री, 15 अक्टूबर को होगा बड़ा लॉन्च

     नई दिल्ली
       
    महिंद्रा नवरात्रि में एक नई कार लॉन्च करने वाली है. कंपनी 15 अक्टूबर को नई एसयूवी पेश करेगी. महिंद्रा का एसयूवी लॉन्च करना कोई बड़ी चर्चा की बात नहीं है. बल्कि असली चर्चा हो रही है सीएनजी कार की. दावा किया जा रहा है कि 15 अक्टूबर को महिंद्रा कॉम्पैक्ट एसयूवी एक्सयूवी 3एक्सओ (Mahindra XUV 3XO) का सीएनजी वर्जन लॉन्च कर सकती है। 

    15 अक्टूबर को महिंद्रा अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी का नया वर्जन लॉन्च करने वाली है. अगर कंपनी कार का सीएनजी अवतार लॉन्च करती है, तो ये ब्रांड के पोर्टफोलियो में चौथा पावरट्रेन होगा. अब तक कंपनी की कारें पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक अवतार में आती हैं. अब सीएनजी का विकल्प भी कंज्यूमर्स को मिल सकता है। 

    सीएनजी की एंट्री के साथ महिंद्रा का सीधा मुकाबला टाटा मोटर्स से होगा. जहां टाटा मोटर्स की नेक्सॉन और पंच सीएनजी में आने वाली छोटी एसयूवीज हैं. वहीं महिंद्रा के पास इनका कोई जवाब नहीं था. एक्सयूवी 3एक्सओ सीएनजी को लॉन्च करके कंपनी पूरा खेल पलट सकती है। 

    क्या होगा कार में खास? 
    फिलहाल महिंद्रा एक्सयूवी 3एक्सओ में दो पेट्रोल इंजन का विकल्प मिलता है. ये छोटी एसयूवी 111 एचपी पावर वाले 1.2 लीटर एमपीएफआई टर्बो पेट्रोल इंजन और 131 एचपी पावर वाले 1.2 लीटर डायरेक्ट इंजेक्शन टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ आती है. अब इन दोनों के अलावा हमें फैक्टरी फिटेड सीएनजी का विकल्प मिल सकता है।  

    हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. एमपीएफआई इंजन को मैन्युफैक्चर करना सस्ता होता है और ये इंजन सीएनजी को आसानी से एडॉप्ट कर लेता है. महिंद्रा इस इंजन को ही सीएनजी के साथ दे सकती है. कंपनी सीएनजी का विकल्प ऐसे मौके पर लेकर आ रही है, जब पैसेंजर व्हीकल मार्केट में ये दूसरे सबसे ज्यादा बिकने वाला फ्यूल ऑप्शन है। 

    महिंद्रा के लिए एक्सूयवी 3एक्सओ में सीएनजी जोड़ना चुनौती से भरा होने वाला है. चूंकि इस कार में सेगमेंट का सबसे कम बूट स्पेस मिलता है. ऐसे में सीएनजी टैंक जोड़ने का मतलब है कि बूट स्पेस और भी कम होगा. महिंद्रा टाटा की तरह डुअल सिलेंडर सेटअप का भी इस्तेमाल कर सकती है। 

    कंपनी ने आधिकारिक तौर पर सीएनजी इंजन को कन्फर्म नहीं किया है. छोटी गाड़ियों में लोग सीएनजी इंजन को काफी पसंद कर रहे हैं. इसकी बड़ी वजह पेट्रोल के मुकाबले कम रनिंग कॉस्ट का होना है. वहीं अब लोगों के पास छोटी गाड़ियों में डीजल का विकल्प बचा नहीं है। 

  • क्या सास को बहू की पेंशन में मिलता है हक? 83 साल की बुजुर्ग महिला के मामले में कोर्ट ने दिया जवाब

    क्या सास को बहू की पेंशन में मिलता है हक? 83 साल की बुजुर्ग महिला के मामले में कोर्ट ने दिया जवाब

    तिरुवनंतपुरम
    क्या सास अपनी बहू को मिल रही पेंशन में हिस्सा मांग सकती है? एक 83 साल की दादी ने न सिर्फ बहू की पेंशन में हिस्सा मांगा, बल्कि पोती से हर महीने 15,000 रुपये खर्चे के लिए भी मांगे। वह अपने दिवंगत बेटे की पत्नी को मिल रही पेंशन में भी हिस्सा मांग रही थी। मामला कोर्ट पहुंचा तो दोनों मांगों पर बड़ा फैसला आया। आखिर कोर्ट ने उनकी मांग क्यों नहीं मानी बहू को पेंशन का हिस्सा और पोती को खर्चे का पैसा देने से क्यों मना कर दिया?

    क्या है पूरा मामला?
    मामला 83 साल की एस. थैंकम्मा से जुड़ा है। वह केरल सरकार के फिशरीज डिपार्टमेंट (Fisheries Department) से रिटायर हुई हैं और खुद पेंशन लेती हैं। उनके पति भी फिशरीज डिपार्टमेंट में सीनियर अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें भी पेंशन मिलती है। थैंकम्मा के बेटे टी राज कुमार की नौकरी के दौरान मौत हो गई थी। वह केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड यानी KSEB में सीनियर सुप्रीटेंडेट थे।

    पेंशन में मांगा बहू से हिस्सा
     रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी को विधवा फैमिली पेंशन मिलने लगी, जबकि उनकी बेटी यानी थैंकम्मा की पोती कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। दादी ने पोती और बहू के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 15,000 रुपये महीने के खर्चे के पैसे की मांग की। साथ ही बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी को मिल रही फैमिली पेंशन में भी अपना हिस्सा मांगा।

    दादी को पहले ही मिले थे 12 लाख रुपये
    इस मामले में कोर्ट के सामने यह भी आया कि बेटे की मौत के बाद मिलने वाले सर्विस बेनेफिट में से करीब 12.28 लाख रुपये दादी को पहले ही मिल चुके थे। यह रकम KSEB ने सीधे उन्हें दिये थे। बाकी रकम बेटे की पत्नी को मिले थे।

    पोती से खर्चे का पैसा की मांग क्यों नहीं मानी?
    कोर्ट ने कहा कि पोती अभी कॉलेज की छात्रा है। व
    ह अपनी पढ़ाई के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से एजुकेशन लोन लेकर पढ़ रही है। ऐसे में उससे दादी का पैसे की मांग करना उचित नहीं है। दादी की ओर से दलील दी गई थी कि सीनियिर सिटीजन एक्ट के तहत पोती को उनकी देखभाल करनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि पढ़ाई कर रही पोती पर ऐसी आर्थिक जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा। खासकर, तब जब वह खुद एजुकेशन लोन के सहारे पढ़ाई कर रही है।

    पेंशन में नहीं मिल सकता हिस्सा
    दादी ने बहू को मिल रही फैमिली पेंशन में भी हिस्सा मांगा था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर दादी को बेटे की विधवा को मिल रही फैमिली पेंशन का हिस्सा दिलाया जा सके। कोर्ट ने दोनों मांगों 15,000 रुपये महीने के हिसाब से खर्च का पैसा और फैमिली पेंशन में हिस्से को खारिज कर दिया। यानी सिर्फ उम्र अधिक होने के आधार पर पोती से खर्चे का पैसा या बहू की फैमिली पेंशन में हिस्सा मांगने का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता। मामले में लागू कानून और संबंधित व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी देखी जाती है।

  • भोपाल में ट्रैफिक की बड़ी समस्या होगी दूर, ऐशबाग का 90 डिग्री ब्रिज दिसंबर तक होगा शुरू

    भोपाल में ट्रैफिक की बड़ी समस्या होगी दूर, ऐशबाग का 90 डिग्री ब्रिज दिसंबर तक होगा शुरू

    भोपाल

    भोपाल शहर में पातरा अंडरपास को 3 अक्टूबर से बंद किए जाने की संभावनाओं के बीच ऐशबाग 90 डिग्री ब्रिज को जल्द शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। पात्रा अंडरपास बंद करने की सूचना पर रहवासियों ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद ट्रैफिक विभाग ने रेलवे को अंडरपास बंद करने की अनुमति नहीं दी। हालांकि रेलवे की ओर से इस हिस्से में प्लेटफार्म नंबर-1 के लिए ट्रैक का काम किया जाना है। ऐसे में वैकल्पिक यातायात व्यवस्था तैयार होने के बाद अंडरपास को बंद किया जाना प्रस्तावित है। लोगों कहना है कि बोगदा पुल मार्ग पहले ही मेट्रो लाइन निर्माण के चलते बंद है, बरखेड़ी फाटक बंद हो चुका है। ऐशबाग, बाग उमराव दूल्हा, महामाई बाग, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, नवीन नगर, पुष्पा नगर, आदि की करीब एक लाख की आबादी निर्भर है, वर्तमान में मंडी रोड और अंडर बाइपास रोड ही एक विकल्प है।

    अंडरपास बंद होने से बढ़ता दबाव
    पातरा अंडरपास शहर के इस हिस्से में आवागमन का प्रमुख रास्ता है। इसे बंद करने पर बरखेड़ी फाटक, बोगदापुल और आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इससे भारत टॉकीज ब्रिज पर वाहनों को लोड बढ़ने से आवागमन मुश्किल हो जाता।

    सुधार के जो तकनीकी दिक्कतें थी, उन्हे हल कर लिया गया है। ऐशबाग ब्रिज जल्द से जल्द शुरू करने की दिशा में काम चल रहा है।-एआर मोरे, इंजी, ब्रिज, पीडब्ल्यूडी

    यातायात की इस संभावित समस्या को देखते हुए ऐशबाग 90 डिग्री ब्रिज को शुरू करने की दिशा में दोबारा काम शुरू किया गया है। ब्रिज के सुधार और शेष निर्माण कार्य के तहत दो पिलर बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा जरूरी तकनीकी काम भी किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि दिसंबर तक इसका काम पूरा कर इसे यातायात के लिए शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    एक बंद, दूसरे को शुरू करने की चुनौती
    पात्रा अंडरपास को रेलवे के ट्रैक और प्लेटफार्म विस्तार के कारण बंद किया जाना है, लेकिन उससे पहले वैकल्पिक मार्ग तैयार करना जरूरी है। ऐसे में 90 डिग्री ब्रिज को जल्द शुरू करना यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • EPFO का बड़ा बदलाव, UPI से सीधे निकाल सकेंगे PF का पैसा; मिनटों में होगा क्लेम सेटलमेंट

    EPFO का बड़ा बदलाव, UPI से सीधे निकाल सकेंगे PF का पैसा; मिनटों में होगा क्लेम सेटलमेंट

    नई दिल्‍ली
     कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने बैंकों के सहयोग से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए प्रोविडेंट फंड (PF) निकाले का ट्रायल शुरू कर दिया है. यूपीआई से पीएफ का पैसा निकलने से सब्‍सक्राइबर्स को क्‍लेम के लिए हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा. क्लेम सेटल होते ही रकम मिनटों में सीधे बैंक खाते में आ जाएगी. इस बड़े बदलाव का फायदा देश के 30 करोड़ ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को होगा. यूपीआई से पीएफ फंड की पूरी निकासी नहीं की जा सकेगी. केवल कुल पीएफ राशि का 75 फीसदी हिस्‍सा ही यूपीआई के जरिए निकाला जा सकेगा। 

    अभी अपने पीएफ खाते से पैसा निकालने के लिए कर्मचारियों को यूएएन पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन क्लेम फाइल करना पड़ता है. इसके बाद दस्तावेजों की जांच होती है और फील्ड ऑफिस से वेरिफिकेशन होता है. इसके बाद बैंक प्रोसेसिंग में कई दिन लग जाते हैं. अब ईपीएफओ का इरादा UAN पोर्टल को मेंबर्स के UPI हैंडल से लिंक करने का है. इससे पेपरवर्क और मैनुअल अप्रूवल का झंझट खत्‍म होगा और क्लेम की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड हो जाएगी। 

    कब से चालू होगी यूपीआई पीएफ निकासी?
    EPFO का कुल कॉर्पस लगभग 26 लाख करोड़ रुपये का है और इसमें करीब 7.5 करोड़ एक्टिव कॉन्ट्रिब्यूटर्स हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैंकों के साथ चल रहा सिस्टम इंटीग्रेशन और सिक्योरिटी टेस्टिंग का काम अंतिम चरण में है. सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस साल के अंत तक यूपीआई से पीएफ निकासी की सुविधा शुरू हो जाएगी। 

    नया ऐप भी हो रहा है तैयार
    मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई से पीएफ निकासी को आसान बनाने के लिए ईपीएफओ सब्‍सक्राइबर्स के बैंक खातों से जुड़ा एक नया मोबाइल ऐप भी तैयार कर रहा है. यह ऐप नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के BHIM ऐप सहित अन्य प्रमुख यूपीआई प्‍लेटफॉर्म्‍स से जुड़ा होगा. इससे पीएफ खाताधारक अपनी सुविधानुसार अपनी यूपीआई पिन दर्ज करके पीएफ क्‍लेम का पैसा अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेगा। 

     

  • सरकारी कर्मचारियों को झटका! 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद तुरंत नहीं बढ़ेगी सैलरी

    सरकारी कर्मचारियों को झटका! 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद तुरंत नहीं बढ़ेगी सैलरी

    नई दिल्ली

    केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सैलरी का फायदा आखिर कब से मिलना शुरू होगा। वेतन आयोग (Pay Commission) की प्रक्रिया सिर्फ रिपोर्ट तैयार होने तक सीमित नहीं है। आयोग को अपनी रिकमेंडेशन देने के बाद भी सरकार की समीक्षा, मंजूरी और नोटिफिकेशन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसलिए रिपोर्ट जमा होने और सैलरी में वास्तविक बदलाव दिखने के बीच कुछ महीनों का अंतर हो सकता है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

    8th पे कमीशन को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में करीब 11 महीने पूरे हो चुके हैं और आयोग फिलहाल एम्पलायी व पेंशनर्स संगठन के साथ बातचीत कर रहा है। अब तक देश के कई शहरों में बैठकें हो चुकी हैं। अगली मीटिंग बेंगलुरु में 7-8 अक्टूबर और इसके बाद मुंबई में 22-23 अक्टूबर को प्रस्तावित हैं।

    आयोग ने दिल्ली, कोलकाता, भुवनेश्वर, लखनऊ, श्रीनगर, हैदराबाद, पुणे, देहरादून, चेन्नई, जयपुर, पुडुचेरी और चंडीगढ़ समेत कई स्थानों पर स्टेकहोल्डर्स से चर्चा की है। हालांकि, रिपोर्ट कब जमा होगी, इसकी आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं है। कुछ एक्सपर्ट का अनुमान है कि बातचीत नवंबर तक पूरे होने पर रिपोर्ट फरवरी या मार्च 2027 में आ सकती है, जबकि एक अन्य अनुमान के मुताबिक आयोग अपनी रिपोर्ट मई 2027 की डेडलाइन तक जमा कर सकता है।

    कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि पे कमीशन की रिपोर्ट सबमिट होने का मतलब यह नहीं है कि अगले ही महीने सैलरी बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दी गई रिकमेंडेशन को पहले सरकार की तरफ से एग्जामिन किया जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से गठित मिनिस्टर्स का ग्रुप रिपोर्ट की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर आयोग से क्लेरिफिकेशन या बदलाव की मांग भी की जा सकती है।

    इसके बाद सरकार रिकमेंडेशन पर अंतिम फैसला लेगी और उन्हें लागू करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। यही वजह है कि रिपोर्ट सबमिशन और एक्चुअल इंप्लीमेंटेशन के बीच कई महीनों का गैप हो सकता है।

    इंप्लीमेंटेशन की अवधि को लेकर भी अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के सी. श्रीकुमार के मुताबिक सरकार रिकमेंडेशन लागू करने में करीब 3 से 4 महीने ले सकती है। वहीं, केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और कामगार परिसंघ (Confederation of Central Government Employees & Workers) के एसबी यादव का अनुमान है कि रिव्यू और फाइनल डिसीजन की प्रक्रिया में करीब 4 से 6 महीने लग सकते हैं।

    इस हिसाब से अगर 8th पे कमीशन अपनी रिपोर्ट मई 2027 तक जमा करता है, तो सैलरी रिवीजन का एक्चुअल इंपैक्ट 2027 के दूसरे हिस्से या साल के अंत में देखने को मिल सकता है। हालांकि, अंतिम टाइमलाइन पूरी तरह सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।

    8th पे कमीशन की नई पे स्केल को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी किए जाने की उम्मीद बताई जा रही है, लेकिन एक्च्युअल इंप्लीमेंटेशन बाद में हो सकता है। ऐसी स्थिति में इफेक्टिव डेट और इंप्लीमेंटेशन डेट के बीच की अवधि के लिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर मिल सकते हैं। हालांकि, एरियर की अवधि और भुगतान को लेकर अंतिम फैसला सरकार की नोटिफिकेशन के बाद ही स्पष्ट होगा।

    पुराने पे कमीशन को देखें तो रिकमंडेशन तैयार करने में अलग-अलग समय लगा है। 7th पे कमीशन का गठन फरवरी 2014 में हुआ था और उसने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट जमा की थी। वहीं, 6th पे कमीशन अक्टूबर 2006 में गठित हुआ और मार्च 2008 में report दी। इससे साफ है कि पे कमीशन की पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है। इसलिए 8th CPC के मामले में भी कर्मचारियों को रिपोर्ट, सरकार अप्रूवल और नोटिफिकेशन तीनों चरणों को ध्यान में रखकर सैलरी हाइक की टाइमलाइन समझनी चाहिए।

  • मां दुर्गा के हाथी पर आगमन का शुभ संयोग, धन-समृद्धि के संकेत; 9 दिनों की पूजा से होंगे ये बड़े बदलाव

    मां दुर्गा के हाथी पर आगमन का शुभ संयोग, धन-समृद्धि के संकेत; 9 दिनों की पूजा से होंगे ये बड़े बदलाव

    अक्टूबर के इसी महीने में नवरात्रि की भी शुरुआत हो रही है, जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. जगह जगह पर माता की स्थापना के लिए झांकियां तैयार होनी शुरू हो चुकी हैं. शहडोल जिले के चौक चौराहों पर जहां-जहां दुर्गा मां की प्रतिमा स्थापित की जाती है. वहां पर कई दिन पहले से ही पंडाल सजना लाइटिंग की व्यवस्था झांकी की व्यवस्था की जा रही है. मूर्तिकार मूर्तियों को तैयार करने में जुटे हुए हैं. इस बार माता किस पर सवार होकर आ रही हैं, बैठकी का शुभ मुहूर्त कब है, और जिस वाहन में माता आ रही हैं उसके क्या संकेत हैं, जानिए ज्योतिष आचार्य से

    11 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत
    ज्योतिष  बताते हैं कि, ''इस बार नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है, दिन रविवार पड़ रहा है. प्रातः कालीन सुबह 5:27 से लेकर के 10:30 बजे तक दिन में घट स्थापना का पहला शुभ मुहूर्त है. इसके बाद एक अभिजीत मुहूर्त भी है जो विशेष कर 11:45 दिन में शुरू होगा और 1:00 बजे के बीच में अभिजीत मुहूर्त रहेगा. यह बहुत महत्वपूर्ण मुहूर्त माना जाता है. इस मुहूर्त की लोग प्रतीक्षा भी करते हैं, और फिर एक मुहूर्त सायं कालीन शाम को 6:00 बजे से लेकर के 9:00 बजे के बीच में रात्रि कालीन समय में रहेगा. इस मुहूर्त में घट स्थापना करें, देवी की स्थापना करें, पंडाल को सजाएं और इसमें स्थापना करके पूजा पाठ करें तो देवी बहुत प्रसन्न होती हैं.''

    11 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत 
    ज्योतिष  बताते हैं कि, माता का हाथी पर आगमन देश और दुनिया के लिए कई बड़े संकेत लेकर आ रहा है. इस बार जब नवरात्रि की शुरुआत होगी तो माता हाथी पर सवार होकर आएंगी. शास्त्रों में ऐसा लिखा है कि जब हाथी पर बैठकर मां दुर्गा आती हैं तो पृथ्वी बहुत संतुष्ट होती है और पृथ्वी धन-धान्य से परिपूर्ण होती है. विशेष कर जो राजनीतिक क्षेत्र में लोग हैं उनमें बहुत सामंजस्य होता है। 

    देश में होगी अच्छी वर्षा, किसानों होंगे खुशहाल
    ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, ''हाथी को जल और बादलों का भी प्रतीक माना गया है, इसलिए माता का हाथी पर सवार होकर आना इस बात का भी संकेत है कि देश में अच्छी वर्षा होगी. जल स्रोतों में वृद्धि होगी, किसानों की फसल बेहतर होगी. समाज में ज्ञान स्थिरता, और सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होगी. जब माता गज में सवार होकर आती हैं तो ये देश और समाज के लिए बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है. शांति का प्रतीक माना गया है. इससे जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती आने की संभावनाएं भी बढ़ रही है. मतलब इस बार बहुत ही शुभ संकेत हैं, इस बार सब कुछ अच्छा होगा। 

  • दिवाली-छठ पर हवाई किराए में भारी उछाल, हैदराबाद से पटना-चंडीगढ़ समेत कई रूट्स पर ₹22 हजार तक टिकट

    दिवाली-छठ पर हवाई किराए में भारी उछाल, हैदराबाद से पटना-चंडीगढ़ समेत कई रूट्स पर ₹22 हजार तक टिकट

     नई दिल्ली

    दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सफर का खर्च चिंता बढ़ा रहा है. ट्रेनों में बुकिंग शुरू होते ही सीटें फुल हो गई थीं और अब जिन यात्रियों के पास हवाई जहाज से घर पहुंचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है, उन्हें आसमान छूते किराये का सामना करना पड़ रहा है. हैदराबाद से उत्तर भारत के कई शहरों के लिए दिवाली और छठ के आसपास हवाई टिकट इतने महंगे हो गए हैं कि कुछ मामलों में विदेश जाना भी इससे सस्ता पड़ रहा है। 

    दिवाली और छठ से करीब एक महीने पहले ही हैदराबाद से कई घरेलू रूट पर हवाई किराये में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. वहीं, हैदराबाद से सिंगापुर, मलेशिया और बैंकॉक जैसे विदेशी गंतव्यों के लिए टिकट करीब 15,000 से 18,000 रुपये में मिल रहे हैं. कुछ घरेलू रूट की तुलना में ये किराये करीब 7,000 रुपये तक सस्ते हैं 

    चंडीगढ़-पटना का टिकट ₹22000 तक

    दिवाली के दौरान हैदराबाद से चंडीगढ़ या पटना जाने वाली एक तरफ की फ्लाइट का किराया करीब ₹22,000 तक पहुंच गया है. सामान्य दिनों में इसी रूट का किराया करीब ₹9,000 रहता है. यानी त्योहार के समय यात्रियों को सामान्य किराये से दोगुने से भी ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं. जयपुर के लिए भी यही स्थिति है. सामान्य तौर पर करीब ₹8,000 में मिलने वाला एक तरफ का टिकट अब लगभग ₹21,000 तक पहुंच गया है. कोलकाता, गुवाहाटी, लखनऊ, भोपाल और इंदौर जाने वाली उड़ानों में भी किराये में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. कुछ रूट पर टिकट की कीमत सामान्य स्तर के मुकाबले करीब दोगुनी हो गई है। 

    ट्रेन में टिकट नहीं, फ्लाइट बनी मजबूरी
    त्योहारों के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन आमतौर पर सबसे सस्ता विकल्प होती है. लेकिन दिवाली और छठ के समय लंबी दूरी की ट्रेनों में टिकट मिलना पहले से ही मुश्किल हो जाता है. ऐसे में आखिरी समय में घर पहुंचने के लिए हवाई सफर ही विकल्प बचता है. यही वजह है कि जिन लोगों को त्योहार पर हर हाल में घर पहुंचना है, उन्हें बढ़े हुए हवाई किराये के बावजूद टिकट बुक करना पड़ रहा है. हैदराबाद से लखनऊ के लिए एक तरफ का हवाई टिकट ₹17,000 से ज्यादा होना चौंकाने वाला है. इस कीमत पर विदेश जाना भी सस्ता पड़ रहा है. त्योहार के दौरान घर जाने वाले परिवारों के पास बढ़ा हुआ किराया चुकाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचता। 

    फ्लाइट्स की संख्या कम, डिमांड ज्यादा
    ट्रैवल एजेंट्स का कहना है कि हवाई किराये में इस तेजी की बड़ी वजह मांग और उपलब्ध सीटों के बीच बढ़ता अंतर है. कई रूट पर एयरलाइंस कम उड़ानें चला रही हैं, जबकि त्योहार के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. त्योहार के समय ज्यादातर लोग अपने शहर और गांव लौटते हैं, ऐसे में उपलब्ध सीटें तेजी से भर रही हैं और बची हुई सीटों के किराये बढ़ते जा रहे हैं। 

    दिवाली तक और बढ़ सकता है किराया
    दिवाली में अभी कई हफ्ते बाकी हैं, लेकिन कई घरेलू रूट पर किराये में अभी से बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है. ट्रैवल एजेंट्स को आशंका है कि जैसे-जैसे यात्रा की तारीख नजदीक आएगी और मांग बढ़ेगी, किराये में और बढ़ोतरी हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, दशहरे के दौरान भी हैदराबाद से कई घरेलू रूट पर हवाई किराये सामान्य से काफी ऊपर रहे थे. ऐसे में दिवाली और छठ के लिए घर जाने वाले यात्रियों के सामने मुश्किल यह है कि ट्रेन में टिकट उपलब्ध नहीं है और फ्लाइट का किराया बजट बिगाड़ रहा है. कुछ रूट पर स्थिति ऐसी बन गई है कि देश के भीतर अपने घर जाना, विदेश जाने से भी महंगा पड़ रहा है। 

  • पीएनजी समन्वय समिति के सत्यापन उपरांत ही एलपीजी सप्लाई बंद की जाए

    पीएनजी समन्वय समिति के सत्यापन उपरांत ही एलपीजी सप्लाई बंद की जाए

    पीएनजी समन्वय समिति के सत्यापन उपरांत ही एलपीजी सप्लाई बंद की जाए

    भोपाल 

    पीएनजी कनेक्शन के संबंध में आयुक्त खाद्य दिनेश जैन द्वारा सीजीडी(सिटी गैस डिस्ट्रीव्यूशन) संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि कॉलोनियों में पीएनजी की सप्लाई सुचारू रूप से चालू होने के बाद पीएनजी समन्वय समिति द्वारा सत्यापन उपरांत ही संबंधित उपभोक्ता की एलपीजी सप्लाई बंद की जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

    वर्तमान में भोपाल जिले में 4 सोसायटी जिसमें सागर लेक व्यू होम्स अयोध्या बायपास, सौम्या पार्क लैण्ड अवधपुरी, आकृति ग्रीन्स सलैया एवं कैनाल किंनशिप सलैया एलपीजी फ्री घोषित की गई है। इन कॉलोनियों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    थिंक गैस कंपनी के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन पूर्व से उपलब्ध हैं, उन्हें भी एलपीजी फ्री श्रेणी में रखा गया है। यह जानकारी भी दी गई है कि भारत सरकार के राजपत्र अनुसार जिन क्षेत्रों में पीएनजी की उपलब्धता है, वहां उपभोक्ताओं को नोटिस देने के 90 दिवस बाद एलपीजी सप्लाई बंद करने के प्रावधान हैं।

    भोपाल जिले के 88 प्रतिशत एलपीजी उपभोक्ताओं द्वारा ई-केवायसी की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा विगत 06 माह में 06 बार ई-केवायसी की अनिवार्यता के लिये समय-सीमा बढ़ाई गई है। एक अक्टूबर 2026 तक जिन उपभोक्ताओं के द्वारा ई-केवायसी नहीं कराई गई है, उन्हें गैस रिफिल बुकिंग की सुविधा गैस कंपनियों द्वारा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार अस्थाई रूप से बंद की गई है, जो संबंधित उपभोकता द्वारा ई-केवायसी कराये जाने पर तत्काल पुनः प्रारंभ हो सकेगी। उपभोक्ता गैस एजेंसी अथवा ऑयल कंपनी के ऐप के माध्यम से भी घर बैठे ई-केवायसी कर सकते है।

    पीएनजी सप्लाई

    आयुक्त खाद्य जैन ने अपील की है कि जिन उपभोक्ताओं के एलपीजी रिफिल सुविधा ई-केवायसी न कराये जाने के कारण अस्थाई रूप से बंद है, वे तत्काल ई-केवायसी करवाना सुनिश्चित करें। साथ ही एलपीजी या पीएनजी संबंधी समस्या होने पर संबंधित ऑयल कंपनी सीजीडी कंपनी की हेल्पलाईन पर संपर्क कर सकते है। हेल्पलाईन नम्बर र्थिंक गैस – इंडियन ऑयल कंपनी – 1800-3000-0046, भारत पेट्रोलियम कंपनी – 1800-2243-44/0755-2601651, हिन्दुस्थान पेट्रोलियम कंपनी – 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते है।

     

  • क्रिकेट मैच से इंदौर के होटल फुल, किरायों में जबरदस्त उछाल; कई कमरों के दाम ढाई गुना तक बढ़े

    क्रिकेट मैच से इंदौर के होटल फुल, किरायों में जबरदस्त उछाल; कई कमरों के दाम ढाई गुना तक बढ़े

    इंदौर 

    11 अक्टूबर को होलकर स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले टी-20 मुकाबले से पहले इंदौर के होटल कारोबार में तेजी दिखाई देने लगी है। मैच से पांच दिन पहले ही कमरों की डिमांड बढ़ गई है और इसका असर रूम रेट पर भी पड़ा है।

    दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि 6 अक्टूबर को जिस कमरे का किराया जितना था, वही कमरा 11 अक्टूबर को कई होटलों में करीब दोगुने और कुछ जगहों पर इससे भी ज्यादा रेट में उपलब्ध है।

    जिन होटलों में दोनों टीमों के खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था है, वहां कम कीमत वाले कमरों की उपलब्धता तेजी से घट रही है। बाहर से मैच देखने आने वाले दर्शकों के कारण शहर के दूसरे होटलों में भी बुकिंग बढ़ी है। इंदौर में करीब 300 होटल हैं।

    इनमें सबसे ज्यादा डिमांड रेडिसन ब्लू होटल और इंदौर मैरिएट होटल के आसपास के होटलों में देखी जा रही है।

    रेडिसन में डीलक्स रूम 6,975 से सीधे 14 हजार
    रेडिसन में टीम इंडिया के खिलाड़ियों के ठहरने की तैयारी है। यहां मैच की तारीख पर कमरों के रेट में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। प्रेसिडेंशियल सुइट का मौजूदा रेट 51,300 रुपए है, जो 11 अक्टूबर को 56,655 रुपए होगा।

    डीलक्स रूम का मौजूदा किराया 6,975 रुपए है। मैच वाले दिन यही कमरा 14 हजार रुपए में मिलेगा। यानी एक ही कमरे के किराए में करीब 7 हजार रुपए का अंतर है। सामान्य श्रेणी के कमरों की डिमांड भी मैच की तारीख नजदीक आने के साथ बढ़ी है।

    मैरिएट में 13,050 का कमरा 21,565 रुपए में
    मैरिएट होटल में वेस्टइंडीज टीम के खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था है। यहां भी 11 अक्टूबर के लिए कमरों के रेट बढ़े हुए हैं।

    सबसे महंगे कमरे का मौजूदा रेट 13,050 रुपए है, जो मैच वाले दिन 21,565 रुपए होगा। वहीं डीलक्स रूम अभी 7,125 रुपए का है, जबकि 11 अक्टूबर को इसका रेट 9,900 रुपए रहेगा।

    सयाजी में भी बढ़े रूम रेट
    सयाजी में भी मैच की तारीख पर कमरों के रेट बढ़ गए हैं। सबसे महंगे कमरे का मौजूदा रेट 10,555 रुपए है, जो 11 अक्टूबर को 13,499 रुपए होगा। डीलक्स रूम अभी 6,599 रुपए का है, जबकि मैच वाले दिन इसके लिए 7,466 रुपए चुकाने होंगे।

    शेरेटन में किराया ढाई गुना तक पहुंचा
    शेरेटन Grand Palace Indore में कुछ कमरों के रेट में सबसे ज्यादा उछाल दिखाई दे रहा है। सबसे महंगा कमरा अभी 9,416 रुपए का है, जबकि 11 अक्टूबर को इसका रेट बढ़कर 24,699 रुपए हो जाएगा।

    डीलक्स रूम का मौजूदा रेट 14,249 रुपए है, जो मैच वाले दिन 24,699 रुपए रहेगा। यानी मैच की तारीख पर कुछ श्रेणियों में मौजूदा रेट की तुलना में किराया काफी बढ़ गया है।

    होटलों में क्रिकेट थीम, लॉबी से रेस्टोरेंट तक सजावट
    मैच को लेकर होटल संचालक भी तैयारियों में जुट गए हैं। कई होटलों में लॉबी, रेस्टोरेंट और कॉमन एरिया को क्रिकेट थीम पर सजाने की तैयारी है। इसके अलावा फोटो पॉइंट और क्रिकेट से जुड़े डिस्प्ले भी लगाए जाएंगे। बाहर से आने वाले दर्शकों के लिए रेस्टोरेंट और लॉबी में मैच का माहौल बनाने की तैयारी की जा रही है।

    खिलाड़ियों के लिए इंडियन और इंटरनेशनल फूड
    टीमों के खाने को लेकर भी होटल विशेष तैयारी कर रहे हैं। खिलाड़ियों की डाइट और पसंद को ध्यान में रखते हुए इंडियन और इंटरनेशनल व्यंजन रखे जाएंगे। मेन्यू में हल्का और प्रोटीन आधारित भोजन प्राथमिकता में रहेगा।

    होटल एसोसिएशन: मैच से होटल सेक्टर में बूम
    होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने कहा कि इंदौर में क्रिकेट मैच होने पर होटल कारोबार में हर बार डिमांड बढ़ती है। बाहर से बड़ी संख्या में दर्शक आते हैं, जिसका फायदा होटल के साथ रेस्टोरेंट कारोबार को भी मिलता है। इस बार भी होटल सेक्टर में बूम दिखाई दे रहा है और होटल मैच के हिसाब से तैयारियां कर रहे हैं।

    टीमों के साथ दर्शकों की बुकिंग से डबल फायदा
    भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले से होटल कारोबार को दो स्तर पर फायदा मिल रहा है। टीमों के ठहरने के कारण चुनिंदा होटलों में कमरों की डिमांड बढ़ी है, जबकि मैच देखने देश के अलग-अलग शहरों से आने वाले दर्शकों के कारण शहर के दूसरे होटलों में भी बुकिंग बढ़ रही है।

    शाम 7 बजे शुरू होगा मुकाबला
    भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सीरीज का तीसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच शाम 7 बजे शुरू होगा।

  • किसानों के लिए बड़ी पहल, 17 सूक्ष्म तत्वों वाली ‘सोर्स बेस्ड’ खाद का मॉडल तैयार कर रहा ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय

    किसानों के लिए बड़ी पहल, 17 सूक्ष्म तत्वों वाली ‘सोर्स बेस्ड’ खाद का मॉडल तैयार कर रहा ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय

    ग्वालियर
    राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के वैज्ञानिक किसानों की आर्थिक उन्नति, भूमि सुधार और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक नवोन्मेषी सोर्स बेस्ड कंपोस्ट मॉडल तैयार कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंचल के किसानों को उनकी स्थानीय फसलों, भूमि के प्रकार और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर जैविक व प्राकृतिक खाद बनाने के लिए आत्मनिर्भर बनाना है।

    खासबात यह है कि इन इस मॉडल से बनने वाली कंपोष्ट खाद में न केवल मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटेशियम के अलावा अन्य 17 सूक्ष्म तत्व होंगे। जिससे किसानों की फसल को पूरा पोषण मिलेगा। साथ ही रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करना पड़ेगा। साथ ही इन मॉडलों को बनाने में प्रयास किया जा रहा है कि कार्बन का उत्सर्जन शून्य हो। जिससे वातावरण भी स्वच्छ रहे। यदि कंपोस्ट बनाने का ये मॉडल अप्रने प्रयोग में सफल रहते हैं तो इन्हें किसानों को अपनाने के लिए बुलाया जाएगा।

    किसान की जरूरत के मुताबिक होंगे माउल
        एग्रीफोरेस्ट्री बेस्ड नेचुरल मॉडल
    : यह मॉडल कृषि और वानिकी का बेहतरीन समन्वय है। इसमें खेतों और वृक्षों से मिलने वाले जैविक कचरे का उपयोग कर टिकाऊ कंपोस्ट तैयार की जाएगी। यह मॉडल सभी किसानों के लिए होगा।

        हाई-इनकम एग्री-हार्टी नेचुरल फार्मिंग मॉडल: कृषि और उद्यानिकी फसलों (फल व सब्जियां) को ध्यान में रखकर तैयार यह मॉडल व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों की उच्च पोषण आवश्यकता को पूरा करता है। इस मॉडल उन किसानों के लिए अनुकूल होगा जो जो आर्थिक रूप से भी अधिक सक्षम हैं और उनके पानी की उपलब्धता है।

        क्लाइमेट-रिजिलिएंट सिस्टम मॉडल: यह मॉडल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जैसे अनियमित वर्षा या सूखे जैसी परिस्थितियों में भी मिट्टी में नमी और जैविक कार्बन बनाए रखने में सक्षम है। इस मॉडल से उन किसानों को फायदा मिलेगा जिनके पास फसलों की सिंचाई के लिए पानी कम है। कम पानी भी इस खाद वे वे अच्छा उत्पादन ले सकेंगे।

    संसाधनों के अनुसार चयन का विकल्प
    इन तीनों मॉडलों को किसान की वित्तीय क्षमता, वार्षिक आय और उनके क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इससे छोटे, मध्यम और बड़े किसान अपनी आवश्यकता अनुसार सही मॉडल चुनकर कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली खाद बना सकेंगे। साथ ही किसानों के पास उपलब्ध एग्री वेस्ट या एनीमल वेस्ट का भी उपयोग कर सकेंगे।

    जीरो कार्बन एमिशन और मृदा स्वास्थ्य पर जोर
    इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता शून्य कार्बन उत्सर्जन है। कंपोस्ट बनाने की पारम्परिक प्रक्रियाओं में निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों पर नियंत्रण कर पर्यावरण को सुरक्षित रखा जाएगा।

    क्या कहते हैं वैज्ञानिक
    -इस तकनीक से रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता काफी कम होगी, जिससे खेती की लागत घटेगी। इसके साथ ही लगातार रासायनिक खादों के इस्तेमाल से खराब हो रही मिट्टी की जैविक उर्वरता और जल धारण क्षमता में सुधार होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इन सोर्स बेस्ड मॉडल बनाने का प्रयोग सफल होता है तो इनका प्रदर्शन विभिन्न माध्यमों से किसानों के के सामने किया जाएगा। जिससे वे इन्हें अपना सकें। डॉ. एकता जोशी, वैज्ञानिक व नोडल अधिकारी, आरवीएसकेविवि