Author: NewseDay

  • UPI MDR पर बढ़ी हलचल, 15 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक; जनवरी 2027 तक टालने की मांग

    UPI MDR पर बढ़ी हलचल, 15 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक; जनवरी 2027 तक टालने की मांग

    नई दिल्ली
    यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से अधिक पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) लगाने की योजना 15 अक्टूबर से लागू होनी है। लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे 1 जनवरी तक टालने पर विचार किया जा रहा है। यानी फेस्टिव सीजन में इससे रिटेलर्स को राहत मिल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार अगले कुछ दिनों में इस पर फैसला ले सकती है।

    इस रिपोर्ट से पेमेंट एग्रीगेटर्स पेटीएम के शेयर 10% गिर गए और कंपनी का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे चला गया। इसी तरह मोबिक्विक और पाइन लैब्स में 8% तक की गिरावट आई। पेटीएम के शेयर कुछ देर के लिए 1,558.80 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गए। मार्केट खुलने के कुछ ही मिनटों में कंपनी का मार्केट कैप करीब 10,972 करोड़ रुपये कम हो गया।

    पेटीएम शेयर
    पेटीएम का 52 हफ्ते का टॉप 1,856.50 रुपये है। मोबिक्विक के शेयर 8% से ज्यादा गिरकर 234.52 रुपये पर आ गए, जबकि पाइन लैब्स के शेयर 4% से ज्यादा फिसलकर 170.21 रुपये पर आ गए। मोबिक्विक का 52 हफ्ते का टॉप 290.35 रुपये है। इसी तरह पाइन लैब्स का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 283.70 रुपये है।

    ट्रेडर्स और इंडस्ट्री एसोसिएशन के इस बात पर चिंता जताई थी कि त्योहारों की सेल के दौरान MDR शुरू करने से बिजनेस के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) की अगुवाई वाली UPI और सर्विस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य बुधवार को MDR टाइमिंग और दूसरी बातों पर चर्चा करने के लिए मिले।

    वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह 
     एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए। 

    वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए। 

    UPI-MDR चार्ज पर क्‍या है प्रस्‍ताव? 
    NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजैक्‍शन पर 0.4 % का MDR चार्ज लागू किया जाना है. 

    इस हिसाब से 75,000 रुपये के लेनदेन पर चार्ज 300 रुपये बनते हैं.हालांकि एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। 

    ऐसे में 75,000 रुपये से ऊपर के जो भी ट्रांजैक्‍शन होंगे, उनपर अधिकतम यानी 300 रुपये MDR चार्ज लिए जाने का प्रावधान है। 

    2,000 रुपये से ऊपर हर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं?
    2,000 रुपये से ज्यादा के सिर्फ तय Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा. सामान्य दर 0.4% होगी, जबकि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये होगा। 

    रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR होगा। 

    अहम बात ये है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा. बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं
    सरकार के मुताबिक, करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2,000 तक के सभी UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। 

    इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी MDR नहीं लगेगा. RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी MDR शून्य रहेगा। 

    नो यूपीआई डे
    इस महीने की शुरुआत में, होलसेल ट्रेडर्स और रिटेलर्स ने 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR के प्रस्तावित लागू होने के विरोध में 'नो UPI डे' मनाया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कमेटी 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को MDR फीस से छूट देने पर भी विचार कर रही है। मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत 1 लाख रुपये तक के मंथली टर्नओवर वाले बिजनेस को रोलआउट के तहत छूट दी जानी थी।

     

  • दीपावली 2026 की तारीख हुई साफ, 8 नवंबर को होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन; जानें शुभ मुहूर्त

    दीपावली 2026 की तारीख हुई साफ, 8 नवंबर को होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन; जानें शुभ मुहूर्त

     Diwali 2026 : दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। रोशनी और खुशियों का यह पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाने के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच दिवाली की तारीख को लेकर उत्सुकता है। आइए जानते हैं 2026 में दिवाली किस दिन मनाई जाएगी और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

    कब है दिवाली?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी। वहीं, अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण इस साल दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दिन शाम के समय घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवार इस दिन अपने घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल को दीपों और रंगोली से सजाते हैं।

    लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
    दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए शाम 5 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 50 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं। पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ करके सजाएं। इसके बाद चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य एक साथ शामिल होकर देवी-देवताओं का ध्यान कर सकते हैं।

    दिवाली से जुड़े प्रमुख त्योहारों की तारीख
    धनतेरस: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
    छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी: 7 नवंबर 2026, शनिवार
    दीपावली: 8 नवंबर 2026, रविवार
    गोवर्धन पूजा: 10 नवंबर 2026, मंगलवार
    भाई दूज: 11 नवंबर 2026, बुधवार

    दीपावली की पूजा विधि

    •     दिवाली की पूजा से पहले पूजा स्थल और पूरे घर की साफ-सफाई कर लें।
    •     इसके बाद पूजा की चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
    •     पास में कलश रखें और उस पर रोली से तिलक करें।
    •     इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें आवश्यक पूजा सामग्री अर्पित करें।
    •     पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान और पूजन से करें।
    •     उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें।
    •     देवी को फूल, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
    •     पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए दीप जलाएं।
    •     इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा और कथा कर सकते हैं।
    •     अंत में देवी-देवताओं की आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें।
    •     मान्यता के अनुसार, दिवाली की रात दीप जलाने और विधि-विधान से पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    दिवाली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य, सुख और समृद्धि का वास होता है। यही वजह है कि लोग इस दिन अपने घर और पूजा स्थल को दीपों से सजाते हैं और मां लक्ष्मी से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। भगवान गणेश को शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश जी की आराधना करने की भी परंपरा है।

    दिवाली पर इन बातों का रखें ध्यान
        दिवाली के दिन पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए।
        पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा और शांत मन से शामिल हों।
        लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
        घर में दीप जलाते समय उनकी सुरक्षित जगह का ध्यान रखें, ताकि त्योहार के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

     

  • Navratri Ghatasthapana 2026: कलश स्थापना में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें सही नियम

    Navratri Ghatasthapana 2026: कलश स्थापना में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें सही नियम

    Sharadiya Navratri:शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से है। पहले दिन ही मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ घटस्थापना की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि में पहले दिन ही कलश की स्थापना करते हुए अगले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूर्जा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कलश में देवती-देवता वास करते हैं और इसकी स्थापना में किसी भी तरह की चूक करने से बचना चाहिए। तमाम लोगों को ये कन्फ्यूजन होता है कि कलश की स्थापना कैसे करना है और कौन सा स्टेप पहले शुरू करना है।

    वहीं इस बात को लेकर बहुत कन्फ्यूजन होता है कि कलश को सीधे जमीन पर रखना है या फिर इसके नीचे कोई अनाज रखना है। अगर अनाज रखना है तो फिर कौन सा अनाज रखना है? चलिए जानते हैं कि कलसश के नीचे क्या रखना चाहिए? साथ ही जानेंगे के घटस्थापना के वक्त किन गलतियों को करने से बचना है?

    कलश के नीचे कौन सा अनाज रखें?
    नवरात्रि की कलश स्थापना में कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा के कलश को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है। ना ही इसे सीधे तौर पर चौकी पर रखना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अनाजों की वेदी बनाते हैं और इसी पर कलश को रखना शुभ मानते हैं। इस दौरान सात तरह के अनाजों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। इसे सप्तधान्य भी कहा जाता है। इसमें आप चावल, गेंहू, तिल और बाजरा समेत कई चीजें मिला सकते हैं। सबसे पहले अनाज को साफ कर लें और फिर इसकी वेदी बना दें और इसी पर कलश को रखें।

    नवरात्रि घटस्थापना में ना करें ये गलतियां
    1. कलश पर रखे जाने वाले नारियल को गलत दिशा में कभी भी ना रखें। इसकी सही दिशा का ध्यान जरूर दें। धार्मिक मान्यता के हिसाब से जब आप पूजा करें तो नारियल की दिशा पूजा करने वाले की साइड होना चाहिए। इसे कहीं पर भी ऊपर या फिर अपने पीछे की ओर ना रखें।

    2. नवरात्रि की घटस्थापना में अक्षत का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस दौरान कोशिश करें कि चावल टूटे हुए ना हो। कलश स्थापना के वक्त चावल का इस्तेमाल करते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें। साथ ही ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साफ हो।

    3. नियम के अनुसार घटस्थापना वाले कलश को गलत जगह ना रखें। इसके लिए घर के ईशान कोण को चुनें। ज्योतिष वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। अगर यहां जगह संभव नहीं है तो पूर्व दिशा में भी कलश रख सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि जहां भी पूजा हो रही है वो जगह साफ हो। बार-बार यहां पर किसी का हाथ नहीं लगना चाहिए।

  • UP Rajya Sabha Election: खत्म हुआ चुनाव का इंतजार, BJP के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाएंगे

    UP Rajya Sabha Election: खत्म हुआ चुनाव का इंतजार, BJP के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाएंगे

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब नहीं होगा. राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये थे. लेकिन आज नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद BJP के 8 और समाजवादी पार्टी (सपा) के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है. यानी अब इन 10 सीटों के लिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है. इसे देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने इन सीटों पर 16 अक्टूबर को द्विवार्षिक चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किया था। 

    10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने दाखिल किया था नामांकन
    चुनाव प्रक्रिया के तहत 29 सितंबर से 6 अक्टूबर तक नामांकन की अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी. 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच तथा 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की समयसीमा तय है. जिसके तहत 10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। 

    सबसे पहले नामांकन कर बैकफुट पर आई सपा
    नामांकन प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले सपा की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया. वहीं 1 अक्टूबर को कांते सयन्ना ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा. हालांकि इस दौरान सपा ने जल्द ही अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतारने का ऐलान कर दिया था. हालांकि बीते 6 अक्टूबर को नामांकन के अंतिम दिन सपा मुखिया अखिलेश यादव ने X पर “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” पोस्ट कर अपना तीसरा उम्मीदवार ना उतारने का ऐलान कर BJP और सपा के सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन तय कर दिया था। 

    BJP के आत्मविश्वास से बैकफुट पर आये विपक्षी
    इस दौरान BJP ने अपने 8 उम्मीदवारो के नाम का ऐलान कर दिया था. जिसमें 7 को जिताने के लिए BJP के पास पर्याप्त संख्या थी. जबकि BJP ने अपना 8 वां उम्मीदवार विपक्षी विधायकों के समर्थन के भरोसेमंद मैदान में उतारा था. जिसके बाद एक ओर जहाँ विपक्ष बैकफुट पर नज़र आया. तो वही BJP पूरे आत्माविश्वास के साथ CM योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी CM के साथ संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ BJP ने अपने सभी 8 उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराते हुए नज़र आई. जिसमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, राम प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह और श्रुति गंगवार शामिल रही. हालांकि इस दौरान ओमकार नाथ चौरसिया ने भी बिना आवश्यक 10 प्रस्तावको के ही निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया. जिससे 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों के नामांकन हो गए। 

    दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज
    7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने कांते सयन्ना और ओमकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्र खारिज कर दिए. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक दोनों निर्दलीय उम्मीदवार आवश्यक 10 प्रस्तावकों की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर सके थे. जिसके चलते बिना 10 प्रस्तावको के ही नामांकन पत्र दाखिल कर देने के आधार पर इन दोनों निर्दलीय उम्मीदवारो का नामांकन ख़ारिज कर दिया गया है. अब राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मैदान में केवल BJP के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार रह गए हैं. ऐसे में इन सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है। 

    9 को नाम वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद मिलेगा सर्टिफिकेट
    अब 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी. यदि कोई उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है. तो इसके बाद सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी. और सभी उम्मीदवारों को निर्वाचन का सर्टिफिकेट भी दें दिया जायेगा. और फिर उसके बाद बिना मतदान ही राज्यसभा चुनाव की समस्त प्रक्रियाओ को संपन्न करने की औपचारिकताओ को भी पूरा कर दिया जायेगा। 

    इन राज्यसभा सदस्यों का 25 नवंबर को खत्म होगा कार्यकाल
    उत्तर प्रदेश से जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, उनमें अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रो. राम गोपाल यादव, रामजी, बी.एल. वर्मा, सीमा और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं. वहीं डॉ. दिनेश शर्मा को बीते दिनों अंडमान निकोबार का उप राज्यपाल बना दिया गया है. जिसके चलते राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे जाने के चलते उनकी सीट बीते 11 सितंबर 2026 से रिक्त है। 

  • भारत की एयर पावर को मिलेगा बूस्ट, अमेरिकी कंपनी ने सौंपे 4 F404 इंजन; तेजस की डिलीवरी होगी तेज

    भारत की एयर पावर को मिलेगा बूस्ट, अमेरिकी कंपनी ने सौंपे 4 F404 इंजन; तेजस की डिलीवरी होगी तेज

    बेंगलुरु 

     भारत के तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम को नई रफ्तार मिली है. अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी ने देसी राफेल फाइटर जेट के नाम से मशहूर तेजस लड़ाकू विमान के लिए 4 F404 इंजन भेजा है. बता दें कि इंजन की आपूर्ति में देरी की वजह से तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम पर प्रतिकूल असर पड़ा और यह प्रोग्राम तय समय से काफी पीछे चल रहा है. अब इसके रफ्तार पकड़ने की संभावना बढ़ गई है. अमेरिकी कंपनी ने तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए इंजन की आपूर्ति शुरू कर दी है. सितंबर महीने में 4 F404 भेजे गए. बताया जा रहा है कि ऐसे 20 जेट इंजनों की सप्‍लाई का प्‍लान ट्रैक पर है। 

    जानकारी के अनुसार, अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस कार्यक्रम के लिए सितंबर 2026 में 4 F404-IN20 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भेजे हैं. कंपनी के प्रवक्ता ने न्‍यूज एजेंसी ANI को यह जानकारी दी है. इसके साथ ही जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 इंजनों की आपूर्ति के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कंपनी की प्रगति जारी है. GE Aerospace के प्रवक्ता ने आगे बताया कि कंपनी भारत के तेजस लड़ाकू विमानों को शक्ति देने के लिए आवश्यक इंजनों की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किए हुए है. कंपनी ने HAL और भारतीय वायुसेना के साथ अपनी साझेदारी पर भी जोर दिया. सितंबर की खेप से पहले अगस्त में तीन इंजन HAL को भेजे गए थे। 

    2021 में 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर
    पूर्व HAL चेयरमैन डीके सुनील ने अप्रैल में ANI को बताया था कि GE ने जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 F404 इंजन की आपूर्ति का आश्वासन दिया है. HAL ने तेजस Mk1A कार्यक्रम के लिए 2021 में GE से 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर दिया था. इस ऑर्डर के तहत पहला इंजन 25 मार्च 2025 को भारत पहुंचा था. GE के मुताबिक, अतिरिक्त ऑर्डर मिलने के समय F404-IN20 इंजन की उत्पादन लाइन करीब 5 वर्षों से बंद थी. कंपनी को उत्पादन दोबारा शुरू करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन को भी फिर से सक्रिय करना पड़ा. GE के कॉम्बैट एंड ट्रेनर इंजन कारोबार के महाप्रबंधक शॉन वॉरेन ने बताया था कि कोविड-19 महामारी के कारण यह प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो गई थी। 

  • कच्चे मकान की परेशानियों से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से नोहर साय का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    कच्चे मकान की परेशानियों से मिली मुक्ति, पीएम जनमन आवास से नोहर साय का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    रायपुर

    बारिश के दिनों में छत से टपकता पानी, कच्चे मकान के क्षतिग्रस्त होने का डर और परिवार की सुरक्षा की चिंता कभी सरगुजा जिले के पहाड़ी कोरवा जनजाति के श्री नोहर साय के जीवन का हिस्सा थी। सीमित आमदनी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपने परिवार के लिए पक्का मकान बनाना उनके लिए एक बड़ा सपना था। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत आवास योजना ने उनके इसी सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज नोहर साय का परिवार अपने पक्के घर में सुरक्षित और सुकून के साथ जीवन बिता रहा है।

    सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत ससौली के ग्राम चांगोरी निवासी नोहर साय विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह पहाड़ी कोरवा से आते हैं। जिला मुख्यालय अम्बिकापुर से लगभग 55 किलोमीटर दूर रहने वाले इस परिवार को वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। योजना से मिली सहायता और अपनी मेहनत की कमाई से की गई बचत को जोड़कर उन्होंने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया।

    बारिश में टपकती थी छत, परिवार की सुरक्षा को लेकर बनी रहती थी चिंता

    नोहर साय बताते हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश शुरू होते ही छत से पानी टपकने लगता था। कच्चे मकान के क्षतिग्रस्त होने की आशंका के साथ परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती थी। जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी परेशानी का कारण था।

    परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपनी कमाई से पक्का मकान बनवा सकें। सीमित संसाधनों के बीच घर की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही प्राथमिकता थी। ऐसे में पक्के मकान का सपना लंबे समय तक अधूरा रहा।

    शासकीय सहायता और अपनी बचत से पूरा किया घर बनाने का सपना

    वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत होने पर नोहर साय को अपना पक्का घर बनाने का अवसर मिला। उन्होंने योजना से प्राप्त सहायता राशि के साथ अपनी मेहनत की कमाई से बचाई गई राशि का उपयोग कर मकान निर्माण पूरा किया।

    पक्का मकान बन जाने के बाद परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने और घर के क्षतिग्रस्त होने की चिंता नहीं रहती। परिवार को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध हुआ है।

    पक्की छत के साथ जीवन में आया सुकून और आत्मविश्वास

    नोहर साय के लिए पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानी से मिली राहत और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद है। पहले कच्चे मकान में रहने के दौरान मौसम बदलने के साथ घर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। अब अपने पक्के घर में परिवार के साथ रहना उन्हें सुकून देता है।

    पक्का आवास मिलने से परिवार को बारिश और अन्य मौसमी परेशानियों से बेहतर सुरक्षा मिली है। इसके साथ ही घर की मजबूती को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहने से परिवार में आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    विशेष पिछड़ी जनजातीय परिवारों के लिए सुरक्षित आवास का संबल

    प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के पात्र परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आवास योजना के माध्यम से पक्का मकान उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    नोहर साय की कहानी बताती है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए आवास सहायता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। सीमित आमदनी के कारण जो परिवार अपने संसाधनों से पक्का घर नहीं बना पाते, उनके लिए योजना से मिलने वाला सहयोग सुरक्षित आवास का सपना पूरा करने का माध्यम बन रहा है।

    कच्चे घर से पक्के आशियाने तक, बदली परिवार की जिंदगी

    कभी कच्चे मकान में मौसम की मुश्किलों और असुरक्षा के बीच जीवन बिताने वाला नोहर साय का परिवार आज अपने पक्के घर में रह रहा है। वर्षों से संजोया सपना पूरा होने के साथ परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिला है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत नोहर साय की यह कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में आने वाले बदलाव को सामने लाती है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना से मिली सहायता और स्वयं की मेहनत ने उनके पक्के घर का सपना साकार किया है। आज यह घर उनके परिवार के लिए केवल एक आशियाना नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान, सुकून और बेहतर भविष्य के प्रति विश्वास का प्रतीक बन गया है।

  • 9 अक्टूबर का राशिफल: शुक्रवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, धनलाभ और करियर में मिलेंगे शुभ संकेत

    9 अक्टूबर का राशिफल: शुक्रवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, धनलाभ और करियर में मिलेंगे शुभ संकेत

    मेष राशि- दिन आपके लिए चुनौतियों और अवसरों का मिश्रण लेकर आया है। आपका पॉजिटिव रवैया दिन को सफलता के साथ पार करने और व्यक्तिगत विकास के द्वार खोलने में महत्वपूर्ण होगा।

    वृषभ राशि- दिन आपके लिए पॉजिटिव रहेगा। लव लाइफ में एक दूसरे के बीच के मतभेद दूर करें। टास्क में भी उत्तम परिणाम दें। स्मार्ट निवेश करने के लिए आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी है।

    मिथुन राशि- साहस और उत्साह के साथ दिन का आनंद उठाएं। हेल्दी डाइट लें और स्ट्रेस को बाय-बाय कहें। आज का दिन शुभ है। प्रेम के मामले में रोमांटिक रहें। आज आपका प्रेम जीवन मजबूत और पेशेवर जीवन रचनात्मक रहेगा।

    कर्क राशि- स्वास्थ्य भी ठीक है। याद रखें आप काम के प्रेशर को ऐसे संभालते हैं, जैसे कोई नहीं संभालता। आज आप आप क्रिएटिव फील कर सकते हैं। प्रॉब्लम सॉल्व करने की कला आप जानते हैं।

    सिंह राशि- आपकी करंट वित्तीय स्थिति स्मार्ट निवेश योजनाओं की अनुमति देती है। आज आपका स्वास्थ्य भी कोई तकलीफ नहीं देगा। अपने कार्यक्षेत्र में सफलता के प्रति आश्वस्त रहें।

    कन्या राशि- ज्यादा स्ट्रेस न लें। उत्पादकता से जुड़े मुद्दे पेशेवर जीवन पर असर नहीं डालेंगे। आपको दृष्टिकोण में हमेशा सकारात्मक बने रहना चाहिए। रिश्ते के मुद्दों को पॉजिटिव तरीके से सुलझाएं।

    तुला राशि- आपको हेल्थ पर फोकस करना चाहिए। अपने ऑफिस में अपना बेस्ट दें और प्रोडक्टिव बने रहें। धन को चालाकी से संभालने की जरूरत है। हेल्थ के मामले में पेट से जुड़ी कुछ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।

    वृश्चिक राशि- लव के मामलें में दिल की नहीं बल्कि दिमाग की सुनें। वर्कप्लेस पर आज कोई चुनौती मौजूद नहीं है। प्रेम संबंधी मामले समझदारी से सुलझाएं और पार्टनर के साथ ज्यादा से ज्यादा टाइम बिताएं।

    धनु राशि- व्यावसायिक चुनौतियों से मेहनत से निपटें। कोई वित्तीय समस्या नहीं रहेगी। आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहने वाला है। आज का दिन आपके लिए शानदार रहने वाला है।

    मकर राशि- कोई बड़ी वित्तीय समस्या नहीं है और स्वास्थ्य भी अच्छा है। लव के मामले में विवादों को निपटाने के लिए सही सोल्यूशन खोजें। आज आपको सेल्फ लव पर ध्यान देना चाहिए।

    कुंभ राशि- दिन पैसों के मामलें में वृद्धि और करियर में उन्नति के अवसर प्रदान करता है। कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहें, जो आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।

    मीन राशि- दफ्तर में बेहतर करियर सुनिश्चित करने के लिए अपनी क्षमता साबित करें। आर्थिक रूप से आज आप समृद्ध हैं। आज नया प्यार पाने के लिए तैयार रहें। बेहतर मौके आपके दिन को बेहतर बनाएंगे।

  • पति के निधन के बाद अकेली रह गईं भुइरी बाई, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सुरक्षित आशियाना

    पति के निधन के बाद अकेली रह गईं भुइरी बाई, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सुरक्षित आशियाना

    रायपुर,

    जीवनसाथी का साथ छूटने के बाद अकेले जीवन गुजारना आसान नहीं होता। ऐसे में सिर पर सुरक्षित छत और रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाएं किसी बड़े सहारे से कम नहीं होतीं। सरगुजा जिले की मती भुइरी बाई के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने ऐसा ही बदलाव लाया है। कभी पति के साथ कच्चे मकान में अनेक परेशानियों के बीच रहने वाली भुइरी बाई आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सुकून भरा जीवन बिता रही हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से मिली रसोई गैस की सुविधा ने उनके दैनिक जीवन को भी आसान बनाया है।

    भुइरी बाई की यह कहानी केवल एक पक्का मकान मिलने की नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित आशियाने के सहारे जीवन को आगे बढ़ाने की है। पति के निधन के बाद अकेली रह गईं भुइरी बाई के लिए पक्का घर आज सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का आधार बन गया है।

    पति के नाम से स्वीकृत हुआ था आवास, लेकिन साथ नहीं रह सके जीवनसाथी

    भुइरी बाई बताती हैं कि पहले वे अपने पति स्वर्गीय  कांशीराम के साथ कच्चे मकान में रहती थीं। मकान की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उन्हें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और सीमित संसाधनों के कारण अपने खर्च पर पक्का मकान बनवाना संभव नहीं था।

    इसी बीच उनके पति के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ। इससे परिवार में पक्के घर की उम्मीद जगी, लेकिन आवास स्वीकृत होने के बाद उनके पति का निधन हो गया। जीवनसाथी के गुजर जाने से भुइरी बाई अकेली रह गईं।

    ऐसी कठिन परिस्थितियों में पक्का आवास उनके जीवन का महत्वपूर्ण सहारा बना। अब वे अपने पक्के मकान में रह रही हैं। कच्चे घर की परेशानियों से राहत मिलने के साथ उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध हुआ है।

    कच्चे मकान की परेशानियां हुईं दूर, अब पक्के घर में मिल रहा सुकून

    भुइरी बाई बताती हैं कि पहले कच्चे मकान में रहने के दौरान कई तरह की दिक्कतें होती थीं। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपनी बचत से पक्का मकान बनवा सकें। पति के निधन के बाद अकेले जीवन गुजारते हुए घर की सुरक्षा और सुविधाओं का महत्व उनके लिए और बढ़ गया।

    प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पक्का मकान मिलने के बाद अब उन्हें पहले जैसी आवास संबंधी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। अपने घर में सुरक्षित रहने की सुविधा ने उनके जीवन में सुकून और आत्मविश्वास बढ़ाया है।

    उज्ज्वला योजना से रसोई की परेशानी भी हुई कम

    पक्के आवास के साथ भुइरी बाई को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से रसोई गैस की सुविधा भी मिली है। अब वे गैस चूल्हे पर भोजन तैयार करती हैं, जिससे रोजमर्रा के घरेलू कामों में सहूलियत हो रही है।

    अकेले रहने के कारण घर की सभी जिम्मेदारियां भुइरी बाई स्वयं संभालती हैं। ऐसे में रसोई गैस की सुविधा उनके लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। पक्का घर और रसोई गैस जैसी सुविधाओं ने उनके दैनिक जीवन को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया है।

    “अपने पैसे से पक्का घर बनाना संभव नहीं था, सरकार ने पूरा किया सपना”

    अपने जीवन में आए बदलाव को साझा करते हुए भुइरी बाई भावुक होकर कहती हैं, “पहले कच्चे मकान में रहती थी, तब बहुत दिक्कत होती थी। मेरे पति के नाम से आवास निकला था, लेकिन बाद में उनका निधन हो गया। अब मैं अकेले रहती हूं। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि अपने पैसे से पक्का मकान बनवा सकूं। सरकार ने अच्छा घर बनाकर दिया है। अब घर में अच्छी सुविधा है और गैस पर खाना भी बनाती हूं।”

    भुइरी बाई के लिए पक्का मकान वर्षों पुरानी इच्छा पूरी होने जैसा है। उनका कहना है कि आवास मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। अब वे अपने घर में अधिक सुरक्षित और संतुष्ट महसूस करती हैं।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    भुइरी बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से पक्का मकान और उज्ज्वला योजना से रसोई गैस की सुविधा मिलने पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्वयं पक्का घर बनाना संभव नहीं था। शासन की सहायता से उनका सपना पूरा हुआ है और अब वे अपने पक्के मकान में बेहतर सुविधाओं के साथ जीवन बिता रही हैं।

    एक पक्की छत ने दिया सुरक्षा, सम्मान और नई उम्मीद का आधार

    भुइरी बाई की कहानी बताती है कि जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्का आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का महत्वपूर्ण आधार भी है। विशेष रूप से अकेले जीवन गुजार रही महिलाओं के लिए आवास और रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधाएं दैनिक जीवन की कठिनाइयों को कम करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई भुइरी बाई की यह कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से जीवन में आए बदलाव का उदाहरण है। पति के निधन के बाद अकेली रह गईं भुइरी बाई के लिए पक्के घर की छत आज केवल मौसम से सुरक्षा नहीं, बल्कि जीवन में सुकून, सम्मान और भविष्य के प्रति भरोसे का सहारा बन गई है।

  • बिहान से बदली पुष्पा राजवाड़े की जिंदगी, टेंट व्यवसाय से शुरू हुआ सफर, ट्रैक्टर खरीदकर बनीं लखपति दीदी

    बिहान से बदली पुष्पा राजवाड़े की जिंदगी, टेंट व्यवसाय से शुरू हुआ सफर, ट्रैक्टर खरीदकर बनीं लखपति दीदी

    रायपुर

    कभी घरेलू कामकाज और पारंपरिक खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली सरगुजा जिले की मती पुष्पा राजवाड़े आज लखपति दीदी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत की शुरुआत की, फिर टेंट व्यवसाय के माध्यम से स्वरोजगार की राह पकड़ी। व्यवसाय से आत्मविश्वास बढ़ा तो समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा। आज ट्रैक्टर से जहां परिवार की खेती आसान हुई है, वहीं उसे किराए पर देकर अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। इस तरह एक छोटे से प्रयास से शुरू हुआ उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है।

    सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्रा खुर्द निवासी पुष्पा राजवाड़े की यह कहानी बताती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाला आर्थिक सहयोग, नियमित बचत और स्वरोजगार के अवसर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बिहान से जुड़कर उन्होंने न केवल परिवार की आय बढ़ाने के नए साधन विकसित किए, बल्कि बच्चों की बेहतर परवरिश और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    समूह से जुड़कर शुरू की बचत, टेंट व्यवसाय ने दिखाई स्वरोजगार की राह

    पुष्पा राजवाड़े जय  शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं और समूह में लेखापाल का दायित्व भी निभा रही हैं। वे बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनका अधिकांश समय घरेलू कार्यों और खेती-किसानी में बीतता था। परिवार की आय बढ़ाने की इच्छा थी, लेकिन स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक संसाधन और अवसर सीमित थे।

    बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की। समूह की गतिविधियों में भागीदारी से उन्हें स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली और स्वयं का काम शुरू करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा। इसके बाद उन्होंने समूह के माध्यम से टेंट व्यवसाय की शुरुआत की।

    टेंट व्यवसाय से आमदनी होने लगी तो पुष्पा ने आजीविका के अन्य साधन विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने महसूस किया कि खेती-किसानी में आधुनिक साधनों का उपयोग कर समय और मेहनत की बचत करने के साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है।

    समूह से ऋण लेकर खरीदा ट्रैक्टर, पारंपरिक खेती की मुश्किलें हुईं कम

    पुष्पा बताती हैं कि पहले उनके परिवार में पारंपरिक तरीके से हल चलाकर खेती की जाती थी। खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्यों में अधिक समय तथा मेहनत लगती थी। कई बार समय पर कृषि कार्य पूरा करने में भी कठिनाई होती थी।

    इन परेशानियों को दूर करने के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदने का निर्णय लिया। समूह से मिले आर्थिक सहयोग के माध्यम से ट्रैक्टर खरीदने के बाद परिवार की खेती-किसानी का तरीका बदल गया।

    अब खेतों की जुताई सहित अन्य कृषि कार्य समय पर पूरे हो रहे हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। उनके पति खेती-किसानी के साथ ट्रैक्टर चलाने का कार्य करते हैं।

    पुष्पा के लिए ट्रैक्टर केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बन गया है। परिवार अपनी खेती के कार्य पूरे करने के साथ ट्रैक्टर को किराए पर देकर भी आय अर्जित कर रहा है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।

    टेंट व्यवसाय से ट्रैक्टर तक, आय के कई साधन किए विकसित

    पुष्पा ने अपनी आजीविका को किसी एक व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। टेंट व्यवसाय से शुरुआत करने के बाद उन्होंने ट्रैक्टर के माध्यम से खेती और किराए से आमदनी के अवसर विकसित किए।

    इसके साथ ही उनका स्वयं सहायता समूह मानसरोवर तालाब में मछली पालन और बागवानी का कार्य भी कर रहा है। समूह की महिलाएं सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर तलाश रही हैं।

    पुष्पा का अनुभव बताता है कि ग्रामीण महिलाएं उपलब्ध संसाधनों और समूह से मिलने वाले सहयोग का उपयोग कर अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकती हैं। इससे परिवार की आय के स्रोत बढ़ाने के साथ भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार भी तैयार होता है।

    लखपति दीदी बनकर मिली नई पहचान, बच्चों की बेहतर परवरिश में मिल रहा सहयोग

    पुष्पा राजवाड़े के परिवार में उनके पति और दो बच्चे हैं। वे बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और स्वरोजगार शुरू करने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। अब खेती-किसानी के साथ टेंट व्यवसाय और ट्रैक्टर से होने वाली अतिरिक्त आमदनी परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मददगार बन रही है।

    आर्थिक स्थिति बेहतर होने से बच्चों के पालन-पोषण और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सुविधा हुई है। पुष्पा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे अब परिवार की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

    पुष्पा गर्व के साथ कहती हैं, “मुझे खुशी है कि मैं बिहान समूह से जुड़कर लखपति दीदी बनी हूं। समूह से मुझे बहुत सहयोग मिला है। आज हम खेती-किसानी के साथ अन्य व्यवसाय भी कर रहे हैं और अपने बच्चों की अच्छी तरह देखभाल कर पा रहे हैं।”

    बिहान ने दिया आत्मविश्वास, बचत से व्यवसाय तक पहुंची पुष्पा

    पुष्पा राजवाड़े की सफलता में स्वयं सहायता समूह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत करने, आवश्यकता के अनुसार ऋण प्राप्त करने और व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला।

    उन्होंने इन अवसरों का उपयोग करते हुए पहले टेंट व्यवसाय शुरू किया और बाद में ट्रैक्टर खरीदकर अपनी आजीविका का विस्तार किया। आज वे लखपति दीदी के रूप में अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

    पुष्पा ने बिहान योजना के माध्यम से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने और परिवार की स्थिति बेहतर बनाने का अवसर मिला।

    छोटी बचत से बड़े बदलाव तक, ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं पुष्पा

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पुष्पा राजवाड़े की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार से आए बदलाव का उदाहरण है। कभी घरेलू कार्यों और पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली पुष्पा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत की आदत विकसित की और धीरे-धीरे अपनी आजीविका के साधन बढ़ाए।

    टेंट व्यवसाय से शुरू हुआ उनका सफर आज ट्रैक्टर, खेती-किसानी और समूह की अन्य आजीविका गतिविधियों तक पहुंच चुका है। लखपति दीदी के रूप में उनकी पहचान यह संदेश देती है कि आर्थिक सहयोग के साथ मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसर मिलें तो ग्रामीण महिलाएं स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार भी बन सकती हैं।

  • सीहोर में विद्युत चोरी की जांच करने गई टीम से मारपीट एवं शासकीय कार्य में बाधा पहुँचाने वाले 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

    सीहोर में विद्युत चोरी की जांच करने गई टीम से मारपीट एवं शासकीय कार्य में बाधा पहुँचाने वाले 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

    भोपाल 

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सीहोर वृत्त अंतर्गत कंपनी की चेकिंग टीम के साथ अभद्र व्यवहार, मारपीट एवं शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में थाना कोतवाली, सीहोर में 8 व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

    विद्युत चोरी की सूचना पर मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की प्रबंधक जोन-2, सीहोर मती साधना कवरेती के नेतृत्व में विद्युत कंपनी की टीम जांच के लिए कंजर चौराहा, सीहोर पहुंची थीं। टीम द्वारा एक उपभोक्ता के विद्युत संयोजन की जांच की जा रही थी। इसी दौरान मौके पर उपस्थित जयप्रकाश, जयवंती एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा विद्युत कंपनी की टीम के साथ अभद्र व्यवहार एवं मारपीट की गई। शिकायत के अनुसार, महिला कर्मचारी सु प्रीति शुक्ला का गला दबाने का प्रयास किया गया तथा लाइन हेल्पर  राहुल चौहान के साथ मारपीट कर उनका हाथ मरोड़ दिया गया। आरोपितों द्वारा टीम के सदस्यों को ईंट-पत्थर से मारने का प्रयास भी किया गया। स्थिति बिगड़ने पर टीम ने 112 पर पुलिस को सूचना दी।

    शिकायत के आधार पर थाना कोतवाली , सीहोर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 132, 121(1), 296(बी), 115(2) एवं 3(5) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। प्रकरण में जयप्रकाश, करन सिलावट, सचिन सिलावट, दीपक, जयवंती, रानी, मीरा एवं आदित्य, सभी निवासी कंजर चौराहा, सीहोर को नामजद किया गया है।

    मैदानी कर्मचारियों से दुर्व्यवहार पर कंपनी का सख्त रुख

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार अथवा शासकीय कार्य में बाधा डालने की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। कंपनी ने सभी नियंत्रणकर्ता अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ऐसी घटनाओं में तत्काल पुलिस को सूचना देकर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करें।