Author: NewseDay

  • मुख्यमंत्री योगी ने 15 खिलाड़ियों को मंच पर प्रदान किया नियुक्ति पत्र

    मुख्यमंत्री योगी ने 15 खिलाड़ियों को मंच पर प्रदान किया नियुक्ति पत्र

    लखनऊ

     खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा और मेहनत से प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले 15 खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए। विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन खिलाड़ियों को सरकारी सेवा से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली के खिलाड़ी भी शामिल हैं।

    इन्हें मिला नियुक्ति पत्र

    कुशीनगर की आइस प्रजापति – बॉक्सिंग
    मेरठ के शार्दूल विहान – शूटिंग
    लखनऊ के आमिर अली – हॉकी
    उधम सिंह नगर, उत्तराखंड के हिमांशु तिवारी – बैडमिंटन
    मुरादाबाद के मोहित पाल – शूटिंग
    गाजीपुर की अनन्या राय – वॉलीबॉल
    जबलपुर की रागिनी मार्को – तीरंदाजी
    भदोही की तान्या चौधरी – एथलेटिक्स
    बरेली की सुहानी राजपूत – भारोत्तोलन
    लखनऊ की तनु भारती – साइकिलिंग
    दिल्ली के प्रणय शर्मा – कराटे
    वाराणसी के अभिषेक यादव – बॉक्सिंग
    मुजफ्फरनगर के अमरेश – कबड्डी
    गोरखपुर की प्रतिमा सरोज – हॉकी
    लखनऊ के अभय सिंह राठौर – बॉक्सिंग

    खेल अभी खत्म नहीं हुआ, पुलिस सेवा के साथ पदक जीतने का भी अवसर: केशव प्रसाद मौर्य

    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण के कार्यक्रम लगातार होते हैं, लेकिन देश और प्रदेश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करने का आनंद और गौरव कुछ अलग है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने अपने खेल के माध्यम से प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है और अब उन्हें पुलिस सेवा के माध्यम से जनसेवा का अवसर मिलने जा रहा है। यह उनके लिए नई जिम्मेदारी और नए दायित्व की शुरुआत है। उपमुख्यमंत्री ने नवचयनित खिलाड़ियों से कहा कि खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर उन्हें पुलिस सेवा में आने का अवसर मिला है, लेकिन उनका खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। पुलिस सेवा के साथ-साथ उनके पास खेल के मैदान में भी देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है और ऐसे समय में पुलिस सेवा का हिस्सा बनना गौरव की बात है।

    बॉक्स

    खेल प्रतिभाओं को सम्मान और रोजगार दे रही योगी सरकार: खेल मंत्री

    उत्तर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों के लिए नई संस्कृति विकसित हुई है। सरकार ने खिलाड़ियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करते हुए उन्हें सम्मान, रोजगार, बेहतर प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चाहे एशियन गेम्स हों, कॉमनवेल्थ गेम्स, ओलंपिक, पैरालंपिक या अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, प्रदेश के पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने और पुरस्कार राशि उपलब्ध कराने का काम किया गया है। खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जिन पदों पर पहले सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से भर्ती होती थी, उन्हें आयोग के दायरे से बाहर कर कुशल खिलाड़ियों को सीधे भर्ती के माध्यम से अवसर देने की व्यवस्था की गई। अब तक ऐसे 17 खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति दी जा चुकी है। खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप उच्च पदों पर भी नियुक्तियां दी गई हैं। डिप्टी एसपी, जिला पंचायत राज अधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर खिलाड़ियों को अवसर देकर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि खेल प्रतिभा को सरकारी सेवा में भी सम्मानजनक स्थान मिलेगा।

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    कुशल खिलाड़ी प्रदेश और यूपी पुलिस के वैश्विक राजदूत: डीजीपी

    डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में कुशल खिलाड़ियों को सम्मान और अवसर देने की नीति के तहत 470 प्रतिभाशाली खिलाड़ी पुलिस परिवार का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इनमें आरक्षी नागरिक पुलिस एवं आरक्षी पीएसी के 427 खिलाड़ी तथा उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के 43 खिलाड़ी शामिल हैं। वर्ष 2022 से अब तक 950 कुशल खिलाड़ियों की भर्ती उत्तर प्रदेश पुलिस में की जा चुकी है। यह केवल भर्ती का आंकड़ा नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं को सम्मान, अवसर और जनसेवा से जोड़ने की प्रभावी व्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि खेल और पुलिस सेवा में गहरा संबंध है। खेल खिलाड़ियों में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व, धैर्य, फिटनेस और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। यही गुण पुलिस सेवा के लिए भी आवश्यक हैं। मैदान पर खिलाड़ियों की जीत उत्तर प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाती है, जबकि वर्दी में उनका आचरण जनता के विश्वास को मजबूत करता है। प्रदेश में कुशल खिलाड़ियों के लिए भर्ती के साथ-साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन पर आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन और शीर्ष उपलब्धियों पर पुलिस उपाधीक्षक पद तक सीधी नियुक्ति जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। अब तक कुशल खिलाड़ियों को निरीक्षक/दलनायक पीएसी के पद पर 14 आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नतियां दी गई हैं, जिनमें पांच महिलाएं और नौ पुरुष शामिल हैं। इसी प्रकार उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर के पद पर 59 आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नतियां दी गई हैं, जिनमें 21 महिलाएं और 38 पुरुष हैं। मुख्य आरक्षी नागरिक पुलिस/पीएसी के पद पर भी 440 आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नतियां दी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाड़ियों ने विगत एक दशक में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अखिल भारतीय पुलिस प्रतियोगिताओं में 1105 पदक अर्जित किए हैं। वहीं वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स-2025 में यूपी पुलिस के खिलाड़ियों ने 95 पदक जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। डीजीपी ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी मैदान पर पदक जीतता है तो उसके साथ उत्तर प्रदेश पुलिस, उत्तर प्रदेश और देश का नाम भी गौरवान्वित होता है। इसलिए कुशल खिलाड़ी केवल पुलिस संगठन के गौरव नहीं, बल्कि प्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस के वैश्विक राजदूत भी हैं।

  • जालंधर स्कूल में छात्र पर कुर्सी से हमला, पेट में गंभीर चोट; लगे 22 टांके

    जालंधर स्कूल में छात्र पर कुर्सी से हमला, पेट में गंभीर चोट; लगे 22 टांके

    जालंधर.

    ट्विंकल मॉडल स्कूल दो बच्चों में 2 दिन पहले बेंच पर बैठने को लेकर लड़ाई हो गई थी। इस दौरान एक बच्चे ने दूसरे को कुर्सी उठाकर मार दी जिस वजह से उसके पेट पर 22 टांके लगे हैं।

    घायल बच्चे के ताया जसवीर सिंह और मासी सिमरन ने कहा कि उनका बच्चा आकाशदीप दसवीं कक्षा में पड़ता है। स्कूल में एक ही कक्षा में दसवीं और नवमी कक्षा पढ़ाई जाती है। उनके बच्चे को सुबह जल्दी बुलाया जाता है और वह सुबह जल्दी आकर कक्षा के बेंच ठीक करता है, ऐसे में आकाशदीप दो दिन पहले कक्षा के बेंच ठीक कर रहा था तभी नवमी कक्षा के एक छात्रा ने उसे बहसबाजी शुरू कर दी कि वह इस बेंच पर बैठेगा जबकि वह बेंच अतिरिक्त था। इसी बात को लेकर उसके बच्चे को पहले चेहरे और बाद में कुर्सी उठाकर उसके पेट में मारी गई।

  • 5 हजार से अधिक युवाओं का अंतिम चयन, मुख्यमंत्री ने लगभग 1,100 चयनित युवाओं को सौंपे ऑफर लेटर

    5 हजार से अधिक युवाओं का अंतिम चयन, मुख्यमंत्री ने लगभग 1,100 चयनित युवाओं को सौंपे ऑफर लेटर

    रायपुर 

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर अपने ही प्रदेश में मिलें, वे अपने कौशल और प्रतिभा के बल पर आत्मनिर्भर बनें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला–2026 के समापन अवसर पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे। 

    इस अवसर पर उन्होंने चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री के करकमलों से लगभग 1,100 चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए गए।
    7 एवं 8 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय रोजगार मेले में प्रदेशभर से 13 हजार से अधिक युवाओं ने सहभागिता की। विभिन्न कंपनियों द्वारा आयोजित चयन प्रक्रियाओं के बाद 5 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ। प्रदेश के सभी जिलों के साथ दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों से भी बड़ी संख्या में युवा मेले में पहुंचे और अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री  साय ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि रोजगार का यह अवसर उनके जीवन में नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर अपने परिवार के साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।

    युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ रही सरकार

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में 925 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है, जिनके माध्यम से 25 हजार 845 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। राज्य स्तरीय रोजगार मेले की सफलता इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और गति देने वाली है।

    उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार तक जोड़ने की दिशा में निरंतर काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘प्रयास’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से भी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक अवसर छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों। इसके लिए शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    95 से अधिक नियोक्ता संस्थानों ने युवाओं को दिए रोजगार के अवसर

    राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक पंजीकृत नियोक्ता संस्थानों के साथ अन्य कंपनियों ने भी सहभागिता की। आयोजन स्थल पर लगभग 50 स्टॉल स्थापित किए गए, जहां विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, साक्षात्कार और चयन किया गया।

    मेले में आईटीआई, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, स्नातक सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। रोजगार विभाग के साथ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, तकनीकी शिक्षा विभाग, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों तथा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण की भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता रही।

    कौशल विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षित युवाओं ने भी बड़ी संख्या में रोजगार मेले में हिस्सा लिया। इस तरह रोजगार मेला केवल नियुक्तियों का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधे संवाद और समन्वय का प्रभावी मंच भी बना।

    ई-रोजगार पोर्टल बनेगा ‘स्किल मार्केट’

    रोजगार मेले में अभ्यर्थियों के पंजीयन, आवेदन, उपस्थिति और चयन संबंधी प्रक्रियाओं को ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित किया गया। इससे चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में सहायता मिली।

    राज्य सरकार द्वारा ई-रोजगार पोर्टल को आगे ‘स्किल मार्केट’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उद्योगों की आवश्यकताओं और उपलब्ध रिक्त पदों के साथ रोजगार के इच्छुक युवाओं की शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल की जानकारी उपलब्ध होगी। इससे एक ओर युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप अवसर खोजने में आसानी होगी, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।

    जिन्हें आज अवसर नहीं मिला, उनके लिए आगे भी खुलेंगे रोजगार के द्वार

    मुख्यमंत्री  साय ने रोजगार मेले में शामिल उन युवाओं का भी उत्साहवर्धन किया, जिन्हें इस बार रोजगार का अवसर नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार आगे भी रोजगार मेलों, कौशल विकास कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ समन्वय के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करती रहेगी।

    मुख्यमंत्री ने रोजगार मेले के सफल आयोजन के लिए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा प्रदेश एवं अन्य राज्यों से आए औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कंपनियों के प्रतिनिधियों को बधाई दी।

    तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनके हुनर को रोजगार और आजीविका के वास्तविक अवसरों से जोड़ना है।

    उन्होंने कहा कि रोजगार मेले में प्रदेशभर से युवाओं की व्यापक भागीदारी उनके उत्साह और बेहतर भविष्य की आकांक्षा को दर्शाती है। उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार के लिए सक्षम बनाया जा रहा है।

    पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधार के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार थर्ड पार्टी मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया।

    रिपोर्ट में पॉलिटेक्निक संस्थानों के शैक्षणिक स्तर, प्रशिक्षण व्यवस्था, उपलब्ध अधोसंरचना और गुणवत्ता सुधार की संभावनाओं का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर संस्थानों के समग्र विकास तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। इससे तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सेवा संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्षों के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रोजगार मेला भी युवाओं को सीधे अवसरों से जोड़ते हुए सेवा और जनकल्याण की इसी भावना को आगे बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार मेले में आने से पहले वे दुर्ग में आयोजित ‘सेवा सेतु’ कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त जारी करने के साथ विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला, युवा, किसान, श्रमिक और गरीब सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  टंकराम वर्मा, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मती वर्णिका शर्मा, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा, विधायक  सुनील सोनी, विधायक  रोहित साहू सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

  • ‘प्रदेश डुबाओ एलायंस’ में सैफई या सिफारिश से मिलती थी नौकरी, एनडीए का मतलब ‘नौकरी देंगे एलायंस’: सीएम योगी

    ‘प्रदेश डुबाओ एलायंस’ में सैफई या सिफारिश से मिलती थी नौकरी, एनडीए का मतलब ‘नौकरी देंगे एलायंस’: सीएम योगी

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोक भवन सभागार में उत्तर प्रदेश पुलिस में कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत चयनित 470 खेल प्रतिभाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों, खेलों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में युवाओं की नौकरी पर एक परिवार का कब्जा था और नौकरी पाने के लिए ‘सैफई या सिफारिश’ की जरूरत पड़ती थी, जबकि आज नियुक्ति में न किसी की सिफारिश चलती है और न पैसा। आज सिर्फ खिलाड़ी की प्रतिभा, परिश्रम और पसीने की कीमत मिल रही है। “पहले प्रदेश डुबाओ एलायंस’’ था और अब एनडीए की सरकार है। एनडीए का मतलब है- “नौकरी देंगे एलायंस।” अब नौकरी पर केवल पसीने और प्रतिभा का कब्जा है। जिन खिलाड़ियों ने अपने परिश्रम से अपनी प्रतिभा साबित की, उन्हें उसी आधार पर नियुक्ति मिल रही है।

    ‘सैफई या सिफारिश’ का दौर खत्म

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में युवाओं के सामने पहचान का संकट था और उनकी नौकरियों पर डकैती डाली जाती थी। खिलाड़ी मैदान में पसीना बहाता था। उसके पास सिफारिश कराने का समय नहीं था। इसी कारण उसे नौकरी नहीं मिल पाती थी। वर्ष 2017 से पहले समाजवादी पार्टी की सरकार के समय बड़ी संख्या में अराजक तत्वों को संरक्षण मिला। सपा ने प्रदेश में 10 लाख गुंडे पाले थे। वे बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते थे। दंगे-अराजकता फैलाते, गरीबों की जमीनों पर कब्जा करते थे। इसके विपरीत हमारी सरकार ने 10 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देकर उत्तर प्रदेश को नई पहचान देने का काम किया है।

    सपा की बातें मगरमच्छ के शांति उपदेश जैसी

    सीएम ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी युवाओं की नियुक्ति की बात करती है तो हंसी आती है। लगता है जैसे कोई पानी में तैरता मगरमच्छ शांति का उपदेश दे रहा हो। ऐसे मगरमच्छों से सावधान रहना होगा। आप खूब खेलिए, खूब पसीना बहाइए, नए रिकॉर्ड बनाइए। नौकरी की चिंता मत करिए, हमने ऐसी पॉलिसी बना दी है कि नौकरी आपको जरूर मिलेगी। कोई भी आपका प्रमोशन नहीं टाल सकता और ऐसा करेगा तो हम उसको ही टाल देंगे।

    शराब और सपा से सावधान रहें युवा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को शराब व सपा से सावधान रहना चाहिए। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, दोनों ने प्रदेश को बर्बाद किया था। सरकार की खेल नीति का उद्देश्य अच्छे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाना और उन्हें सम्मान व अवसर देना है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में खनन, भर्ती, रिवर फ्रंट समेत विभिन्न घोटालों की चर्चा होती थी, जबकि आज प्रदेश में मेरठ में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट, वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज और खिलाड़ियों के मेडल्स की चर्चा होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने केवल चुनाव जीतने के रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि मेडल जीतने के रिकॉर्ड भी बनाए हैं। एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा 107 मेडल जीतने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे अब तक का सर्वोच्च रिकॉर्ड बताया और खिलाड़ियों से नए रिकॉर्ड बनाने का आह्वान किया।

    ‘मर्डर से मेडल तक बदली यूपी की पहचान’

    सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री जी खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत संवाद करते हैं, उनकी सुविधाओं पर ध्यान देते हैं और दुनिया में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को फोन करके प्रोत्साहित करते हैं। कभी भारत की पहचान राष्ट्रमंडल खेलों के घोटालों से होती थी, लेकिन आज भारत के खिलाड़ी देश के लिए मेडल्स लेकर लौट रहे हैं। इसी तरह पहले प्रदेश की पहचान अपराध और अराजकता से जुड़ी खबरों से होती थी, लेकिन आज यूपी की पहचान उसके कुशल खिलाड़ियों के मेडल्स से हो रही है। मर्डर और मेडल में अंतर है- एक पहचान दिलाता है और दूसरा पहचान डुबोता है।

    जर्सी से वर्दी की यात्रा में भी वही अनुशासन चाहिए
    मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों से कहा कि आज उनकी ‘जर्सी से वर्दी’ की यात्रा शुरू हुई है। जर्सी में उन्होंने जिस अनुशासन, टीम वर्क, परिश्रम और समर्पण के साथ परिणाम दिए हैं, वर्दी में भी उनसे वही अपेक्षा है। नवनियुक्त 470 खिलाड़ियों में 303 पुरुष और 167 महिलाएं शामिल हैं। आरक्षी नागरिक पुलिस में 295 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिनमें 148 पुरुष और 147 महिलाएं हैं। उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस में 43 पुरुष और 20 महिलाएं हैं, जबकि आरक्षी पीएसी में 132 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से पूछा कि क्या नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान किसी ने उनसे पैसे की मांग की? क्या किसी को सिफारिश कराने की जरूरत पड़ी? आज जो नियुक्ति पत्र उन्हें मिल रहा है, वह न सरकार की कृपा है और न मुख्यमंत्री की अनुकंपा, बल्कि यह उनके पसीने और परिश्रम की कीमत है।

    2017 से बदली खिलाड़ी नियुक्ति की व्यवस्था

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पुलिस अथवा किसी अन्य विभाग में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का कोई नियम नहीं था। उनकी सरकार ने पुलिस भर्ती की प्रक्रिया के साथ-साथ विभिन्न विभागों में खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति देने की व्यवस्था शुरू की। अब तक करीब 1000 खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। इसके साथ 1470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है और 555 खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। जीवन में जीत का जितना महत्व है, उससे कहीं अधिक महत्व हार के बाद खड़ा होना, फिर तैयारी करना, संघर्ष करना और अंततः मेडल जीतकर लौटना है।

    डिप्टी एसपी बनने के लक्ष्य ने दिलाया गोल्ड
    सीएम ने कहा कि उन्होंने एक खिलाड़ी से पूछा कि मेडल जीतने के पीछे उसकी प्रेरणा क्या थी। खिलाड़ी ने कहा कि उसने गोल्ड मेडल इसलिए जीता, क्योंकि उसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी एसपी बनना था। जिस तरह अर्जुन का निशाना अपने लक्ष्य पर था, उसी तरह उस खिलाड़ी का लक्ष्य भी डिप्टी एसपी का पद था और उसने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के लिए मेडल जीता। सरकार अब तक ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाले सात कुशल खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी का पद दे चुकी है। हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय को ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम के मेडल जीतने के बाद सरकार ने डिप्टी एसपी का पद दिया। गाजीपुर के राजकुमार पाल का परिवार बेहद गरीब था, लेकिन उनकी प्रतिभा और परिश्रम ने उन्हें ओलंपिक में मेडल तक पहुंचाया। सरकार ने उन्हें भी डिप्टी एसपी का पद दिया।

    खिलाड़ियों को 200 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ओलंपिक और अन्य प्रतियोगिताओं में प्रदेश के लिए मेडल जीतने वाले कुशल खिलाड़ियों को सरकार ने अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई है। एक समय उत्तर प्रदेश की स्थिति ऐसी थी कि सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही जीवन सीमित था। न उससे पहले लोग सुरक्षित महसूस करते थे और न बाद में। खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी अच्छी नहीं थी। 2017 में सरकार बनने के बाद भू-माफिया के खिलाफ अभियान चलाया गया। सरकारी, गरीबों, व्यापारियों और सार्वजनिक स्थलों की जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। करीब 64 हजार हेक्टेयर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। आज उसी भूमि का उपयोग गांव से लेकर ब्लॉक, जनपद और प्रदेश स्तर तक खेल सुविधाओं के विकास में किया जा रहा है। प्रदेश में खेल मैदान, मिनी स्टेडियम, स्टेडियम और इंटरनेशनल स्टेडियम विकसित हो रहे हैं। हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज विकसित किए जा रहे हैं। इनमें अलग-अलग खेलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जा रहे हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रैक्टिस सुविधा, प्रशिक्षित कोच और आवश्यक टीम उपलब्ध हो।

    खेलो इंडिया से विधायक और ग्रामीण खेल प्रतियोगिताओं तक

    सीएम योगी ने कहा कि नशे के खिलाफ सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर कोई बन सकता है तो वह खिलाड़ी है। खिलाड़ी से अधिक कोई नहीं समझ सकता कि नशे की कीमत व्यक्ति, परिवार और समाज को क्या चुकानी पड़ती है। हर खिलाड़ी को नशे के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनना चाहिए। 1400 से अधिक कुशल खिलाड़ी यूपी पुलिस का हिस्सा बन चुके हैं। इन खिलाड़ियों को कोई न कोई गांव गोद दिया जाए और उन्हें सप्ताह में कम से कम एक दिन वहां खेलकूद की गतिविधियों के संचालन के लिए भेजा जाए। जिस प्रकार महिला बीट पुलिस अधिकारी सप्ताह में एक दिन किसी गांव में जाती हैं, उसी प्रकार पुलिस के खिलाड़ी भी गांवों में जाकर युवाओं को खेलों से जोड़ें।

    ‘रील में लाइक्स मिलते हैं, खेल के मैदान में लाइफ’

    मुख्यमंत्री ने युवाओं में बढ़ते रील कल्चर पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के युवा घंटों रील में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। रील में लाइक्स मिलते हैं, लेकिन खेल के मैदान में आपको लाइफ मिलती है, एक नई लाइफ। अब उन्हें तय करना है कि केवल लाइक्स चाहिए या जीवन की वास्तविक उपलब्धि। आज की नियुक्ति नए जीवन की शुरुआत है। अच्छा प्रदर्शन, नियमित अभ्यास और खुद को मजबूत बनाने के साथ खिलाड़ियों के सामने प्रमोशन और आगे बढ़ने के नए अवसर भी खुलेंगे।

    खेल समाप्त नहीं हुआ: केशव प्रसाद मौर्य

    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नियुक्ति मिलने से खिलाड़ियों का खेल समाप्त नहीं हुआ है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त थी। आज बेहतर कानून व्यवस्था की देशभर में चर्चा है। पहले खिलाड़ियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिलते थे। अब पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर हैं।
     
    पुरस्कार राशि ढाई गुना से अधिक बढ़ी: गिरीश यादव

    खेल राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि ढाई गुना से अधिक बढ़ाई है। खेल नीति-2023 लागू करने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए एकलव्य क्रीड़ा कोष बनाया गया। प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज खोलने का निर्णय हुआ है। मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा हो चुका है और इसका लोकार्पण होना है।
     
    खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न पदोन्नतियां: डीजीपी

    पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक 950 कुशल खिलाड़ियों की भर्ती हो चुकी है। निरीक्षक और दलनायक पद पर 14, उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर पद पर 59 तथा मुख्य आरक्षी पद पर 440 आउट ऑफ टर्न पदोन्नतियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि खेल से मिला अनुशासन और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता पुलिस सेवा में उपयोगी होगी।
     
    लघु फिल्म में दिखा गुड़िया का संघर्ष

    कार्यक्रम में खिलाड़ियों के संघर्ष पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। इसमें भदोही के छेछुआ गांव की गुड़िया की कहानी भी थी, जिन्होंने 400 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय पदक जीता है। नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों ने खाकी पहनकर जनसेवा का संकल्प जताया।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, खेल और युवा कल्याण विभाग के मंत्री गिरीश चंद्र यादव, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड एस.बी. शिरोडकर, पुलिस महानिदेशक पीएसी आलोक सिंह के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीगण, नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले कुशल खिलाड़ीगण और उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

  • CG में बाढ़ से किसानों को बड़ा नुकसान, फसल के बदले 21 क्विंटल प्रति एकड़ मुआवजा मांगा

    CG में बाढ़ से किसानों को बड़ा नुकसान, फसल के बदले 21 क्विंटल प्रति एकड़ मुआवजा मांगा

    जगदलपुर.

    अर्नब तूफान के बाद इंद्रावती नदी में आई बाढ़ ने बकावंड और जगदलपुर ब्लॉक के नदी किनारे बसे इलाकों में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हुई, मिट्टी और कीचड़ भर गया और किसानों के सामने अब मुआवजे का सवाल खड़ा हो गया है।

    इसी मांग को लेकर नदी किनारे के कई गांवों के किसान, सरपंच और जनपद सदस्य बस्तर सांसद महेश कश्यप से मिलने पहुंचे। किसानों का कहना है कि नुकसान इतना बड़ा है कि सामान्य राहत राशि से उनकी भरपाई संभव नहीं है।

    किसानों की ये है मांग
    किसानों की मांग है कि फसल नुकसान का आकलन सिर्फ सरकारी राहत दर से नहीं, बल्कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर के आधार पर किया जाए। किसानों का तर्क है कि खेती में जुताई, खाद-बीज और दवा समेत बड़ी रकम पहले ही खर्च हो चुकी थी और फसल घर पहुंचने से ठीक पहले बाढ़ ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।

    19 एकड़ फसल प्रभावित- किसान
    नगरनार के किसान घनश्याम सेठिया के मुताबिक उनकी करीब 26 एकड़ जमीन में से 19 एकड़ फसल प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि प्रति हेक्टेयर 8 हजार रुपये जैसी राहत किसानों के वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम है।

    किसानों को झेलनी पड़ी दोहरी मार
    वहीं जनपद सदस्य अर्जुन सेठिया ने कहा कि तूफान और खातीगुड़ा डैम से पानी छोड़े जाने के बाद किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। कई खेतों में मिट्टी और कीचड़ भर गया, पशुओं के लिए घास और पैरा तक नहीं बचा। किसानों ने साफ कहा है कि वे मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, कलेक्टर और प्रधानमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाएंगे। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा मुआवजा चाहिए जिससे कर्ज के साथ खेती में हुए खर्च की भरपाई हो सके और किसान दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

    सांसद ने कही मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात
    वहीं इस मामले पर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा अर्नब तूफान के बाद तीन दिन लगातार बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे हजारों एकड़ फसल बर्बाद हुई है। किसानों की मांग है कि उन्हें 21 क्विंटल धान खरीदी के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे कर्ज चुका सकें और परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री से चर्चा करने के साथ ही प्रधानमंत्री राहत कोष से भी सहायता की मांग करेंगे।

  • ‘नर्सिंग डिजिटलिया’ पुस्तिका एवं ‘गर्भ संस्कार-नर्सेस प्रशिक्षण’ बुकलेट का किया विमोचन

    ‘नर्सिंग डिजिटलिया’ पुस्तिका एवं ‘गर्भ संस्कार-नर्सेस प्रशिक्षण’ बुकलेट का किया विमोचन

    भोपाल

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सेज यूनिवर्सिटी भोपाल में 11 वीं राज्य स्तरीय TNAI कांफ्रेंस-2026 का उद्घाटन किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि गर्भ संस्कार और नर्सिंग में इनोवेटिव टेक्नोलॉजी जैसे दो महत्वपूर्ण विषय इस सम्मेलन को विशेष बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में अच्छे संस्कार बचपन से ही विकसित किए जाएं, तो वे बड़े होकर समाज के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति बनते हैं। गर्भावस्था से ही मां और बच्चे के स्वास्थ्य और संस्कारों पर ध्यान देने से सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिलेगा और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर दिए जाने वाले व्याख्यान और विचारों को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उनका मनन कर अपने आचरण और व्यवहार में उतारना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नर्सें अस्पताल और फील्ड में मरीजों के साथ संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य करें और अपने कार्य से एक आदर्श नर्स के रूप में पहचान स्थापित करें, ताकि लंबे समय तक उनके सेवा कार्यों को याद किया जाए।

    दो दिवसीय कांफ्रेंस में नर्सिंग शिक्षा, क्लीनिकल प्रैक्टिस, नवाचार एवं तकनीक से नर्सिंग सेवाओं को सशक्त बनाने पर होगा विमर्श

    "रीडिफ़ाइनिंग क्लिनिकल प्रैक्टिस: एम्पावरिंग नर्सेस थ्रू इनोवेटिव टेक्नोलॉजी" थीम पर आयोजित दो दिवसीय कांफ्रेंस में नर्सिंग शिक्षा, क्लीनिकल प्रैक्टिस, नवाचार एवं तकनीक के माध्यम से नर्सिंग सेवाओं को सशक्त बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श होगा। पहले दिन गर्भ संस्कार, सम्मानजनक मातृ देखभाल, प्रसव की तैयारी में नर्सों की भूमिका सहित महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ व्यक्तित्व एवं नृत्य प्रतियोगिता तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। दूसरे दिन वैज्ञानिक सत्रों में नर्सिंग क्षेत्र के समकालीन विषयों पर विशेषज्ञ प्रस्तुतियां देंगे और समापन सत्र में पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरण होगा।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ऐसे प्रयास सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सेज ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष एवं चांसलर संजीव अग्रवाल को आधुनिक शैक्षणिक परिसर विकसित करने और शिक्षा के साथ मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को जोड़ने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अग्रवाल की ऊर्जा और उद्यमशीलता से विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने ‘नर्सिंग डिजिटलिया’ स्मारिका एवं गर्भ संस्कार नर्सेस प्रशिक्षण बुकलेट का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में नर्सिंग एवं एलाइड हेल्थ निदेशक डॉ. बीनू कुशवाह सिंह, TNAI मध्यप्रदेश की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सुनीता लॉरेंस, राज्य सचिव प्रो. (डॉ.) जया बिजॉय, सहित अन्य पदाधिकारी एवं अतिथि उपस्थित रहे।

     

  • ‘इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है’, सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला

    ‘इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है’, सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला

    'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं दोनों राजकुमार', बीजेपी MLC सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला

    'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश को बुलाया तक नहीं गया', कांग्रेस-सपा की कलह पर सुभाष यदुवंश का तंज

    'इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है’, सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला

    ‘राजतंत्र और परिवारतंत्र में विश्वास करते हैं राहुल और अखिलेश’, सुभाष यदुवंश ने साधा निशाना

    सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला, बोले- ‘दोनों राजकुमार एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते’

    'अखिलेश को यूपी की सत्ता मिली तो उन्होंने प्रदेश को सिरफुटौव्वल का अड्डा बना दिया था', बीजेपी MLC का सपा पर हमला

    लखनऊ
    बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सुभाष यदुवंश ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस की ओर से आयोजित इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव को नहीं बुलाए जाने का जिक्र करते हुए यदुवंश ने दोनों नेताओं को ‘राजकुमार’ बताया और कहा कि वे एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते।

    'अखिलेश को बुलाया ही नहीं गया'

    सुभाष यदुवंश ने कहा, 'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव जी को बुलाया ही नहीं गया।' उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव लखनऊ आ गए, तब राहुल गांधी के किसी ‘शिष्य’ का फोन उनके पास आया। यदुवंश ने कहा कि कुछ दिन पहले अखिलेश यादव के इशारे पर ही एक सपाई सांसद ने कहा कि कांग्रेस की हैसियत तो 10 सीटों की भी नहीं है। 

    'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार'

    यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'ये जो चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार हैं, ये सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।' यदुवंश ने कहा कि इन दोनों नेताओं में अनुशासन नहीं है, टीम भावना नहीं है और समन्वय नहीं है। अखिलेश और राहुल दोनों ही किसी व्यवस्था को चला नहीं सकते।

    'डेढ़ साल मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा'

    अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के ‘युवराज’ को सत्ता मिली, तो डेढ़ साल तक मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान उत्तर प्रदेश को 'सिरफुटौव्वल का अड्डा' बना दिया गया।

    'राजतंत्र पर भरोसा करते हैं राहुल गांधी'

    राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए यदुवंश ने कहा कि जब कांग्रेस के ‘युवराज’ को सत्ता मिली थी, तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का तैयार किया हुआ मसौदा राहुल गांधी ने फाड़ दिया था। उन्होंने कहा, 'युवराज ने मसौदा फाड़ करके बताया कि देखो, मैं राजतंत्र में बिलीव करता हूं, संविधान मानता नहीं हूं, संविधान को जेब में रख करके चलता हूं।'

    बता दें कि 2013 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दोषी सांसदों-विधायकों को तत्काल अयोग्यता से बचाने के लिए लाए गए जनप्रतिनिधित्व संशोधन अध्यादेश को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘पूरी तरह बकवास’ बताते हुए सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था।

    अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर हमला करते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि इन पर भरोसा करना, इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है। ये दोनों परिवारतंत्र पर भरोसा करने वाले नेता हैं।

  • 350 करोड़ की FD को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा पर दिग्विजय सिंह का निशाना, आर्थिक स्थिति पर किया सवाल

    350 करोड़ की FD को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा पर दिग्विजय सिंह का निशाना, आर्थिक स्थिति पर किया सवाल

    सीहोर
     प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर सीहोर के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा को लेकर तंज कसा है। दिग्विजय सिंह ने बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा को लेकर कथावाचक द्वारा बताए जाने वाले उपायों पर सवाल उठाते हुए उनकी संपत्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    वीडियो में दिग्विजय सिंह कहते नजर आ रहे हैं कि आजकल धार्मिक गुरु और कथावाचकों की खूब चल रही है। उन्होंने सीहोर वाले कहावाचक का जिक्र छेड़ा और कहा कि वे बच्चों से कहते थे कि तुम्हें पढ़ाई करने की जरूरत नहीं, भगवान शिव को शहद लगाकर बेल पत्र चढ़ा दो और तुम पास हो जाओगे। दिग्विजय यहीं नहीं रुके। उन्होंने कथावाचक पर चुटकी लेते हुए कहा कि सुनने में आया है कि उनका बेटा ही परीक्षा में फेल हो गया।

    350 करोड़ की एफडी का जिक्र
    दिग्विजय सिंह ने सीहोर के कथावाचक की पिछले कुछ सालों में उपजी आर्थिक संपन्नता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीहोर के स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि महज दो साल में उनके (पं. प्रदीप मिश्राा) पास करीब 350 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट हो गई है। इसी को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देखना चाहिए कि पिछले दो साल में वे क्या से क्या हो गए।

    हालांकि, दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट किया कि 350 करोड़ रुपये की एफडी होने का दावा वे स्वयं नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल सीहोर के स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही बातों का उल्लेख कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर इंटरनेट मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    बयान की सोशल मीडिया में चर्चा
    दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा की संपत्ति, आय और वित्तीय स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 350 करोड़ रुपये की एफडी संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 

     

  • जीआईएस : 2027 में ‘साझेदार देश’ के रूप में जुड़ने का आमंत्रण

    जीआईएस : 2027 में ‘साझेदार देश’ के रूप में जुड़ने का आमंत्रण

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनवरी 2027 में भोपाल में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (जीआईएस–2027) में सात देशों को ‘साझेदार देश’ के रूप में जुड़ने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विभिन्न देशों के साथ निवेश और व्यापारिक साझेदारी को ठोस परियोजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहता है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता की कसौटी निवेश प्रस्तावों का धरातल पर क्रियान्वयन होगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुंबई में आयोजित राउंड टेबल बैठक में जापान, मेक्सिको,रूस,कोरिया गणराज्य, थाईलैंड,मिस्र अरब गणराज्य एवं साउथ अफ्रीका के काउंसल जनरल एवं राजनयिक प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रतिनिधियों के विचारों को सुनते हुए कहा, “आपकी बातें मेरे साथ भोपाल जाएँगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जनवरी 2027 में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट   का नौवाँ संस्करण आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि साझेदार देश (पार्टनर कंट्री) के रूप में आने वाले देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ वे स्वयं बैठक करेंगे। प्रतिनिधिमंडल उनके साथ भोज में भी शामिल होंगे। उनकी रुचि के अनुरूप पीथमपुर की औद्योगिक संभावनाओं से लेकर साँची की सांस्कृतिक विरासत तक प्रदेश के विविध पहलुओं से परिचित कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट   के बाद से मध्यप्रदेश में 8.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में भी यही सुनिश्चित करने पर जोर होगा कि जो कहा जाए, वह धरातल पर उतरे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले वर्ष अक्टूबर में मुंबई में कई राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ हुए संवाद का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने विभिन्न देशों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया है और आने वाले वर्ष में इस साझेदारी को और विस्तार देना चाहता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्रिटेन की कंपनी हेलियॉन के निवेश निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया कि कंपनी ने जून में पीथमपुर में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के निवेश से कारखाना स्थापित करने का निर्णय लिया। परियोजना के लिए 40 एकड़ से अधिक भूमि का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी के वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वयं मध्यप्रदेश आए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभिन्न विकल्पों के बीच पीथमपुर का चयन प्रदेश के प्रति कंपनी के भरोसे को दर्शाता है।उन्होंने बताया कि जापान के सौ वर्ष से अधिक पुराने टोप्पन समूह ने भी अपनी नई इकाई के लिए पीथमपुर को चुना है। लगभग 950 करोड़ रुपये की इस परियोजना का पूरा निवेश विदेश से होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोरिया की ई.सी.डी.एस. के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए बताया कि कंपनी ने भारत में अपनी पहली इकाई के लिए उज्जैन में लगभग 780 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इस इकाई में कैंसर की जाँच के किट बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “मध्यप्रदेश में जो बात मेज़ पर होती है, वह धरातल पर उतरती है।”

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जून में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक और लैटिन अमेरिका के 15 देशों के साथ व्यापार एवं निवेश मंच का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन आयोजनों को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और व्यापारिक संबंधों के विस्तार के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजनयिक प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने देशों की राजधानियों तक यह संदेश पहुँचाएँ कि मध्यप्रदेश , जीआईएस–2027 में उनके देश को साझेदार देश के रूप में देखना चाहता है।उन्होंने संबंधित देशों के द्विपक्षीय चैंबरों से मध्यप्रदेश को जोड़ने और उनकी वार्षिक आम सभा भोपाल में आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कई चैंबर इसके लिए सहमत हो चुके हैं और प्रदेश की टीम उनके संपर्क में है।

    मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश आने का आत्मीय निमंत्रण देते हुए कहा कि वे प्रदेश के अतिथि होंगे। उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश भारत का हृदय प्रदेश है। और हृदय का स्वभाव है, सबको जोड़ना। हम आपके देशों से इसी भाव से जुड़ना चाहते हैं।”

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होगा, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। उन्होंने राजनयिक प्रतिनिधियों को सिंहस्थ में आने का भी निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यापारिक साझेदारी के साथ भारत की आत्मा को निकट से देखने का अवसर होगा।

    महावाणिज्य दूतों ने सराहीं मध्यप्रदेश की निवेश संभावनाएं, सहयोग के अवसरों पर हुआ सकारात्मक संवाद

    राउंड टेबल बैठक में जापान की महावाणिज्य दूत सुश्री हितोमी सातो ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमता और निवेश की संभावनाओं की सराहना की। उनके साथ जापान और मध्यप्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक सहयोग के अवसरों पर सकारात्मक चर्चा हुई।

    मेक्सिको के प्रमुख वाणिज्य दूत अदोल्फो गार्सिया एस्त्रादा ने मध्यप्रदेश में व्यापार एवं निवेश के अवसरों को उत्साहजनक बताया। उनसे आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों के विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

    रूस के महावाणिज्य दूत इवान वाई. फेतिसोव ने मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश प्रोत्साहन के प्रयासों की सराहना की। उनके साथ विभिन्न एग्रीकल्चर,फ़ूड प्रोसेसिंग एवं एनर्जी क्षेत्रों में निवेश एवं व्यापारिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक संवाद हुआ।

    कोरिया गणराज्य के महावाणिज्य दूत डोंगवान यू ने मध्यप्रदेश के निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक संभावनाओं को सराहा। बैठक में कोरिया गणराज्य और मध्यप्रदेश के बीच निवेश एवं व्यापारिक सहयोग के अवसरों पर चर्चा की गई।

    थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सुश्री सिरिपोर्न सुपानिमितविसेतकुल ने मध्यप्रदेश की विकास संभावनाओं और निवेशकों के साथ संवाद की पहल की सराहना की। उनके साथ व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।

    मिस्र अरब गणराज्य की महावाणिज्य दूतमती डालिया तवाकोल ने मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों और राज्य सरकार के निवेश प्रोत्साहन प्रयासों की सराहना की। उनसे आपसी आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई।

    दक्षिण अफ्रीका के महावाणिज्य दूत जेडोन लेबाने ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमता और व्यापार की संभावनाओं को सराहा। उनके साथ निवेश एवं व्यापारिक सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।

    बैठक में संबंधित देशों की जीआईएस–2027 में ‘साझेदार देश’ के रूप में संभावित सहभागिता तथा मध्यप्रदेश के साथ सहयोग के अवसरों पर चर्चा की गई। 

  • झिझक की टूट रही दीवार, योगी सरकार में बेटियों के लिए सशक्त एमएचएम व्यवस्था

    झिझक की टूट रही दीवार, योगी सरकार में बेटियों के लिए सशक्त एमएचएम व्यवस्था

    लखनऊ

    योगी सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा को विद्यालयी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (एमएचएम) को व्यापक रूप से मजबूत कर रही है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशानुसार प्रदेश के विद्यालयों में मासिक धर्म को लेकर झिझक और संकोच दूर करने के साथ छात्राओं को आवश्यक सुविधाएं और सही जानकारी उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। इसका असर विद्यालय स्तर पर दिखाई भी दे रहा है। 

    प्रदेश में अब तक 68,358 विद्यालयों में एमएचएम क्लब गठित, 66,045 विद्यालयों में पैड बैंक स्थापित, 63,633 विद्यालयों में बच्चों के साथ जागरूकता सत्र और 63,928 विद्यालयों में शिक्षकों के साथ एमएचएम के बिंदुओं पर चर्चा की जा चुकी है।

    इसको और गति देने के लिए 13 और 14 अगस्त 2026 को राज्य परियोजना कार्यालय में 209 मास्टर ट्रेनर्स की कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं। इसके बाद 9 से 25 सितंबर 2026 के बीच प्रदेश के 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हुआ। इससे विद्यालय स्तर पर मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जानकारी और गतिविधियों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    विद्यालयों में सुविधा के साथ जागरूकता का तंत्र

    एमएचएम व्यवस्था को सिर्फ सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता तक सीमित नहीं रखा गया है। विद्यालयों में एमएचएम क्लब और पैड बैंक के माध्यम से छात्राओं को जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के साथ जागरूकता गतिविधियों को भी नियमित रूप दिया जा रहा है। शनिवार को मीना मंच के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन और महत्वपूर्ण आपातकालीन सहायता नंबरों से संबंधित सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यालय स्तर पर किशोर एवं किशोरियों के लिए साप्ताहिक गतिविधि आधारित पुस्तिका ‘प्रगति के पंख’ में भी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन तथा डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य से संबंधित पारित निर्णय की जानकारी को शामिल करते हुए टीएलएम/प्रशिक्षण गतिविधियों को आगे बढ़ाया गया है।

    450 मास्टर ट्रेनर्स को किया जा रहा प्रशिक्षित

    प्रदेश स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण का विशेष अभियान चलाया गया। अगस्त में 209 मास्टर ट्रेनर्स की राज्य स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित की गई, जबकि सितंबर में 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हुआ। इससे मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जानकारी को विद्यालयों तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाने में मदद मिल रही है।

    पाठ्यक्रम में भी शामिल हुई मासिक धर्म स्वच्छता

    मासिक धर्म स्वच्छता को विद्यालयी शिक्षा की नियमित गतिविधियों से जोड़ने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश की ओर से भी पहल की गई है। प्रचलित पाठ्यक्रम पर आधारित पाठ्यपुस्तकों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन संबंधी जागरूकता की विषयवस्तु का समावेशन किया गया है। इससे छात्राओं के साथ-साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर सहज संवाद का वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

    सुविधा, जागरूकता और सम्मान; तीनों पर एक साथ जोर

    योगी सरकार की एमएचएम व्यवस्था का उद्देश्य बेटियों को सिर्फ जरूरी सामग्री उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां मासिक धर्म को लेकर झिझक कम हो, सही जानकारी मिले और छात्राएं पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इसके लिए स्वच्छ शौचालय, पानी और हाथ धोने की सुविधा से लेकर सैनिटरी नैपकिन, पैड बैंक, एमएचएम क्लब, सुरक्षित निस्तारण, शिक्षक प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जा रहा है। 

    “योगी सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों में ऐसा सुरक्षित और सहज वातावरण तैयार कर रही है, जहां मासिक धर्म उनकी पढ़ाई या आत्मविश्वास में बाधा न बने। प्रदेश में एमएचएम क्लब, पैड बैंक, जागरूकता सत्र और मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के माध्यम से इस व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि हर बेटी को जरूरी सुविधा, सही जानकारी और सम्मानजनक वातावरण मिले, ताकि वह पूरे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा की राह पर आगे बढ़ सके।”
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा